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00:00:02:00 तो आज हम बात करेंगे इकोन के जो अंडर कवर्ड गुंडे टाइप के जो लोग है ना जो किसी को भी कोई भी अपशब्द कहने से पहले कुछ सोचते नहीं है जिनके पास जो धर्म का दिखावा तो करते कि हम धर्म का पक्ष रख रहे हैं या क्या कहते हैं हम जो है अपने संप्रदाय का पक्ष रख रहे हैं दावा तो करते हैं पर उनके आचरण में उनके वो लक्षण होते ही नहीं है है ना अपने से बड़ों को या किसी को भी मान्य हो या ना हो बराबर का हो उसको कुछ भी कह देने से पहले वो सोचते नहीं है कि हम किसको क्या कहने जा रहे हैं तो ऐसे ही कुछ नीच मानसिकता वाले जो लोग हैं उनकी आज बात करेंगे उदाहरणार्थ जो है वह है एक लड़का है भव्य जो अभी अभी किशोर अवस्था से लगता है कि जैसे उसने युवावस्था में बस पैर ही रखा है और ऐसा करते ही बस उसके जो है एक चुल सवार है हम बहुत बड़े तीसमार खान हो गए हैं तुर्रम खा हो गए हैं और हम जो है शास्त्रार्थ डिबेट कर करके कर करके जो है सबको हरा देंगे और हमसे कोई पैदा नहीं हुआ है कोई जन्म नहीं लिया किसी ने कोई मायका लाल जो हमको जो है शास्त्रार्थ में हरा दे तो जो लोग नहीं जानते हैं वह

00:01:17:07 जान ले कि इस व्यक्ति के साथ हमारी एक चर्चा हो चुकी है तीन घंटे की जिसमें हमने अपना सर अपना दीवार में मारा था वो क्यों हुआ था दीवार में मारने जैसी बात हम क्यों बोल रहे हैं वो अभी आपको पता चलेगा तो वो चर्चा जिसने नहीं देखी है वो देख ले और उस चर्चा को देखने के बाद कोई भी जो निष्पक्ष होगा ना सत्य का पक्षधर होगा उसके मन से एक ही आवाज आएगी कि मैंने तीन घंटे अपने दिमाग को टॉर्चर किया है तो इसी टॉर्चर को हमने नाम दिया दीवार में अपना सर मानना तो पहले तो अब हो क्या रहा है कि उस चर्चा के बाद इस व्यक्ति ने उस चर्चा ज वो जब चर्चा हुई थी तो उसमें इस व्यक्ति को कुछ प्रश्न पूछने जिसका यथोचित उत्तर हमने अपने वीडियोस के माध्यम से दिया है मगर किसी कारणवश जो कारण अभी हम आगे बता देंगे किसी कारणवश उस चर्चा को स्थगित किया गया और शेष चर्चा को दोबारा किया जाना सुनिश्चित किया गया तो उसके बाद इस व्यक्ति ने ऐसी कुछ चीजें की जिसके कारण व चर्चा अब आगे नहीं हो पाई तो अब इसके जो चेले चाप है जो चेले चपा टाइप के जो लोग है कुछ गिनती के ही है तो वो लोग जो है वो ऐसा सोचते हैं कि तुम जो है बच रहे हो यह है वो है

00:02:32:28 जो है तुम उससे भाग रहे हो यह है तो इन सारी बातों का जवाब और फिर यह जो एक और धूर्त आत्मा है एक बीइंग स्पिरिट सोल नाम से इसने तो यह वैसे निराकार ब्रह्म को जो है आक्षेप करता है निकृष्ट दृष्टि से प्रस्तुत करने की कोशिश करता है और खुद स्वयं उसी आचरण पर चल रहा है भाई सगुण भगवान के सगुण अवतार की हमको आवश्यकता क्यों है क्योंकि हम उसके साथ व्यवहार कर पाए है ना उसकी आराधना उसकी उपासना उसकी भक्ति करके उसके साथ प्रेम व्यवहार करके हम लोग इससे मुक्त हो पाए जगत से मगर यदि भगवान सगुण रूप अपना प्रदान ही नहीं करेंगे तो हम कैसे व्यवहार करेंगे उनके साथ प्रेम का उसी तरीके से ये आदमी है जो इसके साथ कुछ हुआ है ऐसा जिसके कारण य अपने अपना मुंह दिखाने के लायक नहीं रहा तो छुप के रहता है और अपना चेहरा किसी को आज तक दिखा नहीं पाया शायद इसकी माता जी ने इसको दूध नहीं पिलाया होगा बचपन में अ भागा है जिस कारण से कुपोषित हो गया तो या इसके साथ कुछ घर में ऐसी घटनाएं घटित हो गई उसकी जिसके कारण य मुह दिखाने के योग्य नहीं रहा तो कुल मिलाकर के मुह नहीं दिखा पा रहा है अब जब मुह नहीं दिखा पा रहा है तो यह तो जिन जिन का मुंह है चैनल पर जिन जिन का मुंह

00:03:48:01 प्रदर्शित है तो यह छुट्टे सांड की तरह सबका इमेज बिगाड़े मगर अपना मुह छुपा के रखा है तो यह पार्शियल्टी हुई ना भेदभाव हुआ ना तुम भी अपना मुह पर प्रस्तुत कर ना जिससे कि कोई तुम्हारा भी अगर बिगाड़ना चाहे तो बिगाड़े तो अपना मुंह छुपा के रखा है और जि जो अपना चेहरा लेकर के सामर्थ्य के साथ सामना करते हैं उसमें भव्य भी है उसमें भव्य भी है इस बात में तो भव्य उससे आगे ही हुआ ना उसने इतना गुर्दा दिखाया कि मैं सामना करूंगा तो जो लोग सामर्थ्य के साथ सामना करते तो उनका आप चेहरा बिगाड़ करके एडिट करके यह कर दिया वो कुत्ते का चेहरा लगा दिया यह सब चीजें इन लोगों को सिखाई जाती है और यह कर रहा है तो य किसके उस पर चल रहा है जिसको य खुद निकृष्ट दृष्टि से देखता है और दिखाता है उसी के उस पर पद पर ख खुद चल रहा है और भेद भाव यह है पार्शियल्टी य है इसको क्या कहते हैं पाखंड यह है कि जो लोग अपने सामर्थ्य के साथ अपनी योग्यता के साथ अगर खुलकर अगर आ भी रहे सामने तो उनके चेहरे का दुरुपयोग कर रहा है और कोई बड़ी बात नहीं है इनके य पर ट्रेनिंग दी जाती कैसे अनऑफिशियली हमारे गुंडे तैयार हो जो अनऑफिशियली

00:05:03:19 हम कभी भी उनको अपना हाथ नाम नहीं देंगे कि हमारा ही गुंडा है मगर ऐसे गुंडे तैयार किए जाए तो उस तरीके से मानसिक जो है प्रहार करें लोगों के ऊपर उनकी फोटो बिगाड़े उनको गालिया दे उनको उल्टे सीधे बद्दे बद्दे कमेंट करें और जो है अपना अपने आप को तुरम खा समझे है ना कोई बड़ी बात नहीं है कि इस कन द्वारा इस तरह की ट्रेनिंग दी जाती हो क्योंकि अगर नहीं दी जाती तो कभी ना कभी इसको चीजों का प्रतिकार भी करे ऐसा तो हमने देखा कि भाई इस कौन की तरफ से इस तरीके के लोग ऐसे कर रहे हैं तो उनको ऐसा नहीं करना चाहिए नाम लेकर के बोल दे वो तो हमने आज तक कभी देखा नहीं अरे भैया तुम्हारे यहां तो राम जी को कह रहे कि वो कम ताकतवर है कम हालांकि अंदर से यही सिखाया जाता है बाहर से ड्रामा बाजी कितना भी कर लो वह वास्तविकता वही है वह अभी वीडियो आने वाला है उसम देख लेना तो यह जो वीडियो है यह स्कन के इसी तरीके के अनऑफिशियल गुंडों के लिए है जिनके के चेले चापड़ा समझते हैं कि उनके जो ये सरगना है तीस मार खा तुर्रम खान ये बहुत बड़े बवाल काटी है भैया बहुत बड़ा बवाली है ये लोग इनसे सब थ थरथर कापते हैं देवधर देवधर गुंडे कापे थरथर थर तो इन लोगों को जवाब देने के लिए बनाया

00:06:18:24 है सबसे पहले बात कर लेते हैं कि जिन लोगों को ऐसा लगता है कि भव्य के साथ जो हमारी तीन घंटे की चर्चा हुई थी उसमें भव्य ने बहुत बड़े झंडे गाड़ दिए थे तो ये बहुत बड़ी गलतफहमी है हालाकि उसको हम शास्त्रार्थ नहीं कहते हैं हम तो चर्चा ही कहते हैं मगर फिर भी अगर तुम शास्त्रार्थ कह रहे हो तो तुमने क्या किया उसमें क्या किया सबसे पहला टॉपिक था मायावादी क्या शंकराचार्य मायावादी है वो मायावादी जिसकी बात पदम पुराण में की गई है तो आपने कौन सा ऐसा रेफरेंस दिया जिससे सिद्ध हो रहा है कि शंकराचार्य वही मायावादी है जिस मायावादी की बात पदम पुराण में हो रही है अगर आपने कहा आपसे जब पूछा गया तो क्या कहा सब कहते हैं सबका कहना प्रमाण नहीं होता मेरे भाई दुनिया में सब कहते हैं हिंदू धर्म खराब है ई धर्म अच्छा है फिर क्या करोगे सबका कहना प्रमाण नहीं होता है संख्या अगर संख्या में ज्यादा लोगों ने कह दिया तो उससे सिद्ध नहीं होता जो कही जा रही बात है वो वो है दिखाओ शास्त्र में कहां लिखा हुआ है कि शंकराचार्य मायावादी है या फिर कौन सा वो व्यक्ति होगा जिसके कह देने पर मायावादी शंकराचार्य को मान लिया जाएगा कि वो मायावादी है या वो आकर बताएगा कि मायावादी कौन है इसकी कोई भविष्यवाणी

00:07:34:09 हुई हो शास्त्र का प्रमाण देना होगा ना तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है भाई शास्त्रों से प्रमाण दो सब कह दे हैं सबके कहने से ही होता है ना अच्छा फिर फिर हमने जब आपको ये बताया कि सबके कह देने से नहीं होता तो अगला तर्क आया कि आपके भी कई आचार्यों ने स्वयं को मायावादी कहा है अरे भाई हमारे आचार्य ने अन को भी कहा है माया शब्द के आ जाने मात्र से उसको मायावादी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि माया शब्द का उपयोग तो लगभग हर आचार्य के ग्रंथ में हो रहा है अगर यही आधार है कि किसी ने माया शब्द का उपयोग किया है तो इस कौन की किताबों में माया बाद है वो भी मायावादी है तो इसका मतलब प पुराण में तुम्हारी बात हो रही है आचार्य ने अगर कह दिया तो खुद को अवद मायावादी थोड़ी ना कहा है वहां पर परम पुराण में अधिक मायावा की बात हो रही भी तुम्हारे जो भव्य है आपके सरगना कुछ नहीं बता पाए उसके बाद फिर हमने ये प्रमाण दिया कि रावण परंपरा के प्रामाणिक आचार्य है जिन्होंने उस श्लोक को प्रक्षिप्त माना है हम नहीं कह रहे मगर एक आचार्य है जो जिस परंपरा को आप प्रामाणिक मानते हो उस परंपरा के प्रामाणिक आचार्य ने

00:08:49:13 उस श्लोक को प्रक्षिप्त माना है तो तो उन्होने य आपके जो सरगना है ब सर पैर की बात है वो अगर 19वी सदी के तो प्रमाण जैसे मान ले मतलब किसी भी आचार्य को प्रमाणिक और अप्र माणिक मानने का आधार है कि वो किस सदी में जन्म लिया है ये नहीं है कि वो किस परंपरा से है वो सन्यासी था कि नहीं था ये सब नहीं है वो किस सदी में हुआ है ये प्रमाण है तो वैसे तो श प्रभुपाद को प्रमाणिक क्यों मानते हो वो भी प्रमाणिक नहीं रहेंगे दूसरी बात अब श्री संप्रदाय का प्रामाणिक आचार्य कौन है कौन नहीं है कौन तय करेगा जो श्री संप्रदाय में राम जाचार्य जी की गद्दी पर जो परंपरा गत तरीके से विराजमान होगा तो वो विराजमान है तो यहां पर भी तुम्हारे जो सरगना है उन्होने मूर्खता अपनी दिखा दी उनको अप प्रामाणिक क माधवाचार्य शास्त्री जी को क्योंकि जो संप्रदाय के जगत गुरु की गदी उस बैठने वाले जो जितने भी आचार्य वो उनको प्रामाणिक मानते हैं प्रमाणिक घोषित करते हैं तुम्हारे श्री प्रभुपाद को तो कोई प्रमाणिक घोषित नहीं कर रहा उनसे पीछे का तुम्हारे श्री प्रभुपाद जी है उनको तो जिनको तुम प्रामाणिक घोषित करना चाहते हो उनको उनसे पीछे के लोग प्रामाणिक नहीं घोषित कर रहे तारीफ कर द हा

00:10:04:14 बहुत अच्छी संस्था य व संस्था के रूप में तारीफ कर देंगे किस कारणवश भय या लो या किसी भी कारणवश खुल करके नहीं बोल पाएंगे कि नहीं व प्रामाणिक है मगर कहीं पर भी प्रामाणिक नहीं कहा वो प्रामाणिक है तारीफ कर अच्छा कार्य कर रहा प्रचार कर र य वो है प्रामाणिक नहीं कहा ठीक है तो खैर मैं इस पर नहीं जाऊंगा कि शी प्रभुपाद जी प्रामाणिक थे कि नहीं थे क्योंकि हम तो आउटपुट पर लड़ते है ना आउटपुट सिद्धांत क्या दे रहे हो क्या सिद्धांत आप दे रहे हो श्री प्रभुपाद जी की छापी ई किताब आप दे रहे हो कि नहीं दे रहे हो उन्होने जो लिखा ही वही छाप रहे हो नहीं छाप र इस भी दिक्कत है तोन और श प्रभुपाद जी में भी अत आ रहा है ना श प्रभुपाद जी के नाम के आ में जो छुपने का प्रयास करते हो तो राघवाचार्य जी ने माधवाचार्य शास्त्री जी को प्रामाणिक कहा रे जो सरगना है ना उनकी ये वाली बात भी हो गई ेर कि व अप प्रामाणिक है तो कौन सी बात तुमने सिद्ध की उ तीन घंटों में एक भी बात हमारे विरोध में कोई सिद्ध की भाई तुम शंकराचार्य को मायावादी सिद्ध नहीं कर पाए प पुराण वाला मायावादी और जब

00:11:19:14 तर्क से बात आई काटने की कि चलो ठीक है तुम मानते हो मायावादी है वही वाले पद पुराण वाले तो उनको तार्किक तरीके से भी तो सिद्ध करो हाय मायावादी है इनका जो सिद्धांत है वो ठीक सिद्धांत नहीं है तार्किकता कहा है अगर किसी ने भविष्यवाणी कर दी भैया वो जो मात शक्ति है वो डायन है उसको मार डालो तो बिना देखे समझे वो वाकई में डायन है बच्चों को खा रही है कि नहीं खा रही है बिना देखे समझे उसको डायन घोषित करते हु मार दोगे क्या उसम लक्षण भी तो दिखने चाहिए ना तार्किक रूप से डन वाले वो है या बोल दो हमारा नहीं है ओनली प्रमाण है य बोलो फ जो उल्टी सीध युक्ति देते हो ना उनका आएगा सामने फिर जो बकवास करते हो युक्तियों के नाम फ अगली बात क्या आती है कि तुम्हारे सरगना है नकी नाम लेते हो भैया तुम भव से डरते हो यह सरगना सबसे पहली बात शंकराचार्य को मायावादी सिद्ध नहीं कर पाए किय वही मायावादी जो पद पुराण में कहा गया है उसके बाद जो उन्होने तर्क दि वो कैसे कटे कि सबके देने से मायावादी नहीं माना जा सकता आचार्य ने अगर खुद को मायावादी कहा तो अवैध मायावादी नहीं

00:12:34:19 कहा है और राम परंपरा के जो प्रामाणिक आचार्य उन्होने उस शलोक को ही प्रक्षिप्त कहा है और शंकराचार्य जी के सिद्धांत को सुति समत बताया है सुति समध भी कहा है अब यदि आप य पर य कहते उन्होने किस आधार पर माना इन्होने एक प्रश्न किया किस आधार पर माना वो प्रक्षिप्त है भाई गुरु परंपरा का कार्य ही यही है कि कौन शास्त्र पीछे से मिल रहे हैं उन शास्त्रों में मिलावट है या नहीं है अगर मिलावट है तो कौन सी है कितनी है क्या है यही बताने के लिए तो परंपरा प्राप्त आचार्य की आवश्यकता है वरना कोई भी आ कर के आपको धार्मिक शास्त्र में अपना शलोक जोड़ कर के दे सकता है तो इसका आधार यही है कि वो परंपरा प्राप्त आचार्य है बस भाई तुम ये शास्त्र हमारा परंपरा प्राप्त शास्त्र है या नहीं है ये बताने का आधार यही है कि मुझे मेरे गुरु से मिला कि नहीं मिला ट्स इट इसीलिए परंपरा की आवश्यकता है तो एक परंपरा प्राप्त राण संप्रदाय का आचार्य कह रहा है कि व प्रक्षिप्त है अब इसमें कुछ लोग कहने लगते ज्यादा जानते नहीं है तर्क की दृष्टि से नहीं देखना चाहते हैं क्योंकि वो आर्य समाज के भक्त भगी है आर्य समाज ने क्या किया हर जगह प्रिप प्रिप जो बात उसको समझ में नहीं आई उसको कहने की कोशिश शुरू कर दिया सब प्रक्षिप्त

00:13:49:19 है तो कुछ लोग कहते कुछ भी प्रक्षिप्त नहीं है हर वो जो शास्त्र है पूरे पूरे शास्त्र कहीं भी है वो कुछ प्रक्षिप्त नहीं प्र ऐसा नहीं होता है ना अगर किसी सिद्धांत के किसी तथ्य के दुरुपयोग हो जाने के कारण विकृति आ रही है तो वो जो विकृति है उसको दूर करने का प्रयास किया जाता है ऐसा नहीं है उस तथ के अस्तित्व को ही नि दो अगर आ समाज ने इस प्रक्षिप्त शब्द का दुरुपयोग किया है तो इसका मतलब य नहीं है कि यही कह दो नहीं हम कभी प्रक्षिप्त प्रक्षिप्त किसी को नहीं कहे ऐसे नहीं होता है अगर कल को गीता गोरखपुर में कुछ ऐसे तत्व घ गए या पब्लिकेशन को आप प्रामाणिक मान रहे उसम अगर कुछ ऐसे तत्व घुस गए जो अपने मन कुछ एक लोक वगर मंत्र वग छापने लगे तो क्या करेंगे आप वहां बताने वाला परंपरा प्राप्त गुरु होगा कि मेरे गुरु ने यह शलोक नहीं था मुझे नहीं पढ़ाया य शलोक वो बताएगा कि शलोक गलत है कि नहीं है तो इसलिए ऐसा नहीं है प्रक्षिप्त कहा ही नहीं जा सकता मगर कहां कहा जाएगा कहा नहीं कहा जाएगा इसका निर्णय लेने का अधिकार सुरक्षित किसके पास है परंपरा प्राप्त आचार्यों के पास अब उस सम इसने जवाब नहीं दिया बाहर जाक इसने बना नहीं साब वल्लभाचार्य

00:15:05:03 संप्रदाय जो है उसने अपना य मावाद वाले शलोक को वो किया है यूज किया है भाई पहली बात तोय है की शलोक य हो जाने से स नहीं होहा हैलो में शंकराचार्य जी की बात ई है य कैसे त होगा शंकराचार्य की बात ई है शंकराचार्य जी को माना गया है पुराणों के क और पुराण के अ नहीं कहाया उनको आप शंकराचार्य को शंकराचार्य किस आधार पर मानते हो शिव का अवतार किस आधार पर मानते हो जहां पर उनके श जहां से उनका शिव अवतार होना सिद्ध हो रहा है वहां पर उनको वैदिक कहा गया है वरना व वाले शलोक लाओ जहां पर शंकराचार्य का अवतार होना शिव का अवतार होना सि हो रहा हो परंतु अ कहा गया हो जैसे की अगर शिव पुराण के द्वारा बताया जा रहा है कि वो ब्रह्म सूत्र पर भास करें भाष्य करेंगे तो य पर वैदिक होना बताया गया पुराण के अनुसार उनको वैदिक होना बताया गया है जहां जहां से शंकराचार्य शिव के अवतार सिद्ध होंगे वहां वहा उनको वैदिक कहा गया है और अगर आप अवद से जोड़ेंगे तो जहां से आप अवद से जोड़ेंगे वहां पर उनका शंकराचार्य का शिव अवतार होना सिद्ध नहीं हो रहा है ये एक बात हो

00:16:20:08 गई अब इसके बाद फिर आप कहते वल्लभाचार्य जी ने अपने उसम भाष्य में उपयोग में लिया है लर जी को आप कितना प्रमाणिक मानते हो स्वयं आप तो खुद कहते हो आते अपना भाष्य लेकर के भागवत भाष लिखते तो आपने तो इतना अनर्थ किया उनके लिए इतनी आपत्ति जन बात लिखी चैत ने कहा जो भी शर स्वामी के विरोध में जो भाष लिखेगा लिए के समान है किसको सुनाया थाय सब वल्लभ प्रभु को ना वल्लभ महाप्रभु को सुनाया था आपके अनुसार हमारे अनुसार नहीं आपके अपने ग हुए ग उनके अनुसार मतलब जहा चाहो किसी का अपमान कर दो और फिर जहां चाहो वहा उसी व्यक्ति का लेकर के उसको प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर दो चलो खैर कुल मिलाकर के अगर वल्लभाचार्य जी ने कहा भी है तो भी आपको य सिद्ध करना होगा ना शास्त्रों से कि माया वादम असत शास्त्रम वाला जो लोक है उसम शंकराचार्य जी की बात हो रही है वो आप सिद्ध नहीं कर पाए तो चेले चाप को पहले समझ लेना चाहिए पहला जो टॉपिक था कि शंकराचार्य को आपने मायावादी किस आधार पर अव मायावादी किस आधार पर कहा तो व आधार आपके पास नहीं है ठीक है

00:17:35:24 अब इसके बाद अगला लूगा अगला जो चैप्टर था वो था वैसे माया वाला मगर अगला पहले मैं आपको बताऊंगा कि आपके य जो सरगना है रम है इनकी बोलती बंद हो गई थ पप जसा बोला करते हैं अकेले बना के बोलती बंद हो गई थ हला रहे थे जब इनसे पूछ गया श्वर स शक्तिमान है क्या अब इनका कहना अब जो य वहा पर बोले है भी एक तरीके से है भी नहीं य सब कर रहे व पर बात है इनकी जानकारी में इनकी शिक्षा के अनुसार जो ईश्वर प्राप्त होता है पढ़ने वालो को अनुकरण करने वालो को अनुस करने वालो को बात है संसार में कुछ कार ऐसे नहीं कर सकता हकला एक तरीके से तर जाओ देखो अपने बस का जा कर के फिर आ कर के बात

00:18:38:13 करना सर्वशक्तिमान सिद्ध कर पाए अरे भैया सब बातें एक तरफ हम आपकी सारी बातें मान लेंगे सब कुछ कर सकने वाला ईश्वर दो ना सर्व शक्तिमान सर्व सर्व का अर्थ क्या होता है तु तुम्हारे से ये मुझे अपेक्षा नहीं थी जो जो सवाल मुझे आज समायो से करने पड़ते हैं वो सवाल मुझे कौन से प अरे पहले जाक के अपने गुरुओ को तो सुन लो कई जगह वो निराकार मान केवल भगवान का अवतार ना मानने वालो को कई कई जग तुम्हारे लोग मोहन प्रभु इत्यादि कह चुके हैं ईश्वर सब कुछ कर सकते हैं मुझसे इंदौर वाले जनल सेक्रेटरी नथ इंडिया उन्होने कहा था एक जगह आ जाने पर फस रहे थे वो भगवान तो सब कुछ कर सकते हैं भगवान कुछ भी कर सकते हैं तो कुछ भी का मतलब कुछ भी होता है अगर एक चीज भी आ गई ना नहीं कर सकते तो कुछ भी नहीं है बहुत कुछ होगा बहुत कुछ कर सकते हैं जो मनुष्य से ज्यादा है वो सब कर सकते हैं मगर उसको कुछ भी नहीं कह सकते सर्व नहीं कह सकते ठीक

00:19:44:09 है तुमको यह नहीं पता है अभी राल वाली बात आई कि क्या कहते हैं जो शी प्रभुपाद जी उन्होने जो रासकल कहा है अ भगवान श्री कृष्ण को उन्होंने आचार्यों को भी कहा है और उन्होंने मा जो तुलसीदास जी है अकॉर्डिंग टू स्कोन मैं नहीं मानता कि ये सब उन्होंने कहा है अकॉर्डिंग टू स्कोन ये सब छापा जा रहा है क्यों छापा जा रहा है नसता भरने के लिए हिंदू को हिंदू से अलग करने के लिए सब छापा जा रहा है मैं नहीं मानता कि शील प्रभुपाद जी य सब बोल सकते हैं जो अखंडानंद सरस्वती जी को अपने मंदिर के उद्घाटन में बुलाएंगे वो उन्हीं को बोलेंगे अखंडानंद सरस्वती जी उनके बगल में बैठे हुए उनको ही रासकल बोलेंगे जिन कपा जी की प्रशंसा वो अपने वक्तव्य में करेंगे उनको रासकल बोलेंगे मैं नहीं मानता राज कल कि उन्होने बोला मगर अब तुम्हारा कहना है कि उन्होने रासकल का मतलब वो है ये है वो है वहां पर तर्क भी है कि रासकल उन्होंने क्यों बोला भगवान श्री कृष्ण को रासकल क्यों बोला उन्होंने क्यों कहा बिगेस्ट रासकल हा क्यों बोला था

00:20:59:09 वो तर्क कहां चला जाएगा उन्होंने बोला यदि रासकल डम का इस दुनिया में अस्तित्व है तो उसका कारण वही है श्री कृष्ण तो अगर रासकल का अर्थ तुम वो नहीं मानते हो जो अश्लील है या बुरा है तो फिर भी दुनिया में हर वो चीज जिसका अस्तित्व है उसका मूल कारण तो वही ना भूल अपनी परिभाषा कि सबका कारण वो है श्री कृष्ण भ प्रभुपाद जी का डायलग कि दुनिया में जो भी कुछ चीज अस्तित्व में है उसका जो मूल कारण है उसका मूल कारण श्री कृष्ण है अंग ू आपके गुरु है वो मगर नहीं अब सामने वाले को मुझे जो है गलत ठहराना है इसलिए अपने गुरु का विरोध कर दूंगा

00:21:47:25 मैं भाई इस तर्क का मतलब क्या हुआ हटा दो रासकल अब दुनिया में बलात्कारी है जो तुम कहते हो इनका इनका ईश्वर य है इनका ईश्वर घटिया है ये लोग तो ये कहते हैं कि अगर किसी का रेप भी हो जाए कितनी गंदी गंदी बातें कर रहे हो कहां पर शंकराचार्य ने ये कहा है कि अगर किसी का रेप भी हो जाए तो वो रेप ब्रह्म ने किया इसलिए कोई बात नहीं है कितना कितना ग नीच व्यवहार और परमार्थ में अंतर है जब तक क्रिया का अस्तित्व है तब तक आप वो जो डेफिनेशन है ना कि सब कुछ माया है सब कुछ ब है उस डेफिनेशन को आप लागू नहीं कर सकते और बलात्कार एक व्यवहार है तो व्यवहार के अनुसार आपको कार्य करना होगा व्यवहार के अनुसार आपको आचरण करना

00:22:38:06 होगा सब कुछ ब्रम है यह लोग इतने घटिया है वो वो आ जाएगा व ब स्प सोल वाला वो कहेगा की राधा के पति कृष्ण नहीं है इनके हिसाब से राधा के पति यही है क कहा है शंकराचार्य ने मतलब इनका इनकी जो इनका जो तरीका है ना इनका वो वाला है वो क्या कहते जो सनातन विरोधी तत्व ही चेहरा सामने लाना चाहता हूं संसार के जो सनातन विरोधी तत्व होते हैं ना वो क्या करते हैं जिन बातों का दोहरा अर्थ निकल सकता है एक सही और एक गलत उनमें से जो दूसरा गलत वाला अर्थ है उसको लेकर के अपनी रोटिया सेकते य जाकिर नायक ने किया था अपने व उसके देखना जाकर के मास का अर्थ ग भी है मास का अर्थ मास भी है तो वो तो मास लेगा नहीं लेगा वो वो तो वो वाला मास लेगा जो जानवर को मार के प्राप्त होता है वो गू नहीं लेगा फल का भी ग हो सकता है ऐसे ही तुम लोग कर रहे हो और तुम्हारा यही चेहरा मुझे सामने लाना था समाज के कि देखो कैसे सनातन विरोधी होते हैं अपने पक्ष को बचाने के लिए आओगे और आओगे जितना मुझसे मुझसे सामना होता जाएगा तुम जैसे लोगों का और तुम लोग अपनी अपनी चीज खोलते जाओगे समाज के सामने

00:23:53:28 करने लगे तुम भी जैसे वो नीच शब्द आ गया तो उसका नीच शब्द का अरे तेरे लोग तो तु नीच समझते हैं जो व्यवहार मूलक शब्द था जो व्यवहार मूलक जो व्यवस्था मूलक शब्द था उसका दुरुपयोग कर दिया घणा मूलक शब्द बना दिया नीच को जातिवाद जो व्यवस्था मूलक था तो घणा मलक जातिवाद के रूप में प्रस्तुत कर दिया शास्त्रीय जातिवाद और एक स्वार्थी जातिवाद तो शास्त्रो जातिवाद जो है उसम क स्वार्थ स्वार्थ नहीं केव व्यवस्था के निमत है मगर उसको प्रस्तुत कर दिया आ ग जातिवाद पर वही तो तुम कर रहे हो वही तुम भी कर रहे हो जोय सब किया ने खर आ जाते अपनी मूल बात पर क्या था की आपके जो स्वयं के गुरु लोग है वो कहते ईश्वर सब कुछ कर सकता है तो फिर एक जगह आकर के जो मैंने सवाल किए वो उन सब उन सवालों के उत्तर में एक नहीं क पा रहे भी कर सकता है अगर ब्रेक लग रही है तो ईश्वर है तो जो चेले चाप है वो जाकर देखो तुम्हारा जो बॉस है वो हर जगत हुआ ना तो मायावादी सिद्ध कर पाया प पुराण वाला शंकराचार्य

00:25:09:00 को ना ही वो ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर पाया और ना ही वो माया जो प्रपंच रूप संसार है उसके मिथ्या को नकार पाया वहा भी उसको मानना पड़ा एक तरीके से एक तरीके से और इसके अलावा और भी बहुत सी बात की उसने जो देखने से पता लगे फुसफुस आ रही है लोगों से मदद ले पड़ रही है तुम्हारे बस को स को रम खा को है ना मदद ले ू बोलना पड़ रहा है पहले बोल र है कमरे में कोई नहीं है फिर पन मांग रहा है यह सब झू बोलना पड़ रहा है जाके देखो वीडियो अपने बॉस के कारनामे समझे और और क्या करना पड़ रहा है अपनी बातों को बदलना पड़ रहा है पहले बोल दिया कि हम उसको प्रमाणित नहीं मानते हैं कैसे मान लेंगे अरे भाई और फिर थोड़ बाने तरीके रा नहीं है अब इस बात का क्या करे कोई तुम जब अपनी बात पर ही ठहर नहीं रहे हो जब तुमने कोई एक बात कही उस पर चर्चा हो रही है और आधे घंटे बाद तुमने क मैंने पूरी तरीके नकारा नहीं है तो चर्चा बेकारी ना आधे घंटे की तुम स्पष्ट बोलोना अपनी बात कर सकता है कि नहीं कर सकता है कुछ स्पष्टता है ही नहीं य है तुम्हारे बस के कारना मेंे

00:26:29:03 राघवाचार्य जी ने आपकी सच्चाई बता दी लोगों को राघवाचार्य जी महाराज के साथ हमारा इंटरव्यू हुआ है और क्या कहते हैं जिसने नहीं देखा वो देख ले जाकर के उन्होंने अगर इनकी वास्तविकता सामने बता दी तो व प्रमाणिक नहीं रह गए इनके लिए व जगतगुरु नहीं रह गए अरे भाई तुम्हारे किताबों के अनुसार तुम्हारे ग्रंथों के अनुसार श्री संप्रदाय प्रमाणिक है अब श्री संप्रदाय यदि प्रमाणिक है तो उसम कौन प्रमाणिक है कौन प्रमाणिक नहीं है यह वो तय कर सकता है जो स संप्रदाय में रामाचार्य जी की गद्दी पर बैठता हो और कोई नहीं कर सकता हा अगर तुम उनकी कही ई बातो को नोगे तो यह नहीं कह सकते हो वो रामानुजाचार्य के खिलाफ बोल रहे है तुमको ये कहना पड़ेगा ों के खिलाफ बोल रहे है यानी कि उनको नकारते हुए तुम रामानुजाचार्य जी को ही अप प्रामाणिक कहना पड़ेगा तो फिर तुम्हारी अपनी ग्रंथ की बात कट जाएगी तो कोई अगर तुम अगर तुम उनको अपमा कहोगे तो तुम रामाचार्य जी को अपमा कहना पड़ेगा तो तुमहे अपने ग्रंथ से लाइन मिनी पड़ेगी भूल जाते हो क्या मिटा दो लाइन श्री

00:27:44:19 संप्रदाय प्रामाणिक है मिटा दो लाइन और बताओ हम कितने बड़े दोले है समाज देखे लेपन की पराकाष्ठा अगर राघवाचार्य जी ने इनके पक्ष में बोल दिया तो प्रमाणिक है अगर राघवाचार्य जी महाराज जी राघवाचार्य जी महाराज जी को मनाने कर कर के अपने आप पर ले गए अपने मंदिर में वहां पर भी राघवाचार्य जी ने अपनी मर्यादा रखी भगवान कृष्ण के सामने केवल शीष नवाया और किसी के सामने नहीं और जो एक वीडियो लोग वायरल कर रहे हैं उस वीडियो का क्या अर्थ है भाई जिसम प्रभुपाद जी की कर रहे प्रशंसा अरे प्रभुपाद जी ने जितने अंश में भक्ति की उतने अंश में उनकी प्रशंसा हुई रावण भी बहुत बड़ा विद्वान था उने उसकी प्रशंसा होती है श्री रामचंद्र जी ने समुद्र पार करने से पहले रावण को पुत के रूप में बुलाया था पूजन के लिए कम रामायण प जा कर के तो जितने अंश में जिसका अच्छा कार्य है उसकी प्रशंसा हो गई तो उसके आधार पर उसकी सारी सारी बातो को मान लिया उने दिया उने जो भी बात कही प्रमाणिक बात है नहीं अरे य तो तुम्हारे बोलते ना पु

00:28:59:28 बोलते घुमा फिरा के तारीफ करते हु उसम भी अपनी बात बोल देते नहीं नहीं इसन वाले जो है ना पु जी का वने देखा था कैसे ी तरीके से कोशिश कर रहे थे सच्चाई बताने की नहीं नहींन वालो का पैसा कहीं नहीं जाता है और यह बस एक बात दिक्कत की है कि वो अपने य पर हम लोगों को किसी को भी आने नहीं देते हमारा प्रवचन वहा नहीं हो सकता क्यों नहीं हो सकता भाई य तुमरे व लोग बोल रहे और कुछ ल बोल रहे वण व्यवस्था स्वाने वर्ण व्यवस्था जो स्वीकार की है व जन्म से की है वही भागवत का जो क्या कहते लोक है उसका ही अर्थ बताते हु उन्होने ये लिखा है स गो स्वामियों ने कि भले अगर अगर कोई व्यक्ति भगवान का नाम जप रहा है तो उसकी मुक्ति तो हो जाएगी मगर यदि उसको वो ये चाहता है कि वो जो वैदिक कर्म उसका उसम अधिकारी बने तो उसको अगला जन्म लेना पड़ेगा ये लिखा है स स्वामी में य आपके ग व लोग बता रहे कौन से ग वैष्णव ने य ठोक के कह दिया इस कौन प्रमाणिक है कहते मवा मचार वाले हम प्रमाणिक मानते क मानते क ख लिख दिया प्रमाणिक है तारीफ की है केवल

00:30:16:24 प्रशंसा प्रशंसा करना प्रमाण पत्र नहीं होता है जाके देखो प्रशंसा पत्र होता है प्रमाण पत्र होता है समे आ तो किसी दिन पता चले दूध का दूध और पानी पानी बड़े तुर्रम खा फिरते हैं मैं डिबेट करने जा रहा हूं निगरा चार्य जी ने वो रासकल वाली बात उठाई है हम लोग जो है ये एक थोड़ा सा अंतर है निगरा चार्य जी हमारे काम करने में हम लोग जो है केवल उसी बात पर अड़ते हैं जो बात सामने वाला स्वीकार कर रहा है कि हां इसका जो मतलब है वो ये है अब जब उसने मतलब सामने आपके लोगों ने आपकी किताबों में भले ही लिखा है फिर उसके बाद आपके लोगों ने भी स्वीकार किया उस बात पर हम क्वेश्चन उठाते हैं क्योंकि जो बाकी की बात है उसके दूसरे मतलब भी निकाले जा सकते हैं जैसे राजल वाली बात उसका दूसरा मतलब निकाला जा सकता है क्या कि भाई हर चीज का मूल कारण क्योंकि कृष्ण है तो इसलिए व रासकल उन्होने कहा मगर इसका एक पक्ष य भी है कि चलो ठीक है इसमें वास्तविकता ही है मगर फिर भी राल कहने के अधिकारी नहीं होते कोई भी भगवान श्री कृष्ण को राल कहने का अधिकारी नहीं होता तुम लोग ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का वो बना रहे हो निकाल के दिखा रहे हो अर्थ जाके लिखो

00:31:31:27 फिर प्रभुपाद जी के लिए लिखना शुरू करो राक प्रभुपाद छापना शुरू करो रा प्र ल शबद में कोई दिक्कत नहीं ना निगरा चार्य जी ने रासकल बोल दिया इनको तो रासकल वाली बात उठा दी राजल कहा है उन्होने भगवान श्री कृष्ण को और अन आचार्य को तो कृष्ण को क्यों कहा चलो आचार्य तो तुम्हारे विरोध में है भगवान श्री कृष्ण को ये जो चीज है वो वो कह रहे है या कोई छाप रहा दूसरा मैं नहीं जानता मगर ये जो है उसका है अपने घमंड में अपने नशे में इतना चूर हो गए कि हम कुछ भी बोलने लगेंगे अगर सत्य भी है तो कई ऐसे सत्य होते हैं जिनको परोक्ष रूप से बोला जाता है भगवान श्री कृष्ण ने भी कहा है माता पिता ने किस प्रकार का व्यवहार किया जो संतान उत्पन्न हुई इसको क्या सीधे सधे बोलते हैं अगर उसका कोई सही अर्थ भी उसको भी ऐसे नहीं बोला जाता तो आप रासकल कहने के अधिकारी नहीं हो अगर इस तरह से देखोगे तो फिर भी उसका क्योंकि अर्थ निकल सकता है हमने कभी उस पर कटाक्ष नहीं

00:32:33:13 किया और अगर रास्कल का मतलब जो तुम बता रहे हो कि ये ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी है निगरा चार्य जी गवार है और हम गवार है सब गवार है तो बोलना शुरू कर कल से आज से अभी से श्री प्रभुपाद ल शुरू कर बोलना और अगर कोई बोले तो उससे कुछ कहना मत बोल रासकल अपने पिता को रासकल बोल अपनी मां को रासकल बोल सबको रासकल बोल रासकल तो एक अच्छा शब्द है ना थप वाली जो लैंग्वेज है कि बड़ों के लिए कैसे हम वर्ड यूज करने चाहिए हमको इसको वर्ड यूज करने नहीं आते बड़ों के लिए ठीक है क्योंकि इनके संप्रदाय में ये चीज बहुत ही नॉर्मल है कि आप किसी का कुछ भी बोल दो है ना क्यक सब तो मिथ्या ही है तुम ही ब्रम हो ब्र है ना वो तो आपके पूरी शंकराचार्य नहीं जानते होंगे कोई बात नहीं है ना क्या लेस एजुकेटेड है ना इसलिए कोई बात नहीं आपकी पूरी शंकराचार्य क्या है जातिवाद करने के अलावा कोई और काम धंधा नहीं है उनको है ना अयोग व्यक्ति को पूरी के पीठ पर बिठा के रख दिया है अयोग्य व्यक्ति पूरी के जो यह है उसको पीठाधी बनाक रखा पूरी का तो क्या अयोग्य व्यक्ति के अयोग्य

00:33:48:19 शिष्य आएंगे आवान जैसे है ऐसा ही तो है मायावादी लड़ने से पहले जो भगवान की सर्व शक्ति मत्ता को नकारने के लिए जो कुतर्क तुमने किए हैं तुम्हारे बॉस ने जो कुतर्क किए हैं तुम्हारे बॉस ने क्या किए हैं कि इनका ईश्वर तो रेप भी कर सकता है बहुत घटिया ईश्वर है अरे मंद बुद्धि पहली बात तो तेरे आचार्य ने भी बात की है जिसका भी अस्तित्व है उसका मूल कारण वही है इसलिए वो भी वही है तो अगर रासकल का अस्तित्व है तो रासकल है वो तो फिर आप समझ ले जिस चीज का अस्तित्व वो कौन हुआ ईश्वर तेरे हिसाब से और अगर इतने अंश को हटा भी दे तो तेरा ईश्वर क्या ये सब होते हुए देखता नहीं है तेरा ईश्वर क्या य सब होने देने वाला नहीं है तो बातें क्या क्या कही जा सकती है सुन आर्य समाज वाले को तर्क करते हैं कि जब तक ईश्वर गंदे काम नहीं करेगा तब तक ईश्वर मानेंगे य समालो के उनसे कहा जाएगा कि तुम्हारा ईश्वर नाली

00:35:03:26 में है की नहीं तो मुसलमान और क्रिश्चन व समा कर सकते है जब तक इनका जब तक ईश्वर नहीं होगा तक नहीं मानेंगे य किया जा सकता है मुसलमान के द्वारा तो ए तुम्हारी भाषा में तुम्हारे मुख से तुम्हारी बोली से कौन सवाल कर रहा है जो ईश्वर को बाधित करना जो दुनिया में केवल भोग करना चाहते हैं उनके प्रश्न तुम्हारे मुख से निकल रहे हैं यही है तुम्हारी सच्चाई ऐसे ही तुम नोगे ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता को पहले आर समाज के मुख से निकलता है ईश्वर जब तक ण काम नहीं कर देगा तब तक जो है वोय उसको ईश्वर नहीं मानेंगे जबक उनका भी ईश्वर कई ऐसी स्थिति जिसम वसी ची लागू हो जाएगी ईश्वर का सर्वव्यापक होना तो मानोगे होना तो मानोगे सर्व होना तो मानोगे तो वहा का क्या चला जाएगा तुम्हारा ईश्वर क्या कहते तुम क रहे इनका ईश्वर रे भी कर सकता है तो तुम व व चला जाएगा इ ईवर रे होते देख सकता है तब क चला जाएगा वो गंदा काम नहीं है दुनिया में ब उसको देखना

00:36:18:26 गंदा काम नहीं है सर्वता है श् की नहीं है मानोगे मानना पड़ेगा ना मानो बन जाओ हमारा ईश्वर मर्ख भी है ये भी कह दो उसे पता नहीं सर्वज्ञ नहीं है वो ये भी कह दो सर्वदता नहीं ये भी कह दो कल को कहोगे लड़ाई लड़ाई दुनिया में और कुछ नहीं है ये धर्म और अधर्म के मल में है और मानवता और पशुता के मूल में जो लड़ाई है ईश्वर बादिक और अवाद की करो बादिक ईश्वर को यही तुम्हारा नंगा स सामने लाना है समाज के कितना पीछे पड़ोगे ईश्वर को काटने के ईश्वर यह नहीं कर सकता ईश्वर वो नहीं कर सकता क्योंकि हम भोग सिखाना है दुनिया को मोक्ष नहीं सिखाना है रक्ता नहीं सिखानी भोग सिखाना है हम मुसलमान है जोन के रूप में आके बोल रहे हैं हम क्रिश्चन है जोन के रूप में आके बोल रहे हैं समझे हम भी वही को तक करेंगे जो पूरान पूरा जो मुसलमान और क्रिश्चन करता है यह सिखाना है हम दुनिया को

00:37:28:09 अब ये तीन चीजें आ गई मायावादी सिद्ध नहीं कर पाए जगत के मिथ्या को नकार नहीं पाए और ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं कर पाए ये तीन मेन टॉपिक्स पर बात हुई थी और इसके अंदर और भी बहुत सी चीज है जो गलत साबित हुई आपकी जैसे कि उनको अपमा कहना जैसे कि ये कहना बच्चों जैसी बात करना कि वो सब कहते हैं मायावादी इसलिए मायावादी मान लो यह बात करना कि तुमने अपने आप को मायावादी कहा अरे मूर्ख हमने अपने आपको अवद मायावादी अगर कहा भी है तो और फिर क्या कहते हैं ये मदद लेना पड़ी मदद लेनी पड़ी झूठ बोलना पड़ा यह सब तुम्हारे चेले चाप है ना सुन लो सब तुम्हारे बॉस के कारनामे है अब इसके बाद जब चर्चा खत्म हो जाती है तो ये भाई साहब वीडियो बनाना शुरू करते हैं अच्छा चर्चा कैसे खत्म हुई य भी समझो तीन घंटे इनके इस तरह के व्यवहार के साथ एक मिनट य व्यक्ति बिना हिले नहीं रहा घबराहट है घबराहट की एनर्जी कहां चली जाएगी एक मिनट वक्ति बिना ले नहीं रहा एक मिनट लगातार परेशान क बाल में ना कहीं आगे पीछे होना कहीं इधर उधर देखना क्या समझते नहीं है क्या य सब जाके देखो उसकी कितनी बड़ी च चोर है नीच कहीं

00:38:44:03 का हा यह सब हमने ला एक बात कुछ क उसके बाद अगले मिनट फसने लगा तो अभी मैंने अभी पूरी तरीके से नकारा नहीं है यह है वो है दो तरह की बातें करना एक तरीके से नहीं य सिद्धांत है इनका एक तरीके से एक तरीके से नहीं सिद्धांत वादी है बहन सेवा करना भी नहीं भी करना है यह सिद्धांत वादी है यह तुम्हारे बॉस के सिद्धांत जो तुम लोग उसके अंडर कवर्ड एजेंट की उसम सोच रहे हो अरे भाई तुम्हारा जो व्यक्ति है वो मेरे छोड़ो तुम्हारे ही गुरु के विरोध में कितना बोल गया य सोच जा कर देखो वयो को

00:39:29:12 और जब ये सब चीजें हमने तीन घंटे तक झेली तो हमने पहले आग्रह किया कि भाई अब चर्चा जो है अगली बार कर लेंगे कि नहीं अभी करो अभी करो तो बात आई चलो भैया ऐसे व्यक्ति से मगज मारी कर कर के लोग मुझसे ये तक कह रहे तुम ऐसे लोगों से क्यों अपना टाइम वेस्ट करते हो मैं करूंगा मैं करूंगा ऐसे लोगों से जिससे भी नग सत्य जो है बाहर आए ऐसी संस्थाओं का मैं मर जाऊंगा मगर मरते दम तक आखरी सास तक मैं करता रहूंगा ऐसे लोगों से सामना क्योंकि मुझे इन लोगों का ब्राहमम आइजी को लेके आने वालो का जो नगन सत्य वो सामने लाना है वरना अपने जो किताबे है अपना जो ग्रंथ है उस चेंज करो गलत बात

00:40:16:28 है तो फिर क्या था तो जब हमने आग्रह किया तो नहीं भाई करेंगे तो पहला प्रश्न क्या आया भगवान ने दुनिया क्यों बनाई तो इनका कहना है भगवान मैंने बताया बिना किसी शता सप निषद के आधार पर बताया भगवान ने बिना किसी प्रयोजन के बनाई इनका कहना प्रयोजन है सूक्ष्म प्रयोजन है वो सूक्ष्म प्रयोजन क्या नहीं पता मतलब सामने वाला गलत है पर सही क्या है वो हमें नहीं पता सूम प्रयोजन है भाई यह प्रयोजन है ये इनका कहना है अबे मूर्ख अगर भगवान को किसी भी बौद्धों ने कैसे भगवान को नकारा है मालूम है पढ जा कर थोड़ा बालो में हाथ फेरने से फुर्सत निकाल थोड़ी जाकर पढ़ बध कैसे निकाल रहे हैं कि भगवान को सृष्टि बनाने की आवश्यकता क पड़ी इसका मतलब उसको कुछ क थी क्या मानेगा कमी मानेगा भगवान को मानना पड़ेगा उनके पास कोई क नहीं थी सच्चिदानंद है फिर भी उने बना दी तो क्या कारण र क्या आवश्यकता ही ना बोल भगवान को आवश्यकता थी भगवान के पास किसी चीज का यही स तुम लोगों का बाहर लाना

00:41:35:21 है तो वहा जाकर के कह रहे सक्षम अबे सक्षम है तो क्या है कारण तो बता उनको एंटरटेनमेंट चाहिए था इसका मतलब आनंद में कमी है क्या कारण था वो नहीं बता पाया यहां तो बोल ही नहीं पाया फिर अगला प्रश्न आता हैब वो सच्चिदानंद है तो फ निर्गुण कैसे ये उनका स्वरूप भूत लक्षण है गुण में और लक्षण में अंतर है स्वरूप भूत लक्षण वो जिसके बिना उनका अस्तित्व ही नहीं रहेगा अगर भगवान से चीज हटा दोगे तो भगवान भगवान ही नहीं है जब भगवान भगवान ही नहीं है तो तुम ये प्रश्न कैसे कर रहे हो भगवान भगवान में गुण है कि नहीं है वो निग कैसे पहले तो तुमने मान लिया ना भगवान है भगवान कब माना जब वो सच्चिदानंद है तो जब तुम खुद कह रहे हो वो सच्चिदानंद है तो ये प्रश्न नहीं कर सकते गु कैसे क्योंकि व गुण अगर नहीं होंगे तो व सचिदानंद नहीं तो तुम्हारा प्रश्न गलत हो जाएगा समझना इसको जाकना समझे तो यह स्वरूपत लक्षण है गुण नहीं है और गुण क्या है जिसके बिना भी भगवान का अस्तित्व है भगवान सततम गुण से परे है य सब कहा ले जाओगे इन वचनों को

00:42:57:09 अत गवा तुमको भगवान को निर्गुण नहीं मानना तो लड़ाई इसकी नहीं है आप जो भी मानो मगर भगवान को सर्वशक्तिमान कहो सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं होगा तब तक धर्म की स्थापना नहीं हो सकती ईश्वर को सर्व शक्तिमान करने वाला सिद्धांत लाओ छोड़ दूगा तुम्हारे साथ चलूंगा फ व बिक पहना कर डांस भी करवाना पड़ेगा करम करवाते हो जो तुम्हारी वो आती है तुम लोग कहते हो गस मैरिज कराएंगे हम लोग आगे चल कर के वो भी कराऊंगा जो तुम्हारी अधारणा हो सब स्वीकार मूर्खो ला सर्व शक्तिमान ईश्वर नहीं ला पाओगे जीवन निकल जाएगा सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं ला पाओगे शंकराचार्य के सिद्धांतों का खंडन करके समझे

00:43:54:28 [संगीत] अरे मैं कभी आया क्या कि तुम निर्गुण क्यों नहीं मानते तुम सगुण क्यों मानते हो सगुण क्यों नहीं मानते मैं तो मेरी सिंपल परिभाषा है सर्व शक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धम तीन चीज जो समाज में धर्म की स्थापना कर सकती है जो मनुष्य के मोक्ष का हेतु है तीन चीज दो मुझे ले चलो नहीं दे रहे हो सब बात करोगे य से गलत र सवा जी क हिंदू शब्द गलत है ये है वो है फालतू की बात करवा लो जो मुख्य बात है वो कर नहीं करेंगे ईश्वर पर बात नहीं करेंगे पत्र लिखेंगे हमने आपको शास्त्रार्थ के लिए बुलाया था आप आए नहीं आप भगोड़े

00:44:36:09 हो मगर ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं करेंगे हम वो नहीं कहेंगे वो कहेंगे ईश्वर फलाने काम नहीं कर सकता है जब नहीं कर सकता है तो मुसलमानों का ईश्वर मान लेना क्रिश्चन का ईश्वर मान लेना बना दुनिया को क्रिश्चन यही नगन सत्य यही सच्चाई तुम लोगों की बाहर लानी थी मुझे अभी तुम लोग बोल ऑफिली फिर ऑफिशियल लोग बोलेंगे तब आएगा आनंद अभी तो तुम जैसे लोग कीड़े मकोड़े वाले लोग बोल रहे हो फर सरगना बोलेंगे तब आएगा आनंद अब इसने क्या किया कि जब य तीन घंटे हो गए य पर हमने भैया इसने फर लास्ट में जब य निर्गुण वाला प्रश्न पूछा कि अगर भगवान में गुण है सच्चिदानंद तो भगवान निर्गुण कैसे तो तो तब तक इनसे तीन घ घंटे मगजमारी करते करते हालत खराब हो चुकी थी है ना और उस दिन संभवत एकादशी का व्रत भी था तो मैंने इस दृष्टिकोण से कहने से सामने वाला मान नहीं रहा है तो मैंने उस चर्चा को अपने आप बंद किया यह कहते हुए फिर कि मैं आगे इस चर्चा को कंटिन्यू करूंगा बताऊंगा इसको लक्षण

00:45:51:14 जो भी है तो फिर क्या किया इससे रहा नहीं गया क्योंकि य फेल हुआ था कई बार इसकी बात गलत साबित हो गई थी ईश्वर सर्व शक्तिमान सिद्ध हो नहीं पाया था शंकराचार्य को मायावादी सिद्ध नहीं कर पाया था तो इसने क्या किया तुरंत जाते ही इस इसने और इसके चेले चाप ने व्यंग चित्र बनाना शकल बिगाड़ना ये सब शुरू कर दिया वीडियो बनाना शुरू कर दिया इससे चर्चा से हुआ और उसम व शकल बिगाड़ने से लेकर के धीरे धीरे घटिया है गवार है यह सब चीज है कि उसका ईश्वर बलात्कारी अरे भाई प्रेमानंद जी को नहीं सुना कि ईश्वर जब आतंकवादी के रूप में आएगा तो वैसा व्यवहार करेंगे य क्या है प्रेमानंद जी भी तो वही बात बोल रहे कि ईश्वर आतंकवादी भी हो सकता है मगर ये पर्थ दृष्टिकोण है इसके अनुसार हम लोग व्यवहार नहीं कर रहे हैं व्यवहारिक दृष्टिकोण में जब तक क्रिया है तब तक परमार्थ नहीं है तो परमार्थिक जो सिद्धांत है वो लागू नहीं हो सकते व्यवहारिक सिद्धांत ही लागू होंगे ईश्वर और जीव कभी एक नहीं हो सकते व्यवहार में कभी नहीं एक हो सकते जब तक क्रिया है तब तक वो परमार्थिक ू जो सिद्धांत लागू नहीं हो सकते परमार्थिक सिद्धांत जानना आवश्यक है उनके अनुसार चलना आवश्यक

00:47:06:25 नहीं है जानना इसलिए आवश्यक है क जब तक जानोगे नहीं परम स्वतंत्र मोक्ष को सर्वशक्तिमान ईश्वर को क्योंकि उस पर्थ सिद्धांत के बिना परम स्वतंत्र मोक्ष और सर्व शक्तिमान ईश्वर सिद्ध नहीं हो पाएगा उसकी आवश्यकता केवल इतनी है कि व्यक्ति को मनुष्य को जीव को अपने लक्ष्य में निठार अगर उसके अंदर जिज्ञासा आती जाए तो उसकी जिज्ञासा के अनुसार उसको जवाब मिलते हुए वो उसम दृढ़ हो रहे अपने धर्म में कि हां मुझे वहां पहुंचने पर यह मिलेगा सर्वशक्तिमान ईश्वर है मेरा बाधित नहीं है केवल इ केवल इतना प्रयोजन है उसका परमार्थिक जो सत्ता है अद्वैत और बाकी सब द्वैत के अनुसार आचरण है ब्रह्म का विषय अवत है धर्म का विषय द्वैत है इस बात को डालो अपने भेजे में खैर इन्होने सियान में आकर ईश्वर घटिया है इनके जो आचार्य कितनी गंदी गंदी बात बोली सन्यासी के लिए मूर्ख संप्रदाय है परंपरा है इनके दवारा प्रतिपादित किया हु ईश्वर अब्र ईश्वर से भी क जदा गिरा हुआ और क जटिया है अरे सन्यास का तो वो रख लेता मान जहां से तुम्हारे खुद जिनको तुम पूज्य मानते हो हम भी मानते हैं वो जो चैतन्य महाप्रभु जी है

00:48:22:06 उन्होंने सन्यास कहा से लिया था य तो तुम भी मानते हो वही से लिया है के सन्यासी है सन्यासी का मह भूल गए गवार क रहे हो अन कह रहे हो घटिया कह रहे हो अरे अच्छा हुआ हम ने को कानूनी कदम नहीं उठाया री जो किशोर अवस्था उसको देखते हुए समझे नीच कहीं का और तूने जितना भी किया है सब अपने बंद कम बनाया है तेरे घर में गए मंदिर में गए तब ब हो जाता है

00:48:59:20 सामने आकर के तेरी जी कैसे लड़ कर रही थी ध्यान है ना एक तरीके से एक तरीके से नहीं दि भाई पन दियो जरा पन देना भाई जरा क्या है सब फिर कमरे में कोई है नहीं फुसफुस सुनाई दे रही है डाला वडियो देख लेना जिन्होने नहीं देखा हो चोर कहीं का तो अब एंड क्या है इस भव्य की बातों का और सब सारी सामग्री का एंड एंड क्या है जो लोग ये कह रहे हैं जाकर के भव्य से करो भव्य से करो वो तीन बातें सुनो जो लोग ये कह रहे भव्य जीत गया भव्य जीत गया अगर भव्य को दोबारा हमसे चर्चा करनी है तो जो उसने ये सब किया है आचरण अमर्यादित उसके लिए क्षमा मांगे उस क्षमा के वीडियो को सार्वजनिक करे जितनी आपत्ति जनक सामग्री है उसको मिटाए और फिर वो आए चर्चा करने ठीक है अब बात आती है वो ऐसा नहीं करेगा यह हमारा बचने का बहाना है तो दूसरी बात सुनो जो लोग ये कहते हैं कि भा भ जीत गया था तो भव्य जीता तो वो सिद्धांत वहा पर है ना अभी भी वडियो में हमने वीडियो तो नहीं हटाया है और बाद में

00:50:14:24 भी बने बहुत सारे सिद्धांत दे दिए हैं बना बना करके वीडियो एक एक सिद्धांत दिया भैया वो शंकराचार्य नेय लिखा देखो इनकी किताबों में लिखा है भाई मैंने कहा ना तूने र जी का कहां से पढा जाकर ज्ञान सिर्फ किताबों पर हमने कभी क्लेम नहीं किया है हम जो किताब में लिखा है पहले पूछा कि क्या य तुम्हारे आचार्य मानते हैं तो फिर उस पर बात होती है व शंकराचार्य जी क्या लिख रहे अपने ग्रंथ में यह वो बोल सकता है जिसने वहा पर परंपरा प्राप्त अन किया हो तो शंकराचार्य जी के विरुद्ध में बोल रहा हूं कि नहीं बोल रहा हूं इसका वो जो है तब त होगा जब चार्य कह देंगे कि हा ये बात गलत बोल रहा है जिन्होने उनका परंपरा प्राप्त अध्ययन किया है तूने कहां से कर लिया और जो मैं जो बात बोल रहा हूं मना कर कि नहीं रासकल नहीं बोला उन्होने रासकल लिखा है ना और उसका तर्क भी लिखा है तो बोल दे नहीं यह तर्क नहीं लिखा उन्होने या बता दे दूसरा कौन सा अर्थ है उसका तो हम उस बात पर बात करते हैं जो बात तुम स्वीकार करते हो कि ईश्वर अल्लाह को एक मानते हो कि नहीं मानते हो क्या सिखाया तुम्हारे लोगों उस बात पर बात करते हैं वर्णाश्रम

00:51:30:10 को जन्म से मानते हो कि कर्म से मान लेते हो जिसने जो किया वही हो गया वो कोई व्यक्ति को खड़ा करके गए कि भैया तुम्हे य की रक्षा करनी है मगर वहां परब खतरा लगा तो उसने तुरंत टमाटर बेचना चालू कर दिया उससे आ अरे े दव तेरा तो दायित्व था वहा पर रक्षा करना अरे भाई मैं कर्मणा वाला हूं मैंने तो टमाटर बेचना मेरा दायित्व है तो

00:51:51:04 दायित्व के अनुसार कर्म बाद नहीं हो रहा व्यक्ति का कर्म के अनुसार दायित्व का नामकरण हो

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00:51:56:25 रहा है वाह अब वो जो सुरक्षा के लिए खड़ा किया गया था वो टमाटर बेच रहा उसका वही वही धर्म वही उसका वो हो गया व्यापारी हो गया मैं तो अब छोड़ दिया मैंने अपना कर्तव्य क्योंकि मेरा कर्तव्य तो वो होगा जो मैं करूंगा तो मैं टमाटर बच रहा हूं यही मेरा कर्तव्य है भा में जाए वहा की सुरक्षा अब दस तो पहली बात क्या आ माफी मांगे सामग्री हटाए क्षमा मांग और सामग्री हटा फिर बात होगी और अगर वो नहीं हो सकता है तो जो जो लोग यह कहते हैं व जीत गया व जीत गया जीत गया तो वहा से कुछ सीख के आओ और सीख के आक के जो है आप आ जाओ सामने हिंदी आती है ना ब से सीख लो जा कर के और एक महीने क्लासेस लेलो उससे छोड़ दो अपने बाकी के अन गुरुओ को और ब की गलास लो फिर आओ है ना और अगर य भी नहीं हो पा रहा है नहीं साहब कोई और नहीं है भव्य के अलावा ना गुरु है ना हम है कोई नहीं केवल एक भव्य है उसी का सारा बचा है तो क्या करो अपने 200 स्कन वालों से पोस्ट डलवाओ 200 और उसम लिखवा हमारी ओर से केवल एक

00:53:11:25 भ ही है जो ज्ञानवर्धक जो स्कोन के पक्ष को रख सकता है जो जन ज्ञानी है अगर तुमने ऐसा किया तो ठीक है भ के साथ हम कर लेंगे 200 लोगों से पोस्ट डलवाओ ठीक तो ये तो रही बा अब बात करते हैं उस कलम की वो बी स्प सोल वाला कलम जो किसी को अपना चेहरा दिखाने के लायक नहीं रहा उसके बारे में लोग कहते उसने हमारे विरोध में वीडियो बना दिए हैं 51 वीडियो बना दिए पहली बात तो मैंने तेरे 51 वीडियो देखे नहीं है मैंने शुरू के दो वीडियो तेरे देखे थे पहला जो तूने बनाया उसका मैंने उत्तर दिया चैतन्य महाप्रभु थी ना तूने मुझे उत्तर दिया था तो उसका मैंने उत्तर दिया था उत्तर देते हुए मैंने कहा था अब इससे आगे की बात आमने सामने से होगी तो क्या किया जो मेन प्रश्न मैंने पूछा था जब तने कहा कि चैतन्य महाप्रभु जो है वैष्णव चार्य थे वो वैष्णव थे वास्तव में वो तो शंकराचार्य का दिखावा करते थे तो मैंने कुछ मूलभूत प्रश्न पूछे थे इस वीडियो में कि अगर वो वणवा थे तो उनकी परंपरा क्या थी फिर उनके पास कौन सी जन

00:54:26:28 आया था बताया आज तक किसी वीडियो में और व प्रामाणिक सन्यासी नहीं सुद्ध होते व ू बोल रहे उनके अंदर जीवन का मोह उनके अंदर जबकि सन्यास के क्या लक्षण रक्ता के क्या लक्षण है बस गीता पढ़ाओ अपने जानो मत उन सिद्धांतों को सन्यासी के लक्षण है जिनका मान मोह नष्ट हो चुका हो जिन्होंने अपनी सभी इंद्रियों पर जीत लिया हो को इंद्रियों को वो है सन्यासी और ऐसे सन्यासी को गुरु रूप में स्वीकार करने वाले फिर वो प्रामाणिक सिद्ध नहीं होंगे चैतन्य महा प्रभु तो ये सब मैंने कुछ मूल प्रश्न किए थे कि तुम्हारे यहां पर क्यों नहीं पढ़ाई जा रही उनकी अगर उन वैष्णवास्त्र

00:55:26:16 उनको गुरु कह रहे हैं तो पढ़ाए कैसे होगा तुम्हारे लिए पढ़ाओ उनकी और दूसरी बात अगर चैतन्य महाप्रभु ने उनसे ज्ञान लिया है भगवान श्री कृष्ण को उनसे जान पाए हैं और वो अगर तुम्हारे अनुसार किसी और परंपरा के शंकर परंपरा के नहीं है तब भी तुम उस परंपरा के हुए ना मधवा परंपरा के कहां से हुए ये सब मैंने प्रश्न पूछे थे और फिर इनके बाद मैंने कहा कि अब जो चर्चा होगी आमने सामने से होगी तो जनाब ने आज तक तुम्हारे उस कल में कोई उत्तर नहीं दिया इसका अलग अलग नन वीडियो बनाए और हर बार व विषय बदल देता है अगर चैतन्य महाप्रभु की बात हो रही है तो चैतन्य महाप्रभु की बात जब तक खत्म ना हो जाए दूसरा विषय खल हो तुमसे मैंने पूछा अगर वो किसी और वैष्णव संप्रदाय के है शंकराचार्य के नहीं है तो अपने आप को संप्रदाय का कहो उनकी उनके गं को पढ़ाओ और वो गुरु परंपरा बताओ उने किससे शिक्षा ली किससे लिया फिर उनके पास कैसे आया वो भी बताओ और य भी बताओ वो सन्यासी कैसे हुए फिर डर के अपने शकर मत का कहने वाले आज तक उन बातों का जवाब जब नहीं दिया है और हर बार विषय अंतर कर कर के नए नए प्रश्न बना रहे हो आधे से ज्यादा वीडियो शंकराचार्य नेय क व भव वाला काम शंकराचार्य ने वो कहा शंकराचार्य नेय लिखा वो लिखा है अरे

00:56:41:16 भैया ने शंकराचार्य जी की पढ़ाई कहां से की है हम लोग उन बातो पर बात करते तुम बोलते हो तुम्हारे ग्रंथों में भी लिखा तुम स्वीकार करते हो उसको बोलते हो जो तुम आउटपुट दे रहे उस मेरे क्वे है अगर मुझे कोई तुम्हारे य की चीज मिलेगी तो पहले मैं जाकर के तुम्हारे य के व्यक्ति से उसका अगर वो विवादास्पद दिख रही है तो उसको पूछता हूं कि क्या य जो कृष्ण अल्ला क्राइस्ट है एक मानता है तो तुम्हारा व्यक्ति बोलता है कि हा कृष्ण अल्ला क्राइस्ट एक है तब उस पर मैं बात करता हूं तुम्हारे जैसे नहीं शंकराचार्य ने क्या लिखा क्या नहीं लि उनके परंपरा प्रात आचार बताएंगे तो अपनी व्याख्या को पहले प्रमाणित करो जा कर जो तुम उनका अर्थ बता रहे समझे और नहीं तो एक डंका बजाना छोड़ दो डंका पीटना छोड़ दो कि हम परंपरा परंपरा प्राप्त ज्ञान होता है परंपरा से प्राप्त होता है इस सिद्धांत को तो तुम भी मानते हो ना वो बात और है कि जब इस सिद्धांत को मानते हो तो फिर कुरान का भी अर्थ करने लगते हो जबकि कुरान तो तुम्ह परंपरा से प्राप्त हुई नहीं है मगर उसका भी अर्थ करने लगोगे शंकराचार्य का भी अर्थ करने लगोगे रामानुजाचार्य का भी अर्थ करने लगोगे जबकि ये सब तु परंपरा से नहीं मिल रहा है मगर अर्थ करने लगो

00:57:58:12 क्यों और अगर तुम्हारा इस तरीके से किसी भी ग्रंथ का जो अर्थ करना है वो मान लिया जाए तो फिर इसका मतलब है तुम्हारा ये कहना जब भी कोई आ कर के कहे कि नहीं तुमने जो लिखा वो गलत लिखा और मैंने जो लिखा सही लिखा तो तुम्हारा ये कहना व्यर्थ है कि तुम परंपरा प्राप्त नहीं हो जाक नायक भी अर्थ कर देगा फिर कोई भी अर्थ कुछ भी कर दे फिर तो राल वाला कुछ भी अर्थ कर दे फिर तो यही कहा जाए नहीं तुमने गाली द ल के रूप में निर जी ने अगर कहा भया इन्होने रासकल कह दिया है कृष्ण को तो ये लोग वीडियो बना रहे गवार है मूर्ख है इनको रासकल का अर्थ नहीं पता बोल अपने बाप को रास्कल बोल अपने मां को रास्कल बोल अपने भाई को रास्कल बोल अपने गुरु को रास्कल बोल तब तुम्हारे जैसे लोगों की सच्चाई सामने आएगी समझे तो कुल मिला कर के क्या है ब स्प सोल वाले की क्या बात है कि जब हमने उसको यथोचित उत्तर देते हुए और फिर प्रश्न करते हुए कि अगर तूने ये कहा है कि वैष्णव चार्य थे तो बता उनकी वैष्णव परंपरा क्या है फिर बता तू अपने आप को उस परंपरा का क्यों नहीं कह रहा है फिर बता कि तेरे यहां पर वो पढ़ाया क्यों नहीं जा रहा फिर ये भी बता कि तू जो आज भागवत छाप रहा है और पढ़ा रहा है लोगों को वो भागवत कितना मैच खा रही है कितना नहीं खा रही

00:59:13:20 और अगर मैच नहीं खा रही है तो क्यों नहीं खा रही है और अगर मैच नहीं खा रही है तो भागवत नई भागवत जिसको तू छाप रहा है उसको लिखने वाला कौन हुआ चैतन्य चता मृत के हिसाब से वैश्या कहा है ना चैतन्य महाप्रभु ने उसे वैश्या कहा है जो विरोध करेगा इस भागवत का सीधा स्वामी की भागवत का तो जहां जहा पर वो मैच नहीं खाएगी वहा वहा पर वो कौन हुआ लिखने वाला ई वाली समझ लो तो कुल मिलाकर के यह व्यक्ति जो है स्प सो वाले के चेले मुझसे आ कर के कहते कि तुम्हारे विरुद्ध में इतने वीडियो बनाए तुम मुझे एक बात बताओ एक ही विषय पर जिस पर मैंने उत्तर दे दिया उस पर एक व्यक्ति बारबार बार बार नए नए तरीके से नए नए शब्दों का उग बनाता रहे तो मैं जब तक उसका नाम लेकर के हर वीडियो का उत्तर नहीं दे दूंगा तब तक तुम मुझे बड़ा कहोगे संभव है किसी के लिए भी तब जब विरोध में वीडियो बनाने वाला अकेला नहीं है रामपा वीडियो बना रहे हैं आर समाजी भी वीडियो बना रहे हैं और एक आ समा नहीं एक रामपा नहीं अनेक तो य संभव है कि व्यक्ति जो है उसी विषय पर जिस पर तुमने बात कर द उसी विषय पर शब्दों का हेर फेर करके बनाता र जवाब देते रहो य संभव है तुम्हारे लिए विषयात करके या फिर न टॉपिक

01:00:28:24 जैसे इस पर फसने लगे तो दूसरा टॉपिक निकाल लिया शंकराचार्य ने अपने ग्रंथ में य कहा देख विष्णु भगवान को व क अरे भाई चैत महाप्रभु वाले से शुरू कर जवाब दे इन बातो का छोड़ दिया बातो को तो य तुम लोग के लिए संभव होगा मेरे लिए संभव नहीं भाई कि तुम्हारे विरोध में एक ही विषय पर जिस पर तुम बात कर चुके हो या फिर विषय बदल बदल कर हजारों वीडियो बनते रहे और ब तक हो सकता है तुमने उन बातों की काट भी अपने वीडियो में कर द मगर तुम तब तक नहीं मानोगे जब तक हर व्यक्ति का नाम लेकर के वीडियो नहीं बन जाएगा 2000 लोग अगर वीडियो बना रहे तो 2000 लोगों का नाम लेकर वीडियो बनाओगे वीडियो बनाना पड़ेगा तभी तुम भगोड़े नहीं हो अन्यथा तुम भगड़ हो यही है ना तुम्हारे तुम्हारे जो चीज तुम फैला रहे हो ना उन कुतर को को तुम्हारी जो सत्यता है कि कितनी हीन कितनी निम्न स्तर के तुम्हारे तर्क होते हैं कितने निम्न स्तर की तुम्हारी विचार होते हैं उन सबको ही सामने लाना इस जीवन का इस देह का एकमात्र उद्देश्य है पाखंड का नाश करना सनातन के नाम पर सनातना भास का नाश करना धर्म के नाम पर धर्मा भास का नाश करना ईश्वर के नाम पर ईश्वरा

01:01:44:03 भास का नाश करना ये ध्यान रखना इस शरीर का यही एक मात्र उद्देश्य है तो संभव नहीं है मेरे लिए कि मैं भैया अगर 2000 लोग इस तरह का कार्य करें तो उन 2000 लोगों का ऐसे ही नाम ले लेकर के मैं वीडियो बनाता रहू ठीक है और भी कार्य होते हैं अब बात आती है दुर्जन तोष न्याय से इस बात को मान लिया जाए कि मैं बहाना ढूंढ रहा हूं जवाब ना देना पड़े इसलिए क्योंकि जवाब है नहीं तो अब बात यह बताओ कि मैंने अमोग लीला के नाम लेकर के वीडियो बनाए कि नहीं बनाए केशव दास का नाम लेकर के वीडियो बनाए कि नहीं बनाए और तुम्हारे लोगों के नाम चिह लोगों के प्रामाणिक लोगों के नाम ले लेक के वीडियो बनाए कि नहीं बनाए उन्होने मेरा नाम व नहीं बनाया तो मैंने कभी उनको भगड़ कहा तुमड़ा कहोगे बोलो उनको इसीलिए सामने आकर के बात करने के लिए कहता हूं जिससे की तुम लोग विषयात ना कर पाओ दूसरी बात ना बोल पाओ अब वो कहता है भाई साहब ब सो वाला जिस हकने को हिंदी बोलना नहीं आ रही ठीक से वो कहता है मुझसे संस्कृत में शास्त्रार्थ करो इंटरनेशनली व प्रचारित होगा और जो है वो क्या कहते हैं वो ऑफलाइन होगा संस्कृत

01:02:59:03 में करना पड़ेगा कर लेंगे संस्कृत में ले आएंगे अपने आगे संस्कृत को तू अपनी तू अपनी बात तो बोल तू तो हिंदी नहीं बोल पा रहा है कल और बता सनातन सिद्धांत लिखा दिखा कि शास्त्र चर्चा ईश्वर के बारे में चर्चा केवल संस्कृत में होगी दिखा सिद्धांत अगर संस्कृत मेंही चर्चा होनी है तो फिर जब अगर मैं हिंदी में वीडियो बना रहा हूं तो प्रतिकार क्यों कर रहा है संस्कृत में कर प्रतिकार हिंदी में क्यों कर रहा है बल्कि हिंदी में बने हुए वीडियोस का तो ध्यान ही मत दे क्योंकि केवल तुझे तो संस्कृत में प्रश्न चाहिए मतलब क्या है ये देखिए दोगले पन की पराकाष्ठा क्या है पराकाष्ठा कि हम सनातन के नाम पर सनातन भास फैलाने वाले सिद्धांतों का क्लेम तो करेंगे प्रचार तो करेंगे दुनिया की हर भाषा में छाप देंगे मगर अगर बात आएगी उनके संबंध में प्रश्न का उत्तर देने की उनके संबंध में उठने वाले शंकाओं का समाधान करने की तो हम ये कहेंगे संस्कृत में होगा तो करेंगे दिखा सिद्धांत सनातन सिद्धांत तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है दिखा शास्त्र प्रमाण कहां लिखा

01:04:14:07 है ज्ञान चर्चा केवल शास्त्र चर्चा केवल संस्कृत में होगी और फिर हम आएंगे अपने भाई को लेकर के आएगा हमारा गुरु भाई जो संस्कृत में बात करेगा मुझे नहीं आती नी संस्कृत भाई कोई व्याकरण का विद्यार्थी नहीं रहा हूं मैं ू तैयार रहना सनातन सिद्धांत ले आ फिर तैयार हो अबे हिंदी बोलना तो सीख ले अकले संस्कृत में बात करेगा तो पता चल गया होगा जो उनके चेले चाप उनको भी और बाकी जो न्यूट्रल है और बाकी जो सत्य के पक्षधर है उनको भी कई सारी चीजों का हमने यहां पर वो किया है वैसे मुझे नहीं लगता सामने इसके पास कोई सनातन सिद्धांत होगा गुर्दा होगा एक तीसरी बात करेगा फिर 101 पोस्ट बना देगा फिर इसके चेले चा पड़ आएंगे तेरे विरोध में उसने 101 वीडियो बनाए हैं 101 आज तक तूने कुछ नाम वो नहीं दिया उत्तर अरे भाई तेरे लोगों के लिए जो तुम्हारे यहां के लोग है उनको भी तो बनाए हैं उन्होंने भी नहीं दिया कहो

01:05:12:24 भगवा बेवकूफ कहीं के बिल्कुल ठोस बुद्धि है ठोस बुद्धि मेरे जानकारी में ये जो बी स्प सोल वाला जो व्यक्ति है ये वास्तविकता में दया का पात्र है दया का पात्र क्योंकि इसके माता पिता ने इसके घर ने इसके यह जिस भी बाधित ईश्वर को मानता है भगवान श्री कृष्ण नहीं भगवान श्री कृष्ण सर्व शक्तिमान है अद है किसी भी नियम के नीचे नहीं है सभी नियम को बनाने वाले सर्व नियामक है वो है भगवान श्री कृष्ण मगर जिस ईश्वर की यह पूजा करता है उसने इसके साथ बड़ा अन्याय किया बचपन में मां का दूध नसीब नहीं हुआ बेचारे को इसलिए मुह नहीं दिखा पा रहा है अरे मुझसे संपर्क कर लेना थोड़ा बहुत कुपोषण दूर करवाऊंगी

01:06:00:13 तेरा और एडिटिंग एक थर्ड क्लास निमन दर्जे की एडिटिंग कर लेता है तो सोचता है इसने बड़ा जग कर लिया निगरा चार्य जी की फोटो को कुत्ता बना दिया मेरी फोटो को कुछ कर दिया ये कर दिया वो कर दिया इससे सोचता बस मैंने दुनिया जीत ली तेरे यहां की स्त्रियों के साथ जब कोई घटना घटित हो रही होगी ना तब भी तू एजट कर नीच एडिट कर उस समय मैं देखो इनकी फोटो बूंगा वायरल करूंगा खुश हो जाऊंगा मैंने बहुत बड़ा काम कर लिया चिंता मत कर उस समय हम ही रो जाएंगे तेरे घर की मातृ शक्तियों की रक्षा करने तू अपना मुंह काला करके एडिट करता रहना कर एडिट अब जा कर के शास्त्र का उत्तर शास्त्र का उत्तर नहीं होता है तो यह सब आता है जय श्री राम सभी को [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:06:53 · 03 Mar 2025

भक्ति के नाम पर गुंडई करने वालों को उत्तर Iskcon followers देखे सच्चाई #iskcon

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