No part of this video is used anywhere yet.
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:00:01 – 01:27:46:00 (1:27:46)

00:00:00:01 विवाह होने से जस्ट पहले तक अगर मुस्लिम था अगर आप कराते तो तब है जब वो अभी उसने स्वीकार कर लिया बोलया तो आर्य समाज वैदिक संस्कार ट्रस्ट है इस ट्रस्ट को कोई अथॉरिटी नहीं है पहले तो आपको हिंदू धर्म को जानना पड़ेगा पहले वैदिक धर्म को जानना पड़ेगा आर्य समाज में आर समाज में तो हो रहा है आप नहीं करा रहे समा में हो रहा है तो आप उसको समर्थन दे रहे और मूर्ति पूजा करना धर्म है देखो सत्या प्रका में लिखा है ना मैं दिखा दे रहा हूं क्या लिखा है उस हम कुछ नहीं बोल सकते क्योंकि ईश्वरी व ईश्वर को समझना बहुत बड़ी बात है समाज के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है ये सर्वशक्तिमान है या नहीं है सते वो मनुष्य जन्म लेता है भाई ईश्वर जन्म नहीं लेता तो सभी को जय श्री राम जैसा कि आप लोग जानते हैं आवान के द्वारा विभिन्न जो धार्मिक विचारधाराएं हैं आध्यात्म के बारे में ईश्वर के बारे में धर्म के बारे में तो उनको हम समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं इसी क्रम में आज हम आए हैं भिलाई में आर्य समाज मंदिर है ये और यहां विद्यालय भी है और आज हमारे साथ

00:01:15:12 उसी विद्यालय के धर्माचार्य जी यहां पर विराजमान है तो सर्वप्रथम मैं कहूंगा आपसे थोड़ा सा हमारे दर्शकों को अपना परिचय दे दीजिए नमस्ते जी मैं आचार्य अंकित शर्मा आर्य समाज भिलाई सेक्टर छ के धर्मा चार पद पर पदस्थ हूं और सात वर्षों से यहां पर मैं अपने सेवा दे रहा हूं और मेरी पढ़ाई जो है गुरुकुल में हुई है मैं आचार्य किया हुआ हूं और साथ में आधुनिक शिक्षा बीएड एम एड और दो विषयों पर मैं एमए हूं और निरंतर समाज के कार्यों के लिए महर्षि दयानंद जी के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए हम काम कर रहे हैं उनके दिखाए हुए रास्ते पर हम सभी चल रहे हैं और इसी यही कार्य संस्कार युक्त भारत बनाने के लिए हम सभी लगे हुए हैं बहुत अच्छा परिचय दिया और बताया कि विदत मतलब काफी विद्वान व्यक्ति है इन्होंने काफी सारी योग्यताएं प्राप्त की है तो अब हम थोड़ा सा आपसे जानना चाहेंगे यहां क्या क्या होता है मतलब इस विद्यालय के द्वारा यह जो आपका केंद्र है इसके द्वारा किस किस तरह की चीजें जो है समाज के लिए आप

00:02:31:03 य आर्य समाज भिलाई है लगभग सा वर्षों से आर्य समाज की यहां पर स्थापना हुई हुई है स्वामी दिव्यानंद जी महाराज जी के तत्वा धात में और उनके निर्देश से आर्य समाज की स्थापना हुई भिलाई वासियों के द्वारा जो है चंदा देकर के लोगों के सहयोग से यह आर्य समाज बना और विद्यालय बना और इस तरफ जो है आर्य समाज मंदिर चलता है तो जिसके माध्यम से हम 16 संस्कार जो हम कराते हैं तो 16 संस्कार भी कराते हैं और आर्य समाज मंदिर में प्रत्येक रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन होता है जिसमें हम प्रातः संध्या करते हैं हवन करते हैं और जन कल्याण के लिए आहुति देते हैं लोग स्वस्थ रहे आनंद में रहे इस भाव के साथ हम यहां पर एक सत्संग भी करते हैं और समय समय पर आर्य समाज की ओर से कई सहायता भी हम करते रहते हैं लोगों से दान लेते हैं और दान देने का भी कार्य करते हैं जैसे वस्त्रों का जो है हम आवंटन करते हैं और कंबल का वितरण करते हैं ग्रीष्म कालीन समय में हम लोग जो है पानी बोतल आदि जो है लोगों को देते हैं जो प्यासे होते हैं उनको पिलाते हैं

00:03:47:04 और कई ऐसे कार्य भी करते हैं जैसे लोक कल्याण के लिए विवाह भी हम कराते हैं कई जोड़ों का जो आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है ऐसे लोगों का सामूहिक विवाह कराते हैं और जो संपन्न है वे आर समाज में आए कम खर्च में उनका विवाह हो जाता है ऐसे कई समाज के कार्य हम करते रहते हैं जिससे समाज में एक समरसता बनी रहे जी और दयानंद जी के उन्हीं कार्यों को लेकर हम आगे बढ़ते रहते हैं जी जी स्त्री शिक्षा नारी शिक्षा आदि के लिए भी हम खूब यहां प्रयास करते हैं ताकि हमारी स्कूल के माध्यम से जो है बच्चे अच्छे निकले और पढ़ाई में अच्छे मन लगा कर के पढ़े अच्छा इसमें आपने जैसे एक बात कही कि विवाह भी कराते हैं तो ऐसे मतलब देखने में आता है कि अगर किसी युगल है कोई ऐसा कोई जोड़ा है इसके माता-पिता भी अभी उनके विवाह के लिए तैयार नहीं है अनुमति नहीं मिल रही कि वो आपस में विवाह करें तो उनका विवाह भी यदि वो व्यस्क है तो उनका विवाह भी आर्य समाज के मंदिर में हो जाता है हो जाता है क्योंकि देखो जीवन दो लोगों को

00:05:02:08 अधिकतर प्राय व्यतीत करना होता है स्त्री और पुरुष को यदि दोनों की सहमति है और पूर्ण जीवन उनको विवाह में हमारे यहां तो ऐसा है कि व्रत जब ले लिए और पानी ग्रहण हो गया तो उनको पूरा निर्वाह करना है तो जब निर्वाह करना है पति-पत्नी की सहमति है और माता-पिता की सहमति इसमें नहीं है तो मैं यह उचित मानूंगा कि पति-पत्नी के सहमति को ज्यादा प्राथमिकता दी जाए क्योंकि जीवन निर्वाह उनको कर ना है और एक दूसरे को भली भाति यदि व एक दूसरे को जान लेते हैं और उनके साथ जीवन निर्वाह हो तो बहुत अच्छा तरीके से जीवन निर्वाह हो सकता है मतलब पति-पत्नी यदि उनकी आपस में साथ में रहने की इच्छा है इच्छा है तो इतना भर काफी है उनको विवाह संबंध में बांध देने के लिए मान्य है ये तो सरकार ने भी नहीं सरकार मतलब सरकार तो एक अलग चीज हो गई हमारे धार्मिक नियम धार्मिक नियम में तो ऋषि कहते हैं कि एक दूसरे के जो है पसंद से विवाह आप करते हैं तो उत्तम माना गया उसको तो इसमें ऐसा भी है कि अ जो मुस्लिम वर्ग है या क्रिश्चियन वर्ग है अ हिंदू वर्ग है उसका भी लड़का जैसे कोई प्रेम प्रसंग हो गया युवती के साथ तो उसको भी हम करा देते विवाह कई आर समाज मंदिरों में नहीं देखो हमारे यहां आर्य समाज में यह

00:06:17:13 नियम है जी कि हम हिंदुओं का ही विवाह कराते हैं अच्छा जो आर्य है करते कई आ समाज मंदिरों में ऐसा भी हो रहा है कि मु के आ समाज मंदिरों में व होता है जब वह हिंदू धर्म को स्वीकार करते हैं अच्छा मतलब क्योंकि हम हिंदू और हिंदुओं का ही विवाह करा सकते हैं जी जी जी अन्यों का नहीं करा सकते तो मतलब वो जब हिंदू हो जाता है तो आप उसका तो हम उनका जैसे कि कोई ईसाई है और वो हिंदू धर्म में आना चाहता है स्वक्षा से अपनी इच्छा से तो हम उसे सत्यार्थ प्रकाश देते हैं उनको हम अपने ग्रंथ देते हैं उनको हम आर्य सिद्धांतों के बारे में बताते हैं वैदिक धर्म के बारे में बताते हैं जब वो उन चीजों को स्वीकार कर लेते हैं और मतलब आप कराते तो हिंदू के साथ ही हैं बस वो पहले आप विवाह होने से जस्ट पहले तक अगर मुस्लिम था अगर आप कराते तो तब है जब वो अभी उसने अपना स्वीकार कर लिया बोल दिया कि मैं हिंदू ह हा तो मतलब जब ऐसे जोड़े को जब आप कोई सर्टिफिकेट देते हैं तो उसके साथ में एक सर्टिफिकेट और देते हैं जिसमें कि वो हिंदू हो गया है ऐसा धर्म परिवर्तन का वो वो सर्टिफिकेट भी दे लेकिन लेकिन हम इस चीज को थोड़ा सा वो करते हैं लोगों को समय देते हैं कि आप हिंदू केवल विवाह के लिए बन

00:07:32:13 रहे हो कि आप स्वक्षा से अपना रहे हो तो उनका कहना है कि मैं स्वक्षा से अपना आंगा तो उसके लिए आपको पहले तप करना पड़ेगा पहले तो आपको हिंदू धर्म को जानना पड़ेगा पहले वैदिक धर्म को जानना पड़ेगा धर्म क्या है इसको जानना पड़ेगा आपको हमारी वर्ण व्यवस्था जानना पड़ेगा आपको हमारा पाठ्यक्रम जानना होगा आपको कैसे विचार करना है कैसा आपका खानपान हो किस प्रकार आप रहे कैसे जीवन यापन करें यह तो सीखना पड़ेगा मैं यही मैं एक इसमें से ही यह पॉइंट पूछना चाह रहा था कि जब जैसे कोई हमारे पास विवाह करने के लिए जोड़ा आया चलिए आप तो थोड़ा बहुत उसको देखने के लिए समय भी देते हैं मगर जैसे कोई हमारे पास जोड़ा आया और उसने कहा कि हमें विवाह आपस में करना है मगर उसमें से एक जो है जैसे हमारी कन्या है हिंदू कन्या है और जो क्या कहते प्रेमी है यानी पुरुष है वो जो है मुस्लिम है या क्रिश्चियन है तो हम नहीं कराते तो उसमें फिर नहीं जैसे आपने बताया ना कि वो परिवर्तन कर ले नहीं नहीं हम इस तौर पर कराते हैं यदि मैं मैं एक बार अपना सवाल पू इसमें से मैं ये चीज पूछना चाह रहा था कि जैसे हमारे पास कोई जोड़ा आया जो लड़की हिंदू है और लड़का जो है मुस्लिम है मगर वो ये कह रहा है कि मैं भाई

00:08:47:13 हिंदू होने के लिए तैयार हूं ठीक है तो अब इसमें दिक्कत एक ये आती है कि वो हिंदू होने के लिए तैयार है और हम ये मानते हुए कि वो हिंदू हो गया जैसे मान लीजिए कुछ समय भी दे दिया हमने अब उस समय के बाद दोबारा वापस आया कि मैं हिंदू हो गया हूं तो ऐसा निश्चित पैरामीटर क्या है जिससे हम यह जान सके कि वो वाकई में हिंदू हो गया है अंतरात्मा से उसने ग्रहण कर लिया है या यह कोई एक द्वेष वस एक चाल है उसकी तो इसके लिए एक निश्चित पैरामीटर कोई हमारे पास है क्योंकि मेरी जानकारी ये है इस मामले में कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी जगह पर है जो जैसे मान लीजिए कि इसका यूज यहां नहीं हो सकता हम हम जहां वो है ऐसे ऐसी जगह जन्म लेने वाले व्यक्ति का हमारी कोई ऐसी जगह है जहां पर उसका यूज नहीं हो सकता है मान लीजिए तो अगर वह व्यक्ति उस तरह के आचरण अपना भी लेता है तो वह उसके व्यक्तिगत उद्धार के लिए तो ठीक है मगर हम उसको अपनी जो सेंसिटिव मैटर्स है संवेदनशील मामले हैं उसकी अपॉर्चुनिटी उसको नहीं दे देंगे क्योंकि जैसे मान लीजिए कि वो मुस्लिम है और उसने हिंदू धर्म अपना लिया फिर उसने अपने नाम के आगे त्यागी लगा लिया या पांडे लगा लिया उसके बाद पांडे लगाते लगाते लगाते हमारे किसी बड़े धर्माचार्य की पोस्ट

00:10:02:21 पर बैठ गया तो अगर वो पांडे बन के अपने जीवन बिताना चाह रहा है है ना तो वो उसके लिए तो ठीक है कि वो अपना पांडे बन कर के जीवन बिताए जी देखिए इसमें मैं बता दे रहा हूं मैं एक क्वेश्चन लास्ट में सीधा कर दूं कि हमारे पास क्या हमारे पास कोई निश्चित पैरामीटर्स है ये जानने के लिए कि इसने अंत आत्मा से हमारा हिंदू धर्म अपना लिया है या फिर नहीं अपनाया है तो मतलब क्या वो आधार है जिस पर हम जान सके नहीं अपनाया और जब हम लोग निश्चित नहीं है तो हम लोग अपने घर की बेटियां मतलब अपनी हिंदू बेटियों को बदले हुए जो व्यक्ति हो सकता है चाल से आया हो आजकल आप देख ही रहे हैं किसकिस तरीके से फसाते हैं तो उसका निश्चित पैरामीटर क्या है अब सबसे पहला बात आपको मैं बताता हूं हम जैसे लड़की कोई ईसाई है लड़की कोई मुस्लिम है तो उसका विवाह हम करा देते हैं अपने यहां लेकिन लड़का यदि कोई मुस्लिम है लड़का यदि कोई ईसाई है तो उसका विवाह हम लोग नहीं कराते नहीं बदलने के बाद अगर वो तैयार तो भी नहीं कराते आर्य समाज में आर्य समाज में तो हो रहा है ऐसा आप नहीं करा रहे य तो आपका व्यक्तिगत है तो आपका यहां पर हम लोग नहीं कराते दूसरा चीज प करते मामले इस मामले में आप आर समाज के साथ नहीं है आ समाज के साथी

00:11:18:20 है देखो क्या होता है अब इसमें मैं खुल के बोलना चाहता हूं हमारी बेटी है हमारी बहन है जी अब कोई दूसरे संप्रदाय में चली जाएगी संप्रदाय नहीं पंथ है ना पंथ पंथ में यदि चले जाएगी जी तो हमारा तो भाई एक बेटी हमारी एक बहन तो चली गई ना बिल्कुल तो इसी उद्देश्य को लेते हुए आर्य समाज भलाई यह शादी नहीं कराता कि वह मुस्लिम लड़का है या ईसाई लड़का है तो सबसे पहले वहां पर हम रोक देते हैं कि इनका विवाह नहीं मतलब आप धर्म परिवर्तन करा के शादी नहीं करते मगर आर्य समाज में ऐसा हो रहा है ऐसा यदि हो रहा है तो ठीक हो रहा है तो उसके भी कई कारण है कैसे हो रहा है तो यदि कोई व्यक्ति अपने धर्म को परिवर्तित कर रहा है व सुत वो पहले तो वैदिक धर्म में ही थे हिंदू ही थे उनके पूर्वज तो पूर्वज उनके हिंदू ही थे उन लोग घर वापसी कर रहे हैं जिस घर में थे उसी घर में पुनः वापसी आ रहे हैं तो फिर आप क्यों नहीं कराते मैं इसलिए नहीं कराता कि मैं देखा हूं कई बार ऐसा है मतलब मेरे साथ ऐसा घटना तो नहीं घटा लेकिन सुनने में आया है कि लव जिहाद कोई चक्र चल रहा है जिसके कारण हमारी बहन बेटी बहुत फस जा रही है

00:12:33:20 जी तो मैं कहा कि इस जड़ को ही खत्म कर दे यहां पर आर्य समाज में यह कार्य नहीं कराया जाए नहीं कराएंगे तो क्या दिक्कत है नहीं नहीं देखिए आपने कहा कि जहां प होता है तो वहां पर इसलिए होता है हां तो अब वहां क्यों होता है इसका भी एक है हर व्यक्ति को सुधरने का अवसर मिलता है कोई गलती करता है और कोई यदि व्यक्ति जाता है कि हां भाई कोई मुस्लिम बन गया है या वो अब अपने जीवन काल में वैदिक धर्म से ओत प्रोत होना चाहता है जो सच्चे भाव से कि हां मैं वैदिक धर्म में आना चाहता हूं तो उनका स्वागत है मेरा कहने का मतलब है वो होना चाहता है मगर हमारी लड़की लेके क्यों होना चाहता है हां तो उसके लिए हम प्रतिबंध करते हैं आप नहीं करते मगर आर्य समाज में ऐसा हो रहा है तो अगर आप नहीं कर लेकिन आर्य समाज में भी बंद हो चुका है ये सब ये सब चीज घटना होने के बाद ना नहीं अभी भी हो रहा है अभी मुझे रिसेंट एक व्यक्ति क्लिप दिखाई गई भले आपको मिला होगा लेकिन आर् समाज में बंद है तो फिर सिद्धांत क्या है मतलब कहीं लिखा होगा ना कि ऐसा करना है ऐसा नहीं करना है जैसे तेरे लिए कर्तव्य और

00:13:58:01 अकर्वेंट निर्देश किसी को व्यक्ति को देते हैं और प पहले एक चीज क्लियर कर ले आपका मानना है कि नहीं होना चाहिए हा मगर आर्य समाज में हो रहा है तो आप उसको समर्थन दे रहे हैं यदि कोई व्यक्ति आना इस समर्थन इसलिए नहीं दे रहा हूं कि यदि वह गलत सोच के साथ आ रहा है समर्थन इसलिए दे रहा हूं कि यदि वास्तव में वो बनना चाहता है कोई व्यक्ति आपको कैसे पता है वास्तव में बनना चाहता है कि नहीं भाई उससे पूछोगे ही तो हा तो उससे पूछेंगे उसे वार्तालाप करेंगे उसके मन के भाव को फिर आप यहां भी करा सकते हो यहां कराना शुरू कर नहीं कराना इसलिए नहीं नहीं कराने का मतलब बताया कि लव जिहाद जैसे मानसिकता उनके मन में है तो फिर जहां हो रहा है जहां हो रहा जहां पर हो रहा है वहां पर तो हम आर्य समाज के लोग ऐसे तो नहीं करना चाहिए मेरे ख्याल से नहीं करना चाहिए मतलब आप समर्थन नहीं करते मैं समर्थन नहीं करता कि ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि मानसिकता उनकी अलग है इसलिए हम आर समाज भिलाई में अभी तक के कोई मुस्लिमों का शादी कोई ईसाइयों का लड़का यदि है चलिए इसके लिए मैं आपके लिए बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं आपने ऐ हम ऐसे लोगों के साथ भी नहीं देते हैं क्योंकि विद्यार्थियों का जिनकी मानसिकता गलत है जिनके विचार गलत है हमारी बेटी बहनों के साथ गलत मानसिकता रखते हैं ऐसे लोगों के लिए आर्य समाज उनके साथ में नहीं

00:15:13:03 है नहीं फिर आप दो बातें ई आर्य समाज तो ऐसा कर रहा है पर आप पर्टिकुलर आप ऐसा नहीं करते हम आर्य समाज सेक्टर छ में ऐसा नहीं करते तो फिर जो बाकी का आर्य समाज समाज यद कर रहे हैं यदि आप उसका समर्थन नहीं करते नहीं नहीं आज समाज एक विचारधारा है जो चलता है यदि कोई आर्य समाज ऐसा कर भी रहा होगा तो मैं नहीं बोलता कि वह गलत कर रहा होगा क्यों क्योंकि वह पूरे विचार करते हैं आर समाज के जा देता होगा आप भी जांच परक के देते हो क्या हा जी हम जांच हैं आप जांच पर के मुस्लिम के साथ कराते थे यहां प लड़की रहता है तो उसके साथ करते लड़का से नहीं करते जांच परखने के बाद भी नहीं हम नहीं हमारे यहां ये फार्मूला है कि हम नहीं कराएंगे मतलब नहीं कराएंगे लेकिन यदि कहीं होता भी आज समाज में देखिए तो आर्य समाज में मैं बता दे रहा हूं आर्य समाज में ऐसे लोग नहीं है जो पैसा के लालच में या किसी और के लालच में ऐसे लोग आर्य समाज में नहीं है वो नहीं कह रहा हूं देखिए आपका सिद्धांत हमें बहुत अच्छा लगा आपने कहा कि भाई मैं जांच परखने के बाद भी अपने घर की बेटी को कहीं नहीं भी आऊंगा किसी दूसरे कल्ट में है ना मगर फिर दूसरी तरफ आप ये कह रहे अगर कहीं पर हो रहा होगा तो उसने जांच परख के किया होगा तो जांच परक करके मुस्लिम को अपने यहां की बेटी दे देना जांच परक करके मुस्लिम को मिनट

00:16:28:15 जा प्र करके मुस्लिम को अपने आ की बेटी दे देना आप यहां पर सही मान रहे हैं मगर जब जब आपसे करने को कहा जा रहा है तो आप कह रहे हैं मैं नहीं करूंगा नहीं नहीं मैं नहीं करूंगा ऐसा नहीं कह रहा हूं मेरा कहने के तात्पर्य है जी एक तो हमारे यहां ऐसा कार्य होता नहीं है पहला चीज ये पहला नोट है दूसरा चीज ये है किसी आद समाज में आप बोले होता होगा मेरे जानकारी में नहीं है होता है अभी मेरे भलाई में कहीं भी ऐसा नहीं होता है कोर्ट में केस चला गया था कोर्ट में उन्होने कहा कि भाई तुम अपने मां-बाप के खिलाफ क् खाना चाहती हो तो ये वीडियो है उस तो ठीक लड़की ने कहा कि मेरे पिता मुझे मेरे पति के साथ नहीं रहना देना चाह रहे तो वो क्यों जज ने पूछा क्यों नहीं रहने ऐसा कुछ है बिल्कुल करेक्ट नहीं पता तो फिर वो बोलती है कि वो मुस्लिम है तो बोलते जज के तुम्हारे वो विवाह किसने कराया तो बोले आर समाज ने तो बोले आर समाज ने कैसे करा दिया कि आर समाज में इनका धर्म परिवर्तन हुआ है तो फिर बोला आ समाज को किसने धर्म परिवर्तन कराने के लिए ऑथेंटिक बॉडी बता य बकल उन्होने बोला जसे बोला आपके माता पिता ने जिसने आपको जन्म दिया था क्या ऐसे अपराध किए हैं या करने का प्रयास किया है जिस कारण से मैं पुलिस को आपके माता पिता

00:17:43:22 के खिलाफ एफ आईआर करने का आदेश कर मेजर ग ए ड अफेर विन मन मुस टू गेट मैज मनसन कवर्ड इम हिंदू मुस्लिम टू हिंदू रिलीजन कन्वर्जन के रिचल बताइए क हु तो आर्य समाज वैदिक संस्कार ट्रस्ट है इस ट्रस्ट को कोई अथॉरिटी नहीं है सर्टिफिकेट बा इस ट्रस्ट को स सर्टिफिकेट इशू करने की कोई अथॉरिटी नहीं है कन्वर्जन करने का अथॉरिटी है क्या बस इतना बता दीजिए दे आफ्टर शुद्धीकरण करने का य आर्य समाज वैदिक संस्कार ट्रस्ट इसको क्या अथॉरिटी है आप लोग रहने वाले कहां के सागर ये देहरादून में शादिया कैसे हो रही आप दोनों सागर के रहने वाले हो और यह रजिस्टर कंपलसरी रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिजस कैसे शादी कर रहा है उत्तराखंड वाला कोई दिल्ली से जाकर कर लिया कभी उत्तराखंड से कर लिया कभी किसी से कर लिया और सब बट रहे हैं सर्टिफिकेट उत्तराखंड वाले ने भी बांट दिया दिल्ली वाले ने भी बांट दिया रहने वाले सागर के मैं पुलिस को ये भी डायरेक्शन दे रहा हूं

00:18:58:26 विल वेरीफाई द अथॉरिटी ऑफ पस पर्सन जिन्होंने यह सर्टिफिकेट बांटने का धंधा बना लिया है ये ये सिट ये सर्टिफिकेट आपने किस एक्ट में जारी किया आर्य समाज उसम कहां लिखा है किर समाज में जनाब मुझे यह बताओ आर्य समाज में कहां लिखा है मैज वेशन एक्ट में ट यू कैन इशू सर्टिफिकेट ऐसे नहीं होता कल के दिन कल के दिन आप कल के दिन आप मौलवी बन जाओ एक ट्रस्ट बनवा लोगे क्योंकि हम हम हम तो हम तो आर समाज वाले हैं हमारे य जात पात कुछ चलता नहीं है और इसलिए मुसलमान बोलता है मैं हिंदू बन गया तो सर्टिफिकेट दे रहा हूं यह गोरख धंधा बंद करो 100% अनलॉफुल है बिकॉज यू हैव नो अथॉरिटी इन लॉ टू इशू सर्टिफिकेट तो कहने का मतलब आर समाज ऐसा करा रहा है मगर आप नहीं करा रहे हैं तो फिर आपको अगर यह लगता है कि नहीं कराना चाहिए तो फिर आप इतने अंश में आर समाज का समर्थन ना करें और अगर समर्थन कर रहे हैं फिर अपने साथ यहां पर करने में आप विरोध क्यों कर रहे तो यह थोड़ा सा समझ में नहीं आया अब मैं आपको बता दे रहा हूं हमने नहीं कराया पहला चीज दूसरा चीज जहां पर हुआ होगा वो जांच परक के किए होंगे

00:20:14:22 यानी जा यानी कि जांच परक करके मुस्लिम के हाथ में अपनी बेटी का हाथ दे देना ठीक है आपके अनुसार देखो यह धर्म तो हम लोगों ने बनाया है मैं एक चीज में आ रहा हूं धर्म जो है धर्म नहीं बोला जाए पंथ को है वो पंथ को किसने बनाया एक पैगंबर आया मोहम्मद पैगंबर उस मुस्लिम धर्म शुरू किया लेकिन सबसे पहले हम जिस जगह पर है भगवान ने हमें मनुष्य बनाया जी बाद में यह सब चीज बना है तो हर व्यक्ति का अधिकार है अपने जीवन को जीने का जीवन को जीने का अगर वो वापस आ रहा है तो उसको उसी के तरीके की किसी लड़की से विवाह कराना ये क्यों है वो वापस आने की कीमत य है कि हमारे घर की लड़की जाए हमारे घर की लड़की सबसे पहला माता-पिता को ध्यान देना चाहिए माता पिता तो है मा आर्य समाज विवाह कराते हैं आर्य समाज विवाह करते हैं आचार्य द्वारा विवाह संपन्न कराया जाता है लेकिन इसको निगरानी में रखने का कार्य तो माता-पिता का पहले मेरी बेटी कहां जा रही है रोकना चाहिए ठोकना चाहिए वो बेटी तो बिना बताए ही आई है ना आपके पास है ना तो माता पिता ने नहीं रोका दू आप तो उसम उसका समर्थन कर रहे हो ठीक है तुम्हारा भी माता पिता नहीं करा रहे मैं कराऊंगा नहीं ऐसा समर्थन नहीं है हम ऐसा किसी को नहीं बुलाते कि आप आ

00:21:29:24 जाओ हम करा दे जैसे कोई आया हमारे को विवाह करना है आपने बताया कि भाई देखिए बच्चे अपनी स्वेच्छा से कर सकते भले ही उसमें मां बाप राजा इसके लिए सरकार ने भी अनुमति दे दी अपने से सरकार नहीं हम लोग यहां धर्म की बात कर रहे हैं सरकार का क्या वो तो कल को एलजीबीटी क को भी अनुमति दे दी लिवन रिलेशनशिप को भी अनुमति दे देगी नहीं गलत कार्यों का हम सपोर्ट नहीं करते लेकिन हम अच्छे कार्यों का जरूर सपोर्ट करते हैं यह जो विषय है इसमें तो यह मैं कह आपके देखिए मैं समझ गया आपका व्यक्तिगत चिंतन य है कि मैं नहीं कराऊंगा दूसरे के उसमें मैं अपनी बेटी घर की नहीं दूंगी मगर कहीं प आर समाज अगर कर रहा है तो मैं वर्बल उसका खंडन नहीं करूंगा इतना हमें समझ में आया आप उसका समर्थन नहीं करते हैं मगर आप मुंह से उसका खंडन भी नहीं करेंगे नहीं आर्य समाज यदि धर्म परिवर्तन कराता है और वो हिंदू बन रहा है तो इसमें क्या दिक्कत है आप ऐसे करवाते हैं अपने विवाह कि वो हिंदू बना कर के उसको अपनी बेटी दे दी हिंदू यदि वो बनना चाहे तब तो हमारे यहां तो इतनी प्रक्रिया है उसको सालों बीत जाएगा हिंदू बनने में मतलब कि आर्य समाज में ऐसा होता है कि दो-तीन साल लगते हैं कोई हिंदू से मुस्लिम मैं जो हमारे यहां जो मैं प्रक्रिया बना आप क्या कि नहीं जो आर्य समाज मंदिरों में मुस्लिम के साथ भी विवाह हो रहा है मुस्लिम कहता है कि मैंने अपने आप धर्म परिवर्तन कर लिया

00:22:44:24 क्या वहां पर दो-तीन साल की प्रक्रिया होती है सेम डे या दो तीन दिन की प्रक्रिया होती दे विचारों को मानने के लिए सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ने के लिए सत्यार्थ प्रकाश में सभी धर्मों के बारे में लिखा है 1400 मुल्लास है और उस में खंडन मंडन सब चीज लिखा है तो उसको जो व्यक्ति पढ़ लिया विचारधारा से यदि वो यानी कि ये पैरामीटर है कि जो सत्यार्थ प्रकास पढ़ के आ जाएगा उसको हम हिंदू मान लेंगे और फिर हिंदू मानते आचरण आचरण केवल पढ़ना ही नहीं वो क्याक आचरण है फिर आचरण है धर्म पूर्वक काम करना छल कपट राग द्वेष से दूर रहना ये हम वो जब हमारे म जब हमारे यहां कार्यालय में आएगा उस समय हम जांचें कैसे जांचें विचारों से उनसे मुलाकात करके बार-बार मुलाकात करेंगे उनकी विचार देख उनकी मन शुद्ध हुआ कि नहीं हुआ यानी यानी जिन आर्थ समाज मंदिरों में ऐसा विवाह हो रहा है उसमें यह करते हैं कि मैं मुस्लिम हूं मगर मैं हिंदू हो कर के इस लड़की से विवाह करना चाहता हूं मैं हिंदू बनना चाहता हूं तो हमने कहा या आर्य बनना चाहता हूं तो फिर हमने कहा कि भाई हम तुम्हारे विचार वगैरह जांचें कल आना परसों आना फिर आना फिर आना ऐसे करते हैं या फिर तुरंत उसको एक दो दिन में ही सर्टिफिकेट दिया नहीं नहीं देखो कैसे करते हैं अब ये तो उनकी प्रक्रिया क्या है हमें मालूम नहीं हमारे पास एक लड़का आया हमने उसको कहा आप पहले

00:24:00:13 वैदिक धर्म में दीक्षित हो सबसे पहले आपको हमारे ग्रंथों को पढ़ना पड़ेगा दूसरा चीज आपको मांस त्यागना पड़ेगा और दारू आदि त्यागना पड़ेगा जितने भी गलत कार्य आप करते थे उसने त्यागा आपको कैसे पता चला बोला कि मैं त्याग दिया हूं दूसरा चीज आपको जन धारण करना पड़ेगा तो उसके लिए आपको तप करना पड़ेगा संस्कृत सीखना पड़ेगा संस्कृत पढ़ना पड़ेगा नहीं संस्कृत तो तब चालू होती है जब जने हो जाता है कई है तो मैंने उसको एक कहा कि आपको पहले करा दिया उसका विवाह आपने नहीं नहीं कराया क्योंकि वो विचार से उतना परिपक्व हो नहीं पाया भाई ये बताओ वैदिक धर्म विशाल इसकी कोई निश्चित पैरामीटर नहीं है कि किसी को अगर मुस्लिम से हमें हिंदू मानना है वो वाला हिंदू जिस हिंदू का उपयोग हम अपने आ के संवेदनशील वि विषयों में कर सके तो फिर उसकी वह कौन-कौन से आचरण कर रहा हो कौन-कौन से उसके विचार हो जिसको जांच लेने के बाद हमें मान सके कि वो वाला हिंदू बन गया है नहीं तो चलता हो बोलता ऐसा ये सब हम चेक कैसे करेंगे चेक कैसे करेंगे साथ में रहोगे तब मा आप साथ में तो रहोगे नहीं हा तो इसलिए बोल रहा हूं कि आप तो आप कैसे मान लोगे कि हि इसलिए उसको गुरुकुल में हम भेजते या हमारे पास रखते हैं तब जाके हम उसको देखते हैं कि उसके योग्य है कि नहीं है क्या आर समाज मंदिर

00:25:15:18 में ऐसा विवाह होता है तो यही किया जाता है कि तुम हमारे साथ पहले दो-तीन साल मेरे गुरुकुल में रहो नहीं रहता वो चला जाता है तो हम हमें ठीक है बढिया है मगर विवाह तो हो रहा है ना अब हुआ होगा तो अपवाद हैद अपवाद नहीं है अपवाद नहीं है कई जगह होता है अभी भी होता हुआ होगा तो हुआ होगा अच्छा इसमें एक चीज इस विवाह में और आती है दूसरा विषय आ जाता है कि जैसे कुछ युगल जोड़े ऐसे आते हैं जो कि जो आम हिंदू है जो संख्या में ज्यादा है आर समाज की मान्यता को मानने वाले हिंदू जो है कम है उतना नहीं है जो जनरल मूर्ति पूजक और यहां पर मूर्ति पूजा निषेध है आर समाज में तो जो सामान्य जो जोड़ा आता है जो मूर्ति पूजा करता भी है इवन विवाह के बाद भी वो मूर्ति पूजा कर रहा है तो उसमें एक क्रॉस आता है विचारधारा का कि अगर वह यह मानता है कि भगवान अवतार लेता है आर समाज के अनुसार नहीं लेता है अगर व यह मानता है कि भगवान अवतार लेता है तो अगर उसने आर्य समाज में विवाह किया है तो वह आर्य समाज को सत्य मान रहा है मैं अभी इस पर नहीं जा रहा कि वो झूठ है वो झूठ है वो आर्य समाज को सत्य मान रहा है और आर्य

00:26:30:18 समाज की विचारधारा क्या है कि भगवान अवतार नहीं लेता है तो जब वह यह सोच रहा है कि भगवान अवतार लेता है तो वह आर्य समाज का खंडन कर रहा है और जब व यह सोच रहा है कि मैंने आर्य समाज में विवाह किया है तो उतने अंश में वह उसका खंडन कर रहा है अब यहां पर देखो क्या कहते मूर्ति पूजा का अवतारवाद का खंडन कर रहा है तो जब कहने का मतलब ऐसे जोड़े जब यहां पर आ जाते हैं जो आर समाज को नहीं मानते मगर है हिंदू है ना ऐसे भी जोड़ों की शादी होती होंगी है हिंदू मगर आर समाज को नहीं मानते मगर शादी होती है यहां पर विवाह होता है तो अब वो क्या है कि जितनी बार वोह ऐसा सोच रहा है कि भगवान अवतार लेते हैं भगवान की मूर्ति पूजा हो सकती है उतनी बार व यह सोच रहा है कि आर्य समाज गलत है यही तो सोच रहा है तो सुनो ना एक यदि कोई व्यक्ति जानता नहीं है तो गलत ही मानेगा मैं प्रश्न पूरा कर लू तो जब जब वो यह सोच रहा है कि भगवान अवतार ले सकते हैं भगवान की मूर्ति पूजा हो सकती है इवन आज भी आपके यहां से ही ऐसे कई जोड़े गए होंगे विवाह करके जो अभी मंदिर जा रहे होंगे मूर्ति में इस समय राइट नाउ तो जितनी बार वह मूर्ति पूजा कर रहे हैं उतनी बार अनजाने में ही आर्य समाज का खंडन कर रहे हैं और जब वह आर्य समाज का खंडन कर रहे हैं तो उतनी बार वह अपने विवाह का भी खंडन

00:27:45:27 कर रहे हैं क्योंकि विवाह उनका कहां से हुआ है अरे देखो जी इसमें देखो संस्कार हिंदू धर्म में भी होता है संस्कार आर्य समाज में भी होता होता है 16 संस्कार है अपने वैदिक धर्म जो वो है ना मैं बता रहा क्या कहते 16 संस्कार में एक संस्कार है विवाह संस्कार हम पद्धति क्या है वैदिक पद्धति से हम लोग कराते हैं वैदिक पद्धति से आप भी कराते हैं नहीं जो जो मूर्ति पूजा को मानने वाले हैं उनके विवाह में विवाह करने कराने में और जो आर्य समाज जो आर्य समाज पद्धति में बहुत फर्क है प फर्क है जी हम मूर्ति पूजा उसमें नहीं मानते आप समझे नहीं मेरा क्वेश्चन अलग है मूर्ति पूज मूर्ति पूजा के लिए नहीं पूछ रहा मैं अवतारवाद की बात मैं वो नहीं पूछ रहा हूं मेरा प्रश्न ये है कि जितनी बार वो ये सोच रहे हैं कि भगवान अवतार लेता है उतनी बार वह अपने विवाह पर अंकुश उठा रहे हैं कि हमारा विवाह गलत है तो हम लोग जो आज साथ में रह रहे हैं वह अवैध रह रहे हैं अगर वह मूर्ति पूजा को मानने वाले हैं तो तो फिर ऐसा विवाह या तो आर्य समाज उन्हीं का विवाह करा है जो आर्य समाज को प्रॉपर मान ले क्योंकि अगर वह यहां से यह सोच कर के जा रहा है कि बाहर जाकर के वो मूर्ति पूजा करेगा बाहर जाकर के वो क्या कहते हैं ऐसी चीजें करेगा जो आर्य समाज में नहीं मानी जाती है तो फिर

00:29:00:27 उस क्या आर्य समाज में क्या नहीं मानी जाती जैसे मैं बड़ी चीज बता रहा हूं ना मूर्ति पूजा ही नहीं मानी जा रही अवतारवाद नहीं माना जा रहा आर्य समाज में मूर्ति की पूजा नहीं मानी जाती आपने कहा लेकिन ईश्वर तो मूर्ति में भी व्याप्त है ठीक है हम मूर्ति पूजा का खंडन नहीं करते हैं हम खंडन इस चीज का करते हैं सत्या प्रकाश में खंडन हम खंडन इस चीज का करते आपने कहा कि मूर्ति में ही भगवान है अन्य जगह नहीं है तो हम उसी का खंडन करते हैं भगवान सब तरफ है आपके इसमें कहा गया है ईसा वास्य इदम सर्वम भगवान सब जगह व्याप्त है सब जगह अच्छादित है इसलिए हम सब जगह को पूज नहीं मानते हैं वो एक अलग विषय है ब माचार्य जी मेरा प्रश्न ये नहीं है मूर्ति पूजा सही है कि गलत है कि उसका प्रमाण का है मैं ये कह रहा हूं कि मूर्ति पूजा निषेध का करा गया है ये आपके जो अर्स ठीक है जड़ पूजा की निषेध है सुनिए तो सम खा है मूर्ति पूजा अधर्म है सत्या प्रकाश में लिखा है तो जड़ पूजा की निषेध है अब जो व्यक्ति मूर्ति पूजा कर रहा है हां तो इसका मतलब यह है वह आर्य समाज को खंडन कर रहा है उस समय और अगर उसने आर्य समाज का खंडन किया तो आर्य समाज की पद्धति का खंडन किया आर्य समाज द्वारा जो विवाह संपन्न हुआ

00:30:15:28 उसका भी खंडन हो गया तो जब वो खंडन हो गया तो कहने का मतलब ये है कि उनका जो मूर्ति पूजा को मानने के कारण अप्रत्यक्ष रूप से वह अपने विवाह को नहीं मान रहे हैं और अप्रत्यक्ष रूप से यह हो रहा है कि वह अव विवाह में जी रहे उनके ही अनुसार विवाह मंत्र उच्चार से होता है आचार्यों के ब्रह्मवरा हुआ जहा पाणी ग्रहण हुआ वो अवेध नहीं आप जो बोल रहे हैं कि आर्य समाज की विचारधारा से इतर है इतर रहे चाहे ना रहे देख एक बड़ा अ लेकिन जब विवाह हुआ हैवे नहीं विवाह में और वहां के विवाह में अंतर एक बताऊ वहां पर विवाह बिना कन्यादान नहीं होता तो यहां भी कन्या दान करते हैं हम पिता पिता करता है पिता करता तुल्य कोई व्यक्ति रहता है उससे हम विवाह कराते ये क्या है गाधर विवाह है ना अब विवाह को आप समझे तब तो होगा आठ प्रकार के विवाह होते हैं आठ में से आपने गांधर्व विवाह किया है है ना ब्रह्म विवाह प्रजापत विवाह है आ विवाह यहां पर सबके गंधर्व विवाह होते हैं गांधर्व विवाह जिनके माता पिता नहीं आए केवल पति और पत्नी राजी है तो गांधर्व विवाह श्रेष्ठतम विवाह है जो ब्रह्म विवाह वो नहीं होता वो भी होता है

00:31:31:01 आठ प्रकार का विवाह होता है मतलब माता पिता आते हैं मेरे यहां जितने भी जिनके माता-पिता आते हैं मान लीजिए आपके ऐसे विवाह हो गया तो वो ब्रह्म विवाह है ब्रह्म विवाह हो गया बाहर जाकर के वो लोग मूर्ति पूजा कर रहे हैं अब यहां पर वो सत्यार्थ प्रकाश को नहीं मान रहे हैं सत्यार्थ प्रकाश को नहीं मान रहे हैं तो इसका मतलब सत्यार्थ प्रकाश से स्फुट होने वाले जो और क्रियाकलाप हैं उनको भी वो नहीं मान रहे हैं उसमें सेय क्रियाकलाप है कि उनका विवाह हुआ है उसी के अनुसार तो एक तरीके से वो जानते नहीं है कि मैं जब जब मूर्ति पूजा कर रहा हूं बाहर जाकर के वह अपने विवाह का खंडन कर रहे हैं तो वह अपने ही सिद्धांत के अनुसार वो अवैध एक दूसरे के साथ में रह रहे हैं या तो वो आर्य समाजी हो जाए नहीं तो उनका विवाह हो जी आर्य समाने मेरा कहने का पक्ष ये था मेरा कहने का पक्ष ये था कि उचित यही होगा कि जो आर्य समाज के सिद्धांतों को अपना ले उन्हीं का विवाह केवल कराया जाए ऐसों का ना कराया जाए कि है तो मूर्ति पूजक मगर आपने करा दिया उनका विवाह तो बाहर जाकर के उनका जीवन जो है दुख में होना ही है क्योंकि वो जितनी बार मूर्ति पूजा कर रहे हो आज समाज के द्वारा जो है हमसे लोग जुड़ रहे हैं वो जितनी बार वो जितनी बार मूर्ति पूजा कर रहे हैं उतनी बार आर्य समाज के अनुसार वो पाप कर रहे हैं क्यों पाप करें भाई मूर्ति पूजा अधर्म है ना पाप मूर्ति पूजा कर रहे हैं

00:32:46:06 देखो उनकी ज्ञान के थड़ा घूम जाइए आप कैमरे में आएगा नहीं आपका मेरे ही र हो रहाय बताओ जब तक उनको ज्ञान नहीं होगा कि मूर्ति पूजा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए यह तो उनके विचार आगे और बढ़ेंगे जब वह ग्रंथों के स्वाध्याय करेंगे उनके मन में आएगा संका समाधान होगा तो वो आचार्य के पास फिर आएंगे और फिर संक समाधान अपना करेंगे भाई आचार्य रखे गए हैं ना क्यों रखे गए आचार्य ही तो शंका समाधान उनका करेंगे ना बात समझे नहीं ये बताओ उनके मन में यदि शंका है उनका विवाह कैसे अवेध हो जाएगा कराने वाले आचार्य जो गुरुकुल से पढ़ कर के आचार्य करके उनका विवाह कराया है तो वो अवेद कैसे हो जाएगा क्योंकि वो जहां से विवाह करके आए हैं उसके सिद्धांतों को अपना नहीं उसके सिद्धांत को वो जानेंगे तब तो अपनाएंगे तो आप ये सर्टिफिकेट देते समय लिखते हो क्या वापस आना सिद्धांतों को समझना तो सिद्धांतों को नहीं समझ रहे तो उनको हम सत्यार्थ प्रकाश भेंट करते हैं उनको हम पुस्तकें देते हैं उन पुस्तकों को स करके लोग हमारे पास आते हैं जुड़ते हैं हम आप एक बात बताओ आपने यहां से विवाह हो जाने के बाद कितने लोगों को जाकर के जांचा है कि वो कहीं मूर्ति पूजा तो नहीं कर रहे हैं अगर कर रहे हो तो मैं उनको समझाऊं ये अपने भी विचारधारा से वो तपत होते हैं जो विचारधारा

00:34:01:20 उनको अच्छी लगती है मतलब ऐसा कोई सिस्टम है कि जनों का हम विवाह करा रहे हैं उतन को हम आर्य समाजी बनाए ऐसा कोई आपके यहां प्रोटोकॉल है हम उनको एक अच्छे इंसान बना ले उनको विवाह के नियम सिखा दे पति-पत्नी कैसे रहते हैं विवाह संस्कार में पति और पत्नी का व्रत धारण कराते हैं अन्य चीजों प हम वहां पर फोकस नहीं करते हम केवल वहां पर पानी ग्रहण संस्कार की बातें करते हैं अन्य जब हमसे मुलाकात होती है तब हम उनकी विचारधारा हम बताते हैं लेकिन जहां विवाह हो रहा है आप बोलेंगे विवाह के समय अंत्येष्टि का बात करो तो ये तो गलत है ना ये शास्त्र अनुकूल नहीं जिस पर्पस प वहां उनका संस्कार हो रहा है तो उसी संस्कार के विषय में हम उनको वहां पर बताते हैं उतना ही समय हमारे पास होता का मतलब यह है कि जिस व्यक्ति ने आर्य समाज में आके विवाह किया वो आर्य समाज ही है उतनी उतने अंश में व आर समाज है अब आर समाज के अनुसार अगर हम उसको नहीं ढाल रहे हैं तो आर समाज अनुसार वो बाहर जाकर के अधर्म कर रहा है मूर्ति पूजा करते हुए पाप कर रहा है देखिए वो हमसे हमसे संपर्क में रहते हैं तो हम उ समझाते हैं बताते हैं और उनको अपने पुस्तकें देते हैं ताकि वो स्वाध्याय कर सके हमसे मिल सके ही पूछ रहा हूं कि आपका एक कोई ऐसा पैरामीटर कोई ऐसा

00:35:16:22 प्रोटोकॉल है जिसमें हम जो जोड़ा यहां से आकर के विवाह कर रहा है उसको हम आर्य समाजी बनाने के लिए जुटे रहे ऐसा कुछ है हम अपने आप बता रहे हैं ना हम उनको पहले एक अच्छे इंसान बनाना चाहते थे आर्य समाजी बनाने के लिए कुछ नहीं आर्य समाजी तो स्वत ही बन जाएगा जब विचारों से जुड़ेगा आर्य समाज कोई पंथ थोड़ना है मैं मैं पंथ मतलब कि जो कोई पंथ थोड़ना है आर्य समाज वेद को ही मानता है जो वेदों में आज्ञा है उसी का अनुसरण करते हैं देखिए मैं वो एक अलग चैप्टर है हा मैं ये कह रहा हूं कि एक जो नॉर्मल हिंदू है उससे थोड़ा सा यूनिक आर्य समाज है ठीक आर्य समाज आडंबर को नहीं मानता नहीं नहीं आप आगे चले जाते हैं मैं ये कह रहा हूं कि जो सामान्य हिंदू परिवार है जिसकी जनसंख्या सबसे ज्यादा है देश में भारत में तो वो जो हिंदू है उसके यहां के बच्चों का जब यहां पर विवाह होता है तो उनको हम अगर उतना विवाह आर्य समाज के अनुसार करवा कर के उतने अंश में आर्य समाजी हो गए अब जब वह बाहर वापस जाकर के अपनी सामान्य हिंदू वाली जो जो पारंपरिक परंपरा प्राप्त जो हिंदू धर्म है तो ये बताओ सुनो सुनो सुनो आप जो बोल रहे हो इसी पर से मैं एक प्रसंग लेना चाहता हूं

00:36:31:26 ये बताइए आप विवाह संस्कार एक मिनट एक मिनट मैं लूंगा विवाह संस्कार जब हम कराते हैं तो विवाह संस्कार में इतनी सारी पद्धतियां महर्षि दयानंद जी लिख दिए हैं कि उनको पांच महायज्ञ करना चाहिए हम पांच महा यज्ञ की शिक्षा उनको वहीं पर विवाह संस्कार के समय देते हैं कि संध्या करो देव यज्ञ करो बलि विश्व देव यज्ञ करो और अतिथि यज्ञ करो माता-पिता की सेवा करो यही तो आर्य समाज बना रहे हैं यही तो सीख उसम है विवाह में वो बाहर जाकर के मूर्ति पूजा कर रहे हैं तो कर रहे हैं तो उनको विचारों से हम ार रहे हैं ना आपने ध्यान दिया जितना हमसे हो सकता है हम लोगों को आडंबर से बचाने का प्रयास करते हैं यानी कि यहां पर जिसका विवाह होता है उसके जहां से जाने के बाद भी आप य ध्यान रखते हैं कि धीरे धीरे व आर्य समाजी बने आ आर्य विचारधारा से उपत आर्य विचारधारा वेदों के विचारधारा से उत्त य मूर्ति पूजा छोड़े जड़ वस्तुओ की पूजा छोड़े चेतन वस्तु मूर्ति पूजा छोड़ें हां जो देवता है जैसे माता प ऐसा कोई आपके यहां निश्चित प्रोटोकॉल है हमारे यहां मूर्ति मतलब अभी तक मैंने जो जाना है कि मेरे कई मित्रों का भी आर समाज में विवाह हुआ है मैं जानता हूं मैंने उनके सर्टिफिकेट्स भी देखे हैं तो मैंने आज तक नहीं देखा कि एक विवाह हो जाने के बाद

00:37:47:14 सर्टिफिकेट मिल जाने के बाद आर्य समाज से उसका कोई जरा सा भी संबंध रहा और वो अपना जीवन सामान्य तरीके से जी रहा है वो मंदिर जा रहा है वो स्कन वाला बन रहा है वो मूर्ति पूजा कर रहा है व सब कुछ कर रहा है जो आर्य समाज के बिल्कुल विरोध में है यानी कि आर्य समाज के अनुसार वोह पाप कर रहा है और वह मूर्ति पूजा जब जब कर रहा है तो उतनी बार कह रहा है हमारे हम विवाह संस्कार में जितनी बार वो मूर्ति पूजा कर रहा है उतनी बार वो अपनी पत्नी के साथ अपना जो संबंध है उसको अवैध घोषित कर रहा है मैं पहले ही बोला कि संस्कार कभी अवैध हो ही नहीं सकता ऋषियों के मंत्र है और दूसरे आचार्य वहां पर हैरी बात समझ नहीं तो पहले चीज तो वो अवेद हो ही नहीं सकता चीज आप जो बोल रहे हैं कि आप गलत मान रहे हैं हम विवाह संस्कार में उनको सभी प्रकार के उपदेश देते हैं जो गृहस्थ आश्रम में उनके काम आए तो उ मूर्ति पूजा के लिए बोलते हैं क्या कुछ मूर्ति पूजा नहीं करनी है देखो मूर्ति पूजा एक अलग विषय हो गया है तो वही लेकिन देखो हम उसको यही बोलते हैं कि आप ईश्वर भक्त बने मेरा प्रश्न आप समझ नहीं पा रहे है क्या बात कि अगर वो मूर्ति पूजा ब कर रहा है वो वेदों से आई है कि नहीं आई एक अलग मैटर है मूर्ति पूजा करना गलत है या सही है एक अलग मैटर है मगर आर्य

00:39:02:24 समाज के अनुसार वह सही नहीं है मूर्ति पूजा ठीक है तो जितनी बार वो मूर्ति पूजा कर रहा है उतनी बार वो यह कह रहा है कि मैं आर्य समाज को नहीं मानता तो उनको हमते विवाह में कि मूर्ति की जगह आप माता पिता की पूजा करो आप जो है अपने भाई बंधु नहीं देखा समाज में विवाह होते हुए आर्य समाज की मान्यताओं को मनवाने की कोई प्रक्रिया होवाह संस्कार में चीज ही नहीं है ना भाई जहां पर जो प्रसंग चल रहा है क्यों नहीं होना चाहिए विवाह का विवाह का प्रसंग है अन्य चीजों का प्रसंग नहीं जहां पर जो प्रसंग चलता है उसी के विषय में बता चीज कनेक्टिंग है ना प्रकाश को मानता हूं तो मेरे लिए आर्य समाज में होने वाला विवाह मान्य है अगर मैं सत्या प्रकाश को ना जानता हूं ना मानता हूं बल्कि उसके उलट जाकर के कर्म कर रहा हूं मेरे लिए वो विवाह आर समाज में होने वाला विवाह मान्य कहां से हो गया कैसे सरकार की नजर से मान्य हो सकता है धार्मिक विचारधारा से भी व मान्य है क्योंकि विवाह संस्कार के साथ सभी चीज जुड़ी हुई है आप जानते हो ना वह आपको सही नहीं मानता है ना क्योंकि वह मंदिर जा रहा है व पूजा कर रहा है मूर्ति की और मूर्ति पूजा करना अधर्म है देखो अधर्म धर्म क्या है आप पहले समझ

00:40:17:25 लीजिए धर्म व है जो सत्य के साथ चले यह बताइए जहां सत्य है वहां धर्म है अधार धर्म कैसे धारण करना है 10 लक्षण भी बता दिए गए वो विषय अलग है लेकिन मैं आपको बता रहा आप सत्यार्थ प्रकाश में जो बता रहे हैं उसको वो व्यक्ति नहीं मान रहा है जब वो मंदिर जा रहा है पूजा कर रहा है तो उसको ज्ञान होगा तब तो मानेगा ना तो आप ज्ञान दो फिर विवाह कराओ ना तो सुनिए जहां विवाह का प्रकरण चल रहा है तो हम उसको गृहस्थ आश्रम में पहले उसको बताएंगे उसके बाद आपने ये कोई लिखा कि आपका विवाद तभी मान्य होगा जब आप यहां प आके ये चीजें समझ लोगे पले गृहस्थ आश्रम को समझ ले जिस विषय प को जाना है वो समझ ले उस चीज को भाई साहब वो कनेक्टिंग है ना उसको आप अलग कैसे कर रहे हैं क्या अगर उसने आपके सिद्धांतों को नहीं माना तो आपके विवाह भी उसके लिए अमान्य हैन नहीं बताया आपके अनुसार अमान्य नहीं है मगर उसके अनुसार तो अमान्य है और उसकी उसकी मूर्ति पूजा आपके अनुसार अमान्य बताइए उसकी मूर्ति पूजा संस्कार कभी अमान्य हो नहीं सकते महर्षि हों की देन है ए अमान्य नहीं हो सकते किसी के अनुसार भी अमान्य नहीं हो सकते चलिए ठीक है इस पर काफी लंबी चर्चा हो गई है तो अब हम आगे बढ़ते हैं दूसरा विषय करते हैं चलिए अच्छा इसमें अब एक

00:41:33:00 ये विषय आता है कि क्या आर्य समाज के द्वारा जो यह माना जाता है कि ईश्वर के सिर्फ चार कार्य हैं उत्पत्ति स्थिति समार और कर्मों का फल देना पांच काम है पांचवा क्या है उत्पत्ति है उस प्रलय है संसार को चलाना है उत्पत्ति स्थिति इस प्रलय हो तो क्या हां उत्पत्ति है स्थिति है प्रलय है हां और संसार को चलाना है और संसार को चलाना तो स्थिति हो गई ना और उसके बाद अच्छे बुरे कर्मों का फल भी देना है चार ही तो हुए पांच कार्य होए सत्या प्रकाश खोल लीजिए चार लिखे हैं पांच कार्य है ईश्वर के पांच कार्य चा लिख चार लिखे हैं पांचवा कार्य गिनाए गिनाया नहीं आपने गिनाई मैं बताया था ना पहला है सृष्टि बनाना सृष्ट ठीक है सृष्टि को फिर ध्वस्त भी करना उनका कार्य समार ठीक है तीसरा सृष्टि को चलाना भी है स्थिति तीन हो गए चौथा अच्छे बुरे कर्मों का फल देना है हा चार और पांचवा सृष्टि को चलाना है अरे चलाना बोल तो दिया आपने है सृष्टि को देखना है है ना उनका कार्य है वो अच्छे बुरे कर्मों का फल देना आपने चार गिनाए स्थिति दो बार गिना रहे हो तो पांच कार्य है पांच नहीं है चार है आपने चार गिनाए स्थिति दो बार गिना रहे हो

00:42:48:00 आप चार कार्य पांच कार्य देखो हा पहला कार्य सृष्टि बनाना दूसरा कार्य आप का सृष्टि बनाना यानी कि उत्पत्ति उत्पत्ति करना हा फिर सृष्टि को चलाना सृष्टि को चलाना यानी स्थिति है ना दो हो गए तीसरा आपका है सृष्टि का प्रलय करना तीन चौथा आपका है अच्छे बुरे कर्मों का फल देना चार कार्य हुआ और पांचवा कार्य आपका है ईश्वर अपनी व्यवस्थाओं को चलाने के लिए वेदों का ज्ञान देना वेदों का ज्ञान देना भाई साहब ये स् है वेदों का ज्ञान देना भाई साब दयानंद जी ने सत्या प्र का ज्ञान दिया दयानंद जी ने हर जगह ईश्वर के चार कार्य बताए उत्पत्ति स्थिति समार और कर्मों का फल देना ठीक है तो अब मैं ये पूछ रहा हूं आपसे कि ये आर्य समाज के अनुसार क्या हम जो भक्ति करते हैं उससे मांगने पर ईश्वर कुछ देता है या हमारे केवल कर्म का फल देता है हम जैसे ईश्वर से कुछ मांगे ईश्वर हमें यह दे दो तो क्या ईश्वर देता है या नहीं देता है ऐसा नहीं है ईश्वर देखो आप

00:44:03:00 फल मांगोगे तो फल आपके हाथ में दे देगा ऐसा ईश्वर नहीं है उसके लिए आपको कर्म करना पड़ेगा कर्म करना पड़ेगा यानी भक्ति करने से ईश्वर नहीं देता है कुछ भी भक्ति करने से आपको अंतः प्रेरणा मिलती है अंतः प्रेरणा ईश्वर कुछ देता है कि नहीं देता है ईश्वर आपको प्रेरित करते हैं अत आत्मा से आपको हाथ में लाकर नहीं दे देंगे यह फल खाओ बोलके कर्म स्वयं करना पड़ता है नहीं कर्म करने से फल मिलता है वोह ठीक है कुछ मांगने से ईश्वर देता है कि नहीं देता है वो जो हम मांग रहे हैं आप मांग रहे हो उसके लिए आपको ईश्वर अच्छी बुद्धि देता है ताकि आप उस कर्म तक जाकर के उस उसकी उसको प्राप्त कर सकते यानी जो हम मांग रहे व ईश्वर दे देता है ईश्वर आपको बुद्धि देता है और बुद्धि के द्वारा आप स्वयं उसको प्राप्त कर सकते हैं लेकिन अच्छे आपके कार्य होना चाहिए जैसे आपको पास होना है भवान से आपने याचना किया कि भगवान मुझे इस परीक्षा में पास करा दे तो केवल पास करा देने से आपको ईश्वर पास नहीं करा देंगे उसके लिए आपको अथक मेहनत करना पड़ेगा पढ़ना पड़ेगा पढ़ने के बाद भगवान आपको अच्छी बुद्धि देगा आप गायत्री मंत्र का जाप करेंगे बुद्धि आपकी अच्छी रहेगी तब आप अच्छे पढ़ पाएंगे तब आप पास हो पाएंगे

00:45:18:02 कर्म करने से ईश्वर आपके सहायक होंगे मांगने पर ईश्वर जो हम मांग रहे हैं वह देता है या नहीं देता है मांगने पर मांगने पर श् आपको केवल प्रेरित करता है देता नहीं है मतलब आपको बुद्धि देता है अगर हम बुद्धि मांगेंगे तो ईश्वर हम बुद्धि देंगे देंगे मतलब हमने अगर आपके हाथ में नहीं रख देंगे अगर ईश्वर से हमने कुछ भी मांगा तो वो सब नहीं देगा मगर अगर बुद्धि मांगी तो ईश्वर देगा देंगे आपको प्रेरित करेंगे जैसे आपने कहा कि भा जैसे आपके मन में ही प्रेरित आप कोई गलत कार्य कर रहे हैं ईश्वर कैसे आपको प्रतीत होगा बता रहे तो आपके मन में ऐसी शंका आ जाएगा कोई चोरी करता तो उसके मन में शंका आ जाएगा भय आ जाएगा ये भय कौन दे रहा है ईश्वर दे रहा है जहां गलत काम कर रहे हो वहां ईश्वर आपको प्रेरित कर र है जहां आप अच्छे काम कर रहे हैं वहा ईश्वर आपको प्रेरित करता है कि यानी कि ईश्वर बुद्धि देता है मांगने पर हा अवश्य ये कहीं माना है दयानंद जी ने अपने भाष्य में कहीं पर सिद्धांतों में हा मांगने पर बुद्धि देता है गायत्री मंत्र में ही कहा गया है दियो योना प्रचोदयात कि हे परमात्मा हमें उत्तम बुद्धि प्रदान करें ठीक है तो मांगने पर ईश्वर कुछ नहीं ईश्वर बुद्धि तो देता है मगर और कुछ नहीं देता है आपके हाथ में लाकर नहीं रख देगा कर्म आपको करना पड़ेगा

00:46:34:00 यह है सिद्धांत तो मतलब कहने का मतलब ये कर्म प सिद्धांत है नहीं नहीं अगर बुद्धि हमारी सही हो जाएगी तो फिर हम कर्म भी अच्छे करेंगे अच्छे करेंगे तोवर मतलब ईश्वर मतलब ईश्वर को हमने जब ईश्वर से बुद्धि मांगी तो ईश्वर हमें बुद्धि देगा हा ठीक है जी जी तो मांगने पर ईश्वर देता है बुद्धि अवश्य ईश्वर मांगने पर बुद्धि देता है तो यानी कि जो बुद्धि के अलावा कुछ और मांगे वो कौन मूर्ख हुआ फिर तो जो ईश्वर से जो ईश्वर से ईश्वर से आप मांगोगे मैं आपको उदाहरण भी अभी बताए कि मेरे को पास होना है जी तो आप पास तभी होंगे ना जब आप परिश्रम करेंगे ईश्वर आपको ऐसा कहीं भी कोई सौप नहीं देगा गलत च जा लो मैं आपसे पूछ रहा हूं नहीं देते ईश्वर वही देते हैं ब मनुष्य के लिए लाभदायक हो ईश्वर बुद्धि देते हैं ना मांगने से हा अवश्य उत्तम बुद्धि उत्तम सब पास रता है ले उत्तम बुद्धि प्रन ठीक है बुद्धि देते हैं उसके अलावा अगर कुछ मांगोगे तो नहीं देते हाथ में नहीं देते लेकिन आप कर्म करके उसको अर्जित कर सकते हो समझ आया तो जो व्यक्ति डायरेक्ट मांग रहा है कि मुझे ऐसा दे दो हा वो तो गलत है ना गलत है मूर्ख है ना हां जी तो आपका जो सत्यार्थ प्रकाश है उसमें

00:47:49:03 जो यद यद धर्मस्य जनि भवति भारता वाला श्लोक का अर्थ किया महाभारत है है ना तो वहां दयानंद जी ने जो अर्थ किया है उस में ये माना है कि यहां पर श्री कृष्ण यह कह रहे हैं कि भगवान मुझे बार-बार ध अधर्म का नाश करने भेजे मांग रहे हैं भगवान से अवतारवाद की बात सु है आप गलत पढ़े हैं आप अरे भाई मेरा प्रश्न तो सुन लीजिए वहां पर कृष्ण जी जो है कृष्ण कृष्ण जी को भगवान कहते हैं ना आप वो वाले भगवान नहीं जो अवतार लेकर के आते हैं मगर वो आप्त पुरुष है तो वहां पर कृष्ण जी ये कह रहे हैं अकॉर्डिंग टू दयानंद जी कि भगवान मुझे बार-बार अधर्म का नाश करने के लिए जन्म दे तो यहां पर भगवान से वो मांग रहे हैं आपका कहना है कि बुद्धि के अलावा भगवान से और कुछ मांगने वाला ठीक नहीं है मूर्ख है तो देखो वहां पर आपका जो श्लोक कहता है कि यदा यदा ध उसमें महर्षि दयान जी बोले कि जब जब धर्म की हानि होती है तो कोई आप्त पुरुष जन्म लेता है अच्छे पुरुष जो इसका विध्वंस करता है या उसके ऊपर व कोई प्रहार करता है है ना चल रहा है ना इसमें ऐसा है कि इस विषय पर यही

00:49:04:06 व्याख्या मैं करूंगा कि यदि कोई अधर्म कर रहा है तो उसके सहार के लिए कोई व्यक्ति आता है तो अच्छी बात है कोई दिक्कत नहीं इसमें लेकिन यहां पर ऐसा है कि मैं उसको मार डालू या काट डालू ऐसे ईश्वर से व प्रार्थना करता तो गलत है आपने बताया कि ईश्वर से बुद्धि मांगोगे तो ईश्वर सद बुद्धि सद बुद्धि देगा देगा मगर और कुछ मा मांगना व्यर्थ है यानी और कुछ मांगने वाला जो है म जो प्राप्त होता है जैसे हे परमात्मा मैं मेरा प्रश्न तो बरा भगवान से मांगने के लिए क्योंकि हम उसके बच्चे हैं हम कुछ भी मांग सकते हैं लेकिन भगवान हमें वही देता है जो हमारे लिए उपयुक्त होता है जो ज्ञानी है जो आप्त है वो तो सिर्फ वही चीज करेगा ना जो बिल्कुल एजेक्ट एक्यूरेट हो तो जब भगवान बुद्धि के अलावा कुछ नहीं देते हैं तो श्री कृष्ण ने वहां पर अकॉर्डिंग टू आर समाज के मूर्खता कीय कि मुझे बारबार जो ईश्वर है वह अधर्म का नाश करने के लिए भेजे तो ठीक तो कहा क्या गलत हो गया अरे भाई ईश्वर प्रार्थना करने पर उसका फल नहीं देता आपके केवल कर्म का ही फल देता उससे जो प्रार्थना की जा रही है वो तो व्यर्थ हुई ना तो आप तो पुरुष व्यर्थ का कार्य कर रहा है ना ऐसा

00:50:19:10 कहीं नहीं लिखा स प्रकाश में आपको दिखा देता हूं सत्या प्रकाश में लिखा है मैं दिखा दे रहा हूं क्या लिखा है क्या लिखा है मैं दिखा दे रहा हूं ये सत्या प्रकाश है ऐसा कहीं नहीं लिखा है खोलिए मैं जानता हूं यहां पे होगा सातवा समुल्लास सप्तम समुल्लास है हां क्या लिखा है बताइए जहां पर वो वाली बात आएगी ना य दई दाई धर्मस्य वाली ईश्वर अवतार लेता है कि नहीं लेता ये है ये इसमें देखिए ये बात वेद विरुद्ध के कारण प्रमाण नहीं है यहां देखो यहां क्या लिखा है मिनट इसमें फिर यह कह रहे हैं कि हो सकता है कि श्री कृष्ण ने धर्म की रक्षा करना चाहते थे तो मैं युग युग में जन्म लेकर श्रेष्ठ की रक्षा और दुष्टों का नाश करूं हम तो कुछ दोष नहीं ठीक है नहीं नहीं क्योंकि परोपकार सता विभूत लिखा गया है सुनिए तो मैं तो ये किससे प्रार्थना कर रहे हैं ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं भाई देखो ईश्वर प्रार्थना तो व्यर्थ की है ना नहीं देखो मैं ये बता दे रहा हूं जो हम प्रार्थना करते हैं ईश्वर से वो

00:51:34:22 अभी बात हो रही थी लिखा है कि नहीं लिखा पहले तो मैंने लिखा दिखा दिया नहीं तो क्या लिखा तो आपने क्या क्या बोला अभी मैंने कहा कि भाई अकॉर्डिंग टू दयानंद सरस्वती जी सत्यार्थ प्रकाश में अवतारवाद की बात नहीं की है यही लिखा लेकिन इसमें अवतारवाद इस यहां पर निषिद्ध किया है ना यह बात वेद बुद्ध होने से प्रमाण से नहीं और ऐसा हो सकता है कि श क जी एक मिनट इसको रखिए मिनट इसको रख कि मेरा प्रश्न यह था कि आपने कहा कि बुद्धि के अलावा और कुछ भी मांगने वाला जो है नहीं देते लेकिन विचारों से देते हैं है बुद्धि के अलावा और कुछ भी मांगने वाला मूर्ख है य पर कृष्ण भगवान अपना जन्म मांग रहे हैं तो ठीक है ना मर्ख नहीं है बुद्धि के अलावा कुछ और मांगने वाला मूर्ख नहीं है अपना जन्म मांग रहे हैं ऐसा उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसमें यह बात कही कि लोगों ने इसमें गलत सोच लिया है जैसे कि यहां पर लिखा है श्री कृष्ण जी कहते हैं जब जब धर्म का लोप होता है तब तब मैं शरीर धारण करता रहूं तो इसमें महर्षि दयानंद जी ने अपना उत्तर दिया यह बात वेद वेद विरुद्ध होने से प्रमाण नहीं है ऐसा कहने से उनका प्रमाण नहीं है और उसके बाद ऐसा हो सकता है कि श्री कृष्ण धर्मात्मा और

00:52:49:22 धर्म की रक्षा करना चाहते थे कि मैं युग युग में जन्म लेकर श्रेष्ठ की रक्षा करूं तो यह बताओ हे परमात्मा मैं स्वराज्य की रक्षा के लिए अपना प्राण आहुद करूं ऐसा मुझे बना दो ऐसा परमात्मा योग युग में जन्म लेके जन्म तो उन्होंने जन्म मांगा ना ईश्वर से हां तो आत्मा जन्म लेती है अरे अपने अनुसार मांग रहे हैं ना वो तो युग युग में जन्म लेकर मैं अधर्म की रक्षा करूं और दूसरी बात आत्मा जन्म लेती है मगर ये जन्म तो वो डिसाइड करेंगे नाना ईश्वर और ईश्वर मांगने से कुछ देते नहीं है ईश्वर तो कर्मों के आधार पर देते तो यहां पर मांगने वाला मूर्ख ही तो हुआ आपने अभी कहा था ये बता आप लोग जो है वो मूर्ख कैसे हो सकते रहा श्री कृष्ण जी कैसे मूर्ख हो सकते हैं बता मेरा सवाल नहीं समझ पा रहे देखिए आपने ये कहा कि बुद्धि के अलावा यदि ईश्वर से कुछ भी मांगा जाएगा तो वो मूर्खता है नहीं मूर्खता मैंने आपने कहा थोड़ी देर पहले अच्छा ठीक है नहीं नहीं कहा शास्त्र के अनुसार से अनेक प्रकार से आप प्रार्थना कर सकते हैं भगवान आपको प्रदान भी करते हैं मतलब बुद्धि के अलावा भगवान और भी चीज ची देते प्राथना जमा से मोक्ष काम आप करेंगे यदि कर्म आपका वैसा रहेगा तो आपको परमात्मा जो है मोक्ष भी प्रदान करेंगे लेकिन कर्म आपका होना चाहिए मैं आपसे पूछ

00:54:04:22 रहा हूं मांगने पर फल देते हैं जो हम मांग रहे हैं वो देते हैं कि नहीं देते हैं हा देते हैं देते हैं हा लेकिन यानी बुद्धि के अलावा और कुछ भी मांगेंगे तो वो देते हैं भवान देते हैं है ना लेकिन हाथ में रखते नहीं कर्म करना पड़ता है अब जैसे कि श्री कृष्ण जी कर्म किए हैं एक धर्मात्मा बने हैं और धर्म की रक्षा के लिए य वो उठ तो व कामना कर प्रभु से एक बात बताइए अगर मैं कर्म केवल कर रहा हूं कर्म अच्छे अच्छे बहुत बढ़िया कर रहा हूं हा हा और प्रार्थना नहीं कर रहा हूं भगवान से तो भगवान देंगे कि नहीं देंगे कर्म आप कर रहे हैं तो ईश्वर के ही आप भक्त बन रहे कर्म अच्छा कर रहे मतलब ईश्वर का कार्य कर रहे हैं मैं बोल नहीं रहा हूं भगवान मुझे दे दे मैं कर्म कर रहा हूं तो परमात्मा सब जानते हैं ना सर्व भगवान देंगे सब देंगे इसका मतलब प्रार्थना करना व्यर्थ हो गया व्यर्थ नहीं होता आप अच्छे काम कर रहे मतलब काम ही तो कर रहे हैं आप अरे भाई तो वो ईश्वर का काम कर रहे हैं मगर अलग से भगवान से बोलना कि मुझे दो हा ये बोलना तो व्यर्थ है ना क्योंकि भगवान सिर्फ कर्मों से देगा कर्म से भी देता है मांगने से भी देता प्रार्थना पूर्वक कर्म पुरुषार्थ पूर्वक कर्म को ही परमात्मा सुनते हैं पुरुषार्थ पूर्वक ना पुरुषार्थ पूर्वक कर्म को ही सुनते हैं मैं अगर कर्म कर रहा हूं पुरुषार्थ

00:55:19:25 कर रहे हैं पुरुषार्थ कर रहा हूं कर्म कर रहे हैं यदि प्रार्थना और सम्मिलित हो गया मैं कह रहा हूं प्रार्थना नहीं कर रहा तो फल देंगे कि नहीं देंगे तो देने का कार्य ही फल उसका फल देंगे ना यथोचित तो इसका मतलब प्रार्थना करना अलग से बेकार हो गया बेकार ही तो हो गया क्योंकि प्रार्थना केवल करने से देंगे नहीं उसके साथ कर्म ऐड है और कर्म करने आप प्रार्थना भी नहीं करेंगे तब भी आपको फल मिलेगा वही मैं कह रहा हूं तो यानी कि प्रार्थना यह बोलना कि भगवान मुझे ये दे दे ये व्यर्थ हो गया व्यर्थ नहीं है वो क्यों क्यों व्यर्थ नहीं है क्योंकि भगवान कर्मों से ही दे देंगे ना कर्म से तो आपको देंगे ही देंगे वो तो आपको मिलेगा ही मिलेगा ईश्वर को नहीं मानता उसको अर्थ में मिलता ही मिलता है मैं वही कह रहा हूं तो फिर प्रार्थना करने मथना करने से हमारे मन हमारे विचार शुद्ध होते तो मैंने वही तो पूछा कि केवल बुद्धि देगा ईश्वर या दूसरी चीजें भी देगा दूसरी चीजें भी देंगे लेकिन इसका क्राइटेरिया हम और आप निर्धारित नहीं कर सकते इसमें लिखा है भगवान प्रार्थना करने से फल नहीं देते हैं इसमें लिखा है भगवान प्रार्थना करने से फल नहीं देते हां तो देखो फल नहीं देते ऐसे नहीं मैं भगवान प्रार्थना करने फल तो वो भगवान अपने अनुसार से देंगे ना हम और आप निर्धारित नहीं प्रार्थना करने से देंगे कि नहीं देंगे मैं ये पूछ रहा हूं क्या कि जो हम मांग रहे हैं हम जो मांग रहे हैं परमात्मा हमें प्रदान हाथ में नहीं देते हैं यह पहले बताया नहीं देते

00:56:34:28 ना तो फिर अब वो कृष्ण भगवान जो मांग रहे हैं कि मुझे जन्म दे हां वो गलत मांग रहे हैं ना ये ईश्वर का विषय है ईश्वर ही जानते हैं उसको वो देंगे जो आत्मा मांग रहे हैं उसे वो गलत मांग रहे हैं कि नहीं मांग रहे हैं गलत कर रहे हैं कि नहीं ये कह के कि ईश्वर मुझे जन्म दे ईश्वर मुझे जन्म दे युग युग में जन्म दे जिससे मैं अध कर रहे अब ईश्वर उसको दे कि ना देरा सवाल नहीं है ईश्वर देगा कि नहीं देगा सवाल य है कि क्या ईश्वर बुद्धि के अलावा और कुछ देता है कि नहीं देता है प्रार्थना करने पर बताया पाच कार्यों में से पाच तो है नहीं चा पता नहीं अे और बुरे कर्मों का फल परमात्मा जरूर देते हैं ठीक है अरे अच्छे बुरे कर्म की बात कहां कर रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कि प्रार्थना करने पर ईश्वर बुद्धि के और कुछ देते हैं कि नहीं देते आपने माना थोड़ी देर पहले कि नहीं देते और जो मांग रहा है बुद्धि के अलावा और कुछ मांग रहा है वैसे बुद्धि मतलब प्रार्थना करने पर बुद्धि देते हैं कि नहीं देते ये भी कहीं लिखा नहीं है आप बोल रहे हो इसलिए मैंने उसको मान लिया मतलब प्रेरित करते हैं बोला मैं आपको ऐसा देते नहीं है तो मांगना व्यर्थ हुआ ना मा कर्म करो ये बताओ आप अपने पिताजी से मांगते हैं ना कुछ

00:57:50:04 छोटे रहते हैं ना मांगते हैं तो मेरे पिता जी देते हैं मगर मगर ये जो भगवान है ये नहीं दे रहा है अकॉर्डिंग टू सचा मतलब इसको हम नहीं जान सकते परमात्मा आपको देते हैं कि नहीं देते मना किया है व फल नहीं देता तो अब आपने आपने मांगा कि मुझे यह दे दो तो ईश्वर आपको कैसे दे देगा लिखा है य पर लिखा है भा यही पर लिखा वेद विरुद्ध होने से प्रमाण नहीं है लि एकदम साक्षात य मैं कह रहा ईश्वर फल नहीं देता है भक्ति का माने पर हा तो नहीं देता है होगा वो देगा कि नहीं देगा कैसी बातें कर र तो क्या भक्ति का फल हां भक्ति करने पर ईश्वर फल देता है कि नहीं देता है तो मैं बो पर्टिकुलर आपके हाथ में परमात्मा नहीं दे उन्होने भक्ति करने का क्या बताया है कि आपके अंदर ईश्वर के गुण आएंगे गुण आएंगे अवश्य हा बस इतना बताया है यानी कि ईश्वर से कुछ मांगना व्यर्थ हो गया व्यर्थ नहीं है मैं आपको बताया वो कहां कैसे है सही बताइए आपने कहा कि ईश्वर बुद्धि देता है प्रेरित करता है जब जबक वो भी लिखा नहीं ईश्वर के गुण आते हैं ये माना है दयानंद जी ने ठीक है मगर मैं प्रेरित बुद्धि वाली बात को रख लिया रख लिया मगर फिर भी आपने य तो माना कि बुद्धि के अलावा और कुछ

00:59:05:04 नहीं देगा ईश्वर ईश्वर आपको अंतः प्रेरित करते हैं अच्छे कार्य करने के लिए अंत प्रेरित करता है तो हम अंतः प्रेरणा प्रेरित करने की चीज मांगेंगे ना कि हमें अंतः प्रेरित करे हे भगवान एक मिनट एक मिनट हमें अंत प्रेरित कर भगवान हमें अंत प्रेरित करिए ये मांगेंगे अगर हमने ये मांगा हम कुसी टीवी दे दे फ्रिज दे दे मुझे जन्म दे दे तो ये तो गलत हो गया क्योंकि ईश्वर तो अंतः प्रेरणा देगा ईश्वर मे टीवी फिज कूलर नहीं देगा नहीं देगा तो फिर हम मांगना मांगना गलत हो गया ना फिर अच्छी चीजों को आप यदि मांगते हैं ईश्वर से तो उसके गुण आते हैं जैसे आपने जन्म का इसमें क्या बोलते हैं अपना श्री कृष्ण जी कहते हैं कि युग में जन लेकर मैं दुष्टों का विनाश करू सही बोले हैं ठीक है इसमें कोई दोष नहीं है क्योंकि वो परोपकारी व्यक्ति थे अरे भाई उनका जीवन संतो का जीवन परकार होता भाई साब मैं पूछ आपसे ये रहा हूं कि भगवान बुद्धि के अलावा और कुछ देता है कि नहीं देता है आप एक बात बए अंत प्रेरित करते तो फिर वही व्यक्ति सही है जो उस ईश्वर से अंतः प्रेरणा मांगे वो व्यक्ति गलत है जो अंतः प्रेरणा से हटकर कुछ भी मांगे चाहे वो अच्छे के लिए मांग रहा है बु के लिए मांग रहा है

01:00:20:27 वो व्यक्ति तो मूर्खता कर रहा है ना क्योंकि ईश्वर जो नहीं करता है वो करने के लिए उसे वो कह रहा है ईश्वर व्यक्ति को वही देता है जो उसके योग्य होता है ईश्वर उसके अच्छे बुरे कर्मों को जानता है इसलिए अंतः प्रेरित करता है मन से आवाज आता है कि ये गलत है ये सही है अंत प्रेरणा देता है ना उसके अलावा कुछ नहीं देता ना जन्म देता है जन्म देता है ईश्वर के जो पांच मांगने प मांगने प मांगने पर जन्म देता है ये तो ईश्वरी व्याख्या है ईश्वर अब हम कैसे जाने कि आपको जन्म आप मांग लिए कह रहे ना कि मांगने पर फल नहीं देता है भगवान तो इस इसमें क्या लिखा है अरे इसकी बात नहीं कर रहा हूं मैं जहा पर वो फल वाली अरे ये नहीं है फल वाली बात वो अलग बात है य पर क्या लि है सुनि अरे वो भक्ति करने वाली बात है अलग उसम उन्होने क्या कहा स्वामी दयानंद जी ने कहा वेद विरुद्ध होने के कारण यह बात सही नहीं है बोले भा आप साक्षात लिखा हुआ देखलो इसमें दयानंद जी ने माना है कि ईश्वर भक्ति करने पर कोई ऐसा नहीं है कि आपको जो आप फल दे दे हा तो नहीं देगा ना मैं तो आपको आपने क्या बोला कि आप बुद्धि देते बो बुद्धि देते हैं अंत प्रेरित करते हैं लेकिन आपके हाथ में नहीं रखते

01:01:35:27 हैं कोई चीज आप सुनिए ईश्वर मांगने पर बुद्धि के अलावा अंतः प्रेरणा के अलावा और कुछ नहीं देता ना यह दर्शन का विषय है तो कुछ और मांगने वाला तो मूर्ख हुआ ना मूर्ख कैसे हुआ ज्ञानी व्यक्ति है और ज्ञानी व्यक्ति जब ईश्वर क्योंकि वो वो मांग रहा है जो ईश्वर करता नहीं है और उसको तो ईश्वर के बारे में सब मालूम है तो फिर वोह ऐसी चीज क्यों मांग रहा है जो ईश्वर देता नहीं है ईश्वर देता नहीं ईश्वर वही देता है जो मनुष्य के लिए ये सवाल का जवाब नहीं मेरा सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति यह जानता है कि ईश्वर सिर्फ अंतः प्रेरणा देता है सत बुद्धि देता है तो सिर्फ वो सत बुद्धि मांगेगा अगर वो जानता है कि ईश्वर को सत बुद्धि हो गया तो अच्छे अच्छे कार्य कर तो भगवान से कुछ और मांगना कि मुझे जन्म दे ये तो गलत हुआ ना तो इसमें तो गलत लिखा है वेद विरुद्ध है बोलके आप तो आपको दिखाया यानी कि कृष्ण भगवान ने गलत कहा ना यहां पर उन्होंने उस उस बात को यह कहा कि वेद विरुद्ध होने से गलत है लेकिन श्री कृष्ण जी धर्मात्मा थे वे यह मांग रहे थे कि भगवान मेरे वि दुष्टों को संहार करने के लिए मेरा जन्म बारबार हो ऐसा मांग रहे हैं ऐसा उस बात को ठीक करते हु कहा मैं आपसे पता नहीं पूछ क रहा हूं आप पता नहीं कहां चले जाते हैं मैंने आपसे पूछा यदि कृष्ण भगवान आप्त पुरुष है

01:02:51:10 उन्होंने कोई गलती नहीं की उनको पता है कि ईश्वर केवल क्या करते हैं केवल या तो सद्बुद्धि देते हैं वो भी मैं आपकी बात रख रहा हूं केवल मांगने पर सद्बुद्धि देते हैं मांगने पर अंतःकरण में प्रेरणा देते हैं यह दो चीजें देते मांगने पर देते नहीं प्रेरित करते हैं हां प्रेरित करते हैं ठीक है उसके अलावा कुछ नहीं देते अब मुझे मालूम है फिर भी मैं ईश्वर से कह रहा हूं मुझे जन्म दे तो ये मेरा काम मूर्खता पूर्ण हो गया ना अब वो ईश्वर जानते हैं ना कि आपके कर्म कैसा थे तो आपको भगवान जो कार्म व्यर्थ है वो करने वाला कौन हुआ ये व्यर्थ है बोलके आप कैसे डिसाइड कर ले आप कह रहे हो नहीं देता है मांगने से कुछ और अंतःकरण में प्रेरणा और सद बुद्धि के अलावा तो प्रेरित करते हैं और आ देख अभी आपने कहा ये व्यर्थ है कैसे कह रहे हो मैंने आपको बताया कि ईश्वर सद आपके अकॉर्डिंग सद्बुद्धि और अंतःकरण में प्रेरणा के अलावा ईश्वर कुछ नहीं देता है तो फिर जन् मांगने वाला तो मूर्ख हुआ ना तो ईश्वर के काम में आया ना उसके अच्छे बुरे कर्मों का फल देना जी ईश्वर का जो काम है उस तो कर्म से देगा ना मांग से देगा मांगने से तो नहीं देगा ना आपके कर्म से देगा मांगने से नहीं देगा ना तो मुंह से बोलने वाला मांगने मांगने के लिए कहने वाला तो मूर्ख हुआ मूर्ख नहीं हुआ बो यदि वो मुह से बोलता उन्हे तो मालूम है कि मेरे अगर कर्म होंगे तो भगवान दोबारा भेज देंगे उन्हे मालूम है तो मुंह से जो बोल रहे हैं वो व्यर्थ हुआ ना बोल

01:04:06:18 इससे आपके विचार शुद्ध होते हैं बोलने से जैसे बलशाली हूं हे भगवान मैं जो है ईमानदार हूं ऐसा आप बोलेंगे और मन से ऐसा सोचते हैं तो वास्तव में प्रभाव पड़ता है ये अंतःकरण प्रेरित करते हैं कि आपको जैसे कि आप भगवान अंतःकरण के अलावा और कुछ देते हैं कि नहीं देते हैं देते हैं बहुत कुछ देते हैं परमात्मा ने इतना सारा चीज दे रखा है और क्या नहीं देंगे बता मांगने पर मांगने पर आपके हाथ में नहीं देते यानी कि मांगने वाला गलत है ना मांगने वाला गलत एक प्रकार से यदि गलत मांगता है तो गलत है जैसे आप मांगोगे मेरे टीवी फ्रिज दे दो तो गलत है ना आपके विचार क्या है आप समझे नहीं मेरी बात जो व्यक्ति आप्त पुरुष है जिसको मालूम है ईश्वर और कुछ नहीं देगा सिवाय बुद्धि और अंतःकरण में प्रेरणा के वो भी मैं आपकी बात मान रहा हूं तो फिर दूसरी चीज मांगने वाला भले ही वो किसी अच्छे उद्देश्य के लिए मांग रहा है मगर दूसरी चीज मांगने वाला बुद्धि और अंतःकरण के अलावा कुछ मांगने वाला तो गलत हुआ ना व्यर्थ का काम कर रहा बच्चा जो है कुछ भी मांग सकता है लेकिन ईश्वर का काम सुनिए वो बच्चे नहीं है पुरुष बुजुर्ग भी हो गया बच्चे मूर्ख होते हैं बच्चे नादान होते हैं जो बुजुर्ग भी हो चुका है यदि वो ईश्वर से मांगता है तोव उसके बच्चे ही कहलाते हैं

01:05:21:24 चलिए ठीक है और वो मांग लिए हैं तो ईश्वर का काम है कि वो देना ना देना ईश्वरी व्यवस्था प है उस परे हम कुछ नहीं बोल सकते क्योंकि ईश्वरीय व्यवस्था ईश्वर को समझना बहुत बड़ी बात है नहीं नहीं चलिए ठीक है अब आगे चलते हैं यह जो आर्य समाज के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है यह सर्वशक्तिमान है या नहीं है ना क्यों नहीं सर्वशक्तिमान है न्याय कारी है दयालु है अजमा है अनंत है निर्विकार है अनादि है अनुपम है सर्वाधा सर्वेश्वर सर्वव्यापक सर्व अंतर्यामी अजर अमर अभ नित्य पवित्र है और सृष्टिकर्ता भी है जी तो एक परिभाषा है कि सत्यम ज्ञान अतम ब्रह्म और पूर्ण ईश्वर पूर्ण है है ना हां पूर्ण है ईश्वर पूर्ण है पूर्ण का मतलब कि उसमें किसी भी चीज का किसी भी तरह का अभाव नहीं है नहीं है ठीक है तो ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है ईश्वर सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है तो क्या जो आर्य समाज के अनुसार जो ईश्वर है वो ऐसा ही ईश्वर है जो किसी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है या वह भी कुछ नियमों के नीचे है देखो ईश्वर के पांच कार्य बताया आपको

01:06:38:02 वेद पहली बात तो आप यही गलत कर देते हो अरे मैं बता र आप इसमें ईश्वर के कार्य ईश्वर के कार्य देखिए चार कार्य है पांच कार्य ब का समाज के विरुद्ध जा रहे हो विरुद्ध नहीं जा रहा हूं पहला का सृष्टि बनाना वेदों की उत्पत्ति करना सुनिए वेदों को उत्पत्ति करना सृष्टि को चलाना और वेदों को संहार करना और अच्छे बुरे कर्मों का फल देना ये पांच कार्य है पुन मुझे पांच का आप गिना दो पहला काम सृष्टि बनाना दूसरा काम वेदों की उत्पत्ति करना वेदों के ज्ञान देय अलग है हा जी मैं बताऊंगा

01:07:19:22 मुझे मेरा काम आप देखो वेदों के ज्ञान देना आप पता है क्या कर रहे हो कि सृष्टि बनाना पेड़ उगाना एक अलग कार्य है नहीं नहीं नहीं नहीं उसी के अंतर्गत है तो फिर अलग से क्यों गिना रहे हो आप मुझे सत्या प्रकाश से दिखाओ मैं दिखा रहा हूं वेदों के उपदेश देना है ना जो चार ऋषियों उनके अंतःकरण में तीसरा काम आपका वेदों का उपदेश देना अलग से कोई कार्य नहीं माना है दयानंद जी ने आप पता नहीं दयानंद जी को मानने वाले हो कर के दयानंद जी को नहीं जान रहे आप बताइए चलिए पांच कार्य मैं आपको बता दूंगा दिखाइए कहां लिखे पांच मैं आपको बता दूंगा उसमें जी है ना ईश्वर साकार है निराकार ईश्वर आगे और आगे प्रश्न देखते जाइए बस परमेश्वर आदि अनादि व क्या चाहता है परमेश्वर सबकी भलाई स्तुति देखो देखिए क्या स्तुति आदि करने से ईश्वर अपना नियम छोड़कर स्तुति पार्थना करने पर आप छुड़ा देगा तो इन्होने मना किया उनके वही फल क्या है तो इन्होंने क्या माना है उनके करने का फल क्या है क्या है स्तुति ईश्वर से प्रीति बढ़े ग उसे गुण कर्म स्वभाव

01:08:34:28 में अपने गुण कर्म स्वभाव का सुधारना होगा प्रार्थना से निर अभिमान का होता है उत्साह होता है सहायता का मिलना होता है उपासना से पर यही तो मैं ही कह रहा हूं दयानंद जी से विपरीत हम जाएंगे क्या बने कुछ और नहीं मांगा माना है कि कुछ और भी देता है अगर आप कह रहे हो कि क्या पता दे भी दे नहीं आपने कई बार कहा क्या पता ईश्वर का हम नहीं जानते ना तो फिर आप मतलब मैंने आपको बोला कि आपके हाथ में नहीं देगा आपके कर्म के अनुसार देगा पाच कार्य दिखाइए य देखिए ईश्वर अवतार शरीर धारण किए बिना जगत की उत्पत्ति स्थिति प्रलय करता है और वेदों के ज्ञान देता है आगे लिखा हु भ वेदों का ज्ञान स्थिति में आ गया अलग से कार थोड़ी ना है कहां पर लिखा है

01:09:27:12 चलिए आप मुझे प्रमाण हा देखो ये देखो जगत की उत्पत्ति है पहला स्थिति दूसरा प्रलय तीसरा हां जन्म मरण से युक्त है ना उनके अच्छे बुरे कर्मों का स्वभाव का फल देना हा बस चारही मान भैया आप दिखाइएगा आप भे आप मुझे बाद में भेज दीजिएगा अभ रडि लेते वेदों वेदों का ज्ञान देना आप प्रमाण दीजिए चलिए मैं आपको दूंगा पांच कार्य ईश्वर के हैं वेदों का ज्ञान देना भी ईश्वर का कार्य है चलिए ठीक ठीक है आप भेज दीजिए बाद में भेजिए ठीक है तो हमारी बात ये चल रही थी ईश्वर सर ईश्वर जो है किसी भी प्रकार के नियम में बंधा हुआ है या नहीं बंधा हुआ है ईश्वर अपने नियमों में तो बंधा हुआ है क्योंकि हर ति अपने नियमों में बंधा हुआ है है ईश्वर भी अपने नियमों के अनुसार कार्य करता है मतलब वो अब जैसे कि सृष्टि है स मतलब जो जीव है वह भी बद्ध है और ईश्वर भी बद्ध है हा जी दोनों बध

01:10:43:04 जी बंधन से मुक्त है से परमात्मा लेकिन अपने नियमों पर चलता है जैसे कि कई कार्य ऐसे है जैसे सृष्टि का य पांच कार्य ईश्वर के हमने आपको बता तो उसमें व प्रतिबद्ध है ईश्वर जो है अब इसको तो बाद में देख लीजिएगा हम लोग बात कर लेते हैं वो थोड़ा सा दिक्कत आएगी नहीं तो तो ईश्वर सर्वशक्तिमान है हा आपके अनुसार नहीं है तो कैसे नहीं है ये बताइए मैं नहीं कह रहा मैं ये कह रहा हूं वो किसी भी प्रकार के नियम के नीचे है कि नहीं है नहीं है मतलब अपने नियम से ईश्वर विरुद्ध भी नहीं जाता है और वो अपने नियम को तोड़ सकता है कि नहीं तोड़ सकता नहीं तोड़ सकता है यानी वो उसमें एक कमी है कमी नहीं क्या अपने नियम को तोड़ अपने नियम को तोड़ने के लिए अब सृष्टि का उत्पत्ति करना है सृष्टि को उत्पत्ति परमात्मा का कार्य है सृष्टि वो अपने नियम को तोड़ सकता है कि नहीं नहीं तोड़ सकता है जैसे सूर्य यानी संसार में कुछ कार्य ऐसे हैं जो वो नहीं कर सकता सब काम कर सकते हैं ईश्वर सर काम कर सकते हैं ईश्वर सब कुछ कर सकता है ना वही मैं कह रहा हूं ईश्वर सर्व सामर्थ्य वान है लेकिन अपने नियमों को धारण करते हुए जैसे हम बोलते हैं ना मैं पूछ रहा हूं ईश्वर

01:11:58:09 सर्व सामर्थ वान हैम तो क्या वो अवतार ले सकता है नहीं ले सकते यानी कि वह सर्वशक्तिमान नहीं है अवतार लेने की क्षमता नहीं तो सुनो ना अवतार किसका होता है मनुष्य का होता है किसी का भी होता हो वो ले सकता है मनुष्य का होता है वो ईश्वर है आप ईश्वर और मनुष्य में अंतर समझिए ना मेरा प्रश्न अलग है भाई साब मैं ये कह रहा हूं कि अगर हम कह रहे कि ये सर्व शक्ति मान है सब कुछ कर सकने की शक्ति है सब कुछ तो क्या वोह अवतार ले सकने की शक्ति है कि नहीं वो कारण कोई भी हो अवतार ना लेने का कारण कोई भी हो मगर क्या वह अवतार ले सकता है अगर नहीं ले सकता है तोय जो सर्व विशेषण है ये हटाना पड़ेगा ना हमें तो सर्व सृष्टि के पालन के लिए है मतलब सर्व सर्व जो है सर्व की भी सीमा है सीमा नहीं है वो सीमा से भी परे है परमात्मा लेकिन आप उसको ये बोलोगे कि परमात्मा मेरा झाड़ू लगा दे परमात्मा मेरा पछ लगा मैं कह रहा हूं लगा सकता लगा सकने की क्षमता है कि नहीं क्षमता है लेकिन आप जो बोलेंगे व ऐसा कार्य ईश्वर नहीं करता ईश्वर वही कार्य करता है जो व उनको इस सृष्टि को चलाने के लिए जितनी जरूरत पड़ता है मैं ये नहीं कह रहा हूं कि वो कर दे

01:13:13:13 मैं कह रहा हूं वो कर सकता है कि नहीं कर सकता है वो जन्म ले सकता है जन्म देखो नहीं जन्म परमात्मा अब इसमें आप देखो ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो उसका एक कटेया है आपको पहले ही में बताया अजन्मा है अनंत है निर्विकार है अनादि है आपको पहले मैंने बताया अच्छा इस इस पर मेरा जवाब सुनिए हम ईश्वर अजन्मा है इसलिए जन्म नहीं ले सकता ठीक है इसमें दो बातें आ गई पहली बात तो कारण कोई भी हो हां कोई कार्य ना कर पाने का कारण कोई भी हो मगर उसको फिर हम सर्व नहीं कहेंगे सर्व शक्तिमान सर्व का मतलब है सर्व एक एक मिनट कारण परमात्मा ये बताऊ सुन तो लीजिए कारण कोई भी हो फिर हम उसको सर्व नहीं कह सकते क्यों नहीं कह बाधा आएगी सब कुछ नहीं कर सकता कुछ है कुछ है वो अजन्मा है इसलिए वो जन्म नहीं ले सकता वो अजन्मा है इसलिए वो जन्म नहीं ले सकता इसलिए यह सर्व चीज नहीं आए दूसरी बा मिनट आत्मा जन्मा है कि नहीं है आत्मा आत्मा तो जन्म लेते र अजन्मा होते हुए भी वो जन्म ले रही है जन्म लेता है शरीर ता तो ईश्वर के लिए अजन्मा शब्द आ गया तो हमने क्यों कह दिया कि ईश्वर अजन्मा इसलिए जन्म नहीं लेता आत्मा भी तो अजन्मी है फिर भी वो शरीर धारण करके आ रही प्रकट हो रही है तो आत्मा किसके पास परमा के पास जाती है सानिध्य किसका मिलता है परमात्मा का आप भाई साहब

01:14:28:18 पता नहीं कहां से कहां बात को ले जा रहे हो मैंने दो बातें कही आपने कहा अजन्मा है इसलिए जन्म नहीं लेता तो मैंने कहा कि पहली बात तो कारण कोई भी हो किसी भी कारण से अगर वह नहीं कर पा रहा है तो हम उसको फिर सर्व नहीं कह सकते सर्व सामर्थ वान फिर नहीं कह सकते जो सर्व विशेषण है उसम बाधा आ गई सुनो इसका क्राइटेरिया आप नहीं निर्धारित कर सकते ना कि परमात्मा ये नहीं कर पा रहे परमात्मा अपने शक्ति और सामर्थ के अनुसार आप कर रहे हो सक्तिमान आप कह रहे हो ना कि वो जन्म नहीं ले सकता इसमें ऐसा लिखा ही नहीं है इसमें नहीं हां परमात्मा जो है अवतार नहीं लेते अवतार नहीं लेते जैसे आपने कहा किते ना लेते तो यानी कि ईश्वर कुछ कार्य है जो नहीं कर सकते तो आत्मा परमात्मा अवतार नहीं लेते आ आत्मा का जो है पुनर्जन्म होता हैनो मैं पूछ रहा हूं कि परमात्मा का मेंथ होगा भा ईश्वर एक है मैंने पूछा कि ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं है ना सर्व सर्व शक्ति यानी वो सब कुछ कर सकता सब कुछ कर सकता वो देह धारण कर सकता है देह धारण कर सकता है नहीं ईश्वर स यानी वो सब कुछ नहीं कर सकता ईश्वर वही

01:15:43:26 करते हैं भाई साहब आप पता नहीं मैं पूछ रहा हूं सब कुछ कर सकते हैं कि नहीं कर सक श्वर सब कुछ कर सकते हैं तो वो देह धारण कर सकते हैं लेकिन उनके एक नियम है मैं पूछ रहा हूं कर सकते हैं ईश्वर मनुष्य मनुष्य के जैसे कार्य नहीं करेंगे ना वो ईश्वर जैसे कार्य करेंगे मैं पूछ रहा हूं भाई साहब कर सकते हैं कि नहीं ईश्वर कर सकते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान है सब कुछ कर सकते हैं लेकिन अपने नियमों के अनुसार करते वो बात की बात है वो करेंगे कि नहीं तो आप यही कह रहे हैं कि परमात्मा झाड़ू लगा दे परमात्मा पोछ लगा दे परमात्मा ये कर सकते हैं कि नहीं परमात्मा सब चीज कर सकते यानी वो जन्म ले सकते हैं अवतार ले सकते हैं वो मनुष्य जन्म लेता है भाई ईश्वर जन्म नहीं लेता है मैंने पूछा आपसे ये है क्या वो कर सकते हैं कि नहीं वो करते हैं कि नहीं वो बात की बात है यानी कि जैसे आपने मुझसे कहा कि तुम ये पंखे का बटन दबा सकते हो कि नहीं तो मेरे अंदर क्षमता है कि मैं पंखे का बटन दबा सकता हूं अब मैं करूंगा कि नहीं करूंगा ये अगली चीज हो गई तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि ईश्वर में अवतार लेने की क्षमता है कि नहीं ईश्वर अपने नियमों के अनुसार बंधा हुआ है और मैंने कहा क्षमता है कि नहीं वो सर्वशक्तिमान है क्षमता है लेकिन उनके अंदर भी कुछ नियम है उस नियम के अनुसार परमात्मा

01:16:59:21 चलते वो मनुष्य के अनुसार नहीं चलते अपने नियमों प उनके ऊपर भी नियम लागू होते हैं व अपने ऊपर भी नियम लगा कर रखे मैं इतने कार्य जो है मैं करूंगा करने के लिए सब कार्य ईश्वर कर सकते कर सकते या जन्म ले सकते कर सकते हैं लेकिन ई अजन्मा कहा गया है व ज ले जन्मा आत्मा को भी कहा गया भाई साब आत्मा जन्मा आत्मा आत्मा शरीर के द्वारा जो है जन्म लेती है ऐसे ईश्वर ले सकता है कि नहीं ईश्वर नहीं क्यों लेंगे भाई उनके जब उनको जब कार्य ही नहीं है जब यहां पर लेने के लिएने कब कहा ईश्वर लेगा कि नहीं वो तो बाद में अ पहले ही बता ईश्वर अजन्मा है तो यही पर बात क्लियर हो ग वो अज आप मैं आपसे पूछ रहा हूं उसके अंदर देह धारण जैसे आत्मा देह धारण कर रही है जन्म नहीं ले

01:17:52:06 सकते ले सकता है कि नहीं नहीं लेंगे सता नहीं आप कह रहे हो लेंगे नहीं क्योंकि उनकी आवश्यकता ही नहीं है परमात्मा की जन्म लेने ये एक अलग बात हो गई कि आवश्यकता नहीं है मैं पूछ रहा हूं लेने की सामर्थ अपने नियमों पर बंधे हुए मैंने कहा लेने की सामर्थ्य है कि नहीं सामर्थ्य सामर्थ्य सब चीज के लिए जन्म लेने की सामर्थ्य है जन्म अजन्मा इसलिए कहा गया है जन्म लेंगे तो फ विकार ज तो े भाई साहब मैंने पूछा जन्म लेने की सामर्थ्य है सामर्थ है जन्म ले सते अजन्म है जन्म ले सकते हैं हा जन्म ले सकते जन्म नहीं वो अजन्मा है मैंने कहा सामर्थ अरे तो कैन आई कैन डू इट ये सामर्थ्य ही तो है आप कह रहे हो ले सकते हैं आपने कहा सामर्थ्य है सामर्थ्य सब चीज का है परमात्मा लेकिन वो अपने उसम बंधे हुए लेकिन ऐसा नहीं कह सकते कि परमात्मा जन्म ले लो अरे आपके अनुसार परमात्मा थ चले परमात्मा कर होता

01:18:56:20 विकारों से दूर रहते हैं और परमा मैंने पूछा भाई साब मैं ये पूछ रहा हूं सामर्थ्य है कि नहीं सामर्थ सब चीज के लिए सकाश मना कर तो मैं बता रहा सामर्थ सब चीज के लिए लेकिन सामर्थ नहीं हैन परमात्मा परमात्मा सुन साब सत्या प्रकाश क र सामर्थ नहीं है जन्म लेने की ईश्वर नहीं है सत्यार्थ प्रकाश कह रही है सामर्थ्य नहीं है जन्म लेने की देखिए तो मैं तो आपको पहले बोला ना ई सामर्थ्य है सामर्थ्य व्यान है लेकिन वो अपने नियम के विरुद्ध नहीं जाएंगे मैं पूछ रहा हूं यहां पे मना कर रहा है वो ले ही नहीं सकता ले ही नहीं सकता देखो परमात्मा सब चीज कर सकते हैं लेकिन अपने नियम के अनुसार बंधे हुए हैं इस भाब प्रश्न क्या पूछा जा रहा है आप बोल रहे हैं कि ईश्वर को जन्म लेवा दो ईश्वर जन्म नहीं लेगा भाई साहब सामर्थ है कि नहीं पूछ रहे हो सत्या प्रकाश हाथ रख के कह दीजिए कि मैंने ये कहा है कि ईश्वर को जन्म लिवा दो मैंने आपसे पूछा है ईश्वर के अंदर जन्म लेने की सामर्थ्य है कि नहीं आप उसको जोड़ रहे हो कि ईश्वर को आप कह रहे हो जन्म लिवा दोय गलत बात है तो ईश्वर अपने निम पर बंधा हुआ है और ईश्वर जन्म नहीं लेगा ये है चलो

01:20:11:25 जन्म ले सकता है कि नहीं नहीं लेगा जन्म सत्या प्रकाश में यही लिखा है कि ईश्वर अजन्मा है भाई साहब मैं पूछ रहा हूं कि ईश्वर जन्म लेने की सामर्थ्य रखता है कि नहीं ले सकता है कि नहीं वो लेगा कि नहीं पूछ मेरा प्रश्न पूरा हो जाने दीजिए मैं नहीं पूछ रहा हूं कि वो लेगा कि नहीं मैं नहीं पूछ रहा हूं कि वो लेते हैं कि नहीं लिया है कि नहीं मैं ये सब नहीं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं ले सकते हैं कि नहीं मैं पूछ रहा हूं कि सामर्थ्य है कि नहीं सामर्थ है लेकिन या ले सकते लेते नहीं है नहीं नहीं लेंगे भी नहीं नहीं मैं कह रहा हूं ले सकते पर लेंगे नहीं ईश्वर को महर्षि दयानंद जी ने अजन्मा कहा है और वो अजन्मा है मतलब उनका जन्म ही नहीं हो सकता भाई साहब सवाल मैं ये पूछ रहा हूं ले सकते हैं या ले ही नहीं सकते आप कह रहे हो लेंगे नहीं ले सकते हैं जवाब सुनो उनके भी एक अपने नियम है परमात्मा के उनके अनुसार वो नहीं लेंगे जन्मने पूछा क्या कि वो लेंगे कि नहीं लेंगे मैं आपसे पूछ रहा हूं ले सकते हैं कि नहीं कैपेबिलिटी है कि नहीं परमात्मा सब सामर्थ है या ले सकते हैं लेकिन

01:21:27:10 अपने नियमों पर बंधे हुए हैं तो आप यही बात सत्यार्थ प्रकाश में लिखा हैको ऐसे कह दो कि ले सकते हैं पर लेंगे नहीं नहीं ऐसा भी नहीं है अजन्म है परमात्मा तो नहीं ले सकते ना नहीं ले सकते ना लेने की आवश्यकता ही नहीं फिर वही बात मैं पूछ रहा हूं ले सकते हैं कि नहीं आवश्यकता ही नहीं है फिर भाई साहब मैंने पूछा सता प्रकाश में कहीं नहीं लिखा है कि परमात्मा अवतार लेंगे परमात्मा अवतार के विरुद्ध है मतलब परमात्मा अवतार नहीं ले सकते है ना उसकी कोई प्रतिमा बन नहीं सकते त प्रतिमा अच्छा अब आपने एक बात कही कि उसको आवश्यकता नहीं है ठीक है जब वेदों का भाष किया है दयानंद जी ने तो उसमें कई जगह उन्होने अलंकार लगाए उपमा अलंकार मतलब उन्होने कहा यहां पर जो कहीं भी कोई चमत्कारिक बात हो रही है तो उसमें दयानंद जी ने क्या किया कि कई जगह य कर दिया है कि यहां पर यह वाला अलंकार है वो वाला अलंकार है अलंकार उपमा नहीं बहुत सारे अलग अलग अलंकार तो ये अलंकार की क्या आवश्यकता है वेद के मंत्रों में ईश्वर को अलंकार का अर्थ यह होता है कि उपाधि भाई कि आप बहुत अच्छे व सुंदर बनाने के लिए मंत्र को सुंदर बनाने

01:22:42:15 के लिए तो आवश्यकता क्या है आवश्यकता है मंत्र को सुंदर बनाने की आवश्यकता है मंत्र जैसे हम कविता में अलंकार लगाते हैं ना तो सुंदरता बढ़ जाती है तो क्या आवश्यक है व सुंदरता बढ़ाना संस्कृत में इसको छंद से मैं पूछ रहा हूं आवश्यकता है अलंकार की कि नहीं है आवश्यकता देखो विद्वता के क्षेत्र में अच्छे अलंकार आप लगाएंगे जवाब दे ही नहीं रहे मैं पूछ रहा आवश्यकता है आवश्यकता है कि नहीं है हा या ना सिंपल आंसर आवश्यकता है या नहीं है अलंकारों की आवश्यकता छंद शास्त्र में होती है आवश्यकता है ना लगाना चाहिए व लगाए नहीं तो वहा नहीं लगाएंगे ऐसा है नहीं तो ये किस पैरा एकदम आवश्यक नहीं कि वही लगाए ऐ यानी कि आवश्यक नहीं है ना मनहा हो सकता है व या अपने मन के ऊपर ले ऋषियों द्वारा वर्णित जो मंत्र है उसमें ऋषियों ने पहले से ही छंद शास्त्र के अनुसार छंद बना चुके हैं भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जो वेदों का भाष्य जब किया है दयानंद जी ने तो उन्होंने कई जगह माना कि यहां पर फलाना अलंकार है अब दिक्कत ये आती है कि अलंकार की क्या आवश्यकता थी ईश्वर को मंत्रों में अलंकार लगाने

01:23:57:18 की अगर अलंकार लगाना आवश्यक है तो हर मंत्र में क्यों नहीं लगाया अगर अलंकार आवश्यक था तो प्रत्येक मंत्र में अलंकार नहीं है तो फिर वो इसका मतलब अपने मन मुताबिक कहीं भी कुछ भी कर रहा है उसका मन कौन ईश्वर नहीं ऐसा नहीं है आप ईश्वर को समझ ही नहीं पाए हैं ईश्वर वो सत्ता है जोना काल से मैं आपसे पूछ रहा अलंकार की आवश्यकता है कि नहीं अपने वेदों में ईश्वर को अलंकार की आवश्यकता नहीं है ईश्वर स्व अलंकार वान है मैं पूछ रहा हूं जो हमारे वेद मंत्रों में उन्होंने अलंकार स्वीकार किया तो उसको किसने लगाया ऋषियों ने लगाया है मतलब ये जो है ईश्वरीय ईश्वर ईश्वरीय नहीं है ऋषियों ने अपने हिसाब से रचना की है तो ऋषियों ने प्रेरित किया भगवान ने ऋषि दृष्टा है मंत्र दृष्टा है हा तो ऋषियो मंत्र दृष्ट कहा गया है तो वो मंत्र जो वहां पर उन्होंने लिए है ह तो ईश्वर के आराधना करते समय उन मंत्रों को लिया गया है हां और उनके वर्णन किया गया है कि मैंने पूछा अलंकार की आवश्यकता है कि नहीं मंत्रों में जहां हो सकता है वहां लगाया जा सकता है जी तो एक इसका पैरामीटर क्या है कि कहां पे लगाना आवश्यकता तो छंद है नहीं इसका कोई पैरामीटर होगा

01:25:12:21 ना कि इस मंत्र में आवश्यक था कि नहीं था हम पैरामीटर मतलब ऐसा नहीं बना सकते मतलब निश्चित नहीं हैच नहीं जहां उसको ठीक लगा उसने लगा दिया ठीक छंद जहां बैठ जाए तो कोई तो कोई नियमावली है कि यहां पर लगाना आवश्यक था व्याकरण में है वो बताइए क्या कहां पे है वो नियमावली कि अलंकार लगाना कहां क पर पर है अलंकार लगाना कहां-कहां पर किन-किन आधार पर आवश्यक होता है इसकी नियमावली क्या है इसके काव्य अलंकार में दिए हैं कहां दिया है काव्य अलंकार एक पुस्तक है हा वहां अलंकार कहां-कहां लगते हैं उस पर दिया गया है सूत्र बने हुए हैं वो सूत्र के अनुसार अलंकार लगते हैं छंद शास्त्र पिंगल कृत है उसके अनुसार छंद कहां लगते हैं ये नहीं अलंकार आवश्यक कहां क होते हैं प्रश्न य हा तो काव्य अलंकार एक सूत्रा है उसके माध्यम से उसमें दिया गया है कि कहां कहा कौन से अलंकार का प्रयुक्त होता है नहीं नहीं किस स्थि पर आवश्यक अलंकार भाई साहब आवश्यक बोल रहे हो आप अगर अलंकार आवश्यक है तो हर मंत्र में क्यों नहीं है अलंकार देखो यह बताओ किसी चीज को हमें बताने में आसानी रहता है कि फलाना चीज इस जगह है तो उसको हम बताते हैं कुछ विशेष आकर्षण यानी कि आसान बनाने के लिए जिससे कि मनुष्य

01:26:27:21 ईश्वर को आसानी से समझ सके कुछ विशेष आकर्षण पैदा कर दि वेद को तो समझना बहुत मुश्किल है तो विशेष आकर्षण पैदा करने के लिए अवतार नहीं ले सकता उनके वो सत्यार्थ प्रकाश में नहीं लिखा इसलिए नहीं नहीं सत्यार्थ प्रकाश में लिखा या नहीं लि ईश्वर सामर्थ्य मान है परंतु उनके एक नियम है वे भौतिक तत्व को धारण नहीं करेंगे नाई ईश्वर है चर्चा हुई धर्माचार्य जी है इनके साथ हमारी काफी देर तक बातें हुई और धर्माचार्य जी हमें प्रमाण देंगे कि सत्यार्थ प्रकाश में दयानंद जी ने कहां पर माना है कि ईश्वर के पांच कार्य हमें अब तक ये पता था कि ईश्वर के चार कार्य है ये एक कार्य और बता रहे तो ये हमें प्रमाण देंगे तो आप आशा करते हैं आपको बहुत कुछ जानने को मिला हो और बहुत सी चीज समझ में आई हो आपका बहुत-बहुत आभार हमें समय देने के लिए इतना सारा आपने समय दिया चर्चा होती रहती है इससे क्या है थोड़ा सा अपने ज्ञान का स्तर भी बढ़ है और चीजों को समझने में रुचि आती है फिर हम खुद भी खोजी बनते हैं और आशा करते हैं कि हमने जो प्रश्न उत किए हैं उसका सही जिनसे आप संतुष्ट ना हुए अपने वक्तव्य से उनके बारे में आप रिसर्च करें तो इसी के साथ-साथ आप सभी का आभार आपका आभार सभी को जय श्री राम

01:27:44:10 [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:27:49 · 02 Mar 2025

आर्य समाज के विवाह की सच्चाई #aryasamaj #dayanandsaraswatiji

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

A · Video Swami Dayanand Saraswati ke anusar Shri Krishna Agyani the | Reality o...
Open at 00:13:25:27

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status