1
00:00:02,480 --> 00:00:06,640
जय श्री राम जय श्री राम भाई साहब जय श्री राम हम ये

2
00:00:06,640 --> 00:00:11,200
कह रहे थे कि शंकराचार्य

3
00:00:11,200 --> 00:00:15,280
मौन है यह जानकारी

4
00:00:15,280 --> 00:00:20,160
का अभाव है क्योंकि मीडिया उन्हें उतनी कवरेज नहीं देती है।

5
00:00:20,160 --> 00:00:24,560
आज शंक आज शंकराचार्य है तो ही सनातन

6
00:00:24,560 --> 00:00:28,800
धर्म का अस्तित्व बाकी है। ठीक है। अगर सनात

7
00:00:28,800 --> 00:00:33,040
अगर शंकराचार्य अपना जिम्मेदारी से मुख मोड़ लेंगे तो

8
00:00:33,040 --> 00:00:37,600
सनातन धर्म नष्ट होने में एक सेकंड लगेगा। खत्म।

9
00:00:37,600 --> 00:00:41,680
अब बहुत सी ऐसी बातें हैं शंकराचार्यों की जो जो मेन

10
00:00:41,680 --> 00:00:45,840
मीडिया में कवरेज नहीं होती है। जैसे आपको पता नहीं होगा

11
00:00:45,840 --> 00:00:50,160
रामसेतु को कांग्रेस खत्म करवाने वाली थी। हां।

12
00:00:50,160 --> 00:00:54,240
है ना? कोई प्रोजेक्ट के तहत पूरी लड़ाई पूरी लड़ाई उस समय

13
00:00:54,240 --> 00:00:58,240
पूरी के शंकराचार्य जी ने लड़ी थी। अन्य भी साथ में थे। पूरी

14
00:00:58,240 --> 00:01:02,240
के शंकराचार्य जी ने अग्रणी भूमिका निभाई। हम जो

15
00:01:02,240 --> 00:01:07,200
अपना राम मंदिर का केस जीता गया है उसमें पूरी लड़ाई

16
00:01:07,200 --> 00:01:11,200
शंकराचार्य जी द्वारा बनाई गई संस्था ने लड़ी है। आज हमारा रामपाल का

17
00:01:11,200 --> 00:01:16,080
केस भी उन्हीं की शिष्य हैं जो लड़ रही हैं।

18
00:01:16,080 --> 00:01:17,680
है ना? इसके

19
00:01:17,680 --> 00:01:22,800
अलावा ये साईं के बारे में कि वो मुसलमान था।

20
00:01:22,800 --> 00:01:26,800
ये जानकारी शंकराचार्य ने निकाली। वैदिक गणित

21
00:01:26,800 --> 00:01:31,040
पर पूरे विश्व में वैदिक गणित पर पूरे विश्व में शंकराचार्य

22
00:01:31,040 --> 00:01:35,200
जी द्वारा रचित जो ग्रंथ हैं वो पढ़े जा रहे हैं और

23
00:01:35,200 --> 00:01:39,520
नासा कोरिया संयुक्त राष्ट्र संघ ये लोग आते हैं

24
00:01:39,520 --> 00:01:43,520
शंकराचार्य जी से शिक्षा प्राप्त करते हैं वापस जाते हैं

25
00:01:43,520 --> 00:01:47,520
सुप्रीम कोर्ट में जो सुप्रीम कोर्ट के जज होते हैं वह

26
00:01:47,520 --> 00:01:52,160
बैठकर के इनसे ज्ञान विज्ञान समझते हैं अधर्म और अधर्म का निर्णय समझते हैं

27
00:01:52,160 --> 00:01:56,400
शंकराचार्य का दायित्व क्या है ये शंकराचार्य से ज्यादा

28
00:01:56,400 --> 00:02:00,800
कोई नहीं बता सकता बल्कि दुनिया में किसी भी व्यक्ति का दायित्व क्या है?

29
00:02:00,800 --> 00:02:04,960
इसका निर्णय शंकराचार्य से आगे ज्यादा कोई नहीं बता सकता। तो

30
00:02:04,960 --> 00:02:09,200
शंकराचार्य पर ही ये दोष लगाना कि वो जो करना चाहिए नहीं कर रहे हैं।

31
00:02:09,200 --> 00:02:13,200
ये ये मतलब जानकारी के अभाव के कारण है क्योंकि उनके

32
00:02:13,200 --> 00:02:17,600
कार्यों को मीडिया कवरेज नहीं मिलती। टीवी मगर

33
00:02:17,600 --> 00:02:22,080
मगर जहां पे कहीं पर धर्म की बात हो रही होती है। धर्म क्या है?

34
00:02:22,080 --> 00:02:26,240
ब्रह्म क्या है? स्पिरिचुअल स्पिरिचुअल नॉलेज देने

35
00:02:26,240 --> 00:02:30,480
की बात होती है तो वहां विदेशों से आए हुए अमोग लीला इत्यादि इस

36
00:02:30,480 --> 00:02:32,960
के लोगों को बुला लिया जाता है।

37
00:02:32,960 --> 00:02:37,440
वहां शंकराचार्य को बिठा के प्रवचन नहीं लिए जाते। जी जी टीवी पर

38
00:02:37,440 --> 00:02:41,600
आज तक पर देखो आप जब स्पिरिचुअल बातें करनी होती है कि जिससे

39
00:02:41,600 --> 00:02:45,600
व्यक्ति को कुछ सीखने को मिले। विवाद है तो विवादित विवाद चल रहा है। मान

40
00:02:45,600 --> 00:02:49,600
लीजिए जब स्पिरिचुअल नॉलेज की बात होती है तब शंकराचार्यों को बुला के

41
00:02:49,600 --> 00:02:53,840
नहीं बिठाया जाता। अभी एबीपी न्यूज़ पे कुछ दिनों पहले एक कार्यक्रम चला

42
00:02:53,840 --> 00:02:58,160
था। उसमें डेली मूर्ति पूजा का खंडन

43
00:02:58,160 --> 00:03:02,560
करते थे बैठ के आर्य समाजी लोग डेली और वहां पर

44
00:03:02,560 --> 00:03:06,560
उनको जवाब देने के लिए मूर्खों को बुलाया जाता था। शंकराचार्य के

45
00:03:06,560 --> 00:03:10,800
व्यक्ति को नहीं बुलाया जाता था। शंकराचार्यों ने तो आज ऐसी फौज

46
00:03:10,800 --> 00:03:14,960
खड़ी कर दी है भाई साहब कि दुनिया का कोई माई का

47
00:03:14,960 --> 00:03:18,960
लाल ऐसा नहीं है जो हिंदू धर्म का खंडन कर सके।

48
00:03:18,960 --> 00:03:23,120
शंकराचार्य के द्वारा खड़े हुए लोगों के सामने दुनिया का

49
00:03:23,120 --> 00:03:27,120
कोई माई का लाल हिंदू धर्म का खंडन नहीं कर सकता।

50
00:03:27,120 --> 00:03:31,200
हां ये शंकराचार्य का ही तो कार्य है। शंकराचार्य

51
00:03:31,200 --> 00:03:35,360
ने सन 1947 में ही दिसंबर के दिन की बात

52
00:03:35,360 --> 00:03:39,840
है। ये जो रामलला की मंदिर की जो लड़ाई चली है

53
00:03:39,840 --> 00:03:43,920
आजादी के बाद तो रामलला की जो मूर्ति है ना जिसकी

54
00:03:43,920 --> 00:03:48,720
पूजा होती रही नया राम मंदिर बनने से पहले तक

55
00:03:48,720 --> 00:03:52,800
हम वो मूर्ति करपात्री जी महाराज ने प्रकट

56
00:03:52,800 --> 00:03:56,800
करवाई थी। उसी के उसी मूर्ति के आधार पर पूरी लड़ाई

57
00:03:56,800 --> 00:03:59,600
चली गई है।

58
00:03:59,600 --> 00:04:03,920
और आपको बता दें ये जो कांग्रेसी इंदिरा

59
00:04:03,920 --> 00:04:07,920
गांधी टाइप के लोग हैं ये अपने जो हिंदू मंदिर हैं

60
00:04:07,920 --> 00:04:12,640
इसमें घुस नहीं पाते हैं शंकराचार्यों के कारण। आपको पता होगा

61
00:04:12,640 --> 00:04:16,880
इंदिरा गांधी ने क्योंकि गैर हिंदू से शादी कर

62
00:04:16,880 --> 00:04:21,040
ली थी। जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया था शंकराचार्य

63
00:04:21,040 --> 00:04:25,360
ने। हम सही है और उस समय वो देश की प्रधानमंत्री

64
00:04:25,360 --> 00:04:29,440
थी हम उसके बाद ये जब कालांतर

65
00:04:29,440 --> 00:04:33,680
में राजीव गांधी भी अपने परिवार को ले गए थे वहीं

66
00:04:33,680 --> 00:04:38,000
दर्शन करने और फिर शंकराचार्य ने मना कर दिया था ये कहते हुए हिंदू

67
00:04:38,000 --> 00:04:42,640
तुम हिंदू नहीं हो अंदर नहीं जाओगे आज भी शंकराचार्य

68
00:04:42,640 --> 00:04:46,960
के नेतृत्व में चलने वाले जो मंदिर हैं जहां शंकराचार्य

69
00:04:46,960 --> 00:04:51,200
का निर्णय मान्य होता है सुप्रीम कोर्ट के द्वारा

70
00:04:51,200 --> 00:04:55,520
उनका निर्णय सर्वोच्च बताया गया। तो जिनका जिन जिन मंदिरों में शंकराचार्य

71
00:04:55,520 --> 00:04:59,680
का निर्णय लागू होता है वो मंदिर आज भी लव जिहाद जैसी चीजों

72
00:04:59,680 --> 00:05:03,760
से बचे हुए हैं। आक्रांताओं के आक्रमण से बचे

73
00:05:03,760 --> 00:05:07,920
हुए हैं। घुस नहीं सकता वहां मुस्लिम। क्योंकि वहां शंकराचार्य का वो

74
00:05:07,920 --> 00:05:12,080
है लागू। बस बात इतनी है कि शंकराचार्य जो होते हैं वो सन्यासी हैं।

75
00:05:12,080 --> 00:05:16,560
भीख मांग के खाना खाते हैं। सीधी बात तो उनके पास इतना

76
00:05:16,560 --> 00:05:20,560
अर्थ और दूसरी बात क्या है? सन्यासी है तो उनके उनके

77
00:05:20,560 --> 00:05:24,560
साथ खड़ा होने वाला व्यक्ति कम मिलता है। क्यों? क्योंकि उनके पास रस तो

78
00:05:24,560 --> 00:05:28,560
है नहीं बहुत ज्यादा भौतिक। तो साथ देने वाले हम और आप जैसे

79
00:05:28,560 --> 00:05:32,800
लोग जिनको एसी की आदत है, कारों में चलने की आदत है तो उनके

80
00:05:32,800 --> 00:05:37,200
साथ खड़े होने वाले रंगारंग कार्यक्रमों को चाहने वाले लोग कम होते हैं। जिसके

81
00:05:37,200 --> 00:05:41,920
कारण उनके कार्यक्रमों में उनके क्रियाकलापों

82
00:05:41,920 --> 00:05:46,160
में वो रौनक नहीं होती जो इस जैसी संस्थाएं,

83
00:05:46,160 --> 00:05:50,160
ब्रह्मा कुमारी जैसी संस्थाएं अपने कार्यक्रमों में रौनक ले आती

84
00:05:50,160 --> 00:05:54,160
हैं। जो हमें अच्छा लगता है। तो मीडिया भी वहीं जाती है

85
00:05:54,160 --> 00:05:58,160
जहां रौनक हो। मीडिया भी वहां नहीं जाती। जैसे कि आज

86
00:05:58,160 --> 00:06:02,160
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। बहुत बढ़िया मंदिर बन गया। रौनक आ गई।

87
00:06:02,160 --> 00:06:06,240
तो आज देखिए वहां पर जनता कितनी है। आज से पहले जब राम जी

88
00:06:06,240 --> 00:06:11,920
लला तंबू में रह रहे थे तो क्या वहां जनता जाती थी?

89
00:06:11,920 --> 00:06:16,000
रहे सहे गिनती के रोज दर्शन होते थे। कोई ऐसी भीड़ नहीं लगती

90
00:06:16,000 --> 00:06:18,800
थी। आज आपको एंट्री के लिए वीआईपी

91
00:06:18,800 --> 00:06:22,800
दर्शन मिल रहा है। ये हो रहा है, वो हो रहा है। हो रहा है कि नहीं हो रहा है? तो ये

92
00:06:22,800 --> 00:06:27,040
शंकराचार्य जो होते हैं वो सन्यासी होते हैं। और किसी भी किसी

93
00:06:27,040 --> 00:06:31,120
भी सन्यासी के यहां आप जाओगे तो आपको आडंबर नहीं

94
00:06:31,120 --> 00:06:35,200
मिलेगा। आडंबर ना होने के कारण आज की मीडिया कवरेज नहीं करती है

95
00:06:35,200 --> 00:06:40,160
शंकराचार्य का। तो यह कुछ जानकारी का अभाव है।

96
00:06:40,160 --> 00:06:44,320
वास्तविकता यह है अगर हम यह कह दें आज की

97
00:06:44,320 --> 00:06:48,560
तारीख में कि हम शंकराचार्य को नहीं मानते परम प्रमाण

98
00:06:48,560 --> 00:06:53,200
तो हम स्वयं को हिंदू ही नहीं कह पाएंगे। कारण क्या है?

99
00:06:53,200 --> 00:06:57,440
कि आज से अरबों खरबों वर्षों पहले वेद शास्त्र

100
00:06:57,440 --> 00:07:01,520
भगवान ने प्रकट किए। हमारे जो भी शास्त्र है वो 100 साल

101
00:07:01,520 --> 00:07:05,760
पुराने तो है नहीं। वर्षों पहले के हैं। तो

102
00:07:05,760 --> 00:07:10,000
वेद शास्त्र प्रकट भगवान ने आज से दो अरब वर्ष पूर्व

103
00:07:10,000 --> 00:07:14,240
किए लगभग वहां से लेकर के आप

104
00:07:14,240 --> 00:07:18,160
तक वो वेद शास्त्र कैसे आए?

105
00:07:18,160 --> 00:07:22,480
ये तो हमारा जवाब होगा मुंडकोपनिषद के अनुसार गीता

106
00:07:22,480 --> 00:07:26,560
के अनुसार यह सभी वेद शास्त्र हमारे पास परंपरा से

107
00:07:26,560 --> 00:07:30,800
आए हैं। तो परंपरा कौन सी परंपरा? तो उसमें

108
00:07:30,800 --> 00:07:34,160
शंकराचार्य का नाम आएगा। ये शंकराचार्य

109
00:07:34,160 --> 00:07:38,240
आपको ला के वेद अरबों खरबों वर्ष पहले के आपको

110
00:07:38,240 --> 00:07:42,720
दे रहे हैं। अब यदि आपको शंकराचार्य पर विश्वास नहीं है

111
00:07:42,720 --> 00:07:47,440
तो फिर उनसे प्राप्त होने वाले धर्म ग्रंथों पर भी विश्वास नहीं होगा।

112
00:07:47,440 --> 00:07:51,760
हम और अगर धर्म ग्रंथों पर विश्वास है तो हम यह नहीं कह सकते कि हमें शंकराचार्य

113
00:07:51,760 --> 00:07:55,760
पर विश्वास नहीं है। शंकराचार्य वो प्रमाण है जिसके कारण

114
00:07:55,760 --> 00:07:59,920
हम जाकिर नायक जैसे व्यक्ति से कह सकते हैं कि तुम

115
00:07:59,920 --> 00:08:04,400
अगर वेद का मनमाना अर्थ करोगे तो वो मान्य नहीं होगा।

116
00:08:04,400 --> 00:08:08,560
केवल शंकराचार्य जो अर्थ करेंगे वही मान्य होगा। क्योंकि वह परंपरा

117
00:08:08,560 --> 00:08:12,640
से हैं। क्योंकि शास्त्र में कहा गया है गुरु वही प्रमाणिक जो परंपरा

118
00:08:12,640 --> 00:08:16,800
से हो नहीं तो हर कोई बच्चा राह का बच्चा आज रामपाल

119
00:08:16,800 --> 00:08:20,960
रामपाल जैसा व्यक्ति भी वेद का अर्थ करने लग जाएगा। तो एक

120
00:08:20,960 --> 00:08:25,600
ही शब्द के कई अर्थ होते हैं। कोई भी अपने मन का अर्थ निकाल लेगा।

121
00:08:25,600 --> 00:08:30,000
जैसे कि तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। अब बेर

122
00:08:30,000 --> 00:08:34,000
शब्द दो बार आया है। एक बार बेर का शब्द है

123
00:08:34,000 --> 00:08:38,000
कि वो पहले दिन में तीन बार खाती थी। तीन बेर

124
00:08:38,000 --> 00:08:42,160
खाती थी वो तीन बेर खाती है। मगर अब वो दिन भर में सिर्फ

125
00:08:42,160 --> 00:08:46,240
तीन बेर खा रही है। पहले दिन में तीन बार भोजन करती थी। मगर आज

126
00:08:46,240 --> 00:08:49,520
वो पूरे दिन में केवल तीन बेर खा रही है।

127
00:08:49,520 --> 00:08:53,920
तो बेर शब्द का उपयोग ही अलग-अलग अर्थों में दोनों बार हो गया।

128
00:08:53,920 --> 00:08:57,920
तो कहां पर किस शब्द का क्या अर्थ लेना है

129
00:08:57,920 --> 00:09:02,160
ये हमें अगर हम परंपरा प्राप्त आचार्यों का सानिध्य

130
00:09:02,160 --> 00:09:06,320
छोड़ देंगे तो हम वैदिक ही नहीं रह जाएंगे। और कोई भी जाकिर नायक

131
00:09:06,320 --> 00:09:10,560
आकर के हमारे उपनिषदों का हमारे वेदों का अर्थ बताकर हमारे

132
00:09:10,560 --> 00:09:13,920
लोगों को ही मुसलमान बनाएगा।

133
00:09:13,920 --> 00:09:18,320
तो बहुत बहुत महत्वपूर्ण पद है यह शंकराचार्य।

134
00:09:18,320 --> 00:09:22,400
इसीलिए आप देखो कि जितने भी हिंदुत्ववादी संगठन है अपने धर्म

135
00:09:22,400 --> 00:09:26,400
रक्षकों के उसमें कभी भी शीर्ष पर बैठने वाला

136
00:09:26,400 --> 00:09:30,480
व्यक्ति शंकराचार्य को कुछ नहीं कहता है। चाहे शंकराचार्य कुछ भी कह

137
00:09:30,480 --> 00:09:34,800
दे ना मोदी जी कभी कहेंगे ना योगी जी कभी कहेंगे ना मोहन

138
00:09:34,800 --> 00:09:39,120
भागवत जी कभी कहे कोई नहीं कहेगा। हम लोग निचले स्तर पर ही मोबाइल

139
00:09:39,120 --> 00:09:43,440
के जरिए आने वाले जो ये जो संदेश होते हैं उनमें हम

140
00:09:43,440 --> 00:09:47,600
कहीं ना कहीं जानकारी का अभाव होने के कारण फंस जाते हैं और उसके पोषक

141
00:09:47,600 --> 00:09:51,680
हो जाते हैं। जो षड्यंत्र हमारे विरुद्ध रचा गया है उसी के हम

142
00:09:51,680 --> 00:09:55,760
पोषक हो जाते हैं। आज देखो ये अंग्रेजों की कूटनीति

143
00:09:55,760 --> 00:09:59,760
है कि कोई भी व्यक्ति जगत गुरु या आचार्य शब्द लिखने

144
00:09:59,760 --> 00:10:04,080
के लिए स्वतंत्र है। अंग्रेज जब भारत छोड़ के गए थे तो कांग्रेस

145
00:10:04,080 --> 00:10:04,800
का राज आया।

146
00:10:04,800 --> 00:10:08,800
उसने क्या किया? जगतुगुरु कोई भी लिख सकता है। आज इतने जगतगुरु हो गए।

147
00:10:08,800 --> 00:10:12,800
वास्तविकता में हमारा जगत गुरु कौन है? हम नहीं जानते। हम पोप को जानते

148
00:10:12,800 --> 00:10:17,200
हैं। पोप अगर मरेगा तो तीन दिन भारत का झंडा झुक जाएगा।

149
00:10:17,200 --> 00:10:21,200
मगर हम अपने धर्म के जो गुरु हैं वास्तविक उनको नहीं जानते

150
00:10:21,200 --> 00:10:25,200
हैं। तो वो जब मरेंगे तो कोई कुछ नहीं कहेगा। ठीक

151
00:10:25,200 --> 00:10:29,760
है? तो इससे क्या हो रहा है? हम अपने ही धर्म को नहीं जान पा रहे हैं।

152
00:10:29,760 --> 00:10:34,720
तो अब इसमें क्या हो रहा है कि क्या कहते हैं?

153
00:10:34,720 --> 00:10:38,800
ये अंग्रेजों की कूटनीति ये थी कि कोई भी

154
00:10:38,800 --> 00:10:43,040
व्यक्ति अपने आप को जगतगुरु लिख ले। अंग्रेजों के राज समाप्त

155
00:10:43,040 --> 00:10:47,040
होने तक कोई नहीं लिख सकता था। मगर उनके जाने के बाद जब कांग्रेस आई तो

156
00:10:47,040 --> 00:10:51,040
कांग्रेस ने ये किया कि जगतगुरु कोई भी लिख ले। आज आचार्य के

157
00:10:51,040 --> 00:10:55,040
नाम पर हिंदू धर्म का ही बांटाधार करने वाले कितने

158
00:10:55,040 --> 00:10:59,040
आचार्य घूम रहे हैं। आप खुद ही जानते हैं। रामपाल भी क्या है? रामपाल भी

159
00:10:59,040 --> 00:11:03,360
उनमें से ही एक है। आचार्य प्रशांत देखो हवन का, यज्ञ का, मूर्ति

160
00:11:03,360 --> 00:11:07,440
पूजा का हर हिंदू धर्म की हर चीज का खंडन करता है। रामपाल

161
00:11:07,440 --> 00:11:12,080
खुद को जगतगुरु कहता है। होली, दिवाली, मांग में सिंदूर भरना,

162
00:11:12,080 --> 00:11:16,080
भाई बहन का त्यौहार, रक्षाबंधन, कांवड़ यात्रा हर

163
00:11:16,080 --> 00:11:20,160
चीज का मजाक बनाता है। खुद को जगतगुरु कहता है। तो यह अंग्रेजों

164
00:11:20,160 --> 00:11:24,240
की कूटनीति है कि जगतगुरु इतने खड़े कर दो कि वास्तविक

165
00:11:24,240 --> 00:11:28,240
जगतगुरु को व्यक्ति जान ही ना पाए और एक दिन असली जगतगुरु की बुराई

166
00:11:28,240 --> 00:11:32,400
करने लग जाए। तो ये जो मैसेजेस बनाए जाते हैं शंकराचार्यों के विरोध

167
00:11:32,400 --> 00:11:36,400
में यह हमें हमारे सनातन धर्म से दूर करने

168
00:11:36,400 --> 00:11:40,400
के लिए बनाई गई एक कूटनीति होती है। जो विदेशी

169
00:11:40,400 --> 00:11:44,400
षड्यंत्र के तहत है। जैसे-जैसे हम शंकराचार्य को नहीं जानेंगे

170
00:11:44,400 --> 00:11:48,560
दूर होते जाएंगे। हमारा धर्म धर्म की व्याख्या

171
00:11:48,560 --> 00:11:52,720
मेरी और आपकी अलग होती जाएगी। आपका धर्म कुछ और होगा। गीता

172
00:11:52,720 --> 00:11:56,960
के अनुसार मेरा धर्म कुछ और होगा। तो हम हिंदू होते हुए भी एक साथ कहीं

173
00:11:56,960 --> 00:12:01,040
खड़े नहीं हो पाएंगे। क्यों? क्योंकि किसी का धर्म कुछ है,

174
00:12:01,040 --> 00:12:05,280
किसी का धर्म कुछ है। जैसे मान लीजिए कि हमारे यहां पर चचेरी, ममेरी,

175
00:12:05,280 --> 00:12:09,520
फुपेरी बहनों से शादी करना मना है। हिंदू धर्म के अनुसार। ठीक है?

176
00:12:09,520 --> 00:12:13,920
हम् मगर कुछ स्वयं को हिंदू मगर कुछ लोगों के यहां यह परंपरा

177
00:12:13,920 --> 00:12:18,000
है कि मामा की लड़की से शादी कर लेते हैं। बहनों ममेरी फुपेरी

178
00:12:18,000 --> 00:12:22,160
बहनों से शादी कर लेते हैं। ठीक है? मगर वो कैसे स्वयं

179
00:12:22,160 --> 00:12:26,480
को हिंदू हैं। तो अब क्या होगा कि ममेरी फुपेरी

180
00:12:26,480 --> 00:12:30,640
बहनों की बहनों की शादी से रोकने के लिए तो हम

181
00:12:30,640 --> 00:12:34,720
जाएंगे। के भैया हमारे यहां तो नहीं होती तो अगर कहीं बहन से शादी

182
00:12:34,720 --> 00:12:35,280
हो रही होगी तो

183
00:12:35,280 --> 00:12:39,520
हम रोकेंगे। रोकेंगे ना और कोई होगा जो उसको बचाने

184
00:12:39,520 --> 00:12:43,600
आएगा हिंदू ही हिंदू का दुश्मन क्यों क्योंकि दोनों का धर्म अलग-अलग

185
00:12:43,600 --> 00:12:47,920
हो गया हम तो ये एक कारण है हमको

186
00:12:47,920 --> 00:12:52,000
ये फूट डालने के लिए शंकराचार्यों के प्रति विरोध हमारी नसों

187
00:12:52,000 --> 00:12:56,000
में भरा जाता है उसको समझने की आवश्यकता है

188
00:12:56,000 --> 00:13:00,400
हमारा हमारी समस्या है बहु नेतृत्ववाद और

189
00:13:00,400 --> 00:13:04,560
वो हमारे अच्छा सोचिए जरा कि अगर देश में हर कोई

190
00:13:04,560 --> 00:13:08,560
व्यक्ति प्रधानमंत्री का टैग लगा के घूमने लगे तो देश का सत्यानाश हो जाएगा

191
00:13:08,560 --> 00:13:12,960
कि नहीं? क्योंकि जब व्यक्ति को इंस्पेक्टर

192
00:13:12,960 --> 00:13:17,120
के पास पहुंचना है और उसको बहुत सारे इंस्पेक्टर मिल रहे हैं। जब व्यक्ति

193
00:13:17,120 --> 00:13:21,200
को थानेदार के पास पहुंचना है तो बहुत सारे एसएओ

194
00:13:21,200 --> 00:13:25,520
आियाना एसएओ आशियाना मिल रहे हैं। तो वो व्यक्ति ज्यादा संभावना

195
00:13:25,520 --> 00:13:29,680
है कि सही एसएओ तक पहुंच ही नहीं पाएगा। उसी प्रकार से

196
00:13:29,680 --> 00:13:33,760
सनातन धर्म का बेड़ा गर्क है बहुत सारे जगतगुरु होने के कारण तो

197
00:13:33,760 --> 00:13:37,840
व्यक्ति सही जगतगुरु तक पहुंच ही नहीं पाएगा उल्टा पहुंचने की तो

198
00:13:37,840 --> 00:13:42,000
बात दूर वो तो उल्टा अब नफरत करने लगा अपने जगतगुरु से

199
00:13:42,000 --> 00:13:46,000
तो हिंदू नाम से होते हुए भी वो अपने हिंदुत्व को

200
00:13:46,000 --> 00:13:50,000
जानता ही नहीं है कि हिंदुत्व का अर्थ क्या है हीनता से दूर रहने वाला

201
00:13:50,000 --> 00:13:50,720
हिंदू

202
00:13:50,720 --> 00:13:55,040
हिमालय से लेकर कन्याकुमारी हिंदू सरोवर के बीच के स्थान को हिंदुस्तान

203
00:13:55,040 --> 00:13:59,120
कहा जाता है और वहां रहने वाले को हिंदू इंकार करती हुई गाय

204
00:13:59,120 --> 00:14:03,360
को धोने वाला हिंदू यह सब चीजें कहां मालूम है? क्यों

205
00:14:03,360 --> 00:14:07,840
नहीं मालूम है? क्योंकि हम अपने जगत गुरु से दूर है। रामो

206
00:14:07,840 --> 00:14:11,840
विग्रहवान धर्मा जय श्री राम हम सब कहते हैं। मगर जय श्री राम का अर्थ किसी

207
00:14:11,840 --> 00:14:16,720
को नहीं पता है। जय श्री राम क्यों है? क्योंकि

208
00:14:16,720 --> 00:14:20,800
राम का अर्थ है धर्म। रामो विग्रहवान धर्म

209
00:14:20,800 --> 00:14:24,880
तीन 37 13 वाल्मीकि रामायण और धर्म का अर्थ क्या

210
00:14:24,880 --> 00:14:28,960
है? सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है, कौन बहन

211
00:14:28,960 --> 00:14:33,040
है, कौन पत्नी है, किसको किस नजर से देखना है, यह हमें धर्म बताता

212
00:14:33,040 --> 00:14:37,040
है। अगर हमारे पास धर्म नहीं होगा तो सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों

213
00:14:37,040 --> 00:14:41,280
में हम लोग अंतर नहीं कर पाएंगे। हम लोग कुत्ता बिल्ली बन जाएंगे।

214
00:14:41,280 --> 00:14:45,360
तो जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हम कहते हैं उन नियमों की

215
00:14:45,360 --> 00:14:49,600
जय जो हमें माता बहन और पत्नी में अंतर करना सिखाते

216
00:14:49,600 --> 00:14:53,920
हैं जो हमें पशु से मनुष्य बनाते हैं।

217
00:14:53,920 --> 00:14:58,640
तो ये जो सिद्धांत होते हैं ये हमारा हिंदुत्व तुम्हें पता कैसे चलेगा?

218
00:14:58,640 --> 00:15:02,880
जब हम वास्तविक जगतगुरु को जान ही नहीं पाएंगे। भाई रामपाल तो बता देगा ब्रह्मा

219
00:15:02,880 --> 00:15:06,880
विष्णु महेश ही पूजा करना गलत है।

220
00:15:06,880 --> 00:15:11,280
हैं वो सीता माता वो पार्वती माता के अंदर वो काम लालसा

221
00:15:11,280 --> 00:15:15,360
थी राम के साथ हम ये वो

222
00:15:15,360 --> 00:15:19,360
तो हमें ये बता देगा ना तो इसलिए हमारे अंदर क्या किया गया

223
00:15:19,360 --> 00:15:23,360
पहले तो जगतगुरु बहुत सारे खड़े कर दो फिर शंकराचार्य पद

224
00:15:23,360 --> 00:15:27,360
के लिए इतनी अवमानना भर दो लोगों में आम

225
00:15:27,360 --> 00:15:31,600
जन्म में कि वो शंकराचार्य से दूर रहे आप देखो कोई भी विदेशी षड्यंत्र

226
00:15:31,600 --> 00:15:35,600
अपने आप आएगा भारत में उसकी किताब कभी खोल के देखना शुरू में

227
00:15:35,600 --> 00:15:40,160
ही पहले दूसरे पन्ने पर शंकराचार्य की बुराई लिखी होगी।

228
00:15:40,160 --> 00:15:45,040
रामपाल की किताब देख लो, इस्कॉन की किताब देख लो, आर्य समाज की किताब देख लो।

229
00:15:45,040 --> 00:15:49,280
शंकराचार्य की बुराई जरूर लिखी होगी। है ना? तो

230
00:15:49,280 --> 00:15:53,360
यह समझने का प्रयास करें। शंकराचार्य बहुत कुछ कर रहे हैं। वह

231
00:15:53,360 --> 00:15:57,520
चुप नहीं है। शंकराचार्य ने

232
00:15:57,520 --> 00:16:01,760
ऐसे लोगों को खड़ा कर दिया है कि आप दुनिया में कहीं भी चले

233
00:16:01,760 --> 00:16:06,640
जाओ। सनातन धर्म पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है।

234
00:16:06,640 --> 00:16:10,880
जिस दिन सनातन धर्म पर कोई उंगली उठेगी उस दिन

235
00:16:10,880 --> 00:16:15,280
जब सब हार जाएंगे तब आखरी आखिर में सनातन

236
00:16:15,280 --> 00:16:19,520
धर्म को बचाने वाला शंकराचार्य होगा। कोई अगर नहीं बचा पाएगा

237
00:16:19,520 --> 00:16:22,400
तो उसको शंकराचार्य बचा लेंगे। शंकराचार्य

238
00:16:22,400 --> 00:16:26,720
से कोई जीत नहीं सकता। पूरी दुनिया में सनातन धर्म के

239
00:16:26,720 --> 00:16:30,800
शंकराचार्य के पास ऐसा ज्ञान है। कोई सनातन धर्म का

240
00:16:30,800 --> 00:16:34,960
छू नहीं सकता। बौद्धों ने क्या किया था? बौद्ध पूरा

241
00:16:34,960 --> 00:16:38,960
खा जाने वाले थे। सनातन धर्म नष्ट हो जाता। ढाई हजार साल पहले

242
00:16:38,960 --> 00:16:43,040
शंकराचार्य ने बचा लिया। पूरा खरे

243
00:16:43,040 --> 00:16:47,440
दिया भारत से बौद्धों को। ठीक है भाई साहब।

244
00:16:47,440 --> 00:16:51,840
आशा करता हूं आपने भाई साहब हम कुछ पूछेंगे।

245
00:16:51,840 --> 00:16:56,240
नहीं नहीं आपकी बातें बातों से मैं प्रभावित हुआ हूं। अब हम कुछ पूछेंगे

246
00:16:56,240 --> 00:17:00,240
थोड़ा सा आपसे। जी। देखिए होता क्या है? बुरा नहीं मानना कि

247
00:17:00,240 --> 00:17:04,560
अगर हम कुछ तर्क वितर्क करेंगे मुझे नहीं जानकारी तभी होगी।

248
00:17:04,560 --> 00:17:08,720
जी जी गलत तो नहीं बोला हूं। जी जी जी

249
00:17:08,720 --> 00:17:12,720
अब जैसे आपने आप इसकी बातें बताई इनमें से कुछ बातें हमको आपकी

250
00:17:12,720 --> 00:17:16,720
अच्छी लगी कि हां ये चीज अगर मैंने की है तो उसमें से थोड़ा

251
00:17:16,720 --> 00:17:21,200
सा करेक्शन करने वाला था। ये आपकी बात से मुझे समझ में आया। जी

252
00:17:21,200 --> 00:17:25,360
हम लेकिन अब हम यहां आपसे ये पूछेंगे

253
00:17:25,360 --> 00:17:30,720
कि ये जैसे शंकराचार्य है तो

254
00:17:30,720 --> 00:17:35,280
कितने शंकराचार्य हैं भारत में? शंकराचार्य

255
00:17:35,280 --> 00:17:37,600
चार ही होते हैं। चार होते

256
00:17:37,600 --> 00:17:42,080
हैं। ठीक है? कि जैसे मीडिया हमारे शंकराचार्यों

257
00:17:42,080 --> 00:17:46,320
को कवरेज नहीं दे पा रही तो सोशल मीडिया पे तो हम प्रचार

258
00:17:46,320 --> 00:17:50,640
प्रसार कर ही सकते हैं अपनों का। तो कर तो रहे हैं। आप फॉलो

259
00:17:50,640 --> 00:17:54,640
नहीं कर रहे हैं उन्हें। ऐसा नहीं है कि वो हिंदुओं का पक्ष नहीं ले रहे

260
00:17:54,640 --> 00:17:58,720
हैं। आप देखिए तो सही जाकर के। नहीं मैंने भाई साहब यह बात

261
00:17:58,720 --> 00:18:03,120
नहीं कही है कि वो पक्ष नहीं ले रहे हैं। देखो अगर वो नहीं ले

262
00:18:03,120 --> 00:18:07,120
आप वो मुख्य बात बताइए जिस पर आपको लग रहा है कि ये होना चाहिए था और उन्होंने

263
00:18:07,120 --> 00:18:11,440
नहीं किया है। नहीं मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं। देखिए वो

264
00:18:11,440 --> 00:18:15,440
वो लोग जो कुछ कर रहे हैं अब आपने बताया कि उसको मीडिया कवरेज नहीं दे रही

265
00:18:15,440 --> 00:18:19,920
तो वो हम लोगों तक बात नहीं पहुंचती है। तो इसलिए मैं अब उनकी बात नहीं कर सकता हूं।

266
00:18:19,920 --> 00:18:24,080
वहां पे मेरी गलती है। मैंने मान लिया कि मेरी गलती है। जी जी ठीक है। मेरी गलती

267
00:18:24,080 --> 00:18:28,080
है। मैंने स्वीकार की। जी। अब

268
00:18:28,080 --> 00:18:32,080
बात यह है कि यह लोग जो आडंबर करके चल रहे हैं इनका

269
00:18:32,080 --> 00:18:36,400
विरोध करने कौन आए? उनका विरोध करने

270
00:18:36,400 --> 00:18:40,400
देखिए पहली बात तो यह है कि क्या करना

271
00:18:40,400 --> 00:18:44,880
है और क्या नहीं करना है में भी हमारा जो अंतिम

272
00:18:44,880 --> 00:18:49,040
निर्णय होगा वो उसी का होगा जो हमें शास्त्र दे रहा है तेरे

273
00:18:49,040 --> 00:18:52,640
लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है

274
00:18:52,640 --> 00:18:56,880
यदि शंकराचार्य ने चुना है कि हम इस रणनीति के तहत हिंदू

275
00:18:56,880 --> 00:19:01,280
राष्ट्र के लिए कार्य करेंगे तो हमें उस पर दोष दृष्टि नहीं रख पाएंगे क्योंकि

276
00:19:01,280 --> 00:19:05,440
शंकराचार्य हमारे लिए शब्द प्रमाण होते क्योंकि शंकराचार्यों से

277
00:19:05,440 --> 00:19:09,680
ही हमें शास्त्र मिले और शास्त्रों से ही हम हिंदू है। है ना? पहली

278
00:19:09,680 --> 00:19:13,680
बात। दूसरी बात यह है कि जिन व्यक्तियों का शंकराचार्य सामने से

279
00:19:13,680 --> 00:19:17,840
विरोध नहीं कर रहे हैं। उन व्यक्तियों का विरोध करने के लिए हम और आप

280
00:19:17,840 --> 00:19:22,320
जैसे बहुत सारे सनातनी शंकराचार्य ही तो खड़े करते हैं।

281
00:19:22,320 --> 00:19:26,720
भाई जैसे मान लीजिए रामपाल की बात ले ले।

282
00:19:26,720 --> 00:19:30,880
रामपाल का अगर डायरेक्ट शंकराचार्य नाम लेकर के खंडन करने लगेंगे।

283
00:19:30,880 --> 00:19:35,040
रामपाल के तो बल्ले बल्ले हो जाएंगे। बिल्कुल सीधे सीधे

284
00:19:35,040 --> 00:19:39,200
रामपाल जैसे टपुंजिया व्यक्ति की तुलना शंकराचार्य से होने लगी पर्दे पर

285
00:19:39,200 --> 00:19:43,280
छा गए जगह जगह बातें होने लगी अरे रामपाल जो है

286
00:19:43,280 --> 00:19:47,280
रामपाल की लड़ाई शंकराचार्य से वैसे मीडिया कवरेज वो नहीं करेगी कवर

287
00:19:47,280 --> 00:19:52,000
मगर इस मामले में रामपाल जरूर पूरी दुनिया विश्व विख्यात हो जाएंगे तो शंकराचार्य

288
00:19:52,000 --> 00:19:56,160
की एक रणनीति भी होती है क्योंकि शंकराचार्य धर्म और

289
00:19:56,160 --> 00:20:00,240
ब्रह्म की व्याख्या के साथ-साथ धर्म की रक्षा करने का कार्य भी कर

290
00:20:00,240 --> 00:20:04,320
रहे हैं और इस समय दुविधा क्या है कि उन्हें शासन तंत्र वैसा

291
00:20:04,320 --> 00:20:07,840
प्राप्त नहीं है। पहले क्या होता था कि

292
00:20:07,840 --> 00:20:12,000
जो रामचंद्र जी होते थे वो वशिष्ठ से निर्देश लेते

293
00:20:12,000 --> 00:20:16,000
थे। वशिष्ठ के अनुसार राज्य करते थे। मगर इस समय क्या हो रहा

294
00:20:16,000 --> 00:20:20,160
है कि लोकतंत्र स्थापित है। तो कहीं ना कहीं जो देश का राजा

295
00:20:20,160 --> 00:20:24,640
है वो हिंदू होते हुए भी उस तरीके से कार्य नहीं कर पा रहा है जैसे रामचंद्र

296
00:20:24,640 --> 00:20:28,640
जी करते थे। इतनी तो मानेंगे ना आप। तो उसमें क्या हो रहा है कि

297
00:20:28,640 --> 00:20:33,280
जिस जिन अंशों में वो काम नहीं कर पा रहा उन अंशों में से कुछ अंशों को शंकराचार्य

298
00:20:33,280 --> 00:20:37,680
को ही अपने हाथों में लेना पड़ेगा कि चलो ये रणनीति हम ही अपनाते हैं।

299
00:20:37,680 --> 00:20:41,680
अगर लोकतंत्र लोकतांत्रिक राजा नहीं कर पा रहे

300
00:20:41,680 --> 00:20:46,320
हैं जो कार्य तो उनको हम ही करते हैं। तो ऐसे में लोकतांत्रिक

301
00:20:46,320 --> 00:20:50,720
राजा की इतनी वाहवाही अवश्य होगी कि जब शंकराचार्य ऐसा कुछ करेंगे

302
00:20:50,720 --> 00:20:54,800
तो वो उनको रोकेगा नहीं। जैसे मोदी जी, योगी जी

303
00:20:54,800 --> 00:20:58,800
कभी भी शंकराचार्य कोई कार्य करते तो उस पर यह नहीं करते हम यह रोकने

304
00:20:58,800 --> 00:21:02,800
जा रहे हैं। है ना? तो अब

305
00:21:02,800 --> 00:21:06,880
अब ऐसे में उनके द्वारा जो बनाई गई रणनीतियां होती है ना शंकराचार्यों

306
00:21:06,880 --> 00:21:10,880
की तो उसमें कई बार ऐसा होता है कि वो इस मामले पर खुद

307
00:21:10,880 --> 00:21:15,040
ना बोल के कोई अमुक व्यक्ति खड़ा कर दिया उसके द्वारा बुलवा रहे हैं।

308
00:21:15,040 --> 00:21:19,280
या किसी किसी मामले पर बात नहीं कर रहे हैं। जिन जहां उन्हें आवश्यक

309
00:21:19,280 --> 00:21:22,960
लग रहा है। इस पर बात करने से ये विप्लव हो

310
00:21:22,960 --> 00:21:28,080
सकता है। यह नुकसान हो सकता है। यह धर्म को क्षति पहुंच सकती है।

311
00:21:28,080 --> 00:21:32,720
है ना? तो ऐसा नहीं है कि नहीं कर रहे हैं। अब जैसे रंजना अग्निहोत्री

312
00:21:32,720 --> 00:21:36,800
जी हैं जो रामपाल के विरुद्ध जो हमारे देवी देवताओं को गाली देता है।

313
00:21:36,800 --> 00:21:41,280
बहुत उत्कृष्ट उदाहरण मैं दे रहा हूं। रंजना अग्निहोत्री जी द्वारिका शंकराचार्य

314
00:21:41,280 --> 00:21:45,280
जी की शिष्या हैं। तो उनको रामपाल से लड़ने की

315
00:21:45,280 --> 00:21:49,440
प्रेरणा और राम मंदिर का केस भी उन्होंने लड़ा था। तो राम मंदिर

316
00:21:49,440 --> 00:21:53,440
के लिए ये इसके लिए लड़ने की प्रेरणा और शिक्षा और ज्ञान

317
00:21:53,440 --> 00:21:57,680
कहां से मिला? द्वारका शंकराचार्य से। मैं स्वयं पूरी पूरी

318
00:21:57,680 --> 00:22:01,680
पीठ के शंकराचार्य जी का शिष्य हूं। तो रामपाल के विरुद्ध जो आज

319
00:22:01,680 --> 00:22:06,000
इतना हम अपनी मेरे घर की स्त्री के साथ बलात्कार

320
00:22:06,000 --> 00:22:10,400
करने की धमकी मेरी पांच साल की बिटिया के साथ बलात्कार करने की धमकी

321
00:22:10,400 --> 00:22:14,640
चाकुओं से गोदगोद कर मार डालने की धमकी तीन से चार बार मेरे विरुद्ध

322
00:22:14,640 --> 00:22:18,960
एफआईआर कराने की धमकी और मेरे पास इस समय

323
00:22:18,960 --> 00:22:23,360
110 करोड़ के 100 लगभग 101 एक करोड़ के नोटिस

324
00:22:23,360 --> 00:22:27,680
मेरे पास हैं मानहानि के और इसके बावजूद

325
00:22:27,680 --> 00:22:31,920
भी मैं अपनी जगह पे अटल रूप से खड़ा हुआ हूं। यह मुझे कहां से प्राप्त

326
00:22:31,920 --> 00:22:36,080
हुआ? मैं तो एक भटका हुआ हिंदू था। किसने भरी ये

327
00:22:36,080 --> 00:22:38,000
भावना मेरे अंदर कि अपने धर्म के लिए

328
00:22:38,000 --> 00:22:42,160
मर जाओ मगर खड़े रहो। खड़ा किया ना ऐसा व्यक्ति

329
00:22:42,160 --> 00:22:46,160
ये तो वो है। ये तो मैं हूं जो मुझ जैसा एक छोटा सा निमित्त जो

330
00:22:46,160 --> 00:22:50,240
आपके सामने खड़ा हूं। सोचिए शंकराचार्य ने ऐसे कितने लोग खड़े

331
00:22:50,240 --> 00:22:54,240
करे होंगे अभी तक। नहीं बात आपकी सही है। तो आपका

332
00:22:54,240 --> 00:22:58,640
जो प्रश्न था कि इन इन लोगों के बारे में कौन बोलेगा

333
00:22:58,640 --> 00:23:02,880
तो रणनीति के तहत जहां बोलना उपयुक्त होता है वहां शंकराचार्य बोलते

334
00:23:02,880 --> 00:23:06,960
हैं और जहां नहीं बोलना होता है वो उनका निर्णय होता है कि कहां

335
00:23:06,960 --> 00:23:10,960
नहीं बोलना है वहां चुप भी रहते हैं और जहां पे अन्यों से बुलवाना होता है

336
00:23:10,960 --> 00:23:15,200
वहां पे अन्यों से भी बुलवाते हैं। भाई साहब हम आपकी

337
00:23:15,200 --> 00:23:19,360
बात से सहमत है लेकिन अब आपने जो चीज मुझे बताई

338
00:23:19,360 --> 00:23:23,440
है वो ठीक है। मैंने आपने बताया जहां नहीं बोलना

339
00:23:23,440 --> 00:23:27,440
है वहां वो नहीं बोलते हैं या उनके द्वारा बुलवाया नहीं जाता है। ठीक

340
00:23:27,440 --> 00:23:31,600
है। आज की डेट में आप ये बता जान रहे

341
00:23:31,600 --> 00:23:35,680
हैं कि आडंबर करने वालों को

342
00:23:35,680 --> 00:23:40,160
आडंबर करने वालों के लोग कितना है और किसका

343
00:23:40,160 --> 00:23:45,840
सोशल मीडिया हो रहा है। किसका क्या हो रहा है? और आज की डेट में अगर

344
00:23:45,840 --> 00:23:50,000
जो कुछ हो रहा है वो टोटल आदमी कैसे जान रहा है? मीडिया या सोशल

345
00:23:50,000 --> 00:23:53,280
मीडिया मीडिया से ज्यादा आजकल आजकल सोशल

346
00:23:53,280 --> 00:23:57,600
मीडिया है और जैसे अभी कई बार चर्चा हुई कि

347
00:23:57,600 --> 00:24:01,600
शिवजीत ने अभी जैसे बताया कि ये जो झांकियां निकलती है ये क्या सही है तो वो

348
00:24:01,600 --> 00:24:06,000
गलत है इनको कौन रोकने आएगा अगर हम कह दे वो शंकर भगवान या

349
00:24:06,000 --> 00:24:10,240
पार्वती माता को बना के वहां नटा रहे हैं और हम जाके वहां उंगली उठाए कोई आके

350
00:24:10,240 --> 00:24:14,320
बोल दे कि आपने ये माता पार्वती ऊपर उंगली उठाई तो वहां पर कौन गलत

351
00:24:14,320 --> 00:24:18,880
हुआ हम हुए या कथावाचक हुए

352
00:24:18,880 --> 00:24:22,880
अगर वो नचवा रहा है तो कत जो नचवाने वाला है वो

353
00:24:22,880 --> 00:24:27,360
गलत हुआ और वहां विरोध किसका होगा

354
00:24:27,360 --> 00:24:31,520
सबसे ज्यादा विरोध उसका होगा जो नचवाने

355
00:24:31,520 --> 00:24:35,760
वाला होगा उसका विरोध होगा उसका कोई नहीं विरोध करेगा भाई साहब क्योंकि

356
00:24:35,760 --> 00:24:39,920
वहां आज की डेट में हिंदुओं को आपने ही कहा इन लोगों को जानकारी नहीं

357
00:24:39,920 --> 00:24:44,000
है मैंने ये बात आपकी स्वीकारी है तो भाई साहब इसीलिए तो हम लोगों को कम

358
00:24:44,000 --> 00:24:48,160
अपने जो जो मूल सिद्धांत है ना उनको उनको प्रचारित

359
00:24:48,160 --> 00:24:52,320
करने की बहुत आवश्यकता है। हमको सभाएं करनी होंगी। हमको अपने हिंदू

360
00:24:52,320 --> 00:24:56,560
बच्चों में ठूसना होगा कि सत्यम ज्ञानम अनंतम

361
00:24:56,560 --> 00:25:00,800
ब्रह्म असतो मा सदगो मा ज्योतिर्गमया हमको अपने बच्चों

362
00:25:00,800 --> 00:25:04,800
में ठूसना होगा। हमको अपने समाज में ये जानकारी देनी होगी

363
00:25:04,800 --> 00:25:08,560
कि किसकी बात माननी है? किसकी नहीं माननी है? आचार्य

364
00:25:08,560 --> 00:25:12,880
प्रशांत जैसों की बात नहीं माननी है। वो प्रामाणिक आचार्य नहीं है।

365
00:25:12,880 --> 00:25:17,120
रामपाल जैसे तट पुंजियों की बात नहीं माननी है। वो प्रामाणिक जगत

366
00:25:17,120 --> 00:25:21,200
गुरु नहीं है। हमें बताना होगा और बताने की बजाय यदि हम

367
00:25:21,200 --> 00:25:25,200
ही हमारे प्रामाणिक आचार्यों के प्रति अनास्थावान पहले

368
00:25:25,200 --> 00:25:29,680
से ही बना देंगे। तो वो कैसे फिर एक दिन हम जा करके कहेंगे कि भाई शंकराचार्य

369
00:25:29,680 --> 00:25:33,680
की बात मान्य होगी। रामपाल जब वेदों का ज्ञान होने का दावा

370
00:25:33,680 --> 00:25:38,000
करेगा तो हम उससे क्या यह कहेंगे कि नहीं हम अपना वेदों का ज्ञान देंगे नहीं

371
00:25:38,000 --> 00:25:42,240
वहां हमें उससे कहना पड़ेगा नहीं रामपाल का नहीं शंकराचार्य

372
00:25:42,240 --> 00:25:46,400
का जो वेद वेद का अर्थ है वह मान्य होगा वहां अपना नाम नहीं लेंगे

373
00:25:46,400 --> 00:25:50,640
ना तो पहले ही जब शंकराचार्य के प्रति अनास्था बना चुके होंगे

374
00:25:50,640 --> 00:25:54,640
तो वहां ये नहीं कहेगा अरे तुम ही ने तो एक दिन स्टेटस लगाया था शंकराचार्य गलत

375
00:25:54,640 --> 00:25:58,880
है आज तुम शंकराचार्य सही होके आए हो और ये मैं बता दूं भाई साहब

376
00:25:58,880 --> 00:26:02,880
जब भी हम लोग धर्म की रक्षा करने जाएंगे। अंत में हमको शंकराचार्य

377
00:26:02,880 --> 00:26:06,880
की जरूरत पड़ जाएगी। उसके बिना हम जीत नहीं पाएंगे उस

378
00:26:06,880 --> 00:26:11,040
नाम के बिना। ये मैं आपको बता रहा हूं। इसलिए उस

379
00:26:11,040 --> 00:26:15,360
नाम के प्रति आस्था को हमें सुरक्षित बना के रखने की आवश्यकता

380
00:26:15,360 --> 00:26:19,440
है हर हिंदू को और ये बिल्कुल। अब

381
00:26:19,440 --> 00:26:23,440
मैं आपने कहा मैंने ये आपकी बात स्वीकार की

382
00:26:23,440 --> 00:26:23,940
और

383
00:26:23,680 --> 00:26:28,000
उसको डिलीट भी किया। ठीक है। मैंने बात रिपीट की। मैं बहुत धन्यवाद।

384
00:26:28,000 --> 00:26:32,160
बहुत-बहुत आभार। नहीं धन्यवाद हालांकि मैंने कहा था कि मैंने

385
00:26:32,160 --> 00:26:36,160
हालांकि शिवजीत से कहा था कि अरे इसमें डायरेक्ट

386
00:26:36,160 --> 00:26:40,240
फोन करने की आवश्यकता नहीं किसी दिन बैठेंगे जब साथ में होंगे तो बातें हो

387
00:26:40,240 --> 00:26:44,320
रही होंगी छिड़ जाएगी तो उसी समय बातें नहीं अलग से फोन करने की

388
00:26:44,320 --> 00:26:48,320
आवश्यकता नहीं है नहीं नहीं भाई साहब होता क्या है आप आपकी बात से

389
00:26:48,320 --> 00:26:52,400
सहमत है हम मैंने कहा आपकी बातों से सहमत देखिए होता क्या है जैसे अभी आपने

390
00:26:52,400 --> 00:26:56,400
कुछ चीजें बताई वो मुझे अ समझ में आई अब मैं जो चर्चा कर

391
00:26:56,400 --> 00:27:01,120
रहा हूं वो चर्चा आ रही है। यह जो आज की डेट में कथावाचक

392
00:27:01,120 --> 00:27:05,360
है, इनका विरोध कौन करेगा? यह कौन सी कथा कहने आते हैं?

393
00:27:05,360 --> 00:27:09,360
लोगों के अंदर धर्म की जानकारी नहीं हो पा रही। ये कथावाचक है

394
00:27:09,360 --> 00:27:13,600
या लुटेरे हैं। देखिए हम लोग क्या करते हैं जो

395
00:27:13,600 --> 00:27:17,600
कथावाचक हैं। हम पहले उनको देख लेते हैं कि यह

396
00:27:17,600 --> 00:27:21,760
किस स्तर के हैं और इनको सुनने वाले लोग कितने हैं। अब मान लीजिए किसी

397
00:27:21,760 --> 00:27:25,840
कथावाचक को 500 लोग सुनने वाले हैं। ठीक है? और मुझे

398
00:27:25,840 --> 00:27:30,080
सुनने वाले हैं दो लाख लोग। ठीक है? अब मैंने

399
00:27:30,080 --> 00:27:34,080
अपने दो लाख वाले मंच से 500 वाले का नाम ले कह दिया ये गलत

400
00:27:34,080 --> 00:27:38,240
है। ठीक? तो अब क्या होगा कि दो

401
00:27:38,240 --> 00:27:38,800
लाख में

402
00:27:38,800 --> 00:27:42,960
से दो लाख लोगों को तुरंत उस कथावाचक का नाम पता चल गया।

403
00:27:42,960 --> 00:27:47,120
हम्म। ठीक। अब उसको 500 की बजाय उसको चेक करने के नाम पे

404
00:27:47,120 --> 00:27:51,200
कहता क्या है विरोध? गंदी बात क्या कहता है? उस गंदी बात को चेक करने के नाम पे वहां पे

405
00:27:51,200 --> 00:27:55,200
कम से कम 1 लाख आदमी पहुंच गया। पहले उसको 500 सुन रहे उसको

406
00:27:55,200 --> 00:27:59,360
1500 सुन रहे हैं। इसके बाद क्या होगा कि

407
00:27:59,360 --> 00:28:04,000
एट दी सेम टाइम जितने हमारे दु हैं शत्रु

408
00:28:04,000 --> 00:28:08,160
चाहे वो नीले वाले हो चाहे वो बाहरी विधर्मी

409
00:28:08,160 --> 00:28:12,160
हो चाहे वो कोई भी हो उन सबको हमने

410
00:28:12,160 --> 00:28:16,160
एक हमारे एक मतलब उनमें आपस में हमने संपर्क करा

411
00:28:16,160 --> 00:28:20,400
दिया वो तुरंत उसके पास भाई तुम तो बहुत अच्छी कथा कहते हो उसको

412
00:28:20,400 --> 00:28:24,400
तुरंत इंस्पायर करेंगे और हमसे पैसा ले लो हमारे यहां भी आकर कथा करो

413
00:28:24,400 --> 00:28:28,720
समझ रहे हो? तो इसलिए यह देखना पड़ता है कि किस व्यक्ति

414
00:28:28,720 --> 00:28:32,720
का विरोध किस प्रकार से होना चाहिए। दूसरी बात कई ऐसे भी

415
00:28:32,720 --> 00:28:37,040
होते हैं जो उद्देश्य पूर्वक नहीं कर रहे हैं बल्कि उनको अज्ञानता

416
00:28:37,040 --> 00:28:41,040
है। तो उनका सार्वजनिक विरोध सही नहीं होता है। बल्कि उनको भाईचारे के

417
00:28:41,040 --> 00:28:45,280
तहत समझाना आवश्यक होता है। जिन्हों जो अज्ञानता पूर्वक कुछ गलती

418
00:28:45,280 --> 00:28:49,360
कर रहे हैं तो उनका हम पहले ही अगर सार्वजनिक विरोध कर देंगे तो हो सकता है वो

419
00:28:49,360 --> 00:28:53,600
हमारा दुश्मन ही बन जाए जो हमारा भाई था। तो इस मामले

420
00:28:53,600 --> 00:28:55,200
में

421
00:28:55,200 --> 00:28:59,280
ये सिद्धांत है महाभारत का जब कोई राक्षस था जो

422
00:28:59,280 --> 00:29:03,760
इनको क्या कहते हैं कौरव सो रहे होते हैं

423
00:29:03,760 --> 00:29:08,080
तो वहां पर कोई राक्षस था इनको मार डालने वाला था

424
00:29:08,080 --> 00:29:12,320
क्यों युधिष्ठिर बचाने जाते हैं तो बाकी लोग कहते

425
00:29:12,320 --> 00:29:16,720
हैं कि अरे वो क्या कहते हैं अरे

426
00:29:16,720 --> 00:29:20,880
क्यों बचाने जा रहे हो हमारे तो दुश्मन है ना तो वहां पर युधिष्ठिर

427
00:29:20,880 --> 00:29:24,880
जी ने क्या संदेश दिया नहीं

428
00:29:24,880 --> 00:29:28,880
वो हमारे आपस की बात है कि हम में आपस में क्या है

429
00:29:28,880 --> 00:29:32,960
अगर अंदर की बात है तो वो 100 हम पांच मगर कोई बाहर

430
00:29:32,960 --> 00:29:36,000
का आ जाए तो हम 105

431
00:29:36,000 --> 00:29:40,080
है ना तो अब जैसे करपात्री जी महाराज ने भी यही

432
00:29:40,080 --> 00:29:44,320
बात की थी आर्य समाज मूर्ति पूजा का विरोध करते हैं। मूर्ति पूजा

433
00:29:44,320 --> 00:29:48,400
का विरोध मतलब अगर आर्य समाज की बातें मान ली जाए तो हमारे देश से

434
00:29:48,400 --> 00:29:52,400
हिंदू मंदिर खत्म हो जाए तुरंत तो फिर काहे

435
00:29:52,400 --> 00:29:56,640
के लिए लड़े इतने साल राम मंदिर के लिए मूर्ति पूजा तो गलत है। तो

436
00:29:56,640 --> 00:30:00,640
आर्य समाजियों के ऊपर जब मुस्लिमों ने वो किया था

437
00:30:00,640 --> 00:30:05,440
वार तो करपात्री जी खड़े हो गए उनके साथ लोहा

438
00:30:05,440 --> 00:30:09,440
लेने के लिए। क्यों खड़े हो गए? क्योंकि अंदर की बात है कि हम और

439
00:30:09,440 --> 00:30:10,240
आर्य समाज में

440
00:30:10,240 --> 00:30:14,240
हमारे मतभेद हैं। तो अंदर वो वो 100 हम

441
00:30:14,240 --> 00:30:18,400
पांच मगर कोई बाहर का आ जाए तो हम 105 तो इसीलिए यह

442
00:30:18,400 --> 00:30:22,400
भी देखना पड़ता है कि जो ये कथावाचक हैं ये किस तरीके के हैं इनका बाहरी

443
00:30:22,400 --> 00:30:26,480
विरोध करना है कि अंदरूनी तरीके से इनको इनसे बात

444
00:30:26,480 --> 00:30:30,640
करके वाद संवाद स्थापित करके इनसे बात करके और जो है शोधन

445
00:30:30,640 --> 00:30:34,720
कार्य किया जाना है। ये सब मतलब बातें जो है

446
00:30:34,720 --> 00:30:38,720
विचारनीय होती है। बहुत सोच समझ के कार्य करना पड़ता है। अब जैसे

447
00:30:38,720 --> 00:30:42,800
मैं आपको एक बात कहूं छोटी सी प्रदीप मिश्रा जी है बहुत सारी

448
00:30:42,800 --> 00:30:46,960
ऐसी बातें बोलते हैं जो शास्त्रों के विरुद्ध है। मगर

449
00:30:46,960 --> 00:30:51,440
हम क्योंकि वो शंकराचार्यों के प्रति प्रेमानंद

450
00:30:51,440 --> 00:30:55,520
जी जितने भी हमारे प्रामाणिक आचार्य गण हैं उनके प्रति

451
00:30:55,520 --> 00:30:59,600
अवमानना नहीं करते। इसलिए हमारे चैनल पर आप देखेंगे YouTube पर

452
00:30:59,600 --> 00:31:03,680
तो हमने बहुत लोगों की खाट खड़ी की है। मगर हम इस

453
00:31:03,680 --> 00:31:07,760
तरीके से बहुत ज्यादा उनका खंडनात्मक तरीके से प्रदीप मिश्रा जी

454
00:31:07,760 --> 00:31:11,840
के बारे में कभी नहीं बोला। क्यों नहीं बोला? क्योंकि हमें मालूम है जो वो कर रहे हैं

455
00:31:11,840 --> 00:31:15,840
वो उद्देश्य पूर्वक नहीं कर रहे हैं। वो अज्ञानता वश

456
00:31:15,840 --> 00:31:19,840
कर रहे हैं। यदि हम धीरे-धीरे उनसे वाद संवाद स्थापित करेंगे तो बात ठीक

457
00:31:19,840 --> 00:31:23,840
हो जाएगी। अब जैसे आप ही की बात ले लीजिए। आपने अभी स्टेटस

458
00:31:23,840 --> 00:31:25,280
लगाया तो हमारे मन में

459
00:31:25,280 --> 00:31:30,240
यह भाव नहीं आया। इसका हम विरोध करें और जो हम भी स्टेटस लगा दे या इनको जो है

460
00:31:30,240 --> 00:31:34,400
शास्त्रार्थ की दृष्टि से देखें। हमारे मन में ये भाव आए भाई ये जो

461
00:31:34,400 --> 00:31:38,400
भाई साहब है जानकारी के अभाव के कारण है धीरे-धीरे साथ जब

462
00:31:38,400 --> 00:31:42,480
होगा हम लोगों का धीरे-धीरे अपने आप ही इनका जो है

463
00:31:42,480 --> 00:31:46,800
वो चीज इनको पता चल जाएगी जो अभी नहीं पता है ये भाव है तो ऐसे

464
00:31:46,800 --> 00:31:50,800
ही देखना पड़ता है कि किसका विरोध करना है किसको शोधन

465
00:31:50,800 --> 00:31:54,800
करना है किसको केवल बात संवाद करना है किस तरीके से किसके

466
00:31:54,800 --> 00:31:58,880
साथ स्थापित करना अगर हम सही मायने में देखने देखने

467
00:31:58,880 --> 00:32:03,120
में जाए तो आप तो जानते ही हो उस समय हिंदू समाज कितना भटका हुआ हुआ है।

468
00:32:03,120 --> 00:32:07,440
आप 10 धर्म धर्मनिष्ठ जो धर्म को मानने वाले लोग हैं।

469
00:32:07,440 --> 00:32:11,440
आप उनके उनको बिठा लो एक कुर्सी पे। ठीक है? मान लीजिए

470
00:32:11,440 --> 00:32:15,440
बजरंग दल के हैं या आरएसएस के ही है। उनको एक 10 कुर्सियों डाल के

471
00:32:15,440 --> 00:32:19,680
बिाल दो। एक बात बीच में डाल दो कि बताओ सनातन

472
00:32:19,680 --> 00:32:23,920
धर्म में मूर्ति पूजा है कि नहीं है या यह डाल दो भगवान

473
00:32:23,920 --> 00:32:27,920
निराकार है कि साकार है या यह डाल दो कि मांस खाना है कि

474
00:32:27,920 --> 00:32:32,000
नहीं खाना है थोड़ी देर में देखो दसों लोगों में आपस में वो होने

475
00:32:32,000 --> 00:32:34,640
लग जाएगा

476
00:32:34,640 --> 00:32:38,880
नहीं ये बात आप भैया बात आपकी भाई साहब सही है मैं ये

477
00:32:38,880 --> 00:32:40,640
चीज कह रहा हूं

478
00:32:40,640 --> 00:32:44,880
कि मतलब अगर थोड़ी-थोड़ी जानकारी होगी तो वो

479
00:32:44,880 --> 00:32:49,680
रुकेगी और ज्यादा ज्यादा हो जाएगी तो बाउंस हो जाएगी। गलत तो नहीं

480
00:32:49,680 --> 00:32:54,160
एकदम सही बात मैं कह रहा हूं। अब इसको देखिए

481
00:32:54,160 --> 00:32:57,760
गलत नहीं समझिएगा।

482
00:32:57,760 --> 00:33:02,080
होता है कि नहीं होता है? बहुत आनंदित कर देने वाली चर्चा रही

483
00:33:02,080 --> 00:33:04,800
आपसे।

484
00:33:04,800 --> 00:33:08,800
मैं मेरा कहना जो ये लगा था ये कह मतलब अब

485
00:33:08,800 --> 00:33:13,040
आपने जो बताया वो एक अलग भाव था और वो मेरी समझ

486
00:33:13,040 --> 00:33:17,360
में आया। और मेरा जो सोचना था जैसे आपने बताया कि जानकारी का भाव

487
00:33:17,360 --> 00:33:21,680
वह बिल्कुल था। ठीक है? और मेरा जो उद्देश्य था वो केवल टारगेट

488
00:33:21,680 --> 00:33:27,040
कथा वाचकों का ही था। मैं आपको रियल बता रहा हूं। क्योंकि कोई भी कथावाचक

489
00:33:27,040 --> 00:33:31,120
धर्म के प्रति और हमारी महाभारत क्या कहती है? हमारे वेद क्या कहते हैं?

490
00:33:31,120 --> 00:33:35,120
हमारी रामायण क्या कहती है? हमारी गीता क्या कहती है? ये कोई नहीं वहां पर बताने

491
00:33:35,120 --> 00:33:39,200
आता है। केवल कहानी सुनाने आते हैं सब। तो मैं

492
00:33:39,200 --> 00:33:43,600
आपसे एक निवेदन करूंगा। आपने सही किया मगर इसमें भी कथावाचक

493
00:33:43,600 --> 00:33:47,920
नाम ना डालिए इसमें भी व्यक्ति को पकड़िए डायरेक्ट जो व्यक्ति

494
00:33:47,920 --> 00:33:52,560
बहुत ज्यादा घोर तरीके से कथा का अपमान कर रहा हो है ना

495
00:33:52,560 --> 00:33:56,240
तो उस व्यक्ति का क्योंकि कथावाचक अच्छे भी है

496
00:33:56,240 --> 00:34:00,240
ऐसा नहीं है कुछ भी तो क्या होगा कि अगर हम कथावाचक

497
00:34:00,240 --> 00:34:04,880
कह देंगे ना तो उसमें भी सारे कथावाचक आ जाएंगे तो

498
00:34:04,880 --> 00:34:08,960
हम क्या करें नाम लेकर के जो बहुत ज्यादा उसमें भी ऐसा नहीं कि जिस

499
00:34:08,960 --> 00:34:12,960
किसी ने कोई थोड़ी बहुत ही गलत बात बोल दी उसके लिए बोल दिया क्योंकि फिर

500
00:34:12,960 --> 00:34:17,040
हमारी इंटरनल लड़ाई बाहर वालों को दिखने लगेगी। वो

501
00:34:17,040 --> 00:34:21,120
उसका फायदा उठाने लगेंगे और हमारे उस भाई

502
00:34:21,120 --> 00:34:25,120
को हमसे तोड़ने का प्रयास करने लगेंगे। तो इसलिए

503
00:34:25,120 --> 00:34:29,200
बहुत ज्यादा किसी से घोर गलती हो जाए। जैसे अभी मैंने सुना

504
00:34:29,200 --> 00:34:33,280
था जो एक वो नहीं है एक व्यक्ति जो

505
00:34:33,280 --> 00:34:37,680
बहुत गंदे तरीके से फिल्मी अंदाज में गाने गा रहा था।

506
00:34:37,680 --> 00:34:41,680
उसप एफआईआर हुई थी हजरतगंज में है ना वो

507
00:34:41,680 --> 00:34:45,760
व्यक्ति ऐसा था जिसप बोलने लायक है हालांकि उसने जब क्षमा मांग लिया तो

508
00:34:45,760 --> 00:34:49,760
हमारे मतलब वो हां ठीक है क्षमा मांग लिया ठीक है मगर वो

509
00:34:49,760 --> 00:34:53,840
ऐसा कर रहा था कि बहुत ज्यादा बिल्कुल फिल्मी तरीके से भागवत

510
00:34:53,840 --> 00:34:57,840
अरे जो पूरी के शंकराचार्य जी है गुरुदेव वो खुद अपने आज से 35

511
00:34:57,840 --> 00:35:02,320
साल पहले कह चुके हैं कि धर्म को बिगाड़ रहे हैं कथावाचक

512
00:35:02,320 --> 00:35:06,320
हम आपको भेजेंगे जब वो कह चुके हैं कथावाचकों के लिए जो आप बात कह रहे हैं

513
00:35:06,320 --> 00:35:10,400
कि कथावाचक उन्होंने धर्म को बहुत बिगाड़ दिया है। क्यों? क्योंकि कथा

514
00:35:10,400 --> 00:35:11,520
में वेद वेदांग

515
00:35:11,520 --> 00:35:16,160
तो रहा नहीं। भगवान जो जो उसका तत्विक

516
00:35:16,160 --> 00:35:20,160
बात है वो तो रही नहीं। रंगारंग कार्यक्रम हो जाता है। वही

517
00:35:20,160 --> 00:35:24,240
चीज है ना और कथा वाचक और ये जैसे आपने

518
00:35:24,240 --> 00:35:28,320
कहा कि उसमें सब नहीं है। तो अब जैसे एक गवर्नमेंट

519
00:35:28,320 --> 00:35:32,400
ने अह अह वो किया है कि भ्रष्टाचार या भ्रष्ट।

520
00:35:32,400 --> 00:35:36,560
तो हर विभाग में 90% लोग भ्रष्ट है। हर विभाग

521
00:35:36,560 --> 00:35:40,560
में 10 10% ईमानदार है। उन

522
00:35:40,560 --> 00:35:44,720
10%ों की गिनती नहीं होती है और गाली पूरे विभाग से दिया

523
00:35:44,720 --> 00:35:49,120
जाता है। मगर मगर मैं कहूंगा कि ये

524
00:35:49,120 --> 00:35:53,200
किया जाता है। मगर ये सनातन सिद्धांत नहीं है।

525
00:35:53,200 --> 00:35:57,520
सनातन देखिए अब आज अगर बात करें स्त्री

526
00:35:57,520 --> 00:36:02,080
पुरुष की तो स्त्री पुरुष कितने परसेंट वो हैं?

527
00:36:02,080 --> 00:36:06,400
जो व्यभचारी नहीं है। कितने परसेंट होंगे जो बिल्कुल राम और सीता

528
00:36:06,400 --> 00:36:11,520
की तरह होंगे। आप हृदय पर हाथ रख के बोलिए आज के टाइम में।

529
00:36:11,520 --> 00:36:16,240
आज आज की बात छोड़ दीजिए। आज से 200 साल के बाद

530
00:36:16,240 --> 00:36:20,320
आप क्या मानते हैं कि स्त्री पुरुष कितने परसेंट

531
00:36:20,320 --> 00:36:26,320
होंगे जो व्यभचारी नहीं होंगे?

532
00:36:26,800 --> 00:36:30,800
है ना? फिर भी ज्यादा परसेंटेज आएगी कि ज्यादातर

533
00:36:30,800 --> 00:36:35,360
लोग तो व्यभचारी है ही। हम आज की भी समाज में मानसिकता

534
00:36:35,360 --> 00:36:39,760
यही है कि लगभग यही माना जाता है कि मतलब 60 70%

535
00:36:39,760 --> 00:36:44,080
स्त्री पुरुष जो है वो व्यभचारी हैं। आज की ये मानसिकता है।

536
00:36:44,080 --> 00:36:48,080
फिर भी हम सभी स्त्री पुरुषों के लिए तो ये नहीं कह सकते हैं। सभी

537
00:36:48,080 --> 00:36:52,400
माओं के लिए तो नहीं कह सकते हैं कि वे भी व्यभचारणी है।

538
00:36:52,400 --> 00:36:56,720
मैंने वो चीज नहीं की। मैंने खुद भी आपको एक 90%

539
00:36:56,720 --> 00:37:00,880
भ्रष्ट हैं। 10% वाले विरोध उनका

540
00:37:00,880 --> 00:37:04,880
नहीं करते हैं। तो कुछ तो करना चाहिए।

541
00:37:04,880 --> 00:37:08,960
जब विरोध होगा भैया तभी आगे कुछ होगा। नहीं विरोध

542
00:37:08,960 --> 00:37:13,680
ये नहीं कहता हूं कि सबको बता रहा हूं ना। मैं बता रहा हूं ना यह बड़ा रणनीतिक

543
00:37:13,680 --> 00:37:17,840
विषय है। कि विरोध किस प्रकार से हो? विरोध भी होता है। ऐसा

544
00:37:17,840 --> 00:37:22,080
नहीं हुआ। विरोध होता है अभी क्या कहते

545
00:37:22,080 --> 00:37:26,080
हैं कई ऐसे स्वोषित कथावाचक है अपने आप कथावाचक बन

546
00:37:26,080 --> 00:37:30,240
गए पहले कविता कहते थे अब जो है कथा कहने लगे उन्होंने गलत व्याख्या की

547
00:37:30,240 --> 00:37:34,480
विरोध किया गया विरोध हुआ अब किस रूप से हुआ किस स्तर

548
00:37:34,480 --> 00:37:38,480
का हुआ और फिर वो विरोध आप तक पहुंचा कि नहीं पहुंचा ये

549
00:37:38,480 --> 00:37:41,840
भी बात है विरोध तो किया गया मगर वो आप तक

550
00:37:41,840 --> 00:37:46,320
नहीं पाया तो आपको तो यही लगेगा यार इसका किसी ने विरोध नहीं किया है ना

551
00:37:46,320 --> 00:37:50,320
तो बहुत सारी चीजें और रणनीतिक विषय यह जो जो

552
00:37:50,320 --> 00:37:54,720
युद्ध का समय होता है ना इसमें बड़ा क्या

553
00:37:54,720 --> 00:37:58,800
करना है कैसे करना है बड़ा निर्णायक स्थिति होती है

554
00:37:58,800 --> 00:38:02,880
बस और कुछ नहीं थोड़ा एक जटिल मामला होता है क्या बोलना है क्या नहीं

555
00:38:02,880 --> 00:38:07,120
बोलना और जो व्यक्ति जितने बड़े मंच पर है उसकी उसका

556
00:38:07,120 --> 00:38:11,520
दायित्व उतना ही बढ़ जाता है आप देखिए जैसे छोटी सी बात है जैसे

557
00:38:11,520 --> 00:38:16,480
हम आरएसएस वाले हम बजरंग दल वाले हम विश्व हिंदू परिषद वाले इत्यादि

558
00:38:16,480 --> 00:38:21,040
सभी अपने धर्म के लिए ही जुड़ते हैं। जुड़ते हैं ना आरएसएस

559
00:38:21,040 --> 00:38:25,440
से या किसी भी संगठन से हम इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि हम अपने धर्म से प्यार करते हैं।

560
00:38:25,440 --> 00:38:30,000
हम निचले स्तर पर और अनाधिकृत

561
00:38:30,000 --> 00:38:34,080
रूप से और जो है शंकराचार्यों का विरोध भले

562
00:38:34,080 --> 00:38:38,080
ही कर ले मगर कभी भी आपको आधिकारिक रूप से

563
00:38:38,080 --> 00:38:42,400
आधिकारिक रूप से ये नहीं आएगा कि जाओ किसी चौराहे पर खड़े हो जाओ। शंकराचार्य

564
00:38:42,400 --> 00:38:46,560
का पोस्टर लगाओ। वहां उनका विरोध करो। आएगा कभी? नहीं आएगा।

565
00:38:46,560 --> 00:38:50,640
आज तक नहीं आया। क्यों नहीं आया? क्योंकि उनको भी पता

566
00:38:50,640 --> 00:38:55,520
है कि शंकराचार्य की अगर कोई बात ऐसी हो भी रही है जो हमें

567
00:38:55,520 --> 00:38:56,960
समझ में नहीं आ रही है तो

568
00:38:56,960 --> 00:39:01,440
भी उनका सार्वजनिक विरोध नहीं करना है।

569
00:39:01,440 --> 00:39:05,760
उससे हमें घाटा होगा। ये रणनीतिक निर्णय हुए कि नहीं? हम

570
00:39:05,760 --> 00:39:11,600
तो यही है कभी आप देखो इतनी अभी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में

571
00:39:11,600 --> 00:39:15,920
बहुत दोनों पक्षों में शंकराचार्य और भाजपा आरएसएस

572
00:39:15,920 --> 00:39:20,000
दोनों पक्षों में इतना हुआ मगर कभी भी मोदी जी ने

573
00:39:20,000 --> 00:39:24,000
योगी जी ने डायरेक्ट नाम लेकर के कभी कोई खंडन किया हो

574
00:39:24,000 --> 00:39:28,720
कभी कोई बात कह दी हो बल्कि उस दौरान भी सम्माननीय

575
00:39:28,720 --> 00:39:32,800
शब्दों द्वारा ही संबोधन हुआ सभी शंकराचार्यों का और

576
00:39:32,800 --> 00:39:37,040
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के तुरंत दो दिन बाद स्वयं मोदी जी

577
00:39:37,040 --> 00:39:41,120
द्वारका में द्वारका पीठ में वहां जो उस समय शंकराचार्य

578
00:39:41,120 --> 00:39:45,440
के रूप में अभिषिक्त है जाने जा रहे हैं। उनके चरण छूते

579
00:39:45,440 --> 00:39:49,440
हुए दिखाई दिए। संबित पात्रा जी पूरी पूरी

580
00:39:49,440 --> 00:39:53,680
शंकराचार्य जी के यहां पहुंचे। वह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के आसपास

581
00:39:53,680 --> 00:39:57,760
ही पहुंचे। इतना सब मतलब कभी भी आधिकारिक रूप से बीजेपी

582
00:39:57,760 --> 00:40:01,840
द्वारा शंकराचार्यों का विरोध नहीं किया गया। ना कभी भविष्य में किया

583
00:40:01,840 --> 00:40:06,000
जाएगा। तो यह क्या है? रणनीतिक विषय है अगर

584
00:40:06,000 --> 00:40:10,080
मान लीजिए हमें कोई बात नहीं भी समझ में आ रही है तब भी कहां मौन रहना

585
00:40:10,080 --> 00:40:12,160
है विरोध करना है कि नहीं करना है

586
00:40:12,160 --> 00:40:16,400
तो यही यही जो क्या कहते हैं विडंबना

587
00:40:16,400 --> 00:40:20,480
आचार्यों के पास भी होती है कि किस विषय में कितना बोलना है और वो जो

588
00:40:20,480 --> 00:40:24,560
भी निर्णय लेते हैं उसमें आखरी अंतिम हित जो होता

589
00:40:24,560 --> 00:40:28,720
है वो हमारा ही होता है हम बस देख नहीं पाते हैं बस इतनी

590
00:40:28,720 --> 00:40:32,960
बात है क्योंकि हमारा वो अल्पज्ञता है कि हम समझ नहीं पाते हैं इसलिए

591
00:40:32,960 --> 00:40:37,120
इसलिए ये सारी व्याख्या बाकी तो मजा आ गया आपसे इतनी सारी

592
00:40:37,120 --> 00:40:40,880
बातें।

593
00:40:40,880 --> 00:40:46,160
चलिए बैठेंगे किसी दिन कोई दिक्कत नहीं। जी जी

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00:40:46,160 --> 00:40:52,160
ठीक है ठीक है मिलते हैं किसी दिन। जय श्री राम।

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00:40:52,310 --> 00:40:56,310
[संगीत]
