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00:00:01:25 ऐसा है कि यह जो तीन बातें हैं धर्म, पवित्र और सद ये तीनों बातों में हमारी बातें डिस्कशन हुआ। आपने कुछ बातें कही कुछ हमने कही जनता ने देखा है। अब हम एक बात मुझे समझ में आई उसमें तीनों में जो कॉमन थी कि जो भगवान की ओर पूर्ण ब्रह्म परम परमेश्वर अब उसमें फिर वो बात आ जाएगी भगवान तो ये भी है वो भी है वो भी एक विषय है कि वो भगवान कैसे है मगर फिलहाल हम पूर्ण ब्रह्म की बात कर रहे हैं कि जो पूर्ण ब्रह्म की बात करेंगे वो जो है हमारे लिए धर्म शास्त्र पवित्र शास्त्र और सद ग्रंथ हो जाएंगे। तो अब मैं जब हम यह बात बार-बार कह रहे हैं कि वही हमारे लिए धर्म है जो पूर्ण ब्रह्म की बात करे। वही हमारे लिए पवित्र है जो पूर्ण ब्रह्म की बात करे। वही हमारे लिए सद है जो मोक्ष पूर्ण ब्रह्म की बात करे। ईश्वर की बात करे। तो इसका मतलब यह है कि क्या आपके अनुसार जो ईश्वर है वो क्या है? उसकी क्या परिभाषा है? ईश्वर की

00:01:10:04 यही प्रश्न हमने आपसे किया था कि सर्वशक्तिमान ईश्वर कौन है? ईश्वर का क्या स्वरूप है? सुनिए सुनिए सर्वशक्तिमान ईश्वर कौन है? ये ऑब्जेक्टिव प्रश्न है। ये ऑब्जेक्टिव है। अभी मैंने परिभाषा पूछी है। ऑब्जेक्टिव की वही देखिए सुनिए। ऑब्जेक्टिव का मतलब क्या है? समझ लीजिए। ऑब्जेक्टिव का ऑब्जेक्टिव का मतलब आवाज कहां से आ रही है? ऑब्जेक्टिव का मतलब समझ लीजिए। मैंने कहा कि जो हमें परमेश्वर की प्राप्ति कराएंगे वो शास्त्र हमारे लिए सद ग्रंथ है। ये हो गया सिद्धांत वाला प्रश्न। सिद्धांत। सिद्धांत क्या है? ये है। अब ऑब्जेक्टिव प्रश्न क्या है? वस्तुनिष्ठ क्या है? वो ग्रंथ कौन-कौन से हैं? तो ये ऑब्जेक्टिव हो गया। वो वेद है। वो स्मृति ग्रंथ है। ये ऑब्जेक्टिव हो गया। अभी मैंने हम लोग बात इस पर कर रहे हैं कि जब आप बार-बार ईश्वर को प्राप्त कराने वाले शास्त्रों की बात कर रहे हैं कि वही सद ग्रंथ है, वही धर्म ग्रंथ है, वही पवित्र ग्रंथ है तो इसका मतलब आपको मालूम होना चाहिए कि ईश्वर किसे कहते हैं? तो आपके अनुसार ईश्वर कौन है? कौन मतलब ऑब्जेक्टिव नहीं उसका नाम नहीं पूछ रहा हूं। उसकी परिभाषा पूछ रहा हूं। ईश्वर किसे कहा जा सकता है? क्या सिद्धांत है? हां, उनका लक्षण बता दीजिए। उनका सरल बात में उनका लक्षण बता दीजिए। ईश्वर का क्या लक्षण है? आप परमेश्वर पूर्ण ब्रह्म आप फिर इसमें

00:02:25:06 हो जाएंगे ईश्वर मैं पूर्ण ब्रह्म की बात कर रहा हूं। पूर्ण ब्रह्म का क्या है? परमेश्वर परमेश्वर जो लास्ट है उससे आगे कुछ नहीं है। उसका उसकी क्या परिभाषा है? क्या सिद्धांत है उसका? देखिए परमेश्वर का सिद्धांत है कि वो निर्विकार है, दयालु है, परम पवित्र है। क्या है? निर्विकार है। अजमा है, अनादि है, सर्वेश्वर है, न्यायकारी है, सृष्टि करता है। सर्वव्यापक है, सर्वशक्तिमान है, सच्चिदानंद है। यही उनके लक्षण है। यही उनके गुड गुड गुड गुड। अच्छा सर्वशक्तिमान अच्छा और सर्वज्ञ भी है। सर्वज्ञ जी सर्वव्यापक भी है, सर्वव्यापक भी है। अच्छा तो सर्वव्यापक का अर्थ क्या होता है भाई साहब? क्या लेते हैं आप? सर्वव्यापक का अर्थ जो अपने शक्ति से सर्वव्याप है। हर जगह व्याप्त है। सब जगह सब जगह कोई भी दुनिया की ऐसी कुछ भी ऐसा कुछ भी कुछ भी ऐसा नहीं है जहां वो ना हो। जो अपने शक्ति से हर जगह व्याप्त है। ठीक है। शक्ति से ही सही मगर हर जगह सब जगह ना सब जगह।

00:03:40:21 सब जगह ठीक है। और सर्वज्ञ का क्या मतलब है? जो सब कुछ जानता हो उसे सर्व के सब कुछ यानी कि ऐसा कुछ ना हो कि वो ना जानता हो। यानी कि सर्व का मतलब है सब कुछ कुछ शेष ना रह जाए। ये सर्व का मतलब है। हां अब मैं आपसे पूछता हूं कि भाई साहब भाई साहब मेरी बात अभी पूरी नहीं हुई। रुक जाइए। मैं आपसे एक बार और क्लियर कर लूं कि आप जब सर्वज्ञ कह रहे हैं। एक मिनट एक मिनट जब आप सर्वज्ञ कह रहे हैं, सर्वव्यापक ले कह रहे हैं तो आप सर्व का अर्थ ले रहे हैं कि जिससे बाहर कुछ भी शेष ना रह जाए। सब कुछ सर्वव्यापक जो सब जगह व्याप्त हो। सर्वज्ञ जो सब कुछ जानता हो। ऐसा कुछ ना हो जो वो ना जानता हो। ऐसा ऐसी कोई जगह ना हो जहां उसकी वो शक्ति के रूप में व्याप्त ना हो। आपके अनुसार। ठीक है? यानी सर्व जो विशेषण लग रहा है सर्व इसका अर्थ आप यह मान रहे हैं कि सब कुछ जिससे शेष कुछ ना रह जाए। ठीक है जी हम तो अब बात आती है कि आपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान भी कहा है। बिल्कुल तो सर्वशक्तिमान का अर्थ आप क्या लेते हैं?

00:04:57:20 सर्वशक्तिमान का मतलब कि सबसे सर्व करने वाला उसके असंभव कुछ यानी कि वो सब कुछ कर सकता है जिस के बाहर कुछ भी शेष नहीं रह जाता। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि वो फलाना काम नहीं कर सकता। हां लेकिन अब ये आगे बढ़ने से पहले मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्योंकि आपने भाई साहब ये प्रश्न मेरा ये चैप्टर क्लोज ही नहीं हुआ है तो आप आगे क्यों जा रहे हैं? मैं आपकी सर्वशक्तिमान की परिभाषा पे ही प्रहार कर रहा हूं। एक मिनट एक मिनट भाई साहब अभी सर्वशक्तिमान अभी सर्व अभी जो सर्व वाली बात हो रही है आपने माना सर्वज्ञ वो है जिससे कोई भी चीज जानने की बाकी ना रह जाए और सर्वव्यापक वो है जो शक्ति के रूप में हर जगह व्याप्त हो। कहीं भी कोई भी ऐसी चीज ना हो। एक एक मिनट भाई साहब भाई साहब कैसे करें? अब सर्वशक्तिमान की बात आई तो सब कुछ करने में सामर्थवान हो और हम भी यही हम भी यही मानते हैं गणेश जी दो मिनट दो मिनट दो मिनट आप चुप रहिए दो मिनट नहीं तो आपको जब हम बोलेंगे रुकने के लिए तो आप रुकवाइएगा उनको भैया को भी ठीक है भैया कोई बात नहीं चलिए आप बोलिए बोलिए भैया आप बोलिए तो जब आपने आपने सर्वज्ञ

00:06:12:24 उसे माना जिससे जिसको कुछ भी जानना शेष ना हो आपने सर्वव्यापक उसे माना जिसका कहीं भी जिसका कहीं भी होना शेष ना हो हर जगह हो शक्ति के रूप में शक्ति के रूप में तो फिर सर्वशक्तिमान का मतलब आपने माना जो सब कुछ कर सकता है तो अब मैं पूछ रहा हूं क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है आपकी आवाज नहीं आ रही भाई साहब आपकी आवाज नहीं आ रही मेरा आवाज नहीं जा रहा है अब आ रहा है। इसके पहले हम आपसे प्रश्न पूछना चाहते हैं कि ईश्वर के विषय में आपका क्या कहना है? ईश्वर कौन है? सर्वशक्तिमान ईश्वर कौन है? उसका क्या स्वरूप है? ये तो विषयांतर हो रहा है ना भाई साहब। विषय जब एक बात कोई क्रम से जब एक बात कोई क्रम से चल रही है तो उसको खत्म करिए ना। भाई साहब जब आपने कहा धर्म ग्रंथ और धर्म और पवित्र और सद वो है जो ईश्वर की बात कराए तो मैंने आपसे आपके ईश्वर की परिभाषा पूछी। अब आपने कहा कि भाई हम उसे सद ग्रंथ मानते हैं जो सर्वशक्तिमान की बात करे सर्वज्ञ की बात करे सर्वव्यापक की बात

00:07:27:25 करे। अब मैं आपसे आपके सर्वशक्तिमान को टटोल रहा हूं। तो आप जिन शास्त्रों को आप जिन शास्त्रों को सद ग्रंथ कहते हैं भाई साहब। आप जिन शास्त्रों को सद ग्रंथ कहते हैं भाई साहब उन सद ग्रंथों के द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है आपके अनुसार वो सर्वशक्तिमान आपने माना है तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है भाई साहब सुनिए मेरी बात सुनिए भाई साहब मैं अपने आप को सही सिद्ध कर लूंगा अभी के अभी वो पॉइंट खड़ा करने पर विषयंतर होगा नहीं अगर मैं गलत भी सिद्ध हो जाऊंगा। सुनिए अगर मैं गलत भी सिद्ध हो जाऊंगा तो उससे आपका सही होना सिद्ध नहीं होता। अपने आप को सही सिद्ध करिए। भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब। मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भाई साहब कि क्या आपने कहा सर्वशक्तिमान का अर्थ जो सब कुछ कर सकता है। क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है? इस प्रश्न पर का उत्तर हम देंगे आपको। भाई साहब पहले आप अगर मेरे प्रश्न के जवाब में मुझसे प्रश्न करेंगे उल्टा सुनिए तो मैं अपने आप अपने बारे में कुछ

00:08:42:28 बताऊंगा फिर आप उस पर प्रश्न करेंगे फिर तो वो एक चैप्टर ही खुल जाएगा ना नया मैं अपने आप को भी सही सिद्ध करूंगा अभी आप रामपाल को सही सिद्ध कर रहे हैं अभी आप रामपाल को सही सिद्ध करिए मेरे अगर मैं हार गया अगर मैं अपने पक्ष को सही से सिद्ध नहीं कर पाया तो उससे रामपाल सही सिद्ध नहीं होंगे रामपाल के सही सिद्ध सुनो रामपाल के सही सिद्ध होने से ही रामपाल सही सिद्ध होंगे। आपकी परिभाषा अगर यह है आपकी परिभाषा अगर यह है कि सर्वशक्तिमान का अर्थ है जो सब कुछ कर सकता है। भाई साहब मैं देखिए मैं मैं बहुत ज्यादा आपसे रिपीटेड नहीं कर सकता हूं। मैंने आपको कहा कि आप आराम से वो रखिए। आप अपने भी सवाल को लिख के रखिए। हमारी डिबेट कई एपिसोड्स में होगी। हम लोग बात करते रहेंगे। भाई साहब अभी बात चल रही है। आपने सद ग्रंथ उसे माना है जो सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करे। जी। तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपका जो आपके अनुसार जो ईश्वर है वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है? मैं पूछ नहीं सकता। क्या मेरा कोई अधिकार नहीं है? भाई साहब अभी नहीं है। अभी आप अपना जवाब दीजिए। अभी नहीं है। आप अपना जवाब दीजिए।

00:09:58:07 भाई साहब मैं मेरी बारी आएगी तब मैं आपसे क्वेश्चन नहीं करूंगा। मैं अपना जवाब दूंगा। मैं अपना जवाब दूंगा। भाई साहब आपके अनुसार आंसर दीजिए। मेरे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता। आप अपने को सही सिद्ध करिए। भाई साहब भाई साहब प्लीज भाई साहब मेरे पास इतनी ताकत नहीं है। वैसे ही मेरा मेरा स्वास्थ्य गड़बड़ है। भाई साहब मैं बार-बार बोल-बोल करके और मैं थक रहा हूं। आप मेरी बात को समझिए। जब आप मुझसे क्वेश्चन करेंगे मैं अपना जवाब दूंगा आपको। मैं आपसे क्वेश्चन नहीं करूंगा। इससे विषयंतर होता है। आप आप सुनिए इससे विषयंतर होता है। भाई साहब टॉपिक चेंज होता है इससे। आप अपना जवाब दीजिए। आपका ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं? ईश्वर तब आप ये बोल रहे हो ना कि मैं आपसे पूछ नहीं सकता। पूछो। जब मेरी बारी आएगी तब पूछो। जब मैं मेरे को अपना पक्ष सिद्ध करना होगा सही तब पूछो। अभी आप अपना पक्ष सही सिद्ध कर रहे हैं। आपने कहा पहले ही आपसे पूछा कि आपका देखा आप जवाब नहीं दे रहे हैं। अभी आपने कहा जवाब कैसे दूंगा? अभी आपने कहा जवाब कैसे दूं? बोलने दोगे। जब जब बोला

00:11:13:13 बोलते हो तो जवाब नहीं देते हो कुछ और बोलते हो। मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या सर्वशक्तिमान का जो अर्थ है वो सब कुछ कर सकने वाला है या कुछ-कुछ काम नहीं कर सकने वाला है। ये बता दो भाई साहब। बता दो कृपा करके। आप हमको बोलने दीजिए पहले बोलने दीजिएगा कि नहीं जो प्रश्न का उत्तर है यह देना इधर उधर की बात मत करो प्रश्न का उत्तर भाई साहब जिससे हम देखो अभी पिछली कई चीजों में हमारी सहमति नहीं हुई नहीं हुई ना फिर भी हम लोग बात कर रहे हैं ना हो सकता है कि अभी भी हमारी सहमति नहीं हो पाएगी फिर भी हम लोग बात करेंगे तो जब बात करेंगे तो आपके प्रश्न भी मैं लूंगा मगर भाई साहब प्रश्न के जवाब में प्रश्न करने से वो विषय बदलता है और अगर अगर मान लो आपके अनुसार मैं गलत हूं। एक मिनट के लिए मान लेते हैं मैं गलत हूं। मेरा ईश्वर गलत है। मैं जिन आचार्यों का शिष्य हूं वो गलत है। मैं जिन ग्रंथों को एक एक अक्षर मानता हूं सत्य वो सब गलत है। मैं गलत हूं पूरा। मगर मेरे गलत होने से रामपाल जी का सही होना सिद्ध नहीं होता है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। मेरे भाई मुझे बोलने दो पूरा। अभी प्रश्न ये

00:12:28:16 चल रहा है कि आपने कहा जो सर्वशक्तिमान अभी प्रश्न ये चल रहा है। मैं पूरी लाइन कहूंगा उसके बाद ही चुप होऊंगा। मैं पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब। मैं पूरी लाइन बोलूंगा। भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा। पूरी लाइन बोलूंगा। भाई साहब भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा। मैं पूरी लाइन बोलूंगा। भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब अभी प्रश्न ये चल रहा है। अभी प्रश्न ये चल रहा है। भाग गए भाई साहब। भाई साहब भाग गए।

00:13:21:01 [संगीत] हां जी वो तो चले गए तो भागेंगे भागेंगे ही ना उनके सिद्धांत क्लियर नहीं है उनके सिद्धांत क्लियर ही नहीं है भाई हम सही है या गलत है हमारी जो विचारधारा है वो क्लियर है फट से बोलते हैं कोई भी आंसर हमसे पूछा जाता है फट से बोलते हैं वो हम सही मान सही चीजों को सही मान रहे हैं या गलत चीजों को सही मान रहे हैं वो एक अलग विषय है जैसे उन्होंने मनुस्मृति पे क्वेश्चन किया तो मनुस्मृति में यह भी लिखा है कि जो इस जन्म में किसी का मांस खाया होगा अगले जन्म में वो बनेगा है ना वो वो उसका मांस खाएगा दंड लिखा है मनुस्मृति में यह भी लिखा है कि मांस खाना छोड़ना 100 वर्षों तक प्रतिवर्ष जब तुम अश्वमेध यज्ञ करोगे उसके बराबर का फल देता है अब बोलो है ना अब ये कहेंगे कि नहीं यह बात क्यों लिखी तो जोड़ना पड़ेगा ना कि यह बात का मतलब क्या है यह बात का मतलब क्या है तो वहां पर लिखा हुआ है जो विधि युक्त यानी आवश्यकता पड़ने पर भी

00:14:36:02 अगर आपको मांस खाना पड़ रहा है आ रही बीमारी में मांस जो विषम परिस्थितियां होती है उनमें खाने की आज्ञा है उस समय जो विधि का आलंबन नहीं लेता है विधि युक्त मांस नहीं खाता है वो दंड के लायक है उसको नरक मिला है और अगर ऐसे ही एक बात को उठाना है तो इनकी जो ये है ज्ञान गंगा इसमें 31 वे प्रश्न में कबीर ने बोला है कि गीता को बोलने वाला वाला कौन है? विष्णु के अवतार कृष्ण। हां भाई साहब कहां गए थे

00:15:23:00 आप? गणेश दास जी। आपको भागना है ऐसे बिना बताए। अब देखिए मैं आपको अनम्यूट कर रहा हूं। भाई साहब अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है। हम लोग दोबारा प्रश्न पे आते हैं। फिजूल की बातें नहीं करनी है। ठीक है। जी फिजूल की बातें नहीं करनी। की बातें फिजूल की बातें नहीं करनी। भाई साहब भाई साहब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं। क्या आपने जो बताया कि हम उन्हें सद ग्रंथ मानते हैं। उन्हें धर्म ग्रंथ मानते हैं। उन्हें पवित्र ग्रंथ मानते हैं। जो सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त करने की बात करें। आपने सर्वज्ञ का अर्थ बताया जो जिससे कुछ भी जानना चेत ना हो। आपने सर्वव्यापक का अर्थ बताया जिसके द्वारा कोई ऐसी जगह ना हो जहां शक्ति के रूप में वो व्याप्त ना हो। तो सर्वशक्तिमान का मतलब भी यही हुआ ना कि सर्वशक्तिमान का अर्थ आपने आपने स्वयं भी बताया जो सब कुछ करने में सामर्थ्यवान है। अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है? एक मिनट हम आपसे पूछना चाहेंगे। भाई साहब दूसरी बात नहीं करनी अभी मुझे। मैं थक गया। मुझसे मत पूछिए। जब मेरी बारी आएगी तब पूछिए मुझसे। मेरी बारी

00:16:38:20 आएगी। आप मुझसे अभी अपना जवाब दीजिए भाई साहब। मैं आपसे पूछ रहा हूं। आपके पास जवाब है तत्वद का दिया हुआ। आपके पास जवाब है। सुनने का क्षमता है? आप जाइए आप। आपको जवाब देना है तो ऐसे ऐसे सर हिला दीजिए अन्यथा आप जा सकते हैं। थक गया मैं। पीछे से जड़ की बात करना इसलिए आवश्यक है कि इनकी जड़े ही गलत है। जड़ की बात इसीलिए करना आवश्यक है कि इनकी जड़े ही गलत है। संत के द्वारा प्रदत्त शास्त्र होना चाहिए। फिर वो सद ग्रंथ कैसे कुरान बाइबल और इनका ये क्योंकि ना वशिष्ठ ज्ञानी तत्व ज्ञानी ना ब्रह्मा विष्णु महेश ज्ञानी सब अज्ञानी थे तो वो संत नहीं थे और यहां तक कि ये तक लिखा है कि उनको मोक्ष नहीं मिली उनको शांति नहीं मिली तो आपको उनकी भक्ति करने वालों को शांति कहां से मिलेगी ये सब लिखा है इनकी किताबों में तो जिसको शांति नहीं है उसको संत क्यों मान रहे हो जो संत नहीं है उसके द्वारा प्राप्त ग्रंथों को तुम सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो क्योंकि क्योंकि

00:17:54:19 लोगों को बेवकूफ बनाना है, ढोंग करना है कि हम सबको सद ग्रंथ मानते हैं। आ जाओ आ जाओ आ जाओ हमारे पास आ जाओ। हम तो तुमको भी मानते हैं। हम तो तुमको भी मानते हैं। अनीश जी आप एक काम करिए। आप एक यहां पर मैसेज कर दीजिए का लिंक। अच्छा आज हमने एक बात प्रूफ की है सैद्धांतिक पटल पर आपको मैंने लिंक दिया है ना आप थोड़ी देर के लिए जाइए बाहर और यहां नीचे आकर के कमेंट ये जो मैसेजेस चल रहे हैं ना इसमें लिंक कर दीजिए आप कमेंट कर दीजिए अच्छा अच्छा अच्छा लाइव चैट में शेयर कर देते हैं ना चैट में हां लाइव चैट में जी

00:18:45:08 ठीक तो आज क्या वो हुआ कि इनके द्वारा इनकी ही परिभाषा भाषा के आधार पर ना तो गीता वेद पुराण तो सद ग्रंथ है ही मगर उनकी तो बात छोड़ो कुरान और बाइबल की तो बात छोड़ो गीता वेद पुराण भी इनकी परिभाषा के अनुसार सद ग्रंथ नहीं है नहीं तो सिद्ध करें ये सद ग्रंथ कैसे कह रहे हैं अभी खुद ही इतना बड़ा वीडियो बनाया था इन्होंने किसके ग्रंथ अश्लील अब खुद कह रहे हैं कि वो ग्रंथ अश्लील है खुद कह रहे हैं और फिर कह रहे हैं वो पवित्र है वो सद ग्रंथ है जब अश्लीलता भी है उसमें जो ठीक नहीं है सामाजिक उससे ऐसी बातें भी वो बता रहे हैं ग्रंथ तो अच्छा फिर मैंने पूछा ये प्रमाण के लिए मैंने पूछा कि भाई ये क्या है ये भी सद ग्रंथ है अंतर होना चाहिए इसके एक एक शब्द पे आपको विश्वास है तो फिर इसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो उसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो जिसमें मिलावट है और असद ग्रंथ की परिभाषा ही नहीं है वाह

00:19:54:12 दीजिए भाई लिंक दीजिए यहां पर देखिए ये जो बातें होती है कोई अगर बुद्धिजीवी होता है उसको बिल्कुल समझ में आएंगी ना तो इनका जो इनके द्वारा इनको सद ग्रंथ मानना वो सिद्ध होता है अब बात आती है एक ही चीज कॉमन मिली ईश्वर भगवान परमेश्वर पूर्ण ब्रह्म एक कॉमन मिला तीनों बातों में धर्म में पवित्रता में और हमने कहा चलो उसी में बात कर लेते हैं। क्या तुम ईश्वर की बात कर रहे हो? क्या तुम्हारे अनुसार वो शास्त्र ईश्वर की बात कर रहे हैं? नहीं कर रहे। आप खुद मानते हो कि ईश्वर गर्भ से जन्म नहीं ले सकता। यजुर्वेद में लिखा है वो माता के वो गर्भ में विचरता

00:20:41:02 है। बस यही 18 62 करते रहो। आओ आपको आपका वो है क्या कहते हैं मैसेज कहां से करते हैं मुझे पता नहीं है पोस्ट कमेंट मैंने ये कर दिया है कोई ज्वाइन कर लीजिए थोड़ा सा बात कर ले फिर उसके बाद यह है इनकी पोल यह खुद को सही करने के लिए इनके लिए आवश्यक है कि दूसरा कोई गलत हो तभी तक इनका अस्तित्व है ये तभी तक सही है जब तक कोई दूसरा गलत है इनके अनुसार अन्यथा ये सही नहीं है ये अपनी बात को सही सिद्ध नहीं करेंगे ये दूसरे को गलत सिद्ध करके अपने को सही सिद्ध करेंगे वो कहते हैं ना कि आदमी आजकल अपने दुख से दुखी नहीं दूसरे के सुख से दुखी है तो यह सुखी तब होंगे जब दूसरा दुखी

00:21:52:10 होगा। अरे आ जाओ ना भाई माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो आप आइए जाइन करिए चेहरे के साथ अगर आप हमें जानते हैं तो जय श्री राम जय श्री राम गुरुदेव जय श्री राम अच्छा एक बात और हां ये थोड़ा सा जो है सतलोक सतलोक का करते हैं तो सतलोक जो है इनहीं के ज्ञान गंगा में आवाज आ रही है मेरी जी जी आ रही है आवाज आ रही है हां तो सतलोक जो बोलते हैं ज्ञान गंगा में कि सबसे पहले जो लोक था वो अनामी लोक था उसके नीचे जो है बाद में बनाया बना जो लोग तो अगम लोक उसके नीचे अलख लोक और सतलोक चौथा लोक बनाया ठीक है और जो जो लोक बाद में बना है वो पहले नहीं था तो सनातन कैसे हो सनातन लोक वो नहीं है जो लोक बाद में बना इनहीं के कबीर सागर से और जो भी है ज्ञान गंगा से है तो जो लोग बाद में

00:23:07:13 बना है वो सनातन कहां से नित्य और देखिए कहते हैं हां नित बाद में बनाओ सनातन भी नहीं है सनातन था है और रहेगा परमानेंट तो ये सतलोक और में जाएंगे थे सतलोक के पैगंबर है वो तीन लोक ऊपर अभी ये लोग नहीं पहुंच पाएंगे इनहीं के कबीर सागर के अनुसार ठीक है और ये नाशवान लोक है और देखिए एक कहते हैं एक

00:23:46:03 यजुर्वेद करने तो सत्य क्या है? सत्य क्या है? सत्य या सत्य जो माना जाता है हां तो सत्य क्या है? सत विष्णु भगवान का गुण है। और ब्रह्मा जी का और तम शंकर जी का। ठीक है? तो सत भक्ति सत किसको यहां क्या सूचित कर? सत एक गुण है जो सूचित करता है इनको विष्णु भगवान। तो विष्णु सत साह तो मतलब विष्णु साहे मतलब परमात्मा विष्णु को परमात्मा सिद्ध कर रहा है।

00:24:22:26 जी बिल्कुल बिल्कुल वो ऐसा है ना ये सारी बातें हमारी उसमें आ सकती है। दीपक जी आपकी आवाज नहीं आ रही। कि आप यहां पर कबीर सागर आप देख आवाज नहीं आ रही है। गड़बड़ हो रहा है बीच में। चलिए वह आ गए हैं। थोड़ी सी अपनी चर्चा हम लोग जारी करते हैं। मैं यह कह रहा हूं भाई साहब आपको अपनी बात को सही सिद्ध करना है क्या? या आपको अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए मुझे गलत सिद्ध करना आवश्यक है।

00:25:02:09 यदि आप गलत सिद्ध हो जाएंगे तो स्वाभाविक बात है कि हम ऑटोमेटिक सही सिद्ध हो जाएंगे क्योंकि आपका उद्देश्य था कि संत रामपाल जी महाराज गलत है। भाई साहब किसी के गलत सिद्ध होने से किसी का सही सिद्ध होना सिद्ध होता है। कहां लिखा है ये? कहां का सिद्धांत है? लड़ रहा आपके पास आपके पास अपना ज्ञान है कि नहीं सिवाय दूसरे का ज्ञान गलत करने के अपना ज्ञान है आप भी तो वही कर रहे है ना अरे भाई तत्व ज्ञान ये है क्या कि दूसरा गलत कैसे है बस तत्व ज्ञान ये नहीं है कि ये सही कैसे

00:25:39:16 है तो क्या है तत्व ज्ञान तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या आप जिस ईश्वर को जो आप कह रहे थे सद ग्रंथ का वो ग्रंथ जो सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करे। ठीक है? अब आपने सर्वज्ञ का अर्थ बताया जो सब कुछ जानता है जिससे कुछ भी जानना शेष नहीं है। आपने सर्वव्यापी का मतलब ये बताया जो शक्ति के रूप में सर्वत्र व्याप्त है। जहां जिसका कि कहीं भी ना होना शेष नहीं है। है ना? तो फिर सर्वशक्तिमान का अर्थ आपने भी बताया कि जो सब कुछ कर सकता है। ऐसा कुछ नहीं जो वो नहीं कर सकता है। तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है? बिल्कुल ले सकता है। जब सर शक्तिमान है तो वो कुछ भी कर सकता है। ले भी सकता है नहीं भी ले सकता। ये ये आपके उसमें कहां लिखा है कि ले सकता

00:26:32:22 है रामपाल ने माना ये आपने पूछा कि वो ले सकता है या नहीं ले सकता हमने कहा इसका प्रमाण दिखाना पड़ेगा ना जब आपके रामपाल ने कहीं पर ये कहा हो क्योंकि हमें ये पता है कि वो ये कहता है कि माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता ईश्वर नहीं ले सकता वो दिखाने के लिए फिर विषयांतर होगा कि नहीं होगा विषयांतर कैसे होगा अपने गुरु अपने गुरु के विरोध में जा रहे हो तुम अपने को जिताने के लिए अपने को ही नहीं तुम अपने गुरु के विरोध में जा रहे हो नहीं गलत आप हर बात बिना कुछ बात के विरोध कैसे चले गए आपने हमसे पूछा कि वो ईश्वर सर्वशक्तिमान है आप गोपाल दास को मानने वाले हैं कि नहीं आप हमारी बात को सुनिए पहले हमारी बात को सुनिए आपने प्रश्न किया कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो मां के गर्भ में आ सकते हैं कि नहीं? मैंने कहा कि वो सर्वशक्तिमान वो आ भी सकते हैं नहीं भी आ सकते हैं। अब आप बोल रहे हैं दास जी का तत्व ज्ञान है या आपका अपना है?

00:27:42:16 आपने यह नहीं पूछा कि वो परमात्मा मां के गर्भ में आते हैं कि नहीं। आपने कहा कि आ सकते हैं कि नहीं सकते हैं? ये आपने प्रश्न किया है। आ सकते हैं और आते हैं दोनों में अंतर है। हम तो मैं आपसे वही पूछ रहा हूं। वो आ सकते हैं कि नहीं आ सकते? आ सकते हैं। हम लेकिन कहीं पर कबीर आपने कहीं पर माना है आपके जो गुरु है उन्होंने? आ सकते हैं। आ सकते हैं लेकिन आते नहीं है। आते नहीं है तो मैं पूछ ही नहीं रहा हूं। आते नहीं है तो मैं पूछ ही नहीं रहा हूं। आ सकते हैं कि नहीं? आ सकते हैं। तो ये कहीं पे मेंशन है कि वो गर्भ से भी जन्म ले सकता है। जी बोलिए दीपक शुक्ला एक चीज दिखा हां ये कबीर सागर में लिखा है कि जिन साहब संसार किया सो कितव न जन्म्या नार। ठीक है। जिसने संसार को कबीर सागर में लिखा है और फिर ज्ञान गंगा में भी है। वो उस टॉपिक को उसमें रखे हैं। तो कभी जो है नारी के गर्भ से गर्भ में नहीं आता नहीं जन्मता है वो तो ये कहते हैं आ सकता है।

00:28:53:01 तो भाई देखिए जब सर्वव्याप्त था तो आने में क्या दिक्कत है? एक मैं देखिए आप मेरी बात को समझ ले कि जैसे कि आपका कहना है कि क्योंकि उसने कहा है वह आता नहीं है इसलिए वो नहीं आएगा तो फिर बात ये हो जाती है कि वो अपने कहे हुए से मुकर सकता है कि नहीं [संगीत] चलो बोलो ये तो आपके मन की भावना है अपने से प्रश्न किया है क्या वो अपने कहे हुए से मुकर सकता है कि नहीं

00:29:30:24 परमात्मा कुछ भी कर सकते हैं। मां के गर्भ में आ भी सकते हैं। जब परमात्मा शास्त्रों में लिखा है कि परमात्मा सबके हृदय में विराजमान है। तो एक हाथ आगे भी भाई साहब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं क्या वो अपनी बात से मुकर सकते हैं कि नहीं? देखिए बार-बार विषयांतर करने से कोई फायदा नहीं है। आपने प्रश्न किया नहीं है। हम आपकी बात जो आप बात बोल रहे हैं आपके गुरु के विरोध में है। नहीं हमारे गुरु जी नेक्स्ट ले रहे हैं। आप पक्ष किसका ले रहे हैं? जब आपका गुरु कह रहा है कि परमात्मा जो है वो उससे नहीं आता। यह बात परमात्मा ने कही है। अब मैं कह रहा हूं परमात्मा अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं? नहीं। नहीं। तो यानी कि कुछ ऐसा है दुनिया में जो वो नहीं कर सकते। नहीं ऐसा कहां कहा हमने? अरे तुमने कहा ना नहीं वो कर सकते। तुमने कहा ना नहीं वो कर सकते। आपने कहा ना नहीं वो कर सकते। तुमने कहा ना नहीं वो कर सकते। मैं पूछ रहा हूं तुमने कहा ना नहीं कर सकते। मैं पूछ रहा हूं तुमने कहा ना नहीं वो कर सकते अभी कहा कि नहीं

00:30:34:19 पहला प्रश्न आपने किया देखिए भाई साहब आप जो है आप अगर पॉइंट पे रहिए प्लीज बहुत देर हो गई मुझ में मेरा गला बैठ चुका है मैं आपसे पूछ रहा हूं वो मुकर सकते हैं कि नहीं दोबारा बता दीजिए मुकर सकते हैं कि नहीं दोबारा बता दीजिए मुकर सकते हैं कि नहीं दोबारा बता दीजिए नहीं नहीं तो यानी यानी कि दुनिया में कुछ काम ऐसा है जो वो नहीं कर सकते। इससे कैसे ये सिद्ध हो गया कि वो नहीं कुछ कर सकते। देख रहे हो देख रहे हो? वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं?

00:31:15:15 इससे ये सिद्ध नहीं हो जाता है कि परमात्मा अपने कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं हो सकते। ये तो आपके मन के फालतू का उपज है। तत्व ज्ञान लेने बैठा हूं। आप मुझे बताइए परमात्मा को आप कह रहे हैं सर्वशक्तिमान आपने कहा सर्व का मतलब जो कोई भी कार्य ऐसा ना हो जो नहीं कर सकता अब मैं पूछ रहा हूं क्या वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकता है कि नहीं आप कह रहे हो नहीं मुकर सकता तो वो सर्वशक्तिमान नहीं हुआ ना सर्व का मतलब सर्व मत कहो उसे

00:31:54:08 सर्वशक्तिमान मैं दूसरा मैं दूसरे तरीके से इस बात को क्लियर कर लेता हूं। कबीर दास जी जिस रूप में वहां पर बैठे हैं उसी रूप में यहां पर आते हैं। थोड़ा सा अपने अपने रूप को वो उसका तेज कम करके। ये अलग प्रश्न हो गया। नहीं ये मैं अगर ये प्रश्न अगर रिलेट नहीं करेगा मैं पूरा यहां पर मैं नमन करने लगूंगा रामपाल जी को। आप मुझे केवल इसका जवाब दीजिए कि वह वहां से जब आते हैं तो आते हैं तो वह अपने तेज को कम करके आते हैं कि नहीं। वही बॉडी ले आते हैं कि नहीं?

00:32:32:20 जी आते हैं। जी। अच्छा तो जब वो आते हैं तो पहली बात तो एक ये हो गई कि जब वो आते हैं अपने शरीर के साथ यहां पर उसके प्रकाश को कम करके तो क्या वो अपने शरीर को बदल सकते हैं? यहां आने के बाद वो पहाड़ बन सकते हैं। वो पहाड़ बन सकते हैं? कुछ भी कर सकते हैं। कुछ भी कर सकते हैं। तो जब वो पहाड़ होते हैं और वो दाढ़ी वाले बाबा जी भी होते हैं। है ना? यानी कि जो उनका जो ये रूप है ये नित्य रूप नहीं है उनका। यानी तत्व से वो कुछ और

00:33:21:00 है। जिस रूप को वो बदल पा रहे हैं वो नित्य नहीं हुआ ना? शाश्वत नहीं हुआ ना? यानी कि तत्व से उनका रूप कुछ और है। चलिए आपने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक है। ठीक है? तो मैंने आपसे कहा था कि अ क्या कहते हैं कि जब बीमारी हो जाए और तब जो है विधि युक्त मांस खाने वाला जो होता है वो विधि युक्त मांस ना खाने वाला होता है तो वो नरक में जाता है। ऐसा मनुस्मृति में कहा गया है। आपने वहां पे खट से कहा था। आपने वहां पर खट से कहा था कि वहां पर बीमारी की बात नहीं हुई है। कहा था ना? जी। कहा था ना? हां। अब आपने एक बात कही है कि सर्व्यापक का मतलब है जो शक्ति के रूप में सब जगह व्याप्त हो। तो यह शक्ति की बात कहां हो रही है? जब ईश्वर को सर्वव्यापक कहा जा रहा है तो वहां शक्ति क्यों घुसेड़ रहे हो?

00:34:40:22 देखिए ईश्वर की बात हो रहा है हम और ईश्वर हम पहले ही बता दिए कि ग्रंथ में ईश्वर के बारे में लिखा हुआ है जो ईश्वर को प्राप्त कराता हो ऐसे सब ग्रंथों में लिखा हुआ है इसलिए जो है आपने ईश्वर की परिभाषा जो बताई है उसमें आपने तीन चीजें बोली है अनंत सामर्थवान सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ। अब मैं इसी पे बात कर रहा हूं कि आपने जब सर्वव्यापक को तोड़ा तो आपने कहा जो शक्ति के रूप में सब जगह व्याप्त हो। जबकि वहां पे सर्वव्यापक है। शक्ति के रूप में सर्वव्यापक नहीं है। सर्वव्यापक है जो जो स्वयं सर्वव्यापक है। कहां सर्वव्यापक है? कहां पर? आप क्या मानते हैं? आपका ईश्वर सर्व्यापक नहीं है।

00:35:33:08 हम नहीं बल्कि वेदों में क्या लिखा है उसको देखिए। फिर भाई साहब हम लोग हम लोग अभी यह तय कर रहे हैं कि कौन सा ग्रंथ मानना है और उसके लिए जांच कर रहे हैं कि क्या आपके द्वारा जिन ग्रंथों को मानने का दावा किया जाता है वो खोखला दावा है या वास्तविक है वो वो वास्तविक है तो वास्तविक है तो आपका कहना है कि जो ग्रंथ परमात्मा परमेश्वर सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ की बात करेंगे हम उनको धर्म ग्रंथ या सद ग्रंथ या वो पवित्र ग्रंथ कहते हैं। तो अभी मैं आपके ईश्वर की बात जानना चाह रहा हूं। क्या आप ईश्वर को कैसा मानते हैं? तो आपने बताया कि मैं उसको सर्व्यापक मानता हूं। सर्व्या सर्व शक्तिमान सर्वशक्तिमान का आपके पास उत्तर नहीं है। सर्वशक्तिमान का आपके पास उत्तर नहीं है। कैसे उत्तर नहीं है? क्यों? जब मैंने आपसे पूछा कि भाई अगर वो यहां पर आने के बाद अपने शरीर को बदल रहा है तो फिर उसका वो जो रूप है दाढ़ी वाला वो तो नित्य कैसे हुआ तो इसमें आप शांत हो गए। क्या उत्तर दिया आपने? नित्य है। वो शरीर को बदले फिर से उसी रूप में आ जाए वो समर्थ वान का मतलब ही हुआ तो कुछ भी हो सकता है। नित्य किसे कहते

00:36:48:08 हैं? नित्य किसे कहते हैं? सुनिए नित्य किसे कहते हैं? नित्य किसे कहते हैं? नित्य किसे कहते हैं? शाश्वत किसे कहते हैं? जिसका विनाश नहीं होता है वही शाश्वत है। उसी को नित्य कहते हैं। तो उनका जो रूप है जितनी देर वो पहाड़ बने हैं उनका विनाश हुआ ना? रूप में परिवर्तन हुआ। तत्व में परिवर्तन तो नहीं हुआ ना? तो मैं वही तो कह रहा हूं। यानी कि उनका वो जो रूप है वो शाश्वत रूप नहीं है। वो तत्व से शाश्वत है। वो जो रूप है वो शाश्वत नहीं है। क्योंकि जितनी देर जितनी देर सुनिए जितनी देर जितनी देर जितनी देर जितनी देर वो पहाड़ बने जितनी देर वो पहाड़ बने उतनी देर उनके वो जो रूप था दाढ़ी वाला उसका विनाश हुआ। हमारी बात को सुनिए पहले। हां परमात्मा जो जिस आपने कहा कि पुनीत नहीं है। मेरी बात समझ लीजिए सुनिए या तो परमात्मा जब आता है तो या सुनिए यदि वो जिस रूप में आया है यदि वो जिस रूप में आया है या तो वो शाश्वत रूप नहीं है और या फिर वो परमात्मा सर्वशक्तिमान नहीं है। दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकती। अगर वो सर्वशक्तिमान है, अगर वो सर्वशक्तिमान है तो अपने रूप को बदल

00:38:03:15 सकता है। अगर रूप को बदल सकता है तो उसका वो रूप शाश्वत नहीं है। आपने एक बात कही आपने एक बात कही कि परमात्मा अपनी कही हुई बात से मुकर सकता है। क्यों बोल रहे हैं? बोलना तो हमको था। हमने आपको स्पष्ट करना था। बोलिए बोलिए। जिस समय वो रूप को परिवर्तन करता है तो उसमें केवल रूप में परिवर्तन होता है कि तत्व में परिवर्तन होता है? हमने आपको यह नहीं कहा परिवर्तन होता है। वो मर गया। मैंने यही तो कहा यानी कि तत्व कुछ और है। रूप उसका वो फाइनल रूप नहीं है। मैंने भी तो यही कहा। फिर तुम जब मैं रूप की बात कर रहा हूं तो तुम तत्व पे क्यों आ रहे हो? मैं भी तो यही कह रहा हूं। आपने भी भाई साहब भाई साहब भाई साहब मैं भी तो यही भाई साहब एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट मैं वही बात मैं वही बात कह रहा हूं जो आप कह रहे हैं भाई साहब मैं वही बात कह रहा हूं जो आप कह रहे हैं तत्व से नहीं बदलता है मगर जो उसका रूप होता है वो बदलता है यानी कि आप कह रहे हो कि ये परम परमेश्वर है वो फाइनल रूप नहीं है भगवान का

00:39:21:13 जिस समय पहाड़ के रूप में एक मिनट रुकिए मेरा आवाज नहीं जा रहा है फिर आप तब तक बोलिए दीपक जी और जो गणेश दास जी ने पांच मिनट हां मैं ये बोल रहा हूं कि कबीर जी को जो कहते हैं जो है वो कमल पर प्रकट हुए थे। ऐसा नहीं है। ठीक है। आप यहां पर कबीर [प्रशंसा]

00:39:59:14 कबीर कहां पर है? इसमें इनका एक दोहा आपको पूरा मिलेगा साकी में। यह है रामानंद रहे जब स्वामी ध्यावत निश्चिन अंतर्यामी। तिनके ढंग विधवा एक नारी सेवा करे बो शरण धारी प्रभु ध्यान लगाई विधवा ती तिनके ढंग आए प्रभु कियो बंधन बिन दोसा प्रभु कह पुत्रवती धोसा तब अपने नाम बखाना यह दियो वरदाना स्वामी कहो निकस मुख आयो पुत्रवती हरित तोह ही बनायो है पुत्र कलंक न लागे तब तूत है हरि अनुरागी तब कर फुलका पर आयो कछ दिन में ताते सुत आयो ठीक है ये जो है आप कबीर मूल बीजक पढ़ेंगे पूरा आपको साखी कबीर जी का मिल जाएगा कबीर जी जो है विधवा से ही जो उत्पन्न हुए हैं ठीक है और वो जो अपना जो मनगढ़ंत बनाकर करते हैं कबीर मूल बीजक आप खरीद लीजिए उसमें जन्म साखी पढ़िए उनका पूरा लिखा हुआ है कबीर जी कैसे पैदा हुए प्रकट हुए हैं ठीक है और फिर कबीर जी जन्मते और मर मरते हैं आपको मैं दिखा दूं

00:41:13:15 देखिए पर है कबीर बीजक कबीर ज्ञान विजक शब्द 108 साखी एक आप जाकर के चेक कर लीजिएगा पूर्व जन्म अब हम बहली बहरी जलना पूर्व जन्म तबका मद कीना मतलब कबीर जी को आपकी बात समझ गया सुनिए ऐसा है ये जहां पर भी इनके विरोध में कोई बात होगी ना तो उसमें कहेंगे ये सद ग्रंथ नहीं है ये काल ने बोला है ये मिलावट हो गई है इसीलिए लिए तो मैं बेसिक्स क्लियर कर रहा हूं। बेसिक्स इसीलिए मैं क्लियर कर रहा हूं। इनके विरोध में बहुत सारी बातें हैं शास्त्रों में। मगर जहां पर भी विरोध आएगा तो ये कह देंगे काल ने बोला है। ये मिलावट है। ऋषियों का अपना मत है। समझ रहे हैं? तो फिर मैं इनको चैलेंज कर रहा हूं कि जब आप ये मानते हैं कि शास्त्रों में कुछ गड़बड़ भी है तो आप उन्हें सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो? जो और वो भी तब जब जिसमें बिल्कुल गड़बड़ नहीं है उसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो। तो ये ढोंग हुआ ना? आपके लिए सद ग्रंथ की केवल सच बोलने वाला ग्रंथ स ग्रंथ है। यह परिभाषा है। उसके बाद जो सच भी बोलता है, झूठ भी बोलता है उसकी परिभाषा भी उसको भी आप सद ग्रंथ कहते हैं। और असद ग्रंथ की परिभाषा तो है ही।

00:42:27:03 अच्छा एक एक बार एक आते हैं हां। एक बात और ये कहते हैं लोग कि कबीर या कवि दोनों एक ही है। तो ठीक है। जो कवि है वही कबीर है या कवि कवि है। हम बात 37 में ये जो भाई साहब आज आए हैं ये बढ़िया मतलब इनसे बहुत सारी हम लोग आज ही केवल बात नहीं करेंगे ये बात चलती रहेगी हो सकता है दो महीने तक चलती रहे थोड़े-थोड़े टुकड़ों में दोद घंटे बात कर लिया करेंगे हफ्ते में एक बार दो बार मगर यदि ये कोऑपरेट करें तो है ना जैसे अभी बिना बताए चले गए थे उसका कारण क्या था मुझे नहीं पता तो अब हम गणेश दास जी के पास वापस आते हैं गणेश दास जी एक तो बात ये है कि यदि ईश्वर अपना जो रूप बदल रहा है तो इसका मतलब तत्व से उसका वास्तविक रूप जो बदलता ना हो शाश्वत रूप वो कुछ और है। फिर हम ये चैलेंज नहीं कर सकते कि नहीं यही रूप है उसका वास्तविक क्योंकि वो रूप तो बदल रहा है। है ना? दूसरी बात ये है कि हमने ये कहा कि ईश्वर अपनी कही हुई बातों से मुकर सकता है। झूठ बोल सकता है। आपने ये मान लिया। वैसे मैं आपको एक बात बताऊं कि यह कुछ बातों में आप अपने गुरु के विरोध में चले जाते हैं। कहीं-कहीं पर हो सकता है आपने उनको सारा

00:43:42:07 कुछ नहीं समझा हो। मगर जैसे आपने ये मान लिया कि वो अपने माता के गर्भ में आ सकता है। तो माता के घर में आने वाली बात आपके गुरुदेव ने कहीं पर भी स्वीकार नहीं की है। आकने वाली बात इसलिए मैंने आपसे प्रमाण पूछा था। मगर अभी आपने मान लिया कि आ सकता है। अभी आपने मान लिया कि आ सकता है। तो फिर उसके बाद जब हमने ये कहा उसके बाद जब हमने ये कहा कि क्या वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकता है तो आपने कहा कि हां मुकर सकता है। ठीक है ठीक है। मुकर सकता है कि नहीं दोबारा बता दीजिए। हमको थोड़ा बोलने दीजिए। बोलिए। हमारे गुरु जी ने कहा है कि परमात्मा मां के गर्भ में नहीं आते और आपने प्रश्न किया कि वो मां के गर्भ में आ सकते हैं कि नहीं तो हमने कहा कि अभी मेरा प्रश्न अभी मेरा प्रश्न ये है भाई साहब कि क्या वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं जैसे आपने कहा कि वो नहीं आते नहीं आते यानी कि यानी कि कोई प्रमाण है आपके पास जिसके कारण आप ऐसा कह रहे हैं और वो प्रमाण जाहिर सी बात है वो प्रमाण जाहिर सी बात है वो ईश्वर की वाणी है ठीक है। तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं? ये

00:44:57:25 तो उनका मर्जी है। वो क्या करेंगे नहीं करेंगे? मैं आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब। ये हम फैसला तो नहीं कर सकते हैं कि ईश्वर क्या कर सकते हैं? मुकर सकते हैं कि नहीं तो उसका मर्जी। आपने कहा ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो सर्व में बाधा लग जाएगी। अगर आप यह नहीं कहेंगे कि हां वो ये भी कर सकता है। हां मैंने कहा है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है। सर्वज्ञ है। परंतु मैं नहीं हूं जो हम ईश्वर के बारे में बता सकते हैं कि वो ऐसा कर सकते हैं। मैं आपसे ज्ञानी आप अभी तत्व ज्ञानी की शरण में नहीं गए हैं। हां बिल्कुल गए हैं। हां तो बताइए ईश्वर अपनी बात से मुकर सकता है कि नहीं? मैंने तो कहा कि उसका मर्जी वो कुछ भी कर सकते हैं। मैंने कहा वो सर्व्यापी काम कर सकता है कि नहीं?

00:45:49:25 बिल्कुल नहीं कर सकते हैं। बोलो क्या बोला? क्या बोला? परमात्मा सर्वमान है कुछ भी कर सकते हैं। मैंने यही भाई साहब मैंने कहा आप इसको क्लियर कर दीजिए कि वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं। आप पाखंडी है कि नहीं? आप जा सकते हैं कि [हंसी] नहीं? आ जाइए भाई। [संगीत] हम्म [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 46:26 · 01 Jun 2025

क्या रामपाल का ईश्वर सर्वशक्तिमान है ? #Rampalexpose #RampaljiMaharaj #satlokashram

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B · Live रामपाल का ज्ञान है या अज्ञान #santrampaljimaharaj #तत्त्वदर्शीसन्त
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