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00:00:00:03 कह रहा कुछ चीज है जैसे श सं में बात करता हू बाबा फरीद श उनकी बात तो फिर आपक शुरू कर सकते हो बड़ी गहरी बात अत कि कौन से शास्त्र सही है कौन से गलत है पैरामीटर मैंने आपको बताया नाब पौराण कथाओं को पढ़ रहे हो पुराण को पढ़ रहे हो तो उनका स्थान यदि नीचे है तो उन स्मृतियों को पुराणों को इस स्मृति के प्रकाश में पढ़ना है टव नहीं प्रशा फाउंडेशन क्या ये हम ये कन्फर्म भी नहीं कर सकते कि कोई समझ रहे आचार्य जी तो इनसे साथ साथ करना आई थंक करिए ब मैं डकास्ट सुना नहीं गुरु परंपरा या परंपरा से बकुल नहीं अच्छा हम वो लोग नहीं है जो हम इस बात का सही उत्तर दे पाएंगे मुझे ये लग रहा है ठीक है ठीक हैको ड कर दीजिए तो सभी को जय श्री राम जैसा कि आप लोग जानते हैं हम जो विभिन्न जो मत है स्पिरिचुअलिटी को लेकर के आध्यात्मिकता को लेकर के धर्म को लेकर तो उनके साथ बातचीत करते हैं और तथ्यों को समाज के सामने प्रस्तुत करते हैं तो आज हम आए हैं लखनऊ में आचार्य प्रशांत जी की यहां पर स्टॉल लगी हुई है बुक्स है यहां पर

00:01:15:15 और एक संस्था है जो स्वतंत्र रूप से आचार्य प्रशांत जी के अभियान या जो शिक्षाएं हैं उनका प्रचार प्रसार करने के लिए प्रतिबद्ध है मैं चाहता हूं सबसे पहले आप थोड़ा सा परिचय अपना स्वयं दे दे नमस्कार सभी को मेरा नाम अतुल है और मैं आचार्य जी की शिक्षाओं से पिछले दो वर्षों से जुड़ा हूं सफर य से शुरू हुआ था थोड़ा सा घूम जाइए सफर य से शुरू हुआ था उसके बाद पुस्तकों पर आए पुस्तको के बाद जब ज्ञात हुआ कि हमारे जो धर्म ग्रंथ है गीता उपनिषद अ पर वो सत्र भी करते हैं सत्रों में प्रत्यक श्लोक की भ समझ देते हैं कि अमुक श्लोक या अमुक ग्रंथ आपके जीवन में कैसे महत्त्वपूर्ण है और कैसे आपके जीवन को बेहतर कर सकता है तो फिर मैं शत्रु की तरफ गया और मुझे शत्र में भी एक वर्ष हो रहा है और लखनऊ के जितने भी लोग हैं जो आचार्य प्रशांत जी की शिक्षाओं से जुड़े हैं उनका मैंने समूह बनाया हमने अपना एक एनजीओ क्रिएट किया भूत फाउंडेशन और उस एनजीओ के बैनर तले हम उनकी पुस्तकों को लोगों तक पहुंचाते हैं बहुत अच्छी बात है क्योंकि देखिए सबसे बड़ी बात है किसी भी माध्यम

00:02:30:16 से हो अगर सनातन का प्रचार हो रहा है तो कहीं ना कहीं हमारे लिए वो एक प्रशंसनीय बात होती है हमारे सनातन का प्रचार होना चाहिए तो सबसे पहले मैं थोड़ा सा ये जानना चाहूंगा कि आचार्य प्रशांत जी के अनुसार धर्म की क्या व्याख्या है धर्म की व्याख्या यह है कि धर्म आपके जीवन का आपके जीवन जो आपका जीवन है उसका सबसे केंद्रीय बात धर्म हो सकती है अच्छा धर्म सिर्फ धर्म ग्रंथों में लिखे मंत्र या जो भी धर्म ग्रंथों में या धर्म ग्रंथ में लिखा गया है बात वोह नहीं है वो इसलिए लिखा गया है कुछ लोगों ने हमें इसलिए व दिया है ताकि उसकी व्यवहारिक समझ हो उसका व्यवहारिक एप्लीकेशन हो हम जीवन जीते हैं उसम उसकी बड़ी महत्ता हो एकदम केंद्र में हो धर क्या क्या उपयोगिता हो सकती है मतलब वही मैं पूछ रहा हूं धर्म यह तो हमें धर्म के साथ कैसा बिहेव करना है वो है धर्म की उपयोगिता क्या हो सकती है क्यों आवश्यक है हमारे लिए धर्म इस बारे में थोड़ा उपयोगिता ऐसे हो सकती है कि हम जन्म लेते हैं प्राकृतिक रूप से प्रकृति से जिस मनुष्य का जन्म होता है वो अपने आप में वृत्तियों का एक पिंड होता है उसके अंदर आप जिन सब बातों करते

00:03:45:20 हैं मोह मास लोभ सब पहले से उसके अंदर होते हैं प्रकृति नेही उसको दिए हैं यदि वो जिस रूप में उसने जन्म लिया है अगर उसी रूप को आगे बढ़ाता चले और ऐसे जीवन जीता जाए बहुत बहुत दुख में उसका जीवन बीतेगा कष्ट होंगे अशांति होगी बेचैन रहेगा तो दुख व कष्ट व अशांति व बेचैनी जो हम सबने जीवन में लगातार महसूस करते हैं उनका अनुभव में होता है उस बेचैनी उस कष्ट को उस दुख को दूर करने का अगर कुछ नाम है तो धर्म अच्छा और धर्म के फिर केंद्र में धर्म के ग्रंथ है निषद है गीता यानी कि एक तरीके से जो जीव की वास्तविक चा है वो है सच्चितानंद के रूप में शेष हो जाना तो उस स्टेट को प्राप्त करने के लिए जो प्रोसेस है जो विधि विधान है उसका नाम धर्म है और वह जो धर्म है वह जो नियमावली है वें प्राप्त होती है हमारे सनातन ग्रंथों से या उसके विपरीत और भी जो जैसे इस्लाम है इससे भी होता है हा विजडम लिटरेचर आप बोल सकते हैं बहुत सारा पाश्चात्य दर्शन भी है फिर ईस्टन फिलॉसफी में है फिर बुद्धम जैनिम मतलब तमाम चीजें जो इसमें

00:05:01:00 तो कई जगह पर ऐसी बात की गई है कि जैसे इस्लाम है वो बिल्कुल अगेंस्ट है सनातन के नहीं देखिए कुछ जब हम धर्म ग्रंथ की बात करते हैं तो उसमें कुछ चीजें टाइमलेस होती है कुछ चीज टाइम डिपेंडेंट होती है जिस काल में लिखी गई वो उस काल के लिए थी समय वहां से बहुत आगे आ चुका है हम बहुत आगे आ चुके हैं तो व बात जो उस काल के लिखी गई थी आज महत्वपूर्ण नहीं है वो टाइम डिपेंडेंट है उस समय के लिए थी आज नहीं है कुछ चीजें टाइमलेस होती है वो आज भी है कल भी थी और कल भी रहेंगे जबक जब तक ये मनुष्य है उसकी बेचैनी है उसका दुख है तो उसके दुख के निदान के लिए धर्म रहेगा धर्म की बात रहेगी य आपने बात बिल्कुल सही कही है हमारे यहां पर धर्म की व्याख्या वही है क्योंकि हमारा सनातन इसलिए कहा गया है कि जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले प्रभावित ना हो वो धर्म है और जो बदल रहा है प्रभावित हो रहा है कि आज नहीं यूज करना है परसों ही वो धर्म नहीं है धर्म बहुत बात है मगर जैसे हम इस्लाम को भी अगर इसम ले ले तो इस्लाम तो यह कहता है कि जो भी है व यही है इसके इसके अलावा कुछ नहीं है या यह कभी बदला नहीं जाएगा यही अंतिम रूप से इस बारे में कुछ बताना चाहेंगे आप किस तरह से देखते देखिए सर्व प्रथम तो इस्लाम धर्म को मैंने बहुत पढ़ा नहीं है ना

00:06:16:01 सुना है लेकिन जितना मैं समझ पाया हूं उस हिसाब से इस्लाम धर्म में जो टाइम डिपेंडेंट बातें थी उसको एकदम आत्मसात कर लिया उसम यह कह दिया गया इसके बाद कोई और नहीं आ समझ रहा फिर य पर व सारी बातें खत्म हो गई टाइम से अगर उसने यह ना कहा होता कि मेरे अलावा और कोई नहीं है या उसने यह ना कहा होता कि मेरे बाद और कोई चीज नहीं आएगी तो हम यह कह सकते थे व किसी एक विशेष टाइम के लिए था ठीक है मगर उसने अपने से अलावा किसी भी सोच को मना कर दिया य किसी भी और सोच को ले रहे तो फिर हम इस्लाम को उसके अंदर एडजस्ट नहीं कर सकते थोड़ा सा एडजस्ट करना मुश्किल है और मैं अगर मुझसे एक प की बात करेंगे तो बात यही करूंगा जो इस्लाम धर्म है उसको जबरदस्त तर निसा जागना चाहिए कि जो आज का जो समय है और जो आज असल में जैसे आप इस्लाम को धर्म शब्द की संज्ञा भी दे रहे हैं ना तो अकॉर्डिंग टू हमारे जो सनातन शास्त्र उनके अनुसार तो उसको धर्म की संज्ञा भी नहीं दी जा सकती क्योंकि धर्म वही है जो मोक्ष प्राप्त कराए जो वो स्टेट है वो प्राप्त कराए पहले आपको सुधार दूं कि मोक्ष मुक्ति को स्टेट नहीं हो सकती कि

00:07:31:03 आप यहां पर है आप यहां पहुंचेंगे तो आपको प्राप्त हो जाएगी व एक अनंत यात्रा है यात्री खत्म होगा यात्रा नहीं खत्म होने वाली ठीक है वो ठीक है कि यात्री खत्म होगा यात्रा खत्म नहीं होगी वो एक अलग अलग चीज है मगर वहां पर वो सच्चिदानंद की बात ही नहीं है हा जहां पर सच्चित आनंद की बात नहीं है तो वहां पर फिर उसको धर्म से जैसे आपने कहा जो आपको आपके दुखों से आपकी अपूर्णता से जो आपकी अपूर्णता है उससे आपको जो दूर करे आपको पूर्णता की र जाए वो धर्म है पूर्णता को प्राप्त कराए वो धर्म है तो वहां पर ऐसी कोई पूर्णता की बात नहीं है वहां तो बस आखरी रात को वो दर्शन होंगे और बस ये सब चीजें है नहीं आप देखिए आप जैसे हमारा दत वेदांत है जी मेरी समझ से दर्शन या फिलॉसफी का अंतिम शब्द है अवेद वेदांत क् वहां पर दो बचते नहीं है तो फिर फिलॉसफी करेगा कौन एक ही बचता है कह सकते हैं एक भी नहीं बचता है तो अब आप उस तल पर ही उस चीज को लेकर देख रहे हैं कि अद्व वेदांत एक तरफ है जहां उपनिषद है गीता है और उसी तल पर आप इस्लाम धर्म को लेकर देख रहे हैं उसके ग्रंथ को देख रहे हैं तो बिल्कुल वो एक शुरुआती बात हो सकती है शुरुआत कर सकते हैं और रिक समझ उसको शुरुआत की कैटेगरी में भी हम तब डाल सकते हैं जब उसने उसका स्पेस छोड़ा हो जब

00:08:46:03 वो खुद ये कह रहा है मेरे अलावा और कुछ नहीं हो सकता मेरे से बाहर और कुछ नहीं हो सकता तो फिर हम उसको एडजस्ट नहीं कर सकते हा तो फिर आप देखिए मतलब जो आप कह रहे हैं ना सत्य सरता की क्रमिक अभिव्यक्ति है ना जैसे बच्चे ने पहले फर्स्ट क्लास पास की तो फर्स्ट क्लास के लिए वो हो सकता है सेकंड के लिए हो सकता है थर्ड के लिए हो सकता है मगर वो जो पीएचडी है वो नहीं है पीएचडी का स्तर अलग है तो हम उसको इस क्रमिक अभिव्यक्ति में तब डाल सकते हैं जब उसने उसका स्पेस छोड़ा हो मगर उसने तो यह कह दिया मैं ही पीएचडी हूं मेरे अलावा और कोई पीएचडी हो ही नहीं सकता तो फिर अगर हम उसको डालेंगे कि पीएचडी कोई और है तुम एक स्तर हो उसका तो फिर उसकी वो बात कटेगी और कट गई तो हमने फिर डाला नहीं इस्लाम धर्म में भी आप जब सूफी संतों के पास जाए अगर आपने पढ़ा उने उनकी काफिया है उनके कुछ बोल है तो वो बात अगर आप वहां से लेंगे तो बिल्कुल आपके काम आ सकेगी आप यात्रा पर बढ़ सकेंगे चलिए इस चैप्टर को छोड़ते हैं वैसे उसमें जो आखिर में जो मोक्ष की स्थिति बताई है उसके अनुसार जो फाइनल स्टेट है वह है कि वह दर्शन देगा जो खुदा है वो दर्शन देगा और जो लोग उसको प्रिय होंगे वो उसको देख पाएंगे जो प्रिय नहीं होंगे व उसे नहीं देख पाएंगे आखि रात य उनकी स्टेटस से आगे वो नहीं गए

00:10:01:26 तो यह तो हमारा मोक्ष नहीं है नहीं एट द एंड हम लोग किसी के परतंत्र रहे और हमारा लक्ष्य था स्वतंत्र होना बाधाओं से मुक्त होना हमने जहां से बात शुरू की तो बात आखरी है मैंने फिर से बोला व वहां पर तो फिर कह सकते हैं फिलोस नहीं तो फिर वो सूफी संतों के पास जाने का कुछ बचा नहीं ना या तो या तो वो कुछ ऐसा छोड़ दे स्पेस जिससे कि हम एक बेनिफिट ऑफ डाउट दे सके कि चलो भाई इस बात का कोई ऐसा अर्थ निकल सकता है जब वहां पर क्रिस्टल क्लियर कर दिया कि मेरे बाद और कोई आएगा नहीं जो बताएगा इसके अलावा यह जो बुक है यह सारी बक बुकों का सत्यापन करेगी वेरिफिकेशन जो भी इसके विरोध इससे बाहर होगा जो भी ऐसी कोई चीज कहेगा जो इसमें नहीं है वो सब अमान्य है य सब बातें उसने लिख दी तो फिर हम उसको फिर उस उस उसम नहीं ला पाएंगे स्टैंडर्ड में मैं फिर से कह रहा हूं एडजस्टमेंट बहुत मुश्किल होगा लेकिन मैं ये भी कह रहा हूं कुछ चीजें हैं जैसे सूफी संतो की बात करता हूं बाबा फरीद उनकी बातो सर आप बिल्कुल शुरू कर सकते हो बड़ी गहरी बात है अंतत तो अब आपका जो जो जैसे कि आपने बताया कि जो हमारे सच्चिदानंद को प्राप्त कराने की निमित्त बताई गई मर्यादा का नाम धर्म है तो आपकी य मर्यादा कहां से निकलती है

00:11:17:08 मर्यादा का नाम धर्म मतलब आप स्पष्ट करिए पहले अपनी बात विधि का नाम धर्म जो प्रोसेस जो नियमावली आपको आपके वास्तविक स्वरूप को प्राप्त करने के लिए सहायक बने वो विधि का और उसके केंद्र में आत्मा अवलोकन सेल्फ र्वे अपने आप को देखना लगातार अपने शास्त्र शास्त्र भी तो है उसके केंद्र में आप विधि की बात करें विधि शास्त्र में तो है शास्त्र में भी शास्त्र में बहुत सनातन धर्म में बहुत वृहत शास्त्र है किनको केंद्रीय मानना है किनको नहीं मानना इस भी बात य कहीं पर जैसे की भगवत गीता भगवान जी ने एक बात कही लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है तो फिर जिस किसको मानना है और किसको नहीं मानना है यह सूची भी शास्त्र में दी गई होगी सूची शास्त्र में दी गई सूची आपके अनुसार भी हो सकती है कि जो शास्त्र या जो शब्द जो मंत्र मुझे मेरी बेचैनी मेरे दुख जो मैं शांत हूं य जो अंदर मन है अहंकार है जो वृति है इसको तोड़ते हो इसका इलाज करते हो तो धर्म के केंद्र में व शास्त्र है बाकी जो बात शुरुआत के लिए सही है नहीं नहीं मैं समझा नहीं जैसे आपने कहा कि

00:12:32:22 यह जो सूची है कौन से शास्त्र मानने हैं और कौन से नहीं मानने हैं यह सूची हमें शास्त्र में नहीं दी गई है हमें आत्मा अवलोकन से तय करना है कि शास्त्र की किस बात को लेना है और किस बात को नहीं लेना है तो यह तो फिर ये डिपेंड हो गया कि मुझे क्या अच्छा लगता है और बेसिकली अगर जब जन्म लेते हैं तो हम लोग अपनी वृति आपने कहा वृति के साथ जन्म लेते हैं तो हो सकता है कि आप अपनी शुद्ध की आवाज सुन लो आप सुन लो और समझ लो कि यह सही है कि गलत है जिसको मैं सही मान रहा हूं मगर हर व्यक्ति तो नहीं सुन पा गा उसके अंदर से आवाज आएगी जैसे की एक कुमारिल भट्ट थे उन्होंने लिखा था माता के साथ रमण करने पर भी सुख की प्राप्ति होती है मगर वह धर्म नहीं होता तो सुख के आधार पर हमें क्या अच्छा लग रहा है इस आधार पर हम यह तय नहीं कर सकते कि य धर्म है इसीलिए भगवान ने कहा तस्मा श प्रमाण तो क्या मतलब जो आपका जो धर्म है वो शास्त्र से है या शास्त्र के बाहर भी मतलब चलता है नहीं धर्म के केंद्र में तो धर्म के ग्रंथ ही है लेकिन मैं ये कह रहा हूं कि धर्म ग्रंथ जो केंद्रीय ग्रंथ है वो आपसे बात केवल आपके

00:13:47:22 दुख आपके बेचैनी की करते हैं कि तुम ने जन्म लिया प्राकृतिक रूप से वृतिया है तुम एक अहंकार रूप हो अगर तुम ऐसे ही बने रहे तो तुम बहुत दुख पाओगे बड़े बेचैन रहोगे बड़े अशांत रहोगे तो तुम्हें तुम्हारे दुख से तुम्हारी बेचैनी से तुम्हारी शांति से निजात मिल जाए और जो निजात दे जाए व धर्म ये मैं कहना चाह यानी कि निजात एक तरीके से सच्चिदानंद प्राप्त होने के बाद हमें पता चलेगा कि हमारा धर्म क्या था आप आप फिर आप स्टेट पर रहे हो कि स वही जाना चा रहा आपका वो जो निजात दे जाए निज मैं वही तो कह रहा हूं अगर अभी सच्चिदानंद प्राप्त नहीं हुआ अभी मुझे क्षणिक सुख मिलने लगा हां भाई काम करने से मुझे सुख मिल रहा है तो वो तो धर्म नहीं हो सकता जैसे मैंने कुमार भट्ट का उदाहरण दिया अगर मुझे किसी चीज को करने से सुख मिल रहा है वो आधार नहीं है डिसाइड करने का धर्म है बिल्कुल क्योंकि हमारे लिए धर्म गलत चीज भी हो सकती है तो इसलिए हम अगर अपनी नजरों का चश्मा लगा के देखेंगे धर्म और धर्म को तो फिर हम तो वो देखेंगे हमारी इंद्रियों को क्या अच्छा लग रहा है वो देखने लगेंगे तो इंद्रियों प नहीं जाना सेल्फ ऑब्जर्वेशन का जो मैंने आप मैंने आपको ये भी बताया जैसे आपकी जो आत्मा की आवाज है वो आप सुन पा रहे हो सेल्फ ऑब्जर्वेशन प आप जा पा रहे हो हर हमें एक वो चाहिए ना जो

00:15:02:24 सब पर लागू हो सके है ना सब पर सिर्फ यही लागू होता है कि सभी दुख में है सभी बेचैन है अगर दुख जो जिस व्यक्ति को सेक्स नहीं मिल रहा है वो भी बेचैन है तो क्या उसका धर्म ये मान लिया जाए कि उसको सेक्स की पूर्ति कहां से हो रही है नहीं उस मांग मांग है उसकी सच्चाई देख लेना धर्म है ना कि इस मांग को पूरा कर लेना धर्म आप समझ नहीं रहे मेरी बात कि उसको अपने इस चीज के साथ जो उसकी स्टेट है इससे बाहर आने के लिए क्या करना है क्या नहीं करना है यह कहां से तय हो रहा है जैसे मैं आपको फॉर एग्जांपल बताऊं कि जब ईश्वर को यह मालूम है सनातन धर्म ग्रंथों को यह मालूम है कि व्यक्ति के अंदर काम है तो उसने क्या किया कि भैया विवाह करो है ना विवाह ऐसे ऐसे करो विवाह के बाहर मत करना य चीज तो आप अपनी उसको रेगुलेट कर पाओगे और धीरे धीरे उससे मुक्ति पा पाओगे विवाह करने का प्रयोजन भी यही है कि विवाह करते हुए भी व्यक्ति एक दिन वैराग्य को प्राप्त करे उससे भी विरक्त हो संस्था बनाई ग इसीलिए बनाई गई तो हां तो तो यह जो चीज है कि यह करना है और यह नहीं करना है यह क्या आचार्य प्रशांत जी के अनुसार केवल शास्त्रों के द्वारा है या शास्त्रों के बाहर भी

00:16:17:28 है नहीं मैंने कहा आत्म अवलोकन आत्म अवलोकन जो विधि है शास्त्रों के बाहर भी है जो आत्म अवलोकन विधि है ये आत्म अवलोकन विधि आ तो यही से रही है गीता और अक गीता उपनिषद से ना शास्त्रों के बाहर का नहीं जब हम देखिए जब हम कहते हैं कि हम सनातनी है हम वैदिक है तो फिर ये माना जाएगा कि हमारा जो अंतिम वो है निर्णायक वो वेद है हमारा आत्मा अवलोकन नहीं है वो सेकंड हो जाएगा वेद शति अंतिम प्रमाण कहते है ना वेद उपनिषद तो अगर हम अपने आत्मा अवलोकन से इसको वेरीफाई कर रहे हैं ये गलत है ये सही है ये वाली चीज फालतू है ये वाली चीज सही है तो फिर वो हमारा आधार नहीं रहे आधार हम स्वयं हो गए आधार वो तब है ना जब हम अपना आत्मा अवलोकन उसके आधार पर करें उसका अवलोकन अपने आधार पर ना करें आप कहना चाह रहे जो आत्म अवलोकन विधि है ये हमारी ये इसका स्रोत यहां से है या हम इसको व्यक्तिगत तल प देख रहे हैं आप यही कहना चाहते हां जैसे आपने कहा ना कि कुछ शास्त्र ऐसे हैं जो काम के नहीं है कुछ शास्त्र ऐसे जो काम के है यानी कि हमने हमारे पास कोई और पैरामीटर है यह जांच करने का कि कौन से शास्त्र सही है कौन से गलत है पैरामीटर मैंने आपको बताया ना कि आत्मा अवलोकन आत्मा लोकन विधि है पैरामीटर क्या है

00:17:33:07 मैं दुख में हूं मैं बेचैन हूं मैं अशांत हूं मैंने वही तो कहा कि दुख और सुख के आधार पर हम लोग डिसाइड नहीं कर सकते क्या अच्छा है क्या बुरा मैंने आपको उदाहरण भी दिया कि जो कुमार भट्ट वाला मैंने उदाहरण दिया कि माता के साथ रमण करने वाले को भी सुख की प्राप्ति हो जाती है वो दुखी था उससे पहले मगर वह धर्म नहीं माने माना जाएगा माना जाएगा क्या नहीं मान सकते तो इसका मतलब हमारे को क्या अच्छा लग रहा है यह आधार नहीं हो सकता यह तय करने का कि व्ट टू डू और क्या नहीं करना है नहीं हो सकता तो वही फिर आ जाते कि मतलब जो आचार प्रशांत जी का जो शिक्षा है वह शास्त्र में सीमित है या शास्त्र कहीं कहीं आउट भी जाती है फिर और जाती है तो फिर उसका आधार क्या रहता है श्रोत तो फिर आपके सनातन धर्म की बात करते हैं तो श्रोत तो उनकी केंद्रीय बातें है जोन है गीता है निषद है जैसे मैं आपको एक एग्जांपल बता दूं एक आचार्य प्रशांत जी का एक वक्तव्य आया था कि मनुस्मृति कोई खास ग्रंथ नहीं है हमारे य जबकि मनुस्मृति केलिए हमारे जो ब्राह्मण ग्रंथ है जिसको वेद माना जाता है उसमें औषधि कहा गया है मनुस्मृति को मनुज ने जो

00:18:48:07 भी कहा है वो औषधि है तो उन्होंने कहा था कि मुझे मेरी जानकारी में नहीं है कि मनु को किसने अपने लिए वो माना है मनु को किस राजा ने अपना संविधान माना तो इस स्टेटमेंट से आप सहमत है मैंने आपको शुरू में बताया टाइमलेस टाइम डिपेंडेंट मनुष मृति जिस समय में लिखी गई बहुत सारी बातें ऐसी है जो शायद उस समय के लिए लागू रही और लागू होनी चाहिए बात पूरा करने बीच मुझे मनुष मृति जिस समय में लिखी जिसने भी लिखी है ठीक है हो सकता है कि उसके नियम आज की जब आज हम वैज्ञानिक य में खड़े हैं सामने एआई मशीन लर्निंग है रोबोट्स हैं क्लाइमेट चेंज समस्या है तो क्या वो बातें यहां भी लागू हो सकती है क्या अगर हम उनका सही अर्थ जहां से वो आ रही है उनका सही मर्म और अर्थ समझेंगे बिल्कुल लागू हो स अभी बस वही गया अगर सही अर्थ हम समझेंगे आप तो बिल्कुल लागू हो सकते तो हमने ये कैसे कह दिया कि वो निचले दर्जे का ग्रंथ है अमान्य है ये कैसे कह दिया हम नहीं कहना चाहि देखिए एक सामाजिक जो समाज समय था समाज को बनाए रखने के लिए वो चीज लिखी गई थी वही तो मैं कह रहा हूं ऐसा नहीं है ये

00:20:03:10 तो आपका अंदाजा है अच्छा उसमें आप कुछ बताइए कि आप कैसे जैसे कुछ चीज इसस बात पर कहा था उ उससे ले लेता हूं आचार्य श्री ने कहा था कि कि उसमें तो ये भी लिखा है कि तुम मास नहीं खाओगे तो तुम्हारे साथ ये होगा ऐसा कुछ उन्होंने मास खाने की बात पर उन्होंने नाराजगी जताई थी तो अच्छा उनकी दूसरा एक वो था जैसे सबसे पहले तो हम यह समझ ले कि सनातन धर्म ग्रंथ जब हमने कह दिया किसी को ये सनातन ग्रंथ है तो हम यह नहीं कह सकते कि इसका जो उपयोग है आज की डेट में नहीं है क्योंकि वह सनातन से जुड़ गया और सनातन क्या है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले अगर हम यह कह रहे मनुस्मृति सनातन ग्रंथ है तो हम ये नहीं कह सकते वो किसी एक विशेष टाइम के लिए उपयोगी थी और आज नहीं है तो ये तो यही बात दूसरी बात उन्होंने दो बातें उसम कही थी अपने स्टेटमेंट में कि यह जो मनुस्मृति है इसमें कुछ मास खाने की बात भी की गई है अब मांस खाने की बात जो की गई है उसमें उनका एक इंटरव्यू हुआ था ललन टॉप में उसमें उनसे किसी ने प्रश्न किया था कि अगर कोई व्यक्ति मर रहा है

00:21:18:18 तो क्या मास नहीं खाना चाहिए मास खाने से ही बचे पाएगा उन्होंने कहा था हां ऐसी स्थिति में आप खा सकते हो ये बड़ा अच्छा उन्होंने उपाय दिया यही बात के य मनुस्मृति में मास खाने की अनुमति दी गई है अगर उसको आप ठीक से पढ़े परंपरा अनुसार जो आचार्य गण जो उसकी व्याख्या करते हैं तो उसमें अमुक अमुक जो आपकी स्थिति परिस्थितियां विषम परिस्थितियां है उनसे निकलने के लिए ही मांस खाना अलाउ किया गया है जैसे कि आज की डेट में किसी को फिश ऑयल की जरूरत है बहुत इंपोर्टेंट है फिश ल तो आज की डेट में व्यक्ति क्या करेगा व्यक्ति जाएगा मेडिकल स्टोर से जाकर खरीद के खा लेगा मगर वहीं पर मनुस्मृति में उसम लगा लगाई कि अगर तुम खा भी रहे हो परेशानी की वजह से तो आपको विधि युक्त मांस ही खाना है अ विधि युक्त मास खाने वाला यह होता है वो होता है वो भी इसम ही लिखा है तो मतलब उन्होंने खुद इस बात को माना कि विषम परिस्थितियों में मांस आप खा सकते हो वही बात मनुस्मृति में थी तो उसके आधार पर उन्होंने कहा कि मनुस्मृति जो है निचले दर्जे का ग्रंथ है दूसरे मैं उपनिषद पढ़ाता हूं मैं तुम्हें मनुस्मृति नहीं पढ़ाता हूं तो ये मैं जानना चाह मैं स्पष्ट कर देखिए पहली बात मनुस्मृति जो ग्रंथ है मैंने उसको समग्रता में पढ़ा नहीं पहली बात जब आप सनातन धर्म के ग्रंथों की बात करते हैं

00:22:33:21 तो पर श्रुति स्मृति आप श्रुति और स्मति तो अगर हम ग्रंथों को देखें शति का स्थान सर्वोच्च है ठीक है शति का स्थान सर्वोच्च है गीता उपनिषद और वेदांत ठीक उनका स्थान सर्वोच्च है जो स्मृतियां है उन स्मृतियों को भी यदि आप पढ़ रहे हो या पौराणिक कथाओ को पढ़ रहे पुराण को पढ़ रहे हो तो उनका स्थान यद नीचे है तो उन स्मृतियों को पुराणों को इस के प्रकाश में पढ़ना है आप पुराण को पढ़कर सिर्फ कंक्लूजन अर्थ जो स्मृति शास्त्र है उनके जो उनके द्वारा जो सिद्धांत आपको सरलता से बताए गए उनके आधार पर करना चाहिए शुं का अर्थ शयों का अर्थ स्मृति के आधार हा स्मृतियों के उसम करना चाहिए जोतिया जो बातें कर रही है उसके अंदर रहते क्योंकि उसमें साफसाफ दिया गया कि शति भी डरती है वेद डरते हैं कोई मेरा अपार्ट ना कर दे अनर्थ ना कर दे है ना तो खैर मैं वो मनुस्मृति की बात बता दूं कि एक तो यह है कि मनुस्मृति में जो मास खाने वाली बात कही गई है उसका कारण वही है जो आचार्य प्रशांत जी ने भी स्वीकार किया मगर उन्होंने मनुस्मृति को थोड़ा

00:23:48:26 सा वो कर दिया और फिर वहां पर उन्होंने जो एक बात य कही थी कि मनु मेरी जानकारी में नहीं है कि मनुस्मृति को किसी ने अपना संविधान माना हो तो मतलब जब वो आपको नहीं लगता कि जब वो इतना सब लेकर चल रहे हैं और तो उनको मालूम होना चाहिए कि रामायण में राम ने श्री राम ने मनुस्मृति को अपना संविधान माना है स्पष्ट उन्होंने कहा है कि मनु महाराज ने यह ये कहा है और फिर मनु स्मृति के एजेक्ट लोक उठाकर वहा बोले किसको बाली को बाली को उन्होने मनुस्मृति के श्लोक बोले तो यह कहना कि मतलब किसी ने संविधान नहीं माना जबकि श्री राम ने संविधान माना और यह जो श्लोकों की बात मैं कर रहा हूं यह श्लोक सबके द्वारा स्वीकार रहे है यह भी नहीं कह सकते मिला लिखित है जी मैं आप जब आप रामायण की बात कर रहे हैं रामचरित मानस की बात कर रहे हैं तो उसको किसने लिखा है राम ने लिखा है वाल्मीकि जी ने लिखा है तुलसीदास जी ने लिखा है और किसने लिखा है बहुतों ने लिखा है तो जिस भी व्यक्ति ने अमुक व्यक्ति ने लिखा है उस जो व्यक्ति जिस समाज में है जिस कालक्रम में है उसके साहित्य पर उस समाज का उस कार्यक्रम पर भी छाप होता है ना नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा

00:25:03:26 उन्होंने यह कहा कि मुझे नहीं पता कि किसने उसको अपना संविधान माना तो जबक श्री राम ने उसको अपना संविधान माना तो ये फल्स स्टेटमेंट नहीं है देखिए जब उन्होंने जो बात कही मैंने पहली बात तो सुनी नहीं वो बात और इस बात का खंडन ये उन्होंने कहा है जो रणवीर करके है ना रणवीर इलाहाबादी है शायद उनके साथ एक जो टॉक शो चल रहा था उसमें उन्होंने य बात कही है कि मुझ मेरी मुझे नहीं पता कि मनुस्मृति आप मनुस्मृति के श्लोक को उठा के कहीं रामचरित मानस से वाल्मीकि रामा फिट कर रहे हो और फिर कर रहा मतलब वो चीज है भी और कर र तो उन्होंने गलत क्यों कह दिया जब मैं कह रहा हूं कि जो केंद्रीय बात ये है अब स्मृति को इतना मैं ये नहीं पूछ रहा उन्होंने ये बात कही कि मनुस्मृति को किसी ने संविधान माना नहीं तो रामायण में ऐसा मतलब पॉपुलर ग्रंथ है ऐसा तो साइड का तो है नहीं कि नहीं पढ़ा होगा तो कोई बात नहीं रामायण गीता ये हमारे मतलब फेमस और सेंटर ऑफ रामायण गीता को एक साथ नहीं रखी आपने रामायण गीता एक साथ कैसे हो ग सेंटर ऑफ अट्रैक्शन तो है ना हमारे सनातन ग्रंथ रामायण और ये प्र में आता है य वो एक बात आप अलग कह रहे हैं मैं कह रहा हूं कि ये हमारे ऐसे ग्रंथ है जो बच्चे बच्चे को पता है नाम पता है ग नहीं पता नाम पता

00:26:19:02 है बच्चे को तो फिर गीता भी नहीं पता ऐसे तो हा तो गीता का गीता उन्होंने पढ़ी है ना और वो आचार्य है तो फिर वो ये कैसे कह रहे हैं कि मुझे नहीं पता कि किसी ने उसको संविधान माना हो ये बात थोड़ी सी जानने के लिए पूछ रहा हूं नहीं आपको नहीं मैं आपको स्पष्ट कर रहा हूं ना कि आप जिस भी ऐतिहासिक ग्रंथ की बात कर रहे हैं उसको जिस आप कह रहे हो कि ना श्री राम ने माना हां तो ये बात श्री राम लिखने आए थे कि ये बात तो फिर जिसने मतलब इसम डाउट है नहीं जिस रचनाकार ने ग्रंथ जिस रचनाकार ने ग्रंथ को लिखा उस रचनाकार का अपना पर्सपेक्टिव जिस समाज में था नहीं मैं ये कह रहा हूं आपके पास वो माइक नहीं है नहीं मैं एक वो इससे फाउंडेशन से रिलेटेड एक कहना चाह रहा हूं देखिए ये रिप्रेजेंटेटिव नहीं है प्रशांत हद फाउंडेशन या ये हम ये कन्फर्म भी नहीं कर सकते कि पूरी तरह समझ रहे हैं आचार्य जी तो इनसे शास्त्रार्थ करना आई थिंक शास्त्रार्थ एक तरीके का शास्त्रार्थ मॉडर्न शास्त्रार्थ भी है हम अभी मतलब मैं वही कह रहा हूं कि जो उन्होंने बात कही उसका खंडन हो सकता है मैं ना कर पाऊं वो तो आप उनसे पूछ सकते हैं आई थिंक बेस्ट पर्सन आचार्य जी होंगे इस बारे में बताने के लेकिन मैं मेरी समझ से बता सकता हूं बता रहा हूं कि इसमें जो बात लिखी है आप ऐसा कह रहे हो कि जैसे श्री राम ने कहा हो कि नहीं मैं मान रहा हूं मैं फिर कह रहा हूं फिर फिर तो श्रीराम थे भी कि नहीं थे इस पर भी आप डाउट कर देंगे क्योंकि वो भी किसी ने लिखा है श्रीराम

00:27:34:10 ने तो लिखा नहीं मैं था तो श्री राम थे कि नहीं थे उस परे भी डाउट हो गया तो श्री राम का जब झूठ लिख सकता है व्यक्ति तो ये भी झूठ लिख सकता है राम झूठ लिखने की बात नहीं कर रहा हूं मैं जिस पर्सपेक्टिव से वो चीज लिख रहा है समाज में लिख कहने का मतलब ये है कि आप जो बात कह रहे हैं ना मैं उनसे वही कह रहा हूं अगर आपको इसम बात नहीं करनी है हम टॉपिक चेंज कर देते हैं तो वो कर रहे इस मुझे कर पड़ जो इनके पास है ना वो हमारे पास होगी नहीं हम सब अभी बड़े मैं देख रहा ह उन्होने कहीं पर कुछ कहा उसका खंडन मैं तो बिल्कुल नहीं कर सकता कि नहीं सही की नहीं आप ये कहिए मुझे बारे में जानकारी नहीं है आप ये कह दीजिए आप ऐसा क रहे उन्होने गलत कहा नहीं मैंने कहा कि इस विषय पर आप कुछ बोलना चाहेंगे उन्होंने कैसे किस बारे में कहा तो आप मत समझाइए आप बोल दीजिए कि मुझे जानकारी नहीं है इस बारे में प्रश्न आप करिए मैंने पॉडकास्ट मैंने सुना नहीं है जोदिया की पका में सुन आप आगे बते जी अच्छा एक चीज आती है कि अभी एक रिसेंटली एक चीज और अब उन्होंने क्या कहा उस पर प्रश्न नहीं करेंगे उन्होंने कहा वो जाने उनके प्रश्न आप उसे कर आप उन्हे फॉलो करते हैं ना तो उनको मानते हैं तो उने अगर आपकी जानकारी में हो कि उन्होने य वाली बात कही और आपको समझ में आती है तो आप उसका उत्तर

00:28:49:15 देना ना आगे बढ़ जाना देखिए सोसाइटी में बहुत सारे क्वेश्चन होते हैं तो उसके जब आंसर जाएंगे तो सोसाइटी में वेरिफिकेशन आता है और उससे आपका बढ़ता है इसको वो मत समझिए कि आपकी कोई काट हो रही है उनकी कोई काट हो रही है जो व्यक्ति अपनी समीक्षा के लिए तैयार रहता है वही व्यक्ति पावरफुल माना जाता है जो समीक्षा से दूर रहे और क्या कहते हैं अपोजिशन से दूर रहे कि कोई विरोधाभासी सवाल आना ही नहीं चाहिए वो व्यक्ति कहां से फिर हां तो आप अपोजिशन में जो भी प्रश्न लेकर आ रहे हैं कुछ वक्तव्य लेकर आ रहे हैं अगर मैंने उसको सही समझा मैं आपको समझा रहा हूं अगर आपको इस बारे में पता है तो आप बात कए अन्यथा आप सीधे बोल दीजिए भा मुझे नहीं पता इस बारे में मैं अभी अध्ययन रत हूं आगे बढ़ तो अभी अभी उनका एक बहुत फेमस हुआ था उन्होंने कहा था कि उनके पास कोई मातृ शक्ति आई मातृ शक्ति मातृ शक्ति मतलब स्त्री महिला अच्छा कोई मातृ शक्ति आई और उसने ये प्रश्न किया कि मेरे कई सारे पुरुषों के साथ अफेयर हो चुके हैं वो काफी डिमोटिवेट हो रही थी इस बात को लेकर के तो आचार्य जी ने वहां पर एक बात कही कि भाई तुम डीमे वो हो रही हो जो सबसे ऊंचे ग्रंथ है अ उपनिषद उसमें तो जबाला जबाला ने अपनी

00:30:04:19 मां से पूछा था कि मेरे मेरे पिता कौन है मेरे पिता का नाम क्या है तो उसको पता नहीं था उस स्त्री को अच्छा जब हमने वह खोल करके देखा जब उपनिषद को खोल के देखते तो वहा उसने गोत्र पूछा था और गोत्र प्रवर ऋषि यह सामान्य व्यक्ति को याद हो या ना याद हो मतलब बहुत ज्यादा नहीं पता होता है गोत मगर नाम आचार्य श्री ने कहा प्रशांत जी उन्होंने कहा कि नाम नहीं पता था उसको अपने पति का नाम भी नहीं पता था वहां पर नाम की बात नहीं आई गोत्र की बात आई है वहां पर य प्रस्तुत कर दिया कि वो जो जबाला की जो मां थी उनके भी संबंध कई पुरुषों से बनते थे इस तरह से वहां प्रस्तुत तो इस बारे में आपको पता है कुछ मैंने य जिस वीडियो की आप बात कर रहे शायद मैंने नहीं देखा नगर वो नगरवधु थी नगरवधु मात जानते हैं नहीं वहां प उपनिषद में ये नहीं लिखा

00:31:04:00 र छंद शद ंद मैंने सुना अच्छा एक चीज और है जैसे कि हम कहते कि हमारे जो सिद्धांत है व आ तो ग्रंथों से ही रहे हैं तो यह जो ग्रंथ है य हमारे पास कैसे पहुंचे क्योंकि आज तो लिखे नहीं गए कैसे पहुंचे हमारे पास उपनिषद की आप बात कर रहे इनकी बात कर कैसे प जो भी ग्रंथ आप मानते हैं वो आपके पास कैसे पहुंचे जो मेरी समझ है व यही है कि जो ऋषि मान सते षि मान जैसे ऋषियों ने दृष्टा बने मंत्रों के उन्होंने फिर उसको पहले शति द्वारा स्थानांतरित किया गुरु शिष्य परंपरा से और फिर उसके बाद क्या कहते हैं हम फ उसको ने भी लग गए फिर वो ऐसे कैसे करके ग्रंथ हम तक पहुंचे जिनको आप भी ऊंचे दर्जे का मानते हैं तो क्या आचार्य प्रशांत जी के कोई गुरु है परंपरा से नहीं मैं छोटा सा उनका जीवन परिचय आप क दे पुस्तको में भी उपलब्ध है गुरु आदि परंपरा से बिल्कुल नहीं आ रहे एक सामान्य

00:32:19:28 घर परिवार से आते हैं सामान्य दुनियादारी की पढ़ाई आईटी ली से बीटेक यूपीसी परीक्षा पास करना अहमदाबाद से एमबीए परंपरा या परंपरा से बिल्कुल नहीं आ रहे अच्छा तो यह जैसे उन्होंने अपने इंट्रोडक्शन में बताया कि मैं आईआईटी आईआईटी हूं इस बात का क्या मतलब है आईआईटी से मैंने इंजीनियरिंग की है इस बात का क्या मतलब है क्या मतलब मान सकते हैं मेरे अनुसार आप हाक जैसे मैं हूं विद्यालय से मैंने मास्टर्स किया है दुनिया है इसकी समझ मुझे चाहिए तो समझ शिक्षा से आ सकती है नहीं आपने वो शिक्षा प्राप्त कहां से की आपने उसका नाम बताया ना तो नाम बताने की क्या आवश्यकता है कोई आवश्यकता नहीं नाम बताने की आवश्यकता ये है कि आम आदमी आप इनको बता दीजिए तो कॉलर माइक ले लीज आपकी आवाज आएगी नहीं मैं बता रहा हूं आप कह रहे हैं कि उन्होने नाम लिखा क्यों बताया कि क्यों बताया कि मैंने शिक्षा इंजीनियरिंग की कहां से प्राप्त की

00:33:21:01 है मतलब हम वो लोग नहीं है जो हम इस बात का सही उत्तर दे पाएंगे मुझे ये लग रहा है हम सीख रहे हैं अभी सम बोल दीजिए मैं नहीं दे रहा आर तो वो दीजिए अनथा बोल दीजिए ग आप थोड़ा सा पल में ले जा रहे मैंने कहा था कि मैं य क्यों कर रहा हूं काम मैंने क होगा लेकिन आप क उन्होने व पर कहा खंडन करिए मैं एक चीज जानना चाह रहा हूं जैसे आपने बताया कि आपने क्या चीज कहां से पास की है मैंने विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है कौन सा वहां पर वो यूनिवर्सिटी कौन सी लगती है लखन विश्विद्यालय तो जैसे हम किसी को ये बताते हैं कि हमने पढ़ाई की यहां से फलानी आपने कहा आचार्य जी को छोड़ दीजिए तो आप ये क्यों बताते कि मैंने यहां से पढ़ा है आप अपना जैसे आप मुझसे मिले आप कौन तो आपने अपना नाम बताया बताया वैसे मैंने उसका नाम बताया कि मैंने यहां से शिक्षा प्राप्त की है इसमें एक गुण अर्थ है क्या हम अपनी शिक्षा की प्रामाणिकता बता रहे हैं कि मैंने जो चीज बोली है मैंने पास किया है वो कहां से किया है मैं उसकी प्रामाणिकता बता रहा आप अपनी

00:34:36:01 शिक्षा बताना चाहते हैं या आप कुछ पूछना चाहते देखिए बहुत सारे लोग बीच में इंटरप्ट करेंगे तो ब कर देते मैं आपको बता रहा हूं आपको व्यक्तिगत रूप से आप व्यक्तिगत रूप से आपको कुछ चीज है शायद लेख है वीडियो है उस उन्होने बात की है कि आईटी आईम क्यों आप देख लीजिए आप आगे बढ़ नहीं मतलब तो आपने वो पढ़ा होगा ना मैं आपसे पूछ रहा हूं अभी तो जब हम किसी को ये बताते हैं कि मैंने कोई क्लास पास आउट किया है या यह किया है या वो किया है तो हम फिर इसलिए बताते हैं कि हमने भाई इस जगह से पास किया है इसलिए तो बताते हैं कि मैंने यूपी बोर्ड से 10थ किया या यूपी बोर्ड से 12थ किया या लखनऊ यूनिवर्सिटी से मैंने ग्रेजुएशन की या जो भी किया तो हम अपनी शिक्षा की प्रामाणिकता बताते हैं भाई मैंने कहां से पढ़ाई की है क्योंकि अगर मैं बिना प्रमाणिकता बताए अपनी चीजें कहूंगा तो फिर वो आगे प्रमाणिक नहीं मानी जाएंगी पता नहीं सच बोल रहा है कि झूठ बोल रहा है तो ऐसे ही मैं पूछना चाह रहा हूं कि जैसे जो आचार्य जी है आपने बोला कि वो किसी गुरु शिष्य परंपरा से नहीं है अब वो स्वयं को आचार्य बताते हैं कि वो आचार्य है ठीक है तो उन्होंने यह जो धर्म की पढ़ाई है आध्यात्म की पढ़ाई है यह कहां से की है

00:35:51:15 येज अरे चुप रहो नहीं बता सकते तो इसका मतलब उनका ये जो ज्ञान है मैं बता रहा हूं जैसे कि हमारे पास जो श्रुति परंपरा है उस परंपरा से ही हमारे पास य शास्त्र आते हैं ठीक है अब वह शास्त्रों का कुछ अर्थ बताते हैं कि जबाला को अपने पति का नाम मालूम था कि नहीं मालूम ठीक है जैसे आदि शंकराचार्य जी भी आदि शंकराचार्य जी ने उस श्लोक का उस संदर्भ का जो भाष्य किया है वहां पर यह नहीं बताया कि वो जो है जवाला जो है वो बहुत सारे पुरुषों से संबंध में थी ऐसा नहीं बताया वो बात तो ठीक है वो बात मैंने मैं एक बात बता रहा हूं अब यदि आप आदि शंकराचार्य जी से ग्रंथों को प्राप्त करना मान रहे हैं आदि शंकराचार्य जी से होते हुए ग्रंथ हमारे पास तक आए और हम इन ग्रंथों पर बिलीव कर रहे हैं कि हां ये जो है प्रस्थान त्रई में आता है ये हमारे काम का ग्रंथ है यह हमारे जीवन का प्रमाण है तो जहां से हमको ग्रंथ मिल रहे हैं और उन ग्रंथों पर हमें विश्वास है तो जहां से हमें ग्रंथ मिल रहे हैं उस पर विश्वास ना होना हमारा तार्किक सिद्ध नहीं होता और अगर उस पर हमको विश्वास नहीं है तो उससे मिलने वाले ग्रंथों पर हमारा विश्वास होना तार्किक सिद्ध नहीं होता या तो हमारी जो जो फिलोसोफी

00:37:07:02 हम इस ग्रंथ के आंसर में दे रहे हैं अर्थ में वो फिलोसोफी मैच खा रही हो पीछे वाले से जिससे हमने ग्रंथ लिया है हमने ग्र जैसे मैं मैंने आपको कोई बुक दी आप मुझ पर डाउट कर रहे हो कि मैं बुक का गलत अर्थ बता रहा हूं तो बुक पर भी आपको डाउट होना चाहिए फिर आप बुक को मानने वाले नहीं होते सि और अगर आप बुक को मानने वाले तो मुझे ना मानने वाले सिद्ध नहीं होते तो कहने का मतलब यह है क्या आचार्य जी जो शिक्षा वगैरह दे रहे हैं वो कहीं से प्रमाणित है पीछे आचार्यों से जहां से ग्रंथ आते हैं जैसे आदि शंकराचार्य की बात करें तो सृष्टि के प्रारंभ से विष्णु से नारायण जी से ब्रह्मा ब्रह्मा जी से वशिष्ठ जी वशिष्ठ जी से शक्ति पारा सर व्यास सुखदेव इस तरह से सारे जो गुरु है आज तक के वो लिखे हुए तो आपके पास जो शास्त्र आए वो कैसे आए गुरु शिष्य परंपरा से आपने उन शास्त्रों को लिया और आपका अर्थ मैच कर रहा है नहीं कर रहा वो अलग बात है क्या वो वेरीफाइड है मैच कर रहा है कि नहीं कर रहा ये मैं पूछ रहा हूं जरूरी नहीं है जरूरी है दुख से मुक्ति तो उनका पूरा मुद्दा ये होता है कि इंसान बेचैन है दुख दुख से मुक्ति की बात हम कर चुके हैं कि दुख से मुक्ति माता के साथ माता के साथ रमण करने वाले को भी दुख से मुक्ति मिल रही है तो वो ईमानदारी का पैरामीटर क्या है

00:38:22:15 शास्त्र क्या है धर्म क्या है ये तो पहले आपका पहला प्रश्न आईटी उन्होने बोला तो चकि जो आईटी का एक क्रेज है वो हमारे भीतर ना आईटी कर लिया आईटी चले गए बड़ी बात होती है ना ठीक है हमारे लिए तो नहीं है आपके लिए नहीं लेकिन समाज में बड़ी बात होती हमारे लिए जो आचार्यों की दी हुई शिक्षाए है ज्ञान है वो सब नहीं बहुत दिनों तक सत्र चला आईटी आईम में ही लिखा मैं 201 नहीं वो मैं नहीं कह रहा हूं आप अगर बात करना चाहते हो तो आप आ जाइए कॉलर माइक आप ले लीजिए आप चीजों को आप कर रहे ना तो र ब आर तो फिर आप ये बताने आ रही है बंद करते अगर आप आना चाहते तो आ जाइए देख भाई साब दुख में वो भी है जो बम से उड़ाना चाहता है दुनिया को तो क्या उसका बम से उड़ाने को धर्म मान ले मिनट बोलना चाहता आपसे प्लेसमेंट में जा

00:39:21:00 कनी अल ले जा रब उस क्टी आ जाएगी उसके बाद बनाता बहुत पुरानी परंपरा चली आ रही ठीक है एक काम करते चलिए ठीक है हम लोग फिर किसी दिन कर लेंगे हम लोग फिर किसी दिन कर लेंगे आपसे हो सके नहीं हम पहले से नहीं माने मैं तो पूछ रहा हूं मैं तो पूछ रहा हूं मैं पहले से क्या मान रहा मतलब अगर आप अगर आप ये जो टोपी लगाए तो इसका मतलब आप पहले से मुसलमान है ये कोई बात थोड़ी ना है तोरी मेरी श्र है आप मैं आपसे जो है कर रहा हूं वो बिल्कुल न्यूट्रल रहा प्रश्न कर रहे हैं और मेरा जो प्रश्न है वो लॉजिकल ना हो तो आप मुझे बताइए लॉजिकल नहीं है आप ये कोई बात नहीं है आपने पहले से माना हुआ है मेरे पिता का नाम तो पहले से ही मानूंगा शिवा जी आपने हमसे आठ पुस्तक ली है ठीक है आप आठ पुस्तको को पढ़ेंगे पर अलग अलग मीडिया हैंडल पर इतना सारा पहले से अवेलेबल आपको बताऊ आप वहां पर जाकर चीजों को क्यों नहीं पढ़ समझ रहे क्योंकि मैं एक सही व्यक्ति नहीं हं बताने वाला उसे बो हा आप वहा जा पढ़ मैं नहीं बता पाऊ ऐसे बोलिए आप कह रहे पहले से माने हु आपको ग

00:40:37:14 नहीं ये गलत बात है सभी को जय श्री राम और आनंद आया बात करने में हम लोग फिर मिलेंगे कर करसे साइड की कमेंट मत कर [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 41:01 · 26 Jan 2025

आचार्य प्रशांत ji के फॉलोअर्स ने चर्चा को अचानक से बंद क्यों कराया? @आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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