1
00:00:06,560 --> 00:00:10,640
तो वो जो ध्यान लगाने के लिए ब्रह्मा कुमारी का जो क्या क्लेम है वहां पर ध्यान

2
00:00:10,640 --> 00:00:14,960
लगाओ तो क्या होगा इससे

3
00:00:14,960 --> 00:00:19,600
ऐसा है राजयोग ऐसा बताया जाता है वहां

4
00:00:19,600 --> 00:00:23,600
कि लाइट प्रकाश जो ईश्वर है वो

5
00:00:23,600 --> 00:00:27,680
लाइट स्वरूप है बिंदु स्वरूप है तो उसको मन में

6
00:00:27,680 --> 00:00:32,000
लाने का है वो बिंदु स्वरूप जो लाइट स्वरूप है ना ये आंखें

7
00:00:32,000 --> 00:00:36,320
बंद करके और लाइट को देखना है अंदर

8
00:00:36,320 --> 00:00:40,720
मन में तो उसमें मुझे क्या होता था कि मेरा मन शांत

9
00:00:40,720 --> 00:00:44,880
होने के बजाय और ज्यादा भारी हो जाता था क्योंकि खींचना

10
00:00:44,880 --> 00:00:48,960
पड़ता है ना और प्रकाश चला जाता है फिर

11
00:00:48,960 --> 00:00:53,120
से खींच के लाता हूं इधर प्रकाश को फिर चला

12
00:00:53,120 --> 00:00:57,440
जाता है फिर पकड़ के लाता हूं तो इतना में माइंड

13
00:00:57,440 --> 00:01:01,520
मेरा कंट्रोल होने के बावजूद वो

14
00:01:01,520 --> 00:01:04,320
मेरा मीनिंग

15
00:01:04,320 --> 00:01:08,480
और वो ज्यादा था मैं भारी भारी और मैंने मैंने आपसे ये पूछा

16
00:01:08,480 --> 00:01:12,720
मैंने आपसे ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारी जब

17
00:01:12,720 --> 00:01:16,720
आप मेडिटेशन करते हैं ब्रह्मा कुमारी में तो वो क्या

18
00:01:16,720 --> 00:01:20,960
क्लेम करता है कि इस मेडिटेशन से आपको यह मिलेगा। क्या क्लेम

19
00:01:20,960 --> 00:01:24,160
करता है?

20
00:01:24,160 --> 00:01:28,400
पहली बात तो यह जो बोलने का ऐसा बोलूंगा

21
00:01:28,400 --> 00:01:32,400
वहां कुछ प्राप्त नहीं होता छूटता है आप आप में

22
00:01:32,400 --> 00:01:37,120
छूट जाता है जो कुछ कुछ बात है जो धारण करेंगे

23
00:01:37,120 --> 00:01:41,200
ध्यान में ध्यान लगाए कुछ छोड़ना

24
00:01:41,200 --> 00:01:45,440
नहीं है वो ऑटोमेटिकली छूट जाएगा मैंने कहा आप अपनी डेफिनेशन

25
00:01:45,440 --> 00:01:49,440
मत दीजिए अभी आप हमें मुझे ब्रह्मा कुमारी का क्लेम बताइए कि

26
00:01:49,440 --> 00:01:53,680
वो मेडिटेशन करने से आपको क्या मिलता है एक

27
00:01:53,680 --> 00:01:56,800
तो परम शांति

28
00:01:56,800 --> 00:02:01,120
यह उनका क्लेम है यह उनका क्लेम है

29
00:02:01,120 --> 00:02:05,200
उनका भी है मेरा भी है उनका उनका उनका क्लेम

30
00:02:05,200 --> 00:02:09,600
क्या है वो बताइए अभी आप क्योंकि आपके थोड़े बहुत उसमें अंतर है ना कुछ ओष भी है

31
00:02:09,600 --> 00:02:13,680
कुछ बुद्ध भी बौद्ध भी है ऐसा है ना तो आप अभी केवल ब्रह्मा कुमारी

32
00:02:13,680 --> 00:02:17,600
का बता दीजिए क्या क्लेम है

33
00:02:17,600 --> 00:02:21,760
यही मन की शांति और आत्मा का जो गुण है प्रेम

34
00:02:21,760 --> 00:02:26,000
शांति आनंद पवित्रता वो सब गुण

35
00:02:26,000 --> 00:02:31,360
आत्मा का ओरिजिनल गुण है जो बाहर दिखाई देगा ध्यान करने से

36
00:02:31,360 --> 00:02:36,800
आत्मा का ओरिजिनल गुण है आत्मा का ओरिजिनल गुण है शांति

37
00:02:36,800 --> 00:02:41,360
शांति प्रेम आनंद ये आत्मा ये

38
00:02:41,360 --> 00:02:46,720
ये सब आत्मा के ओरिजिनल गुण है ठीक है अच्छा

39
00:02:46,720 --> 00:02:51,200
तो ये बताइए कि जैसे वहां पर आपको मेडिटेशन

40
00:02:51,200 --> 00:02:57,200
करने से परम शांति मिलती है। आपके घर में कौन-कौन है?

41
00:02:58,800 --> 00:03:02,880
तीन लोग, दो बच्चे, पांच लोग। बच्चे कितने बड़े

42
00:03:02,880 --> 00:03:05,840
हैं?

43
00:03:05,840 --> 00:03:10,000
छोटे। एक 11वीं पढ़ता है और एक

44
00:03:10,000 --> 00:03:14,320
छठी चरण पढ़ता है। अच्छा।

45
00:03:14,320 --> 00:03:17,600
दोनों

46
00:03:17,600 --> 00:03:22,000
बच्चे बॉयज हैं। बालक हैं। बड़ी

47
00:03:22,000 --> 00:03:26,160
लड़की है। छोटा बेटा है। बड़ी लड़की है। हां

48
00:03:26,160 --> 00:03:30,240
जी। अच्छा। तो जो जैसे बिटिया है जब बिटिया

49
00:03:30,240 --> 00:03:34,240
आपकी हुई होगी तो आपने उसको कभी गोद में लिया है? बिटिया को जैसे गोद

50
00:03:34,240 --> 00:03:38,640
में ले खिलाते हैं ना उसको कंधे पर रखा है। उसका सर रखते हैं ऐसे

51
00:03:38,640 --> 00:03:44,640
कभी तो लिया है आपने कभी?

52
00:03:44,880 --> 00:03:49,120
मेरी समझ में नहीं आता है। इस बात

53
00:03:49,120 --> 00:03:53,360
करना एक पिता अपनी बटिया को गोद में ले खिलाता

54
00:03:53,360 --> 00:03:57,680
है ना उस तरह से आपने लिया है कभी तो

55
00:03:57,680 --> 00:04:02,000
जैसे उसने तो तो जब आपने लिया होगा

56
00:04:02,000 --> 00:04:06,160
तो आपको शांति मिली थोड़ी सुख मिला था आनंद आया था उसका

57
00:04:06,160 --> 00:04:10,480
सर जब कंधे पर रखा था आएगा

58
00:04:10,480 --> 00:04:14,720
कौन बाप है जो नहीं आएगा ना गुड

59
00:04:14,720 --> 00:04:18,880
गुड अब अब ये बताइए कि इस शांति में और

60
00:04:18,880 --> 00:04:24,160
वो जो ब्रह्मा कुमारी वाली शांति है उसमें अंतर क्या है?

61
00:04:24,160 --> 00:04:27,680
जमीन आसमान का

62
00:04:27,680 --> 00:04:32,800
जमीन आसमान का वो बताइए क्या अंतर है?

63
00:04:32,800 --> 00:04:36,880
जमीन आसमान का अंतर है। अरे तो मुझे समझाइए तो कि

64
00:04:36,880 --> 00:04:40,880
वहां पर ऐसा है इसलिए वो जमीन आसमान का अंतर है।

65
00:04:40,880 --> 00:04:45,120
नहीं तो फिर तो मुझे ये मानना पड़ेगा कि वहां पे वहां पर मुझे यह मानना पड़ेगा

66
00:04:45,120 --> 00:04:49,200
कि वहां से जो शांति आ रही होती है वो नीचे से आ रही होती

67
00:04:49,200 --> 00:04:53,280
है या वहां की शांति ऊपर से आ रही होती है। यहां की शांति नीचे से आ रही होती। फिर

68
00:04:53,280 --> 00:04:57,440
तो ये मानना पड़ेगा। आप मुझे बताइए जमीन आसमान का अंतर क्या है? अब मुझे बताइए

69
00:04:57,440 --> 00:05:01,520
कि ब्रह्मा कुमारी का जो मेडिटेशन से जो आपको सुख

70
00:05:01,520 --> 00:05:05,600
मिल रहा है वह उसमें और आपकी बिटिया जब

71
00:05:05,600 --> 00:05:09,920
आपके कंधे पर सर रखी थी छोटी सी या कभी भी जब आप ऐसे आलिंगन

72
00:05:09,920 --> 00:05:14,000
करते होंगे अपने प्रियजन का तो उससे मिलने वाले सुख में और उसमें

73
00:05:14,000 --> 00:05:20,000
जो मेडिटेशन आप कर रहे हैं उससे मिलने वाले सुख में अंतर क्या है?

74
00:05:22,960 --> 00:05:27,200
मेडिटेशन करने पर जो शरीर का भाव है ना

75
00:05:27,200 --> 00:05:31,280
शरीर का भाव वो छूट जाएगा धीरे-धीरे

76
00:05:31,280 --> 00:05:35,360
छूटता जाएगा और आत्म स्वरूप में स्थित

77
00:05:35,360 --> 00:05:38,000
होता जाएगा

78
00:05:38,000 --> 00:05:42,080
वो आनंद अलग ही है ऐसा आनंद नहीं है निश्चय पर

79
00:05:42,080 --> 00:05:47,040
है आत्म स्वरूप में स्थित होता जाएगा

80
00:05:47,040 --> 00:05:51,360
हां वो आनंद निश्चय भी पर अच्छा तो

81
00:05:51,360 --> 00:05:54,320
आप जैसे

82
00:05:54,320 --> 00:05:59,520
आप इससे पहले आत्म स्वरूप में स्थित थे क्या कभी

83
00:05:59,520 --> 00:06:03,120
इससे पहले

84
00:06:03,120 --> 00:06:07,440
सर जी मैं शायद दसवीं पढ़ता होगा

85
00:06:07,440 --> 00:06:11,520
दसवीं तो दसवीं कक्षा में तब

86
00:06:11,520 --> 00:06:15,680
से इस ज्ञान मार्ग में आया हूं

87
00:06:15,680 --> 00:06:20,000
नहीं नहीं नहीं मैं कह रहा हूं अभी जब ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी से जुड़कर आप आत्म

88
00:06:20,000 --> 00:06:26,000
स्वरूप में स्थित हुए हैं। तो इससे पहले आप क्या थे?

89
00:06:26,800 --> 00:06:32,160
भक्ति मार्ग में था। उससे पहले

90
00:06:32,160 --> 00:06:36,160
भक्ति मार्ग में था। अरे उससे भी पहले भक्ति मार्ग से

91
00:06:36,160 --> 00:06:40,480
पहले बच्चा था। पहले

92
00:06:40,480 --> 00:06:45,440
की उम्र थी। उससे पहले

93
00:06:45,440 --> 00:06:49,440
उससे पहले तो जन्म ही हुआ होगा। जन्म

94
00:06:49,440 --> 00:06:52,080
से पहले

95
00:06:52,080 --> 00:06:56,240
नहीं था। जन्म से पहले आप एक्सिस्ट नहीं करते

96
00:06:56,240 --> 00:06:58,640
थे।

97
00:06:58,640 --> 00:07:01,280
हां।

98
00:07:01,280 --> 00:07:06,640
क्या मान्यता है उस बारे में? क्या मान्यता है उसकी?

99
00:07:06,640 --> 00:07:10,640
क्या मान्यता है? सर जी दूध दूध

100
00:07:10,640 --> 00:07:15,680
में घी है वो दिखाई देता है दूध में घी है

101
00:07:15,680 --> 00:07:21,600
उसमें क्या मान्यता है मैं ये कह रहा हूं मतलब आपका ये पहला जन्म है

102
00:07:21,600 --> 00:07:26,240
ये पहला जन्म है आपका हां ना

103
00:07:26,240 --> 00:07:31,120
इससे पहले मतलब आप अपने आत्म स्वरूप में थे ना

104
00:07:31,120 --> 00:07:36,560
हां हां ना थे तो फिर यहां कैसे आए

105
00:07:36,560 --> 00:07:41,200
यहां कैसे आए भाई मतलब

106
00:07:41,200 --> 00:07:46,000
आत्म स्वरूप में तो आप पहले भी थे ना

107
00:07:46,000 --> 00:07:50,080
पहले भी रह चुके हो ना आत्म स्वरूप में आप हां

108
00:07:50,080 --> 00:07:54,240
ये सुनो मेरी बात सुनो हां मेरी बात सुनो अब समझ

109
00:07:54,240 --> 00:07:59,600
गए अब आप समझ गए

110
00:07:59,600 --> 00:08:03,760
एक ये बात है जो मैं नहीं मानता कि

111
00:08:03,760 --> 00:08:08,480
जो आत्मा है भगवत गीता में शायद कहा है

112
00:08:08,480 --> 00:08:12,480
कि ऐसा भी नहीं है। अर्जुन को समझाता है ना कृष्ण ऐसा भी नहीं

113
00:08:12,480 --> 00:08:16,640
है कि पहले हम नहीं थे। मैं या तू नहीं

114
00:08:16,640 --> 00:08:22,640
था। ऐसा अर्जुन को बोलता है ना आप इस बात को

115
00:08:22,880 --> 00:08:26,960
नहीं नहीं नहीं अरे मैं ये पूछ रहा हूं आप किसी समय पे

116
00:08:26,960 --> 00:08:32,960
उस जगह पर थे जिस जगह पे आज आप जा रहे हो। ये पूछ रहा हूं।

117
00:08:33,600 --> 00:08:37,920
ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है

118
00:08:37,920 --> 00:08:42,800
उसके अनुसार आप किसी समय पर देवता थे

119
00:08:42,800 --> 00:08:46,800
ठीक है देवता से फॉल देवता से फॉल डाउन होकर के आप

120
00:08:46,800 --> 00:08:51,760
बने वो त्रेता वो द्वापर पहले आता है उनके अंत द्वापर फिर

121
00:08:51,760 --> 00:08:55,840
सतयुग त्रेता जो भी है फिर आज कलयुग में हुआ यानी कि किसी

122
00:08:55,840 --> 00:08:59,840
समय पर आप जो है उस स्टेज पर थे जिस स्टेज पर आज जाने का प्रयास कर

123
00:08:59,840 --> 00:09:04,640
रहे हो है है ना? अ

124
00:09:04,640 --> 00:09:08,800
ये तो सब आपने जान लिया ब्रह्मा कुमारी से क्या था क्या

125
00:09:08,800 --> 00:09:13,040
नहीं। मैं जो मानता हूं वही बोलूंगा मैं।

126
00:09:13,040 --> 00:09:17,120
देखिए आप जो मानते हैं वही बताइए मुझे। अभी मतलब

127
00:09:17,120 --> 00:09:21,120
यह कुल मिलाकर के ब्रह्मा कुमारी की लेखराज वाली जो थ्योरी है

128
00:09:21,120 --> 00:09:26,320
वह आपको नहीं स्वीकार है और ब्रह्मा कुमारी का जो

129
00:09:26,320 --> 00:09:30,560
ये कहने का मतलब है जो वो जो देवता थे देवता से ये बने

130
00:09:30,560 --> 00:09:35,120
ये भी आपको स्वीकार नहीं है नहीं है ना

131
00:09:35,120 --> 00:09:39,120
तो वो बताइए फिर खुल के खुल के बताइए थोड़ा थोड़ा क्लियर

132
00:09:39,120 --> 00:09:43,680
फटाफट चलिए ना स्ट्रेट रहिए थोड़ा बातों जी क्या

133
00:09:43,680 --> 00:09:47,840
क्या जानना चाहते हो देवताओं ब्रह्मा कुमारी

134
00:09:47,840 --> 00:09:48,720
ब्रह्मा कुमारी

135
00:09:48,720 --> 00:09:52,720
के अनुसार आज आप देवत्व को प्राप्त करने पहले

136
00:09:52,720 --> 00:09:56,720
देवता रह चुके हैं ना अरे भाई ब्रह्मा कुमारी के हां तो

137
00:09:56,720 --> 00:10:00,880
वो जो फॉल डाउन होता है कि आज आप कलयुग में है और निकृष्ट जीव की

138
00:10:00,880 --> 00:10:05,200
जीवन को जी रहे हैं देवताओं की कंपेरेटिवली वो फॉल डाउन कैसे हुआ कारण क्या है उसका

139
00:10:05,200 --> 00:10:11,200
देवता पद से नीचे उतरे उसकी बात कर रहे हो ना हां

140
00:10:11,440 --> 00:10:15,600
हां तो हर युग अपना काम करती

141
00:10:15,600 --> 00:10:19,760
सतयुग उसका काम करता है। आत्मा प्योर होती है। इसके बाद

142
00:10:19,760 --> 00:10:23,760
त्रेता युग आता है। थोड़ी कला कम होती है।

143
00:10:23,760 --> 00:10:28,000
इधर द्वापर युग आता है। कम होती है। कला कम होती है। कला

144
00:10:28,000 --> 00:10:32,160
कम होती है और थोड़े अवगुण भी बढ़ते हैं कि पाप कर्म इत्यादि। हां

145
00:10:32,160 --> 00:10:36,240
जी। बढ़ते हैं ना द्वापर से। बढ़ते हैं। ठीक। गुड।

146
00:10:36,240 --> 00:10:40,560
द्वापर से इसका मतलब ये कहा जा सकता है हमारे हमारे

147
00:10:40,560 --> 00:10:44,800
शास्त्र ऐसा बोलता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण का

148
00:10:44,800 --> 00:10:49,120
जन्म बोलता है ना मैं मैं शास्त्र की बात अभी कर ही नहीं रहा अभी मैं शास्त्र

149
00:10:49,120 --> 00:10:53,200
की बात कर ही नहीं रहा हूं मैं तो आपकी केवल थ्योरी समझने का प्रयास कर रहा हूं शास्त्र की बात

150
00:10:53,200 --> 00:10:57,280
जब जब मैं पूछू आपसे प्रमाण तो दे दीजिएगा अभी तो

151
00:10:57,280 --> 00:11:01,360
मैं केवल आपकी मान्यता समझने का प्रयास कर रहा हूं कि आपकी जो मान्यता

152
00:11:01,360 --> 00:11:03,840
है कहने का अर्थ यह है कि आपका जो

153
00:11:03,840 --> 00:11:09,840
फॉल डाउन हुआ है वो पाप की वजह से हुआ है

154
00:11:10,080 --> 00:11:14,080
ना ठीक हैस अभी आप अभी आपने

155
00:11:14,080 --> 00:11:18,240
कहा था कि जो आत्मा का मूल स्वरूप है

156
00:11:18,240 --> 00:11:22,320
है ना मूल जो गुण है मौलिक गुण आत्मा के वो

157
00:11:22,320 --> 00:11:25,280
है

158
00:11:25,280 --> 00:11:29,280
प्रेम शांति और जितनी भी अच्छी अच्छी चीजें हो सकती है वो सब

159
00:11:29,280 --> 00:11:33,360
ना ये मूल हैस ठीक है इसका

160
00:11:33,360 --> 00:11:38,080
मतलब किसी समय पर ये गुण आत्मा में नहीं थे।

161
00:11:38,080 --> 00:11:43,120
कुछ समय ऐसा कोई ना कोई समय ऐसा होता है। अच्छा

162
00:11:43,120 --> 00:11:47,920
तो जब जब आप यानी कि वही मेरी बात सुनो वही

163
00:11:47,920 --> 00:11:52,160
रहा हूं। लेकिन एक मिनट मैं क्लियर कर

164
00:11:52,160 --> 00:11:56,320
यानी कि जब आप जो देवत्व को प्राप्त वाला है तब भी आप

165
00:11:56,320 --> 00:12:01,360
में यह सब बुराइयां थी।

166
00:12:01,360 --> 00:12:05,360
तब नहीं थी।

167
00:12:05,360 --> 00:12:09,440
यानी कि यानी कि एक समय ऐसा यानी कि एक

168
00:12:09,440 --> 00:12:14,960
समय ऐसा होता है जब यह सब बुराइयां आत्मा में नहीं होती है।

169
00:12:14,960 --> 00:12:19,280
हां प्योर होती है। गुड बहुत बढ़िया। बहुत अच्छे। उसका

170
00:12:19,280 --> 00:12:23,600
आप ये बताइए वातावरण पॉजिटिव होता है ना। हां।

171
00:12:23,600 --> 00:12:27,680
ठीक है। ठीक है। तो एक समय ऐसा होता है जब

172
00:12:27,680 --> 00:12:31,680
ये बुरे विचार पाप कर्म के विचार इत्यादि नहीं होते

173
00:12:31,680 --> 00:12:35,120
आत्मा में। यह क्लियर है

174
00:12:35,120 --> 00:12:39,200
नहीं होता है ये क्लियर है ना

175
00:12:39,200 --> 00:12:43,520
ये ये क्लियर है हां ठीक अब ये बात है कि ये जो विचार

176
00:12:43,520 --> 00:12:46,000
है विचार

177
00:12:46,000 --> 00:12:51,600
को धारण कौन विचार को धारण कौन कर सकता है

178
00:12:51,600 --> 00:12:56,080
कोई चेतन तत्व एक मिनट जो विचार है

179
00:12:56,080 --> 00:13:00,240
एक एक मिनट भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं जो विचार है विचार चाहे

180
00:13:00,240 --> 00:13:04,560
अच्छे हो चाहे बुरे हो कुछ भी विचार जो विचार करने की प्रवृत्ति

181
00:13:04,560 --> 00:13:10,560
या कुछ भी यह इसको धारण कोई चेतन तत्व ही कर सकता है ना

182
00:13:11,440 --> 00:13:17,440
कर सकता तो कौन कौन करता है धारण

183
00:13:17,760 --> 00:13:22,640
फोन में कौन सब संग्रह करता है फोन हमारा होता है

184
00:13:22,640 --> 00:13:26,640
उसमें संग्रह करने की चीज क्या होती है सर मेमोरी कार्ड

185
00:13:26,640 --> 00:13:30,640
होता है मोबाइल के अंदर मेमोरी कार्ड होता है मेमोरी कार्ड होता है तो इसमें

186
00:13:30,640 --> 00:13:35,520
सूक्ष्म शरीर शरीर को कैसे भूल गई आप?

187
00:13:35,520 --> 00:13:38,560
अरे भैया

188
00:13:38,560 --> 00:13:42,640
मैं ये कह रहा हूं ये जो बुराई है बुराई ठीक

189
00:13:42,640 --> 00:13:46,800
है बुराई या अच्छाई इसको सूक्ष्म शरीर को धारण

190
00:13:46,800 --> 00:13:52,640
कौन करता है?

191
00:13:52,640 --> 00:13:56,720
आत्मा तो है ही उसका कटका नहीं हो सकता। कट नहीं

192
00:13:56,720 --> 00:14:00,960
हो सकता। बिंदु स्वरूप नहीं हो सकता। भाई साहब आप आप मेरी

193
00:14:00,960 --> 00:14:05,040
बात सुनिए संजय जी हम लोग थोड़ा सा स्ट्रेट और जो टू द

194
00:14:05,040 --> 00:14:09,360
पॉइंट मैटर चल रहा है उस पर थोड़ा सा बात करें। आपने कहा आत्मा

195
00:14:09,360 --> 00:14:14,000
जो है उसका जो मौलिक स्वरूप है वो शांति इत्यादि है।

196
00:14:14,000 --> 00:14:18,160
ठीक है? ये सब भी शांति और ये प्रेम करुणा ये

197
00:14:18,160 --> 00:14:23,040
सब भी विचार ही है ना। विचार है ना यह सब भी

198
00:14:23,040 --> 00:14:27,040
आत्मा सबसे पहले अच्छे विचार धारण कर रही है तो आपका स्टेटमेंट तो गलत

199
00:14:27,040 --> 00:14:31,040
हो रहा है कि विचार धारण नहीं करती आत्मा आत्मा

200
00:14:31,040 --> 00:14:35,440
नहीं करती सूक्ष्म शरीर करती है आत्मा तो

201
00:14:35,440 --> 00:14:39,440
बॉडी छूट जाने आत्मा शुद्ध है आत्मा

202
00:14:39,440 --> 00:14:44,320
तो शुद्ध है उसमें कोई विचार है ही नहीं सूक्ष्म

203
00:14:44,320 --> 00:14:48,800
ही नहीं विचार है ही नहीं अरे विचार है ही नहीं

204
00:14:48,800 --> 00:14:52,880
विचार है ही नहीं विचार है ही नहीं ना। हां गुड तो

205
00:14:52,880 --> 00:14:57,040
है ही नहीं वो तो शुद्ध है। कोई विचार कोई विचार नहीं है। इस

206
00:14:57,040 --> 00:15:01,120
थोड़ा सा मैं कंफ्यूज अरे भाई आप मेरी बात भी तो सुनो।

207
00:15:01,120 --> 00:15:05,200
मैंने मांगा आपसे प्रमाण। मैं कुछ और पूछना चाह रहा हूं। आप कहीं

208
00:15:05,200 --> 00:15:07,920
और ले जाना चाह रहे हैं। बात ये है। मैं

209
00:15:07,920 --> 00:15:12,240
ये पूछ रहा हूं। आपने अभी थोड़ी देर पहले ये कह दिया था ना कि आत्मा

210
00:15:12,240 --> 00:15:16,320
का मूल जो गुण है वो शांति इत्यादि है। ये आपने थोड़ी देर

211
00:15:16,320 --> 00:15:20,720
पहले कहा था। अब आप कह रहे हो नहीं आत्मा तो इससे भी फ्री है।

212
00:15:20,720 --> 00:15:25,440
यह सब तो सूक्ष्म शरीर धारण करता है।

213
00:15:25,440 --> 00:15:29,600
नहीं वो विचार की बात कर रहे हो ना विचार नहीं है। ये ये विचार

214
00:15:29,600 --> 00:15:33,680
नहीं बोल सकते। क्या है? उसका ओरिजिनल गुण है।

215
00:15:33,680 --> 00:15:38,400
आत्मा मतलब एक ऐसी ऊर्जा जो

216
00:15:38,400 --> 00:15:42,640
मात्र अस्तित्व को दिखाता है। उसमें कोई दाग नहीं लगता। विचार

217
00:15:42,640 --> 00:15:46,960
नहीं रहता। अरे भाई अरे भाई किस जब हम किसी को प्रेम

218
00:15:46,960 --> 00:15:51,040
कह रहे हैं प्रेम कर रहे हैं तो प्रेम की भावना आ गई ना मन में विचार हो गया ना

219
00:15:51,040 --> 00:15:56,240
ये प्रेम किसको करोगे आप

220
00:15:56,240 --> 00:16:00,320
प्रेम करोगे ना प्रेम की भावना हो गई ना मन में विचार ही तो है क्या है

221
00:16:00,320 --> 00:16:04,480
ये जो आप समझ लो वही है गुण है गुण है पर

222
00:16:04,480 --> 00:16:07,680
गुण है ना

223
00:16:07,680 --> 00:16:11,760
आत्मा का ओरिजिनल सनातन है वो तो अरे भाई

224
00:16:11,760 --> 00:16:15,840
मैं कहा मैं वो तो वो तो मैंने आपसे

225
00:16:15,840 --> 00:16:19,920
पूछा है आत्मा मिटती है कि नहीं मिटती? बात ये चल रही है कि

226
00:16:19,920 --> 00:16:24,000
आत्मा ये जो विचार वैचारिक जो चीजें हैं विचार वैचारिक

227
00:16:24,000 --> 00:16:28,000
सामग्री इनके बिना आत्मा का अस्तित्व हो सकता है। सीधी बात

228
00:16:28,000 --> 00:16:32,000
यह है तो इनका इनका अस्तित्व ये एक्सिस्ट कहां

229
00:16:32,000 --> 00:16:36,400
पर करते हैं? जो किसी समय पे आत्मा के साथ कनेक्ट हो जाते हैं।

230
00:16:36,400 --> 00:16:40,480
जैसे आपने कहा कि एक समय पे आपके पास ये सब चीजें नहीं थी। आप

231
00:16:40,480 --> 00:16:44,560
फ्री थे, शुद्ध थे। फिर फिर समय के साथ यह चीजें आपके साथ

232
00:16:44,560 --> 00:16:48,640
कनेक्ट हो गई। चाहे अच्छे विचार हो, चाहे बुरे विचार। तो बुरे विचार

233
00:16:48,640 --> 00:16:52,720
की मैं बात कर रहा हूं। यह कहां पर स्थित थे जो समय आने पर आपके पास

234
00:16:52,720 --> 00:16:56,880
आ गए? उनका अधिष्ठान क्या है बुरे विचारों

235
00:16:56,880 --> 00:17:00,960
का? सर वही तो बताने की कोशिश कर

236
00:17:00,960 --> 00:17:05,120
रहा हूं। आप सुनोगे तब ना। ठीक है।

237
00:17:05,120 --> 00:17:11,120
सुनोगे? ठीक है।

238
00:17:11,440 --> 00:17:15,520
गीता में कहा है ना आप मुझसे शास्त्र का

239
00:17:15,520 --> 00:17:19,680
नाम मत लीजिए अभी आप केवल अपनी मान्यता बताते जाइए मैं आपसे पूछ लूंगा

240
00:17:19,680 --> 00:17:25,680
बाद में शास्त्र का नाम

241
00:17:25,760 --> 00:17:31,760
आप सबूत वहां तो ढूंढ रहे हो शास्त्र

242
00:17:33,440 --> 00:17:38,400
सबूत वही था ढूंढ रहे मैंने कहा मैंने कहा कि

243
00:17:38,400 --> 00:17:42,640
अगर आप यह मानते हैं कि आत्मा कभी इन चीजों से मुक्त रह सकती

244
00:17:42,640 --> 00:17:46,800
है। जो आपने बुराइयां बुराइयां

245
00:17:46,800 --> 00:17:50,800
बताई है इन चीजों से आत्मा किसी ना कभी मुक्त रह सकती है। शुद्ध

246
00:17:50,800 --> 00:17:55,520
स्वरूप उस समय उसके पास प्रेम शांति इत्यादि होता है गुण। ठीक है?

247
00:17:55,520 --> 00:18:00,080
तो यह जो विचार वैचारिक सामग्री है पाप करने की प्रवृत्ति

248
00:18:00,080 --> 00:18:04,160
बुराई किसी के बारे में घृणा यह सब यह एक्सिस्ट

249
00:18:04,160 --> 00:18:08,160
कहां पर करता है? जो समय आने पर आ जाता है आत्मा के

250
00:18:08,160 --> 00:18:10,640
अंदर।

251
00:18:10,640 --> 00:18:14,720
इसके धारक तत्व क्या है? अरे भैया मैं पूछ

252
00:18:14,720 --> 00:18:18,720
रहा हूं क्या आपसे? अचल वचल क्यों बोल रहे हो? आप सीधे बात करो ना ये वाला

253
00:18:18,720 --> 00:18:24,480
तत्व यहां पे रहता है वो और समय आने पे आत्मा के साथ आ जाता है।

254
00:18:24,480 --> 00:18:27,280
अब बोलने ही नहीं देता। क्या बोलूं? ब्रह्मकुमारी

255
00:18:27,280 --> 00:18:31,360
वाला तर्क नहीं करता है। इतना बहुत कम बोलता है।

256
00:18:31,360 --> 00:18:34,400
आप बताइए।

257
00:18:34,400 --> 00:18:38,480
बोलने दोगे तो बोलूंगा वरना लेफ्ट हो जाएगा। आप अगर आप अगर आप

258
00:18:38,480 --> 00:18:42,800
अगर बेकार की चीजें बोलेंगे तो आपका स्वागत है। आप लेफ्ट हो सकते हैं। आप मैंने

259
00:18:42,800 --> 00:18:46,960
आपने अभी बोला आत्मा अचल है। मैंने पूछा है कि आपसे कि वो चलती

260
00:18:46,960 --> 00:18:51,520
है कि नहीं चलती है। मूवमेंट करती है कि नहीं करती है? बताइए।

261
00:18:51,520 --> 00:18:55,760
क्यों बोल रहा अचल? हां। बोल रहा हूं। आप सुनोगे

262
00:18:55,760 --> 00:18:59,840
तब ना। देखा मैंने अभी अभी प्रश्न। अब मैं

263
00:18:59,840 --> 00:19:03,840
एक एक मैं एक क्लियर प्रश्न एक मिनट आपने अभी एक मैं एक क्लियर

264
00:19:03,840 --> 00:19:08,240
प्रश्न आपसे कर रहा हूं। ध्यान से सुनिए। मैंने आपसे पूछा था कि आत्मा

265
00:19:08,240 --> 00:19:14,000
मूवमेंट करती है कि नहीं करती है? पूछा था

266
00:19:14,000 --> 00:19:18,160
तो मेरा जवाब में पहले आत्मा ही आना चाहिए। शब्द

267
00:19:18,160 --> 00:19:22,560
ऐसा जरूरी तो नहीं है। आत्मा को समझाने के लिए मुझे मुझे

268
00:19:22,560 --> 00:19:26,640
आप आप मुझे अचल है। क्यों बता रहे हैं? आप जो

269
00:19:26,640 --> 00:19:30,640
विषय से संबंधित जो बात चल रही है वो बताइए। अचल है से क्या मतलब है? और

270
00:19:30,640 --> 00:19:36,640
अगर आप बताएंगे तो मैं टोकूंगा। चलिए बताइए।

271
00:19:39,040 --> 00:19:44,400
वो अचल अडोल है आत्मा और जो हिलता है

272
00:19:44,400 --> 00:19:48,640
आता है वो सूक्ष्म शरीर आता है और उसमें ही विकारों से भरे

273
00:19:48,640 --> 00:19:53,120
होता है। हमारे पूर्व जन्मों का जो भी आप मानते हैं सूक्ष्म

274
00:19:53,120 --> 00:19:57,680
शरीर में वो एक मुख से दूसरी योनि में जाता है।

275
00:19:57,680 --> 00:20:01,840
एक योनि से दूसरी, दूसरी से तीसरी। ये

276
00:20:01,840 --> 00:20:06,240
आवागमन करती है। आत्मा तो स्थिर है। उसका कटका

277
00:20:06,240 --> 00:20:09,120
नहीं हो सकता।

278
00:20:09,120 --> 00:20:13,120
ठीक है। समझ रहे हो आप? समझ गया।

279
00:20:13,120 --> 00:20:17,120
आपने जो कहा आप जो कहना आप जो कहना चाह रहे हो वो मैं सुन

280
00:20:17,120 --> 00:20:21,200
लिया समझ गया। अब मैं उसमें और क्लिटी चाहता हूं। यह सूक्ष्म शरीर

281
00:20:21,200 --> 00:20:25,280
किस तत्व से बना होता है? प्रकृति से बना होता है या अपने

282
00:20:25,280 --> 00:20:29,360
आप में एक स्वतंत्र रूप से एक तत्व है सूक्ष्म शरीर

283
00:20:29,360 --> 00:20:34,160
नहीं नहीं यह बोल सकते हैं हम

284
00:20:34,160 --> 00:20:39,520
वो कॉस्मिक एनर्जी वाला

285
00:20:39,520 --> 00:20:43,840
कॉस्मिक एनर्जी हां जी इसको समझाइए

286
00:20:43,840 --> 00:20:47,680
थोड़ा सा

287
00:20:47,680 --> 00:20:52,400
लाइट की बिजली को कैसे समझाओगे

288
00:20:52,400 --> 00:20:56,560
लाइट की बिजली है। नहीं नहीं उसकी व्याख्या

289
00:20:56,560 --> 00:21:01,200
करनी है तो कैसे समझाओगे?

290
00:21:01,200 --> 00:21:05,600
लाइट की बिजली की व्याख्या करनी है। लाइट की बिजली

291
00:21:05,600 --> 00:21:09,600
कैसे दिखाओगे? नहीं नहीं बिजली बोल रहा हूं। मैंने

292
00:21:09,600 --> 00:21:15,600
मैंने दिखाने की बात कही है। मैंने कहने की बात कही है।

293
00:21:15,680 --> 00:21:19,680
देखिए आप तो पता चलेगा। मेरी बात सुनिए। मेरी

294
00:21:19,680 --> 00:21:23,680
बात सुनिए। मैंने आपसे पूछा है कि यह जो यह

295
00:21:23,680 --> 00:21:27,760
जो सूक्ष्म शरीर है यह बना किस चीज से

296
00:21:27,760 --> 00:21:31,920
होता है? तो इसमें जड़ प्रकृति का मटेरियल

297
00:21:31,920 --> 00:21:35,920
यूज किया जाता है। या फिर हम ये मान ले कि पर

298
00:21:35,920 --> 00:21:41,200
एक मिनट एक मिनट एक मिनट या फिर हम यह मान लें कि परमात्मा

299
00:21:41,200 --> 00:21:44,960
और आत्मा और

300
00:21:44,960 --> 00:21:48,960
प्रकृति इसके अलावा एक तत्व और है जिससे कि सूक्ष्म शरीर बना

301
00:21:48,960 --> 00:21:54,960
है। सीधी बात एक तत्व और एक्सिस्ट करता है।

302
00:21:56,000 --> 00:22:00,320
सर पहली बात तो यह है कि मन बुद्धि से पर है।

303
00:22:00,320 --> 00:22:04,720
मनुष्य बुद्धि नहीं कह सकती इसकी व्याख्या। मतलब

304
00:22:04,720 --> 00:22:07,360
आपको नहीं पता।

305
00:22:07,360 --> 00:22:11,360
आपको नहीं पता। किसी को पता नहीं रहेगा। इसका किसी को भी मतलब ब्रह्मा

306
00:22:11,360 --> 00:22:15,360
कुमारी के पास ये ज्ञान नहीं है। नहीं नहीं

307
00:22:15,360 --> 00:22:19,600
किसी के पास। ठीक है। कोई बात आप ये मुझे

308
00:22:19,600 --> 00:22:25,200
वो किसी किसी के पास होगा कि नहीं होगा? मैं ये पूछ रहा हूं

309
00:22:25,200 --> 00:22:29,440
भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं। ब्रह्मा कुमारी का ये क्लेम गलत हो गया ना कि तीन ही तत्व है। जीव

310
00:22:29,440 --> 00:22:33,680
प्रकृति और आत्मा परमात्मा जीव और प्रकृति ये तीन तत्व

311
00:22:33,680 --> 00:22:38,080
मानती है। आप एक चीज चौथा और बता रहे हो। सूक्ष्म शरीर और उसका उपादान

312
00:22:38,080 --> 00:22:42,320
आप बता नहीं रहे हो। वो तो अपने आप में मान लेता हूं। सूक्ष्म शरीर अपने आप में एक शाश्वत

313
00:22:42,320 --> 00:22:46,560
तत्व है। और दुनिया भर में जितनी आत्माएं उन सबका सूक्ष्म

314
00:22:46,560 --> 00:22:52,560
शरीर एक्सिस्ट करता है। शाश्वत

315
00:22:52,960 --> 00:22:57,280
हां जी और एक और एक बात इससे जुड़ी है बोल देता

316
00:22:57,280 --> 00:23:01,600
हूं कि मनुष्य शरीर का जो सूक्ष्म शरीर

317
00:23:01,600 --> 00:23:05,680
होता है ना वो मनुष्य योनि में ही जाते हैं। हां

318
00:23:05,680 --> 00:23:09,680
स्त्री पुरुष हो सकते हैं दूसरे जन्म लेकिन वो बिल्ली

319
00:23:09,680 --> 00:23:13,760
कुत्ता कोई पशु पक्षी उसमें एडजस्ट

320
00:23:13,760 --> 00:23:18,560
नहीं करते हैं। मतलब सूक्ष्म शरीर एक ऐसा तत्व है

321
00:23:18,560 --> 00:23:22,560
जिसकी अपनी चेतना होती है जिस कारण से वह बुराई और अच्छाई के

322
00:23:22,560 --> 00:23:26,880
विचारों को अपने पास स्टोर कर सकता है। सूक्ष्म

323
00:23:26,880 --> 00:23:30,880
शरीर वो वही वही मेमोरी कार्ड है। वही आती

324
00:23:30,880 --> 00:23:36,720
जाती है। यानी वो चेतन सत्ता है।

325
00:23:36,720 --> 00:23:41,200
चेतन सत्ता तो आत्मा को बोलेगा। चेतन सत्ता

326
00:23:41,200 --> 00:23:45,280
इससे एक्सेस करती है आत्मा से आत्मा है तो वह काम कर सकती

327
00:23:45,280 --> 00:23:49,440
है वरना तो मैंने इसीलिए पूछा है ये जो बुराई

328
00:23:49,440 --> 00:23:53,600
और अच्छाई है ये विचार है इसको धारण वो कर सकता है जो चेतन हो इसको

329
00:23:53,600 --> 00:23:57,840
जड़ तो धारण कर नहीं सकता जो चेतन नहीं वो जड़ हुआ आप कह रहे हो वो जड़ नहीं

330
00:23:57,840 --> 00:24:01,840
है जड़ नहीं तो चेतन है नहीं तो क्या है आप बता दो

331
00:24:01,840 --> 00:24:05,920
नहीं आत्मा की व्याख्या नहीं हो सकती इसकी व्याख्या सिर्फ इतनी हो सकती है

332
00:24:05,920 --> 00:24:10,080
कि वो हां हां वो वो वो पूर्ण ज्ञान भी

333
00:24:10,080 --> 00:24:14,800
नहीं कहेंगे उसको उसको पूर्ण अज्ञानी भी नहीं कहेंगे उसको

334
00:24:14,800 --> 00:24:20,800
पूर्ण प्रकाश भी मैं समझ गया मैं समझ गया इसको इसको पूर्ण भी नहीं

335
00:24:20,960 --> 00:24:25,200
इसको दूसरी तरीके से समझ लेते हैं तो अभी जब आपने कहा कि आत्मा अपने मौलिक स्वरूप

336
00:24:25,200 --> 00:24:29,360
में जा रही होती है तो आपने यह माना कि आपका कभी

337
00:24:29,360 --> 00:24:33,360
ऐसा होगा जब आप सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे और या

338
00:24:33,360 --> 00:24:38,240
फिर आपका जो एंडिंग पॉइंट है वो यही है कि सूक्ष्म शरीर के साथ तो हमेशा रहोगे

339
00:24:38,240 --> 00:24:44,240
ऐसा है क्या? सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे। ऐसा होता है

340
00:24:46,800 --> 00:24:50,960
आत्मा तो हिलेगी नहीं। सूक्ष्म शरीर ही अवर करता है। आत्मा उसमें

341
00:24:50,960 --> 00:24:55,040
भी है लेकिन उसका नहीं हो सकता। भाई साहब मैंने

342
00:24:55,040 --> 00:24:59,040
क्या समझा नहीं? मैंने कहा कि अभी आपने

343
00:24:59,040 --> 00:25:03,440
ये बात कही थी कि भाई जो आत्मा का मौलिक स्वरूप है ना उसमें

344
00:25:03,440 --> 00:25:07,600
शांति इत्यादि है। है ना? और जब हम मेडिटेशन करते हैं तो जो मौलिक

345
00:25:07,600 --> 00:25:11,840
स्वरूप है वो हम प्राप्त करने लगते हैं अपना। ठीक है? हां जी।

346
00:25:11,840 --> 00:25:15,840
यही गाना आपने। इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं। इसके बाद हम इस

347
00:25:15,840 --> 00:25:20,480
पे आ जाते हैं कि अ

348
00:25:20,480 --> 00:25:24,720
इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं कि आपने यह माना कि ये जो वैचारिक

349
00:25:24,720 --> 00:25:28,720
सामग्री है इसको धारण करता है सूक्ष्म शरीर। अब वो सूक्ष्म शरीर

350
00:25:28,720 --> 00:25:32,880
चेतन है। जड़ है। ये मैं नहीं कह सकता। हां चेतन आप उसे मानते नहीं। जड़ उसे

351
00:25:32,880 --> 00:25:37,040
आप मानते नहीं। आप क्या मानते हो वह तो आप बता नहीं पा रहे हो बात एक अलग है

352
00:25:37,040 --> 00:25:41,520
मगर फिर भी यह वैचारिक जो चीजें हैं वैचारिक सामग्री

353
00:25:41,520 --> 00:25:46,400
यह धारण करता है सूक्ष्म शरीर तो अब मैं यह पूछ रहा हूं कि

354
00:25:46,400 --> 00:25:50,560
आपने जो कहा कि ध्यान करने से आत्मा मौलिक स्वरूप में स्थापित होने

355
00:25:50,560 --> 00:25:54,720
लगती है स्थित होने लगती है तो मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के बिना वाला मौलिक

356
00:25:54,720 --> 00:26:00,720
स्वरूप या मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के साथ वाला मौलिक स्वरूप

357
00:26:00,880 --> 00:26:04,720
किसको कह रहे हैं मौलिक स्वरूप

358
00:26:04,720 --> 00:26:09,200
आप मौलिक किसे कह रहे हो? ओरिजिनल

359
00:26:09,200 --> 00:26:15,200
जो उसका वास्तविक स्वरूप है।

360
00:26:16,960 --> 00:26:22,320
मतलब सूक्ष्म शरीर के बिना भी उस आत्मा एक्सिस्ट करती है ना।

361
00:26:22,320 --> 00:26:26,720
हां जी। ये हो गया। यानी कि यह जो सारी गंदगी

362
00:26:26,720 --> 00:26:31,360
है यह शरीर में होती है सूक्ष्म शरीर में और

363
00:26:31,360 --> 00:26:35,680
आत्मा जो है आप जब ध्यान लगाते हैं तो आप जो है अपने सारे शरीरों

364
00:26:35,680 --> 00:26:39,680
से मुक्त हो के सूक्ष्म शरीर के वो आपने मौलिक स्वरूप में

365
00:26:39,680 --> 00:26:44,800
जाकर के वो भोगते हैं। क्या कहते हैं?

366
00:26:44,800 --> 00:26:49,520
ठीक है। ठीक है ना? हां। तो

367
00:26:49,520 --> 00:26:53,600
अब इसमें बहुत सारे प्रश्न हो जाते हैं। मगर मैं जो मेरा जो मुख्य विषय चल रहा है

368
00:26:53,600 --> 00:26:57,600
कि बुराई उसके अंदर आई कहां से? मैं उस पर ही रहता हूं। तो अब

369
00:26:57,600 --> 00:27:01,760
आप यह बताइए कि आत्मा सूक्ष्म शरीर जब सूक्ष्म शरीर में आने से ही पाप आना

370
00:27:01,760 --> 00:27:06,160
है तो सूक्ष्म शरीर से आत्मा कनेक्ट क्यों हो रही है?

371
00:27:06,160 --> 00:27:10,240
कौन कर रहा है कनेक्ट? उसे एक तरीके से मान लीजिए कि

372
00:27:10,240 --> 00:27:14,720
ये जो बुराई है वो सूक्ष्म शरीर में रहती है और सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म

373
00:27:14,720 --> 00:27:16,080
शरीर से आत्मा को जोड़

374
00:27:16,080 --> 00:27:20,160
के आत्मा को पापी जो बुराई करने की वो है

375
00:27:20,160 --> 00:27:24,320
दे दी जाती है तो कौन कर रहा है ये अरे वो

376
00:27:24,320 --> 00:27:29,520
खुद पे ही करता है सूक्ष्म उसका संस्कार

377
00:27:29,520 --> 00:27:33,600
उसका संस्कार खुद से ही करता है कि मुझे समझ गया मैं समझ गया मैं

378
00:27:33,600 --> 00:27:37,840
थोड़े से समझ जाता हूं भाई साहब इतना सा बोलते मैं समझ जाता हूं खुद से करता

379
00:27:37,840 --> 00:27:42,000
है बस समझ गया हां अब इसमें आगे चलते हैं इसका

380
00:27:42,000 --> 00:27:45,040
मतलब

381
00:27:45,040 --> 00:27:49,680
यानी कि उसको मालूम है कि उसमें में जाकर के मैं पापी बन जाऊंगा

382
00:27:49,680 --> 00:27:54,320
और फिर भी वह उससे जुड़ता है खुद से। अरे

383
00:27:54,320 --> 00:28:00,320
उसका संस्कार ही ऐसा है ना वो पवित्र पवित्र शरीर

384
00:28:00,480 --> 00:28:04,720
उसका संस्कार ऐसा है कि उसको मालूम है कि वो पाप से जुड़कर के सूक्ष्म

385
00:28:04,720 --> 00:28:10,720
शरीर से जुड़कर के पापी बन जाएगा। मगर फिर भी वो उससे जुड़ता है।

386
00:28:10,880 --> 00:28:15,120
नहीं नहीं पापी तो है ऑलरेडी। वो पाप को लेकर ही जाता है दूसरे शरीर

387
00:28:15,120 --> 00:28:19,280
में। यानी आत्मा जब सूक्ष्म जब

388
00:28:19,280 --> 00:28:25,280
सूक्ष्म शरीर से अलग है तब भी आत्मा पापी होती है। पाप होते हैं उसके पास।

389
00:28:25,360 --> 00:28:29,360
हां सूक्ष्म शरीर में रहता है। अरे [हंसी] भाई साहब

390
00:28:29,360 --> 00:28:33,360
मैंने कहा मैंने कहा सूक्ष्म शरीर से जब आत्मा अलग हो

391
00:28:33,360 --> 00:28:38,800
गई है तब उसके पास पाप है कि नहीं है?

392
00:28:38,800 --> 00:28:44,160
आत्मा में बोल रहे हो आत्मा में। हां हां

393
00:28:44,160 --> 00:28:48,160
आत्मा में कहां पाप रहेगा? आत्मा नहीं रहेगा वो तो शुद्ध है। तो

394
00:28:48,160 --> 00:28:52,480
अब अब आप ये अब आप ये मुझे बताइए सुनिए सुनिए मैं मैं बताऊं

395
00:28:52,480 --> 00:28:56,560
मान लीजिए ये हो गई आत्मा इसको मानिए आत्मा

396
00:28:56,560 --> 00:29:00,560
है और ये उसका सूक्ष्म शरीर है। सूक्ष्म शरीर में पाप

397
00:29:00,560 --> 00:29:04,960
है। ठीक है? इससे जोड़कर के पापी हो जाएगी आत्मा। तो आत्मा

398
00:29:04,960 --> 00:29:10,960
को पाप इस सूक्ष्म शरीर से कौन जोड़ रहा है? क्यों जोड़ रही है वो?

399
00:29:10,960 --> 00:29:14,560
जब वो इधर पापी हो रही तो

400
00:29:14,560 --> 00:29:18,720
नहीं नहीं पापी हो जाएगी ऐसा नहीं वो पाप लेकर जाती है उसका

401
00:29:18,720 --> 00:29:22,880
मन है ना वो मन ही मान लो सूक्ष्म शरीर जो है उसका संस्कार भर

402
00:29:22,880 --> 00:29:26,160
के दूसरे शरीर जाती है अभी वो सूक्ष्म शरीर

403
00:29:26,160 --> 00:29:30,160
से अलग है मैं क्या पूछ रहा हूं अभी वो सूक्ष्म शरीर से अलग है ना

404
00:29:30,160 --> 00:29:36,160
आत्मा मैं तब की बात कर रहा हूं

405
00:29:36,320 --> 00:29:42,320
सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट क्यों हो रही है आत्मा

406
00:29:44,000 --> 00:29:49,040
भैया आपको एक तो पूर्ण मूर्ख मिले या तो पूर्ण ज्ञानी मिले।

407
00:29:49,040 --> 00:29:55,040
मेरे जैसा बच्चे का नहीं मिला आपको। आप जा सकते हैं।

408
00:29:55,600 --> 00:30:01,440
यह सवाल मैं क्यों पूछ रहा हूं वो आप लोग समझ लीजिए।

409
00:30:01,440 --> 00:30:07,440
आप जा सकते हैं। भाई साहब मैं समझ गया आपका आंसर क्या है।

410
00:30:09,920 --> 00:30:15,440
यह सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि

411
00:30:15,440 --> 00:30:19,680
यह लोग यह कहते हैं कि आत्मा का जो मूल

412
00:30:19,680 --> 00:30:23,760
स्वरूप है वो शांति करुणा प्यार इत्यादि पाप रहित है।

413
00:30:23,760 --> 00:30:27,840
दूसरी ओर यह भी कहते हैं कि भैया जो आत्मा है वो सदा सुखी नहीं हो सकती।

414
00:30:27,840 --> 00:30:31,920
हर 5000 साल में वो इनका एक साइकिल है। उनको मोक्ष पूरी थ्योरी

415
00:30:31,920 --> 00:30:36,080
आप समझ लीजिए। शुरू से अंत तक मैंने क्या और क्यों पूछा है उसको आप लोग भी जान लीजिए।

416
00:30:36,080 --> 00:30:40,160
देखिए जब मैंने उससे यह पूछा इनसे भाई साहब

417
00:30:40,160 --> 00:30:44,400
से कि जब आपने बिटिया का सर कंधे पर रखा था तो आपको कुछ

418
00:30:44,400 --> 00:30:48,400
सुख की अनुभूति हुई होगी तो उसमें और इसमें

419
00:30:48,400 --> 00:30:52,480
अंतर क्या है? तो इन्होंने बताया परम सुख है जमीन आसमान का अंतर है और

420
00:30:52,480 --> 00:30:56,480
इसमें हम अपने मौलिक स्वरूप में आते हैं। ठीक है? तो सीधी सी बात

421
00:30:56,480 --> 00:31:00,640
है इसमें अंतर ये होता है आध्यात्मिक सुख में और इस सुख में यह

422
00:31:00,640 --> 00:31:04,640
सुख अनंत होता है। आध्यात्मिक सुख। इसको समझना है।

423
00:31:04,640 --> 00:31:08,800
अगर यह अनंत नहीं है तो इस सुख में भौतिक भौतिक चीजों से मिलने

424
00:31:08,800 --> 00:31:12,880
वाले सुख में और अध्यात्म से मिलने वाले सुख में कोई अंतर नहीं है। अगर

425
00:31:12,880 --> 00:31:16,960
यह सुख अनंत नहीं है तो अनंत है तो ही वो

426
00:31:16,960 --> 00:31:20,960
परम सुख है। वो अनंत सुख है और वही सच्चिदानंद वाला मामला

427
00:31:20,960 --> 00:31:24,960
है मोक्ष वाला। तो अब पहली बात इनके यहां की थ्योरी ये है ब्रह्मा

428
00:31:24,960 --> 00:31:29,120
कुमारी के यहां की कि अनंत सुख तो है नहीं। तो पहली बात इस इस सुख

429
00:31:29,120 --> 00:31:33,200
में और इस सुख में अंतर क्या आया? अब यह तो एक बात हो गई कि इस

430
00:31:33,200 --> 00:31:37,280
सुख में उस सुख में कोई अंतर नहीं है। जो भौतिक दुनिया से जो सुख प्राप्त कर रहे हैं

431
00:31:37,280 --> 00:31:41,440
वही सुख वहां से भी मिल रहा है क्योंकि वहां वो खुद क्लेम कर रहे हैं कि वहां पर भी आपका इतनी

432
00:31:41,440 --> 00:31:45,680
देर का ही सुख है और तमाम

433
00:31:45,680 --> 00:31:49,760
सारी दुनिया की दुनियादारी की चीजों को छोड़ के व्यक्ति से कहा जाए कि हम तुम्हें

434
00:31:49,760 --> 00:31:54,720
इतनी देर के लिए जैसे जेल पर जेल से बाहर छोड़ते हैं ना पेरोल पे

435
00:31:54,720 --> 00:31:59,040
पैरोल कहते हैं क्या कहते हैं जेल से थोड़ी देर के लिए बाहर तो उस समय उस व्यक्ति को

436
00:31:59,040 --> 00:32:03,280
कैसी अनुभूति होगी जब वो पैरोल पे बाहर होगा है ना

437
00:32:03,280 --> 00:32:07,360
और दूसरी बात यह होती है कि पैरोल पर जो मुक्ति होती है ना पैरोल

438
00:32:07,360 --> 00:32:11,520
वाली वो मुक्ति भी पूरी तरीके से मुक्ति नहीं होती। यही हो कि पैरोल वाली जो मुक्ति

439
00:32:11,520 --> 00:32:15,760
है वो पूरी मान ली जाए क्योंकि उसमें उसके एक कष्ट होता है कि बस 15

440
00:32:15,760 --> 00:32:20,000
दिन में वापस जाना है। एक महीने में वापस जाना है। जैसे राम रहीम पैरोल

441
00:32:20,000 --> 00:32:24,000
पर बाहर आता जाता है। तो जितनी देर वो बाहर आता है और वापस जाता

442
00:32:24,000 --> 00:32:28,560
है उतनी देर उसके अंदर सारे दुख भले ही खत्म हो जाए जेल से संबंधित। एक दुख दोबारा

443
00:32:28,560 --> 00:32:33,920
उसके मन में होता है कि मुझे दोबारा जाना है। ठीक है?

444
00:32:33,920 --> 00:32:38,240
तो एक तो यह हो गया कि यह वह जो जिस

445
00:32:38,240 --> 00:32:40,320
ब्रह्मा कुमारी में जा रहे हैं लोग

446
00:32:40,320 --> 00:32:44,480
वहां पर अंतर क्या है यह कोई नहीं बता पाएगा। वही भौतिक सुख यहां का भी बाधित

447
00:32:44,480 --> 00:32:48,640
है और ब्रह्मा कुमारी के द्वारा आध्यात्मिक दुनिया का जो सुख है वह भी बाधित

448
00:32:48,640 --> 00:32:52,720
है। वह खुद यह क्लेम कर रही है। दूसरी बात अब इसमें ये

449
00:32:52,720 --> 00:32:56,880
लोग जब बातें करते हैं मीठी-मीठी बातें करने के चक्कर में तो इनको यह कहना पड़ता

450
00:32:56,880 --> 00:33:00,880
है कि आत्मा का जो मौलिक स्वरूप होता है वो शांति होता

451
00:33:00,880 --> 00:33:05,040
है। शांति और यह जैसे अभी आपने हमारी पिछली कुछ

452
00:33:05,040 --> 00:33:09,360
चर्चाएं हुई हैं उसमें देखा होगा तो जो शांति है शांति और यह अच्छी-अच्छी

453
00:33:09,360 --> 00:33:13,440
मीठी-मीठी बातें प्यार प्रेम करुणा दया है ये सब ये उसका मौलिक होता

454
00:33:13,440 --> 00:33:18,640
है तो वो मौलिक भी होने लगती है अब दिक्कत ये आती है कि

455
00:33:18,640 --> 00:33:22,640
इन्होंने जब यह माना कि यहां से छूट करके वहां जाना है इसके लिए हमें अच्छे काम

456
00:33:22,640 --> 00:33:26,720
चाहिए तो वहां से छूट वहां से इनको यहां आना है जो ये माने

457
00:33:26,720 --> 00:33:30,720
बैठे हैं कि वहां से आना है उसके लिए बुरे काम चाहिए तो अगर यहां से वहां

458
00:33:30,720 --> 00:33:34,960
जाने के लिए अच्छे काम आत्मा का वास्तविक धर्म है तो वहां से

459
00:33:34,960 --> 00:33:39,360
आने के लिए बुरे काम आत्मा का वास्तविक धर्म मानना पड़ेगा।

460
00:33:39,360 --> 00:33:43,680
इसका अर्थ क्या हुआ कि अधर्म करना, पाप करना, व्यभचार

461
00:33:43,680 --> 00:33:48,400
करना, ब्रह्मा कुमारी के अनुसार झूठ बोलना यह सब

462
00:33:48,400 --> 00:33:52,480
उसका मौलिक धर्म होगा। यह सब भी उसी प्रकार से जैसे

463
00:33:52,480 --> 00:33:55,680
जितना सच बोलना, जितना शांति प्राप्त

464
00:33:55,680 --> 00:33:59,760
करना, शांति की ओर जाना, जितना यह सब उसका धर्म है आत्मा

465
00:33:59,760 --> 00:34:03,760
का उतना ही दूसरी चीजें भी धर्म है। तो क्या ब्रह्मा कुमारी के अनुसार

466
00:34:03,760 --> 00:34:08,000
कभी धर्म स्थापना हो पाएगी? धर्म संस्थापना हो पाएगी ब्रह्मा कुमारी

467
00:34:08,000 --> 00:34:11,440
के अनुसार क्योंकि

468
00:34:11,440 --> 00:34:15,520
बुराई से अच्छाई की ओर जाना भी धर्म है और अच्छाई से बुराई की ओर

469
00:34:15,520 --> 00:34:19,760
आना भी धर्म है। ये इसलिए क्वेश्चन था।

470
00:34:19,760 --> 00:34:24,000
ठीक है? और अगर हम यह कहते हैं कि नहीं नहीं आत्मा जो है पाप

471
00:34:24,000 --> 00:34:28,160
कर्मों के बिना रह सकती है आत्मा। अब यह तीसरा पॉइंट आ गया

472
00:34:28,160 --> 00:34:32,640
बचने के लिए कि आत्मा पाप कर्मों के बिना उसका मौलिक स्वरूप है।

473
00:34:32,640 --> 00:34:36,800
तो पाप कर्मों के बिना जब मौलिक स्वरूप है तो मौलिक स्वरूप जब वो पहुंच रही है तो वहां से इधर

474
00:34:36,800 --> 00:34:40,800
आ रही कैसे है? पाप कर्मों से कौन डाल रहा है? अच्छा माया ये मानते नहीं

475
00:34:40,800 --> 00:34:44,880
है। प्रपंच रूपी संसार ये मानते नहीं है। नहीं तो सब कुछ उसमें आ जाए। समस्त

476
00:34:44,880 --> 00:34:49,200
कर्मों को करते हुए भी तू मुझे कर्ता मान। यह सनातन फिलॉसफी

477
00:34:49,200 --> 00:34:53,280
है भाई अकाट्य सिद्धांत कहीं से भी आ जाओ गिरा दिए

478
00:34:53,280 --> 00:34:57,440
जाओगे इसको कहते हैं सिद्धांत खैर तो वो तो ये मानते नहीं

479
00:34:57,440 --> 00:35:01,600
है तो अब ये मानना पड़ेगा कि वो जो बुराई इसमें नहीं थी वो आई

480
00:35:01,600 --> 00:35:05,840
कहां से किसने डाली परमात्मा बुराई डाल डालेगा नहीं इनके यहां

481
00:35:05,840 --> 00:35:09,840
क्योंकि वो वो नहीं है सर्वशक्तिमान परमात्मा तो ये वाली चीजें करता

482
00:35:09,840 --> 00:35:10,800
ही नहीं है तो

483
00:35:10,800 --> 00:35:14,880
परमात्मा बुराई डालेगा नहीं तो क्या होगा जब परमात्मा

484
00:35:14,880 --> 00:35:19,200
बुराई डालेगा नहीं तो बुराई से अच्छा अच्छा पहले इन्होंने काफी देर तक

485
00:35:19,200 --> 00:35:23,200
बचने के लिए जो सूक्ष्म शरीर में डाल दिया बुराई मतलब विचारों

486
00:35:23,200 --> 00:35:27,200
को जबकि विचार जो है यहां पर भी ये फंसे विचार जो है धारण

487
00:35:27,200 --> 00:35:31,760
कर सकता है कोई चेतन तत्व चेतन तत्व केवल दो हैं परमात्मा

488
00:35:31,760 --> 00:35:36,240
और जीव तो परमात्मा तो बुराई धारण नहीं कर सकता इनके अनुसार

489
00:35:36,240 --> 00:35:40,240
क्योंकि माया इत्यादि ये मानेंगे नहीं प्रपंच मानेंगे नहीं तो वो धारण नहीं

490
00:35:40,240 --> 00:35:44,320
कर सकता तो क्या होगा फिर तो जीव या तो जीव में मानना पड़ेगा

491
00:35:44,320 --> 00:35:48,320
कि हां उसके अंदर बुराई पाप कर्म वगैरह भी सदा से थे हैं और

492
00:35:48,320 --> 00:35:52,400
रहेंगे। इसका मतलब जब कोई हत्या भी कर रहा है तो वह अपना मौलिक धर्म निभा रहा

493
00:35:52,400 --> 00:35:56,400
है। जब कोई रक्षा कर रहा है तो वह भी धर्म कार्य कर रहा है और जब कोई

494
00:35:56,400 --> 00:36:00,480
भक्षण कर रहा है वो भी धर्म कार्य कर रहा है। यह है इस

495
00:36:00,480 --> 00:36:04,560
पॉइंट में मैं लाना चाह रहा हूं। इस सच्चाई को आप समझिए।

496
00:36:04,560 --> 00:36:08,560
ब्रह्मा कुमारी के सिद्धांतों के अनुसार या जैसे जो दूसरे सेक्ट हैं

497
00:36:08,560 --> 00:36:12,640
इनके अनुसार जितना धर्म आचरण जिसे हम कहते

498
00:36:12,640 --> 00:36:16,640
हैं सदा सदाचरण जिसे हम कहते हैं वो धर्म है उतना ही जो

499
00:36:16,640 --> 00:36:20,800
दुराचरण है वो भी धर्म सिद्ध हो जाएगा क्योंकि

500
00:36:20,800 --> 00:36:24,960
हमें यह मानना पड़ेगा कि बुराई उसमें इनबिल्ट है

501
00:36:24,960 --> 00:36:26,400
आत्मा में इनबिल्ट

502
00:36:26,400 --> 00:36:30,480
है बुराई और बुराई सच है माया

503
00:36:30,480 --> 00:36:34,480
तो है नहीं प्रपंच तो है नहीं सच है तो

504
00:36:34,480 --> 00:36:38,480
बुराई अगर सच है तो वह आत्मा में इनबिल्ट है तो इनबिल्ट है तो जब

505
00:36:38,480 --> 00:36:42,560
कोई हत्या करता है बलात्कार करता है चोरी करता है पाप

506
00:36:42,560 --> 00:36:46,880
करता है तो ब्रह्मा कुमारी जैसे तंत्रों के अनुसार वो भी धर्म है

507
00:36:46,880 --> 00:36:51,040
क्योंकि जिस जिस प्रकार से अशांति से शांति और

508
00:36:51,040 --> 00:36:55,440
शांति की यात्रा इनके यहां निश्चित है उसी तरीके से शांति से अशांति

509
00:36:55,440 --> 00:36:59,760
की यात्रा भी इनके यहां निश्चित है। तो जिस तरीके से

510
00:36:59,760 --> 00:37:04,080
सच्चाई का आलंबन लेकर के शांति की यात्रा करते हैं तो उसी तरीके

511
00:37:04,080 --> 00:37:08,320
से झूठ का आलंबन लेकर के अशांति

512
00:37:08,320 --> 00:37:12,400
तक की यात्रा भी इनके यहां सुनिश्चित है। ठीक

513
00:37:12,400 --> 00:37:16,640
है? तो अब क्या हुआ कि धारक तत्व इन्होंने सूक्ष्म शरीर

514
00:37:16,640 --> 00:37:20,720
मान लिया। तो सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट कौन कर रहा है? मानना पड़ेगा। या तो

515
00:37:20,720 --> 00:37:24,880
वह खुद कर रही है। अगर खुद हो रही है तो फिर यह बुराई आ गई। सूक्ष्म

516
00:37:24,880 --> 00:37:28,880
शरीर से कनेक्ट होने का विचार ही बुराई है। भाई जब मालूम है

517
00:37:28,880 --> 00:37:33,440
कि यह पाप है तो इससे कनेक्ट क्यों हो रहे हो? तो यह विचार भी बुराई है।

518
00:37:33,440 --> 00:37:37,440
लो तो ये बुराई कहां रहती थी? आत्मा में ही रहती थी। इसका मतलब

519
00:37:37,440 --> 00:37:43,440
पाप कर्म भी आत्मा का शाश्वत धर्म है।

520
00:37:43,840 --> 00:37:48,880
ठीक है? इस तरीके से इनकी सारी बातें खंडित होती हैं।

521
00:37:48,880 --> 00:37:54,880
आशा करते हैं आपको चीजें समझ में आ रही हो।

522
00:38:05,320 --> 00:38:09,320
[संगीत]
