1
00:00:05,440 --> 00:00:10,160
कुतर्क और दोगलेपन की खदान गुप्ताचार्य

2
00:00:10,160 --> 00:00:14,560
महान। अभी-अभी इस धूर्त का एक वीडियो आया है सामने

3
00:00:14,560 --> 00:00:18,560
जिसमें कि यह प्रलाप कर रहा है कि हाई कोर्ट

4
00:00:18,560 --> 00:00:22,640
के द्वारा एक आदेश निकला है जिसमें कि इसके चैनल

5
00:00:22,640 --> 00:00:27,120
को बंद करवाने के निर्देश दिए गए हैं। उसमें जांच चल रही है। तो

6
00:00:27,120 --> 00:00:31,440
संभवत तुझे सूचना जो मिली है वह आधी अधूरी मिली है। सूचना

7
00:00:31,440 --> 00:00:35,760
यह है। मैं तुझे क्लियर कर देता हूं। सूचना यह मिली है भागवत

8
00:00:35,760 --> 00:00:40,000
आनंद कि हाई कोर्ट में एक अधिवक्ता के द्वारा

9
00:00:40,000 --> 00:00:44,320
एक याचिका लगाई गई है जिसमें कि यह मांग

10
00:00:44,320 --> 00:00:48,880
की गई है कि न्यायालय के जो न्यायाधीश हैं उनके लिए बहुत सारी अवमानना

11
00:00:48,880 --> 00:00:53,360
की गई है। न्यायपालिका के प्रति अवमानना की गई है। तो

12
00:00:53,360 --> 00:00:57,520
इस व्यक्ति पर तुरंत रोक लगाई जाए। यह इस तरीके

13
00:00:57,520 --> 00:01:01,600
से जो विष्ठा फैलाने का कार्य है वह अपने शब्दों में यहां मैं

14
00:01:01,600 --> 00:01:05,920
तेरे ही शब्दों को तुझे वापस कर रहा हूं। इस तरीके से विष्ठा

15
00:01:05,920 --> 00:01:10,000
फैलाने का जो इसका कार्य है यह निरंतर करता जा रहा है हमारे आचार्यों

16
00:01:10,000 --> 00:01:14,080
के लिए आचार आचार्यों के मठ मंदिरों में आने वाले वहां

17
00:01:14,080 --> 00:01:18,400
के आगंतुकों के लिए आचार्यों के जो शिष्य गण हैं उनके

18
00:01:18,400 --> 00:01:20,560
लिए तो यह सब बैक सपोर्ट है और

19
00:01:20,560 --> 00:01:24,720
मुख्य बात है कि इसने कोर्ट की अवमानना की है और इस बारे में एक याचिका

20
00:01:24,720 --> 00:01:29,440
लगाई गई है। ठीक है? अब क्या हुआ है कि याचिकाकर्ता

21
00:01:29,440 --> 00:01:33,840
के लिए कोर्ट ने यह निर्देश दिया है, डायरेक्शन दिए हैं। इसमें डिसीजन

22
00:01:33,840 --> 00:01:38,160
दिया गया है कि यह मामला जो एजी

23
00:01:38,160 --> 00:01:42,160
हैं यानी कि एडवोकेट जनरल वो इसको देखेंगे। वो

24
00:01:42,160 --> 00:01:46,160
अपने मतलब तेरे खिलाफ जो मुकदमा लगेगा ना तो वो एडवोकेट

25
00:01:46,160 --> 00:01:50,480
जनरल लगाएंगे। कौन? उत्तर प्रदेश के एडवोकेट जनरल। उत्तर प्रदेश इलाहाबाद

26
00:01:50,480 --> 00:01:54,480
हाई कोर्ट के जो एडवोकेट जनरल हैं यानी कि शासन की तरफ से

27
00:01:54,480 --> 00:01:58,720
जो मुख्य लॉयर होता है इसमें निर्देश है कि वो इसको

28
00:01:58,720 --> 00:02:03,280
संज्ञान में लें है ना वो इसको देखेंगे तो इसमें

29
00:02:03,280 --> 00:02:07,280
जैसा कि तूने अब यहां से जो तूने बोला है ना वो ठीक है कि इसमें जांच

30
00:02:07,280 --> 00:02:11,600
चल रही है इसमें जो होगा वो निर्णय आएगा वो अपनी निर्णय उसका आने वाला है विचाराधीन

31
00:02:11,600 --> 00:02:15,600
बात है वो बात ऐसी है कि

32
00:02:15,600 --> 00:02:20,240
इसने अब इसके आगे क्या कुतर्क किए हैं कि इसने ने फिर से विजयश्री

33
00:02:20,240 --> 00:02:24,240
जी के लिए बहुत सारी उनकी जो जो उनका पुराना जीवन

34
00:02:24,240 --> 00:02:28,480
था उसको लेकर के बहुत सारी उनकी फोटो निकाल ली पुरानी और ये वो है ना

35
00:02:28,480 --> 00:02:32,480
और उसको दिखा के ये बोल रहा है कि देखो हमने इस स्त्री के लिए अगर ऐसा

36
00:02:32,480 --> 00:02:36,240
कहा वहां पर मंत्र चल रहे हैं ये हो रहा है वो हो रहा है

37
00:02:36,240 --> 00:02:40,240
तो हम हमारे धर्म का नाश हो रहा है और मैं प्रतिबद्ध हूं पूरी शंकराचार्य

38
00:02:40,240 --> 00:02:44,480
जी ने भी ऐसा कहा है मगर मैं उनकी वाणी के लिए प्रतिबद्ध हूं हमारे धर्म

39
00:02:44,480 --> 00:02:48,480
ने ऐसा कहा है धर्म की धर्म का जहां पे उल्लंघन हो रहा है उसके के लिए मैं

40
00:02:48,480 --> 00:02:52,720
प्रतिबद्ध हूं। तो सबसे पहली बात है कि इसमें जो इसने चित्र

41
00:02:52,720 --> 00:02:57,040
दिखाए हैं, वीडियोस दिखाए हैं, यह विजयश्री के पुराने जीवन

42
00:02:57,040 --> 00:03:01,120
के वीडियोस हैं। जब वह अपना नाम रिदमम कपूर लिखती थी और अपने हर वीडियो

43
00:03:01,120 --> 00:03:05,280
के अंत में प्रणव शक्ति प्रणव लिखती थी।

44
00:03:05,280 --> 00:03:09,520
ठीक है? तो पहली बात तो इसका कुतर्क यहीं पर क्लियर हो जाता है। पहला कुतर्क

45
00:03:09,520 --> 00:03:13,600
वो पहला कुतर्क क्या क्लियर हो जाता है? कि यह विजय श्री जी के पुराने

46
00:03:13,600 --> 00:03:17,680
जीवन को आज के जीवन से जोड़ करके दिखाते हुए

47
00:03:17,680 --> 00:03:21,840
पूरी पीठ में आने जाने वालों का खंडन करते हुए पूरी

48
00:03:21,840 --> 00:03:26,000
पीठ के प्रति अनास्थावान वहां के परिकरों के प्रति अनास्थावान बनाने

49
00:03:26,000 --> 00:03:30,320
का इसने वो षड्यंत्र रचा था जो शुरुआत में चालू हुआ था। ठीक है?

50
00:03:30,320 --> 00:03:34,960
अब बात ऐसी आती है कि जब यह अपने बाप के लिए बोलता है

51
00:03:34,960 --> 00:03:39,200
कि इसका जो बाप है वो जब व्यास गद्दी पर किसी

52
00:03:39,200 --> 00:03:43,440
स्त्री के बैठने का समर्थन करता है तो यह वहां पर लथखोर शब्द का उपयोग

53
00:03:43,440 --> 00:03:47,520
नहीं करता है। वहां पर उसको इस तरह की राय

54
00:03:47,520 --> 00:03:51,360
नहीं देता है अपने बाप को कि अपनी मां को, अपनी बहन को, अपनी स्त्री को यहां सुला

55
00:03:51,360 --> 00:03:55,520
दो, कुत्ते के साथ सुला दो, अपना भाई पैदा करवा लो। जबकि धर्म का उल्लंघन वहां

56
00:03:55,520 --> 00:03:59,040
भी हो रहा है। मगर वहां ये विष्ठा नहीं करता है मुख से।

57
00:03:59,040 --> 00:04:03,600
मेरे पिताजी ने भी महिला कथा वाचिका का समर्थन किया।

58
00:04:03,600 --> 00:04:07,920
और उन्होंने गलत किया। तो मैं तो ना पिता के विरोध में जा सकता हूं, ना

59
00:04:07,920 --> 00:04:11,920
शास्त्र के विरोध में जा सकता हूं। तो मैं थोड़ा फंस जाता हूं और मौन हो जाता

60
00:04:11,920 --> 00:04:16,080
हूं। तो मैंने तो कुछ नहीं कहा पिताजी को।

61
00:04:16,080 --> 00:04:20,240
मुझे अपनी प्रतिष्ठा की अपेक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है।

62
00:04:20,240 --> 00:04:20,740
है

63
00:04:20,400 --> 00:04:24,480
ना? इसके बाद क्या है? यह जो इसके शरण में आते हैं

64
00:04:24,480 --> 00:04:28,640
जो लोग वह भले ही विदेशगामी हो वह भले ही आदि शंकराचार्य का अपमान

65
00:04:28,640 --> 00:04:32,800
करने वाले हो परंतु यदि वो अपनी वकालत नहीं कर रहे हैं पीछे

66
00:04:32,800 --> 00:04:36,800
वाले कर्मों की तो यह कोई आपत्ति नहीं है। उनको

67
00:04:36,800 --> 00:04:40,880
जो है जो प्रायश्चित इत्यादि है बता करके अपनी शरण में ले लेता है। उनको क्रिटिसाइज नहीं

68
00:04:40,880 --> 00:04:45,200
करता है। यह उनको हिदायत नहीं देता है कि वो अपने घर की स्त्रियों

69
00:04:45,200 --> 00:04:49,360
को अमुक के साथ सुला दें और इस प्रकार का ऐसा भाई पैदा

70
00:04:49,360 --> 00:04:51,840
करवा लें। उनको हिदायत नहीं देता है।

71
00:04:51,840 --> 00:04:55,920
हां कोई व्यक्ति अगर भूतकाल में गलती से विदेश गमन कर लिया हो जिसको विदेश के गमन का दोष ज्ञात

72
00:04:55,920 --> 00:04:59,920
ना हो और अब वह विदेश गमन की वकालत नहीं करता है कि हां बहुत अच्छा बहुत अच्छा गर्व में अनुभव

73
00:04:59,920 --> 00:05:03,760
नहीं करता ग्लानी अनुभव करता है वो संस उसका बहिष्कार नहीं करते मगर

74
00:05:03,760 --> 00:05:08,080
जो लोग इससे दूर है या इसकी शरण में नहीं है या उनकी शरण

75
00:05:08,080 --> 00:05:12,400
में है जहां पर ये जो कहीं जिनके प्रति कहीं ना कहीं ये द्वेष रखता

76
00:05:12,400 --> 00:05:16,560
है तो ये अपने मुख से विष्ान उगलता है। उनके पुराने जीवन को लेकर के

77
00:05:16,560 --> 00:05:20,720
उनके वर्तमान को खंडन करने का प्रयास करता है। यह तो रही

78
00:05:20,720 --> 00:05:24,720
यह बात। इसकी जो चोरी है। इसने आज के उनके वीडियो क्यों नहीं दिखाए?

79
00:05:24,720 --> 00:05:30,720
जो वर्तमान में उनके वीडियोस आ रहे हैं, क्यों नहीं दिखाए?

80
00:05:32,080 --> 00:05:36,080
महामृत्युंजय मंत्र शुड नॉट बी चंटेड विदाउट दीक्षा।

81
00:05:36,080 --> 00:05:42,080
गायत्री मंत्र कैन नॉट बी चांटेड बाय द फीमेल। [संगीत]

82
00:06:03,760 --> 00:06:07,760
और यदि पुराने जीवन के आधार पर वर्तमान में व्यक्ति की

83
00:06:07,760 --> 00:06:11,760
व्यक्ति की अवमानना करनी है, व्यक्ति का अपमान करना है तो भाई अभी

84
00:06:11,760 --> 00:06:15,760
तो तेरा एक वीडियो आया है जिसमें बृजेश पांडे ने यह सब किया जो कि वर्तमान

85
00:06:15,760 --> 00:06:19,760
समय वो कर रहा है। भगवत पाद आदि शंकराचार्य का अपमान किया। श्री

86
00:06:19,760 --> 00:06:23,920
रामचंद्र जी का अपमान किया। उसने क्या नहीं किया है मगर उसका तू समर्थन

87
00:06:23,920 --> 00:06:28,160
करेगा यह है दोगलेपन की पराकाष्ठा परंपरा प्राप्त दोगलापन है ना

88
00:06:28,160 --> 00:06:32,960
परंपरा प्राप्त दोगलापन है ये तेरा अच्छा और

89
00:06:32,960 --> 00:06:37,280
अपने पिताजी के लिए अपने बाप के लिए वो जब कोई उल्लंघन

90
00:06:37,280 --> 00:06:41,360
करेगा कि अमुक अमुक को ऐसा नहीं होना चाहिए वो जब कोई उल्लंघन करेगा

91
00:06:41,360 --> 00:06:45,600
तो वो लथखोर नहीं है। उनका जो वो है ना क्या कहते हैं उनकी

92
00:06:45,600 --> 00:06:49,760
प्रतिष्ठा हमें अपनी प्रतिष्ठा से ज्यादा प्रिय है। मुझे अपनी प्रतिष्ठा

93
00:06:49,760 --> 00:06:54,080
के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है। यह है दोगलेपन की

94
00:06:54,080 --> 00:06:58,080
पराकाष्ठा परंपरा प्राप्त दोगलापन हां अब इसके बाद इसने

95
00:06:58,080 --> 00:07:02,480
और क्या अविष्ठा की है मुख से इसने बताया है

96
00:07:02,480 --> 00:07:06,720
अच्छा इसके साथ ही साथ एक बात और है कि जिन पीठों का इसको समर्थन

97
00:07:06,720 --> 00:07:10,960
प्राप्त है या फिर जिन पीठों में इसको प्रश्रय मिला हुआ है।

98
00:07:10,960 --> 00:07:15,120
बहुत सी पीठे हैं बहुत से मठ हैं जहां पर इसकी उन चीजों पर ध्यान नहीं दिया गया जिन

99
00:07:15,120 --> 00:07:18,880
चीजों पर यहां पर ध्यान दिया जा रहा है। कई विषय ऐसे होते हैं जिसमें सभी

100
00:07:18,880 --> 00:07:22,960
लोग एक ही तरीके से एक ही कार्य विधि को नहीं अपनाते। ठीक है? मगर

101
00:07:22,960 --> 00:07:27,200
जिन पीठों से इसके संबंध मधुर हैं। उन पीठों में भी आने

102
00:07:27,200 --> 00:07:31,280
वाले कई लोग ऐसे होते हैं जिनका पुराना जीवन ऐसा हो सकता है जैसा

103
00:07:31,280 --> 00:07:35,360
जीवन ये विजयश्री का दिखाते हुए विजयश्री के प्रति अवमान ना

104
00:07:35,360 --> 00:07:40,160
कर रहा है। ठीक है? मगर ये उन पीठों के बारे में भी कुछ नहीं करेगा। यह है दोगलापन।

105
00:07:40,160 --> 00:07:44,720
अपने प्रोपेगेंडा को पुष्ट करने के लिए यह व्यक्ति क्या करता है?

106
00:07:44,720 --> 00:07:48,800
योग की बातें करता है। वहां पर योग हो रहा है। इस तरह की वेशभूषा क्यों है?

107
00:07:48,800 --> 00:07:53,360
और जब चित्र दिखाता है तो सबसे पहले फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन।

108
00:07:53,360 --> 00:07:57,520
आपके मन पे अपनी बात का प्रभाव छोड़ने के लिए कौन से चित्र दिखाता है? जहां

109
00:07:57,520 --> 00:08:01,760
पर योग नहीं हो रहा है। वो किसी अन्यत्र किसी और उद्देश्य के लिए खिंचाई

110
00:08:01,760 --> 00:08:06,000
गई फोटो थी। उसको योग से जोड़ करके आपके सामान्य

111
00:08:06,000 --> 00:08:10,240
जन के मन को प्रभावित करने का प्रयास करता है। यह व्यक्ति परंपरा प्राप्त

112
00:08:10,240 --> 00:08:14,320
दोगलापन। कौन सी परंपरा? लुप्त परंपरा। लुप्त संप्रदाय के

113
00:08:14,320 --> 00:08:18,720
गुप्ताचार्य की परंपरा और उससे मिली है उनको यह दोगलापन।

114
00:08:18,720 --> 00:08:22,960
यह विष्ठा करने की विधि उससे उनको प्राप्त हुई है। न्यायाधीश हां

115
00:08:22,960 --> 00:08:27,600
न्यायाधीशों के लिए बड़ा सम्मान पूर्वक बोल रहा है कि भाई पुलिस वालों के पास जाएगा

116
00:08:27,600 --> 00:08:32,000
तो वो थोड़े बहुत तो बुद्धिमान होंगे। वो न्यायाधीश होंगे। वो तो बुद्धिमान

117
00:08:32,000 --> 00:08:34,160
होंगे। ये है वो है। बड़ा सम्मान

118
00:08:34,160 --> 00:08:38,160
है। अरे क्यों भाई? अरे दोगले। अरे दोगले थोड़े दिन

119
00:08:38,160 --> 00:08:42,320
पहले के तेरे वचन है। हैं क्या कह रहा था तू?

120
00:08:42,320 --> 00:08:47,680
न्यायालयों में बैठने वाले न्यायाधीश जुारी शराबी कबाबी

121
00:08:47,680 --> 00:08:51,920
व्यभचारी और कोठों के दलाल और वहां

122
00:08:51,920 --> 00:08:55,920
के वहां पर न्यायालयों में केवल यह निर्णय किया जाता है कि क्राइम कैसे किया जाए

123
00:08:55,920 --> 00:08:59,920
और करके कैसे छुपाया जाए यह सब तेरे वक्तव्य

124
00:08:59,920 --> 00:09:03,920
थे न्यायालय के लिए मगर दोगले आज कैसे उसकी शरण प्राप्त करने के लिए कैसे

125
00:09:03,920 --> 00:09:07,920
तूने अपने भाव बदल दिए अब जब इधर-उधर से चीजें हो रही है तो तुझे लग रहा है

126
00:09:07,920 --> 00:09:11,920
अरे तेरे द्वारा फैलाई गई विष्ठा है ये वह तो

127
00:09:11,920 --> 00:09:15,920
तुझे उठाकर सर पर ले जानी पड़ेगी ना कहीं ना कहीं तूने ही फैलाई है

128
00:09:15,920 --> 00:09:20,080
ना यही कहा था ना तूने कि पूरी के परों की

129
00:09:20,080 --> 00:09:24,160
विष्ठा साफ करते हैं पूरी शंकराचार्य जी के जो शिष्य

130
00:09:24,160 --> 00:09:28,160
हैं वहां के जो चेले हैं यही कहा था ना अच्छा तो जब विष्ठा

131
00:09:28,160 --> 00:09:32,400
करेगा तो विष्ठा साफ भी करनी पड़ेगी अब दूसरी एक बात आती है इसने कुतर्क

132
00:09:32,400 --> 00:09:36,720
किया कि भैया महिला के अंतर वस्त्रों की बात होगी तो यही नाम तो लेने पड़ेंगे

133
00:09:36,720 --> 00:09:40,800
तो किसी भी प्रसंग वश तेरे घर की स्त्रियों के बारे में

134
00:09:40,800 --> 00:09:44,800
बात होने पर तू इसी प्रकार से उनके भी अंतर वस्त्रों का एक एक नाम

135
00:09:44,800 --> 00:09:48,960
लेकर के बताएगा ना। भले ही परोक्ष रूप से उनके उनके

136
00:09:48,960 --> 00:09:49,460
ऊपर

137
00:09:49,200 --> 00:09:53,360
के वस्त्रों का नाम लेने से ही काम चल जाए या नाम लिए बिना ही काम

138
00:09:53,360 --> 00:09:57,680
चल जाए परंतु तू बिल्कुल अपोक्ष रूप से एक-एक क्रिस्टल

139
00:09:57,680 --> 00:10:01,680
क्लियर बात करते हुए चलेगा ना। मान ले कि दीक्षा ही

140
00:10:01,680 --> 00:10:05,680
ली गई तेरी पत्नी के द्वारा या तेरी मां के द्वारा तो तू ऐसे

141
00:10:05,680 --> 00:10:09,680
ही बताएगा ना। पूछा जाएगा कि उस समय पारंपरिक वस्त्रों में थी ना। ऐसा तो नहीं

142
00:10:09,680 --> 00:10:13,680
आज के आधुनिक कपड़ों में थी उस समय तुम्हारी मां या बहन या पत्नी तो तू ऐसे

143
00:10:13,680 --> 00:10:17,680
ही बताएगा ना हां मेरी माता जी ने साड़ी भी पहन रखी थी और नीचे का

144
00:10:17,680 --> 00:10:21,840
यह फलाना वाला अंतरवस्त्र भी पहन रखा था ऊपर का फलाना वाला अंतरवस्त्र

145
00:10:21,840 --> 00:10:26,320
भी पहन रखा था या मेरी पत्नी ने भी अंदर यह अंतरवस्त्र

146
00:10:26,320 --> 00:10:30,560
पहन रखा था ऊपर यह अंतरवस्त्र पहन रखा था इसी तरीके से विष्ठा निकालेगा

147
00:10:30,560 --> 00:10:35,040
ना अपनी माता पत्नी और बहन के लिए

148
00:10:35,040 --> 00:10:39,280
शर्म नहीं आ रही तुझे कुतर्क करते हुए अब तू यहां पर एक कुतर्क करेगा

149
00:10:39,280 --> 00:10:43,280
कि मेरे घर की स्त्री ऐसे फोटो नहीं खिंचवाती है। मेरे घर की स्त्री ऐसे वीडियो नहीं

150
00:10:43,280 --> 00:10:48,960
बनवाती है। तो तू अपना यही कारण बताना उन शब्दों का यूज़ करने का।

151
00:10:48,960 --> 00:10:52,960
जब शब्दों का यूज़ करने का कारण पूछा जा रहा है तो बड़ा भोला बन करके बोल

152
00:10:52,960 --> 00:10:56,960
रहा है कि भाई आजकल अंतर वस्त्रों को इन्हीं नामों से पुकारा जाता है। तो मैंने

153
00:10:56,960 --> 00:11:01,120
बोला अरे तू कारण यह बता ना क्योंकि वो इस तरह

154
00:11:01,120 --> 00:11:05,360
से उसने फोटो खिंचाई इसलिए मैंने उसके बारे में ऐसा बोला।

155
00:11:05,360 --> 00:11:09,520
जबकि मैं कह सकता था कि उसने अंतर वस्त्रों में फोटो खिंचवाई है। फिर भी मैंने नाम

156
00:11:09,520 --> 00:11:13,520
लेकर के बोला मेरे अंदर तो अभी भी अपने गुरु से प्राप्त राम

157
00:11:13,520 --> 00:11:17,840
श्री राम जी से प्राप्त इतनी मर्यादा है कि मेरे को अभी भी दिक्कत

158
00:11:17,840 --> 00:11:21,920
हो रही है। तेरा रिप्लाई करते टाइम तेरे घर की महिलाओं के बारे में ये

159
00:11:21,920 --> 00:11:27,600
बातें बोलने में। जबकि तू इतनी विष्ठा कर चुका है मेरे लिए।

160
00:11:27,600 --> 00:11:31,680
है ना? यह है अंतर। यह है परंपरा प्राप्त मर्यादा।

161
00:11:31,680 --> 00:11:36,400
और तेरा क्या है? परंपरा प्राप्त विष्ठा। परंपरा प्राप्त दोगलापन

162
00:11:36,400 --> 00:11:40,640
परंपरा प्राप्त कुतर्क अब एक बात बता

163
00:11:40,640 --> 00:11:44,640
क्या तेरे चैनल पर तेरी Facebook

164
00:11:44,640 --> 00:11:48,640
आईडी पर कभी किसी ने तुझको और अनर्गल

165
00:11:48,640 --> 00:11:51,200
उल्टी सीधी बातें नहीं कही

166
00:11:51,200 --> 00:11:55,600
तो तूने लेना एक ना देना दो मुझे ही मानहानि का 100 करोड़ का दावा क्यों भेजा

167
00:11:55,600 --> 00:11:59,680
भाई क्यों भेजा उनको 100 करोड़ का दावा क्यों

168
00:11:59,680 --> 00:12:03,760
भेजा जो मेरे चैनल पे जिनका इंटरव्यू पड़ा था चिकित्सक जी का आयुर्वेदिक चिकित्सक

169
00:12:03,760 --> 00:12:07,840
हैं तूने ले दे के एक आदित्य वैभव सिंह के नाम

170
00:12:07,840 --> 00:12:11,840
से जोड़ते हुए मेरे खिलाफ ही एफआईआर क्यों कराने का प्रयास किया?

171
00:12:11,840 --> 00:12:15,840
क्यों? बहुत से कमेंट तेरे चैनल पे दिख जाएंगे। तूने खुद अपने पोस्ट

172
00:12:15,840 --> 00:12:20,080
इत्यादि में अब कई ऐसे कमेंट हैं जो तूने निर्गत किए

173
00:12:20,080 --> 00:12:24,080
हैं वहां पर दिखाए हैं कि देखो मुझे कितना बुरा भरा बोल रहे हैं। उल्टा सीधा बोल रहे

174
00:12:24,080 --> 00:12:28,160
हैं। तो उनके खिलाफ तूने एक्शन क्यों नहीं लिया है? क्या हम

175
00:12:28,160 --> 00:12:32,240
हमारे विरोध में इस तरह का कार्य करने

176
00:12:32,240 --> 00:12:36,400
वाले प्रत्येक व्यक्ति के ऊपर एक्शन ले क्या जहां जो हमें

177
00:12:36,400 --> 00:12:40,560
सही लगेगा कि इसके ऊपर एक्शन लेने से एक हमारे जो

178
00:12:40,560 --> 00:12:44,720
प्रयास है वो सफल होगा और ज्यादा उस जो प्रयास

179
00:12:44,720 --> 00:12:48,720
है जो श्रम है उसका हमें वो अपेक्षाकृत वो अच्छा फल

180
00:12:48,720 --> 00:12:52,880
मिलेगा हम उस प्रकार करेंगे और दूसरी बात इस समय हम लोग

181
00:12:52,880 --> 00:12:56,960
रामपाल ने जो अभद्र चीजें की है हमारे धर्म को लेकर के हमारी दुर्गा माता

182
00:12:56,960 --> 00:13:01,680
के लिए उल्टी सीधी बातें बोली हैं। हम इस समय

183
00:13:01,680 --> 00:13:04,240
अ

184
00:13:04,240 --> 00:13:06,240
उनका प्रतिकार कर रहे हैं। चल रहा है। तो

185
00:13:06,240 --> 00:13:10,240
इस समय अब रामपाल वाले कहे कि अरे भैया अमुक अमुक

186
00:13:10,240 --> 00:13:14,480
तंत्र भी तो है जो गीता में शिव जी का अपमान कर रहा है। मगर उसका केस

187
00:13:14,480 --> 00:13:18,640
नहीं किया। हमारा केस किया है। तो ये कहां तक की तर्कपूर्ण बातें हैं

188
00:13:18,640 --> 00:13:22,880
भाई? रामपाल पर केस इसलिए ना करें कि जिस दिन हम दुनिया

189
00:13:22,880 --> 00:13:27,120
में जितने भी सनातन विरोधी सनातन के नाम से चलने वाले तंत्र हैं

190
00:13:27,120 --> 00:13:31,360
या सनातन विरोधी तंत्र जिस दिन हम उन सब पे एक साथ केस करेंगे उसी

191
00:13:31,360 --> 00:13:35,520
दिन हम रामपाल पे केस करेंगे अन्यथा नहीं करेंगे। यही है ना तेरी

192
00:13:35,520 --> 00:13:39,680
तर्कशीलता। अब अपने शब्दों का वेग क्यों बदल रहा है? अब अपने शब्दों

193
00:13:39,680 --> 00:13:43,760
को सॉफ्ट करके क्यों बोल रहा है? वैसे ही बोल। कुत्ते के साथ

194
00:13:43,760 --> 00:13:47,920
चुम्मा बोलना। क्या दिक्कत हो रही है क्या कुत्ते के साथ चुम्मा

195
00:13:47,920 --> 00:13:52,320
बोलने में? बोल वैश्या बोला था ना सिद्ध करा के वैश्या

196
00:13:52,320 --> 00:13:55,440
कोर्ट में

197
00:13:55,440 --> 00:13:59,760
दया भी आती है तेरे ऊपर ये जो तू अपनी अखेलियों

198
00:13:59,760 --> 00:14:04,400
में आगे बढ़ता चला जा रहा है ना दया भी आती है

199
00:14:04,400 --> 00:14:08,560
तेरी जो दुर्बुद्धि है जो तुझे प्रेशर देने वाले जो तेरे चापलूस हैं

200
00:14:08,560 --> 00:14:14,560
जो तुझे फुकों पर चढ़ाए रहते हो तू चढ़ा रहता है चढ़ चढ़

201
00:14:14,560 --> 00:14:18,560
झूठे की हद तक और चोर के घर तक तूने अपमान मान किया है

202
00:14:18,560 --> 00:14:21,520
ना परंपराओं का उन आचार्यों के कारण

203
00:14:21,520 --> 00:14:25,520
तेरा नाश होगा तूने महिलाओं का अपमान किया है ना वैश्या का

204
00:14:25,520 --> 00:14:29,840
है ना निराधार रूप से उन महिलाओं के कारण तेरा नाश होगा

205
00:14:29,840 --> 00:14:34,000
तूने सामर्थ्यवान गुरु परंपरा प्राप्त आचार्यों के शिष्यों

206
00:14:34,000 --> 00:14:38,160
का अपमान किया है ना उनके कारण तेरा नाश

207
00:14:38,160 --> 00:14:42,160
होगा देखता जा जय श्री राम [संगीत]
