1
00:00:01,550 --> 00:00:07,550
[संगीत]

2
00:00:08,800 --> 00:00:14,800
तुम [संगीत]

3
00:00:31,440 --> 00:00:36,560
तो सभी को जय श्री राम। निग्रह प्रवेशिका

4
00:00:36,560 --> 00:00:40,960
बाबा जी गुप्ताचार्य हैं जो इन्होंने कई बार ये कहा हमसे

5
00:00:40,960 --> 00:00:45,040
कि भैया निग्रह प्रवेशिका आएगी आएगी। जैसे वो करण अर्जुन

6
00:00:45,040 --> 00:00:49,360
आएंगे आएंगे। मेरे करण अर्जुन आएंगे। मेरे करण

7
00:00:49,360 --> 00:00:54,320
अर्जुन आएंगे। मेरे करण अर्जुन आएंगे। वैसे ही

8
00:00:54,320 --> 00:00:58,320
गुप्ताचार्य जी महाराज कहते हैं निग्रह प्रवेशिका आएगी आएगी।

9
00:00:58,320 --> 00:01:02,800
यद्यपि आएगी भी। मगर यह निग्रह प्रवेशिका

10
00:01:02,800 --> 00:01:06,960
वर्तमान समय तक तो इनकी प्राप्त हमें नहीं हो पाई। परंतु अभी तक इन्होंने जो अपनी

11
00:01:06,960 --> 00:01:11,280
प्रामाणिकता के लिए दावे किए हैं उसके संबंध में हमें निग्रह

12
00:01:11,280 --> 00:01:15,600
निकासिका लिखने का अवसर अवश्य प्राप्त करा दिया इन्हीं महानुभाव ने।

13
00:01:15,600 --> 00:01:16,560
कैसे वह भी मैं

14
00:01:16,560 --> 00:01:20,640
बताऊं। तो आप इस वीडियो को मिस ना करें। यह

15
00:01:20,640 --> 00:01:25,120
वीडियो बहुत जल्द आपको प्राप्त हो जाएगा जिसमें कि इनकी निग्रह प्रवेशिका

16
00:01:25,120 --> 00:01:29,280
के ऐसे ऐसे तार खोले गए हैं। है ना प्रवेशिका

17
00:01:29,280 --> 00:01:33,360
नहीं अभी स्वयं की निकासिका ही लिखेंगे अब इसके आने के

18
00:01:33,360 --> 00:01:37,760
बाद तो इसको जरूर देखिएगा और अभी कुछ

19
00:01:37,760 --> 00:01:41,840
कुतर्क किए गए थे इनके द्वारा जैसे हरि नारायण तिवारी कोई करके हैं

20
00:01:41,840 --> 00:01:46,320
जिन्होंने पूरी के शंकराचार्य के विरोध में काफी कुछ बोल दिया है

21
00:01:46,320 --> 00:01:50,560
अपमान पूर्वक बोल दिया है तो ये हमसे अपेक्षा कर रहे हैं कि शिवश नारायण

22
00:01:50,560 --> 00:01:55,120
द्विवेदी इनका विरोध यदि करते हैं नहीं तो हमें ज्ञात हो जाएगा कि

23
00:01:55,120 --> 00:01:59,280
उनका जो विरोध है शिवश नारायण द्विवेदी इत्यादि का वह हम तक ही सीमित

24
00:01:59,280 --> 00:02:03,600
है। क्यों भाई तुमको दिख नहीं रहा है क्या रामपाल का विरोध?

25
00:02:03,600 --> 00:02:07,600
इसन का विरोध हर उस व्यक्ति का विरोध जो सनातन धर्म को

26
00:02:07,600 --> 00:02:11,680
क्षति पहुंचा रहा है। यद्यपि तुम्हारे साथ हम सामंजस्य

27
00:02:11,680 --> 00:02:15,920
बिठाना चाहते थे। पर तुम्हें तो पसंद था धार्मिक

28
00:02:15,920 --> 00:02:20,800
कैरी मिनाटी बनना। है ना? उसके चक्कर में तुमने सबको

29
00:02:20,800 --> 00:02:25,040
समेटना शुरू कर दिया। मैं धार्मिक कैरी मिनाटी बन के फेमस होऊंगा।

30
00:02:25,040 --> 00:02:29,200
तो ठीक है बन जाओ कैरी मिनाटी। ऐसा थोड़ी ना है।

31
00:02:29,200 --> 00:02:32,080
हर शेर को किसी दिन सवा शेर मिल ही जाता है।

32
00:02:32,080 --> 00:02:37,120
अच्छा इससे पहले इसके कुछ दोगले व्यवहार पर भी नजर डाल लेते हैं।

33
00:02:37,120 --> 00:02:41,120
यह क्या करता है कि आचार्यों ने क्या लिखा क्या

34
00:02:41,120 --> 00:02:45,120
नहीं लिखा उसका अपने अनुसार अर्थ निकाल करके लथखोर

35
00:02:45,120 --> 00:02:49,120
इत्यादि जैसे शब्दों का उपयोग भी कर लेगा। सबके

36
00:02:49,120 --> 00:02:54,080
लिए एक ही लकड़ी से सबको हाक देगा। मगर अपना बाप यदि

37
00:02:54,080 --> 00:02:58,080
व्यास गद्दी पर स्त्री के बैठ जाने की बात कहेगा तो वहां बहुत मुलुर मुलुर करके

38
00:02:58,080 --> 00:03:02,080
कहेगा मेरे पिताजी के लिए बड़ी दिक्कत हो रही है इनको ज्योतिष

39
00:03:02,080 --> 00:03:06,160
पीठ वालों को ना वो वहां आयोजक थे ना वो वहां पर श्रोता थे ना वो

40
00:03:06,160 --> 00:03:10,160
वहां पे वक्ता थे है ना कुछ थे ही नहीं मगर सबसे बड़ी

41
00:03:10,160 --> 00:03:14,160
वकालत यही कर रहे हैं अपने में से मैं नाम बताना चाहूंगा

42
00:03:14,160 --> 00:03:18,160
एक वशिष्ठ त्रिपाठी है दूसरा रामनारायण द्विवेदी है तीसरा एक विनय कुमार पांडे

43
00:03:18,160 --> 00:03:22,240
चौथा रमाकांत पांडे जो कि भगवान विष्णु को किंग कर्तव्य विमूढ़ बता रहा था। फिर कोई

44
00:03:22,240 --> 00:03:26,400
रामकेश्वर त्रिपाठी है। एक हर प्रसाद दीक्षित, एक विवेक कुमार पांडे और

45
00:03:26,400 --> 00:03:29,280
आप सबों को आश्चर्य होगा गोवर्धन मठ के भागी शंकराचार्य

46
00:03:29,280 --> 00:03:32,640
के रूप में जिसको प्रोजेक्ट किया जा रहा है ना दिव्य चेतन ब्रह्मचारी का भी नाम

47
00:03:32,640 --> 00:03:36,800
है। ये लोग कहते हैं कि व्यास कृष्ण पर सबका अधिकार है। भागवत चर्चा सब

48
00:03:36,800 --> 00:03:41,200
लोग कर सकते हैं और वेदव्यास जी और वाल्मीकि जी ब्राह्मण ऋषि थे। अरे लथखोरों

49
00:03:41,200 --> 00:03:45,600
मैं सतर्क करता हूं तुम लोगों को। ये जो है यात्रा पूर्ण होते ही तुम लोगों का पोस्टमार्टम

50
00:03:45,600 --> 00:03:49,600
करूंगा। मेरे पिताजी ने भी महिला कथा वाचिका

51
00:03:49,600 --> 00:03:53,680
का समर्थन किया और उन्होंने गलत किया। तो मैं तो ना

52
00:03:53,680 --> 00:03:58,320
पिता के विरोध में जा सकता हूं ना शास्त्र के विरोध में जा सकता हूं।

53
00:03:58,320 --> 00:04:02,640
तो मैंने तो कुछ नहीं कहा पिताजी को। मुझे अपनी प्रतिष्ठा

54
00:04:02,640 --> 00:04:06,640
के अपेक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है। अपने बाप के लिए लथोर शब्द

55
00:04:06,640 --> 00:04:10,800
नहीं निकलेगा। अन्यों के लिए लथोर शब्द निकलेगा। उनका पोस्टमार्टम करेगा।

56
00:04:10,800 --> 00:04:15,040
अपने बाप का पोस्टमार्टम नहीं करेगा। हैं? क्योंकि हम तो ऐसा कृत

57
00:04:15,040 --> 00:04:19,760
कभी किए ही नहीं जो अच्छा शंगेरी में

58
00:04:19,760 --> 00:04:23,840
गलत तरीके से प्राप्त किया हुआ धन आया और उसका

59
00:04:23,840 --> 00:04:28,080
उपयोग करना अनुचित था। उपयोग में उसे लेना अनुचित था। यह बात

60
00:04:28,080 --> 00:04:31,360
तुमने खुद कही।

61
00:04:31,360 --> 00:04:35,440
मगर क्या शंगेरी वाले इस बात को मानते हैं?

62
00:04:35,440 --> 00:04:39,520
श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य जी ने स्वामी विमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

63
00:04:39,520 --> 00:04:43,520
के सन्यासाधार को पुष्ट करते हुए उनके शंकराचार्य के रूप में होने

64
00:04:43,520 --> 00:04:48,400
की मान्यता को दृढ़ किया। आप कहते हैं किसान सरस्वती

65
00:04:48,400 --> 00:04:52,560
जो है शंकराचार्य नहीं है। श्रृंगेरी ने अभिषेक किया तो श्रृंगेरी अराजक हो गई।

66
00:04:52,560 --> 00:04:56,640
मतलब आपके लिए बाकी तीन पीठ कुछ नहीं है। वह जो द्रव्य दोष लगा है

67
00:04:56,640 --> 00:05:01,120
श्रृंगेरी को उसके कारण श्रृंगेरी की बुद्धि में ऐसी राजनैतिक

68
00:05:01,120 --> 00:05:05,680
विकृतियां घुसती जाती हैं जो कई बार उनसे साईं के चमचों

69
00:05:05,680 --> 00:05:09,120
की भी वृदावली बखान करवा देती है। जो लोग साईं को

70
00:05:09,120 --> 00:05:13,600
शिव जी का अवतार बताते फिरते हैं। ऐसे ब्राहणाधमों का सम्मान भी श्रृंगेरी

71
00:05:13,600 --> 00:05:18,160
कर बैठती है। तो श्रृंगेरी के माननीय शंकराचार्य जी ने स्वामी

72
00:05:18,160 --> 00:05:22,320
भारती तीर्थ जी ने उन्होंने एक वैश्य वर्ण के व्यक्ति

73
00:05:22,320 --> 00:05:26,640
को दंड सन्यास दिया है। जब एक दूसरे अब ब्राह्मण को दंडी मानते आप शंकराचार्य

74
00:05:26,640 --> 00:05:30,960
बनाएं इस बात में कैसे हम आपत्ति नहीं करें।

75
00:05:30,960 --> 00:05:34,960
यदि अभिमुक्त सुरानंद सरस्वती ब्राह्मण नहीं है तो आपकी बात को पुष्ट कैसे

76
00:05:34,960 --> 00:05:39,120
माना जा सकता है? जब आप स्वयं ही एक अब ब्राह्मण को दंड सन्यास दे चुके

77
00:05:39,120 --> 00:05:43,120
हैं। तो यदि तुम्हारे लिए शंगेरी वालों का शब्द प्रमाण है तो

78
00:05:43,120 --> 00:05:47,200
शंकर परंपरा की शंगेरी पीठ पर तुम उंगली कैसे उठा रहे हो? और

79
00:05:47,200 --> 00:05:51,600
यदि उनका शब्द तुम्हारे लिए प्रमाण नहीं है तो इस बात का आलंबन

80
00:05:51,600 --> 00:05:55,840
लेते हुए कि अमुक शंकराचार्य ने अमुक शंकराचार्य को घोषित

81
00:05:55,840 --> 00:06:00,160
किया है। इसलिए मान लेना चाहिए कि वह शंकराचार्य हैं। क्यों डंका

82
00:06:00,160 --> 00:06:04,400
पीट रहे हो? क्यों तबला बजा रहे हो? क्योंकि तुम्हारा दोगला

83
00:06:04,400 --> 00:06:08,560
चरित्र है। दोगला नंबर वन

84
00:06:08,560 --> 00:06:12,800
मैं हूं दोगला नंबर वन क्या सोचा था

85
00:06:12,800 --> 00:06:17,600
तुम्ही को आता है रोस्ट करना हैं कोई मिलेगा नहीं तुमको

86
00:06:17,600 --> 00:06:21,680
और क्या है हम भाई बहुत शास्त्रों को

87
00:06:21,680 --> 00:06:24,400
मानने वाले हैं बहुत शास्त्र के अनुरूप चलने

88
00:06:24,400 --> 00:06:28,480
वाले हैं पूरी में कोई भी ऐसी घटना जो हमें समझ में नहीं आ

89
00:06:28,480 --> 00:06:32,720
रही होगी या जहां पर भी हमको मौका मिल जाएगा अशास्त्रीयता

90
00:06:32,720 --> 00:06:36,800
प्रकट करने का तो वहां हम जरूर जरूर कर देंगे। मगर जिनका

91
00:06:36,800 --> 00:06:41,040
हमको जिनका हमको समर्थन प्राप्त है। यदि उनके यहां कुछ दोष

92
00:06:41,040 --> 00:06:45,280
निकलेगा तो हम राजा हैं। हम ईश्वर हैं। इसलिए हम कह देंगे कि

93
00:06:45,280 --> 00:06:49,360
चलो मान लिया। मैम यद्यपि दो पीठों पर एक ही

94
00:06:49,360 --> 00:06:53,360
शंकराचार्य नहीं हो सकते। पर चलो मान लेते हैं। क्योंकि तुम ही से निर्णय

95
00:06:53,360 --> 00:06:57,440
कराएंगे ना चारों शंकराचार्य। कौन शंकराचार्य है कि नहीं? तुम ही

96
00:06:57,440 --> 00:07:01,760
तो हो एक। जोधपुर वाले गुप्ताचार्य

97
00:07:01,760 --> 00:07:06,000
हैं। तुम ही से लेने आएंगे ना निर्णय चलो मान

98
00:07:06,000 --> 00:07:10,000
लेते हैं। हालांकि मैं एक पीठ पर दो आचार्य

99
00:07:10,000 --> 00:07:14,080
और दो पीठ पर एक आचार्य का समर्थन नहीं करता। मेरी शास्त्री दृष्टि इस बात को स्वीकार नहीं

100
00:07:14,080 --> 00:07:18,640
करती। लेकिन ठीक थे। चलिए आप थे। आप थे और अच्छी बात है। ठीक।

101
00:07:18,640 --> 00:07:22,800
ये है दोगलापन। जिनका समर्थन प्राप्त है उनकी

102
00:07:22,800 --> 00:07:27,040
चीजें आ जाने पर दोगलापन दिखा दो। और जिनका समर्थन

103
00:07:27,040 --> 00:07:31,040
प्राप्त करने की आकांक्षा है मन में उमड़ रहा है किसी

104
00:07:31,040 --> 00:07:35,120
तरह से मुझे शंकराचार्य के बगल में बैठने को मिल जाए पूरी वाले

105
00:07:35,120 --> 00:07:39,840
उनका यदि समर्थन प्राप्त नहीं होगा तो हर चीज पर उंगली उठाएंगे

106
00:07:39,840 --> 00:07:43,840
पूरी शंकराचार्य जी किस बारे में किस किस

107
00:07:43,840 --> 00:07:47,840
विषय में किस दृष्टिकोण से क्या कहे उससे कोई मतलब नहीं है

108
00:07:47,840 --> 00:07:52,880
मतलब जानते हुए भी गलत मतलब निकालेंगे हम

109
00:07:52,880 --> 00:07:58,240
खुद तो मुसलमानों की जहां पर परंपरा रही होगी उनकी पुस्तकें लिखेंगे

110
00:07:58,240 --> 00:08:02,320
मगर पूरी शंकराचार्य जी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए जो वक्तव्य

111
00:08:02,320 --> 00:08:07,280
देंगे उनका अपने अनुसार गलत मतलब निकाल करके ढिंढोरा पीटेंगे

112
00:08:07,280 --> 00:08:11,520
टचई कैरी मिनाटी की टचई नकल करेंगे

113
00:08:11,520 --> 00:08:16,400
पूरी शंकराचार्य जी की आत्म मुग्धता हम

114
00:08:16,400 --> 00:08:20,480
मेरी गुरु परंपरा क्या है ये मेरे गुरु ने बताने को मना किया तब क्या हो गया तुम्हारी आत्म

115
00:08:20,480 --> 00:08:21,680
मुग्धता को

116
00:08:21,680 --> 00:08:25,760
अब मैं थोड़ा गुरु परंपरा का भी संकेत कर देता हूं यद्यपि मेरे गुरु गुरुजनों ने मना किया।

117
00:08:25,760 --> 00:08:29,920
कामाख्या की परंपरा से और तारापीठ की परंपरा से मेरा संबंध है। इससे अधिक मैं

118
00:08:29,920 --> 00:08:32,880
अभी नहीं बता सकता। गुरुजनों ने मना किया। तब

119
00:08:32,880 --> 00:08:37,040
तुम्हें परेशानी नहीं हुई। संसत्मा विनश्यति याद नहीं आया। भगवत गीता

120
00:08:37,040 --> 00:08:41,520
4:40 मेरी गुरु परंपरा क्या है? ये मेरे

121
00:08:41,520 --> 00:08:45,600
गुरु ने बताने को मना किया है। पहले खुद पता कर लूंगा तब बताऊंगा

122
00:08:45,600 --> 00:08:49,600
गुरु का नाम। पूरी शंकराचार्य जी जिन विषयों में

123
00:08:49,600 --> 00:08:55,200
मौन रहते हैं उत्तर नहीं देते वहां तुम टाइटल डालते हो ना आत्म मुग्धता

124
00:08:55,200 --> 00:08:59,280
हैं दोगला कहीं का

125
00:08:59,280 --> 00:09:03,440
इससे अधिक मैं अभी नहीं बता सकता गुरुदेव ने मना किया है इससे अधिक

126
00:09:03,440 --> 00:09:07,920
मैं अभी नहीं बता सकता गुरुदेव ने मना किया नागलोक की सेना

127
00:09:07,920 --> 00:09:11,920
मधुमक्खी अरे भैया ये सारी बातों के आधार

128
00:09:11,920 --> 00:09:16,080
पर कोई कहता है क्या कि तुम शंकराचार्य मान लो क्योंकि उनकी उनके पास नागलोक

129
00:09:16,080 --> 00:09:20,080
की सेना उन पर आस्थानित लोगों के लिए वक्तव्य है।

130
00:09:20,080 --> 00:09:24,080
मानना हो मानो नहीं मानना हो मत मानो। मुझे आचार्य कथन पर विश्वास हो सकता

131
00:09:24,080 --> 00:09:28,080
है। दब बल से कर दे अलग बात है। मुझे आचार्य कथन पर विश्वास हो सकता है।

132
00:09:28,080 --> 00:09:32,160
देवब बल से कर दे अलग बात है। मुझे आचार्य कथन पर विश्वास हो सकता है। दैवब

133
00:09:32,160 --> 00:09:36,160
बल से कर दे अलग बात है। तुमने अपने वीडियोस में नहीं कहा। मानना

134
00:09:36,160 --> 00:09:40,560
हो मानो नहीं मानना हो नहीं मानो। अब इससे ज्यादा क्या प्रमाण दे दे तुमको।

135
00:09:40,560 --> 00:09:44,640
अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना है तो अपनी कंबल तानो और सो जाओ। अगर तुमको इसमें प्रमाण

136
00:09:44,640 --> 00:09:48,800
नहीं मानना है तो अपनी कंबल तानो सुनाओ। क्यों कहा था?

137
00:09:48,800 --> 00:09:52,800
वहां क्या तर्क था तुम्हारे पास? भगवती तुम्हें वरदान देने

138
00:09:52,800 --> 00:09:57,520
आती हैं। तुम कहते हो नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए। क्यों नहीं मांगा था हिंदू राष्ट्र?

139
00:09:57,520 --> 00:10:02,720
क्यों नहीं मांगा था? गौ हत्या बंद हो जाए। झूठा।

140
00:10:02,720 --> 00:10:06,720
मां भगवती आती है वरदान देने। इन जैसों को वरदान देने

141
00:10:06,720 --> 00:10:09,680
आएंगी। गुप्ताचार्यों को जोधपुर वाले।

142
00:10:09,680 --> 00:10:13,840
और भगवती ने मुझे यही वरदान दिया। इस बात की भी मैं शपथ कर सकता हूं।

143
00:10:13,840 --> 00:10:18,480
जब सिंपैथी गेन करनी होगी तो क्या करोगे कि देखो देखो जो

144
00:10:18,480 --> 00:10:22,640
पूरे जगत की विश्व की जो वरिष्ठतम

145
00:10:22,640 --> 00:10:26,800
धर्म की जो वरिष्ठतम प्रतिमान है उनके साथ

146
00:10:26,800 --> 00:10:31,280
देखिए उनके ही परिकर कैसा छल कर रहे हैं।

147
00:10:31,280 --> 00:10:35,920
अरे भैया त्रिकाल संध्या वाला व्यक्ति जो एक सन्यासी के

148
00:10:35,920 --> 00:10:40,240
स्थानांतरित होने वाले शिविर के साथ लगातार चल सके ढूंढ के दे।

149
00:10:40,240 --> 00:10:45,680
देखा नहीं होगा। ऐसे ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स हैं जो यूज हो रहे हैं वहां पर।

150
00:10:45,680 --> 00:10:51,680
यद्यपि वह मंगवाए नहीं गए हैं। कोई ना कोई देके ही गया है श्रद्धालु।

151
00:10:53,280 --> 00:10:57,440
लगातार स्थानांतरण हो रहा है। चीजें आप

152
00:10:57,440 --> 00:11:01,440
बार-बार स्थानांतरित होते समय बहुत आसान होता है क्या? और वहां कोई

153
00:11:01,440 --> 00:11:05,680
क्या प्रोफेशनल बैठे हुए हैं क्या? कैमरामैन सब वही

154
00:11:05,680 --> 00:11:09,680
है ब्रह्मचर्य आश्रम में जो अभी

155
00:11:09,680 --> 00:11:14,960
प्रवेश हुआ है और अपना पढ़ाई भी हुई है थोड़ी बहुत और चल रही है और

156
00:11:14,960 --> 00:11:18,160
सहायता कर रहे हैं

157
00:11:18,160 --> 00:11:22,320
ले ढूंढ के ऐसा प्रोफेशनल व्यक्ति जो जापान से आने वाले क्या

158
00:11:22,320 --> 00:11:26,480
कहते हैं माइक वगैरह को यूज़ करना चाहता जानता हो कौन सा माइक कौन से कैमरे

159
00:11:26,480 --> 00:11:30,480
के साथ किस स्थिति में कंपैटिबल होगा लगे उड़ाने मजाक

160
00:11:30,480 --> 00:11:34,720
हर बात का हमारी कहने पर यह आएंगे या नहीं

161
00:11:34,720 --> 00:11:38,720
आएंगे। यह संदिग्ध विषय है। अपेक्षित सहयोग

162
00:11:38,720 --> 00:11:43,120
का नितांत अभाव इस आंदोलन को क्षीण कर रहा है।

163
00:11:43,120 --> 00:11:47,280
हर जगह दोष दिख रहा है। मगर वहां जहां जिनका समर्थन प्राप्त है वहां

164
00:11:47,280 --> 00:11:51,600
चलो मान लेते हैं। कोई बात नहीं। क्यों? क्यों मान लिया?

165
00:11:51,600 --> 00:11:56,560
तस्मात शास्त्रम प्रमाणम। कैसे मान लिया?

166
00:11:56,560 --> 00:12:00,800
क्योंकि तू दोगला व्यक्ति है। इसलिए मान लिया। हम

167
00:12:00,800 --> 00:12:05,040
इस बात को कभी नहीं कहते कि दो पीठों पर नहीं होने चाहिए। तूने उठाई

168
00:12:05,040 --> 00:12:08,320
ना। क्यों मान लिया? जो जहां गलत

169
00:12:08,320 --> 00:12:12,480
होगा उसको तू गलत कहता है। और कहता है कि अगर कोई

170
00:12:12,480 --> 00:12:16,640
भी आचार्य तो अगर तू तेरे पास कोई

171
00:12:16,640 --> 00:12:20,880
ऐसा गुरु ही नहीं है जो कहीं पर गलत ना दिखाई दे तुझको। तो तेरे

172
00:12:20,880 --> 00:12:24,880
पास शब्द प्रमाण क्या है? वेद का? क्या शब्द

173
00:12:24,880 --> 00:12:28,880
प्रमाण है वेद का तेरे पास? तेरा बाप तक तुझे गलत दिखाई दे

174
00:12:28,880 --> 00:12:32,080
रहा है जो कि है भी

175
00:12:32,080 --> 00:12:36,080
दिखाई दिया ना व्यास गद्दी पर नहीं बैठना चाहिए

176
00:12:36,080 --> 00:12:39,440
था ना

177
00:12:39,440 --> 00:12:43,440
कौन है जो तेरे हिसाब से गलत नहीं है तो शब्द प्रमाण क्या है वेद का

178
00:12:43,440 --> 00:12:49,440
ये वही वेद है जो ईश्वर ने दिए थे

179
00:12:50,640 --> 00:12:54,640
गुरु का शब्द प्रमाण होता है

180
00:12:54,640 --> 00:12:58,800
और अगर गुरु के लिए व्यक्ति उसमें भगवान को देख रहा है तो उसमें कोई गलत

181
00:12:58,800 --> 00:13:03,520
नहीं है। श्वेता शत्रपनिषद छ 23 में लिखा है

182
00:13:03,520 --> 00:13:07,600
जिसकी भगवान में जितनी श्रद्धा होती है उतनी श्रद्धा यदि गुरु में होती है वही व्यक्ति

183
00:13:07,600 --> 00:13:11,760
भवसागर को पार कर पाता है। भूल गया

184
00:13:11,760 --> 00:13:15,840
तू कैसे याद रख पाएगा इन नियमों को? तेरे जीवन में तो कोई गुरु है ही नहीं।

185
00:13:15,840 --> 00:13:21,840
स्वषित आचार्य [संगीत]

186
00:13:25,360 --> 00:13:30,160
गुरु की अवेलना केवल दो स्थितियों में की जा सकती है।

187
00:13:30,160 --> 00:13:34,480
एक गुरु स्वयं यह कह दे मैं यहां शास्त्र विरुद्ध

188
00:13:34,480 --> 00:13:38,560
आचरण कर रहा हूं। मैं यहां पर धर्म का निर्वाह नहीं कर रहा

189
00:13:38,560 --> 00:13:41,280
हूं।

190
00:13:41,280 --> 00:13:46,240
अथवा उसने जो सिद्धांत बताया हो उसका

191
00:13:46,240 --> 00:13:51,440
आचरण उसके विपरीत हो।

192
00:13:51,440 --> 00:13:55,520
धर्म अधर्म का निर्णय स्वयं करके उस निर्णय के अनुसार गुरु को

193
00:13:55,520 --> 00:13:59,760
नहीं आ सकते। वरना उसको गुरु मत कहो। क्योंकि धर्म का

194
00:13:59,760 --> 00:14:04,720
धर्म की व्याख्या तुम्हें गुरु से प्राप्त होगी। स्वयं से नहीं।

195
00:14:04,720 --> 00:14:08,960
गुरु की चीजों पर उंगली उठाई जा सकती है। मगर

196
00:14:08,960 --> 00:14:13,360
तब जब गुरु स्वयं कह रहा हो कि हां हां मैं गलत हूं।

197
00:14:13,360 --> 00:14:17,440
और अगर ऐसा ना करके गुरु के विपरीत जाकर के

198
00:14:17,440 --> 00:14:21,440
धर्म बोध होते धर्म बोध होने का दिखावा

199
00:14:21,440 --> 00:14:25,440
करते हुए गुरु के विपरीत व्याख्या करते हुए धर्म और ब्रह्म की और

200
00:14:25,440 --> 00:14:29,760
तब तुम यदि गुरु पर उंगली उठाओगे तो वो तुम्हारा गुरु सिद्ध नहीं होगा

201
00:14:29,760 --> 00:14:33,920
जिस पर तुम उंगली उठा रहे हो क्योंकि गुरु वो है जो

202
00:14:33,920 --> 00:14:39,920
अज्ञानता रूपी अंधकार से बाहर निकाले

203
00:14:40,400 --> 00:14:44,560
नहीं उठाई जाएगी गुरु पर उंगली गुरु के

204
00:14:44,560 --> 00:14:48,560
द्वारा निर्देशित व्याख्यानों के विपरीत जाकर के गुरु पर उंगली

205
00:14:48,560 --> 00:14:52,560
नहीं उठाई जाती है। गुरु यदि कह दे हां यहां पर मैं अधर्म कर रहा हूं

206
00:14:52,560 --> 00:14:56,560
तब उसके विपरीत आप हो जाइए।

207
00:14:56,560 --> 00:15:00,640
गुरु ने जो सिद्धांत प्रतिपादित किया हो, गुरु ने जो सिद्धांत आपको सिखाया

208
00:15:00,640 --> 00:15:04,720
हो, यदि वो सिद्धांत के विरुद्ध कहीं पर जाता हुआ दिख रहा है तो उसके

209
00:15:04,720 --> 00:15:08,880
विपरीत हो जाओ। अपनी ओर से व्याख्या करके शास्त्रों

210
00:15:08,880 --> 00:15:13,200
की अपनी ओर से अर्थ निकाल करके गुरु से उस बारे में कोई संवाद

211
00:15:13,200 --> 00:15:19,200
स्थापित ना करते हुए बस गुरु विरोध करने लगे

212
00:15:19,280 --> 00:15:23,360
तो फिर वो गुरु नहीं है ना तुम्हारा क्योंकि तुम व्याख्या अपने आप कर रहे हो

213
00:15:23,360 --> 00:15:26,320
समझ में आया

214
00:15:26,320 --> 00:15:30,400
और इनके कुछ चेले चापड़ क्या कहते हैं अंधभक्त

215
00:15:30,400 --> 00:15:34,960
क्या कहते हैं हमारे गुरु जी निग्रचार्य भागवत

216
00:15:34,960 --> 00:15:39,200
आनंद मैं तुम्हारी रिस्पेक्ट इसलिए करता हूं कि तुम शास्त्र

217
00:15:39,200 --> 00:15:43,280
से बोलते हो। पूछा जा रहा है अद्वैत में भक्ति क्यों नहीं

218
00:15:43,280 --> 00:15:47,440
है? इस कौन ऐसा आरोप लगाता है? यह महाशय क्या बता रहे हैं?

219
00:15:47,440 --> 00:15:51,680
यदा यदा धर्मस भवती भारत

220
00:15:51,680 --> 00:15:55,680
क्योंकि हमें संस्कृत आती है क्योंकि हमने श्लोक पढ़े हैं तो

221
00:15:55,680 --> 00:16:00,480
बस अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए हम संस्कृत बोलेंगे। श्लोक बोलेंगे।

222
00:16:00,480 --> 00:16:04,720
हर बात के उत्तर में संस्कृत और श्लोक दिखा देंगे। यद्यपि वो

223
00:16:04,720 --> 00:16:09,120
संस्कृत और वो श्लोक उस बात का उत्तर ना हो

224
00:16:09,120 --> 00:16:12,960
जो बात पूछी जा रही है

225
00:16:12,960 --> 00:16:17,040
तुमसे ज्यादा संस्कृत आती होगी आर्य समाजियों को

226
00:16:17,040 --> 00:16:22,000
कई अंशों में बड़े व्याकरणी होंगे तुमसे तो

227
00:16:22,000 --> 00:16:26,000
उनके सिद्धांत मान लिए जाए और ऐसे अंधभक्त ऐसे अंधे

228
00:16:26,000 --> 00:16:32,000
फॉलोअर्स जो भी बोलते हो शास्त्र से बोलते हो

229
00:16:32,640 --> 00:16:36,800
भाई भाई जो बोलना है वो उस बात के उत्तर में बोलना है और तब

230
00:16:36,800 --> 00:16:42,800
शास्त्र का उपयोग हो तब उसका मान होता है। [संगीत]

231
00:16:44,240 --> 00:16:48,800
हमारे गुरु जी शास्त्र से बोलते हैं शास्त्रों का आलंबन

232
00:16:48,800 --> 00:16:51,840
लेते हैं।

233
00:16:51,840 --> 00:16:55,840
दोगलापन दिखा रहे हैं तुम्हारे गुरु जी वो नहीं दिख रहा है। वो शास्त्रीय दिख रहा है।

234
00:16:55,840 --> 00:17:00,000
खुद कह रहा है आदमी मुझे मां भगवती से वरदान मिला है

235
00:17:00,000 --> 00:17:04,240
कि मेरे से कोई गलत कार्य होने वाला होगा तो वो रोक देगी।

236
00:17:04,240 --> 00:17:08,640
यदि तुम्हारी बुद्धि कभी अधर्म में लग रही होगी तो क्रिया पर तुम्हारा नियंत्रण

237
00:17:08,640 --> 00:17:13,120
होगा। बुद्धि खराब होने से तुम्हारा कर्म खराब नहीं होने दूंगी।

238
00:17:13,120 --> 00:17:17,360
और यदि कभी तुम क्रिया ही गलत करने जा रहे हो तो बुद्धि भ्रष्ट नहीं होगी। तुम्हारा

239
00:17:17,360 --> 00:17:20,160
विवेक तुम्हें रोक लेगा।

240
00:17:20,160 --> 00:17:24,720
हम्म और फिर खुद उसका वाक स्कलन हो रहा है। क्यों नहीं रोका भगवती ने?

241
00:17:24,720 --> 00:17:29,200
वाकलन से हो गया होगा वाकलन वाकलन से हो गया होगा वाकलन वाकस्थलन

242
00:17:29,200 --> 00:17:33,520
से हो गया होगा वाकलन झूठा वरदान है वो

243
00:17:33,520 --> 00:17:37,520
या फिर वो कोई देवी नहीं है जो वरदान देके गई है वो वही

244
00:17:37,520 --> 00:17:41,520
है परी जो आई होगी और

245
00:17:41,520 --> 00:17:45,680
जो तुम्हारे द्वारा जो है सनातन धर्म का सत्यानाश कराने पर तुली

246
00:17:45,680 --> 00:17:49,840
होगी आए बड़े वरदान मिला

247
00:17:49,840 --> 00:17:53,840
है इनको पूरी के शंकराचार्य नाग लोक की

248
00:17:53,840 --> 00:17:57,840
सेना का उपयोग तुरंत कर ले। पूरी के शंकराचार्य मधुमक्खी की सेना

249
00:17:57,840 --> 00:18:01,920
का उपयोग तुरंत कर ले। मगर इनके पास स्वयं मां जगदंबा आएगी

250
00:18:01,920 --> 00:18:07,920
और पूछेगी क्या चाहिए? तो गौ हत्या बन दो। ये वरदान नहीं मांग पाएंगे।

251
00:18:07,920 --> 00:18:13,440
हमारे गुरु जी शास्त्र से बोलते हैं। [संगीत]

252
00:18:13,440 --> 00:18:17,840
तो आ रही है इसकी निग्रह प्रवेशिका। का समाधान।

253
00:18:17,840 --> 00:18:22,320
जो इसके मन की प्रवेशिका है उसका समाधान।

254
00:18:22,320 --> 00:18:26,400
निग्रह निकासिका वो क्यों लिखनी पड़ी यह भी

255
00:18:26,400 --> 00:18:30,480
वीडियो में पता चलेगा। तो ध्यान से देखें आने वाला

256
00:18:30,480 --> 00:18:34,960
है। जय श्री राम।

257
00:18:34,960 --> 00:18:38,960
[संगीत]
