1
00:00:09,920 --> 00:00:14,800
द निग्रह निकासिका ये सीरीज हम लेकर आए हैं।

2
00:00:14,800 --> 00:00:18,880
जो भागवतानंद है उसने अपने आप को प्रामाणिक सिद्ध करने के लिए बहुत

3
00:00:18,880 --> 00:00:22,880
से दावे किए और बहुत से वादे भी किए कि हम यह

4
00:00:22,880 --> 00:00:26,880
देंगे वचन आपको दिए कि हमारी निग्रह प्रवेशिका

5
00:00:26,880 --> 00:00:30,960
आएगी आएगी आएगी। की तो वो तो नहीं आई मगर निग्रह निकासिका जरूर हमें प्राप्त हो गई

6
00:00:30,960 --> 00:00:35,040
है कि किस प्रकार से किन-किन दृष्टिकोण से तथ्य

7
00:00:35,040 --> 00:00:39,920
तर्क प्रमाण से यह सिद्ध होता है कि ये जो भागवतानंद

8
00:00:39,920 --> 00:00:44,000
है जो स्वयं को एक निग्रह संप्रदाय से जोड़ता है

9
00:00:44,000 --> 00:00:48,080
वो लुप्त हो गया था। यह उसके गुप्त आचार्य हैं। तो किस

10
00:00:48,080 --> 00:00:52,240
प्रकार से इसकी अप्रामाणिकता सिद्ध होती है? ये सारी चीजें इस सीरीज में आपको

11
00:00:52,240 --> 00:00:57,440
देखने को मिलेंगी। निकासिका के आपको

12
00:00:57,440 --> 00:01:03,360
छह चैप्टर मिलेंगे। छह छह चैप्टर्स में है यह सीरीज़।

13
00:01:03,360 --> 00:01:09,360
पहला है भूमिका।

14
00:01:10,880 --> 00:01:16,880
दूसरा है निग्रह प्रवेशिका।

15
00:01:19,120 --> 00:01:24,320
ये जितने भी इसने दावे किए हैं ना

16
00:01:24,320 --> 00:01:28,320
अ भागवतानंद ने जितना भी इसने आज तक बोला

17
00:01:28,320 --> 00:01:32,720
है स्वयं को प्रामाणिक सिद्ध करने के लिए उन सबका कलेक्शन है

18
00:01:32,720 --> 00:01:37,040
निग्रह प्रवेशिका में तो पहले चैप्टर का नाम है भूमिका

19
00:01:37,040 --> 00:01:41,200
दूसरे चैप्टर का नाम है निग्रह प्रवेशिका तीसरे चैप्टर का नाम

20
00:01:41,200 --> 00:01:45,520
है निग्रह निकासिका जो मुख्य जिसमें खंडन है

21
00:01:45,520 --> 00:01:50,800
जिसमें इसकी अप्रामाणिकता सिद्ध होगी जिसमें जिसके भी दो भाग हैं उसमें

22
00:01:50,800 --> 00:01:55,120
एक हिस्सा यह है कि किस प्रकार जो निग्रह

23
00:01:55,120 --> 00:01:59,360
संप्रदाय है उसके अस्तित्व की अस्पष्टता है शास्त्रों

24
00:01:59,360 --> 00:02:03,840
में पहली बात तो वो सिद्ध हो कि वो संप्रदाय है भी कि नहीं है

25
00:02:03,840 --> 00:02:08,320
और दूसरा यह कि अगर वो है तो उसके साथ इसका संबंध

26
00:02:08,320 --> 00:02:12,320
कितना प्रामाणिक है इन दो विषयों पर जो ये तीसरा चैप्टर

27
00:02:12,320 --> 00:02:12,880
आएगा

28
00:02:12,880 --> 00:02:17,360
जिसका नाम होगा निग्रह प्रवेश निग्रह निकाशिका भाग एक

29
00:02:17,360 --> 00:02:21,600
तो उसमें इन दो बिंदुओं पर बातचीत होगी। फिर चौथा जो चैप्टर

30
00:02:21,600 --> 00:02:26,880
आएगा निग्रह निकासिका का उसमें आचरण

31
00:02:26,880 --> 00:02:31,280
क्योंकि इसका एक बहुत बड़ा फैक्टर है जो इसने कहा है कि भाई मेरे आचरण

32
00:02:31,280 --> 00:02:35,280
से पहचान होगी कि मैं आचार्य हूं कि नहीं और निग्रह संप्रदाय के

33
00:02:35,280 --> 00:02:39,280
अनुसार जो उसके आचार्य के आचरण होने चाहिए वो इसमें है

34
00:02:39,280 --> 00:02:43,360
कि नहीं। तो इन सारे इस आलोक में हम लोग देखेंगे

35
00:02:43,360 --> 00:02:47,680
कि ये जो कितना प्रामाणिक है इसकी प्रामाणिकता पर उसमें

36
00:02:47,680 --> 00:02:52,160
बात होगी। ये चौथा चैप्टर है। पांचवें चैप्टर में

37
00:02:52,160 --> 00:02:56,400
जो इसको एक प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है विनोद वाला विषय है जो उस पर हमने

38
00:02:56,400 --> 00:03:00,640
बातें की है। यद्यपि ये जो तीसरा और चौथा चैप्टर

39
00:03:00,640 --> 00:03:04,880
होगा इसी में सारी कहानी समाप्त हो जाएगी। फिर भी हमने कुछ टॉपअप

40
00:03:04,880 --> 00:03:08,960
के लिए एक जो इसने विनोद एक चुटकुले के रूप में एक प्रमाण

41
00:03:08,960 --> 00:03:13,120
पत्र जारी किया है उस पर बात होगी पांचवें

42
00:03:13,120 --> 00:03:17,440
चैप्टर में और छठवें और लास्ट चैप्टर में एक बहुत बड़ा सरप्राइज है आप लोगों के लिए

43
00:03:17,440 --> 00:03:22,320
उस पर बात होगी। तो ये पूरे छह एपिसोड्स में ये

44
00:03:22,320 --> 00:03:26,640
निग्रह निकासिका आपको प्राप्त होगी। यद्यपि हमने इसमें

45
00:03:26,640 --> 00:03:28,080
निग्रह निकासिका में

46
00:03:28,080 --> 00:03:32,480
यह भागवत की गुरु की जो वास्तविकता है उसकी अप्रामाणिकता

47
00:03:32,480 --> 00:03:37,120
है या उसकी जो क्लेम्स हैं उसको प्रामाणिक सिद्ध करने के लिए

48
00:03:37,120 --> 00:03:41,200
तो उनके खंडन में अप्रामाणिकता

49
00:03:41,200 --> 00:03:45,760
को सिद्ध करने के लिए हमने तर्क और प्रमाण

50
00:03:45,760 --> 00:03:50,000
दोनों ही चीजों पर बात की है। परंतु कहीं पर

51
00:03:50,000 --> 00:03:56,000
कहीं-कहीं पर

52
00:03:57,200 --> 00:03:59,360
न्यायालय

53
00:03:59,360 --> 00:04:05,360
हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जो भी आप कहें

54
00:04:05,840 --> 00:04:11,230
उसको ध्यान में रखकर के भी बात की गई है। कारण क्या है?

55
00:04:11,230 --> 00:04:14,160
[संगीत]

56
00:04:14,160 --> 00:04:18,800
कारण यह है कि निग्रह निकासिका को लिखने के लिए

57
00:04:18,800 --> 00:04:22,960
जो हमें प्रेरित करने वाला व्यक्ति है या जो चीज

58
00:04:22,960 --> 00:04:28,960
है वह भी भागवतानंद ही है।

59
00:04:29,320 --> 00:04:33,040
[संगीत]

60
00:04:33,040 --> 00:04:37,440
इस व्यक्ति ने अ

61
00:04:37,440 --> 00:04:41,440
जब औरों के लिए अत्यंत अवमानना पूर्ण वक्तव्य निर्गत

62
00:04:41,440 --> 00:04:45,440
किए अपने चैनल से तब इसे कोई आपत्ति नहीं थी।

63
00:04:45,440 --> 00:04:49,440
परंतु इसके खुद के वीडियोस में कई बार इसने जब

64
00:04:49,440 --> 00:04:53,520
यह कहा है कि मेरे बारे में आपको कोई भी शंका हो तो आप सार्वजनिक रूप से

65
00:04:53,520 --> 00:04:57,520
उसको पूछिए। ऐसे निर्देश देने के बाद भी जब उन

66
00:04:57,520 --> 00:05:01,520
निर्देशों के अनुसार हमने कुछ प्रश्न अपने

67
00:05:01,520 --> 00:05:05,680
वीडियोस के माध्यम से इससे किए थे कि भाई ऐसा सुनने में आया कि

68
00:05:05,680 --> 00:05:10,080
जोधपुर का ये है या ये है तो या जोधपुर

69
00:05:10,080 --> 00:05:14,480
वाले चिकित्सक के साथ हमारा जो इंटरव्यू था इन सब चीजों के आधार पर

70
00:05:14,480 --> 00:05:18,480
खुद ही क्लेम कर रहा है कि मुझसे सार्वजनिक पूछो और जब पूछ रहे हैं तो

71
00:05:18,480 --> 00:05:20,880
इस व्यक्ति ने हमको 100 करोड़ का नोटिस

72
00:05:20,880 --> 00:05:24,880
भेजा 100 करोड़ का तो 100 करोड़ का जब इसने

73
00:05:24,880 --> 00:05:29,120
नोटिस भेजा है उसमें इसने सबसे पहले स्वयं को कहा है कि मुझे

74
00:05:29,120 --> 00:05:34,240
साक्त संप्रदाय द्वारा उपाधि प्राप्त हुई है निग्रहचार्य की

75
00:05:34,240 --> 00:05:38,320
तो उस नोटिस में लिखी वो जो पंक्ति है

76
00:05:38,320 --> 00:05:42,320
कि इस साक्त संप्रदाय से निग्रहचार्य की उपाधि हमें प्राप्त हुई

77
00:05:42,320 --> 00:05:46,800
है। क्लेम है। उस क्लेम को खंडित

78
00:05:46,800 --> 00:05:51,120
करने के लिए उसके रेप्लिकेशन में ही हमें निग्रह निकासिका लिखने

79
00:05:51,120 --> 00:05:55,360
की प्रेरणा मिली और उसमें भी एक चैप्टर बनाया गया जिसमें

80
00:05:55,360 --> 00:05:59,440
कि जिसको निग्रह प्रवेशिका हम कह रहे हैं। उस चैप्टर में

81
00:05:59,440 --> 00:06:03,600
इसके द्वारा दिए गए सारे जितने भी पूर्व पक्ष हैं उनको संकलन करने का प्रयास

82
00:06:03,600 --> 00:06:07,680
किया गया। तो अब एक तरीके से जो

83
00:06:07,680 --> 00:06:11,680
कोर्ट के लिए जो नोटिस आया है कोर्ट में बुलाने वाला यद्यपि वो मामला अभी कोर्ट

84
00:06:11,680 --> 00:06:15,680
में गया भी नहीं है मगर वो जो नोटिस आया है उसके आलोक

85
00:06:15,680 --> 00:06:19,840
में यह उत्तर लिखा गया तो इसलिए कहीं-कहीं पर इस

86
00:06:19,840 --> 00:06:24,160
पूरे निग्रह निकासिका में कहीं-कहीं पर आपको कोई कोई ऐसा तथ्य

87
00:06:24,160 --> 00:06:28,240
या तर्क भी मिलेगा जो कि अह न्यायालय को दिया जाने वाला

88
00:06:28,240 --> 00:06:32,400
उत्तर होगा। है ना? यद्यपि जब इसके नोटिस का हमने जो उत्तर

89
00:06:32,400 --> 00:06:36,000
दिया है उसमें जो निग्रह निकासिका जो लिख ली गई थी खूब सारी

90
00:06:36,000 --> 00:06:41,280
बड़ी सी उसको हटा के इसको केवल जो कोर्ट के दृष्टिकोण से जो

91
00:06:41,280 --> 00:06:45,600
उत्तर दिया गया है केवल वही भेजा गया मगर यह जो निग्रह

92
00:06:45,600 --> 00:06:49,760
निकासिका लिखी गई थी इसके निग्रचार्य ना होने के समर्थन

93
00:06:49,760 --> 00:06:53,760
में या इसकी अप्रामाणिकता को सिद्ध करने के लिए यह लिख ली

94
00:06:53,760 --> 00:06:58,000
गई थी और क्योंकि इस इसको हमें आवश्यक लगा कि इसको जनता

95
00:06:58,000 --> 00:07:02,000
के समक्ष जनसामान्य के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। तो हम इस माध्यम

96
00:07:02,000 --> 00:07:06,000
से प्रस्तुत कर रहे हैं। कोर्ट के केवल कोर्ट के दृष्टिकोण से जो उत्तर

97
00:07:06,000 --> 00:07:10,240
दिया गया है वह कभी हमें समय मिलेगा और आप लोग जन

98
00:07:10,240 --> 00:07:14,320
सामान्य यदि आग्रह करेंगे तो हम उसको भी प्रस्तुत कर देंगे। सार्वजनिक कर देंगे कि कोर्ट

99
00:07:14,320 --> 00:07:18,640
के दृष्टिकोण से हमने क्या उत्तर दिया था। परंतु कोर्ट के उत्तर में निग्रह

100
00:07:18,640 --> 00:07:22,800
निकासिका को लिखा गया है और

101
00:07:22,800 --> 00:07:27,280
इसलिए कहीं-कहीं पर ऐसा आपको देखने को मिल जाएगा कि कोई कोई बात न्यायालय

102
00:07:27,280 --> 00:07:31,360
को सामने रखकर कही जा रही है और हां एक बात

103
00:07:31,360 --> 00:07:35,840
और कि ये जो निग्रह निग्रहचार्य

104
00:07:35,840 --> 00:07:39,840
की जो उपाधि है उपाधि शाक्य संप्रदाय से प्राप्त होने की इसने बात कही

105
00:07:39,840 --> 00:07:44,000
है शुरू में ही उस नोटिस के शुरू में ही तो ये जो उपाधि

106
00:07:44,000 --> 00:07:48,000
है इसमें क्योंकि क्योंकि मानहानि का नोटिस है तो मान

107
00:07:48,000 --> 00:07:51,040
हानि तो सबसे पहले ये देखा जाता है कि भाई

108
00:07:51,040 --> 00:07:55,200
जो व्यक्ति ये क्लेम कर रहा है कि मेरा मान है जिसकी हानि हुई है तो

109
00:07:55,200 --> 00:07:59,600
उस मान के लिए ही इसने अपने आप को निग्रहचार प्रस्तुत किया था तो हमने उस मान

110
00:07:59,600 --> 00:08:03,600
के मान के विरोध में ही कि इसका कोई मान्य नहीं है। यह एक नंबर का

111
00:08:03,600 --> 00:08:07,760
धूत और निर्लज्ज व्यक्ति है। इसी अह बात को

112
00:08:07,760 --> 00:08:11,760
सिद्ध करने के लिए ही निग्रह निकासिका हमने लिखी कि ये स्वयं का जो मान बता

113
00:08:11,760 --> 00:08:15,920
रहा है ना कि मैं निग्रहचार्य हूं। यह निग्रहचार्य है ही नहीं। किसी भी प्रकार

114
00:08:15,920 --> 00:08:20,240
से निग्रहचार्य प्रस्तुत नहीं होता है। यह केवल और केवल एक मनमुखी लुप्त

115
00:08:20,240 --> 00:08:24,240
संप्रदाय का गुप्त आचार्य है जिसकी कोई पुष्टि कहीं से भी नहीं

116
00:08:24,240 --> 00:08:28,320
हो सकती। किसी भी प्रकार से नहीं प्राप्त हो सकती। तो यही सारा विवरण ये जो कोर्ट के

117
00:08:28,320 --> 00:08:32,400
आलोक में जो ये हमने उत्तर लिखा मानहानि के नोटिस

118
00:08:32,400 --> 00:08:36,400
के रेप्लिकेशन में वही कोर्ट के उत्तर के रूप में ये निग्रह

119
00:08:36,400 --> 00:08:41,490
निकासिका बन गया जो अब आपके सामने प्रस्तुत होने वाला है।

120
00:08:41,490 --> 00:08:44,050
[संगीत]

121
00:08:44,050 --> 00:08:47,920
[प्रशंसा]

122
00:08:47,920 --> 00:08:51,680
[संगीत] यद्यपि

123
00:08:51,680 --> 00:08:56,400
ये भागवतानंद में

124
00:08:56,400 --> 00:09:00,320
और रामपाल में

125
00:09:00,320 --> 00:09:06,320
कोई खास अंतर नहीं है।

126
00:09:06,960 --> 00:09:12,960
पर फिर भी कंपैरेटिवली टू रामपाल

127
00:09:15,360 --> 00:09:19,680
भागवतानंद की जो अप्रामाणिकता है

128
00:09:19,680 --> 00:09:24,320
उसको ढूंढने में थोड़ी कठिनाई होती है। अब अंतर क्यों नहीं है?

129
00:09:24,320 --> 00:09:28,480
अंतर इसलिए नहीं है कि ये दोनों ही इतने बड़े दोगले हैं

130
00:09:28,480 --> 00:09:32,880
कि इनकी हर दूसरी बात इनकी पिछली बात से कटती है। पर

131
00:09:32,880 --> 00:09:37,120
इजी क्यों है? भागवतानंद का कठिन क्यों है? और रामपाल का इजी

132
00:09:37,120 --> 00:09:41,120
क्यों है? इसलिए नहीं कि भागवतानंद को संस्कृत आती है और रामपाल

133
00:09:41,120 --> 00:09:45,200
जेलधाम निवासी उसको संस्कृत नहीं आती बल्कि इसलिए कि

134
00:09:45,200 --> 00:09:49,840
रामपाल के नाम से बहुत सारी पुस्तकें अवेलेबल है। सुलभ है।

135
00:09:49,840 --> 00:09:53,920
बहुत सारी उसने अपने आप को प्रामाणिक या अपनी जो क्लेम्स हैं उनके लिए बहुत सारी

136
00:09:53,920 --> 00:09:57,920
उसकी पुस्तकें हैं जिनको आराम से आप कहीं से प्राप्त कर सकते हैं और उसका

137
00:09:57,920 --> 00:10:02,160
अध्ययन करके उसकी चीजें तोड़ निकाल सकते हैं। वो जो उसकी अप्रामाणिकता

138
00:10:02,160 --> 00:10:03,360
है उसको आपको साफ

139
00:10:03,360 --> 00:10:07,920
दिख जाएगी। पर इसके उलट जो भागवतानंद

140
00:10:07,920 --> 00:10:11,920
है इसके जो क्लेम्स है वही छुपे हुए हैं। इसकी चीजें

141
00:10:11,920 --> 00:10:16,000
छुपी हुई हैं। तो ये औरों पर क्लेम

142
00:10:16,000 --> 00:10:20,000
करता है कि इसका ये ये करता है। इसका सचिव ये करता है। उसका वो फलाना ये करता है।

143
00:10:20,000 --> 00:10:24,160
ये उसके साथ खड़ा होता है। मगर क्या ये अपनी जीवनी को अपने लोगों को अपने

144
00:10:24,160 --> 00:10:28,240
से जुड़े हुए लोगों को क्या सार्वजनिक करता है? ये किससे मिल रहा है? किससे नहीं

145
00:10:28,240 --> 00:10:32,320
मिल रहा? इससे जुड़ा हुआ व्यक्ति किससे मिल रहा है? किससे नहीं मिल रहा है? उसी प्रकार से यह

146
00:10:32,320 --> 00:10:37,040
नहीं करता है और दूसरों पर क्लेम करता रहता है। अगर यह करेगा

147
00:10:37,040 --> 00:10:41,600
तब इसको यह पता लगेगा कि भाई आज के लोकतांत्रिक वातावरण

148
00:10:41,600 --> 00:10:45,840
में धर्म की स्थापना के लिए युद्ध भूमि

149
00:10:45,840 --> 00:10:49,920
में धरातल पर उतर कर कार्य किस प्रकार से करना पड़ता है।

150
00:10:49,920 --> 00:10:53,920
खैर वो एक अलग विषय है। मगर इसी प्रकार से जिस तरह से इसने अपनी जीवनी को

151
00:10:53,920 --> 00:10:58,080
छुपा रखा है। उसी तरीके से इसने अपने क्लेम्स को भी बहुत सुलभ नहीं बनाया है। इसने

152
00:10:58,080 --> 00:11:02,080
जितने भी क्लेम्स किए जिसमें कहता है कि हमने खंडन किया, यह किया या अपने आप को प्रामाणिक

153
00:11:02,080 --> 00:11:06,240
सिद्ध किया है। वो इसने सुलभ किए ही नहीं है। निग्रह प्रवेशिका के लिए तो स्वयं ही

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00:11:06,240 --> 00:11:10,240
आज तक कहता है कि अभी तक नहीं आई है। तो जब इसके पूर्व पक्ष ही हमें

155
00:11:10,240 --> 00:11:14,400
प्राप्त नहीं होंगे, तो हम उसका खंडन किस प्रकार से लिखेंगे?

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00:11:14,400 --> 00:11:18,400
तो इसलिए इसका खंडन लिखने के लिए पहले इसके पूर्व

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00:11:18,400 --> 00:11:23,040
पक्ष को ढूंढना कठिन था। इस मामले में रामपाल के कंपैरेटिवली

158
00:11:23,040 --> 00:11:27,040
भागवतानंद का जो की जो अप्रामाणिकता है उसको सिद्ध करने में

159
00:11:27,040 --> 00:11:31,200
हमें कठिनाई हुई। परंतु भगवत कृपा है और काफी हमें समय

160
00:11:31,200 --> 00:11:35,360
भी मिल गया इस बीच तो हम थोड़ा-थोड़ा थोड़ा-थोड़ा करते रहे। शोध शोध जो है और हमें

161
00:11:35,360 --> 00:11:39,680
वो इनकी जो निग्रह प्रवेशिका थी तथाकथित वो प्राप्त हो गई इसके क्लेम्स

162
00:11:39,680 --> 00:11:44,000
के संकलन के रूप में। है ना? तो इसलिए ये

163
00:11:44,000 --> 00:11:48,400
जो बात है कि रामपाल के कंपैरिजन में भागवतानंद को काउंटर

164
00:11:48,400 --> 00:11:52,560
करना कठिन क्यों पड़ा? क्योंकि इसने अपनी चीजों को छिपा के रखा है। कई

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00:11:52,560 --> 00:11:56,560
वीडियोस है इसके जिसमें स्वयं ही कह रहा है कि भाई वो मेरे

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00:11:56,560 --> 00:12:00,640
गुरु ने मना किया बताने को। लो अब इसमें ऐसे में जब

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00:12:00,640 --> 00:12:04,800
गुरु ने मना किया ये कहने के बाद हम इसका ढूंढेंगे कि इसका वक्तव्य जो इसने

168
00:12:04,800 --> 00:12:08,960
निर्गत किया है। उसका कैसे काउंटर करें? तो इसमें इसमें क्या काउंटर करें।

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00:12:08,960 --> 00:12:13,040
गुरु ने मना किया है तो ऐसे तो इसके द्वारा पूछे जाने वाले सभी सवालों

170
00:12:13,040 --> 00:12:17,280
का उत्तर हो सकता है। गुरु गुरुदेव ने मना किया है। मगर तब ये करेगा अरे

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00:12:17,280 --> 00:12:21,280
अस्पष्ट अस्पष्टता के कारण बहुत बड़ा विप्लव हो रहा है। मगर निग्रह

172
00:12:21,280 --> 00:12:25,360
संप्रदाय के जो गुरु है वो कह रहे हैं ये ये मत बताना उससे

173
00:12:25,360 --> 00:12:29,240
कोई विप्लव नहीं होगा।

174
00:12:29,240 --> 00:12:35,240
[संगीत]

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00:12:37,360 --> 00:12:43,360
तुम्ही

176
00:12:49,160 --> 00:12:55,160
[संगीत]

177
00:13:03,920 --> 00:13:07,920
ये जो सीरीज है निग्रह निकासिका ये भागवतानंद के

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00:13:07,920 --> 00:13:12,080
द्वारा किए जाने वाले जो कुतर्क है या क्लेम्स हैं जो

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00:13:12,080 --> 00:13:16,480
जिनमें कुछ शास्त्रों की आवश्यकता हो सकती है। ज्यादातर उसके जो क्लेम्स होते हैं वो

180
00:13:16,480 --> 00:13:20,960
कुतर्क से ही केवल उसमें शास्त्र की आवश्यकता नहीं होती। भगत जिन क्लेम्स

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00:13:20,960 --> 00:13:25,040
में शास्त्र आवश्यक हैं यह उनमें से कुछ एक

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00:13:25,040 --> 00:13:29,520
विशेष सीरीज है निग्रह निकासिका और संभवत

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00:13:29,520 --> 00:13:33,680
ये हमारा आखिरी अंतिम रूप से होगा जो शास्त्रीय

184
00:13:33,680 --> 00:13:39,280
रूप से हम उसको उत्तर कुछ दे रहे हैं। इसके अलावा दो विषय और हैं। बुद्ध

185
00:13:39,280 --> 00:13:43,360
और सबरी वाला विषय जो है भगवान बुद्ध का अवतार

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00:13:43,360 --> 00:13:44,800
के विषय में जो इसने

187
00:13:44,800 --> 00:13:48,960
वो प्रलाप किया है और सबरी का विषय ये दो विषय

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00:13:48,960 --> 00:13:52,960
और रह जाएंगे तो इस पर भी हम इसका अवश्य उत्तर

189
00:13:52,960 --> 00:13:57,120
देंगे। हां मगर इसके बाद बहुत आवश्यक ना होने

190
00:13:57,120 --> 00:14:01,120
पर हम इसके रिप्लाई नहीं देंगे क्योंकि शंकराचार्य का विरोध

191
00:14:01,120 --> 00:14:05,200
करने वाला यह एक तुच्छ व्यक्ति है बिल्कुल तुच्छ

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00:14:05,200 --> 00:14:09,280
इसका इसका उत्तर देना एक बात आती है ना कि मठ से कोई

193
00:14:09,280 --> 00:14:13,600
क्यों नहीं बोल रहा है इसका उत्तर क्यों नहीं दिया जा रहा है ये क्या बोल रहा है क्यों नहीं इसके

194
00:14:13,600 --> 00:14:17,840
भाई ये है कौन इसका अस्तित्व क्या है यहां तो इस्लाम

195
00:14:17,840 --> 00:14:21,840
से लेकर के क्रिश्चियनिटी तक और जो अपनी भीमा आर्मी

196
00:14:21,840 --> 00:14:26,240
है ये सब कोई इनके पीछे पड़ा हुआ है। शंकराचार्य

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00:14:26,240 --> 00:14:30,640
और उनके सार्वभौम सिद्धांतों के पीछे पड़ा हुआ है। आर्य समाज

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00:14:30,640 --> 00:14:34,960
इस ना जाने कितने लोग हैं जो शंकराचार्य अपनी किताब को शुरू करते ही

199
00:14:34,960 --> 00:14:39,040
उस किताब में सबसे पहले शंकराचार्य का विरोध करते हैं। तो

200
00:14:39,040 --> 00:14:43,200
इसका वैसा अस्तित्व है ही नहीं जिसको बहुत ज्यादा समय दिया जाए।

201
00:14:43,200 --> 00:14:47,280
इस कारण से जो हमारे आचार्य गण है वो भी बहुत ज्यादा समय

202
00:14:47,280 --> 00:14:51,440
अपना नहीं देते और हम भी इसके रेप्लिकेशन देने में बहुत ज्यादा समय नष्ट

203
00:14:51,440 --> 00:14:55,760
करना उचित नहीं समझते। तो यह कुछ अंतिम विषय होंगे हमारे

204
00:14:55,760 --> 00:14:59,920
जिस पर हम शास्त्रीय रूप से इसका उत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं।

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00:14:59,920 --> 00:15:04,160
आगे बहुत ज्यादा आवश्यक ना होने पर जब तक नहीं होगा आवश्यक

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00:15:04,160 --> 00:15:08,160
बहुत ज्यादा तब तक इसका शास्त्रीय या इस तरीके से विधिवत

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00:15:08,160 --> 00:15:12,160
रूप से इसका खंडन प्रस्तुत नहीं करेंगे। और हां इसने

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00:15:12,160 --> 00:15:16,240
एक बात कही थी रेलवे स्टेशन पर बैठकर क्या कहा था

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00:15:16,240 --> 00:15:19,600
इसने

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कि इसने कहा था कि जब मैंने कहा था ना खंडन करने का प्रयास किया

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00:15:23,600 --> 00:15:27,600
आपने मैं आप आप बोलता था तब इससे इसको वो भाषा समझ में नहीं आई

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00:15:27,600 --> 00:15:31,600
थी तो यही भाषा सही जो तुमने चुनी है अपने लिए खैर तो

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ये बोल मैंने उसमें ये बोला था कि भाई आपने करपात्री जी के खंडन का प्रयास

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00:15:35,600 --> 00:15:39,760
किया है तो एक शिष्य के जब एक शिष्य अपने

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00:15:39,760 --> 00:15:43,840
गुरु गुरु के लिए किसी के वक्तव्य के बारे में बात करेगा तो वो यही कहेगा कि भाई तुमने प्रयास

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किया तुमने खंडन नहीं कर दिया है ठीक है तो ये बड़े तिरस्कार

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पूर्वक बोला था प्रयास नहीं किया है खंडन

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00:15:52,320 --> 00:15:57,520
किया है ऐसे बोला था तो सुन भागवतानंद

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00:15:57,520 --> 00:16:02,240
ये जो निग्रह निकासिका है ना इसमें तेरे को अप्रामाणिक

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00:16:02,240 --> 00:16:06,800
सिद्ध करने का तेरा खंडन करने का प्रयास नहीं किया है

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00:16:06,800 --> 00:16:10,880
खंडन किया है ध्यान रखना खंडन

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00:16:10,880 --> 00:16:14,880
ठीक है। जय श्री राम। [संगीत]
