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00:00:01:20 तो सर्वशक्तिमान ईश्वर और परंपरा अलंकार समाजियों को चाहिए कि थोड़ा सा प्रैक्टिस करें। कुछ तर्क निकालें, कुछ प्रमाण निकाले इस संबंध में कि कैसे वह अपने आप को परंपरा से प्राप्त ज्ञान बांटने वाला बता सकें और अपने ईश्वर को वह अबाध्य अनंत सामर्थ्यवान सिद्ध कर सकें। क्योंकि ऐसा ना होने की स्थिति में स्वतः ही इनके अंदर एक दोगलापन उद्भाषित हो जाता है। कुछ ऐसा ही अभी यह व्यक्ति देखिए। इससे आपको पता चलेगा कि अलंकार समाज के द्वारा किस प्रकार के धर्म को प्रतिपादित किया जा रहा है, परिभाषित किया जा रहा है और प्रचारित किया जा रहा है। उससे निकलने वाले वहां से निकलने वाले लोग किस प्रकार से दोगलापन कर रहे हैं। यह व्यक्ति जो स्वयं को अलंकार समाज को फॉलो करने वाला बता रहा है। यह कह रहा है कि अनिरुद्धाचार्य जी महाराज मैं आपके सवालों से संतुष्ट हो गया। आपके उत्तरों से मैं आज संतुष्ट हो गया। और उसके बाद वही व्यक्ति जब हमसे आकर के मिलता है और अनिरुद्धाचार्य जी के बारे में प्रश्न होता है तो बोलता है तुरंत झूठ बोल देता है कि

00:01:17:22 क्या कहते हैं मैं जो है वहां पर मैंने प्रश्न किया था अनुचार्य जी से मगर उन्होंने मुझे उत्तर नहीं दिया। मतलब दोगलेपन की जो हम लोग कहते हैं ना पराकाष्ठा सब पराकाष्ठा है और जाहिर सी बात है जहां पर ईश्वर बाधित होगा जहां पर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं होगा जहां पर परंपरा प्राप्त ज्ञान नहीं होगा वहां पर ऐसा ही धर्म आपको प्राप्त होगा वहां पर ऐसा ही झूठ असत्यवादिता वाला आचरण आपको प्राप्त होगा जिसका यह बिल्कुल उत्कृष्ट उदाहरण है यह वीडियो आप देख सकते हैं हालांकि जब इनकी बातें जब अलंकार समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर पर हमने बात की, परंपरा पर हमने बात की तो इस व्यक्ति को निरुत्तर होना पड़ा और मगर फिर भी निरुत्तर होने के बाद भी यह व्यक्ति कमेंट्स के माध्यम से ऊट ऊटपटांग प्रश्न किया करता है और यहां तक कि इस व्यक्ति ने चर्चा में यह तक कह दिया कि मैं किसी विद्वान को आपसे लाऊंगा बात कराऊंगा। वह विद्वान लेकर व्यक्ति आज तक नहीं आया। इस व्यक्ति ने इस व्यक्ति से हमने पूछा कि आप हमारा चैनल कितने दिनों से देख रहे हैं? इसने कहा 6 महीने।

00:02:33:01 तो हमने कहा जब छ महीने से आप जब हमारा चैनल देख रहे हैं तो हमने तो यह प्रश्न कई बार पूछा है। सर्वशक्तिमान है कि नहीं? तो आपको 6 महीने में अपने गुरु से प्रश्न पूछने का जो आपका अलंकार समाज से गुरु है यानी जो इनका समाज है वहां का जो गुरु है क्या उससे प्रश्न पूछने का आपको समय नहीं मिला? तो बोला नहीं नहीं हमें अभी समय नहीं मिला है मगर मैं आपकी बात कराना चाहूंगा। निरुत्तर होने के बाद और यह आश्वासन देने के बाद कि मैं किसी विद्वान को लेकर आऊंगा। उनसे आपकी चर्चा कराऊंगा। उसके बाद भी यह व्यक्ति कमेंट्स के माध्यम से कुतर्क किया ही करता है। तो यह होता है जब व्यक्ति के पास बाधित ईश्वर होता है। यह होता है जब व्यक्ति के पास परंपरा प्राप्त वैदिक ज्ञान नहीं होता है। मनमुखी व्याख्या उससे निकलता है झूठ उससे निकलता है यह दोगलापन जो आपको यहां पर देखने को मिलेगा। हद होती है दोगलेपन की। देखिए संतुष्ट हो? सुनो मैं इस सवाल से गुरु जी आपसे पूरी तरह संतुष्ट हूं। ले मैं इस सवाल से गुरु जी आपसे पूरी तरह संतुष्ट हूं। मैं इस सवाल से गुरु जी आपसे पूरी तरह संतुष्ट हूं। आप अनुद्धाचार्य जी की सभा में गए थे? तो उन्होंने कौन सा बड़े भाई सवालों का जवाब दे दिया? मैं आपसे पूछ रहा हूं गए थे कि नहीं गए थे? पूछ तो उन्होंने सवालों का जवाब कौन सा दे दिया बड़े भाई जी? पूछ तो उन्होंने सवालों का जवाब कौन सा दे दिया बड़े भाई जी?

00:03:48:04 पूछी तो उन्होंने सवालों का जवाब कौन सा दे दिया बड़े भाई जी? तो कौन सी परंपरा से? कौन सी संप्रदाय से हो? क्या मानते हो? मैं आर्य समाज को आर्य समाज जी क्या पढ़ा है ऋग्वेद में बताओ? उसमें लिखा हुआ है कि परमात्मा का कभी अवतार नहीं होता। तो फिर कृष्ण कौन है? फिर राम कौन है? वो योगेश्वर वही महापुरुष थे। योगेश्वर श्री कृष्ण अच्छा पुराणों के हिसाब से जो कृष्ण वो अलग है। गीता जी के हिसाब से वो कृष्ण अलग है। तो क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है? हां जी। क्या वो अवतार नहीं सकता है? नहीं।

00:04:32:14 वो अनंत सामर्थ्यवान मानते हैं आप उसे? हां जी। तो जब वो अनंत सामर्थ्यवान है तो फिर वो अवतार क्यों नहीं ले सकता? और यदि वो अवतार नहीं ले सकता है तो फिर वो अनंत सामर्थवान कैसे? अवतार लेने की जरूरत ही नहीं है। जी अवतार लेने की मैंने पूछा ले सकता है कि नहीं? साहब सिंह जी नहीं ले सकता है। जी हां तो आप ये बताइए कि जब वो अवतार नहीं ले सकता तो अनंत सामर्थ्यवान कैसे हुआ?

00:05:16:02 बोलिए। क्यों जो ये बताओ जी जैसे अवतार उसकी सामर्थ्य का अंत हो रहा है ना। मैं पूछ रहा हूं उसकी सामर्थ्य में सीमा है ना कि वो अवतार नहीं ले सकता है। सीमा है ना उसकी अच्छा बोलिए सीमा है ना ये तो जब सीमित हो गया तो अनंत कैसे क्यों अवतार ये बताओ आपने कहा कि अवतार लेगा तो उसमें बाधित हो रहा है। अवतार नहीं ले रहा है तो हां ठीक है। हां तो ये बताओ अवतार लेगा तो फिर जन्म मिलेगा फिर उसका मरण भी होगा। तो फिर अच्छा ये बताइए आपके अनुसार जो जीव है आपके अनुसार जो जीव है हां जी वो जन्म लेता है

00:06:16:12 तो जन्म लेता ही है। इंसान तो जन्म ले ही रहा है। लेता है। उसका मरण होता है। और क्या फिर भी आप जीव को अनादि अनंत कहते हैं कि नहीं? फिर भी आप जीव को अनादि अनंत कहते हैं कि नहीं? आपका मेरी मेरी आपका सवाल नहीं आ रहा है। जी। आप समझ नहीं रहे। जब जन्म और मरण से जन्म और मरण से जन्म और मरण होने के बावजूद भी आप जीव को अनंत कह पा रहे हैं तो जन्म और मरण से आपको ईश्वर को अनंत मानने में क्या दिक्कत हो रही है?

00:07:00:28 और कुल मिलाकर के सवाल ये है ही नहीं। सवाल तो यह है यदि एकमात्र भी सीमा है तो वो अनंत कैसे? एकमात्र भी सीमा है। एक नियम है जो उस पर लागू है। तो वह फिर असीमित कैसे? अनंत कैसे? उसको आप ईश्वर कहो मगर अनंत सामर्थ्यवान मत कहो। अच्छा जी। उसको आप ईश्वर कहो कोई दिक्कत नहीं है। अनंत सामर्थ्यवान मत कहो। जैसे आप जो भी आप जो वेदों में जो परिभाषा बताते हैं आप ये कहते हैं कि आर्य समाज के वेद है ना वो यानी पारंपरिक नहीं है वो हमारे वेद जो आए हैं वो विषय बदल रहा है विषय बदल रहा है। अब मुझे आप ये बताइए कि अगर ईश्वर की सामर्थ्य की सीमा है तो फिर ईश्वर अनंत क्यों? या तो आप आज ये बोलिए ईश्वर अनंत सामर्थ्यवान नहीं है।

00:08:05:15 ये बताओ जी भाई साहब जो आप ये कह रहे हो अवतार नहीं ले सकता है तो वो सामर्थ नहीं है। अब मैंने आपसे पूछा अगर उसकी सामर्थ्य की सीमा है तो उसको अनंत मत कहिए। अच्छा जी। हां। अब बोलिए अब ईश्वर क्या है? आपके अनुसार अनंत आपके अनुसार ईश्वर अनंत सामर्थवान है क्या? अब ये बताओ बड़े भाई साहब ये बताओ आप ये कहते हो कि अवतार नहीं लेता तो आपका ईश्वर है।

00:08:45:13 आप ये बताओ आप जो वेद बता रहे हो आपके जो अनुसार जो अर्थ है जो भी है ना अभी बताओ आपका गुरु परंपरा क्या? उनका भैया आप ये कहते हो कि आर्य समाज का जो वेद है वो उन्होंने अर्थ अलग से लिया है। पहले आप ईश्वर के ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए। अनंत सिद्ध करिए या तो यह कहिए कि ईश्वर अनंत नहीं है। फिर आगे बढ़ते हैं। बड़े भाई जी इसका जवाब है ना हमारे गुरुजी वो दे पाएंगे। अच्छा तो आपके पास इसका इसका उत्तर नहीं है। कौन है आपके गुरु नहीं है। कौन है आपके?

00:09:27:08 स्वामी सच्चिदानंद महाराज अब आप मुझे ये बता दीजिए आप हमारा चैनल कब से दे रहे हैं? देख रहे हैं। आप हमारा चैनल कब से देख रहे हैं? हो गए कम से कम छ महीने से ज्यादा हो गया। छ महीने से तो आपने हमारा ये सवाल सुना था कि नहीं? ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? तो ये आपने से पूछा नहीं आज तक। मेरा अभी वहां जाना नहीं हुआ है। अनुचार की सभा में तो आप चले गए। अनिरुद्धाचार्य जी की सभा में तो आप चले गए मगर अपने गुरु के पास क्यों नहीं पहुंच पाए? वो मेरे गांव के पास में ही है। अनुदाचार्य जी वृंदावन मेरे गांव के पास में है। अच्छा नजदीक में छ महीने में छ महीने में आप फोन के माध्यम से जाकर के किसी भी प्रकार से आपको मौका नहीं मिला कि आप अपने गुरु से पूछ पाए कि जब ईश्वर अवतार नहीं ले सकता उसकी ये सीमा है तो फिर ईश्वर अनंत सामर्थ्यवान क्यों कैसे है? आपको छ महीने में इतना समय नहीं मिला। चलिए कह तो आपने कह दिया गुरु जी दे पाएंगे कह दिया आपने गुरुजी दे पाएंगे कोई बात नहीं अगली बार बात करेंगे अब बात आती है परंपरा की तो मैं ये मैं ये कह रहा हूं कि आर्य

00:10:42:21 समाज को जो वैदिक ग्रंथ है वो कैसे प्राप्त हुए ये बताइए मैं आपको अपने बारे में बताऊंगा बताऊंगा पर उसका एक क्या है ना क्लेरिफिकेशन होता है इस तरह से आर्य समाज के पास वेद कैसे आए वो ऋषि परंपरा से आए ऋषियों के द्वारा वो नाम बताइए ब्रजानंद के गुरु पूर्णानंद और दो चार गुरु और बताइए पीछे के गुरुओं का नाम बताइए क्यों आपने बता तो दिया ब्रजानंद के जो दयानंद जी के गुरु थे ब्रजानंद ब्रजानंद के पीछे पूर्णानंद थे पूर्णंद के पीछे कौन थे

00:11:19:20 ये तो ऋषियों के द्वारा आए अब तक भाई साहब नाम होता है ना कुछ कौन से ऋषि थे जिन्होंने ने पूर्णानंद को भेद दिया। अरे भाई जी एक बात बताओ आप आप जैसे शंकराचार्य जी की बात करते हो। ठीक है आज गुरु शंकराचार्य जी की बात करते हो। है ना? उनके गुरु कौन थे? आप बताओ। गोविंद योगेंद्रस अच्छा जी। अब ये बताओ जैसे बौद्ध मत का 500 ईसा पूर्व आया। उनमें उनमें कौन सी परंपरा आ रही थी? ये बताओ आप मेरे को। नारायण बता रहा हूं ना भाई सुनो। पहली बात नारायण समारंभाम शंकराचार्य मध्यमाम ये नारायण से आ रही थी ये परंपरा जो जिसका खंडन बौद्धों के काल में आके आदि शंकराचार्य जी ने किया मगर अगर यह बात मान ले कि शंकराचार्य जी की भी गुरु परंपरा पर आपको विश्वास नहीं है तो फिर ये हो जाएगा कि वैदिक वांग में अनादिन अनंत नहीं है। अभी जो 100 200 साल का इतिहास आपका है तभी रचे गए हैं। जैसे बड़े भाई जी शंकराचार्य जी ने वेदों का भाष्य शंकराचार्य जी ने वेदों का भाष्य तो किया नहीं उस वेदों का भाष्य सायन आचार्य ने तो किया उनकी परंपरा में आने वाले हो

00:12:36:02 अरे भाई आप ये बताओ दयानंद सरस्वती जी ने सब पर भाष्य किया है क्या जिसकी आवश्यकता हो रही है कर रहे हैं नहीं हो रही नहीं कर रहे फिर आगे चलकर के दोबारा जब प्रासंगिक भाषा बदल गई फिर किसी ने भाष्य किया आवश्यकता दिखाई देगी तब भाष्य करेंगे कि यूं ही भाष करते चले जाए। तो बड़े भाई जी आवश्यकता थी तभी तो दयानंद सरस्वती ने उनका वो भाष्य किया। अरे तो भाष्य किया वो जो ज्ञान था वो उनके पास आया कहां से? उनके गुरु कौन थे पूर्णानंद के?

00:13:10:28 आप बात ही नहीं समझ रहे हो। मैं तो समझने के लिए बैठा हूं। चैनल खोल रखा है। और क्यों खोला है चैनल? अरे नहीं बड़े भाई जी आप आप ये बताइए कि आपके पास जो पूर्णानंद जी हैं विजानंद जी के गुरु विजानंद जी है दयानंद सरस्वती के गुरु दयानंद जी के पास जो ज्ञान पूर्णानंद से आ रहा है पूर्णानंद जी के पास वो ज्ञान कहां से आया था? अगर वो उनके पास सुनिए अगर उनके पास अपना कोई वो नहीं है कि हमारे पास यहां से आया और जिसके पास है जो ये बता रहा है मेरे पास यहां से आया अगर उस पर विश्वास नहीं है अप्रत्यक्ष रूप से आप ये कह रहे हैं कि वेदों का अस्तित्व तब का है जब वो 100 200 साल पहले जितना आपका दयानंद जी मानते हैं। बस दयानंद जी से जो आया। दयानंद जी ने कभी वेदों का जो समय है वो 100 200 वर्ष नहीं माना। अरे भाई उनकी गुरु परंपरा क्या है? तो गुरु परंपरा क्या है? बड़े भाई जी ब्रजानंद जी थे ना जो व्याकरण के बहुत बड़े आचार्य थे। उसके अनुसार उन्होंने वेदों का वो अनुवाद किया था। क्योंकि वेदों में मैंने पूछा है ब्रजानंद जी की गुरु परंपरा क्या है?

00:14:29:01 चलो ये भी माना कि चलो गुरु परंपरा से वेद आए हैं। आपकी मेरी बात चलो मानी तो उस समय वेदों में किसने वेदों में आपको ये एन केन प्रकारनेन मानना पड़ेगा कि आपके पास जो वेद आए हैं वो इनहीं परंपराओं से आए हैं जिनका आप खंडन करते हो जिनका आप अनादर करते हो जिनको आप कोप कहते हो जिनको आप पौराणिक कहते हो जिनका मजाक उड़ाने के लिए आप उनकी सभा में जाकर के उलजूल प्रश्न करते हो उलजूल कोई प्रश्न नहीं करता बड़े भाई नहीं नहीं वो ठीक है कोई नहीं करता मैं देखूंगा आपका वो वीडियो जिसमें आप गए हैं मगर अभी फिलहाल बात मैं ये कर रहा हूं कि जिनसे आपको वेद मिले हैं उनका आप खंडन करते हो उनके प्रति अविश्वास प्रकट करते हो अब बात ये आती है कि जिनसे आपको वेद मिले हैं हां जी यदि आपको उनके ऊपर विश्वास नहीं है तो उनसे मिलने वाले वाले वेदों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता। और जिनसे मिले हुए वेदों पर विश्वास है उनके ऊपर जिनसे आपको वेद मिले हैं जिनसे मिले हुए वेदों पर विश्वास है आपको तो उन पर अविश्वास

00:15:44:16 होना आपका सिद्ध नहीं होता। तो या तो अगर गुरुओं पर विश्वास नहीं है परंपरा प्राप्त तो वेदों पर विश्वास मत करो और यदि वेदों पर विश्वास है तो गुरुओं पर विश्वास करो। आया कुछ आपके समझ में? मैं आपकी बात समझ रहा हूं। आप तो वैदिक कहते हो ना। आप कैसे सिद्ध होते हो? आप भी आप भी तो सबसे पहले देखो वेदों का अर्थ जो भी निकले वो नैतिक है अनैतिक है ये एक अलग विषय है मगर वेद जहां से आए हैं उस पर हमें भरोसा करना पड़ेगा कि इससे हमने अगर वेद लिए हैं तो ये व्यक्ति हमारे लिए विश्वास पात्र है तभी उसके द्वारा दी गई सामग्री पर विश्वास होना हमारा सिद्ध होगा तो अपने को वैदिक कहने के लिए सबसे पहले हमारी गुरु परंपरा पर हमें विश्वास होना करना होगा

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 16:41 · 30 Nov 2024

Alankar Samaj अपूर्ण ईश्वर or अधर्म ज्ञान #vedpuran #hindu #aniruddhacharyaji

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A · Live Discussion with Arya Samaj Follower आर्यसमाज का ईश्वर #aryasamaj #vedp...
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