⬜ Not used yet · 00:00:03:13 – 00:45:32:07 (45:29)
00:00:03:13 क्या सच में आपको ऐसा लगता है कि उस कुतर्की ने जो कुतर्क किए हैं सत्यपत ब्राह्मण वाले ने यह जो अनऑफिशियल एक गुंडा पाल रखा है ऑनलाइन जिसको शायद समय आने पर पहचानने से भी मना कर देंगे इस वाले। इसका एक पॉइंट जो इसने उठाया अपने वीडियो में उसका खंडन हमने किया है। यह है पॉइंट बाय पॉइंट खंड। ठीक है? तो, यह लिंक हम शेयर कर देंगे। आप पढ़ लेना। अगर किसी को इस वीडियो देख के कंफ्यूजन हुआ हो, वैसे हुआ नहीं होगा। क्या आपको सच में लगता है कि उसने ऐसे कुछ तर्क और प्रमाण प्रस्तुत किए हैं जिनके रेप्लिकेशन में या जिनके निराकरण के रूप में हमें एक वीडियो बनाने की आवश्यकता है। सच में ऐसा लगता है वास्तविकता तो यह है कि जो उसके प्रति समर्पित व्यक्ति भी होंगे ना उसके द्वारा दिए गए जो कुतर्क हैं उनसे सहमत नहीं होंगे। संतुष्ट नहीं होंगे और उसके फॉलोअर्स तो क्या वह खुद सतपथ ब्राह्मण वह खुद जो है यह डालते समय वीडियोस डालते समय आश्वस्त नहीं होगा कि भाई मैंने
00:01:18:16 जो है पूर्ण रूप से उत्तर दे दिया कि नहीं दे दिया। उसने अपने वीडियो को डालते समय एक पीडीएफ तक प्रोवाइड की है। उस पीडीएफ को भी अगर आप देख लें तो हमने जो पीडीएफ दी थी शिव और विष्णु की एकता बताने के लिए तो उसने जो शिव और विष्णु में अंतर बताने के लिए जो वो दी है पीडीएफ शिव जी को निम्न विष्णु जी की अपेक्षाकृत निम्न दिखाने के लिए जो पीडीएफ दी है उसमें उसने समग्र रूप से हमारे जो क्वेश्चंस हैं पूर्व पक्ष के रूप में वो रखे ही नहीं है। अपने मन से सेलेक्टिव क्वेश्चंस को रख के उनका उत्तर दिया है। सत्यपत ब्राह्मण हां हिंदी बोलना नहीं आता है उसे तो ऐसे ही बात करता है तो उस पर हंसी आती है जब वह ऐसे बोलता है सत्य पत ब्राह्मण तो मतलब मुझे ऐसा नहीं लगता कि हमें किसी भी रूप से उसके किसी वीडियो का रिप्लाई देने की आवश्यकता है क्योंकि एक बार जब उसने वीडियोस बनाए थे कई सारे तो एक बार हम पहले दे चुके हैं और उसको लाइव आने के लिए आमंत्रित भी कर चुके हैं। उस वीडियो में पूछे गए जो सवाल थे, प्रश्न थे, उनके उत्तर आज तक उस सत्यपथ ब्राह्मण वाले की तरफ से प्रस्तुत नहीं किए जा सके। और अभी भी जो
00:02:34:00 हमारे वीडियोस के रेप्लिकेशन के नाम पे वो जो वीडियोस प्रस्तुत कर रहा है, वह केवल अपने आत्मा को बताने के लिए भाई मैंने उत्तर दिया। कुछ कुछ तो दिया। समथिंग इज बेटर देन नथिंग। यह सोचते हुए मगर वह स्वयं भी क्या उससे संतुष्ट होगा जो आप लोग यह अपेक्षा करते हैं कि मैं उसका उत्तर दूं। बचपन में जब मैं छोटा था तो होली के दिन की बात मुझे याद है। मेरे पिताजी ने मुझसे कहा था कि होलिका के पूजन के लिए आप एक गन्ना ले आइए। उससे पूजन होगा। तो मैं छोटा था तो मैं एक गन्ना साइकिल से लेने गया और गन्ना जब मैं लेके आ रहा था तो गन्ने का जो आगे का भाग होता है जिसमें जो सामग्री होती है होलिका पूजन की वो बांध करके पूजन किया जाता है वो आगे का भाग थोड़े से गन्ने के अंश के साथ टूट करके रस्ते में गिर गया तो मुझे लगा कि गन्ना मेन है। गन्ना मुख्य है। तो मैं मैंने जो है उसको गिर जाने दिया। मैं आगे बढ़ता रहा। मैंने उसको उठाया भी नहीं और मैं घर चला आया। पास में ही घर था 100 200 मीटर की दूरी पर। घर पर आकर के पिताजी ने पूछा गन्ने का
00:03:49:01 अग्र भाग कहां है भाई? तो मैंने कहा कि वह तो रास्ते में गिर गया। इंपॉर्टेंट तो गन्ना है। उन्होंने कहा नहीं वही आज के दिन इंपॉर्टेंट होता है क्योंकि उसी में सामग्री बांधी जाती है। उसी के द्वारा जो है पूजन होता है। अब मुझे बड़ा वो लगा। हालांकि पिताजी ने नहीं कहा कि जाओ वो पार्ट उठा लो। पर मैं तो जानता था कि मेरी अभी पहुंच में है वो पार्ट मैं ला सकता हूं। तो मैं उस पार्ट को लेने गया वापस दौड़ करके। जब मैं उस पार्ट को उठाने गया तो मैं क्या देखता हूं कि उस गन्ने के अग्र भाग को जिसमें बाल भी होते हैं और थोड़ा सा गन्ने का जो डंडे डाला हिस्सा है उसका उपयोग करते हुए ग्रामीण परिवेश का एक बालक था। लगभग मेरे समकक्ष ही होगा। तो वो टायर घुमा रहा था। आपने देखा होगा कि बच्चे जो है ग्रामीण क्षेत्रों में टायर घुमाते हैं डंडे से वह घुमा रहा था। तो मैंने उससे कहा भाई यह जो आप जिसका उपयोग कर रहे हो यह मेरा है और हमें पूजा करनी है। मेरा गिर गया था मुझे दे दीजिए। तो उसने कहा कि मैं नहीं गूंगा। मैंने पायो है यहां से राजस्थान की ऐसी बोली है। मैंने तो पायो है यहां से। मैं ना दे रहा हूं। तो मैंने कहा मैंने उससे जो है बलपूक वो छीन लिया कि मेरा है मुझे दे दीजिए। छीन लिया और मैं जाने लगा।
00:05:04:04 तो पीछे से तोतली सी आवाज में उससे बोलता है मां माता की बहन की गाली उसने देना प्रारंभ किया। तो जैसा कि मुझे मेरे एक चिप फीड थी कि भाई गाली का जवाब हमारे पास गाली से नहीं है। मार से है। हम मार सकते हैं, पीट सकते हैं। उठा उठा के पटक सकते हैं। यह चिप फीट थी। गाली हमें देना नहीं आता है। गाली के जवाब में गाली नहीं। तो उसने जब हमारी माता बहन को हमको गाली देना शुरू किया तो हमने वह जो गन्ने का अग्र भाग था जो हमारे हाथ में था वही उल्टा किया और उसके चपाचप चपाचप 510 लगा दिए। अब मैं घर घर आ गया गन्ने का भाग लेकर के घर आकर के पिताजी को भाग दे दिया। तब तक उसकी जो दादी या माताजी को ही उसको साथ में लेकर चली आई कि अरे अरे डॉक्टर साहब तुमने हमारे तुम्हारे मोड़े ने हमारे लल्लू है पीटो है डंडा ते मारो है बहुत बुरो मारो है इस तरह से विलाप कर रही थी तो मैंने कहा कि माता जी ये जो है मुझे मां बहन की गालियां दे रहा था तो उन्होंने एक बड़ी अच्छी बात कही उस समय ईश्वर ने जिसे बल नहीं दिया है ना उसको जुबान दी है जुबान
00:06:20:16 तो इस व्यक्ति ने जो यह कुतर्क किए हैं अपशब्द बोले हैं अभद्र आचरण किया है घटिया है तेरी गुरु परंपरा थूकता हूं यह है वो है दूसरी भी चीजें हो सकती पर फिलहाल जो सत्यता मैं बता रहा हूं इसके पास बल नहीं था शास्त्र का तो इसने अपनी जुबान चलाई है वो सीख मेरे वहां फीड हो गई वही किया इसने अब बात करते हैं कि जब वीडियो बना ही रहे हैं तो अंतिम बार एक बार मैं और अ जो लोग अभी बीच की स्थिति में है पूरी तरह से फंसे नहीं है शायद उनके दिमाग पर जो पर्दा पड़ा हुआ है वो हट जाए क्योंकि जो उसके अंध अनंध अंधभक्त हो चुके हैं वो तो शायद वाह वाह वाह वाह जैसे अरे अर्ज किया है तो पहले ही शेर सुनने से पहले ही वाह वाह वाह वाह अमा शुरू तो करने दो तो वो वाला वाला हिसाब किताब है वह तो वाह वाह वाह वाह बिना देखे ही करने लगेंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] मगर फिर भी जो बुद्धिजीवी होंगे और सत्य के पक्षधर होंगे पक्षपात विहीन लोग होंगे कुछ होंगे उसके फॉलोअर्स में भी उनको कुछ मैं बताना चाहता हूं। इसके लिए मैं
00:07:35:20 अंतिम बार उसके रेप्लकेशन में एक वीडियो आखिरी बना रहा हूं। इसके बाद यदि वह लाइव आता है तो चर्चा होगी या फिर उसके द्वारा तैयार किया हुआ क्योंकि उसका तो चेहरा अज्ञात है। शायद ऐसे कुकर्म किए हैं या इतना काला चेहरा हो गया कुकर्मों के कारण कि वह सामना नहीं कर सकता है। भले ही उसको यह लगता है कि जिसके लिए वह लड़ाई लड़ रहा है वो सत्य है। वह सत्य का पक्षधर है। तो धर्म की रक्षा करते समय जिसको वह धर्म मान रहा है। उस धर्म से उसे वह बल प्राप्त नहीं हुआ। साहस प्राप्त नहीं हुआ है जो वह आकर के सामना कर सके। प्रत्यक्ष रूप से डटकर खड़ा हो सके धर्म की रक्षा के लिए। उसके हिसाब से जो धर्म है उसकी रक्षा के लिए। तो यही होता है जब ईश्वर बाधित होता है ना जहां पर मान्यता में वहां पर धर्म का हास होने लगता है। मूल में क्या है? ईश्वर अबाध्य धर्म में और अधर्म में क्या है? ईश्वर बाध्य है। बाधित है। तो अब बात करते हैं जो कुछ उनके कुतर्क हैं। सीरीज वाइज ले लें। सबसे पहले तो उन्होंने अपने कई वीडियोस में जब हमने यह बात कही कि विष्णु और कृष्ण विष्णु और शिव में भेद नहीं है
00:08:51:10 तो प्रमाण के रूप में उन्होंने आदि शंकराचार्य आदि के तथ्य प्रस्तुत किए। तो सबसे पहला मेरा प्रश्न है क्या विष्णु को भगवान शिव से श्रेष्ठ मानने का आधार आपके लिए शंकर परंपरा और उसके आचार्य हैं? अगर हैं तो आपने शंकर परंपरा के द्वारा प्राप्त होने वाला जो ज्ञान विज्ञान है उसका अध्ययन कहां से किया है? अभी मैं उनके तथ्यों को प्रमाण के रूप में लेने के ऊपर बात कर रहा हूं। तो कहां से आपने प्राप्त किया है? अगर प्राप्त नहीं किया है और अगर ले भी रहे हो तो आधा अधूरा क्यों ले रहे हो? भाई उन्होंने उनसे जब पूछा जाता है कि आफ्टर ऑल एट द एंड जब मैं जीव भाव को प्राप्त हो गया हूं तो मुक्ति के लिए क्या करना है मणि रत्न माला में तो वह कहते हैं कि या तो तुम कंस के शत्रु कृष्ण की पूजा करो भक्ति करो या फिर तुम काम के शत्रु शिव की पूजा करो भक्ति करो भज गोविंदम भज गोविंदम प्रलाप मचाया जाता है इस के द्वारा कि अरे तुम लोग तो अपने गुरु की नहीं मान रहे उन्होंने तो भज भज गोविंदम बताया है भाई पहले आप लोग डिसाइड तो कर लो कि वो मायावाद फैला रहे थे या फिर विष्णु की भक्ति
00:10:06:12 फैला रहे थे और उन्होंने भज गोविंदम केवल एक स्त्रोत नहीं लिखा है भगवान की महिमा गान में 72 स्त्रोत लिखे हैं उसमें मां दुर्गा के लिए भी है भगवान शिव के लिए भी है गणेश जी के लिए भी हनुमान जी के लिए भी सबके लिए लिखे हैं तो अपनी जानकारी पहले वो कहते हैं ना अर्ध ज्ञानी भयंकर तो अर्ध ज्ञान भयंकर होता है। इसलिए उसको प्रचारित प्रसारित करने से पहले उसको पुष्ट करिए अपनी जानकारी को। तो यदि आपने शंकर परंपरा का ज्ञान उनकी परंपरा के आचार्यों उसके पास जाकर नहीं लिया कि भाई आपके ग्रंथों से मुझे यह समझ में आ रहा है कि उन्होंने विष्णु को शिव से श्रेष्ठ बताया है। अभेद बताया है। तो क्या यह सही है या फिर सही क्या है? उन्होंने क्या बताया है? तो या तो वो आपको बताते सामंजस्य की शिक्षा। इधर यह लिखा है, इधर यह लिखा है। और या फिर कम से कम अगर उनकी अनुपस्थिति में आप नहीं भी जा रहे हैं शंकर परंपरा के उनके यहां पर तो उनके ग्रंथों का आधा ही हिस्सा जो हिस्सा तुम्हारे मतलब का है वही पढ़ोगे क्या? अब कहां गया तुम्हारा अर्ध कुकुट न्याय? हां भूल गए क्या? दूसरी बात यदि आपको यह
00:11:21:15 लगता है कि आदि शंकराचार्य के बाद से अब तक जो उनकी परंपरा भ्रष्ट हो गई है उसमें लोग या तो किसी तरीके से मजबूरी वश या लालच वश भयवश बदल चुके हैं। तो इसका अर्थ है कि शंकर पर भगवान आदि शंकराचार्य जी के द्वारा जो ज्ञान विज्ञान दिया गया वह अब उसका कोई अस्तित्व नहीं है क्योंकि कौन सा सही है कौन सा गलत है इसका सत्यापन नहीं किया जा सकता तो ऐसे में शंकराचार्य के नाम से प्रचारित प्रसारित होने वाले ग्रंथों से निकलने वाले प्रमाणों को आप अपने मान्यता के लिए प्रस्तुत तो नहीं कर सकते क्योंकि आपको खुद विश्वास नहीं है यह उन्हीं का है कि नहीं है या फिर जो आपके पक्ष में है वह अपने आप उनका है। ऐसा सिद्धांत आपने बना रखा है। दुनिया में जो भी कहीं-कहीं भले ही वह कितना भी गलत हो आपके हिसाब से वह अगर विष्णु की बात कर रहा होगा तो हमारे लिए वह सही है। हम्म भाई आप पहले यह तय करिए क्या विष्णु की भक्ति बताना मायावाद है क्या? तो आपके हिसाब से वो माया फैलाने आए थे। तो पहले इन दोनों में से एक चीज को पकड़ो ना। आपके हिसाब से यदि वह मायावाद फैलाने आए थे और आप ही यह कह रहे हो कि वह विष्णु को श्रेष्ठ कह रहे हैं तो इसका मतलब है यह भ्रामक
00:12:36:16 शिक्षा है आपके अकॉर्डिंग। तो जब ये भ्रामक शिक्षा है तो ये क्यों ढोल पीटा करते हो कि उन्होंने विष्णु को श्रेष्ठ बताया। उन्होंने विष्णु को श्रेष्ठ बताया। भाई वह तो माया फैला रहे हैं। यानी कि जब वह यह कह रहे हैं कि विष्णु की भक्ति करनी चाहिए तो आपके हिसाब से यह गलत है। माया है, भ्रम है। तो इसको जरा समझने का प्रयास करिए कि यदि आपने शंकर परंपरा के किसी आचार्य से जाकर के अध्ययन नहीं किया है तो केवल ग्रंथों के आधार पर वह भी अपने मंतव्यों के अनुसार चुनाव करके उनके ग्रंथों से प्रमाण रूप में तथ्यों को प्रस्तुत ना करें। अनुचित है। फॉर्म ऑफ वासुदेवा अगर सारे इक्वल नॉलेज और लॉर्डशिप करेंगे तो इससे क्या होगा? वन मोर देन वन ईश्वर हो जाएगा। यह आर्य शंकराचार्य का खुद कहना था। ठीक है? यह उन्होंने लिखी है। ये पाखंड मत फैलाना कि इस का ट्रांसलेशन है। इस ठीक है। अभी मैं तुम्हारे आचार्यों की किताबें दिखा रहा हूं। दूसरी बात कि जो परंपरा वाली बात है, यह तो इस कौन भी मानता है।
00:13:51:20 आर्य समाज अगर परंपरा को ना मानने की बात कहे, तो मैं समझ सकता हूं। कबीर पंथी अगर यह बात कहे तो मैं समझ सकता हूं। मगर तुम लोग तो डंका बजाते हो भाई। परंपरा परंपरा हमारी परंपरा है। सीधे कृष्ण से आया है। यानी कि आप इस बात को जानते हैं कि किसी भी विषय का जो ज्ञान है वो उसकी जो परंपरा है मूल स्त्रोत से स्टार्ट होने वाली वहां से करना चाहिए। तो आपने आदि शंकराचार्य जी का ज्ञान कहां से अध्ययन किया? और नहीं किया तो उनके वक्तव्यों को प्रमाण रूप में कैसे प्रस्तुत कर रहे हो? भाई हमने आपसे पूछा है आप विष्णु को क्यों क्यों श्रेष्ठ मानते हैं शिव से आप अपना बताइए आदि शंकराचार्य जी को हम मानते हैं और उनकी जो परंपरा है उसमें जाकर हम अध्ययन करते हैं और वो हमें बताया जाता है परंपरा प्राप्त आचार्यों से कि भाई विष्णु और शिव में कोई अंतर नहीं है। कहीं पर विष्णु को श्रेष्ठ कहा गया है। कहीं पर शिव को श्रेष्ठ कहा गया है। तत्वतः दोनों एक है। अगर आपको इन आचार्यों पर भरोसा नहीं है तो आप आदि शंकराचार्य की बात का संदर्भ लेते हुए स्वयं के मंतव्यों को प्रमाणित सिद्ध मत करिए। ठीक है? देखिए बात सच क्या है? बात तो सच वैष्णवों की ही होगी। ये तो सिंपल सी बात है। अब यही बात यही बात जो सिंपली केशवानंद प्रभु ने सिंपल भाषा में
00:15:06:21 समझा दी और ये पाखंडी आरोप लगाता है कि ये जो बात बता रही ऐसा तो वेदांत सूत्र में लिखा ही हुआ है। शंकराचार्य के तो जो ये सरल भाषा में भक्तों को डिवोटीज को बता दे रहे हैं केशवानंद प्रभु वो बात ऐसा नहीं हवा में बोल दे रहे हैं। इसी संदर्भ में एक कदम और आ जाते हैं। आपने अपने एक वीडियो में कहा जब हम कि जब हमने एक वीडियो बनाया था कि उन्होंने कोई है आपके यहां के तथाकथित विद्वान उन्होंने कहा था कि भगवान आदि शंकराचार्य जी ने व्यास जी को ही गलत कह दिया। कहा कि इस जगह 1.12 में व्यास जी ने गलत लिख दिया। उसके बाद हमने ब्रह्मसूत्र दिखाया जहां पर कहीं पर भी ऐसा वक्तव्य नहीं है कि भगवान आदि शंकराचार्य जी ने व्यास जी को गलत कहा हो। अब आपने इसके पक्ष में कहा कि नहीं नहीं वो विद्वान है। वो सरल करके बता रहे थे। अरे भाई सरल करने के लिए आप अधिकृत आपको अधिकृत किसने किया? आदि शंकराचार्य जी ने आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व क्या कहा था? इसको सरल करने वाले वो लोग कौन होते हैं जो आदि शंकराचार्य जी को मानते ही नहीं है। झूठा मानते हैं। झूठ फैलाने आए थे मानते हैं। वो
00:16:22:00 लोग करेंगे। और क्या उन्होंने परंपरा प्राप्त अध्ययन किया आदि शंकराचार्य जी का? फिर वही बात आ जाती है कि अगर परंपरा पर आपको उनकी परंपरा के आचारों पर विश्वास नहीं है तो वह जो ग्रंथ है ना जिससे आप यह देख के कह रहे हो कि उन्होंने जो है ऐसा कह दिया वो ग्रंथ जो है आपको उनकी परंपरा से प्राप्त हुए हैं। तो यदि परंपरा यह स्वीकार कर रही है कि हां आदि शंकराचार्य जी ने व्यास जी को गलत कहा तो आप यह कह सकते हैं कि हां आदि शंकराचार्य जी ने व्यास जी को गलत कहा। मगर ना ही उनके ग्रंथ में कहीं लिखा है और ना ही उस परंपरा के आचार्य यह बात स्वीकार करते हैं। तो फिर आप होते कौन है सरल करने वाले? आपने भगवान श्री कृष्ण की बात को सरल करने के नाम पर तो जो भ्रम फैलाया है, जो मिलावट की है वो तो जग जाहिर है। ब्रह्म का अर्थ ब्रह्म नहीं है। कृष्ण भावना भावित हो गया। है ना? जिस यज्ञ में अर्पण भी ब्रह्म होता है, सामग्री भी ब्रह्म होती है और करने वाला भी ब्रह्म होता है, क्रिया भी ब्रह्म होती है। फल स्वरूप प्राप्त भी ब्रह्म होता है। इसको बदल दिया। एक एक जगह पर भी ब्रह्म नहीं रह गया। तो आपने
00:17:37:03 भाष्य के नाम पर भगवान कृष्ण के साथ तो छल कर ही दिया। अब आप आदि शंकराचार्य जी की बात को भी रखने वाले हो गए। आप क्या उनके क्या उत्तराधिकारी हैं जो उनकी बात को सरल करके बताएंगे? क्या कुतर्क करते हो यार। सोच तो लिया करो कि उन्होंने सरल करके बता दिया। अभी सरल करके मैं बता दूं क्या कि स्कॉन में गेस मैरिज होती है। समलैंगिक विवाह होता है। अभी सरल करके मैं बताऊं आपको इस जो है सनातनियों को अब्राहमिक बनाना चाहता है। इस जो है ईसाई बनाना चाहता है। तो क्या मेरे इस सरल करने को आप मान लोगे?
00:18:16:14 [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं सरल करके बताऊं। बीइंग स्पिरिट सोल वाला जो है उसका मुंह काला हो गया था। किसी ने उसके मुंह पर नाली का जो पानी होता है वो लगा दिया था। लो मानोगे इसे? नहीं। क्योंकि मैं आपकी तरफ से बोलने वाला प्रामाणिक व्यक्ति नहीं हूं। तो मैं किस हिसाब से सरल कर सकता हूं? और अगर मैं ऐसा बोलूंगा तो उसके खिलाफ एक्शन भी लिया जा सकता है। जब आपका फेथ ही नहीं है भगवान आदि शंकराचार्य में तो उनकी कही हुई बात को उन्होंने क्या लिखा क्या नहीं लिखा उनकी कही हुई बात को आप सरल करने किस आधार पर कर रहे हैं ना ही आपने उनका परंपरा प्राप्त अध्ययन किया बल्कि आप न्यूट्रल ना होकर के विरोधी हैं और फिर आप उनकी बात को सरल करके बता रहे तो गलत है ना ये क्या उनके परंपरा प्राप्त जो उत्तराधिकारी हैं वो यह मानते हैं कि आदि शंकराचार्य जी ने व्यास जी को कहा था कि वह गलत हैं ना उनके ग्रंथ में है ना कोई आचार्य मानते हैं और आपने कहा कि हमने जो है सरल करके बता दिया आदि शंकराचार्य जी की बात को हम जो है सबका सरल करते रहते हैं। भगवान श्री कृष्ण का भी सरल कर देते हैं। हम आदि शंकराचार्य जी का सरल कर देते हैं। परंपरा एवं परंपरा प्राप्त ये है। अच्छा अब
00:19:31:22 बात आ जाती है कि आप में और हम में अंतर क्या है? भाई यह बात आप भी तो कह सकते हो कि जो बातें हम इस के आधार पर बोल रहे हैं क्या हमने इस के बारे में परंपरा प्राप्त लोगों से बात की? हां इस के बारे में कोई भी बात करने से पहले आपके द्वारा चयनित आपके द्वारा नियुक्त किए गए अधिकृत व्यक्तियों के पास जाकर के पूछा कि जो हमें आपके ग्रंथों में दिखाई दे रहा है क्या वही सत्य है या कुछ और सत्य है? अगर और कुछ है तो बताइए।
00:20:05:25 और उन्होंने कहा हां जो आप समझ रहे हो वही सत्य है। शिव काली दुर्गा को भगवान के समान समझने वाले पापी हैं। पाखंडी हैं। कृष्ण और अल्लाह में कोई अंतर नहीं है। सब एक ही हैं। बाइबल का यहोवा कुरान का अल्लाह और भगवत गीता का कृष्ण एक ही है। यह ठोक के उन्होंने कहा ना आपके लोगों ने तब हमने बोला ना कुछ यह अंतर है। हम आपकी उन बातों पर प्रश्न करते हैं जो आपने स्वीकार की हुई है और उन पर आपत्ति है। आप हमारी उन बातों पर आक्षेप लगा रहे हैं जो बातें हम स्वीकार ही नहीं करते कि हमने कही है। हमारे द्वारा प्रचारित प्रसारित की जा रही है। अपने मन से इसकी ईंट उसका रोड़ा भानुमती का कुरवा जोड़ा करते रहो। अब बात करते हैं आपने रिसेंट वीडियो में क्या कहा कि मैंने वैष्णव शास्त्रों के नाम पर वैष्णव शास्त्र दिखाए ही नहीं है। जबकि वैष्णव शास्त्र तो वो है जिसमें कि वैष्णवाचार्यों ने भास किया हो। भाई आप ही लोग बोलते हैं ना ठोक ठोक करके कि वैष्णव शास्त्र सात्विक हैं और उसमें पुराण का प्रमाण देते हैं पद्म पुराण आदि का। उसमें लिखा है क्या कि वैष्णव शास्त्र जो वैष्णवाचार्यों द्वारा भाष्य जो किया गया होगा वो
00:21:20:28 मान्य होगा। उसमें तो नाम लिखा है ना पुराण का और उस नाम के आधा नाम को दिखाते हुए मैंने कहा मुझसे गलती हो गई भाई मुझसे गलती हो गई जो पद्म पुराण में जो ये लाइन लिखी है कि वैष्णव शास्त्र जो है भागवत पुराण जिसमें विष्णु भगवान की महिमा का गान हुआ है वो नहीं है उस पर जो कमेंट्री लिखेंगे विष्णु के भक्त वो वैष्णव शास्त्र है ना यही सही है ना और भागवत पुराण जो है वह वैष्णव शास्त्र नहीं है। विष्णु पुराण जो है वह वैष्णव शास्त्र नहीं है। उस पर जब कोई विष्णु को मानने वाला कमेंट्री लिख देगा वो वैष्णव शास्त्र कहलाएगा। उसका एज इट इज ट्रांसलेशन करेंगे तो सनातन सिद्धांत प्रभाव प्रतिपादित हो जाएंगे। और क्योंकि वैष्णवों के सिद्धांत आपके अनुसार सनातन तो है नहीं। वो तो वैष्णव सिद्धांत होंगे। भाई मैं एक प्रश्न करना चाहता हूं। ये वैष्णवों के नाम पर आप बात करते हैं। आपने एक बात भी कही कि वो वैष्णवों पर कहता है। शेफ पे कहता है हां मैं शेफ पे अभी तक इसलिए नहीं बोला हूं क्योंकि मुझे कोई भी ऐसी फेमस पर्सनालिटी नहीं मिली। कोई भी ऐसा व्यक्ति राष्ट्रीय स्तर का अंतरराष्ट्रीय स्तर का नहीं दिखा मुझे जो भ्रम फैला
00:22:36:04 रहा हो। विष्णु और शिव में भेद कर रहा हो। दिखेगा तो बोलूंगा भेज दो मुझे। और दूसरी बात अपने आप को परंपरा प्राप्त वैष्णवों से के साथ खड़ा करने का यह प्रलाप बंद कर दो। वैष्णव वैष्णवता की आड़ में जो बचने का प्रयास करते हो बंद कर दो। वो लोग कृष्ण और अल्लाह को एक नहीं बताते हैं। जाकर सुन लेना राघवाचार्य जी को। वो लोग मलेच्छों को गायत्री मंत्र की दीक्षा नहीं देते हैं। यह वैष्णवता की आड़ में
00:23:12:02 अपने जो कुकृत है ना उनको छिपाने का प्रयास बंद करो। आपसे पूछा जा रहा है कि विष्णु को श्रेष्ठ क्यों मान रहे हो? तो आप शास्त्र का प्रमाण दो वैष्णवता की आड़ में मत छुपो। नहीं तो मैं पूछूंगा कि वैष्णव घर में जन्मे थे इसलिए विष्णु भगवान को श्रेष्ठ मानते हो या विष्णु भगवान को श्रेष्ठ मानते हो इसलिए वैष्णव हो। अगर विष्णु भगवान को श्रेष्ठ मानते हो तो किस आधार पर माना? अगर तुम भेद करते हो विष्णु और शिव में और भेद करते हुए विष्णु को श्रेष्ठ रखते हो तो किस आधार पर माना? मतलब वैष्णव बने कैसे? हम वैष्णव है इसलिए ऐसा मानते नहीं। वैष्णव बने कैसे? और अगर वैष्णव हो इसलिए विष्णु को प्रिय मानते हो तो इसका मतलब आपका जो भाव है वह यह है कि मैं जहां जन्म लूंगा उसके अनुसार जो चीजें होंगी बस वही मेरे लिए एक्सेप्टेबल है। यह आपका सिद्धांत है। यह सनातन सिद्धांत है। अब बात करते हैं अगले टॉपिक की कि इन्होंने अब जितने भी वीडियोस दिखाए हैं उसमें यह बताया है कि विष्णु को श्रेष्ठ कहा गया है। विष्णु को श्रेष्ठ कहा गया है। विष्णु को श्रेष्ठ कहा गया है। अरे भाई विष्णु को श्रेष्ठ कहने से आपत्ति नहीं है।
00:24:28:00 भगवान शिव को श्रेष्ठ ना कहने से आपत्ति है। अगर आपने ढेर सारे प्रमाण दिखाए हैं विष्णु को श्रेष्ठ कहने के लिए तो हमने भी तो भगवान विष्णु और शिव की एकता के संबंध में बहुत सारे प्रमाण दिखाए हैं ना। श्रुति शास्त्रों से भी पौराणिक पुराणों से भी सबसे दिखाएं। और आपने सबसे बड़ी बात कि विष्णु को श्रेष्ठ श्रेष्ठ श्रेष्ठ करके बता रहे हो और उसके बाद क्या करते हो आगे उसके उसके लिए उसको और प्रमाणिक सिद्ध करने के लिए कि देखो शिव से बड़े क्यों है दो मुझे तर्क पकड़ में आए जो मतलब मुझे नहीं लगता वो थे मगर कुल मिलाकर के आपके दो तर्क पकड़ में आए कि देखो क्योंकि ज्यादा बार विष्णु को शिव का उपास्य कहा गया है और क्योंकि भगवान विष्णु से शिव को शक्तियां मिल रही हैं। अब भगवान जो शिव है वह उन पर डिपेंड है। है ना? अब इसमें बात यह आती है कि मैं दिखाऊंगा नहीं। मगर क्या तुम यह पक्का कह सकते हो सौगंध खा के जिनको तुम मानते हो उनकी? [संगीत] क्या ऐसे
00:25:43:03 प्रमाण नहीं है शास्त्रों में जहां पर विष्णु जी भगवान शिव पर डिपेंड हो? माता पर डिपेंड हो ऐसे प्रमाण नहीं है। श्रुति में भी हैं और स्मृति में भी हैं। तो उनको झूठा क्यों मान लिया जाए? और बात रही है संख्या की कि ज्यादा बार शिव विष्णु को श्रेष्ठ कहा गया तो यह भी आपका भ्रम है। अलग प्रकार से भगवान शिव को भी दूसरे शब्दों में श्रेष्ठ कहा गया है और समकक्षता के साथ। मगर अगर इस सिद्धांत को मान लें कि ज्यादा बार जिसे कहा जाएगा उसे माना जाएगा और कम बार जिसे कहा जाएगा उसको नहीं माना जाएगा। आपका कहने का मतलब यह है कि जो बातें ज्यादा बार लिख दी है जिसके द्वारा वह लिखी जा रही है उसी के द्वारा लिखी जाने वाली जो दूसरी बातें हैं दूसरे के संबंध में शिव के संबंध में वो बातें झूठी है और जब वो झूठे हो गए जब कोई व्यक्ति एक लाइन भी झूठी लिख सकता है तो फिर उसकी किसी भी बात पर विश्वास किस आधार पर करें बना दिया भ्रामिक आपने बना दिया आपने व्यास जी को कि हम अपनी कोई आयत बदल देते हैं तो उससे सबसे बेहतर आयत लाते हैं। व्यास जी भी ऐसे ही हो गए
00:26:58:07 ना जो झूठ बोल सकते हैं। उन्होंने झूठ बोल दिया क्योंकि ज्यादा बार उन्होंने कृष्ण को कहा मगर एक एक दो बार उन्होंने आपके हिसाब से एक दो बार नहीं कहा मगर एक दो बार उन्होंने आपके हिसाब से शिव को बड़ा कहा। तो इसलिए क्योंकि उन्होंने कम बार शिव को कहा तो शिव वाली बातें झूठी हो गई। वो वैष्णवा नाम यथा शंभू यथा शंभू मगर एक जगह जो कृष्ण आपके हिसाब से कि कृष्ण को जो है भगवान शिव का भक्त कहा और कृष्ण को परम शैव कहा वो एक बार कहा इसलिए कम बार कहा आपके हिसाब से कम बार कहा मगर कम बार कहा इसलिए वो बात उन्होंने झूठी लिखी है तो जो झूठा है वो आपको झूठ नहीं बोल रहा है यह कैसे सिद्ध होता है जो मूल प्रश्न थे जो कोई भी है जो लोग ये देख रहे हैं हमने अपने पिछले वीडियो में पीडीएफ दी थी इसमें भी दे देंगे तो वो सारे जो प्रमाण है ना वो सारे प्रमाण उसमें पिछले वीडियो में दिए गए हैं। वो हमारी पीडीएफ को रखिए और उन्होंने इन्होंने एक पीडीएफ प्रोवाइड की है। उसको देखिए क्या इन्होंने समग्र रूप से सत्य पत ब्राह्मण पूर्व पक्ष के रूप में हमारे सभी प्रश्नों को लिया भी है। सभी प्रश्नों को नहीं लिया और जिनको लिया भी उनके लिए केवल कुतर्क प्रस्तुत किए हैं और कुछ नहीं। केवल कुतर्क
00:28:10:24 तो यह कोई सनातन सिद्धांत नहीं है कि ज्यादा बार यदि कृष्ण के लिए उपास आया, ज्यादा बार यदि कृष्ण के लिए परमेश्वर आया तो जहां पर जिनके लिए कम बार परमेश्वर आया उनको परमेश्वर ना माना जाए। ऐसे में लिखने वाले को उतने हिस्से में झूठा मान लिया जाए। यह सनातन सिद्धांत नहीं है। सनातन सिद्धांत दिखाइए और अगर दिखा देंगे तो वैदिक धर्म पर आघात पहुंचाएंगे, नष्ट कर देंगे धर्म को क्योंकि लिखने वाले के प्रति आप अविश्वास पैदा कर रहे हैं। अविश्वास को जन्म दे रहे हैं। उसकी क्रेडिबिलिटी पर वार कर रहे हैं।
00:28:52:07 भाई जो व्यक्ति झूठ बोल रहा है, वह आपसे बोलते समय आपको बताएगा क्या कि अब मैं तुमसे सच बोल रहा हूं। तो उनको झूठा साबित करने पर क्यों तुले हो? और फिर एट दी एंड अगर आपका सिद्धांत पकड़ लिया जाए कि विष्णु भगवान के लिए बात हो रही है। ज्यादा बार विष्णु के लिए बात हो रही है। सच बात है। श्रुति शास्त्रों में भी ज्यादा बार विष्णु के लिए बात हुई है। तो फिर आप तो कह रहे हो कि विष्णु विष्णु जो है कृष्ण से छोटे हैं। विष्णु भी नारायण भी पूर्ण ऐश्वरवान नहीं है भगवान कृष्ण के समान। और आपके अकॉर्डिंगली
00:29:30:21 जो है भगवान कृष्ण श्रेष्ठ है तो आपने उनकी श्रेष्ठता क्यों मान ली? श्रुति स्मृतियां तो ज्यादा बार विष्णु की बात कर रही है ना। हर जगह विष्णु की चर्चा ज्यादा है। विष्णु नाम से भगवत तत्व की चर्चा ज्यादा है ना। तो आप ही के सिद्धांत से धर्म अधर्म में यही अंतर होता है। अधर्म जो है खुद ही जो बात बोलता है उसी को काटना पड़ जाता है। अब आपने देखिए क्या किया कुतर्क स्कंद पुराण के आधार पर आप बोल रहे हैं कि जो शिव जी हैं शिव जी हैं वह तामस कल्प में प्रधान होते हैं और ब्रह्मा जी राजस कल्प में प्रधान होते हैं और जो विष्णु जी हैं वह सात्विक कल्प में प्रधान होते हैं। ठीक है भाई? पहली बात तो यह है कि जैसे आप यह चाहते हैं कि भागवत पुराण का अध्ययन जो है वह वैष्णव भाष्य से हो तो आपने यह जो शैव शास्त्र है इसका अध्ययन किस शैव शास्त्र से किया है? शैवाचार्य के यहां से किया है तोड़ो अपना सिद्धांत। तोड़ो। खुद ही अपना सिद्धांत तोड़ोगे। खुद ही कहेगा अब्राहमिक ईश्वर खुद ही कहेगा ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है दो 106 और उसके बाद जब अवतार लेने की बात आएगी तो वह खुद ही कहेगा
00:30:46:16 कि मेरी कोई संतान कैसे हो सकती है मैं नीचे नहीं आ सकता मुझे देखा नहीं जा सकता तो वह खुद ही अपने नियमों को तोड़ेगा यही अधर्म की पहचान है। अब तोड़ो अपना नियम जब वैष्णव शास्त्र को समझ जब वैष्णव शास्त्र केवल भागवत पुराण को नहीं माना जाएगा। भागवत पुराण पर जो वैष्णवाचार्य जो टीका लिखेंगे वह माना जाएगा। तो शैव शास्त्र को तुमने कैसे मान लिया बिना शैवाचार्य के टीके के और दूसरी बात अच्छा याद दिलाया आप तो यह कहने के लायक भी नहीं हो कि फलाने का वो भाष्य पढ़ो भागवत पे। श्रीधर स्वामी का प्रमाण आपने क्यों नहीं दिखाया? श्रीधर स्वामी जी का भाष्य जो है जो आपके जो चैतन महाप्रभु है हमारे भी हैं। पर आप जिस तरह से उनको प्रस्तुत करते हैं कि वो आपके परमाचार्य हैं तो उनके लिए तो सबसे ज्यादा प्रमाणिक जो है श्रीधर स्वामी जी का भाष्य है। तो वहां से दिखाओ ना जहां पर शिव जी को बड़ा बताया जा रहा है भागवत पुराण में उसके भाष्य में आपके अनुसार जो वैष्णवाचार्य हैं उन्होंने कुछ और लिखा है। उन्होंने शिवजी को बड़ा नहीं बताया। तो आप उनको प्रमाण के रूप में क्यों प्रस्तुत कर रहे हो? आपका प्रमाण तो श्रीधर स्वामी जी का है ना भाष्य उनका दिखाओ नहीं दिखाओगे क्योंकि पर्दे में
00:32:01:18 रहने दो पर्दा ना उठाओ पर्दा जो उठ गया तो भेद खुल जाएगा हां अल्लाह जैसा कृष्ण मेरी तौबा अल्लाह जैसा कृष्ण मेरी तौबा हां तो श्रीधर स्वामी जी से आपने दिखाया नहीं शवाचार्यों के पास आप गए नहीं और आप जो है स्कंद पुराण से प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो कि जो तामस कल्प होता है उसमें शिव की प्रधानता होती है। अब बात ये आती है कि इन सब चीजों को साइड भी कर दें। आप ही की बात को मान लेते हैं। आप ही की बात को मान लेते हैं। कि ऐसे ऐसे अलग-अलग कल्पों में ब्रह्मा विष्णु महेश की श्रेष्ठता होती है। ठीक है? मान लिया तो यहां तो आपने अपने लिए ही गड्ढा खोद लिया ना। इसका अर्थ है कि आप जो विष्णु की श्रेष्ठता को सिद्ध कर रहे हैं शिव से अलग करते हुए तो यह कोई सनातन सिद्धांत नहीं है। क्योंकि वो कल्प वेद से प्रभावित हो रहा है। और सनातन क्या है? जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसी का नाम सनातन है। तो यह विष्णु की श्रेष्ठता जो है
00:33:16:26 राजस और तामसिक कल्प में भंग हो रही है। इसका अर्थ आप ही कह रहे हो कि विष्णु जी श्रेष्ठ हैं। यह सनातन सत्य नहीं है। सनातन सत्य क्या है भाई? कि विष्णु ही राजस कल्प में अगर आपके अनुसार बोले तो विष्णु ही राजस कल्प में ब्रह्मा रूप में पूजे जाते हैं। विष्णु ही तामस कल्प में शिव जी के रूप में पूजे जाते हैं। कल्प भेद से तीनों के रूप में अलग-अलग है। प्रधानता अलग-अलग कल्पों में अलग-अलग भगवान के रूपों की बताई गई है। परंतु तत्वतः तीनों एक हैं। आप ही ने आपने ही खुद सिद्ध कर दिया कि विष्णु जी शिव से श्रेष्ठ है या विष्णु और शिव में भेद है। तो फिर अगर विष्णु और शिव में भेद है तो फिर विष्णु श्रेष्ठ हैं। विष्णु प्रधान हैं। यह सनातन सत्य नहीं है। यह आपने सिद्ध किया। कैसे काटोगे इसको?
00:34:15:27 तो भाई थोड़ा सोच समझ के बातें किया करो। अब इतनी सारी व्याख्या को एक साइड कर दें। एक साइड सबसे मूल प्रश्न वह प्रश्न जिसके आगे अधर्म की गति नहीं हो सकती। उस प्रश्न को तो आपने छुआ ही नहीं। अपने किसी वीडियो में नहीं छुआ। यही बात है। इसीलिए मैं राम के पीछे पड़ता हूं। राम जहां कुछ भी समझ में ना आए वहां राम को लाइए। किसका भाष्य, किसका अर्थ, यह वह किसने क्या किया? सब कुछ एक तरफ कर दो और मूल प्रश्न पर आ जाओ। प्रभु श्री राम ने किसका ध्यान किया? गायत्री मंत्र के जाप के द्वारा उन्होंने धर्म में क्या सिखाया? रामो विग्रहवान धर्मः राम जो करेंगे वह धर्म है। तो राम जी ने जो गायत्री मंत्र से जाप किया तो ईश्वर के किस रूप का जाप किया? किस रूप का किया? बताइए। अगर आप कहते हैं कि कृष्ण का किया, विष्णु का किया तो वहां पर अद्वैत की स्थापना हो जाएगी कि
00:35:30:28 भगवान श्री राम ने अपने ही पूर्ण रूप को भजन करना सिखाया। अपने ही पूर्ण रूप का ध्यान रखना ध्यान लगाना सिखाया मानोगे और यदि किसी और का ध्यान लगाया तो फिर मानना पड़ेगा कि विष्णु से भिन्न भगवान शिव का ध्यान लगाया भगवान मां दुर्गा का ध्यान लगाया किसी को तो मानना पड़ेगा ना भगवान विष्णु से भिन्न और या फिर यह कह दो कि भगवान जो राम है वह भी झूठ बोल सकते हैं। भगवान राम भी मिथ्या फैला सकते हैं, भ्रम फैला सकते हैं। बोल दो। भगवान राम साक्षात धर्म नहीं हैं। बोलो और यदि वो धर्म है और वो सिखा रहे हैं। आपके अनुसार अपने पूर्ण रूप आपके अनुसार। भगवान राम भी पूर्ण है। व्यवहार में। वो विष्णु की भक्ति आपके अनुसार बता रहे हैं। कृष्ण की भक्ति आपके अनुसार बता रहे हैं। तो अपने पूर्ण रूप की भक्ति बता रहे हैं ना। अद्वैत की स्थापना हो गई। मान लो भगवान आदि शंकराचार्य जी के सिद्धांत को मान लो और यदि अपने पूर्ण रूप कृष्ण रूप को नहीं ध्याया विष्णु रूप को नहीं ध्याया तो फिर किसको ध्याया भाई
00:36:46:07 और अगर ध्याया तो क्या वो धर्म नहीं है क्या वो असत्य था क्या वो मिथ्या थी क्या वो झूठ बोले थे वहां पे शिव जी को जब भगवान कहा था परमेश्वर कहा था वो झूठ बोले थे गायत्री के द्वारा उनका स्मरण किया था वो क्या झूठ बोले थे वो धर्म नहीं और अगर धर्म है तो किसकी बात माने? किसका किसको फॉलो करें? किसको अनुकरण करें? राम को या इसान को? राम को या इस कौन को? किसको फॉलो करें?
00:37:28:04 गाली का जवाब गाली से नहीं देते हैं। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] प्रभु श्री राम जब आ जाते हैं तो अधर्म को रास्ता अपना नाप लेना पड़ता है। ये आपके वीडियो से पता चल गया। मुझे लगा था शायद मैंने आपकी पीडीएफ को खोल के देखा था बहुत उत्सुकता से। राम का क्या जवाब दिया राम का? तो देखा तो उसमें राम वाला जो क्वेश्चन है वो है ही नहीं। कहां से होगा भाई? फस जाओगे। राम के रहते हुए अधर्म की गति संभव नहीं है ना। या तो राम को झूठा कहो। मत मानो कि मर्यादा पुरुषोत्तम है। सत्यवादी थे। रामो दुना भाषेते। राम दो प्रकार की बातें नहीं करता। राम झूठ नहीं बोलता। बोल दो। राम भी झूठे थे। उन्होंने जो है भ्रम फैलाया। जो सत्य नहीं था वो करके दिखाया। तो इतने हिस्से में वो धर्म नहीं था। बोलो
00:38:26:14 हम बस प्रलाप करना है आपको वो बातों में बात करनी है जिसमें आप थोड़ा बहुत कुछ बोल बोल पाओ वो तोतला लड़का था ना बच्चा ग्रामीण परिवेश का जो उसमें बोलता है कि कुछ मुझे जो गालियां दी थी उसने बस वही है घटिया है यह है वो है वही आपने किया राम से कैसे लड़ोगे भाई राम ने गायत्री मंत्र के द्वारा किसका ध्यान लगाया? राम ने अगर भगवान शिव को परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया तो क्या यह मिथ्या है? क्या यह झूठ है? उन्होंने अगर गायत्री मंत्र से भगवान शिव का ध्यान नहीं लगाया तो क्या अपना ध्यान लगाया? अद्वैत का धर्म दिया, अद्वैत की शिक्षा दी। बताओ या फिर कह दो राम जी झूठे हैं। राम जी भी झूठे हैं। कहो तब आएगा आपका असली चेहरा सामने। है ना? कितने आश्चर्य की बात है ना? एक पक्ष है जो भगवान शिव और विष्णु में समानता सिद्ध करने का प्रयत्न कर रहा है। जिससे कि हमारे जो समाज है जो इन तथाकथित
00:39:42:02 भ्रांतियों के कारण बट रहा है वह ना बटे। एकत्व आए सुरक्षित हो। और दूसरा पक्ष है जो पुरजोर प्रयास कर रहा है भगवान शिव को विष्णु के सामने नीच सिद्ध करने के लिए और फिर भी यह बातें समाज को दिखाई नहीं दे रही। एक पक्ष है जो पुरजोर प्रयास कर रहा है यह सिद्ध करने के लिए कि कृष्ण और अल्लाह एक है मगर शिव और कृष्ण एक नहीं है। मगर फिर भी समाज को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। वैष्णवा नाम यथाशंभू पे ही अगर बात करोगे ना तो उसमें भी तुम्हें अपने आप को तोड़ना पड़ जाएगा। अपने जो सिद्धांत है उनसे मुकरना पड़ जाएगा। कैसे किस तरह के लोग हो तुम? मगर भगवत गीता यथारूप के 2.62 में तो लिख रहे हो कि भगवान शिव से अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल नहीं हुआ और वो जो है मां पार्वती के प्रति जो विवाह के लिए प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार कर लिया और वहीं पर एक दूसरा भक्त था जो भगवान हरि का भजन करता था और उस वो जो वहां पर एक क्या कहते प्रॉस्टिट्यूट से उनका कंपैरिजन किया गया है। मां पार्वती के विवाह प्रस्ताव का कंपैरिजन एक प्रॉस्टिट्यूट के जो व्यभचार रूपी आचरण होता है उससे किया गया है। है
00:40:57:10 ना? और वहां पर क्या कहा गया कि हरिदास अपनी जो तपस्या से हैं वो हिले नहीं। तो कहां रह गए वो परम वैष्णव? फिर आपने तो फिर इन सारे शास्त्रों को मना कर दिया। इसमें वैष्णवा नाम यथा शंभू वैष्णवा नाम यथा शंभू भाई हरिदास जी का नाम तो कम बार आया होगा ना वैष्णवा नाम यथा हरिदास कितनी बार आया है यही है मैंने बताया ना धर्म और अधर्म के बीच का अंतर कि अधर्म जो है अपनी ही कही हुई बात को बार-बार ठुकराएगा। क्यों? क्योंकि अधर्म जो है शाश्वत नहीं होता है। उसको सदा के लिए धारण नहीं कर सकते और धर्म जो है वह सनातन होता है। हिलता नहीं है अपनी जगह से। तो अगर आप कह रहे हो कि वैष्णव जो भगवान शिव है वह सबसे बड़े वैष्णव हैं तो आपने तो भगवत गीता 2.62 में उनको गिरा दिया और किसी और को उनसे बड़ा वैष्णव सिद्ध कर दिया क्योंकि वो भैया आसक्त हो गए। विवाह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया उन्होंने। वो तो इंद्रियों पर उनको कंट्रोल नहीं है। और इन्होंने जो है हरिदास जो है अपनी उसमें रहे तो बड़े वैष्णव हो गए। कहां वैष्णव है? फिर तो यहां तो आपने अपनी 2.62 में इन सारे जो
00:42:12:12 प्रमाण है इनको खुद ही खंडित कर दिया। तो इसीलिए मैं कहता हूं इसीलिए मैं कहता हूं कि वीडियो बनाने से पहले सोच समझना सोचो समझो और उस बच्चे की तरह मुंह मत चलाओ। अब बात ऐसी है कि अंतिम बार मैंने वीडियो बनाया है। कोई भी व्यक्ति सबसे पहले तो तू जो ये दाम बीइंग स्पिरिट सोल वाला है थोड़ा बहुत अगर तेरा चेहरा काला ना हुआ हो और थोड़ा बहुत घर में साबुन-वाबुन की व्यवस्था हो धो के अगर चेहरा ऐसा हो जाए कि जो समाज को दिखा सके तो तू प्रयास करना आने का। वरना बहुत ज्यादा काला हो चुका है। कालिक मिट नहीं रही है। बिल्कुल किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचा है। तो किसी कोई तो ऐसा होगा ना जो तेरी पीडीएफ तेरी वीडियो पढ़ के देख के तैयार हो पाया होगा। जो सामना कर सके धर्म उस धर्म की रक्षा के लिए जिसे तुम धर्म कहते हो। हालांकि वो है धर्माभास। जिसे आप धर्मा जिसे आप धर्म कहते हो वह धर्माभास है। अगर चलो जिसको तुम धर्म समझते हो उस धर्म की रक्षा के लिए अगर सामना करने का साहस जुटा सको जुटा सको तो ऐसे किसी व्यक्ति को भेज देना आपका मुंह धुल जाए साबुन की व्यवस्था ना हो तो नंबर ले लो है ना
00:43:27:13 मुंह धुलने के लिए साबुन की व्यवस्था ना हो तो वह भी करवाएंगे आपके मुंह को एकदम चमकदार बनाइए फिर समाज के सामने आइए और अगर बहुत ज्यादा काली पुत गई है मुंह दिखाने के काबिल नहीं बचे हो किसी को बहुत शर्मसार को तो ठीक है। किसी कोई तो होगा ऐसा जो आपके वीडियोस से तैयार हुआ होगा। उसने पीडीएफ को पढ़ा होगा और सामना करने का जो साहस है वो जुटा पाया होगा। तो उसको भेज दो और चर्चा आवश्यक नहीं है। हमारे ही चैनल पर होगी। किसी न्यूट्रल चैनल को ढूंढेंगे बीच का चैनल उस पर कर लेंगे। नंबर हम दे रहे हैं बार-बार। ठीक है? तो तर्क व्यर्थ के तर्क और कुतर्क से बचो। समय के व्यर्थ अपव्यय से बचो और सामना करो। प्रत्यक्ष चर्चा में आइए। अन्यथा जो मुंह को छुपा के जो कुकर्मी लोग जो घूमते हैं चोरों की तरह वैसे घूम सकते हो। कोई आपत्ति नहीं है। अपने मुंगेरी लाल के हसीन सपनों में स्वयं को बहुत बड़ा तीस मार खान योद्धा समझ सकते हो। कोई आपत्ति नहीं है। सामना होगा प्रत्यक्ष तो दृश्य बदल जाएगा। घगी बंध जाएगी गघी आवाज
00:44:42:24 नहीं निकलेगी मुंह से आवाज अब्बा डब्बा चब्बा हो जाएगा अब्बा डब्बा चब्बा और यह जो विश्वास है वो ऐसे नहीं आता है वो आता है गुरु गोविंदो ग्रंथ की कृपा से भगवान शिव की कृपा से भगवान राम की कृपा से भगवान कृष्ण की कृपा से वो वाला कृष्ण नहीं अल्लाह के समान कृष्ण नहीं सनातन कृष्ण कृष्ण महाभारत के कृष्ण कोई समानता नहीं है अल्लाह से उसकी वो कृष्ण उसकी कृपा से आता है ऐसा बल और उसी विश्वास के साथ में बता रहा हूं सूत्रात्मक शैली में समझ लेना कि इस संसार में यदि कोई ऐसा व्यक्ति है जो यह मानता है कि वह पशुओं से भिन्न है मनुष्य है तो उसको यह मानना
✅ This part is already used · 00:45:32:07 – 00:45:39:13 (0:07)
→ Used in: A · Live Discussion with Arya Samaj Follower आर्यसमाज का ईश्वर #aryasamaj #vedpuran #snat... at 18:49 ↗
00:45:32:07 होगा कि इस संसार में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता रूपी ईश्वर है जिसे प्राप्त करने के लिए उसने उन नियमों का आलंबन लिया
⬜ Not used yet · 00:45:39:13 – 00:48:45:00 (3:06)
00:45:39:13 दिया हुआ है जिसे धर्म कहते हैं। धर्म। दूसरा क्या है कि इस संसार में यदि कोई मनुष्य ऐसा है, व्यक्ति ऐसा है जो यह मानता है कि ईश्वर जो है अबाध्य है, अनंत है, अनंत सामर्थ्यवान है, सनातन है, शाश्वत है, सर्वशक्तिमान है। तो इसका अर्थ है कि वह वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को वैदिक वाङ्मय सनातन शास्त्रों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को और उसे प्राप्त करने कराने के निमित्त प्रतिपादित होने वाले धर्म को मानता है। अनुगमन करता है। और तीसरा सूत्र है कि इस संसार में यदि कोई व्यक्ति ऐसा है जो यह मानता है कि वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है, अनंत है, अबाध्य है, अनंत सामर्थ्यवान है। तो इसका अर्थ है कि वह वेदों के उस अर्थ को मानता है जिन्हें भगवान आदि शंकराचार्य जी ने स्वीकार किया है। तो इसलिए व्यर्थ के कुतर्कों से बचें और यदि आपको लगता है कि सत्य के पक्षधर हैं तो या तो आप प्रत्यक्ष वार्ता के लिए उपस्थित हो या आपके सिद्धांतों से यदि कोई ऐसा बन पाया हो जो आपको लगता हो या उसको लगता हो कि मैं प्रत्यक्ष चर्चा में जा सकता हूं तो उसका स्वागत है।
00:46:54:26 जय श्री राम। शिव और विष्णु में भेद करना पाप है। नारद पुराण कहता है और फिर रामो विग्रह धर्म श्री राम ने जब भेद करना नहीं सिखाया तो हम क्यों करें? हर हर महादेव [संगीत] नमः शिवा हर हर महादेव नमः शिवा हर हर महादेव [संगीत] नमः शिवम हर हर महादेव नमः शिवम विकास तल प्रलय परम प्रकाशतम तमज्जनम [संगीत] स्थापना जगतम नमः शिवम नमः शिवम परम पिता जगतना विराट वृक्ष जना प्राण वायु रक्त मन अस्तेश मास तन विवेक [संगीत] तेज भय भरम नमः शिवम नम शिव वर्तमान मान भूत कल धरा समुद्र जल रुद्र क्रुद धीर [संगीत] बल शांत युद्ध वीर दल विकट महा क्रिया करम नमः शिवम नमः शिवम विचारहार [संगीत] जय पस जीव अधमरा गुवि योग भाग धनगर मरू भागवन परस्थित में समम नमः शिवम नमः शिवम यत्र तत्र सर्वदा गंगा नील नर्मदा यूरोप रोम तालबान वर्मा चीन [संगीत] श्री भटान वुसलम नमः शिवम नमः शिवम संचार जाल परमाणु काल श्रम सरल तकनीकली
00:48:11:03 परखुयान [संगीत] संग्राम नवीनतम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम [संगीत] नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवम नमः शिवाय हर हर महादेव नमः शिवम [संगीत] हर हर महादेव नमः शिवा हर हर महादेव [गाना गाने की आवाज़] नमः शिवम [संगीत] हर हर हर महादेव [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
A Reply To Neech Follower Of Iskcon #iskcon #iskconfollowers #iskcondevotees
🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮