1
00:00:01,840 --> 00:00:06,080
तो शंकर परंपरा पर शंकर

2
00:00:06,080 --> 00:00:10,080
परंपरा के मान्य आचार्यों शंकराचार्यों पे फता

3
00:00:10,080 --> 00:00:14,560
के साथ अमर्यादित रूप से टिप्पणी करने के लिए

4
00:00:14,560 --> 00:00:18,640
और व्यक्तिगत रूप से पीएन मिश्रा जी पर टिप्पणी करने

5
00:00:18,640 --> 00:00:22,880
के लिए फुवरता भरी हुई टिप्पणियां करने के लिए पीएन मिश्रा

6
00:00:22,880 --> 00:00:27,280
जी ने भागवतानंद को शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दे डाली है।

7
00:00:27,280 --> 00:00:31,360
अब भागवत आनंद का वही पुराना प्रलाप चालू हो गया कि भाई जो

8
00:00:31,360 --> 00:00:35,600
अमुक को नहीं मानता है मैं उसके साथ शास्त्रार्थ क्यों करूं? जो अमुक को नहीं मानता

9
00:00:35,600 --> 00:00:39,760
है मैं उसके साथ शास्त्रार्थ क्यों करूं? अरे भाई यह कहां लिखा है कि जो अमुक को नहीं

10
00:00:39,760 --> 00:00:44,400
मानता है उसके साथ शास्त्रार्थ क्यों नहीं होगा क्यों होगा? अथवा क्यों नहीं होगा?

11
00:00:44,400 --> 00:00:48,800
पी.एन मिश्र जी ने शास्त्रार्थ की जो चुनौती दी है। तो जो व्यक्ति आदि शंकराचार्य

12
00:00:48,800 --> 00:00:53,120
के भाष्य और महर्षि वादरायण के भाष्य से असहमति रख सकता हो ऐसे व्यक्ति से शास्त्रार्थ

13
00:00:53,120 --> 00:00:57,120
करने की योग्यता हमारी कैसे हो सकती? अच्छा यदि वह अमुक को मानने का

14
00:00:57,120 --> 00:01:01,200
दावा कर रहा है और तुमने यह तय किया है कि वह अमुक को नहीं मानता

15
00:01:01,200 --> 00:01:05,440
तो शास्त्रार्थ करके उसको शास्त्रार्थ में निरुत्तर कर दो ना कि तुम्हारा यह

16
00:01:05,440 --> 00:01:09,520
दावा जो है गलत है झूठा है। तुम अमुक को मानने का दावा

17
00:01:09,520 --> 00:01:13,520
कर रहे हो मगर अमुक को अमुक को नहीं मानते हो। तुम वेद को मानने का दावा

18
00:01:13,520 --> 00:01:16,960
कर रहे हो गुरु चंद्र दास मगर तुम वेद को नहीं मानते हो उसको निरुत्तर

19
00:01:16,960 --> 00:01:20,960
करो ना जाके और शास्त्रार्थ होता किसके बीच में है?

20
00:01:20,960 --> 00:01:25,760
दो एक मत को मानने वालों में या दो अलग-अलग विचारधाराओं

21
00:01:25,760 --> 00:01:28,240
में

22
00:01:28,240 --> 00:01:32,400
तुम यदि ये सोच रहे हो कि पीएन मिश्रा जी भगवत आदि

23
00:01:32,400 --> 00:01:38,400
शंकराचार्य भगवान को नहीं मानते हैं तो तुम उनको शास्त्रार्थ में निरुत्तर करो ना

24
00:01:38,640 --> 00:01:42,880
क्या हुआ बाबू सामना करने लायक दूध नहीं मिला क्या बचपन

25
00:01:42,880 --> 00:01:47,120
में पोषण के साथ ह माताजी ने निष्ठा पूर्वक

26
00:01:47,120 --> 00:01:51,120
दूध नहीं पिलाया क्या बचपन में जो किसी का सामना

27
00:01:51,120 --> 00:01:55,120
कर पाओ मैं गुरु चरण दास का सामना इसलिए नहीं करूंगा कि वह अमुक

28
00:01:55,120 --> 00:01:59,600
को मानता मानता ही नहीं है तो मैं क्या शास्त्रार्थ करूं मैं पीएन मिश्रा जी का

29
00:01:59,600 --> 00:02:04,000
सामना इसलिए नहीं करूंगा क्योंकि मैं वो अमुक को मानता ही नहीं है तो मैं क्या शास्त्रार्थ

30
00:02:04,000 --> 00:02:08,080
करूं मैं शिवश नारायण द्विवेदी के तो सामने जिंदगी में जीवन

31
00:02:08,080 --> 00:02:12,080
में झांकूंगा तक नहीं क्योंकि वो तो खाल उधेड़ के

32
00:02:12,080 --> 00:02:16,320
रख देगा है ना इसका अगला प्रलाप क्या है कि

33
00:02:16,320 --> 00:02:20,720
मैं यहीं से उत्तर दे रहा हूं तो ठीक है इस विषय पर हमको जो कहना है वह अब आप आगे

34
00:02:20,720 --> 00:02:24,960
श्रवण कर सकते हैं। मैं चाहता तो इसका व्यक्तिगत उत्तर भी मैं दे सकता था और

35
00:02:24,960 --> 00:02:29,040
लघु उत्तर तो मैंने 2ाई मिनट का या पौ/ 3 मिनट का एक प्रसारण ऑडियो

36
00:02:29,040 --> 00:02:32,320
मैसेज के माध्यम से उनको भिजवा दिया है। लेकिन इसमें जिन बिंदुओं

37
00:02:32,320 --> 00:02:36,400
पर उन्होंने एक बात कही है। उन बिंदुओं का मैं सार्वजनिक उत्तर भी देना चाहता हूं। जब

38
00:02:36,400 --> 00:02:40,480
तुझे शास्त्रार्थ करना नहीं है। जो व्यक्ति तेरे हिसाब से भगवत

39
00:02:40,480 --> 00:02:44,880
पाद आदि शंकराचार्य भगवान को नहीं मानता है। इसलिए तू उससे शास्त्रार्थ

40
00:02:44,880 --> 00:02:49,360
नहीं करेगा। तो अपना पक्ष क्यों रख रहा है? उन उन विषयों पर जो जो विषय उन्होंने शास्त्रार्थ

41
00:02:49,360 --> 00:02:53,440
के लिए प्रस्तुत किए हैं। क्यों रख रहा है बंद कमरे

42
00:02:53,440 --> 00:02:57,520
में? क्योंकि तू कायर है। क्योंकि तू दोगला है। तू

43
00:02:57,520 --> 00:03:01,600
सामने जाकर के वो पक्ष नहीं रखेगा जो बंद कमरे में रख लेगा। इसलिए

44
00:03:01,600 --> 00:03:05,840
तू बंद कमरे में अपना पक्ष रख रहा है। हां। अरे भैया

45
00:03:05,840 --> 00:03:11,360
यही पक्ष जो तू यहां रख रहा है यही पक्ष सामने जाके रखना।

46
00:03:11,360 --> 00:03:15,440
कि वो मंदिर के अंदर इसको ले गए, उसको ले गए। यही सारे पक्ष तू सामने

47
00:03:15,440 --> 00:03:20,080
जाकर रख दे। तेरा पक्ष मजबूत है। तू सत्य पे है। रख दे।

48
00:03:20,080 --> 00:03:24,160
पर नहीं रखेगा। तुझे मालूम है तेरी ढोल में पोल है। तू

49
00:03:24,160 --> 00:03:28,240
कायर है। तू दोगला है। कुपोषित है। नहीं

50
00:03:28,240 --> 00:03:32,240
रखेगा। केवल मुंह चलाना आता है। केवल मुंह चलाना है। मुंह चलवा लो

51
00:03:32,240 --> 00:03:37,760
बस। कुछ करने की बारी आएगी तो अब्बा डब्बा चब्बा।

52
00:03:37,760 --> 00:03:41,840
अच्छा अब ये क्या कह रहा है? यह वही प्रलाप कर रहा है जो कुछ दिनों पहले

53
00:03:41,840 --> 00:03:46,080
अलंकार समाजियों ने चालू किया था कि भैया श्रृंगेरी मठ में तो

54
00:03:46,080 --> 00:03:51,760
टीपू सुल्तान की सहायता की गई थी। वीडियो बनाया था हमने मुंह तोड़ वीडियो

55
00:03:51,760 --> 00:03:56,000
हैं। मैं जो भी कह रहा हूं वो श्रृंगेरी मठ की ऑफिशियल

56
00:03:56,000 --> 00:04:00,240
वेबसाइट के आधार पे कह रहा हूं। मैं अपने मन से नहीं कह रहा हूं। अब श्रृंगेरी मठ वाले

57
00:04:00,240 --> 00:04:04,560
अगर अपने बारे में नहीं जानते तो फिर इसमें मेरी क्या गलती है? अगर सत्यता श्रृंगेरी

58
00:04:04,560 --> 00:04:08,640
मठ वाले नहीं जानते तो इसमें मेरी क्या गलती है? या तो यह सब बातें हम

59
00:04:08,640 --> 00:04:12,640
नहीं कह रहे यह श्रृंगेरी की वेबसाइट कह रही है। तो जो टीएन मिश्र हैं वो ऐसा

60
00:04:12,640 --> 00:04:16,880
करें कि चाहे तो भारत तीर्थ जी के पास चले जाए या विश्व शेखर जी के पास चले जावे

61
00:04:16,880 --> 00:04:21,280
और कहें कि आप गलत लिखे हैं इसीलिए अपनी वेबसाइट में सुधार कर लें। क्योंकि भैया हमने श्रृंगेर

62
00:04:21,280 --> 00:04:25,360
की वेबसाइट में जो पढ़ा सो हमने लिखा वो हमने कहा अब अगर श्रृंगेरी की

63
00:04:25,360 --> 00:04:26,480
वेबसाइट अगर अपनी पीठ और

64
00:04:26,480 --> 00:04:30,560
इतिहास के बारे में झूठ बोल रही है तो इसके उत्तरदाई हम नहीं। श्रृंगेरी मठ की ऑफिशियल

65
00:04:30,560 --> 00:04:34,640
वेबसाइट के आधार पर जो तू व्याख्या कर रहा है वो तेरी मनमुखी

66
00:04:34,640 --> 00:04:38,800
व्याख्या है धूर्त वो व्याख्या तूने श्रृंगेरी मठ वालों से मैच कराई

67
00:04:38,800 --> 00:04:43,120
क्या सत्यापन कराया क्या कि मैं आपके लिखे हुए इस पैराग्राफ का

68
00:04:43,120 --> 00:04:47,680
ये मतलब समझ रहा हूं तूने कहा कि

69
00:04:47,680 --> 00:04:51,680
अ उस पूरे लेख में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि टीपू

70
00:04:51,680 --> 00:04:55,680
सुल्तान के लिए यज्ञ नहीं किया गया था तो यह लिखा है क्या कि टीपू सुल्तान

71
00:04:55,680 --> 00:04:59,840
के लिए यज्ञ किया गया था वो यज्ञ प्रजा के लिए किया गया था।

72
00:04:59,840 --> 00:05:04,080
प्रजा के हित में किए गए यज्ञ की अनुभूति सकारात्मक

73
00:05:04,080 --> 00:05:08,160
अनुभूति आंशिक रूप से टीपू सुल्तान को भी

74
00:05:08,160 --> 00:05:12,320
हुई थी। तो उसके द्वारा व्यक्त किए गए भाव को उस उस लेख में बताया

75
00:05:12,320 --> 00:05:16,640
गया है। क्या यह कहा गया है कि वो जो यज्ञ था वो इसलिए

76
00:05:16,640 --> 00:05:21,600
किया गया था कि टीपू सुल्तान जो है हिंदू राजाओं पर जीत प्राप्त कर ले।

77
00:05:21,600 --> 00:05:24,240
अब सुन

78
00:05:24,240 --> 00:05:28,560
अब अब करते हैं बात कांटे की। अकाट्य याद है ना अकाट्य

79
00:05:28,560 --> 00:05:32,720
छोडूंगा नहीं मैं हूं तेरे पीछे छोडूंगा

80
00:05:32,720 --> 00:05:36,960
नहीं तुझे क्या लगता है मैं व्यस्त हो गया ये रामपालियों

81
00:05:36,960 --> 00:05:41,200
में तो तुझको छोड़ दिया है नहीं छोडूंगा नहीं तो अकाट

82
00:05:41,200 --> 00:05:41,700
टेप बात

83
00:05:41,680 --> 00:05:45,680
सुन जहां से तूने ये बात उठाई है जिस ऑफिशियल

84
00:05:45,680 --> 00:05:49,920
वेबसाइट से ना वो वेबसाइट तेरे लिए प्रमाण है ना तो

85
00:05:49,920 --> 00:05:53,920
यदि तेरे लिए शंगेरी की वेबसाइट प्रमाण है जहां से

86
00:05:53,920 --> 00:05:58,080
तू यह सिद्ध करना चाह रहा है कि शंगेरी मठ के जो शंकराचार्य थे तत्कालीन

87
00:05:58,080 --> 00:06:02,960
उन्होंने टीपू सुल्तान से मदद ली थी या उसके लिए यज्ञ किया था तो मूर्ख

88
00:06:02,960 --> 00:06:07,360
उसी ऑफिशियल वेबसाइट में उसी लेख लेख के क्रम में

89
00:06:07,360 --> 00:06:11,440
ये लिखा हुआ है कि शास्त्रार्थ के समय जब पर्दा हटा

90
00:06:11,440 --> 00:06:15,680
के देखा गया था तो वहां पर स्वयं शारदा मां विद्यमान थी और वही

91
00:06:15,680 --> 00:06:19,760
रूप बदलकर के शंगेरी पीठ के तत्कालीन शंकराचार्य के रूप में

92
00:06:19,760 --> 00:06:24,080
विराजमान हुई थी। ये मानता है कि नहीं तू मानता है? उसी

93
00:06:24,080 --> 00:06:28,400
ऑफिशियल वेबसाइट में है। तो अब अगर तू यह मानता है तो तेरे

94
00:06:28,400 --> 00:06:32,880
अनुसार जो यह अन्न दोष लगा है वह

95
00:06:32,880 --> 00:06:36,880
शारदा मां को लगा है। यानी कि शारदा मां ने गलत किया। शारदा

96
00:06:36,880 --> 00:06:41,200
मां ने टीपू सुल्तान की सहायता की। शारदा मां ने टीपू सुल्तान

97
00:06:41,200 --> 00:06:45,280
के लिए यज्ञ करवाया। शारदा माता ने

98
00:06:45,280 --> 00:06:49,280
है ना? तो तेरे हिसाब से वो शारदा माता शारदा माता नहीं

99
00:06:49,280 --> 00:06:53,360
होंगी। अब तू यह कहने लगेगा तो या तो अब तू जब

100
00:06:53,360 --> 00:06:56,800
यह कहेगा कि नहीं मैं नहीं मानता मां शारदा मां थी शंकराचार्य के

101
00:06:56,800 --> 00:07:00,800
लिए तो यानी कि तू यह नहीं मानता कि वहां सब सच लिखा है तो फिर

102
00:07:00,800 --> 00:07:05,120
यह क्यों मानता है क्योंकि तुझे शंकर परंपरा के प्रति लोगों को अनास्थावान

103
00:07:05,120 --> 00:07:09,280
बना के बना बना के बना के अपना परचम लहराना है। यह

104
00:07:09,280 --> 00:07:13,520
सोचे समझे बिना कि शंकराचार्यों के प्रति

105
00:07:13,520 --> 00:07:17,600
यदि मैं लोगों को अनास्थावान बना दूंगा तो जो

106
00:07:17,600 --> 00:07:21,920
अकाट्य सिद्धांत ऐसे सिद्धांत, ऐसे सार्वभौम

107
00:07:21,920 --> 00:07:26,560
सिद्धांत जिनके सामने संसार का कोई भी

108
00:07:26,560 --> 00:07:31,360
सनातन विरोधी तंत्र टिक नहीं सकता। मैं उन सिद्धांतों

109
00:07:31,360 --> 00:07:35,360
के प्रति लोगों को अनास्थावान बना दूंगा। यह सोचना

110
00:07:35,360 --> 00:07:39,920
भूल गया तू मूर्ख। क्योंकि तेरे लिए धर्म

111
00:07:39,920 --> 00:07:44,080
श्रेष्ठतम नहीं है। तेरे लिए अपनी वर्चस्वता,

112
00:07:44,080 --> 00:07:48,640
अपनी ख्याति, अपनी स्थापना वो

113
00:07:48,640 --> 00:07:52,720
प्राथमिकता है। बाकी बातें मैं खूब बनाऊंगा।

114
00:07:52,720 --> 00:07:56,800
मैं बहुत बड़ा धर्मज्ञ हूं, धर्म प्रेमी हूं। और समय आने पर

115
00:07:56,800 --> 00:08:01,120
झूठ तो ऐसे निकलेगा जीवा से जैसे गीली माटी में हल चलता है ना।

116
00:08:01,120 --> 00:08:05,440
ऐसे झूठ निकलेंगे कि आदित्य प्रकाश सिंह के द्वारा

117
00:08:05,440 --> 00:08:09,600
आदित्य सिंह के द्वारा शिवश नारायण द्विवेदी ने मेरे घर की स्त्रियों

118
00:08:09,600 --> 00:08:12,000
को गाली दिलवा दी। सिद्ध

119
00:08:12,000 --> 00:08:16,240
कर जीते जिए सिद्ध करके जाना कि शिवश

120
00:08:16,240 --> 00:08:20,640
नारायण द्विवेदी ने तेरे घर की मातृशक्तियों को गाली दिलवाई थी।

121
00:08:20,640 --> 00:08:24,640
चुनौती दे रहा हूं तुझे मैं। कर शपथ गंगा में

122
00:08:24,640 --> 00:08:29,040
उतर के दिलवाई है। नहीं दिलवाई तो माफी मांग।

123
00:08:29,040 --> 00:08:33,120
कि मैंने गलत बोला। जीतने के लिए

124
00:08:33,120 --> 00:08:38,160
शपथ का बहुत शौक है ना तेरी यह शपथ भी मैं देख लेता हूं। शपथ बाद

125
00:08:38,160 --> 00:08:42,960
जनेऊ हाथ में गंगा में उतर के खा शपथ

126
00:08:42,960 --> 00:08:47,200
खा शपथ शिवश नारायण द त्रिवेदी ने तेरे घर की स्त्रियों को गाली दिलवाई

127
00:08:47,200 --> 00:08:53,200
है आदित्य सिंह के द्वारा

128
00:08:53,600 --> 00:08:58,240
रामपालियों में व्यस्त हूं। बताता हूं मैं तुझको रुक जा।

129
00:08:58,240 --> 00:09:02,240
जय श्री राम। [संगीत]
