1
00:00:06,720 --> 00:00:10,880
मतलब सर थोड़ा उसको समझा दीजिए सर तो हम फोन लगाते

2
00:00:10,880 --> 00:00:14,880
हैं लगाइए फोन जय

3
00:00:14,880 --> 00:00:19,360
श्री राम हां जय श्री राम बोलिए जी

4
00:00:19,360 --> 00:00:25,200
माता जी आप ब्रह्मा कुमारी से जुड़ी हुई हैं हां

5
00:00:25,200 --> 00:00:29,280
तो ब्रह्मा कुमारी में क्या विशेषता है जो आपको घर पे नहीं

6
00:00:29,280 --> 00:00:33,520
है हां ब्रह्मा कुमारी

7
00:00:33,520 --> 00:00:37,680
जाने से क्या प्राप्त होता है? क्या प्राप्त होता

8
00:00:37,680 --> 00:00:42,000
है ब्रह्मा कुमारी जाने से? जी ब्रह्मा

9
00:00:42,000 --> 00:00:46,080
कुमारी के ज्ञान से ही तो ईश्वर की प्राप्ति होती है। ईश्वर

10
00:00:46,080 --> 00:00:50,480
से क्या प्राप्त होता है? ईश्वर से क्या प्राप्त होता है? आप भी जानते

11
00:00:50,480 --> 00:00:55,360
होंगे। आप बताइए तो भाई ईश्वर हमें क्यों चाहिए?

12
00:00:55,360 --> 00:00:59,440
क्यों चाहिए ईश्वर? तो आप बताइए आपको ईश्वर

13
00:00:59,440 --> 00:01:03,760
की नहीं जरूरत है क्या? भाई मुझे तो इसलिए चाहिए कि शाश्वत सुख

14
00:01:03,760 --> 00:01:09,760
ऐसा सुख जो कभी खत्म ना हो इसलिए ईश्वर चाहिए होता है। हां

15
00:01:10,080 --> 00:01:14,400
शाश्वत सुख अनंत सुख के लिए ईश्वर की प्राप्ति

16
00:01:14,400 --> 00:01:18,400
की इच्छा होती है। अनंत सुख तो इसीलिए

17
00:01:18,400 --> 00:01:22,640
आप भी जाती हैं ब्रह्मा कुमारी। अनंत सुख शांति

18
00:01:22,640 --> 00:01:26,720
के लिए अनंत अनंत सुख शांति तो दूर की

19
00:01:26,720 --> 00:01:30,800
बात हम कोई अभी जो हम जी रहे हैं जिंदगी इसमें हमको सुख शांति

20
00:01:30,800 --> 00:01:33,440
चाहिए

21
00:01:33,440 --> 00:01:37,520
बाकी तो और सब अनंत सुख की तो बात ही छोड़िए तो मतलब

22
00:01:37,520 --> 00:01:43,520
ब्रह्मा कुमारी अनंत सुख की बात अनंत सुख नहीं देता ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर

23
00:01:43,600 --> 00:01:47,680
ब्रह्मा कुमारी सेंटर अनंत सुख देता है नहीं इस जन्म

24
00:01:47,680 --> 00:01:51,920
में तो सुख मिलता है शांति मिलती है ना जो दुख है जो तकलीफ

25
00:01:51,920 --> 00:01:56,080
है इंसान के अंदर उसकी तो ब्रह्मा कुमारी उसके वो तो

26
00:01:56,080 --> 00:02:00,320
उसके हिसाब से तो हमें वहां ज्ञान मिलता है ना हमारे

27
00:02:00,320 --> 00:02:04,640
अंदर शांति महसूस होती है। ये बताइए हां

28
00:02:04,640 --> 00:02:09,600
कि आपने जिसके साथ विवाह किया है हां

29
00:02:09,600 --> 00:02:13,680
वो आप वहां जा रही हैं वह दुखी है

30
00:02:13,680 --> 00:02:17,760
तो इस बात का दुख है कि नहीं आपको? अच्छा ये बताइए आप शादी

31
00:02:17,760 --> 00:02:21,840
किए हैं कि नहीं किए हैं? माता जी अभी

32
00:02:21,840 --> 00:02:25,120
आपकी बात हो रही है ना? हां तो मेरी बात छोड़िए ना।

33
00:02:25,120 --> 00:02:29,440
हम भी आपसे बात कर रहे हैं तो हम ही तो जान सकते हैं कि आप शादी किए हैं कि नहीं? हां

34
00:02:29,440 --> 00:02:33,440
हुई है मेरी शादी। हां? हां हुई है। तो आप अपनी औरत

35
00:02:33,440 --> 00:02:38,720
को कैसे रखते हैं? हां? अच्छे से।

36
00:02:38,720 --> 00:02:43,040
अच्छे से। दुनिया में तो हर आदमी यही ना चाहता है कि हम ही खुशहाल रहे जिंदगी

37
00:02:43,040 --> 00:02:47,360
अपनी। तो ये आपको अच्छे से नहीं रखते क्या? वो तो उनकी

38
00:02:47,360 --> 00:02:51,680
और हमारी बात छोड़िए। अरे अभी शादी

39
00:02:51,680 --> 00:02:55,200
अगर एक औरत अपने

40
00:02:55,200 --> 00:02:59,200
सुनिए एक औरत अपने मां-बाप का घर छोड़ के खींच के घर आती है तो

41
00:02:59,200 --> 00:03:03,200
किस लिए आती है? आप यह बताइए आपने अभी मुझसे प्रश्न किया कि आपकी पत्नी

42
00:03:03,200 --> 00:03:07,520
के बारे में बताइए मैंने बताया ना आपको तब मैं पूछ रहा हूं तो आप क्यों

43
00:03:07,520 --> 00:03:11,680
आप क्यों कह रही कि छोड़िए?

44
00:03:11,680 --> 00:03:17,680
मैं पूछ रहा हूं वो आपको अच्छे से नहीं रखते क्या?

45
00:03:18,240 --> 00:03:22,960
हेलो साहब से पैसे नहीं हम लिए थे। हां

46
00:03:22,960 --> 00:03:27,120
हेलो उनके हां बोलिए मैं कह रहा हूं आपके पति आपको अच्छे

47
00:03:27,120 --> 00:03:31,280
से नहीं रखते क्या? तो अब हमारे पति

48
00:03:31,280 --> 00:03:35,520
की बात तो छोड़िए ना। आप हमसे क्या बात करना चाहते हैं? मैं ये करना

49
00:03:35,520 --> 00:03:40,400
चाह रहा हूं कि आप अपने जो सनातन हिंदू धर्म है उसके विरुद्ध

50
00:03:40,400 --> 00:03:44,800
जो ब्रह्मा कुमारी है वहां क्यों जा रही हैं? अपने

51
00:03:44,800 --> 00:03:48,960
हिंदू अपने हिंदू धर्म में आपने भक्ति की भगवान विष्णु की

52
00:03:48,960 --> 00:03:53,280
शंकर की कृष्ण की रहकर अपने घर में रहकर जो हमारी परंपरा प्राप्त

53
00:03:53,280 --> 00:03:57,280
जो पूजा पद्धति है उसके द्वारा आपने भक्ति करके सुख प्राप्त करने

54
00:03:57,280 --> 00:04:01,360
का प्रयास किया और यदि आप ये कहती हैं, यदि आप यह कहती

55
00:04:01,360 --> 00:04:05,440
हैं कि ब्रह्मा कुमारी जाकर के मुझे सुख मिल रहा है। बताइए हम भक्ति क्यों

56
00:04:05,440 --> 00:04:09,600
करते हैं? एक मिनट एक मिनट माता जी। अगर आप यह कह रही हैं कि नहीं नहीं

57
00:04:09,600 --> 00:04:13,680
मुझे ब्रह्मा कुमारी जाकर के सुख मिल रहा है तो दुख तो नहीं मिल रहा है क्योंकि आपका

58
00:04:13,680 --> 00:04:17,760
पति दुखी है और फिलहाल इस समय मैं आपसे जो प्रश्न कर रहा हूं

59
00:04:17,760 --> 00:04:21,760
यह भी आपको प्रिय नहीं है तो यहां पर भी आपका सुख बाधित हो रहा

60
00:04:21,760 --> 00:04:25,760
है समझ रही हैं मेरी बात तो हम आपसे

61
00:04:25,760 --> 00:04:26,800
पूछ रहे हैं ये बताइए कि

62
00:04:26,800 --> 00:04:31,440
भक्ति कह रहे हैं कि आप अपने घर में भक्ति की कृष्ण की इनकी उनकी

63
00:04:31,440 --> 00:04:35,600
बताइए हम भक्ति हम या आप भक्ति क्यों करते हैं बताइए भक्ति

64
00:04:35,600 --> 00:04:39,840
ईश्वर प्राप्ति के लिए ईश्वर प्राप्ति के लिए करते हैं।

65
00:04:39,840 --> 00:04:43,840
भक्ति से ईश्वर मिला है। क्यों नहीं मिला है? राजा जनक को

66
00:04:43,840 --> 00:04:48,000
मिला है, कृष्ण को मिला है, अर्जुन को मिला है। तो राजा

67
00:04:48,000 --> 00:04:52,080
जनक और कृष्ण कब भक्ति किए थे? बताइए। राजा जनक ने भक्ति

68
00:04:52,080 --> 00:04:56,080
नहीं की थी भगवान की। अरे तो हम आप हम भी तो आपसे पूछ रहे

69
00:04:56,080 --> 00:05:00,080
ना कि कृष्ण की बात किए हैं राजा जनक की बात किए हैं चाहे राम

70
00:05:00,080 --> 00:05:04,800
है चाहे शंकर है सब तो परमात्मा की ही मतलब

71
00:05:04,800 --> 00:05:08,960
परमात्मा को ही पुकारते हैं एक शिव को तो परमात्मा

72
00:05:08,960 --> 00:05:13,200
जो शिव को पुकार रहे हैं उसमें और ब्रह्मा कुमारी वाले परमात्मा

73
00:05:13,200 --> 00:05:17,280
में तो अंतर है ना मैं बता रहा हूं मैं बता

74
00:05:17,280 --> 00:05:21,440
रहा हूं मैं बता रहा हूं बता रहा हूं बता रहा हूं परमात्मा

75
00:05:21,440 --> 00:05:25,440
में क्या अंतर है अंतर है अंतर अंतर है। बता रहा हूं। तो बताइए क्या अंतर है? बता रहा

76
00:05:25,440 --> 00:05:30,000
हूं माता जी। ब्रह्मा कुमारी का परमात्मा यह कहता है

77
00:05:30,000 --> 00:05:34,000
कि मैं मतलब कि शिव और शंकर अलग-अलग है।

78
00:05:34,000 --> 00:05:38,000
जबकि राम ने जिस ईश्वर की पूजा करना सिखाई है। कृष्ण ने

79
00:05:38,000 --> 00:05:42,080
जिस ईश्वर की पूजा करना सिखाया है वो ईश्वर और शंकर

80
00:05:42,080 --> 00:05:47,040
में कोई अंतर नहीं है। पहली बात। दूसरी बात जो

81
00:05:47,040 --> 00:05:51,120
राम और कृष्ण का जो ईश्वर है वही ईश्वर अवतार लेता है। माता के

82
00:05:51,120 --> 00:05:55,360
गर्भ से जन्म लेता है। सर्वशक्तिमान है, अनंत है, अबाध्य

83
00:05:55,360 --> 00:05:59,360
है, पूर्ण है। और जो ब्रह्मा कुमारी का

84
00:05:59,360 --> 00:06:03,600
ईश्वर है, वह केवल परकाया प्रवेश कर सकता है। अवतार

85
00:06:03,600 --> 00:06:07,760
धारण नहीं कर सकता। वो सब कुछ नहीं एक एक मिनट सुन

86
00:06:07,760 --> 00:06:11,920
लीजिए। वो सर्वव्यापक नहीं है। एक देसी है। एक जगह है,

87
00:06:11,920 --> 00:06:16,080
दूसरी जगह नहीं है। यह पूर्ण सत्य नहीं है। दूसरी बात।

88
00:06:16,080 --> 00:06:20,320
जिस ईश्वर की राम और कृष्ण ने पूजा करना सिखाया है,

89
00:06:20,320 --> 00:06:24,320
वह ईश्वर अनंत मोक्ष देता है। वह यह कहता

90
00:06:24,320 --> 00:06:28,400
है कि आप जब वहां जाएंगे वह परमधाम तो वहां से आप वापस

91
00:06:28,400 --> 00:06:32,400
नहीं आएंगे। जबकि ब्रह्मा कुमारी कहता है कि आप जो है केवल

92
00:06:32,400 --> 00:06:38,080
देवता बनेंगे। और देवता बन करके फिर जो है आप वापस फसेंगे।

93
00:06:38,080 --> 00:06:42,320
यह अंतर है मोटे मोटे। बाकी तो बहुत सारे अंतर है। अच्छा आपका

94
00:06:42,320 --> 00:06:46,400
ईश्वर कहता है कि जब तक परमधाम जाएंगे तो फिर वापस नहीं आएंगे।

95
00:06:46,400 --> 00:06:50,800
हां। और ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर कहता है कि परमधाम

96
00:06:50,800 --> 00:06:54,880
नहीं जाएंगे फिर यहीं पे। परमधाम तो जाओगे ही नहीं। आप केवल देवता बनोगे।

97
00:06:54,880 --> 00:06:57,520
देवता से फिर वापस आप बनोगे वो। द्वापर

98
00:06:57,520 --> 00:07:01,520
आएगा आपके अनुसार। फिर त्रेता आएगा फिर जो है वो आएगा कलयुग। फिर आप जो है यहीं

99
00:07:01,520 --> 00:07:05,600
आ जाओगे जहां पे हो इस समय। और और आपका आपका

100
00:07:05,600 --> 00:07:11,600
परमात्मा कहते हैं कि जो है कि परमधाम जाएंगे तो फिर जो है

101
00:07:12,160 --> 00:07:16,320
बिल्कुल दोबारा पुनरावृति नहीं होती है

102
00:07:16,320 --> 00:07:21,040
ये अंतर बता रहा हूं आपके वहां में और यहां पे अंतर बता रहा हूं

103
00:07:21,040 --> 00:07:25,200
और परमात्मा सिर्फ एक है ठीक है

104
00:07:25,200 --> 00:07:29,440
तो परमात्मा परमा परमात्मा माता जी माता जी सुनिए

105
00:07:29,440 --> 00:07:33,520
परमात्मा एक है मगर परमात्मा की परिभाषा भाषा अलग-अलग

106
00:07:33,520 --> 00:07:37,520
है। ब्रह्मा कुमारी गलत परिभाषा दे रहा है परमात्मा की। वो कह

107
00:07:37,520 --> 00:07:41,680
रहा हूं मैं। अच्छा तो ये बताइए शंकर शंकर क्या है? वो देवता है कि भगवान

108
00:07:41,680 --> 00:07:45,920
है कि परमात्मा है? क्या जो जो परम सत्य है जो निर्विशेष

109
00:07:45,920 --> 00:07:50,800
निर्गुण निराकार जो सर्वव्यापी सर्व नियंता सर्वव्यापक

110
00:07:50,800 --> 00:07:55,040
अबाध्य सर्वशक्तिमान जो जो परम तत्व है वही

111
00:07:55,040 --> 00:07:59,120
सगुण साकार होता है तो वह शंकर कहलाता है। वह अवतार

112
00:07:59,120 --> 00:08:02,160
धारण करता है।

113
00:08:02,160 --> 00:08:06,160
ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर तो कुछ भी नहीं कर सकता। ब्रह्मा

114
00:08:06,160 --> 00:08:11,360
कुमारी का शंकर लेते हैं शिवजी शंकर के

115
00:08:11,360 --> 00:08:13,040
आपके हिसाब से वो परमात्मा

116
00:08:13,040 --> 00:08:17,760
मेरे हिसाब से नहीं शास्त्र के हिसाब से वेद के हिसाब से अच्छा तो शंकर परमात्मा

117
00:08:17,760 --> 00:08:22,000
है शंकर इतना हवन जाप होता है तो हर जगह

118
00:08:22,000 --> 00:08:26,240
होता है कि ब्रह्मा देवताय नमः विष्णु देवताय नमः शंकर देवताय नमः

119
00:08:26,240 --> 00:08:30,400
तो शिव परमात्माए नमः कहां कहते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़]

120
00:08:30,400 --> 00:08:34,640
बताइए मैंने क्या कहा मैंने मैं आपका

121
00:08:34,640 --> 00:08:39,040
जवाब जवाब दे रहा हूं माता जी मैं आप जैसे यह होता है ना जैसे

122
00:08:39,040 --> 00:08:43,200
लोग कहते हैं शिव परमात्माए नमः शंकर देवताय नमः तो आपको मैं

123
00:08:43,200 --> 00:08:47,200
यह भी दिखा देता हूं शास्त्र में कि शिव ही शंकर है उसका

124
00:08:47,200 --> 00:08:51,440
क्या करोगे इसको क्या करें सुनिए शंकर

125
00:08:51,440 --> 00:08:55,520
तो तपस्या आप सुनिए आप कह रही हैं आप कह रही

126
00:08:55,520 --> 00:08:59,760
हैं हां चलिए ठीक है तपस्या करने वाली बात सुन लीजिए आप

127
00:08:59,760 --> 00:09:03,920
कह रही हैं लोगों के लोग ऐसा कहते हैं मैं कह रहा हूं जो शास्त्र

128
00:09:03,920 --> 00:09:07,920
में लिखा अब आप आपने कहा ना कि शंकर जी स्वयं तपस्या करते हैं।

129
00:09:07,920 --> 00:09:12,000
उसकी बात भी सुन लीजिए। नारद पुराण में विष्णु भगवान

130
00:09:12,000 --> 00:09:16,160
कहते हैं शंकर जी से भगवान आप किसका तप कर रहे हैं? तो शिव

131
00:09:16,160 --> 00:09:20,240
जी कहते हैं हे गोविंद मैं किसी का तप नहीं

132
00:09:20,240 --> 00:09:24,240
करता। मैं किसी की भक्ति नहीं करता। यह तो

133
00:09:24,240 --> 00:09:28,160
मैं नास्तिकों को धर्म में प्रवृत्त करने के लिए

134
00:09:28,160 --> 00:09:31,920
लीला करता हूं। केवल

135
00:09:31,920 --> 00:09:36,000
अब सीधी सी एक बात है माता जी इतनी बहुत ज्यादा लंबी बात

136
00:09:36,000 --> 00:09:40,160
करने का मतलब ही नहीं है। सीधी बात है ईश्वर वो है

137
00:09:40,160 --> 00:09:44,480
जो सर्वशक्तिमान है। सर्वशक्तिमान का मतलब

138
00:09:44,480 --> 00:09:48,640
सब कुछ कर सकने वाला। अब ये बताइए ब्रह्मा

139
00:09:48,640 --> 00:09:52,720
कुमारी के अनुसार ईश्वर गर्भ में धार गर्भ

140
00:09:52,720 --> 00:09:56,880
के गर्भ के द्वारा जन्म ले सकता है। अवतार धारण कर सकता है कि नहीं? ये

141
00:09:56,880 --> 00:10:01,840
बताइए। ब्रह्मा नहीं। नहीं। तो नहीं नहीं

142
00:10:01,840 --> 00:10:05,840
हो सकता तो इसका मतलब वो सर्वशक्ति तो फिर वो इसका

143
00:10:05,840 --> 00:10:10,480
इसका मतलब वो सर्वशक्तिमान नहीं है ना सर्व

144
00:10:10,480 --> 00:10:14,560
सर्वशक्तिमान नहीं है नहीं है ना जब वो नहीं तो

145
00:10:14,560 --> 00:10:18,640
जब से जन्म सुनिए वो तो अच्छा परमात्मा जो

146
00:10:18,640 --> 00:10:23,200
है कि हर वक्त यहां आते हैं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं माता जी

147
00:10:23,200 --> 00:10:27,360
मैं आपसे ये पूछ रहा हूं क्या ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो ईश्वर की व्याख्या

148
00:10:27,360 --> 00:10:32,000
की गई है उसमें ईश्वर ईश्वर सर्वशक्तिमान है। हां सर्वशक्तिमान

149
00:10:32,000 --> 00:10:36,160
है। सर्व सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या होता है माता जी? तो

150
00:10:36,160 --> 00:10:40,400
इसका मतलब कि मैंने आप देखिए माता जी चार तरह की बातें करेंगे

151
00:10:40,400 --> 00:10:43,440
फिर निष्कर्ष नहीं निकलेगा। आप बोल रहे हैं सर्वशक्तिमान

152
00:10:43,440 --> 00:10:47,760
का मतलब कि कुछ भी कर सकते हैं। तो आप बताइए

153
00:10:47,760 --> 00:10:52,080
ना सर्वशक्तिमान का मतलब क्या है? तो सर्वशक्तिमान है। ठीक है?

154
00:10:52,080 --> 00:10:56,080
लेकिन उनका भी तो मैंने मैंने कहा मैंने माता जी मैं क्या

155
00:10:56,080 --> 00:11:00,400
मैं क्या कह रहा हूं? वो ठीक है मत करिए। आप मुझे आप मुझे

156
00:11:00,400 --> 00:11:04,960
माता जी आप मुझे सर्वशक्तिमान का अर्थ बताइए क्या होता है? तो सर्वशक्तिमान

157
00:11:04,960 --> 00:11:09,040
का मतलब सारी शक्तियां उनके पास है। ठीक है। सारी सारी ना

158
00:11:09,040 --> 00:11:13,440
सारी एक भी कम नहीं होनी चाहिए ना। हां। हां।

159
00:11:13,440 --> 00:11:17,520
सारी होनी चाहिए ना। हां। ठीक है। अब ये

160
00:11:17,520 --> 00:11:21,680
बताइए क्या वो अवतार धारण कर सकता है? अवतार तो वो

161
00:11:21,680 --> 00:11:26,560
लेते ही हैं। अवतार माता के गर्भ से जन्म पर काया प्रवेश नहीं।

162
00:11:26,560 --> 00:11:30,960
अवतार होता ही है उनका ये हमको भी पता है

163
00:11:30,960 --> 00:11:34,960
कहां होता है ब्रह्मा कुमारी के से डेज कोर्स में लिखा

164
00:11:34,960 --> 00:11:39,040
है उनका अवतार नहीं होता मेरे पास किताब है ब्रह्मा कुमारी बोल रहे

165
00:11:39,040 --> 00:11:43,200
हैं हम लोग को भी पता है क्यों नहीं अवतार होता है लास्ट सीन में उनका

166
00:11:43,200 --> 00:11:47,200
जब विनाश का समय होगा लास्ट सीन में उनका अवतार तो होगा ही ये

167
00:11:47,200 --> 00:11:51,520
तो नहीं है कि अवतार उनका नहीं होगा अवतार होगा उनके असली

168
00:11:51,520 --> 00:11:55,520
रूप में प्रकाश के रूप में अवतार होगा और किस किसी शरीर धारी के रूप में

169
00:11:55,520 --> 00:11:58,560
अवतार होगा क्या? तो अब चलिए मैं अपना प्रश्न बदलता

170
00:11:58,560 --> 00:12:02,720
हूं। शरीरधारी के रूप में अवतार हो सकता है कि नहीं? नहीं हो सकता

171
00:12:02,720 --> 00:12:07,120
है। इसका मतलब शरीर धारी के रूप में अवतरित होने की शक्ति नहीं है।

172
00:12:07,120 --> 00:12:11,200
नहीं अवतार अवतार का मतलब क्या कहें कि अवतार मैं कह रहा हूं

173
00:12:11,200 --> 00:12:15,440
शरीर धारी के रूप से शरीर शरीर में प्रवेश

174
00:12:15,440 --> 00:12:19,680
करने की उनकी शक्ति है। वो जन्म नहीं लेते हैं गर्भ से। तो मैं वही तो आपसे

175
00:12:19,680 --> 00:12:23,920
पूछ रहा हूं। जन्म ले सकता है कि नहीं? माता के गर्भ से उत्पन्न हो सकता है कि नहीं?

176
00:12:23,920 --> 00:12:28,000
माता के गर्भ से वो जन्म नहीं लेते हैं। तो इसका मतलब माता के गर्भ से

177
00:12:28,000 --> 00:12:32,320
प्रकट होने की शक्ति नहीं है ना उसके पास शक्ति है क्यों नहीं?

178
00:12:32,320 --> 00:12:36,320
और जब माता का गर्भ से जन्म कलयुग में पाप से जन्म हो रहा है तो भगवान का

179
00:12:36,320 --> 00:12:40,320
जन्म तो मैं पूछ रहा हूं ले सकता है कि नहीं? ले

180
00:12:40,320 --> 00:12:44,560
सकता है लेंगे ही नहीं वो पाप से जन्म लेंगे ही नहीं। अरे भाई मेरे पास शराब

181
00:12:44,560 --> 00:12:49,040
पीने पाप से जन्म इसका मतलब आपका पाप से जन्म हुआ है।

182
00:12:49,040 --> 00:12:53,200
हां क्यों नहीं हुआ है? कलयुग में पाप से हर आत्मा का जन्म होता है। और देवता

183
00:12:53,200 --> 00:12:57,200
देवताओं का जन्म कैसे होता है? देवताओं का जन्म जो संकल्प शक्ति से

184
00:12:57,200 --> 00:13:01,200
होता है। योग बल से होता है। तो संकल्प शक्ति से गर्भ से बाहर नहीं आ सकते

185
00:13:01,200 --> 00:13:05,280
वो। क्यों? संकल्प शक्ति से गर्भ से बाहर नहीं आ सकते

186
00:13:05,280 --> 00:13:09,440
वो। अरे तो संकल्प शक्ति जब से जब मां के गर्भ

187
00:13:09,440 --> 00:13:13,520
में बच्चा आ सकता है तो क्या वो पैदा नहीं होगा? 9 महीने बाद। तो वही तो मैं

188
00:13:13,520 --> 00:13:14,020
कह

189
00:13:13,600 --> 00:13:19,280
रहा हूं। फिर पाप कहां रह गया वो? हम

190
00:13:19,280 --> 00:13:23,760
फिर पाप कहां रह गया वो जब संकल्प शक्ति से गर्भ धारण किया मां ने

191
00:13:23,760 --> 00:13:27,760
पाप कहां रह गया तो देवताओं का जन्म संकल्प शक्ति मैंने

192
00:13:27,760 --> 00:13:31,840
आपसे क्या पूछा मैंने आपसे क्या पूछा मैंने आपसे क्या पूछा संकल्प

193
00:13:31,840 --> 00:13:36,320
शक्ति से गर्भ धारण नहीं कर सकती मां तो संकल्प

194
00:13:36,320 --> 00:13:40,560
शक्ति से धारण कर सकती है जब पूरी सृष्टि सतो प्रधान रहेगी

195
00:13:40,560 --> 00:13:44,800
पांचो अरे भैया मैं कह रहा हूं आपने कहा कि जब जब स्त्री

196
00:13:44,800 --> 00:13:49,200
पुरुष उसके मिलन से होगा तो पाप से उत्पन्न माना आपने। आपने अपने माता-पिता

197
00:13:49,200 --> 00:13:53,280
अपना जन्म को भी पापी मान लिया। अपने माता-पिता को पापी मान लिया। ठीक है कोई बात

198
00:13:53,280 --> 00:13:57,440
नहीं। अब आप मुझे ये बताइए कि संकल्प शक्ति से ईश्वर गर्व

199
00:13:57,440 --> 00:14:01,680
नहीं दे सकता। बिना पाप के हो जाए। क्या

200
00:14:01,680 --> 00:14:05,680
बोलना है? संकल्प शक्ति से वो नहीं दे सकता। अपना

201
00:14:05,680 --> 00:14:09,680
जन्म बिना बिना स्त्री पुरुष के मिलन से ही गर्भ धारण

202
00:14:09,680 --> 00:14:12,160
कर ले वो।

203
00:14:12,160 --> 00:14:16,400
[हंसी] किसको कह रहे भगवान को? आप कह रही है ना कि वो पाप से उत्पन्न नहीं

204
00:14:16,400 --> 00:14:20,480
होगा। हम तो पाप क्या है? स्त्री पुरुष का मिलन।

205
00:14:20,480 --> 00:14:24,880
यही पाप है ना? तो क्या स्त्री पुरुष के मिलन के बिना ही

206
00:14:24,880 --> 00:14:28,640
ईश्वर अपनी संकल्प शक्ति मात्र से माता को गर्भ

207
00:14:28,640 --> 00:14:32,800
धारण नहीं करवा सकता जिससे कि वो उत्पन्न हो जाए। माता के गर्भ से बाहर आ जाए। जन्म ले

208
00:14:32,800 --> 00:14:36,800
ले। संकल्प शक्ति से। तो संकल्प शक्ति से कृष्ण का

209
00:14:36,800 --> 00:14:41,120
जन्म हुआ है ना पहला जन्म? मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं माता

210
00:14:41,120 --> 00:14:45,680
माता जी मैं मैं देखिए देखिए माता जी मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं गर्भधारण

211
00:14:45,680 --> 00:14:49,760
करवा सकता है या नहीं संकल्प शक्ति से अपने लिए

212
00:14:49,760 --> 00:14:53,840
हां नहीं जब उनका इसका मतलब संकल्प शक्ति मतलब

213
00:14:53,840 --> 00:14:58,320
कि सर्वशक्तिमान है तो जो चाहे वो कर सकते हैं क्या हां हां बिल्कुल

214
00:14:58,320 --> 00:15:02,800
बिल्कुल आप आप कह सकते हैं ना कि ठीक है मैं मैं मैं

215
00:15:02,800 --> 00:15:07,520
वही कह रहा हूं इसका मतलब कि इसका मतलब इसका मतलब की सर्वशक्तिमान

216
00:15:07,520 --> 00:15:11,760
नहीं मानते ना आप भगवान को ब्रह्मा कुमारी क्यों नहीं मानते हैं सर्वक्तिमान

217
00:15:11,760 --> 00:15:15,760
सर्वक्तिमान का अर्थ क्या है मेरा भी पार्ट है

218
00:15:15,760 --> 00:15:19,840
पार्ट है कि जब मुझे पूछना है तभी हमें माता जी एक एक

219
00:15:19,840 --> 00:15:23,920
करके बात करिए सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या मानती हैं आप सर्वशक्तिमान का

220
00:15:23,920 --> 00:15:28,080
अर्थ आप जो बता रहे हैं वही हम ही मान रहे हैं तो फिर आप तो ये कह रही है ना सर्व

221
00:15:28,080 --> 00:15:32,160
शक्तियां है तो जो चाहे वो कर सकता है यानी कि कर तो सकता है पर करता

222
00:15:32,160 --> 00:15:36,320
नहीं है यही है ना तो करता

223
00:15:36,320 --> 00:15:40,480
नहीं है तो ये आप बोल रहे है हम तो यही अरे आप ही तो कह रही हो कि

224
00:15:40,480 --> 00:15:43,680
आप यह कह रही हो कि मेरे ईश्वर के पास सारी शक्तियां

225
00:15:43,680 --> 00:15:47,760
तो हैं पर वो यह वाले कार्य नहीं करता जैसे कि संकल्प

226
00:15:47,760 --> 00:15:52,960
से गर्भधारण नहीं करवाएगा और वो जो है गर्भ से बाहर नहीं आएगा।

227
00:15:52,960 --> 00:15:58,960
यह शक्ति तो है करने की पर वो करेगा नहीं।

228
00:15:59,920 --> 00:16:04,080
क्या हुआ? क्या नहीं हुआ? आप जो बकवास

229
00:16:04,080 --> 00:16:08,160
कर रहे हैं यह बकवास वगैरह माता जी माता जी बकवास आप कर रही

230
00:16:08,160 --> 00:16:12,720
है आपके यहां आपके यहां केवल मूर्ख बनाया जा रहा है लोगों को हो गई निरुत्तर

231
00:16:12,720 --> 00:16:17,120
आप मूर्ख मैंने आपसे क्या पूछा अगर आप ये कह रही है

232
00:16:17,120 --> 00:16:22,320
मूर्ख बनाने के लिए आप मूर्ख बना रहे हैं लोगों को और आप मूर्ख हो चुकी

233
00:16:22,320 --> 00:16:26,320
आप मूर्ख हो चुकी है आपका ब्रेन वाश हो चुका है मैंने आपसे क्या पूछा सत्य

234
00:16:26,320 --> 00:16:30,640
आज नहीं तो कल शाम अरे भैया मैं आपको अभी सिद्ध हो रहा हूं आपका

235
00:16:30,640 --> 00:16:34,800
आपका आपके आपके मुंह में सिलाई क्यों हो रही है? मैं आपसे

236
00:16:34,800 --> 00:16:39,120
क्या पूछ रहा हूं? मैंने आपसे पूछा कि अगर वो सर्वशक्तिमान

237
00:16:39,120 --> 00:16:43,280
है उसके पास सारी शक्तियां है तो आपका कहने का मतलब यह है कि वो उसके पास शक्ति तो

238
00:16:43,280 --> 00:16:47,280
है पर वो करता नहीं है। अच्छा दूसरी बात अब ये

239
00:16:47,280 --> 00:16:51,840
इसको छोड़ दो। ये बताइए आपने एक बात कही वो पाप पाप से उत्पन्न नहीं होगा।

240
00:16:51,840 --> 00:16:55,840
आप ये बताइए आप बोल रहे हैं कि सर्वशक्तिमान है आपने क्या होगा मां

241
00:16:55,840 --> 00:16:58,880
के गर्भ से वो चाहे तो जन्म ले सकता है ये बताइए आपके

242
00:16:58,880 --> 00:17:03,120
चाहने से वो मां के गर्भ से जन्म लेंगे मेरे मैंने ये प्रश्न मेरा नहीं है कि वो

243
00:17:03,120 --> 00:17:07,280
लेगा कि नहीं लेगा मेरा मेरा प्रश्न है उसके पास शक्ति है कि नहीं लेने की शक्ति है

244
00:17:07,280 --> 00:17:11,440
तो ठीक है वो भी बोलते हैं यानी कि अभी मैंने यही तो मैं

245
00:17:11,440 --> 00:17:15,520
यही तो है कि मैं सर्वक्तिमान हूं ठीक है लेकिन ये नहीं है कि हम

246
00:17:15,520 --> 00:17:19,520
जो चाहे वो करें जो मैं पूछ रहा हूं आप एक बात क्लियर कर

247
00:17:19,520 --> 00:17:23,680
दीजिए कि गर्भ से जन्म लेने की शक्ति तो है पर वह लेता नहीं है। यह

248
00:17:23,680 --> 00:17:27,760
कर दीजिए क्लियर। तो गर्व से लेने की शक्ति है कि नहीं? हम

249
00:17:27,760 --> 00:17:31,760
उनसे पूछने ना जाए। इसका मतलब इसका मतलब आपको

250
00:17:31,760 --> 00:17:35,840
आपको नॉलेज नॉलेज नॉलेज वहां मिल नहीं रही है पूरी ब्रह्मा कुमारी

251
00:17:35,840 --> 00:17:39,920
में। अच्छा तो आपको मिल रही है तो आप ही बताइए। एक मिनट

252
00:17:39,920 --> 00:17:44,000
ये चैप्टर जो चल रहा है ना ये क्लोज हो जाएगा। इसमें एक बात और है। आपने कहा

253
00:17:44,000 --> 00:17:48,480
वो पाप से उत्पन्न नहीं होगा। यह बताइए जो पाप होता है

254
00:17:48,480 --> 00:17:52,640
यह एग्जिस्ट किस जगह पर करता है? कहां पर है

255
00:17:52,640 --> 00:17:56,880
पाप? एक समय ऐसा होता है जब आत्मा भी पापी नहीं है और ईश्वर

256
00:17:56,880 --> 00:18:00,880
तो पापी हो ही नहीं सकता। तो ये पाप रहता कहां पर है? पाप का जो विचार

257
00:18:00,880 --> 00:18:04,880
है ये कहां पर रहता है? पाप नहीं

258
00:18:04,880 --> 00:18:09,040
होता है। सब पुण्य होता है। मैं आपसे पूछ रहा हूं। पाप एक्सिस्ट कहां पर करता

259
00:18:09,040 --> 00:18:13,200
है? जैसे कि जो बुरे विचार है वह मेरा मन धारण किए हुए

260
00:18:13,200 --> 00:18:14,080
हैं। मगर मेरा मन

261
00:18:14,080 --> 00:18:18,720
भी एक समय पर ऐसा था जब उसमें पाप नहीं था। है कि नहीं?

262
00:18:18,720 --> 00:18:22,800
है कि नहीं? मेरा मन भी मेरा मन भी

263
00:18:22,800 --> 00:18:26,880
एक समय पे ऐसा था जब मेरे मन में पाप नहीं था। तो पाप

264
00:18:26,880 --> 00:18:32,480
जब मेरे मन में नहीं था, तो उस समय पाप कहां पर एक्जिस्ट कर रहा था।

265
00:18:32,480 --> 00:18:36,720
जब ना ईश्वर ईश्वर में पाप कभी नहीं है। मेरे में

266
00:18:36,720 --> 00:18:40,800
मेरे मन में आज पाप है। तो आज जब मैं मुक्त था

267
00:18:40,800 --> 00:18:44,960
जब आपके अनुसार देवता वाली स्टेज होती है जो तो पाप उस

268
00:18:44,960 --> 00:18:49,040
समय एकिस्ट कहां पे करता है? का कौन धारण धारक

269
00:18:49,040 --> 00:18:53,120
तत्व क्या है पाप का? जो जहां पर एक्सिस्ट होने के

270
00:18:53,120 --> 00:18:57,680
कारण समय आने पर वो पाप प्रवेश कर जाता है मन में।

271
00:18:57,680 --> 00:19:02,000
समझ रहे हैं मेरा प्रश्न? हां हां समझ रहे हैं। हां। तो यह पाप एक्सिस्ट

272
00:19:02,000 --> 00:19:06,080
कहां पर करता है? जब जीव पाप से मुक्त हो सकता है और ईश्वर तो

273
00:19:06,080 --> 00:19:10,160
पाप रहित है। तो तीसरा तत्व कौन सा है जहां पर पाप उस

274
00:19:10,160 --> 00:19:16,160
समय रहता है जब जीव पाप को धारण नहीं कर रहा है।

275
00:19:16,720 --> 00:19:21,200
एक तीसरा तत्व मानना पड़ेगा ना पाप। पाप के लिए क्योंकि जो

276
00:19:21,200 --> 00:19:25,280
प्रकृति है वह तो जड़ है। वो तो धारण नहीं कर सकती ज्ञान को

277
00:19:25,280 --> 00:19:31,280
बुरे विचारों को। तो ये बुरा विचार एक्सिस्ट कहां पे करेगा?

278
00:19:32,480 --> 00:19:36,640
अब प्रकृति जो है कि इस समय तो प्रकृति

279
00:19:36,640 --> 00:19:41,040
भी जो है अशुद्ध है समो प्रधान प्रकृति भी है। प्रकृति को

280
00:19:41,040 --> 00:19:45,200
नहीं प्रकृति का खुद का दिमाग है क्या? प्रकृति का खुद का दिमाग

281
00:19:45,200 --> 00:19:49,360
है क्या? नहीं खुद का दिमाग नहीं है। लेकिन

282
00:19:49,360 --> 00:19:53,520
सही बताइए प्रकृति को किसने बनाया है? ईश्वर ने?

283
00:19:53,520 --> 00:19:58,000
ईश्वर ने प्रकृति को अशुद्ध किसने किया है?

284
00:19:58,000 --> 00:20:02,480
प्रकृति को अशुद्ध किसने किया है? तमो प्रदान किसने किया है? बताइए।

285
00:20:02,480 --> 00:20:06,480
माता जी बात अभी ये चल रही है कि यह जो क्या कहते

286
00:20:06,480 --> 00:20:10,480
हैं? बुराई है यह एकिस्ट कहां पर कर रही है? जब आप आपने ईश्वर

287
00:20:10,480 --> 00:20:14,480
तो हमारा पाप रहित है। और मनुष्य को भी पाप से मुक्त होने

288
00:20:14,480 --> 00:20:18,640
की यात्रा है। इसका मतलब कि बुराई के रहने का और

289
00:20:18,640 --> 00:20:22,720
कोई अधिष्ठान हमें मानना पड़ेगा। तो बुराई एक्सिस्ट कहां पे कर रही

290
00:20:22,720 --> 00:20:26,800
है? जहां से बुराई बुराई एडजस्ट करती है

291
00:20:26,800 --> 00:20:30,880
जब जो है कहां पे सुनिए शुरुआत होता

292
00:20:30,880 --> 00:20:31,840
है चेतन तत्व

293
00:20:31,840 --> 00:20:36,000
मानना पड़ेगा ना जहां बुराई शुरुआत होता है जब जो है कलयुग

294
00:20:36,000 --> 00:20:40,080
और सतयुग और त्रेता जब खत्म होता है जब कलयुग का

295
00:20:40,080 --> 00:20:44,080
द्वापर जब समय शुरू होता है तब तब जो [गला साफ़ करने की आवाज़] है कि पाप का

296
00:20:44,080 --> 00:20:48,080
समय शुरू होता है तब सबके अंदर पाप प्रवेश करता है अरे तो

297
00:20:48,080 --> 00:20:52,240
मैं वही कह रहा हूं ना पाप मैं वही कह रहा हूं ना पाप प्रवेश करता है तो

298
00:20:52,240 --> 00:20:56,640
प्रवेश करने से पहले पाप कहां पे था? पाप कहां था?

299
00:20:56,640 --> 00:21:01,040
हां पाप था जो है आपके अंदर बुराई

300
00:21:01,040 --> 00:21:05,120
आ रही है। मैं पूछ रहा हूं माता जी आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रही

301
00:21:05,120 --> 00:21:09,360
संभवत मैं कह रहा हूं यदि बताइए ना पाप

302
00:21:09,360 --> 00:21:13,680
कहां था? आप ही बताइए। मैं बता रहा हूं यह दुनिया जो है

303
00:21:13,680 --> 00:21:18,000
यह प्रपंच मात्र है। इसमें कुछ भी पाप पुण्य है ही नहीं।

304
00:21:18,000 --> 00:21:22,160
यह पाप पुण्य केवल मनुष्य के लिए है। ईश्वर की दृष्टि में कुछ

305
00:21:22,160 --> 00:21:26,160
भी अच्छा या बुरा है ही नहीं। सब समत्व है। एक है सब कुछ

306
00:21:26,160 --> 00:21:30,720
कुछ नहीं। सब माया है। इसलिए

307
00:21:30,720 --> 00:21:34,800
वो पाप इसलिए इसलिए इसलिए शास्त्रों में उनको

308
00:21:34,800 --> 00:21:38,960
पाप पुण्य से गुणों से परे कहा गया है। ईश्वर को

309
00:21:38,960 --> 00:21:43,200
इसीलिए वो मुक्त हैं। ईश्वर इसीलिए मुक्त कहा जाता है। जैसे

310
00:21:43,200 --> 00:21:46,960
कि एक पेंटर अपनी जब पेंटिंग बनाता है। भले ही वह

311
00:21:46,960 --> 00:21:50,960
स्त्री की फोटो बना रहा हो तो वह भले ही आंखों में कलर भरे आंखों

312
00:21:50,960 --> 00:21:55,040
को छुए या फिर वो स्त्री के उन अंगों को छुए जिन

313
00:21:55,040 --> 00:21:59,200
अंगों को किसी मनुष्य के द्वारा छुए जाने पर आपत्ति हो सकती

314
00:21:59,200 --> 00:22:03,360
है। मगर वहीं पर उस पेंटिंग को बनाते समय वो जो पेंटर

315
00:22:03,360 --> 00:22:07,680
होता है उसको उन अंगों को छूने पर कोई आपत्ति नहीं होती। इसी प्रकार से इसी

316
00:22:07,680 --> 00:22:11,920
प्रकार से जो ईश्वर है उसके लिए कोई पाप पुण्य का भेद नहीं है। इसीलिए

317
00:22:11,920 --> 00:22:15,920
उन्होंने कहा समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे करता मान क्योंकि

318
00:22:15,920 --> 00:22:20,000
किसी भी कर्म के उसमें फल में मेरी आसक्ति नहीं है क्योंकि मैं जानता हूं

319
00:22:20,000 --> 00:22:24,320
कि ये सब माया है। प्रपंच मात्र है। अगर

320
00:22:24,320 --> 00:22:28,400
हम इसको रियल मान लेंगे पाप और पुण्य को तो हमको इसका एग्जिस्टेंस मानना

321
00:22:28,400 --> 00:22:32,480
पड़ेगा। एक और तत्व मानना पड़ेगा। जैसे ही एक और तत्व मान लेंगे तो एक

322
00:22:32,480 --> 00:22:36,720
दूसरा ईश्वर खड़ा हो जाएगा। जैसे कि जैसे

323
00:22:36,720 --> 00:22:40,720
कि आपको और सरलता से समझाता हूं। जैसे कि मान लीजिए किसी ने

324
00:22:40,720 --> 00:22:44,800
बुरा कर्म किया है। ठीक किसी ने बुरा कर्म किया

325
00:22:44,800 --> 00:22:49,200
है। उसको उसके बुरे कर्म की सजा कौन देगा?

326
00:22:49,200 --> 00:22:53,200
कौन देगा? उसका कर्म देगा। हां। यही यही यही यही फंसता है

327
00:22:53,200 --> 00:22:57,280
ना आदमी। देखिए अब ईश्वर तो दे नहीं रहा है। नहीं दे रहा है ना?

328
00:22:57,280 --> 00:23:01,440
ठीक। अब मान लीजिए किसी ने किसी को दर्द दिया है, गला घोट

329
00:23:01,440 --> 00:23:02,400
के मारा है।

330
00:23:02,400 --> 00:23:06,560
उसको उसकी सजा मिलनी है। तो यह फैसला जड़

331
00:23:06,560 --> 00:23:10,640
तो कर नहीं सकती। प्रकृति तो कर नहीं सकती। वो तो जड़ है। कौन

332
00:23:10,640 --> 00:23:13,440
कर रहा है ये फैसला?

333
00:23:13,440 --> 00:23:17,520
कि इसको कब, किस समय, कौन सा दंड किस प्रकार से देना है वो जो उसने

334
00:23:17,520 --> 00:23:21,840
गला घोटा था। सोचा है कभी आपने? दूसरा तत्व मानना

335
00:23:21,840 --> 00:23:26,000
पड़ेगा चेतन तत्व। और जैसे ही मान लोगे मुक्त मानना पड़ेगा। सर्वशक्तिमान मानना

336
00:23:26,000 --> 00:23:31,920
पड़ जाएगा। दो ईश्वर खड़े कर दोगे आप।

337
00:23:31,920 --> 00:23:36,080
सोच के देखिए। थोड़ा विचार करिए। बुद्धिमान है आप। इंटेलेक्चुअल पर्सन है इसलिए

338
00:23:36,080 --> 00:23:39,840
इतनी देर तक बात की है। ठीक है?

339
00:23:39,840 --> 00:23:43,840
कर्मों का फल देने वाली कौन सी शक्ति है? ईश्वर के

340
00:23:43,840 --> 00:23:48,080
अलावा। ईश्वर के अलावा अपने कर्म का फल अपने ही अरे माता

341
00:23:48,080 --> 00:23:52,480
जी कर्म का फल, कर्म का फल मैं खुद तो स्वयं को दे नहीं रहा हूं।

342
00:23:52,480 --> 00:23:56,560
यह कर्म का फल देने के लिए कोई ना कोई चेतन सत्ता माननी पड़ेगी ना

343
00:23:56,560 --> 00:24:00,800
जो निर्णय कर रही है कि इसने अभी उसका गला दबाया है। अब इसके ऊपर ये पंखा

344
00:24:00,800 --> 00:24:04,800
गिरा दो। हां। तो ये पंखा गिरा दो।

345
00:24:04,800 --> 00:24:08,800
इसके ऊपर ये निर्णय कौन ले रहा है? किसने लिया निर्णय? ईश्वर

346
00:24:08,800 --> 00:24:12,960
ले रहा है। यानी कि ईश्वर हमें बुरे बुरा बुरे चीजें करता

347
00:24:12,960 --> 00:24:17,120
हुआ दिखाई दे सकता है। मतलब अगर हमको यह

348
00:24:17,120 --> 00:24:17,620
नहीं मालूम

349
00:24:17,600 --> 00:24:21,680
है कि इस व्यक्ति ने किसी का गला घोटा है। इसलिए इसके ऊपर पंखा

350
00:24:21,680 --> 00:24:25,760
गिरा। इसलिए इसकी जो है बाढ़ में मृत्यु हो गई

351
00:24:25,760 --> 00:24:29,760
तो हमें ऐसा दिख सकता है कि ईश्वर भी बुरे कर्म कर रहा है। ईश्वर के बुरे से

352
00:24:29,760 --> 00:24:34,000
लिप्त होने की प्रतीति हो सकती है। ईश्वर बुरा

353
00:24:34,000 --> 00:24:38,160
कर्म कर रहा है। हां भाई अभी-अभी एक शिशु ने जन्म

354
00:24:38,160 --> 00:24:42,560
लिया हमारी नजरों में। ठीक? ठीक है। उस शिशु

355
00:24:42,560 --> 00:24:46,560
ने पिछले जन्म में किसी की ऐसी निर्ममता से हत्या की थी कि उसका

356
00:24:46,560 --> 00:24:50,560
ये कर्म का फल था कि उसको इस जन्म में जो है बहुत

357
00:24:50,560 --> 00:24:54,640
बाढ़ के द्वारा या भूकंप के द्वारा मरना है।

358
00:24:54,640 --> 00:24:58,640
ठीक। तो अब ईश्वर व्यवस्था करेगा ना भूकंप के द्वारा उसके

359
00:24:58,640 --> 00:25:02,720
मरने की। और वो मर गया। अब मर गया तो जनता को

360
00:25:02,720 --> 00:25:07,200
क्या लगेगा भाई छोटा सा बच्चा कैसे मर गया? तो भगवान भगवान जो है पाप किया।

361
00:25:07,200 --> 00:25:11,360
तो आप बताओ ना आप आप जो सुनिए

362
00:25:11,360 --> 00:25:15,600
मैंने आपको क्या इसका मतलब यह है कि भगवान भी हमको

363
00:25:15,600 --> 00:25:19,840
पाप से लिप्त होता हुआ दिख सकता है वास्तविकता में भगवान के लिए पाप और पुण्य

364
00:25:19,840 --> 00:25:22,240
है ही नहीं

365
00:25:22,240 --> 00:25:27,200
भगवान पाप और पुण्य से परे है भगवान मुक्त है

366
00:25:27,200 --> 00:25:31,280
अगर पाप और पुण्य सत्य है अगर आप आपके अनुसार मान ले पाप और

367
00:25:31,280 --> 00:25:32,880
पुण्य सत्य है तो

368
00:25:32,880 --> 00:25:36,880
मान लीजिए कि कोई व्यक्ति अह अभी अभी मुक्त

369
00:25:36,880 --> 00:25:41,280
हो गया आपके यहां से। यहां से मुक्त हो गया। भगवान के बिल्कुल पास में बैठा हुआ है।

370
00:25:41,280 --> 00:25:45,520
हां। और यहां पर उसके बीवी बच्चे वगैरह सब है नाते

371
00:25:45,520 --> 00:25:50,080
रिश्तेदार। अब वहां से वो अपने बीवी बच्चों को दुखी देखेगा

372
00:25:50,080 --> 00:25:54,320
तो क्या करेगा? खुश होगा या दुखी होगा या उसको

373
00:25:54,320 --> 00:25:58,080
कुछ असर नहीं होगा?

374
00:25:58,080 --> 00:26:02,320
बताइए। हम तो जानते हैं कि मरने के बाद हर आत्मा खुद

375
00:26:02,320 --> 00:26:06,400
जानती है कि यहां मेरा कोई नहीं था। इसका मतलब वो समझ

376
00:26:06,400 --> 00:26:10,480
गए। इसका मतलब इसका मतलब यहां की चीजें झूठी

377
00:26:10,480 --> 00:26:14,480
है। इसका मतलब यहां इसका मतलब यहां की चीजें झूठी है। माता

378
00:26:14,480 --> 00:26:20,480
जी इसका मतलब यहां की चीजें झूठी है ना।

379
00:26:20,720 --> 00:26:25,120
इसका मतलब यहां की चीजें झूठी है ना। मैं कह रहा हूं इसका

380
00:26:25,120 --> 00:26:29,280
बोलिए। इसका मतलब यहां की [गला साफ़ करने की आवाज़] चीजें झूठी है ना? यहां की

381
00:26:29,280 --> 00:26:33,360
चीजें झूठी हैं। हां

382
00:26:33,360 --> 00:26:37,600
भाई आपका जो आपका जो रिश्ते नाते आपका कोई नहीं होता है। वास्तविकता

383
00:26:37,600 --> 00:26:41,760
में आपका कोई नहीं है ना? तो वास्तविकता में तो किसी का कोई नहीं है। सब

384
00:26:41,760 --> 00:26:45,760
लोग अपना करने आते हैं। इसका मतलब वास्तविकता में ना पाप है ना

385
00:26:45,760 --> 00:26:49,840
पुण्य है। सब लोग अपना अपना कर्म करने आ रहे हैं। अच्छा हो

386
00:26:49,840 --> 00:26:54,160
या बुरा हो अगर हम बुरा कर्म कर आप कई जगह पर माता जी आप

387
00:26:54,160 --> 00:26:58,160
सुनिए आप सुनिए। आपसे काफी लंबी चर्चा हुई है। आप इंटेलेक्चुअल पर्सन है।

388
00:26:58,160 --> 00:27:02,160
आप खुद चिंतन मनन करिए। कर्म का फल देने वाला आपने बोल दिया

389
00:27:02,160 --> 00:27:06,480
ना ईश्वर ईश्वर देता है। ब्रह्मा कुमारी नहीं मानता है। ब्रह्मा कुमारी

390
00:27:06,480 --> 00:27:10,880
की दीदियों से बात कर चुका हूं। राजौरी गार्डन से लेकर के और पटना बिहार तक

391
00:27:10,880 --> 00:27:15,040
ब्रह्मा कुमारी यह नहीं मानता है कि कर्म का फल ईश्वर देता है। पहली बात

392
00:27:15,040 --> 00:27:19,360
सुनिए सुनिए कर्म का फल अपने आप मिल जाता है। सुनिए

393
00:27:19,360 --> 00:27:23,760
अच्छा आप बुरा कर्म करके इस जन्म में फिर जाएंगे

394
00:27:23,760 --> 00:27:27,920
अगला जन्म में तो इसके अनुसार ही दूसरा जन्म मिलेगा आपको।

395
00:27:27,920 --> 00:27:31,920
मैं ये कह रहा हूं माता जी दुखी जन्म दुखी जिंदगी

396
00:27:31,920 --> 00:27:36,000
जीना पड़ेगा। मैं कह रहा हूं दुखी मैं वो

397
00:27:36,000 --> 00:27:40,000
कर्मों का हिसाब किताब रख कौन रहा है उसमें बुद्धि चाहिए ना प्रकृति

398
00:27:40,000 --> 00:27:44,160
तो रख नहीं पाएगी मैं खुद को सजा दूंगा नहीं और ब्रह्मा कुंवारी

399
00:27:44,160 --> 00:27:49,200
के अनुसार ईश्वर दे नहीं रहा है कर्मों का फल नहीं बताइए जो हम कर्म करेंगे

400
00:27:49,200 --> 00:27:53,200
हम मतलब सुनिए जो हम खेती करेंगे वही ना काटेंगे कि कोई दूसरा

401
00:27:53,200 --> 00:27:57,200
काटेगा अरे माता जी वो इसलिए इसलिए हम वही

402
00:27:57,200 --> 00:28:01,200
इसलिए हम वो खेती काटेंगे क्योंकि ईश्वर देख रहा है ईश्वर हमें दंड

403
00:28:01,200 --> 00:28:05,280
देगा मगर आपके के यहां पर ईश्वर नहीं देगा दंड। अपने आप मिलेगा।

404
00:28:05,280 --> 00:28:09,920
अपने आप कैसे मिलेगा? वो मैं पूछ रहा हूं। अपने

405
00:28:09,920 --> 00:28:14,080
आप हां ईश्वर दंड नहीं देता ना आपके यहां ब्रह्मा कुमारी की दीदियां

406
00:28:14,080 --> 00:28:18,880
बोल रही हैं। नहीं आप इस शरीर से निकलेंगे। ठीक है? आप

407
00:28:18,880 --> 00:28:22,880
बताइए अपने को मानते हैं कि आप इस शरीर से निकलने की बातें

408
00:28:22,880 --> 00:28:27,120
आप नई-नई चीजें खुलती चली जा रही है। मैं क्या पूछ रहा हूं?

409
00:28:27,120 --> 00:28:31,360
हां यह मेरी दंड व्यवस्था कौन करेगा कि इसके ऊपर दंड व्यवस्था

410
00:28:31,360 --> 00:28:35,600
आप खुद कर चुके हैं ना हम कर्म करके अपना दंड व्यवस्था कर चुके नहीं कर्म

411
00:28:35,600 --> 00:28:39,760
करके दंड मिलना व्यवस्थित हुआ है मगर किस रूप में किस काल में किस देश

412
00:28:39,760 --> 00:28:44,160
में दंड मिलेगा यह व्यवस्थित नहीं किया मैंने जैसे मैंने कहा

413
00:28:44,160 --> 00:28:48,160
मैंने किसी का गला घोटा जिसके कारण मेरे ऊपर पंखा गिरना है मुझे दर्द

414
00:28:48,160 --> 00:28:52,240
मिलना है अब मेरे ऊपर किस समय कहां पर पंखा

415
00:28:52,240 --> 00:28:56,800
गिरेगा यह कैसे कौन तय करेगा

416
00:28:56,800 --> 00:29:00,800
ये कैसे कौन तय करेगा तो आप जब कर्म कर चुके

417
00:29:00,800 --> 00:29:04,880
हैं तो उसके अनुसार तो आज नहीं तो कल उसका आपको मिलेगा अभी तो हम

418
00:29:04,880 --> 00:29:09,120
तीन तारीख सेट करने वाला को नहीं जानते हैं हम यही जानते हैं कि नहीं जानते

419
00:29:09,120 --> 00:29:13,280
ना तो ब्रह्मा कुमारी से सुनिए परमात्मा है

420
00:29:13,280 --> 00:29:17,440
सुनिए एक परमात्मा है दूसरा उन्हीं का रूप धर्मराज है ठीक है वही

421
00:29:17,440 --> 00:29:21,680
जो है कि सबकी सजा दिलाते हैं हम तो यही जानते हैं लेकिन है परमात्मा

422
00:29:21,680 --> 00:29:25,760
जो ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो ईश्वर है वो दंड नहीं देता

423
00:29:25,760 --> 00:29:29,760
है। ठीक है? और अभी आपने आपने

424
00:29:29,760 --> 00:29:34,240
जब के अनुसार फल मिलता है ना तो फल भैया वो

425
00:29:34,240 --> 00:29:38,320
लेकिन जो माता जी सुनिए माता जी सुनिए मैं दंड अपने आप

426
00:29:38,320 --> 00:29:42,480
को तो दूंगा नहीं। ठीक है चेतन तत्व कितने हैं? दो

427
00:29:42,480 --> 00:29:46,560
एक है ईश्वर और एक है एक है जीव। जीव स्वयं को जीव स्वयं

428
00:29:46,560 --> 00:29:50,960
को तो दंड देगा नहीं। और ईश्वर जो है वह दंड देता नहीं है।

429
00:29:50,960 --> 00:29:55,200
तो यह जो जो व्यवस्था है कि इसको ऐसे यहां इतने बजे

430
00:29:55,200 --> 00:29:59,280
इतने समय उस जगह पर यह चीज मिलेगी दंड स्वरूप यह

431
00:29:59,280 --> 00:30:05,280
बुद्धि का काम है कि बिना बुद्धि का काम है चेतन का काम है कि जड़ का काम है यह बताइए।

432
00:30:06,240 --> 00:30:10,480
अब बुद्धि तो अपना कर चुकी है ना। उसमें तो आ गया है। अरे आप माता

433
00:30:10,480 --> 00:30:14,560
जी अब अपना आप सचाई से मुंह फेर रही हैं। आप सच्चाई से मुंह फेर रही हैं। आप बार-बार

434
00:30:14,560 --> 00:30:18,720
वही वो बात बोल रही हैं। आप समझ रही हैं मैं क्या पूछ रहा हूं। मगर आपको मानना नहीं है बस अब यह

435
00:30:18,720 --> 00:30:22,880
बात है। मैं मैं आप यह समझ रहे आप सुनिए अगर

436
00:30:22,880 --> 00:30:26,880
आप ईश्वर को पाप और पुण्य से तोलेंगे ठीक है?

437
00:30:26,880 --> 00:30:31,760
अगर आप ईश्वर को पाप और पुण्य से तोलेंगे उसको परे रखकर के नहीं देखेंगे

438
00:30:31,760 --> 00:30:35,840
तो उसके द्वारा कर्म फल व्यवस्था तो हो नहीं पाएगी। आपको कर्मों का

439
00:30:35,840 --> 00:30:39,840
दंड किसी और से दिलवाना पड़ेगा। और जब आप कर्मों का दंड किसी और

440
00:30:39,840 --> 00:30:44,640
से दिलवाओगे तो उस सत्ता को भी सर्वव्यापी सर्वशक्तिमान

441
00:30:44,640 --> 00:30:48,720
सर्व सुन सुन लीजिए मैं मैं हो गया अब आप आप जो है अपने हस्बैंड

442
00:30:48,720 --> 00:30:52,880
से बात करिए मैं रिकॉर्डिंग भेजूंगा फल फल कौन देता है ये बताइए धर्मराज

443
00:30:52,880 --> 00:30:56,960
किस किस लिए है धर्मराज है कि नहीं है बताइए ना अरे अरे

444
00:30:56,960 --> 00:31:01,360
भैया सीधी बात है धर्मराज के ऊपर कंट्रोल किसका है

445
00:31:01,360 --> 00:31:05,840
किसका है कंट्रोल तो धर्मराज तो परमात्मा ही तो धर्मराज

446
00:31:05,840 --> 00:31:09,840
के रूप में है ये आपके यहां ब्रह्मा कुमारी में माना है परमात्मा

447
00:31:09,840 --> 00:31:14,000
धर्मराज के रूप में माना है अरे ब्रह्मा कुमारी से ही तो हमको

448
00:31:14,000 --> 00:31:18,320
पता है ना कि अरे भैया आपकी ब्रह्मा कुमारी मना कर रही है

449
00:31:18,320 --> 00:31:21,360
मना कर रही है वो आप ब्रह्मा कुमारी मना कर रही

450
00:31:21,360 --> 00:31:25,520
है कि आप अपने मुंह से कह रहे हैं कोई देखने जा रहा है राजरी गार्डन का वीडियो है

451
00:31:25,520 --> 00:31:29,760
उसमें मना किया है नहीं नहीं ईश्वर दंड नहीं देता ईश्वर केवल ज्ञान देता है वीडियो

452
00:31:29,760 --> 00:31:33,760
जितना चढ़ाते हैं बनाते हैं कि अच्छा अच्छा सुनिए

453
00:31:33,760 --> 00:31:37,840
इसको मैं क्लियर कर लेता हूं ठीक है इसका मतलब इसका मतलब इसका

454
00:31:37,840 --> 00:31:42,720
मतलब धर्मराज के रूप में वह आदमी आप लोग से मिलाजुला

455
00:31:42,720 --> 00:31:46,720
अरे भैया आपका सेंटर है राजरी गार्डन हेड ऑफिस है दिल्ली

456
00:31:46,720 --> 00:31:49,440
का

457
00:31:49,440 --> 00:31:53,600
अच्छा सुनिए सुनिए आपने जो माना उसके अनुसार बात कर लेते हैं। इतना हम

458
00:31:53,600 --> 00:31:57,600
रमा कुमारी जी के खिलाफ जो आपने आपने जो माना

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00:31:57,600 --> 00:32:01,680
है उसके अनुसार बात सुनिए आप आपने जो माना है आपने जो मान

460
00:32:01,680 --> 00:32:06,000
लिया है उसके अनुसार बात कर रहा हूं आपने माना

461
00:32:06,000 --> 00:32:10,160
आपने माना है सुनिए सुनिए आपने जो मान लिया है मैं

462
00:32:10,160 --> 00:32:14,160
कह रहा हूं आपने जो मान लिया है उस पर बात कर रहा हूं मैं मिलेगा आपको

463
00:32:14,160 --> 00:32:18,400
वो सजा वो आपके वो जो तटपुंजिया ये जो लोग है ना ये

464
00:32:18,400 --> 00:32:22,640
लेखराज एकराज ये कभी नहीं दे पाएंगे हम जैसों को हम मनुवादी हैं शंकराचार

465
00:32:22,640 --> 00:32:26,640
चार के शिष्य हैं। ये लेखराज ये लोग कुछ नहीं कर पाएंगे। पता है

466
00:32:26,640 --> 00:32:30,880
कि ब्रह्मा कुमारी के खिलाफ शंकराचार्य हैं। हमें पता है। अरे हमें पता

467
00:32:30,880 --> 00:32:35,040
है सनातन धर्म के खिलाफ ब्रह्मा कुमारी है। आपको नहीं पता है।

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00:32:35,040 --> 00:32:36,560
ठीक है। सनातन धर्म के

469
00:32:36,560 --> 00:32:40,560
खिलाफ है। किस खिला धर्म कौन बनाया है? बताइए ना। आप ये

470
00:32:40,560 --> 00:32:44,800
बताओ। आप ये बताओ आदि सनातन क्या है? आदि

471
00:32:44,800 --> 00:32:48,880
सनातन ठीक है। आप बताइए। ठीक है। क्या होता है? आप अपनी चीजों को ठीक है। कह देती

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00:32:48,880 --> 00:32:53,040
हैं। आप ही बताइए सब धर्म का स्थापक। आखिर धर्म स्थापक

473
00:32:53,040 --> 00:32:57,360
किसने किया है? कौन धर्म स्थापक किया है? जो हमारा धर्म है सुन लीजिए

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00:32:57,360 --> 00:33:01,680
सुन लीजिए जो हमारा धर्म है वो अनादि है वो कभी

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00:33:01,680 --> 00:33:05,920
भी शुरू नहीं हुआ वो तब से है जब से ईश्वर है अगर मैं आपसे पूछूं

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00:33:05,920 --> 00:33:10,000
ईश्वर को किसने बनाया आप बता पाओगी? तो ईश्वर को किसने बनाया

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00:33:10,000 --> 00:33:14,080
आप ही बताइए? आप ही ईश्वर को किसी ने नहीं बनाया अनादि है तो जैसे

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00:33:14,080 --> 00:33:18,160
ईश्वर है वैसे ही धर्म है। किसको बना रहा है? ईश्वर को किसने बनाया आप बताइए? किसी ने

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00:33:18,160 --> 00:33:22,240
नहीं बनाया ना। इसीलिए तो वो ईश्वर है तो इसीलिए तो ईश्वर है तो

480
00:33:22,240 --> 00:33:26,720
आदि सनातन धर्म जो कहते हैं आदि सनातन अपने आप में एक बहुत बड़ी बेवकूफी

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00:33:26,720 --> 00:33:30,880
है सनातन सुनिए सनातन का अर्थ क्या है माता जी

482
00:33:30,880 --> 00:33:34,880
हां सनातन का अर्थ क्या है का हो गया हो गया बैंड बज गया

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00:33:34,880 --> 00:33:38,880
निरुत्तर हो गई आप अब बैंड नहीं बज गया चलिए अब आप अपने पति को पति के

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00:33:38,880 --> 00:33:44,880
साथ बैठ के रिकॉर्डिंग सुनिएगा जय श्री राम

485
00:33:54,450 --> 00:33:58,450
[संगीत]
