1
00:00:02,160 --> 00:00:06,160
एक कहावत है हर कुत्ते का दिन आता

2
00:00:06,160 --> 00:00:10,560
है। अभी-अभी मुझे एक वीडियो प्राप्त हुआ है जिसमें

3
00:00:10,560 --> 00:00:14,720
जो भागवतानंद है उसका जो विवाद चल रहा है

4
00:00:14,720 --> 00:00:19,040
और शाक द्वीपीय ब्राह्मणों को लेकर के जो विषय इस समय चल रहा है जो संदीप

5
00:00:19,040 --> 00:00:23,040
देव जी ने उठाया है उस विषय में भागवतानंद

6
00:00:23,040 --> 00:00:28,000
के समर्थन में जो पूज्य विद्या भास्कर स्वामी जी हैं

7
00:00:28,000 --> 00:00:32,400
उनका वक्तव्य आया है। तो वह हमारे लिए सदैव

8
00:00:32,400 --> 00:00:37,840
प्रणम्य थे, प्रणम्य है और प्रणम्य रहेंगे। और

9
00:00:37,840 --> 00:00:41,840
मैं ऐसा मानता हूं कि उन्हें भागवतानंद की धूर्तता

10
00:00:41,840 --> 00:00:45,680
और जो उसका जो नीच

11
00:00:45,680 --> 00:00:50,160
प्रकृति है उसकी जो नीच प्रकृति है जो उसने महिलाओं को भी निराधार वैश्या

12
00:00:50,160 --> 00:00:54,240
कहा है ना स्ान को पालने वालों के लिए यह

13
00:00:54,240 --> 00:00:58,880
तक कह दिया कि वह अपनी मां के साथ स्वान को सुला दे और एक

14
00:00:58,880 --> 00:01:03,360
भाई प्राप्त कर ले और जो मान्य हमारी आचार्य पीठे हैं

15
00:01:03,360 --> 00:01:07,360
उनके लिए अनेकानेक एक अपशब्द शंकराचार्यों के

16
00:01:07,360 --> 00:01:11,680
लिए तू ततड़ाक उपहास जिस

17
00:01:11,680 --> 00:01:16,080
प्रकार से आर्य समाजी जो हमारी अलौकिक बातें होती है पुराणों

18
00:01:16,080 --> 00:01:17,200
की उसका उपहास

19
00:01:17,200 --> 00:01:21,680
उड़ाते हैं उसी तरीके से जो दिव्य अलौकिक बातें हैं

20
00:01:21,680 --> 00:01:26,000
प्रत्येक पीठ में ऐसा नहीं रामानुज पीठों में भी है तो ऐसी

21
00:01:26,000 --> 00:01:30,320
ही दिव्य बातों का अलौकिक बातों का जो है उसी आर्य समाजी बुद्धि

22
00:01:30,320 --> 00:01:34,560
से उपहास उड़ाया इस व्यक्ति ने

23
00:01:34,560 --> 00:01:40,560
और अनेकानेक नीच प्रवृत्ति मूलक चीजें की।

24
00:01:40,960 --> 00:01:45,040
तो मैं यह समझता हूं कि जो हमारे पूज्य स्वामी जी महाराज हैं

25
00:01:45,040 --> 00:01:49,200
विद्या भास्कर जी वो इन चीजों से अनभिज्ञ हैं और उनको संभवत

26
00:01:49,200 --> 00:01:53,360
यह खबरें पहुंच नहीं रही है कि वो उनका नाम लेकर के भी शंकर पीठ

27
00:01:53,360 --> 00:01:57,840
पर दोष लगा रहा है। यद्यपि आज तक उन्होंने

28
00:01:57,840 --> 00:02:02,080
भागवतानंद ने यह तक कहा है कि वह कभी शंकराचार्य पीठ

29
00:02:02,080 --> 00:02:06,080
में जगद्गुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर जी

30
00:02:06,080 --> 00:02:10,480
के दर्शन करने गए थे। मगर उनको मिलने से रोक दिया गया। यह आरोप भी

31
00:02:10,480 --> 00:02:14,800
विद्यामस्कर स्वामी जी का नाम लेकर के भागवत अन्न ने लगाया है।

32
00:02:14,800 --> 00:02:16,480
कहा था विद्या भास्कर स्वामी

33
00:02:16,480 --> 00:02:20,480
जी ने भी ऐसा ही अनुभव बताया कि अयोध्या में शंकराचार्य जी आए थे तो हम उनका

34
00:02:20,480 --> 00:02:24,560
दर्शन करने की इच्छा रखते थे। पहले तो बहुत हम आराम से मिलते जुलते थे। साथ

35
00:02:24,560 --> 00:02:26,320
में धर्म चर्चा भी होती थी। बाद में मिलने गए

36
00:02:26,320 --> 00:02:30,560
तो उनके परिक्र हमको मिलने नहीं दिए। ये बात विद्या भास्कर स्वामी जी ने भी हमको कही। तो

37
00:02:30,560 --> 00:02:34,640
अब जब यह आरोप लगाया है तो कहीं ना कहीं यदि उनको यह खबरें पहुंच

38
00:02:34,640 --> 00:02:38,960
रही होती तो कहीं ना कहीं वह आकर के इस वक्तव्य को समर्थन भी दे देते

39
00:02:38,960 --> 00:02:43,840
कि हां भाई मेरे साथ ऐसा हुआ था कि मैं पूरी पीठ में गया था और ऐसा-सा हुआ था।

40
00:02:43,840 --> 00:02:47,840
आप जैसा प्रणम्य व्यक्ति अगर समर्थन दे देता तो हम तो मर

41
00:02:47,840 --> 00:02:51,920
मिटते उस वचन के लिए। परंतु क्योंकि

42
00:02:51,920 --> 00:02:55,920
आपका ऐसा कोई वक्तव्य हमें प्राप्त नहीं हुआ है तो हम यही मानते हैं कि

43
00:02:55,920 --> 00:03:00,000
आप इसकी इन नीचता पूर्ण गतिविधियों से अनभिज्ञ हैं।

44
00:03:00,000 --> 00:03:04,240
इस कारण से ही इसके लिए निग्रहचार्य जी और इत्यादि जैसे

45
00:03:04,240 --> 00:03:08,400
जो सम्मान मूलक शब्द हैं उनका उपयोग हो रहा है। और यह

46
00:03:08,400 --> 00:03:12,560
भी बात सत्य है कि जो यह शाक द्वीपीय

47
00:03:12,560 --> 00:03:16,800
ब्राह्मण वाला जो विषय चल रहा है इसमें हमने अपना कोई ना किसी का समर्थन

48
00:03:16,800 --> 00:03:21,280
ना किसी का विरोध इत्यादि के रूप में कोई पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। जबाला

49
00:03:21,280 --> 00:03:25,760
वाले विषय में आचार्य प्रशांत के कुतर्कों को हमने

50
00:03:25,760 --> 00:03:29,840
निराकरण प्रस्तुत किया था वीडियो के माध्यम से वो हम पहले ही प्रस्तुत कर चुके

51
00:03:29,840 --> 00:03:33,840
हैं और यही नहीं आचार्य प्रशांत के फॉलोअर्स के

52
00:03:33,840 --> 00:03:37,920
सामने जाकर छाती पर चढ़कर के और हमने वहां

53
00:03:37,920 --> 00:03:41,360
पर जबाला वाले विषय पर उनका मुंह बंद कराया था। उन्हें

54
00:03:41,360 --> 00:03:45,600
निरुत्तर किया था। तो उस विषय में हम अपना पक्ष बहुत

55
00:03:45,600 --> 00:03:49,600
पहले ही निर्गत कर चुके थे। तो हम इस पूरे

56
00:03:49,600 --> 00:03:54,400
विवाद में ना तो किसी के पक्ष में थे ना ही किसी के समर्थन में। हां

57
00:03:54,400 --> 00:03:58,560
हम भागवतानंद की जो दोगलेपन की प्रवृत्ति है उसका विरोध

58
00:03:58,560 --> 00:04:03,760
अवश्य कर रहे थे। और जो यह जो शास्त्रार्थ

59
00:04:03,760 --> 00:04:08,000
या चर्चा से पीठ दिखाने की जो प्रवृत्ति है, कायरता है,

60
00:04:08,000 --> 00:04:12,240
इसका इसकी समीक्षा जरूर कर रहे थे क्योंकि यह सबकी समीक्षा

61
00:04:12,240 --> 00:04:16,480
करता है। क्योंकि यह सबकी समीक्षा करता है इसलिए

62
00:04:16,480 --> 00:04:20,480
इसकी समीक्षा कर रहे थे। अच्छा अब इसमें

63
00:04:20,480 --> 00:04:25,280
एक सबसे हंसी की बात क्या है जिसकी समीक्षा करने के लिए मैं ये वीडियो बना रहा हूं।

64
00:04:25,280 --> 00:04:29,600
वह हंसी की बात यह है कि अभी कुछ दिनों पूर्व इस

65
00:04:29,600 --> 00:04:33,600
भागवतानंद ने ही अपनी दोगलेपन की प्रवृत्ति के

66
00:04:33,600 --> 00:04:37,600
अंतर्गत एक वक्तव्य दिया था।

67
00:04:37,600 --> 00:04:41,680
जब पूरी पीठाधीश्वर जी की जो रिकॉर्डिंग

68
00:04:41,680 --> 00:04:45,760
होती है वीडियोस की उसमें उनकी आवाज उतनी क्लियर नहीं

69
00:04:45,760 --> 00:04:50,400
आ रही थी या फिर और भी अनेक जो टेक्निकल तकनीकी जो

70
00:04:50,400 --> 00:04:54,480
चीजें होती है उनका अभाव होता है तो उसके कारणों से उनकी आवाज साफ

71
00:04:54,480 --> 00:04:56,400
नहीं आ रही थी तो इसने वक्तव्य निर्गत

72
00:04:56,400 --> 00:05:00,640
किया था कि विश्व की वरिष्ठतम प्रतिमान जो मूर्ति

73
00:05:00,640 --> 00:05:05,040
है उसके साथ उसके ही पीठ वाले ऐसा अनाचार

74
00:05:05,040 --> 00:05:09,120
कर रहे हैं ऐसा दुराचार कर रहे षड्यंत्र पूर्वक उसके वक्तव्यों को आने

75
00:05:09,120 --> 00:05:13,360
नहीं दे रहे हैं। ढिमका ढिमका फला फला पूरे

76
00:05:13,360 --> 00:05:17,360
विश्व में सनातन धर्म के इतने वरिष्ठ प्रतिमान को भी अपने

77
00:05:17,360 --> 00:05:21,360
भाषण के लिए माइक और कैमरा ठीक से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बार-बार कहने पर भी उपलब्ध नहीं हो

78
00:05:21,360 --> 00:05:25,440
पा रहा है। तो उनके परिकर उन्हीं का मुख बंद करने की चेष्टा करते हैं जो सार्वजनिक रूप से कई बार

79
00:05:25,440 --> 00:05:29,680
देखा गया है। है ना? वो वो बात अलग है कि उसी

80
00:05:29,680 --> 00:05:34,080
विश्व की वरिष्ठतम प्रतिमान मूर्ति को यह मुसलमान समर्थक

81
00:05:34,080 --> 00:05:38,480
भी कहता है। रायपुर में मुसलमान के घर कौन गया था?

82
00:05:38,480 --> 00:05:42,720
मैं गया था। नहीं पूरी के शंकराचार्य गए थे। वंचित

83
00:05:42,720 --> 00:05:46,720
मुसलमानों को संपत्ति का हक मिलना चाहिए। ये बयान किसका है? मेरा है।

84
00:05:46,720 --> 00:05:51,040
नहीं। पूरी के शंकराचार्य निशानंद सरस्वती जी का है। कुंभ

85
00:05:51,040 --> 00:05:55,600
के मेले में अभी जो प्रयाग में लगा वहां पर अच्छे मुसलमानों

86
00:05:55,600 --> 00:05:59,920
को आना चाहिए। रहीम कोटि के कलाम कोटि के मुसलमानों को आना चाहिए।

87
00:05:59,920 --> 00:06:03,920
यह किसने कहा? हमने कहा क्या? नहीं। पूरी के शंकराचार्य ने कहा। हमने तो बल्कि इस बात

88
00:06:03,920 --> 00:06:08,160
का विरोध भी किया था। मुसलमानों का सहयोग

89
00:06:08,160 --> 00:06:11,440
जेल में बंद मुसलमानों का सहयोग हिंदू राष्ट्र में ले रहे हैं। यह

90
00:06:11,440 --> 00:06:15,760
कौन बोल रहा था? मैं बोल रहा था नहीं। फरवरी 2022 में जांजगीर में जो दैनिक

91
00:06:15,760 --> 00:06:20,000
भास्कर का एडिशन है उसमें देख लेना। पूरी शंकराचार्य जी ने कहा है। दोगला

92
00:06:20,000 --> 00:06:24,480
व्यक्ति समय-समय पर। मगर क्योंकि वहां पर उसकी

93
00:06:24,480 --> 00:06:28,480
असामर्थता को प्रकट करना था कि देखो उसके साथ रह के भी उसके

94
00:06:28,480 --> 00:06:33,040
शिष्य सुधरे नहीं। सामर्थ्यवान गुरुओं के साथ रहकर के

95
00:06:33,040 --> 00:06:37,200
जो शिष्य होते हैं वह सुधर जाते हैं। मगर 30 वर्ष हो गए अभी तक अमुक अमुक

96
00:06:37,200 --> 00:06:41,280
नहीं सुधरा। और इसी असमर्थता को प्रकट कर रहा है वह

97
00:06:41,280 --> 00:06:45,440
पीठ के परिकरों पर या पीठ पर यह आरोप लगाते हुए

98
00:06:45,440 --> 00:06:50,000
कि पीठ वाले ही जो पूज्य पीठाधीश्वर हैं उनके

99
00:06:50,000 --> 00:06:54,160
विरोध में षड्यंत्र रच रहे हैं और उनके जो संसाधन है उनका

100
00:06:54,160 --> 00:06:58,720
अभाव है विश्व की वरिष्ठतम प्रतिमान मूर्ति के जो वक्तव्य हैं उनकी रिकॉर्डिंग

101
00:06:58,720 --> 00:07:02,960
ठीक से नहीं हो पा रही है। उनकी आवाज दब रही है। यह है वह है। उसमें कोई तकनीकी

102
00:07:02,960 --> 00:07:07,120
समस्या नहीं हो सकती है। आज मैंने वीडियो देखा है विद्या भास्कर

103
00:07:07,120 --> 00:07:11,120
जी महाराज का जिसमें उनकी आवाज साफ नहीं आ

104
00:07:11,120 --> 00:07:15,440
रही है जैसी उनके अन्य वीडियोस में आती है। हम

105
00:07:15,440 --> 00:07:20,560
नीचे आए हैं मृत्यु लोक में इसीलिए ना नहीं तो ऊपर वैुंठ में रहते

106
00:07:20,560 --> 00:07:24,560
स्वर्ग में ही रहते हैं। स्वर्ग में पुण्य का बैलेंस समाप्त हो गया

107
00:07:24,560 --> 00:07:27,760
तब हम मृत्यु लोक में आए।

108
00:07:27,760 --> 00:07:31,760
अब यह दोगला व्यक्ति क्यों नहीं बोल रहा है कि विद्या भास्कर

109
00:07:31,760 --> 00:07:35,840
जी की पीठ में भी षड्यंत्रकारी शिष्य हैं और

110
00:07:35,840 --> 00:07:39,840
विद्या भास्कर जी भी सामर्थ्यवान नहीं है क्योंकि उनके सानिध्य में रह

111
00:07:39,840 --> 00:07:44,400
के उनके जो शिष्य हैं वह सुधर नहीं पाए हैं।

112
00:07:44,400 --> 00:07:48,560
वो षड्यंत्र पूर्वक विद्या भास्कर जी के वक्तव्यों को निर्गत

113
00:07:48,560 --> 00:07:54,560
होने से रोक रहे हैं। उसमें बाधा डाल रहे हैं। क्यों नहीं बोल रहा है यह दोगला व्यक्ति?

114
00:07:54,720 --> 00:07:58,720
यही है इसके दोगलेपन की पराकाष्ठा। अच्छा

115
00:07:58,720 --> 00:08:02,720
या तो हम लोग यह मान ले कि यह जो व्यक्ति यह कहता

116
00:08:02,720 --> 00:08:06,800
है कि मेरे लिए शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मधवाचार्य इत्यादि सब एक है। मैं

117
00:08:06,800 --> 00:08:10,800
तो अद्वैत मुक्ति बुद्धि रखता हूं इन सब में। तो या तो हम यह

118
00:08:10,800 --> 00:08:15,440
मान ले कि इसके लिए विश्व की वरिष्ठतम प्रतिमान मूर्ति केवल वही है शंकराचार्य।

119
00:08:15,440 --> 00:08:19,760
रामानुजाचार्य पीठ इसके लिए विश्व की वरिष्ठतम प्रतिमान मूर्ति

120
00:08:19,760 --> 00:08:23,840
नहीं है बल्कि निम्न कोटि की है। इसलिए

121
00:08:23,840 --> 00:08:27,920
इसको उनकी पीठ की चिंता नहीं है दोगले को। यही

122
00:08:27,920 --> 00:08:32,880
मान ले। अरे बोल ना दोगले।

123
00:08:32,880 --> 00:08:38,880
विद्या भास्कर जी की पीठ के बारे में वही शब्द उपयोग में ला

124
00:08:39,440 --> 00:08:43,680
कि उनके यहां के जो परिकर है उस उनकी जो पीठ है उनके उनके

125
00:08:43,680 --> 00:08:49,680
लिए ही षड्यंत्र कर रही है और उनकी सामर्थ्यता पर दोष उठा

126
00:08:51,360 --> 00:08:55,840
नहीं करेगा क्योंकि वहां से समर्थन प्राप्त है इसलिए

127
00:08:55,840 --> 00:08:59,840
इस वीडियो को आप सभी डाउनलोड करके रख लें विद्या भास्कर स्वामी

128
00:08:59,840 --> 00:09:03,840
जी महाराज का ये वीडियो जिसमें इस व्यक्ति

129
00:09:03,840 --> 00:09:08,720
भागवतानंद का दोगलापन बिल्कुल स्पष्ट रूप से आपको दिखाई दे रहा है।

130
00:09:08,720 --> 00:09:12,880
क्या दिख रहा है? कि एक तरफ विश्व की वरिष्ठतम प्रतिमान मूर्ति

131
00:09:12,880 --> 00:09:16,880
की बड़ी चिंता है। पीठ की बड़ी चिंता है। जिसमें कि कोई अगर तकनीकी

132
00:09:16,880 --> 00:09:20,960
समस्या आ गई अभाव आ गया तो उस पर यह बड़ा कटाक्ष करेगा।

133
00:09:20,960 --> 00:09:25,040
मगर रामानुज पीठ में अगर यह सच ऐसी चीजें होंगी तो वहां पर यह कुछ

134
00:09:25,040 --> 00:09:29,040
नहीं कहेगा क्योंकि वह इसका समर्थन करती है क्योंकि वह इसके

135
00:09:29,040 --> 00:09:33,120
दुष्कृत्यों से अनभिज्ञ है और मुझे यह पता है मुझे

136
00:09:33,120 --> 00:09:37,200
ज्ञात है कि जिस दिन विद्या भास्कर जी को इसके जो काले चिट्ठे हैं जो

137
00:09:37,200 --> 00:09:42,320
कर रहा है उनके नाम से भी उनके बिना नाम से भी बाहर वो जिस दिन यथावत

138
00:09:42,320 --> 00:09:46,880
ज्ञात होंगे या विद्या भास्कर जी स्वामी जी महाराज मुझे कभी समय देंगे

139
00:09:46,880 --> 00:09:51,680
और मैं उनके समक्ष उन चीजों को रखूंगा कि इसने किस प्रकार से मनुस्मृति

140
00:09:51,680 --> 00:09:55,200
के नियमों का उल्लंघन करते हुए किसी स्त्री पर

141
00:09:55,200 --> 00:09:59,200
व्यभचारणी वैश्या होने का आरोप लगाया है। बिना

142
00:09:59,200 --> 00:10:03,360
कोई ठोस प्रमाण दिए हुए। ये सब चीजें

143
00:10:03,360 --> 00:10:07,360
मैं उनके सामने रखूंगा और फिर पूछूंगा कालिया जिन्न की उपासना करने

144
00:10:07,360 --> 00:10:09,680
वाला

145
00:10:09,680 --> 00:10:14,320
ये निग्र आचार्य कैसे? ये हमारा वैदिक आचार्य कैसे?

146
00:10:14,320 --> 00:10:18,480
हम लोग परंपरा प्राप्त परंपरा प्राप्त परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का नाम

147
00:10:18,480 --> 00:10:22,480
ले लेकर के आर्य समाजियों से मुसलमानों से इस कोनियों से भिड़ रहे

148
00:10:22,480 --> 00:10:26,480
हैं। ऐसे में यदि कोई स्वयं को मनः कल्पित परंपरा के

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आधार पर खड़ा करके और जो सार्वभौम सिद्धांत निर्गत करने वाले आचार्य

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जन है। भले ही वह शंकराचार्य हो या रामानुजाचार्य हों। उनका विरोध

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करेगा कि भैया मेरा नियम मानो। मैं जो सिद्धांत ला रहा हूं बुद्ध के विषय में

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या मैं जो सिद्धांत ला रहा हूं शबरी के विषय में उसको मानो। अपने

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परंपरा प्राप्त आचार्यों ने जो सिद्धांत दिए उसको त्याग दो।

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तो जब हम फिर कैसे उनका सामना करेंगे जिनसे

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हम पूछते हैं कि वेद कहां से आए? कैसे करेंगे सामना? तो ये

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सारी चीजें मैं रखूंगा उनके समक्ष और मुझे मालूम है

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कि यदि आज विद्या भास्कर जी अनज्ञता के कारण इस नीच

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इस धूर्त इस दोगले व्यक्ति का समर्थन कर रहे हैं तो उस दिन दौड़ा

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दौड़ा कर मार मार कर भगाने वाले भी स्वामी जी महाराज ही

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होंगे। यदि वह मुझे समय देंगे तो

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वह हमारे लिए परिणम्य है। जय श्री राम। [संगीत]
