1
00:00:06,960 --> 00:00:11,520
हां भाई बाबू बहुत बढ़िया आ गए करत करत अभ्यास ते

2
00:00:11,520 --> 00:00:16,480
जड़मती होत सुरान रड़ी आवत जात ते सिल पर निशान

3
00:00:16,480 --> 00:00:22,480
डडी डडीिकेशन तो मानना पड़ेगा बाबू तुम्हारा

4
00:00:22,480 --> 00:00:26,560
मुझे मालूम था बाबू जी जो है

5
00:00:26,560 --> 00:00:30,880
फस गया बेचारा उस में हां

6
00:00:30,880 --> 00:00:35,040
बाबू बताइए रामपाल जी का ज्ञान आपको

7
00:00:35,040 --> 00:00:39,440
क्यों वो लगता है प्रामाणिक

8
00:00:39,440 --> 00:00:43,440
जी बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय

9
00:00:43,440 --> 00:00:47,920
हो बंदी छोड़ कबीर भगवान की जय हो सत साहेब

10
00:00:47,920 --> 00:00:52,400
राम राम आप सभी दर्शकों को सत साहिब ये आपने अभी-अभी

11
00:00:52,400 --> 00:00:57,280
जो कबीर को भगवान और रामपाल को भगवान कहा है

12
00:00:57,280 --> 00:01:01,360
और बंदी छुड़वाने वाला कहा है ये कैसे

13
00:01:01,360 --> 00:01:07,360
आधार पे कहा है जी

14
00:01:07,520 --> 00:01:11,600
बताइए जिस आधार से छुड़ाया जाता है उसी आधार से जिस आधार से छुड़ाया जाता

15
00:01:11,600 --> 00:01:17,600
यानी कि यानी कि कबीर जो है वो ईश्वर है

16
00:01:18,320 --> 00:01:23,600
जी जी सर्वशक्तिमान है तो देखिए हम

17
00:01:23,600 --> 00:01:27,680
आपसे बहुत कठिन से जुड़े हैं तो आपसे हम सर्वप्रथम

18
00:01:27,680 --> 00:01:31,760
हम एक दिक्कत है आप सिर्फ यहां पे अभी भगवान मत कहिए मेरे चैनल

19
00:01:31,760 --> 00:01:36,000
पे अपने शब्द वापस ले लीजिए या फिर भगवान

20
00:01:36,000 --> 00:01:40,400
सिद्ध करिए पहले हमने हमने हमने जो

21
00:01:40,400 --> 00:01:44,400
बोला है तो हमने अपने गुरु को अपने भगवान को प्रणाम किया हमने तो आपको कुछ

22
00:01:44,400 --> 00:01:48,480
नहीं बोला भगवान किसी का अलग नहीं हो सकता है सबका भगवान एक ही हो

23
00:01:48,480 --> 00:01:52,960
सकता है किसी का अलग नहीं हो सकता है आप आप जिसको यहां भगवान कह रहे हैं

24
00:01:52,960 --> 00:01:57,280
भगवान के रूप में प्रचारित कर रहे हैं आप उसको भगवान फिर सिद्ध करिए या तो अपने शब्द वापस

25
00:01:57,280 --> 00:02:01,280
लीजिए हमने अपने गुरु को अपने भगवान को

26
00:02:01,280 --> 00:02:05,280
प्रणाम। भाई मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं भगवान श्री राम

27
00:02:05,280 --> 00:02:09,280
की जय। और अगर तुम पूछोगे मैं श्री राम को भगवान सिद्ध

28
00:02:09,280 --> 00:02:13,920
कर दूंगा। सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दूंगा। अब तुम यदि सर्वशक्तिमान

29
00:02:13,920 --> 00:02:18,080
सिद्ध कर पा रहे हो कबीर को तो तुम कहो वरना अपना वापस

30
00:02:18,080 --> 00:02:23,280
ले लो। दूसरी बातें करो। और अपने घर पे खूब लो राम।

31
00:02:23,280 --> 00:02:27,520
अपने घर पे जाके आप खूब नाम लीजिए उनका। अच्छा अच्छा

32
00:02:27,520 --> 00:02:33,440
कोई बात नहीं तो आपने श्री राम सिद्ध करेंगे ना सक्षम

33
00:02:33,440 --> 00:02:34,080
फिलहाल

34
00:02:34,080 --> 00:02:38,880
आपने ये कहा है ना फिलहाल आपने ये माना है ना

35
00:02:38,880 --> 00:02:43,360
हम करेंगे सिद्ध फिलहाल आपने शुरुआत की है तो आपको सिद्ध करना है

36
00:02:43,360 --> 00:02:47,600
करेंगे ठीक नहीं हम हम उसको हम सिद्ध

37
00:02:47,600 --> 00:02:51,600
करेंगे लेकिन हम ये कह रहे हैं कि आपने बोला है कि हम सर्वशक्तिमान सिद्ध करेंगे

38
00:02:51,600 --> 00:02:55,680
श्री राम को ठीक है तो आप करिए लेकिन इस

39
00:02:55,680 --> 00:02:59,920
इस पर हम आपसे चर्चा करने से पहले हम कुछ बातें रखेंगे अपनी। इसके बाद हम

40
00:02:59,920 --> 00:03:04,240
आपसे चर्चा करेंगे। नहीं नहीं वो बातें आप तब रखिए जब अपने शब्द वापस

41
00:03:04,240 --> 00:03:08,240
लीजिए पहले। हां हम वापस ले लीजिए।

42
00:03:08,240 --> 00:03:12,320
देखिए हम संत रामपाल जी महाराज को अपना गुरु मानते हैं। कबीर साहब

43
00:03:12,320 --> 00:03:16,320
को परमात्मा मानते हैं। हम अपने लिए मानते हैं। हम अपनी बात को अपने पास रख रहे

44
00:03:16,320 --> 00:03:20,320
हैं। अपना वापस लेते हैं। आपसे हमारा उसमें कोई नहीं है। आपके लिए भी परमात्मा सिद्ध

45
00:03:20,320 --> 00:03:24,480
करिए ना। हम हमें यदि आप बता रहे हैं। आप मन में मानिए। आप यदि

46
00:03:24,480 --> 00:03:28,560
हमें बता रहे हैं हमारे सामने कोई असत्य बात करेंगे यदि आप तो हम टोकेंगे ना

47
00:03:28,560 --> 00:03:32,800
आपको आपके लिए भी वो परमात्मा नहीं है उसको

48
00:03:32,800 --> 00:03:36,880
हम हम सिद्ध करेंगे कि कभी परमात्मा अभी अभी अगर आपने पहले वो

49
00:03:36,880 --> 00:03:42,160
पॉइंट नहीं उठाया होता तो हम कुछ ना कहते वो पॉइंट आपने उठाया

50
00:03:42,160 --> 00:03:45,200
हां ठीक है हमने

51
00:03:45,200 --> 00:03:49,200
मैंने आ के कोई क्लेम किया क्या मैंने आ के

52
00:03:49,200 --> 00:03:53,360
कोई क्लेम किया क्या हम सिद्ध करने के लिए तैयार है बात आपको

53
00:03:53,360 --> 00:03:57,520
समझ कर दीजिए ना कर दीजिए बहुत देर थोड़ी ना लगेगी कर दीजिए फिर आगे बढ़िए

54
00:03:57,520 --> 00:04:01,520
चलिए ठीक है ठीक है करेंगे करेंगे थोड़ी रुक जाइए रुक जाइए शांत धैर्य

55
00:04:01,520 --> 00:04:05,600
बना करके देखिए नहीं तो आप आप वो शब्द वापस

56
00:04:05,600 --> 00:04:09,600
ले लीजिए आगे चलते हैं आप कह दीजिए अभी फिलहाल के लिए मैं इस बात को रख

57
00:04:09,600 --> 00:04:13,600
रहा हूं कि मैं उन्हें भगवान नहीं मानता फिर आगे चलिए

58
00:04:13,600 --> 00:04:17,600
नहीं तो अगर भगवान कहा है तो आप सिद्ध करो पहले

59
00:04:17,600 --> 00:04:21,680
मैंने कबीर भगवान 100% मानता हूं हां तो

60
00:04:21,680 --> 00:04:25,920
सिद्ध करो 100 में 99 भी नहीं है। 100% है कि मैं कबीर

61
00:04:25,920 --> 00:04:30,960
परमात्मा को मानता हूं। ठीक है? तो क्या वो सर्वशक्तिमान है?

62
00:04:30,960 --> 00:04:35,120
जी हम माता के गर्भ से जन्म ले सकता

63
00:04:35,120 --> 00:04:39,120
है? नहीं लेता है। तो वो तो

64
00:04:39,120 --> 00:04:43,600
सर्वशक्तिमान नहीं रहा। फिर

65
00:04:43,600 --> 00:04:49,520
कैसे? अरे सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या है?

66
00:04:49,520 --> 00:04:54,000
सर्वशक्तिमान का अर्थ है कि जो सब कुछ कर सकता है हम

67
00:04:54,000 --> 00:04:58,000
तो वो वो गर्भ से जन्म क्यों नहीं ले पा रहा है फिर वो गर्भ

68
00:04:58,000 --> 00:05:02,400
से जन्म उसको लेने की जरूरत क्या है वो तो अपने अपने नीचे से अरे भैया

69
00:05:02,400 --> 00:05:06,400
फिर वही बात हो गई जरूरत ना होना वो थोड़ी ना है मैं कह रहा हूं ले सकता है

70
00:05:06,400 --> 00:05:10,400
कि नहीं कैपेबिलिटी है कि नहीं वो ले सकता है

71
00:05:10,400 --> 00:05:14,560
लेकिन लेता नहीं है क्योंकि उसने उत्पत्ति किया है उसने अपने समक्ष

72
00:05:14,560 --> 00:05:18,800
उत्पत्ति किया है वो लेता नहीं है इस बात इस मर्यादा को तोड़

73
00:05:18,800 --> 00:05:22,880
सकता है कि नहीं? मर्यादा नहीं तोड़ता वो।

74
00:05:22,880 --> 00:05:26,880
वो सर्वशक्तिमान है इसलिए मर्यादा नहीं तोड़ता।

75
00:05:26,880 --> 00:05:31,120
अच्छा ये कहां पर लिखी है परिभाषा?

76
00:05:31,120 --> 00:05:35,200
कबीर सागर में लिखा है। वो सर्वशक्तिमान है।

77
00:05:35,200 --> 00:05:39,360
हां। सर्वशक्तिमान ठीक है। सर्वशक्तिमान भी मर्यादा

78
00:05:39,360 --> 00:05:43,440
किसके लिए होती है? मर्यादा का अर्थ क्या है? मर्यादा

79
00:05:43,440 --> 00:05:48,320
का अर्थ है कि वो इतने इतने के अंतर्गत वो कार्य को करेगा। मर्यादा

80
00:05:48,320 --> 00:05:52,640
मर्यादा की आवश्यकता क्या है? मर्यादा की आवश्यकता

81
00:05:52,640 --> 00:05:56,800
इसलिए है कि जो भी मतलब कार्य होगा एक नियम के आधार से होगा। अरे

82
00:05:56,800 --> 00:05:58,720
क्यों? क्यों

83
00:05:58,720 --> 00:06:02,720
होगा नियम के हिसाब से बताइए? नियम के हिसाब से इसलिए

84
00:06:02,720 --> 00:06:06,880
होगा कि अगर नियम को अगर उल्लंघन करके अगर कोई अगर चल

85
00:06:06,880 --> 00:06:11,680
रहा है तो उसमें कुछ भी हानि हो सकती है। लेकिन अगर

86
00:06:11,680 --> 00:06:16,160
यानी कि यानी कि भगवान को भी हानि होगी। भगवान

87
00:06:16,160 --> 00:06:20,320
को भी भय है। भाई किसी भी चीज की नियम

88
00:06:20,320 --> 00:06:24,560
होती है। अगर नियम तोड़ेगा तो उसका हानि होगी। बाबू मैंने

89
00:06:24,560 --> 00:06:28,880
आपसे क्या पूछा है? भगवान को भी हानि होने का भय है।

90
00:06:28,880 --> 00:06:33,120
बिल्कुल 100% भाई अगर अगर नियम तोड़ेगा तो हानि तो होगा ही। उसमें

91
00:06:33,120 --> 00:06:37,120
कौन सी सत्य बात है? तो क्या हानि होगी उसकी? जैसे जैसे हमने नियम

92
00:06:37,120 --> 00:06:41,120
तोड़ा तो हमें तो मोक्ष नहीं मिलेगा। नरक मिलेगा। उसने

93
00:06:41,120 --> 00:06:46,400
नियम तोड़ा तो उसको क्या मिलेगा? क्या हानि है?

94
00:06:46,400 --> 00:06:50,480
उसको उसको जो जिस कार्य को करेगा अगर वो नियम तोड़ के करेगा तो उसमें

95
00:06:50,480 --> 00:06:54,480
उसका हानि होगी। अरे हानि होगी तो उसको कष्ट होगा।

96
00:06:54,480 --> 00:07:00,480
जैसे हमारी हानि यही है कि हमें कष्ट होगा एट द एंड उसको कष्ट होगा।

97
00:07:00,960 --> 00:07:05,120
उसको कष्ट नहीं होगा क्योंकि उन्होंने सब चीजों को अपने शब्द से उत्पन्न

98
00:07:05,120 --> 00:07:09,200
किया है। मैंने क्या पूछ हानि सिद्ध करो ना भगवान की हानि कैसे

99
00:07:09,200 --> 00:07:13,200
होगी? सिद्ध करो फिर कैसे होगी? हानि ऐसे जैसे मान लीजिए

100
00:07:13,200 --> 00:07:17,440
कि भगवान ने अपने शब्द से उत्पन्न कर लिया। ठीक है? शब्द से

101
00:07:17,440 --> 00:07:21,760
शब्द से उत्पन्न करने के बाद अगर वो अपना रखा है अगर उसको अगर

102
00:07:21,760 --> 00:07:26,080
शब्द को अगर वापस ले लेता है उसने उसका विचार था कि सृष्टि रचे और सृष्टि

103
00:07:26,080 --> 00:07:30,080
ना रच करके अगर शब्द को पूरा वो तोड़ देता है तो उसका सृष्टि

104
00:07:30,080 --> 00:07:34,640
नहीं रची जाएगी। तो इसलिए इसका

105
00:07:34,640 --> 00:07:38,720
मतलब सृष्टि इसका मतलब सृष्टि रचना उसका

106
00:07:38,720 --> 00:07:42,800
लाभ है। सृष्टि रचना से उसे खुशी मिल रही

107
00:07:42,800 --> 00:07:46,800
है। बिल्कुल जब सारे ब्रह्मांडों को उसने उत्पन्न किया है तो

108
00:07:46,800 --> 00:07:51,760
किसी रचना से उसे खुशी मिल रही है। बिल्कुल

109
00:07:51,760 --> 00:07:57,200
अच्छा और सृष्टि रचना नहीं होगी तो उसे दुख होगा।

110
00:07:57,200 --> 00:08:01,440
कौन सी आप कौन सी सृष्टि रचना कह रहे हैं? ये जो हम कोई भी कोई

111
00:08:01,440 --> 00:08:05,440
भी सृष्टि रचना अगर सृष्टि रचना नहीं की उसने

112
00:08:05,440 --> 00:08:09,760
नियमों के विरुद्ध जाने के कारण तो उसे दुख होना मान रहे हो आप। नहीं

113
00:08:09,760 --> 00:08:13,760
ये जो हम लोग यहां पर जो काल भगवान के 21 ब्रह्मांड के अंतर्गत जो सृष्टि

114
00:08:13,760 --> 00:08:17,920
रची जा रही है भाई मैंने कहा कि उसकी उसको कष्ट कैसे

115
00:08:17,920 --> 00:08:22,000
होगा ये बता दो कष्ट होता है कि नहीं होता है पहले ये बता दो कबीर को

116
00:08:22,000 --> 00:08:26,160
कष्ट होता है ना जैसे जैसे कष्ट ऐसे होता है यानी कि भगवान को भी

117
00:08:26,160 --> 00:08:30,160
दुख है भगवान को भी दुख हो सकता है भगवान को

118
00:08:30,160 --> 00:08:34,240
दुख ऐसे होता है कि जैसे हम लोग यहां पर दुखी होते हैं नरक में जाते हैं 84 में जाते

119
00:08:34,240 --> 00:08:38,400
हैं तो हम हम परमा हमने भगवान के अंश है तो

120
00:08:38,400 --> 00:08:42,560
हम लोग जब यहां पर नरक में जाते हैं। अगर चिल रोते हैं, चिल्लाते हैं तो उसको

121
00:08:42,560 --> 00:08:46,720
वहां दुख पहुंचता है कि हमारा यह पुत्र हमारा बच्चा यहां पर नर्क में आज

122
00:08:46,720 --> 00:08:50,720
भटक रहा है। हम हमने जब सही मार्ग बताया इसने नहीं माना था। तो इस बात

123
00:08:50,720 --> 00:08:54,880
यानी कि भगवान में भी अभाव है, दुख है, कमी है, पूर्ण नहीं है फिर

124
00:08:54,880 --> 00:08:58,880
वो वो पूर्ण है। लेकिन उसकी संतान जब यहां पर

125
00:08:58,880 --> 00:09:03,040
दुखी है तो मेरे भाई जो दुखी

126
00:09:03,040 --> 00:09:07,280
है वो मुक्त कहां से हो गया? जो किसी भी कारण से दुखी हो सकता है

127
00:09:07,280 --> 00:09:11,360
वो मुक्त कैसे हो गया? अच्छा आप एक बात आप

128
00:09:11,360 --> 00:09:12,400
एक बात बताओ ऐसे

129
00:09:12,400 --> 00:09:16,480
समझ लो जैसे मान लो कि हम यहां से मुक्त होकर चले गए

130
00:09:16,480 --> 00:09:21,600
तो कहां जाएंगे? भगवान के लोक में जाएंगे ना

131
00:09:21,600 --> 00:09:25,760
भगवान के लोक में जाएंगे ना। हां जी। कबीर के लोक में जाएंगे

132
00:09:25,760 --> 00:09:30,000
ना? तो वहां जाकर के उसके बाद क्या हमें

133
00:09:30,000 --> 00:09:34,080
किसी भी प्रकार का दुख हो सकता है? नहीं वहां

134
00:09:34,080 --> 00:09:38,160
नहीं होता। अच्छा मतलब वहां पर भगवान को दुख

135
00:09:38,160 --> 00:09:41,760
हो सकता है। हमें नहीं हो सकता।

136
00:09:41,760 --> 00:09:46,000
वहां पर सतलोक में कोई दुख नहीं होता। वहां पर भगवान

137
00:09:46,000 --> 00:09:50,080
को दुख जब आप भगवान का दुख होना स्वीकार कर रहे हो तो फिर हम

138
00:09:50,080 --> 00:09:54,320
तो जीव है ना। ये बताइए कि अगर किसी बाप

139
00:09:54,320 --> 00:09:59,440
का अगर बाप के सामने किसी बेटे को कोई मार रहा है तो

140
00:09:59,440 --> 00:10:04,480
क्या बाप को दुख नहीं होगा? बाप को दुख बाप सर्वशक्तिमान नहीं होता ना

141
00:10:04,480 --> 00:10:10,080
जो बाप जिस बाप से आप तुलना कर रहे हो वो सर्वशक्तिमान नहीं है ना

142
00:10:10,080 --> 00:10:14,160
आप सर्वशक्तिमान की तुलना एक हाड़ मास के पंच भौतिक शरीर से

143
00:10:14,160 --> 00:10:17,840
तुलना कर रहे हो आप भगवान की

144
00:10:17,840 --> 00:10:22,320
इसीलिए कहते हैं मत चक्कर में नहीं एक मिनट

145
00:10:22,320 --> 00:10:26,720
आप आपका ये कहना है कि अगर कोई अगर बाप को अगर

146
00:10:26,720 --> 00:10:27,600
बेटे के दुख

147
00:10:27,600 --> 00:10:31,920
से अगर दुखी है तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है। अब यह कहना चाहते हैं। अरे भैया

148
00:10:31,920 --> 00:10:35,920
इसका मतलब जो बाप है वह सर्वशक्तिमान मान रहे हो उसे अगर बेटे के दुख से वो

149
00:10:35,920 --> 00:10:39,280
दुखी हो रहा है फिर भी

150
00:10:39,280 --> 00:10:43,280
भाई अब जो हमारा भगवान को सच्चिदानंद कहा गया

151
00:10:43,280 --> 00:10:48,640
है कि नहीं? भगवान को सच्चिदानंद कहा गया है कि नहीं?

152
00:10:48,640 --> 00:10:52,720
सच्चिदानंद और सच्चिदानंद घन ब्रह्म में अंतर है। अब कौन से

153
00:10:52,720 --> 00:10:56,800
भगवान की बात घन मैं कह रहा हूं सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहा गया है

154
00:10:56,800 --> 00:11:02,800
कि नहीं? चलो हां कहा गया

155
00:11:04,240 --> 00:11:07,440
क्या अर्थ है इसका

156
00:11:07,440 --> 00:11:11,440
उसका नाम है ये नाम का अर्थ नहीं होता सत

157
00:11:11,440 --> 00:11:15,680
कुछ नहीं पता है नाम का अर्थ नहीं होता चले आए नाम का अर्थ नहीं होता अर्थ है इसका

158
00:11:15,680 --> 00:11:20,000
सुनो सत मतलब स्वरूप से सत कभी

159
00:11:20,000 --> 00:11:24,080
ना चेंज होने वाला चित मतलब अखंड ज्ञानी

160
00:11:24,080 --> 00:11:28,240
सतचित आनंद मतलब अनंत अनंत आनंद जिस

161
00:11:28,240 --> 00:11:32,640
आनंद में ब्रेक नहीं लग सकती वो है भगवान

162
00:11:32,640 --> 00:11:36,720
अगर उसके भी आनंद में ब्रेक लग सकती है तो

163
00:11:36,720 --> 00:11:40,720
वो सच्चिदानंद कहां से सिद्ध हुआ सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहां

164
00:11:40,720 --> 00:11:45,120
से सिद्ध हुआ शिवश का शिवांश का अर्थ करिए आप शिवंश

165
00:11:45,120 --> 00:11:51,120
का अर्थ क्या होता है शिवकांश

166
00:11:51,200 --> 00:11:55,920
हो गया अच्छा अच्छा अच्छा हां चलिए

167
00:11:55,920 --> 00:12:00,640
अब सुन लीजिए अब सुन लीजिए इसके बाद चर्चा करेंगे। अब अब आपका हो गया। अब

168
00:12:00,640 --> 00:12:04,720
अब मेरी बात समझ लीजिए। अभी हम आपसे बोलना चाह रहे थे। आपने बोलने

169
00:12:04,720 --> 00:12:08,960
नहीं दे रहे थे। अभी हमारी बात पूरा नहीं हुई थी कि हमने जब आपके चैनल पर अभी ज्वाइन

170
00:12:08,960 --> 00:12:12,960
होना चाह रहा था। बहुत कोशिश किया तो पता नहीं क्यों हट जा रहे थे। आपके इस पर क्या

171
00:12:12,960 --> 00:12:17,040
लिखता है कि दिस दिस होस्ट हैज इनेबल लोकल

172
00:12:17,040 --> 00:12:21,120
रिकॉर्डिंग। मतलब इस पर लोकल रिकॉर्डिंग बोल रहा था कि आप ये लोकल रिकॉर्डिंग है।

173
00:12:21,120 --> 00:12:25,280
तो मैंने काफी कोशिश किया इस पर ज्वाइन नहीं हो पा रहे थे। अब दूसरी बात यह है

174
00:12:25,280 --> 00:12:29,600
कि यह बकवास बातें हमें ना बताइए। हम आपको बार-बार

175
00:12:29,600 --> 00:12:33,600
ऊपर ले रहे थे तब आपने जो है अपना कैमरा ऑन नहीं कर पा रहे

176
00:12:33,600 --> 00:12:37,760
थे। ठीक है? कोई बात अब आप दोबारा उस पे आइए

177
00:12:37,760 --> 00:12:42,000
विषय पे। अब आप विषय पे आ जाइए। आपने कहा हमारा

178
00:12:42,000 --> 00:12:46,000
ईश्वर आपने कहा हमारा ईश्वर दुखी होता है तो

179
00:12:46,000 --> 00:12:50,080
दुखी होता है तो इसका मतलब उसका जो आनंद है वो अनंत आनंद

180
00:12:50,080 --> 00:12:54,320
नहीं है उसमें ब्रेक लग सकती है एक मिनट एक मिनट

181
00:12:54,320 --> 00:12:58,640
भाई साहब जब ब्रेक लग सकती है ब्रेक लग सकती है तो ऐसे

182
00:12:58,640 --> 00:13:02,800
आनंद की किसको जरूरत है शांति बना

183
00:13:02,800 --> 00:13:06,240
लीजिए आपके सारे प्रश्न का उत्तर देंगे हम ऐसे नहीं जाएंगे उत्तर देके जाएंगे थोड़ी

184
00:13:06,240 --> 00:13:10,240
शांति बना लीजिए जी हमारा आपसे कहना है हमारा हमारा

185
00:13:10,240 --> 00:13:14,480
सर्वप्रथम हमारा यह कहना है कि आप हमें डिबेट से अपने

186
00:13:14,480 --> 00:13:18,640
से आप हटाओगे नहीं अगर मैं हट भी गया तो आपको जॉइ लेना होगा। नहीं हमारे

187
00:13:18,640 --> 00:13:22,720
पास हमारे पास व्यर्थ का समय नहीं है। अगर आप यहां

188
00:13:22,720 --> 00:13:26,880
पे आकर के जेलधाम निवासी की जो लीलाएं हैं वो

189
00:13:26,880 --> 00:13:30,960
वाली जिनके कारण वो जेल में पड़ा हुआ है वो बातें आप यहां बताने लगोगे तो हमें

190
00:13:30,960 --> 00:13:35,120
हटाना पड़ेगा आपको। जी हम उसको नहीं बताएंगे आपको। हमारा

191
00:13:35,120 --> 00:13:39,200
प्रश्न कोई और ये मैंने केवल उदाहरण दिया आपको। अगर आप

192
00:13:39,200 --> 00:13:43,520
व्यर्थ की चीजें करेंगे तो हटाना पड़ेगा हमें। हम यह आपके साथ वो नहीं

193
00:13:43,520 --> 00:13:47,760
और आप अपने मन से कई बार भागे भी हैं। आप अपना

194
00:13:47,760 --> 00:13:51,760
जवाब बाबू बाबू देखो मेरे पास बहुत ज्यादा समय नहीं है। आप मेरे

195
00:13:51,760 --> 00:13:55,840
लिए एक नगण्य व्यक्ति हैं। कोई इंपॉर्टेंट नहीं रखते आप। मैं मैं

196
00:13:55,840 --> 00:14:00,320
आपको तुरंत हटाऊंगा। फालतू की बातें अगर करोगे तो। सीधे जवाब दो।

197
00:14:00,320 --> 00:14:04,320
आपका आपका जिसको आपने अभी भगवान कहा है उसको दुख होता है।

198
00:14:04,320 --> 00:14:09,280
माना आपने। इसका मतलब वो सच्चिदानंद नहीं है।

199
00:14:09,280 --> 00:14:13,280
और आपने अभी एक बेवकूफी और की है कि सच्चिदानंद का कोई अर्थ

200
00:14:13,280 --> 00:14:17,840
नहीं है। यह भी बेवकूफी कर दी आपने। आप

201
00:14:17,840 --> 00:14:21,440
आप वो चीज दिखाइए कि भगवान को दुख नहीं होता। वो दिखाइए आप कहां पर लिखा

202
00:14:21,440 --> 00:14:25,600
है? अरे सच्चिदानंद अपने आप में ही ये बात है ना।

203
00:14:25,600 --> 00:14:29,680
अच्छा ये बताओ भगवान को भी दुख भगवान को भी दुख होता है तो

204
00:14:29,680 --> 00:14:33,840
हमारे और भगवान में अंतर क्या रह गया बताओ? चलो नहीं मनगढ़ नहीं चलेगा।

205
00:14:33,840 --> 00:14:38,000
प्रमाण दीजिए कहां पर कि दुख नहीं होता है। दिखाइए प्रमाण। अरे यही प्रमाण है उसको

206
00:14:38,000 --> 00:14:42,080
उसको सच्चिदानंद कहना ही प्रमाण है। मनग

207
00:14:42,080 --> 00:14:46,240
देखिए मनगण हम नहीं मानते। प्रमाण चलता है। संत रामपाल जी ठीक है।

208
00:14:46,240 --> 00:14:50,320
ठीक है। नहीं मानते। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। नहीं मानते तो हमको ये

209
00:14:50,320 --> 00:14:54,480
बताओ। मैं मैं उत्तर मैं उत्तर दे रहा हूं।

210
00:14:54,480 --> 00:14:58,720
मैं उत्तर दे रहा हूं। मैं उत्तर दे रहा हूं। मेरा प्रश्न आप कह रहे हैं प्रमाण

211
00:14:58,720 --> 00:15:02,880
दिखाओ। आप कह रहे हैं प्रमाण दिखाओ। यही कह रहे हो ना?

212
00:15:02,880 --> 00:15:07,200
प्रमाण दिखाओ। कह रहे हो ना? क्लेम किसका है? किसी

213
00:15:07,200 --> 00:15:11,360
चीज के होने का प्रमाण चाहिए होता है ना होने का नहीं आप दिखाओ

214
00:15:11,360 --> 00:15:15,440
दुख दुख है भगवान को यह प्रमाण आपको दिखाना है दिखाओ

215
00:15:15,440 --> 00:15:19,920
नहीं आप कह रहे हैं कि दुख नहीं होता तो चीज दिखाइए ना कि कहां पर लिखा

216
00:15:19,920 --> 00:15:23,920
अरे भैया किसी चीज के ना होने का प्रमाण थोड़ी ना चाहिए होता है होने का

217
00:15:23,920 --> 00:15:28,000
चाहिए होता है कोई ये क्लेम कर रहा है ये चीज है उसका प्रमाण चाहिए जैसे

218
00:15:28,000 --> 00:15:32,000
मैंने कहा जैसे सुनो जैसे मैंने कहा कि यहां पे

219
00:15:32,000 --> 00:15:36,080
बाबू है तो मुझे प्रमाण देना है अगर बाबू नहीं तो

220
00:15:36,080 --> 00:15:36,580
तुम अगर

221
00:15:36,560 --> 00:15:40,560
यहां पे नहीं हो ये अपने आप में एक प्रमाण है। इसके लिए मुझे कुछ ला के दिखाने की जरूरत

222
00:15:40,560 --> 00:15:44,800
नहीं है। वो वो हमारे पास प्रमाण है कि परमात्मा

223
00:15:44,800 --> 00:15:48,880
को दुख होता है। हमारे पास कबीर साहब का प्रमाण है। वो वो दिखाओ वो दिखाओ। दुख होता है।

224
00:15:48,880 --> 00:15:53,600
परमात्मा को दुख होता है वो दिखाओ। फिर हम उसको काटेंगे। वो

225
00:15:53,600 --> 00:15:57,680
चीज हमारे पास प्रमाण है। आप वो चीज दिखाइए कि परमात्मा को दुख नहीं होता है।

226
00:15:57,680 --> 00:16:01,680
आप कहां से प्रमाण मानोगे ये बताओ। किसको प्रमाण मानते हो ये

227
00:16:01,680 --> 00:16:04,160
बताओ। चलो।

228
00:16:04,160 --> 00:16:08,240
कबीर सा में लिखा है ना कबीर सागर को मैं

229
00:16:08,240 --> 00:16:12,400
दिखाऊं आपको कबीर सागर को दिखाऊं तो ये चिल्लाया करो जाके

230
00:16:12,400 --> 00:16:18,400
कबीर सागर में प्रमाण है और कबीर भगवान है वेद का नाम क्यों लेते हो

231
00:16:18,960 --> 00:16:23,040
दुख नहीं होता दिखाइए कहां पर लिखा है अरे भैया जब तुम

232
00:16:23,040 --> 00:16:27,040
खुद कह रहे हो कि यहां से जो जीव मुक्त होता है उसको दुख नहीं होता तो तुम ये

233
00:16:27,040 --> 00:16:33,040
मान रहे हो कि मतलब जीव को दुख नहीं होगा परमात्मा को दुख होगा

234
00:16:33,600 --> 00:16:38,560
यहां पर जीव नरक में जाता है 84 में जाता है तो परमात्मा

235
00:16:38,560 --> 00:16:42,560
करके भगवान के धाम चला जाएगा जहां भगवान बैठा है वहां पे

236
00:16:42,560 --> 00:16:47,200
जीव को वो दुख होगा कि नहीं होगा

237
00:16:47,200 --> 00:16:51,200
वहां पर दुख नहीं होता वहां पर परम शक्ति इसका मतलब तुम ये कह

238
00:16:51,200 --> 00:16:55,280
रहे हो कि जहां भगवान है वहां भगवान को तो दुख होगा मगर जो

239
00:16:55,280 --> 00:16:59,120
मुक्त जीव है वो उसको दुख नहीं होगा

240
00:16:59,120 --> 00:17:03,200
अरे यार हम का कह रहे हैं कि यार नरक में 84 में जब हम लोग घूमते हैं तब

241
00:17:03,200 --> 00:17:07,280
परमात्मा को दुख होता हम ये कह रहे हैं। अरे मैं मैं कह

242
00:17:07,280 --> 00:17:11,280
रहा हूं जब मैं कह रहा हूं जो जीव मुक्ति धाम चला गया जहां पर

243
00:17:11,280 --> 00:17:15,280
भगवान अच्छा जब परमात्मा को जब दुख होता है और जब मनुष्य जो

244
00:17:15,280 --> 00:17:19,280
है जीव जो है 84 लाख योनियों में होता है तो भगवान कहां

245
00:17:19,280 --> 00:17:23,600
पर होते हैं उस समय जहां उनको दुख होता है कहां

246
00:17:23,600 --> 00:17:28,880
होते हैं भगवान भगवान सनातन परमधाम रहते हैं

247
00:17:28,880 --> 00:17:32,960
अरे भैया उस लोक के उस लोक में जिस लोक में आप जाओगे मुक्त

248
00:17:32,960 --> 00:17:34,160
होने के बाद वहां

249
00:17:34,160 --> 00:17:38,560
या उससे भी और अच्छे लोक में रहते हैं ना तो

250
00:17:38,560 --> 00:17:43,040
वहां पर वहां पर किसी की कोई दुख नहीं होती परमात्मा कभी वहां दुख नहीं होता

251
00:17:43,040 --> 00:17:45,840
लेकिन परमात्मा

252
00:17:45,840 --> 00:17:49,840
का कोई भी जीव सुनिए मैंने क्या है मैंने क्या

253
00:17:49,840 --> 00:17:54,080
इस अच्छा ये बताओ इस समय कुछ लोग मुक्त होंगे कि नहीं वहां पे जीव

254
00:17:54,080 --> 00:17:58,080
कि परमात्मा अकेला है वहां बहुत मुक्त

255
00:17:58,080 --> 00:18:02,400
है बहुत लोग हैं वहां पर मुक्त है तो क्या उनको दुख हो सकता है इस समय जो इस समय मुक्त

256
00:18:02,400 --> 00:18:06,400
है वहां पर वहां पर नहीं होता नहीं होता तो

257
00:18:06,400 --> 00:18:10,480
वहीं पे जीव जो है वो मुक्त है उसको दुख नहीं हो रहा है भगवान

258
00:18:10,480 --> 00:18:14,480
को दुख होता है वहां पर भगवान को भी दुख

259
00:18:14,480 --> 00:18:18,480
नहीं होता जो यहां पर आत्माएं दुखी होती है उसके विपरीत में परमात्मा

260
00:18:18,480 --> 00:18:23,600
वहां दुखी होता है अरे किसी भी कारण से हो दुखी तो होता है ना

261
00:18:23,600 --> 00:18:29,440
बिल्कुल बिल्कुल दुख है ना तुम्हारे सतलोक में

262
00:18:29,440 --> 00:18:33,600
अपने बाप बाप अपने पुत्र के लिए दुखी नहीं होगा फिर किसके लिए दुखी होगा क्योंकि

263
00:18:33,600 --> 00:18:37,760
वो बाप बाप यह जानता है कि यह जो लड़का है मेरा बेकार में दुखी हो रहा है क्योंकि

264
00:18:37,760 --> 00:18:42,080
वो बाप जो है वो यह जानता है कि मैं सर्वशक्तिमान हूं।

265
00:18:42,080 --> 00:18:46,160
वो बाप साधारण बाप नहीं है। पंच भौतिक बाप नहीं

266
00:18:46,160 --> 00:18:49,200
है वो बाप।

267
00:18:49,200 --> 00:18:53,360
आपका ये कहना है कि मतलब परमात्मा दुखी नहीं होता। तो आप उस वो चीज हम परमा

268
00:18:53,360 --> 00:18:57,440
अरे भैया जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे। जब आप

269
00:18:57,440 --> 00:19:03,200
जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे तो हमको मुक्ति कौन देगा?

270
00:19:03,200 --> 00:19:07,440
कौन देगा मुक्ति अरे तो परमा किसी भी

271
00:19:07,440 --> 00:19:11,760
कारण से सुनो बाबू सुन लो किसी भी कारण

272
00:19:11,760 --> 00:19:15,920
से यदि परमात्मा दुखी हो रहा है तो हमारे को

273
00:19:15,920 --> 00:19:20,080
मुक्ति वो देगा वो भी अनंत वाली अनंत दुख वाली ये हम कैसे मानेंगे

274
00:19:20,080 --> 00:19:24,800
भाई जो खुद दुखी है किसी भी कारण से

275
00:19:24,800 --> 00:19:29,040
देखिए ये हाई लेवल का ज्ञान है इस ज्ञान को आप ऐसे

276
00:19:29,040 --> 00:19:33,520
नहीं समझ सकते पहले आप बातें करोगे मैं तुम्हें सच से निकाल दूंगा।

277
00:19:33,520 --> 00:19:37,600
बहुत हो गया। हाई लेवल, लो लेवल हमें ना बताना। देख रहा हूं तुम्हारा हाई

278
00:19:37,600 --> 00:19:41,600
लेवल कितना है। आप बात

279
00:19:41,600 --> 00:19:44,480
नहीं है तो हम क्या करें? आप प्रमाण कौन बोल रहा है? प्रमाण नहीं

280
00:19:44,480 --> 00:19:48,720
है भाई मैं प्रमाण तब दिखाऊं ना जब प्रमाण प्रमाण हो। अभी

281
00:19:48,720 --> 00:19:52,880
आपसे मैंने पूछा प्रमाण किसे मानते हो? आप मानते हो उसको कबीर

282
00:19:52,880 --> 00:19:57,280
सागर को तो मैं क्या दिखाऊं तुम्हें प्रमाण? जाओ जाकर के कबीर सागर के नाम पे खूब ढिंढोरा

283
00:19:57,280 --> 00:20:01,360
पीटो के कबीर सागर में प्रमाण है और रामपाल भगवान है और मैं भगवान

284
00:20:01,360 --> 00:20:05,360
हूं और मेरे पिताजी भगवान है सब ढिंढोरा पीटो हमें क्या मतलब वेद से

285
00:20:05,360 --> 00:20:09,600
वेद को प्रमाण मानो वेद को प्रमाण मानना जब सिद्ध करोगे की हां मेरे

286
00:20:09,600 --> 00:20:13,600
लिए वेद प्रमाण है गीता प्रमाण है तब मैं तुम्हें वो दूंगा तुम्हारे

287
00:20:13,600 --> 00:20:17,920
साथ क्या लाइव चर्चाएं की नहीं है क्या

288
00:20:17,920 --> 00:20:21,920
खूब लाइव चर्चा कर चुके हैं तो हम मुझसे आगे की बात करेंगे ना जो

289
00:20:21,920 --> 00:20:25,920
हो चुकी है वही बात रिपीट करते रहे ठीक है। ठीक है। हम उस पर

290
00:20:25,920 --> 00:20:29,920
चर्चा करते हैं। आप बताइए कि परमात्मा पहले है कौन? तो उसको तो जान

291
00:20:29,920 --> 00:20:34,400
ले पहले। अब परमात्मा किसको मान कर बैठे हैं? विषयंतर मत करो।

292
00:20:34,400 --> 00:20:38,480
तुमने जो आकर के बोला है उसको वापस लो कि अभी

293
00:20:38,480 --> 00:20:42,560
फिलहाल मैं ये मान रहा हूं कि जो कबीर है

294
00:20:42,560 --> 00:20:48,560
और रामपाल है भगवान नहीं है। ये बोलो फिर आगे बढ़े।

295
00:20:49,600 --> 00:20:54,080
हम 100% मानते हैं कि कबीर परमात्मा भगवान सारे सृष्टिने

296
00:20:54,080 --> 00:20:58,400
वाले अच्छा चलो ठीक है तुम्हारा भगवान दुखी होता है ठीक है दुखी

297
00:20:58,400 --> 00:21:02,880
होता है मान लिया मान लिया ना ठीक है अब तुम्हारा परमात्मा

298
00:21:02,880 --> 00:21:06,880
दुखी होता है तो दुखी होने वाला परमात्मा एक्सिस्ट

299
00:21:06,880 --> 00:21:11,360
करता है सिद्ध करो

300
00:21:11,360 --> 00:21:15,440
सिद्ध करो चलो हम गीता

301
00:21:15,440 --> 00:21:19,680
अध्याय 15 श्लोक नंबर अच्छा गीता

302
00:21:19,680 --> 00:21:24,000
को गीता क्या है बताओ जरा

303
00:21:24,000 --> 00:21:27,600
गीता तुम्हारे पास कैसे आई

304
00:21:27,600 --> 00:21:31,680
गीता आई हम आपके परंपरा के आधार से अच्छा तो

305
00:21:31,680 --> 00:21:35,600
गीता का अर्थ कौन बताएगा

306
00:21:35,600 --> 00:21:39,600
आप ही लोग तो अनुवाद किए गीता पर जो भी लिखा आपके परंपरा वाले अनुवाद किए हैं

307
00:21:39,600 --> 00:21:42,800
उसको उन्होंने

308
00:21:42,800 --> 00:21:47,120
उन्होंने माना है कबीर भगवान है

309
00:21:47,120 --> 00:21:51,280
उन्होंने गीता मेरी परंपरा मेरी परंपरा वालों ने क्या माना है क्या

310
00:21:51,280 --> 00:21:55,280
कबीर भगवान है आपके परंपरा वाले गीता में

311
00:21:55,280 --> 00:21:59,440
बताई परम अचर ब्रह्म है परमात्मा अरे भाई मैंने क्या कहा कबीर को भगवान

312
00:21:59,440 --> 00:22:03,520
माना है क्या वो जो जिसने दोहे लिखे हैं बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़

313
00:22:03,520 --> 00:22:07,840
खजूर इनको प्रमाण माना है क्या जिस जो जिसे तुम्हारा

314
00:22:07,840 --> 00:22:13,520
रामपाल भगवान कहता है उसको हमारे आचार्यों ने भगवान माना है क्या

315
00:22:13,520 --> 00:22:17,600
अच्छा अगर तुम्हें उन पर विश्वास नहीं है उन आचार्यों पर

316
00:22:17,600 --> 00:22:21,680
तो उनके द्वारा दी जाने वाली किताब पर विश्वास कैसे? इसका

317
00:22:21,680 --> 00:22:25,680
मतलब तुम कबीर को उन किताबों के आधार पर परमेश्वर सिद्ध नहीं

318
00:22:25,680 --> 00:22:26,560
कर सकते

319
00:22:26,560 --> 00:22:31,200
जो किताबें तुम्हें उन आचार्यों से मिली है जिन पर तुम्हें विश्वास नहीं है।

320
00:22:31,200 --> 00:22:35,520
ठीक है? तो कुल मिलाकर के तुम्हें स्वतंत्र रूप से सिद्धांत

321
00:22:35,520 --> 00:22:41,440
के द्वारा सिद्ध करना है। सिद्धांत के द्वारा

322
00:22:41,440 --> 00:22:45,680
हम हम उसको सिद्धांत के द्वारा सिद्ध कर रहे हैं। हम आपको ये भी सिद्ध

323
00:22:45,680 --> 00:22:49,840
करके दिखाएंगे कि आप अपने परंपरा वालों की बात को नहीं मानते। हमारे

324
00:22:49,840 --> 00:22:53,920
वो बात है। फिलहाल फिलहाल आप जो है कबीर को

325
00:22:53,920 --> 00:22:58,000
परमात्मा है। यह सिद्ध करो। गीता

326
00:22:58,000 --> 00:23:02,080
गीता का प्रमाण मत दो। गीता का प्रमाण दो तो गीता देने वाले पर

327
00:23:02,080 --> 00:23:04,960
विश्वास करो।

328
00:23:04,960 --> 00:23:09,120
हमें विश्वास या तो कह दो या तो यह कह दो कि वो झूठे हैं

329
00:23:09,120 --> 00:23:13,120
अज्ञानी है तो फिर गीता को मत मानो उनके द्वारा मिलने वाली फिर तुम

330
00:23:13,120 --> 00:23:17,360
सिद्ध कर दो। हम उसको बांध रहे हैं ना कि आपके

331
00:23:17,360 --> 00:23:22,080
जो परंपरा वाले हैं जो गीता का ज्ञान लिखे हैं वेदव्यास जी उनको

332
00:23:22,080 --> 00:23:26,320
जितना जानकारी मिली उतना लिख दिए। अब आगे की अरे भैया

333
00:23:26,320 --> 00:23:30,560
इतना जानकारी उतना नहीं वो सच बोलते हैं वो

334
00:23:30,560 --> 00:23:34,640
सही बात बताते हैं या वो झूठ बोलते हैं वो गलत बात भी बताते

335
00:23:34,640 --> 00:23:37,680
हैं क्या

336
00:23:37,680 --> 00:23:41,920
वो जो गीता जो गीता का ज्ञान देने वाले भगवान ने बोला वेदव्यास

337
00:23:41,920 --> 00:23:46,480
ने दिव्य दृष्टि दिए थे संजय अली मैंने क्या कहा भाई साहब आपको

338
00:23:46,480 --> 00:23:50,480
आपको ये जो किताब है वेदव्यास जी ने नहीं दी है। आपको

339
00:23:50,480 --> 00:23:55,120
ये किताब पिछले 100 साल में 50 साल पहले जो हमारे पूर्वाचार्य

340
00:23:55,120 --> 00:23:59,120
हुए हैं उन्होंने दी है। ठीक है? जी। तो आप वो जो

341
00:23:59,120 --> 00:24:03,440
पूर्वाचार्य हैं उन्होंने कबीर को भगवान माना है। अगर

342
00:24:03,440 --> 00:24:07,680
नहीं माना है और फिर भी आप कबीर को भगवान मान रहे हैं उनकी किताब

343
00:24:07,680 --> 00:24:11,760
के आधार पे तो इसका मतलब है कि आपको उनकी गुणवत्ता पर

344
00:24:11,760 --> 00:24:17,440
यकीन नहीं है। कि वो सच ही बोलेंगे।

345
00:24:17,440 --> 00:24:21,520
हम उसी चीज को तो जानना चाहते हैं पहले आपसे आप हर

346
00:24:21,520 --> 00:24:25,920
भाई अभी बात अभी बात ये चल रही है कि कबीर परमा

347
00:24:25,920 --> 00:24:29,920
कबीर अभी बात ये चल रही है कि जिसमें दुख

348
00:24:29,920 --> 00:24:34,160
है जिसमें दुख है उस भगवान का अस्तित्व कैसे सिद्ध

349
00:24:34,160 --> 00:24:37,120
होता है वो बताओ

350
00:24:37,120 --> 00:24:41,120
उसका तो आपके पास प्रमाण ही नहीं है लेकिन अब हम प्रश्न कर रहे हैं आपसे आप उत्तर फालतू

351
00:24:41,120 --> 00:24:45,360
की बात करोगे हम तुम्हें हटा देंगे हमारे पास सच्चिदानंद अपने आप

352
00:24:45,360 --> 00:24:49,360
में प्रमाण है उसमें प्रमाण देने की आवश्यकता ही

353
00:24:49,360 --> 00:24:53,120
नहीं है। और हम तुम्हें प्रमाण दे क्यों?

354
00:24:53,120 --> 00:24:57,280
अरे मैं जो कह रहा हूं जब तुम प्रमाण उसको मानते ही नहीं हो जब

355
00:24:57,280 --> 00:25:01,360
तुम जब तुम जैसे मैंने तुम्हें अगर ये बुक दी मान लो ये बुक मैं तुम्हें

356
00:25:01,360 --> 00:25:05,440
दे रहा हूं। अब इस बुक को तुम प्रमाण तब मानोगे जब तुम मुझे सच्चा

357
00:25:05,440 --> 00:25:09,600
मानोगे। अगर तुम मुझे झूठा मानते हो तो मैं झूठी किताब भी तुम्हें

358
00:25:09,600 --> 00:25:15,040
दे सकता हूं। तुम्हें कैसे पता है वेदव्यास जी वाली किताब है?

359
00:25:15,040 --> 00:25:19,440
ठीक। अब बता रहा हूं आपको हां कि आपके

360
00:25:19,440 --> 00:25:23,440
परंपरा से जो परंपरा से चलते आ

361
00:25:23,440 --> 00:25:28,160
रहा है जो वेद गीता संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान तो आज चालू हुआ है 1997

362
00:25:28,160 --> 00:25:32,160
से बातें मत करो पहले तुम ये बताओ दुखी होने

363
00:25:32,160 --> 00:25:36,880
वाला ईश्वर कैसे है ये सिद्ध करो पहले

364
00:25:36,880 --> 00:25:42,080
आप आप अभी तक हमें वो प्रमाण नहीं दिए प्रमाण दीजिए किस बात

365
00:25:42,080 --> 00:25:46,720
जो ईश्वर भागवत उतार फीता लगा

366
00:25:46,720 --> 00:25:51,120
दुखी नहीं होता वो प्रमाण ठीक है दे रहा हूं

367
00:25:51,120 --> 00:25:55,680
हालांकि देना नहीं चाहिए अपमान है वो प्रमाण का फिर भी दे रहा हूं

368
00:25:55,680 --> 00:25:59,840
वो जनता आप प्रमाण दीजिए वाले के लिए कल

369
00:25:59,840 --> 00:26:04,320
ही खोला था ये प्रमाण तुम भी देख लो इस वाले के लिए खोला था ये प्रमाण

370
00:26:04,320 --> 00:26:08,480
भागवत का आप प्रमाण दीजिए कि जनता दे रहा हूं

371
00:26:08,480 --> 00:26:12,640
परमेश्वर ये देखो भागवत में लिखा हुआ है स्कंद सात अध्याय

372
00:26:12,640 --> 00:26:18,640
नौ लिखो ये देख लो। अच्छा क्या लिखा है?

373
00:26:18,800 --> 00:26:24,800
क्या लिखा है? पढ़ो।

374
00:26:28,000 --> 00:26:32,480
ये कौन सा ग्रंथ है? भागवत पुराण। भाग भागवत। अच्छा

375
00:26:32,480 --> 00:26:36,960
क्या लिखा है? क्या लिखा है? भागवत लिखा है। ये किस इसका

376
00:26:36,960 --> 00:26:42,000
इसका? ये कवर दिखाइए। कवर कवर में क्या लिखा है?

377
00:26:42,000 --> 00:26:47,040
कवर दिखाइए इसका। पहले तुम पढ़ लो फिर दिखाऊंगा।

378
00:26:47,040 --> 00:26:51,120
ये कहां? ऊपर से नीचे साइड ऊपर से बीते के

379
00:26:51,120 --> 00:26:55,360
तुरंत बाद। अच्छा अच्छा यहां लिखा

380
00:26:55,360 --> 00:26:59,840
है कि हल्का नीचे करिए। हल्का सा हल्का

381
00:26:59,840 --> 00:27:03,920
नीचे करिए। हां। परम परमेश्वर अर्थात पूर्ण

382
00:27:03,920 --> 00:27:08,240
पुरुषोत्तम भगवान सदैव आत्म तष्टिक रहने वाले

383
00:27:08,240 --> 00:27:12,240
हैं। अत जब उन्हें कोई भेंट अर्पित की जाती है हो

384
00:27:12,240 --> 00:27:16,240
गया हो गया हो गया क्या लिखा है और निकालो और

385
00:27:16,240 --> 00:27:20,320
भागवत और निकालो हां तो अभी क्या लिखा था अभी अभी

386
00:27:20,320 --> 00:27:24,560
आपने वो परमेश्वर तो बता नहीं पा रहे हैं परमेश्वर है कौन वो तो बताइए

387
00:27:24,560 --> 00:27:28,640
फालतू अब देखो तुमने की फालतू बात इसीलिए निकालता हूं बात

388
00:27:28,640 --> 00:27:32,640
चल रही है कि परमेश्वर में दुख होता है ये आपको सिद्ध करना है

389
00:27:32,640 --> 00:27:36,880
आपने पूछा आप कह दो दुख नहीं होता तो मैंने दिखा दिया परमेश्वर सदैव

390
00:27:36,880 --> 00:27:41,120
आत्म संतुष्ट रहता आत्म संतुष्ट उसको किसी चीज की जरूरत

391
00:27:41,120 --> 00:27:45,360
नहीं है। सदैव हमेशा नित्य स्थाई

392
00:27:45,360 --> 00:27:47,760
सनातन

393
00:27:47,760 --> 00:27:51,760
वो वो वो ज्ञान बोला किसने वो चीज दिखाइए। ऐसे कैसे हम मान लेंगे? वो

394
00:27:51,760 --> 00:27:55,840
ज्ञान बोला किसने? उसको अरे भाई किसी ने भी बोला हो परमेश्वर

395
00:27:55,840 --> 00:27:57,840
के लिए तो बोला गया।

396
00:27:57,840 --> 00:28:01,840
अरे तो उसके पास तत्व ज्ञान है अरे तुमसे बेकार है। अब तुम ये

397
00:28:01,840 --> 00:28:06,960
बता दो तुम्हारे पास किताबें आई कहां से? जिन किताबों का तुम वो कर रहे हो।

398
00:28:06,960 --> 00:28:10,960
वो किताब आपके परंपरा वाला से आई है। सुनो सुनो तुम किताबों के आधार पर

399
00:28:10,960 --> 00:28:14,960
परमेश्वर सिद्ध कर रहे हो। सिद्धांत के द्वारा नहीं है तुम्हारे

400
00:28:14,960 --> 00:28:19,120
पास। परमेश्वरत्व कबीर के पास उसी

401
00:28:19,120 --> 00:28:23,200
चीज को उसी चीज को जानना चाहता हूं। सिद्धांत क्या है मेरे भाई? सिद्धांत

402
00:28:23,200 --> 00:28:28,240
क्या है? मैं तुमसे पूछ रहा हूं। सिद्धांत क्या है?

403
00:28:28,240 --> 00:28:32,320
सिद्धांत क्या है? सिद्धांत सिद्धांत हमारा यह है कि जो

404
00:28:32,320 --> 00:28:36,400
आपके परंपरा वाले जो ये लिखे हैं परमेश्वर में दुख होता

405
00:28:36,400 --> 00:28:40,640
है कि नहीं ये बताओ ये सिद्धांत है तुम्हारा ईश्वर

406
00:28:40,640 --> 00:28:44,800
को दुख होता है कबीर सागर में प्रमाण है मेरे पास कबीर सागर हम

407
00:28:44,800 --> 00:28:48,960
नहीं मानते कबीर सागर आप वेद में

408
00:28:48,960 --> 00:28:53,120
वेद में गीता में ईश्वर को दुख ईश्वर को ईश्वर को दुख स्वरूप

409
00:28:53,120 --> 00:28:56,800
मानते हो

410
00:28:56,800 --> 00:29:01,600
आप वेद और गीता को सही सही कैसे मानते हैं? किस आधार से?

411
00:29:01,600 --> 00:29:05,760
वेद और गीता को हम सही मानते हैं क्योंकि हमारे पास वो परंपरा से

412
00:29:05,760 --> 00:29:09,760
आया है। और सीधी बात है अगर सीधी

413
00:29:09,760 --> 00:29:14,080
बात है कि अगर आप यह मान रहे हो किसी भी किताब का अर्थ

414
00:29:14,080 --> 00:29:18,240
कि हमारा जो ईश्वर है उसको दुख होता है क्योंकि वो कुरान में लिखा है वो बाइबल

415
00:29:18,240 --> 00:29:22,240
में लिखा है वो कबीर सागर में लिखा है तो सीधी बात है कि उस

416
00:29:22,240 --> 00:29:26,240
ईश्वर की सिद्धि कर दो कि ऐसा कोई ईश्वर एक्सिस्ट

417
00:29:26,240 --> 00:29:30,400
करता है स्वतंत्र होकर। किताब के आधार पर नहीं क्योंकि

418
00:29:30,400 --> 00:29:34,880
किताब को अब हम चैलेंज कर रहे हैं। किताब को अब हम चैलेंज कर रहे हैं

419
00:29:34,880 --> 00:29:39,040
कि ऐसे ईश्वर को ईश्वर सिद्ध कर दो। एक मिनट

420
00:29:39,040 --> 00:29:43,520
आपके ऐसे ईश्वर को ऐसे

421
00:29:43,520 --> 00:29:48,880
ईश्वर को

422
00:29:48,880 --> 00:29:52,960
आपके जो परंपरा वाले हैं कि ग्रंथ में जो चीज लिखे हैं तो आप कैसे

423
00:29:52,960 --> 00:29:57,200
मान लीजिए वो सही लिखे हैं? क्योंकि वो परंपरा

424
00:29:57,200 --> 00:30:01,360
मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं क्योंकि वह परंपरा से है। पहली बात

425
00:30:01,360 --> 00:30:05,600
दूसरी बात देने वाला सन्यासी है। एक मिनट तीसरी बात

426
00:30:05,600 --> 00:30:10,240
वो समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देते हैं।

427
00:30:10,240 --> 00:30:14,240
चौथी बात कि वो मेरा संचय दूर करते हैं। जो मेरा प्रश्न

428
00:30:14,240 --> 00:30:18,560
होता है ईश्वर तत्व के विषय में जो तुम जैसे भोंदू लोग तुम्हारे जैसे

429
00:30:18,560 --> 00:30:22,560
जो भोंद गुरु के भों चेले नहीं समझ पाते हैं वो तात्विक ज्ञान

430
00:30:22,560 --> 00:30:27,200
वो मुझे देते हैं। यानी कि परंपरा

431
00:30:27,200 --> 00:30:32,080
एक मिनट एक मिनट परम सुनो परंपरा से प्रामाणिकता

432
00:30:32,080 --> 00:30:36,160
लक्षण से सन्यासत्व और समस्त श्रुति स्मृति

433
00:30:36,160 --> 00:30:40,240
शास्त्रों का आलंबन और फल स्वरूप प्राप्त होने वाला तत्व

434
00:30:40,240 --> 00:30:44,240
ज्ञान वो देते हैं वो ज्ञान जिसको प्राप्त करने

435
00:30:44,240 --> 00:30:48,240
के बाद किसी और ज्ञान को पाने की आवश्यकता नहीं रह जाती। मेरी प्यास है

436
00:30:48,240 --> 00:30:52,240
कि भाई जब ईश्वर अगर सशरीर है तो वो खड़ा है वो दुनिया

437
00:30:52,240 --> 00:30:56,640
किसने बनाई? अब तुम कह देते हो भैया हमें नहीं पता।

438
00:30:56,640 --> 00:31:00,800
अरे रुक जाइए। ऐसे जटिल जटिल सवालों का जवाब वो

439
00:31:00,800 --> 00:31:04,000
देते हैं। अरे रुक तो जाइए। देखिए आप

440
00:31:04,000 --> 00:31:08,000
रुक लीजिए। आपका भाषण सुनने हम नहीं आए हैं। आप जो गाली दे रहे हैं बहुत दूर से आप जा

441
00:31:08,000 --> 00:31:12,000
सकते हैं। आप जा सकते हैं। चलिए निकलिए निकलिए।
