⬜ Not used yet · 00:00:00:26 – 00:00:13:03 (0:12)
00:00:00:26 तो मैं इस समय खड़ा हुआ हूं उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय के बाहर लखनऊ ब्रांच और आज हम यहां पर आने का आपको कारण बताने वाले हैं।
✅ This part is already used · 00:00:13:03 – 00:01:26:02 (1:13)
→ Used in: A · Video क्या रामपाल अपने शरीर को नष्ट करसकता है? Rampal comedy Classics E1 at 6:31 ↗
→ Used in: A · Video मैंने कर दिया आह्वान #rampalexpose at 4:21 ↗
00:00:13:03 आप हमें वेदों में प्रमाण दिखाइए। कहां पर लिखा है? कबीर भगवान है लिखा दिखाओ। परमा गलत क्यों है? भाई साहब ये गलत कबीर तो हम उसको बोलते हैं ना कबीर मुझे वो नियम बताइए संस्कृत के कि कबीर कबीर माना जाए मतलब क्या क्या है कोई प्रमाण कुछ उसमें क्या कारण होता है भगवान को पता होता है उन है लिखा दिखाओ
00:00:50:12 बता दीजिए उस भगवान ने आगे की कहानी बताई ही नहीं है कहीं पर प्रदर्शित की ही नहीं है आधार पर ये सब कुछ चल रहा है प्रमाण मुझे प्रमाण से बताइए कि कबीर कबीर कैसे
⬜ Not used yet · 00:01:26:02 – 00:36:24:00 (34:58)
00:01:26:02 आप मर जाएंगे ये नहीं बिकने देंगे समझे
00:02:04:28 तो मैं इस समय खड़ा हुआ हूं उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय के बाहर लखनऊ ब्रांच और आज हम यहां पर आने का आपको कारण बताने वाले हैं। एक बहुत ही शुभ सूचना है सभी हिंदुओं के लिए, सभी सनातन प्रेमियों के लिए। उससे पहले मैं थोड़ी सी अपनी यात्रा बताऊंगा कि मैं किस प्रकार से यहां तक पहुंचा। मैंने अपने कई वीडियोस में बताया है कि मेरा जीवन ऐसा रहा। बहुत ही सामान्य जो भौतिकवादी एक परिवार होता है जिसकी होती हैं। यह कमाना है, वे यहां पे इतना धन कमाना है, ऐसे अच्छे कपड़े पहनने हैं। यह फिल्म देखने जाना है। ऐसा ही जीवन मेरा बीता था। हां, बस इतना था कि कोई प्रारब्ध रहा होगा। भगवान की कोई कृपा रही होगी पूर्व जन्मों का जो ऐसे घर में मुझे जन्म मिला ऐसे माता-पिता के द्वारा मेरी उत्पत्ति हुई जिस कारण से मुझे राम का नाम बचपन से ही श्रवण हो गया था और राम कहीं ना कहीं मेरे जीवन में स्थापित हो गए थे और श्री राम के स्थापित होने का ही एक कारण रहा कि समस्त प्रपंच जो संसार के सांसारिक प्रपंच होते हैं उन सब में
00:03:20:00 लिप्त होते हुए भी एक राम के प्रति जो एक अगाध निष्ठा एक अह जो वो रहती है भावना वो हमारे अंदर प्रभु श्री राम के अंदर लिए सदैव से विद्यमान रही और यही वो कारण था जिसके कारण जब भी मैं कहीं पर धर्म का खंडन होते हुए देखता था अ जो सनातन धर्म की अह मूल मान्यताएं हैं उन पर आघात पहुंचते हुए देखता था, निंदा होते हुए देखता था तो वहां पर मुझे सहन नहीं होता था और मैं प्रतिकार करता था। वह किसी भी रूप में सनातन धर्म को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा हो। मैं उनका प्रतिकार करने की करने का प्रयास करता था और ऐसा ही होते-होते जीवन में जब किशोरावस्था आई किशोरावस्था में कुछ ऐसे कुछ घटनाएं घटित हुई जिससे कि मेरी रुचि शास्त्रों में बढ़ी। शास्त्रों को शास्त्रों का अध्ययन करने में रुचि हो गई। अध्ययन शुरू हुआ और तब मुझे एक चीज़ पता चली जब मैं अपने शास्त्रीय ज्ञान को लेकर के जो स्वा अध्ययन से मुझे प्राप्त हुआ था। उस शास्त्रीय ज्ञान को लेकर के जब अपने धर्म को पक्ष धर्म के पक्ष को
00:04:35:03 यथावत रूप से रखने का प्रयास करने लगा। तब एक समस्या सामने आई कि भाई यदि कोई मेरे सनातन धर्म के ऊपर कोई आरोप लगा रहा है और किसी एक श्लोक की कोई पंक्ति का अर्थ बता रहा है कि देखो तुम्हारे यहां धर्म में यह गलत बात लिखी हुई है और उसी श्लोक उसी पंक्ति का जो सही अर्थ है वो मैं कर रहा हूं कि नहीं जो तुम अर्थ कर रहे हो वो गलत है और जो मैं अर्थ कर रहा हूं वो सही है। तो यहां पर एक अड़चन आई कि मैं जब सही अर्थ को रखूं तो मेरा वाला ही प्रामाणिक रूप से सही अर्थ क्यों माना जाए और जो सामने वाला आक्षेप कर रहा है वो अर्थ क्यों ना माना जाए। तो इसी रूप में जब मैंने इस प्रश्न के उत्तर के निमित्त सनातन धर्म ग्रंथों का अध्ययन करना प्रारंभ किया तो उसमें प्रामाणिक आचार्य
00:05:28:24 की आवश्यकता की महत्ता जो है मुझे ज्ञात हुई और वो प्रामाणिक आचार्य कौन होना चाहिए? कैसा होना चाहिए? आज कलयुग में सनातन धर्म के सर्वोच्च सार्वभौम आचार्य कौन है? यह सब मुझे ज्ञात हुआ। उस आचार्य की आवश्यकता मेरे जीवन में इसलिए बहुत आवश्यक थी। आत्म कल्याण के लिए तो एक अलग बात है। मगर जिस राह पर मैं निकलता चला जा रहा था, जिस मार्ग पर मैं चलता चला जा रहा था कि मुझे सनातन धर्म का खंडन सनातन धर्म की निंदा करने वालों का प्रतिकार करना था। विशेष तौर पर जो सनातन धर्म का चोला ओढ़कर के सनातन धर्म का प्रतिकार कर रहे हैं। सनातन धर्म की मूल मान्यताओं पर आघात पहुंचा रहे हैं। है ना? ऐसे लोगों को मुझे नष्ट मतलब ऐसे लोगों को मुझे उत्तर देना था। ऐसे लोगों का मुझे प्रतिकार करना था। और यह भी भावना कैसे उत्पन्न हुई जब हम कभी भी किसी विधर्मी का सामना करने जाते हैं। जैसे बहुत समय तक एक कालक्रम चला डॉक्टर जाकिर नायक जिसने हमारे बहुत से हिंदुओं को प्रभावित किया और जो है बहुत सी ऐसी मिथ्याएं फैलाई हमारे धर्म के बारे में जिसके कारण धर्म को बहुत बड़ी क्षति पहुंची और आज भी वो करता है। तो वह भी हमारे अह
00:06:44:28 सनातन धर्म को क्षति पहुंचाने के लिए ऐसा नहीं था कि वह मुसलमान बनके ही आघात पहुंचाता था। नहीं वह बाकायदा वेद शास्त्र उपनिषदों का रेफरेंस देते हुए ही आपको अपने मुस्लिम धर्म से प्रभावित करने का प्रयास करता था। और जब मैं उससे कभी जब ऐसे लोगों से ऐसे विधर्मियों से जब कभी मेरा सामना हुआ तब मुझे पता चला कि सनातन का वास्तविक शत्रु कौन है? सनातन का वास्तविक शत्रु कौन है? कैसे पता चला कि मान लीजिए मैं सामने वाले से कह रहा हूं कि हमारा ईश्वर वो है जो सर्वशक्तिमान है जो सब कुछ कर सकता है तो सामने वाला कहता है कि तुम यह कैसे कह सकते हो कि तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है और हमारा नहीं है तो मैं उनको बताऊंगा कि भैया तुम्हारे इस्लाम में जो है मूर्ति पूजा नहीं है तुम्हारे इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है कुरान की सीमा का ईश्वर अवतार नहीं ले सकता बाधित है अबाध्य नहीं है असीमित शक्तियां नहीं है उसकी बाधित तो उसने तो उसका यह कहना होता था कि अरे भैया तुम्हारे हिंदू धर्म में भी तो तुम्हारे सनातन को मानने वाले वैदिक लोग भी तो ऐसे हैं जो ईश्वर का अवतार नहीं मानते हैं। तो मुझे मेरी दृष्टि उन लोगों पर पड़ने लगी जो सनातन का चोला ओढ़ के ही सनातन
00:08:00:12 की मूल मान्यताओं पर प्रहार कर रहे हैं। और कुछ लोग मर्यादा की सीमा में रहकर चल रहे हैं और कुछ लोग सभी मर्यादाएं लांग करके बात कर रहे हैं। तो इसी अ जो ये जो उ मन में जो यह विवाद की स्थितियां पल रही थी। इन्हीं विवाद की स्थितियों में मुझे वह ब्रह्मास्त्र मिला किस शास्त्र का सही अर्थ किसका मान्य होगा किसके पास जाना होगा। तो तब मुझे पता चला कि हमारे सार्वभौम आचार्य होते हैं शंकराचार्य और उन्हीं की परंपरा से वही ऐसी प्रामाणिक परंपरा है जिसको पीछे रखते हुए हम सामने वाले से कह सकते हैं कि इस परंपरा से प्राप्त जो शास्त्र का अर्थ है वही प्रामाणिक है अन्यथा दूसरा अर्थ इसके विरोध में दूसरा अर्थ मान्य नहीं है। तो जब मुझे वह मिला तो मैं थोड़ा सा आपको वह भी एक इंसिडेंट बताऊं कि जब प्रथम बार मैं जगतगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी के दर्शन करने गया था। उस दिन सबसे पहले उनको साक्षात देखते हुए हालांकि मैं भाव भील हो गया था। मगर उनको देखते ही जो जब मेरे पास प्रश्न
00:09:15:20 पूछने का मेरा अवसर आया तो मैंने सबसे पहले उनसे एक ही प्रश्न किया था कि गुरुदेव आज सनातन का चोला ओढ़कर सनातनी बनकर या विधर्मी बनकर कई ऐसी संस्थाएं हैं, कई ऐसे संगठन है, कई ऐसे तंत्र हैं जो सनातन की मूल मान्यताओं पर लगातार प्रहार कर रहे हैं और जिस प्रहार के कारण समाज में बहुत सारी भ्रामक स्थितियां फैल रही हैं और समाज हमारा ग्रुप ग्रुपिज्म में ग्रुप में बंटता जा रहा है। बहुत सारे छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटता जा रहा है। जिस कारण से असंगठित होने के कारण हमारा सनातन समाज असुरक्षित है। और जो बाहर का व्यक्ति विधर्मी है वो बहुत ही आराम से हम पर हमें आघात पहुंचा सकता है। उस समय जगतगुरु शंकराचार्य जी ने मुझे वही युक्ति दी थी जो आज जिस युक्ति का प्रचार प्रसार हम अपने विभिन्न प्रयासों के माध्यम से करने का प्रकल्पों के माध्यम से करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा था कि संघ के बल का निर्माण करो। नीचे संघ का बल और ऊपर ईश्वर का बल यही आपका सहारा है। आप मैंने उनसे कहा था कि क्या मैंने उनसे पूछा था कि क्या हम इस तरह के जो
00:10:30:26 सनातन का चोला ओढ़ के सनातन का नाम लेकर के सनातन का गलत अर्थ बता के सनातन शास्त्रों का गलत अर्थ बना बता कर बना बता करके और बहुत सारी भ्रामक स्थितियां उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या हम इनके लिए विधिक कारवाही कर सकते हैं? हम आपकी आज्ञा लेने आए हैं। कोर्ट में जा सकते हैं। न्यायालय में जा सकते हैं। जो लोग गलत अर्थ बता रहे हैं उनके विरुद्ध तब उन्होंने मुझे कहा था पहले संघ के बल का निर्माण करो। संघ का बल अपनाओ। संघ संघ का बल प्राप्त करो और उसके बाद जब यदि आवश्यकता दिखती है तो आप वहां जाना। कोई भी कार्रवाई करने से पहले संघ का निर्माण करो। और वो बात और है कि जिस दिन मेरे मेरा जो अपना व्यक्तिगत जो कल्याण था मुझे ऐसा लगता है कि उसी दिन मेरा जीवन का जो अपना लक्ष्य था वो पूर्ति हो गई थी। उनसे दीक्षा प्राप्त हो गई और मुझे एक उद्देश्य मिल गया कि मुझे अपने जीवन में करना क्या है? धर्म की रक्षा उनके पद उनके बताए हुए मार्ग पर चल चलते हुए करनी है। और जब उनकी उनकी ये युक्ति मुझे मिली थी उस दिन से ही मैं कार्य करने लगा। बहुत सारे कार्य करते-करते। तो मैंने अभी आपको थोड़ी देर पहले बताया था कि कुछ लोग होते हैं जो मर्यादा में रह के धर्म का खंडन करते हैं। थोड़ी बहुत मर्यादा का पालन कर
00:11:46:04 लेते हैं। कुछ लोग होते हैं जो बियों्ड द लिमिट जाते हैं। मतलब वो सारी जो सीमाएं होती हैं वो पार कर लेते हैं। ऐसा ही एक सेक्ट था जिसको मैंने गुरुदेव के मेरे जीवन में आने से पहले भी सामना किया था। उस सेक्ट का नाम था रामपाल। ये गिरोह हमारे देवी देवताओं के लिए बहुत सारी अलग-अलग ऐसी अश्लीलता से भरी हुई असभ्यता से भरी हुई इतनी निंदनीय बातें कहता है जिसके बारे में हमने अपने अलग-अलग बहुत सारे वीडियोस में बताया भी है। तो इस गिरोह के विरुद्ध हमने धीरे-धीरे जब गिरोह का प्रतिकार करना शुरू किया, जितना प्रतिकार किया, जितना इसका सामना किया, उतना ही इस गिरोह के बारे में हमें पता लगता गया, ज्ञात होता गया। तो अब उसी गिरोह के लिए आज हमने यहां पर उसकी विभिन्न जो चीजें हैं जो उसने सनातन धर्म के विरुद्ध में की हैं और जिसके बारे में विवरण भी मैं अभी देने वाला हूं आपको उसी गिरोह के विरुद्ध रामपाल का रामपाल के नाम से जो चलने वाला तंत्र सतलोक आश्रम इत्यादि के नाम से Facebook और Twitter YouTube Instagram सोशल मीडिया पे जो दुष्प्रचार चल रहा है इस गिरोह के द्वारा सनातन धर्म का उन सारे विषयों के विरुद्ध
00:13:01:18 हमने यहां पर आज आप सबके लिए शुभ समाचार यह है कि उच्च न्यायालय लखनऊ में हमने एक अह याचिका दर्ज कर दी है, दाखिल कर दी है और इस पर अब सुनवाई होने वाली है। अब तो यह आप सभी सनातनियों के लिए सभी सनातन प्रेमियों के लिए बहुत ही हर्ष का वो है कि हमने इसको ललकार लिया है। कोर्ट में आकर यह जवाब दें कि भैया गायत्री के इतने पति होंगे। ऐसा श्राप गायत्री माता को शास्त्र में कहां मिला है? है ना? और भी हम बहुत सारी जो आपने हमारे अन्य वीडियोस में देखी हैं वो सारी बातें इसमें लिखी हैं। अब बात यह आती है कि इस गिरोह का जो शास्त्रीय प्रतिकार है, वाणी के द्वारा प्रतिकार है, लेखन के द्वारा प्रतिकार है। वहां से लेकर के आज ये न्यायालय तक पहुंचने की यात्रा के बीच में इस गिरोह से मेरा आमनासामना हमारा आमनासामना आपका आमनासामना आह्वान का आमनासामना कैसे-कैसे हुआ उसका थोड़ा सा विवरण मैं आपको दे देता हूं। सबसे पहले जब मुझे गुरुदेव की शरण मिल गई थी तो सबसे पहले एक बार अह इनका प्रतिकार मैंने किया था। अह
00:14:16:19 दो पहले मैंने अपनी किशोरावस्था में कई बार किया था। पर तब मेरे पास कोई शास्त्रीय इतना अह जो सानिध्य था गुरुओं का आचार्यों का वो नहीं था। मगर जब मुझे गुरुओं से जो सार्वभौम सिद्धांत है वो प्राप्त हुए आचार्य से जगद्गुरु शंकराचार्य जी से तो उन कुछ सिद्धांतों के कुछ छोटे-मोटे आधार को लेकर के ही 2023 वर्ष 2023 में मैंने प्रथम बार इनका प्रतिकार किया था। जब इन्होंने लखनऊ का जो हस्त स्मृति उपवन में मेला लगता है वहां पर इन्होंने अपना एक का वो स्टॉल लगा रखा था और वहां से सतलोक आश्रम के नाम पर अपनी वही गंदी अश्लील किताबें बेच रहे थे जिसमें सनातन धर्म के लिए बहुत ही अश्लील निंदनीय बातें लिखी हुई हैं। तो वहां पहुंच कर के मैंने इनका प्रतिकार किया। मैंने इनसे क्वेश्चन किए कि भाई आप आप रामपाल को वो कर रहे हैं। आप वो वीडियो देख सकते हैं। आपको लिंक मिल जाएगा कि रामपाल को आप जगतगुरु कैसे कह रहे हैं। वह गुरु कैसे होता है? गुरु का अर्थ क्या है? और बहुत सी शास्त्रीय बातें। इसके बाद 2023 के बाद 2023 में मेरे पास संघ का बल बहुत कम था। तो 2023 में सर्वप्रथम जब मैं उनके पास गया था तो उन्होंने मेरा कैमरा बंद करवा दिया था और यह कहा था भाई ऑफ ऑन ऑफ कैमरा हम बात कर सकते
00:15:31:20 हैं ऑन कैमरा नहीं करेंगे और मुझे इतना गुस्सा आया था कि उस समय भी जो मेले के आयोजक होते हैं जो प्रदर्शनी के आयोजक होते हैं मैं उनका एक रंगारंग कार्यक्रम चल रहा था वहां रंगारंग कार्यक्रम के बीच में अपना पोर्टेबल स्पीकर लेकर के माइक लेकर के मैंने वहां पर जाकर के अनाउंस किया था वो नृत्यादि कार्यक्रम हो रहा था उसके बीच में दर्शकों की तरफ से खड़े खड़े होकर के मैंने कहा था कि हिंदुओं तुम्हें शर्म से मर जाना चाहिए। तुम यहां बैठकर के नृत्य आदि देख रहे हो और तुम्हारी मां के बारे में, दुर्गा के बारे में इतनी असहनीय, इतनी अश्लील, इतनी निंदनीय बातें वहां पर लिखी हुई है। वो वो स्टॉल यहां पर स्वतंत्रता के साथ चल रहा है। और उसके बाद वहां पर मेरी सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद मुझे कुछ अपने सहयोगी मिले। जिनके साथ पुनः दूसरे दिन जाकर के मैंने उस स्टॉल पर फिर से प्रतिकार किया और उस प्रतिकार का जो भी वहां पर चर्चा हुई बातचीत हुई उनका कैसे वो लोग निरुत्तर हुए वो सारा वीडियो आपको हमारे YouTube चैनल पर प्राप्त हो जाएगा 2023 बस इस प्रतिकार के बाद वो 2023 के बाद वो स्टॉल बंद नहीं हुआ चलता रहा 2023 निकला 2024 आया अब तक गुरुदेव की कथनी के अनुसार गुरुदेव के मार्ग निर्देशन के अनुसार मैं चल रहा था तो धीरे-धीरे संघ का बल एकत्रित हो रहा था। 2024 में फिर से वही मेला लगता है। वही प्रदर्शनी
00:16:47:06 लगती है। वही उन्हीं आयोजकों के द्वारा और फिर से उसमें सतलोक आश्रम के नाम से वही अश्लील किताबें बेचने वाला स्टॉल फिर से लगता है। तो मैं हमने क्या किया जो अब हमारा जो संघ का बल बन चुका था जो हिंदुत्ववादी और भी संगठन जो मेरे आसपास के क्षेत्र में सक्रिय थे उनका सहयोग लेते हुए उसमें सभी प्रकार के थे। विश्व हिंदू परिषद के लोग भी थे। बजरंग दल के लोग भी थे, आरएसएस के लोग भी थे, आदित्य वाहिनी के लोग भी थे। सभी तरह के जो भी हिंदुत्व से प्यार करने वाले जो भी संगठन है वो सब वहां पर गए। आम हिंदू जो किसी संगठन से नहीं वह भी वहां पर गया और हमने वहां जाकर के इस बार संघ बल के साथ वहां उस स्टॉल का प्रतिकार किया जिसमें हमारी मां का अपमान था और प्रशासन को वहां पर विवश होना पड़ा और प्रशासन को मेला प्रशासन जो आयोजक थे उनके द्वारा उस स्टॉल को हटवा दिया गया। यहां से कहानी बदल जाती है। अभी तक क्या हो रहा है? अभी तक केवल वाणी के द्वारा लेखन के द्वारा विरोध हो रहा है और उस विरोध का कोई परिणाम प्राप्त नहीं हो रहा है हमें मगर फिर क्या हुआ फिर सामने वाला व्यक्ति खुद ही मैं इसमें यहां तक आने के लिए क्रेडिट दूंगा एक व्यक्ति को तो इसमें
00:18:02:12 उसकी भी एक अहम भूमिका रही है तो जब ऐसी जो क्या कहेंगे इनको अनैतिक अधार्मिक और ऊपर से संविधान के भी विरोध में क्योंकि ये किताबें कहां छप हैं वह आपको पता ही है। किसी को पता नहीं है। ये जो एड्रेस डालते हैं वो फर्जी है। बरवाला का आश्रम इनका बंद है। तो ये बरवाला का एड्रेस कैसे डालते हैं? बहुत सी बातें हैं उसमें। तो और जो एड्रेस डालते हैं बवाना वाला वो भी एड्रेस पे हम लोग हो के आए हैं। वहां पर भी पाउडर बन रहा है। तो इललीगल रूप से बनने वाली किताबों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है और हम उसका विरोध कर रहे हैं। तो विरोध के फल स्वरूप सामने वाला जब जानता है कि उसकी चीजें इललीगल हैं। तो उसको कानून कानूनी विधियों से दूर रहना चाहिए। मगर वो खुद अड़बड़ के अपनी वाहवाही कराने के लिए या किस किस लिए वो व्यक्ति मामले को ले जाता है थाने में। यहां से पहली बार मेरी इस यात्रा में हमारी इस यात्रा में पहली बार वो थाना कोर्ट कचहरी का नाम आता है और वो पुलिस में ये झूठी शिकायत लिखवाता है कि हमने वहां पर जाकर के गाली गलौज की ऊंचनीच करी और वहां पर और भी उपद्रव किया। हालांकि
00:19:17:15 वीडियो में सब कुछ है मगर वो ये वहां झूठी रिपोर्ट लिखाता है कि भैया ऐसा-सा हुआ। सामने वाला पक्ष। अब वह जब लिखाता है तो पुलिस द्वारा हमें बुलाया जाता है। अब धीरे-धीरे क्या हो रहा है कि हम प्रतिकार करते गए करते गए सामने वाला रिप्लाई दे रहा है। उस कारण से हम उसे और जानते गए कि ये किताबें ही फर्जी हैं। इसमें और भी अश्लील अश्लील बातें लिखी हुई हैं। ये और हमें ज्ञात होने लगा। सामना करते-करते सामने वाले को अच्छे से समझ में समझने में सरलता हो जाती है। जिससे आपका सामना है उसे आप बहुत आसानी से समझ पाते हैं। तो वो एक पहला प्रकरण था जब हम इस मामले की कारण थाने में गए अपना पक्ष रखने के लिए हमें बुलाया गया। हम गए वहां पे हमने अपना पक्ष रखा। तो एक बात आई सामने हमारे जो सहयोगी थे उन्होंने भी कहा और जो पुलिस प्रशासन था उसने भी कहा कि भाई आपका पक्ष बिल्कुल सही है। इसमें हिंदू धर्म का अपमान है। ठीक है। मगर आप जो डायरेक्ट वहां पर गए थे वो प्रतिकार ना करके आपको पुलिस सहायता लेनी चाहिए थी। और मेरे अंदर का भाव भी यही था कि हमने पुलिस सहायता क्यों नहीं ली। पुलिस सहायता अगर लेते तो उसी दिन इन पर कानूनी कार्रवाई हो जाती। स्टॉल था बहुत सारी किताबें थी। देखिए कैसे-कैसे भूमिका बदलेगी। उस दिन ये लोग रंगे
00:20:32:21 हाथों पकड़े जा सकते थे इललीगल किताबों के साथ। मगर उस दिन हमारे पास हमारे साथ पुलिस नहीं थी। हमने एक स्वतंत्र रूप से प्रतिकार किया और मेला प्रशासन ने वो स्टॉल हटवा दिया। बस इतना हुआ। मगर यदि हम पुलिस सहायता लेते तो उसी दिन इन पर कानूनी कार्रवाई हो जाती। मगर अगर हो जाती तो हम आज यहां ना आते। यह भी बात है। चलिए जो होता है अच्छा ही होता है। तो उन्होंने जब यह भावना व्यक्त की हमारे सहयोगियों ने और पुलिस वालों ने भी कि भैया ये आपको जाना चाहिए प्रतिकार करिए मगर एक विधि है उसके अनुसार प्रतिकार करिए तो मुझे ये बात अच्छी लगी। तो मैंने उस प्रकरण में वहां पर एक लेख लिखा कि भैया हमने जिस तरह से जो कुछ किया उसके लिए मुझे खेद है क्योंकि मैं जो करना चाहिए था वो नहीं किया। इस बात के लिए मुझे खेद है और आगे से इस प्रक्रिया की पुनरावृति नहीं होगी। यह नोट है ना इसको ध्यान रखिएगा क्योंकि यह आगे काम में लिया गया है मेरे विरुद्ध। ah कुछ आगे के जो इस सीरीज के आगे के एपिसोड हम लाएंगे न्यायालय के साथ जो न्यायालय को रखते हुए केंद्र में और अब जो रामपाल के गिरोह के साथ हमारा जो प्रतिकार चल रहा है, उसका विवरण आपको देते रहेंगे समय-समय पर। तो यह पहली एक शिकायत की गई। इसमें आईजीआरएस होती है।
00:21:48:09 यूपी गवर्नमेंट के द्वारा जो पोर्टल है उस पर कोई भी व्यक्ति जाकर के वहां पे आईजीआरएस के रूप में शिकायत कर सकता है। उस आईजीआरएस के आधार पर पुलिस जांच करती है। उसको सही लगता है तो वो मुकदमा दर्ज कर लेती है। एफआईआर दर्ज कर लेती है। मगर जब हमने वो लेख लिख करके दे दिया तो पुलिस वालों का भी कहना था और बाकी सारी चीजें झूठी हैं और उसने वहां पर आईजीआरएस को निराकरण करते हुए समाप्त कर दिया। पुलिस प्रशासन में। इसके बाद क्या होता है कि कुछ ही दिनों बाद हमको फिर से इस गिरोह के द्वारा नियुक्त एक महिला कहीं पर मिलती है जो हमारे लोगों का मतांतरण करने का प्रयास कर रही थी। वहां पर पुस्तक बांटने के लिए प्रेरित कर रही थी। हम उसका जाकर के प्रतिकार करने स्वयं नहीं गए। हम वहां मौके पर पहुंचे। पुलिस बुला रहे हैं। केवल इतनी ही घटना है। उसका वीडियो है। और पुलिस नहीं आई क्योंकि उस महिला ने ये कह दिया हमारे पास किताबें हैं ही नहीं। तो हमने कहा किताबें नहीं है तो बात खत्म हो गई और वो वहां पर हम लोग वापस चले गए वो भी अपने घर चली गई मगर सामने वाले पक्ष को क्या मिला बहाना तो वो अब एक झूठी शिकायत करता है दोबारा से हमारे विरोध में अच्छा पिछली बार उसने क्या षड्यंत्र किया था कि हमारा केवल नाम लिया था शिकायत करते समय हमारे साथ जो अन्य संगठन थे संगठन के लोग थे उनमें से किसी का शिकायत नहीं किया जिससे कि
00:23:04:21 अपना पक्ष रखते समय मैं अकेला पड़ जाऊं मगर ऐसा तो है नहीं हिंदुत्व अभी मरा नहीं है बहुत से हिंदू भाई मेरे साथ सदैव खड़े रहे। तो क्या है कि दूसरे वाले में जो हिंदू भाई हमारे साथ खड़े थे पिछले वाले प्रकरण में अलग नहीं हुए थे छोड़ के नहीं गए थे। अब इस वाले प्रकरण में जब महिला के द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई हमारे विरुद्ध दोबारा वही आईजीआरएस तो जब यह दर्ज कराई गई कि भैया इन्होंने हमारे साथ वो जातिचक शब्द कहे हैं छेड़खानी का मुकदमा लगाने की धमकी उस महिला ने ऑन कैमरा दी है हमें और उस उस शिकायत में इसने अन्य हिंदू भाइयों का नाम भी ले लिया अब ये दूसरी शिकायत पहुंचती है हमारी अच्छा अभी हम क्या कर रहे हैं हम क्या कर रहे हैं केवल अध्ययन और इनके बारे में और जो भी इनकी जो जानकारियां वो एकत्रित कर रहे हैं। अभी हम कोई कानूनी कारवाई इनके विरुद्ध नहीं कर रहे। हम इन अध्ययन कर रहे हैं कि इन्होंने और क्या-क्या किया है और साक्ष्य एकत्रित कर रहे हैं। अपनी तैयारी कर रहे हैं। बड़ी लड़ाई के लिए और यह हम पर ये फिर से आईजीआरएस लगाते हैं। इसमें मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा जो लखनऊ पुलिस है आशियाना थाना क्षेत्र की उन्होंने निष्पक्षता के साथ जांच करते हुए बिना किसी पक्षपात के और उन्होंने जो है इसमें फिर से जांच की और
00:24:19:27 जो सत्यता थी वो बताई उन्होंने हमारे आसपास के क्षेत्र में जो अन्य अ वो लोग हैं जो आस-पड़ोस के लोग जो उस घटना स्थल के पास के रहने वाले हैं उन सबका उन्होंने बयान लिया स्टेटमेंट लिया और उसमें फिर से आईजीआरएस में ये कहा आईजीआरएस के जवाब में कि भैया ये झूठे आरोप हैं। इनका विवाद धार्मिक विवाद है और उस धार्मिक विवाद में दबाव बनाने के लिए झूठे आरोप लगा करके ये जो है आईजीआरएस लिखवाई गई है। तो भाई इन्होंने हमारे अह जो आईजीआरएस इन्होंने लिखवाई दूसरी वाली शिकायत वह भी हमारे हाथ में है इस समय और जो पहली वाली शिकायत लिखवाई थी आईजीआरएस के थ्रू वो भी हमारे हाथ में है। यह जो दूसरी वाली आईजीआरएस है इसमें भी पुलिस ने जांच लगा दी। तो इस तरीके से दो बार इन्होंने हमारे खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास कर दिया। अच्छा अब इन्होंने इस बीच क्या हुआ कि हमने इनकी जानकारी बटोरने के लिए इनका जो लखनऊ में जो सतलोक आश्रम नामक केंद्र है वहां का एक दौरा किया कि वहां आसपास के क्षेत्र में लोग क्या जानते हैं इनके बारे में वहां क्या होता है कैसे होता है हमें बहुत सी बातें पता चली मगर क्योंकि हम वहां गए थे और वहां पर जब हम गए तो हमारे दो लोगों को इन्होंने फिर से अपनी वही मतांतरण वाली किताबें
00:25:35:08 पकड़ाने का प्रयास किया। हम वापस आ गए। अगले दिन इस व्यक्ति का फोन आता है सामने वाले के पक्ष से सामने वाले पक्ष से जो इनका पैरोकार है मुख्य वो फिर हमें फोन करके जो जिसने पिछले वाले शुरू पहले प्रकरण से ही हमको फोन के द्वारा धमकाना चौकी में बैठकर के खुद को आग लगाने की धमकी देते हुए हमारे ऊपर मुकदमा करने का मुकदमा करने की धमकी देना ये सारा मतलब हैरेसमेंट टोटल वो शुरू से जो कर रहा था उसी का फोन फिर आता है और वो फिर हमसे पूछता है आप हमारे सतलोक आश्रम या सतनाम दान केंद्र क्यों गए थे तो हम उससे पूछते हैं कि भाई वो क्या कोई गई बीती जगह है, कोई आपत्तिजनक जगह है, कोई चोरी चकारिकारी की जगह है, जहां पर कोई जा जाएगा तो विवाद हो जाएगा। आपको आपत्ति क्यों है? वो तो सामान्य जगह है। है ना? तो वो इस बात को लेकर के फिर से एक मुकदमा लगवाने का प्रयास करता है। किसी अन्य थाने में फिर से आईजीआरएस करवाता है कि इसने हमारे आश्रम के बारे में नाम दान केंद्र के बारे में अमुक अमुक शब्द कहे। और फिर से उसकी निष्पक्ष जांच होती है। फिर से एसीपी उसमें निष्पक्ष जांच करवाते हैं संबंधित थाना क्षेत्र के और उसमें बिल्कुल निष्पक्षता के साथ लिखवाते हैं कि ये पूरा मामला फर्जी है। इस तरीके से कितने बार हो गया हमारे विरुद्ध कार्यक्रम प्रयास तीन बार। पहली बार
00:26:50:14 को छोड़ के सामने वालों का जो पैरोकार है वो बाद वाले दोनों मामलों को जिसमें पुलिस ने कह दिया था कि झूठे मामले हैं उसको लेकर के वो कोर्ट में भी जाता है और कोर्ट में जब जाता है तो कोर्ट के लिए फिर से रिपोर्ट वो मामला जांच के लिए आता है और फिर हमें बया अपना पक्ष रखने के लिए बार-बार थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं। हालांकि मुकदमा दर्ज नहीं होता क्योंकि पुलिस ने यहां पर बहुत ही सत्यवादता के साथ बहुत ही निष्पक्ष भूमिका निभाई। इसके बाद अब हम जब इतना सब देख चुके थे, बहुत कुछ इनके बारे में जान चुके थे तो फाइनली हम एक शिकायत पत्र बनाते हैं और अब हम आईजीआरएस के द्वारा संबंधित थाना क्षेत्र जो जहां पर इनका आश्रम है वहां के लिए शिकायत करते हैं आईजीआरएस पे। अब की बार हमारी शिकायत आती है सरोजनी नगर थाना क्षेत्र में जिस पर पुलिस के साथ हमारा अह सुनियोजित संपर्क ना होने के कारण और इनका निकटतम होने के कारण क्योंकि जहां वो आश्रम है वहां के पास में ही वो थाना है तो उनका आना जाना बहुत आसानी से हो सकता है और हमारे घर से काफी दूर है। हमारे निवास से हमारे हमारी जो कार्य कार्य क्षेत्र है उससे काफी दूर है। तो अगर हम दिन में एक बार जाएंगे तो वो दिन में
00:28:05:18 पांच बार आ सकते हैं। तो कुछ इन कारणों से पुलिस हमारा पक्ष ठीक से जान नहीं पाई तो प्रथम बार में हमारी रिपोर्ट पर भी पुलिस ने यह लिख दिया मतलब उन्होंने हमारे पक्ष में जवाब नहीं लगाया उसका निराकरण नहीं किया एफआईआर दर्ज करनी थी नहीं की और जो है मामले को व्यर्थ का बताते हुए उसमें लगा दिया उस मामले के आधार पर कि हमने इस आश्रम की शिकायत की आईजीआरएस पे हमको एक नोटिस आ गया सामने वाले पैरोकार के द्वारा दोबारा से मानहानि का ढाई ढाई लाख के दो नोटिस हमारे लिए हमारे पिताजी के लिए और वो जो हमारी जो आई आईजीआरएस निरस्त हुई थी व्यर्थ बताते हुए पुलिस के द्वारा संपर्क ना हो पाने के कारण उसके लिए भी एक प्रोटोकॉल होता है कि भाई फिर से हमसे पूछा जाता है संबंधित विभाग के द्वारा कि आप इस जांच से संतुष्ट हैं तो हमने असंतुष्टि जताई उसमें तो अभी भी वो विचाराधीन है वो वो जांच जो जो हमने आईजीआरएस दी थी वो अभी भी विचाराधीन है। उस पर भी जांच चल रही है। क्या है वो एक अलग विषय है। मगर वो जो आईजीआरएस में पुलिस ने हमारे हमारा पक्ष ना जानते हुए कुछ कारवाई कर दी थी। उसके आधार पर सामने
00:29:20:19 वाले पैरोकार ने हमें फिर से नोटिस भेज दिए। और जब हमारे को हमको वहां से पुलिस के द्वारा वो निस्तारण होता हुआ नहीं दिखाई दिया तब इसमें जो है और इसका हमें यह नोटिस प्राप्त हुए तब फिर हमको उतरना पड़ा इस तरीके से कि भैया अब तो युद्ध स्तर पर कारवाई करनी पड़ेगी। युद्ध स्तर पर उतरना पड़ेगा। अन्यथा हम अगर नहीं उतरेंगे तो ये तो हमारे विरुद्ध हर क्षण कार्य कर ही रहे हैं। है ना? तो इसी बीच हमारे संपर्क में फिर आई जो कि लखनऊ में बहुत ही अच्छे स्तर की विद्वान मानी जाती हैं। अधिवक्ता हैं। हाई कोर्ट में लॉयर हैं। जो हमारी अग्रजा भी हुई माननीय रंजना अग्निहोत्री जी जब वो हमारे संपर्क में आई और हमने पूरा विधिवत शुरू से लेकर के अंत तक जैसे हमने आपको सारी बातें बताई हैं। इसी प्रकार से पूरा वृतांत उनको सुनाया और उनके सानिध्य में उनके मार्गदर्शन में आज जो है पूरे रामपाल गिरोह के विरुद्ध यह याचिका दर्ज हो रही है। ये मामला दर्ज हाई कोर्ट में चला गया है और बहुत सारे हमारे मजबूत
00:30:35:20 इतने पक्ष हैं कि बहुत ही मतलब मजबूती के साथ हम कोर्ट में आए हैं और संभव है कि बहुत जल्दी ही इस प्रकरण में हमारे पक्ष में न्यायालय से ये हमें प्राप्त हो जाए समाधान हमारी समस्याओं का। इसमें मेरे ख्याल से कितने 14 लोगों को 14 पार्टीज को पार्टी बनाया गया सामने विपक्ष में। बाकी तो कुछ कई सारी गवर्नमेंट बॉडीज हैं। Google है, YouTube है, बहुत सारी हैं। और रामपाल की बात करें तो रामपाल को भी पार्टी बनाया है। उसके केंद्र को भी पार्टी बनाया है। है ना? क्योंकि रामपाल के नाम से ये लोग मिथ्स फैलाते हैं ना। मैंने आपको शुरू में कहा था ये लोग क्या-क्या कर रहे हैं जो इललीगल है। क्या-क्या कर रहे हैं? हिंदू धर्म के बारे में निराधार भ्रम फैलाना। हिंदू धर्म के बारे में निराधार अश्लील टिप्पणियां करना। देवी देवताओं का मजाक बनाना। धार्मिक भावनाएं आहात करना। ठीक है? इसके बाद इललीगल रूप से इन किताबों को छापना, इललीगल रूप से इन किताबों का प्रचार प्रसार करना। ऑनलाइन इंटरनेट के माध्यम से जहां जिस प्रकार से भी
00:31:50:24 इसके साथ ही साथ यह भ्रम फैलाना कि हमारे जो गुरुदेव हैं वो वहां से जेलधाम से प्रवचन करते हैं। यह भी एक ऑफेंस है। पब्लिक को आप बेवकूफ बना रहे हो सामने वालों को। इसके साथ ही साथ और भी अनेक पक्ष हैं कि किसी के बारे में भी विवादित टिप्पणियां दे देना। झूठी झूठी जानकारियां दे देना किसी के भी बारे में। मेरी अपनी अगर बात करूं तो मुझे जान से मारने की धमकी दी गई। चाकुओं से गोट डालने की धमकी दी गई। मेरे घर की स्त्रियों के साथ दुष्कर्म कर देने की धमकी दी गई। मेरा चेहरा बिगाड़ करके राक्षस बना करके उसको प्रायोजित तरीके से प्रचार करवाया गया। अनेकानेक चीजें वो सारी चीजें इस यह जो प्रकरण हम लोग लेकर के आए हैं कोर्ट में वो आ चुका है और अब दो बातें हैं। देखिए जो गवर्नमेंट बॉडीज हैं उनका तो आप जानते ही हैं कि उनका पक्ष किस तरीके से वो रखेंगे। अ मगर जो इसमें जो रामपाल से जुड़ी हुई जुड़े हुए लोगों को भी पार्टी बनाया गया है तो अब इसमें वो मामला भी साफ हो जाएगा कि ये सारी चीजें रामपाल के नेतृत्व में ही चल रही हैं। रामपाल इसमें शामिल नहीं है क्योंकि रामपाल या तो आकर के कहेगा कि हां ये किताबें मैंने चपवाई हैं और मैं बताता हूं
00:33:05:25 कहां-कहां क्या-क्या लिखा क्यों लिखा है। तो रामपाल आके बताएगा या तो। और नहीं तो वो ये कह देगा भैया मैं नहीं जानता। ठीक है? दोनों ही बातें हमारे पक्ष में है। यदि वह आ जाता है तो अच्छी बात है। क्लियर हो जाएगा। दूध का दूध और पानी का पानी कर लेंगे। कोर्ट में आए तो सही कोई उसके पक्ष से कोई आएगा तो वो किस प्रकार से माना जाए कि वो रामपाल ने ही भेजा है। ये भी बात आएगी। बहुत सारी चीजें हैं कि किस प्रकार से कौन रामपाल से कनेक्ट होगा। उसके पास क्या अथॉरिटी है। कौन सी संस्था कहां पंजीकृत है। हां। एक ये भी ऑफेंस था कि कोई इनका संगठन पंजीकृत दिखाई नहीं दे रहा है। है ना? यह भी एक बात है। तो यह सारी चीजें हमारे पक्ष में होने वाली है। यही शुभ समाचार आपको देने थे। अब पुलिस ने जो हमारे हमारी बातों को समझ ना पाने के कारण एक आख्या जो लगाई आईजीआरएस पे प्रथम बार बाकी उस पर अभी विवेचना चल रही है बाकी है वो निरस्त नहीं हुई है तो जो उसने आख्या लगाई वो और जो इनका जो हमारे विरुद्ध जो ढाई ढाई लाख का नोटिस आया है दो है ना मेरे और मेरे पिताजी के नाम से इस पर एक विवेचनात्मक वीडियो हम अलग से लाएंगे इसके बाद
00:34:15:15 एक अन्य अह नोटिस भी मेरे पास आया है ₹15 लाख का सामने वाले पक्ष से किसी व्यक्ति के द्वारा और उस नोटिस पे भी एक विवेचनात्मक वीडियो हम लोग एक अन्य इसी सीरीज में आगे लाएंगे नोटिस के बारे में हमने जो भी हमें अभी तक नोटिस प्राप्त हुए हमने किसी का भी जवाब नहीं दिया क्योंकि हम अपनी इस कार्यवाही में ठोस कार्यवाही में करने में व्यस्त थे। तो आवश्यक नहीं दिखाई दिया कि उनका उस तरीके से विधिवत एक जवाब दिया जाए। परंतु इस विवेचनात्मक आने वाले वीडियो के माध्यम से हम उसमें अपना पक्ष भी रख देंगे। सामने वाले को जो अगर जवाब हमारे उत्तर का हमारे उत्तर की प्रतीक्षा हो तो। तो तो आप सभी का स्वागत है इस धर्म युद्ध में। जो भी इस लड़ाई में हमसे जुड़ना चाहे जुड़ सकता है और जो सामने वालों की तरफ से है ना? अपना पक्ष रखने आना चाहता है। जिन लोगों ने हमारी मां को मां के लिए बहुत अश्लील बातें कही हैं। उस पक्ष से उन बातों को सही करने के लिए जो आना चाहता है, उसका भी स्वागत है। है ना? तो ये थी सारी जानकारी। आपको ये शुभ सूचना देनी थी। हाई कोर्ट में मामला पहुंच गया है। सबमिट हो
00:35:30:19 गया है। और एक-एक बात को बहुत ही सूक्ष्म दृष्टि से देखते हुए हमारी जो माननीय अग्रजा हैं रंजना अग्निहोत्री जी उन्होंने इस मामले को कोर्ट में ले गई हैं और बहुत जल्द सभी हिंदुओं को, सनातनियों को, सनातन प्रेमियों को, वैदिकों को, वर्णाश्रमियों को यहां से शुभ समाचार प्राप्त होने वाले हैं। इस सीरीज में हम आगे जो विवेचनात्मक वीडियो है, जो भी तथ्य के संबंध में वीडियोस लाएंगे, वह भी आप जुड़े रहिएगा। इस युद्ध में जो जुड़ना चाहते हैं, वह हमसे संपर्क कर सकते हैं। और जो प्रतिकार करना चाहते हैं, वह तो प्रतिकार करेंगे ही, उनको आना ही पड़ेगा। है ना? और अधिकृत रूप से आएंगे, तो जवाब यहां दिया जाएगा और अनाधिकृत रूप से तो फिर आगे महादेव की इच्छा। तो, कैसा लगा वीडियो? आप लोगों को जानकारी कैसी लगी? अपने भाव अवश्य व्यक्त करिएगा। जय श्री राम।
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा रामपाल गिरोह के विरुद्ध लखनऊ उच्च न्यायालय में मुकदमा दर्ज
🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮