⬜ Not used yet · 00:00:02:12 – 00:05:01:16 (4:59)
00:00:02:12 तो सभी को जय श्री राम अभी तक हमने कई बार इसकन के कई प्रकार के लोगों से बात की कुछ उसमें से नौ सखिए थे कुछ उसमें सीनियर्स भी थे तो कई बार ऐसा होता है कि लोग आ करर के कहते हैं कि तुम कभी किसी विद्वान से बात नहीं करते हो तुम कभी विद्वान के पास नहीं जाते हो हालांकि ऐसा नहीं है स्कन के द्वारा नियुक्त जो ऑथराइज लोग हैं विद्वान माने जाते हैं गीता की क्लासेस चलाते हैं मंदिर चलाते हैं अध्यक्ष हैं उन लोगों के पास हम गए हैं जनल सेक्रेटरी के पास हम गए हैं और जो इनके ही द्वारा जो सिलेक्टिव पर्सनालिटी है उनके पास हम नहीं जा पाए क्योंकि वह उन्हें हमने अप्रोच किया मगर आप जाहिर सी बात है कि कई कारण हो सकते हैं जो हमें समय ना दे बात करने के लिए मगर अभी रिसेंटली जो पूज्य राघवाचार्य जी महाराज के साथ जो हमारा वीडियो हुआ था और उसमें स्कन की सच्चाई बिल्कुल निर्भीकता के साथ जो पूज्य राघवाचार्य जी महाराज ने रखी थी जनसामान्य के समक्ष उस पर एक डिप्लोमेटिक टाइप का मैं कहूंगा कि मतलब ऐसा वीडियो कि हमने अपने अच्छा अच्छा हमने अपने बारे में कह दिया और हमने सारी बातें
00:01:17:15 कह दी अच्छी भी कह दी अपने बारे में नकारात्मक को हमने छोड़ा नहीं सकारात्मकता भी कह दी उसमें से जिसको जो पकड़ना हो वो पकड़ ले हमने सारी बातें कह दी तो इस तरह का एक वीडियो आया है और इसमें मैं आप लोगों को यह बताना चाहूंगा कि आप लोग अब यह देखें कि यह इस कौन के विद्वान हैं और इनके क्या कुतर्क रहते हैं किस तरह से डिप्लोमेटिक बातें करते हैं किस तरह से कहेंगे दोगली बातें करते हैं दोनों प्रकार की बातें करते हुए चलते हैं जिससे कि जो गलत बात हो जब गलत बात पर इनको कहा जाए तो यह बोले कि हमने सही भी तो किए और वैसे हम तो गलत बात के ही पक्षधर हैं अचत भदा भेद अचिंत वेदा वेद वाले हैं ना भाई कि अचिंत वेदा वेद में क्या है कि ऐसा भेद है जिसका चिंतन ना किया जा सके मगर उसी भेद के आधार पर हम यह कर लेंगे कि शिव छोटे हैं और कृष्ण बड़े हैं चिंतन नहीं करना उस पर अचिंत है मगर उसी भेद के आधार पर हम कृष्ण को कृष्ण को बड़ा और शिव को छोटा कर देंगे और उसी अभेद के आधार पर हम अल्लाह और कृष्ण को एक कर देंगे ये है अचिंत भदा भेद मतलब अच भदा भेद कहक जो हमें मनवाना
00:02:32:16 है वो मनवा लेंगे तो चलिए चलते हैं इनकी बात सुनते हैं तो वो बारबार सही भक्तों से यही पूछ रहे कि इस कन वाले ही लोक सीख है श्रीरंग विकार विशेष जोगा दूध से दही दूध से दही और उन्होंने बहुत सुंदर एक चीज कहा कि दूध और दही तो अपूर्ण है प्राकृतिक है लेकिन भगवान कृष्ण तो पूर्ण है शिव भी पूर्ण है तो दूध से दही बन सकता है दही से दूध नहीं बन सकता लेकिन कृष्ण से शिव बनते शिव से तो कृष्ण बन सकते हैं दोनों ही पूण बात तो उनकी सही है तो अवश्य ही बन सकते लेन बनने की जरूरत ही क्या है मेरा एक और प्रश्न है इसम कृष्ण तो ऑलरेडी है ही वे शिव बन रहे हैं और शिव ही कृष्ण रूप में ऑलरेडी है ही तो बनने की जरूरत नहीं है तो सबसे पहले इन्होंने यह माना कि भैया सभी पूर्ण है भगवान शिव भी पूर्ण है भगवान कृष्ण भी पूर्ण है राम भी पूर्ण है सबसे पहली बात तो यह है कि आपके जो ऑथराइज और लोग हैं वो यह बात नहीं मानते हैं अब आपने कह दिया कि वह अज्ञानी है मगर इकोन की ऑथराइज बॉडी ने नहीं कहा ना आपकी बुक्स में नहीं लिखा ना आप उनके लिए
00:03:47:19 पहले वीडियो क्यों नहीं बना रहे कि लखनऊ के स्कन प्रेसिडेंट ने ऐसी ऐसी बात कही मैं ऐसा बोल रहा हूं उनके बारे में कि उन्होंने कहा कि शिवजी परम ब्रह्म नहीं है और अल्लाह क्राइस्ट और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है बनाइए ना वीडियोस आप उनके लिए वीडियोस क्यों नहीं बना रहे जो आप कह रहे जिनके बारे में कि जो ऐसा कहते हैं वह ज्ञानी होते हैं और जो आप ये क्लेम कर रहे हैं कि भैया सभी पूर्ण है मगर हमारी भगवत भक्ति इनके लिए है तो अभी ये कह रहे हैं कि शिव जी की परब्रह्म जो श्रुति शास्त्र है उनसे सिद्ध है तो इसलिए उनकी परमेश्वर होता को कोई नकार नहीं सकता है तो मैं यह कहना चाहूंगा विथ हंबल रिक्वेस्ट कि आप पहले अपने जितने भी इकन के सेंटर्स से उनमें एक मीटिंग करके डिसाइड कर लीजिए कि इकन को प्रीच क्या करना है क्योंकि आपके अकेले कह देने से वह आवाज स्कन की आवाज थोड़ी ना मान ली जाएगी आप एक सेंटर के अगर ऑथराइज लीडर है तो दूसरे सेंटर्स के ऑथराइज लीडर तो कह रहे हैं ना कि शिव और कृष्ण में भेद है मगर अल्लाह और कृष्ण में कोई भेद नहीं है आपके भक्तगण तो कह रहे हैं ना डिवटी कह रहे हैं ना रट्टू तोते की तरह कि राम जी पूर्ण नहीं है पूछ रहा हूम जी एक बताओ
✅ This part is already used · 00:05:01:16 – 00:05:30:16 (0:29)
→ Used in: A · Video #amoghlilaprabhu द्वारा #iskcon की चोरी छिपाने के कुतर्कपूर्ण प्रयास at 6:55 ↗
00:05:01:16 आप एक बताओ मर्यादा या पूर्ण इसमें पूर्ण कौन सा है बता रहा बताओ अक्षर पुरुष लिख उनके लिए मर्यादा बड़ा है या पूर्ण बड़ा है पूर्ण भी राम जी पूर्ण भी है लि लि सब मानते हो को नहीं मानोगे नहीं आप सब झूठ बोल रहे हो आप साले आप साले आप साले ये आप ये बना रहे हैं
⬜ Not used yet · 00:05:30:16 – 01:00:59:04 (55:29)
00:05:30:16 आप आप त नहीं है जानने की ली दे रहा कितना निर्लज के साथ गाली देते हुए यहां से गया है हमने भी सुना था उसने कहा नच करने आया विदेशों से अरे वो गंदा बात बोला था लड़ रहे हैं गाली तक दे रहे हैं है ना और ऐसा नहीं है कि वो अपने से बोल रहे हैं ये सब उनको सिखाया जा रहा है ना आपके आ के ब्रह्मचारी वो बोल रहे हैं कि नहीं राम जी पूर्ण नहीं है विष्णु भगवान पूर्ण नहीं है शंकर भगवान की तो बात दूर है तो पहले आप लोग डिसाइड कर लीजिए कि इकोन का इकोन की प्रीचिंग है क्या और उसके बाद में आप सबको बताइए कि यह प्रीचिंग है आपकी बुक्स में य छपवा इए कि शिव की ईश्वर होता को कोई नकार नहीं सकता परमेश्वर का को अपनी आपकी बुक्स में छपवा इए कि जी पूर्ण ईश्वर है राम और कृष्ण में कोई भेद नहीं है किसी भी प्रकार का जब राम और कृष्ण में भेद करना होता है तो भेद कर देते हैं उसके बाद बचाने आ जाते डेंटिंग पेंटिंग करने आ जाते हैं अरे वो रस की दृष्टि से कह दिया है अरे तुम्हारा रस है ना भाई वो दूसरे
00:06:45:19 का रस तो नहीं है ना तुलसीदास जी का रस तो नहीं है ना हनुमान जी का रस तो नहीं है ना अपना रस क्यों थोप रहे हो दूसरों पर और फिर एज इट इज बोलते हो आप तो पहले तो डिसाइड कर लीजिए और एक वो क्लेम बनाई यह हम प्रीच करते हैं ठीक है 10 लोग 10 तरह की बातें मत बोलिए और अगर आप जो कह रहे वही सत्य है तो जो लोग आपके विरुद्ध बात कर रहे हैं स्कन की तरफ से उनका नाम लेकर के पहले वीडियोस बनाइए जैसे आपने अभी राघवाचार्य जी का नाम लेकर के वीडियो बनाया है ऐसे ही उन लोगों का नाम लेकर जो नौ सखिया है मैं आपको दे दूंगा संपर्क करिएगा य लिंक डाल दूंगा उन सबका नाम लेकर के आप वीडियोस बनाइए जो ऐसी बातें करते हैं तब तो यह माना जाए कि आप सत्य के पक्षधर है धर्म प्रेमी है न्याय प्रिय हैं आप व्यक्ति निष्ठ नहीं है संस्था निष्ठ नहीं है बल्कि धर्म निष्ठ है है ना और तब तक वह वीडियोस बनाते रहिए जब तक उनका ऐसा करना बंद ना हो जाए पीछे पड़िए आगे देखते हैं और सबसे पहले ना अपनी भगवत गीता को थोड़ा सा संशोधित कर लीजिए जिसमें हर कदम पर हर पृष्ठ पर लगभग हर दूसरे तीसरे पृष्ठ पर किस तरह से शिवजी कि विष्णु जी की
00:08:00:21 जो अपमान जनक उनके बारे में बातें की गई है उसको भी संशोधित करें ये सब वक्तव्य देने से पहले कि उनकी परमेश्वर होता को कोई नकार नहीं सकता और फिर 262 में उनकी तुलना जो है किसी से करते हुए उनको जो है वैष्णव के नाम पर भी नीचे कर दिया है ना और जो है वो इंद्रियों पर क्या कहते हैं कंट्रोल करने वाले भी नहीं रहे उनका जो पार्वती माता के साथ वैवाहिक संबंध है उसकी तुलना कर दी एक जो प्रोस्टिट्यूट होती है और वो किसी के साथ संबंध बनाती है तो उस संबंध के साथ पार्वती माता के साथ जो उनका पवित्र संबंध है उसकी तुलना कर दी पार्वती माता की तुलना उसके साथ हो गई जाहिर सी बात है जब हरिदास ठाकुर जी से तुलना कर रहे हैं आप शिव जी की और उस संबंध की तुलना कर रहे हैं आप प्रोस्टिट्यूट वाले संबंध से तो फिर पार्वती जी की तुलना भी तो उस किस से हुई ना तो ये सब चीजें अपनी संशोधित करिए ये सब मतलब क्या कहेंगे इसको कि शुगर कोट करने वाले बयान देने से पहले है ना पहले आप अपनी जी बुक्स को क्लियर करिए उसमें लिखिए 3 1525 में कि भगवान शिव के नाम को कृष्ण भगवान के नाम के समान समझने वाले मूर्ख नहीं है दुर्गा काली के नाम जप को कृष्ण के नाम जप के समान समझने वाले मूर्ख नहीं है अपराध नहीं है ऐसा करना तो फिर ऐसे ये डिप्लोमेटिक आंसर दीजिए है ना
00:09:17:03 वैसे इस वीडियो में कोई मायावादी समय मिले तो हमें उन प्रश्नों का उत्तर दीजिएगा कि पद्म पुराण में अगर मायावादी मायावादी बात हो रही जो आदि शंकराचार्य जी ने लिखा आदि शंकराचार्य जी ने अगर अपने आप को मायावादी कहा या उनके शिष्यों ने आने वाली उस परंपरा के आचार्यों ने अपने आप को मायावादी कहा तो क्या अवैध मायावादी कहा था क्योंकि पद्म पुराण में जिस मायावादी बात हो रही है वहां पर उसको अवैध कहा गया है है ना तो यह सब प्रश्न है फिर दूसरी बात कि अगर आप चैतन्य महाप्रभु के फॉलोअर हैं तो वह खुद को मायावादी सन्यासी कह रहे हैं हां वो श्रीधरी टीका को प्रमाणिक मान रहे हैं और किसी टीका से क्या मधवा चार्य जी से आपको टीका नहीं मिली थी भागवत की जो उसको उसके लिए आपको पढ़ने के लिए और कहीं जाना पड़ रहा है वह एक मायावादी को जो गलत सिद्धांत देने वाले आचार्य हैं उनको क्यों कह रहे हैं कि मैं जो है उनको जगतगुरु मानता हूं तो यह सारे उसमें भी पूर्वा कुछ पूर्व पक्ष है उस अलग वीडियोस है आपने बोला है तो मुझे बोलना पड़ रहा है हालांकि इस वीडियो में इसकी जरूरत नहीं थी चलिए आगे चलते हैं चलो हम लोगों ने भगवान की
00:10:32:04 आज्ञा नहीं मानी आप लोग तो अपने आचार्य की आज्ञा नहीं मानी तो आप लोग कैसे वैष्णव हुए श्री संप्रदाय वाले आप लोग के आचार लोगों ने गुण गाया किसका तिरुमाला पर्वत का तिरुपति का नहीं टी जितने गेस्ट हाउस है सब में नियन गार्लिक वाला खाना मिलता है चाय कफी तो रहा है और मैंने अपनी आंखों से देख किसी सुना हु बात नहीं है जिस मार्ग में भगवान का शोभ यात्रा होता है उधर एक भेल वाला भेल बना उसी मार्ग में कुंड के पास और लड्डू वाला सब जानते ही है तब इ पता क इने ब वि ल में दवार से ल जितने भी दुकान है सब है साउथ इंडिया में रामेश्वरम से लेक सब कन मुस्लिम भर ग कैसे व नहीं था आप लोग इतने विवान इतने बण लोग
00:11:30:21 बताइ आपके नाक के चेन कैसे हुआ ब्राह्मण जाते ूर करते बवास कर अब आपने वर्णाश्रम की बात शुरू की और उसमें कहना शुरू किया कि जातिवाद की वजह से यह हो रहा है व हो रहा है वसुदेव कुटुंबकम यह है वह है तो पहली बात तो यह है कि क्या यह जातिवाद शास्त्रोक्त है या फिर अपने मन से बनाया गया जातिवाद पहली बात तो यह सोचना पड़ेगा दूसरी बात यह है कि अगर हम किसी व्यवस्था के लिए किसी को कुछ मानने के लिए बाध्य किया जाए किसी व्यक्ति को रोका जाए किसी व्यवस्था के लिए कहीं कुछ विधि निषेध इत्यादि का पालन करवाया जाए तो इसका अर्थ यह कहां से होता है कि उस व्यक्ति से हम घृणा करते हैं उसको अपने से छिटक रहे हैं अगर हमारे घर में आने वाले किसी पुरुष को हम अपने घर की किसी मातृशक्ति से दूर रखें तो इसका मतलब यह है कि वो जो आने वाला है वो नीच है उससे हम घृणा करते हैं यह कौन से अर्थ में लिखा है सनातन के कि वसुदेव कुटुंबकम का अर्थ आप क्या यह मानते हैं कि आप अपने घर की स्त्रियों को सबको भेज दो सबके साथ विधि निषेध का पालन करते होंगे ना तो ये कौन सा अर्थ ले रहे हैं आप कि अगर वर्ण व्यवस्था का पालन हो गया तो वहां पर जो है सबको
00:12:46:12 घृणित मान लिया गया बहिष्कृत मान लिया गया अलगाव हो गया और वसुदेव कुटक की धज्जियां उड़ गई ये सब कहां से सीखा है आपने कौन से शास्त्र में लिखा है कि अगर वर्णाश्रम धर्म का पालन होगा तो वसुदेव कुटुंबकम का पालन नहीं होगा कहां से निकल रहा है इसके बाद आपने क्या तर्क दिया भाई अग धर्म है होना चाहिए ग होना चाहिए पम प का में मास का प्रयोग होना चाहिए और देवर के साथ संतान उत्पन्न होना चाहिए कर्म सन्यास होना चाहिए लिखा
00:13:27:14 गया लिखा गया इसका इसका व्याख्या क्या है अगर आप लोग सब प्रकांड ज्ञानी वैदिक ब्राह्मण हो तो दिखाओ क्त्र ला के दिखाओ कि अश्वमेध यज्ञ कराओ अगर वर्ण व्यवस्था को मानना है तो पहली बात तो यह है कि आपने माना कि जो हमारे शास्त्रों की वर्ण व्यवस्था है वो तो वही है मगर आज हम अश्वमेध यज्ञ जैसी चीजें नहीं कर सकते आप जो है उन यज्ञों को खराब मान रहे हैं गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं जो हमारे शास्त्रों में दिए गए हैं राम जी इत्यादि जी रामो विग्रह धर्मा ये लोग जो करते थे वो ठीक नहीं था आज आप लोग ठीक कर रहे हैं यही बताने का प्रयास कर रहे हैं ना उनके लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं कि आज वो देवर के साथ गमन करवाओ पुत्र को जन्म दो कहां पर लिखा है कि क्षत्रिय कोई व्यक्ति तभी होगा जब वहां पर वर्णाश्रम धर्म का पालन तभी होगा जब वहां पर देवर के साथ गमन होगा अमुक अमुक स्थितियों में वंश की रक्षा के लिए संतान की प्राप्ति के लिए विधि दी गई है तो आप उन विधियों को जो हमारे शास्त्रों में दी गई है उन विधियों का आप इस तरह से प्रस्तुत कर रहे हैं जैसे आपको खुद उनसे लज्जा आती हो आपको लज्जा आती है अपने शास्त्रों पर तो खुल के बोलो ना कि हमने अपने शास्त्र नए लिखे हैं बताओ ना समाज को फिर क्यों डोरा पीटते हो सनातन सनातन
00:14:43:06 बताओ ना सनातन नहीं हमारे सिद्धांत अभी-अभी लिखे हमने पिछले 100 वर्षों में अपने मन मुताबिक हम केवल चोला ड़ हैं सनातन का बताओ ना समाज को नहीं तो बताइए कि कौन से शास्त्र में लिखा है वर्णाश्रम धर्म का पैरामीटर है अश्वमेध यज्ञ वर्णाश्रम धर्म का पैरामीटर है क्या कहते वो नियोग विधि यह सब आप बताइए कहां पर कौन से पैरामीटर्स में दिया गया है कभी अपनी जो चीजें कुछ रट के रख ली है उसके अलावा कुछ और जानने की कोशिश तो की नहीं है तो इसीलिए अनर गर्ल प्रलाप होता है फिर वही है अपने ही शास्त्रों पर दोष निकालना कि पहले तो ऐसा होता था ऐसा कर पाओगे यानी कि वो गलत होता था राम जी गलत करते थे सतयुग सतयुग में गलत होता था द्वापर में गलत होता था और जो है त्रेता में गलत होता था एक आप ही हो कलयुग में महापुरुष भगवान के अवतार जो आप सही करने आए हो लोगों को और अपने शास्त्र रच रहे हो आने वाले टाइम में वेदों को हटा देना मनुस्मृति को हटा देना सब कुछ हटा देना अपने द्वारा लिखी गई भगवत गीता कर देना प्रभुपाद जी की भी हटा देना अपने द्वारा रची गई भगवत गीता कर देना अपने द्वारा रचे गए सिद्धांत कर देना है ना ईश्वर अल्लाह को एक कर देना यही तो है आपने कहा कि भैया वो क्या कहते हैं आपकी व्यवस्था है
00:15:58:12 हम कि आपको जो है मिल नहीं रहे हैं इसलिए आपको जो है ऐसे लोगों को बनाना पड़ता है ब्राह्मण बनाना पड़ता है आज के टाइम में मिलते नहीं है तो हमें किसी को बनाना पड़ता है पहली बात तो आप यह क्यों प्रचारित कर रहे हैं कि शास्त्रों में यही दिया है आप बोलिए ना कि हम व्यवस्था में बना रहे हैं किसी को ब्राह्मण बना रहे हैं तो आप ये क्यों अपनी सच्चाई क्यों नहीं बता रहे हैं आप कर भी रहे हैं शास्त्रों के विपरीत जाकर के कार्य मान भी रहे हैं जब जब ऐसी बात आ गई और वैसे ढंडोरा पीट रहे हैं चातु व मया सटम चातु वण मया सटम क्यों ढूंढ पीट रहे हो भाई मना करो ना फिर तो आप आप कह रहे हो हम बहुत बड़े शास्त्रज्ञ हम तो शास्त्रों के हिसाब से चलते हैं और जब शास्त्रों की बात कही गई जब शास्त्रों का हवाला दिया गया तो कह र हो कि शास्त्रों को हम फॉलो कर सकते हैं क्या अ अम दिया कि कर पाएंगे क्या यज्ञों की बात करने लगे तो बोलो ना कि हम शास्त्रों को फॉलो नहीं कर रहे हमने अपने नियम खुद से बनाए हैं दूसरी बात यह है कि यदि हम चलो मान लिया पहली बात तो ये आपातकालीन धर्म होता है आपने तो पढ़ा होगा आप बहुत शास्त्र लेकर के बैठे हो लिख लुखा करके तो पहली बात तो यह है कि आपातकालीन धर्म होता है मगर आपातकालीन धर्म होते हुए भी जिस समय हम आपातकालीन धर्म का आलंबन ले रहे हैं उस समय भी हमें वास्तविक धर्म को तो बताना
00:17:13:19 पड़ेगा ना यदि आप आपातकालीन धर्म को ही सामान्य धर्म बता देंगे तो जो वास्तविक सामान्य धर्म है वो तो लुप्त हो जाएगा आप अगर किसी वजह से शास्त्रों के विपरीत जाकर के कुछ कर रहे हो आपकी व्यवस्था है या जो भी है तो आप यह थोड़ी ना बताने लगो कि जो हम कर रहे हैं वही धर्म है आपको बताना तो यही पड़ेगा धर्म तो वो है मगर हमें व्यवस्था बस यह करना पड़ रहा है ये तो ठीक वही वाली बात हो गई कि आप इंद्रियों पर आपका कंट्रोल नहीं रहा आप सिगरेट पीने लगे पिताजी की आज्ञा के विरुद्ध जाकर के तो आपने बताना शुरू कर दिया मेरे पिताजी ने यही कहा है सिगरेट पीना ही अच्छा है अरे भाई ये बताइए ना कि पिताजी ने तो कहा है सिगरेट पीने को मना किया है मगर मेरा बस नहीं चल रहा है सिगरेट पिए बिना यह बताओ ना लोगों को मगर उसमें दिक्कत आएगी पब्लिसिटी में जो प्रोपेगेंडा करना है पूरा जो धार्मिक सत्ता तियानी है या जो भी है दुकाने चलानी है है ना उन सब में दिक्कत आने लगे सच्चाई बताने लगेंगे रा पीट पीट के तो इसलिए जब भी शास्त्रों का हवाला दिया जाएगा तो इसी तरीके से किसी खोपचे में जाकर के एक वीडियो बना देंगे और अब उन लोगों को तसल्ली हो जाएगी जो फॉलो वाह क्या वीडियो बनाया बिल्कुल इमोशनल कर दिया भाई इन्होने तो शिवजी को परमेश्वर मान लिया और किताब फिर वही छापें शिवजी शिव जी का तो अपनी इंद्रियों पर कोई कंट्रोल नहीं
00:18:28:24 नहीं है वो पार्वती माता ने उन्हें विषय भोग के लिए उकसाया और वो मान गई राम जी तो 12 कला के हैं वो पूर्ण नहीं है कृष्ण भगवान पूर्ण है हां फिर ये करेंगे आगे देखते हैं और आश्रम पालन और ब्राह्मणों का तो क्या कहना है भारतवर्ष में मैथली ब्राह्मण बंगाली ब्राह्मण जो नहीं खाते और की जात के लोग वो भी वो लोग खाते हैं गुटका मावा और भारत के बहुत सारे प्रसिद्ध मंदिर में नाम नहीं लूंगा भगवान शंकर का ज मंदिर है पुजारी पंडा से मासा करते रा क जयं [संगीत]
00:19:20:22 ब आपने कहा कि आज ब्राह्मण भी मास खाने वाले हैं ठीक है तो पहली बात तो य बताइए जब आजकल सभी लोग मांस खाने वाले हैं एक बात और क्लेम की जाती है आपकी ओर से कि भैया ये जो है कलयुग में सभी शूद्र होंगे यह भी लिखा उन्ही शास्त्र जहां शूद्र की बात हो रही है ना भविष्य बताया जा रहा है कलयुग का वहीं पर लिखा है कि कलयुग की स्त्रियां जो है व्यभिचार नहीं होंगी तो क्या ख्याल है आपका अपने घर की स्त्रियों के बारे में व्यभिचारी है आपकी मां आपकी माताएं आपकी बहने सब व्यभिचारिणी है पराय पुरुषों के साथ समय बिताना चाहेंगी वोह तो यह है बातें करना चाहेंगी घंटों टाइम बिताना बिताना चाहेंगी यह सब है आप ऐसा सोचते हैं अपनी माता बहनों के बारे में नहीं ना तो वहां पर बताया जा रहा है कि कलयुग की स्थिति ऐसी हो जाएगी मगर वहां ठोक के नहीं कहा जा रहा है कि एक एक व्यक्ति वैसा ही हो जाएगा ब्राह्मण भी वैसे हो जाएंगे स्त्रियां भी वैसी हो जाएंगी मगर इसका मतलब ये नहीं कि सभी स्त्रियां हो जाएंगी है ना वरना ब्राह्मण ये जो कलयुग की बात लेकर के आप शास्त्रों का ये लेकर के जब हवाला देना शुरू करते हो कि ब्राह्मण जो कोई ब्राह्मण नहीं रहेगा सब शुद्र हो जाएंगे ब्राह्मण भी शूद्रो चित काम करने लगेंगे जो शास्त्रों की बात लेकर के आप चलते हैं तो उस समय अपनी माताओं बहनों का भी चेहरा या किया करिए है ना और दूसरी बात आपने कहा कि भाई कोई ब्रा आजकल सब मांस खाने वाले हैं तो आपको अपने मंदिरों
00:20:36:00 के लिए व्यक्ति कहां से मिल जाता है पुजारी बनाने के लिए आपको यह कहना पड़ेगा कि हमें जो भी मिलता है वो अब ब्राह्मण ही मिलता है मतलब आपका क्लेम यह है कि आज के टाइम में ब्राह्मण ब्राह्मण तो हमेशा मांस खाने वाले ही मिलेंगे और य मांस ना खाने वाला व्यक्ति अब्राह्मण ही होगा वो ब्राह्मण नहीं हो सकता यह कहना चाहते हैं आप कितने ब्राह्मण दिलवा आपको बिना मास खाने वाले शाकाहारी त्रिकाल संध्या करने वाले यह सब आपके खोखले क्लेम है खोखले ना सर है ना पैर है ना बस बोलना है जिससे अपने कुछ जो लोग सवाल उठा रहे हैं इनको उत्तर दो इनको उत्तर दो तो वो लोग बल्ले बल्ले हो गया खुश हो गए भाई यही तो है भाई क्या आज के टाइम में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिल रहा है जो मांस ना खाता हो और अगर मिल रहा है तो वो क्या सिर्फ अब्राह्मण ही है ऐसा ब्राह्मण नहीं मिल रहा जो मांस ना खाता हो तो ये आपकी बात निराधार है सोचिए इस बारे में विचार करिए आगे चलते हैं क्या आपके मंदिरों में ऐसे महंत ऐसे पुजारी ऐसे अध्यक्ष नहीं है जो जन्म से भी ब्राह्मण हो आपके अनुसार वह कर्म से भी ब्राह्मण है क्या वह ऐसा कोई ब्राह्मण नहीं है जो जन्म से भी ब्राह्मण हो
00:21:51:04 आपके ही मंदिरों में जाकर दिखा दूंगा ऐसे ब्राह्मण जो पूजा जो आपके यहां पर जो नियुक्त है महंत के रूप में या आप जो भी उस पोस्ट को नाम देते हो आपका तो कॉर्पोरेट की तरह चलता है ना वह प्रेसिडेंट या जनरल मैनेजर इस तरह की पोस्ट होती है आपके यहां तो तो आपके यहां पर ही मैं दिखा दूंगा कि जन्म से ब्राह्मण भी कर्म आपके अनुसार वोह ब्राह्मणों वाले कर्म करते हुए वहां पर नियुक्त है तो कहां से मिल गया यह और अंत तो कत्व सौ की सीधी एक बात है कि अगर आपको कर्म के आधार पर ही चयन करना है और आपने खुद माना कि भैया शास्त्रों को आज हम लागू नहीं कर सकते तो फिर खुद को श समत का चोला क्यों उड़ाते हो यह ढोंग क्यों है लोगों को पता चलने दो ना सच्चाई क्या है कि आपका अपना नियम है आपके अपने सिद्धांत उनका सनातन से मतलब नहीं है आपने सिर्फ नाम पकड़ रखे हैं सनातन के भागवत भगवत गीता कृष्ण य सब नाम पकड़ रखे हैं बाकी सब आपका अपना हैस्ट को ना की बड़ावा दिया है मोहम्मद को कहां है बहुत जगह प ने भी कहा है कि ट्रू क्रिश्चन है वो इसलिए नहीं कहा है उन सबको क्रिश्चियन हम सबको क्रिश्चन बनाना चाहते थे वो किस देश में किस स्थान में किस काल
00:23:06:09 में किस पात्र के सामने कहा है वह बहुत बहुत बहुत बहुत मायने रखता है स्थान काल पात्र ये ठीक उसी तरह है भागवत में लिखा हुआ है ना बुद्ध बुद्ध देव कैसे आए किस लिए आए थे समोह सरद विषम एक ट्रिक अपनाया था उन्होंने जो आस्तिक लोग इछा रखते थे उनको सम्मोहित करने के बुद्ध देव बात करते हैं अब इनका जो ये जो हमने जो क्वेश्चन रेज किए अल्लाह और कृष्ण को एक क्यों करते हैं है ना तो इनका कहना है कि भा वो देश काल परिस्थिति वहां पर ऐसा हिसाब किताब था वो कंट्री ऐसी थी तो उनको अपने से मिलाने के लिए बुद्ध की तरह इन्होंने उदाहरण भी लिया है बुद्ध की तरह उन्होंने ऐसा किया ठीक है सबसे पहली बात आ जाती है कि यदि बुद्ध के अवतार में भगवान विष्णु ने कुछ भी ऐसा किया जो वेद सम्मत नहीं था तो हम बुद्ध के सिद्धांतों को सनातन नाम से प्रस्तुत नहीं करते हैं आपकी किताबें हो रही है सनातन धर्म के नाम से प्रस्तुत हिंदू धर्म के नाम से प्रस्तुत हो रही है आपकी किताबें लोग आपको आपके सिद्धांतों को हिंदुत्व का सिद्धांत समझ रहे हैं वो मिक्स है सब आपके यहां आपने कोई फिल्टर थोड़ी ना लगाया है ये वाली बुक हिंदू हिंदुत्व की नहीं है जिन किताबों में वो विवरण दिया गया है जिसमें कि वहां के लोगों को आपने अपने में लय कराने के लिए
00:24:21:10 बातें बोली थी उन किताबों के लिए कोई फिल्टर है क्या आपके यहां नॉन हिंदू के लिए किताबें हैं विदेशियों के लिए किताबें हैं नहीं ना उनको भी सनातन ग्रंथों के बीच में सनातन ग्रंथों के साथ सनातन ग्रंथ के नाम से ही बेचा जा रहा है दिया जा रहा है लोगों को पढ़ने के लिए बुद्ध की किताबों को तो हमने नहीं स्वीकारा ना जब आपने मान लिया ना कि वो बुद्ध बुद्ध की तरह से उन्होंने किया था बुद्ध ने अवैध चीजें की थी तो आपने मान लिया कि अवैध चीजें थी की थी प्रभुपाद जी ने वहां पर धन्यवाद अब इसको जीवी से वि से भी डिक्लेयर करा दीजिए कि वो वहां पर उन्होंने जो भी वो दी है ना ये ई अल्लाह और क्राइस्ट के बारे में वो सब उन्होंने जो है वो बुद्ध की तरह से दी है दूसरी बात ये आ जाएगी कि जब वह वहां पर झूठ बोल सकते हैं तो यहां पर क्यों नहीं शब्द प्रमाण खत्म हो गया ना अगर आपने यह माना कि वो बुद्ध की तरह वहां पर झूठ बोल सकते हैं जब मुस्लिम उनसे पूछेगा कि तुमने हिंदू लोगों को प्रेज क्यों किया है जब मुस्लिम कंट्रीज में आप समझाने जाते तो वहां भी यही कहते होगे वो बुद्ध की तरह किया था बुद्ध ने जैसे लोगों को अधिक चीज मतलब शास्त्र के विरुद्ध चीज जो अपने में लय कराने के लिए बोल दी थी वैसे ही हम बोलते हैं हिंदुओ को यही तो बोलोगे क्या बोलोगे और
00:25:37:06 वहां का अगर कोई बुद्धिजीवी प्रश्न कर देगा तो कैसी मतलब कैसी बे सिर पैर की बातें आप लोग आप करते हैं प्रभुपाद जी अगर बुद्ध की तरह बोलने लग गए तो प्रभुपाद जी की क्रेडिबिलिटी खत्म अ वैदिक हो गए वो फिर उनकी बातों को प्रमाण के रूप में उपयोग में नहीं ले सकते सबसे बड़ी बात क्या आप अगर ये जानते हो बुद्ध के रूप में तो उनके ग्रंथों को आप क्यों सनातन ग्रंथों के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो अगर वो विदेशों के लिए दी गई शिक्षा है तो य इंडिया में क्या कर रही है भारत में क्या कर रही है वो शिक्षा अगर दूसरों को अल्लाह वालों को अपने में लय कराने के लिए तुम ये बोल देते हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है जीसस जीसस जीसस भी व सन ऑफ गॉड है अल्लाह उनके कृष्ण के मैसेंजर थे मोहम्मद उनके कृष्ण के मैसेंजर थे हां तो जब यह सब चीजें बोल देते हो तो इसमें क्यों आप लोगों की आप लोगों सांप सूख जाता है कि शिव जी और कृष्ण जी एक हैं जिनके बारे में सनातन शास्त्रों में वर्णन है उनके साथ एकत्व को स्वीकार करने में और प्रचार करने में आप लोगों को दिक्कत हो रही है और जिनको हमारे यहां नास्तिक कहा गया मनुस्मृति इत्यादि ग्रंथों में उनको आप ल करा रहे हो आप एक बात
00:26:52:12 ध्यान रखिए यदि आप हिंदू और मुस्लिम के बीच में कोई ब्रिज बनाते हैं यह सोचकर वह है नहीं मगर मैं आपकी बात रखने के लिए कह रहा हूं यह सोचकर हम ब्रिज बनाते हैं कि मुस्लिम को इधर ले आएंगे तो उसी ब्रिज से हिंदू भी मुस्लिम की ओर जा सकता है यह कहां चली गई अकल इसीलिए कहा गया है धर्म के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाती है धर्म के साथ वह सब नहीं होता है यह जो आप कर रहे हैं कि वहां उसको उसके मुंह पर उसकी सी बात कर दी उसके मुह पर उसकी सी बात कर दी धर्म है ये धर्म खिलौना नहीं है तो ये सब बातें आपको सोचनी चाहिए हो रही थी वेदों के आचरण के नाम से उस हिंसा को रोकने के लिए उन्होने वेद का एक विपरीत वाद लेके आए तो वो भी लाए ना इसलिए बुद्ध को प्रणाम करते बुद्ध के बात को हम लोग नमस्कार करते नहीं लेते और जब भारत बुद्धिस्ट होने ल बुद्ध बिक धर्म वालो ने भी हमारे धर्म का बहुत हानि किया जन धर्म वाले ने भी इतिहास है मंदिर तोड़े हमारे लंदा विश्वविद्यालय पहले ब्राह्मणों के द्वारा संक होता था उस हमारे वेद ग्रंथ थे उसके बाद इन लोग ने कब्जा किया बुद्ध ने उन लोगों ने हमारा वेद ग्रंथ बहुत नष्ट किया और उसके बाद उनके उस लाइब में अपने ग्रंथ रखे अपने सब कुछ रखे फिर जलाया बाद में जला उसके बाद ये भी इतिहास पाया जाता है सत्य इतिहास है को दीजिए आप लोग तो उन बुद्धों को बुद्धों के द्वारा फिर
00:28:07:18 जो धर्म का नाश हुआ धर्म का उसको संयमित करने के लिए भगवान शंकर हु ब्रह्मण मूर्ति के रूप में मायावा शस्त्र वेदों के जो दंत और उपनिषद व्याख्या है उसम मायावादी शंकराचार्य जी भी आए थे वही काम प्रभुपाद जी ने किया तो आदि शंकराचार्य जी को आप मानते क्या उनके सिद्धांत को फॉलो करते हैं क्या या बुद्ध के सिद्धांत को फॉलो करते हैं क्या तो प्रभुपाद जी के सिद्धांतों को कैसे फॉलो कर रहे हैं फिर मतलब हर बात कह दो जिसको जहां जो सही लगे व अपने मतलब की ले आए वही तो है ऐसी फिल्म बनाओ जिसमें सब तरह की स्टोरीज हो रोमांटिक फिल्म भी डाल दो मसाला बना दो मसाला मूवी बचपन के बिछड़े हुए बच्चे मिल जाते हैं मां बाप से और भाई वगैरह मिल जाते अपने भाइयों से और उसके बाद एक कोई लव ट्रायंगल भी चल रहा होता है उसी में और उसके बाद हि बॉर्डर पर वो भी हो रही होती है आक्रमण हो रहा होता है पाकिस्तान के द्वारा देशभक्ति भी आ गई और धार्मिकता भी आ गई धर्म परिवर्तन के सीन भी हो जाएंगे सारा सब कुछ डाल लो कुछ बच ना जाए कोई विषय बच ना जाए ऐसा करो कि सबको पसंद आ जाए हमारी कोई ना कोई बात सबको यह सिद्धांत नहीं होते
00:29:23:02 हैं है ना सिद्धांत क्या होता है रामो दुर ना भी भाष राम दो प्रकार की बातें नहीं करता रामो विग्रहवां धर्मा है ना राम साक्षात धर्म का स्वरूप है यह सिद्धांत नहीं होते हैं और आपने कहा कि वह जो है अवद जो शंकराचार्य जी हैं वह वेदों के विरुद्ध जो [संगीत] मायावादी आवश्यकता नहीं है इस वीडियो में अगर आपने क्योंकि थोड़ी बहुत चर्चा की है तो मैं बताता चलूं जिस श्लोक के आधार पर ये कहा जाता है कि भैया मायावादी सिद्धांत गलत है उस श्लोक में
00:30:04:28 मायावादी विरुद्ध मायावादी शंकराचार्य जी ने अपने अपने सिद्धांत को ख्या पित किया है यह बात अन्य कई वैश्णवा चार्य ने भी मानी है कुछ ने नहीं मानी है मगर कुछ ने मानी भी है और आदि शंकराचार्य ने तो स्वयं माना ही है कि उन्होंने वेदार्थ करते हुए मायावादी किया है तो उनका जो वेद वेदार्थ है जो वेदांत है का जो वो अवैध मायावादी मायावादी सब चीजें सोचा करिए और एट दी एंड अगर भविष्यवाणी कर दी गई है शास्त्रों में कि भैया ऐसा ऐसा कुछ होगा वहां पर संकेत किए गए हैं नाम तो लिया नहीं गया है अगर भविष्यवाणी कर दी गई है सांकेतिक दृष्टि से कि भैया कोई ले वो महिला है मातृ शक्ति है वो डायन है तो आप बस उससे मिलता जुलता मिल जाएगा और उसको जांच होगे नहीं परखो ग नहीं जाकर के उसको मार डालोगे डायन इसलिए क्योंकि शास्त्र ने कहा वो भी संकेत में परख के नहीं तार्किक दृष्टि से नहीं देखोगे कि वो डायन जैसा व्यवहार कर रही है कि नहीं कर रही है हा बौद्धों को क्यों नहीं हरा दिया था आप लोग तो थे ना आपकी तो परंपरा सनातन है क्यों नहीं परास्त कर दिया था बौद्धों को क्यों शंकराचार्य की फिलॉसफी को आना पड़ रहा
00:31:20:13 है हरा ब दो को आज भी हरा दो नहीं हरा पाओगे शंकराचार्य के बनाए हुए घेरे में बैठ कर के अपनी अपनी सब लोग कुलाची मार लो यही तो है शंकराचार्य ने जो सुरक्षा का घेरा बना दिया नास्तिकों को हरा कर के उसके अंदर बैठ के खूब शंकराचार्य को गाली दे लो और फिर नास्तिकों से किसी दिन सामना हो जाए तो शंकराचार्य जी के पीछे छुप जाना जाकर के हरा भैया इनको ईश्वर को ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध
00:31:52:26 करो तो अगर शास्त्रों ने कोई बात कह दी है सांकेतिक दृष्टि से तो अगर आपको लग रहा है कि इसी के लिए संकेत किया गया है तो तर्क से भी तो देखोगे सिद्ध करो उनका तर्क से खंडन करो उसका हमारे आचार्यों ने किया आपने सीखा कि नहीं सीखा आचार्यों से कर दो खंडन कर दो सिद्ध अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान अरे तुम तो शास्त्रों को ना मानने वाले हो खुद कह रहे हो कि हमने शास्त्रों को नहीं मानते शास्त्रों में तो असमे यज्ञ है प्रपंच बातें बता रहे हो तो तुम काहे केलिए बात बता रहे हो कि हमारे आचार्यों ने किया वो किया है और अगर किया है तो आपने तो जान लिया ना कैसे किया है आ जाओ कर दो उनको सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म दे देना आदि शंकराचार्य जी का खंडन करते हुए नहीं दे पाओगे तो यह सब व्यर्थ की बातें हैं जो आप लोग किया करते हो ठीक है आगे देखते हैं
00:32:52:09 के माया वाद शास्त्रम प्रन बौद्ध उते मतम देवी कलो ब्राह्मण मूर्ति भगवान शंकर पार्वती को बोल रहे हैं य स्वीकार नहीं करते इवन हमारे पूरी पीठाधीश्वर जो शंकराचार्य जी है उनको किसी ने प्रश्न पूछा था किकन वाले ऐसा कहते हैं व पॉलिटिकल डिप्लोमेटिक आंसर दिया था उन्होने व आंसर नहीं दिया परान में है या नहीं उल्टा बटा बुला बुला के बहुत कुछ घुमा दिया था बात को है से संबंधित है वो बारबार शंकर परंपरा पर विशेषत आक्षेप लगाती है कि शकर जो शंकर आचार्य है वे मायावा के समर्थक है इस हेतु पद्म पुराण का एक लोक बारबार उत करते हैं पद्म पुराण के उत्तरखंड के अध्याय का है के लिए मान लीजिए कि यह श्लोक या यह श्लोक प्रक्षिप्त नहीं
00:33:54:08 है कालिका पुराण में भी कुछ वचन है आजकल मैं मंत्र तंत्र यंत्र नामक एक तंत्र का ग्रंथ लिख रहा हूं कालका पुराण आदि सब मेरे पास है वाम मार्गी कालिको के लिए यह सब वचन चरितार्थ होते हैं दूसरी बात यह है कि थोड़ा विचार कीजिए माया बाद का अर्थ क्या होता है ब्रह्म विहीन मावाद या ब्रह्म सहित मावाद इस पर विचार कीजिए क्या वेदांता प्रस्थान
00:34:36:20 में उपनिषदों में ब्रह्म सहित माया से जगत की उत्पत्ति मानी गई है या केवल माया से इंद्रो माया भी पुरूप यते उपनिषद गीता ही ले लीजिए गीता की प्रसिद्धि अधिक है मम यो म ब्र हम म प्र सरा परवत ब्रहम सक्ति प्रकृति राल ब्रहम सत्यम जगन मिथ्या शंकराचार्य ने इस चचन को को किया उ किया है या वचन शंकराचार्य का बनाया हुआ नहीं है
00:35:23:22 रा ऐसी स्थिति में भगवान जो जगत बन जो लोग भगवान को जगत का उपादान कारण और निमित्त कारण दोनों मानते हैं मैटर और मेकर दोनों मानते हैं वे तो केवल माया को नहीं मानते केवल शक्ति को नहीं मानते शक्तिमान को भी मानते हैं ना परमात्मा को माया से अगर परहेज तो उपनिषदों को मानना छोड़ दीजिए भागवत को मानना छोड़ दीजिए सब जगह सृष्टि की उत्पत्ति में जिस शक्ति का वर्णन किया गया है स्वेता ले लीजिए इसको क्या करिएगा मायाम प्रकृति विद्या माया माने प्रकृति प्रकृति का अर्थ माया अगर उपनिषद को मानते हैं वेदा शास्त्र को मानते हैं तो भगवान जो सृष्टि बनाते हैं उन्हें कोई शक्ति की अपेक्षा है या नहीं मिट्टी से जो घट बनता है तो घट पाता नाम की शक्ति चाहिए या नहीं आप दौड़ते हैं तो दौड़ने की क्षमता आपने चाहिए या नहीं स्वाभाविक ज्ञान
00:36:38:26 ल क्रिया हम आपको भी विज्ञान में कोष के माध्यम से ज्ञान शक्ति मनोमय कोष के माध्यम से इच्छा शक्ति प्राणम कोष के माध्यम से क्रिया शक्ति प्राप्त है इसलिए अच्छा चैत महाप्रभु के सिद्धांत को कालांतर में कटर द्वैत वादी मधवा चार्य के सिद्धांत से जोर दिया गया माध गौरेश्वर नाम दे दिया गया चैतन्य महाप्रभु का मूल सिद्धांत माधवाचार्य जी का द्वैतवाद ताल बेल नहीं खाता अच्छा अंत में थोड़ी देर के लिए हम चैत महाप्रभु को क्योंकि भगवन नाम की दीक्षा उन्होने गया बिहार में मध संप्रदाय के सं सेली और बाद में में और जो सन्यास आश्रम में दीक्षित हुए भारती नामा सन्यासी के द्वारा थोड़ी देर के लिए मचार का ही अनुगामी चैत महाप्रभु को मान ले भगवत गीता के 1 अध्याय का अंतिमा शलोक है मम जन
00:37:52:07 भत पर इस पर शंकराचार्य का भाष्य है वही मधवा चार जी ने संक्षेप में लिख दिया व मायावादी होही गए हम लोग के सामने दाल नहीं लते ना उनको बला दो जिन्होने ग्रंथों को ना देखा होगा हम लोगों के पास एक अरब 97 करोड़ लाज 118 वर्षों की गुरु परंपरा का जन है फ मार के कोड़ नहीं सकता समझ दूसरी बा ब मान होली है
00:38:28:18 प्रबोधा नहीं चत मवा आप देख ली और मैं संकेत करता हूं ध्यान पूर्वक सुनिए जब अंग्रेज व्यापारी बन करके आए डिया कंपनी के माध्यम से तो कालांतर में भारत के बादशाह बन ग इतिहास इतिहास अब जब बाबा बन इस वाक्य पर ध्यान दीजिए आज से नहीं 74 से कह रहा हूं 7 ज इनकी फैक्ट्री वृंदावन में वही 7 से रह रहा था इस पद पर आने के सात दिन पहले त साल में अभी भी 20 दिन वृंदावन में रहता हूं अपने आश्रम में थोड़ा ध्यान दीजिए जब व व्यापारी बनके आए थे तो बादशाह बन गए अब बाबा बन कर के करोड़ों युवक युवतियों को उन्होने दी है और उनके द्वारा दीक्षित कोई भी व्यक्ति अपने को हिंदू नहीं कहता कौन कहता है अब हिंदुओ के शिष्य होकर वाले अपने को हिंदू नहीं कहते भारत के विखंडन का कितना बड़ा सय भारत शासन चल
00:39:44:13 रहा गुरुदेव के लिए आप बोल रहे हो कि उन्होंने बातों को घुमा दिया उन्होंने सीधा सरल जवाब नहीं दिया उन्होंने सीधा जवाब दिया था आपको समझ में नहीं आया तो बात अलग है आप हमसे मिलिए हम बताते गुरुदेव ने क्या जवाब दिया था अगर उस श्लोक को प्रक्षिप्त ना भी माना जाए वैसे कई पूर्वा चार्य ने उसको प्रक्षिप्त माना है अगर उसको प्रक्षिप्त ना भी माना जाए तो व आदि शंकराचार्य जी के लिए उपयुक्त सिद्धि नहीं होता है क्योंकि आदि शंकराचार्य जी का शंकर का अवतार होना जहां जहां से सिद्ध हो रहा है वहां पर उनको वैदिक और वेद धर्म वैदिक धर्म की स्थापना करने वाला बताया जा रहा है और यहां पर जिस मायावादी बात की जा रही है वो वेद विरुद्ध मायावादी साथ उन्होंने यह भी बताया गया प्रक्षिप्त ना भी माना जाए तो वो फिट बैठता है कापालिक का जो कापालिक के लिए जो ग्रंथ लिखे गए थे जो दक्ष के यज्ञ में जो श्राप मिला था शिव गणों को और विष्णु के गणों को उनके उद्धार के लिए शिव जी जो शास्त्रों की रचना करने वाले थे ऐसे शास्त्रों की जिन पर चलते चलते जन्म जन्मांतर या किसी प्रकार से जो उनको श्राप लग गया है वह वेदों से दूर रहते हुए भी किसी प्रकार से वेदों तक आने का प्रयास करें उनका फिट बैठता है देवी भागवत में बात आई है तो कितनी तरह
00:40:59:14 की चीजें हैं उसमें जो आप क्लेम कर रहे हो वह सब क्लेम ही है आपके कभी सामने आते नहीं हो जो जिससे कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए और फिर हर तरह की बात कर लो हम भैया शास्त्रों को इसलिए नहीं मानते क्योंकि अद यज्ञ नहीं होता है या नियोग नहीं होता है अरे भैया आपको समझ में नहीं आता है आपको समझ में आया है क्या जो आप अपने शास्त्रों के लिए इतने गणित तरीके से बात कर रहे हैं कि शास्त्रों को इस समय उपयोग में नहीं लिया जा सकता क्योंकि भैया वहा यह होता था फिर कह रहे हो कि हमारे प्रभुपाद जी बौद्ध की तरह बुद्ध भगवान की तरह थे अरे भैया बुद्ध भगवान की तरह थे तो बुद्ध भगवान की तरह रखो ना उहे फिर क्यों यहां पर प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो चलिए आगे देखते हैं आप लोग खुद स्वीकार करते हो कि शंकराचार्य की वजह से आज हिंदू धर्म का अस्तित्व है तो भाई नास्तिकों को परास्त करने के लिए अपनी बात समझाने के लिए क्यों लाना पड़ रहा है आपको कोई और है गलत सिद्धांत कहां की थ्योरी है ये क्या सत्य से झूठ को नहीं काटा जा सकता ये कहां का सनातन सिद्धांत है कि नास्तिकों को वो करने के लिए आप जो है लेके आ रहे हैं गलत सिद्धांत को सिद्धांत तो आप आपका वाला सिद्धांत ही सर्वश्रेष्ठ सिद्धांत है ना उससे लाओ
00:42:14:24 नास्तिकों को कर दो परास्त आज ही कर दो छोड़ो उस काल में किया कि नहीं किया शंकराचार्य को आना पड़ा तो ये झूठी क्यों क्या कहते प्रोपेगेंडा फैला के रखा है फिर आप जो है कह रहे हैं कि जो है धर्म में वापस लाए हम धर्म में वापस लाए आप जो है उनको धर्म में वापस ला रहे हैं यह फिलोसोफी देकर के कृष्ण और अल्लाह एक है सनातन धर्म में आप वापस ला रहे हैं अगर आप अपने धर्म की गलत व्याख्या करके उस गलत व्याख्या से अट्रैक्ट करके सामने वाले को वापस ला रहे हो तो आप धर्म में नहीं ला रहे हो उन्हें आप उन्हें अधर्म में ला रहे हो वो धर्म नहीं है अधर्म है सब कांटे की नोक वाली बातें हैं सिद्धांत वादी बनी है सिद्धांत वादी जो मन में आया वो बोल दिया बस किसी तरीके से मीठा मठा लग जाए लोगों को सुनने में आहा हा भाई आचार प्रशांत वाली बात है आचार्य प्रशांत और ये जग्गी वासुदेव और एक वो तुम्हारा ओशो इस तरह की बातें करवा लो सब मीठा मठा हो जाएगा आपका कहना है कि आज तक इस कौन ने कितने लोगों को हिंदू बना दिया है ना आपको क्या
00:43:29:24 लगता है कि कोई व्यक्ति अगर हिंदू से क्रिश्चन बनेगा या क्रिश्चन से हिंदू बनेगा तो उसकी उसका जो है पहचान कैसे होगी नाम से या वह क्या आडलज मान रहा है उससे आपके यहां का जो व्यक्ति है वो जाकर के कैथोलिक चर्च खोल रहा है वहां जाकर क्राइस्ट के बारे में लोगों को पढ़ा रहा है य सब नहीं मालूम क्या आपको हा फिर कह दोगे वो अज्ञानी हम क्या करें कहां से सीखा भाई कहां से बना ऐसा जब आपने व्यक्ति के अंदर आइडल जीी उसकी चेंज कर दी वह अपना नाम कुछ भी रखे सर्टिफिकेट बनाना लगाना जरूरी है क्या कि मैं मैं जो है नाम से हिंदू रहूं और मैं जो है नमाज पढ़ूं जाकर के मैं नाम से हिंदू रहूं मगर कुरान के ईश्वर में मेरी श्रद्धा हो जाए मैं नाम से ईश्वर रहूं मगर बाइबल के ईश्वर में मेरी श्रद्धा हो जाए और क्योंकि मेरा नाम जो है हिंदी नाम है तो मैं हिंदू कह लाऊ वही तो आप कर रहे हो भाई जब आपने क्राइस्ट के प्रति उनको आस्थान वित कर दिया अल्लाह के प्रति उनको निष्ठावान बना दिया शिव से आपने द्रोह करा दिया माता दुर्गा से आपने द्रोह करा दिया राम जी से आपने द्रोह करा दिया पूर्ण नहीं है पूर्ण नहीं है मगर कृष्ण क्राइस्ट और यहोवा एक है हा तो उनकी
00:44:44:27 निष्ठा हो गई कि नहीं हो गई और कैसे होते हमारी बिटिया के 35 टुकड़े आप जैसे लोगों की वजह से जो करते हो ना ईश्वर अल्ला तेरो नाम ये सब जो करते हो उसी की वजह से होते उसको नहीं बताया कि हमारे ईश्वर ने सिखाया रल सदा चली प्राण जा परवचन ना जा उसको आप लोगों ने य नहीं सिखाया कि हमारा ईश्वर अलग है हम उसी ईश्वर को मानते हैं जो सर्वशक्तिमान है अबाध है क्योंकि आप तो खुद ही अब बाधित करते हो ईश्वर को तो सर्वशक्तिमान के बात क्यों करोगे है ना दूध दही की थ्योरी से और ना जाने कितनी थ्योरी लेकर के चलते हो बाधित करते हो ईश्वर को फिर डंका पीटते हो कि हमारा शास्त्र सम्मत है शास्त्रों को मानने की बात आती है कि भैया आज के टाइम में शास्त्र फॉलो कर सकते हैं क्या वहां पर तो इसलिए कहना पड़ा क्योंकि वो वहां मुस्लिम कंट्री थी इसलिए ऐसा कहना पड़ा बुद्ध की तरह से कहना पड़ा मगर है हम प्रमाणिक है हम वैदिक कितनी तरह की बातें करोगे भैया जातिवाद जातिवाद जातिवाद से सब कुछ नष्ट हो रहा है थोड़े दिनों बाद कहने लगना
00:45:55:02 मातावादी सामने वाला कहे मुझे अपने धर्म मुझे अपने धर्म में अगर रखना है तुझे तो अपनी माताओं को दे मुझे बहनों को दे मुझे तो फिर ऐसे ही वीडियो बनाना छोड़ दो मातावादी वाद सही है मगर व्यवस्था मूलक हर उस चीज को जिसको लेकर के समाज में बातें बनने लगे या समाज ना समझी के कारण अगर उस चीज को समझ ना पाए उसके बारे में गलत प्रचार किया आप जैसे ही लोगों के द्वारा आप जैसे ही लोगों के द्वारा उसके बारे में गलत प्रचार किया जाए तो हर उस चीज को जिसको लोग समझ नहीं पा रहे हैं और उसकी वजह से विवाद हो रहा है तो हर उस चीज को धन से काटते जाओ आपने आपको किसने अथॉरिटी दी है कि अमे यज्ञ का क्योंकि पालन नहीं होगा तो इसलिए वर्ण व्यवस्था को भाड़ में जाने दो किसने अथॉरिटी दी है डिक्लेयर करने की तस्मा शास्त्रम प्रमाणम भूल गए तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है जातिवाद बुरा है वोह कह रहे जाति धर्मा कुल धर्मा शाश्वत वही भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं जिनकी जिनका भक्त होने का पाखंड
00:47:10:06 करते हो आप लोग ढंडोरा पीटते हो बहुत बड़े भक्त है उनके वही भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं वही कह रहे हैं जाति धर्म कुल धर्म शाश्वत महाभारत का श्लोक आपने पढ़ लिया अच्छी बात है आप ही खुद कह रहे हो ब्राह्मण का भाव प्राप्त हो रहा है हां उसका उपयोग विनियोग ब्राह्मण के रूप में समाज करे इसके लिए नहीं है इस प्रकार के जो शास्त्रों में वर्णन दिए गए कि अगर किसी ने जीवा पर किसी की जीवा पर जो है भगवान का नाम हो गया उसके अंदर ब्राह्मण आ जाएगा या वो जो है जिसने सारे वेद पढ़ रखे होंगे उसके बराबर हो जाएगा ये सब उसकी अपनी उपलब्धि है कि उसकी भक्ति से उसको क्या प्राप्त होने वाला है इस विषय में शास्त्रों के इन प्रमाणों का परवन है हा वरना क्या तोते को भी हम लोग आचार्य बनाकर बिठा
00:48:06:08 लेंगे स्त्रियों को भी जनेऊ करा दो क्योंकि उसकी जीवा भी भगवान का नाम है आपके जो गोस्वामी जी है वो तो लिख रहे हैं कि नहीं भले ही वो क्या कहते हैं वो चांडाल के घर में भी उत्पन्न हुआ हो मगर अगर उसकी जीवा पर भगवान का नाम है तो मुक्त हो जाएगा मगर यदि उसकी इच्छा है ब्राह्मण उचित कार्यों में कार्य करने की तो उसको अगला जन्म लेकर नया शरीर ब्राह्मण का शरीर प्राप्त करना होगा अरे भाई जिस व्यवस्था का कोई उपयोग ही नहीं है व अवस्था कैसी जब अपने दायित्व से जी चुराना भी दायित्व हो जाएगा जब अपने दायित्व से मुंह फेरना ही धर्म हो जाएगा तो ऐसे दायित्व की आवश्यकता ही क्या है कोई सुरक्षा करने वाला व्यक्ति है सुरक्षा में उसको कोई दिक्कत आ रही है करने में और उससे जी चुराना उसके लिए वो हो गया धर्म वो भैया लोगों को पढ़ाने लगा अपने सुरक्षा से जी चुराने के लिए लोगों को पढ़ाने लगा तुमने कह दिया ब्राह्मण है फायदा क्या है उसको ब्राह्मण कहने का क्योंकि जिस दिन हम उसके पास ब्राह्मण के लिए जाने लगे उसको अगर कष्ट हुआ वो फिर बदल देगा अर्जुन ने भी तो कहा था मैं जा रहा हूं भगवान ने कहा तो क्षत्रिय धर्म युद्ध लड़ना तो अर्जुन तर्क दे सकता था अब मैं गायत्री मंत्र पढ़ूंगा जा रहा हूं मैं कथा कहूंगा
00:49:21:12 भगवान की व्यास गद्दी बैठूंगा लो भगवान कृष्ण भी व्यर्थ की बातें करते थे भगवत गीता में आपके तो व जनल मैनेजर कही रहे हैं गीता उतनी रिलेवेंट नहीं है आज के टाइम में आपने भी कह दिया रिलेवेंट नहीं है मैं समस्त सामान्य जनता को कहना चाहूंगा जितने भी यह सनातन का चोला ड़ करके है ना जो ऐसे तत्व सनातना भाषी तत्व यह सभी तत्व कहीं ना कहीं यह जरूर कहेंगे कि शास्त्रों को आज हम पालन नहीं कर सकते बस यही कहेंगे वो वो यह नहीं कहेंगे कि को व यह क मतलब व यह जरूर कहेंगे कि शास्त्रों का हम पालन नहीं कर सकते इसलिए हमने थोड़ा सा धर्म को चेंज किया है अभी आर समाजी आचार्य आ थे उन्होंने भी कह दिया ऋषियों ने जो लिखा है दयानंद ने लिखा है उसको भी हम बदल देते हैं देश काल परिस्थिति के अनुसार इनके भी लोग कहते हैं देशकाल परिस्थिति के अनुसार बदल देते हैं यह अपने मन से बदलेंगे फिर बदल दिया इन्होंने और जो प्रामाणिक लोग होंगे सनातन पक्के पक्के सनातनी वो क्या कहेंगे कि अगर देश काल परिस्थिति अनुसार हम धर्म का पालन नहीं कर पा रहे हैं तो ठीक है यह आपातकालीन धर्म के रूप में इसको उपयोग करेंगे इसका आलंबन लेंगे मगर धर्म तो वही है यह बताएंगे कि इतने इतने अंश
00:50:36:19 में हम धर्म का आलंबन नहीं ले पा रहे आपातकालीन धर्म यह अंतर है प्रामाणिक और अप्राम में अप प्रामाणिक जहां पर भी उसकी सुलभता होगी वहां तुरंत शास्त्रों को नकार देगा खुद की बात को धर्म के रूप में ख्या पित कर देगा इस सच के आसपास वाले झूठ को समझिए और आप कितनी तरह के मैं तो इसी वीडियो को देख देख कर के मेरे मन में यही आ रहा है कि आपने क्या किया इसमें कितने प्रकार की बातें कही है अब मैं इस तरह के शब्द उपयोग ना करूं तो मैं क्या करूं दोगले पन की भी हद होती है एक तरफ कह रहे हैं कि हम उनको वैदिक कर्म थोड़ी ना कर देते हैं हम अगर किसी को ब्राह्मण बना आपने जब यह मान लिया कि ब्राह्मण तो वाकई में वही होता है जो जन्म से भी होता है फिर कर्म से भी होता है उसके बाद फिर आपने कहा कि हम आज क्योंकि ब्राह्मण नहीं मिल रहा है वो बात अलग उसम भी चीज है मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है मगर क्योंकि आज आपको नहीं मिल रहा है तो इसलिए आप जो है लोगों को परिवर्तित करते हैं मगर आप उनको कोई वेद वैदिक कर्म में थोड़ी लगाते अरे क्या कह रहे हो भाई क्या है वेद जब आपने गायत्री दे दी किसी को तो वैदिक कर्मी तो हो गए वह बात और है कि उनको त्रिकाल संध्या आता है कि नहीं आता है जने बदलना आता है कि नहीं आता व बात और है
00:51:51:24 है ना मगर आपने उनको वेद ही दिए हैं तोय ढंडोरा क्यों पी रहे हो क्यों झूठ बोल रहे हो और किससे बोल रहे हो गायत्री देने का अर्थ ही होता है वेद दे देना वैदिक कर्म दे देना किसी को गायत्री में ही सब कुछ है नहीं मालूम अध्ययन की आवश्यकता है आपको आपने जो किसी को ब्राह्मण घोषित करने के लिए मापदंड फिक्स किए हैं कि इतने वर्ष तक हम उसे चेक करते हैं सब जो मापदंड है किसी को कि हिंदुओं का उसको आचार बना दो अगर वह मलेच्छ भूमि में भी जन्मा है मलेच्छ है कुछ भी यह सब जो आपने कर रखा है खिलौना यह मापदंड कहां पर दिए हैं शास्त्रों में तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है कहां है कि क्या क्या उसका देखना पड़ेगा कितने कितने समय तक जिससे कि मान लिया ब्राह्मण हो गया हा हा कहां से मापदंड आपने फिक्स किए हैं मधवा चार्य जी की नियमावली आपने जो मधवा चार्य जी द्वारा कहते हो पूर्वा चार्य से आई वही विधि का पालन करते हैं कैसे चेक करते हो आप उसके साथ उसके घर पर जाते हो क्या कैसे चेक करते हो उसके कर्मों
00:53:07:01 को कैसे चेक करते हो अपना एक सिपाही छोड़ देते हो क्या कि उसके घर में ट्रांसमीटर लगा देते हो वीडियो कैमरा लगा देते हो निगरानी और एक बात और सुन लीजिए घटनाओं का घटित होना प्रमाण नहीं होता है महाभारत में लिखा है उन्हें शास्त्रों द्वारा न्याय धर्म उचित रूप में स्वीकार किया जाना प्रमाण होता है रामायण में अगर रावण ने सीता का हरण कर लिया तो प्रमाण नहीं हो गया सीता का हरण करो रावण को विग्रहवां धर्म नहीं कहा शास्त्रों ने राम को कहा तो अगर कोई घटना घटित हो रही है तो उसको हम आधार नहीं बना सकते कि उन्होंने ऐसा किया इसलिए हम भी ऐसा कर रहे हैं आधार शास्त्र है रामानुजाचार्य जी भगवान ने क्या कहते हैं अपना नया मत चलाया क्या उन्होंने जो उनसे पीछे की उन्होंने परंपरा बताई थी क्या उन्होंने कहीं पर उस परंपरा का विरोध किया है सिद्धांतों में आपने किया है सबसे पहली बात तो आप स्वीकार करते हो गुरु विरोध आपके यहां हो रहा है और दूसरी बात यह है कि आप जिसका होने का क्लेम करते हो उसका विरोध करते हो आप फिर कहते हो हमारे पास परंपरा से आ रहे भागवत आपके पास श्रीधर स्वामी से आ रही है
00:54:22:06 फिर कहते हो मधवा चार वाले हैं मायावादी आपके य सन्यास दीक्षा होती है चैतन्य महाप्रभु स्वयं को सन्यासी मायावादी सन्यासी कहते हैं सीध स्वामी को प्रामाणिक मानते हैं फिर वह चैतन्य चैतन्य महाप्रभु को भी आप नकार दो कि अब तो हम नया टीका लिखेंगे भले ही उन्होंने कहा जो सीदर स्वामी के विरुद्ध नया टीका लिखेगा वह मेरे लिए व्या के समान है आप ही के ग्रंथों में लिखा है ना तोय कौन से आधार होते हैं आपके बात करने के कितनी सारी बातें बोलोगे भैया सोच तो लो आपका सिद्धांत क्या है पहले कहोगे कि हम पीछे से चलता हुआ आ रहे हैं वही मानते हैं फिर बोलोगे कि हम जो है जैसे सबने अपना मत नया चला दिया वो मानते हैं हमने भी अपना नया मत चला लिया तो पहले तो मान लो ना कि नया मत है फिर क्यों कह रहे हो परंपरा से हैं रामानुजाचार्य भगवान ने कहीं भी जिनको अपना गुरु बना बताया है उनका विरोध नहीं किया सिद्धांतों में आपके यहां विरोध है मधवा चार्य जी दे रहे हैं द्वैत आप दे रहे हो चिंत भदा भेद मधवा चार्य जी दे रहे वर्ण व्यवस्था आप कह रहे हो आज वर्ण व्यवस्था मानने लायक है ही नहीं मधवा चार्य जी भागवत दे रहे
00:55:37:08 हैं उनके द्वारा जिन जिन चैप्टर्स को माना नहीं गया स्वीकार कर दिया गया श्रीमद् भागवत पुराण के उन चैप्टर्स को आपके स्वीकार कर लिया गया क्यों यह गुरु विरोध होता है आप गुरु के द्वारा दिए गए सिद्धांतों का विरोध किए बिना उसको एक्सप्लोर कर सकते हैं सिद्धांत को व्याख्या कर सकते हैं और नए नए तर्क और प्रमाण के साथ रख सकते हैं उन्हीं के सिद्धांतों को और अच्छे से समझा सकते हैं मगर विरोध नहीं कर सकते और अगर विरोध कर रहे तो फिर उस परंपरा के नहीं कह सकते ये क्या कर रहे हो भाई जी का उदाहरण देते हो तुलसीदास जी लिख रहे हैं शूद्र ना पूजू वेद प्रवीणा यह नहीं पढ़ा आपने रामचरित मानस में तो केवल उतना पढ़ते हो क्या रामपाल की तरह रामपाल गैंग है जो व भी यही करता है भगवान श्री कृष्ण ने अगर यह कह दिया कि हे अर्जुन तू उस ब्रह्म की उसमें जा या हे अर्जुन तू उस ब्रह्म की खोज कर तो बस ब्रह्म अलग हो गया यह छोड़ देंगे कि व कह रहे वो ब्रह्म मैं ही हूं वह छोड़ दो वही करते हो क्या रामनाचार्य
00:56:52:08 रामानंद चार्य की बहुत सारे जो शिष्य जसे कबीर संत संत कबीर जी संत धना भगत संत राय दस रविदास जी मीराबाई के गुरु बने क्याय लोग सिद्धता में इसमें कोई संदेह है इनकी सिद्धता में ये लोग कौन जाती कबीर दास रविदास मीराबाई रसखान किसने त्रिर सन्यास लिया था इनम से कौन बना बैठ के बन के बैठा था जगतगुरु
00:57:28:24 कौन ब्राह्मणों से अपने पैर पुजवा रहा था कोई नहीं मीराबाई को जने दे दिया था क्या उनके जीवा पर तो भगवान का नाम था दे दो उन्हे भी जने उदाहरण लो तो पूरा लो भाई वह अच्छे विदू विदूषक बने विद्वान बने भगवत तत्व को समझने वाले बने मगर वो प्रामाणिक आचार्य के पद पर नहीं बैठ गए सब में अनियन गार्लिक वाला खाना मिलता है चाय कॉफी तो धरले से बी बिक रहा है हा और मैंने अपने आंखों से देखा है किसी का सुना हुआ बात नहीं है जिस मार्ग में वेंकटे भगवान का शोभा यात्रा होता है उधर ही एक भेल वाला भेल बना रहा है उसम सब कांदा पियाज सब रखा हुआ है कांदा उसी मार्ग में कुंड के
00:58:23:19 पास और लड्डू वाला के सब जानते ही है तो तब इनकी पंडिताई इ कहां गई थी इतने ब्राह्मण सब कहां गए थे के विष्णु कांती जाइए रा स्वामी टेंपल में दीवार से लग के जितने भी दुकान है जितने टो सब क्रिश्चन है सब क्रिश्चन है साउथ इंडिया में रामेश्वरम से लेकर सब क्रिश्चियन मुस्लिम भर गए हैं कैसे वहा तो इसकन नहीं था आप लोग ही ना थे इतने विद्वान है इतने ब्राह्मण आप लोग क्यों कश्चन म से रोका नहीं सब लोगों को वैसे इन बातों को मैं खींचना नहीं चाहता था मगर अब जब आप यह बात कर रहे कि उसी त्रि माला में पर्वत में यह हो रहा है वो हो रहा है तो क्या हम उसका विरोध नहीं कर रहे और हो क्यों रहा है क्योंकि जो प्रमाणिक जो वास्तविक परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत धर्म की शिक्षा लोगों तक पहुंच चाहिए वो नहीं पहुंच रही आप जैसे लोगों के कारण दुकाने खोल रखी है कदम कदम पर व्यक्ति अगर धर्म को ढूंढने निकलेगा तो भैया रास्ते में नकली धर्म के ठेकेदार मिलेंगे सनातना भासी मिलेंगे आदमी चकराए फिर क्या करेगा कंफ्यूज हो कर के संचय आत्मा
00:59:39:26 विनती हम तो सारी बात बोलने वाले हैं हम तो व्यक्ति को चकरा देंगे सिद्धांत उसको देंगे ही नहीं गुण गोवर हो गया वो तो सिद्धांत तो गया चूल्हे में और फिर आप जो यह बातें कर रहे हैं कि वह त्रिवा नहीं हो रहा है आपके यहां क्या हो रहा है अरे नंगा पकड़ा गया है नंगा नगन उसका गुप्तांग दिख रहा है कैमरे में क्यों हो रहा है भाई आपने तो बहुत सोच समझ के उसको ब्राह्मण बनाया था ना सालों की मेहनत के बाद क्यों पकड़ा गया क्यों आया उसका व वीडियो बाहर मार कुटाई हो रही है वो क्या है वैष्णव नहीं है क्या वो लोग
01:00:27:18 तो इस तरह की बातें करने से क्या मिल जाएगा आपको अरे भैया आपकी फिलोसोफी के अकॉर्डिंग तो भगवान श्री कृष्ण और उनके लोक में कोई कमी थी ना जो जीवों के अंदर चाह आई थी भोग करने की वही चा है ना ये भाग रहा है व्यक्ति तो उसको हम पर क्यों थोप रहे हो जुगनू और उल्लू सूर्य की ओर आकर्षित
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01:00:59:04 नहीं होते हैं टिमटिमाते हुए दिए इत्यादि की ओर आकर्षित होते हैं तो जुगनू और उल्लू का सूर्य की ओर आकर्षित ना होने में
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01:01:09:12 सूर्य की सामर्थ का दोष नहीं होता है जुगनू की जुगनू और उल्लू की असमर्थता का दोष होता है समझ में आया थोड़ा सा थोड़ा यह सिद्धांत होते हैं सिद्धांत संबंधों का त्याग करना पड़ जाए पर सिद्धांतों का त्याग मत करना यह आपके सिद्धांत है हा भैया वहा जो है वो क्रिश्चन भर रहे हैं अरे भाई क्यों भर रहे हैं आप जैसे लोगों के कारण जो आपने क्रिश्चन और मुस्लिम को एक कर दिया क्रिश्चन मुस्लिम हिंदू को एक कर दिया आप लोगों ने अब सब सोच रहे हैं कि हम क्रिश्चन होते हुए भी वही कर रहे हैं होंगे क्रिश्चन आपने ब्रज दिया है ना उनको तैयार किया है क्या हुआ था पटना में किस अवस्था में उसकी फोटोज आई थी तो थोड़ा सोच लो ट्रायल करके देते हो ना आप तो जनेऊ गायत्री क्या हो गया फिर उसको ट्रायल करके वो गायत्री जनेऊ देते हो जो कह रहा था गाली दे रहा था जो राम जी को सर्वशक्तिमान बोलने पर लड़ रहा था ट्रायल करके देते हो ना इस आप ही के लोग ये प्रूफ कर रहे हैं कि आप लोग इस तरीके से जो ब्राह्मण घोषित कर रहे हो
01:02:24:20 वो गलत तरीका है अ शस्त्री तो है ही प्रायोगिक रूप से भी उसका जो एमप्लीफाई कर रहे हो वह भी उसका गलत है वह लोग तो रामानुज जी नहीं थे ना जो पकड़े गए वहा जो आपका दंगा हुआ था स्कोन पटना में कैसे कैसे कुतर्क कर रहे हो भाई जातिवाद की वजह से क्रिश्चन बन रहे हैं हा जय भीम अरे आप लोगों के द्वारा कितने शूद्र बनाए गए आज तक कितने लोगों को शूद्र घोषित किया है आपके मंदिर में आप कितने लोगों को शूद्र घोषित करते हैं ब्राह्मण का तो दीक्षा दे देते हैं सबको ब्राह्मण दीक्षा हुई है मेरी ब्राह्मण दीक्षा हुई है यज्ञ पवित धारण करने का मंत्र तक आता नहीं होगा इस वीडियो को देखते समय जो स्कोन के लोग है ना वो देखना तुम लोगों को यज्ञ पवित धारण करने का मंत्र आता है कि नहीं यज्ञ पवित परमम पवित्रम पहली बार सुना होगा हरे कृष्ण से धारण करते होगे तुम
01:03:36:21 लोग टय मले छों का है तो क्यों यूज कर रहे हो अरे भैया ये जब जो ये जो प्रपंच रूपी संसार है नाय भगवान के विरुद्ध आए हो तुम लोग इसमें तो क्यों इसका यूज कर रहे हो इसके यहां की कोई भी किताब क्यों यूज कर रहे हो धार्मिक ग्रंथ क्यों यूज कर रहे हो धरती पर गिरा हुआ व्यक्ति धरती का सरा लेकर के उठता है जिस वायुयान को आकाश में उड़ना होता है वह आकाश में उड़ने से पहले अपने आप को आकाश में उड़ने लायक बनाने के लिए धरती का ही आलंबन लेता है इसलिए कर रहे
01:04:17:08 हैं हमने बहुत सारे चर्चों को मंदिर बनाया अरे तुम मंदिर चर्च बना रहे हो भैया कौन से हमारे जो पौराणिक सनातनी म मर जो ब्लू कलर के हैं देखो अपना मायापुर का जो आपने नक्शा दिखाया है कौन से एंगल से वह मंदिर लग रहा है मंदिर के नाम पर चर्च खोला आपने और चलो आपके मन में नहीं होगा कश्च आपने बोल दिया जो बोलना था आपके मन में नहीं होगा आपकी किताबें आपकी आइडल जीी आपका जो बड़ा कुटुंब है ना जीबीसी व यही सब कर रहा है देखो जा कर के
01:04:57:26 वो क्या था नाम रसमंडल दास बुक लिखी है इस्लाम और वेद में सामंजस्य का क्यों भाई क्यों दिखा रहे हो सामंजस्य का जब कुरान में लिख दिया गया कि इसके अलावा सभी किताबें गलत है क्यों बिठा रहे हो सामंजस्य ता भाई भीड़ चाहिए ना फिर भीड़ से दिखाओगे ना हमने देखो कितनों को हरे कृष्ण का जाप करवा दिया भले व किसी भी मंतव्य के साथ वो नाम ले रहे हो व भीड़ दिखाने के लिए अपनी दुकान के लिए क्रिश्चन बन रहे हैं या यह हो रहा है वो हो रहा है अरे माता सीता का हरण हुआ था कि नहीं राम जी के रहते हुए तो राम जी दोषी हो
01:05:45:14 गए कि अगर राम जी थे तो माता सीता का हरण क्यों हुआ है ना यही कह रहे हो ना कि अगर इतने ही बड़े वर्णा थे तो क्यों हो रहा है ये सब तो अगर ऐसा हो रहा होगा अगर कौरवों की संख्या ज्यादा हो रही होगी तो आप जैसे लोग आकर के कौरवों की चीजों को ही धर्म कहने लगोगे बदल दोगे शास्त्रों को क्योंकि लोग जा रहे हैं पलायन कर रहे हैं थोड़े दिनों बाद लोग कहेंगे मुझे माता से विवाह करना मुझे बहन से विवाह करना है तो क्योंकि लोग जा रहे हैं तो इसलिए आप लोग उसको भी बदल देना ठीक है ठीक है भाई आ जाओ आ जाओ हम करवा देंगे आ जाओ यही करो
01:06:28:27 ना शंकराचार्य के को कोर्ट में विवादास्पद है इससे आपके धर्म ब्रह्म पर क्या असर पड़ रहा है पटना वाली बात हम नहीं लाए थे आपने खींची हम उन बातों पर बात करते हैं जिन्हें सत्यापन का आलंबन नहीं चाहिए होता है आपने शिव और कृष्ण में भेद किया हां किया आप भी स्वीकार करते हो आपने ईश्वर अल्लाह को एक कहा हां कहा आप स्वीकार करते हो आप लोग आपके लोग स्वीकार करते हैं आपका टेक्स्ट स्वीकार करता है हम उन पर बात करते हैं य सब बातों पर बात नहीं करते हम यह नहीं कहते कि इस कौन का रित्विक में क्यों चल रहा है चल रहा है भाई होंगे कुछ सैद्धांतिक मतभेद आपस में होंगी कुछ चीजें अरे भैया कोई शंकराचार्य है या नहीं है इससे आपके धर्म ब्रह्म पर क्या फर्क पड़ रहा है यदि जो शंकराचार्य स्वयं को बताने वाला है और वह विवादास्पद है परंतु उनके द्वारा मिलने वाली जो उनके द्वारा प्राप्त होने वाला जो धर्म ब्रह्म है व वही धर्म ब्रह्म है जो प्रामाणिक शंकराचार्य जिनके जो निर्विवाद रूप से शंकराचार्य उनके द्वारा मिल रहा है तो क्या परेशानी आ रही आपको वो उनका क्या
01:07:43:27 कहते प्रासंगिक विषय कि वह शंकराचार्य के पद पर अभिषिक्त है कि नहीं है कि विवादास्पद है कि क्या है बात हो रही है कि आउटपुट क्या दे रहे हो आप को आपका तवे जो भी चल रहा है वो प्रभुपाद जी कह रहे हैं कि भैया मेरे बास कोई जो है गुरु नहीं होगा फिर भी गुरु बन रहे हैं यहां पर हा ब्रह्मचारी को सन्यासियों को ऑर्डर देने वाले जीबीसी वाले हैं जीबीसी में ग्रस्त भी है वाह सन्यासियों के ऊपर अधिकार है किसका ग्रस्तों का क्या हो रहा है
01:08:21:14 सब और फाइनली आउटपुट क्या दे रहे हो कि राम जी छोटे हैं मगर छोटे नहीं है क्या कहते हैं हरि और हर में भेद है मगर भेद नहीं है यही तो कर रहे हो विष्णु भगवान भी पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है 2.2 भगवत गीता वह भी पूर्ण है धीरे से बोल दो यही कर रहे हो ना य नाटक है धर्म नहीं है ये धंधा है का विरोध किसने किया था बताइए ब तो शंकर अनवा नहीं विरोध किया था सत्य घटना है तब तो इसको नहीं था तब कौन लोग थे ये लोग ही थे य ब्राह्मण लोग और य शंकर अनुयाई क्या कहते हो आप कि वो तुलसीदास जी की जब वो रामचरित्र मानस आई थी तो वह जो है शंकराचार्य जी के शिष्य थे मधवा चार्य जी के शिष्य नहीं थे क्या क्या क्लियर कट बात करने में शर्म आती है क्या इतनी इतना ज्यादा शर्मिंदा है क्या आप अपने विचारों पर अपने सिद्धांतों पर हर बात में आपको दोगलापन असत्य यह सब प्रकट करना पड़ता है तोय एक मूर्खता एनजीओ बोला गया एनजीओ
01:09:37:07 राघव म मेरा प्रश्न है उनका जो ट्रस्ट है व एनजीओ नहीं है क्या व संप्रदाय खोल के डोनेशन ले रहे हैं क्या ऐ को कर सकता है दुनिया में कोई भी संप्रदाय हो उसको एनजी खोलना ही पड़ेगा नेशन लेना है ना ट कैसे देंगे सब बाक चातु देखे मने नया नया आरोप लगाना एनजीओ एनजीओ के बिना कौन सा सस्ता है अगर है तो मैं मुझे बोलिए पुलिस को बोलता हूं अभी तुरंत
01:10:20:01 ही हम ये सभी संप्रदायों ने अपने अपने अकाउंट खोल रखे हैं वहां पर जीबीसी नहीं चला रही है कोई पीठाधीश्वर बैठा हुआ है आचार्य पद पर बैठा हुआ है व कोई कमेटी नहीं व बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की व कमेटी नहीं चला रही है उसको आप यहां पर संत का वस्त्र पहन करके बैठे हैं और आपको मुझे नहीं पता आप सन्यासी है कौन है ब्रह्मचारी है मगर आपके ऊपर अधिकार करने वाला कोई ग्रस्त भी है जो उस जीबीसी की कमेटी में है ये सब भूल जाते हो क्या यह होता कंपनी में यह होता है संस्थाओं में और कोई ऐसा सनातन सिद्धांत नहीं जो इस प्रकार से चलने की आज्ञा देता हो गुरु शिष्य परंपरा को अरे भाई सीधी सी बात है अगर गुरु शिष्य परंपरा चली आ रही थी तो आज आपका उत्तराधिकारी कौन है प्रभुपाद जी का उत्तराधिकारी जो उनकी गद्दी बैठा है क्या है उनकी गद्दी कौन बैठा उनकी गद्दी पर मधवा चार्य जी के य राम अनुज आचार्य जी के यहां पर है आपके य पर कहां है गद्दी कहां है कौन बैठा
01:11:34:13 है यह एनजी और संप्रदाय में अंतर एक लेख था दैनिक भास्कर से इन्होने छापा था बहुत पहले और स्वयं श्री भाई जीने उसके बाद अलग बात है रामचरित मानस प्रमाणिकता लेकर तो सब लोग ही संदे है इसका नहीं तीन काराम मिले जो हख का है जो अयोध्या कांड है उसका राज कपी है व कॉपी तो मल मिता नहीं लिखा गया है का बालकांड मिला अयोध्या में और य अ कांड और सुंदर कांड य तीन कांड जो है ओरिजनली स्कप मिला है घटना क्या हु सभी लोग मानते है कि मूल
01:12:21:26 रामायण में रामायण छपा गीता प्रेस गोरखपुर से संकलित रामायण है कहा गया कि जने रामायण लोग ने क कर लिया उसे ले ले ले बाकी य पर लिखा किसने किया था चमनलाल जी गोस्वामी और पंडित नंद दुलारे जी वाजपेई जी ने मिलकर तयार किया तो उस समय य जो शंकर लोग भी जहा हवा त लोग घूम जाते थे ना तो उन लोग ने बनाना शुरू कर दिया ऐसे ही दोहे इसलिए प्र ने कहा कि य तीन कांड में तो कोई संदेह नहीं है जो लि अपने हाथों से जो मिला नल स् बाकी में अवश्य ही कुछ ना कुछ दोष हो सकता है क्योंकि वो संकलित है रामायण में कुछ थट बा नहीं भी हो सकती है प्रश् तो उतर नहीं दे पाऊंगा लिखा ही नहीं है तो किसी का सुन सुन के जो याद था किसी को सुन सुन के लोगों ने उस उसको ट्राक किया अभ सोचिए इसम कितना प्रामाणिकता हो सत्य घटना बोल रहा जो है वो बोल रहा बना हु घटना नहीं है ये घटना है रामचरित मानस का य हम जाते थे पहले कभ बोलते नहीं बोलने मजबूर किया रामचरित मानस प्रामाणिक रूप से प्राप्त नहीं है हां पहली बात तो कह दो तुलसीदास जी प्योर वैष्णवी नहीं है हनुमान जी प्योर वैष्णव नहीं
01:13:36:26 है राम जी को मानते थे ना तुलसीदास जी प्योर वैष्णव नहीं है फिर कह दो कि तुलसीदास अच्छा समय पड़ने पर रामचरित मानस के उनको भी ले लो सब तरह की बातें कर दो जहां अपनी चाल चलनी हो वहां रामचरित मानस आपने कहा ना बुद्ध की तरह करते बुद्ध की तरह करते हो जब रामचरित मानस प्रामाणिक मानते व प्योर वैष्णव नहीं है तो लोगों को अट्रैक्ट करने के लिए क्यों रामचरित मानस के दोहे पढ़ देते हो फिर कहते हो हमने केवल वहां दूसरी कंट्रीज में किया था यहां भी करते हो वही कार्य रामचरित मानस प्रामाणिक प्राप्त है कि नहीं यह कौन बताएगा कौन बताएगा यह जो उनकी परंपरा के लोग हैं वो
01:14:25:09 और अगर ऐसे अगर आपको हार्ड कॉपी चाहिए ना तो ना वेद प्राप्त है हार्ड कॉपी में इस तरह से ना पुराण प्राप्त है कुछ भी प्राप्त नहीं है तो सब सब बेकार हो गया आज के टाइम में जो आपको किसी भी रूप से मिल रहा है तो गुरु शिष्य परंपरा डिसाइड करती है कि यह वह है कि नहीं यदि उनकी परंपरा ने उनके उनके गुं है उस उस किहा कोई नहीं होते वण प्राप्त नहीं है असली रामचरित मानस पुराणों में तो पुराणों में तो भगवान के रूप में भेद बताया गया लीला के आधार पर और वह भी अनन्य की रक्षा के लिए अखम जगह पर किसी को बड़ा कर दिया कहीं किसी को बड़ा कर दिया मगर आपने तो इस तरह से रामचरित मानस को बोल कर के आपने तो श्री राम जी के चरित्र को ही नकार दिया उनको ही आप प्रामाणिक सिद्ध कर दिया तुलसीदास जी की परंपरा प्रभुपाद जी को मानती है क्या आपने कहा शंकर अनुयाई थे उन्होंने विरोध किया था क्या प्रमाण है क्या प्रमाण है तुलसीदास जी किस परंपरा के थे प्रभुपाद जी किस परंपरा के थे भाई ना मधवा चार के सिद्ध हो रहे हैं श्रीधर स्वामी
01:15:40:13 का तो खुद ही विरोध कर रहे हो चैतन्य महाप्रभु का सीदर स्वामी का विरोध करने के कारण मायावादी कहने के कारण विरोध कर रहे हो और प्रभुपाद जी के गुरु जाकर के खुद दीक्षा ले ले रहे फोटो से तू मान ना मान मैं तेरा शिष्य मान ना मान मैं तेरा मेहमान तो मान ना मान मैं तेरा शिष्य जो लोग य दावा करते हैं सब कुछ जानते महामूर्ख है सब लोग सब कुछ नहीं जान सकते हैं हमारे संप्रदाय का अंतर नहीं तो बात है हम लोग जानते हैं तुम कैसे जानोगे भैया एक तरफ कह रहे हो कि हमारे संप्रदाय के बारे में हम जानते हैं आप कैसे जान लोगे फिर तुलसीदास जी के संप्रदाय में क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा वह आप जानते हो शंकराचार्य जी के संप्रदाय में क्या हो रहा है वो क्या नहीं हो रहा है वो आप जानते हो रामानुजाचार्य संप्रदाय में क्या हो रहा है क्या नहीं होहा व आप जानते हो मगर आपके संप्रदाय में क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा व सिर्फ आप जानते हो स्वीकार हम नहीं करते तुलसीदास जी को फिर स्वीकार करते भी हैं मोहम्मद ने हो सकता है सत्य लिख दिया हो मोहम्मद का हो सकता है सत्य लिखा हो मगर सत्य नहीं लिखा है अरे भैया पहले तय कर लो कि सत्य बोलना है या खुश करना है या तो सत्य लिख लो या फिर सत्य या फिर खुश कर लो लोगों को
01:16:58:10 जब कोई व्यक्ति किसी को खुश करने के लिए कहीं भी किसी भी कारण से झूठ बोलने लगता है तो उसकी क्रेडिबिलिटी खत्म क्योंकि यदि वह उनको बहलाने फुसला के लिए उनकी मन की बात कह सकता है तो हो सकता है वह आपको बहलाने फुसला के लिए आपके मन की बात कह रहा हो ये सब चीजें कभी विचार नहीं करेंगे बस काल का मेल पकड़ ली और दौड़ते चले जाओ रेलवे की पटरी पर सही मार्गदर्शन करने का मतलब यह है कि जो वेदा शास्त्रों के द्वारा हमें जो चीजें जो सिद्धांत दिए गए उनको छोड़ दो सबको शूद्र बना के रखेंगे शूद्र को गाली आपने बनाया है ना हमारे यहां शूद्र गाली नहीं है हमारे यहां शूद्र हमारा भाई है शूद को गाली आपने बनाया है जो विधि निषेध इत्यादि है लोगों के लिए अमुक अमुक चीजों के लिए उन सब चीजों को पनिशमेंट आपने बनाया है आप देखते हो शूद्र के अंदर अपराधी आप देखते हो शूद्र के साथ जो होने वाला व्यवहार है व एक पनिशमेंट है और हम उसमें व्यवस्था देखते हैं हम उसमें अपना भाई देखते हैं और अगर आप नहीं देखते तो कितनों को शूद्र बना रहे हैं आप और क्यों नहीं बना रहे क्या शूद्र है नहीं इस दुनिया में और जो है क्या उनको आप घोषित
01:18:13:14 कर रहे हैं कि आप शूद्र [संगीत] हो नहीं आप केवल ब्राह्मण घोषित करोगे कर्म कर्म ना वर्ण व्यवस्था का तो आल इसलिए हम थोक के बा ब्राह्मण बना देंगे सबको शूद्र रहित दुनिया क्षत्रिय रहित दुनिया वैश्य रहित दुनिया ब्राह्मण बना देंगे हम ब्राह्मण इसी से दुकान चलेगी नहीं तो बताओ कितने शूद्र बनाए वसुदेव कुटुंबकम का मतलब है सबको साथ लेकर के चलना आप तो शूद्र के अस्तित्व परही बर कर दे रहे हो जो शूद्र है उससे शूद्र उसकी पहचान ही छीन ले रहे हो जो उसके दादा परदादा से उसके पास उसको मिली है रोवर में अगर कोई हमारे धर्म में आना चाहता है अगर कोई भक्त बनना चाहता है तो उसकी कीमत बस यही है कि वो आचार्य बन जाए उसकी कीमत बस यही है कि वो हमारी बिटिया से विवाह कर ले यही है ना इसी शर्त पर ही कोई व्यक्ति घर वापसी कर सकता है व वो आर्य समाजी भैया अगर वो आना चाहता है इसलिए विवाह करा दो अपनी बिटिया का क्योंकि वह घर वापसी कर रहा है आप उसे आचार्य बना दो क्योंकि वो घर वापसी कर रहा है अरे भैया भक्त भक्ति करने के लिए घर वापसी नहीं कर सकते वो भगवान की सुंदरता से आकर्षित नहीं हो सकता वह
01:19:29:00 आचार्य पद से ही आकर्षित होगा हिंदू बहन बेटियों से ही आकर्षित होगा सिद्धांतों से आकर्षित नहीं होगा असतो मा सगम अतम जगम म मतया से आकर्षित नहीं होगा य धर्म भवती भारता से वो नहीं होगा नैनम चि सण नन पावक इन सब से आकर्षित नहीं होगा आचार्य पद से ही आकर्षित होगा ब्राह्मण पद से ही आकर्षित होगा यही लालच देकर के लाओगे उसको वापस कि आजा और फिर किसी दिन इसकन मंदिर में तू नंगा पकड़ा
01:20:09:02 जाना आजा हमारी बिटिया से विवाह कर ले उसके बाद किसी दिन उसके 35 टुकड़े करके छोड़ देना बैग में भर के ऐसे ही वापस लाओगे ना सब पंडित गरी पंडित पंडिताई पंडिताई करते रह गए चिया चुक गई खेत ब्राह्मणों को सुधारे पहले क्षत्रिय लाए ब्राह्मणों को सुधारे पहले कहां लिखा है मैं पकडा पाखंड हों की शसी लेकर के जीव पकड़ लूंगा मैं अरे शास्त्र से बोलो क्या पहले करना है क्या बाद में करना कैसे बोल रहे हो भाई क्या ब्राह्मणों को सुधारे चलो ब्राह्मण अपने ब्रा ला चलो काशी मेरे साथ चलो प्रयागराज मेरे साथ बैठा कितने ब्राह्मण तुमने तैयार किए ब्राह्मण को सुधारे स्वयं को सुधारो प्रभु स्वयं को ब्राह्मणों को सुधारे पहले तब क्षत्रिय की बात करें क्षत्रिय लाए पहले इसकन बहुत बिजी है बिजी है क्या कहते हैं अपना प्रोपेगेंडा फैलाने में अशा स्त्रीय कार्य करने में क्योंकि शास्त्र तो गणित कार्य बताते हैं आपके हिसाब से
01:21:24:16 है ना आपके पास उनका उत्तर तो है नहीं जो शास्त्रों पर आक्षेप लगते हैं वो उत्तर लेने के लिए रामानु जीयों के पास जाओगे है ना शंकराचार्य के य जाओगे और फिर कहोगे कि जो है पहले कार्य करो यह करो फिर उन्हीं शंकराचार्य की बुराई करोगे फिर उन्ही रामानुज की बुराई करोगे शास्त्रों की बुराई करोगे और बातें ना करके कामर करें य मेरा अनुरोध है इस कौन बहुत बिजी है सब लो करने में आप लोगली बिजी हो इस कौन बिजी है घोषित कर दिया दूसरे लोग निठल्ले बैठे हैं घोषित कर दिया बातें कम करो काम ज्यादा करो घोषित कर दिया अरे भैया आपने अगर जापान नहीं देखा तो इसका अर्थ यह नहीं है कि इस दुनिया में जापान नहीं है हमने भी आपको यहां बैठे हुए देखा हमने तो नहीं देखा काम करते हुए बताओ क्या करें मान ले कि तुम इसके कुछ नहीं करते हो पैर भी टूटे हुए हैं व्हील चेयर पर चलते हो बैठे हुए देखा मैंने तुम्हें मैंने देखा चलते हुए स्क्रॉल करेंगे ना दूसरे वीडियोस है ना स्क्रॉल करो थोड़ा जानो थोड़ा कौन क्या कर रहा है कौन राम सेतु के लिए लड़ रहा है
01:22:39:28 कौन राम मंदिर के लिए लड़ रहा है ठीक है कौन मंदिरों के लिए लड़ रहा है कौन हिंदुओं के लिए लड़ रहा है किसकी वजह से हिंदुत्ववादी वित है स्क्रॉल करो स्क्रॉल है ना और अगर मि और इसमें इतना भी आप लोग को बत है य करना बंद करबा कर पखा ी ब करिए सब द उपन तब जा समझ हो ले रहे हो ू
01:23:11:10 है और यह द्वेष वाली बातें तो करना मत तुम्ह इतना द्वेष शास्त्र से शास्त्र को छोड़ दो वर्णाश्रम धर्म से अगर दवे है तो वर्णाश्रम का नाम लेना छोड़ दो और भगवान श्री कृष्ण के वाक्यों से इतना द्वेष है जिन्हें तुम्हें मानना नहीं है तो उनकी भक्ति का पाखंड करना छोड़ दो भला हो जाएगा बहुत सारे लोगों का हिंदुओं का जय श्री राम [संगीत]
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YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
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⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
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⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
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⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
ब्राह्मण विरोधी वेद पुराण रामायण विरोधी इस्कॉन #iskcon
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