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00:00:01:09 [घंटी की आवाज़] तो सभी को जय श्री राम। आज हम आए हैं इस मंदिर इंदौर और हमारी यहां पर भेंट हुई प्रभु जी से और हम आज इस का जो दृष्टिकोण है धर्म को लेकर ईश्वर को लेकर के उसके बारे में चर्चा करने जा रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं हमारे बारे में। तो प्रभु जी सबसे पहले आप अपना एक हमारे दर्शकों को अपना एक परिचय दे दीजिए संक्षिप्त में कि आप कहां से बिलोंग करते हैं। कैसे इस तक पहुंचे और वर्तमान में इस के किस पद पर विराजमान होकर के किस ओर प्रयासरत हैं। जी जय श्री कृष्णा। मेरा नाम महामना दास है। मैं नॉर्थ इंडिया का संजीव जोनल सेक्रेटरी कहते हैं। पूरा नॉर्थ इंडिया का देखता हूं। बेस मेरा इंदौर में है। मैं 1972 में श्री प्रभुपाद जी से लंदन में मिला। उसमें मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग का स्टूडेंट था और उनके दर्शन के बाद मैंने सोचा कि यही हमारे लिए संस्था है जिससे हमारे को कृष्णा कॉन्शियसनेस का विज्ञान आत्मा का विज्ञान मालूम होता है। तो तब से मैं इस में हूं और कई

00:01:16:19 दुनिया के भागों में हमने प्रचार किया है। वृंदावन का मैं प्रेसिडेंट रहा हूं और यहां मैं इंदौर में न 2004 से हूं। अच्छा बहुत ही सुंदर परिचय प्रभु जी ने अपना दिया और सबसे अच्छी बात हमें यह लगी कि आज हम स्वयं श्रील प्रभुपाद जी के शिष्य के साथ बैठे हैं वार्ता करने के लिए। तो ये अपने आप में एक सौभाग्य की बात है हमारे लिए। अ तो जैसे कि हमारे धर्म के अनुसार कहा गया है कि भगवान श्री कृष्ण जो है वह पूर्ण हैं। तो जैसे भगवान के अन्य रूपों की भी व्याख्या की गई है। तो एक बात आती है हमारे सामने कई बार सुनने में कि जो जैसे शिव दुर्गा काली की भक्ति बताने वाले जो शास्त्र हैं वह तामसिक हैं। तो इस पर किस तरह से दृष्टिकोण है? यह क्या है? भगवान स्वयं भगवत गीता में कहते हैं कि भगवान वाचा के वही देवताओं के भी आदि है। स्रोत्र वही है। हम सभी देवताओं का मान सम्मान करते हैं। पर जो आदि पुरुष है वो भगवान कृष्ण ही है और सब जो

00:02:31:22 है उनके विस्तार हैं या उनके अंश हैं। और भगवान शिव जी वैष्णव नाम यथा शिव सबसे परम वैष्णव माने जाते हैं। तो हम भगवत गीता के अनुसार भागवतम के अनुसार ये तत्व है के परम भगवान ईश्वर एकल कृष्णा और सब वृत्य और सब उनके सेवक हैं। ईश्वर जो है परमेश्वर वो भगवान कृष्णा है। नहीं वो तो सही कह रहे हैं प्रभु जी मगर इसमें क्या होता है कि उस स्थिति में क्या करें जैसे यहां पर श्री कृष्ण को जैसे बड़ा कहा गया तो शिव पुराण में शिव जी को बहुत बड़ा कहा गया है और भगवती पुराण में भगवती को बहुत बड़ा कहा गया है तो अब ये बात आती है कि जब ये कहा जाता है कि वो जो पुराण है वो तामसिक है तो इसका हम क्या अर्थ ले या तो हम ऐसी शिक्षा ले कि शिव और कृष्ण एक है मगर भागवतम में भाष्य करते समय श्रील प्रभुपाद जी लिखते हैं कि वो शिव और विष्णु को एक समान देखना गलत है। शिव और कृष्ण को एक समान नहीं देखना चाहिए। 10 नाम अपराध वहां पर बताए उन्होंने। तो अगर शिव पुराण तामसिक है या जो भगवती

00:03:46:24 पुराण है वो तामसिक है तो इसको हमें किस तरह से लेना चाहिए ये तामसिकता को? बहुत ही सुंदर प्रश्न है आपका। और इस प्रश्न का उत्तर महादेव ने दिया। भगवान शिव जी ही देते हैं। क्योंकि शिव जी को एक बार उनकी धर्मपत्नी पार्वती ने ऐसा ही प्रश्न पूछा था के अन्य पुराणों में अन्य देवताओं की प्रशंसा की। शिव पुराण में शिव जी की, ब्रह्म भगवान में ब्रह्मा जी की, गणेश की। ऐसा अलग-अलग पुराण में अलग। तो देवी पार्वती पूछती थी कि मेरा मन थोड़ा विचलित हो रहा है कि कौन से देवताओं को मारना चाहिए? भगवान शिव जी ही कहते हैं विष्णु सॉरी शिव पुराण में कि आराधनम सर्वशाम विष्णु आराधनम परम तस्मात प्रतम देवी तद देवी शिव जी कहते हैं सब तरह की आराधना में से विष्णु आराधना इससे और बढ़कर कोई तत्व नहीं भगवान शिव जी के मुकाबले से [गला साफ़ करने की आवाज़] विष्णु आराधना पर तस्मात परत्रम देवी नाम और अगर उससे भी बढ़कर चाहिए विष्णु की भक्ति वो है उनके भक्तों की जैसे

00:05:02:04 तुलसी महारानी गंगा जी उनके पार्षदों एक मैं आपको प्रसंग सुनाना चाहूंगा ये एक रियल लाइफ की हिस्ट्री है एक जर्मन स्कॉलर थे तो उन्होंने वैदिक शास्त्रों का बहुत अध्ययन किया काफी अध्ययन किया हुआ था तो उनका भी मन कुछ ऐसा ही विचलित हो था एक पुराण में इसको अन्य देवताओं तो उन्होंने सोचा कि मैं क्यों ना स्वयं जाकर इंडिया में देखो प्रयाग में हम पहुंच गए। उस समय कुंभ मेला चल रहा था। कुंभ मेला के समय यहां में पहुंचे और देखे कुंभ मेला में बहुत सी झांकियां लगी हुई थी। तो संयोग से पहली जाकी में गए तो उन्होंने देखा माता दुर्गा की जाकी थी और ये देखकर वो बहुत ही इंप्रेस हो गए प्रभाव माता एक शेर के ऊपर बैठी है कितनी अब उनका शक्ति कितनी होगी फिर उन्होंने देखा उनकी 10 भुजाएं हर एक भुजा में कोई ना कोई अस्त्र है तो उन्होंने सोचा शक्तिशाली तो जरूर है

00:06:17:18 पर यह अस्त्र किस काम को इनका मतलब कोई किसी चीज का भय है कोई अस्त्र ना अटैक करे इसके लिए अस्त्र तैयार है उन्होंने बोला ठीक है आगे चलकर देखते हैं अगली जंकी देखी शिव जी की थी और इस बार और भी ज्यादा प्रभावित होंगे उनके कंठ में तो एक नाग से उन्होंने इंप्रेस हुए वाह ये कितने शक्ति होंगे शाली होंगे जिनके कंठ में नाग है और इनको कुछ बह नहीं था। फिर ध्यान से देखा पर उनके हाथ में एक त्रिशूल भी है। त्रिशूल क्या मतलब कोई और असुर ना अटैक करे और दूसरा उनके दाएं हैंड में जपमाला है। तो जपमाला होगी तो किसी का नाम जपते हैं। अपना नाम तो किसी कोई उनसे बड़ा होगा जिनका वो नाम जपते हैं। तो बहुत इंटेलिजेंट था वो। देखते हैं आगे चलकर। इसी तरह से कोई और झांकियां देखी श्री रामचंद्र जी की झांकियां देखी वहां में भी रामचंद्र जी धनुष लेकर कर रहे हैं। लक्ष्मण जी भी धनुष लेकर हनुमान जी गधा लेकर ये बहुत शक्तिशाली तो हैं जरूर पर इनको हाथ में सब धनुष है लक्ष्मी नारायण के जांकी देखी वहां में भी

00:07:32:19 चतुर्भुज रूप देखे लक्ष्मी जी का नारायण जी का वहां में मुस्कुराते हुए नारायण जी लक्ष्मी जी प्रसन्न हुए एक लास्ट में वह एक जांकी पहुंचे राधा और कृष्ण की और इस बार उन्होंने क्या देखा कि इनके कोई अस्त्र नहीं है। यह तो बांसुरी बजा रहे हैं और राधा रानी जी एक वरमाला ले खड़ी है उनको वरमाला पहनाने के लिए तो मैं समझ गए इनको किसी का भय नहीं है। ये परम आनंद ले रहे हैं। ये ही भगवान है। तो ऐसे कई प्रश्न आते हैं। भगवान शिव जी के मुखारविंद से जो श्लोक है राधनम सर्वेशाम इससे परम कोई प्रमाण नहीं हो सकता सबके गुरु हैं मगर प्रभु जी इसमें एक ये बात आ जाती है कि अगर हमने इस बात को अंतिम प्रमाण मान लिया जैसे आपने जो कहा कि शिव जी ने कहा कि वो उन्होंने कहा है कि विष्णु की भक्ति ही सबसे श्रेष्ठ है तो इसको अगर हम अंतिम प्रमाण मान लेते हैं तो क्या हम शिव पुराण को झूठा माने, गलत माने, क्या माने? वो अलग तरह

00:08:47:22 के गुणों के जो लोग होते हैं, अच्छा लोगों के स्तर होते हैं डिवोटीज के लिए उनके लिए होता है। हम भागवतम को सबसे ऊंचा प्रमाण देते हैं। सब प्रमाणों में सब भागवत पुराणों में भागवत सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। नहीं कहने का मतलब यह है क्या शिव पुराण में झूठ लिखा है? नहीं झूठ नहीं लिखा पर जो सत्य है वो भागवतम में लिखा है। नहीं वो शिव पुराण में जो शिव जी के लिए लिखा है वह गलत लिखा है। यह सवाल यह रह जाता है ना उसको क्या माने? वो असत्य है या सत्य है। अगर वो सत्य है तो फिर इसका मतलब यहां पर इसको अंतिम प्रमाण नहीं मान सकते। अगर वो असत्य है तब इसको हम प्रमाण मान सकते। हम इस या गौरिया मात हम जो शास्त्र कहते हैं वह उनके अनुसार चलते हैं। तो शास्त्र और भगवान शिव जी सबके गुरु हैं। उनके मुखारविंद से ये वचन निकले हैं। देवी पार्वती को और श्रीमद् भागवत जो है व्यास देव जी ने लिखी। तो हमें यह मानना पड़ेगा ना कि व्यास जी ने ये पद्म पुराण लिखा। व्यास जी ने ही शिव पुराण लिखा। मगर शिव पुराण में उन्होंने गलत लिखा है वो चीज़ गलत नहीं लिखा उनके स्तर के जो लोग हैं जो लोग उतना ही समझ सकते हैं उनके लिखा जैसे

00:10:03:10 मुसलमान मुसलमान का एग्जांपल लिखिए उनको उनका जो प्रॉफिट आया उन्होंने उतना ही स्तर से बताया जितना वो समझ सकते हैं उसके आगे वर्करों को अर्जुन तो बहुत एडवांस डिवोटी था उनको स्टार्ट क्या किया आप ये शरीर नहीं है आप आत्मा है। यह जो नॉर्मल लोग नहीं समझ सकते थे। जिन जैसे उनकी स्थिति होती है उनके अनुसार कहने का तात्पर्य यह है कि जब हम सनातन धर्म के नाम पर किसी धर्म ग्रंथ को पढ़ते हैं तो हम यह मानते हैं अथर्ववेद में आया है कि जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है। तो यदि शिव पुराण में दिया गया जो ज्ञान है वो किसी एक व्यक्ति विशेष के लिए किसी व्यक्ति स्तर वाले के लिए है तो इसका मतलब और भागवत का ज्ञान जो है अंतिम है। तो हमें यह मानना पड़ेगा कि शिव पुराण में सनातन ज्ञान नहीं है। तो वही मैं पूछ रहा हूं क्या व्यास जी ने उसमें सनातन ज्ञान नहीं दिया? सनातन ज्ञान जो है उस स्तर के है। अगर वो स्तर लग रहा है तो वो सनातन नहीं हुआ ना। साथ सनातन का मतलब है जो किसी भी देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो। जो हर व्यक्ति विशेष हर व्यक्ति के लिए समान रूप से वो व्यापक है। तो वो सनातन हुआ। तो अगर

00:11:18:14 हम ये मान लेंगे कि शिव पुराण में दी गई जो चीजें हैं वो किसी एक व्यक्ति विशेष वर्ग के लिए है। सबके लिए नहीं है। अंतिम प्रमाण नहीं है। तो फिर हमें ये मानना पड़ेगा कि शिव पुराण में सनातन ज्ञान नहीं है। और जबकि लिख उसको भी व्यास जी ने ही लिखा है शिव पुराण को भी। तो फिर यह कैसे पता लगे कि इसमें सनातन ज्ञान नहीं है। इसमें सनातन ज्ञान है। यह बात इसमें ऐसा है कि देखिए जो प्रमाणम अमलम जो सबसे ऊंचा प्रमाण है वो श्रीमद् भागवत है। नहीं वो आप वो तो मैं मानता ही हूं कि श्रीमद् भागवत सबसे ऊंचा प्रमाण है। मगर जिसने श्रीमद् भागवत को लिखा है वही दूसरी जगह जाकर के जो सनातन ज्ञान नहीं है वो क्यों दे रहा है? और अगर वह दे सकता है तो उसकी क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न उठ जाता है कि जो यहां पर झूठ बोल सकता है जैसे बोलने का सवाल नहीं होगा। नहीं नहीं जैसे शिवजी सबसे बड़े नहीं है मगर उसमें शिव जी को उन्होंने सबसे बड़ा कह दिया वो रिलेटिवली आप देखो हां तो शिव जी आप कहते हैं सबसे बड़े नहीं है जी पर एक्चुअली वो सबसे बड़े हैं वो सबके गुरु हैं और एक्चुअली भगवान का एक रूप है विस्तार है इस भौतिक जगत के लिए

00:12:33:18 ये भौतिक जगत का संचालन भगवान विष्णु करते हैं भगवान शिव जी के माध्यम से तो इसको एक तरफ से देखा जाए तो शिव जी और भगवान कृष्ण में कोई अंतर नहीं है। पर उनके पपस जो है उनके जो कार्य हैं क्रिया है उनके लिए वो अपना शिव जी का रूप धारण करते हैं। मगर उनमें कुछ गुण कम होते हैं ना कृष्ण जी से हां ना तो वो परम परमेश्वर नहीं होते हैं। मगर उसमें जो शिव जी को मूल बताया गया है कि ब्रह्मा विष्णु कृष्ण के भी मूल शिव जी हैं। समस्त चराचर जितना भी वो है जगत उसके मूल शिवजी ही बताया गया है। शिव शिव बताया गया है। शिव पुराण में रुद्र समिता में बताया गया है। शिव पुराण में अन्य पुराण यहां तक कि राधा और कृष्ण का जन्म भी बताया गया कि शिव पुराण शिव जी राधा बन रहे हैं और जो माता है भगवती वो जो है कृष्ण बन रही है। ये तक बताया गया है। तो मेरा कहने पूछने का मतलब यह था कि अगर व्यास जी के द्वारा भागवत में कृष्ण को सबसे बड़ा कहा गया है तो उन्होंने यहां पर जो सनातन ज्ञान नहीं है अंतिम प्रमाण नहीं है वो क्यों दिया व्यास जी नहीं आप स्वयं भगवान श्री भगवान वाच श्री भगवान वाच किसको रिफर करते हैं भगवान कृष्ण को रेफर करते नहीं लिखा तो व्यास जी ने ही है ना नोटिफाई तो उन्हीं ने किया ना पर

00:13:50:09 उनकी वाचन तो उनके है स्वयं तो वचन उनके है वचन है मगर वचन तब है जब फिर दूसरे अन्य शास्त्र है जैसे ब्रह्मा ब्रह्म संहिता ने क्या है गोविंद आदि पुरुषम गोविंद जो है वो आदि पुरुष है नहीं नहीं वो है मगर क्या इसके कारण हम शिव पुराण को झूठा मान ले ये बात झूठा नहीं मानेंगे पर हम कहेंगे जो ये रिलेटिव ट्रुथ है जो यानी सनातन ज्ञान नहीं है उसमें वो सनातन ग्रंथ नहीं है सनातन जन्म देखो एक्चुअली आर्गुममेंट के साथ ये जो है विवाद जो है इसका कोई अंत नहीं हुआ है। चलिए चलिए इसको से अनंत काल से हो रहा है। इसको छोड़ देते हैं। एक इसी में एक कनेक्ट कनेक्टिंग पॉइंट आता है ये कि जैसे आपने बताया कि शिव जी कह रहे हैं कि जो सबसे जो परम भक्ति है वो हरि की भक्ति है। विष्णु की भक्ति है। मगर यही बात जब शिव जी ने राम जी के सामने कही। राम जी जो स्वयं श्री कृष्ण का ही दूसरा रूप है। तो राम जी से जब कही तो राम जी ने कहा नहीं आप यह गलत कह रहे हो। पद्म पुराण में ही है। जब शिव जी ने कहा नहीं राम तुम सबसे श्रेष्ठ हो। तुम्हारी तुम में और हम में जो भेद भेद जो तुम में और हम में एक कहते हैं वो गलत है। वो सब

00:15:05:15 ऐसे अनन्यता का भाव उन्होंने प्रकट किया तो राम जी ने कहा नहीं। सत्य नहीं है। सत्य ये है कि तुम में और मुझ में भेद नहीं है। मेरे हृदय में तुम हो। तुम्हारे हृदय में मैं हूं। ये राम जी ने कहा। तो यहां पर जो शिव जी की वो वाली बात है कि नहीं वो विष्णु की भक्ति ज्यादा सुपर है कृष्ण की भक्ति तो वो चीज कट जाती है क्योंकि राम यहां पे कह रहे हैं नहीं समान है दोनों तो राम जी के लिए आया है रामो विग्रहवान धर्मः राम जो है धर्म है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम रामो दृणा भाषेते राम दो प्रकार की बातें नहीं करते झूठ नहीं बोलते और सभी में शिवो विग्रहवान धर्मः ब्रह्माो विग्रहान धर्मा विष्णु विग्रहान धर्म नहीं आया रामो विग्रहान धर्म आया क्योंकि राम जी को मर्यादा पुरुषोत्तम सत्यवादी है ना एकवचन बोलने वाला तो राम जी ने जब यह कह दिया कि शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं है मुझ में और आप में कोई भेद नहीं है तो फिर हम शिव जी की किसी बात को उनके प्रमाण के आगे कैसे स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि उसमें है भागवतम में ये आता है कि शिवजी सबसे टॉप मोस्ट भक्त है वैष्णव सब नहीं नहीं ऐसा इनके लिए भी आया है कृष्ण भगवान के लिए महाभारत में आया है कि सबसे परम जो शैव है वो वो कृष्ण है। उपमन्यु ऋषि से दीक्षा लेकर उन्होंने तप किया शिव जी का और

00:16:20:19 ये तक कहा कि मुझे अगर कोई वरदान दे सकने में सक्षम है। आपका पपस यहां कहां कोई डिबेट करने है कि क्या करने का है? अरे नहीं मैं से इस संस्था है एक बहुत प्रतिष्ठित संस्था है जो गुरु परंपरा से आ रही है हमारा परंपरा से कनेक्शन है ब्रह्म माधव गौरिया संप्रदाय है तो इनका ये जो हम संप्रदाय के बाहर जाएंगे तो हम समझ नहीं पाएंगे हम संप्रदाय हमारा ब्रह्मा जी का रुद्र संप्रदाय का भी हम पूरा मान करते हैं रुद्र शिव जी का भी तो एक संप्रदाय है विष्णु स्वामी उनके आचार्य हैं। तो ऐसा हम स्वीकार करते हैं। मतलब एक तरीके से संप्रदाय के अंदर रह के जो शिक्षा है मगर मुझे क्षमा करिएगा। वहां भी मुझे क्षमा करिएगा। यहां पे भी एक क्वेश्चन आ जाता है वो ये आता है कि अगर हम हम वैष्णव हैं इसलिए हम ये कहते हैं कि श्री कृष्ण श्रेष्ठ हैं। क्योंकि हम वैष्णव हैं। नहीं शिव जी का भी तो संप्रदाय है ना। रुद्र संप्रदाय मेरी बात सुनो रुद्र संप्रदाय है वो वैष्णव संप्रदाय है वो पुष्टि मार्ग का है उनका आगे चल तो पुष्टि मार्ग आ जाए देखिए वो है मैं तो ये पूछ रहा हूं कि राम जी ने यदि ये कहा कि मुझ में और शिव में कोई भेद नहीं है तो ये झूठ कहा कि सत्य कहा नहीं

00:17:37:01 लेवल पर आप समझते नहीं है मैं कितनी बात समझाऊं देखो जी एब्सोल्यूट ट्रुथ जो है उनके अनंत रूप हो सकते हैं हमारे कई यही चीजें जो है हम इनकबल राम जी ने सत्य नहीं बोला ना वहां नहीं सत्य आप समझोगे तो सच सत्य सत्य समझेंगे ना अच्छा एक चीज और पूछूंगा इस बारे में सत्य जो है आप समझने के योग्य भी होना चाहिए अपने योग्य तो होनी चाहिए तो आप सत्य समझेंगे अच्छा एक चीज और पूछूंगा कि राम जी के इष्ट शिव जी हैं या नहीं है नहीं शिव जी के इष्ट राम है तो पूरे रामायण उसी को तो राम राम जी के ईस्ट कोई और है या नहीं? नहीं राम स्वयं भगवान अच्छा वो किसी की भक्ति नहीं करते। अब वाल्मीकि रामायण जब हम पढ़ते हैं जैसे आपने बताया कि उनके हाथ में माला देखी तो पता चला कि किसी की भक्ति कर रहे हैं। तो वाल्मीकि रामायण में गायत्री मंत्र का जाप करते हैं वो। कौन? राम जी। तो वह गायत्री मंत्र के द्वारा किसका वर्णन कर रहे हैं? अच्छा और जब हम भागवतम पढ़ते हैं तो आठव स्कंध के 30व श्लोक के आसपास कहा गया है कि गायत्री के द्वारा शिव जी का वर्णन किया गया है। और भगवान श्री कृष्ण ने इधर कहा है कि मैं मंत्रों में मैं गायत्री हूं।

00:18:52:02 छंदों में मैं गायत्री हूं। तो राम जी ने यहां पे गायत्री मंत्र का जाप करके किसका वर्णन किया? किसका स्मरण किया? हां तो यह तो मैंने नहीं पढ़ा कि राम जी ने वो पढ़ा पर आप कहते हैं तो ठीक है तो गायत्री गायत्री का ओरिजिन आप देखिए कैसे वहां तक पहुंचिए आप गायत्री का स्रोत क्या है? गायत्री का स्रोत है श्री [गला साफ़ करने की आवाज़] कृष्ण जी की बांसुरी से ओम सिलेबल प्रकट होता है। ओम का विस्तार होता है गायत्री मंत्र और गायत्री मंत्र का विस्तार है वेद चाहे वेदांत और वेदांत का विस्तार है श्रीमद् भागवत और अन्य पुराण वही पुराण ब्रह्मा जी के हृदय से भगवान कृष्ण ने दी। तो यह जो आप बोलते हैं रामचंद्र जी ने गायत्री की गायत्री कई बार रामचंद्र जी ने कई ऐसे कार्य किए क्योंकि गुरु थे विश्वा विश्वमित्र और अन्य तो

00:19:53:25 गायत्री उन्होंने किया और क्या गायत्री का स्रोत समझिए ना गायत्री आप गायत्री के द्वारा उन्होंने गायत्री का गायत्री का जो अर्थ निकलता है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का हम वर्ण करते हैं तो उन्होंने किस आपने कहा कि वो किसी का भक्ति नहीं किया। वो स्वयं परमेश्वर है। तो यहां उन्होंने गायत्री के जप द्वारा क्या करना सिखाया? किसकी भक्ति करना सिखाया? कुछ भी कर सकते हैं। वो कई लोग आरोप लगाते हैं के रामचंद्र जी मांस खाते थे तो हम भी मांस खाएंगे। वह तो पूरे बनवाने को खा सकते हैं। देखिए राम जी के दो स्वरूप हैं। राम जी के दो स्वरूप हैं। एक पारमार्थिक जिसमें वो ईश्वर है। एक भौतिक जिसमें कि वो व्यवहारिक जिसमें कि वो एक मनुष्य होते हुए वो मर्यादा सिखाते हैं। तो रामू विग्रहान धर्माया मनुष्य के लिए धर्म क्या है? जो राम ने किया वो धर्म है। अब राम जी किसी अन्य की भक्ति सिखा रहे हैं। जब वह जाप कर रहे हैं तो वहां पर किसकी भक्ति मानी जाए? अपना जाप कर रहे हैं या वो किसी और का जाप कर रहे हैं तो इसमें क्या मानना किसी और के जाप करने की आवश्यकता ही नहीं तो फिर यह मानना पड़ेगा कि वो मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं है उन्होंने क्योंकि वो छल किया लीला की क्या छल किया जाप करके दिखाया जो कि सत्य नहीं था ये मानना पड़ेगा ना जो महापुरुष होते हैं उनके मुद्राएं

00:21:10:07 और कर्म समझना हमारे लिए अचिंतनीय है वो हम नहीं नहीं वो वो मर्यादा पुरुषोत्तम है कि नहीं है तो हम इसका शास्त्र कहते हैं हम क्या कहेंगे तो अगर है तो फिर इसका अर्थ हम यह क्यों ना लें कि वो किसी की भक्ति कर रहे हैं राम जी जो जब जाप कर रहे हैं वो स्वतंत्र है किसी की भक्ति करनी हो तो कर सकते हैं अगर करनी हो तो इसका मतलब हमारे कंट्रोल में नहीं है उनके उन्होंने पद्म पुराण में और अन्य जगह पर ये शिव जी की भक्ति करके बताया भी है शिवलिंग के निर्माण किया तो फिर एक तरीके से देखा जाए तो उन्होंने सिखाया शिव जी परमेश्वर इसमें कई होते हैं कंक्लूजशंस जो होते हैं जो फाइनल कंक्लूजन व्यास देव जी ने दिया है राम जी का नहीं मानेंगे क्या चीज कि वो कह रहे हैं कि शिव जी परमेश्वर है शिव और राम एक हैं भक्ति कर रहे हैं जाप कर रहे हैं उनका नहीं मानेंगे शिव जी स्वयं कह रहे हैं कि परम भगवान आराधनम राम भी तो कर रहे हैं सर क्या राम भी तो स्वयं कर रहे हैं क्या कर शिव जी की भक्ति

00:22:20:16 वो स्पेशल सिचुएशन थी क्योंकि रावण का वध करना था तो मतलब राम जी ने वो सत्य नहीं किया जो किया वो हमें नहीं करना चाहिए वध करना था मतलब उतने अंश में जो राम ने किया वो धर्म नहीं है वो हमें नहीं करना चाहिए या नहीं क्यों करना चाहिए जो शास्त्र कहते हैं हमारे लिए शास्त्र कह रहे हैं रामो विग्रहान धर्म मर्यादा पुरुषोत्तम उनको तो हम हम क्या अलग बोल रहे हैं? नहीं तो आप कह रहे हैं कि वो एक सिचुएशन के लिए था। वो हमारे लिए नहीं था। सबके लिए नहीं था वो। हां। तो आपका क्या कहना है मतलब? भाई राम ने शिव की पूजा करके ये सिखाया कि राम और जो विष्णु और हर हरि और हर एक हैं। हां। देखो जो आज का प्रैक्टिकल युग है। भगवत गीता और फिर उसके बाद श्री चैतन्य महाप्रभु आचार्यों के पद चिन्ह में चलो। नहीं तो आप भ्रमित हो जाएंगे। यही तो दुर्भाग्य है इंडिया का कि सब लोग किसी को भी किसी को मान लेते हैं जो अगर आप शास्त्रों परंपरा के द्वारा चलेंगे शिवजी का परंपरा है वो परंपरा के अनुसार चलो आप तो आपको परंपरा का शिव जी ने परंपरा उनके आचार्य हैं पुष्टि मार्ग के आचार्य विष्णु स्वामी जी उसके बाद पुष्ट मार्ग के आचार्य वल्लभाचार्य जी

00:23:35:20 वो संप्रदाय क्यों नहीं आप मान रहे अगर वो मानेंगे संप्रदाय मान रहे हैं इसका कोई क्वेश्चन का आंसर तो होगा ना संप्रदाय में कि राम जी को कैसे मना कर दें इस क्वेश्चन का आंसर होगा ना संप्रदाय में कुछ पर वही विष्णु स्वामी जो शिव जी के संप्रदाय रुद्र संप्रदाय है उन्होंने राधा कृष्णा की भक्ति सिखाई है और राधा कृष्ण को परम माना है मतलब कि कुछ पॉजिटिव वो तो देखिए ऐसा है आगे चलने का नहीं लाश है नहीं तो आपके विचार ठीक है हम रिस्पेक्ट करते हैं हमें जो गुरु परंपरा में हमारे गुरुदेव गुरु परंपरा से ही एक चीज आती है। जैसे हमने कहा कि हमारी गुरु परंपरा ने हमें ये सिखाया है और उनकी ने वो सिखाया तो वो भी सही है। हम भी सही है। क्या ये मानना ठीक है? फिर आप शास्त्र सबका ओरिजिन है ना शास्त्र तो शास्त्र से ही तो मैं आपको बता रहा हूं कि राम जी ने शिव की भक्ति सिखाई। अब जब शास्त्र बता रहा हूं तो आप परंपरा बोल रहे हैं। नहीं पर शास्त्र जो कंक्लूजन क्या है? वो कंक्लूजन परंपरा से आ रहा है ना। अब जैसे शैव शैव परंपरा है। देखो चार वैष्णव संप्रदाय हैं। आप जानते हैं एक रुद्र एक ब्रह्मा एक शी संप्रदाय ये चार कुमार का संप्रदाय और चारों संप्रदाय जो वैष्णव संप्रदाय

00:24:50:28 है निष्कर्ष है भगवान विष्णु या दादा संप्रदाय भी है ना जिसमें शिव को बड़ा बताया वो अलग है वो इसका मतलब वो वो गलत है या फिर वो हम उनको क्या से ले वो सत्य है या झूठ है क्या माने अनादि काल से ये भी बात हो रहा है वैष्णव उनको सुप्रीम बोल रहे हैं और वाइट उनको बोल दें और इसी कारण से हो रहा है ना नहीं तो सर इसीलिए तो इसीलिए मैं परंपरा को ना लाके मैं राम जी की बात कर रहा हूं परंपरा को इसीलिए नहीं ला रहा जैसे आपने कहा हमारी परंपरा राम जी से पूछ रहा हूं उनको त्रेता युग में थे राम जी उस तरह की जो भक्ति थी जो भी स्थितियां थी उसके अनुसार उसके बाद श्री कृष्ण जी का नहीं मगर शास्त्र में लिखा है कलयुग में राम का अनुकरण करो तो मुक्ति मिलेगी ये शास्त्र में लिखा है कलयुग में राम का अनुकरण करो कृष्ण का अनुसरण करो रामचंद्र जी चैतन्य महाप्रभु जी के रूप में प्रकट हुए 500 वर्ष पहले अगर आप नहीं मानेंगे वो अलग बात है नहीं हां तो एक चैतन्य महाप्रभु जी डभुज रूप में आए डभुज मीन छह उसमें रामचंद्र जी धनुष और बाण लिए हैं और श्री कृष्ण जी बजा रहे हैं चैतन्य

00:26:06:07 महाप्रभु जी सन्यास का डंडा और कमर डूब लिए हुए हैं तो वही श्री रामचंद्र जी कृष्ण है और वही चैतन्य महाप्रभु। अभी हम चैतन्य महाप्रभु जी ने जो टीचिंग्स दी है उनको फॉलो करेंगे तो हमारा कल्याण होगा। उन्होंने कीर्तन उन्होंने बताया है कि ये संकीर्तन आंदोलन इस कलयुग का युग धर्म है। उन्होंने शिव भक्ति राम भक्ति तक नहीं कही। उन्होंने कहा चैतन्य महाप्रभु और राधा कृष्ण की भक्ति को। वो तो सही है सर। मगर बात वही आ जाती है कि अगर चैतन्य महाप्रभु के रूप में अगर उन्होंने यह कहा तो राम रूप में जो उन्होंने किया और कहा उसको क्या माने झूठ माने ठीक है आप कुछ भी मानो [हंसी] जो अच्छा आपके विचार हम बदल नहीं सकेंगे नहीं नहीं बदलना नहीं सकते आप मेरे विचार चाहे बंद हो या ना बंद हो हमको फर्क नहीं पड़ता क्योंकि जो शास्त्र है हम उसको टाल नहीं सकते सर शास्त्र से ही तो बता पूछ रहा हूं मैं आपसे मैं तो शास्त्र से ही पूछ रहा हूं आप आप चैतन्य महाप्रभु को ला रहे हैं तो चैतन्य महाप्रभु क्योंकि वो अवतार है। मैं ये नहीं कह रहा तो राम भी तो अवतार है। राम को मना कैसे करना? हर एक युग में जो सर ये भी मैंने शास्त्र ने ये भी बता दिया कि कलयुग में राम का अनुकरण करना ही वो है।

00:27:21:20 क्लैश है किसी के पास? थोड़े अच्छा सर एक चीज और पूछनी थी। अ ये तो हो गया। ये जो वर्ण व्यवस्था है हमारी उसका जो सनातन धर्म के अनुसार इस द्वारा स्वीकार जो सिद्धांत है वर्ण व्यवस्था की तो उसका क्या लाभ है? क्या उपयोग है वर्ण व्यवस्था का? ये वर्ण व्यवस्था एक्चुअली ये स्वाभाविक नेचुरल डिवीजंस हैं। अच्छा। ऑलरेडी। कई लोग होते हैं जो बुद्धिमान इंटेलेक्चुअल टाइप होते हैं। कई क्षत्रिय टाइप होते हैं। इनका ड्यूटी है समाज को प्रोटेक्ट। कई वैश्य जो बिजनेस में बहुत तेज होते हैं वो रक्षा ये गीता में पूरी डिस्क्राइब किया है। ब्राह्मणों के क्या गुण है क्षत्रियों के वैश्यों के और शद्रों के लिए तो पूरी तरह से जैसे पहले था वर्णश्रम उसको इंप्लीमेंट करना शायद नहीं पॉसिबल होगा। पर हम सबके जो गुड क्वालिटीज है वो ले सकते हैं। जन्म से ही सब शूद्र होते हैं। लेकिन भक्ति आने से कोई विष्णु की सेवा करने से ये मतलब जन्म से शूद्र होना मतलब हमेशा से है। हां ये तो जन्म से सब शुद्ध होते

00:28:36:21 हैं। अनादिकाल से जन्म से सब शूद्र होते हैं। अच्छा अच्छा ठीक है। फिर फिर ये जो रिफॉर्मेशन विजा बनते हैं। संस्कार करने से प्यूरिफिकेशन आता है। शुद्धि करना तो संस्कार करने से कोई भी कोई भी बन सकता है। हम मैंने देखा है अच्छा संस्कार सत्य सत्य काम के एक प्रसंग आता है। गौतम ऋषि से दीक्षा देने चाहते थे वो अच्छा जब तक जिसका संस्कार नहीं हुआ है उसको शूद्र शूद्र माना जाएगा। जब तक संस्कार नहीं हो पर कोई भी किसी भी स्थिति में हो जो भगवान की तरह आ जाए भगवान की शरण में आ जाए वो शुद्ध हो शुद्ध नहीं शुद्ध होना तो एक अलग बात है भगवान की शरण में आ के जैसे कि मेरा पूछना ये था कि ये जो वर्ण व्यवस्था है इसका लाभ क्या है इसका मतलब यूज़ क्या है क्यों दी गई है ये वर्ण व्यवस्था हमको क्योंकि हमारा अल्टीमेट पर्पस लाइफ का है सेल्फ रियलाइजेशन जी आत्मा आत्मा सम जी जी आत्मा साक्षात्कार जी तो सर उसके लिए हमारे को यूनिटिटी होनी चाहिए शुद्धता होनी चाहिए इसमें कई जो तामसिक आदतें वो छोड़नी पड़ेगी मांस मछली अंडे यानी खाना प्याज लहसुन

00:29:51:22 ये सब छोड़ना पड़ता है नशा वाली चीज नहीं जब तक हम वो बुरी आदतों में रहेंगे हमारे में शुद्धता नहीं आएगी तो हम आगे प्रकृति नहीं कर सकेंगे नहीं ये तो है तो इसको तो केवल दो भाग में बांट सकते हैं सात्विक और तामसिक ये जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जो दिया है इसका जहां तक मुझे पता था वो यह था कि ब्राह्मण किसी को हमने टैग दिया जैसे और जैसे किसी को शूद्र का टैग है किसी को क्षत्रिय का टैग है। वही तो गलती है ना उसी कारण तो उसी के कारण तो इंडिया में मैं एक प्रश्न प्रश्न पूछ लूं। जैसे हमने कहा कि यह ब्राह्मण है, यह क्षत्रिय है, वैश्य है, शूद्र है। तो, इसका यूज़ यह है कि जब हमें किसी इंटेलेक्चुअल पर्सन की आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा ब्राह्मण कौन था भाई? उसके पास चलो। जब हमें सेवियर की रक्षा करने वाले की आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि चलो भाई क्षत्रिय जो था उसके पास चलो। और हमें जब किसी व्यापारी की आवश्यकता पड़ी तो हम वैश्य के पास चले गए। और हमें जब किसी शूद्र की आवश्यकता पड़ी सेवा कार्य करने वाले की तो हम शूद्र के पास चले गए। और इसी को इस चीज में जैसे ब्राह्मण की बेटी का ब्याह करना है तो ब्राह्मण को ढूंढ लो या क्षत्रिय की बेटी का ब्याह करना है शादी करनी विवाह करना है तो उसको ढूंढ लो तो ये तो ऐसी व्यवस्था

00:31:07:01 है तो क्या इसी के लिए ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र का हुआ नहीं ऐसा नहीं होता पुराने अनादिकाल से ये जो है भगवान के बनाया हुआ ही ये सिस्टम है जी और ये सिस्टम बनाया ताकि समाज व्यवस्थित हां सुचारू रूप से चलता रहेगा। ये समाज में वैसे भी ना भी डिवाइड करें तो भी ये डिवीज़ंस तो रहते ही हैं। कई लोग इंटेलेक्चुअल होते हैं। कई लोग जो चतुरिया टाइप की मेंटालिटी रहती है। तो बिजनेस से देखिए टैग लग जाने से हमें टैग की बातें टैग नहीं लगाना चाहिए। नहीं लगाना चाहिए। टैग तो हमने लगा दिया। हमने नहीं तो ये तो ब्राह्मण जो ब्राह्मण क्वालि गुण कर्म विभाग साने क्या लगा दिया? जन्म कर्म से लगा दिया। नहीं, मैं जन्म की बात नहीं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं कि जो यह टैग लगा रहे हैं गुण और कर्म के आधार पे वह क्यों लगा रहे हैं? हमें फ़ायदा क्या है उससे? कलयुग में अक्सर ब्राह्मण या क्षत्रिय वैश्य ढूंढना बहुत मुश्किल है। जैसे मैंने कहा कोलो शूद्र समव कलयुग में खासकर शद्रा का ही गुण है। आप सही कह पतित हो जाते हैं। हां पतित हो जाते हैं। पर फिर भी जो नाम जपेगा वो वै ब्राह्मण से भी ऊंचा है।

00:32:22:07 वो वैष्णव है। वैष्णव जो है ब्राह्मण से भी ऊंचा है। नहीं सर भक्ति के मामले में तो ठीक है। मुसलमान हरिदास ठाकुर आपने सुना होगा हरिदास ठाकुर जी मुसलमान के परिवार में जन्म हुआ जी परम वैष्णव बने नाम आचार्य बने तो अगर आप ये कुछ प्रश्न पूछते हैं तो कुछ चैतन्य महाप्रभु जी की नॉलेज भी होनी चाहिए आपको ठीक है तो मुसलमान थे कई और सनातन गोस्वामी रूप गोस्वामी उनका जगह करा दिया था महाप्रभु ने यज्ञ पवित्र कोई यज्ञ जरूरत नहीं है आपने कहा ना संस्कारों से वो संस्कार नाम नाम है चैतन महाप्रभु जी ने वो नाम जप करने वाले जो हरिदास जी थे क्या उनका यज्ञ पवित्र संस्कार कुछ भी आवश्यकता ही नहीं है तो मतलब संस्कार के बिना भी बन जाएगा नाम जो है सर्वश्रेष्ठ है नाम जो भी जपेगा वो ब्राह्मण से भी ऊंचा है सर मैं शायद अपना सवाल आपको समझा नहीं पा रहा हूं मैं पूछ रहा हूं इसकी आवश्यकता क्या है कि हम उसको ब्राह्मण कहे इसकी आवश्यकता नहीं है ना मतलब यूजलेस है ये बात चातुर वर्णेम मया सष्टम ये यूजलेस उस समय रेलेवेंट था और युगों में अभी भी ये कहीं लिखा है कि मतलब जो ये जो चातुर्वर्ण मया सिस्टम है ये कलयुग

00:33:37:08 के लिए रेलेवेंट नहीं है। वो हम प्रैक्टिकली देख रहे हैं। मतलब ये कहीं लिखा नहीं है। शास्त्र की बात नहीं है। ये ये हमारी मन की बात है। क्या मन की बात मन की बात कुछ नहीं करते। जो प्रैक्टिकल बात करते हैं हम वो देखते हैं। मतलब जो शास्त्र ने यह नहीं कहा कि कलयुग में 500 वर्ष पहले ब्राह्मण समाज था क्षत्रिय से वैश्य से पर ये ग्रेजुअली डिक्लाइन हो जा रहा है। नहीं डिक्लाइन आज आपको ब्राह्मण कहां मिलेंगे? सर डिक्लाइन होना एक अलग बात है। और मैं पूछ रहा हूं अगर मिल जाते हैं तो फायदा क्या है इसका? इसका क्या यूज़ है? क्योंकि मेरे पास तो हां इन वर्णों का यूज मुझे जो समझ में आया वो यह है कि जब पढ़ा जब अध्यापक की आवश्यकता पड़े तो ब्राह्मण के पास चले जाओ। नहीं वो कोई जो है जिस कार्य के कोई योग्य व्यक्ति है उसके पास हम जाएंगे। ठीक है ना? शुरुआत कैसे करेंगे सर उसे ढूंढने की? जैसे सपोज़ दैट जैसे मुझे मेरी बहन का विवाह करना है। अब मान लीजिए कि मुझे ब्राह्मण से करना है। वो छोड़ दीजिए मैं कौन हूं। मैं कौन हूं? वो छोड़ दीजिए। थोड़ी देर मान लेते हैं कि मुझे क्षत्रिय से करना चली मान लीजिए तो क्या उसको ले मैं सड़क पर उतर जाऊं हर व्यक्ति को चेक करने लगूं तुम्हारे गुण कैसे हैं तुम्हारे कर्म कैसे हैं तुम्हारे गुण कैसे तुम्हारे काम या मुझे कोई एक घर ढूंढना पड़ेगा वहां

00:34:52:16 से शुरुआत करते हैं ब्राह्मण का या क्षत्रिय का घर है वहां जाके मेरी बहन के लिए अगर लड़का अच्छा होगा तो शादी कर देंगे तो वो शुरुआत करने के लिए एक टैग मैंने ढूंढा कि क्षत्रिय का घर कौन सा है देखो ये आपसी समाज समाज की मामला है ये दिस नथिंग टू डू विद स्पिरिचुअलिटी यह दिस इज़ ट्रेडिशन में आपके घर के रिवाज क्या है? वह वेरियस डिफ़ेंट डिफरेंट कम्युनिटीज़ में अलग-अलग होता है। पर जभी आप

00:35:19:25 हरि नाम जपने शुरू हो जाएंगे आप ब्राह्मण से भी ऊंचे हैं। फिर उसमें कुछ नहीं मैटर करेगा

⬜ Not used yet · 00:35:27:03 – 00:53:11:00 (17:44)

00:35:27:03 कि आप ब्राह्मण से करो या क्षत्रिय से वैश्य से। अच्छा सर कितना नाम जप कर लेने पर वो ब्राह्मण हो जाएगा व्यक्ति। जैसे होगा ना 5 लाख। क्या ब्राह्मण से ऊंचा हो जाएगा? ब्राह्मण से ऊंचा हो जाएगा। कितना बार करने पर? वो जितना भी आप जैसे मैंने बोला अभी जैसे मान लीजिए मैं शूद्र हूं। मैं शूद्र हूं। मैंने बोला मैंने बोला हरे कृष्ण हरे भी नहीं है कि ब्राह्मण होना आप मैकेनिकली या आर्टिफिशियली ब्राह्मण नहीं बन सकते। ठीक है? तो ब्राह्मणों के गुण बताए गए हैं जिसमें सत्य हो है ना जो सोच हो क्लीनलीनेस हो दीक्षा हो जो मैनर्स वगैरह अच्छे हो सत्य हो वो ब्राह्मण उससे हम जान सकते हैं आपने से नहीं ठीक है हमने एक बात कही कि जो भगवान का संकीर्तन करने लगेगा वो ब्राह्मणों से भी ऊंचा हो जाएगा तो वो कितना संकीर्तन करेगा वो कितना संकीर्तन करेगा जिससे हो जाएगा जितना वो वो करेगा उतने पर डिपेंड होता है। अगर जैसे घोषित होना चाहिए कि अभी ये ऊंचा हो गया इसमें कोई मापदंड नहीं होता। मतलब अगर मैंने एक बार कह दिया हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे मिनिमम चार नियम मांस मछली अंडे नहीं खाना। दूसरा कोई तरह का नशा नहीं

00:36:42:04 लेना। तीसरा कोई लिसिट सेक्स या अवैध संग नहीं करना। और चौथा नो गैंबलिंग मतलब कि जुआ तो ये चार मिनिमम ब्राह्मणों से ऊंचा हो जाएगा फिर और प्रिंसिपल्स भी है और मिनिमम ये मिनिमम मिनिमम मिनिमम इसमें हो जाएगा फिर बाकी के और भी हैं तो फिर जब अगर सब लोग ये करने लगे तो क्षत्रिय तो बचा ही नहीं फिर बचा क्षत्रियों के गुण रहते हैं कसेशन दिए जाते हैं पहले जमाने में भी कंसेशन नहीं आज जैसे कोई नाम जब करने लगा बहुत ज्यादा और ये ये चारों गुण उसके अंदर आ गए तो क्षत्रिय तो रहा नहीं वो तो ब्राह्मणों से ऊंचा हो गया ब्राह्मण हो गया हां तो आजकल की स्थिति जो है प्रैक्टिकल स्थिति अब हम देखेंगे कि जो वैष्णव है वो ब्राह्मण से भी ऊंचा है और हमको ये जो है क्षत्रिय और जो हम एक और पर ट्राई कर रहे हैं वर्णाश्रमम इंप्लीमेंट करने का पर वो जो पुराने जमाने में जैसे वर्णाश्रम था उसका इंप्लीमेंट करना वो रेलिवेंट नहीं है उसका हां नहीं वो तो सही कह रहे हैं मगर ये बात समझ में नहीं आ रही कि अगर कोई व्यक्ति ये चार नियम पालन करने लगे अवैध सेक्स ना करे और वो मां मदिरा ना करे और जो है क्या कहते

00:37:57:06 हैं नाम जप करे शरणागत हो जाए और कुछ आपने नियम बताए थे जुआ ना खेले है ना तो वो ब्राह्मण हो गया तो फिर इसका मतलब हमारे पास क्षत्रिय वैश्य तो बचेंगे ब्राह्मण नहीं हो गया ब्राह्मण से ऊपर ऊंचा हो गया तो हमारे उसके उसका मतलब यह नहीं कि ब्राह्मण हो गया तो हम सर वैष्णव हो गया तो हम क्षत्रिय के लिए कहां जाएंगे फिर तो की जरूरत नहीं पड़ेगी फिर हमारे को सर किसी माता की बहन की गरिमा भंग की जा रही है बात हां तो उसके लिए उसके लिए किसी रक्षा करने वाले को चाहिए ना हमें जैसे क्षत्रिय राघव राम अर्जुन जी हे अर्जुन जा युद्ध कर रक्षा कर आज के युग में अगर आप क्षत्रियों का पालन कर लेंगे जो पालन जैसा अभी मैं बात कर रहा हूं कॉन्टेक्स्ट में आज के कॉन्टेक्स्ट में ये जो है एडमिनिस्ट्रेशन वगैरह आप कितने भी सत स्ट्रांग क्षत्रिय हो आप किसी के ऊपर भी कुछ भी करो अटैक करो या कुछ हो आपको न्यायालय जो है कंट्री के जो है वो नियम लागू होने पर सर ये शाश्वत सिद्धांत थोड़ी ना न्यायालय का शाश्वत सिद्धांत तो हमारे सनातन रियलिटी तो वो है ना नहीं वैलिड है नहीं रियलिटी रियलिटी वो है मगर वो शाश्वत नहीं है उसमें तो आज एलजीबीटी को भी आप ये आर्ग्यू करना चाहते हैं शायद मेरे पास वो

00:39:12:14 नहीं है एबिलिटी ना ही मेरे पास समय अच्छा अच्छा बस एक एक लास्ट क्वेश्चन है इससे थोड़ा सा आगे बढ़ते हैं इसको छोड़ देते हैं एक सर ब्रह्म संभिता में एक चीज आती है वो बड़ी मतलब मुझे परेशान करती है और और जन समाज में भी इसको लेकर के बहुत ज्यादा वो है भ्रम उसमें कहा गया है कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव से कृष्ण नहीं बन सकते आपने बताया शिव जी जो है वो कृष्ण का ही विस्तार है है ना तो यानी कि कृष्ण ही शिव बने मगर शिव बनने के बाद वापस कृष्ण नहीं बन सकते हैं। तो यहां पे क्या हुआ कि जो दूध है वह बाधित है वो पूर्ण नहीं है। उसके अंदर गुण नहीं है कि वो अगर दूर दूर दूध बन गया तो वापस आ सके। मगर हम कृष्ण को जो सुप्रीम कंट्रोलर है जो किसी भी नियम के नीचे नहीं है। उसके लिए हम कैसे कह सकते हैं कि वो शिव बनने के बाद वापस कृष्ण नहीं बन सकता।

00:40:08:00 वे उनका इटरनल एक्सपेंशन है। उन्होंने ऐसा शिव जी का रूप धारण किया है इस जगत का संचालन करने के लिए। जी। ठीक है ना? तो कुछ चीजें जो है वो हमारे लिए अचिंतनीय है। इनकंसबल है। कब यह हुआ कैसे हुआ? कई चीजें हम नहीं समझ में। हमारी सोच के बाहर रहे। ठीक है ना? तो जितना हमारे को शास्त्र से ज्ञान है गुरु द्वारा गुरुजनों के द्वारा ज्ञान होता है उसको हम समझ सकते हैं मेंटल स्पकुलेशन से मतलब इस चीज को हम समझ नहीं सकते इस वाली बात ये अचिंतनीय है अचिंतनीय अच्छा एक तो फिर इसमें बात ये आती है जैसे हम लोग गुरुओं को फॉलो कर रहे हैं चैतन्य महाप्रभु जी ने कहा कि मेरे जो गुरु हैं मैं जगतगुरु मानता हूं अ श्रीधर स्वामी को श्रीधर ही टीका था उनका ठीक है मैं श्रीधर स्वामी के द्वारा कृष्ण कृष्ण को समझ पाया हूं और वो ब्रह्मांड के गुरु हैं। तो श्रीधर स्वामी जिसको अपना गुरु मानते हैं क्या उनकी दी हुई शिक्षा हम लोग फॉलो कर रहे हैं? कर रहे हैं ना भागवतम जो है गुरु परंपरा में ही आ रही है। नहीं नहीं श्रीधर स्वामी तो शंकर परंपरा के हैं ना शंकराचार्य थे। हां श्रीधर स्वामी अपने समय के शंकराचार्य आप समझिए

00:41:24:00 के श्रीमद् भागवतम के जो मुख्य टीकाकार हैं श्रीधर स्वामी है और श्रीधर स्वामी के बाद फिर चैतन्य महाप्रभु उसी श्रीधर स्वामी किस परंपरा के थे वैष्णव संप्रदाय ना शंकराचार्य शंकराचार्य थे अपने समय के श्रीधर स्वामी अपने समय के शंकराचार्य थे चैतन्य महाप्रभु इस की किताबों में भी लिखा है जी इस की किताबों में लिखा है के चैतन्य महाप्रभु जी ने श्रीधर महाराज को परम पद दिया इसलिए परम पद दिया कि उनकी जो कमेंट्री है भागवतम के ऊपर वो सबसे ऑथेंटिकेटेड है तो वो तो सर मधवाचार्य जी से नहीं आई ना वो तो शंकराचार्य

00:42:14:00 वो जो जिस परंपरा में वो शिष्य हैं श्रीधर स्वामी हां वह शंकराचार्य के शिष्य हैं। अह शायद 1200 से 1300 के आसपास वो वहां के शंकराचार्य भी उसी काल के थे। मधवाचार्य जी की परंपरा तो अलग थी ना। हम श्रीधर स्वामी जो है वो शंकर संप्रदाय के शिष्य हैं। वो गुरु शिष्य परंपरा है। शंकराचार्य अभी लाइन गई हुई नहीं तो मैं आपको रेफरेंस बताता। हम रेफरेंस मैं बता रहा हूं आपको। हमारे पास भी रेफरेंस है। मोबाइल था ना आपका मोबाइल कहां है? चैतन्य महाप्रभु जी के ही भक्त रेफरेंस भक्त थे वल्लभाचार्य जी जी

00:42:56:02 नहीं वल्लभाचार्य नहीं जो श्रीधर स्वामी है जिनको वो जगतगुरु मानते हैं चैतन्य महाप्रभु वो श्रीधर स्वामी शंकराचार्य के भागवत यानी भागवतम का भाष्य श्रीधर स्वामी उसको अपना प्रमाण मानते हैं और वो जो है मधवाचार्य परंपरा से नहीं है। तो भाई शंकराचार्य ने भागवत के ऊपर कोई भाष्य नहीं लिखी है। श्री सीधर स्वामी ने किया ना भाष्य उस पर शंकराचार्य आदि शंकराचार्य नहीं उनकी शिष्य के शिष्य के शिष्य उस परंपरा के जो शंकराचार्य थे तो उनके बारे में मैं आपको दिखा देता हूं इसको पासवर्ड खोल दीजिए

00:43:34:19 Google श्रीधर स्वामी देखिए श्रीधर स्वामी इस द फॉर्मर लेट हेड शंकराचार्य ऑफ गोवर्धन मठ ड्यूरिंग 12th सेंचुरी ही वाज अ ग्रेट स्टोंज डिवोटी ऑफ़ लक्ष्मी नरसिम्हा एंड बिंदु माधव लक्ष्मी नरसिं सो लक्ष्मी सिंह के भक्त हैं वो तो भक्त तो शंकराचार्य भी कृष्ण के थे आप शिव जी के भक्त बोल रहे हैं ना नहीं मैं भक्त नहीं बोल रहा उनका जो टीका है उसको हमने ऑथेंटिक माना चैतन महाप्रभु जी ने श्रीधर स्वामी स्वामी के टीके को और श्रीधर स्वामी जो बिलोंग करते हैं शंकराचार्य परंपरा लिखा है वो बोला ना आपको दिखा तो वो तो नरसिंह का बोल रहा है परंपरा गुरु परंपरा कौन सी है गुरु परंपरा उनकी शंकराचार्य शंकराचार्य तो पांचों देवों को बराबर मानते हैं ना ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश तो उसमें से कोई किसी की भी भक्ति कर सकता है तो इसमें श्रीधर स्वामी इस द फॉर्मल लेट हेड ऑफ शंकराचार्य ऑफ गोवर्धन मठ ड्यूरिंग 12्थ सेंचुरी इनके द्वारा जो टीका लिखा गया है श्रीमद् भागवतम पर उसको चैतन महाप्रभु ने माना और यह भी कहा कि जो भी इसके अगेंस्ट टीका लिखेगा वो मेरे लिए प्रोस्टट्यूट के समान होगा और उनको कहा

00:44:49:20 कि वो ब्रह्मांड के गुरु हैं। जगत गुरु हैं। एक चीज और कही थी कि मैं कृष्ण को जान पाया हूं उनकी श्रीधर स्वामी के वजह से तो अगर चैतन्य महाप्रभु श्रीधर स्वामी को अपना गुरु मानते हैं तो श्रीधर स्वामी तो शंकराचार्य परंपरा के हो गए और शंकराचार्य परंपरा के हो गए। चैतन्य महाप्रभु शंकराचार्य परंपरा के हो गए। तो उनको चैतन्य महाप्रभु को मानने वाले हम लोग इस के लोग फिर वो अपने आप को मधवाचार्य का कैसे कह रहे हैं क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने साक्षात मध्य जो मधवाचार्य के पास आए थे माधवेंद्र पुरी ईश्वर पुरी उनसे दीक्षा ली स्वयं उन्होंने नहीं मगर उन्होंने शंकराचार्य को तो रिजेक्ट किया शंकराचार्य महाराज ये जो है स्वामी उसको इसॉन की आपको चीज दिखा देता हूं हां बताइए ये इस डिजायर ट्री नाम से वेबसाइट है। इसमें श्रीपाद शंकराचार्य के बारे में बात हो रही है।

00:45:45:22 इसमें इस ने भी माना है कि जो श्रीधर स्वामी थे वो अपने समय के शंकराचार्य थे उनका टीका माना चैतन्य महाप्रभु ने और यह तक कहा कि मैं कृष्ण को जानता हूं उनसे श्रीधर स्वामी से ईश्वर पुरी जी से नहीं जानता हूं। श्रीधर स्वामी से कृष्ण को जान पाया। तो हमारा गुरु तो वही है ना जो मैं ब्रह्म का बोध कराए। अब जब ब्रह्म का बोध करा रहे हैं श्रीधर स्वामी तो उनके जो मेन गुरु सिद्ध हुए वह श्रीधर स्वामी हुए और श्रीधर स्वामी ने जो भागवतम लिखी है उन्होंने ये भी कहा कि उसके अगेंस्ट तो आज क्या इस कौन श्रीधर स्वामी की भागवतम पढ़ाता है? हां ठीक है। दूसरा एक प्रश्न यह बना कि श्रीधर स्वामी जब शंकराचार्य संप्रदाय के हैं तो फिर उनको मानने वाले चैतन महाप्रभु को मानने वाले हम ठीक है बहुत सुंदर प्रश्न तो उसमें यह भी आता है शंकराचार्य जी ने यह भी कहा भज गोविंदम भज गोविंदम भज गोविंदम मूढ़माते मृत्यु के समय ये जो आपका स्पेकुलेशन ये हेल्प नहीं करेगा तो वो भी तो मगर सर इसमें एक बात श्रीधर स्वामी ने तो वो भी तो पॉइंट लिया है पॉइंट है सर इसमें पॉइंट ये है कि शंकराचार्य ने 72 स्त्रोत लिखे हैं। उसमें से एक है भजगोविंदम। उन्होंने माता की भक्ति भी करना सिखाया है। उन्होंने शिव की भक्ति करना भी सिखाया है।

00:47:01:06 आस्तकम जो हम गाते हैं वो भी शंकराचार्य ने लिखा है। नहीं तो उन्होंने लास्ट पॉइंट जो होता है सर लास्ट पॉइंट उन्होंने क्या कहा? हम उन्होंने कहा भज गोविंदम भज गोविंद ऐसा नहीं उनकी प्रश्नमाला है मणि प्रश्नमाला नाम की बुक है जब भक्त ने उनसे पूछा कि मैं जीव भाव को प्राप्त हो गया हूं तो मैं क्या करूं तो वहां पर शंकराचार्य ने बोला तुम या तो शिव की भक्ति करो काम के शत्रु शिव की भक्ति करो या कंस के शत्रु कृष्ण की भक्ति करो उन्होंने दोनों को एक बता दिया तो तो उन्होंने केवल भजगोविंदम नहीं लिखा है उन्होंने बहुत से स्रोत लिखे उसमें से एक भज गोविंद जगन्नाथ आसम भी लिखा है। उन्होंने सौंदर्य लहरी भी लिखा है। हां। सौंदर्य लहरी में उन्होंने माता की पूजा की है। चैतन्य महाप्रभु जी अगर आप नहीं स्वीकारते तो अलग बात है। अगर आप स्वीकार करेंगे चैतन्य महाप्रभु नहीं मैं कर तो रहा हूं। चैतन्य महाप्रभु शंकराचार्य को अपना गुरु बता रहे हैं। चैतन्य शंकराचार्य को मान जरूर देते हैं। पर उन्होंने यह भी कहा है कि मायावादी भाष्य सुनीले सर्वनाश। अब सर इसमें एक इसमें अब यह बात आ जाती है जैसे अभी आप सुनिए सर डिबेट नहीं है सर एक एक छोटा सा क्वेश्चन आ जाता है इसमें एक छोटा सा यह है कि हमने कहा कि शंकराचार्य जी ने भज गोविंद बताया यानी

00:48:16:09 शंकराचार्य ने अच्छी शिक्षा दी दूसरी तरफ हम कह रहे हैं शंकराचार्य का जो भाष्य है वो मायावाद है गलत मैं नहीं कहता वो चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु कह रहे हैं तो अगर शंकराचार्य मायावाद फैला रहे हैं हां तो फिर क्या भजगोविंदम भी मायावाद है नहीं इसीलिए उनका जो एसेंस था शंकराचार्य जी का एक पपस था क्योंकि उसमें बुद्धिज्म बहुत ज्यादा फैल गया था। बुद्धिज्म बुद्धिज्म फैल गया था। वहां से पर्सनल व्यक्तिगत रूप भगवान का समझाने में मुश्किल होती। ये इंटरमीट स्टेप थी ताकि ये फिल्म फिर सर उसको उसके बाद चैतन्य महाप्रभु तो उनके शिष्यों का ज्ञान चैतन महाप्रभु ने क्यों लिया? शंकराचार्य ने गलत दिया ना कह तो रहे हैं श्रीधर स्वामी मेरे मेरे मैं श्री कृष्ण को जान पाया हूं श्रीधर स्वामी श्रीधर स्वामी हां श्रीधर स्वामी शंकराचार्य के शिष्य हैं पर श्रीधर स्वामी के थ्रू भगवान को जानने शंकराचार्य को नहीं जाने वो नहीं शंकराचार्य को जानने शंकराचार्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य से वो पढ़ने जा रहे हैं तो वो शिक्षा तो वही देंगे जब जो उन्होंने दी थी जो शिक्षा आदि शंकराचार्य जी ने दी थी वही शिक्षा तो देंगे ठीक है तो पर वो अगर आप नहीं सुनते बार-बार मैं आपको बोल रहा हूं। उन्होंने इतनी शिक्षा दी शंकराचार्य पर लास्ट में क्या बोला?

00:49:31:15 भज गोविंदम भज सर ये कहां लिखा है? कहां लिखा भज गोविंदम लास्ट में बोला लिखा हुआ ना ये तो आपको ये अगर ये नहीं मालूम सर मैं शिष्य हूं शंकराचार्य का मेरे पास ग्रंथ अच्छा मालूम है बाज गोविंदम तो एक बहुत वेल नोन प्रेयर है सर सौंदर्य लहरी भी है वेल नोन प्रेयर है ये बात है आपको नहीं पता है नहीं पता होगा हम आप जैसे विद्वान नहीं है पर हमको ये इतना तो मालूम है नहीं शंकराचार्य के बारे में नहीं पता ये बोल ठीक है उन्होंने जैसे आपको में सब कुछ करने के बाद ये गलत उन्होंने यह कहा के आप मूढ़ मातो आपकी जो बुद्धि भ्रष्ट है आप पांच गोविंदों को सर उन्होंने लास्ट में नहीं लिखा है ये जो स्पेकुलेशन है मेरा बैग देखिए जरा मेरा बैग देखिए उसमें 72 स्त्रोत के नाम लिखे हैं उनके किसी के पास कोई बुक है अगर आप बताते हैं कि ऐसा तो मैं भी बुक्स अपनी लेकर आता नहीं नहीं वो जो आप कह रहे हैं ना लास्ट में लिखा वो नहीं है वो बीच में लिखा है लास्ट में नहीं लिखा कहीं भी लिखा हो पर उसी को मानेंगे बाकी को छोड़ देंगे क्या नहीं और सबसे इंपॉर्टेंट कंक्लूशन क्या है? सर उन्होंने नहीं कहा कि ये इंपॉर्टेंट सबसे इंपॉर्टेंट कह रहा हूं मैं। उन्होंने जब जिसकी भक्ति की है उसी को सबसे इंपॉर्टेंट बताया है। शंकराचार्य ने नहीं कहा कि

00:50:46:19 सबसे इंपॉर्टेंट ये है। उन्होंने शिव को भी सबसे इंपॉर्टेंट कहा। उन्होंने माता को भी सबसे इंपॉर्टेंट कहा। अच्छा चलिए ठीक है। हम लोग आए थे यहां पर प्रभु जी के साथ बातें करने। चलिए रहने दीजिए अब। तो बहुत अच्छी सी रोचक सी चर्चा आप लोगों को देखने को मिली। प्रभु जी थोड़ा सा बताना चाहेंगे जो आपके यहां जो कृष्ण जन्माष्टमी का प्रोग्राम होने वाला है। हमारे गडिया संप्रदाय में जी ये 26 अगस्त को दुनिया भर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। अच्छा अच्छा तो ये सनातन धर्म का आप तो जानते हैं मुख्य अंग है। चाहे कोई भी परंपरा हो हम जैन तक हो सिख तक भी हो जन्माष्टमी तो श्री कृष्ण जन्म मनाते हैं ये वर्ल्ड वाइड हमारे रशिया में अमेरिका चाइना पाकिस्तान में भी बहुत बढ़िया मनाई जाती है बहुत अ इंपॉर्टेंट फेस्टिवल है जी हमारे लिए ये बहुत रोचक बात है 1965 में अच्छा प्रभु भूपाल जी कोलकाता से अमेरिका गए थे तो उन्होंने उसी मास में

00:52:01:27 अगस्त 20 को जन्माष्टमी मनाई थी जहां आज की बनी और फिर आगे पहुंचे अमेरिका में और फिर उन्होंने सनातन धर्म का प्रचार किया मुख्य तौर पर भगवत गीता और श्रीमद् भागवत का आज घर-घर में हरे कृष्णा मंत्र भगवत गीता होती है। बहुत से वैष्णव चैतन्य महाप्रभु जी की भविष्यवाणी थी के पृथ्वी तत नगर आद नाम सर्वत्र प्रचार पृथ्वी में हर एक नगर देश और गांव में उनके नाम का प्रचार हो। तो ये एक्चुअली अभी चल रहा है। तो आप सभी कृष्ण महोत्सव से जुड़े। अगर आप इस मंदिर ना भी पहुंच पाए तो कम से कम अपने घर में रहकर के कृष्ण जन्माष्टमी जरूर मनाएं और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें और जैसा भी आपके यहां परंपरागत रूप से मनाई जाती हो भगवान श्री कृष्ण की जन्माष्टमी है तो ऐसा था हमारा प्रभु जी के साथ इंटरव्यू आप लोगों को कैसा लगा बताइएगा सभी को जय श्री राम

00:53:09:26 [संगीत]

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    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 53:12 · 14 Aug 2024

अनसुलझे प्रश्न Disciple of srila prabhupada #iskcon #iskcondevotees

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