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00:00:02:03 कारण मैं देता हूं मैंने कई बार अपने वीडियोस में इस बात को बोला है कि मनुस्मृति 12वां अध्याय 37 वा लोक दिया गया है जिन कार्यों के जिन स्थितियों के समय आपके मन में छिपाने का भाव उत्पन्न हो वह सारी चीजें तामसिक की ओर आती है और जिन कार्यों को करते समय आपके मन में बताने का भाव उत्पन्न हो वो सारी चीजें सात्विकता की तरफ आती है अब देखिए शूद्र कर्म से के जन्म से वो बात की बात है ठीक है मगर दोनों में एक अंतर है अंतर क्या है कि शूद्र के जीवन को वहां पर पाप योनि के साथ खड़ा किया ना भगवान श्री कृष्ण ने नवे अध्याय 2 श्लोक में तो वहां पाप योनि से मतलब ये नहीं वो पापी है ये है वो है उनके जीवन में तामस गुण की प्रधानता है उनके जीवन में तामस जो कार्य तामस स्थितियां है वो ज्यादा है मतलब ऐसी स्थितियां ज्यादा है जिनके समय उसके मन में छिपाने का भाव आएगा और वहीं पर जो जिनके जीवन में तामस स्थितियां कम है उसके बदले वहां पर सात्विक स्थितियां ज्यादा है बताने का भाव तो एक ब्राह्मण का सोचिए कि वो जन्म से कर्म से वो बात की बात है वो अलग विषय हो जाएगा मगर ब्राह्मण का जो कर्म है वो क्या है अपने
00:01:17:07 मन के अंदर की बात किसी को बताकर वो पैसे कमा रहा है अपने मन के अंदर की बात किसी को बाहर निकाल करर वो आजीविका प्राप्त कर रहा है वहीं पर क्षत्रिय क्या होता है एक एक सीढ़ी नीचे आ गया भाई सामने वाले से जीतना है तो अपनी रणनीति को छिपाना तो पड़ेगा ही तो थोड़ा सा तामस आ गया अच्छा व्यापार के वैश्य में क्या हो जाता है कि भाई क्या कहते हैं अगर इसमें हम मार्जिन इसमें हमें क्या कहते हैं फायदा लाभ निकालना है तो हमें बोलना पड़ेगा कि भाई देखिए पा रप की आई है मैं आपको छह में दे रहा हूं भले ही वो एक में आई हो तो इसने क्या किया छिपाने का भाव यहां पर आ गया अच्छा यही नहीं है अगर ब्राह्मण को छिपाने के भाव से दूर रखने की बात की जा रही है तो कभी आप मनुस्मृति का अध्ययन करेंगे तो उसमें मिलेगा कि एक ब्राह्मण को नगन होकर नहाना नहीं चाहिए नगन होकर नहाने में क्या आएगा आपके मन में छिपाने का भाव एक ब्राह्मण को किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए क्या आएगा आपके मन में छिपाने का भाव एक ब्राह्मण को अपनी आवश्यकता से ज्यादा धन नहीं कमाना चाहिए क्या आएगा मन में छिपाने का भाव तो दुनिया में जो ये निर्णय हुआ है ना छिपाने
00:02:32:12 और ना छिपाने का और ना छिपाने का अच्छाई और बुराई का निर्णय छिपाने के भाव पर ही है जिन कार्यों को करते समय हमारे मन में बताने का भाव आ रहा है दान करते समय बताने का भाव तो हम क्या करेंगे वो हो गया सात्विक और चोरी करते समय छिपाने का भाव वो हो गया तामसिक कार्य आप अपने मन में सोचो कि जो ये जो संभोग आदि जो स्थितियां है ये भी तामसिक में आ जाते हैं इसीलिए जब कभी आप इस रास्ते पर जा रहे होगे तो भगवान भी रास्ते में पड़ेंगे ना मंदिर तो उनसे आप नजर थोड़ी सी चुरा लोगे यह सब व स्थितियां होती है अच्छा दूसरी एक बात मैं कह रहा हूं कि अब य छिपाने के भाव से हो क्या रहा है एक्चुअली होता क्या है जितनी बार हमारे मन में छिपाने का भाव उत्पन्न होता है उतनी बार हम अपने मन में भले ही मुंह से बोले या ना बोले हम अपने मन में य कह रहे होते हैं कि हमें कोई नहीं देख रहा है आपको मैं एग्जांपल दूं जब आप चौराहा क्रॉस करते हैं तो कई बार वहां पर सर्किल बना होता है तो सर्किल कई बार जल्दबाजी के लिए हालांकि कोई आपकी ऐसी स्थिति परिस्थिति नहीं होती जल्दबाजी के लिए आप कई बार गलत तरह से चौराहे को क्रॉस करते हैं आप सर्किल के राउंड से घूम के नहीं जाते हैं आप सीधे
00:03:47:15 डायरेक्ट इधर से तिरछा काटते हैं अपनी बाइक को गाड़ी को कार को तो जब आप तिरछा जा रहे होते तो आप क्या सोच रहे होते हैं इससे पहले की कोई ट्रैफिक पुलिस वाला इससे पहले की कोई मुझे अधिकृत व्यक्ति देख पाए देख ले उससे पहले मैं चौराहा क्रॉस कर जाऊं तो इसका अर्थ क्या हुआ कि आपने उस उस मेरी आवाज आ रही है सभी को हां पूरी आवाज आ रही है बोले हा तो इसका अर्थ ये हुआ कि आपने जब जब वो चौराहा क्रॉस कर रहे हैं तब तब आपके मन में छुपाने का भाव आ रहा है तो ये छुपाने का भाव है करता क्या है जो मैंने जो अध्ययन प्राप्त किया उसमें यही मालूम पड़ा जितनी बार आप किसी से अपने मन में भाव ला रहे हो कि मैं छिपा रहा हूं उतनी बार आप अप्रत्यक्ष रूप से ईश्वर को भी नकार रहे हो तो जो जीवन में जो लड़ाई है ना ईश्वर को मानने की और ना मानने की धर्म और धर्म की जो लड़ाई है वो ईश्वर को मानने और ना मानने के ऊपर है तो आपके जीवन में यह भाव बारबार आ रहा है जितनी बार आप झूठ बोल रहे हो चोरी कर रहे हो ऐसे कर्म कर रहे हो इसीलिए आपको ऐसे कर्मों से दूर करना ही धर्म सिखाता है कि कैसे आप उन कर्मों से दूर हो पाओ जिनम की छिपाने के भाव आते हैं अब यहां पर मैं एक एग्जांपल दे दूं जैसे की मांसाहार पर बात आती है तो मांसाहार
00:05:02:25 में भी यही बात है कि मास को जब आप प्राप्त करते हो मास को कोई व्यक्ति जब प्राप्त करता है तो प्राप्ति के प्राप्त करते समय उसके मन में छिपाने का भाव होता है वहीं पर जब वो किसी शाकाहारी भोज पदार्थों को प्राप्त करने जाता है तो कोई भी बस वो टच हो के स्क्रीन प जा बस हल्का सा र टच करके आन कनेक्ट हो जाएगा तब तक मैं आर्य समाजी बंधु बड़े बेचैन है मैं इनको जरा उत्तर दे दू सर्वप्रथम जो आर सामाजिक बंधु जो बड़ा उत्पात मचाए हुए हैं मैं अन्य लोगों को बता देना चाहता हूं शास्त्रों में एक निषेध काल बताया गया मैं छिपाने और ना छिपाने के ऊपर बात कर रहा था जितनी बार आपके मन में छिपाने का भाव आ रहा है उतनी बार आप भगवान को नकार रहे हो और जब जब वो नकार रहे हो तो वही चीज ना नकारने के लिए ही आपको वहां से दूर किया जाता है इसको मैं मैं मांसाहार की जब बात करने लगा तो मांसाहार की जब बात करते हैं तो क्या होता है कि मास को प्राप्त करते समय में छिपाना पड़ता है और शाकाहार को प्राप्त करते समय नहीं छिपाना पड़ता है तो हमारे सिद्धांतों में जहां कहीं भी जो मास के निमित मास परक जो प्रमाण प्राप्त होते हैं उनका केवल एक मात्र उद्देश्य होता है परिस
00:06:18:00 विधि प्राण रक्षा के निमित्त जैसे कि मान लीजिए क्योंकि अभी यह विषय आ गया तो इसको भी बताते चले मास मास वाली कई बहुत बार बातें आ रही है कि सनातन धर्म मासा हार को प्रमोट नहीं करता है बल्कि उसे नियंत्रित करता है नियंत्रित क्यों करता है जिससे कि व्यक्ति नियंत्रण के कारण उससे विरक्त हो सके है ना प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से निर्व तो वो जो मास परक जो अर्थ मिलते हैं कहीं पर भी वह उसके प्रमोशन में नहीं होते हैं कि खूब मास खाओ वोह एक अनुमति है जिसको अधिकार समझता है व्यक्ति अनुमति को अधिकार समझ लेता है अब मैं आपको एग्जांपल दे रहा हूं अभी क्या हो रहा है कुछ दिनों से एक हलाल करके बहुत ज्यादा फैलाई जा रही है कि भाई जो मुस्लिम संस्थाएं हैं वह जितने भी ये उद्योग है उस पर हलाल का ठप्पा दे रही है अब ऐसे में क्या हो रहा है केएफसी या डोमिनो या फिर ये सब जो संस्थाएं हैं जो बहुराष्ट्रीय कंपनी है संगठन है व्यवसाय यह सबने हलाल का सर्टिफिकेट खरीद रखा अभी योगी जी ने किया था कि हलाल बैन किया था उत्तर प्रदेश में तो इन्होंने क्या किया है जितनी भी कंपनीज है ये हलाल का
00:07:33:00 सर्टिफिकेट लेकर के हलाल को प्रमोट कर रही है अब हलाल का अर्थ क्या है हलाल का अर्थ है कि इस्लामिक विचारधारा के अनुसार मास मास का भोजन इस्लामिक विचारधारा के अनुसार तो अब बात ये आती है कि हमें अपने लोगों को जो हिंदू वहां जाकर के हलाल प्रोडक्ट खा रहा है हलाल उत्पाद ग्रहण कर रहा है तो हम चाहेंगे कि भाई हिंदू जो मास खा रहा है वो हलाल तो ना खाए कम से कम अब पहले दिन जाकर के हिंदू से ये तो नहीं कह सकते हैं इस समस्या के निवारण के लिए कि तुम मांस खाना ही बंद कर दो तो अब हम ऐसे में यह कर सकते हैं कि भाई ठीक है ऐसा तो है नहीं कि दुनिया में कोई हिंदू नहीं है जो मास नहीं बेचता है अब हम किसी हिंदू को लाए और जहां पर हलाल मांस बिक रहा है वहीं आसपास किसी हिंदू मांस बेचने वाले को स्थापित कर दें तो क्या हमने यहां पर मासा हार का प्रमोशन किया है क्या हमने हलाल वाली मास व्यवस्था से लड़ने के लिए यहां पर अगर उपलब्ध कराया जो पहले से उस व्यवसाय में था ऐसे हिंदू को हमने वहां से लाकर के यहां स्थापित कर दिया तो क्या इससे यह सिद्ध होगा कि हमने यहां पर मासा हार को प्रमोट किया भाई हम तो यह सिखाएंगे व्यक्ति को कि मांसाहार ना करे
00:08:48:22 मगर इस समय जो जो ऐसा हिंदू है जोय जानता है मांसाहार नहीं करना चाहिए और वो जाकर के वहां पर हलाल वाली चीजें ग्रहण कर रहा है तो हम उसको हलाल से दूर करने के लिए यदि ऐसा मास ऐसा मास उपलब्ध करा रहे हैं जो कि हलाल नहीं है तो क्या उस जगह पर हम हला मांसाहार को प्रमोट करने वाले बनेंगे नहीं बनेंगे बस इसी संदर्भ में जो प्रमाण आते हैं ऐसे जो मास परक अर्थ होते हैं वो इसी संदर्भ में है कि कोई व्यक्ति यदि प्राण रक्षा के निमित्त या प्रवृत्ति से निवृत्ति के निमित्त यदि उसके जीवन में मास ग्रहण करना भी पड़ रहा है तो वो ऐसे ऐसे कठिन नियमों का पालन करते हुए करे जिससे कि उन नियमों का पालन करते करते करते करते अगर वो शास्त्र सम्मत चले बिल्कुल प्योर पिन पॉइंट तो उसका वो मास छूट ही जाए ठीक है ये तो मास ये तो मास की बात हो गई अब मैं दोबारा आ जाता हूं हमारा जो मेन टॉपिक चल रहा था छिपाना और ना छिपाना अच्छा ये जो छिपाना ना छिपाना इसको एक चीज और देख लीजिए इस्लाम में भी ज्ञान के पीक लेवल तक नहीं ले जा पाते मगर हमारी चीजों को पकड़ते तो है ना थोड़ा बहुत भाई जहां भी दुनिया में कोई थोड़ी बहुत भी चमक है वो है तो वेदों से ही ना सनातन सेय जो भी चमक है और जितने अंश में वेदों का विरोध है
00:10:03:22 उतने अंश में चमक नहीं है तो जो वहां पर कुफ्र आया है कुफ्र शब्द छिपाना छिपाने वाले को वहां पर काफिर कहा गया है जो हम जो कुरान की आयतों को ना मानने वाले को काफिर इस रूप में कहा जाता है कि वो उस शिक्षा को छुपा रहा है ना मानते हुए छुपा रहा है जो शिक्षा समाज की भलाई के लिए भेजी गई है उनकी दृष्टिकोण से तो काफिर भी इसी संदर्भ में है छिपाने वाला कुफ्र करने वाला यहां तक कि एक जगह पर तो क्या कहते हैं कहीं कहीं पर जो बीज बोता है किसान धरती में उसको भी काफिर कहा गया देखिए मैंने कहा ना तामस गुण प्रधान हो गया वैश्य में तो वहां पर वैश्य को काफिर वहां कहा गया कुफ्र करने वाला कहा गया अच्छा एक चीज और देखिए कई बार मुस्लिम ऐसे डिबेट करते हैं कि भाई शाकाहार और उसमें कोई अंतर नहीं है उसको भी हमारे खाने के लिए बनाया है ऐसे जानवर ठीक है मगर यहां पर बात यह बनती है क्या आपके यहां पर किसी सब्जी को काटते हुए कलमा पढ़ना अनिवार्य किया गया है क्या नहीं किया गया बल्कि केवल किसी पशु को काटते समय कलमा पढ़ना अनिवार्य किया गया है इसका अर्थ क्या है यहां पर भी वही चीज दिखाई दे रही है जैसे हमारे
00:11:18:28 यहां पर मास परक अर्थ इस संदर्भ में आए कि किसी की मजबूरी है वस्ता है उसके निमित अगर उसको मास को ग्रहण करना पड़ेगा तो वो इस इस विधि का लेते हुए मास को ग्रहण पड़े तो वहां पर क्या है शाकाहारी चीजों के लिए कोई ऐसा अनिवार्य नहीं है कि आप कलमा पढ़ के काटो लौकी को आप कलमा पढ़ के काटो टमाटर को मगर कलमा पढ़ के मुर्गा उनको काटना पड़ेगा तो अंतर वो हमारे यहां से ये कह रहे हैं अंतर नहीं है उनके यहां पर अंतर है ठीक है तो ये बात आपको अब बात ये है कि ये सब जो इतनी पीक लेवल की बातें है वहां होती नहीं है इतना ज्यादा वो पाच एक में कह दिया गया वहां पर ऐसा ज्यादा सवाल जवाब मत करो नहीं तो मार पड़ेगी इसी संदर्भ में ऐसा कहा गया सुनिए मैं बता रहा हूं शिवा जी राजा सला के संबंध में भी इस्लाम का एक मानना है मैं बताऊंगा एक मिनट जरा ये जो कुछ लोग बड़े बेच हमारी बात हम करेंगे नहीं खैर मैं बताऊ राज के बारे में बात हो रही थी विषयात होने की आवश्यकता नहीं अपनी एक बात पूरी कर लू तो कुल मिलाकर के अगर दार्शनिक देखें अब हमने डिटेल में जान लिया अभी इतनी सारी लंबी जो बात हुई है हमने वो ऐसा हुआ कि हिमाचल से निकले कन्याकुमारी के लिए मगर बीच में नागालैंड भी चले गए और गुजरात भी हुआ है है ना बीच में दोबारा पटरी पर आते हैं फिर वापस जाते हैं कुल
00:12:34:04 मिलाकर के एक बात बताइए क्या जिस समय स्त्री रसवाला होती है उस समय उसके मन में छिपाने के भाव उत्पन्न हो रहे होते हैं या नहीं हो रहे होते हैं क्या वह वैसे ही निर्भीक होती है अगर यह भी मान लिया जाए कि चलो ठीक है वह ब्लड जब तक अंदर था तब तक वह खराब नहीं भी था भाई निकल कहां से रहा ये तो देखिए आप कम से कम मतलब कुछ भी निकल वो बाहर कहां से आ रहा है अच्छा दूसरी बात ये है कि कि अब अगर ऐसी बात कर ले कि सब कुछ यही तो है ईश्वर से ही तो सब कुछ बन रहा है इसमें भी तो ईश्वर है उसमें भी तो ईश्वर है तो क्या आप मल की भी पूजा करेंगे क्योंकि भाई उस तरह से देखेंगे तो वहां भी ईश्वर है सर्वव्यापक है ईश्वर तो तो वहां प इनका व्यवहार और परमार्थ वहां इनका व्यवहार परमार्थ अलग हो जाएगा नहीं नहीं भाई यहां इसकी पूजा हम नहीं करेंगे वहां इनका व्यवहार पर बिल्कुल कान खड़े हो जाएंगे बिल्कुल अरे ऐसा लगेगा डाल दिया सुनिए वो तो गुप्तांगों से निकलते हैं मैं शुद्ध जगह से निकल मुह से जो उल्टी निकलती है उल्टी क्या उसको स्पर्श करते हैं लोग क्या वो तो शुद्ध जगह से निकला हुआ है कहने का निकल से निकल रही है तब भी आप उससे गिनाते हैं उल् तो मुह से ही निकल रही है कान से खोट निकलती है आप खा जाते हैं क्या
00:13:49:04 बेली समझ के अच्छा एक चीज में अभी आर्य समाज जीयों ने जातिवाद प छुआछूत प बात की तो मैं उनकी खत्म एक चीज मत पूछना चाहूंगा मैं कि भाई उनके उनके यहां पर जो है जन्म से वो नहीं होता है कर्म से होता है मगर कर्म से होने के बाद भी उन्होंने ये तो नहीं माना कि नहीं शूद्र अध्ययन नहीं करेगा वेदों का उन्होंने तो तब भी शूद्र को अध्ययन करा दिया तो ये पहली बात तो हुई कि इस विभाजन का उद्देश्य क्या है जब शूद्र भी सारे वो कार्य करेगा जो ब्राह्मण करेगा और ब्राह्मण भी वो सारे कार्य करेगा जो शूद्र करेगा तो फिर इस विभाजन का उपयोग क्या था फिर दूसरी बात ये आती है कि क्या आर्य समाज के द्वारा जितने भी उनके संपर्क में आने वाले लोग हैं क्या उनमें कोई किसी को शूद्र के रूप में आर समाज ने स्वीकार किया है नहीं किया सभी लोगों को विद्वान ब्राह्मण के रूप में ही स्वीकार किया है ठीक है नहीं किया तो इससे अर्थ क्या
00:14:51:19 निकल आवाज कट गई शिवान जी शिवा जी आवाज कट गई है आपकी र शिवान जी जुड़ रहे हैं अभी चंद्रकांत जी क रहे चर्चा अलग जा रही हां क्योंकि राजसला वाले प्रकरण पर व्यवहारिक पक्ष वैज्ञानिक पक्ष और शास्त्रीय पक्ष तीनों पक्ष रख दिए गए हैं आपका उससे कोई संबंधित प्रश्न हो तो अवश्य पूछिए उसका उत्तर मिलेगा जब तक वो नहीं आ रहे तब तक मैं बता दूं आपको कि राजसला समय में जब हमारी माताएं बहनें राजसला होती है तो आपके घर में भी माताएं बहने होंगी उनके व्यवहार का आकलन कीजिए क्या सामान्य दिन में जैसा उनका व्यवहार होता है क्या उन चार पांच दिनों में उनका व्यवहार वैसा ही होता है उनको सामान्य दिनों के औसत में ज्यादा चिड़चिड़ापन चेहरे पर बीमारी की तरह लक्षण रेखाएं थका हुआ शरीर थका हुआ मन हर बात में गुस्सा हो जाना भोजन ना करना बहुत नींद लेना हमेशा स्नान करने की इच्छा जाहिर होना और अजीब अजीब सी वृतिया आने लगती जैसे कि एक बीमार आदमी में वृत्ति आती है तो जब सामान्य स्त्री उन सामान्य दिनों
00:16:06:28 में असामान्य दिनों में सामान्य नहीं रह पाती है तो किस प्रकार से यह कहने के अधिकारी हो गए आप कि दोनों स्थितियां समान होती है मैं पूछना चाहता हूं जया किशोरी जी से कि वो किस स्थिति में आ कह र है कि व समान्य स्थिति है और राजस्वाला स्त्री के बारे में होने का राज न होने का जबसे नियमों का पर फॉलो नहीं हो रहा स कहां जा रहा है देखिए ना ऋषियों ने कहा कि राजसला का पालन ना होने पर दुर्व आती है समाज में समाज बचारी हो जाता है समाज कैसा है बताए क्या समाज व्यभिचारी नहीं है समाज दुर वृति से ग्रस्त नहीं है समाज में क्या अपराध नहीं हो रहा है जी अब आवाज आ रही है लेकिन डियो वीडियो अभी रुका हुआ
00:16:52:14 है मैं एक चीज पर बस प्रकाश डालना चाह रहा था जितने भी ऐसे हैं जो जाति को से नहीं मानते उसका गलत मतलब निकाल करके जो परंपरा प्राप्त हमारे आचार्य गण है उनको क साइज करने का उनके लिए नता फैलाने का प्रयास करते हैं समाज में मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि जब वेदा शास्त्रों में शूद्र एजिस्ट करता है तो क्या आर समाज में रहने वाला कोई व्यक्ति शूद्र के रूप में स्वीकार किया गया है आज तक किया गया है क्या आपकी जानकारी में है क्या सिद्धार्थ जी कि आर समाज ने किसी को शूद्र के रूप में स्वीकार किया इसका अर्थ सबको ब्राह्मण बनाना है हां तो इसका अर्थ क्या हुआ कि उनके हिसाब से जो व्यक्ति आर समाज को अपना लेगा समाज की धारणा को अपना लेगा वोह व्यक्ति ब्राह्मण ही होगा वो व्यक्ति शूद्र होगा ही नहीं इस हिसाब से अगर आर समाज को पूरे देश में खपत कर दिया जाए तो क्या शूद्र एजिस्ट करेगा वहां पे नहीं बस ब बना समाज की व्यवस्था आ जाए तो क्या शूद्र होगा तो जब वहां पर शूद्र होगा ही नहीं तो वेदा शास्त्रों का अनुगमन कैसे हो रहा है यह मुझे बताए दरस समाज तो हर व्यक्ति को ब्राह्मण बनाता है ना शिवा
00:18:07:14 जी ले नहीं तो हम तो परीक्षा दोनों दोनों बाद से भी दे सकते हैं और सामने आएंगे तो हम बढ़िया से और अच्छे से दे सकते हैं उसम हमारा तो वो है कि सामने कौरव कितने भी हो कर्मन वादी कारते मा फलेशु कदाचना ये जो कमेंट में इस तरह से लिखते हैं ये सिर्फ कमेंट में लिखते हैं इनको कहा जाए अच्छा एक एक प्रश्न का मैं उत्तर दे दूं एक प्रश्न टो जी ने बारबार पूछा है कि मैं उवाच ऋषि उवाच की उसम क्यों नहीं गया था मैंने इस बारे में कंप्लीट वीडियो बनाया है कि ऋषि उवाच के जो लाइव रखा गया था उसमें मैं क्यों नहीं गया पहली बात तो यह है कि ऐसा नहीं होगा कि आपने जब मन किया तब आपने घोषणा कर दी उसमें दम है तो मैं आज उसके चिड़े बनाने वाला हूं दम है तो आ जाए बचा ले ऐसा नहीं होगा मैं अभी एक सेकंड की घोषणा कर रहा हूं दम है तो आप पूरा समाज आ जाए चित्र उ क्याय संभव है क्या अगले एक सेकंड बाद आप उित हो जाएंगे क्या आपको मुझसे पूछना होगा कि मैं किस दिन फ्री हूं किस दिन आ सकता हूं किस दिन नहीं आ सकता हूं इसके निमित्त हम में चर्चा हो रही थी चर्चा के बीच में किसी बात पर दोनों पक्षों का एक ही जगह पर जब सहमति नहीं हो रही थी तो ऋषि वाच ने वहां पर गलत तरीके से आपत्ति जनक तरीके से अमर्यादित व्यवहार किया
00:19:22:28 जिसके कारण ऐसे व्यक्ति से चर्चा करने का कोई उद्देश्य नहीं है हां मेरे पास समय नहीं है हो सकता है मैं उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखा हूं मेरे पास सम क्योंकि इंटरनेट में बहुत सारे लोग बहुत कुछ बोलते रहते तो हम सबके खिलाफ ऐसे कारवाई करना नहीं इसके लिए कभी अगर मौका मिला समय मिला तो ये भी करेंगे हा ऋषि विवाज अगर सामने आ जाए अगर ऋषि विवाज सामने होगा तो उसका फिर प्रतिकार उस तरह से किया जाएगा उसका जो दुर्व्यवहार है मैंने कोई दुर्व्यवहार नहीं किया एक चीज और एक चीज और फिर उसके बाद फिर उसके बाद मैंने ये भी कहा कि अगर आप लोग इस कुकृत्य के लिए क्षमा मांग लीजिए सार्वजनिक रूप से तो मैं फिर आपके साथ एक चर्चा में आना चाहूंगा तो उन्होंने आज तक कोई क्षमा भी नहीं मांगी इसके बाद इसके बाद इसके बाद की बात य है कि ऐसा नहीं है आपको बहुत जल्द किसी आर्य समाज किसी संभ्रांत आर्य समाजी के साथ एक विस्तृत चर्चा में जरूर दूंगा उसका आप थोड़ी प्रतीक्षा दीजिए प्रतीक्षा करिए थोड़ी सी एक विस्तृत चर्चा आपको मिलेगी संभ्रांत के साथ जाए तो अच्छी बात है एक प्रकरण में सुना दूं जो द्वारिका के पूर्वा चार्य बमन स्वरूपा जी महाराज थे कहानी सुनाते हैं एक ऐसे ही वो बनारस में थे तो वहां के किसी दो कौड़ी के पंडित नें जी एक बात बताइए मैं अगर ऑफ कर दूं अपनी तरफ से तो लाइव
00:20:38:06 चलती रहेगी मतलब मैं ये फ्लाइट मोड ऑन करूं थोड़ी देर के लिए और उसके बाद वापस आ सकू क्योंकि मेरा कैमरा चलती रहेगी चलती रहेगी बंद तो नहीं होगी ना बस जब से नेटवर्क के आने तक बस बंद रहेगी तो आप चाहे 10 सेकंड बंद कर सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है नेटवर्क दिखेगा नाश्ता हु वीडियो नहीं बंद होगी ठीक है मैं करता हूं ऊपर से वो डिस्प्ले प ना आए बस हल्का सा टच करके वो करिए नहीं 10 सेकंड हां वो टच करके ही करूंगा करिए तो मैं यह कह रहा था कि आज जाने शिमान जी को इस तरह से क्या लाइव तो हो रहा हूं मैं ब मुझे लग रहा है मेरी पिक्चर जो है जी जी वही है चलिए कोई बात नहीं आवाज तो आ रही है ना कोई बात नहीं कोई समस्या आ गई
00:21:31:09 मैं बताऊ शिवा जी कि एक उदाहरण दे रहा हूं जहा डिबेट की बात हुई तो किसी संभ्रांत से बात करें तो ठीक है कोई बात नहीं वाद विवाद चलना चाहिए लेकिन पूर्वा आचार्य ब्रह्मलीन द्वारिका आचार्य स्वरूपानंद जी महाराज एक वृत्तांत सुनाते थे बनारस से तो कोई दो दो कड़ी के ऐसे ही किसी आदमी ने उनको चुनौती दी कहा कि हम यह कह रहे हैं स्वरूपानंद जी आक हम शास्त्रार्थ करें उन्होंने मंच से यह बात कही थी वीडियो में मिल जाएगा शायद उन्होने मंच से यह बात की थी कि अच्छा मान लीजिए मैं उ शास्त्रार्थ करने चला गया शास्त्रार्थ करने चला जाने का मतलब है कि मैंने उसको स्वीकार करके और जो है कि उसकी बराबरी में बैठ के शास्त्रार्थ कर लिया तो एक हाथी को एक कुत्ते से शास्त्रार्थ करे अपने बल के बारे में यही एग्जांपल यहां सेट होता है कि मैं जाक उसे शास्त्रार्थ करूंगा तो एक तो दि मेरा लेवल बराबर हो जाएगा तो अपने आप को कुत्ता ना कह अपने आप को हाथी कह ग मैंने शंकराचार्य से शास्त्रार्थ किया था तो एक बात समझिए कि हर कि शाथ करने की आवश्यकता भी नहीं है ये जो सड़क के किनारे बल पदार्थ पड़े होते टाइम अभी के अभी भैया ब्रॉक लेसनर को चुनौती दे दूं खली को चुनौती दे दूं बतिस्ता को चुनौती दे दूं अंडरटेकर को चुनौती दे दूं भाई उसमें दम है तो आ जा मुझे हरा के दिखा दे अब वो नहीं आ पाया तो भाई वो वो जो है भा ये लोग इनसे में जैसे जो जो जितने भी आते हैं ऋषि उवाच
00:22:46:13 की तरफ से ऋषि उवाच ने तो गलत बात बोल दी और उसने माफी नहीं मांगी और जो उसके वक्तव्य है मेरे लिए दिए ऐसा नहीं है मैं समय मिलेगा मैं कार्य करूंगा बहुत सारे कार्य हैं हम केवल केवल यही नहीं है कि वीडियो ही बना भाई हम धरती पर भी कार्य करते हैं और ये सारे कार्य हमारे चैनल पर आपको दिख भी जाएंगे लोग जो उनकी तरफ से जो कमेंट करते हैं आकर केयह क्या कायर है क्या यह स्वयं क्यों नहीं आ सकते भाई इन्होंने तो कोई अभद्र वाली बात की नहीं तो यह लोग क्या कायर है या इन्होंने बचपन में मां का दूध नहीं पिया है माता का अपनी जो ये आ नहीं पा रहे हैं कि आप क्यों नहीं सामना कर पा रहे हो मैं आपसे तो मना नहीं कर रहा हूं और क्या आपको दृत नहीं पता है सिधांत नहीं पता है श्री जी जिया किशोरी जी बता रही हैं ठीक है तो अब यहां पर आपको क्या कमेंट्स नए आते हुए दिख रहे हैं क्या हा नए कमेंट्स आ रहे हैं जी अब मैं शिवा जी मैं ये चाहता हूं कि क्योंकि देखिए हम लोगों ने व्यवहारिक पक्ष वैज्ञानिक पक्ष और शास्त्रीय तीनों पक्ष अपने मात्रा में रख दिया जिससे कोई भी व्यक्ति सुनने वाला राजस्वाला के संबंध में अपने जीवन में कैसे उतारना है सब जान जाएगा अब मैं यह चाहता हूं कि जितने लोग जो भी लोग जुड़े हु दिख रहे हैं वो राजसला या इस प्रकरण में जया
00:24:01:19 किशोरी जी के प्रकरण के संबंध में राजसला के संबंध में अगर कोई उनका प्रश्न हो तोव प्रश्न पूछे उत्तर देने का प्रयास किया जाएगा तो मैं चाहता हूं कि अब जो प्रश्न आ रहे उससे संबंधित आए उ प्रश् एक प्रश्न आ रहा है ब्रह्मा कुमारी थ्योरी पर प्रकाश डालिए देखिए ब्रह्मा कुमारी थोरी ब्रह्मा कुमारी के साथ हमारा हो गया उन्होंने माना है कि हम वैदिक नहीं है पूर्णतया तो पहली बात तो यह कि वह मुंह से बोल रहे हैं कि हम वैदिक नहीं है तो उनको सनातनी रूप में देखना गलत है अब वो मैंने बताया ना पकड़ के व्यक्ति इसलिए रखता है मना इसलिए नहीं करता कि पीछे वाली फिलोसोफी को पीछे वाली दृष्टांत को हम छोड़े नहीं नहीं तो कोई हमारी बात नहीं सुनेगा तो ब्रह्मा कुमारी ने खुद ये वक्तव्य दिया है उनके हम सेंटर में गए थे तो उन्होंने खुद य बोला है वीडियो है हम पूर्णतया वैदिक नहीं है दूसरी बात अब जब वैचारिक खंडन की सैद्धांतिक खंडन की बात आएगी तो वो आपको वीडियो मिल जाए आने वाले टाइम में पर अभी के लिए इतना मान लीजिए सनातनी नहीं है जो वैदिक नहीं है सनातनी नहीं है ठीक एक और चीज है मैं कहना चाहता हं दर्शको से की राजला और इनके संबंध मेंही प्रश्न करें तो उसका उत्तर दिया
00:25:13:18 जाए नाता बं उपाध्याय जी करके उका हमा रख योगेश सोनी जी आप हमारा नंबर नोट कर लीजिए लाइव के लिए 7483 18 69 ठीक है इस नंबर पर संपर्क करिएगा आपको लाइव लिया जाएगा आप मुझे बताइएगा किस संदर्भ में आप आर समाज की तरफ से आ रहे हैं क्या है क्या नहीं ठीक है अच्छा तो इसमें देखिए प्रश्न आया है जी कि गोंद के लड्डू बनते हैं उसे खाए कि ना खाए तो बाबू भाई साहब बता ही दिया गया गोंद के लड्डू खाने गोंद खाना चाहिए सेवन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए पनीर आज लोग बड़ा मन से खाते हैं पनीर मना है दूध जो फट के जो भी बनता है सब अप्राकृतिक है अप्राकृतिक रूप से बना है महाभारत में भीष्म जी ने इसको मना भी किया है जब युधिष्ठिर को प्रवचन कर रहे हैं उस समय तो कई ऐसी चीजें है मशरूम लोग आज खाने लगे हैं जोक त्याज है प्याज लहसुन तो बात है तो ये उसी कोटि की चीज है ये त्याज ही है अच्छा दूसरी एक बात मैं आपको बता दूं जो प्रासंगिक अभी अभी गुरुदेव का एक दिन वो हिंदु राष्ट्र अधिवेशन था उसमें गुरुदेव ने कहा था कि जिसने देखिए अभी क्या है कि जैसे आप फोर लाइन रोड है और उसमें डिवाइडर के एक तरफ की जो पट्टी है व पूरी कंस्ट्रक्शन में अंडर कंस्ट्रक्शन कंस्ट्रक्शन है तो आपकी वहां पर मजबूरी कि
00:26:28:18 अभी आपको इधर वाली पट्टी से ही जाना पड़ेगा रंग साइड ही जाना पड़ेगा तो गुरुदेव ने उस दिन कहा था बड़ा अच्छा बोले थे कि जिसने अभी तक कभी घी नहीं खाया है और एकदम से उसको बिल्कुल शुद्ध देसी घी भी मत दे देना तो आप अपने जीवन में ये सब चीजें धीरे-धीरे लागू करिए मगर वो होंगी कैसे होने का सबसे अच्छा तरीका है मामे कम शरणम पर सर्व धन प्रत धर्म प्रत का अर्थ ये नहीं है इकोन वाले कहते हैं भैया सारे धर्म छोड़ दो केवल भगवान की भक्ति करो इसका अर्थ ये तो नहीं ले सकते ना कि भाई कि भाई अब जो है मैं जो है भगवान श्री कृष्ण की शरण में आ गया हूं मैं माता को माता नहीं मानूंगा ऐसा तो नहीं है भगवान ने कहा कि तुम ये जो छोटी छोटी सी चीजें है इसको सही करते करते तो जीवन बीत जाएगा तुम मेरी शरण में आओ मैं देख लूंगा क्याक करना है तुम्हारे साथ तो सबसे अच्छा रास्ता यह होता है कि आप सबसे पहले अपने जीवन में सवा घंटे का भक्ति बल बनाइए उपासना बल तो भगवान फिर आपके जीवन में ऐसे एनवायरमेंट ऐसा वातावरण उत्पन्न करने लगेंगे जिससे कि आपकी जो
00:27:37:13 त्याज ठीक है ना जी एक प्रश्न दस बात एकदम से भी सारे नियम कादे कानून लागू ना करने के विषय में भगवत गीता का ही वचन है कि यदि आप व्यवस्था वश धर्म का अनुकरण कर पाने में असमर्थ है और आपके ना कर पाने की स्थिति में पश्चाताप है तब भी आप धर्मजीवन का पालन अवश्य करिए आपका सबसे पहले भक्ति स्टार्ट करिए आपके जीवन के हर प्रश्न का उत्तर मिलने लगेगा यहां तक कि अगर आचार्य आपके जीवन में नहीं है तो वह भी आ जाएंगे आचार्य भी आपके पास आ जाएंगे तो आप सबसे पहले अपने जीवन में भक्ति प्रारंभ
00:28:21:10 करिए शिवांश जी चंद्रकांत जी का एक प्रश्न है क्या स्त्री दीक्षा ले सक तो पिता उसको आवश्यकता तो है नहीं पिता और पति की आज्ञा से ले दूसरा प्रश्न आया है हर्ष जी का कामसूत्र तो पूरे जीवन को संचालित करने का सबसे उत्तम बुक है उत्तम पुस्तक है कि अपने जीवन में वैवाहिक संबंध कैसे बनाए जिनको अभी मैंने नंबर दिया था जिनको अभी मैंने नंबर दिया था वो किसी बात से बौखलाए हुए हैं तो लगातार मुझे ट मैसेजेस कर रहे मैं आपके साथ वार्ता करूंगा पर ठीक अभी ये नहीं संभव हो सकता आप धैर्य रखिए ठीक है आपको लेंगे आपको आपसे आपको अवसर दिया जाएगा आप धैर रखिए थोड़ा सा और यह काफी दिनों से मुझसे जुड़े भी हुए हैं किसी माध्यम से तो मुझे अभी भी पता चला क्योंकि इनका नाम सेव था वहां पर यहां किसी और ना से जी बताए सिद्धांत जी आप कामसूत्र ग्रंथ के बारे में बोल रहे थे कुछ
00:29:29:28 कैसा होना चाहिए पुस्तक है उस पुस्तक को पढ़ने के बाद आप जाएंगे की विवाह क्या है काम काम जो धर्म अर्थ काम रखा गया काम का वहा अर्थ क्या है तो इसके लिए किसी परंपरा प्राप्त व्यक्ति से किसी जानकार वक्ति से अगर जानकारी लेंगे तो बहुत अच्छे समझ में आएगा आगे बताइए हमारे यहां तो गों के लड्डू बनते सेवन ये तो हो गया हो गया सनातन ा चैनल के बारे में क्या राय है हमने देखा नहीं है अभी वो और क्या है आधुनिकता वादी काम सूत्र से चल ही नहीं सकता है कमेंट ऑफ करने के अलावा क्या कर सकते हो तुम लोग भाई हमें हमने कोई कमेंट ऑफ नहीं किए हैं किंग पागल है सब पागलो को छोड़ हटाइए चलिए ठीक है तो अब इसको आगे बढ़ाया जाए और फिर किसी दिन हम लोग लाइव आएंगे आज हमने काफी सारे विषय कवर किए जैसे कि मांसाहार पर भी बात हो गई स्त्री रसवाला पर भी बात हो गई एक पॉइंट यह भी छोड़ दिया कि भाई आर्य समाज के यहां पर शूद्र का अस्तित्व है कि नहीं है तो इसका अर्थ ये है कि अगर देखा जाए तो इस तरह के जितने भी लोग हैं जो कर्म के अनुसार व्यवस्था को
00:30:45:00 मानते हैं यह एक तरीके से शूद्रों का अस्तित्व मिटाने का कार्य कर रहे हैं अच्छा सबसे बड़ी बात आप देखो कि जो लोग ये कहते हैं कि नहीं वो जन्म से नहीं कर्म से होता है य वो उनको स्वयं आप देखिएगा ना तो शिखा होगी ना सूत्र होगा भले ही हमारे यहां कहा गया है कि अगर शूद्र भी है तो उसको भी शिखा रखनी चाहिए टीका लगाना चाहिए तो जो व्यक्ति ये बातें बोल रहा है कि भाई वो जन्म से होता है कर्म से नहीं होता देखो शंकराचार्य वाले छुआछूत मानते हैं वो व्यक्ति स्वयं देखिए वो ना तो उसके पास सिखा होगा ना सूत्र होगा यहां तक कि यज्ञ पवित भी नहीं होगा और वो ज्ञान दे रहा होगा वहां पर अ आगे एक बात और है एक बात संदर्भ में आई है कि सबसे बात क्या है अगर देखा जाए तो सृष्टि निर्माण सृष्टि के नजरिए से भौतिक संसार के नजरिए से सब आपको आवाज आ रही है मेरी जी आवाज काफी लेट जा रही है लग रहा है ऐसा अच्छा मैं मैं बोल रहा था कि भौतिक भौतिकता के नजरिए से जो सबसे उत्तम श्रेष्ठ जीवन है वह शूद्र का है क्योंकि उसको छूट है जितने सारे जितना ब्राह्मण ब्राह्मण की ओर जाएंगे उतना कड़े नियम इतने क्या कहते हैं सच के बाद इतने
00:32:00:00 कुल्ले मूत्र विसर्जन के बाद इतने कुल्ले अन के बाद इतने कुले फल के बाद इतने कुले दातून के बाद इतने कुल्ले तो जितना हम ब्राह्मण की ओर जाएंगे उतना कड़े नियम और जितना हम शूद्र शूद्र की ओर जाएंगे उतने कम नियम तो जो संसार का सुख भोगने का वो मिला है तो एक तरीके से सबसे ज्यादा शूद को मिला है इसका और भी है इसका और भी उदाहरण दे सकता हूं मनुस्मृति के अनुसार जिस अपराध के लिए ब्राह्मण को दो कई गुना ज्यादा डंडे हैं कई गुना ज्यादा वहां पर सजा दी जा रही है उसी अपराध के लिए शूद्र को कम सजा दी जा रही है ये भी देख लीजिए व्यवहारिकता में और क्या है शूद्र के लिए नहीं कहा गया कि आप जो है अपमान की खोज करो ब्राह्मण को कहा गया कि तुम कभी सम्मान पर ध्यान मत देना हमेशा अपमान पर ध्यान देना ब्राह्मण को कहा जा रहा है शूद्र को नहीं कहा गया कि भाई तुम जरूरत के अनुसार पैसा कमाओ नहीं ब्राह्मण को कहा गया है कि जरूरत से ज्यादा पैसे मत कमाना धन अर्जन मत करना तो ये सारे कड़े नियम किस पे है अब ये सारे नियम वो जो ब्राह्मण बनना चाहता है वो कभी अपनाए नहीं ये वाले नियम ऐसे नियम है जब डंडे पड़ रहे होंगे ना शूद्र से कम ब्राह्मण ब्राह्मण को तो हर ब्राह्मण कहेगा भाई उसको कम क्यों मार रहे हो मुझे मुझे ज्यादा क्यों मान रहे हो य ये कहेगा अच्छा दूसरी
00:33:15:02 एक बात ये है ये लोग जो शूद्रों को शूद्रों को ऐसे करते हैं ना भड़का हैं इस व्यवस्था के खिलाफ कह रहे वो तुझे हीन समझते हैं तुम छुआछूत मानते हो ये वो भड़का हैं उनके दृष्टिकोण से ऐसी भावना प्रकट होती है कि वो स्वयं शूद्रों का जीवन न जीना चाहते हैं इसलिए शूद्रों का वहां से पलायन करा रहे हैं उनकी जगह हथियाने के लिए ये ये जो लघु उद्योग है यह सब खाली हो जितने भी सर्विसेस वाले क्षेत्र है जितनी भी छूट है जीवन जीने की वो मुझे प्राप्त हो और शूद्र जाकर के नियमों का पालन करें जी जी तो मैं यही कह रहा था कुछ ऐसे प्रश्न अच्छे आए हैं इसमें देखिए शिवांश जी कि भाई जी ब्राह्मण को छह पीढ़ी से जनव ना हुआ हो तो क्या उनके लिए जन विधान है चकि रात दोष है रात का बड़ा विधान है लेकिन आप प्रयाग चले जाइएगा पुरी शंकराचार्य भगवान के ही कृपा पात्र आदरणीय वहा सदानंद आश्रम के आचार्य जी हैं वो आपको विध एक विधि बता देंगे नाम चप के माध्यम से उचित सीमा में तो वहां जाकर के आप जो है कि अपने पूर्वजों से जो भी नहीं हुआ है ब्राह्मण है क्या है वहां पर जाकर के आप उनसे निदान पूछ सकते हैं वो बता देंगे एक निदान बताते हैं जिसमें कुछ समय लगता है उसके बाद आप उस योग्य हो जाते हैं ठीक
00:34:30:04 है ये करा सकते हैं आपको एक नाम जप का संकल्प दिलवाया जाएगा वो नाम जप आप कर लेते हैं तो आप जो है आपका यज्ञ पवित के लिए आप वो हो जाते हैं ्र त दोष तो है मगर फिर भी आप यज्ञ पवित पा लेते हैं तो आप गायत्री के अधिकारी हो जाते गायत्री मंत्र का जाप करते हैं और कुछ नहीं है एक प्रश्न आया है कि गुरुदेव से दीक्षा कैसे ले ले तो आप जहां गुरुदेव है वहां चले जाइए एक धोती लेकर के बाकी फल द और गुरुदेव के जो जहां पर भी शिविर हो वहां पर आप सुबह पहुंच 10 11 बजे प्रवचन होगा प्रवचन होने के बाद वहां नाम पूछा जाएगा दीक्षा लेने के लिए वहां पर अपना नाम लिखाए और वहां पर दीक्षा ले लीजिए दीक्षा के लिए आपको किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं देना होता है बस आपको जब गुरुदेव देखे जब आपको गुरु मंत्र दे रहे हो तो उस समय आप सनातन शास्त्र सम्मत वस्त्रों में होने दिखाई दो वरना वो क्रोधित हो जाएंगे यहां पर गुरु दीक्षा लेने आए हो रीच प्रो जो है दो पीढ़ी तक नहीं हुआ तो बिल्कुल करवा सकते हैं तीन पीढ़ी के बाद मले हो जाते हैं लोग तो उसे आप करवा सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है ब्राह्मण मूर्ख मर गुरुदेव तो अभी जो आए थे पांच पीढ़ी से उनके य नहीं हुआ था उसको भी उन्होने अला किया था तो करते गुरुदेव शंकराचार्य उनके हाथ
00:35:45:07 में तो सब कुछ है जी आगे कोई प्रश्न है इनका कि क्या दो प हा बिल्कुल आपका उत्तर मिल गया है हां बिल्कुल पहन सकते हैं पहनना ही चाहिए आगे क्या है कि सर सर मेरा मूलांक साथ है मूलांक साथ है इसका क्या अर्थ है पता नहीं भैया राजेंद्र दास जी महाराज भी विष्णु जी को भगवान मान बताते हैं बिल्कुल भगवान है इसम बताना क्या है भगवान विष्णु जी तु लाइव आइएगा बात करेंगे देखिए जो विषय चल रहा है उस पर बात कर करें हां बिना यज्ञ पत के दीक्षा ले सकते हैं ये कह रहे हैं तुषार की ब्राह्मण को जान ब्रह्म को जानने वाला ब्राह्मण होता है तो जरा बताए कि विदुर ब्राह्मण हो गए क्या विदुर से ज्यादा ब्रह्म ज्ञान है क्या आपको केव जदा बन है क्या आपको जनक जी जदा जन ब्राह्मण हो जाए द्रोणाचार्य ने युद्ध लड़ा ब्राह्मण कहलाए क्या रावण ने युद्ध लड़ा ब्राह्मण वो क्षत्रिय कहलाया क्या द्रोणाचार्य कहलाया क्या और सबसे बड़ी बात है कि कर्म के आधार पर फिर वह भी नियम तो नियमावली तो दे दीजिए किस एज में ठीक है विषयात हो जाएगा किसी और दिन लेंगे इसको वरुण शर कुछ लोग धर्म से ऊपर उठकर एक
00:37:00:08 बार एक बाबा को मानने लगे जो कहते हैं ईश्वर अल्लाह एक है मुस्लिम नहीं नहीं सब गलत बातें हैं देख साले आपने कह दिया आपका जो है वो जो है ना आने का साले कहने के बाद आपका आने की जो उत्तीर्ण है आप योग्य नहीं रहे अब आप अब अब बात य आती है कि मैं आपका आपने जो साले कहा है मुझे तो यह साले के लिए फिर मैं आपकी कोई कारवाई करूं तो जो मुझे सब में मिलेगा तो मैं करूंगा मगर आप इस योग्य नहीं रहे कि मैं आपसे स्वस्थ चर्चा कर सकू ठीक है आपने अपने गिरा लिया कोई दूसरी आईडी बनाएगा किसी और नाम से आइएगा मर्यादित व्यवहार करिएगा फिर हम लोग बात करेंगे अरे वो अपने माता पिता से भी ऐसे ही बात करते उ लोग की बात छोड़ दीजिए चलिए आगे बढ़ आगे किसी का प्रश्न हो तो देखिए यह क्या है कि अगर पहले से ही दूसरे पंथ की दीक्षा हो दोबारा अगर दीक्षा परंपरा प्रचार से है जी ओटो जी किंग ऑफ द वर्ल्ड का मैंने जवाब दे दिया मैं उनको लेने वाला था वैसे नंबर मैंने आपका सार्वजनिक किया है 74 जीरो किसी का भी शंकराचार्य के मत को लेकर के कोई भी विवाद हो या फिर विरोधाभास हो या संशय हो और वो लाइव आना चाहता हो इस चर्चा के नेम तो उसका स्वागत है मर्यादित रहते हुए बात होगी ऐसा कुछ नहीं है अमर्यादित शब्दों को नहीं लिया जाएगा अगर कोई अमर्यादित
00:38:15:09 व्यवहार की करेगा तो उसको हटा दिया जाएगा य कोई चोरों का और हा एक चीज और है उसमें अपने चेहरे को लेकर आना होगा ये कोई गैंग वर नहीं चल रही है यहां पर अंडरवर्ल्ड एक नया डर अंडरवर्ल्ड हॉलीवुड को कोई फिल्म नहीं बन रही है यहां पर आप अपने चेहरे के साथ आइए बात करिए ठीक है जी का प्रश्न है जी चंद्रकांत जी का प्रश्न है कि अगर पहले दूसरे पंथ में दीक्षा र अगर जिस पंथ में आपने दीक्षा ली अगर वो परंपरा प्राप्त गद्दी है तो फिर आपको अन्यत्र कहीं भी दीक्षा लेने की आवश्यकता नहीं है नहीं है तो तत्काल वो दीक्षा मान्य है ही नहीं कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है उसे त्याग दीजिए और किसी परंपरा प्राप्त आचार्य से दीक्षा ले लीजिए क्या दीक्षा होती है भाई जी आप शंकराचार्य जी से किस व्यवस्था होने मात्र देते हैं महाराज जी व शंकराचार्य है वाम मार्गी दीक्षा छोड़कर सब कुछ देते हैं सारी दीक्षा किंग ऑफ द वर्ल्ड जी अगर मैं आपको समझने में कोई गलती कर बैठा हूं तो आप मुझे कॉल कर लीजिएगा मैंने नंबर दिया है मुझे बताइएगा अगर ऐसी कोई बात होगी तो मैं आपके साथ लाइव कर लूंगा अगर आपने यह किसी और के लिए कहा था क्या दीक्षा होती चलिए ठीक है तो आज के लिए अब इतना काफी है काफी देर से हो गए हम लोग मुझे अपना गोत्र पता नहीं है कैसे पता करूं जी इसके लिए संपर्क करिएगा हमारे नंबर
00:39:30:12 हमने सार्वजनिक किए हैं यह सब बातें बहुत आसान है इसके लिए आप संपर्क करिएगा कृपया मनुस्मृति की हर श्लोक का देखिए समय मिला तो बनाएंगे क्या दीक्षा होते ही भाई रामपाल के चेले रामपाल और कबीर को ही भगवान मानते हैं उनका क्या करें उनका हमने वीडियो बनाया तो है जितना ज्यादा हो सके एक सिद्धांत को फैलाना शुरू करें सभी लोग जैसे कोल गट का एक ऐड आता था ना क्या आपके टूथपेस्ट में नम तो कोई भी व्यक्ति जो ईश्वर विषयक बातचीत कर रहा हो उससे केवल एक प्रश्न पूछना है आपको क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है मत कहिए कि मैं शंकराचार्य की तरफ से हूं मत कहिए मैं फलाने पंथ से हूं मत मत करिए मैं फलाने संप्रदाय से हूं एक ही चीज को पकड़ लीजिए कि मैं उस ईश्वर को मानता हूं जो सर्वशक्तिमान है सर्वशक्तिमान पूछना चालू करिए सर्वशक्तिमान बस ठीक है शिवा जी अब कोई प्रश्न आ नहीं रहा है आज के मुद्दे संबंध तो य इसको विराम देते हैं बाकी मेरा निवेदन है आप सबसे की आवान सहित आप लोग जो है कि हमारे हिंदू राष्ट्र प्रकल्प चैनल से भी जुड़े जो अक्सर कोलबेट करके हम ं पर जुड़ते रहते हैं लोगों से तोय इं फेसबुक हर जगह हमारी आईडी है उस पर जुड़िए हम आपका समर्थन प्राप्त होगा तो हम सामने वाले वि
00:40:52:18 धर्मिल जारी रहेगा सिद्धांत जी एक चीज बता मैं भाई किसी का खंडन नहीं कर रहा मेरे एक आम जनमानस की तरह से प्रश्न होते हैं और मैं उनके निमित्त एक चर्चा करता हूं इसको ना तो हम खंडन कहेंगे ना हम इसको शास्त्रार्थ क आ देको अच्छे से जवाब मिल जाएगा र ठीक है चलिए धन्यवाद आपका एक विशेष अच्छी चर्चा हुई और इसमें व्यवहारिक सामा ला काफी तथ पर आपने जानकारी द बहुत बहुत आभार आपका तो सभी को जय श्री राम जय जगनाथ नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम पर अम चार्य पर्यंत वंदे गुरु परंपरा हर हर महादेव हर हर महादेव
00:41:44:10 [संगीत]
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