1
00:00:01,960 --> 00:00:06,000
[घंटी की आवाज़] सनातन हिंदुओं को नष्ट किया जा रहा था

2
00:00:06,000 --> 00:00:10,000
तो मैं बहुत परेशान होता था उनको देख के और समझ में भी नहीं आता था

3
00:00:10,000 --> 00:00:14,000
क्या करूं फिर धीरे-धीरे आपकी आपके बारे में जाना आपकी

4
00:00:14,000 --> 00:00:18,160
शरणागत हुआ दीक्षा भी प्राप्त की तो आपने एक निर्देश दिया

5
00:00:18,160 --> 00:00:22,240
था आज से कुछ वर्षों पूर्व मुझे जब मैंने ये सारी चीजें आपके

6
00:00:22,240 --> 00:00:26,400
समक्ष रखी थी तो आपने कहा था कि ऊपर ईश्वर का बल

7
00:00:26,400 --> 00:00:31,360
और नीचे संघ का बल आप पहले उसको

8
00:00:31,360 --> 00:00:35,440
संकलित करें, इकट्ठा करें। तब जाकर के आप जो है सनातन मानव

9
00:00:35,440 --> 00:00:39,760
लोगों की रक्षा के लिए निकलें। गुरुदेव एक बात आती है कि

10
00:00:39,760 --> 00:00:43,840
हमारे कई सनातन के धर्म सनातन धर्म के मंदिर ऐसे

11
00:00:43,840 --> 00:00:47,920
हैं जिसमें कि जो पूजा अर्चना है भगवान की वो विधि पूर्वक

12
00:00:47,920 --> 00:00:52,160
नहीं हो रही है। तो जो सामान्य हिंदू जन है उनको उन मंदिरों के प्रति किस तरह

13
00:00:52,160 --> 00:00:56,400
दृष्टिकोण रखना चाहिए। कई कई लोग ज्यादा शास्त्र की मर्यादा के कारण उपेक्षा

14
00:00:56,400 --> 00:01:00,400
भी करने लगते हैं। तो किस तरह का दृष्टिकोण होना चाहिए गुरुदेव ऐसे

15
00:01:00,400 --> 00:01:06,400
मंदिर के लिए जी

16
00:01:06,800 --> 00:01:11,600
पुराण है

17
00:01:11,600 --> 00:01:17,520
प्रतिष्ठा ना हो तो देवता का नहीं होता है।

18
00:01:17,520 --> 00:01:22,240
प्रतिष्ठा और पूजन आदि ना हो तो मूर्ति सिद्धि शक्ति

19
00:01:22,240 --> 00:01:26,800
हो जाती है। जाने शक्ति प्रसाद आदि

20
00:01:26,800 --> 00:01:31,520
अशुभ शक्ति का सो जाता है और शक्ति

21
00:01:31,520 --> 00:01:35,200
बुरा पहचा देती है।

22
00:01:35,200 --> 00:01:38,800
बुरा

23
00:01:38,800 --> 00:01:42,960
तो गुरुदेव ऐसे मंदिरों में दर्शनार्थ पहुंचे सामान्य हिंदू जन या

24
00:01:42,960 --> 00:01:48,080
ना पहुंचे। जी

25
00:01:48,080 --> 00:01:52,400
शायद व्यक्ति ना पहुंचे आम

26
00:01:52,400 --> 00:01:56,590
जनता ना पहुंचे तो कर लेंगे [गला

27
00:01:56,590 --> 00:02:01,120
साफ़ करने की आवाज़] पिता से तो दर्शन आज होता ही नहीं है

28
00:02:01,120 --> 00:02:05,280
कि कहां से दर्शन करना चाहिए कि का दर्शन

29
00:02:05,280 --> 00:02:09,280
मंदिर का दर्शन करना चाहिए आज तक तो है

30
00:02:09,280 --> 00:02:11,680
नहीं

31
00:02:11,680 --> 00:02:14,960
इसलिए

32
00:02:14,960 --> 00:02:19,840
व्यक्ति ना जाए हम जनता नहीं जाएंगे तो तो

33
00:02:19,840 --> 00:02:24,080
क्या होगा पर कब्जा कर लेते आपके

34
00:02:24,080 --> 00:02:30,080
मतलब नहीं है हम कब्जा कर लेते हैं

35
00:02:31,280 --> 00:02:36,080
यह वो प्रश्न है जिसने मेरे साथ-साथ मुझ जैसे कई शास्त्रनिष्ठ

36
00:02:36,080 --> 00:02:40,240
लोगों को जो लोग शास्त्रों में आस्थानित हैं उन लोगों को परेशान

37
00:02:40,240 --> 00:02:44,240
कर रखा था क्योंकि भारत के अधिकांशतः मंदिर ऐसे ही

38
00:02:44,240 --> 00:02:48,320
हैं जहां जहां पर विधि निषेध का पालन नहीं हो रहा है

39
00:02:48,320 --> 00:02:52,400
या फिर वहां पर ऐसे ऐसे विग्रह भी हैं जो हमारे

40
00:02:52,400 --> 00:02:56,720
लिए पूजनीय नहीं है। आप समझ रहे होंगे मैं किनकी बात कर रहा हूं साईं की

41
00:02:56,720 --> 00:03:01,120
तो कई बार होता है जो प्रामाणिक आचार्यों से जो लोग जुड़ गए हैं

42
00:03:01,120 --> 00:03:05,360
शास्त्र निष्ठावान है। शास्त्रनिष्ठ हैं।

43
00:03:05,360 --> 00:03:10,000
शास्त्रों में आस्थान्वित हैं। तो वह कई बार स्वयं को इस दोराहे पर

44
00:03:10,000 --> 00:03:14,240
खड़ा पाते हैं कि भाई यह सार्वजनिक रूप से एक हिंदुओं

45
00:03:14,240 --> 00:03:18,400
का स्थल है। इसमें लोग जा रहे हैं। अब मैं यहां जाऊं कि ना जाऊं।

46
00:03:18,400 --> 00:03:22,560
तो इस प्रश्न का हल वैसे तो आपने देख ही लिया गुरुदेव ने क्या दिया। इसी क्रम में आगे

47
00:03:22,560 --> 00:03:26,640
गुरुदेव ने यह भी बताया कि वो जो सिद्धांतिक

48
00:03:26,640 --> 00:03:30,800
लोग हैं वो कौन है? जैसे करपात्री जी महाराज

49
00:03:30,800 --> 00:03:35,040
जिनके जीवन में शास्त्र निष्ठा तप के रूप में

50
00:03:35,040 --> 00:03:39,440
शौचाचार के रूप में इत्यादि लगभग प्रत्येक

51
00:03:39,440 --> 00:03:43,600
जितने भी क्षेत्र होते हैं शास्त्र द्वारा निर्देशित

52
00:03:43,600 --> 00:03:46,560
उनमें उनकी गति थी। तो ऐसे

53
00:03:46,560 --> 00:03:50,640
लोगों के लिए ही गुरुदेव ने कहा कि यदि आपका जीवन इस प्रकार

54
00:03:50,640 --> 00:03:55,040
से शास्त्र निष्ठा से ओतप्रोत है तब तो

55
00:03:55,040 --> 00:03:59,280
आपके लिए ऐसे मंदिर स्थलों में जाने

56
00:03:59,280 --> 00:04:03,360
की अनिवार्यता नहीं है। परंतु यदि आप एक सामान्य

57
00:04:03,360 --> 00:04:07,600
हिंदू हैं। यदि आप आपके जीवन में शास्त्र

58
00:04:07,600 --> 00:04:11,760
निष्ठा तो है। शास्त्र के प्रति आस्था तो हैं। परंतु आज के विपरीत

59
00:04:11,760 --> 00:04:15,760
वातावरण के कारण आप पूरी तरीके से शास्त्रों को अप्लाई नहीं कर पा रहे हैं

60
00:04:15,760 --> 00:04:20,240
अपने जीवन में। तो ऐसे में यह अनुचित

61
00:04:20,240 --> 00:04:24,320
होगा कि आप मंदिर के विषय में ही एकदम कांटे की नोक पर सोचने

62
00:04:24,320 --> 00:04:28,320
लग जाओ कि भाई यह मंदिर जो है शास्त्रों की कसटियों पर खड़ा उतरता

63
00:04:28,320 --> 00:04:32,320
है कि नहीं पूरी तरीके से तभी मैं अंदर जाऊंगा। यदि आपके जीवन का

64
00:04:32,320 --> 00:04:38,080
कोई भी अंश बाकी नहीं रह गया है शास्त्रों

65
00:04:38,080 --> 00:04:42,160
शास्त्रों के अनुरूप चलने से तो बात अलग है।

66
00:04:42,160 --> 00:04:46,240
परंतु यदि आप कई बार कई जगहों पर समझौता कर रहे हैं

67
00:04:46,240 --> 00:04:50,320
विपरीत वातावरण के कारण तो ऐसे में आपके द्वारा इस प्रकार के

68
00:04:50,320 --> 00:04:54,560
मंदिरों का इस प्रकार के स्थलों का तिरस्कार

69
00:04:54,560 --> 00:04:58,880
करना या उन्हें छेक देना वह अनुचित कहलाएगा

70
00:04:58,880 --> 00:05:01,760
क्योंकि यह मंदिर, यह

71
00:05:01,760 --> 00:05:05,840
मंदिर स्थल हमारे देवताओं के हैं। कभी ना कभी आज नहीं

72
00:05:05,840 --> 00:05:10,320
तो कल यहां पर देवता निवास करते ही थे।

73
00:05:10,320 --> 00:05:14,480
तो उस दृष्टि से भी आपके मन में इन स्थलों के लिए सम्मान की

74
00:05:14,480 --> 00:05:18,720
भावना होनी चाहिए। हां जो पूरी

75
00:05:18,720 --> 00:05:22,720
तरीके से किसी ऐसे

76
00:05:22,720 --> 00:05:27,360
व्यक्ति को समर्पित है जैसे कि चांद मियां जो साईं बाबा

77
00:05:27,360 --> 00:05:31,440
के बारे में बातें स्पष्ट हुई थी।

78
00:05:31,440 --> 00:05:35,440
अब ऐसे किसी व्यक्ति का मंदिर बना हुआ है जैसे आजकल सुनने में

79
00:05:35,440 --> 00:05:39,680
आ रहा है कि कोई राजनेता हैं उनका भी मंदिर बिहार में बनने वाला है

80
00:05:39,680 --> 00:05:43,760
तो ऐसा कोई मंदिर है जहां पर हमारे सनातन देवी देवता हैं

81
00:05:43,760 --> 00:05:47,760
ही नहीं और बल्कि सीधे तौर पर वह किसी व्यक्ति विशेष

82
00:05:47,760 --> 00:05:51,760
को समर्पित मंदिर है तो ऐसे मंदिरों को आप छेक सकते हैं।

83
00:05:51,760 --> 00:05:55,920
ऐसे मंदिरों की आप उपेक्षा कर सकते हैं। परंतु यदि कोई मंदिर

84
00:05:55,920 --> 00:06:00,000
है हनुमान जी का वहां पर कोई विग्रह लगा हुआ है या फिर वहां पर विधि निषेध का पालन

85
00:06:00,000 --> 00:06:04,000
नहीं हो रहा है या फिर उसकी स्थापना ठीक से नहीं हुई है तो यहां पर

86
00:06:04,000 --> 00:06:08,080
आपको आंकलन करना होगा क्या मंदिरों को लेकर के

87
00:06:08,080 --> 00:06:12,080
शास्त्र निष्ठा की कसौटी द्वारा प्राप्त

88
00:06:12,080 --> 00:06:16,080
दृष्टि रख रखते समय आपके जीवन में भी

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00:06:16,080 --> 00:06:16,960
शास्त्र उसी

90
00:06:16,960 --> 00:06:21,200
तरह से लागू है जिस तरह से आप इन मंदिरों को देख रहे हैं।

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00:06:21,200 --> 00:06:27,200
जय श्री राम।

92
00:06:42,170 --> 00:06:46,170
[संगीत]
