1
00:00:02,400 --> 00:00:06,480
अच्छा भैया मेरा आपसे एक सवाल है मतलब जो मेरे मन में बहुत दिनों से यह चाह

2
00:00:06,480 --> 00:00:12,400
रहा है मैं आपसे पूछूं तो भैया ये बताइए हमें गीता क्यों पढ़ना चाहिए आखिर

3
00:00:12,400 --> 00:00:16,800
देखो ये तो एक प्रश्न हो गया कि सब लोग हमसे कहते हैं कि गीता पढ़ो

4
00:00:16,800 --> 00:00:20,880
जी और तुम्हारे मन में ये सवाल आता होगा कि गीता क्यों

5
00:00:20,880 --> 00:00:24,880
पढ़ना चाहिए? बिल्कुल मगर आपके

6
00:00:24,880 --> 00:00:29,040
मन में इसके अलावा और भी बहुत से सवाल आते होंगे।

7
00:00:29,040 --> 00:00:35,040
जी दुख आता होगा, कष्ट आता होगा कि यह दुख मुझे क्यों हो रहा है?

8
00:00:35,200 --> 00:00:39,200
या फिर यह ऐसा क्यों नहीं है? यह ऐसा होना चाहिए।

9
00:00:39,200 --> 00:00:45,200
यह वैसा क्यों नहीं है? और कई बार ये आता होगा कि

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00:00:45,440 --> 00:00:49,520
मैं मृत्यु को लेकर के चिंता आती होगी। किसी के

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00:00:49,520 --> 00:00:53,680
बिछड़ जाने की चिंता आती होगी। कोई कुछ चीजें

12
00:00:53,680 --> 00:00:57,760
होंगी जो प्राप्त ना कर पाने के निमित्त आपके मन में

13
00:00:57,760 --> 00:01:01,760
चिंता उमड़ती होगी। तो क्या है कि

14
00:01:01,760 --> 00:01:05,920
यह सारी चिंताएं आपके अंदर आ रही है। कभी आप इस

15
00:01:05,920 --> 00:01:09,920
पर विचार करो कि ये चिंताएं मेरे अंदर क्यों आ रही और मैं चाहती

16
00:01:09,920 --> 00:01:14,160
क्या हूं वास्तविकता? तब एक आंसर आएगा। वो आंसर

17
00:01:14,160 --> 00:01:17,600
लिखा हुआ है प्रधानिक उपनिषद एक तीन 28

18
00:01:17,600 --> 00:01:23,040
में असतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिगमया मृत्युमाया

19
00:01:23,040 --> 00:01:27,360
अगर इसका इसका सारांश निकालेंगे तो एक ही सारांश आपको प्राप्त होगा

20
00:01:27,360 --> 00:01:31,680
वो क्या है कि आप वास्तविकता में

21
00:01:31,680 --> 00:01:35,920
सत स्वरूप सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर यानी कि भगवान को ढूंढ

22
00:01:35,920 --> 00:01:40,000
रहे हो आप एसी में टीवी में फ्रिज में कार में स्कूटर

23
00:01:40,000 --> 00:01:44,160
में मोटरसाइकिल में मकान में अपने में, पराए

24
00:01:44,160 --> 00:01:48,320
में, मिठाई में, रोटी में, पकवान में, बर्गर में,

25
00:01:48,320 --> 00:01:52,480
पिज़्ज़ा में, मैकडोनाल्ड्स में हर जगह आप केवल

26
00:01:52,480 --> 00:01:57,520
और केवल भगवान को ही ढूंढ रहे हो। क्यों ढूंढ रहे हो?

27
00:01:57,520 --> 00:02:01,840
क्योंकि आपके आपके अंदर एक इच्छा है कि मैं कभी दुखी

28
00:02:01,840 --> 00:02:06,400
ना हो। तो कौन है जो कभी दुखी नहीं होता है? भगवान।

29
00:02:06,400 --> 00:02:10,480
हम आपके अंदर एक इच्छा है कि मैं कभी बीमार ना पडू। मैं कभी

30
00:02:10,480 --> 00:02:15,200
मृत्यु को प्राप्त ना हो। तो कौन है जो कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता है?

31
00:02:15,200 --> 00:02:19,200
हां। आपके अंदर एक इच्छा है कि मुझे यह भी पता चल

32
00:02:19,200 --> 00:02:23,520
जाए। मुझे वो भी पता चल जाए। मैं तो भविष्य भी देख लूं। तो कौन है

33
00:02:23,520 --> 00:02:28,160
जिसको सब कुछ पता है? भगवान। आपके अंदर एक इच्छा है

34
00:02:28,160 --> 00:02:32,320
कि भैया मैं अभी घर जाना है। मुझे पैदल जाना है बाय वॉकिंग

35
00:02:32,320 --> 00:02:32,960
जाना है।

36
00:02:32,960 --> 00:02:37,040
तो ये धूप बहुत ज्यादा पड़ रही है। तो थोड़ी कम हो जाए। पदरी छा जाए।

37
00:02:37,040 --> 00:02:41,440
तो इसका अर्थ क्या है? कौन है जो मौसम को कंट्रोल कर सकता है? भगवान

38
00:02:41,440 --> 00:02:45,680
यानी कि एन केन प्रकारन आप हर बात में भगवान

39
00:02:45,680 --> 00:02:49,760
को ही खोज रहे हो। बस प्रॉब्लम यह है कि आप

40
00:02:49,760 --> 00:02:54,000
जानते नहीं हो कि आप भगवान को खोज रहे हो। इसलिए

41
00:02:54,000 --> 00:02:58,000
आप एसी में दिमाग लगा रहे हो। आप चिंतन नहीं कर रहे हो कि मेरी

42
00:02:58,000 --> 00:03:02,240
ये वास्तव में ये जो प्यास आ रही है मेरे अंदर ये कहां से बुझेगी? आप

43
00:03:02,240 --> 00:03:06,400
सोचते हो क्षणिक विचार आया एसी लेना है एसी के पीछे परेशान

44
00:03:06,400 --> 00:03:10,480
आप क्षणिक विचार आया कि मेरे को मोटरसाइकिल लेनी है कार लेना है

45
00:03:10,480 --> 00:03:14,560
स्कूटी लेनी है मकान लेना है तो उसके लिए परेशान तो आप अपने

46
00:03:14,560 --> 00:03:18,640
आपको समय नहीं दे रहे हो कि वास्तविकता में ये

47
00:03:18,640 --> 00:03:22,720
चिंता मेरे अंदर क्यों आ रही है क्यों बार-बार मैं चीजों को पटक रहा हूं

48
00:03:22,720 --> 00:03:26,880
क्यों क्योंकि जैसे ही आपने एसी ले लिया थोड़ी देर बाद आपको एसी से मुंह खत्म हो जाएगा

49
00:03:26,880 --> 00:03:30,960
आपको रसगुल्ले की बड़ी चाह है थोड़ी देर बाद वही रसगुल्ला आपका शत्रु

50
00:03:30,960 --> 00:03:35,040
बन जाएगा तो इसका अर्थ क्या है कि आप

51
00:03:35,040 --> 00:03:39,120
यह नहीं चाहते हो जो जिनके पीछे आप परेशान है। आप

52
00:03:39,120 --> 00:03:43,200
चाहते हो अनंत सुख और ये चीजें आपको अनंत सुख नहीं दे रही।

53
00:03:43,200 --> 00:03:47,360
ये चीजें आपको खत्म हो जाने वाला सुख दे रही है। क्षणिक सुख दे रही है

54
00:03:47,360 --> 00:03:48,080
जो नष्ट हो

55
00:03:48,080 --> 00:03:52,160
जाता है। और थोड़ी देर में वही चीज जो अभी सुख का कारण थी वो आपके दुख

56
00:03:52,160 --> 00:03:56,320
का भी कारण बन जाती है। क्योंकि अरे खत्म क्यों? फिल्म

57
00:03:56,320 --> 00:04:01,280
खत्म क्यों हो गई? अच्छी बलि तो चल रही थी। तो

58
00:04:01,280 --> 00:04:06,000
भगवत गीता में आपके इसी चिंतन का

59
00:04:06,000 --> 00:04:10,000
समाधान है। इसलिए हमें भगवत गीता पढ़नी चाहिए। किस

60
00:04:10,000 --> 00:04:14,160
चिंतन का समाधान? कि हमें वास्तविकता में चाहिए क्या?

61
00:04:14,160 --> 00:04:19,440
सतचित आनंद। हमें वास्तव में चाहिए क्या? भगवान।

62
00:04:19,440 --> 00:04:24,560
तो भगवान कैसे हैं? भगवान की पहचान

63
00:04:24,560 --> 00:04:28,720
यानी कि ब्रह्म। और भगवान को प्राप्त कैसे

64
00:04:28,720 --> 00:04:32,960
किया जाएगा? यानी कि धर्म। इन दोनों की व्याख्या भगवत

65
00:04:32,960 --> 00:04:37,520
गीता में है। इसलिए हमको भगवत गीता पढ़नी

66
00:04:37,520 --> 00:04:41,520
चाहिए। क्योंकि इन दोनों सवालों के जवाब कि भगवान कैसे हैं? उनका

67
00:04:41,520 --> 00:04:45,680
स्वरूप क्या है? वो किस-किस प्रकार से दिखते हैं या नहीं दिखते

68
00:04:45,680 --> 00:04:49,680
हैं। आप समझ पाओगे वो तत्व क्या है जिसको मैं लेने जा

69
00:04:49,680 --> 00:04:54,720
रहा हूं। जब आप उसको पहचान लोगे अच्छे से तभी तो आप उसको प्राप्त करने के लिए निकलोगे।

70
00:04:54,720 --> 00:04:58,880
और जब आपने पहचान लिया तो अब उसको प्राप्त कैसे

71
00:04:58,880 --> 00:05:02,880
करूं? तो ये दोनों चीजों की व्याख्या बहुत ही सरलता

72
00:05:02,880 --> 00:05:03,440
पूर्ण

73
00:05:03,440 --> 00:05:07,520
तार्किक दृष्टि से व्यवहारिक दृष्टि से पारमार्थिक दृष्टि से

74
00:05:07,520 --> 00:05:11,680
हर हर प्रकार से भगवत गीता में की गई है। इसलिए हमें भगवत गीता

75
00:05:11,680 --> 00:05:15,680
पढ़नी चाहिए। [संगीत]
