1
00:00:02,880 --> 00:00:07,040
तो दोगलापन कंटिन्यू लुप्त संप्रदाय के गुप्त

2
00:00:07,040 --> 00:00:11,200
आचार्य ने एक हास्यास्पद वीडियो बनाया है। अपने

3
00:00:11,200 --> 00:00:15,440
मीडिया प्रभारी का पक्ष लेने के लिए क्या-क्या कुतर्क किए हैं।

4
00:00:15,440 --> 00:00:19,840
यहां तक कि इस धूर्त ने भगवत पाद आदि शंकराचार्य

5
00:00:19,840 --> 00:00:23,920
के अपमान को भी सहते हुए अपने मीडिया प्रभारी

6
00:00:23,920 --> 00:00:28,080
की गलती पर पर्दा डालने का प्रयास किया है। तो सबसे पहली

7
00:00:28,080 --> 00:00:32,400
बात तो यह है कि मैं अपने कई वीडियोस में यह कह चुका था कि भाई तुम भी

8
00:00:32,400 --> 00:00:36,480
अपने से जुड़े हुए लोगों के बारे में जरा बताओ तो कहां रहते हैं,

9
00:00:36,480 --> 00:00:40,880
क्या करते हैं? तो हम भी थोड़ी उनकी विवेचना करें, समीक्षा

10
00:00:40,880 --> 00:00:45,200
करें कि वो कैसे हैं, क्या हैं, कितना झूठ बोलते हैं, कितना सच बोलते हैं, क्या उनके आचार

11
00:00:45,200 --> 00:00:49,280
विचार हैं। जैसे तुम सबकी समीक्षा कर पा रहे हो। उन लोगों की

12
00:00:49,280 --> 00:00:53,680
जो प्रतिष्ठित हैं समाज में और जिनकी जीवन शैली

13
00:00:53,680 --> 00:00:58,000
पारदर्शिता के साथ जो सार्वजनिक

14
00:00:58,000 --> 00:01:02,080
है तो ये अपनी चीजों को तो छिपाते हुए गुफाओं

15
00:01:02,080 --> 00:01:06,400
में जाकर के वीडियो बनाते थे लालटेन लेकर के लाल बत्ती में है ना

16
00:01:06,400 --> 00:01:11,040
या रेलवे स्टेशन पे जाकर के तो कोई कैसे पता करेगा भाई तुम्हारे साथ है क्या

17
00:01:11,040 --> 00:01:15,440
तो अब जब इनके मीडिया प्रभारी की कोई बात सामने आई है

18
00:01:15,440 --> 00:01:18,240
तो ये अ

19
00:01:18,240 --> 00:01:23,600
उसको बचाने के लिए कुतर्क कर रहे हैं। अच्छा इसमें एक बात और है।

20
00:01:23,600 --> 00:01:27,760
पूरी पीठ पर आरोप लगाने के लिए क्या करता था यह व्यक्ति की पूरी पीठ से जुड़ा

21
00:01:27,760 --> 00:01:31,920
हुआ कोई व्यक्ति यदि पूरी पीठ के बारे में कुछ भी बोल देता था बिना किसी

22
00:01:31,920 --> 00:01:36,080
साक्ष्य और प्रमाण के भी तो ये उसकी ही बात को मानते हुए प्रमाण

23
00:01:36,080 --> 00:01:40,320
के रूप में उपस्थित प्रस्तुत करते हुए पूरी पीठ को

24
00:01:40,320 --> 00:01:44,480
बदनाम करता था पूरी पीठ के प्रति अनास्थावान बनाने का प्रयास करता

25
00:01:44,480 --> 00:01:48,480
था करता है अभी भी कर रहा है ना अब इससे जुड़ा

26
00:01:48,480 --> 00:01:52,560
हुआ व्यक्ति इसके मीडिया प्रभारी का खंडन कर रहा है और

27
00:01:52,560 --> 00:01:56,800
जो कि बिल्कुल सही है। इसने जो कॉल रिकॉर्डिंग सुनाई है

28
00:01:56,800 --> 00:02:01,040
उसमें अभी हम बात करेंगे समीक्षात्मक रूप से। तो जब इससे जुड़ा

29
00:02:01,040 --> 00:02:05,360
हुआ व्यक्ति जो इसका सम्मान करता है। अब जब वो इसके मीडिया प्रभारी का

30
00:02:05,360 --> 00:02:09,520
खंडन कर रहा है तो यह क्यों नहीं मान लेता उसको? क्योंकि कोई किसी से अगर जुड़ा

31
00:02:09,520 --> 00:02:13,600
हुआ है। कोई किसी के प्रति यदि अपनत्व रखता है उसने ही आकर के

32
00:02:13,600 --> 00:02:17,600
यदि कह दिया कुछ जिसके प्रति वो अपनत्व रखता है उससे जुड़े

33
00:02:17,600 --> 00:02:21,760
हुए लोगों के बारे में तो उसकी बात तो प्रमाण माननी चाहिए। तो अब इसने

34
00:02:21,760 --> 00:02:25,840
संदीप जी की बात को प्रमाण ना मानते हुए क्यों उसमें

35
00:02:25,840 --> 00:02:30,960
अनुसंधात्मक रवैया अपनाया यह है दोगलापन

36
00:02:30,960 --> 00:02:33,280
दोगलेपन की पराकाष्ठा वो ये जो

37
00:02:33,280 --> 00:02:37,520
इसको ये जो इसका लुप्त संप्रदाय मिला है ना इसको परंपरा से इसको

38
00:02:37,520 --> 00:02:41,840
परंपरा से क्या मिला है आपको पता है गालियां इसको परंपरा

39
00:02:41,840 --> 00:02:45,920
से मिला है दोगलापन इसको परंपरा से मिला है द्वेष

40
00:02:45,920 --> 00:02:50,000
इसको परंपरा से मिली है नीचता ये सब चीजें इसको परंपरा से प्राप्त हुई

41
00:02:50,000 --> 00:02:54,080
है जिसका ढिंढोरा पीटता है खैर है। अब हम वीडियो में कहे हुए इसके

42
00:02:54,080 --> 00:02:59,680
कुछ मोटे-मोटे कुतर्क हैं। मैंने पूरा पूरा इसका सुना नहीं क्योंकि यह बड़ी

43
00:02:59,680 --> 00:03:04,000
व्यर्थ की बातें भी बोलता है अपने वीडियो में जिनका कोई औचित्य नहीं होता है। जैसे

44
00:03:04,000 --> 00:03:08,000
कि मान लीजिए बताएगा कि मुझे संदीप देव जी

45
00:03:08,000 --> 00:03:12,160
का एक मैसेज आया। तो मैं उस समय कार में चल रहा था। पानी का गिलास मेरे

46
00:03:12,160 --> 00:03:16,160
हाथ में था। उसके बाद मैंने गिलास को वहां रखा साइड में। तो इस वजह से उस मैसेज

47
00:03:16,160 --> 00:03:20,160
को देखने में मुझे 10 मिनट का टाइम लग गया। अरे भाई इस इसको बताने की क्या आवश्यकता

48
00:03:20,160 --> 00:03:24,320
थी? हैं? तो इस तरीके से व्यर्थ की बातें भी बहुत करता है जिसकी वजह

49
00:03:24,320 --> 00:03:28,480
से मैं इसका पूरा वीडियो देख नहीं पाता हूं। मगर जो कुछ आंशिक

50
00:03:28,480 --> 00:03:32,640
रूप से मैंने देखा तो उसको मैंने बोला उसको

51
00:03:32,640 --> 00:03:37,120
मैंने नोट किया है और जिस पर हम बात करेंगे। सबसे पहली बात आती है

52
00:03:37,120 --> 00:03:41,120
इस व्यक्ति ने अपने वीडियो में यह बात बोली है कि

53
00:03:41,120 --> 00:03:45,440
जब इसकी ज्योतिष पीठ से बात हुई तो उधर से कहा गया

54
00:03:45,440 --> 00:03:48,480
इस विषय में पी एन मिश्र और इसके बीच में जो विवाद

55
00:03:48,480 --> 00:03:52,880
चल रहा है इस विषय में जब इसने ज्योतिष पीठ से बात की तो उन्हों

56
00:03:52,880 --> 00:03:56,880
वहां से कहा गया कि भाई दोनों ही अपने हैं और कहीं ना कहीं

57
00:03:56,880 --> 00:04:00,880
वहां पर मौन हम इस विषय में मौन ही रहेंगे। ऐसा

58
00:04:00,880 --> 00:04:05,040
प्रकट किया गया। है ना? इसके बाद यह इस व्यक्ति ने उस

59
00:04:05,040 --> 00:04:09,200
बारे में चर्चा आगे क्यों नहीं की? क्यों नहीं की भाई? क्यों नहीं की?

60
00:04:09,200 --> 00:04:13,200
वीडियो बनाना और बोल यह व्यक्ति अपने से जुड़े हुए लोगों के

61
00:04:13,200 --> 00:04:17,600
मुंह में इतना वो हो गया है कि मुझे शर्म आती है कि कभी मैंने इस व्यक्ति का साथ दिया।

62
00:04:17,600 --> 00:04:21,920
नीच पूरी शंकराचार्य जी के लिए ऐसे ही बोला था ना तूने।

63
00:04:21,920 --> 00:04:26,480
किस व्यक्ति के साथ कैसे व्यवहार करते हुए और किस रणनी रणनीति

64
00:04:26,480 --> 00:04:30,800
के द्वारा धर्म संस्थापना करनी है इसका निर्णय शंकराचार्य करते

65
00:04:30,800 --> 00:04:35,520
हैं तुझ जैसा धूर्त नहीं अब कहां गया तेरा

66
00:04:35,520 --> 00:04:39,920
धर्म परायणता कहां गई तेरी धर्म परायणता अब तुझे अपना दोगलापन

67
00:04:39,920 --> 00:04:44,080
नहीं दिख रहा है भाई अगर ज्योतिष पीठ किसी विषय पर मौन

68
00:04:44,080 --> 00:04:48,080
रह रही है किसी विषय को उस तरीके से नहीं कुरेद रही है

69
00:04:48,080 --> 00:04:52,560
जिस तरीके से तू कुरेदना चाहता है तो तू तू उनका विरोध करना।

70
00:04:52,560 --> 00:04:56,720
बना वीडियो कि यहां न्यायपूर्ण रवैया नहीं

71
00:04:56,720 --> 00:05:00,800
अपनाया जा रहा है। अपनेपन की अपनेपन को ऊपर रखा जा

72
00:05:00,800 --> 00:05:04,080
रहा है। बना वीडियो।

73
00:05:04,080 --> 00:05:04,580
जब

74
00:05:04,560 --> 00:05:08,880
एक आचार्य को अपने ब्राह्मणत्व के साथ क्षत्रियत्व का आलंबन

75
00:05:08,880 --> 00:05:12,880
लेते हुए रणनीति का उपयोग करना पड़ता है ना तो उसे इन इन सारी

76
00:05:12,880 --> 00:05:17,680
विधाओं का आलंबन लेना पड़ता है। मगर तू दोगला है।

77
00:05:17,680 --> 00:05:22,800
एक जगह पर अलग व्यवहार और दूसरी जगह पर अलग व्यवहार। यह तेरी

78
00:05:22,800 --> 00:05:27,440
वो है। हैबचुअल। तेरी प्रवृत्ति है ये।

79
00:05:27,440 --> 00:05:31,440
हैबचुअल है तू। हैबचुअल। हैबचुअल क्या है? जो हिस्ट्री सीटर्स होते हैं

80
00:05:31,440 --> 00:05:35,680
ना थानों में जाओ तो हिस्ट्री सीटर्स के नाम लिखे होते हैं। उसी तरीके से तू हैबचुअल

81
00:05:35,680 --> 00:05:39,840
है दोगलेपन का। अगर कहीं पर थाना होगा ना जहां दोगलापन दोगलेपन का वो

82
00:05:39,840 --> 00:05:43,840
लिखा जाता होगा अपराध तो वहां पर तू हिस्ट्री सीटर के नाम

83
00:05:43,840 --> 00:05:48,080
में सबसे पहला नाम आएगा। कौन भाई भागवत आनंद दोगलापन

84
00:05:48,080 --> 00:05:53,200
की पराकाष्ठा और सुन दोगलापन तेरा क्या है? बताता हूं।

85
00:05:53,200 --> 00:05:57,200
फिर क्या है? अब ये व्यक्ति किसका पक्ष ले रहा है?

86
00:05:57,200 --> 00:06:01,280
जो व्यक्ति कॉल रिकॉर्डिंग के शुरू में जब संदीप देव

87
00:06:01,280 --> 00:06:05,280
जी कोई बात अपना कोई पक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं तो शुरू में

88
00:06:05,280 --> 00:06:09,600
ही जब वह बता रहे हैं कि तुम्हारे गुरु जी ने यह कहा है तो इनका वो

89
00:06:09,600 --> 00:06:13,760
जो मीडिया प्रभारी है दोगलेपन

90
00:06:13,760 --> 00:06:17,760
की पराकाष्ठा में वो उसको भी मिली होगी परंपरा से क्योंकि वो तुम्हारा शिष्य है तो उसको

91
00:06:17,760 --> 00:06:19,680
भी दोगलापन परंपरा से प्राप्त

92
00:06:19,680 --> 00:06:23,680
हो गया है ना तुम्हारी लुप्त संप्रदाय का गुप्त परंपरा

93
00:06:23,680 --> 00:06:27,680
तो क्या है वो क्या कह रहा है जब संदीप देव जी ये बता रहे हैं कि तुम्हारे

94
00:06:27,680 --> 00:06:31,760
गुरु जी ने ये कहा है वो कह रहा है अरे वो गुरुजी ने कुछ कहा होगा वो हम नहीं

95
00:06:31,760 --> 00:06:35,920
जानते मगर मतलब उसपे वो बात ही नहीं करना चाह रहा है और

96
00:06:35,920 --> 00:06:40,000
उन्होंने मुझसे ये कहा है कि तुम इसे देख लो क्यों भाई तेरे गुरु ने क्या

97
00:06:40,000 --> 00:06:44,160
कहा है क्या नहीं कहा है पूछ ना जाके स्पष्ट करना

98
00:06:44,160 --> 00:06:48,400
और जब सामने वाला तुझे बता रहा है कि यह कह रहा है तो सुन उसको

99
00:06:48,400 --> 00:06:52,560
स्पष्ट कर कॉलर पकड़ के पूछ वो नाग वाला डंडा पकड़ के पूछ

100
00:06:52,560 --> 00:06:57,280
उससे अपने गुरु से कि क्या कहा है तूने संदीप देव जी से

101
00:06:57,280 --> 00:07:01,680
क्योंकि तू यही चाहता है पूरी पीठ वालों से

102
00:07:01,680 --> 00:07:05,680
पूछ क्यों नहीं बात करता? क्यों नहीं स्पष्टता

103
00:07:05,680 --> 00:07:09,840
है? अस्पष्टता की वजह से जो है सारा विप्लव हो रहा है ना यह

104
00:07:09,840 --> 00:07:14,480
अस्पष्टता कहां से आ गई भाई? तुम तो बड़े स्पष्ट हो खड़े हो।

105
00:07:14,480 --> 00:07:18,480
कैसे तुमने वहां पर बात को आगे बढ़ा दिया। जब संदीप देव जी गुरु के

106
00:07:18,480 --> 00:07:22,720
बारे में कुछ बता रहे हैं कि तुम्हारे गुरु जी ने यह बोला है तो तुम बोल रहे हो कि

107
00:07:22,720 --> 00:07:27,760
वह गुरु जी ने कुछ कहा होगा वह हम नहीं जानते। क्यों भाई? क्यों नहीं जानते

108
00:07:27,760 --> 00:07:33,360
पूछ अपने गुरु से जाके वह जो नाग पासा लिए फिरता है पूछ उससे

109
00:07:33,360 --> 00:07:34,800
कि क्या कहा है तूने संदीप

110
00:07:34,800 --> 00:07:39,520
देव जी से है ना यही है ना अंधभक्ति

111
00:07:39,520 --> 00:07:42,800
अब आगे क्या करता है ये

112
00:07:42,800 --> 00:07:47,040
हां फिर इसने एक कुतर्क किया है अपने बाबू

113
00:07:47,040 --> 00:07:51,040
ने भागवतानंद ने क्या कुतर्क किया है कि भाई

114
00:07:51,040 --> 00:07:55,200
जो जैन और बौद्ध हैं उनका मत स्पष्ट था कि हम वेद को नहीं मानते

115
00:07:55,200 --> 00:07:59,680
थे तो उनसे शास्त्रार्थ करते थे आदि शंकराचार्य मगर यहां तो इनका मत अस्पष्टित

116
00:07:59,680 --> 00:08:03,760
है। इनके गुरु कुछ कह रहे हैं यह कुछ कह रहे हैं। तो ऐसे व्यक्ति से हम शास्त्रार्थ कैसे

117
00:08:03,760 --> 00:08:08,800
करें? क्यों? क्या आर्य समाजियों से शास्त्रार्थ नहीं हुआ?

118
00:08:08,800 --> 00:08:12,880
करपात्री जी का क्या अन्य वैष्णव परंपरा के आचार्यों का

119
00:08:12,880 --> 00:08:17,040
आर्य समाजियों से शास्त्रार्थ नहीं हुआ? जो वेदों को मानने का दावा करते हैं

120
00:08:17,040 --> 00:08:21,120
और जिनके पीछे भी जाएंगे तो उनके भी गुरु के रूप में वही गुरु मिलेंगे जो उन्हीं

121
00:08:21,120 --> 00:08:25,120
परंपराओं के गुरु मिलेंगे जो हमारी हमारे गुरु हैं जिन परंपराओं से

122
00:08:25,120 --> 00:08:29,280
मगर फिर भी वेदों को मानने का दावा करने वाले हैं

123
00:08:29,280 --> 00:08:33,760
जबकि उनके गुरु कुछ कह रहे हैं और वो कुछ कह रहे हैं और उनसे भी शास्त्रार्थ

124
00:08:33,760 --> 00:08:37,760
हुआ और क्या भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का जो अन्य मत

125
00:08:37,760 --> 00:08:43,520
हैं जो वेदों को मानने का दावा करते थे और विभिन्न

126
00:08:43,520 --> 00:08:48,000
क्या कहते हैं विचारधाराओं में समाज को बांट रहे थे तो सबसे उनका शास्त्रार्थ हुआ

127
00:08:48,000 --> 00:08:50,080
तो शास्त्रार्थ होने से पहले यह तय

128
00:08:50,080 --> 00:08:54,160
करना होता था क्या कि तुम मेरी सारी चीजें मान लो वेद का जो अर्थ मैं मान रहा हूं वही अर्थ

129
00:08:54,160 --> 00:08:58,240
मान लो हम ऐसा होता था क्या

130
00:08:58,240 --> 00:09:02,320
शास्त्रार्थ होने से पहले कि वेद का जो अर्थ मैं मान रहा हूं वही अर्थ तुम भी मान

131
00:09:02,320 --> 00:09:06,720
लो तब मैं तुमसे शास्त्रार्थ करूंगा अरे भाई तुम्हें सिद्ध करना है उससे शास्त्रार्थ

132
00:09:06,720 --> 00:09:10,800
करके कि वेद का जो अर्थ मैं मान रहा हूं वो सही है

133
00:09:10,800 --> 00:09:14,800
और तुम जो अर्थ वेद का मान रहे हो वो गलत है तो तो आपको ये पीएन

134
00:09:14,800 --> 00:09:18,800
मिश्र से भी शास्त्रार्थ करके सिद्ध करना था कि आदि

135
00:09:18,800 --> 00:09:22,800
शंकराचार्य जी की बात का या वेद के अर्थ का जो मतलब तुम निकाल रहे हो वो

136
00:09:22,800 --> 00:09:27,280
गलत है। जो मतलब मैं निकाल रहा हूं वो सही है। मगर नहीं

137
00:09:27,280 --> 00:09:31,280
और सुनो इनका जो मीडिया प्रभारी है वो भी यही

138
00:09:31,280 --> 00:09:35,280
कहता है। अरे भाई शास्त्र में लिखा तो है। शास्त्र में लिखा तो है। तो फिर

139
00:09:35,280 --> 00:09:39,360
वो क्यों नहीं मान रहे? इनका मीडिया प्रभारी बोला है कि शास्त्र में लिखा हुआ जब तुम नहीं

140
00:09:39,360 --> 00:09:43,520
मानोगे तो हम क्या करें? अरे भाई शास्त्र में लिखा हुआ द्वैत वाले नहीं मान रहे अहम

141
00:09:43,520 --> 00:09:47,840
ब्रह्मास्म तो उनसे शास्त्रार्थ नहीं होना चाहिए। हां सर्वम खलविदम

142
00:09:47,840 --> 00:09:51,920
ब्रह्मा शास्त्र में लिखी हुई बात है। अगर कोई द्वैतवादी नहीं मान

143
00:09:51,920 --> 00:09:56,000
रहा है। विशिष्टा द्वैतवादी नहीं मान रहा है तो उनसे कभी शास्त्रार्थ नहीं होना चाहिए और ना कभी हुआ

144
00:09:56,000 --> 00:10:00,080
है। है ना? वेदों

145
00:10:00,080 --> 00:10:04,080
को मानने वाला होने का दावा करने वाले आर्य समाधि से शास्त्रार्थ कभी नहीं

146
00:10:04,080 --> 00:10:05,120
होना चाहिए। ना कभी हुआ है

147
00:10:05,120 --> 00:10:09,120
तुम्हारे अनुसार। भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी की जब बात

148
00:10:09,120 --> 00:10:13,280
आती है कि उन्होंने ऐसेसे शास्त्रार्थ किया था तो यह इनका मीडिया प्रभारी

149
00:10:13,280 --> 00:10:17,360
कहता है कि भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी के पीछे तो फौज चलती थी

150
00:10:17,360 --> 00:10:21,600
जो शास्त्रार्थ करो नहीं तो उनका मुंड काट डालती थी

151
00:10:21,600 --> 00:10:25,760
और यह बहाना लिया है कि इसलिए आप आदि शंकराचार्य जी का उदाहरण

152
00:10:25,760 --> 00:10:29,760
नहीं दे सकते क्योंकि उनके पास ये विशेषता थी तो इसका मतलब इस

153
00:10:29,760 --> 00:10:34,480
व्यक्ति का जो एक लुप्त आचार्य है गुप्त आचार्य है

154
00:10:34,480 --> 00:10:38,480
है ना वो किसी से भी शास्त्रार्थ तब करेगा जब वो इसके गुरु

155
00:10:38,480 --> 00:10:43,520
की जो है मुंडी पर तलवार रख देगा या तो शास्त्रार्थ कर

156
00:10:43,520 --> 00:10:47,840
वरना मैं तेरी गर्दन काटूं। अन्यथा इसके अंदर अपने से

157
00:10:47,840 --> 00:10:52,080
भावना नहीं आएगी कि मैं शास्त्रार्थ करके अपने मत को सिद्ध करूं। जबकि यह कह

158
00:10:52,080 --> 00:10:56,320
चुका है कि भैया मेरी परंपरा का कार्य है शास्त्रार्थ के द्वारा

159
00:10:56,320 --> 00:11:00,400
धर्म की धर्म की स्थापना करना धर्म की रक्षा करना और ना हो तो शस्त्र

160
00:11:00,400 --> 00:11:04,400
के द्वारा करना। और यह खुद शस्त्र का इंतजार कर रहा है कि

161
00:11:04,400 --> 00:11:08,480
मैं शास्त्रार्थ तब करूंगा। पहला चरण तब पार करूंगा। पहले चरण का उपयोग तब

162
00:11:08,480 --> 00:11:12,480
करूंगा जब कोई और शस्त्र का सहारा लेगा। अन्यथा मैं तो भाई

163
00:11:12,480 --> 00:11:16,640
भाग जाऊंगा गुफा में। लालटेन लेकर के लाल बत्ती जला कर के और मैं वो

164
00:11:16,640 --> 00:11:20,160
अपने वो राज कॉमिक्स और जो ये मनोज कॉमिक्स जो आती

165
00:11:20,160 --> 00:11:24,480
थी इंडिया में डायमंड कॉमिक्स इन सब में जो कहानियां होती थी उनको परोसूंगा मलेश

166
00:11:24,480 --> 00:11:28,880
राज के रूप में। इस धूर्त व्यक्ति ने किस तरीके से भगवत पाद आदि शंकराचार्य

167
00:11:28,880 --> 00:11:32,960
जी के अपमान पर पर्दा डालने का भी प्रयास किया वह भी इसके वीडियो में

168
00:11:32,960 --> 00:11:37,200
स्पष्ट हो रहा है। वहां साफ दिखाई दे रहा है कि जो व्यक्ति बात कर रहा है इसके मीडिया

169
00:11:37,200 --> 00:11:41,280
प्रभारी के रूप में बृजेश पाठक जैसा व्यक्ति जो आदि

170
00:11:41,280 --> 00:11:45,520
शंकराचार्य जी के बारे में यह भावना रखता है कि वो अगर शास्त्रार्थ

171
00:11:45,520 --> 00:11:49,840
नहीं होता था तो वो निर्दयीता से जो है मुंड काट डालते उनको निर्दय

172
00:11:49,840 --> 00:11:53,840
निर्दयी के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। इस तरह की भावना रखने

173
00:11:53,840 --> 00:11:58,640
वाले बिल्कुल ठीक कहा। संदीप देव जी ने इस बारे में बिल्कुल ठीक कहा।

174
00:11:58,640 --> 00:12:02,720
इस तरह की भावना ही कम्युनिस्टों की है। इस तरह की भावना ही बौद्धों की है। वो यही

175
00:12:02,720 --> 00:12:07,280
कहते हैं कि आदि शंकराचार्य जी ने शास्त्रार्थ करके नहीं जीता है। भारत को

176
00:12:07,280 --> 00:12:11,280
धर्म की स्थापना सनातन धर्म की स्थापना शास्त्रार्थ से नहीं हुई है। शस्त्र

177
00:12:11,280 --> 00:12:15,440
से हुई है। तो वही तुम्हारे यहां पल रहे हैं। उसी को तुम पालपस के बड़ा

178
00:12:15,440 --> 00:12:19,440
कर रहे हो। और क्यों नहीं करोगे? भैया तुम्हें तो परंपरा से प्राप्त हुआ है दोगलापन।

179
00:12:19,440 --> 00:12:23,440
अब इसने एक बात बोली है वकीलों का कार्य है झूठ बोलना। यह बात गलत नहीं

180
00:12:23,440 --> 00:12:27,440
है। यानी कि इसने जो हमें मानहानि का नोटिस भेजा है या वकील के द्वारा इसने

181
00:12:27,440 --> 00:12:31,760
जो भी कार्यवाही करवाई है यह मानता है कि वो झूठ है। इसका

182
00:12:31,760 --> 00:12:35,360
समर्थन करता है ना ये पूरे राष्ट्र के वकीलों

183
00:12:35,360 --> 00:12:39,360
पर इसने एक ही धब्बा लगा दिया। वकीलों का काम है झूठ बोलना। पीएन मिश्र जी

184
00:12:39,360 --> 00:12:43,840
झूठ को सच साबित करते हैं। इसका अर्थ क्या हुआ कि राम मंदिर में

185
00:12:43,840 --> 00:12:47,840
जो भगवान का विग्रह स्थापित हुआ है वहां पर राम जी का जन्म नहीं

186
00:12:47,840 --> 00:12:52,000
हुआ था। वो झूठ को स्थापित किया गया भाई वकील के द्वारा।

187
00:12:52,000 --> 00:12:56,160
वकील का तो काम है झूठ को स्थापित करना। और तू जैसा जिसको भगवती

188
00:12:56,160 --> 00:13:00,240
से वरदान प्राप्त है। हालांकि वो परी थी। वह जो परी साधना

189
00:13:00,240 --> 00:13:04,240
करवाता था यह पर फिर भी तुझे तो भगवती से वरदान प्राप्त हुआ

190
00:13:04,240 --> 00:13:08,320
है। भगवती से वरदान प्राप्त करने वाले के द्वारा मुख से तो कभी कोई गलत

191
00:13:08,320 --> 00:13:12,400
बात निकलेगी नहीं। तो फिर सामने वाला वकील तुम्हें झूठा कैसे

192
00:13:12,400 --> 00:13:16,560
साबित करेगा? तुम्हारे पास तो हर बात का खंडन होना चाहिए। स्वयं भगवती आकर

193
00:13:16,560 --> 00:13:20,560
के पढ़ा रही ना। कहां गई भगवती की क्लासेस? भगवती

194
00:13:20,560 --> 00:13:24,640
मां की क्लासेस नहीं है वो। लुप्ताचार्य वो

195
00:13:24,640 --> 00:13:28,640
तुम्हारी परी की क्लासेस है जिसको तुम अपने लोगों को बोलते

196
00:13:28,640 --> 00:13:32,640
हो कि अगर परी तुमसे प्रसन्न हो जाए तो पहले उसे मेरे पास

197
00:13:32,640 --> 00:13:37,120
भेजना 500 साल लग गया श्री राम जी को क्योंकि

198
00:13:37,120 --> 00:13:41,360
श्री राम जी को स्वयं को सिद्ध करने में 500 साल लग गया यह भी कुतर्क कर रहा है

199
00:13:41,360 --> 00:13:45,440
यह व्यक्ति मतलब जो व्यक्ति धर्म का कार्य कर रहा है वह इसलिए धर्म का कार्य ना

200
00:13:45,440 --> 00:13:49,760
करें क्योंकि उसमें बहुत टाइम लगना है अरे तुझ जैसों के लिए ही जन्म हुआ था कृपात्री

201
00:13:49,760 --> 00:13:52,640
जी महाराज का

202
00:13:52,640 --> 00:13:56,640
उन्होंने बताया था ऐसा कहने वालों को अगर 500 साल लग

203
00:13:56,640 --> 00:14:00,880
रहा है तो क्या हम प्रयास करना छोड़ दें? अगर गर्मी का मौसम है तो क्या हम गर्मी

204
00:14:00,880 --> 00:14:04,960
से बचने का उपाय करना छोड़ दें? भले ही कितना भी लगे हमें

205
00:14:04,960 --> 00:14:10,480
तो निरंतर प्रयास करना है ना। कर्मन्यवादी कारस्ते मा फलेशु कदाचना।

206
00:14:10,480 --> 00:14:14,640
भगवान श्री राम को क्योंकि सीता माता को वापस लाने

207
00:14:14,640 --> 00:14:18,720
में इतना इतना समय लग गया था। इसलिए भगवान श्री राम को वो करना ही नहीं चाहिए

208
00:14:18,720 --> 00:14:22,720
था क्योंकि उसमें तो समय लग जाता है तो उन्हें प्रयास करना ही नहीं चाहिए क्योंकि

209
00:14:22,720 --> 00:14:28,720
समय बहुत लगने वाला है इसलिए हमें प्रयास अभी से बंद कर देना चाहिए

210
00:14:28,880 --> 00:14:33,040
क्योंकि गर्मी बहुत ज्यादा है इसलिए हम गर्मी से बचने का प्रयास बंद कर देना चाहिए

211
00:14:33,040 --> 00:14:37,600
क्योंकि कलयुग में सभी स्त्रियां व्यभचारणीय हो जाएंगी इसलिए

212
00:14:37,600 --> 00:14:41,600
स्त्रियों को व्यभचारी होने से पुरुषों को व्यभचारी होने से रोक

213
00:14:41,600 --> 00:14:46,080
देना रोकना बंद कर देना चाहिए प्रयास बंद कर देना चाहिए धर्म की संस्थापना

214
00:14:46,080 --> 00:14:50,080
करना बंद कर देना चाहिए। कलयुग में अंतिम चरण पर जो

215
00:14:50,080 --> 00:14:54,080
अधर्म होगा वह अपनी पराकाष्ठा पर होगा। तो हमें हाथ पर हाथ धर के बैठ जाना

216
00:14:54,080 --> 00:14:58,080
चाहिए। वही तो कह रहा है यह कि श्री राम जी को जब 500 साल लग गए तो

217
00:14:58,080 --> 00:15:02,480
हमें तो 50 500 साल लगेंगे। यह सबको तर्क कर रहा है और यह गुप्ताचार्य

218
00:15:02,480 --> 00:15:06,480
बैठकर के अपने उस बृजेश पाठक का समर्थन कर रहा है। और सुनो

219
00:15:06,480 --> 00:15:10,480
इसकी टेक्निक क्या है? टेक्निक यह है कि भले ही बृजेश पाठक

220
00:15:10,480 --> 00:15:14,800
ने उसमें तमाम सारे तमाम सारे कुतर्क किए हो

221
00:15:14,800 --> 00:15:18,960
मगर पहले से पहले उस कॉल रिकॉर्डिंग को अपने वक्तव्यों के साथ

222
00:15:18,960 --> 00:15:23,200
रखते हुए पहले से ही पृष्ठभूमि तैयार करते हुए कॉल रिकॉर्डिंग

223
00:15:23,200 --> 00:15:27,840
प्रस्तुत कर दी जिससे हम बन गए सत्यनारायण सत्यवादी

224
00:15:27,840 --> 00:15:31,840
हरिश्चंद्र बन गए क्यों देखो मैंने ही तो कॉल रिकॉर्डिंग तुम्हें सुनाई है और

225
00:15:31,840 --> 00:15:35,840
पृष्ठभूमि पहले से बना दी पहले से एक वातावरण ऐसा बनाया

226
00:15:35,840 --> 00:15:39,840
उस कॉल रिकॉर्डिंग के लिए जिससे कि व्यक्ति उसको सुनने से पहले ही अपना मन ये

227
00:15:39,840 --> 00:15:43,840
बना ले कि हां उस कॉल रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी बातें सुनने वाले हैं। और जब वो

228
00:15:43,840 --> 00:15:44,340
कॉल

229
00:15:44,080 --> 00:15:48,480
रिकॉर्डिंग को सुने तब वो पहले न्याय को ना देखे। धर्म को ना देखे। पहले

230
00:15:48,480 --> 00:15:52,720
भागवतानंद ने जो उसके लिए जो प्रीफिक्स लगाया है उसको देखे।

231
00:15:52,720 --> 00:15:56,720
है ना? जैसे कहीं पर खून का मुकदमा चल रहा है और सामने

232
00:15:56,720 --> 00:16:00,800
वाला एक आरोपी है जो कटघरी में खड़ा हुआ है। तो

233
00:16:00,800 --> 00:16:04,880
जो अधिवक्ता गण है वो न्यायाधीश को यह नहीं

234
00:16:04,880 --> 00:16:09,440
बता रहे हैं कि ये कैसे सिद्ध होता है कि इस व्यक्ति ने हत्या की है। बल्कि

235
00:16:09,440 --> 00:16:13,520
वो उसको दिखा रहे हैं। देखो हत्या कितनी निशंस तरीके से हुई है। कितनी

236
00:16:13,520 --> 00:16:17,520
निर्दयी तरीके से मारा गया। देखिए कितनी बार चाकू गोदा गया है। जिससे

237
00:16:17,520 --> 00:16:21,520
कि इतनी इतना द्वेष इतनी नफरत आरोपी

238
00:16:21,520 --> 00:16:26,080
के लिए पहले से ही न्यायाधीश के मन में आ जाए कि वह न्याय करते समय

239
00:16:26,080 --> 00:16:30,240
इस द्वेष को पहले देखे और न्याय को बाद में।

240
00:16:30,240 --> 00:16:36,240
तो इसीलिए हमने बताया आपको कि दोगलापन कंटिन्यू। जय श्री राम।

241
00:16:38,430 --> 00:16:42,430
[संगीत]
