⬜ Not used yet · 00:00:02:28 – 00:00:03:03 (0:00)
00:00:02:28 हां
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→ Used in: B · Live सहानुभूति आड़ में छिपता भागवतानन्द at 40:58 ↗
00:00:03:03 तो बताओ ना उस डॉक्टर का नाम बताओ। मैं भी जानना चाहता हूं कि जोधपुर इस जन्म में कब गया? यह देखो मेरा यज्ञ प्रवीत और वह रही भगवती कामाक्ष का शिखर वह तो कैमरा नहीं घूमेगा और वह भगवान सूर्य आकाश जो हम सापियों के पूर्वज हैं और साक्षी शिवश मैं अपने पूर्व के समान भगवान सूर्य जो सभी शिवा साक्षी है युद्ध हाथ में रख दे इसकी आवश्यकता नहीं है विधि का सम कह रहा हूं कि मेरे अंदर कभी मेरी जानकारी किसी प्रकार का ऐसा यौन रोग हां जो जो मैं जोधपुर में जाकर किसी डॉक्टर से या कहीं भी जोधपुर क्या पूरे भारत में कहीं भी किसी भी डॉक्टर के पास जाकर मैंने कोई इलाज कराया हो असत्य है ये मैंने कभी नहीं कराया और जोधपुर तो मैं आज तक गया नहीं कभी नहीं गया इतना खुलकर इससे अधिक मैं नहीं कह सकता
⬜ Not used yet · 00:00:50:00 – 00:32:28:00 (31:38)
00:00:50:00 हूं आगे आते हैं तो सभी को जय श्री राम जैसा कि आप सभी जानते हैं इन दिनों एक विवाद काफी चला भागवतानंद और हमारे बीच में और तरह-तरह की छींटाकसी आरोप प्रत्यारोप हुए कई सारी ऐसी भागवतानंद के द्वारा जानकारियां प्रस्तुत की गई है जो कि जिनका कोई आधार नहीं था और गुरुदेव भगवान का जगुरु शंकराचार्य जी का उपहास अपमानजनक तरीके से प्रवृत्तियां कसना इत्यादि आप लोग देख ही सकते हैं तो ये जो पूरा विवाद है इस सब में एक नाम भी बाहर निकल कर के आया जिसमें कि भागवतानंद ने एक नाम लिया था जब हमने यह बताया था कि भागवतानंद जोधपुर से अपने यौन रोग का जैसा कि उन्होंने कहा था कि पूरी पीठ के पर अमुक अमुक जो है चीजों में लिप्त है आपत्तिजनक तो हमने पहले कहा था कि इसका आधार क्या है? क्या प्रमाण है? ये सब बातें हमने पूछी थी कि ठोस चीजें क्या है? तो यह सब बातें बताने में वो सदैव मौन धारण किया उन्होंने कि हमारे पास कोई ठोस प्रमाण नहीं है। बस हमसे लोग कहते हैं। अब दूसरी बात यह आती है
00:02:05:01 कि हमने भी उनसे यह पूछा था कि आपके भी बारे में कुछ चीजें ऐसी सुनाई दे रही है जिसमें कि ऐसा पता चला है कि आप इस प्रकार के यौन रोग से गुप्त रोग से पीड़ित हैं और आप अपने आप अपनी चिकित्सा जो है जो जोधपुर के कोई डॉक्टर हैं आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं उन उनके यहां से उसका आप स्वास्थ्य उपचार ले रहे हैं। तो यह जो इस प्रकार का मतलब हमने जब ये बताया था कि आप भी इस अह भगवतानंद भी इस प्रकार के यौन रोग से पीड़ित हैं। जो यौन रोग होना किसी अह स्वयं को आचार्य कहने वाले के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। आपत्तिजनक है। तब इन्होंने जब हमने ये सब इनके बारे में अह प्रश्न किया तो क्या ये जो सुनी सुनाई बातें हैं जो हमें सुनाई दे रहा है। जैसे कि आपने सुनी सुनाई बातों के आधार पर कि लोग कहते हैं इसलिए मान लिया या इस प्रकार का दुष्प्रचार करने लगे पूरी पीठ के बारे में परिकरों के बारे में तो हमने इनसे प्रश्न किया क्या इस तरह से सुनी सुनाई बातों के आधार पे हम भी ये मान ले क्या कि आपका इस प्रकार का गुप्त रोग का उपचार चल रहा है यो रोग का उपचार चल रहा है तो इस संबंध में इन्होंने एक नाम लिया अपने सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म से इन्होंने बताया कि भाई
00:03:20:16 हमारा अमुक प्रमुख राजस्थान के जो डॉक्टर हैं डॉक्टर हेमंत पालीवाल उनके यहां से खांसी जुकाम का किसी समय इंटरनेट के माध्यम से इलाज हमने उनसे लिया था। तो आज हम उन्हीं महाशय के पास हैं। डॉक्टर साहब के पास आज आए हैं हम डॉक्टर हेमंत पासवाल जी। जय श्री राम। जय श्री राम। तो इस संबंध में आज हम चर्चा करने वाले हैं कि यह सारा जो विवाद है इससे जुड़ी हुई कौन सी चीजें हैं जो जिसमें कि हेमंत पारवाल जी कुछ तथ्यों पर प्रकाश डाल सकते हैं। किस प्रकार से तो उस पर ही हम चर्चा करने वाले हैं। आज तो सबसे पहले तो मैं आपको आभार प्रकट करता हूं कि आपने जो है हमें समय दिया। आपका स्वागत है जी।
00:04:12:22 अ एक पर्ची सोशल मीडिया के माध्यम से प्रस्तुत की गई है जिसमें कि ये बताया गया कि हमने खांसी जुकाम का उपचार लिया था हेमंत पालीवाल जी के यहां से भगवत आनंद के द्वारा जी क्या वो पर्ची आपके यहां की है? हां जी हां जी मेरे क्लीनिक की पर्ची है और ये उपचार मेरे द्वारा दिया गया था और ये ऑनलाइन परामर्श के अंतर्गत था। अच्छा अच्छा जी अच्छा एक चीज और है डॉक्टर साहब क्या आप केवल ये जो सामान्य रोग होते हैं खांसी जुकाम बुखार क्या आप केवल इनका ही उपचार करते हैं या जो विशेष गंभीर गुप्त यौन रोग भी होते हैं जैसे हस्तमैथुन की लत है तो उससे कैसे छुटकारा पाया जाए तो क्या इस प्रकार के उपचार भी आप करते हैं केवल ये सामान्य खांसी जुकाम बुका इसमें ही सीमित है देखिए आयुर्वेद में आयुर्वेद को अष्टांग आयुर्वेद के रूप में वर्णित किया गया है। काय बाल ग्रह वृद्धांग शल्य दृष्टा जरा तो जो आप इसे बता रहे हैं वो वृष चिकित्सा वाजीकरण चिकित्सा के अंतर्गत आती है चीजें तो उसका उपचार भी किया जाता है और ऐसे जो रोगी आते हैं अस्थन आदि कुटे के ये मनोरोगों के अंतर्गत भी आते हैं जी और ये ऐसे जो लोग हैं ये
00:05:27:25 राज्यमा के अंतर्गत भी आते हैं तो सभी तरह के चिकित्सा क्योंकि हमने पूरे हेतु लिंग औषद ज्ञानम तो हेतु लिंग और औषध जब हमने पूरा पढ़ाया तो हम सभी तरह के रोगों के उपचार में प्रैक्टिस करते हैं और सभी तरह के रोगी भी हमारे पास आते हैं। तो काय बाल काय मतलब जनरल मेडिसिन बाल मतलब बाल बालकों का उपचार ग्रह आदि रोगों का भी आयुर्वेद में वर्णन है। इसी तरह से वाजीकरण का भी वर्णन है और इस तरह के पेशेंट आते भी हैं और उनके उपचार भी होते हैं। तो ये लगभग सभी वैद्य करते हैं इस तरह के मतलब और मैं भी करता ही हूं। अच्छा मतलब यौन रोग का उपचार भी आप करते हैं। से छुटकारा या अन्य जो गुप्त रोगों जी अच्छा एक चीज डॉक्टर साहब मुझे थोड़ा सा असहज लग रही थी तो मैं आपसे पूछ लेता हूं जी कि दूरदराज से इंटरनेट के माध्यम से जी ये जो गुप्त रोग हैं यौन रोग हैं जिनको व्यक्ति समाज में नहीं बताना चाहता है या अपने पड़ोस में अगर कोई डॉक्टर है तो उससे जाकर के परामर्श लेने में हिचकिचाता भी है जी जी तो इस संबंध में या फिर कोई ऐसी गंभीर बीमारी जो कि उससे छुटकारा नहीं प्राप्त हो पा रहा है तो वो बहुत ज्यादा दूरी पर भी कोई स्थित है चिकित्सक और वो प्रभावशाली है तो उससे वो रोग अपने
00:06:42:28 उपचार कराने के लिए जाता है है ना उससे संपर्क साध भले ही वो अमेरिका में बैठा हो हां कहीं भी रहता है तो इवन एब्रॉयड के पेशेंट आते ही हैं हमारे पास एनआरए भी कई लोग आते हैं। हां तो मैं यह इसमें यही पूछना चाह रहा था कि एक चीज़ समझ में नहीं आ रही कि केवल खांसी जुकाम के लिए भागवतानंद ने आपको संपर्क किया जबकि वो पूर्वांचल भारत में रहता है और आप बिल्कुल दूसरे छोर पश्चिमी भारत के हैं। जोधपुर में हम लोग बैठे हैं। तो इतनी दूर से संपर्क करना केवल खांसी जुकाम के लिए ये थोड़ा सा मतलब जी से ऐसा है कि बहुत पुराना परिचय है। अच्छा बहुत पुराने समय से वो हमको जानते हैं। हम उनको जानते हैं। तो संपर्क उन्होंने किया होगा। जी तो चिकित्सा भी उनको दी। अच्छा जी। अच्छा इसमें एक चीज और है कि ये चीज भी संभावना व्यक्त है कि जिस समय का ये बात है जब आपसे उन्होंने चिकित्सा ली उस समय कोरोना था। व्यक्ति ज्यादा बाहर निकल ही नहीं रहा था। ऑनलाइन उस समय तो ऑनलाइन माध्यमों से काफी ज्यादा चिकित्सा कार्य हुआ और उस समय मोस्टली पेशेंट ऑनलाइन माध्यम से ही आते थे और मेरे नंबर भी पर्याप्त फैले हुए थे लोगों के बीच में। काफी लोगों को पता था। अच्छा। कई कई सेलिब्रिटी ने अपने स्टेटस में भी मेरे पुलिस पैड को डाला था। अच्छा उसी दौरान हां कमलेश तिवारी जी की वाइफ जो है उन्होंने भी डाला था अपने स्टेटस
00:07:58:12 से जो कमलेश तिवारी जी जो थे ना हिंदू महासभा वाले उनकी पत्नी किरण लखनऊ ना जी जी जी हां उनकी हत्या कर दी गई जी उनकी पत्नी ने भी स्टेटस लगाया था क्योंकि मैंने उस समय परामर्श निशुल्क कर दिया था सबका। अच्छा तो उन्होंने अपने स्टेटस पे डाला था कि किसी को भी चिकित्सा चाहिए क्योंकि उनको कई लोगों ने बताया भी कि चिकित्सा सफलतापूक चल रही है। लोगों को आराम आया होगा तो उनके पास फीडबैक गया तो उन्होंने डाला था। अच्छा उस दौरान भागवतानंद जी के भी बारे में कोई कॉल आई थी मेरे पास। अच्छा और मैंने ये परामर्श लिखा था। अच्छा अच्छा जी। चलिए आगे बढ़ने से पहले कुछ समष्टि के दृष्टिकोण से। ये जो आजकल जो हस्तमैथुन की जो लत है जी ये समाज में बहुत बढ़ रही है। जी इसका मतलब ये इसका कारण और इसका ये कितनी खतरनाक हो सकती है ये इसके इसके बारे में अस्तमैथुन तो अपने आप में बहुत भारी बीमारी है हम क्योंकि यह एक अप्राकृतिक मैथुन की पूर्ति का तरीका है तो इससे भारी बीमारी तो परस्त्री गमन भी नहीं है क्योंकि कम से कम प्राकृतिक तो प्रक्रिया है। जी जी जी हालांकि हम समर्सन नहीं करते हैं। जी पर हस्तुन तो भयंकर अपराध है एक तरह से जी तो यह तो मनोरोग के अंतर्गत भी आता है। हस्ताथुन
00:09:13:13 तो एक तरह का मनोरोग ही है। और जो तीन चार साल के बच्चों के रेप कर रहे हैं तो वो भी एक तरह का मनोरोग है। ये भी एक तरह का मनोरोग है। तो दूसरी बात ये है कि इस तरह के कुटे वाले लोग आते हैं हमारे पास बहुत रेंडमली। उनकी चिकित्सा के प्रयास भी करते हैं और ज्यादातर इन लोगों में छुड़ा सकने की तो उनके मनो इच्छाओं पर ही निर्भर करता है। हम बल वृश्य औषधियां देते हैं ताकि उनका बल रिकवर हो जाए कैसे करके। अच्छा तो मैं इसका कारण क्या है डॉक्टर साहब? क्यों बढ़ रहा है आजकल समाज में? कारण ये है कि गलत लोगों की संगत में रहना या फिर कोई क्षय जैसे रोग उत्पन्न होना। जैसे हम राजक्षमा देखते हैं चरक चिकित्सा स्थान में तो उसमें लिखा है स्त्री मध्य अति अति इच्छा होना स्त्री मध्य लोलुपता होना स्त्री मध्य मास आदि की लुलुपता होना तो जब स्त्री नहीं मिलती है तो अन्य कुटे में लोग जाते हैं। अच्छा तो ये किसी के पूर्व रोग का भी एक लक्षण हो सकता है। मनोरोग का भी एक लक्षण हो सकता है। इवन हस्तमैथुन से भी मनोरोग हो सकता है और मनोरोगी भी हस्तमैथुन कर सकता है। अच्छा जी ऐसे लक्षण शास्त्र में एक दूसरे से रिलेट करते हैं। तो राजक्ष्मा को हम मॉडर्न एरा में ट्यूबरक्लोसिस की दृष्टि से देख सकते हैं।
00:10:28:16 जब जब हम तुलनात्मक अध्ययन करते हैं मॉडर्न साइंस का और आयुर्वेद का तो इसके रेफरेंस में ट्यूबरक्लोसिस को मॉडर्न में देखा जाता है। अच्छा तो इसके भी दो भेद है। अनुलोम छ प्रतिलोम छ अनुलोम छय मतलब आहार विहार ठीक से नहीं होना। उससे रस रक्त मास मेद अस्थि मज्जा शुक्र धातुएं शुष्क हो जाती है। व्यक्ति कृष्का काय हो जाता है। अब आते हैं दूसरे तरह के लोग जो प्रतिलोम क्षय होते हैं। प्रतिलोम क्षय मतलब हस्तमैथुन कह दो एक बार स्त्री गमन कह दो अति स्त्री गमन कह दो जिसमें शुक्र धातु का क्षय करके पूर्ववर्ती धातुओं का भी क्षय हो जाता है। तो ऐसे कई केस आते हैं जिनको राज्मा हुआ ही इस कारणों से है। कई ऐसे भी केस आते हैं कि राजक्ष मास से मध्य मास इत्री की अधिक लोलुपता होती है और वो हस्त करते हैं और उनमें ये दोष बढ़ जाते हैं। मनोरोग की वजह से वो हुआ या उसकी वजह से हां ये वाइस वर्षा चलता है और अब क्या है कि आजकल मॉडर्न विचारक जो भी है एलोपैथी वाले बोल देते हैं कि ये एक सामान्य प्रक्रिया जबकि ये सामान्य प्रक्रिया है नहीं क्योंकि सामान्य प्रक्रिया होती है तो धरती के सभी लोग करते हैं। अब वो ऐसे भी उदाहरण देते हैं कि अधिकतर युवा करते हैं। तो अधिकतर युवा करते हैं। यह भी एक गलत तथ्य है। अधिकतर युवा नहीं करते हैं पर इसको जनरल दिखाने
00:11:43:27 के लिए इसको लोगों को इसके यूज टू दिखाने के लिए या लोगों में गिल्ट के भाव नष्ट करने के लिए हो सकता है राइट इंटेंशन भी हो उनका इसलिए बोलता है बोलते हैं कि गिल्ट से बाहर निकले ये एक स्वाभाविक प्रक्रिया है इस तरह से उनको स्वाभाविक बताया जबकि है नहीं स्वाभाविक यह मनोविकृति ही है एक तरह से अच्छा जी इसमें एक चीज मैंने जैसे आपने उत्तर उत्तर दे दिया है। उसको थोड़ा सा विस्तृत तरीके से बताएंगे कि परस्त्री गमन ज्यादा खतरनाक हो सकता है या फिर हस्तमनाथन। इसको थोड़ा सा लोकाचार की दृष्टि से देखें तो परिस्थ से भारी कलंक कुछ नहीं है। किंतु हम क्योंकि हमारा मुख्य प्रतिपाद्य विषय आयुर्वेद है। चिकित्सा हमारा मुख्य प्रतिपाद्य विषय है। तो हम अभी लोकाचार की बात नहीं करते हैं। धर्म की दृष्टि से तो परस्त्री भ्रमण ज्यादा है। ज्यादा दोष पर हम चिकित्सा शास्त्र की दृष्टि से बात करें तो हस्तमैसन अधिक दोष कारक है। अच्छा क्योंकि ये एक मनोरोग है। पहली बात दूसरी बात ये व्यक्ति कभी भी परफॉर्म कर सकता है। इस घटना इस कृत्य को कभी भी परफॉर्म कर सकता है। उसके लिए थोड़ा सा ही पॉजिटिव एनवायरमेंट हो एकांत वास हो वो परफॉर्म कर जाएगा। इसलिए ये हानिकारक भी अधिक है। तीसरा है इसमें मनोविकृतियां होती है। व्यक्ति अन्य लोगों का विचार करके
00:12:59:06 ऐसे करते हैं। हमारे पास केस आते हैं। हमने फला का विचार करके ऐसा किया। कोई बोलता फला का विचार तो ये और भी घातक है और अधिक घातक दूसरा स्वास्थ्य की दृष्टि से जो घातक है तीसरा शरीर में अकेला धातु क्षय ही नहीं होता है मनोविकारों की वृद्धि भी इससे होती है क्योंकि क्या होता है कि क्षयजन्य जो मनोविकार होते हैं जैसे हम बोलते हैं वातज उन्माद अब क्या है कि ऐसे रोगी उन्माद को हम आज के टाइम में साइकोसिटी बोल देते हैं तो वातज उन्माद धातु क्षय होने से देह में वायु वृद्धि होती है जिसके कारण वात उन्नद उत्पन्न होता है। फिर व्यक्ति अनर्गल प्रलाप करता है। अनर्गल बातें करता है। ऐसे रात्रि में ऐसे स्वप्न देखता है कि तालाब सूख गए हो आंधी तूफान आ रहे हो और ऐसी अच्छा अ संदर्भ युक्त बिना संदर्भ युक्त रहस्यमई बातें व्यक्ति करने लगता है। अच्छा हां रहस्यमय जैसे कोई कभी किसी को बोलेगा कि मुझे फला साधना है। कभी क्या बोलेगा? मुझे फला स्वप्न आया है। कभी क्या बोलेगा कि मुझे फला दृष्टि है। शक्ति से कोई बातचीत चल रही है। हां वो ऐसे स्वयं को दिखाने का क्योंकि देखो ऐसे व्यक्ति तो क्षय होते हैं। उसमें क्या है कि रस रक्त
00:14:14:07 मांस मेद अस्थि मज्जा शुक्र सातों धातुओं का क्षय होने लगता है। अनुलोम प्रतिलोम जो भी विधि है तो व्यक्ति खुद को आकर्षक दिखाने के लिए खुद को श्रेष्ठ दिखाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करता है। ताकि लोग उसको पॉजिटिव वे में उसको एक सात्विक वे में देखें क्योंकि व्यक्ति को खुद अपने शरीर से घृणा होने लगती है। तो वो अपने को श्रेष्ठ दिखाने के प्रयास ऐसे करता है जो सफल होते भी नहीं है ज्यादातर। बड़ा कनेक्ट हो गया हूं। सफल उस व्यक्ति से नहीं कनेक्ट आप हो रहे हैं। ये एक देखो इसका क्या है कि जैसे उसका जीवन कितना मतलब कष्टदाई मतलब एक आत्मग्लानियों से भरा हुआ। तो फिर वो अपने श्रेष्ठ स्वयं अगर ये संदर्भ कहीं पे फिट बैठता है तो ये अलग बात है। मैं जो बता रहा हूं वो शास्त्र के हिसाब से बता रहा हूं। जी तो वो व्यक्ति तो ग्लानि में जी रहा होता है। उसको लगता है कि मेरे मांस रक्त मे आदि सूख गए हैं। तो मैं कैसे खुद को आकर्षक दिखाऊं तो या तो वो श्रृंगार करेगा या चित्र विचित्र वस्त्र पहनेगा या चित्र विचित्र बातें करेगा या चित्र विचित्र स्वप्न के बारे में बातें करेगा या चित्र विचित्र कोई आध्यात्मिक धरातल की बातें करेगा। जबकि वो दूसरे धरातल पे कुछ और ही होता है। चित्र विचित्र व्यवहार भी मिलेगा। जी। जैसे मॉडर्न में इसको अलग-अलग नाम दे देते हैं। फला सिंड्रोम, फला सिंड्रोम बोल देते हैं। जबकि
00:15:29:10 ये सब चीजें आयुर्वेद से अच्छे से डिकोड होती है। अच्छे से आयुर्वेद से समझा जा सकता है इन विषयों को। और मैं ये मानता हूं कि आयुर्वेद ज्यादा अच्छे से एक्सप्लेन करता है चीजों को। हम हालांकि किसी पैथी का अपमान मान की बात नहीं है। तुलना की बात नहीं है। पर आयुर्वेद हमारे शास्त्र जो है इन चीजों को ठीक से पढ़े हैं। जैसे नृत्य श्रृंगार और अलंकार वस्त्र आदि को धारण करना। अपने को बेहतर दिखाना अपने को कोई सिद्ध पुरुष दिखाना ताकि लोग उसके रस, रक्त, मांस, मेद आदि के सूखने के ऊपर विचार ना करें। हम ऐसा वो संबंधित व्यक्ति सोचता है। अच्छा। अच्छा इसमें एक डॉक्टर साहब आपने अभी बात कही तो कि जैसे स्त्री का ना मिलना भी एक कारण होता है। जैसे हां स्त्री अगर अभी देखा जा रहा है सामान्यत जैसे विवाह भी हो जा रहा है। जी जी उसके उपरांत भी लोगों में वो जो लालसा है जी हस्तमैथुन की जो बनी हुई है और उसमें क्या हो रहा है कि एक एक क्योंकि मैं व्यायाम प्रशिक्षक हूं तो से मिला था जी उसने आके एक अनोखी बात बताई कि वो इतना ज्यादा वो जो पोर्न इंडस्ट्री है जो चलचित्र बनाती है जी जी उसने जो है ऐसेसे
00:16:44:28 चलचित्र देखने का आदि हो गया कि अब वो वही लालसा जो उसने उसमें काल्पनिक दुनिया में देखा, वही लालसा वह अपने वास्तविक जीवन में करने लगा। आप परफ़ॉर्म करने प्रयास करते हैं। वह अब क्या है? वह संतुष्ट नहीं हो पा रहा है। अह अपने साथी से, जीवन संगनी से वह संतुष्ट नहीं हो पाता है। अब उसको तो ये मतलब कि अब इस हद तक हो रहा है। तो, क्या इसका कारण क्या इसको पोर्न दृष्टि को ही माना जाए? जो चल देखने से मनोविकार होते हैं। सामान्य जो भोग की क्रिया है संभोग की क्रिया है उससे व्यक्ति को संतुष्टि नहीं हो रही तो यहां तक लाके खड़ा करने वाला कौन आयुर्वेद में आपने जो विषय छेड़ा है थोड़ा गंभीर विषय है और थोड़ा लोक में पता नहीं इसकी एक्सेप्टेंस कितनी होगी। जी सुश संहिता के सारी स्थान में नपुंसक के भेद बताए हुए हैं। अच्छा अब नपुंसकता छ से भी हो सकती है। छ में मैंने दो विधियां बताई है। अनुलोम और प्रतिलोम नपुंसक के जहां भेद बताए हुए हैं वहां एक ईर्षक नपुंसक की बातें आती है। जो दूसरे के पोम को परफॉर्म करते हुए देख के पो में प्रत होता है। तो ये भी एक मनोविकार है। अच्छा हां बिल्कुल मनोविकार है। और ऐसे लोग जो पोर्न देख के और वैसा ही
00:18:00:02 कृत करने के लिए परफॉर्म करते हैं तो वह भी एक ईर्षित नपुंसक की श्रेणी में आते हैं। स्वस्थ व्यक्ति ऐसा क्यों करेगा? है ना? उसको उसमें आने के लिए किसी ट्रिगर की जरूरत नहीं है। सामग्री की जरूरत नहीं है। ट्रिगर वहां वो पोर्न देख के ट्रिगर हो रहा है। इसका मतलब वो ईर्षक है। मतलब इसका शास्त्र में प्रॉपर ससुर संहिता शारीर स्थान इसका रेफरेंस है। देखा जा सकता है ठीक से। और जो ये डिमांड करना आपने कि वैसा ही परफॉर्म यहां पर हो मतलब अगर जो वहां पर जो काल्पनिक विकृतियां फटसी जो बनाई जाती है तो वो फेंटसी कोई और अपने साथी से संतुष्ट नहीं हो पा रहा है ये ये विकृतियां मनोरोग आदि है और संतुष्ट होगा भी कैसे क्योंकि हम अन्य शास्त्र की बात करते हैं आयुर्वेद से आगे जाए तो हम बोलते हैं वीर भोगिया वसुंधरा जब कोई व्यक्ति अपने पौरुष आदि बल रस रत्न मास मेद अस्थि मज्जा शुक्र आदि जो धातुएं हैं जो ओ नष्ट कर चुका है भले ही किसी भी कारणों से वो अपने शखिया को भी ठीक से भोग नहीं पाता है। शकिया को भी ठीक से अपनी पत्नी को भी ठीक से उसके साथ वो आनंद नहीं पा पाता है तो वो फिर जाता है डिप्रेशन में और फिर वो भिन्न-भिन्न फेंटसीज में घुसता है हम तो ये भी एक मनोरोगी है। अच्छा जी। अब मैं एक ठोस सवाल करने जा रहा हूं। थोड़ा सा
00:19:15:06 गंभीर हो सकता है जी कि अब जिस विवाद से रिलेट होते हुए आज हम यहां राजस्थान जोधपुर भी आ गए। जी जी क्या भागवतानंद ने कभी आपसे हस्तमैथुन इत्यादि का उपचार लिया है या प्रयास किया है? देखिए ये बहुत रहस्यमय क्वेश्चन है। तो जो एक पहले आपने पूछा उसमें तो आप स्क्रीनशॉट ही लेके आ गए कि ये भागवत आनंद ने ऐसे ऐसी कोई पोस्ट डाली है। तो मैं आपको क्या नकारू बाकी इस विषयों में हम किसी पेशेंट की आइडेंटिटी अनवील नहीं करते हैं। उजागर नहीं करते हैं। तो इस विषय में जानकारी के तो वही है कि संदर्भ जो है वो देखे जाए, लक्षण देखे जाए, उसी रोगी को पूछा जाए। यही एक तरीका है। तो मतलब हम कम से कम अपने पेशेंट की आइडेंटिटी अनवील करते नहीं है। तो मतलब इसका क्यों ऐसा क्या सिद्धांत मतलब आपने ये मेडिकल एथिक्स की बात है। अच्छा ये एथिक्स की बात है कि हम क्यों किसी को मैंने अपने किसी सोशल प्लेटफार्म पे कभी नहीं लिखा कि मैंने भागवतानंद का उपचार किया। जी। अब भागवतानंद खुद ने अपने प्लेटफार्म पे लिखा है तो उसका तो मैं कुछ नहीं कर सकता। आपको इतना दूर आना पड़ा। जी जी। ठीक है। नहीं लिखता तो आप नहीं आते शायद। नहीं उसने गुप्त रोग का उपचार नहीं खांसी जुकाम के संबंध में। जो चीजें नहीं हम बताना चाहते हैं वो नहीं बताते हैं हम और अब जो चीज उन्होंने अनवील कर दी वो तो आपके घोषित है तो इस विषय में
00:20:30:07 आप बेहतर होगा भावनंद से पूछिए अच्छा ठीक है मैं इस पे ज्यादा नहीं बात करती हूं मैं एक ये चीज पूछूंगा कि इसी को हस्तमैथुन है की है जी जी या ये ये जो मनोरोग माना गया है आयुर्वेद के अनुसार जी ये है इस बात की पुष्टि फिर किस प्रकार से हो सकती है ये दो तरीके हैं एक तो कोई एक्सपर्ट हो जो इस तरह के केसेस में डील करते हो वो लक्षणों से देख ले वह लक्षण आदि से अच्छा और बातचीत से पता लग जाता है या फिर वह व्यक्ति स्वयं एक्सेप्ट कर ले अच्छा या तो जिसके बारे में आप बात कर रहे हैं अच्छा जो भी कोई किसी के बारे में बात करे या तो वो स्वयं एक्सेप्ट करे या फिर कोई एक्सपर्ट ही कोई बोले जैसे आयुर्वेद है तो आयुर्वेद में नाड़ी आदि परीक्षण होते हैं अच्छा लक्षण आदि देखते हैं एलोपैथी में भी अन्य तरीके होते जी मतलब या तो रोगी से ही पूछेंगे या फिर आप जैसा कोई एक्सपर्ट है वो वो लक्षण देख के बता सकता है। हां संभावना व्यक्त कर सकते हैं। जी जी जी अच्छा इसमें एक चीज़ दबा आएगी कि ये मुख्य कौन से लक्षण होंगे जिससे कि हम मतलब जिससे कोई वो तो जैसे कौन से लक्षण आपको बताया गया है कि जैसे अभी राजक्षमा का चला प्रसंग तो उसमें जो चीजें वर्णित हुई अच्छा जैसा आपने बताया कि वो मतलब
00:21:45:15 शरीर में धातु निकल जाने के हां अनुलोम छ प्रतिलोम छ पोषण ठीक से नहीं लेने से होने वाला क्षय या फिर पोषण ठीक से लिया है पर वो शुक्र क्षय कर रहा है भिन्न-भिन्न विधियों से तो पूर्ववर्ती धातुओं का क्षय हो जाता है। या फिर बीज दोष माता-पिता की विकृति से भी ऐसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं। माता-पिता के बीज दोष बीज में दोष होने से उत्पन्न होने वाली संतान भी फिर क्षय हो सकती है। फिर भी कोई सामान्य लक्षण सामने से देखने में क्या दिख सकता है? जैसे क्रिस का दिखेगा शरीर का रुखा-सखा दिखेगा। अति वाताल होगा। अति चित्र विचित्र बातें चित्र विचित्र श्रृंगार आदि व्यक्ति करता होगा। अच्छा जी ताकि उनके जो रस रक्त मांस आदि जो शुष्क है वो सो नहीं वो लोगों को दिखे नहीं वो हाइड करने की कोशिश करता है जैसे मैंने बताया कि उनकी जो दुर्बलता है वो अपने वीक पॉइंट को छुपाने का प्रयास करेगा श्रृंगार करेगा सुंदर वस्त्र पहनने का प्रयास करेगा अलग-अलग ऐसी चीजें जो ओवर उसको पुअर ग्लमराइज खुद को करेगा ताकि जो चीजें छुपानी है वो छुप सके अच्छा जी अब आगे बढ़ेंगे तो इसमें इसका उसका मुख्य क्या उपचार हो सकता है? औषधि क्या हो सकती है? और क्या ध्यान देने योग्य बातें हो सकती हैं? चिकित्सा तो इसमें जो छय धातु है जो
00:23:00:19 क्षित धातु है उनकी पुष्टि उन लोगों के कुटे से दूर करना स्त्री प्रसंग मध्य मास आदि जो ये लक्षण प्रकट हो रहे हैं उनसे दूर करना और ठीक से चिकित्सा करना छ हुई धातुओं को ठीक से सही करना और धातुएं छ ना हो इसके प्रयास करना उनके बल की रक्षा करना पोषक तर्पक भोजन देना और पाचन को ठीक करना अग्नियां जठराग्नि आदि जो अग्नियां है धातग्नि आदि जो अग्नि है महा भूत आदमी आदि जो अग्नियां है वो ठीक रहे रोगी की तो चिकित्सा आद कार्य होते हैं भिन्नभिन्न प्रक्रिया इसमें प्रोसीजर फॉलो होते हैं रस औषधि दी जाती है काष्ट औषधि दी जाती है पंचकर्मा आदि प्रोसेस किए जाते हैं कुछ औषधि के नाम भी आप बताएंगे जो औषधि के नाम तो इसमें खूब है जैसे मृगा रस देते हैं शीतोपलादी चूर्ण देते हैं और अश्वगंधाद घतम शीतोपलादी चूर्ण भी इसमें दिया जाता शीतोपलादी चूर्ण का जो आप रेफरेंस देखेंगे चरक चिकित्सा स्थान में ये आपकी की क्योंकि वो जो खांसी जुकाम वाली पर्ची दिखाई उसमें भी मेंशन है शीतोप्लादी हां तो शीतोपलादी जो है वो स्वास कास में वैद्य लोग देते हैं जबकि जो इसका मुख्य टेक्स्ट है वो राज्य अक्ष्मा में ही है क्षय रोग में ही है जो चरक चिकित्सा में आप देख सकते हैं सर्वत्र उपलब्ध है अच्छा तो इसका जो मेन टेक्स्ट है वो चरक चिकित्सा
00:24:15:20 स्थान है अब प्रवृत्ति आचार्यों ने भिन्न-भिन्न जगह दे दिया पर हम रेफरेंस मानते हैं आचार्य चरक को अच्छा जी जी ये ये तो आपने बता ही दिया कि क्या ये मनोरोग भी है और वो भी है या इससे भी मनोरोग हो सकता है। साइकोसोमेटिक डिसीज कह सकते हैं। साइकोसिटी भी शामिल है और शरीर के लक्षण भी शामिल है। अच्छा जी तो इस हस्तमैथुन का मनोरोग पर क्या प्रभाव पड़ेगा? अगर हस्तमैथुन से मनोग जैसे कोई मनोरोगी है वो अधिक हस्तमैथुन परफॉर्म करता है तो उसमें वायु की वृद्धि होगी। वायु की वृद्धि होने से वापस मनोरोगों की और वृद्धि होगी। तो यह एक ऐसा कुआ है, ऐसा दलदल है जिसमें जितने पैर मारोगे उतना डूबोगे। अच्छा तो जो अधिक करने वाला व्यक्ति होगा वो अधिक मनोरोगी भी होगा। अच्छा उसमें चिंता भय विचित्र व्यवहार और दिव्य बातें कभी भूतज कभी प्रेतज पता नहीं क्या-क्या चीजें मिलने लगती है धीरे-धीरे। अच्छा जी। तो क्या ये कहा जा सकता है कि बाइपोलर नाम की बीमारी भी हस्तमैथुन से हो सकती है या फिर बाइपोलर से बाइपोलरिटी का मतलब क्या है? बाइपोलरिटी का मतलब क्या है कि कभी तो दानव है कभी देवता है। अच्छा कभी तो कैसी
00:25:30:24 बातें करेगा? कभी तो वो सज्जन है, कभी वो दुर्जन है। कभी वो देवताओं का उपासक है, कभी वो प्रेतों का उपासक है। कभी वो सही वृतांत वर्णित करेगा, कभी वो मन मन भावने स्वभाव वृतांत वर्णित करेगा। बाईपोलरिटी का मतलब यही है ना कि दो पोलर के बीच में लटकता रहता है आदमी। अच्छा तो ये वातस मनोरोग के ही तो अंतर्गत आता है। अच्छा जी मतलब ऐसा हो सकता है कि कभी वो शास्त्रोक्त देवी मां की पूजा करे कभी भगवान की क्योंकि इनमें चित्र विविचित्र व्यवहार मिलता है। मैं एक मैं ये कह रहा हूं कि ऐसा हो सकता है कि कभी वो देवी मां की पूजा करे। शास्त्रों में वर्णित कर सकते हैं। कालिया जी ने इत्यादि की पूजा भी कर सकते हैं। कर सकते हैं। अच्छा जी। इसमें हमेशा ड्यूल पर्सनालिटी जैसे बिहेवियर रहेंगे। अब इसको क्या मतलब हम बोले तो और जैसे मॉडर्न मेडिसिन में इसको अलग-अलग नाम देते हैं। बायपोलर डिसऑर्डर वो भी आयुर्वेद के हिसाब से उन्माद है। जी। मल्टीपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर वो भी आयुर्वेद के हिसाब से उन्माद है। ऐसे भिन्नभिन्न नाम दिए जाते हैं। पर आयुर्वेद के हिसाब से वो उन्माद के अंतर्गत आ जाते हैं। उन्माद के पांच भेद लिखे हुए हैं। सबज पितज कपज प्रेतज और देवज जी जी भूतो्माद
00:26:46:09 भी एक वर्णन है। देव देवोद भी एक वर्णन है। तो ये कोई अधिक दिव्य बातें करना कभी भूत प्रेत की बातें करना। ये उन्माद के ही तो लक्षण है सारे। अच्छा जी जी बहुत प्रकार डाला आपने डॉक्टर साहब। एक फिर क्या है कि ऐसे जो रोगी होते हैं ये मतलब दोष रहित वस्तुओं में दोष देखना और दोष युक्त वस्तुओं में उनको दिव्यता दिखती है जैसे अतत्वाभिनिवेश महागद महागद अतत्वाभिनिवेश तत्व में अत्व देखना अतत्व में तत्व देखना ऐसे जिसमें लक्षण हो तो ऐसे महागद जिनको उत्पन्न हो जाते हैं ये असाध्य रोगों में से जो महा महागद जितने भी महा गद मतलब बड़े-बड़े रोग जो भी है उनमें सबसे श्रेष्ठ है ये रोग कौन सा अतत्वाभिनिवेश अच्छा अतत्व में तत्व देखना तत्व में अतत्व देखना इससे बड़ा कोई रोग नहीं है अच्छा तो ऐसे लक्षण मनोरोग में आता है ईर्ष्या करना और तत्व में अतत्व देखना ईर्ष्या मा्य भाव आदि भी तो उन्माद के लक्षण है अच्छा मातर्य भाव होना ईर्ष्या होना हम उन्माद के तो लक्षण है ये पूरी तरह सही हो सकता है कभी ये जो मनोरग इस तरीके से हो गया जीर्ण राजक्ष्मा मुश्किल
00:28:01:22 से सही होता है और जो वंशानुगत राजक्ष्मा होता है जैसे दुर्बल शुक्र और आरों के सहयोग से जो संतान उत्पन्न होती है वो भी मुश्किल से सही होता है साध्य राजक्ष्मा वो होते हैं जो तत्काल में हुए हो और रोगी वैद्य की शरण में तत्काल में पहुंच जाए ठीक से उपचार ले उनके स्वजन आदि भी इसमें तत्पर रहे हो तो वो ठीक हो सकता है अब वो उन्माद की अवस्था से आगे चला जाए तो वो वो राजमा भी दुसाध्य है या असाध्य कह सकते हैं। अच्छा जी जी और ऐसे व्यक्ति आत्मघात आदि के भी कदम उठा ले तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। अच्छा जी मतलब जब आत्मघाती हो सकता है तो सामने वाले के लिए घातक भी हो सकता है। घातक व्यक्ति है वो ये जो बीमारी मतलब चल रही है आजकल समाज को विकृत भी कर रही है। जी जी इसको आपके अनुसार क्या बैन होना चाहिए? प्रतिबंध लग जाना चाहिए। पोर्न आदि तो बैन होने चाहिए औरुन आदि तो मैंने आपको पहले ही बताया ना कि असतमथुन ज्यादा खतरनाक क्यों है? जी क्योंकि व्यक्ति एकांत वास तो करता ही करता है। वो कभी भी परफॉर्म कर लेगा इसलिए तो ज्यादा खतरनाक है। बैन करेगा कोई कैसे? जैसे पर स्त्री गमन के लिए परस्त्री भी हो वैसा
00:29:16:26 प्लेस भी मिले। कई चीजें होती है। जी किंतु हस्तमैथुन के लिए क्या चाहिए? कभी परफॉर्म कर सकते हैं। इसमें तो मन का नियंत्रण होना चाहिए। इंसान के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। जी जी। इसलिए हम लोग इसको ज्यादा खतरनाक मानते हैं। जी। अकॉर्डिंग टू मेडिकल साइंस। अनथिकल तो पर स्त्री का अधिक है पर देखें तो व्यक्ति को किससे हानि अधिक हो रही है जी जैसे वो व्यसनी जो लोग होते हैं कोई मध्यपान करे कोई स्मोकिंग करे तो स्मोकिंग वाला ज्यादा खतरनाक है कभी भी कहीं भी परफॉर्म कर लेगा पर मध्यपी को पूरा एनवायरमेंट चाहिए जी समझ गए आप बात तो हम तरतमा अभ्यास से यह विचार कर सकते हैं कि अस्तम वाला चिकित्सा शास्त्र की दृष्टि से अधिक बुरा रोगी है जी क्योंकि हम ना तो कंट्रोल कर सकते हैं ना समझा सकते हैं वो एकांत उसको मिलेगा ही कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं मिलेगा ही जी जी तो डॉक्टर साहब जो लोग इस बात में पढ़ चुके हैं जी जी उनके लिए क्या प्रायश्चित हो सकता है क्या उनका कैसे आप करेंगे मान प्रायश्चित तो कैसे कि वो व्यक्ति पूर्वाचार्य जितने भी हैं श्रेष्ठ आचार्य उनकी शरण में जाए उनसे पहले अपने मनोवह विचार जो भी है उनको ठीक
00:30:32:02 करें मन में ग्लानी हो उनको और ग्लानी के बाद में ठीक करने का संकल्प ले ग्लानी का जो शत्रु फिर वो जो एलोपैथी जो फैला रही है कि ग्लानी हो ही ना वो तो एलोपैथी शत्रुता निभा रही है उनका उनका एलोपैथी तो निभा ही रही है ग्लानी अगर उपचार है तो ग्लानी वो खत्म कर रही है जब तक ग्लानी नहीं होगी जैसे कोई व्यक्ति कोई हत्या कर देता है जब उसको ग्लानी नहीं है अगर तो आप उससे क्या प्रायश्चित करवाओगे क्या किसी को जेल में बंद रखना चिकित्सा है क्या उसकी उसको ग्लानि तो होनी चाहिए ना कि मैंने ये गलत काम किया कुकृत का कुकृत्य को नहीं करने का संकल्प मन में तो होना ही चाहिए बिल्कुल अन्यथा सजा या कोई दंड आदि से इन चीजों को नियंत्रण करना कठिन काम है जी बहुत-बहुत आपको साधुवाद आपने बहुत सारी चीजों पर प्रकाश डाला जी और आपके थोड़े से कहे हुए में हमें काफी बहुत कुछ प्राप्त हुआ है जी और अगर सामाजिक हित के हिसाब से भी देख तो आपने बहुत जरूरी आज ये विषय लोगों तक पहुंचना चाहिए। किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य ना करके ये पूरे समाज की जिम्मेदारी है कि पूरे समाज में ये चीजें ठीक से नियंत्रित नियमित हो। जी जी इस तरह के कुटेव ना हो। इस तरह के छय आदि के लक्षण किसी
00:31:47:03 के घर में किसी को मिले तो समय रहते समझे। समय रहते उनकी चिकित्सा कराए। जी जी और निकटवर्ती अच्छे वैद्यों से मिले और शास्त्र की शरण में जाए। आचार्यों की शरण में जाए। आयुर्वेद की शरण में जाए। जी क्योंकि जो लोग आपको प्रोत्साहित करें कि यह कोई रोग नहीं है वो लोग आपको दूर नहीं कर पाएंगे। जी इस तरह के दुर्भावों से बिल्कुल जी चलिए आपका बहुत-बहुत आभार साहब आपने समय दिया और दर्शकों को भी मैं मुझे लगता है काफी कुछ तथ्य प्राप्त हुए होंगे और जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम [संगीत]
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जोधपुर वाले डॉक्टर ने खोले हस्तमैथुन से जुड़े राज @Swami Nigrahacharya (Shri Bhagavatananda Guru) @Dark Secrets By Swami Nigrahacharya
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