⬜ Not used yet · 00:00:01:22 – 00:22:18:13 (22:17)
00:00:01:22 तो भाई मनोरंजन के लिए एक नया समाचार प्राप्त हुआ है जो हमने सोचा कि हम आप सबको भी अवगत करा दे जिससे भगवतानंद ने हमारे बीच जो प्रत्यक्ष चर्चा है हो सकती है उससे दूरी बनाने का एक बहाना सोच लिया है। एक नहीं मैं कहूंगा कुछ बहाने सोच लिए हैं। अच्छा सबसे पहले इस विषय में आगे बढ़ने से पहले मैं जो उसके अंधभक्त हैं जो आंखों पर पट्टी बांध करके दीवार में सर मारा करते हैं। मैं उनसे यह पूछना चाहूंगा कि हमारा अभी तक जो एक कमजोर पक्ष दिखाई देता था इस पूरी उस पूरे विवाद में आह्वान का एक ही पक्ष कमजोर दिखाई दे रहा था कि भाई आह्वान जो है उसको जब चर्चा का प्रस्ताव दिया गया उनके हिसाब से अंधभक्तों के हिसाब से सौहार्दपूर्ण चर्चा है ना वो बात और है कि उसने अपने लाइव वीडियोस में कहा कि हम तुम्हारा करियर खा जाते अगर तुम हमें लाइव लेते मगर अंधभक्तों के अनुसार यह एक सौहार्दपूर्ण चर्चा का प्रस्ताव था। तो इसको स्वीकार ना करके हमने हमारे पक्ष को कमजोर कर दिया। हमारे पक्ष को ऐसे देखा जाने
00:01:17:01 लगा कि भाई इसका पक्ष कमजोर है इसीलिए चर्चा नहीं करना चाहता है। तो अब प्रश्न उन अंध भक्तों से यह बनता है कि अब जब तुम्हारा भगवतानंद तुम्हारा आका यह कह रहा है कि मैं अमुक अमुक कारणों से चर्चा नहीं कर सकता। नहीं करना चाहता या चर्चा से दूरी बना रहा है। तो इस समय तुम अपने आका के पक्ष को कमजोर क्यों नहीं समझ रहे हो? अगर तुम्हारे आका के पास चर्चा से दूर रहने का कोई भी कारण हो सकता है तो किसी और के पास नहीं हो सकता। यह तुम्हारा न्याय है। यह तुम्हारी निष्पक्षता है। धर्म परायणता है। है ना? ऐसे ही खोखले दावों को बाहर करने के लिए ही समाज के सामने लाने के लिए ही हम जैसों का जन्म हुआ है। है ना? अपने जाकर के शीशे में देखो अपने आप को कि तुम कितने बड़े निष्पक्ष व्यक्ति हो। तुम कितने बड़े न्यायप्रिय व्यक्ति हो। और जो प्रबुद्ध जन है जो इस विवाद को न्यूट्रल होकर के देखेंगे। दोनों तरफ की बातों को पूर्वाग्रह से ग्रसित हुए बिना देखेंगे वो समझ जाएंगे। वह यह जानते हैं कि हमने पहले भी मर्यादा को लांगने वालों से चर्चा करने
00:02:32:07 के लिए मना किया है। पहले भी हमने कई ऐसे प्रस्ताव ठुकराए हैं जिसमें कि जो सामने वाला व्यक्ति था वह अमर्यादित आचरण कर चुका था और अपने अमर्यादित आचरण के लिए उसने किसी भी प्रकार का पश्चाताप प्रकट नहीं किया था। जैसे कि जो आर्य समाजी है जो वह अलंकार समाज का जो अनऑफिशियल गुंडा है अलंकार समाज के अनऑफिशियल गुंडे से संबंधित संस्थान के द्वारा भी हमसे संपर्क किया गया तो हमने उसको भी कहा यदि ऋषि उवाच तुमसे सद्ध है तो पहले उसके कुकृत्यों के लिए क्षमा मांगो उसके बाद तुम्हारे साथ चर्चा होगी हमने इस के भी कई लोगों को चर्चा करने के लिए मना किया। यदि उन्होंने अभद्रा आचरण किया था। जिसका एक प्रमाण है वह लड़का राधा कृष्ण दास पहले वह चर्चा के लिए आया उसके बाद उसने जाकर के जो विप्लव मचाया वितंडा किया तो हमने उसके साथ भी चर्चा को मना कर दिया। हालांकि सभी ये लोग जानते हैं कि उसके साथ चर्चा करने में हमारा पक्ष कितना मजबूत है। कम से कम उतने अंश में तो जानते हैं ना सभी लोग।
00:03:47:10 हमने मोहित गौर से भी चर्चा करने को मना कर दिया। अब तुम वहां भी कह दो कि हमारा पक्ष कमजोर था। भव्य राधा कृष्ण दास के सामने भी हमारा पक्ष कमजोर था। ऋषिवाच के सामने भी हमारा पक्ष कमजोर था। हम तो जो प्रबुद्ध लोग हैं वो ये समझते हैं कि हमने किन कारणों से मना किया है। वो प्रस्ताव जो है स्वीकार नहीं किया था। उसके लिए हमने कहा था। हमने अपने कारण बताए थे कि सर्वप्रथम गुरु विरोध, गुरु निंदा और गुरु का अपहास होने के कारण भगवतानंद के द्वारा हमारा उसके निकट आने की स्थिति में विवाद होना सुनिश्चित है। तो क्योंकि हम विवाद समाज को नहीं दिखाना चाहते। उसके और अपने बीच का दो वर्णाश्रमियों के बीच का। दो ऐसे लोगों का जो वेद में प्रमाण्य बुद्धि रखते हैं। ऐसे लोगों का विवाद हम नहीं दिखाना चाहते थे। इसलिए हमने उससे दूर रहना ही स्वीकार किया। हमने यह भी कारण बताया था कि जो विषय चर्चा के लिए चुना गया है वो विषय किसी के व्यक्तिगत जीवन के बारे में चर्चा होनी है। इस बात को लेकर के कि वह दोषी है कि नहीं। वह
00:05:02:19 दोषी है कि नहीं यह तो बाद में तय होगा। मगर उसके निजी जीवन को लेकर के जो कटाक्ष किए जाएंगे जो वाद विवाद होगा उसके कारण ही वह व्यक्ति दोषी नहीं भी हुआ तो भी जन सामान जन सामान्य के समक्ष उपहास का चर्चा का गसिप्स का पात्र बन जाएगा। मगर ये सारे कारण उन अंध भक्तों को दिखाई नहीं देंगे। उनको नहीं नजर आएंगे ये सारे कारण। हां, भगवतानंद के कारण समझ में आएंगे, तो भगवतानंद ने कारण क्या-क्या बताए हैं, उस पर बात करते हैं। ने स्वयं को अप्रामाणिक शुद्ध होने से बचाने के लिए एक हमारे से होने वाली चर्चा से दूर रहने हेतु खोखले बहाने ढूंढ लिए हैं। उन पर बात करते हैं कि उसके जो बहाने हैं, वह कितने उनके मूल में क्या है। मीमांसा करते हैं उनका वो। भगवतानंद क्या कहते हैं? पोस्टमार्टम करते हैं उसके बहानों का। तो उसका कहना है कि कौन है शिवश नारायण द्विवेदी? क्या वह शंकराचार्य पुरी मठ का जो है कोई अधिकृत वक्ता है अधिवक्ता है क्या वो रिदमम कपूर है या उसका वक्ता है या उसका वो सगा संबंधी है हां
00:06:18:00 यदि शंकराचार्य हमसे चर्चा करने में रुचि रखते हैं तो हम अवश्य जो है उनसे चर्चा कर लेंगे और अगर वो एक वहां का शिष्य है एक फॉलोवर मात्र है तो ऐसे कई फॉलोअर्स हैं जो इस विवाद में उसके पक्ष में है। वो बात और है कि उसने कभी यह नहीं बताया कि वह कौन से अज्ञात लोग हैं जो उसके पक्ष में है। कहां खड़े हैं, कहां दिखाई दे रहे हैं। कहां टिमटिमा रहे हैं। है ना? ऐसे लोग उसके पक्ष में हैं जो धर्म की रक्षा के लिए अपनी कायरता का चोला भी नहीं छोड़ सकते। शायद ऐसे ही लोग उसके पक्ष में है ना। ऐसे गुरु द्रोही हैं जिनको गुरुदेव ने स्वयं नकार दिया है कि तुम यहां से चले जाओ। जिनको यह तक नहीं दिखाई दे रहा है कि जो व्यक्ति इस बात का दावा कर रहा है कि मैं शंकर मठ का शोधन कर रहा हूं। मैं पूरी पीठ को बचाना चाहता हूं और पूरी पीठ को बचाने के साथ-साथ वो वहां के जो जगतगुरु शंकराचार्य उनमें भी दोष निकाल रहा है। और इन लोगों को पट्टी क्या पढ़ाई गई है जो ऐसे गुरु द्रोही हैं संभवत जो इसके साथ खड़े हैं। वो लोग उन लोगों का एक वक्तव्य आता है कि भाई हम शास्त्र के साथ
00:07:33:08 हैं। शास्त्र के साथ अरे भाई शास्त्र तुमको गुरु के बिना मिल गए। परंपरा प्राप्त गुरु से ही तो शास्त्र मिलना स्वीकार करोगे कि आर्य समाजी बन जाओगे। अच्छा दूसरी बात कि हम शास्त्र के साथ हैं तो चलो तुम्हारा एक बार को हालांकि वह भी गलत है। गुरु का विरोध किया जा रहा है शास्त्रों का नाम लेकर के तुम उसके साथ खड़े हो बिना विवेचना किए कि उसका पक्ष सही है कि नहीं है। मगर क्योंकि उसने शास्त्रों के आधार पर बात की है तो इसलिए तुम उसके पक्ष में खड़े हो और वहां पर तुम यह स्वीकार कर रहे हो कि वहां पर गुरु विरोध नहीं हो रहा है। मगर यदि यह मान भी लिया जाए कि तुम शास्त्रों के जहां पे शास्त्रों का उसने हवाला दिया है वहां पर उसके साथ खड़े हो। मगर वो साथ ही साथ और भी तो ऐसी चीजें कर रहा है जिसमें कि गुरुदेव का उपहास उड़ रहा है तुम्हारे। तुम्हारे गुरु का उपहास उड़ाया जा रहा है। सा वर्ष में हिंदू राष्ट्र होना था। इस बात को लेकर के निंदा उपहास किया गया कि नहीं? उसके द्वारा मधुमक्खी मधुमक्खियों की जो है वो सेना है। हरिहर के तेज से स्थापित होते हैं। इन सब वक्तव्यों को लेकर के उपहास पूर्ण तरीके से प्रस्तुत कर रहा है वो निर्लज व्यक्ति और तुम उसके साथ खड़े हुए हो यह कहते हुए कि हम तो शास्त्र के साथ हैं। इसमें कौन सा शास्त्रीय पक्ष चल रहा
00:08:48:15 है? बात करें चमत्कारों की तो उसकी लाल बत्ती नहीं देखी क्या तुमने मिस्टर इंडिया वाली? जो वह इधर उधर के ऐसे प्रमाण जो हमारे लिए प्रमाण नहीं है उनके उनके आधार पर एक कहानी बनता है कथा बनाता है मलिकराज की उसकी यहां पर नहीं देखी तुमने चमत्कारों से प्रभावित होने वाली बातें वहां पर तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है तुम उसके साथ खड़े हो और फिर भी यह कहोगे हम गुरु भक्त है हम तो शास्त्र के साथ है इसलिए हम गुरु की हम गुरु विरोधी नहीं है तो भले ही भगवतानंद ये दावा करता है कि भैया पूरी पीठ के ही कई समर्थक और अनुयाई जो है पूरी पीठ के परिकों में दोष देख रहे हैं और मेरे समर्थन में है। मगर वास्तविकता में वह कौन है जो भगवतानंद का समर्थन कर रहे हैं। वो गुरु विरोधी हैं। वो पूरी पीठ के विरोधी है। वो शंकर परंपरा के विरोधी है। क्योंकि भगवतानंद के अनुसार तो चारों पीठों में कोई भी ऐसा नहीं है जो निर्दोष हो। सब में उसने दोष ढूंढ रखा है। चारों पीठ के जो चारों पीठ के जो संरक्षक हैं जो आचार्य हैं जो प्रतिनिधि हैं उनमें उसने दोष ढूंढ रखा है। तो कौन सी पीठ ऐसी है जो निर्दोष रह गई जो कहीं ना कहीं अशास्त्रीय नहीं हुई और जब अशास्त्रीयता आ गई
00:10:03:27 चारों पीठों में तो शंकर मठ का ज्ञान विज्ञान विशुद्ध रूप से कहां से प्राप्त होगा तो इस हिसाब से अप्रत्यक्ष रूप से तो उन्होंने उसने जो है शंकर परंपरा को ही लुप्त करने की तैयारी कर दी। मगर फिर भी आंख के अंधे अकल के अंधे तथाकथित गुरु भक्त उसका समर्थन करते हुए भी स्वयं को सोचते हैं कि हम बहुत बड़े गुरु भक्त हैं। तो इसका यह जो पक्ष है कि भैया शंकर शंकराचार्य को या पूरी पीठ को फॉलो करने वाले कई लोग हैं जो इस विवाद में उसके समर्थन में खड़े हैं। तो इसलिए शिवश नारायण द्विवेदी उस योग्य नहीं है कि उससे चर्चा की जाए। तो पहली बात यहां पर मैं यह पूछूंगा कि भाई यदि कोई व्यक्ति इस विवाद में पूरी पीठ को फॉलो करने वाला ही कोई व्यक्ति कोई शिष्य ही गुरुदेव से जो दीक्षित है वो मान भी लिया जाए कि तुम्हारे सब पक्ष में खड़ा हुआ है तो इससे मेरा पक्ष गलत है अनुचित है या मैं अयोग्य सिद्ध हो जाता हूं यह कौन सा सिद्धांत है सनातन का इसको
00:11:19:03 प्रकट इसको जो है स्पष्ट करने में असमर्थ हैं तुम्हारे सो कॉल्ड आचार्य भगवत आनंद स्वोषित अब बात करते हैं कि इस व्यक्ति ने कुछ और भी जो शुरुआत में जो तर्क दिए कहा कि कौन है वो अधिवक्ता है वो तो इसकी वो गुरुदेव ने एक बात कही थी कि सबसे घटिया वक्ता वो होता है जिसकी बात उसी के वक्तव्य से कटती है। अब ये व्यक्ति आज ये कह रहा है कि शिवश नारायण द्विवेदी कौन है? वो क्या वो उसका अधिवक्ता है? क्या वो मठ का वो है? प्रमाणिक कोई वक्ता या परिकर कौन है वो? और जबकि कुछ दिन पहले इसी ने मुझे प्रस्ताव दिया था। अगर इन कारणों से जो कारण इसने बताए हैं कि मैं अमुक अमुक में से कोई नहीं हूं। शिवश नारायण द्विवेदी अमुक अमुक में से कोई नहीं है तो उससे वो चर्चा करने के योग्य किस प्रकार हुआ? तो जब जब इसने मुझे स्वयं चर्चा का प्रस्ताव दिया था तब भी मैं इनमें से कोई नहीं था ना। क्यों दिया था? क्योंकि तब लगता था कि शिवश नारायण द्विवेदी हंबल वे में चल रहा है। केवल मुझको आक्रमण करना है। ज्यादा से ज्यादा अगर बहुत ज्यादा स्थितियां खराब हुई तो यही होंगी ना कि अपनी रक्षा कर लेगा।
00:12:34:09 इस सब से मेरे ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा? रक्षा कर ली भाई उसने बस। आक्रमण तो कर नहीं रहा है तो इसलिए जाएंगे और राम राम श्याम श्याम करके चले आएंगे। अगर उसका पक्ष सिद्ध हो भी गया तो ये भगवत आनंद के अनुसार यही सोचा था। मगर अब इसको पता चल गया है कि किसी की उदारता को कायरता नहीं समझना चाहिए। यह व्यक्ति प्रतिकार भी करेगा। यह व्यक्ति मुझसे पूछेगा कि तुम्हारी परंपरा क्या है? कितनी ऑथेंटिक है? यदि आज तुम्हें अपनी परंपरा के बारे में बात करने में दिक्कत हो रही है तो आज तुम अपने आप को निग्रचार्य क्यों कह रहे हो? उस दिन कहना जिस दिन बात करने में समर्थ हो जाओ। आज तुम्हें नहीं पता है क्या तुम्हारी परंपरा क्या है? यह पूछेगा। मेरे पास कोई उत्तर नहीं होगा। अभी तो मैं अपनी कपोल कल्पित कहानियां बनाऊंगा पहले। वो निग्रह प्रवेशिका में फिर लिख के जनता को मूर्ख बनाने के लिए दूंगा या नहीं दूंगा। भविष्य की बात है तो अभी मैं क्यों जाऊं परंपरा बात करने जब मुझे खुद नहीं पता है कि मेरी परंपरा कैसी है क्या है
00:13:44:13 हम तो ये पूछेगा इस कारण से अब चर्चा में जाना मेरे लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है पूरा का पूरा निग्रह संप्रदाय ही कहीं लुप्तता से और गहन पाताल लोक वाली लुप्तता में ना चला जाए तो यह सारे इनके कुतर्क थे अब एक पक्ष और आता है इसकी ओर से कि हां शंकराचार्य अगर हमें हमसे चर्चा करने में रुचि दिखाते हैं तो हम अवश्य चर्चा करेंगे। क्यों भाई? तुम यह अपेक्षा कैसे कर रहे हो शंकराचार्य से कि वो तुमसे चर्चा करने में रुचि दिखाएं। क्या वो यह प्रश्न नहीं सोच सकते? जैसे तुम किसी के लिए प्रश्न सोच रहे हो शिवश नारायण द्विवेदी के लिए सोच रहे हो कि कौन है शिवश नारायण द्विवेदी? तो शंकराचार्य नहीं सोच सकते कि कौन है भगवत आनंद? किस परंपरा का प्रमाणिक आचार है? आचार है भी कि नहीं है कि किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त है वो भी तो यह सोच सकते हैं। बाइपोलर नाम की बीमारी का एक लक्षण यह भी है कि व्यक्ति को ये ऐसा लगने लगता है कि कोई असाधारण शक्ति उससे बात कर रही है। उसको ये लगने लगता है कि उसको सबको कंट्रोल करना है। ये सब चीजें उसके सिम्टम्स हो सकते हैं।
00:14:59:13 वो भी तो ये सब चीजें सोच सकते हैं। और यदि अगर तुम उनसे अपेक्षा इसलिए रख रहे हो क्योंकि तुमने उनका विरोध किया है अमुक अमुक शास्त्र शास्त्रों के संदर्भ को लेकर या अमुक अमुक उनके वक्तव्यों का उपहास उड़ाया है। अगर तुम यह सोच कर चर्चा की अपेक्षा कर रहे हो चर्चा में रुचि रखने की अपेक्षा कर रहे हो शंकराचार्य से तो तुमसे अपेक्षा क्यों नहीं की जा सकती कि तुम्हारा किसी ने अगर विरोध किया हो तो तुम मुझसे चर्चा करने में रुचि दिखाओ। तुम्हारे ही सिद्धांत के आधार पर मुझसे चर्चा में रुचि दिखाना तुम्हारे अनुसार उचित है। क्योंकि शंकराचार्य का तुम्हारे साथ चर्चा करने में रुचि दिखाने का कारण जो है वो एक ही कारण है कि तुमने उनका विरोध किया है। और कौन सा कारण है कि तुम्हारे साथ चर्चा की जाए। कौन हो तुम? अपनी परंपरा बताने के लिए तो तुम्हें छ महीना चाहिए। जब से तुमने अपने आप को निग्राचार घोषित किया तब से तुम आज तक अपनी परंपरा पब्लिक नहीं कर पा रहे हो। और इसी पब्लिक ना कर पाने की असामर्थता के कारण तो तुम भाग रहे हो चर्चा से। तो जब तुम केवल विरोध के आधार पर यह सोच सकते हो कि शंकराचार्य आकर मुझसे चर्चा करें तो तुम्हारे लिए क्यों नहीं सोचा जा सकता लोगों के द्वारा कि
00:16:14:14 तुम्हारा विरोध करने के कारण तुम जो है शिवश नारायण द्विवेदी से चर्चा करो। तो यहां पर हमने तुम्हारे एक एक पॉइंट को ध्वस्त किया है। एक एक जो तुमने बहाना बनाया ना खोखला चर्चा से भागने का इसको कहते हैं पोस्टमार्टम। और तर्कपूर्ण बहाने लाओ और सोचो और थोड़ा सा वो निग्रह प्रवेशिका के बारे में मनन करो, चिंतन करो। सपने देखो या लाल बत्ती में ढूंढो थोड़े बहाने और जला के पुरानी हवेली की म्यूजिक लगा लेना पीछे। है ना राम से ब्रदर से संपर्क कर लो उनसे कहो थोड़ा माहौल बनाओ वातावरण बनाओ फिर लाल बत्ती में मैं ढूंढूंगा मलेच राज को वो देगा मुझे खोखले खोखले बहाने या फिर राज कॉमिक्स पढ़ लो उसमें भी कुछ कररेक्टर्स मिल जाएंगे ये वाले मलेच राज जैसे कॉमिक्स पढ़ के थोड़ा फिर बायपोलर के प्रभाव को बढ़ाओ और फिर जो है तर्क निकाल के लाओ कि शिवांश नारायण द्विवेदी से के साथ चर्चा करने से किस प्रकार बचा जाए वास्तविक िकता यह है भगवत आनंद कि अब तुम चर्चा से भाग रहे हो। अच्छा है कि डर होना चाहिए। धर्म के सामने खड़े हुए अधर्म में धर्म का भय होना चाहिए।
00:17:30:12 तुमको पता है कि तुम्हारे जो आक्षेप हैं पूरी पीठ के परिकरों पर विजयश्री पर वो निराधार है खोखले हैं। मिनट से पहले ध्वस्त हो जाएंगे। मिनट से पहले आ बाबा डाबा बाबा करते नजर आओगे। और उसके बाद तुम्हारी परंपरा क्या कहने जब उस पर बात होगी तो क्या होगा तुम्हारा तो इसलिए तुम अब चर्चा से अपना मुंह चुरा रहे हो मुंह छिपा के भाग रहे हो कि चर्चा ना करनी पड़े क्योंकि अब तुम्हें पता लग गया है कि केवल व्यक्ति डिफेंसिव नहीं खेलेगा अब वो ऑफेंसिव भी होगा वो आक्रामक भी खेलेगा और ये कोई पहली बार तो है नहीं जो भगवत आनंद ने इस तरीके से चर्चा से मुंह छिपाने का बहाना बनाया है। है ना? सनार्ग वालों ने उसको कहा कि आजा भाई सनार्ग वालों से भाग ही रहा है। वो इनके जवाब दे चुके हैं। इन सबरी वाले मामले में इनका मुंह तोड़ चुके हैं। मगर वहां से भागता नजर आएगा। राजन दास जी के जो शिष्य हैं उनके साथ इसलिए चर्चा नहीं करेगा क्योंकि उसके अंदर अशास्त्रीयता है। भाई किसी के साथ भी मतभेद के निमित्त जो हम चर्चा करते हैं वो उसमें सामने वाले पक्ष में हम अशास्त्रीयता ही तो
00:18:45:15 देखते हैं। फिर तो कभी आर्य समाजियों से स्कनियों से कभी कोई चर्चा होगी ही नहीं। सब अशास्त्रीय हैं। चर्चा होगी किससे? जो हमारे मत को पहले से ही मानता है। है ना? तो चर्चा से यह इसीलिए अब भागेंगे क्योंकि इन्हें पता लग चुका है कि शुरुआत में पहले पूरी पीठ के परिकरों पर लगाए गए आक्षेप और विजय श्री पर लगाए गए आक्षेप उन पर बात होगी और उसके बाद यह मेरे पीछे पड़ेगा। यह मुझसे पूछेगा कि वो लाल बत्ती का क्या ड्रामा है भाई? ये मुझसे पूछेगा परंपरा की प्रामाणिकता तुम्हारे द्वारा डेवलप किए गए कररेक्टर की प्रामाणिकता। अनेकानेक दिए गए कपोल कल्पित वक्तव्यों की प्रमाणिकता मलेच्छराज की प्रमाणिकता ये सब मुझसे पूछेगा और मेरे पास कोई जवाब नहीं होगा सिवाय यह कहने के कि भाई मेरे पास असाधारण शक्ति है जो मैं कह रहा हूं मान लो तो यह चूर्ण जो है ना असाधारण शक्ति का ये अपने अंध भक्तों को खिलाना और यह जो बहानों का चूर्ण है क्योंकि यही शायद वह चूर्ण है जिससे कि किसी जिसके द्वारा तुम किसी को अपने वश में कर पाते
00:20:00:12 तो चर्चा से भगवत आनंद क्यों भाग रहे हो? ये अब सबको दिखाई दे रहा है और संभवत तुम्हारे जो अंध भक्त हैं वो भी देख पाएंगे कि हां भगवत आनंद गुरु जो है यहां पर इसलिए भाग रहा है क्योंकि उसको पता है कि कैसे परखच्चे उड़ाएगा शिवश नारायण द्विवेदी जिस प्रकार से उसने इस और अलंकार समाज के परखच्चे उड़ाए अनेकानेक वाद विवाद में उनके द्वारा किए जाने वाले जो मन कल्पित जो दावे हैं उन दावों के और हां सबसे अंतिम और सबसे सुंदर बहाना कि पहले हमारे पास समय था और अब समय नहीं है कोई बात नहीं कोई बात नहीं बहुत अच्छा बहाना है ये जो प्रबुद्ध जन जो है समझेंगे देखेंगे कि ये कैसा है मतलब कितना तर्कपूर्ण बात है ये और तुम्हारे अंधभक्त भी देखेंगे मगर हम तो यही कहेंगे भगवत आनंद कि जीवन में कभी तो तुम्हें लाल बत्ती में मलिक स्वराज को ढूंढने से फुर्सत मिलेगी। जीवन में कभी तो तुम्हें अवेंजर्स और राज कॉमिक्स को मिक्स करने से फुर्सत मिलेगी। है ना? वो पुरानी हवेली की और रामसे ब्रदर्स की म्यूजिक लगा के वीडियो बनाने से कभी तो फुर्सत मिल
00:21:15:26 जाएगी। तो हम तुम्हें कोई समय सीमा नहीं दे रहे हैं कि कल शाम 5:00 बजे तक निर्णय अपना बता दो। आजीवन निग्रह प्रवेशिका आज तुम लिख तुमने लिख ली है तो आज नहीं लिख लो तब आजीवन जीवन में कभी भी समय मिल जाए अपने उन महत्वपूर्ण कार्यों से जो तुम वो कर रहे हो कार्टून कररेक्टर्स बना बनाकर उनसे अगर समय मिल जाए तो आ जाना है ना वो जो वशीकरण वाला चूर्ण है वो भी भी तो बना रहेगे ना तुम खाने में मिला के मुझे खिलाने के लिए वो जो प्रतियोगिता वाली बात की थी मैंने अपनी लाइव में वो भी तो बना रहेगे ना तो उस चूर्ण को बना लो या उसको बनाने से थोड़ा रेस्ट करो फुर्सत मिल जाए तो आ जाना हमने तो आजीवन का समय दे रखा है तुम्हें कभी तो तुम साहस जुटा पाओगे सामना करने की तो
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→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 27:23 ↗
00:22:18:13 भगवतानंद हमने तुमसे पहले ही कहा था कि इस विवाद को मत बढ़ाओ आगे तुम्ही को परेशानी होगी। अब प्रत्यक्ष रूप से हमने यही दर्शाया था मत बढ़ाओ मत बढ़ाओ। हो गई ना कहा था हमने खेल अच्छा है तुम्हारा। बहुत अच्छा है। सालों से खेल रहे हो। इस बार भी खेल अच्छा था। आदमी गलत चुन लिया। तो माता जी ने अगर निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया ना तो यह बहाने बनाने बंद करो और प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करो। प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल
⬜ Not used yet · 00:22:57:14 – 00:23:18:00 (0:21)
00:22:57:14 जाएगा। और हम आजीवन प्रतीक्षा करेंगे। तुम्हारे समय प्राप्त होने तुम्हें जो है समय प्राप्त हो पाए। आजीवन प्रतीक्षा करेंगे कि कभी तुम्हें भैया अपने वह लाल बत्ती वाले काम से थोड़ी फुर्सत मिल जाए। आ जाना जय श्री राम [संगीत]
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आह्वान का कमज़ोर पक्ष और भागवतानंद का पलायन
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