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00:00:01,840 --> 00:00:05,840
हमने वीडियो दिखा इसमें दिखाए हैं कि

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00:00:05,840 --> 00:00:09,840
यह जो है कालिया जिन की पूजा करता करवाता उसकी आवश्यकता होने की

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00:00:09,840 --> 00:00:13,920
बात कहता है। जिसमें भागवतानंद अभी आपको वीडियो आगे दिखा

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00:00:13,920 --> 00:00:18,160
दिया जाएगा जिसमें भागवतानंद स्वयं कालिया जिन्न एवं परिसाधना जैसी इस्लामिक

5
00:00:18,160 --> 00:00:22,320
पूजा पद्धति लोगों को सिखाने की बात कर रहा है। जो किसी भी प्रकार से वेद

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00:00:22,320 --> 00:00:26,480
सम्मत नहीं है। यदि तुम किसी अह परंपरा का नाम दे दो

7
00:00:26,480 --> 00:00:30,480
वहां पे भी तो होता है। तो वहां तुम यह चेक नहीं करोगे कि नहीं शास्त्र से

8
00:00:30,480 --> 00:00:36,000
है कि नहीं शास्त्र के बाहर नहीं होना चाहिए ना

9
00:00:36,000 --> 00:00:40,160
नाम बताओ किस परंपरा में कहा है किसने ये मंत्र आपको दिया है कालिया

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00:00:40,160 --> 00:00:44,240
जिन का परिसाधना का शास्त्र में बात हो रही ना

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00:00:44,240 --> 00:00:48,240
तसात शास्त्र प्रमाणम भाई शास्त्र बाहर यदि गुरु भी हो

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00:00:48,240 --> 00:00:52,400
तो उसका भी वो करना चाहिए निग्रह ना तो तुम्हें उनका निग्रह करना चाहिए जो

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00:00:52,400 --> 00:00:56,560
ऐसा दे रहे हैं तुम उनके आधार पर अपनी चीजों अपनी गलत

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00:00:56,560 --> 00:01:00,880
चीजों की पुष्टि कर रहे हो कहां चला गया तुम्हारा निग्रह

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00:01:00,880 --> 00:01:05,040
या निग्रह संप्रदाय से तुमको मिला कालिया जिन पर परिधना का

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00:01:05,040 --> 00:01:05,540
एक

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00:01:05,360 --> 00:01:09,440
व्यक्ति ने मुझे बहुत परेशान कर रखा था कि मुझे साधना दीजिए सिद्धि दीजिए साधना दीजिए

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00:01:09,440 --> 00:01:13,440
सिद्धि दीजिए उनको कालिया जिन का मंत्र चाहिए था तो कालिया जिन का

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00:01:13,440 --> 00:01:15,520
मंत्र किससे लेकर गए हमसे लेकर गए

20
00:01:15,520 --> 00:01:19,520
इस फोटो को मैंने भेज दिया और कहा कि ऐसे-सा कुछ

21
00:01:19,520 --> 00:01:23,520
कर ले तो इतना सत्य है इसमें फोटो सत्य है फोटो मैंने भेजा क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो

22
00:01:23,520 --> 00:01:27,600
के नीचे वो मैंने लगाए थे ये मुझे याद है क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने मैंने लगाए

23
00:01:27,600 --> 00:01:31,600
थे। ये मुझे याद है। क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने लगाए थे। ये मुझे याद है।

24
00:01:31,600 --> 00:01:35,600
क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने लगाए थे। ये मुझे याद है। लेकिन ये सब जो लिखा

25
00:01:35,600 --> 00:01:39,840
है ना कि इसे पहले मेरे पास भेजना पड़ेगा। ये मुझे याद नहीं है। गुरु पूर्णिमा से लेकर अगले

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00:01:39,840 --> 00:01:43,920
पूर्णिमा तक खुले में बैठकर आसमान के नीचे सावन आया बाहर आई। तेरे

27
00:01:43,920 --> 00:01:48,160
बाप शैतान को सजदे की मार आई। परी तू ना आई तो तुझे तेरे बाप शैतान

28
00:01:48,160 --> 00:01:52,320
की मार आई। 51 माला जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर हाथ में फूल गुलाब देना

29
00:01:52,320 --> 00:01:56,560
है और साथ रहने को बोलना है। तीन वचन ले लें एवं मृत्यु समय ना बिगाड़ने बोले।

30
00:01:56,560 --> 00:02:00,640
वह इसकी वास्तविकता क्या है? पहली बात कि सावन आया बहार आई तेरे बाप

31
00:02:00,640 --> 00:02:04,880
शैतान को सजदे की मार आई। यह जो मंत्र है यह वास्तविक मंत्र है। और ये

32
00:02:04,880 --> 00:02:09,040
मंत्र मैंने आदित्य वैभव को दिया था। 29 जून 2021

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00:02:09,040 --> 00:02:13,520
को मैंने इसको ये साधना भेजी थी। कब भेजी थी? सुबह 8:50

34
00:02:13,520 --> 00:02:17,600
में। तो क्या है इसमें? रात्रि को 12:00 बजने के ठीक बाद यदि संभव है तो

35
00:02:17,600 --> 00:02:21,680
स्नान करके अन्यथा हाथ पैर लिंग आदि धोकर कुल्ला आदि करके सफेद कपड़ा पहन

36
00:02:21,680 --> 00:02:26,160
के इत सुगंधित वस्तु लगाकर खुले आसमान में एकांत में चले जावे।

37
00:02:26,160 --> 00:02:30,400
पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जावे। एक धूप जला लें। इसके अतिरिक्त कुछ

38
00:02:30,400 --> 00:02:30,900
भी

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00:02:30,640 --> 00:02:34,800
और काम करने की आवश्यकता नहीं है। आकाश की ओर दृष्टि रखकर यदि चंद्रमा

40
00:02:34,800 --> 00:02:38,800
दिखे तो और भी उत्तम। निम्न मंत्र को स्फटिक की माला से सात

41
00:02:38,800 --> 00:02:43,040
माला पढ़ें। यह मंत्र शुक्रवार अथवा पूर्णिमा को करें। सावन आया

42
00:02:43,040 --> 00:02:47,040
बार आई। तेरे बाप शैतान को सजदे की मार आई। लाली तू ना आई

43
00:02:47,040 --> 00:02:51,200
तो तुझे शैतान की मार आई। प्रयोग पूर्ण होने पर उससे तीन वचन लें।

44
00:02:51,200 --> 00:02:55,600
मेरे स्मरण करने पर सदैव आकर मेरा बताया कार्य करें। मेरे और मेरे परिवार प्रियजनों

45
00:02:55,600 --> 00:02:59,760
को किसी प्रकार की क्षति कभी ना करें। मृत्यु के बाद मेरी उर्धगति में किसी प्रकार से बाधक

46
00:02:59,760 --> 00:03:03,760
ना हो। यदि देवी की प्रत्यक्ष सिद्धि हो जावे तो उसके बाद आप गुरु दक्षिणा

47
00:03:03,760 --> 00:03:07,840
में मेरे बताए किसी भी एक दो कार्य को पूर्ण करा दें। प्रयोग से पहले प्रयोग

48
00:03:07,840 --> 00:03:12,080
के बीच या प्रयोग के बाद में कभी भी इस बात का उल्लेख मेरे अतिरिक्त किसी से अन्य से ना करें।

49
00:03:12,080 --> 00:03:16,240
बहुत सरल है। यद्यपि दीपावली की रात्रि से तीन रात मिट्टी के बर्तन में खीर बनाकर

50
00:03:16,240 --> 00:03:20,240
और दक्षिण दिशा होकर रात 12:00 बजे 108 बार जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर पैसा

51
00:03:20,240 --> 00:03:24,480
ले लेना है। अधिकतम 10 करोड़ और इसका 25% मुझे देना है। अब विधि

52
00:03:24,480 --> 00:03:28,560
तो सही है। कालिया जिनवाला ये मंत्र मैंने तीन चार लोगों को दिया था।

53
00:03:28,560 --> 00:03:32,560
जिनकी आर्थिक स्थिति मुझे लगी कि बहुत गड़बड़ है। और बहुत गरीबी

54
00:03:32,560 --> 00:03:36,720
में था वो बाद में बहुत अमीर भी हो गया था। और उड़ीसा के एक व्यक्ति जिसका मैंने संदर्भ दिया।

55
00:03:36,720 --> 00:03:40,880
उसको भी यह सिद्ध था और वो चार लोग मिलकर इसको सिद्ध किए थे। तो उसमें

56
00:03:40,880 --> 00:03:45,040
शर्त यही थी कि जो मंत्र देता है मतलब बताता है वह 25% उसको

57
00:03:45,040 --> 00:03:45,760
देने पर ही वह

58
00:03:45,760 --> 00:03:50,000
धन उसको लाभ करता है। उन्होंने अरबी फारसी

59
00:03:50,000 --> 00:03:54,000
के मंत्रों से किसी शक्ति की आराधना कर रखी थी अपने किसी गुरु से प्राप्त करके

60
00:03:54,000 --> 00:03:58,240
वो पीर शक्ति की। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता

61
00:03:58,240 --> 00:04:02,240
पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ

62
00:04:02,240 --> 00:04:06,320
आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे

63
00:04:06,320 --> 00:04:10,560
भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए? तो ऐसी कई शक्तियां

64
00:04:10,560 --> 00:04:14,800
हैं जो पीरवाणी तंत्र में है। मुसलमानों की साथ कनेक्ट करती हैं। तो ऐसी कई

65
00:04:14,800 --> 00:04:18,880
शक्तियां हैं जो पीरवाणी तंत्र में है। मुसलमानों की साथ कनेक्ट करती हैं। तो

66
00:04:18,880 --> 00:04:22,880
ऐसी कई शक्तियां हैं जो पीरवाणी तंत्र में है। मुसलमानों की साथ कनेक्ट

67
00:04:22,880 --> 00:04:27,120
करती हैं। पीरवाणी है जिसमें खुदा सुलेमान ये सब शब्द आते हैं। आयतल

68
00:04:27,120 --> 00:04:31,120
कुर्सी कक्ष कुरान आगे पीछे तू रहमान धड़ राखे खुदा सब राखे सुलेमान। यद्यपि

69
00:04:31,120 --> 00:04:35,120
मैं अपनी व्यस्तता के कारण उसे नहीं कर सकता। यद्यपि मैं अपनी व्यस्तता के कारण

70
00:04:35,120 --> 00:04:39,360
उसे नहीं कर सकता। यद्यपि मैं अपनी व्यस्तता के कारण उसे नहीं कर सकता।

71
00:04:39,360 --> 00:04:43,520
यद्यपि मैं अपनी व्यस्तता के कारण उसे नहीं कर सकता। यह मैंने खुद

72
00:04:43,520 --> 00:04:47,920
लिखा है। मंत्र दे दीजिए, कोई तंत्र दे दीजिए, कोई सिद्धि दे दीजिए और मैं बहुत टालता हूं, टालता हूं। फिर इक्कादुक्का

73
00:04:47,920 --> 00:04:52,160
किसी को कुछ दे देता था पहले। लेकिन अब इन प्रकरणों के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब इन प्रकरणों

74
00:04:52,160 --> 00:04:56,160
के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब इन प्रकरणों के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब इन

75
00:04:56,160 --> 00:05:00,160
प्रकरणों के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब प्रश्न यह उठता

76
00:05:00,160 --> 00:05:00,960
है कि इस प्रकार

77
00:05:00,960 --> 00:05:05,040
की अवैदिक पूजा पद्धति भगवतानंद को किस प्रामाणिक संप्रदाय

78
00:05:05,040 --> 00:05:09,280
से प्राप्त हुई है? प्रथम तो कोई भी प्रामाणिक संप्रदाय इस प्रकार की अवैदिक

79
00:05:09,280 --> 00:05:13,680
पूजा पद्धति का समर्थन नहीं करता। यदि करता भी है तो निग्रह संप्रदाय

80
00:05:13,680 --> 00:05:17,680
में प्रमाण्य बुद्धि होने के कारण किसी संप्रदाय द्वारा किए जा रहे इस प्रकार

81
00:05:17,680 --> 00:05:21,920
के शास्त्र विरुद्ध कृत का निग्रह ना करते हुए उसका

82
00:05:21,920 --> 00:05:26,640
प्रचार करना यह दिखाता है कि भागवतानंद की प्रमाण्य बुद्धि

83
00:05:26,640 --> 00:05:30,720
निग्रह संप्रदाय में भी नहीं है। क्योंकि उसने स्वयं निग्रह

84
00:05:30,720 --> 00:05:34,960
संप्रदाय को श्रुति सम्मत बताया है। ऐसे में अपने संप्रदाय की सीमा का उल्लंघन

85
00:05:34,960 --> 00:05:39,120
करते हुए किसी और संप्रदाय की वेद

86
00:05:39,120 --> 00:05:43,200
विरुद्ध सामग्री का समर्थन करना भागवतानंद को उसी के द्वारा

87
00:05:43,200 --> 00:05:47,440
परिभाषित निग्रह संप्रदाय को ना मानने वाला सिद्ध करता है।

88
00:05:47,440 --> 00:05:51,600
इसके साथ ही साथ यदि यह माना जाए कि इस प्रकार की इस्लामिक सामग्री से युक्त

89
00:05:51,600 --> 00:05:55,920
पूजा पद्धति उसे निग्रह संप्रदाय से ही प्राप्त हुई है तो ऐसे में

90
00:05:55,920 --> 00:06:00,320
निग्रह संप्रदाय को ही वेद विरुद्ध मानना होगा। जो

91
00:06:00,320 --> 00:06:06,320
भी हो इस प्रकार की सनातन विरुद्ध सामग्री को प्रामाणिक एवं

92
00:06:06,400 --> 00:06:10,560
फलदायक मानते हुए उसका प्रचार समर्थन एवं महिमागान करने

93
00:06:10,560 --> 00:06:14,560
वाले भागवतानंद को अवैदिक और सनातन विरोधी ना मानकर

94
00:06:14,560 --> 00:06:16,080
सनातन वैदिक आर्य हिंदू

95
00:06:16,080 --> 00:06:20,240
धर्म का प्रामाणिक आचार्य क्यों माना जाए क्योंकि भागवतानंद ने कहा

96
00:06:20,240 --> 00:06:24,560
है यही नहीं शक्ति संगम तंत्र

97
00:06:24,560 --> 00:06:28,880
1832 एक 9 41

98
00:06:28,880 --> 00:06:33,760
51 पहला खंड आठवां अध्याय 32वां श्लोक

99
00:06:33,760 --> 00:06:37,760
पहला खंड नौवां अध्याय 51वा श्लोक इसके अनुसार ब्राह्मण

100
00:06:37,760 --> 00:06:41,920
के लिए वेद विरुद्ध आचरण सर्वथा निषिद्ध है।

101
00:06:41,920 --> 00:06:46,720
वेद विरुद्ध आचरण सर्वथा निषिद्ध है। काली

102
00:06:46,720 --> 00:06:50,720
खंड में वेद रहित भूत प्रेत आदि को सिद्ध करने की विधि का

103
00:06:50,720 --> 00:06:55,120
आलंबन लेने वाले को चांडाल कहा गया है।

104
00:06:55,120 --> 00:07:00,000
ऐसे में यह जो इस्लामिक पूजा करने करवाने वाले को

105
00:07:00,000 --> 00:07:04,080
चांडाल क्यों ना माना जाए अब ब्राह्मण क्यों ना माना जाए पतित

106
00:07:04,080 --> 00:07:10,000
ब्राह्मण क्यों ना माना जाए अयोग्य क्यों ना माना जाए क्योंकि

107
00:07:10,000 --> 00:07:14,000
भागवत आनंद ने कहा है [संगीत]
