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00:00:01:18 तो सभी को जय श्री राम। तो जैसा कि आप सभी जानते हैं भगवत आनंद एक व्यक्ति जो स्वयं को किसी संप्रदाय विशेष का उत्तराधिकारी बताता है। आचार्य बताता है और उसकी परंपरा क्या है कभी स्पष्ट अभी तक उसने किया नहीं है। पूछने पर बहाने बनाता है। सामने आने से बचता है। तो इसके ऊपर बात कर ही लेते हैं जब कर रहे हैं। भगवतानंद का कहना है कि वह हमारी लाइव स्ट्रीम में इसलिए नहीं आएगा क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी है कौन? अ ना तो वह पूरी पीठ का कोई योग्य व्यक्ति है ना ही उसके द्वारा नियुक्त कोई दूत है ना वक्ता है अधिवक्ता है। अधिवक्ता शब्द का उपयोग भी किया है उसने। खैर पूरी पीठ के विषय में अगर बात करनी तुम पूरी पीठ के
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00:00:51:18 आधिकारिक व्यक्ति हो। ना प्रतिनिधि हो। ना शंकराचार्य के द्वारा तुम कोई राजदूत या अह अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत किए गए हो। ना पूरी मठ के किसी योग्य पद पर तुम अह अधिकारी के रूप में बैठे हो।
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00:01:03:08 हो क्या तुम? अच्छा ना ही वह रिदमम कपूर है ना ही रिदमम कपूर का पिता भाई पति इत्यादि में से कोई ऐसा संबंधी जो उसकी तरफ से खड़े होकर के बात कर सके। विजयश्री के तुम क्या हो? बाप हो, मां हो, पति हो, भाई हो, वकील हो, खुद विज हो। क्या हो? ऑथराइज रूप से क्या हो? तो सबसे पहले तो मैं यह कहूंगा कि भगवतानंद क्या तुमने जब मुझे लाइव का प्रस्ताव दिया था तब तुम्हें यह सब नहीं पता था कि मैं कौन हूं? तब तुम्हें यह सब ध्यान नहीं था कि मैं पीठ का कोई योग्य परिकर हूं या वहां का अधिवक्ता हूं या रिदमम कपूर से कैसे रिलेट करता हूं। तब तुम्हें नहीं पता था क्या? तो तुमने क्यों दिया था प्रस्ताव? अच्छा वह बात और है कि तुमने अपने वीडियोस के टाइटल में कई जगह पर अधिवक्ता ही लिखा है मुझे। है ना? खैर चलिए वह एक विनोद में लिख दिया होगा तंज कसने के लिए। तो दूसरी बात यह है कि जब तुम स्वयं प्रस्ताव दे चुके हो लाइव आने का तो तुम्हारी यह बात तो स्वतः कट जाती है कि शिवश नारायण द्विवेदी है कौन? ठीक है। अगर वह कुछ
00:02:18:14 नहीं है तो तुम क्यों आ रहे थे उससे? क्यों कहा था कि अगर उनको सहज लगे तो वह लाइव चर्चा कर सकते हैं। हमें सहज लग रहा है। अब उस समय स्थितियां ऐसी थी कि हम कुछ चीजें नहीं देना चाहते थे सनातन आभासी तंत्रों को। पर तो अब तो कुछ बचा ही नहीं है तुम्हारे और मेरे बीच में। तो हमने अपनी लाइफ में भी कहा था कि जब भैया युद्ध छेड़ ही दिया है तो क्यों ना इस यज्ञ में जो है पूर्ण आहुति दी जाए। अच्छे से दी जाए। तुम्हें तो उन चीजों से मतलब है नहीं। धर्म स्थापना कैसे होगी? सिद्धांतों की रक्षा कैसे होगी? तुम्हें तो भूकना है तो भूकोगे। तो भूकोगे तो फिर फसोगे। अब दूसरी बात ये आती है कि इसने कहा कि हम कुछ नहीं है। नथिंग है यह है वो है। खुद ही व्यक्ति पहले प्रस्ताव देता है। खुद ही अधिवक्ता भी कहता है। अब एक यहां पर प्रश्न और उठ जाता है। जब यह पूछ रहा है कि कोई शिवश नारायण द्विवेदी है कौन? इस व्यक्ति ने अमुक अमुक लोगों से अज्ञात लोगों से जो सामने आकर के यह नहीं कह सकते कि हां यह बात मैंने कही है। इस व्यक्ति ने ऐसे लोगों से के कथनों के आधार पर किसी प्रतिष्ठित पीठ पर प्रतिष्ठित आचार्य पर उसके परिकरों
00:03:34:00 पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। इसने उन लोगों से क्यों नहीं पूछा कि तुम हो कौन? तो बात ऐसी है कि हमारे वास्तविक नाम पहचान को सब जानते हैं। इन लोगों के वास्तविक नाम पहचान को वो लोग नहीं जानते। उसको छिपा कर ये सब बहुत सी ऐसी बातें समय-समय पर मेरे विरुद्ध प्रचारित करते रहते हैं। और इतना ही नहीं मैं तो कह रहा हूं ना ये लोग मतलब आप एक बात का खंडन करिए दूसरी स्क्रिप्ट बना लेंगे। दूसरी खंडन करें तीसरी बना लेंगे। तीसरी करें चौथी बना लेंगे। तो यह रक्तबीज हो गए हैं। इनका कोई अंत नहीं होगा। कहो
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→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 27:18 ↗
00:04:05:01 कि शंकराचार्य दीक्षित शिष्य हैं। तो एक लाख दीक्षित शिष्य हैं। तो क्या हम सबसे पर्सनली बात करते
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00:04:08:26 चले? उन लोगों की प्रामाणिकता क्यों नहीं जांची कि तुम हो कौन? जो लोग सामने तक नहीं आ सकते जिस सत्य के वह पक्षधर हैं उसके लिए उन लोगों की बात पर तुमने इतने गंभीर आरोप लगाए। हां तब क्यों नहीं ध्यान दिया कि क्या यह कोई ऐसा प्रामाणिक व्यक्ति है जिसकी बात पर बात में दम हो? जिसकी बात के आधार पर कोई युद्ध लड़ा जा सके, जिसकी बात से कोई प्रभाव पड़ सके या मुझे प्रभावित होना चाहिए। मतलब तुम जब आरोप लगाने आओगे तब तो किसी भी एरे गहरे न्थू गहरे का राह चलते हुए व्यक्ति का गली में स्मैक बेचने वाले व्यक्ति का भी तुम वक्तव्य लाकर दिखा दोगे। यह देखो पूरी पीठ के परिकरों के बारे में यह बातें हो रही हैं। और जब तुम्हें कोई निराकरण प्रस्तुत करेगा तो निराकरण तुम केवल अधिकृत व्यक्तियों का लोगे। यह है दोगलेपन की पराकाष्ठा। समझ रहे हो? इसको कहते हैं दोगलापन। खुद ही कहोगे कि मैं आना चाहता हूं। प्रस्ताव दे प्रस्ताव रखा है लाइव पर इसलिए नहीं ले रहा इसलिए नहीं ले रहा है। फिर खुद ही कहो खुद ही कहोगे क्यों जाए हम उसकी लाइव में। अब
00:05:24:07 तीसरी बात जो आती है एक निकल कर के कि इसने यह बात कही कि शिवश कह रहा है कि लाइव आओ और क्या करेंगे लाइव में आकर वह मुझसे मेरी परंपरा की प्रमाणिकता पूछेंगे। क्यों? क्यों नहीं पूछ सकते भाई? पहले तो मेरे वही प्रश्न लिए जाएंगे ना जो प्रश्न चल रहे हैं कि पूरी पीठ के परिकरों पर तुमने आरोप लगाया उस पर बात होगी ना? फिर जो विजयश्री का मामला उस पर बात होगी। और जब तुम्हारे उठाए हुए दो मुख्य बिंदु हैं जिनके ऊपर विवाद है। जब वह उस पर बात हो जाएगी तब मैंने कहा ना कि फिर मैं परंपरा पूछूंगा। क्यों नहीं पूछ सकते भाई? तुम जब किसी पीठ पर किसी शंकराचार्य से कुछ भी पूछ सकते हो तो हम क्यों नहीं पूछ सकते तुमसे? तुम तो कहते हो ना कि पूछो। तुम तो कहते हो ना कि तुम तुम वो चापलूस बने हुए हो। तो तुम क्या चाहते हो? तुम लोगों को अपना चापलूस बनाना चाहते हो कि तुमसे कोई प्रश्न ना किया जाए। तुम प्रश्न ना करने वालों को चापलूस की उपाधि देते हो ना। तो तुमसे प्रश्न क्यों ना किया जाए? तुम्हें अपनी परंपरा पर डाउट है। तो सात्विकाचार्य के माध्यम से
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→ Used in: A · Video निग्रह परंपरा का अस्तित्व एवं भागवतानंद की नियुक्ति The Nigrah Nikasika Chapter... at 44:50 ↗
00:06:39:10 कामाख्या की परंपरा से और तारापीठ की परंपरा से मेरा संबंध है। इससे अधिक मैं अभी नहीं बता सकता। गुरुजनों ने मना किया
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00:06:45:24 है। और फिर बात करते हो तुम्हारे गुरु करें तो बात है। क्यों? तुम्हारे गुरु नहीं है क्या? तुम उनके चरणों में बैठकर के ज्ञान प्राप्त नहीं किए हो क्या उनसे? संशय तुम्हारे दूर नहीं किए क्या? जो इतनी हीन तरीके से हल्के शब्दों में कह रहे हो तुम्हारे गुरु पूछे तो बात है। घिग्गी बन जाएगी घिग्गी? जिस दिन सामना हुआ उनका नहीं मेरा। समझे? इसीलिए भागे-भागे फिर रहे हो। ये तो भाई सवाल भी पूछेगा। ये केवल उत्तर नहीं देगा। फिर सवाल भी करेगा। उसी से बचना है तुम्हें। क्योंकि सबसे बड़ी इस पूरी ये जो पूरी फिल्म है इसमें सबसे बड़ा तुम्हारा जो वीक पॉइंट है वो तुम्हारी परंपरा ही है। जिसका तुमने ढिंढोरा पीट रखा है। लुप्त संप्रदाय का गुप्ताचार्य। खैर इसके बाद इसके कुछ लोग हैं जो इस तरह की चीजें उड़ा रहे हैं कि भाई मेरा व्यवहार ठीक नहीं होता है मेरी लाइव स्ट्रीम में। तो तुम अपने आका को जाके कहो ना कि भड़भड़ी में आकर के जब उसने पहला प्रस्ताव दिया था तो पहले चेक नहीं किया था। अपने नुमाइंदों से पूछा नहीं था। कालिया जिन से पूछा नहीं था। जिनकी उपासना करवाते हैं कि भाई वो कैसा व्यवहार करता है? अपनी लाइफ में बुला करके आधिपत्य जमा लेता है। लोगों के अधिकार को छीन लेता है। ये सब तुमने पूछा नहीं था। जो अब तुम्हें याद आ रहा है। जब तुम्हें पता लग गया कि प्रश्न पूछा जाएगा परंपरा पे तो क्या-क्या बहाने लगा रहे हो कि शिवश कोई प्रामाणिक व्यक्ति नहीं है। मगर हम आरोप लगाएंगे अप्रामाणिक व्यक्तियों के द्वारा। मगर अगर कोई अप्रामाणिक व्यक्ति है मगर वो अगर आकर के निराकरण करना चाहता है तो हम
00:08:00:28 उसका निराकरण नहीं लेंगे। हम तो आरोप लगाएंगे। है ना? आरोप लगाने के लिए वक्तव्य लेंगे। और हम अपने वक्तव्यों में पहले उसको अधिवक्ता मान भी लेंगे। उनकी तरफ से जिन पर हम आरोप लगा रहे हैं और जब वह अधिवक्ता बोलने आएगा तो हम पूछेंगे तुम हो कौन हम और उसके बाद परंपरा पर क्यों की बात होगी इसलिए हम नहीं जाएंगे यही है ना दोगलापन और फिर शिष्य जो चेले हैं वो भी दोगलापन करेंगे दोगलापन क्या है कि अब वो निकाल के लाएंगे शिवश का व्यवहार गलत है। उसकी लाइफ में इसलिए उसकी लाइफ में जाना सही नहीं है। यह भी दोगलापन भाई पहले तुम प्रस्ताव देने से पहले पूछ देख लेते ना कि क्या है? कैसा व्यवहार है। तब नहीं मालूम किया था कैसा व्यवहार है। खैर चलो एक मौका और दे देते हैं तुम्हें। हमारे चैनल पर आने में आपत्ति है ना कि व्यवहार गलत होगा। यह होगा वो होगा। हां। अपने चैनल पर कर लो। अपने चैनल पर कर लो। हम तुम्हारे चैनल पर आ जाएंगे। कहा था ना
00:09:16:07 कहा था पहले ही तुम डाल डाल हम पाथपात चलो अपने चैनल पर करो। ठीक है। तो अब बता देना जिगरा हो जाए तो तुम्हारे अंदर इतना अहंकार भरा हुआ था जिसकी वजह से ये सब हुआ। चाहते नहीं थे हम ये सब करना। और शंकराचार्य अकाट्य क्यों? इस बारे में उत्तर दे दिया है। सर्वशक्तिमान धर्म चैनल पर डाला है। उत्तर लाइव हुआ था जो अभी पिछला लाइव हुआ था उसी में दिया था उत्तर तो उसकी कटिंग निकाल के डाल दी वहां देख लेना शंकराचार्य को अकाट्य कहने की आवश्यकता क्या है? और भागो मत आओ सामना करो। बताओ तुम्हारी परंपरा तुम्हारा ज्ञान तात्विक विवेचना कहां से आई? और सबसे पहले तो पूरी पीठ के परिकों पर जो आरोप लगाया है फिर विजयश्री पर जो आरोप लगाया है वह सिद्ध करो आगे अपने उन प्रमाणों को ले आओ बात करो चलो ठीक है और साहस हो जाए सामर्थ हो जाए तो परंपरा को लेके ही आना बता देना कब आ रहे हो और आवश्यक नहीं है मेरे चैनल पर आना ठीक
00:10:31:14 है तुम जयकांत शिकरे हो ना मैं बाजीराव सिंघम जय श्री राम [संगीत]
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Endless Hypocrisy #भागवतानंद
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