1
00:00:01,960 --> 00:00:06,080
[घंटी की आवाज़] आपने बोले हैं कि संत रामपाल जी महाराज जी जो भी

2
00:00:06,080 --> 00:00:10,240
है वेद पुराण से अलग बताते हैं और जो भी वेद पुराण में बता

3
00:00:10,240 --> 00:00:15,360
वो सारा चीज गलत है। मिलता जुलता कुछ नहीं है। हमसे

4
00:00:15,360 --> 00:00:19,440
सवाल है और भी आप बोले हैं कि वेद पुराण पे बात करना

5
00:00:19,440 --> 00:00:23,440
बेकार है। और उनके सभी भक्तों को ना जाने

6
00:00:23,440 --> 00:00:27,440
क्या-क्या बोल रहे हैं। आप वो भी बोले हैं। तो वही चीज पे आज गीता पे साबित

7
00:00:27,440 --> 00:00:31,600
होगा कि क्या गलत बताएं आप बता दो कि क्या गलत

8
00:00:31,600 --> 00:00:36,080
बताएं उसके बाद मैं साबित करूंगा क्या सही बोले अच्छा

9
00:00:36,080 --> 00:00:40,160
तो वेद पुराण गीता के विरुद्ध नहीं जाते वो

10
00:00:40,160 --> 00:00:44,560
ये आपका कहना है पहला पहला यही है ना

11
00:00:44,560 --> 00:00:49,040
वेद पुराण गीता के विरुद्ध नहीं जाते वो अच्छा ठीक है

12
00:00:49,040 --> 00:00:53,200
तो ये बताइए दो बातें पहली बात यह है क्या

13
00:00:53,200 --> 00:00:58,480
वेद ने ऐसा कहा है कि वेद के अलावा और कोई मार्ग है जिससे मुक्ति मिलेगी?

14
00:00:58,480 --> 00:01:03,200
जी कहां पर कहा है?

15
00:01:03,200 --> 00:01:07,200
वो गीता अध्याय मैं आपको बता रहा हूं जिसमें बोले हैं मैं

16
00:01:07,200 --> 00:01:12,400
वेद की बात मैं वेद की बात कर रहा हूं। पहले आप वेद का बता दीजिए कहां पर है?

17
00:01:12,400 --> 00:01:17,120
तो वेद और पुराण ये गीता क्या है? वेद पुराण अरे भैया

18
00:01:17,120 --> 00:01:21,280
पुराण से भी लेंगे। गीता से भी लेंगे। अब वेद में आपके पास प्रमाण है क्या जो वेद

19
00:01:21,280 --> 00:01:26,000
ये कह रहे हो कि भैया वेद में मार्ग नहीं है वेद से बाहर मार्ग है

20
00:01:26,000 --> 00:01:30,240
अच्छा है क्या आपके पास प्रमाण मैंने पूछा प्रमाण

21
00:01:30,240 --> 00:01:34,320
है कि नहीं देखिए एक बात को खत्म किया करिए हां वेद का

22
00:01:34,320 --> 00:01:39,040
प्रमाण है तो बताओ हां मैं बता मैं बता रहा हूं बताइए आप

23
00:01:39,040 --> 00:01:43,040
अभी क्या पूछे वेद ने ये कहा है क्या कि

24
00:01:43,040 --> 00:01:47,280
वेद में जो मुक्ति का मार्ग है वो नहीं है वेद

25
00:01:47,280 --> 00:01:52,400
से बाहर कहीं पर है ये कहा है क्या सब वेद में है

26
00:01:52,400 --> 00:01:56,480
लेकिन मैंने मैंने यह कहा कि वेद

27
00:01:56,480 --> 00:02:00,640
में वेद में ये प्रमाण है क्या कि वेद में मुक्ति का मार्ग नहीं है वेद

28
00:02:00,640 --> 00:02:04,720
से बाहर है मुक्ति का मार्ग नहीं है सब वेद में है

29
00:02:04,720 --> 00:02:08,880
मुक्ति का मार्ग लेकिन वेद को समझने वाला टीचर चाहिए

30
00:02:08,880 --> 00:02:12,880
एक मिनट भाई साहब एक एक करके चलेंगे वेद को समझने वाला टीचर चाहिए उस पर भी

31
00:02:12,880 --> 00:02:17,120
आ जाएंगे अभी आपने कहा कि वेद में मुक्ति का मार्ग है

32
00:02:17,120 --> 00:02:21,680
ठीक है वेद वेदों में चारों वेदों में

33
00:02:21,680 --> 00:02:25,840
चारों वेदों में मुक्ति का मार्ग है। वेदों में है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं। वेद में वेद

34
00:02:25,840 --> 00:02:29,840
में वेद में वेद में है कि नहीं? हां वेद

35
00:02:29,840 --> 00:02:32,160
में उस परमात्मा के गुण लिखा

36
00:02:32,160 --> 00:02:36,240
गया है। मैंने कहा मुक्ति मैंने कहा मुक्ति का मार्ग है

37
00:02:36,240 --> 00:02:40,320
कि नहीं? है सूक्ष्म वेद में है।

38
00:02:40,320 --> 00:02:44,560
सूक्ष्म वेद नहीं चारों वेद। चार वेद चार वेद चार वेद

39
00:02:44,560 --> 00:02:48,640
जो है चार वेद को मानते हैं। चार ही वेद है। या हां

40
00:02:48,640 --> 00:02:53,840
हां हां उनमें है कि नहीं है? उनमें है कि नहीं?

41
00:02:53,840 --> 00:02:57,920
अरे भाई मैं मैं पूछ आपकी बात मैंने क्या पूछा आपसे? मैं ये

42
00:02:57,920 --> 00:03:02,160
पूछ रहा हूं जो चार वेद हैं अथर्ववेद, ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद इनमें मुक्ति

43
00:03:02,160 --> 00:03:06,960
का मार्ग है कि नहीं? या वेद क्या ऐसा कहते हैं कि भैया

44
00:03:06,960 --> 00:03:12,000
इनसे बाहर कहीं मुक्ति का मार्ग है। यह मैं कह रहा हूं।

45
00:03:12,000 --> 00:03:16,240
मुक्ति का रह गया जो वेद का है बात आप बोल रहे हैं वेद के चार वेद

46
00:03:16,240 --> 00:03:20,640
ऋग्वेद सामवेद अथर्ववेद ये सब में उस परमात्मा के गुणगान

47
00:03:20,640 --> 00:03:25,280
लिखा गया है कि उस परमात्मा मैंने क्या पूछा है भाई साहब

48
00:03:25,280 --> 00:03:29,520
देखो भाई बात को समझो मैंने आपसे ये पूछा है क्या वेद

49
00:03:29,520 --> 00:03:33,520
में मुक्ति का मार्ग है कि नहीं पहले तो आप यह बता दो चार वेद जो हैं उनमें मुक्ति का

50
00:03:33,520 --> 00:03:37,600
मार्ग है कि नहीं और अगर आप यह कह रहे हो कि नहीं सूक्ष्म वेद को भी वेद मान के तब मैं

51
00:03:37,600 --> 00:03:41,600
बोल रहा हूं कि हां वेद में मुक्ति का मार्ग है तो उस पे फिर मैं बात करूं यह

52
00:03:41,600 --> 00:03:45,600
क्लियर कर दो। चार वेद में है कि नहीं? सूक्ष्म वेद को चार वेद में नहीं है।

53
00:03:45,600 --> 00:03:47,360
सूक्ष्म वेद को ऐड करके तब

54
00:03:47,360 --> 00:03:52,560
आप वेद मानते हो। अच्छा सूक्ष्म वेद हां

55
00:03:52,560 --> 00:03:56,720
आप एक मिनट सुन लीजिए मेरी। हम पहले हमारे पिताजी पढ़ते

56
00:03:56,720 --> 00:04:00,960
थे तो ये संस्कृत नहीं था। मैं नहीं भाई साहब मैं आपसे देखिए।

57
00:04:00,960 --> 00:04:05,040
आप अगर मुझे इधर-उधर करेंगे। मैं पूछ रहा हूं। पहले बता दो क्लियर कर दो

58
00:04:05,040 --> 00:04:09,040
कि हम जानने क्या जा रहे हैं। आप ये क्लियर कर दो। उसके बाद हम जानेंगे।

59
00:04:09,040 --> 00:04:13,120
आप एक क्लियर कर दो वेद वेद में मुक्ति का मार्ग है कि

60
00:04:13,120 --> 00:04:17,120
नहीं? चार वेद में जो चार वेद है उसमें मुक्ति का मार्ग है

61
00:04:17,120 --> 00:04:21,360
कि नहीं? नहीं है। [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं है। हां।

62
00:04:21,360 --> 00:04:25,440
यानी कि चार वेद में मुक्ति का मार्ग नहीं है। ये आप भी कहते हो

63
00:04:25,440 --> 00:04:30,320
और आपके रामपाल भी कहते हैं। ठीक है। रामपाल भी यही कहते हैं।

64
00:04:30,320 --> 00:04:34,480
मैंने क्या पूछा? हां। ठीक है।

65
00:04:34,480 --> 00:04:38,480
चार वेद भी यही कहते हैं और रामपाल भी यही कहते हैं। अब आप कह रहे हो कि

66
00:04:38,480 --> 00:04:43,120
वेद भी यही कहते हैं। तो वेद में कहां प्रमाण है वो बता दो।

67
00:04:43,120 --> 00:04:47,280
हम वेद में कहां प्रमाण है कि मुक्ति का मार्ग नहीं है।

68
00:04:47,280 --> 00:04:51,680
नहीं है। इन चार वेदों में से किसी में भी मुक्ति का मार्ग ही नहीं है।

69
00:04:51,680 --> 00:04:55,840
पहले आप एक पहले आप एक बात बोले थे कि बिना माने कुछ सिद्ध

70
00:04:55,840 --> 00:05:00,080
होने वाला नहीं है। बात बात शुरू कहां से हो रही है? बात देखिए

71
00:05:00,080 --> 00:05:02,560
टॉपिक क्या चल रहा है? टॉपिक ये चल रहा

72
00:05:02,560 --> 00:05:06,560
है कि आपने कहा आपके जो आपके जो वो हैं

73
00:05:06,560 --> 00:05:10,720
आपने कहा है आपके जो रामपाल जी महाराज हैं वो

74
00:05:10,720 --> 00:05:14,800
एक भी बात वेद के विरुद्ध नहीं कहते बाहर नहीं कहते है ठीक है अब आपने एक

75
00:05:14,800 --> 00:05:18,880
बात कही है कि जो वेद है उनमें मुक्ति का मार्ग नहीं है यह

76
00:05:18,880 --> 00:05:22,880
बात वेद में कहां लिखी है प्रमाण है चलिए ये साबित

77
00:05:22,880 --> 00:05:27,680
करना चाहता हूं कि कोई भी बच्चा एक सब्जेक्ट से पास होने वाला नहीं है

78
00:05:27,680 --> 00:05:31,760
मैंने कहा आपकी बात का प्रमाण है वेद में मुक्ति का मार्ग है या नहीं

79
00:05:31,760 --> 00:05:37,120
इस बात का एक एक बात क्लियर करके चलो प्रमाण है कि नहीं

80
00:05:37,120 --> 00:05:41,280
प्रमाण नहीं है हां चार वेदों में मुक्ति का मार्ग चार वेदों

81
00:05:41,280 --> 00:05:45,600
में मुक्ति का मार्ग नहीं है गीता में भी नहीं है और पुराणों में भी नहीं है

82
00:05:45,600 --> 00:05:49,760
नहीं है बहुत बढ़िया उपनिषद में भी नहीं है

83
00:05:49,760 --> 00:05:53,760
ठीक है नहीं है जी हां नहीं है ये तो हमने क्लियर कर

84
00:05:53,760 --> 00:05:57,760
लिया कि जो हमारे सनातन धर्म शास्त्र है आप उसमें

85
00:05:57,760 --> 00:06:02,160
कबीर को जोड़ो वो कबीर वाणी को जोड़ रहे हो हम नहीं जोड़ रहे हैं। मगर जो सनातन

86
00:06:02,160 --> 00:06:06,400
धर्मशास्त्र कबीर वाणी के बिना है उपनिषद पुराण

87
00:06:06,400 --> 00:06:11,120
स्मृति ग्रंथ यानी रामायण महाभारत गीता और वेद श्रुति ग्रंथ

88
00:06:11,120 --> 00:06:15,120
इनमें जो है मुक्ति का मार्ग नहीं है। यह आपका कहना

89
00:06:15,120 --> 00:06:17,920
है। ठीक है? हां। अब भैया इनको

90
00:06:17,920 --> 00:06:22,400
शास्त्र जो ऑपरेटर जी हैं वो इनको जरा

91
00:06:22,400 --> 00:06:24,880
वो

92
00:06:24,880 --> 00:06:30,880
नान्या पंथा वाला दिखा दीजिए। प्रमाण यजुर्वेद 319

93
00:06:37,760 --> 00:06:41,760
आप बता [गला साफ़ करने की आवाज़] दीजिए व से बता दीजिए। उसमें लिखा है उसमें

94
00:06:41,760 --> 00:06:46,000
लिखा है कि जन्म मरणम के चक्कर से छूटना यानी मुक्ति

95
00:06:46,000 --> 00:06:50,320
का। इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है जो वेद बता रहे हैं।

96
00:06:50,320 --> 00:06:54,400
अच्छा जन्म मरणम से छूटना। यही मुक्ति का मार्ग

97
00:06:54,400 --> 00:06:59,520
है। हम ठीक। और आगे क्या लिखा है?

98
00:06:59,520 --> 00:07:05,360
यही लिखा है मुक्ति का मार्ग और इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है।

99
00:07:05,360 --> 00:07:09,520
मतलब कि जो मतलब इससे यह सिद्ध हुआ कि वेद

100
00:07:09,520 --> 00:07:13,600
जो है वही मुक्ति का मार्ग है। चार वेद उसके अलावा और कोई मुक्ति का

101
00:07:13,600 --> 00:07:17,600
मार्ग नहीं है उससे बाहर जाकर के। ये कह रहे हैं वेद। चार

102
00:07:17,600 --> 00:07:21,760
वेद। तो गीता गीता भी नहीं मानेंगे तब। अगर गीता

103
00:07:21,760 --> 00:07:25,920
की यह बात तो रामपाल खुद लिखते हैं कि अगर गीता की कोई बात ऐसी होगी जो वेद से मैच

104
00:07:25,920 --> 00:07:30,000
नहीं खाएगी तो नहीं माननी है। यह तो रामपाल खुद लिखते हैं। दिखाऊं

105
00:07:30,000 --> 00:07:33,040
मैं दिखाऊं? हां दिखाइए। मैं

106
00:07:33,040 --> 00:07:38,800
दिखाऊं? दिखा देता हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] दिखा देता हूं।

107
00:07:38,800 --> 00:07:42,800
मैंने क्या कहा है? मैंने क्या कहा है? आप यह मानते हो कि रामपाल

108
00:07:42,800 --> 00:07:47,040
जो है गीता को एज इट इज पूरा का पूरा मानते हैं। थोड़ा बहुत उसमें कुछ चीजें ऐसी हैं

109
00:07:47,040 --> 00:07:51,120
जो वेद के विरुद्ध है जो वो नहीं मानते हैं। हां

110
00:07:51,120 --> 00:07:55,760
ये तो है जो है ना

111
00:07:55,760 --> 00:07:59,920
हां तो इसका मतलब गीता गीता ज्ञानी की गीता में जो भी चीजें

112
00:07:59,920 --> 00:08:04,000
वेदों के बाहर जा रही है ये चीज लिखी भी है रामपाल ने गीता

113
00:08:04,000 --> 00:08:08,080
में जो भी चीज वेद के विरुद्ध जाती हुई दिखाई देगी

114
00:08:08,080 --> 00:08:13,120
उसको नहीं मानना है रामपाल ने लिखा है दिखाना है

115
00:08:13,120 --> 00:08:19,120
मैंने कहा मैंने कहा दिखाना है क्या

116
00:08:24,720 --> 00:08:29,200
यह देखिए गीता का जो ज्ञान गीता का जो ज्ञान

117
00:08:29,200 --> 00:08:33,760
वेद एक मिनट बता रहा हूं। एक मिनट बता रहा हूं।

118
00:08:33,760 --> 00:08:38,000
पहले पढ़ रहा हूं फिर आपको बता रहा हूं। गीता का जो ज्ञान वेदों तथा

119
00:08:38,000 --> 00:08:42,000
सूक्ष्म वेद जो सच्चिदानंद घन ब्रह्म अर्थात सत्य

120
00:08:42,000 --> 00:08:46,160
पुरुष ने अपने मुख कमल से तत्व ज्ञान बोला उससे मेल नहीं करता तो वह ज्ञान गलत

121
00:08:46,160 --> 00:08:50,320
है। यानी कि गीता तभी तक मान्य है जब तक वेदों

122
00:08:50,320 --> 00:08:54,560
से मैच खाए। ठीक है? तो गीता [गला साफ़ करने की आवाज़] के आधार पर आप वेद

123
00:08:54,560 --> 00:08:58,640
की बात को कट नहीं कर सकते। वेद कह रहे हैं कि वेद से बाहर और

124
00:08:58,640 --> 00:09:02,720
कोई ज्ञान नहीं है जीवन और मरण से छूटने का।

125
00:09:02,720 --> 00:09:08,000
रामपाल कह रहे हैं कि वेद से बाहर है।

126
00:09:08,000 --> 00:09:12,080
तो ये तो वेद के ये तो वेद का विरोध हो गया। कौन सा?

127
00:09:12,080 --> 00:09:16,240
वेद का विरोध हो गया। तो वेद में एक अरे

128
00:09:16,240 --> 00:09:20,560
भाई इसका तो विरोध हो गया। मैंने कहा इसका तो विरोध हो गया।

129
00:09:20,560 --> 00:09:24,720
इसका तो विरोध हो गया। एक उंगली पकड़ लेने से क्या

130
00:09:24,720 --> 00:09:29,040
पूरा शरीर बांधा जाता है? अच्छा अच्छा ठीक है। ठीक है। ठीक है। मतलब मतलब

131
00:09:29,040 --> 00:09:33,280
एक आध बात का विरोध हो सकता है वेद की। रामपाल के अनुसार एक आध बात का विरोध

132
00:09:33,280 --> 00:09:37,520
होता है। रामपाल के यहां वेद की मैंने

133
00:09:37,520 --> 00:09:41,760
हां बोलिए। चलिए बोलिए। आपका जो यह बात बोले

134
00:09:41,760 --> 00:09:46,000
हैं जैसे मान लीजिए हम डॉक्टर चले गए एग्जांपल आप भी दे सकते

135
00:09:46,000 --> 00:09:50,160
हो मैं भी दे सकता हूं भाई साहब मैं आपकी बात को समझ

136
00:09:50,160 --> 00:09:54,320
गया हूं मुझे आप क्लियर पहले कर दीजिए यानी कि रामपाल के यहां पर वेद

137
00:09:54,320 --> 00:09:58,400
की एक आध मैंने कहा मैंने कहा रामपाल के यहां पर

138
00:09:58,400 --> 00:10:02,720
वेद की भी एक आध बात का विरोध होता है। आप यह बता दीजिए

139
00:10:02,720 --> 00:10:06,800
होता है ना होता भी है हां अभी होता

140
00:10:06,800 --> 00:10:11,040
है होता है हां हां तो जो मैंने ये बात कही है कि रामपाल

141
00:10:11,040 --> 00:10:15,760
का जो ज्ञान है वो वेद पुराण के बाहर है

142
00:10:15,760 --> 00:10:19,760
रामपाल का जो ज्ञान है वो वेद पुराण के बाहर है तो बाहर हो

143
00:10:19,760 --> 00:10:23,040
गया ये इसका विरोध हो गया अब दूसरी अब

144
00:10:23,040 --> 00:10:27,040
दूसरी बात है अब दूसरी बात दूसरी अब दूसरी बात आप यह कह रहे हैं कि भाई एक आध

145
00:10:27,040 --> 00:10:31,600
चीज के विरोध से यह नहीं हो जाता कि हम पूरा का पूरा विरोध करते हैं ठीक है

146
00:10:31,600 --> 00:10:35,600
ठीक है ना? एक आ चीज के विरोध से यह नहीं हो जाता कि

147
00:10:35,600 --> 00:10:40,880
हम पूरा का पूरा विरोध करते हैं। यही तो है आपका कहने का मतलब।

148
00:10:40,880 --> 00:10:44,880
अरे बोलो मुंह से बोलो। मैं बोलूं मैं तो

149
00:10:44,880 --> 00:10:49,040
बोल रहा हूं। तो

150
00:10:49,040 --> 00:10:53,040
आप ये क्लियर कर दीजिए। कि एक आध आपका ये क्या आपका यही

151
00:10:53,040 --> 00:10:57,120
कहना है कि एक आध चीज के विरोध से पूरा का पूरा विरोध सिद्ध नहीं

152
00:10:57,120 --> 00:11:01,200
होता है। चलिए ठीक हां वही मैं बोल रहा हूं मेरा भी

153
00:11:01,200 --> 00:11:05,200
पहले बात तो सुन लो इसका जवाब दे दो फिर

154
00:11:05,200 --> 00:11:09,200
बोलो इसका इसका जवाब दे दो फिर बात बोलो इसका जवाब दे दो एक आ

155
00:11:09,200 --> 00:11:13,360
चीज के क्या क्या आप यही मानते हो आपने ये तो मान लिया कि रामपाल के

156
00:11:13,360 --> 00:11:18,720
यहां वेदों की एक आध कुछ बातों का विरोध भी होता है वेदों की

157
00:11:18,720 --> 00:11:22,800
होता है ठीक है तो वेदों की एक कुछ बातों का

158
00:11:22,800 --> 00:11:26,880
विरोध भी होता है ये एक एक बात हो गई ठीक है दूसरी बात ये हो गई कि इसका

159
00:11:26,880 --> 00:11:30,960
मतलब आपका ये मानना है कि एक आध का एक आध बात का विरोध हो जाने

160
00:11:30,960 --> 00:11:36,800
से आप उसके विरोधी सिद्ध नहीं होते हैं। यह आपका मानना है।

161
00:11:36,800 --> 00:11:38,240
ठीक है। अब आप अपनी बात बोलो।

162
00:11:38,240 --> 00:11:41,600
हां जी।

163
00:11:41,600 --> 00:11:45,600
अब बोले हैं कि वेद पुराण से बाहर बताते हैं।

164
00:11:45,600 --> 00:11:49,680
आपको मानना है। लेकिन हमारे मानना है कि हमारे गुरु जी सब वेद पुराण

165
00:11:49,680 --> 00:11:53,760
से बताते हैं। हम लोग का जो भी साधना हो गया। इस संबंध

166
00:11:53,760 --> 00:11:57,840
में बताओ कि क्या आपने जो यह बात कही है इस संबंध

167
00:11:57,840 --> 00:12:02,080
में आपका पक्ष क्या रख रहे हो वो बताओ।

168
00:12:02,080 --> 00:12:06,160
वेद का विरोध करते हैं कि नहीं रामपाल? वेद वेद ये

169
00:12:06,160 --> 00:12:10,160
कह रहे हैं कि वेद ही मार्ग है। रामपाल कह रहे हैं कि वेद नहीं वेद

170
00:12:10,160 --> 00:12:14,240
के बाहर जाकर के कबीर वाणी मार्ग है। वेद का विरोध नहीं करते

171
00:12:14,240 --> 00:12:19,760
हैं। वेद को ना समझने वाले उसको विरोध करते हैं। वेद सही है हमारा।

172
00:12:19,760 --> 00:12:24,080
अरे ये क्या लिखा है? मृत्यु के परे जाने

173
00:12:24,080 --> 00:12:28,240
के लिए दूसरा मार्ग नहीं है। नान पता

174
00:12:28,240 --> 00:12:32,800
विद्यते यह लिखा है स्क्रीन पे बस देख लो भैया।

175
00:12:32,800 --> 00:12:38,800
ठीक ठीक दूसरा मार्ग नहीं है। अब इसको हटा दो आप हटा दो।

176
00:12:39,280 --> 00:12:43,520
चलो अब मैं बोलूं? हां

177
00:12:43,520 --> 00:12:47,040
बोलिए।

178
00:12:47,040 --> 00:12:51,040
कोई भी वेद जो भी वेद लिखा है हजार वर्ष पहले लिखा है 600

179
00:12:51,040 --> 00:12:55,120
वर्ष पहले लिखा है सारा चीज श्रद्धालय हम लोगों को

180
00:12:55,120 --> 00:12:59,280
मानना 600 वर्ष 600 मानना पड़ेगा 600 वर्ष पहले

181
00:12:59,280 --> 00:13:03,520
लिखा है 600 वर्ष या000 वर्ष

182
00:13:03,520 --> 00:13:08,480
ये हमारा टॉपिक नहीं है चलो छोड़ते हैं आगे बढ़ो जी हां बताइए ठीक

183
00:13:08,480 --> 00:13:12,640
उसको मानना पड़ेगा हमको [गला साफ़ करने की आवाज़] सूक्ष्म वेद में लिखा है

184
00:13:12,640 --> 00:13:16,800
पर सूक्ष्म वेद कहते है एक-एक भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं।

185
00:13:16,800 --> 00:13:20,800
एक-एक करके चलिए एक टॉपिक पहले खत्म हो जाए। आपने कहा

186
00:13:20,800 --> 00:13:24,800
कि भैया एक आध चीज का विरोध रामपाल करते हैं वेद की।

187
00:13:24,800 --> 00:13:30,400
ये मानते हैं। अब इस संबंध में आपको कुछ विरोध नहीं।

188
00:13:30,400 --> 00:13:34,640
वेद के ना समझने वाले आदमी को विरोध करते हैं। जो वेद को नहीं समझता है। एक मिनट,

189
00:13:34,640 --> 00:13:38,880
एक मिनट। इस बात का क्या करें? यजुर्वेद 31 19 ये कह रहा है कि इस मार्ग

190
00:13:38,880 --> 00:13:42,880
के अलावा यानी जो मार्ग यजुर्वेद में बताया जा रहा है वेदों में चार वेदों में

191
00:13:42,880 --> 00:13:46,960
बताया जा रहा है उसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है। इसका

192
00:13:46,960 --> 00:13:50,960
विरोध है कि नहीं रामपाल को? विरोध नहीं

193
00:13:50,960 --> 00:13:55,440
है। इसका कंप्लीट नॉलेज नहीं है।

194
00:13:55,440 --> 00:13:59,600
जब वो ये कह रहा है वो वो ये कह रहा है यही वो ये

195
00:13:59,600 --> 00:14:02,960
बात कहां लिखी है कि इसमें आधा अधूरा है। बताओ।

196
00:14:02,960 --> 00:14:07,280
वो यह कह रहा है कि इसके अलावा वो यह कह रहा है यजुर्वेद

197
00:14:07,280 --> 00:14:11,920
क्या कह रहा है इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है। इसके अलावा

198
00:14:11,920 --> 00:14:16,080
यानी कि अगर यजुर्वेद ये चार वेदों को छोड़ दे तो इनके अलावा और

199
00:14:16,080 --> 00:14:19,440
कोई मार्ग नहीं है।

200
00:14:19,440 --> 00:14:23,440
वो ये कह रहा है वेद कहां से? पहले जड़ से जाना पड़ेगा। वेद कहां

201
00:14:23,440 --> 00:14:28,240
से आया? हां बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। अब जड़ पे आते हैं।

202
00:14:28,240 --> 00:14:33,200
अब जड़ पे आते हैं। इसको थोड़ा और क्लियर कर लेते हैं। तब इस प्रश्न पे आते हैं कि वेद कहां से आया?

203
00:14:33,200 --> 00:14:37,600
अब बात यह आती है कि एक मिनट एक मिनट। रामपाल

204
00:14:37,600 --> 00:14:43,120
के अनुसार जो क्या कहते हैं?

205
00:14:43,120 --> 00:14:47,120
रामपाल के अनुसार गीता में किसी और भगवान के

206
00:14:47,120 --> 00:14:52,080
पास जाने की बात कही गई है। है ना? हां।

207
00:14:52,080 --> 00:14:56,640
कही गई। अच्छा। यानी कि तत्वदर्शी संत प्रामाणिक

208
00:14:56,640 --> 00:15:00,880
आचार्य वही बन सकता है जो जो किसी और भगवान

209
00:15:00,880 --> 00:15:05,920
के पास जाने की बात की गई है उसके पास जाने की बात करता हो।

210
00:15:05,920 --> 00:15:09,920
वही तो बन सकता है। है ना? तो वेद ये कह रहे

211
00:15:09,920 --> 00:15:13,920
हैं ब्रह्म से ब्रह्म से किसी और भगवान के पास जाने की बात की

212
00:15:13,920 --> 00:15:18,080
गई की गई है। जबकि जबकि वेद ये कह रहे हैं कि

213
00:15:18,080 --> 00:15:22,240
ब्रह्मचारी यानी कि ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला ब्रह्म की तरफ जाने

214
00:15:22,240 --> 00:15:26,560
वाला वही आचार्य बनता है। वही प्रामाणिक आचार्य है।

215
00:15:26,560 --> 00:15:31,520
ये वेद कह रहे हैं। इस बात का विरोध है कि मानते हो उस बात को?

216
00:15:31,520 --> 00:15:35,840
विरोध नहीं है। ब्रह्मचार्य का पालन करने वाला पालन

217
00:15:35,840 --> 00:15:39,840
करने वाला। हां अच्छा ब्रह्मचारी पालन क्या है ये बताइए।

218
00:15:39,840 --> 00:15:44,000
अरे भाई ब्रह्म ब्रह्मचारी का पहले मैं वो निकाल रहा हूं शाब्दिक ब्रह्म

219
00:15:44,000 --> 00:15:48,240
के लिए आचरण करने वाला ब्रह्मचारी ब्रह्म के लिए आचरण

220
00:15:48,240 --> 00:15:52,400
करने वाला तो आप ये कह रहे हो कि ब्रह्म के लिए ब्रह्म के लिए आचरण

221
00:15:52,400 --> 00:15:57,040
नहीं करना ब्रह्म से किसी और के लिए आचरण करना यानी कबीर कबीरचारी होना चाहिए।

222
00:15:57,040 --> 00:16:01,040
कबीरचारी होना चाहिए। कबीर की तरफ जाने की बात करने वाला होना चाहिए। ठीक

223
00:16:01,040 --> 00:16:05,040
है? जबकि वेद ये कह रहे हैं कि ब्रह्म की बात करने वाला ब्रह्म के

224
00:16:05,040 --> 00:16:09,200
तरफ ले जाने वाला ही आचार्य बनता है। इसका इसको मानते

225
00:16:09,200 --> 00:16:12,240
हैं कि नहीं मानते हैं?

226
00:16:12,240 --> 00:16:16,320
इसको मानते हैं ना भाई मानते हैं। तो फिर

227
00:16:16,320 --> 00:16:20,320
इसका मतलब ब्रह्म के लिए ही आचरण करने वाला आचार्य है। और जो ब्रह्म से किसी और

228
00:16:20,320 --> 00:16:24,400
के पास जाने की बात करे वो आचार्य नहीं है। अच्छा तो ब्रह्म

229
00:16:24,400 --> 00:16:26,800
कौन है?

230
00:16:26,800 --> 00:16:30,800
अरे भैया तुम्हारा ब्रह्म अलग है ना? तुम्हारा ब्रह्म

231
00:16:30,800 --> 00:16:33,200
जो परमेश्वर तुम्हारा ब्रह्म

232
00:16:33,200 --> 00:16:37,360
परमेश्वर से अलग है ना तुम्हारा ब्रह्म परमेश्वर

233
00:16:37,360 --> 00:16:40,320
से अलग है ना

234
00:16:40,320 --> 00:16:43,360
भाई देखो

235
00:16:43,360 --> 00:16:47,920
ब्रह ब्रह्म ही परमात्मा है ब्रह्म ही परमात्मा

236
00:16:47,920 --> 00:16:52,000
है ब्रह्म ही परमात्मा है 21 ब्रह्मांड का

237
00:16:52,000 --> 00:16:56,240
परमात्मा ये ब्रह्म है अरे मेरे भाई आचार्य

238
00:16:56,240 --> 00:17:00,320
तो वो बनेगा ना जो 21 का हो चाहे 39 40 का हो, 40 का हो, 50

239
00:17:00,320 --> 00:17:04,880
का हो, जो ब्रह्म के लिए आचरण करेगा वो आचार्य बनेगा।

240
00:17:04,880 --> 00:17:09,280
ब्रह्म के लिए जो आचरण करेगा वो आचार्य बनेगा। वही प्रामाणिक

241
00:17:09,280 --> 00:17:13,440
आचार्य है वेद के हिसाब से। अच्छा चलिए ठीक है। वेद के हिसाब से

242
00:17:13,440 --> 00:17:18,160
ब्रह्म के आचरण करने वाले क्या है? थोड़ा दो टॉपिक में पहले

243
00:17:18,160 --> 00:17:22,320
हां मैं बता दे रहा हूं। ब्रह्म के लिए आचरण करने वाले का मतलब है

244
00:17:22,320 --> 00:17:26,560
जो ब्रह्म के लिए आपको भक्ति में लगा है। जो ब्रह्म के लिए आपके सदाचरण

245
00:17:26,560 --> 00:17:30,640
आपको दे। ब्रह्म के लिए जो भी कार्य करना है ब्रह्म के लिए करना है। यानी ब्रह्म

246
00:17:30,640 --> 00:17:34,720
की तरफ जाने वाला मार्ग जो प्रशस्त करे वह ब्रह्मचारी हुआ। उसी

247
00:17:34,720 --> 00:17:38,880
का एक होता है कि भैया अपने फायदे के लिए ना भोग करना है ना संभोग करना है तो उसमें

248
00:17:38,880 --> 00:17:42,960
वो भी आ जाता है कि स्त्री से दूर रहना है। क्योंकि जब सारे काम बिल्कुल ही

249
00:17:42,960 --> 00:17:46,960
सारे के सारे काम जब ब्रह्म के लिए हो जाते तो उसमें जो अपना भोग है वो भी

250
00:17:46,960 --> 00:17:48,560
नहीं रह जाता। व्यक्तिगत भोग

251
00:17:48,560 --> 00:17:52,800
तो इसलिए उसमें आ जाता है। मगर ब्रह्मचारी का मतलब केवल यही नहीं है कि स्त्री संबंध नहीं।

252
00:17:52,800 --> 00:17:57,120
ब्रह्मचारी का जो मूल अर्थ है वह है ब्रह्म ज्ञान स्वरूप

253
00:17:57,120 --> 00:18:01,200
भगवान सच्चिदानंद स्वरूप भगवान उनकी तरफ ले जाने का

254
00:18:01,200 --> 00:18:05,440
आचरण करने वाला ये हमारा हो गया आपके हिसाब से जो ब्रह्म है

255
00:18:05,440 --> 00:18:09,440
वो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर नहीं है वो अलग

256
00:18:09,440 --> 00:18:13,600
है तो वेद ये कह रहे हैं कि आचार्य तत्वदर्शी

257
00:18:13,600 --> 00:18:17,920
प्रामाणिक संत ये वो बनता है जो ब्रह्म के लिए आचरण करता है जबकि

258
00:18:17,920 --> 00:18:22,240
रामपाल ये कह रहे हैं कि नहीं ब्रह्म के लिए नहीं किसी दूसरे के लिए आचरण

259
00:18:22,240 --> 00:18:27,120
करो करो कोई अलग आचरण करो और वो आचरण है कबीर

260
00:18:27,120 --> 00:18:31,600
तो यह ब्रह्म से अलग किसी के लिए आचरण करने का प्रमाण

261
00:18:31,600 --> 00:18:36,960
वेद में कहां पर है

262
00:18:36,960 --> 00:18:40,960
मैं आपको बोला कि कोई भी छात्र हो गया एक सब्जेक्ट

263
00:18:40,960 --> 00:18:45,280
से पास होने वाला नहीं है। अरे भाई मैं एक सब्जेक्ट

264
00:18:45,280 --> 00:18:48,240
की बात नहीं

265
00:18:48,240 --> 00:18:52,320
मैं यह कह रहा हूं कि आप यह कहते हो ना अपने आप

266
00:18:52,320 --> 00:18:56,640
आप ये कहते हो कि जो है जो रामपाल

267
00:18:56,640 --> 00:19:01,200
जी की बात है एक भी वेद के वेद का विरोध नहीं है एक भी बात में

268
00:19:01,200 --> 00:19:05,200
ठीक तो एक भी बात में यदि विरोध नहीं है तो इस बात का क्या करें जब वेद

269
00:19:05,200 --> 00:19:09,280
ये कह रहे हैं कि इस इन वेदों के अलावा इस वेदों के बताए मार्ग के अलावा और

270
00:19:09,280 --> 00:19:13,440
कोई मार्ग नहीं है मुक्ति का पहली बात दूसरी बात वेद का क्या करें? जब वेद

271
00:19:13,440 --> 00:19:17,600
ये कह रहे हैं कि ब्रह्म के लिए आचरण करो। ब्रह्म के लिए आचरण करने

272
00:19:17,600 --> 00:19:21,920
वाला ही आचार्य बनता है। 11 पांच 16 अथर्ववेद

273
00:19:21,920 --> 00:19:26,000
इसका क्या करें? चलिए ठीक। अब मैं जवाब

274
00:19:26,000 --> 00:19:30,240
दे रहा हूं सुनिएगा। ठीक हां प्रश्न समझ गए ना आप?

275
00:19:30,240 --> 00:19:34,400
प्रश्न प्रश्न समझ गए ना आप? प्रश्न

276
00:19:34,400 --> 00:19:38,560
समझ गए ना आप? वेदों के हिसाब से आचार्य वो है। संत

277
00:19:38,560 --> 00:19:42,640
वो है। प्रामाणिक संत वो है। तत्वदर्शी संत वो है जो ब्रह्म

278
00:19:42,640 --> 00:19:46,800
के लिए आचरण करे करवाए। आपके रामपाल कह रहे हैं

279
00:19:46,800 --> 00:19:50,880
कि भैया ब्रह्म के लिए आचरण नहीं करना है। किसी और के लिए आचरण करना

280
00:19:50,880 --> 00:19:52,080
है। तो फिर वेदों के

281
00:19:52,080 --> 00:19:56,320
हिसाब से जो रामपाल है वो संत प्रामाणिक आचार्य सिद्ध

282
00:19:56,320 --> 00:20:00,240
नहीं होते। अब बोलिए।

283
00:20:00,240 --> 00:20:04,560
यह जो ब्रह ब्रह आप बोल रहे हैं तो पहले सबसे पहले जानना पड़ेगा ब्रह

284
00:20:04,560 --> 00:20:08,640
है कौन आपको पता है कि नहीं पता है ये तो मुझे पता नहीं है लेकिन हमको

285
00:20:08,640 --> 00:20:12,720
पता है वो ब्रह है क्या अरे भाई वो कुछ भी

286
00:20:12,720 --> 00:20:17,040
हो तुम्हारे हिसाब से वो भगवान नहीं है ना सबसे बड़ा

287
00:20:17,040 --> 00:20:21,120
सबसे बड़ा भगवान नहीं है ना सबसे बड़ा

288
00:20:21,120 --> 00:20:25,200
उसके बाहर कोई नहीं है उसके ऊपर

289
00:20:25,200 --> 00:20:29,600
कोई नहीं है मैंने कहा उसके ऊपर पर कोई नहीं है।

290
00:20:29,600 --> 00:20:33,600
मैंने कहा उसके ऊपर कोई नहीं है। तुम्हारे हिसाब से है ना ब्रह्म जो है

291
00:20:33,600 --> 00:20:37,920
परमेश्वर नहीं है। पूर्ण परमेश्वर नहीं है वो ब्रह्म तुम्हारे हिसाब से।

292
00:20:37,920 --> 00:20:42,000
तो वेद ये नहीं कह रहे हैं। वेद ये कह रहे हैं कि ब्रह्म ही है जो कुछ है

293
00:20:42,000 --> 00:20:46,400
अंतिम। वेद ये कह रहे हैं और वेद ये कह रहे हैं कि जो

294
00:20:46,400 --> 00:20:50,480
क्या कहते हैं? ब्रह्म के लिए आचरण जो करेगा वही तत्वदर्शी

295
00:20:50,480 --> 00:20:54,640
है वही संत है वही प्रामाणिक आचार्य है तो वेद वेद में प्रमाण

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है कि ब्रह्मचारी के लिए जो आचरण करता करवाता है वो आचार्य है

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तो फिर आपके जो तत्वदर्शी है वो ये कह रहे हैं कि ब्रह्म से अलग कोई और

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है जिसके लिए आचरण करना है वो आचरण बताने वाला आचार्य तो ये जो

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है वेद की सीमा का उल्लंघन हो गया। वेद मना कर रहे हैं।

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जो ब्रह्म के लिए आचरण करेगा वो आचार्य है। और जो रामपाल है वो

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कह रहे हैं जो ब्रह्म के लिए आचरण करे वो आचार्य नहीं है। जो ब्रह्म से दूसरे किसी उनके

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हिसाब से जो पूर्ण परमेश्वर इत्यादि उसके लिए आचरण करेगा वो आचार्य है।

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तो फिर वेद को माने या रामपाल को माने हम

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ये दोनों को मानना पड़ेगा। ये सब सामने आया

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और मेरे को हां बोलिए बोलिए सुन बोलिए

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ये [गला साफ़ करने की आवाज़] जो ब्रह है ये बोल रहा है कि मेरा भक्ति करो मेरा साधना करो

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ठीक ये करो ठीक ये जो

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ब्रह है पहले जानना पड़ेगा ये ब्रह है कौन ये क्या है ब्रह्म

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अरे यार ठीक घूम फिर के बात तुम वहीं पे ला रहे हो ब्रह्म कोई

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भी हो मैं ये कह रहा हूं आपके पास प्रमाण है ब्रह्म से इतर किसी के लिए आचरण

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करने वाला आचार्य बनता है तो आप मुझे बता दीजिए ब्रह्म

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से इतर किसी के लिए हैं। आचार्य

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हो जाने से सबका मुक्ति हो जाएगा। धरती पे आचार्य कितना है? भारतवर्ष

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आचार्य कौन होता है? शास्त्रों के हिसाब से बताओ आचार्य की परिभाषा

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क्या है? आचार्य कौन? टीका लगाने वाला हो

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जाता है क्या? अरे यार तुमसे

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जो तुमसे वो जो पूछ रहे हैं वो बताओ। फालतू की बातें [हंसी] करो भगा दूंगा मैं।
