1
00:00:02,040 --> 00:00:06,280
मैं देख रहा हूं कि जब से हमने अलंकार समायो की जो मूल

2
00:00:06,280 --> 00:00:10,520
विचारधारा है उस पर जब कुछ सशक्त प्रश्न खड़े कर दिए

3
00:00:10,520 --> 00:00:14,880
हैं तो तब से वह बौखला से गए हैं और

4
00:00:14,880 --> 00:00:19,320
इसी कारण से कुछ भी अनर गर्ल प्रलाप कर रहे हैं

5
00:00:19,320 --> 00:00:24,240
जैसे अभी एक अलंकार बोला कि कोई दूसरा अलंकारी कहीं पर

6
00:00:24,240 --> 00:00:28,280
पूज्य गुरुदेव से शास्त्रार्थ किया उसने उत्तराखंड

7
00:00:28,280 --> 00:00:32,520
में और शास्त्रार्थ में पूज्य पूरी शंकराचार्य जी को उसने हरा

8
00:00:32,520 --> 00:00:36,560
दिया ऐसी एक मिथ्या फैला रहा है तो सबसे पहले तो

9
00:00:36,560 --> 00:00:40,920
मैं कहूंगा कि यह जो शास्त्रार्थ था इसकी पूर्व में सूचना

10
00:00:40,920 --> 00:00:45,520
आपके अलावा और किसकिस को थी इस अलंकारी के अलावा और किसकिस को

11
00:00:45,520 --> 00:00:49,600
थी दूसरी बात वहां निर्णायक कौन बना था किसने किसको

12
00:00:49,600 --> 00:00:53,600
इस शास्त्रार्थ के लिए आमंत्रित किया था इन सब बातों पर भी प्रकाश डाल

13
00:00:53,600 --> 00:00:57,680
दीजिए अगर इस प्रकार के तथ्य और प्रमाण आपके पास नहीं है

14
00:00:57,680 --> 00:01:01,680
तो क्यों बेकार में स्वयं को एक

15
00:01:01,680 --> 00:01:05,920
संकट में डालने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि इस प्रकार के वक्तव्य के आधार पर एक अच्छी

16
00:01:05,920 --> 00:01:10,000
खासी संवैधानिक कार्यवाही आपके विरुद्ध की जा सकती है

17
00:01:10,000 --> 00:01:14,400
वह बात और है कि धरातल पर कार्य करते धर्म रक्षा में

18
00:01:14,400 --> 00:01:17,800
पूरा मंतव्य है हमारा तो इसलिए

19
00:01:17,800 --> 00:01:21,920
जो भिन्न प्रकार की जो गतिविधियां होती है उस पर ज्यादा हम समय नहीं दे

20
00:01:21,920 --> 00:01:26,000
पाते मगर समय मिलेगा तो यथोचित कारवाही भी कर सकते

21
00:01:26,000 --> 00:01:30,080
हैं तो इसलिए ऐसे प्रयास करने से बचे जिसमें

22
00:01:30,080 --> 00:01:34,320
कि आप स्वयं को ही गड्ढे में डाल रहे हो कुटने की तैयारी कर रहे हो ऐसे प्रयासों

23
00:01:34,320 --> 00:01:39,200
से बचना चाहिए अलंकारी को अब बात आती है कि इन्होंने आधार क्या बताया

24
00:01:39,200 --> 00:01:43,240
कि एक अलंकारी ने उत्तराखंड में कहीं पर

25
00:01:43,240 --> 00:01:47,280
गुरुदेव को जाकर के शास्त्रार्थ मराया इसने उसका आधार यह बताया कि

26
00:01:47,280 --> 00:01:51,400
उसने पूछा कि वेदों में हिंदू शब्द मुझे दिखा दो तो

27
00:01:51,400 --> 00:01:56,040
सबसे पहले तो मैं य पूछूंगा कि हे मेरे प्रिय

28
00:01:56,040 --> 00:02:00,520
अलंकारी क्या सत्यार्थ प्रकाश का नाम जिसे आप

29
00:02:00,520 --> 00:02:04,800
प्रमाण मानकर अपना जीवन का निर्वाह करते हैं ईश्वर को बाधित

30
00:02:04,800 --> 00:02:08,960
करने का प्रयास करते हैं लोगों को नास्तिक अधर्मी बनाने का प्रयास करते हैं

31
00:02:08,960 --> 00:02:13,920
जिसके आधार पर क्या यह नाम वेदों में वर्णित है

32
00:02:13,920 --> 00:02:18,080
अगर नहीं है तो फिर क्या आप उसके बाद भी इसको प्रमाण

33
00:02:18,080 --> 00:02:22,440
मानते हैं मानते हैं तो क्यों मानते हैं क्या सत्यार्थ प्रकाश

34
00:02:22,440 --> 00:02:26,680
में दी गई जितने भी विधि विधान है वो सारे वैदिक हैं वेदों में दिए गए हैं

35
00:02:26,680 --> 00:02:30,800
या वेदों के आधार पर जो अन्य धर्म ग्रंथ प्राप्त है उनमें

36
00:02:30,800 --> 00:02:33,080
दिए गए उनसे भी आपने प्रमाण

37
00:02:33,080 --> 00:02:37,360
के रूप में सत्यार्थ प्रकाश में उन चीजों को निहित किया है विधियों

38
00:02:37,360 --> 00:02:41,800
को निहित किया है तो यदि उनका एज इट इज

39
00:02:41,800 --> 00:02:45,800
संदर्भ वेदों में नहीं है तो आपने उनको क्यों मान लिया है जाहिर सी

40
00:02:45,800 --> 00:02:50,120
बात है इस पर आपका उत्तर यही होगा कि सत्यार्थ प्रकाश में जो बातें आप

41
00:02:50,120 --> 00:02:54,640
लिखी हुई है आपके अनुसार वह सारी बातें

42
00:02:54,640 --> 00:02:59,000
वैदिक शास्त्र सम्मत जो ग्रंथावली है वैदिक वांगम

43
00:02:59,000 --> 00:03:03,000
है उसके के आधार पर है इसलिए वो हमारे लिए प्रमाण है

44
00:03:03,000 --> 00:03:08,920
और हमारे अकॉर्डिंग हमारे अनुसार जो तथाकथित

45
00:03:08,920 --> 00:03:13,040
हमारे ऋषि है महा ऋषि है उनके द्वारा वो विरचित

46
00:03:13,040 --> 00:03:17,120
है इसलिए हमारे लिए वो प्रमाण है उन्होंने कहा है कि वेदों पर

47
00:03:17,120 --> 00:03:22,240
आधारित है इसलिए हमारे लिए वो प्रमाण है तो इसी प्रकार से

48
00:03:22,240 --> 00:03:26,680
जो हिंदू शब्द है वो उच्चारण

49
00:03:26,680 --> 00:03:31,120
भेद से जो वेदों में सिंधु शब्द आया है उसी का ही उच्चारण

50
00:03:31,120 --> 00:03:35,360
भेद से उपयोग किया गया किनके द्वारा कोई सामान्य लोगों

51
00:03:35,360 --> 00:03:39,640
के द्वारा नहीं हमारे उन्हीं ऋषि महा ऋषियों के द्वारा जिन

52
00:03:39,640 --> 00:03:43,720
ऋषि महा ऋषियों से हमें हमारा वैदिक वांगम परंपरागत

53
00:03:43,720 --> 00:03:47,720
रूप से प्राप्त होता है आपकी तरह नहीं कि जब भी आपसे पूछा जाता

54
00:03:47,720 --> 00:03:48,560
है

55
00:03:48,560 --> 00:03:52,680
कि भाई आपको यह वैदिक वांगम कैसे प्राप्त हुआ तो आप कहते

56
00:03:52,680 --> 00:03:57,000
हो हमारी परंपरा ब्रह्मा से चलती है ब्रह्मा से चलती जमिनी तक आती जमिनी

57
00:03:57,000 --> 00:04:01,040
आपको बॉल की तरह लो कैच लो ऊपर से लो बीच के सारे लोग

58
00:04:01,040 --> 00:04:05,240
गायब सीधे ब महर्षि दयानंद सरस्वती जी के पास आपके

59
00:04:05,240 --> 00:04:09,400
हाथ में आ जाती है बॉल लो भाई ऊपर से फेंक रहा हूं जमनी सी

60
00:04:09,400 --> 00:04:13,480
ने ऊपर से फेंकी वैदिक मांग में ये लो कैच और बीच

61
00:04:13,480 --> 00:04:17,880
में कोई नहीं सीधे आ गई लपक के अरे भैया मांडो

62
00:04:17,880 --> 00:04:22,040
को उपनिषद में जो महा ऋषि गण है वो बता रहे हैं वैदिक वांग में उनके

63
00:04:22,040 --> 00:04:26,600
पास कैसे आया वो अपने से हाथ हाथ किसने दिया

64
00:04:26,600 --> 00:04:30,600
किसने किससे किससे किसको स्थानांतरित हुआ वो बता रहे हैं तो आप क्यों नहीं

65
00:04:30,600 --> 00:04:34,800
बता रहे महा ऋषि दयानंद जी के जस्ट पहले वाले गुरु कौन है जिनसे

66
00:04:34,800 --> 00:04:38,880
उनको वैदिक मांग में प्राप्त हुआ और उनके जस्त पहले वाले गुरु

67
00:04:38,880 --> 00:04:43,000
कौन है जिनसे उनको वैदिक मांग में प्राप्त हुआ और उनके गुरु कौन है तब

68
00:04:43,000 --> 00:04:47,240
ऐसे आप कनेक्ट करिए जेमिनी से अपने को ब्रह्मा जी से अपने को

69
00:04:47,240 --> 00:04:51,400
वरना य कौन सा तरीका लो भाई कैच ब्रह्मा जी ने ऊपर से उड़ा

70
00:04:51,400 --> 00:04:55,480
के दिया बीच में कोई नहीं सीधे लपक लिया दयानंद जी

71
00:04:55,480 --> 00:04:59,680
ने कुछ ऐसा ही है क्या अब बात कर लेते हैं कि भाई

72
00:04:59,680 --> 00:05:03,640
ू शब्द की जगह हिंदू शब्द का उपयोग क्यों किया जा रहा है किस आधार पर किया जा रहा

73
00:05:03,640 --> 00:05:07,920
है महा ऋषियों के द्वारा वो महा ऋषि जिनके जिनके द्वारा हमें

74
00:05:07,920 --> 00:05:12,240
जो हमारे सनातन शास्त्र सम्मत पूरा वैदिक वांग में प्राप्त है उनके द्वारा

75
00:05:12,240 --> 00:05:16,480
ये सिंधु शब्द की जगह हिंदू शब्द का उपयोग क्यों और किस आधार पर हो रहा है

76
00:05:16,480 --> 00:05:20,520
तो सबसे पहले तो मैं आपको बता दूं ये पाणिनीय सूत्र है मेरे

77
00:05:20,520 --> 00:05:25,560
पास इसमें सातवा अध्याय

78
00:05:25,560 --> 00:05:30,440
चतुर्थ पाद और उसका 52 वा सूत्र है 5वा

79
00:05:30,440 --> 00:05:34,560
इसमें लिखा हुआ है कि सकार जो होता

80
00:05:34,560 --> 00:05:38,680
है वह ह का हो जाता है मतलब कि

81
00:05:38,680 --> 00:05:42,960
कुल मिलाकर के सा जो है उसका उपयोग हा

82
00:05:42,960 --> 00:05:47,000
में होता है यानी कि सा और हा एक ही है

83
00:05:47,000 --> 00:05:51,080
सा की जगह पर ह का उपयोग वैदिक है यह पाणिनीय सूत्र कह रहे हैं

84
00:05:51,080 --> 00:05:55,400
इसको तो मानते हैं ना अष्टाध्याई सूत्र अच्छा

85
00:05:55,400 --> 00:05:59,720
यह उपयोग वेदों में हुआ भी है जैसे कि सरस्वती को एक जगह सरस्वती

86
00:05:59,720 --> 00:06:04,160
कहा गया एक जगह पर श्री को हिरी कहा गया और इसी आधार पर

87
00:06:04,160 --> 00:06:08,240
आने वाले टाइम में केसरी को तुलसीदास जी

88
00:06:08,240 --> 00:06:12,440
ने अपने चौपाइयों में केहरी भी कहा अब पहली बात तो य आती है कि आपका

89
00:06:12,440 --> 00:06:17,120
कोई एक अलंकारी है जो अपने वीडियो में यह कहता हुआ दिखाई देता है

90
00:06:17,120 --> 00:06:19,280
कि अरे भाई

91
00:06:19,280 --> 00:06:24,240
अगर सा की जगह हा का उपयोग करना भी है

92
00:06:24,240 --> 00:06:28,600
तो इस्लाम को लाम क्यों नहीं कह रहे हो है ना

93
00:06:28,600 --> 00:06:32,680
और डनी को डनी क्यों नहीं कह रहे हो यह सब इस प्रकार के कुतर्क

94
00:06:32,680 --> 00:06:36,680
भी करता है तो इसका क्या उत्तर है पहला उत्तर तो यह है तो इसका अर्थ

95
00:06:36,680 --> 00:06:40,680
है कि आप वे वेदों का भी विरोध करते हैं वेदों की बातों को

96
00:06:40,680 --> 00:06:44,880
नहीं मानते क्योंकि वेद यह कर रहा है कि सरस्वती को हरस्त कह रहा है

97
00:06:44,880 --> 00:06:49,080
वेद यह कर रहे हैं कि वह श्री को री कह रहे हैं ठीक

98
00:06:49,080 --> 00:06:53,160
है दूसरी बात यह है कि जब सा की जगह

99
00:06:53,160 --> 00:06:57,400
इस प्रकार हा का उपयोग करते हुए सिंधु के सिधु सिंधु

100
00:06:57,400 --> 00:07:01,400
को उच्चारण भेद से हिंदू कहा जाता है तो वह भी किसके

101
00:07:01,400 --> 00:07:05,960
द्वारा परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य ऋषि महा ऋषियों द्वारा

102
00:07:05,960 --> 00:07:10,200
ठीक है यह भी ध्यान रखिएगा हां अब क्या है तो

103
00:07:10,200 --> 00:07:14,360
कहा जाता है तो किस आधार पर कहा जाता है क्योंकि हिंदू शब्द के

104
00:07:14,360 --> 00:07:18,400
वैदिक अनुशीलन कराने वाले अर्थ प्राप्त होते हैं जैसे कि

105
00:07:18,400 --> 00:07:22,520
हिकार जो है वह गाय का धोत है तो हिं काती

106
00:07:22,520 --> 00:07:26,680
हुई गाय को धोने वाला हिंदू जो प्रणवा अक्षर है उसकी

107
00:07:26,680 --> 00:07:31,320
रचना भी ऐसे हुई है सत्य शब्द की रचना भी ऐसे ही हुई है

108
00:07:31,320 --> 00:07:35,000
तो यह सब गलत है क्या आपके हिसाब से आप इसके विरोधी हैं

109
00:07:35,000 --> 00:07:39,640
तो अगर विरोधी भी है तो कोई बात नहीं पहले आप गैर सनातनी स्वयं को घोषित करिए

110
00:07:39,640 --> 00:07:43,800
पहले आप स्वयं को अवैध घोषित करिए बाहर जाइए सनातन की सीमा से ऐसा

111
00:07:43,800 --> 00:07:47,800
नहीं उसके बाद छोड़ देंगे उसके बाद भी लपेट पर पहले कहिए तो

112
00:07:47,800 --> 00:07:52,080
कि हम नहीं मानते इतने संदर्भ में उपनिषदों को नहीं मानते इतने संदर्भ में

113
00:07:52,080 --> 00:07:56,360
पाणिनीय सूत्र को नहीं मानते इतने संदर्भ में वेदों को नहीं मानते इतने संदर्भ

114
00:07:56,360 --> 00:08:00,360
में इतने संदर्भ में हम अवैध हैं यह कहिए तो

115
00:08:00,360 --> 00:08:04,600
बाहर जाइए उसके बाद भी छोड़ेंगे नहीं लपेट तब भी पर पहले

116
00:08:04,600 --> 00:08:08,600
आपका यह चेहरा तो सामने आए ठीक है अब

117
00:08:08,600 --> 00:08:12,800
क्या हुआ कि जब हम सिंधु के आधार पर पानी

118
00:08:12,800 --> 00:08:16,840
सूत्र के आधार पर और जो वेद है हमारे उनके आधार पर

119
00:08:16,840 --> 00:08:20,880
जब सा की जगह ह का उपयोग करते हैं तो हमें सिंधु

120
00:08:20,880 --> 00:08:24,960
के स्थान पर उच्चारण वेद से हिंदू शब्द प्राप्त होता है परंपरा प्राप्त आचार्य ऋषि महा

121
00:08:24,960 --> 00:08:29,040
ऋषियों द्वारा और उस हिंदू शब्द के कई अर्थ होते हैं

122
00:08:29,040 --> 00:08:33,280
क्या हिकार करती हुई गाय को धोने वाला

123
00:08:33,280 --> 00:08:37,400
हिमालय से लेकर हिंदु सरोवर यानी कन्याकुमारी के बीच का जो स्थान है वह

124
00:08:37,400 --> 00:08:42,480
है हिंदू स्थान और वहां रहने वाला व्यक्ति हिंदू

125
00:08:42,480 --> 00:08:46,480
सिंधु सिंधु का अर्थ गंगा भी है तो गंगा यानी सिंधु

126
00:08:46,480 --> 00:08:50,400
को जटाओ में धारण करने वाले भगवान शिव चंद्रमा

127
00:08:50,400 --> 00:08:54,480
चंद्रमा को सिन कहा गया है तो सिन

128
00:08:54,480 --> 00:08:58,840
को धारण करने वाले सिंधु और उनके उनका जो उपासक देश है

129
00:08:58,840 --> 00:09:02,960
व ू देश और वहां रहने वाले हिंदू अगर

130
00:09:02,960 --> 00:09:07,120
इतिहास को देखें तो इसका उपयोग हमारे कई लोगों ने कहा और अपने अपने

131
00:09:07,120 --> 00:09:11,200
तरीके से हिंदू की व्याख्या की जैसे कि हीनता से दूर रहने

132
00:09:11,200 --> 00:09:15,520
वाला हिंदू हिंसा से दूर रहने वाला जो विकृत हिंसा है उससे दूर रहने

133
00:09:15,520 --> 00:09:19,760
वाला हिंदू इसी प्रकार से अनेका अनेक प्रकार की जो व्याख्या है

134
00:09:19,760 --> 00:09:23,800
वह हमारे इतिहास में भी अलग-अलग महापुरुषों ने की है अच्छा

135
00:09:23,800 --> 00:09:28,040
हुआ जो आप जैसे लोग महाराणा

136
00:09:28,040 --> 00:09:32,320
प्रताप और जो छत्रपति शिवाजी है या हरियर बुक्का है

137
00:09:32,320 --> 00:09:36,440
इन जैसे लोगों के समय में थे नहीं बहुत आपका भाग्य अच्छा

138
00:09:36,440 --> 00:09:40,560
है नहीं वहां जाकर जब ये लोग हिंदवी राष्ट्र के लिए लड़ रहे थे तो

139
00:09:40,560 --> 00:09:44,680
आप लोग वहां जाकर जब यह कहते ना कि अरे हिंदवी राष्ट्र नहीं अपना झंडा बदल दो

140
00:09:44,680 --> 00:09:49,160
हिंदवी राष्ट्र मत कहो हिंदी हिंदू शब्द तो विदेशियों ने दिया है

141
00:09:49,160 --> 00:09:53,880
विदेशियों की देन हिंदू शब्द का अर्थ तो होता है चोर लुटेरा काफिर डाकू

142
00:09:53,880 --> 00:09:58,360
तो यह सब जब आप बोलते ना इन लोगों से छत्रपति शिवाजी से महाराणा प्रताप आदि से

143
00:09:58,360 --> 00:10:02,960
यह धर के कूट देते आपको कूटते अच्छे से है ना

144
00:10:02,960 --> 00:10:03,960
वो

145
00:10:03,960 --> 00:10:08,600
द्वंद कहां तक पाला जाए युद्ध कहां तक टाला जाए तू भी राणा का वंशज

146
00:10:08,600 --> 00:10:09,960
फेंक जहां तक भाला जाए तो

147
00:10:09,960 --> 00:10:14,000
भाला कहां कहा जाता फिर अच्छा अब इसके बाद की बात क्या

148
00:10:14,000 --> 00:10:18,000
है कि जो एक यह तर्क लाया जाता है कि भैया

149
00:10:18,000 --> 00:10:22,080
उनके जो जो जो द्वेष भावना रखते हैं

150
00:10:22,080 --> 00:10:26,120
हिंदुस्तान से हिंदुओं से द्वेष भावना रखते हैं उन्होंने अपने धर्म ग्रंथों

151
00:10:26,120 --> 00:10:30,320
में हिंदू शब्द का अर्थ यह दिया हुआ है भाई राम शब्द

152
00:10:30,320 --> 00:10:34,360
का अर्थ गुलाम लिखा हुआ है अब बताइए क्या करें राम नाम

153
00:10:34,360 --> 00:10:38,360
जपना बंद कर दें आर्य का अर्थ जो है वह घोड़ा लिखा हुआ है

154
00:10:38,360 --> 00:10:42,360
तो उस हिसाब से क्योंकि भाई वह लोग भी प्रमाणिक है आपके लिए उस

155
00:10:42,360 --> 00:10:46,680
हिसाब से आपका जो समाज का नाम क्या घोड़ा समाज हो जाएगा

156
00:10:46,680 --> 00:10:50,760
या फिर आप आर शद शब्द का उपयोग भी बंद कर दोगे हमको भी कह दोगे हम भी

157
00:10:50,760 --> 00:10:55,120
आर शब्द का उपयोग बंद कर दे अपने लिए इतनी

158
00:10:55,120 --> 00:10:59,480
सी बात समझने की है कि जो हमारे से हमारी संस्कृति

159
00:10:59,480 --> 00:11:03,560
से हमारे धर्म से द्वेष भावना रखते हैं उसने अपने

160
00:11:03,560 --> 00:11:07,600
यहां के शास्त्रों में अपने यहां की किताबों में लोगों के मन में पहले

161
00:11:07,600 --> 00:11:11,760
से हमारे प्रति बैर भावना भरने के लिए वहां पर हमारे यहां के जो बहुमूल्य

162
00:11:11,760 --> 00:11:15,840
शब्द है जो जिनके प्रति हमारे अंदर आदर है उन शब्दों का गलत अर्थ

163
00:11:15,840 --> 00:11:19,880
वहां पर लिखा है अब कोई अपनी किताबों में जाकर के कुछ

164
00:11:19,880 --> 00:11:23,920
भी लिख दे तो हम वहां से प्रभावित होकर के अपने जो अपना जो जीवन यापन है अपना

165
00:11:23,920 --> 00:11:25,000
जो निर्वाह अपने जो

166
00:11:25,000 --> 00:11:29,560
सनातन सिद्धांत है उनको बदल दे क्या

167
00:11:29,560 --> 00:11:33,560
या फिर हम उन्होंने जो लिखा वह मानने लगे कि

168
00:11:33,560 --> 00:11:37,640
अलंकार समाज नहीं घोड़ा समाज कैसी

169
00:11:37,640 --> 00:11:42,240
बातें करते हैं आप लोग और कुल मिलाकर

170
00:11:42,240 --> 00:11:46,720
के लास्ट में प्रश्नों से भागि नहीं

171
00:11:46,720 --> 00:11:50,720
सीधे बताइए मूल प्रश्न का जवाब दीजिए मूल प्रश्न बख

172
00:11:50,720 --> 00:11:54,960
लाइए नहीं क्या आर समाज के द्वारा प्रतिपादित

173
00:11:54,960 --> 00:11:59,000
होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं यदि है तो

174
00:11:59,000 --> 00:12:03,040
क्या व अवतार ले सकता है यदि है तो

175
00:12:03,040 --> 00:12:07,920
क्या वह मनुष्य रूप में मनुष्यों के बीच में आ सकता है और अगर नहीं आ सकता

176
00:12:07,920 --> 00:12:12,160
नहीं ले सकता अवतार तो उसे अनंत सामर्थ्य वान कहने वाला

177
00:12:12,160 --> 00:12:16,480
बंद कीजिए अनंत नहीं है सामर्थ उसका कहिए ना अंत

178
00:12:16,480 --> 00:12:21,440
है वह यह नहीं कर सकता यह कहिए फिर बात आगे की जाएगी

179
00:12:21,440 --> 00:12:25,480
पहले कहिए ना ठीक है हम यह भी मान लेंगे हां भाई ईश्वर ऐसा हो सकता है

180
00:12:25,480 --> 00:12:29,520
जिसकी जिसमें सामर्थ्य का अंत हो ये मान लेंगे अगर यह

181
00:12:29,520 --> 00:12:34,320
कहिए ना फिर उसको अनंत सामर्थ वान क्यों कह रहे हैं अपने शास्त्रों में

182
00:12:34,320 --> 00:12:38,640
कहिए कि उसके सामर्थ्य का अंत है वह यह नहीं कर सकता पहले इसको स्वीकार

183
00:12:38,640 --> 00:12:40,240
करिए उसके बाद

184
00:12:40,240 --> 00:12:44,320
यह सब सोचा जाएगा कि वह आएगा तो क्यों आएगा या वह ऐसा क्यों करेगा यह तो

185
00:12:44,320 --> 00:12:48,400
आगे की बात हो गई ना भाई पहले उसको अंत लगाइए कि हां वह यह

186
00:12:48,400 --> 00:12:53,280
कार्य नहीं कर सकता यह उसकी सीमा है सीमित कीजिए ईश्वर को खुल कर

187
00:12:53,280 --> 00:12:57,600
के ये तो वही वाली बात हो गई ना जो ये

188
00:12:57,600 --> 00:13:01,640
जो अलंकार समाज से पूछा जाता है कि

189
00:13:01,640 --> 00:13:05,800
भाई ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं तो अलंकार समाज कह देता शक्तिमान का

190
00:13:05,800 --> 00:13:10,280
अर्थ यह नहीं होता सर्वशक्तिमान का अर्थ यह नहीं होता है कि वो कुछ भी कर सकता है

191
00:13:10,280 --> 00:13:14,400
तो यह वह वाली बात हो गई कि जब मंत्री जी से पूछा

192
00:13:14,400 --> 00:13:18,680
गया बाढ़ आई हुई है जिले में और मंत्री जी से पूछा गया कि भाई

193
00:13:18,680 --> 00:13:22,720
बाढ़ का पानी जो है व खतरे के निशान तक आ गया है तो मंत्री जी ने

194
00:13:22,720 --> 00:13:27,680
क्या समाधान दिया खतरे का निशान दो इंच और ऊपर कर दो

195
00:13:27,680 --> 00:13:31,800
है ना यानी कि जब खतरा आ रहा है खतरे के निशान

196
00:13:31,800 --> 00:13:36,160
तक जब पानी आ रहा है तो खतरे के निशान की परिभाषा ही बदल दो

197
00:13:36,160 --> 00:13:40,480
तो जब आपके आड़े सर्वशक्तिमान शब्द आने लगा तो सर्वशक्तिमान की

198
00:13:40,480 --> 00:13:44,560
परिभाषा ही बदल दो मगर ऐसे होगा थोड़ी ना आपसे पूछा

199
00:13:44,560 --> 00:13:48,840
जाएगा कि यदि अवतार जो नहीं ले सकता उसको भी सर्वशक्तिमान

200
00:13:48,840 --> 00:13:53,240
कहेंगे तो जो अवतार ले सकता होगा उसको क्या कहेंगे कोई तो शब्द बनाओ

201
00:13:53,240 --> 00:13:55,280
वो शब्द बनाओ हम वही लगा लेंगे आप

202
00:13:55,280 --> 00:13:59,360
कह दो वो सर्व सर्व शक्तिमान है ठीक है भैया हमारा ईश्वर आप सर्व ति

203
00:13:59,360 --> 00:14:03,400
मान को रख लो हम सर्व सर्व शक्तिमान को रख लेंगे है ना

204
00:14:03,400 --> 00:14:07,760
अगर जिसकी सामर्थ्य का अंत है उसको भी अनंत

205
00:14:07,760 --> 00:14:13,000
सामर्थ्य वान कहेंगे तो जिसकी सामर्थ्य का अंत नहीं होगा उसको क्या

206
00:14:13,000 --> 00:14:17,280
कहेंगे तो इन सब बातों मूल प्रश्नों पर आओ मूल प्रश्न

207
00:14:17,280 --> 00:14:21,400
वेदा शास्त्र कैसे मिले ब्रह्मा जी ने कैच कराए हैं क्या ऊपर

208
00:14:21,400 --> 00:14:25,960
से लो कैच कैच बीच के लोग कहां है

209
00:14:25,960 --> 00:14:30,610
कैसे मिले जय श्री j

210
00:14:30,610 --> 00:14:34,610
[संगीत]
