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00:00:02:00 तो सभी को जय श्री राम। यह पेपर आप देख रहे होंगे मेरे हाथ में। अ मेरी जानकारी में आर्य समाज का अनुगमन करने वाली एक संस्था है जिसने अपना नाम लिखा है वैदिक संस्थान और इसकी तरफ से हमें जो है पत्र प्राप्त हुआ है कि आपने अपने फला फला वीडियो में जो है आर्य समाज की गुरु परंपरा पर प्रश्न किया है या अज्ञानतापूर्ण बातें की हैं। आक्षेप लगाए हैं। अ अनैतिक आचरण किया है। इस तरह का भाव प्रस्तुत करते हुए इस लेटर में हमको और उसके उत्तर में हमने यह अपनी ओर से पांच प्रश्नों का एक
00:00:56:04 उत्तर दिया है। उन्होंने हमें यह कहते हुए कि आपने आर्य समाज का अपमान किया। आपने आर्य समाज को अ आपत्तिजनक बातें की आर्य समाज के बारे में। तो यह कहते हुए उन्होंने कहा कि हम आपको शास्त्रार्थ की चुनौती देते हैं और आपका आने जाने का जो व्यय है वह भी हम देखेंगे और आप यहां आइए गुजरात अहमदाबाद और आकर के अपना पक्ष प्रस्तुत करिए। तो हमने इसमें अपना उत्तर दिया है। वैसे आपको एक बात बता दूं हसी की कि जब मैंने इस पत्र के बारे में कि भाई हमें इस तरह से आर्य समाज का अनुगमन करने वाली किसी संस्था ने शास्त्रार्थ की चुनौती दी है और चुनौती को स्वीकार ना करने की स्थिति में अथवा हार जाने की स्थिति में दोनों ही रूप में अह या तो क्षमा मांगने की लिए बोला गया है कि वह उन आपत्तिजनक जो उनको आपत्तिजनक लग रही है उन आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट आदि से हटाएं या फिर हमारे विरुद्ध कारवाई की जाएगी कानूनी जहां तक है संवैधानिक कारवाई तो जो कुछ ऐसे शुभचिंतक भी थे जिन्होंने कहा कि यह जो पत्र आपको प्राप्त हुआ है इसका एक काम करिए बरसात का सीजन चल रहा है तो बच्चों को नाव बना करके दे
00:02:11:08 दीजिएगा उसमें या तो नाव बना करके वो तैराएं या फिर वो हवाई जहाज भी बनता है ना हवा में उड़ाने के लिए वो भी तो मैंने उनको कहा भाई यह नहीं कर सकते क्योंकि हमें यह हार्ड कॉपी नहीं मिली है हमको अभी यह पीडीएफ ही मिली है सॉफ्ट कॉपी मिली है WhatsApp आदि के द्वारा हार्ड कॉपी शायद उन्होंने बाय पोस्ट वगैरह भेजी भी होगी। शायद अभी तो हमें प्राप्त नहीं हुई है। तो हमें पीडीएफ मिला है। वह पीडीएफ भी कितना जेन्युइन है वह नहीं पता। तो अभी हम हवाई जहाज और नाव तो नहीं बना सकते। हां जिस तरह से वहां से कोई बात आई है तो उस तरह से उनको प्रत्युत्तर अवश्य दे सकते हैं। तो वो हम दे रहे हैं। हमने सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि हमने इसमें इनकी जो शास्त्रार्थ की जो चुनौती है इसको स्वीकार किया है। पर स्वीकार करते हुए हमने अपनी दो शर्तें रखी हैं वहां पर वो मैं आपको बताने वाला हूं कि क्या है क्या नहीं है। मैं अपने हमने अपने लेटर में क्या लिखा है वह सब कुछ विस्तृत बात आपको बताने वाला हूं। तो सर्वप्रथम आपके पत्र में कुछ ऐसे विषय हैं जिनके संबंध में आपको स्पष्टीकरण उपलब्ध कराना चाहिए था और चाहिए। पहला तो यह है कि आपके पत्र के आधार पर यह प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है कि भाई यह जो पत्र ये जो शास्त्रार्थ की चुनौती हमें प्राप्त हुई है
00:03:26:28 यह हमें जो है आर्य समाज की तरफ से प्राप्त हुई है। तो सबसे पहली बात तो यह है क्या यह जो जानकारी है कि पूरे समग्र रूप से आर्य समाज ने हमें शास्त्रार्थ के लिए आमंत्रित किया है। क्या यह बात सच है? और अगर सच है तो किस आधार पर सच है? कैसे यह निर्णय किया जाए कि यह समग्र आर्य समाज की तरफ से आमंत्रण हमें दिया गया है। दूसरी बात यह भी है कि इसमें जो आपने यह नहीं बताया कि यह जो चर्चा होगी हमारे आपके बीच में इसमें निर्णायक कौन होगा? कैसे यह तय होगा कि भाई इनका पक्ष मजबूत रहा इनका नहीं रहा। या मध्यस्थता की भूमिका किसकी रहेगी और किस आधार पर रहेगी? वह किस आधार पर चुना गया है? यह बात हो गई। अब इसके बाद अगला जो है कि अ इसको लिखने वाले व्यक्ति की जो व्यक्तिगत पहचान है वो इसमें कहीं पर भी नहीं है कि किसने भेजा है। इसको लिखा किसने? किस-किस के भाव इसमें पिरोए गए हैं। केवल संस्था का नाम है और जहां पर हस्ताक्षर होते हैं, वहां पर अधिकृत सदस्य ऐसे लिखा हुआ है। उस अधिकृत सदस्य का कुछ नाम भी हो सकता है। खैर वो नाम नहीं है वहां पे। हमने जो अपना पत्र दिया है उसमें
00:04:42:04 अधिकृत हस्ताक्षर की जगह पर खुद साइन किए हैं अध्यक्ष अध्यक्ष के रूप में। तो जब हमने इस पत्र को लिखने वाले व्यक्ति के बारे में पता करने के लिए या संस्थान किसके द्वारा संचालित हो रहा है उसके सदस्य कौन-कौन है? इस बारे में पता करने के लिए इस पत्र में दिए गए संपर्क सूत्र पर जब फोन किया तो वहां पर किसी सज्जन से बात हुई तो उन्होंने उनसे बातचीत के दौरान हमें पता लगा कि जो ऋषि उवाच नाम का जो चैनल है उस चैनल से जो सामग्री प्रचारित प्रसारित की जाती है वो चैनल इन्हीं के द्वारा संचालित होता है ये जो संस्थान है इसके द्वारा वैदिक संस्थान और यही नहीं उस चैनल पर जो मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्ति दिखाई देता है। वह भी इस संस्था का एक पदाधिकारी है। एक अधिकृत सदस्य है। वही व्यक्ति जो काफी आपत्तिजनक टिप्पणियां करता है अपने वीडियोस के माध्यम से व्यक्तिगत प्रहार करता है ना कि सैद्धांतिक बातें करता है। फिर जब हमें यह पता लग गया तो फिर ऐसे में हमारी जो दो अपेक्षित स्थितियां हैं जिनके निर्वाह की निर्वाह हो जाने पर ही हम इस संस्था का ये जो चर्चा का आमंत्रण
00:05:57:10 है स्वीकार करेंगे और वहां जाएंगे और इनसे अपना जो सैद्धांतिक पक्ष है वह रखेंगे। अब वो स्थितियां क्या है? पहली बात यह है कि ऋषि ओवाच नाम के ही कई सोशल मीडिया हैंडल्स हैं। जैसे Twitter अकाउंट है या Instagram है या उसका Telegram चैनल है या उसका YouTube आदि है। तो ऐसी बहुत सी सामग्री हमें प्राप्त है जो अह जिसमें कि काफी अश्लील बातें मां भगवती राधा के बारे में हमारे पुराणों के बारे में उसमें जो भगवान की लीलाएं हैं उसको अलग ही एक स्वर में आप तो जानते ही हैं। ये सर्वविदित बातें हैं कि किस तरह से आर्य समाज को फॉलो करने वाले लोगों के द्वारा कई अभद्र आपत्तिजनक बातें की जाती हैं। राधा कृष्ण के बारे में पुराणों के बारे में या जो रूप लेते हैं भगवान हमारे साकार ईश्वर के बारे में सब बातें की जाती है और क्यों ना की जाए भाई जब दयानंद जी ने ही अपनी जो लेख आदि हैं उनमें ही ईश्वर के लिए जो भगवान शिव की शिवलिंग है उसके बारे में और काफी अनापशनाप उसमें लिखा है कि वो वो
00:07:12:21 वहां कैलाश में है तो उनका शिवलिंग यहां पर है तो वहां क्या जो शिवलिंग है वो वो वहां जो शिव जी हैं क्या वो नपुंसक ऐसे कुछ शब्दों का उपयोग किया है जिसको बोलने [गला साफ़ करने की आवाज़] में मुझे थोड़ा सा असहज लग रहा है। तो इस तरह की चीजें तो यह जो ऋषि उवाच नाम का चैनल है इससे हमें काफी सोशल मीडिया की ऐसी सामग्री प्राप्त है जिसमें कि बहुत सी अश्लील वक्तव्य आदि शंकराचार्य के बारे में अ काफी मतलब उसको शब्दों में पिरो करके प्रस्तुत करने में असहजता है। मुझे तो नहीं कर सकता। खैर मगर हां यह जो सामग्री हमें प्राप्त है यह सामग्री अभी जांच के अधीन है। अभी इनका सत्यापन नहीं हुआ है और इसके बारे में यह भी है कि यह सामग्री अब यहां से हटा दी गई है। तो हमारी जो पहली अपेक्षित स्थिति है वह यह है कि आप इसमें अपना स्टैंड क्लियर करें कि यह जो सामग्री हम बता रहे हैं जिसमें कि अश्लील बातें बहुत सारी आपत्तिजनक बातें आदि शंकराचार्य के बारे में भगवत स्वरूपों के बारे में मां भगवती के बारे में राधा के बारे में पुराणों के बारे में हमारी पूजा पद्धति के बारे में जो अश्लील चीजें हैं जो बिल्कुल भी अगर जिन पर
00:08:27:22 बात की जाए तो कानून की मर्यादा को भी लांग जाती हैं। ऐसी सब चीजें जिन सामग्री में दी गई है, इसके बारे में आपका क्या कहना है? वह सच है, झूठ है, यह आप अपना पक्ष वहां पर प्रस्तुत करें कि आपके विरुद्ध कोई संवैधानिक कारवाई कानूनी कारवाई क्यों ना की जाए। तो, इसमें अपना स्टैंड आप अपना क्लियर करें। और दूसरी अपेक्षित स्थिति यह है कि काफी सारी सामग्री हमें सीधे-सीधे हमें जिस जो किसी की मध्यस्थता से नहीं मिली है वो सीधे-सीधे आपके चैनल से आपसे वार्ता करते समय हमें प्राप्त हुई है। अ जैसे कि सबसे पहले अगर बात करें तो जब हमसे आपकी बात हो रही है अ चर्चा में आने के निमित्त टेलीग्राम पर तो कोई एक नियम को लेकर के जब हमने आपत्ति जताई जब चर्चा के निमित्त बात हो रही थी तो उसमें एक नियम आया ऋषिवाच की तरफ से ऋषिवाच चैनल की तरफ से उस उस व्यक्ति का नाम प्रीतेश बताया है कि कृतेश बताया गया वो भी स्पष्ट नहीं है मगर ऋषिवाच के रूप में ही अगर उस व्यक्ति को देखा जाए तो उसकी तरफ से यह जब एक ऐसी पहले चर्चा हो रही थी जिस बारे में हमने एक पूरा वीडियो बना के रखा है। उसका लिंक भी दे देंगे। तो जब वह चर्चा हो रही थी तो कोई एक नियम को लेकर बात अटक गई। हमने कहा हम इस नियम को नहीं मानते।
00:09:43:01 उन्होंने कहा मानो। हमने कहा हम नहीं मानते। हम परतंत्र थोड़ी ना हैं कि आप जो संविधान लिख देंगे वो हम मान लें। और नहीं मानेंगे तो आप आप अभद्रतापूर्ण बातें करने लगे। इन्होंने की अ कुछ ऐसे डायलॉग्स थे वहां पर कि उस समय तक मुझे इनकी ये जो सामग्री थी ना इंटरनेट वाली यह भी नहीं पता थी। अगर यह पता होती तो मैं इनसे वो बातें भी ना कर रहा होता। अगर इनकी वो इंटरनेट वाली जो सामग्री है जो इन्होंने ट्वीट किए हैं टेलीग्राम पर अभद्र बातें की हैं। यह सब अगर मुझे पता होती तो मैं इनसे वह बात भी ना कर रहा होता। मैं तो यह जानता था कि यह व्यक्ति जो है आर्य समाज का प्रतिनिधित्व करता है। जब कोई बात होती है तो वहां से चर्चा के लिए उपस्थित होता है। तो जब हमारे बीच में चर्चा को लेकर के नियमों को लेकर के सामंजस्यता नहीं बैठने लगी तब इन्होंने वहां पर आपत्तिजनक अभद्रतापूर्ण व्यवहार शुरू कर दिया कि एक-ए मिनट की रील बना के पैसे कमाने वाला कुछ इस तरह के उसमें डायलॉग्स लिखे थे। वो हम सब यहां पर दिखा देंगे। सब कुछ है। अच्छा। इसके अलावा जब इनसे हमारी कोई बात चल भी नहीं रही थी तब भी इन्होंने टीपू सुल्तान से कनेक्ट करते हुए जो है शंकराचार्य के बारे में अ शुरू किया था बोलना कि शंकराचार्य हिंदू द्रोही हैं। ये हैं वो हैं। यह शंकराचार्य का पक्ष पूछने
00:10:58:04 उनके पास कभी नहीं गए कि आपकी वेबसाइट से हमें ऐसी जानकारी मिली है। इसका अर्थ क्या है? वो वहां से पूछा। वहां से या वेबसाइट से पढ़ा और अपने मन मुताबिक कांट छांट करके वो ले लिया। भले ही उसी वेबसाइट में लिखा हो कि बाजीराव पेशवा मराठा जिनका विरोधी होने का आरोप लगाया जा रहा है उन्होंने प्रथम पूज्य शंगेरी के शंकराचार्य को घोषित किया था। यह भी वही लिखा है। भले ही वहां पर लिखा हो कि जो शंकराचार्य थे शास्त्रार्थ के समय जब वह पर्दे के पीछे बैठे थे और शास्त्रार्थ के समय किसी ने इतना अलौकिक ज्ञान देख के पर्दा हटाने का प्रयास किया तो वहां पर शारदा देवी स्वयं विद्यमान थी। यह सब बातें वहां जो वेबसाइट है उसमें आपको मिल जाएंगी। तो [संगीत] कुल मिलाकर के जो वो टीपू सुल्तान वाला मामला है वो यह है कि उस समय के जितने भी शासक होते थे वो शंकराचार्य को आध्यात्मिक गुरु के रूप में सम्मान देते थे। उनमें से एक टीपू सुल्तान भी था। शंकराचार्य की कोई विशेष कृपा नहीं थी। अगर आप यह कहोगे कि टीपू सुल्तान के वो समर्थक थे तो उनके जो शत्रु हैं मराठा वो उनको क्यों प्रथम पूज्य के रूप में स्वीकार कर रहे हैं? अगर आप ऐसे में तत्कालीन शंकराचार्य को हिंदू विरोधी सिद्ध करना चाहोगे तो उनको प्रथम पूज्य के रूप में रखने वाला जो मराठा साम्राज्य है बाजीराव पेशवा द्वितीय आदि वो भी हिंदू द्रोही साबित हो [संगीत] जाएंगे।
00:12:13:18 तो ये सब करिए। खैर यह सब ना करते हुए सब जानने का प्रयास सामने वाले का पक्ष जानने का प्रयास भी ना करते हुए आपने अपने मन से यह बना लिया कि भाई जो शंकराचार्य होते हैं वो जो हिंदू द्रोही थे यह है वो है और यह सब क्या है [संगीत] यह सब कब उठता है कभी सोचा है आप लोगों ने यह सब तब उठता है जब सैद्धांतिक धरातल पर सामने वाले को आप टक्कर नहीं [संगीत] दे सकते तब आप जो है उसके ऊपर व्यक्तिगत आघात करना शुरू करते हो हमने कभी अपने चैनल से व्यक्तिगत आघात नहीं किए। हमने कुछ नहीं कहा कि दयानंद सरस्वती जी यह या आर्य समाज का फलाना व्यक्ति यह या कोई ऐसी कोई व्यक्तिगत बात नहीं। [संगीत] सिद्धांत सिद्धांतों की बात की है हमने सदा। हमने तो व्यक्तिगत बात कभी की नहीं। हमने पूछा आपकी परंपरा क्या है? कैसे आया ज्ञान आप तक? तो यह आपकी पूर्व से बातें चली आ रही हैं जो आपने कही हैं और उस चर्चा के दौरान भी इन्होंने काफी अभद्रतापूर्ण बातें की। अच्छा इसके बाद भी जब हमारी वह चर्चा निश्चित नहीं हुई तो इन्होंने जब यह धमकी दी हमको हम तुम्हारी परंपरा के चीथड़े उड़ाने वाले हैं। और फिर उन्होंने चीथड़े उड़ाने का इनकी नजरों में यथासंभव प्रयास भी किया वीडियो बनाकर। उसमें भी ढेर सारी आपत्तिजनक बातें
00:13:28:24 हैं। फिर हमने इनको दो चार वीडियो के माध्यम से उपयुक्त जवाब दे दिया और हम संतुष्ट हो गए। अपना कार्य करते रहे। वो सैद्धांतिक प्रश्न है। वो पूछते रहे और वो मरते दम तक आखिरी सांस तक पूछते भी रहेंगे। है ना? [संगीत] वो हम पूछते रहेंगे जो दर्शन विज्ञान और व्यवहार की जो मर्यादा है उसमें सामंजस्य के साथ जो मर्यादा है उसके अंदर रहते हुए हम आपसे प्रश्न पूछते रहेंगे। तो जो दूसरी हमारी अपेक्षित स्थिति है वो यह है कि जो सामग्री जो पहली वाली अपेक्षित स्थिति यह है कि जो सामग्री जांच के अधीन है उसमें आपका क्या कहना है? चाहे वो सच है कि झूठ है उसके आधार पर आपके विरुद्ध संवैधानिक कारवाई क्यों ना की जाए इस बारे में अपना पक्ष प्रस्तुत करें अपना स्टैंड क्लियर करें [संगीत] दूसरा जो यह बातें हैं जो हमने डायरेक्ट सुनी है जैसे आपने मूर्ख कहा पाखंडी कहा हमने अपने किसी वीडियो में व्यक्तिगत कोई प्रहार किया तुम अज्ञानी हो तुम मूर्ख हो तुम ये हो तुम वो हो प्रश्न किए हैं प्रश्न हमने प्रश्न पूछे हैं कि इसका यह तो इसका यह कैसे हमने नहीं कहा कि आप मूर्ख हो आपने व्यक्तिगत आपने वो जो नैतिक मर्यादा है उसका उल्लंघन किया। पाखंडी पाखंडी कहा त्रिपुंड को पाखंड कहा माला को पाखंड कहा
00:14:44:02 है ना मूर्खतापूर्ण ये सब हमने इसमें लिखा है किस-किस वीडियो में लिख किया है और डिटेल के साथ सब लिखा है तो जो ये दूसरी वाली जो सामग्री जिस जो कि सत्यापन के अधीन नहीं है जांच के अधीन नहीं है। इसके निमित्त क्योंकि ऋषिवाच चैनल जो है आपकी संस्था के द्वारा संचालित है और जो वो मुख्य वक्ता है वो आपके संस्था का एक सदस्य है तो अब केवल ऋषिवाच नहीं अब ये वैदिक संस्थान समग्र रूप से क्षमा याचना करें हाथ जोड़कर वीडियो बनाए लेटर में लिखे तरह-तरह से अनेक प्रकार से क्षमा याचना करें कि हमने हमारे जो संस्था के एक पदाधिकारी ने हमारे चैनल पर हमने अपने पदाधिकारी के द्वारा बहुत ही अभद्र आचरण किया और इसके निमित्त हम आपसे क्षमा प्रार्थी हैं। कृपया हमें क्षमादान दें। जब आप इस तरह का वीडियो इस तरह का और साथ ही साथ वो जितनी भी आपत्तिजनक सामग्री है उसको हटाएं। आपके जितने भी सोशल मीडिया हैंडल्स हैं, उसके बाद हम आपसे बात करेंगे। क्योंकि अगर आपको कोई गाली दे रहा है, अगर आपका कोई अपमान कर रहा है, यही नहीं आपने तो जो लेटर लिखा उसमें भी
00:15:59:03 पक्षपात विहीनता प्रस्तुत नहीं की। आपने उसमें भी हमें अज्ञानी बोल दिया। यह कहते हुए यह सब आपकी अज्ञानता का धोतक है। हमने कहीं नहीं बोला। आप दिखाइए हमने आपको कहां सीधे-सीधे अज्ञानता कहा हो आपके लिए। हमने कहीं नहीं बोला। हम तो प्रश्न पूछते हैं। प्रश्न आप प्रश्नों का उत्तर दीजिए। अच्छा अब बात यह आती है कि जब हमने यह जब हम यह कह रहे हैं कि भाई आप जो है अपने इन कुकृतों के लिए ये जो आपने ये जो अभद्र आचरण किया है इसके लिए क्षमा याचना करें। तो इस पर उसके बाद हम आपके सामने चर्चा में बिल्कुल उपस्थित हो जाएंगे। जहां कहेंगे वहां आएंगे। हमें कोई दिक्कत नहीं है। तो इस पर जो है और इस पर यह आपकी तरफ से एक बात आती है जो हमने जब फोन किया था वहां पे भी कहने लगे थे कि भाई तुमने शुरू किया है। तुमने शुरू किया है गलत बोलना। तो पहली बात तो मैं यह बता दूं आप यह कभी सिद्धि ही नहीं। पहली बात तो हमने शुरू नहीं किया। टीपू सुल्तान से पहले तो हमने इनके खिलाफ कुछ नहीं बोला था। खिलाफ तो हमने कभी बोला ही नहीं। हमने तो केवल प्रश्न पूछे हैं। उसी में आप बौखलाए हैं। मगर आपके अनुसार यदि मान भी लें कि हमने आपके विरुद्ध कुछ बोला भी है तो टीपू सुल्तान पे आप कब बोल रहे हो? हम
00:17:14:04 कब बोल रहे हैं। ठीक है? और दूसरी बात अगर इसी पे आ जाए कि पहले किसने किसको किसका खंडन किया या पहले किसने किसके विचारधारा में सिद्धांत में कमी निकाली तो मेरे [संगीत] भाई आपका पूरा जीवन निकल जाएगा। आप यह सिद्ध नहीं कर पाओगे कि हमने पहल की। क्यों सुन लो सत्यार्थ प्रकाश में शंकराचार्य का खंडन है। सत्यार्थ प्रकाश में शंकराचार्य का खंडन करने का प्रयास किया गया। तरह-तरह से पोप पोप पुराणों के लिए वह यह वह बातें और आर्य समाज की जितनी सामग्री है उसमें मतलब काफी पर्याप्त मात्रा में पुराण परंपरा प्राप्त आचार्य गण और भगवत स्वरूपों के लिए तरह-तरह के आपत्तिजनक वक्तव्य आपको मिल जाएंगे। तो आप यह बताइए कि इस सामग्री से पहले कब शंकराचार्य ने किस किस समय के शंकराचार्य ने अलंकार या आर्य समाज के लिए आपत्तिजनक कोई कुछ कोई कुछ वक्तव्य लिख दिया नहीं लिखा क्यों अस्तित्व में ही नहीं था कैसे सिद्ध करोगे आपका सिद्धांत ही अस्तित्व में नहीं था ना उस पर भी आ रहा हूं
00:18:29:06 मैं अस्तित्व नहीं था वाली बात पर तो आप यह तो कहो मत कि आपने पहले किया है शंकराचार्य का विरोध और या फिर परंपरा प्राप्त आचार्य गणों का विरोध, पुराणों का विरोध, भगवत स्वरूपों का विरोध, मूर्ति पूजा का विरोध, अवतारवाद का विरोध यह सब आपने पहले शुरू किया है। और अगर पहले और बाद की बात ही आ जाएगी तो जन्म जन्मांतर लग जाएंगे। आप यह सिद्ध नहीं कर पाओगे कि हमने पहले किया। [संगीत] ठीक है? यह तो हो गई एक बात। अब इसका एक दूसरा पक्ष ले लेते हैं कि आपका कहना है कि हमने वहां पर वह जो वीडियो का इन्होंने लिंक दिया है कि आपने यहां से शुरुआत की है हमारा हमारे बारे में आपत्तिजनक बातें करने की आक्षेप लगाने की। अच्छा तो यह कौन सा वीडियो है जिसमें हम आर्य समाज के मंदिर में विधिवत जाते हैं और वहां जाकर के एक सौहार्दपूर्ण चर्चा करते हैं और केवल एक सवाल पूछते हैं कि आर्य समाज की गुरु परंपरा क्या है? और यह हमने केवल वहां नहीं जो हाथरस जिले के जो आर्य दल आर्यवीर दल के जो प्रभारी हैं उनसे भी पूछा था हाथरस में और रायपुर में जो
00:19:44:09 मंदिर प्रबंधक थे सूरज आर्य उनसे भी पूछा [संगीत] तो सूरज आर्य जी ने सीधे-सीधे कहा कि आर्य समाज गुरु परंपरा को नहीं मानता। ठीक है? इसको पॉइंट टू बी नोटेड। आर्य समाज गुरु परंपरा को नहीं मानता। अगर चलिए गुरु परंपरा शब्द को छोड़ दीजिए। अगर उनसे पूछा जाए बृजानंद पूर्णानंद उनसे पहले तो नहीं है गुरु नहीं है तो गुरु का नाम भी नहीं पता है तो और यही यही स्थिति जो है हर व्यक्ति की जिससे भी हमने आज तक पूछा यहां तक कि आपसे भी पूछा हमने यह नहीं कहा आपकी गुरु परंपरा गलत है हमने पूछा क्या है नाम तो बताइए पर आप इस प्रश्न से इतना बौखला गए कि इसको आपने यह ध्यान ही नहीं दिया कि सूरज्य ने तो यह कहा है कि हम गुरु परंपरा को मानते ही नहीं है आर्य समाज गुरुडम परंपरा को नहीं मानता। देखिए वहां जाकर के। सभी को जय श्री राम। आज हम आए हैं आर्य समाज के मंदिर और आज हम चर्चा करने वाले हैं यहां के महानुभाव हैं उनसे। विद्वान हैं आर्य समाज के। थोड़ा सा अपना परिचय दे दीजिए सर्वप्रथम। मैं पंडित सूरज आर्य आर्य समाज मंदिर बैजनाथ पारा रायपुर का पुरोहित हूं और मैंने आर्ष शिक्षा शिक्षा आर्य गुरुकुल होशंगाबाद से प्राप्त की है। जो
✅ This part is already used · 00:20:57:25 – 00:21:17:03 (0:19)
→ Used in: A · Video एक सवाल : दुनिया भर के पाखंडी परेशान | परंपरा at 0:02 ↗
00:20:57:25 हमारे आर्य समाज की गुरु परंपरा है। वो कहां से स्टार्ट होती है? इसमें आर्य समाज में गुरु परंपरा नहीं है। नहीं कहीं से तो आपके गुरु ने ज्ञान दिया होगा। आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने किया। उनके गुरु उनके गुरु स्वामी बिरजानंद जी थे। और उनके गुरु उनके गुरु के बारे
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00:21:17:03 में जानकारी नहीं है। पूर्ण पूर्णानंद नाम था। बिरजानंद जी के गुरु के नाम में मेरे को शायद पूर्णानंद जी के गुरु के बारे में शायद मेरे को जानकारी नहीं है। तो आप परंपरा प्राप्त आचार्य को नहीं मानते। नहीं ये स्वामी दयानंद सरस्वती ने ही इनको खंडन किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि आर्य समाज में गुरुडम परंपरा नहीं चलेगी। अच्छा अच्छा तो जैसे अभी वहां अपने से खंडन किया और उन्होंने कभी नहीं कहा कि आप मेरे किसी भी आर्य समाज के बड़े फंक्शन में मेरे चित्र में ना माला चढ़ाएंगे ना अगरबत्ती जलाएंगे। उन्होंने वहां से खत्म कर दिया गुरु डम परंपरा। एक होता है गुरु परंपरा। जी कि नारायण जी को मिले, फलाने ऋषि को मिले। उन्होंने अपने शिष्य को दिया। उन्होंने अपने शिष्य को दिया। तो क्या स्वामी दयानंद सरस्वती जी भी गुरु परंपरा को मानते थे? जी। तो उनकी गुरु परंपरा में उनके गुरु के कुछ नाम बताएंगे जो पीछे जाती जाए दो करोड़ वर्ष तक पहुंच थोड़ा सा। आदित्य अग्नि अंगरा हम हम ये ये ऋषि थे फिर और अन्य ऋषियों को भी उन्होंने माना है पाणिनी को माना है फिर मतलब उन तक कैसे आए उनके उनके गुरु कौन थे स्वामी दयानंद सरस्वती स्वामी बृजानंद
00:22:32:21 बृजानंद बृजानंद के गुरु ये तो बहुत लंबा प्रोसीजर चला जाएगा नहीं चार पांच इतने संज्ञान में नहीं मेरे करीब पांच 10 पीढ़ी का तो पता हो नहीं मेरे संज्ञान में नहीं आपके संज्ञान में नहीं मंत्र जो है किसी ग्रंथ के रूप में प्राप्त हुए हैं ना बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल किसी ग्रंथ के रूप में तो कहां से प्राप्त हुए वो कौन सा पब्लिकेशन मैंने मंगवाए हैं यहां से जो आर्य समाज से अच्छा आर्य समाज से तो आर्य समाज के पास वो जो ग्रंथ है वो कहां से आए वेद मंत्र? वो उनके गुरु आदि से बताइए एक आध नाम बताइए। कुछ गुरुओं का नाम बताइए पीछे से। नहीं गुरुओं का नाम भाई वेदों वेदों का आप कहां पर मानते हैं? उद्गम कहां मानते हैं? वेदों का उद्गम यही मानते हैं। भारत में ही मानते हैं। नहीं नहीं वो ठीक है मगर ऋषियों से जो आए हैं होते हुए वो लगभग कितने वर्ष हो चुके हैं? काफी वर्ष हो चुके हैं। बहुत सारे प्राचीन तो कुछ पिछले जो आर्य समाज के जो पिछले गुरु हैं जहां से उनको वेद मंत्र प्राप्त होते चले आए। वो नाम बताइए। एक तो स्वामी दयानंद जी हैं। उनके गुरु हैं विजानंद जी। उनके पीछे से नहीं जानता मैं।
00:23:48:28 तो पहली बात तो यह है अच्छा इसके अलावा अगर सत्यार्थ प्रकाश को पढ़े या फिर जो आर्य समाज की जो ग्रंथावली है जो सामग्री है उसको टटोलें तो उसमें हमें तो कहीं नहीं मिला कि दयानंद जी ने कहीं पर गुरुओं गुरु परंपरा के बारे में बताया हो कि जैमिनी के बाद इसको ज्ञान दिया गया और उसके बाद इनको ज्ञान दिया गया। उसके बाद यह आर्य समाज वाला ज्ञान इनको दिया गया। उसके बाद आर्य समाज वाला ज्ञान इनको दिया गया। फिर उनसे जो है ऐसेसे करके आया कहां तक? स्वामी दयानंद जी तक। ठीक है? तो ऐसी कोई जानकारी हमें नहीं मिली। हमें उसमें गुरु परंपरा का विरोध तो मिला कि ये नारायण नारायण पद्म भूव इस तरह से उसमें [संगीत] वो तो मैं अपने कई वीडियोस में बता ही चुका हूं कि जो भी मेन स्ट्रीम से नई शिक्षा देना चाहता है उसको सबसे पहला उसका टारगेट होता है शंकराचार्य। सत्यार्थ प्रकाश पढ़ लीजिए। शंकराचार्य टारगेट है। इस की किताबें पढ़ लीजिए। शंकराचार्य टारगेट पहले पहले भरा जाएगा। शंकराचार्य का विरोध घुसेड़ा जाएगा। अन्य कोई नहीं। [संगीत] रामपाल की किताबें पढ़ लीजिए। शंकराचार्य पहला टारगेट वो अभी कल्कि अवतार वाला है। उसकी उसकी किताबें पढ़ लीजिए। शंकराचार्य पहला टारगेट। बहुत बड़ी बात नहीं है। ब्रह्माकुमारी वालों का भी शंकराचार्य पहला टारगेट होगा। और बहुत बड़ी
00:25:04:04 बात नहीं है जो इधर-उधर जितने भी कल्ट्स जो चल रहे हैं शुरू होने वाले आने वाले टाइम के जो चीजें हैं उन सबको पहले शंकराचार्य का विरोध करना पड़ेगा क्योंकि शंकराचार्य के बारे में अगर मन में भ्रम नहीं उसेड़ेंगे मन में मिथ्या बातें नहीं डालेंगे विरोध नहीं प्रकट उत्पन्न करेंगे तो फिर हमारा अस्तित्व जो है खतरे में पड़ जाएगा शंकराचार्य आपको शंकराचार्य के पास जैसे ही व्यक्ति जाएगा तो उसको जो है चीजें मालूम पड़ जाएगी तो उससे दूर रखो तो उसमें जो सत्यार्थ प्रकाश आदि में जो जहां तक हमारी जानकारी है आपके पास कुछ हो तो आप उपलब्ध कराइएगा। तो हमारी जानकारी में दयानंद जी ने अपनी गुरु परंपरा के बारे में कभी बताया ही नहीं है कि हम इस परंपरा से हैं ऐसे जैमिनी जी से हमारे तक आए। तो जब आपकी गुरु परंपरा का अस्तित्व ही नहीं है अकॉर्डिंग टू सूरज्य अकॉर्डिंग टू प्राप्त ग्रंथावली अकॉर्डिंग टू जो हाथरस के जो सज्जन थे वो [गला साफ़ करने की आवाज़] तो फिर जब अस्तित्व [संगीत] ही नहीं है तो आप यह बात कैसे कह सकते हैं कि हमने आपकी गुरु परंपरा पर आक्षेप लगाया तो ये तो फिल्मी तरीका हो गया ना लोगों की सिंपैथी हासिल करने का अरे अरे उसने जो है जैमिनी जी को बुरा कह दिया मैंने जैमिनी जी को बुरा नहीं कहा है मैंने ब्रह्मा जी को बुरा नहीं कहा। उसमें ब्रह्मा जी की भी बात है। मैंने पूछा
00:26:19:15 है जैमिनी जी से दयानंद जी तक वो जो ग्रंथ है या ज्ञान है आर्य समाज का वो कैसे आया? परंपरा क्या है? मुझे कंफर्म नहीं हूं। पर मेरी जानकारी में यह भी है कि दयानंद जी ने जो भाष्य लिखे थे वेदादि भाष्य वो पहले जो है शायद उनसे कुछ गलती हो गई थी और उसके बाद उन्होंने दोबारा लिखे। तो अगर आपके अनुसार परंपरा प्राप्त ज्ञान था तो उन्होंने क्या पहले बिना परंपरा प्राप्त ज्ञान के चालू कर दिया था लिखना और अगर वह परंपरा प्राप्त ज्ञान नहीं था तो उन्होंने क्यों लिखा था पहले और अगर परंपरा प्राप्त ज्ञान था तो गलत क्यों लिखा था यह सब बातें अगर यह जानकारी कंफर्म है इसमें मैं कंफर्म नहीं हूं सत्यापन कर लीजिएगा तो ये बात हो गई अच्छा इसके बाद क्या होता है कि अगर देखा जाए और परंपरा की बात करते हैं कि आपका जो धारणा है या आपकी जो विचारधारा आपके जो सिद्धांत हैं वह सीधे ब्रह्मा जी से आ रहे हैं। जैमिनी जी से आ रहे हैं। अब क्या है कि जब जो अह सत्यार्थ प्रकाश है उसको पढ़ने पर हमें दिखाई देता है कि जो दयानंद जी है वह लिख रहे हैं कि जैनियों का खंडन करने
00:27:34:19 के लिए तो शंकराचार्य जी की जो वो है सिद्धांत वो ठीक [संगीत] है। जैनों का बौद्धों का खंडन करने के लिए। तो यदि आपकी परंपरा वह सृष्टि के प्रारंभ से ब्रह्मा से आ रही है तो क्या उस समय आपका वो ज्ञान नहीं था? अगर था तो इसका उल्लेख वहां पर दयानंद जी ने क्यों नहीं किया कि भाई हमारे इस सिद्धांत के द्वारा भी जैनियों का बौद्धों का खंडन किया जा सकता है। पर शंकराचार्य ने गलत किया। सही सिद्धांत प्रस्तुत ना करके यह सिद्धांत प्रस्तुत कर दिया। [संगीत] ऐसा कोई उल्लेख वहां पर नहीं है। जैनों को बौद्धों को हराने के लिए शंकराचार्य की आवश्यकता क्यों है सबको? इस्कॉन वाले भी कहते हैं कि मायावाद इसलिए आवश्यक था कि वो बौद्धों को हराना था। शंकराचार्य की धारणा इसलिए आवश्यक थी कि बौद्धों को हराना था। अरे आपकी आपकी चीजें कहां गई? शाश्वत है ना आपका सिद्धांत? तो कहां था? बौद्धों को क्यों नहीं हरा रहे हो? और अगर हरा सकते हो तो उसके लिए आवश्यकता क्यों लिख रहे हो? शंकराचार्य की
00:28:41:18 क्योंकि जब आपको बौद्धों जैसे लोगों से लोहा लेना होगा तो शंकराचार्य की शरण में जाना होगा। तब तक जब तक उनसे दूर हो जब तक सनातन विरुद्ध मजबूत लोगों से दूर हो तो शंकराचार्य का जो सुरक्षात्मक घेरा है ना उसके अंदर रह के खूब किलकारी मार लो और अपने ही माता-पिता समान आचार्यों के खूब घाव कर लो नोचनोच के [संगीत] खूब कर लो। मगर जिस दिन बाहरी आक्रमण होगा तो आपको बचाने वही सिद्धांत आएगा। बचाएगा [संगीत] भाई। अरे भाई सनातन का जो विशुद्ध सिद्धांत है वो आपका है। आर्य समाज का है। अरे तो क्यों लिख रहे हो कि जैनियों के खंडन करने के लिए उसकी आवश्यकता थी। अगर बात कंपैरेटिव बात वैसे हमने की नहीं। इस पर भी हम आगे बात करेंगे। मगर अगर कंपैरिजन की बात की जाए तो कौन से शंकर मत के आचार्य ने लिखा है कि आर्य समाज के सिद्धांत की आवश्यकता है। किसने लिखा है? आप लिख रहे हो सत्यार्थ प्रकाश में लिख रहे हो ना? अलंकारी किताब में तो क्यों लिख रहे हो? और वहां पर अपने सिद्धांत को उल्लेखित क्यों नहीं कर रहे हो? कहीं पर कोई विवरण क्यों नहीं दिया गया है कि उस समय फलाने वाले ऋषि थे। वो जो है ये कार्य कर रहे थे। ऐसा कोई विवरण कहां है?
00:29:58:00 हम आपकी परंपरा को गलत नहीं कह रहे हैं। पहले आप अस्तित्व तो सिद्ध करो परंपरा का। हम तो पूछ रहे हैं आपसे कि आपकी परंपरा है क्या है? आप उसी में इतने बौखलाए जा रहे हो कि तुमने हमारी परंपरा पे आक्षेप कैसे लगा है? अब हम जो है कागजी कारवाई करेंगे। भाई जो गुरुदेव का जो आश्रम है ना उसमें कानून की किताब भी पढ़ाई जाती है। ठीक है? [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो इसमें मत रहना कि आप यह कानून का डर दिखा के संविधान का डर दिखा के जो है अनैतिकता पूर्ण अपने मंतव्यों की सिद्धि कर लोगे। [संगीत] क्योंकि कानून सिर्फ आपका नहीं है। है ना? ठीक है। अब आगे चलते [संगीत] हैं। तो अब बात आती है कि सत्यार्थ प्रकाश में गुरु परंपरा का विरोध तो है मगर अपनी गुरु परंपरा का कोई विवरण नहीं है। यहां [संगीत] तक कि जैनियों का खंडन करने के लिए शंकराचार्य की चीजों की प्रशंसा भी हुई है। समर्थन भी हुआ है। [संगीत] तो पहली बात तो यह आती है कि शंकर संप्रदाय के आचार्यों द्वारा आर्य समाज के मत का आवश्यकता जाहिर नहीं की जाती कि नहीं भैया हमें जो है इस चीज का खंडन करने के लिए आर्य समाज चाहिए। नहीं अपने ही शाश्वत
00:31:13:13 सिद्धांत के द्वारा हमारे हर एक से लड़ेंगे। अपने से लड़ पाएंगे तो लड़ेंगे। नहीं तो अगर हमारे हिसाब से आर्य समाज गलत है तो हमें क्या आवश्यकता सामने वाले के सामने उसकी उसको रखने की? तो एक तो बात ये हो गई। तो कुल मिलाकर के क्या निष्कर्ष निकला कि हमने प्रश्न पूछा है कि आपकी परंपरा क्या है? आपकी परंपरा बुरी है यह हमने नहीं कहा अभी तक। परंपरा क्या है? और आपकी परंपरा बुरी होने में फर्क है। मगर आपने अपने पत्र में क्या लिखा है? कि हमने आपकी परंपरा को गलत शर्त कहा है। आक्षेप लगाया आपकी परंपरा। भाई परंपरा है कहां? और अगर परंपरा है तो जो लोग आपके प्रबंधक बने बैठे हैं, मंदिरों के प्रभारी बने बैठे हैं आरवी दल के उनके विरुद्ध आपने क्या कारवाई की है? क्योंकि वह तो कह रहे हैं कोई परंपरा नहीं है। एक दो पीढ़ी पहले से जैसे आपके यहां क्या है कि आप लोग विशुद्ध सनातन इतिहास बताने का दावा करते हो। मगर आपसे आपके लोगों से आपको शायद पता होगा। मुझे नहीं पता। अभी तक आपने उत्तर ही नहीं दिया इस बात का। [संगीत] आपके लोगों से प्रश्न किया जाता है कि भैया आपके एक दो पीढ़ी पहले के गुरु का नाम बताओ। कैसे आया है शाश्वत ज्ञान आपके पास तो ठेंगा कुछ नहीं कुछ नहीं कोई कुछ नहीं बताता हाथ खड़े और तो और तो कुल मिलाकर के यहां
00:32:28:14 पर क्या निकला निष्कर्ष दोबारा से बता दूं कि हमारा प्रश्न यह नहीं है कि आपकी गुरु परंपरा गलत है हमारा प्रश्न यह है कि आपकी गुरु परंपरा है क्या कौन-कौन से गुरु हैं जैमिनी के बाद किसको मिला ब्रह्मा जी के बाद किसको मिला कैसे आया आप तक वो बताइए हमने तो कभी नहीं कहा गलत है दूसरी बात यह है कि आपने अपने समक्ष रूप से जितने भी वीडियोस बनाए हैं उसमें हमारी परंपरा को झुठलाने का प्रयास किया कि यहां पे यह जो प्रमाण है गलत है इसका मिस इंटरप्रिटेशन किया जा रहा है ये है वो है ये वो है बहुत सी चीजें हैं ठीक है मगर अगर एक बार को आपकी उसका यथोचित उत्तर भी है हमारे पास यथोचित उत्तर है और समय-समय पर देते रहेंगे कार्य बाहुल बाहुल्य है तो समय जब मिल जाता है तो देते हैं मगर अगर मान भी लिया जाए कि हमारा गलत है तो क्या हमारे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध हो जाता है। आप तो यह सिद्ध करिए ना कि दो अरब वर्ष पूर्व या जब भी आपके हिसाब से वेदों की उत्पत्ति होती है वहां से ले आप तक इस इस तरह से वेद आदि शास्त्र आए हैं। अगर आप यह नहीं बता सकते तो इससे तो यही सिद्ध होगा कि वेदों का इतिहास ज्यादा से ज्यादा दो ढाई हजार साल पुराना है। और वो दो ढाई हजार साल पहले भी क्योंकि आदि शंकराचार्य का अस्तित्व मिलता है। उनकी परंपरा का अस्तित्व मिलता है। आदि शंकराचार्य से अभी तक तो फिर
00:33:43:18 तो यह मानना ही पड़ेगा कि आपको जो वेद है वो उन्हीं से मिले और आपने अपने एक वीडियो में अप्रत्यक्ष रूप से द्वेषपूर्ण [संगीत] हास्य करते समय इस बात को स्वीकारा भी है। वो भी हम बता देंगे कहां स्वीकारा? अप्रत्यक्ष रूप से आपने स्वीकारा कि वो एक गधे पर अगर मैंने अपनी किताबें ला लाद दी और वो गधा घर आकर के बोलेगा मैं तेरा गुरु हो गया। तो उस रूप में आपने ये स्वीकारा कि वो जो आपने गधे की संज्ञा देने का प्रयास किया आचार्यों को। ठीक है वो ईश्वर देखेगा आपको कोई बात नहीं जहां से सब कुछ खत्म हो जाता है ना वहां से ईश्वर का शुरू होता है तो आपने संज्ञा देने का प्रयास किया ठीक है मगर आपने उसमें स्वीकार किया प्रत्यक्ष रूप से कि जो वहां से लेकर के यहां तक वेद आ रहे हैं आपको मिल तो परंपरा प्राप्त आचार्यों से ही रहे हैं। ठीक है? हालांकि आपका उद्देश्य वहां पर गधे की संज्ञा देते हुए आचार्य परंपरा का मजाक उड़ाना था आपका उद्देश्य। ठीक है? अब इसके बाद तो पहली बात यह आ जाती है कि हमने गुरु परंपरा पर आक्षेप नहीं गुरु परंपरा को जानने के लिए प्रश्न किया है। ठीक है? तो अगर आप इसको ऑफेंस मानते हैं अगर यह अगर वो है गलत तो आपको क्या आप उनके विरुद्ध भी कारवाई कर रहे हैं जो
00:34:59:06 रायपुर के जो सज्जन हैं सूरज आर्य और हाथरस के जो सज्जन हैं इनके विरुद्ध भी कारवाई क्योंकि उन्होंने कहा है कोई गुरु परंपरा नहीं है। और सत्यार्थ प्रकाश में हमारी जानकारी में ऐसा कोई विवरण नहीं है। तो पहले तो आप अपनी गुरु परंपरा का अस्तित्व सिद्ध करें तब तो यह माना जाएगा कि हमने आपके ऊपर उंगली उठाई गुरु परंपरा के ऊपर हमने तो उंगली उठाई नहीं। हमने तो प्रश्न पूछा जानने के लिए। अच्छा और साथ ही साथ क्या है कि अगर आपकी गुरु परंपरा थी तो जैनों को हराने में सामर्थ्यवान क्यों नहीं थी? अ जो आपके ये दयानंद जी हैं इनको क्यों लिखना पड़ रहा है कि शंकराचार्य का मत वहां पर सही था। उनके लिए जैनों को हराने के लिए ठीक है उपयुक्त है एक्सेप्टेबल है। तो यह चीज हो गई। अब इसके बाद अगली चीज आ जाती है कि कुल मिलाकर के आपका कहना यदि यह है कि हमने आपके प्रत्युत्तर में यह सब चालू किया तो पहली बात तो आप पहले से चल रहे थे। कार्य आप पहले से कर रहे थे। आपकी जो गैर सत्यापित ये चीजें हैं स्क्रीनशॉट्स वगैरह जिसमें अश्लील शब्दों का भी उपयोग है अप्रत्यक्ष रूप से यह सब तो पहले से ही प्रचलित थी। दूसरी बात टीपू सुल्तान मैंने खुद देखा टीपू सुल्तान के नाम से जो आपने किया ये सब क्या है? व्यक्तिगत आपने वो
00:36:14:09 किए हैं। व्यक्तिगत सैद्धांतिक बातें नहीं की आपने यहां पे। व्यक्तिगत प्रहार किए हैं। इसी से ही तुच्छता प्रकट हो जाती है। हमने क्या किया? गुरु परंपरा क्या है? ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? या जो भी सैद्धांतिक विचार वैचारिक मतभेद है उस पर बात करते हैं हम। हमने किसी पर पर्सनल अटैक नहीं की। ना स्पॉन वालों पर करते हैं ना हम आर्य समाजियों पर करते हैं ना हम संत रामपाल वालों पर करते हैं। पर्सनल अटैक हम नहीं करते कि वो जेल में है ये है वो है। हम नहीं करते पर्सनल अटैक। हम तो सीधे पूछते हैं भैया आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? यहां से शुरू होती है अपनी कहानी और हम करते रहेंगे। अच्छा तो अगर आपका कहना है कि यह प्रतिकार स्वरूप आपने किया था तो पहली बात तो ये प्रतिकार स्वरूप नहीं था। दूसरी बात यह है कि आपको उस वीडियो को दोबारा देखना चाहिए। [संगीत] उस वीडियो में कहीं भी ऐसी कोई आपत्तिजनक अभद्रतापूर्ण अमर्यादित व्यवहार हमसे हम हमारे द्वारा नहीं किया गया है। जो सूरज आर्य जी हैं उनसे आप पता करिए फोन लगा के। जब इंटरव्यू समाप्त हो गया था उसके बाद बाकायदा उन्होंने हमसे चाय के लिए पूछा तो जो व्यक्ति आपको गाली दे रहा है अभद्रतापूर्ण आचरण कर रहा है उसको आप चाय के लिए पूछते हैं है ना तो यह भी नहीं सिखाया
00:37:29:13 हमारे शास्त्रों ने अगर आपका ऐसा संविधान हो तो बात अलग है कि कोई मां को गाली दे दे और हम उससे पूछे भैया चाय पी लो। दूसरी बात यह है कि यदि हमने वो ऑफेंस किया है तो उस ऑफेंस का समर्थन करने वाले आपके ही आर्य समाजी जो लोग हैं उनके विरुद्ध आपने क्या कारवाई की है एटलीस्ट उनको आर्य समाज की जो अंतरंग अ प्रणाली है उसके द्वारा तो कोई ना कोई आपने कदम उठाया ही होगा तो वो हमें बताएं उससे अवगत कराएं और कुल मिलाकर के आखिर में 100 की सीधी एक बात हमारे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है अगर आप यह कह रहे हैं कि प्रतिकार स्वरूप आपने दिया तो आपने जो लेटर आज दिया है यह लेटर पहले देना चाहिए था। इतना सब यह जो वीडियोस आपने बनाए हैं यह क्यों बनाए? और जब वीडियोस बनाने थे तो फिर इस लेटर का क्या औचित्य है? आपको यदि लग रहा है कि वीडियोस बना के ही आप हमें उत्तर दे लोगे, संतुष्ट कर लोगे तो फिर आपने लेटर क्यों भेजा? और लेटर जब भेजना था तो फिर आपने ये वीडियोस क्यों बनाए जिसमें आपने अभद्रता स्वीकार की? और यह अभद्रता आपने स्वीकार की है। वो जो आपने फोन हमने किया था उसमें आपने कहा है कि आपने पहले शुरुआत की तो पहले शुरुआत की इसका मतलब वो शुरुआत के नाम पर आपने उसका उत्तर देने के रूप में वह अभद्रता की है। तो यह सारी चीजें हो गई। तो कुल मिलाकर के हमारी जो अपेक्षित स्थितियां
00:38:44:21 है वह क्या है? जिसके [संगीत] जिसका निर्वाह होने पर हम वहां पहुंचेंगे। वह अपेक्षित स्थितियां हैं कि पहले जो सत्यापन रहित आपकी सामग्री हमें प्राप्त है जिसमें कि भगवत स्वरूपों भगवान आदि शंकराचार्य आचार्य गणों के लिए अश्लील बातें आपत्तिजनक अमर्यादित बातें लिखी हुई है ऋषिवाज की तरफ से उसके बारे में अपना पक्ष प्रस्तुत करें कि आपके विरुद्ध संवैधानिक कार्रवाई क्यों क्यों नहीं की जानी चाहिए इन सामग्री इस सामग्री के आधार पर और दूसरा जो सामग्री हमें डायरेक्ट प्राप्त है कि आपने तरह-तरह के वीडियोस बनाए जिसमें मूर्ख बोला है, पाखंडी बोला है और वो जो एक एक रुपए के रील एक-ए मिनट की रील बना करके चीथड़े उड़ा देंगे तुम्हारे ये ये तरीका है बात करने का क्या हमने कहां की थी उस समय आपसे बात सौहार्दपूर्ण वार्ता चल रही थी टेलीग्राम पर आपने कहा चीथड़े उड़ा देंगे आ जाना बचाने ठीक है तो आप अगर इन अपेक्षित स्थितियों का निर्वाह करते हैं तो हम जरूर जरूर पहुंचेंगे। इसके साथ ही साथ आपने क्या किया? कोई एक व्यक्ति चलती हुई सभा में प्रवचन जहां पर गुरुदेव कर रहे हैं वहां पर पहुंच के सवाल करता है, प्रश्न करता है और
00:40:00:00 गुरुदेव उसको यथोचित उत्तर प्रदान करते हैं। परंतु वह अलग मंतव्य से आया है। उसको विघ्न डालना है। तो जब वो ऐसी ऐसा अभद्र आचरण करने लगता है तो उसको वहां के जो व्यवस्थापक गण है बाहर निकाल देते हैं। इसको आपने कहा कि उत्तराखंड में आर्य समाजी व्यक्ति ने शास्त्रार्थ में पूज्य गुरुदेव पूरी शंकराचार्य जी को परास्त कर दिया। तो यह भी मिथ्या भाषण है। क्यों मिथ्या भाषण है? अगर वह शास्त्रार्थ है तो फिर यह क्या है जो आपने हमें भेजा है? है ना? कौन निर्णायक था? अगर वो शास्त्रार्थ है तो ऐसे में तो आप डायरेक्ट हमारे पास आ जाते। हमारे गेट पर मैं नहा रहा हूं, ब्रश कर रहा हूं, कुछ भी कर रहा हूं, पूजा कर रहा हूं, आकर चिल्लाने लगते। और यदि उस स्थिति में मैंने आपका उत्तर आपको नहीं दिया तो बार अखबारों में छपवा देते, अपना रील बना देते कि भैया हमने जो है हम शिवश द्विवेदी के घर गए थे। शास्त्र ने उसको हरा दिया। उसके पास जवाब नहीं था। कभी भी चले जाओ मुंह उठा के कहीं भी हो गया शास्त्रार्थ हमने तो कभी नहीं कहा कि हमने किसी को शास्त्रार्थ में हराया हम तो शास्त्रार्थ करते ही नहीं है हम तो केवल जिज्ञासु हैं अज्ञानी है पूज्य गुरुदेव पूरी शंकराचार्य जी के अल्पज्ञ शिष्य अल्पज्ञ वही उसी में ही बहुत संतुष्टि है और हम केवल जानना चाहते हैं भाई कौन से ऐसे वैचारिक समीकरण है जो हमको बांटे हुए हैं जो
00:41:15:06 समाज है बट बट रहा है ना एक हो जाएगा आप आप दे दीजिए वो धारणा हम नहीं हम थोड़ी ना कहते हैं नहीं शंकराचार्य को मानो शंकराचार्य को मानो हमारी सिर्फ तीन चीजें हैं सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म जिसके पास ये है हम उसके आप दे दीजिए हम आपके बाधित ना हो ईश्वर ठीक है ये तो रही एक बात अब ऐसे में एक प्रश्न और बाकी रह जाता है कि भाई जब यह ऋषि वाच सोशल मीडिया हैंडल से इतना सब कुछ हुआ है तो हम लोग कुछ करते क्यों क्यों नहीं समय मिलने पर करेंगे ऐसा नहीं है संवैधानिक नैतिक मर्यादा के अंदर रहते हुए कारवाई करेंगे और जो अभी कर पा रहे हैं वह भी कर ही रहे हैं समय मिलने पर करेंगे भी मगर ऐसे ऐसे व्यक्ति के साथ या ऐसे संस्थान के साथ कोई वार्ता तो नहीं हो सकती बाहुबली में डायलॉग है ना एक कि गलत किया तुमने देवसेना स्त्री के ऊपर वाले का की उंगली नहीं काटते काट काटते हैं उसका सर। तो यहां सर काटने वाली बात नहीं क्योंकि यहां अपराध वैसा नहीं है। मगर फिर भी जो आपके आचार्यों के लिए आपत्तिजनक व्यवहार कर रहे हैं। जो आपके गुरु परंपरा
00:42:30:09 के चीथड़े उड़ाने की बात कर रहे हैं। अपने मन में उड़ा भी रहे हैं। है ना? मूर्ख इत्यादि जैसे पाखंड इत्यादि जैसे शब्दों का उपयोग करते हुए वीडियोस बना रहे हैं। उनके साथ वार्ता थोड़ी ना करेंगे। मंच साझा थोड़ी ना करेंगे। यथोचित उत्तर देंगे। कारवाई करेंगे। अब कुल मिलाकर के हमने अपनी सारी बातें रख दी हैं। अंत में मैं एक बात और कहूंगा कि अब इस वीडियो को देखने के बाद इस पत्र को जब हम प्रचारित प्रसारित कर देंगे उसके बाद कुछ लोग ऐसे हैं जो यह कहेंगे कि अरे वह तो बहाना बनाओगे ही मालूम ही था। जैसे कि इन्होंने ऋषिवाद चैनल पे एक वो डाला गया कि पौराणिक हम जहां तक उम्मीद है पौराणिक आएंगे नहीं। उनके अंदर आर्य समाजियों से शास्त्रार्थ करने का वो नहीं है बल नहीं है ये है वो है ना वो बहाने बनाएंगे ना आने के बहुत सारे तो ये सब बातें भी कहने वाले हैं लोग अभी होंगे जो इस वीडियो को देख रहे होंगे तो उनके लिए भी उनको भी मैं खाली हाथ नहीं भेजूंगा उनके लिए भी मैंने कुछ मतलब उनको कुछ देना चाहता हूं उनको भी मैं दे देता हूं तो मैंने एक पत्र और लिखा है आप खाली हाथ मत जाइए आपके लिए मैंने एक पत्र और लिखा है यह जो पत्र है यह पत्र मैंने लिखा है गौतम खट्टर और अंकुर आर्य के लिए। ठीक है? और
00:43:45:15 इसमें हमने यथोचित रूप से बता दिया है कि भाई गौतम खट्टर और अंकुर आर्य आप मूर्ति पूजा का विरोध करते हैं। आप जो है परंपरा प्राप्त जो वर्ण व्यवस्था है उसका विरोध करते हैं। फला फला और भी जो वैचारिक मतभेद हैं उसके उसके बारे में बात करते हुए लिख दिया है और उनके लिए चर्चा का ओपन निमंत्रण जैसे आपने वो लिखा है ना आमंत्रण ऐसे ही हमने इसमें अंकुर आर्य और क्या कहते हैं? गौतम खट्टर के लिए लिख दिया है। ठीक है? यह भी ओपन चैलेंज है। ठीक है? आप लोग लिखते हो ना कि आर्य समाज ने तुमको ओपन चैलेंज दिया है। जाओ जाके यहां कायरतापूर्ण वीडियो क्यों बना रहे हो? तो यह भी ओपन चैलेंज है। दोनों को जाके बता देना कि हमने भैया उन्हें धार्मिक चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। उनका आना जाना रुकना रहना, खाना पीना सब हमारी संस्था के द्वारा किया जाएगा। आप आए और यहां पर पक्ष प्रस्तुत करें कि आपने शंकराचार्य को गलत कैसे कहा। आपने परंपरा प्राप्त आचार्यों को गलत कैसे कहा? उनके द्वारा स्वीकार सिद्धांतों का खंडन किस प्रकार किया? अपना इस बारे में पक्ष प्रस्तुत करें। अब ये हम जो है इसको भी हम सर्कुलेट कर देंगे। आप जैसे ये वीडियो पहुंचेगा तो यह पत्र भी सर्कुलेट हो जाएगा। तो फिर अगर गौतम, खट्टर और अंकुर आर्य हमसे चर्चा
00:45:00:28 करने नहीं आते हैं तो आपके सिद्धांत के अनुसार वह भी कायर। आपके सिद्धांत के अनुसार वह भी क्या कहते हैं? भगोड़े और आपके सिद्धांत के अनुसार आर्य समाजियों में दम नहीं होती है जो वह सनातन वैदिक हिंदू आर्य से बात कर सकें। है ना? आर्य समाजियों में दम नहीं हो सकती है। क्योंकि आपने ही तो कहा ना कि अगर आपके अनुसार बुलाए जाने पर हम कहीं भी ना चले आए तो हम कायर हैं। तो फिर हमारे बुलाने पर अगर ये लोग नहीं आएंगे तो ये ये लोग भी कायर कहलाएंगे। तो ठीक है। है ना? तो इसीलिए मैं कहता हूं कि क्यों पड़े हो चक्कर में? कोई नहीं है टक्कर में। जय श्री राम।
00:45:54:09 [संगीत]
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