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00:00:02,160 --> 00:00:06,320
भागवतानंद को यह वरदान प्राप्त है कि यदि उसकी कर्मेंद्रियों

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00:00:06,320 --> 00:00:10,400
द्वारा कोई अनुचित कार्य होने वाला होगा तो उसका विवेक उसकी

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00:00:10,400 --> 00:00:13,280
बुद्धि उसकी कर्मेंद्रियों का निग्रह करेंगे।

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00:00:13,280 --> 00:00:17,520
और भगवती ने मुझे यही वरदान दिया। इस बात की भी मैं शपथ कर सकता हूं

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00:00:17,520 --> 00:00:21,760
कि यदि तुम्हारी बुद्धि कभी अधर्म में लग रही होगी

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00:00:21,760 --> 00:00:25,920
तो क्रिया पर तुम्हारा नियंत्रण होगा। बुद्धि खराब होने से तुम्हारा कर्म खराब

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00:00:25,920 --> 00:00:30,000
नहीं होने दूंगी। और यदि कभी तुम क्रिया ही गलत करने जा

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00:00:30,000 --> 00:00:34,160
रहे हो तो बुद्धि भ्रष्ट नहीं होगी। तुम्हारा विवेक तुम्हें रोक लेगा। यदि कभी

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00:00:34,160 --> 00:00:38,240
कलयुग के प्रभाव से बुद्धि गड़बड़ा रही हो तो क्रिया नियंत्रित रह जाएगी। कभी क्रिया ही

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00:00:38,240 --> 00:00:42,400
गड़बड़ होने जा रही हो तो बुद्धि वहां तुम्हें बचा लेगी। तो ये बहुत बड़ा एक रक्षा कवच

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00:00:42,400 --> 00:00:44,160
मां छिण अवस्था ने हमें प्रदान किया है।

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00:00:44,160 --> 00:00:48,480
यदि कृष्ण संप्रदाय के अंतर्गत यहां दो उदाहरण हम आगे दे रहे हैं। जिसमें स्वयं

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00:00:48,480 --> 00:00:52,560
भागवतानंद ने स्वयं के दोष को ही स्वीकार किया है। मैं गालियां देता हूं और

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00:00:52,560 --> 00:00:56,560
मैं गालियां दूंगा। तो गाली देना शास्त्रीय है। बिल्कुल सही बात।

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00:00:56,560 --> 00:01:00,560
मैं गालियां देता हूं और मैं गालियां दूंगा तो गाली देना शास्त्रीय

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00:01:00,560 --> 00:01:04,720
है। बिल्कुल सही बात। मैं गालियां देता हूं और मैं गालियां दूंगा। तो

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00:01:04,720 --> 00:01:08,000
गाली देना शास्त्रीय है। बिल्कुल सही बात। बोला था कि

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00:01:08,000 --> 00:01:12,000
विजय की क्लिप ऐड करूंगा। वाकस्थलन से हो गया होगा। वाकस्खलन से मैंने वो

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00:01:12,000 --> 00:01:16,000
बोलने के समय अलग-अलग विषयों में गड़बड़ हो गई थी। इस मानवीय त्रुटि को

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00:01:16,000 --> 00:01:20,080
हम सुधार लेते हैं। लेकिन उसी त्रुटि के कारण बोलने में हो गया था

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00:01:20,080 --> 00:01:24,080
वाकस्खलन। अब जिस स्त्री की बात चल रही थी जिसका नाम

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00:01:24,080 --> 00:01:28,080
विजयाश्री बताया गया था। मैं इसी वीडियो में एक वीडियो अटैच करूंगा आप लोगों

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00:01:28,080 --> 00:01:32,240
के लिए जिसमें आप देखिएगा कैसे पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर वो स्त्री

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00:01:32,240 --> 00:01:36,480
बैठी हुई है और सम्मान के साथ वाकस्थलन से हो गया होगा वाकस्थलन से। तो इस

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00:01:36,480 --> 00:01:40,640
लड़की का Facebook हैंडल भी हमने बता दिया और इसका एक पॉडकास्ट

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00:01:40,640 --> 00:01:44,720
का लिंक भी दे दिया। वहां आप स्पष्ट सुन सकते हैं कि ये विदेश इत्यादि भी आती जाती रही है। वहां से भी

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00:01:44,720 --> 00:01:49,440
इसका उठना बैठना है। और पूरी के शंकराचार्य के मंच पर एक संदिग्ध

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00:01:49,440 --> 00:01:53,440
सूत्रों वाली स्त्री का अचानक से आना और अचानक से उसका मठ में इतने

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00:01:53,440 --> 00:01:57,440
महत्वपूर्ण स्थान पर बैठ जाना। वाकस्थलन से हो गया होगा। वाकलन से

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00:01:57,440 --> 00:02:01,600
मैंने और पूरी के शंकराचार्य के मंच पर रिदमम कपूर को बैठने

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00:02:01,600 --> 00:02:05,680
दिया जा रहा है। वाकस्थलन से हो गया होगा। वाकलन सेशन उसका है। यूआईएसएफ

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00:02:05,680 --> 00:02:09,840
यूनिवर्सल योगा स्पोर्ट्स फेडरेशन जिसकी उत्तराखंड प्रेसिडेंट है रिदमा कपूर। तो भूरी शंकराचार्य

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00:02:09,840 --> 00:02:14,160
जी के साथ मठ में मंच साझा कर अलग-अलग शिविरों में मंच साझा कर रही है। वाकस्थलन

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00:02:14,160 --> 00:02:18,240
से हो गया होगा वाकलन से यूआईएसएफ की उत्तराखंड स्टेट प्रेसिडेंट मंच साझा किसके

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00:02:18,240 --> 00:02:22,320
साथ कर रही है? पूरी शंकराचार्य जी के साथ और वाकस्थलन

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00:02:22,320 --> 00:02:23,440
से हो गया होगा वाकस्खलन

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00:02:23,440 --> 00:02:27,520
से रिदमम कपूर को और रिदमम कपूर जो है वो पूरी शंकराचार्य जी के

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00:02:27,520 --> 00:02:29,520
साथ मंच साझा कर रही है। वाकस्थलन से हो

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00:02:29,520 --> 00:02:33,600
गया होगा वाकलन से। इस वीडियो में जो आपको अभी-अभी दिखाया गया है,

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00:02:33,600 --> 00:02:38,000
भागवतानंद ने स्पष्ट किया है कि उसकी कर्मेंद्रियों

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00:02:38,000 --> 00:02:42,720
द्वारा ऐसा कोई आचरण हुआ, जो उचित नहीं था।

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00:02:42,720 --> 00:02:46,800
भाई, वाक्यस्खलन से निकला तो क्या? असत्य भाषण निकला ना

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00:02:46,800 --> 00:02:50,800
वाकलन से। जीभा फिसल जाने

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00:02:50,800 --> 00:02:54,880
के कारण तुम्हारे मुख से असत्य भाषण निकला ना। तुमने स्वीकार भी

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00:02:54,880 --> 00:02:59,120
कर लिया। अशास्त्रीयता तो तुमने स्वीकार कर ही ली है। गाली देने

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00:02:59,120 --> 00:03:03,120
के रूप में। पर यहां तो भागवतानंद के कथन

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00:03:03,120 --> 00:03:07,120
अनुसार ही यह सिद्ध होता है कि अनुचित आचरण करते समय उसकी

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00:03:07,120 --> 00:03:11,280
कर्मेंद्रियों का निग्रह उसके मन बुद्धि विवेक इत्यादि के द्वारा नहीं

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00:03:11,280 --> 00:03:15,280
किया गया। तुम्हारी जीवा फिसल कैसे सकती है? तुम्हें तो वरदान

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00:03:15,280 --> 00:03:20,640
प्राप्त है ना देवी का कैसे हो गया वाकलन?

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00:03:20,640 --> 00:03:24,880
तो या तो वो वाकलन नहीं था और या फिर वो देवी नहीं

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00:03:24,880 --> 00:03:28,960
थी और या फिर वो वरदान नहीं था। समझे?

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00:03:28,960 --> 00:03:34,960
आखिरकार कोई तो वजह होगी जो हम शंकराचार्य के शिष्य हैं।

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00:03:38,950 --> 00:03:42,950
[संगीत]
