1
00:00:01,960 --> 00:00:06,000
[घंटी की आवाज़] यहां पर स्त्रियां कैसे बनती है पता है? यह लोग क्या करते हैं?

2
00:00:06,000 --> 00:00:10,000
यह कहते हैं कि देखो वहां पर जो विवाह हुआ था वहां पर क्या

3
00:00:10,000 --> 00:00:14,000
सात फेरे लिए गए थे? ये जो दैय जो योग होते हैं

4
00:00:14,000 --> 00:00:18,080
दिव्य शक्तियों के योग इनको ये मनुष्यों के विवाह के दृष्टि से

5
00:00:18,080 --> 00:00:22,160
देखता है। तो ये बोलता है कि वहां पर किसी का सात फेरा हुआ था क्या? तो

6
00:00:22,160 --> 00:00:26,560
ये सात आठ फेरे सब मनगढ़ंत है। ठीक है? तो इसका मतलब क्या है

7
00:00:26,560 --> 00:00:30,640
कि कि इनके यहां पर जो वहां की जो चीजें हैं आध्यात्मिक जगत की चीजें

8
00:00:30,640 --> 00:00:35,520
हैं वो एज इट इज अप्लाई हो जाती हैं। तो अब क्या है कि इनके यहां पर

9
00:00:35,520 --> 00:00:40,720
अ इनके अनुसार रामपाल के अनुसार जो जिसका

10
00:00:40,720 --> 00:00:44,800
जो वो थी ना जिसने एक हाथ उठाया था वो जीवात्माओं में से जिसको ये लोग

11
00:00:44,800 --> 00:00:48,800
भगवती से जोड़ते हैं। वो कैरेक्टर है जो वो कैरेक्टर उसके

12
00:00:48,800 --> 00:00:52,960
जो है स्त्री जो अंग होता है जिसको भग कहते हैं

13
00:00:52,960 --> 00:00:57,440
वो गुप्तांग स्त्री का वो था ही नहीं तो वो काल ने अपने नाखूनों

14
00:00:57,440 --> 00:01:01,680
से चिपकाया एडजस्ट किया ठीक है तो

15
00:01:01,680 --> 00:01:06,240
इसका मतलब इनके यहां की स्त्रियां जो होती हैं इनके अनुसार रामपाल

16
00:01:06,240 --> 00:01:10,240
के अनुसार और ये राघवदास के अनुसार इसके यहां की जो माताएं

17
00:01:10,240 --> 00:01:14,880
और बहनें होती हैं वो आती तो बिना उसके हैं प्रजनानांग के

18
00:01:14,880 --> 00:01:17,120
बिना वो आती आती है जन्म लेती है और उसके

19
00:01:17,120 --> 00:01:21,360
बाद यह लोग नाखूनों से जिससे वह बाई जाती हैं वह रामपाल

20
00:01:21,360 --> 00:01:25,360
के विवाह सिस्टम के अनुसार जिससे वह बाई जाती हैं फिर वो लोग उसके वो

21
00:01:25,360 --> 00:01:29,440
चिपकाते हैं फेविक्विक से या फेविकॉल से वो चिपकाते हैं नाखूनों

22
00:01:29,440 --> 00:01:33,440
से उसको एडजस्ट करते हैं। उसके बाद फिर वो आगे जो है स्त्री शरीर पूरा हो

23
00:01:33,440 --> 00:01:37,840
के आगे चलता है मामला। ठीक है? ये घिनौनी

24
00:01:37,840 --> 00:01:41,840
बातें रामपाल ने अपनी किताबों में लिखी हुई है। स्त्री कैसे आती?

25
00:01:41,840 --> 00:01:46,080
पहले स्त्री है। पहले वो पहले शरीर से पूरी तरीके से स्त्री

26
00:01:46,080 --> 00:01:50,160
नहीं है। पहले वह स्त्री घोषित हो गई। लड़की का रूप रंग अच्छा था। ये सब लिखा

27
00:01:50,160 --> 00:01:54,160
है। उसके बाद उसके जो है जो लड़की का जो स्त्री होने का

28
00:01:54,160 --> 00:01:58,320
जो सबसे जो स्वरूप भूत एक अंग मान लीजिए आप

29
00:01:58,320 --> 00:02:02,320
उसको। तो वो जो है वो उसके बाद राक्षस उसके लगाता है। तब वो जो है

30
00:02:02,320 --> 00:02:06,400
स्त्री बनती है। तो इनके यहां की क्योंकि ये लोग आध्यात्मिक जगत की

31
00:02:06,400 --> 00:02:10,400
चीजों को एज इट इज लागू करते हैं अपने यहां। जैसे इन्होंने ब्याह को लागू किया है

32
00:02:10,400 --> 00:02:14,640
तो इनके यहां क्या है कि स्त्रियां जो हैं वह तब

33
00:02:14,640 --> 00:02:18,640
बनती हैं जब ब्याह हो जाता है और ब्याह होने के बाद जो है जिसके साथ ब्याई गई

34
00:02:18,640 --> 00:02:22,800
हैं वो जो है नाखूनों से फेविक्विक के

35
00:02:22,800 --> 00:02:27,040
फेविक्विक या फेविकॉल पता नहीं जो ज्यादा मजबूती से टिका रहे उसके

36
00:02:27,040 --> 00:02:31,760
द्वारा वो चिपकाया जाता है जो प्रजनन अंग होता है।

37
00:02:31,760 --> 00:02:32,400
फिर आगे

38
00:02:32,400 --> 00:02:36,480
ये बोल रहा है कि भैया जो है देवी और

39
00:02:36,480 --> 00:02:40,480
परम ब्रह्म अभेद है। इससे पता लगता है कि वो ब्रह्म जो है

40
00:02:40,480 --> 00:02:44,560
वो उनका पति है। है ना? तो

41
00:02:44,560 --> 00:02:48,560
कई जगह आत्मा को भी परमेश्वर के साथ अभेद कहा गया

42
00:02:48,560 --> 00:02:52,880
है। तेरी किताबों में तेरा जूता ही तेरे सर मारूंगा। तेरी किताबों

43
00:02:52,880 --> 00:02:56,880
में आत्मा को सुन क्या लिखा है दूसरे उसमें दूसरे अध्याय

44
00:02:56,880 --> 00:03:00,880
में जहां पर ये दो 16 वाली बात

45
00:03:00,880 --> 00:03:04,880
आती है ना नम चिनती दो 23 जहां आत्मा को वो

46
00:03:04,880 --> 00:03:09,120
कहा गया है शाश्वत नित्य कहा गया है तो वहां पर तेरे बाबा ने लिखा है

47
00:03:09,120 --> 00:03:14,160
कि आत्मा का अभेद जो आत्मा

48
00:03:14,160 --> 00:03:18,160
ईश्वर के सानिध्य में होने के कारण जो आत्मा है वह अविनाशी

49
00:03:18,160 --> 00:03:22,400
है ईश्वर के सानिध्य में होने के कारण ठीक है वह अविनाशी

50
00:03:22,400 --> 00:03:27,520
है। तो यहां पर भी अभेद चीज हो गई। अब इसका अर्थ हो गया कि आत्मा

51
00:03:27,520 --> 00:03:31,520
रामपाल के अनुसार रामपाल का जो ईश्वर है जिस जो रामपाल

52
00:03:31,520 --> 00:03:35,520
के रूप में प्रकट हुआ है उसमें और रामपाल के अनुसार जो आत्माएं

53
00:03:35,520 --> 00:03:39,680
हैं जो इसके तत्वदर्शी चिलवा भगत हैं वो अभेद है तो इसलिए वो पतिपत्नी

54
00:03:39,680 --> 00:03:43,760
हो गए। यानी कि राघव और इस हिसाब से

55
00:03:43,760 --> 00:03:47,520
देखा जाए तो राघव को और जेलकट्टू को पतिपत्नी

56
00:03:47,520 --> 00:03:52,000
मानना पड़ेगा। तो यह राघव जो है राघव

57
00:03:52,000 --> 00:03:56,240
जैसी जो चिलए भगतों की जो तत्व ज्ञानियों की जो आत्मा है 15 करोड़

58
00:03:56,240 --> 00:04:00,640
वह और रामपाल यह सब पति पत्नी क्योंकि वहां अभेद आ गया मामला अभेद

59
00:04:00,640 --> 00:04:04,640
शब्द आ गया तो इसलिए पतिपत्नी हो गए दूसरी बात कि ब्रह्म का

60
00:04:04,640 --> 00:04:08,960
अर्थ जो है हमारे यहां पर तो भाई शिव है शंकर है ब्रह्म

61
00:04:08,960 --> 00:04:13,120
का अर्थ 50 जगह दिखा चुके हैं ब्रह्म का अर्थ शिव भगवान स्वयं

62
00:04:13,120 --> 00:04:17,120
कह रहे हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं ठीक तो

63
00:04:17,120 --> 00:04:21,280
इसको हमारे लिए यह है और तुम्हारे लिए जो तुम मानते हो उसके अनुसार तुम वो

64
00:04:21,280 --> 00:04:25,840
मान लो कि रामपाल और जितने चिलवा भगत आत्माएं हैं वह सब पतिप

65
00:04:25,840 --> 00:04:29,840
हैं और पतिप्नी है और फिर अच्छा एक चीज और

66
00:04:29,840 --> 00:04:33,920
है यहां से इसने केवल एक अभेद शब्द वो जो

67
00:04:33,920 --> 00:04:38,720
अभिषेक है वो अपने वीडियो में कह रहा है कि भाई

68
00:04:38,720 --> 00:04:42,720
जो प्रकृति है और पुरुष को अभेद कहा गया

69
00:04:42,720 --> 00:04:46,800
है अभेद इससे उनका विवाह सिद्ध हो गया और

70
00:04:46,800 --> 00:04:50,960
विवाह से बलात्कार भी सिद्ध हो गया कितने नीच नीचता भरी बातें

71
00:04:50,960 --> 00:04:55,840
हैं भाई। अरे जोक ऑफ द डे तो है ही तुम्हारी मूर्खता।

72
00:04:55,840 --> 00:05:00,080
मगर नीचता कितनी करोगे कि तुमने केवल

73
00:05:00,080 --> 00:05:02,560
एक अभेद शब्द से विवाह निकाल लिया और

74
00:05:02,560 --> 00:05:06,720
विवाह में गौर रूप से तुमने बलात्कार भी मान लिया। यानी कि

75
00:05:06,720 --> 00:05:10,880
इनके यहां पर जो विवाह है उसमें बलात्कार होता है। इसका अर्थ तो

76
00:05:10,880 --> 00:05:15,120
यह मानना पड़ेगा ना। अरे बेवकूफ तेरी बातें इतनी ज्यादा

77
00:05:15,120 --> 00:05:19,120
तेरे ही ऊपर हावी हो जाएंगी ना कि सोचेगा कि भाई कहां चुल्लू

78
00:05:19,120 --> 00:05:23,120
और पानी में जाकर के डूब मरूं जो मैंने बोला है। जो

79
00:05:23,120 --> 00:05:27,760
तू बोल रहा है। विवाह का मतलब बलात्कार है क्या?

80
00:05:27,760 --> 00:05:31,760
बलात्कार सिद्ध करना है ना तुझे शास्त्रों से? तो तू

81
00:05:31,760 --> 00:05:36,080
विवाह क्यों दिखा रहा है? हालांकि वो विवाह भी नहीं है। और अगर विवाह मानोगे

82
00:05:36,080 --> 00:05:40,240
तो फिर तेरे ऊपर यह आएगा कि तू पत्नी है रामपाल की कबीर की और

83
00:05:40,240 --> 00:05:44,400
रामपाल कबीर कबीर की पत्नी है। ये सब मानना पड़ेगा। और फिर उनके

84
00:05:44,400 --> 00:05:48,480
बीच तुम्हें ये सब मानना पड़ेगा नाखूनों से इसका ये अंग लगा दिया।

85
00:05:48,480 --> 00:05:52,560
उसका वो अंग लगा दिया। ये सब भी मानना पड़ेगा क्योंकि तुम आध्यात्मिक जगत की चीजों को

86
00:05:52,560 --> 00:05:56,640
एज इट इज मानते हो यहां पर। यह भी तुम्हारे से ही सिद्ध कर दिया। क्योंकि शिव

87
00:05:56,640 --> 00:06:00,960
पार्वती ने या वहां पर दय जगत में होने वाले विवाह में सात फेवरे

88
00:06:00,960 --> 00:06:05,440
तुम्हारी जानकारी में नहीं लिए तो इसलिए यहां पर भी नहीं लेने चाहिए। यानी आध्यात्मिक

89
00:06:05,440 --> 00:06:09,600
जगत की चीजें एज इट इज यहां मानी जाएगी। इसका मतलब रामपाल

90
00:06:09,600 --> 00:06:13,600
कबीर की पत्नी है और जितने 15 करोड़ तथाकथित

91
00:06:13,600 --> 00:06:17,680
15 करोड़ है कि नहीं है मुझे नहीं पता। मगर तुम तो कहते हो 15 करोड़ है। तो 15

92
00:06:17,680 --> 00:06:22,720
करोड़ पत्नियां है रामपाल की फिर हां

93
00:06:22,720 --> 00:06:27,040
और फिर वो किस तरह से जो लोग उस अंग

94
00:06:27,040 --> 00:06:31,040
के साथ नहीं है उस अंग का उस अंग को फिट कैसे

95
00:06:31,040 --> 00:06:35,440
करेंगे नाखूनों के द्वारा फेविकॉल से फेविक्विक से वो सारी क्रियाएं ये सब तुम्हारे

96
00:06:35,440 --> 00:06:41,440
साथ होंगी ना राघव और अभिषेक के साथ ठोको [हंसी]

97
00:06:41,600 --> 00:06:46,720
ठीक है [गला साफ़ करने की आवाज़] तो अभेद का मतलब होता है

98
00:06:46,720 --> 00:06:51,120
कि दो नहीं है एक ही है केवल दिख दो रहे

99
00:06:51,120 --> 00:06:55,200
ये है अभेद और जैसे ही तुम किसी भी माने मामले में अलग-अलग कर दोगे तो

100
00:06:55,200 --> 00:06:59,200
अभेद नहीं कहलाएगा। यह सनातनियों के लिए जवाब।

101
00:06:59,200 --> 00:07:05,120
ठीक है? फिर तीसरी बात कि हमारे यहां आना पड़ेगा।

102
00:07:05,120 --> 00:07:09,360
इसका भी मैंने उत्तर दे दिया कि पांच महिला और

103
00:07:09,360 --> 00:07:13,760
एक बच्चे की हत्या का मुकदमा मेरे ऊपर नहीं चल रहा है। मेरे पक्ष के ऊपर नहीं चल रहा है।

104
00:07:13,760 --> 00:07:17,840
12 साल जेल में मैं नहीं रह के आया। ठीक है? और हर

105
00:07:17,840 --> 00:07:21,840
पन्ने पर तुम्हारा दोगलापन हर बात में तुम्हारा दोगलापन सिद्ध हो रहा है।

106
00:07:21,840 --> 00:07:25,920
मेरा नहीं सिद्ध हो रहा है। और तब भी मैं तुझे

107
00:07:25,920 --> 00:07:30,080
अपने आने की थोड़ी ना कह रहा हूं। है पुरुषत्व शेष

108
00:07:30,080 --> 00:07:33,200
तो बीच के स्थान पर मिल

109
00:07:33,200 --> 00:07:37,280
पता चल जाएगा ये राग कितना बड़ा तुम लोग तत्व ज्ञानी हो।

110
00:07:37,280 --> 00:07:41,360
समझ गए? चौथी बात मैंने ये भी दिखा दिया

111
00:07:41,360 --> 00:07:45,520
ऑन लाइव स्ट्रीम। कितना साहस है इसके अंदर

112
00:07:45,520 --> 00:07:49,600
जो ताल ठोक रहा है वीडियो में कि मैंने उसको कई बार बुलाया। अरे

113
00:07:49,600 --> 00:07:53,920
मनुवादी शंकराचार्य के सैनिक का फोन तक उठाने की तो सामर्थ्य

114
00:07:53,920 --> 00:07:59,440
है नहीं तुम में बात करते हो तुम सामना करोगे मालूम है तुम्हें

115
00:07:59,440 --> 00:08:03,920
केवल ज्ञान से केवल वार्तालाप से तुम्हारी थूथुन

116
00:08:03,920 --> 00:08:07,120
को रगड़ दिया जाएगा

117
00:08:07,120 --> 00:08:11,440
जगह नहीं मिलेगी मुंह छुपाने की ये मालूम है तुम्हें इसलिए

118
00:08:11,440 --> 00:08:15,920
अपने गवर्नरों के लिए वीडियो बनाते हो कि गवर्नर संतुष्ट हो जाए

119
00:08:15,920 --> 00:08:20,320
अगर इनके यहां के सिद्धांतों को मान लिया जाए हालांकि मैं इनके यहां के सिद्धांतों

120
00:08:20,320 --> 00:08:24,400
को नहीं मानता और एक मातृशक्ति होने के नाते सभी स्त्रियों का सम्मान

121
00:08:24,400 --> 00:08:28,640
है। मगर इनके सिद्धांतों को मान लिया जाए तो इनके यहां की स्त्रियां

122
00:08:28,640 --> 00:08:32,880
ब्याह के बाद जब फेरे जब फेरे नहीं इनका जो 17 मिनट वाला ब्याह है

123
00:08:32,880 --> 00:08:36,880
उसके बाद इनके यहां की स्त्रियां

124
00:08:36,880 --> 00:08:41,520
वो 17 मिनट वाले विवाह के बाद जब पति के द्वारा फेविकोल

125
00:08:41,520 --> 00:08:45,680
से या फेवीक्विक से एक विशेष प्रकार का अंग उनके चिपकाया जाता है।

126
00:08:45,680 --> 00:08:48,400
तब वो संपूर्ण रूप से वह स्त्री बनती है। वो

127
00:08:48,400 --> 00:08:52,400
महिला बनती हैं जिनको हम महिला कहते हैं। साधारण लोग ये

128
00:08:52,400 --> 00:08:56,400
तो खीर जगत के लोग हैं ना भाई। इनकी तो बात ही निराली है।

129
00:08:56,400 --> 00:09:02,400
ठीक है?

130
00:09:17,410 --> 00:09:21,410
[संगीत]
