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00:00:01:25 तो सनातन के जिन पांच सिद्धांतों के प्रचार प्रसार की बात हम करते हैं उनमें से ही एक सिद्धांत है कि संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वह भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो हमारे चैनल पर कुछ दिनों पूर्व एक टोटली टोटली एक नास्तिक व्यक्ति आया था जिसने अपने पूर्वाग्रह से व ग्रसित था उसने जो सोच समझ रखा था उसको उन्हीं के लिए उन्हीं सिद्धांत लड़ते रहना था तो इसलिए जब हमने उसके सामने कुछ सार्वभौम सिद्धांत रखे भगवान को मानने के संबंध में ईश्वर को ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करने के संबंध में तो हालांकि वह निरुत्तर तो हो गया परंतु उसने ऐसा नहीं किया कि वह हमारी बात से उसने सहमति जता दी हो मैं बात कर रहा हूं जो प्रेमजीत सिरोही नाम का एक व्यक्ति आया था जिसने समय आने पर जो है माता के साथ गमन को भी स्वीकार कर लिया था व्यक्ति के द्वारा तो ऐसे व्यक्ति समाज में कैसे बन पाते हैं कौन से वह हालात होते हैं जो किसी व्यक्ति को इस हद तक नास्तिक बना दे इसका कारण एक ही है सामर्थ्य वान गुरुओं से दूरी
00:01:17:07 जी सामर्थ वान गुरुओं से जब तक समाज दूर रहेगा वह सार्वभौम सिद्धांतों से दूर रहेगा जब गुरु से दूर तो सार्वभौम सिद्धांतों से दूर ईश्वर का अस्तित्व कैसे किसी मनुष्य के जी जीवन में हम सिद्ध कर सकते हैं उसको जो है अगर वह जानना चाहता है उसका सकारात्मक दृष्टिकोण है तो उसको हम कैसे ईश्वर के अस्तित्व के प्रति संतुष्ट कर सकते हैं यह सब सामर्थ्य वान गुरुओं की शरण में जाने पर हमें प्राप्त होते हैं ऐसा नहीं है कि वो प्रेमजीत सुरही कभी निकला नहीं होगा कभी उसके मन में सवाल नहीं आए होंगे पर उसे जो सामर्थ मान गुरु हैं जो उसको समझा सकते थे सूत्रा क्मक शैली में वो उसे समय पर मिल नहीं पाए और जब मिले जब उसे पता चला है सामर्थ वान गुरुओं के बारे में तब तक वह अपना एक माइंड मेकअप बना चुका है कि मैं नास्तिक हूं और मैं ऐसे ही चलूंगा मगर हमारे ही चैनल पर एक जिज्ञासु व्यक्ति और आए थे जो सीकर थे जो ईश्वर के अस्तित्व को लेकर के इसलिए जो ईश्वर के अस्तित्व को इसलिए स्वीकार नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उन्हें जानना था उनको ठोस कारण चाहिए थे ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करने के संबंध में तो देखिए चर्चा बहुत अच्छी है उन्होंने बड़ा ही सकारात्मक प्रयास
00:02:32:08 किया ईश्वर के अस्तित्व को समझने के लिए तो आप इस चर्चा को देखिए मेरा नाम रतन है सर जी कहां से हैं जालौर राजस्थान अच्छा बोलिए सर वो एक कमेंट में कर रहा था अंतरजातीय विवाह वाला कार्टून वीडियो हो हां आप ही हो हां वो मैं ही हूं अच्छा अच्छा आप तो बहुत सारे अजीब अजीब से प्रश्न किया करते हो शायद मैंने देखा थोड़ा दूर जाइए चेहरा तो दिखाइए थोड़ा सा दूर से लीजिए अच्छा हां बोलिए अंतरजातीय विवाह सर वैसे मेरा आपसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है किंतु मेरे जो चीजें समझ नहीं आती मैं अपने चारों पहली बात तो ये है कि जो आपने आधार बनाया है अंतरजातीय विभाग का पहले बताऊं आपको कि अभी मैंने जैसे उदाहरण दिया रोट वेलर का तो क्या रट वेलर का
00:03:47:24 संबंध लेब्राडोर के साथ होगा तब भी हमें वैसी क्वालिटी का रट वेलर प्राप्त हो सकता है वैसे तो नहीं होगा नहीं होगा अच्छा दूसरी बात यह कह रहा हूं क्या जो साइंस के द्वारा बताए गए सिद्धांत होते हैं वह शाश्वत होते हैं शाश्वत तो नहीं होते अच्छा मतलब वह कभी भी बदल सकते हैं आज उन्होंने एक पैरामीटर दिया अच्छा है हो सकता है कल को यह भी हो जाए गलत है हां यानी कि उनके उनके आधार पर हम रिलाई नहीं कर सकते हैं किंतु आप भी तो अपनी बात को वेरीफाई करने के लिए विज्ञान के पास ही जाओगे आपको कैसे पता चला कि जो हमारे पिता से जो गुण मिलते हैं वो वैसे ही होंगे वो सहारा मात्र लिया जा सकता है उसके ऊपर डिपेंड नहीं है पूरी तरीके से बात करते समय कुछ भौतिक उदाहरणों का सहारा लिया जा सकता है मगर उसके ऊपर ही डिपेंड नहीं है दूसरी बात मैं उस पर आ रहा हूं जैसे कि हम अपने घर की स्त्रियों का स्पर्श अच्छा नहीं मानते हैं किसी पर पुरुष के साथ आप मानते हैं कि नहीं
00:05:02:09 नहीं नहीं नहीं मैं पूछ रहा हूं व्यर्थ क्यों किया जाए व्यर्थ का ना हो नहीं नहीं व्यर्थ नहीं मान लीजिए कोई व्यक्ति है उसकी आसक्ति हो रही है कि किसी के घर की स्त्री का मैं चुंबन ले लू गाल प तो यह उचित मान इसको ना करना या इसको रोकना इससे क्या यह आप मानते हैं ऐसा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए नहीं मेरे को व्यक्तिगत रूप से ये ठीक नहीं लगता अच्छा तो यह साइंस ने कहा है क्या कि ऐसा नहीं होना चाहिए नहीं विज्ञान ने तो नहीं कहा ऐसा ठीक है अच्छा कहा तो इस प्रकार के उदाहरण क्यों देने पड़ते हैं कि सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में से कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है क्योंकि जब सामने वाले के समक्ष हम ऐसी बात बोलते हैं जो मतलब अपने अंतिम चरण पर हो तो व्यक्ति के पास उसके साथ कॉम्प्रोमाइज करने का विकल्प नहीं होता है जैसे कि मान लीजिए कि मैं अगर कहूं कि क्या आप बिना हाथ हैंड वश करके आप जो है पानी पी लेंगे तो व्यक्ति कहेगा हां विषम परिस्थितियों में पानी पी लूंगा हाथ बिना धोए
00:06:17:12 भी पानी पी लूंगा मतलब कुछ अगर हम सामान्य उदाहरण किसी को रखेंगे तो उन सामान्य उदाहरणों के साथ सामने वाला समझौता कर सकता है तो इसलिए उदाहरण की प काष्ठा पर जाना पड़ता है जहां पर व्यक्ति के पास विकल्प ना बचे समझौता करने का जिससे कि वह सत्य जो कि हमें लाना है बाहर वह जल्दी से जल्दी शीघ्र से शीघ्र बाहर आए वरना हम शुरुआती चरण पर थोड़ा सा सामान्य उदाहरण भी दे सकते हैं उससे कह सकते हैं कि क्या आप अपने रसोई घर में चप्पल पहनकर जा सकते हैं क्या तो कई बार ऐसे कुतर की भी मिल जाएंगे जो आपको कह देंगे हां मैं जा सकता हूं मैं तो जाता हूं उनके घर में नहीं होगा ऐसा संस्कार इसी तरीके से और क्या अपने पिता को गाली दे सकते हैं क्या हां दे सकता हूं तो यह कुछ ऐसे उदाहरण है जो दिए जा सकते हैं परंतु उदाहरण की पराकाष्ठा पर इसलिए जाना पड़ता है हमेशा कि माता बहन और पत्नी में अंतर या फिर की बहन पर कुदृष्टि नहीं डालनी है इस पर आपने विश्वास तर्क से किया है या फिर आपने अपने माता-पिता की बात मान ली बिना तर्क के तो ये उदाहरण इसीलिए देने पड़ते हैं क्योंकि ऐसे उदाहरण होने चाहिए जिसके पास जिसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी
00:07:32:18 हो जाए व्यर्थ में सामने वाले को हम विकल्प ना दें कि वो उन उदाहरणों के साथ भी हालांकि वो अपने जीवन में ऐसा ना भी करता हो फिर भी अपनी बात को अग्रणी रूप से रखने के लिए प्राथमिकता से रखने के लिए अपनी वर्चस्व होता के लिए यहां पर ये कह दे कि हां हां मैं तो ऐसा कर लूंगा मगर यहां पर जब हमने इनके समक्ष ये बात रखी तो क्योंकि जिज्ञासु हैं सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ थे तो इन्होंने इस बात को स्वीकार किया और कोई प्रश्न है आपका सर धर्म सभी चीजों का अंत थोड़ी है डार्विन का सिद्धांत आप कैसे का करोगे उसको डार्विन का सिद्धांत मार्क्स वाद और रामराज आप पढ़िए विस्तृत है आप पढ़ लीजिएगा डार्विन का सिद्धांत आप यह बताइए कि आप अपने जीवन में मर्यादा का पालन करते हैं क्या
00:08:31:21 वोचित हां जितनी मर्यादा है शायद उतनी नहीं किंतु बहुत सारी मर्यादाओं का पालन होता माता को माता की दृष्टि से देखना पत्नी की दृष्टि से ना देखना इसका पालन तो करते हैं ना हां करते हैं कहां से सीखा यह तो हमें हमारे पिता से ही पता चला पिता भी नास्तिक थे नहीं पिताजी इतने नहीं थे किंतु उन्होने बता धर्म को मानते थे या नहीं मानते थे मानते थे हां तो धर्मे ना पशु भी समाना आपके जीवन में आप अगर थोड़ी भी मानव उचित मर्यादा का आलंबन ले रहे हो उसका मूल धर्म है साइंस आपको मर्यादा नहीं सिखाती है साइंस आपको आपके उसके अनुसार प्रोजेक्ट देते रहती है कि आज यह अच्छा है ये अच्छा है ऐसे हो गए तो ऐसे कर सकते हैं मगर वो धर्म मर्यादा नहीं देती है दूसरी बात य कह रहा हूं कि आप अगर धर्म को नहीं मानते हैं तो इसका अर्थ है कि आप ईश्वर को नहीं मानते
00:09:38:13 हैं नहीं मर्यादा टूटने से अंत में क्या हो जाएगा मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर को मानते हैं कि नहीं मानते पता नहीं क्योंकि मैंने कभी देखा नहीं है उनको महसूस नहीं किया है तो जब आपने जब आप उस आप उसमें प्रमाण का इंतजार कर रहे हो यानी उसकी एक्जिस्टेंस आपको सवाल है सवाल है तो आप नहीं मानते हो आज की स्थिति तो यही है ना यही हुई ना अब आप ये बताओ अब आप यह बताओ कि आपके मन में ऐसा भाव आता है कि नहीं बारिश ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए हा आता है ना साइंस ने कहा है कि आप बारिश को कंट्रोल कर सकते हो साइंस ने अभी दुबई में किया था ना बारिश को कंट्रोल सते धूप को कंट्रोल कर सकते हो नहीं इस रिसर्च हो सकती है नहीं रिसर्च हो सकती है नहीं अभी का सीन क्या है अभी क्लेम हो गया मन मेंा क्यों आ रही है जिसका अस्तित्व नहीं है यह तो मन है और शरीर है इसलिए
00:10:54:06 हा मतलब आपके मन में जिसका अस्तित्व नहीं है उसकी भी इच्छा है हां है तो जिसका अस्तित्व नहीं है आपके अनुसार भगवान का अस्तित्व नहीं है उसकी इच्छा है आपके अंदर भगवान का अर्थ समझ लीजिए क्या है सत चित आनंद सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर यह भगवान की व्याख्या होई सत चित्तान का मतलब है सत मैं बोल रहा हूं बोल ले सत का मतलब है जो कभी देश काल मतलब सत शाश्वत सत्य ठीक है तो एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है भले ही साइंस कहे या ना कहे कभी मरना नहीं चाहता है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सारा ज्ञान प्राप्त कर लेने की चाह विद्यमान है भविष्य तक देख लेने की चाह विद्यमान है इंडिया पाकिस्तान का मैच चल रहा है तो आंकड़े लगाने लगेंगे कौन है जो नहीं अभी तक घोषित हुआ साइंस की तरफ से वो आंकड़े भी लगाने लगेंगे माता-पिता 200 वर्ष की उम्र में भी अगर हॉस्पिटल में एडमिट होंगे तो एक इच्छा होगी कि किसी तरीके से बच जाए लेकिन कल को ये चीजें सारी इंसान के कंट्रोल में आ पूरा पूरा पूरा कहने दीजिए
00:12:09:08 मुझे पूरा कहने दीजिए वो भी मैं बताऊंगा वो भी बताऊंगा कि कल को ये चीज साइंस के कंट्रोल में आ गई वो भी बताऊंगा अब इसके बाद तीसरी इच्छा है सदा आनंदित रहने की कि मैं कभी दुखी ना हो मेरे कभी झुरिया ना पड़े मेरे कार के टायर कभी घिसे ना मेरा कभी मोबाइल में एक भी स्क्रेच ना आए तो अब क्या है कि यदि हमारे अंदर कोई ऐसी इच्छा होती है जो पूरी नहीं हो सकती जो बकवास है उस इच्छा से हम आसानी से स्वयं को अलग कर सकते हैं जैसे कि एक छोटे बच्चे ने कहा कि मैं बिल्डिंग को हाथ में उठाना चाहता हूं मैं कार को तान देना चाहता हूं यह कहा छोटे बच्चे ने भौतिक स्वरूप से तो उसकी मां ने कहा पागल है ऐसा कभी नहीं हो सकता साइंटिफिकली वो जो 5 किलो का बच्चा है वो 900 किलो की कार को नहीं उठा सकता या बनी बनाई बिल्डिंग को हाथ पर नहीं उठा सकता तो वह बच्चा जो है वो प्रत्यक्ष रूप से वह कार्य करने की जो इच्छा थी उसके अंदर उसको छोड़ दिया उसने और उसके बिना वो खुश है मगर साइंस हमसे कह रही है कि आप मरोगे आज की आज की तारीख का रिजल्ट यही है साइंस ने नहीं कहा कि आप अमर हो फिर भी मृत्यु का ख्याल तक आते ही आप
00:13:24:08 उसको झट देते हो आप उससे अलग हटाते हो अपने मन को तो आप साइंस के विरुद्ध जाते हुए मृत्यु से भाग रहे हो मृत्यु हीन जीवन साइंस ने नहीं कहा कि आप भविष्य देख सकते हो मगर साइंस के विरुद्ध जाते हुए आप सब कुछ जान लेने की कामना कर रहे हो भविष्य तक जान लेने की कामना कर रहे हो यानी कि अज्ञ विहीन जीवन और साइंस ने नहीं कहा कि आपके कभी जुरिया नहीं पड़ेंगी आप कभी यह नहीं होगे वो नहीं होंगे आपकी कार कभी खराब नहीं होगी फिर भी आप साइंस के विरुद्ध जाकर के उन सारी स्थितियों को ही कामना कर रहे हो का मतलब दुख रहित जीवन तो जिस अब क्या है कि जो हमारे अंदर इनबिल्ट इच्छा है इनबिल्ट मतलब जिससे हम अलग नहीं हो पा रहे कुछ इच्छाएं है जिनको हम छोड़ कर के अलग हो जाते हैं खुश रहते हैं मगर इन इच्छाओं को छोड़ के हम अलग नहीं हो पा रहे यह तो सदा ही व्याप्त है हमारे अंदर
00:14:18:21 ले ये जो इनबिल्ट इच्छाएं हैं इनसे ही सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है जिसको एक नास्तिक भी प्राप्त करना चाहता है ये एक बहुत बड़ी समस्या है कि लोग ईश्वर का कांसेप्ट नहीं जानते हैं जो ज्यादातर नास्तिक है वह समझते हैं कि भगवान कोई बैठा हुआ कोई एक पर्सनालिटी है जो सब कुछ कंट्रोल करते हैं वह यह नहीं जानते हैं कि भगवान की डेफिनेशन है सत चित आनंद सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर यानी कि जो हमारी जो वास्तविक चाह है जिसको एक संसार का हर प्राणी मात्र ढूंढ रहा है उसी की उस चाह का जो विषय है उसी का नाम परमेश्वर है तो यह ज्यादातर लोग इस कांसेप्ट को जानते नहीं है जिसके कारण से एक अलग से एक एंटिटी बैठी हुई है जो सब कुछ कंट्रोल कर रही है वह अलग की तो इस कांसेप्ट को ना जान पाने के कारण भी यह नास्तिकता जो है समाज में व्याप्त हो जाती है अब बात ये आती है आपने एक बात कही कि वैज्ञानिकों ने अगर इस सबको कंट्रोल कर लिया तो इसका मतलब यह है ना कि वो वही पहुंचे जहां हम जा रहे हैं अगर उन्होंने सच्चिदानंद स्वरूप स्थिति को ढूंढ लिया तो उन्होंने ढूंढा तो वही
00:15:33:22 ना जिसको हम भगवान कहते हैं नास्तिक और आस्तिक में फर्क सिर्फ इतना है कि नास्तिक जिधर भाग रहा है वो यह मानता है कि मैं जिधर भाग रहा हूं वो जगह इस दुनिया में है ही नहीं मतलब व खुद ही कह रहा है कि मैं जहां जा रहा हूं वो दुनिया में है ही नहीं मगर मैं जा रहा हूं आस्तिक का आस्तिक का आस्तिक की स्थिति है कि वो जिधर जा रहा है वो ये कहता है कि वो दुनिया में है ये अ दोनों में अंतर नास्तिक खुद ही खुद को मूर्ख कह रहा है कहां जा रहे हो कि मैं सत चित आनंद को प्राप्त करने जा रहा हूं सच्चिदानंद है नहीं है सच्चिदानंद को ही भगवान कहा गया ना सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर तो सच्चिदानंद है नहीं है तो उसने क्या करा व उस चीज को मांगने जा रहा है जिसको वो खुद ये कह रहा है वो है ही नहीं तो मूर्ख कौन हुआ या तो उसर भागना बंद कर दे यह बात हमने अपने एक एक शॉर्ट वीडियो में समझाने का प्रयास भी किया था कि नास्तिक और आस्तिक में जो मुख्य अंतर है वह यही है कि जो नास्तिक है वह एक ट्रेडमिल पर भागने वाला व्यक्ति है जो भाग तो रहा है मगर कहीं पहुंच नहीं रहा है और उसका कारण सबसे बड़ा तो यह है कि जहा जिस चीज के लिए वो भाग रहा है जो मांग
00:16:48:27 रहा है संसार से सत चित आनंद को ढूंढ रहा है उसके एक्जिस्टेंस को खुद नहीं स्वीकार कर रहा है कि हां इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है सच्चिदानंद स्वरूप स्थिति है अर्थात मोक्ष है और आस्तिक कौन है जो यह कह रहा है जो यह मानता है कि इस दुनिया में अगर मैं चाहता हूं तो संसार में सत चितता आनंद स्वरूप परमेश्वर है वह स्थिति है मोक्ष है तो यह हमने एक वीडियो बना कर के भी बताया था अगर आपने देखा ना हो वो वीडियो तो आप जरूर देखिएगा थोड़ा कॉमेडी भी उसमें लेकिन आप इसको एक शरीर धारी या आप जिस तरह भी भगवान को मानते हो उस तरह मान रहे हो लेकिन विज्ञान के लिए तो ये केवल एक वस्तु मात्र होगी कैसे होगी वस्तु मात्र वो बताओ भाई सच्चिदानंद का मतलब हुआ अ बाध्य अवाद का मतलब हुआ कुछ भी कर सकने वाला तो अगर वस्तु मात्र होगी तो वो कुछ भी थोड़ी ना कर सकती है तो बाधित है बाधित की अस् अवाद के अस्तित्व को स्वीकार करना पड़ेगा ना आपको आज आपने चेहरा दिखाया अच्छा लगा आपने साहस दिखाया बहुत बढ़िया रहा आपके कमेंट्स में पढ़ता रहता
00:18:05:03 था हां नहीं आप लगे ही रहते हैं जब भी हमारा वीडियो आता है तो आप उसमें थोड़ा निरंतर में देखता हूं कभी-कभी मैंने आपको कहा भी होगा कि लाइव आइएगा नहीं सर मेरा व्यक्तिगत विरोध नहीं है लेकिन मैं इतना ज्यादा दिमाग खराब हो गया है तो प्रश्न पूछने के लिए आप यहां से स्टार्ट करो कि अगर भगवान नहीं है इस दुनिया में आप यहां से अपना जीवन में स्टार्ट गुरु अगर भगवान नहीं अगर सच्चिदानंद स्वरूप नहीं तो मैं इसको छोड़ क्यों नहीं पा रहा हूं सच्चिदानंद को प्राप्त करने की जो भावना है उसको त्याग करके हम रह सकते हैं क्या नहीं रह सकते वो तो हमारे इनबिल्ट है हां तो बस यहीं से स्टार्ट करो इसका मतलब है कि इस दुनिया में जैसे हमारे पास प्यास है तो दुनिया में पानी है भूख है तो खाना है देखने की क्षमता है तो दुनिया में दृश्य है सुनने की क्षमता है तो दुनिया में आवाज है मतलब हमारे अंदर इनबिल्ट प्यास से ही सि हो गया कि दुनिया में उसका जो सब्जेक्ट है उसका निवारण करता है वो मौजूद है तो इसी प्रकार हमारे अंदर जो ये इनबिल्ट प्यास है सच्चिदानंद की उसी से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है और यदि कोई कह रहा है कि नहीं है तो फिर वो खुद को मूर्ख कह रहा है क्योंकि वो चाहता तो उसी को है जो वैज्ञानिक है
00:19:20:07 जो नास्तिक वैज्ञानिक है वो चाहते तो वही है भाई मैं अगर आज एक प्रश्न पूछूं कि वो कौन सा आविष्कार होगा जिसके बाद वैज्ञानिक चन से बैठेंगे कि अब मैं आराम करूंगा अब मैं कोई खोज नहीं करूंगा वो आविष्कार एकही है सच्चिदानंद स्वरूप अवाद चंद्रमा के साथ फुटबॉल खेल सके हाथी को पूछ से उड़ा कर के फेंक सके इतना मतलब कुछ भी मन में जो सोचे वो कर सके तो यानी कि जा वो भी उधर ही रहे जिधर हम जा रहे हैं बस वो मना कर रहे हैं वो है ही नहीं हम कह रहे है इतना अंतर है और फिर आगे बहुत सी चीज है तो आप एक शुरुआत करिए यहां से सोचना तो यह जो प्राणी मात्र के अंदर जो सत चित आनंद की चा है मृत्यु विहीन जीवन जड़ता विहीन जीवन और दुख रहित जीवन इसको हमारे शास्त्रों ने भी वर्णित किया है असतो मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर गम मृत मतम गमाया तो यह इस तरह से जब हम सामर्थ वान गुरुओं के सानिध्य में जाकर के अध्ययन करते हैं या ईश्वर को जानने का प्रयास करते हैं मैं भी निमित्त मात्री हूं जो थोड़ा बहुत जगतगुरु की कृपा से जो मिल गया है प्रसाद तो उसके कारण ही है तो और सबसे अच्छी
00:20:35:12 बात है कि जो नास्तिक हैं अगर वह अभी उन्होंने अपने आप को पूर्वाग्रह से ग्रसित नहीं किया है तो इस तरह के सकारात्मक परिणाम आपको देखने को मिलते हैं जैसे यह जिज्ञासु नास्तिक हैं जो आए इनके समक्ष हमने अपनी बातें रखी तो इन्होंने जहां जहां पर चीजें ठीक थी तर्कपूर्ण थी तो उन्होंने वहा वहा पर सहमति जताई मार्क्सवाद और रामराज ग्रंथ है यह पढ़िए इसमें डार्विन ही नहीं इसमें डार्विन नहीं डार्विन जैसे बहुतों का तर्क और प्रमाण यहां जो मैंने बताया कुछ भी नहीं है मगर उसके लिए डिक्शनरी ले लीगा क्योंकि गुरुदेव की हिंदी बहुत वैसे शुद्ध हिंदी है तो कई शब्द होंगे जो बाउंस हो सकते हैं तो डिक्शनरी ले लीजिएगा चौखंबा पब्लिकेशन से आती है डिक्शनरी सबको इसको पढ़िए अच्छा लगेगा सर भगवान को भगवान को करने के लिए कुछ कर सकते हैं भगवान को आप महसूस कर रहे हो ना बारबार जब जब आप अपनी मृत्यु से अमरता की ओर जाने की कोशिश कर रहे हो असतो सदम तब तब आप भगवान को महसूस कर रहे हो जब जब आपन की जैसे मीरा जी ई ऐसे भक्त महसूस करते
00:21:50:15 थे इस तरह वो जब आप ो जैसे आज आपने जिज्ञासा बसा कर के कुछ प्रश्न किए कुछ संतुष्टि पर कुछ मिली उसके आधार पर फिर आपने उसके अनुरूप काम करना शुरू किया धीरे-धीरे आपकी जो जीवन में प्रेजेंस है भगवान की वो बढ़ती जाएगी और जिनके जीवन में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है वो मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं ठीक है हां सर धन्यवाद सर अच्छा लगा जय श्री राम
00:22:23:07 [संगीत]
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