⬜ Not used yet · 00:00:02:02 – 00:43:06:00 (43:04)
00:00:02:02 पर आए हैं हमारे प्रिय गुरु भाई सिद्ध दीक्षित जी। जय जगन्नाथ। सिद्ध दीक्षित जी। जय जगन्नाथ। तो सिद्धार्थ दीक्षित जी का चैनल है हिंदू राष्ट्र प्रकल्प और बहुत ही मैं कहूंगा प्रभावशाली वक्तव्यों के साथ वो धर्म की चर्चा करते हैं अपने वीडियोस में और बहुत ज्यादा जो प्रासंगिक चीजें होती है उसके निकट होती है उनकी बात बिल्कुल और आप इनके वक्तव्यों को सुनेंगे तो बिल्कुल एकदम से आपको लगेगा कि हां जो बात है बिल्कुल सत्य के बिल्कुल जैसे निरावरण सत्य होता है ना वो बोलते हैं निरावरण सत्य ये शब्द ज्यादा उचित रहेगा आपके वक्तव्यों के लिए हम लोग इसके लिए बड़े आभारी हैं कि कोई तो है जो निरावरण सत्य को रख रहा है क्योंकि निरावरण सत्य बोलने वाले भी कम होते हैं। गुरुदेव के प्रति भी इसीलिए लोगों लोगों के मन मन में भ्रांतियां भरी जाती है क्योंकि गुरुदेव निरावरण सत्य बोलते हैं।
00:01:11:25 तो तो जैसा कि आज की चर्चा का मुख्य विषय है कि लक्ष्य जी बता रहे हैं कि आज इस के लोग मेरे दरवाजे पर आए थे और उनसे लड़ाई हो गई। [हंसी] जी मैं मैं एक आप लोगों को समाचार जय जय जय शंकर शिव जय शंकर जी मैं आप लोगों को एक सूचना बताना चाहता हूं। हमसे इस वृंदावन से संपर्क किया गया है और संभव हुआ तो आपको एक बहुत ही अच्छी चर्चा देखने को मिलेगी। हम जा रहे हैं 18 से 19 तारीख के आसपास हम होंगे वृंदावन में और वहां से वृंदावन इस टेंपल से हमें निमंत्रण आया था तो वहां जा रहे हैं अगर संभव हुआ तो उनसे चर्चा होगी बैठकर के और वो सारी चीजें आपको देखने को मिल सकती हैं। [हंसी] संकल्प जी कह रहे हैं ईंट फेंक के मारते। तो आज की चर्चा का मुख्य विषय है कि जो जया किशोरी जी ने जो एक वक्तव्य दिए हैं तो उस पर हम केवल आज तार्किक बात ही करेंगे
00:02:30:16 उस पर केवल हम तार्किक बात ही करेंगे और क्योंकि उन्होंने वहां कोई प्रमाण वगैरह तो बोले नहीं है तो ऐसी उन्होंने बातें कही है और अब तक मैं उनको लेकर के थोड़ा सकारात्मक दृष्टि रखता था क्योंकि कथा भले ही व्यास गद्दी पर बैठना वो नहीं है पर फिर भी एक ऐसा लगता था कि धर्म का प्रचार प्रसार हो रहा है और उस रूप में ना देख कर के कि वो व्यास गद्दी पर बैठी है बल्कि उस रूप में मैं अपने आप के अपने मन को समझा लेता था कि चलो व्यास गद्दी पर नहीं बैठी है वो धार्मिक चर्चा कर रही है और धार्मिक चर्चा के निमित्त वो कहीं पर बैठी हुई है पर अब उन्होंने ऐसी बातें कर दी है अपने मंच से तो इसलिए इसलिए मैंने अपने गुरु भाई को आमंत्रित किया कि आप आए और थोड़ा सा इस बारे में बताएं। तो आप बताएं सिद्धार्थ जी क्या आप किस तरह से देखते हैं उनके वक्तव्यों को? मेरी आवाज आ रही है। जी जी बताइए। गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देव महेश्वर गुरु साक्षात पर
00:03:37:27 हर हर महादेव। जैसा कि सर्वप्रथम जो आपने परिचय दिया तो उस परिचय पर मैं एक मिनट में अपनी बात खत्म करना चाहूंगा। फिर उसके बाद इस पर बात करेंगे हम लोग और जितने लोग देख रहे हैं सबको मैं प्रणाम कर रहा हूं और भगवती की कृपा उन पर बनी रहे ऐसी कामना करता हूं। आप लोग अपने प्रश्न भी देते रहिएगा समय-समय पर उसके उत्तर भी दी जाए दिए जाएंगे बातचीत के दौरान। जैसा कि आप सबको परिचय कराते हुए शिवान जी ने कहा कि मेरे वक्तव्यों में कुछ व्यंग होता है। एक तरह से मतलब मुंहतोड़ जवाब देने का प्रयास किया जाता है। तो मैं आप जितने भी देखने वाले अभी देख रहे हैं उन सबको मैं ये बता देना चाहता हूं कि हम दोनों एक ही चरण चरणारविंद से निकली हुई दो धाराएं हैं। पूरी शंकराचार्य भगवान के हम लोग दासानुदास हैं। उनके दासों के दास अगर कह लिया जाए तो वो भी मेरे लिए कम ही होगा। वो भी सौभाग्य की बात है। तो हम उनकी ही चरणारविंद से निकली हुई दो धाराएं हैं और हमने यह प्लान पहले ही कर लिया था कि जब शिवा जी शास्त्री खंडन करेंगे औरकि मैं अपनी वृत्ति के अनुसार मैं इनका जो है कि जिस जिस भाषा में वो समझना चाहेंगे उस भाषा में समझाने का अभद्र भाषा का प्रयोग न करते हुए शास्त्रीय भाषा [गला साफ़ करने की आवाज़] का प्रयोग करते हुए जिस भाषा में सामने वाला समझेगा उस भाषा में समझाने का प्रयास किया जाएगा। इसीलिए आपका आवाहन
00:04:53:03 और हमारा हिंदू राष्ट्र प्रकल्प चैनल इन इन कार्यों में हमेशा लगा रहेगा। मुझे पूर्ण भरोसा है आप पर भी और स्वयं पर भी कि क्योंकि यह कार्य हम और आप नहीं कर रहे हैं। यह कार्य हमसे गुरुदेव करा रहे हैं। और गुरुदेव जहां तक हमसे सेवा लेना चाहेंगे, जहां तक हम हमसे कार्य कराना चाहेंगे, वहां तक तो हम चलेंगे, निर्विघ्न चलेंगे। हम हमसे हमें किसी का भय नहीं है। इसीलिए हमारी बातों में वो पैनापन होता है या और हमें किसी प्रकार का लोभ भी नहीं है। हमें ना इससे कोई भोजन पानी लेना है ना हमें किसी प्रकार की कोरी भावुकुता इत्यादि जैसा कुछ है। हम बस गुरुदेव के आदेश पर अपने कार्य को कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। अब जहां तक एक एक बात मैं बता दूं। अभी एक प्रश्न आ रहा है। सीमा सिंह जी हैं कोई जो पूछ रहे हैं कि वो पूछ रही है कि पूछ रहे हैं मैं समझ नहीं पा रहा हूं क्योंकि उन्होंने अपने आप को जो संबोधन किया है वो स्त्रीवाचक शब्द से किया तो मैं नहीं पुरुषवाचक शब्द से किया है और नाम उनका स्त्रीवाचक है पर मैं पुरुषवाचक समझते हुए बोल रहा हूं। उनकी तरफ से प्रश्न आ रहा है कि क्या हम आपके वीडियोस को किसी धर्मार्थकार में उपयोग कर सकते हैं कि नहीं? तो मैं आपको बिल्कुल खुली तरीके से बोल रहा हूं बल्कि मेरा ही नहीं सिद्धांत जी का भी कोई भी वीडियो आपको किसी भी तरह से उपयोग में लेना है आप लीजिए। है ना? धर्मार्थ
00:06:08:16 के लिए यह देखिए यह कोई बिजनेस नहीं है। जिसको हम तभी किसी को देंगे जब हमें कहीं से कोई मूल्य प्राप्त होगा। हमारा तो उद्देश्य है कि यह जो विचार है, यह जो शिक्षाएं हैं, यह जो जानकारियां है जो हमें गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा से प्राप्त हो गई है। यही थोड़ी बहुत जो भी है वो कितने ज्यादा लोगों तक पहुंच पाए। तो इसलिए आप बेह झिझक हो के निर्भयता से इन वीडियोस को आप कैसे भी कहीं भी यूज करिए। ठीक है जी। जी बिल्कुल सच कहा आपने। हमारा मूल्य तो यही है कि आप लोग इसका प्रयोग करें। यही हमारा मूल्य है। इन चीजों को लोगों तक पहुंचाए। अपने अपने लोगों तक अपने लोगों तक आवाहन के माध्यम से या जो हमारा चैनल है हिंदू राष्ट्र प्रकल्प आप YouTube पे देखते होंगे इंस्टा पर भी और एक बार लाइव शिवा जी हमारे चैनल पर लाइव आए भी हैं और आगे भी आते रहेंगे। तो उन दोनों के जितने भी कंटेंट हैं आप उनको बिना किसी अनुमति के उसका प्रयोग आप कर सकते हैं। कर सकती हैं। तो जैसा कि हम जिस मुद्दे पर बात करने के लिए जुटे हैंकि अब लोग आ गए हैं तो अब हमें शुरू करना चाहिए उन चीजों को। जी देखिए जया किशोरी जी ने खैर वो स्त्री है तो हमारे लिए पूज्य है मतलब। मैं उनको स्त्रियों का बड़ा सम्मान है मेरे
00:07:23:22 मन में। क्योंकि सेवा करता हूं तो इसलिए तो जहां तक कि जया किशोरी जी का ये बयान है इसके पहले मैं बता दूं सिद्धार्थ जी साक्त हैं और माता के भक्त हैं। भगवती के रूप में ब्रह्म की वो उसको स्वीकारते हैं और बहुत मतलब अच्छे से भगवती की सेवा करते हैं। तो इसी के नाते इनके जो भाव है वो प्रकट हो रहे हैं इस समय। जी गुरुदेव की कृपा ही है बस। तो जहां तक अब इनके वचनों की बात है तो जया किशोरी जी है चित्रलेखा जी एक दो तीन ऐसी ही कथा वाचिकाएं हैं जो समय-समय पर कुछ ऐसा बयान देती रहती जिसके कारण वो हाईलाइट बनी रहे। हाईलाइट में उनका नाम रहे ताकि उनको लोग अपनी कथाओं में बुलाएं और उनका लाखों का व्यापार हो और व्यापार के माध्यम से जो भौतिक सुख सुविधाएं जुटा सकते हैं वो भौतिक सुख सुविधाएं जुटा सके। अभी सर्वप्रथम तो वो लल्लन टॉप पे गई अपना न्यूज़ इंटरव्यू देने के लिए जो भी करने गई वहां पर उनसे ये प्रश्न पूछा गया और मैंने वो वीडियो बड़ी ध्यान से देखी। बोलते समय उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। बोलते समय उनके चेहरे पर कोई हड़बड़ी नहीं है। जैसे कि वह तैयार थी इस प्रश्न के लिए और उनका उत्तर पहले से ही तैयार था। तो कोई यह कहे कि प्रेशर में निकल गया। कई लोग कह रहे हैं कि यूं ही निकल गया। ऐसे ही बोल दिया वगैरह वगैरह तो ये बिल्कुल गलत बात है। ये जो प्रश्न आया एकदम
00:08:38:26 जेनुइनली उनके सामने प्रश्न आया। उन्होंने बहुत इजीली उसका उत्तर दे दिया। उसमें कोई उनको अफसोस नहीं है। अब उनका जो उत्तर था उस पर बात कर लेते हैं। पहले देखिए इसका तो इतना विरोध हुआ मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि आज हमारे आचार्य चरण जितने भी हैं उन्होंने इसका इतनी कठिनाई कठोरता से विरोध किया है कि मतलब अब जो है कि चौराहे तक लोग इस बात को जान गए हैं कि जया किशोरी ने कुछ बोला है और उसका भयंकर खंडन हुआ है। तो हर जगह उनकी इमेज जो है कि एक नेगेटिव ही गई है पूरी तरह ये बड़ी प्रसन्नता का विषय इसलिए हमने भी सोचा कि इस पर हम एक वीडियो बनाएंगे और आपके माध्यम से इसमें जुड़ा भी जाएगा। उनका जो बयान है कि राजस्वला में म ओवर वो कहना ये चाहते हैं कि ये सब जो है सिस्टम को देख के बनाया गया साइंटिकली प्रूव्ड है कि इससे कुछ होता नहीं है। वो छूने के लिए मना किया गया। मन की वृत्ति ऐसी होती है। कृष्ण जी फिर लगे एग्जांपल अपने तर्क को अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए कुतर्क देने का प्रयास। कृष्ण जी आकर के द्रोपदी जी माता द्रोपदी को उस समय बचा लिया। उन्होंने अगर ऐसा बात होता तो भगवान आते क्यों वगैरह वगैरह बात की तो पहली बात तो हम बता दें कि इनके कहने का कारण क्या है? मैंने एक शॉर्ट वीडियो बनाई थी। अभी एक फुल वीडियो मेरे YouTube चैनल पे अभी आज ही प्रसारित हुई है 7:00 बजे उसे भी आप सब देखिएगा। उसमें मैंने यही बताने का प्रयास किया कि आचार्यों ने तो श्लोक के माध्यम से तथ्यों के माध्यम से पूरा
00:09:53:27 खंडन कर दिया। ये बता दिया कि मतलब आपका आपके आपका जो जो आपका तर्क है या जो आपकी बातें हैं वो शास्त्र के अनुसार कहीं भी नहीं ठहरती है और वो किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। तब हमारा आपका कर्तव्य क्या है? हम और आप तो आचार्य है नहीं। हमारा आपका कर्तव्य यह है कि हम अब इन शास्त्रीय बातों को व्यवहारिक स्तर पर लोगों को समझाने का प्रयास करें कि व्यवहारिक स्तर क्योंकि हमारी कई माताएं बहने इस पर जुड़ी हुई होंगी। तो व्यवहारिक स्तर क्योंकि हर माता बहन को ये फेस करना ही पड़ता है। तो वो अपने घर में अपने आसपास किस तरह इस माहौल में जब आए तो किस तरह से धर्म का पालन करें ये जानना बड़ा आवश्यक है। तो सर्वप्रथम तो जया किशोरी जी के बयान देने का कारण क्या है ये जान लीजिए। बयान देने का सबसे बड़ा कारण ये है कि अगर वो वहां ये कह देती कि हां राजस्वला का जो नियम बनाया गया है वो सही है। वो शास्त्रों में जो बात कही गई है सही है। तो सामने वाला एक प्रश्न मार देता। निरावरण सत्य अगर कह देती तो निरावरण सत्य जी बिल्कुल बिल्कुल निरावरण सत्य अगर कह देती कि नहीं वो सही है जो हमारे शास्त्रों में लिखा गया राजस्वला का जो नियम कानून बनाया गया है वो बहुत साइंटिफिक है और वो सही है तो सामने वाला तुरंत एक प्रश्न मारता कि आप भी तो व्यासपीठ के महीनों में एक दिन ऐसा दिन नहीं है जिस दिन आपका प्रोग्राम कहीं कथा वाचन का ना होता हो तो आपको भी तो राजस्वला होती होंगी पांच दिन के लिए
00:11:09:03 तो क्या उस अपवित्र अवस्था में क्या उस प्राकृतिक जो विरेचन की अवस्था होती क्या उस अवस्था में भी आप व्यास पीठ पर बैठ के सामने वाले को मूर्ख बनाती है तो इसका उत्तर उनको क्या मिलता उनको पता था कि इसका उत्तर क्या है इसका उत्तर तो कोई है ही नहीं और मीडिया वालों को भी प्रोपेगेंडा चाहिए मीडिया वालों को तो असली सवाल पूछते ही नहीं है मीडिया वाले क्योंकि उनको तो प्रोपगेंडा चाहिए उनको ये पूछना चाहिए कि आप बैठती कहां है व्यास गद्दी पे तो उनसे पूछना चाहिए कि व्यास गद्दी यानी वेदभ्यास जी महर्षि वेदव्यास जी तो उनसे पूछना चाहिए पहला प्रश्न कि महर्षि वेदव्यास जी की किसी एक शिष्या का नाम बता दीजिए। सबसे पहला प्रश्न तो यह होना चाहिए था कि वेद महर्षि वेदव्यास की शिष्या का नाम बता दीजिए। दूसरा प्रश्न होना चाहिए था क्या आपका उपनयन हुआ है। तो हो सकता है आर्य समाजी हो तो उपनयन भी करा लिया गया होगा। क्या पता कोई ठीक नहीं है। तो उपनयन के समय जब हम लोग का उपनयन हुआ था तो हम लोग कोपिन धारण किए थे। मैं बिल्कुल भी लालपेट नहीं करता। मैं सीधी बात करूंगा। किसी को अच्छा लगे चाहे बुरा लगे। हमारी माताएं बहने जुड़ी हुई इस गंभीरता को समझे। कोपीन कोपीन को आप बता दीजिएगा। हो सकता है जो आम जनमान माना से जानता ना हो कोपीन जी कोपीन कोपीन को अगर यूं भाषा में कहा जाए तो लंगोट समझ लीजिए उसमें जैसे लंगोट में तो सिलाई होती है उसमें सिलाई भी नहीं होती है वो लंगोट के आकार का होता है जिसे हम कमर के पास पहनते हैं पुरुष पहनते
00:12:24:09 हैं पुरुष वर्ग के लोग पहनते हैं उसे तो अथर्ववेद में अथर्ववेद में प्रमाण है पिछले वीडियो में बिल्कुल बिल्कुल बात एक बताई है अथर्ववेद में प्रमाण है गोपीन मैखला धारण पूर्वक ब्रह्मचारी ब्रह्मचर्य धारण करता है और इसमें मैं एक बात और जोड़ना चाहूंगा कि यदि वो आर्य समाज जैसे मंतव्यों के द्वारा यह मानती हैं कि मैंने ब्रह्मचर्य धारण किया है तो फिर उनको वो जो पौराणिक कथाएं हैं उनका बांचने का कोई मतलब उनका सिद्ध नहीं होता फिर अगर समाज को धारण करती हैं तो जी आप नहीं वो वो तो चलिए उनके आर्य समाज है कि नहीं वो तो छोड़ दीजिए वो बातें छोड़ दीजिए जो बहुत जेन्युइन बात निकल के आती है कि अगर व्यास गद्दी पर बैठ रही है तो योग्यता की मैं बात कर रहा हूं पहला तो उपनयन हुआ है कि नहीं हुआ? चलिए मान लीजिए आप कह मेरा उपनयन हुआ है। मैं आर्य समाजी हूं वगैरह वगैरह हो गया मेरा सबको अधिकार है। गार्गी पहला का लगेंगे उदाहरण देने। तो उसके बाद ये बताएं कि क्या आपने कोपीन धारण किया था जनेऊ के समय ऐसी कोई ऐसी कोई तस्वीर हो तो बताएं। देखिए मैं यहां पर नियम की बात कर रहा हूं उपनयन के। अन्य कोई बात नहीं कर रहा। दूसरी बात जिनके साथ जिनका जने होता है वो अपने आचार्य के साथ दो या तीन दिन तक रहते हैं। फिर वो अर्ध जी
00:13:40:14 दो तीन रात्रि तक आचार्य के साथ वास किया जाता है। तो कृपा करके बताएं कि किस आचार्य के सन्निधि में आपका उपनयन हुआ? क्या आपने ये नियम फॉलो किया था? दूसरी बात कि अर्धनग्न होकर के पूरे जन्म का कार्यक्रम किया जाता है। क्या आपने ये कार्य किया था? माने ऐसे प्रश्न इतने प्रश्न खड़े हो जाएंगे कि इन प्रश्नों से बचने के लिए उन्होंने जो है कि उल्टी कर दी कि राजस्वला का जो नियम होता है वो वैज्ञानिक धरातल पर गलत है। वो कुछ ऐसा होता नहीं है। बस ऐसे ही छुआछूत ना हो पीरियड्स में अचार नहीं खाना चाहिए। इसलिए माताओं ने कह दिया कि अचार ना खाओ ये ना करो वो ना करो। हेन तेन लालटेन पूछने वाला भी गधा अब बताने वाला तो खैर शिरोमणि। तो इस तरह से उन्होंने इस इन प्रश्नों का जवाब बचने के लिए पहले से इनके दिमाग में है। वो चित्रलेखा जी हो चाहे ये जया किशोरी जी हो। तो इनके मन में सबसे पहले ये उत्तर सारे फिक्स है। उनको मालूम है कि इसका उत्तर क्या देना है। अब ये एक और चीज है। ये लोग कभी किसी भी आचार्य के सामने जाते नहीं है। किसी परंपरा प्राप्त आचार्य की सन्निधि में ये लोग नहीं जाएंगे। क्योंकि उनको मालूम है जैसे जाएंगे तुरंत उनको सुनने भर का खाने भर का मिल जाएगा। तो ये हमेशा टीवी सिनेमा सीरियल हीरो हीरोइन में बने रहेंगे। और एक और बात बता दूं मैं आपको नई बात। मुझे आज ही जया किशोरी जी की डांस बात याद आ रही आपने जब ये कहा था ना आचार्य के पास नहीं जाएंगे क्योंकि मेरा मूड आज थोड़ा सा ऐसा है कि
00:14:55:18 मैं थोड़ी रिलैक्स वाली बातें भी करूं। एक बचपन में एक फिल्म देखी थी सौदागर हम उसमें राजकुमार का एक डायलॉग था सांप और बिच्छू सिरों काटा नहीं करते दूर दूर से रेंग के निकल जाते हैं बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल वही हाल है वही हाल है तो परंपरा प्राप्त आचार्यों के पास ना तो लंदन टॉप वाले जाएंगे ना आपके अजीत भारती जाएंगे ना आपके तोफेल चतुर्वेदी जाएंगे ना आपके व्याकरण के जो पता नहीं कौन से मिश्र है वो जाएंगे ना दीक्षित जी जाएंगे हां कोई नहीं जाएगा वहां पर वहां पे जाने की किसी में वो नहीं है अच्छा ऐसा नहीं है इनके पास जाने का सामर्थ्य नहीं है ये सब जगह चले जाएंगे मगर परंपरा प्राप्त आचार्यों के पास नहीं जाएंगे क्योंकि मालूम है कि जब वहां जाएंगे तो घिग्गी बंध जाएगी और एक और बात है और यही नहीं है ये पुरानी परंपरा है जब धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज प्रातः स्मरणीय कर्पात्री जी महाराज ने जब अंबेडकर को बुलाया था। उस समय जिनको जिन जो विद्वान होते थे अपने आप को बड़ा विद्वान मानते थे। उनको जब करपात्री जी बुलाते थे कि आओ बैठो तुमको तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर दूंगा मैं तो वो प्रश्न पूछने तक नहीं जाते थे। ये जितने
00:16:10:26 आज देश के पापा देश के चाचा और ये दुकादुका बन के संविधान निर्माता बन के बैठे। किसी की हिम्मत नहीं थी कि करपात्री जी महाराज के सामने जाकर के तर्क वितर्क कर सके क्योंकि ज्ञान है ही नहीं। वो तो पपेट्स बन के बैठे थे। अंग्रेजों के वो अपना कार्य कर रहे थे। खैर ये दूसरी बात हो जाएगी। हम अभी इस पर भी थोड़ा बहुत बात कर लेंगे। लेकिन पहले जया किशोरी जी पर मैं आना चाहता हूं। तो उनका बयान देने का यह कारण था। अब बयान देने के कारण के पीछे मैंने रीज़ बता। यह भी कारण बताया कि क्यों यह बयान ऐसा दे रही हैं और इससे इनका व्यापार चल रहा है। इनके इनके घर द्वार चल रहा है। इनका पूरा पालन पोषण हो रहा है। इनका फैन फॉलोइंग मेंटेन हो गया है। तो इसलिए जो है कि उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। मर्यादा परंपरा क्या है? उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ये बस अपना जो मन में आएगा उससे उल्टी करेंगी। उल्टी करके चली जाएंगी। अब हमारी माताएं बहने भी यहां जुड़ी हुई हैं। अब प्रश्न ये आएगा कि राजस्वला का मामला है क्या? शास्त्र इसके बारे में क्या आदेश करते हैं? तो मैं बहुत श्लोक वगैरह तो नहीं पढूंगा। कुछ जानकारियां हमने इकट्ठा किए जो अपने वीडियो में मैंने रखी थी। उसे मैं दो चार मिनट की सीमा में बता कर के व्यवहारिक धरातल पर ही आप लोगों के प्रश्न आते जाएंगे। उत्तर देते जाएंगे। या आपसे बातचीत करने के दौरान हम लोग अपनी बात करते जाएंगे। मैं एक विवरण देना चाहता हूं। चार पांच जो माताएं हमारी जुड़ी हुई है। वह बहुत ध्यान से सुनेंगे इस चीज को। जो राजस्वला का प्रकरण आता है ये सर्वप्रथम कहां से आता है ये जानने का विषय है। तो इसकी शुरुआत तब होती
00:17:26:00 है जब देवाधि देवों के देवता जो है कि इंद्र ने वृत्तासुर नाम के एक राक्षस का वध किया। उस राक्षस के वध करने के बाद उन पर ब्रह्म हत्या का पाप लग गया। अब ब्रह्म हत्या का पाप लगने के कारण उनको प्रायश्चित स्वरूप अपने ब्रह्म हत्या को उन्होंने चार भागों में विभाजित किया। अब वो चार भाग किसको प्राप्त हुए? क्यों प्राप्त हुई यह जानने की आवश्यकता है और यह जानने के बाद हमारी माताएं यह तय कर पाएंगी कि यह इनके लिए श्राप है कि वरदान है। यह देखने का इसके बारे में मेडिकली भी इस पर बात करूंगा मैं। कुछ डाटा मैंने अपने वहां नोट करके रखा है जिससे मैं बताने का प्रयास कर रहा हूं। तो उसने उन्होंने जो है कि चार इसमें जो है कि चार लोगों को ब्रह्म हत्या का श्राप लगा। पहला वृक्ष को जल को, पृथ्वी को और स्त्री को। वृक्ष को श्राप यह दिया गया कि वृक्ष के वृक्ष का जो रस निकलता है गाद गोद कहीं गोदा कहते हैं कहीं गाद कहते हैं चिपचिपा सा होता है वो वृक्षों में जो चिपचिपाहट का जो गाद निकलता है उसको खाना वर्जित है उसका सेवन वर्जित है क्योंकि वह ब्रह्म हत्या से जी एक बात मैं बताना चाहूंगा कुछ यहां पर आर्य समाज के भी पक्षधर हैं तो मैं उनको ये बताना चाहूंगा कि जो जया किशोरी जी हैं वो पौराणिक
00:18:41:15 धारणाओं को मानती है वो वेदों को भी मानती है और पुराणों को भी मानती हैं। तो यह जो अगर बताया जा रहा है तो उनके द्वारा स्वीकार किए गए सिद्धांतों की सीमा में बताया जा रहा है। ठीक है? तो इससे आप विचलित ना हो इसलिए मैंने आपको ये बता दिया। चलिए ये कोई महर्ष महर्षि है स्त्री त्रिलोकी शर्मा करके कि स्त्री के लिए पीरियड्स महापा त्रिलोकी शर्मा जी तो अच्छे अच्छे व्यक्ति हैं। नहीं नहीं तो मैं उन उनहीं से कहना चाहता हूं कि वो इस बात को सुने जो मैं बताने जा रहा हूं। लोकी जी ध्यान से सुनिएगा और माताएं बहने भी सुने तो वृत्तासुर को मारने के बाद उन्होंने चार भागों में ब्रह्म हत्या को बांटा पहला वृक्ष को बांट दिया कि वृक्ष से जो घात निकलेगा जो चिपचिप चिपचिपा पदार्थ निकलेगा वो सेवन के योग्य नहीं होता किसी पुरुष के सेवन के योग्य नहीं होगा क्योंकि वह ब्रह्म हत्या से फलीभूत हुआ है तो वो दोष से फलीभूत हुआ इसलिए वो खाने के योग्य नहीं है तो वृक्षों को यह श्राप मिला कि आप इसका इसका सेवन कोई नहीं करेगा दूसरा जल को जल को क्या श्राप मिला कि जल में जो बुदबुदे निकल के आते हैं ना बुदबुदे जैसे आप नदी में नहाने जाते बुदबुदे होते तो बुदबुदे हटा के नहाया जाता है। तो ये यूं ही नहीं हटाया जाता है। ये जल को ये श्राप मिला कि जो बुदबुदा जल होगा जो बुदबुदा मिलता है जल में वो बुदबुदा ब्रह्म हत्या से फलीभूत है। वो जल में जो बुदबुदा निकल के आता है वो ब्रह्म हत्या से फलीभूत है। इसीलिए उसको सेवन भी मना है उसमें नहाना भी मना
00:19:56:16 है। तो जब नदी में आप जाते हो बुदबुदा होता है तो यूं करके हटा दिया जाता है। तो उसके हटाने के पीछे ये रीजन है। और दूसरा जो मिला पृथ्वी को पृथ्वी पर जहां भी बंजर भूमि दिख रही है आपको जहां कुछ भी नहीं हो रहा है वो बंजर भूमि ब्रह्म ब्रह्म हत्या के जो जो उनको अंश मिला इंद्र के द्वारा धरती को उस उस हत्या ब्रह्म हत्या के शाप से फलीभूत होने के कारण जहांजहां धरती आपको ऊसर दिखती है बंजर दिखती है तो वो ब्रह्म हत्या के शाप के फलीभूत होने के कारण ही है। अब चौथी आई स्त्री तो स्त्रियों में जो राज रजस्वला की परिस्थिति तीन से पांच दिन की आती है यह ब्रह्म हत्या के ही कारण आती है। इंद्र को जो ब्रह्म हत्या का श्राप लगा उसका चौथा अंश उन्होंने स्त्री को समर्पित स्त्री को दे दिया स्त्रियों में बांट दिया। अब मानव स्त्रियों में स्त्री योनि में नहीं मानव स्त्री में। अब देखिए ये चार श्राप बच गए जिसके कारण लोग कहते हैं कि ये बहुत बड़ा शाप है। शाप है। अब इसके साथ चार वरदान भी मिले। अब वरदान और श्राप को जब आप लोग कंपेयर करेंगे तब आपको लगेगा हमारी माताओं बहनों को लगेगा कि ये वरदान है। कैसे वरदान ज्यादा है ये किस तरह से इसको जरा समझने का प्रयास करें। तो पहले वृक्ष को जो मिला श्राप कि उसका गाद जो है वो कोई खा नहीं सकता है। उसका पान नहीं किया सेवन नहीं किया जा सकता है। उसी में उसको वरदान
00:21:11:25 क्या मिला? वरदान ये मिला उनके द्वारा इंद्र के द्वारा देवताओं के द्वारा यह वरदान मिला वृक्ष को कि वहां उसको कोई भी कहीं से काटे अगर उसका जड़ पेड़ का जड़ सुरक्षित है तो उसको कहीं से भी काटा जाएगा उसमें कोपल निकल आएगी ये वरदान मिला पेड़ को सोचिए साफ क्या था कितना छोटा वरदान कितना बड़ा समझिएगा इसको वरदान क्या मिला कि कोई कहीं से भी वृक्ष को काट दे अगर उसकी जड़ सुरक्षित है मनुष्य को मैं वही मैं इस कर रहा हूं इंजेक्ट करने वाली बात सनात करके जो है आप अपने प्रश्न को रखे रहिएगा अभी अवसर मिलेगा उसका उत्तर देंगे तो उस पेड़ को ये मिला वरदान कि कहीं से कोई पेड़ काट दे जड़ अगर सुरक्षित है तो कोपल निकल आएगी तो ये उसी वरदान के स्वरूप कोपल निकल के आती है जल को वरदान दिया गया कि जल कभी भी नष्ट नहीं होगा कभी घटेगा नहीं वो अगर धरती पर गिर गया तो फिर धरती को फसल के काम आ जाएगा वरना वाष्पन हो के ऊपर चला जाएगा वायुमंडल में बरसात के रूप में नीचे आ जाएगा या तालाब से गया तो नदी में नदी नदी से गया तो समंदर में जाकर स्टोर हो जाएगा। माने वो ब्रह्मांड में इस वायुमंडल में इस पर्यावरण में किसी ना किसी रूप में जल रहेगा। तो अब जल में जो श्राप दिया गया जल को जो वरदान दिया गया। अब सांप और वरदान को कंपेयर कीजिए। अब जो तीसरा नंबर आता है वो
00:22:26:26 पृथ्वी का आता है। पृथ्वी को ये वरदान मिला उस सांप के बदले बंजर भूमि के बदले कि पृथ्वी में कहीं भी गड्ढा किया जाए। प्रकृति स्वयं उसे कुछ दिन बाद भर देगी बिना किसी प्रयास के। ये सांप मिला। ये वरदान मिला। तो अब यहां भी आप उस श्राप को और इस वरदान को कंपेयर करके देखिए और जो सबसे बड़ी बात स्त्रियों की जिस पर हम आज चर्चा करने बैठे हैं उनको उनको ये सुनने की आवश्यकता है कि पीरियड्स उनके लिए श्राप है कि वरदान है। तो वरदान बताने के पहले मैं दो मिनट और बता देना चाहता हूं कि जो हमारी माताओं बहनों में पीरियड्स का दौर आता है वो महीने भर का विरेचन की एक प्रक्रिया है। एक शुद्धि की एक प्रक्रिया है। अगर वो शरीर में ना हो तो गर्भधारण कभी नहीं होगा। अगर वो शरीर में ना हो तो स्त्री की मृत्यु हो जाएगी। अगर वो शरीर में ना हो तो कई शारीरिक विकार हो जाएंगे। उसकी अनियमितता से अनियमितता से इतने विकार हो जाते हैं तो ना होगा तो क्या होगा? तो वो जो अशुद्धि शरीर आपका पुरुष स्त्री जो शरीर बना है तो स्त्री की आवश्यकता के अनुसार भगवान ने जो शरीर रचा है उसमें जो 26 दिनों में चीजें गंदगी रहती है वो उसके माध्यम से उन चीजों के माध्यम से वो बाहर निकल जाती है तो ये जो आपको राजस्वला होने का जो समय है इसमें थोड़ी पीड़ा तो होती है लेकिन जो वो समय दिया गया जो जो ये कालखंड है जो जो चीजें ये बन रही है ये सब आपके ही हित में है और जो वरदान मिला
00:23:42:02 वो क्या है वो वो आनंद है जिसके लिए स्त्री का जन्म होता है जिसके लिए स्त्री का जन्म अर्थात पुत्र प्राप्ति जो स्त्री के लिए मोक्ष का मार्ग है। बिना पुत्र के स्त्री को मोक्ष नहीं मिलता। बिना पुत्री पैदा किए स्त्री को मोक्ष नहीं मिलता। तो जो आपके मोक्ष का मार्ग है वो मोक्ष का मार्ग इसी से होकर के गुजरता है। तो अब ये पक्ष जानने के बाद ये व्यवहारिक पक्ष जानने के बाद हमारी माताएं बहने जो यहां मौजूद है वो स्वयं निर्णय करें कि हमारे ऋषि महर्षि कितने ज्ञानी थे। कितने त्रिकालदर्शी से या इन जैसे व्यापारी इन जैसे वाचिकाएं जो है कि जिनको धर्म का ध भी नहीं पता है आ के जो मन में आता है व्यास बैठ के उल्टी कर देती है तो ये मैंने बताया और एक और चीज इतना ही नहीं है चरक सुश्रुत या हमारे वहां जितने सुषण वगैरह जितने वैद्य हुए उन्होंने क्या-क्या और बताया ये भी जानने की आवश्यकता है। अब इसमें क्या जानना है जो आपके जो हमारी माताओं बहनों में राजस्वला का दिवस आता है उस राजस्वला के दिवस के अनुसार ही आपके बालक के पैदा होने का उसके पूरे जीवन पर पूरे समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है उसका एक विवेचन मैं बताना चाहता हूं इसे भी बहुत ध्यान से शिवान जी सुनने की आवश्यकता है अब इसमें क्या है मैंने कुछ डाटा रखा है कि हमारे जो आयुर्वेद शास्त्र है उसमें ये बताया गया है कि जो चार या पांच दिन का समय होता है माताओं का
00:24:57:06 हमारे राजस्व समय में तो अगर ध्यान से सुनिएगा कि अगर कोई कोई स्त्री उस राजसोला के चौथे दिन संबंध अपने पति से बना लेती है तो उससे जो पुत्र पैदा होगा वह अल्प आयु का पुत्र होगा। चौथे दिन जो संबंध बनाएगा वो अल्प आयु का पुत्र होगा। पांचव दिन जो संबंध बनाएगा उसमें अगर रक्त स्राव ज्यादा है तो पुत्री पैदा होगी और शुक्र शुक्राणु या शुक्र स्राव ज्यादा है तो पुत्री पैदा होगी और दोनों अगर बराबर है तो नपुंसक पैदा होगा। क्या पैदा होगा? नपुंसक पैदा होगा। छठे दिन जो माने इसमें बताया गया कि जो समि हम समि अगर संबंध पति पत्नी बना रहे हैं तो उससे पुत्र पैदा होगा और विषम दिन बनाएंगे तो पुत्री पैदा होगी इसलिए हमारे वहां गर्भाधान संस्कार जो मनाया जाता है हम जानते हैं कि हमें क्या होने वाला है क्योंकि गर्भाधान संस्कार में जो नियम होते हैं सम और विषम प्रेम के संभोग के जो नियम होते हैं उसका पालन करने के अनुसार समझ जाता है व्यक्ति कि पुत्री होगी कि पुत्र होगा तो मैंने क्या बताया कि छठे दिन क्या होगा कि छठे दिन जो जो संभोग होगा उससे जो पुत्र पैदा होगा वो वो पू नामक नरक से अपने अपने माता-पिता को उबारने वाला होगा। पुत्र का अर्थ क्या होता है? जो प नामक नर्क से अपने माता-पिता को तार दे। अपने पूर्वजों को तार दे। तो वैसा योग्य पुत्र
00:26:12:09 अगर पैदा करना है तो छठे दिन राजस्वला होने के छठे दिन अपने पति से संबंध बनाना चाहिए। सातवें दिन अगर कन्या संबंध बनाएंगे तो उस दिन एक कन्या पैदा होगी। लेकिन वो कन्या बंध्या होगी। वो किसी पुत्र को जन्म नहीं दे सकती। किसी पुत्री को जन्म नहीं दे सकती। तो वो क्या होगा? वो वर्जित काल हो गया। आठवें दिन अगर करेंगे तो सर्वगुण संपन्न पुत्र पैदा होगा। राजस्वला के राजस्वला के नौव दिन करेंगे तो सर्वगुण संपन्न पुत्री पैदा होगी। दव दिन करेंगे तो विद्वान पुत्र पैदा होगा। 11व दिन अगर संभोग करेंगे या संबंध बनाएंगे तो योग्य पुत्री पुत्री पैदा होगी। 12व दिन वैदिक पुत्र इस शब्द पर ध्यान रखिएगा। मैं अभी बहुत संय बहुत अभी अच्छे से इस पर बात करूंगा। ठीक है? तो 13व दिन हो गया। 14व दिन धर्मनिष्ठ पुत्र, 15व दिन धर्मनिष्ठ कन्या और 16व दिन ज्ञानी पुत्र पैदा होगा। तो अब आप स्वयं देखें बाकी दिनों का ऐसे ही विवरण है कि राजस्वला होने के तिथि से ही निर्धारित होता है कि आपका पुत्र कैसा होगा? आपकी पुत्री कैसी होगी? आज जो मुर्गा लड़ान शुरू हो गया है समलैंगिकता वाला खेल। ये क्यों हो रहा है? शास्त्रों के छोटे छोटे नियमों का हम वोक बन करके जो उल्लंघन कर रहे हैं। विवाह होते लोग उठ जा रहे हैं हनीमून पे। बिना किसी तिथि जाने संबंध बना रहे हैं। पुत्र
00:27:27:15 पैदा हो रहा है और जीवन भर छाती पीट रहे हैं। सर पीट रहे हैं कि अरे कैसा पुत्र पैदा हो गया। कहां से पागल पैदा हो गया? कहां से कोढ़ी पैदा हो गया? कहां से अंधा पैदा हो गया? अंधा से याद आया। इसमें क्या कहा गया है कि जो राजस्वला स्त्रियां होती है उनको जरा ध्यान से सुनिएगा आप लोग। मैं अभी शास्त्री विरो दे रहा हूं। व्यवहारिक ही बात करूंगा। ये सारी बातें मैं व्यवहार में कैसे है मैं ये भी बताऊंगा 10 मिनट की सीमा में। एक चीज और मैं बताने का प्रयास कर रहा हूं। इसका जरा व्यवहार मतलब वैज्ञानिक धरातल पर भी बताया जाएगा जो आज समाजी बंधु हड़बड़ा रहे हैं वो थोड़ा धैर्य रखें
00:28:00:24 ये अभी देखिए किसी भी जो भी कोई घटना या शिक्षा दी जाती है सनातन धर्म में या जिन शिक्षाओं को आप नहीं मानते पहली बात तो यह है कि वह सारी उसी तरीके के संदर्भ आपको वेदों में भी मिलेंगे जैसे कि देवताओं की जैसे कि देवताओं की कुतिया ने कुतिया एक मंत्र की दृष्टा बनी। अब यहां पर आप उसका उसका तिरस्कार नहीं करोगे। उसे अपना लोगे। इसी प्रकार से एक जगह पर शर्मा नाम की शर्मा नाम का क्या कहते हैं? हां शर्मा नाम की कुतिया है जो और कपोत सूक्त में कबूतर मंत्रों का दृष्टा बना। अब इसकी आप हंसी नहीं उड़ाएं क्योंकि वेदों का आपको वो पकड़ के चलना है। जैसे जब इस्लाम पंथ उसमें आया अस्तित्व में तो इस्लाम पंथ ने क्या चतुराई की कि भाई मैं जो है जो पीछे वाला पंथ है बाइबल वाला मैं उसको छोडूंगा नहीं पूरी तरीके से वरना मुझे कोई सुनेगा नहीं। तो उसने क्या किया ईसा जो है ये जीसस जीसस को अपने साथ जोड़ लिया कि जीसस तो हमारे नबी थे। इसी प्रकार से जितने भी जो हमारी परंपराएं हैं पूर्वाचार्य हैं इनके द्वारा दी गई शिक्षाओं का खंडन करने खड़े होते हैं तो
00:29:15:25 जितने भी ये मत मत मतंतर बनते हैं तो ये क्या करते हैं क्योंकि इनको कोई सुनेगा नहीं अगर ये पीछे से पीछे वाली चीजों को लेंगे नहीं तो अपने मंतव्यों को तो रखते हैं मगर उसमें आड़ लेते हैं वेदादि शास्त्रों की जबकि वेदाद शास्त्र भी इनके लिए अंतिम प्रमाण नहीं होता है जैसे कि मैंने अभी आपको उदाहरण दिया कि भाई क्या कहते हैं शर्मा नाम की कुतिया है जो मंत्रों की तष्टा है और कबूतर है कपोत सूक्त है उसमें एक जगह पर बैल को भी ब्रह्मचर्य बताया जा रहा है घोड़े का भी ब्रह्मचर्य बताया जा रहा है मगर यहां पर आप लोग क्या करोगे उसको जहां पर आपके मंतव्यों के विरुद्ध बात आपको दिखाई देगी वहां पर आप सीधे-सीधे क्या कर दोगे अलंकार यही तो करोगे कि अलंकार में बोल दिया अब आप जब अवतारवाद की बात आती है तब तब तो ये बोलते हो कि भगवान को अवतार लेने की क्या आवश्यकता है। मगर अब यहां पर नहीं सोचोगे कि भगवान को अलंकार रूपी बात कहने की क्या आवश्यकता है। है ना? तो ये पक्षपात है ना? तो वो वाली बात है कि ये जो कोई भी बात है या तो वो वेदों में लिखी हो या पुराणों में लिखी हो, स्मृति में लिखी हो। ये सभी बातें क्या
00:30:31:01 कहते हैं? दर्शन विज्ञान और व्यवहार तीनों धरातल पर सिद्ध होती हैं। और हमारे जितने भी सिद्धांत अपने अपनाए हुए हैं वो ऐसे ही है जो दर्शन विज्ञान व्यवहार तीनों धरातल पर सिद्ध होते हैं। तो अभी सिद्धांत जी आदि भौतिक आदि दैविक अर्थ बता रहे हैं आपको आदि दैविक और अभी जो आयुर्वेद से अभी उन्होंने इंद्र वाला जो बताया था वो आदि दैविक अर्थ था। अब जो वो आयुर्वेद से बता रहे हैं ये थोड़ा सा विज्ञान पे है और अभी व्यवहारिक अर्थ भी बताया जाएगा। ठीक है। अरे अभी अभी विज्ञान को व्यवहार में विज्ञान को व्यवहार में कैसे लाना है मैं भी बताऊंगा। अरे समाजी बंधु खैर वो भी हिंदू मैं मानता हूं हिंदू ही है। लेकिन उन्हें कह देना चाहता हूं। देखिए हमें हमें शिक्षा दी गई है। आप हमारे से अलग नहीं हो। जब बाहर से कोई लड़ने आएगा तो हम पांच हम पांच और आप 100 नहीं या आप पांच हम 100 नहीं तब हम 105 होंगे। ध्यान रखिएगा। चलिए जी। तो अब समझे तो मैं ये बात कर रहा था। खैर आर समाजी मित्र भी बहुत ध्यान से सुन। देखिए दिमाग को हम क्योंकि हम लोग इस्लाम के नहीं है हम लोग मुस्लिम नहीं है तो हम लोग को दिमाग जहां दिया गया है ना वही प्रयोग करना चाहिए उसको किनारे नहीं रखना चाहिए तो दिमाग को जब वहां रख के आप सोचेंगे समझेंगे तो आपको समझ में आ जाएगा कि हम क्या कह रहे हैं। ठीक है खैर तो मैं ये बताना चाहता था कि हां अब
00:31:46:02 देखिए धनवंतरी जी का एक कथन मैं बताना चाहता हूं। कथन के माध्यम से कथन नहीं बताऊंगा। मैं बताऊंगा क्या कहा है उन्होंने। राजा 16 ईस्वी को ज्यादा हंसना मना है, ज्यादा घूमना मना है, दौड़ना मना है, श्रृंगार करना मना है, नहाना मना है। ये क्यों है? तो जरा देखिएगा धनवंतरी जी क्या कहते हैं? ध्यान रखिएगा। धनवंतरी का कथन मैं बता रहा हूं कि राजा 16 दिन में सोए तो बहुत सोने वाला पुत्र पैदा होगा। काजल लगाने से अंधा पुत्र पैदा होगा। रोने से विकृत दृष्टि वाला पुत्र पैदा होगा। अनुपन से शारीरिक पीड़ा पीड़ा युक्त पुत्र पैदा होगा। तेल लगाने से कोढ़ी पैदा होगा। दौड़ने से चंचल पैदा होगा। हंसने से काले दांत वाला पैदा होगा। अधिक वायु सेवन से पागल पैदा होगा। बाल सवारने से गंजा पैदा होगा। और बहुत बोलने से बकवादी पैदा होगा। ये मेरा ये मैं नहीं कह रहा हूं। ये धनवंतरी जी कह रहे हैं। अब नियम बता दिया। एक नियम और बता दूं। फिर मैं व्यवहारिक धरातल पर ये क्या प्रयोग है? मैं इसका ये बताने का प्रयास करूंगा। एक नियम और है जरा उसको भी जान लीजिए कि ऋतु काल में जो है कि संभोग से जो पुत्र पैदा होते हैं, वो क्या होते हैं? रोगी कुलघाती पापी नीच बेईमान व्यभिचारी महिलाओं के साथ बलात्कार करने वाला और जो पुत्री पैदा होती है वह कुल को वर्ण संकरता में डूबाने वाली और उस समय
00:33:01:08 किया गया संभोग ब्रह्म हत्या के बराबर होता है कुछ लोग कहते हैं कि प्रथम दिन चांडालिनी कह दिया गया स्त्री को प्रथम दिन चांडालिनी क्यों कह दिया गया दूसरे दिन ब्रह्मघातनी ब्रह्म हत्यारीन कह दिया गया राजस्वला के समय तीसरे दिन शद्रवत कह दिया गया चौथे दिन उसको शुद्ध बता दिया गया तो माता को क्यों ऐसा कहा जा रहा है वगैरह वगैरह तो उसका आप सुनिए ये तो मैंने आपको नियम बता दिया ठीक है जो और अब आप देखिए कि इस नियम का जो है कि व्यवहारिक धरातल पर क्या प्रयोग है मैं बताना चाहता हूं पहले दिन उन्हें ये क्यों कहा जाता है कि राजस्वला जो माताएं बहने हैं वो पहले दिन चांड डालनी के समान होती है कारण क्या है अब आप देखिए मनोवैज्ञानिक मनोस्मृति या स्मृतियां जो है वो इतनी कठोर क्यों बनाई गई क्योंकि तीनों युगों में पाप पाप के तीन स्वरूप होते हैं कायिक मानसिक और वाचिक वाचिक मतलब बोला हुआ पाप मानसिक मतलब सोचा हुआ पाप। कायिक मतलब किया हुआ पाप। यानी जो सोचा जाएगा उसका भी अपराध होता है। त्रेता, त्रेता, सतयुग, द्वापर में। कलयुग में बस किया हुआ अपराध होता है। मानसिक और वाचिक नहीं होता। ठीक है? लेकिन बाकी तीनों युगों में ये होता है। तो स्मृतियों में जो कठोर नियम बताया गया कि इसको चांडालिनी कह दो या शीशा भर दो वगैरह जो वो क्यों कहा गया? ताकि इसे इसको वो करने के बारे में कोई सोचे भी मत। क्योंकि
00:34:16:16 अगर सोच भी लिया सोच भी अगर लिया तो उसका पाप उसको लग जाएगा तो सोचे भी मत इसलिए इतना कठोर पाप दिया गया अब आप समझिए अगर राजस्वला के समय स्त्री श्रृंगार करके श्रृंगार करके रह रही है उसका पति का मन उस पर रीझ गया और उस समय संभोग होगा तो पुत्र कैसा पैदा होगा जैसा बताएगा राक्षस पैदा होगा बलात्कारी पैदा होगा व्यभचारी पैदा होगा आज क्या स्थिति है समाज की जरा कोई बताएगा आज पिछले 20 सालों में भारत में सबसे ज्यादा रेप हो रहे हैं अपने घर में बेटी बहने सुरक्षित नहीं अपने घर में आपकी बहन सुरक्षित नहीं अपने भाई से। अपने घर में पिता नहीं सुरक्षित है। पुत्री से पुत्री से पिता नहीं सुरक्षित है। ये स्थिति हो गई है। भाई बहन विवाह कर रहे हैं। ये ये दुराचार इतना भयंकर दुराचार हो गया है। कहां से हो रहा है? ये इनहीं शास्त्र के नियमों को न मानने के कारण हो रहा है। छोटीछोटी गलतियां कर रहा है व्यक्ति जो उसका बड़ा परिणाम देखने को मिल रहा है। शास्त्रों में लिखा गया है राजस्वला का बनाया गया भोजन करने मात्र से व्यभचारी पुत्र पैदा होता है। समाज में व्यभचार फैलता है। परिवार नष्ट हो जाता है। परिवार विखंडित हो जाता है। परिवार में दरिद्रता आ जाती है। आज क्या स्थिति है? परिवार अस्वस्थ हो जाता है। एक परिवार बता दिया जो स्वस्थ हो। आज हिंदुओं को ललन चूड़ा पिला दिया गया। हम दो हमारे दो और उस दो के पहले के पहले चार पांच भाई होते
00:35:31:18 थे। एक माता एक बहन एक एक भाभी उनकी भाभी चाहे एक पत्नी कोई अगर राजस्वला हो जाए तो किनारे हो जाती। चार लोग खाना बनाते थे मिलके। आज हम दो हमारे दो में एक ही लड़का है वही राजस्वला है तब भी भोजन बनाएगी। सामान्य दिन में भी भोजन बनाएगी। कितनी पीड़ा होती है माताओं बहनों को राजस्वला के दिन में। उस पीड़ा में भी आप उससे भोजन बनवा रहे हैं। उस पीड़ा में आप उससे वस्त्र खचवा रहे हैं। उस पीड़ा में आप उससे पूजा करवा रहे हैं। उस पीड़ा में आप उससे घर की सफाई करवा रहे हैं। ये क्या है? ये ये स्त्री स्त्रीवादियों को फेमिनिस्टों को ये अपराध नहीं दिखता। उस भयंकर पीड़ा में भी स्त्री काम कर रही है। यहां उनको फेमिनिज्म नहीं दिखता। बस फेमिनिज्म तब है जब शारीरिक वासना पूर्ति करनी हो। जब जो है कि वैश्यापन करना हो तभी आपको फेमिनिज्म दिखेगा। हम माताओं बहनों से कहना चाहते हैं जितनी माताएं बहने यहां जुड़ी हुई है मैं उनसे बहुत निवेदन करना चाहता हूं यह आपके लिए कल्याणकारी प्रसंग है। इसे सोचे ये ओक और फेमिनिज्म महिलाओं के चक्कर में 1910 से जो प्रकल्प चलाया गया महिलाओं को प्रगतिशील बनाने का कम्युनिस्टों के द्वारा उसका परिणाम क्या हुआ? आज हमारी माताएं बहने बाजार की वस्तु बन के रह गई हैं। आज हमारी माताएं बहने बैगों में ठूसी जा रही हैं। यही कारण है। अपनी संस्कृति, अपनी संरचना, अपने अपने समाज, अपने शास्त्रों से दूरी होने का कारण है। और वोक बनने के कारण ये सब हो रहा है। भोग कौन रहा है? सबसे ज्यादा दुर्गति हमारी माताओं बहनों की हो रही है। द्रोपदी
00:36:46:19 जी को बचाने भगवान कृष्ण उनका चेहरा देख के नहीं आए थे। उनकी बॉडी देख के नहीं आए। उनका सित्व देख के आए थे। उनका सित्व देख के आए थे। तो अगर आप में सित्व है, आप में शास्त्रों का पालन है तो आज भी भगवान आपको बचाने आ सकते हैं। रेप होता है तो भगवान कहां है? भगवान बचाने नहीं आ रहे। भगवान क्यों आए बचाने? आपने भगवान का कहा माना कि भगवान आपको बचाने आए। यही कारण है। अपने धर्म का पालन कीजिए। सारी चीजें ठीक रहेंग। तो आप देखिए समाज में आज पैदा होने वाले पुत्रों की स्थिति देख लीजिए। क्या स्थिति है? ना गर्भाधान बचा तो पुत्र योग्य पैदा होगा नहीं। पुत्र हमेशा अस्वस्थ रह रहा है। एक साल में इतनी दवाई उसको दे दी जा रही नष्ट हो जा रहा है। तो राजासोला जैसा सामान्य नियम का पालन ना करने वाला समाज कहां से विशेष नियम का पालन करेगा? जब तक इन चीजों का पालन होता था तब तक शिवा जी पैदा होते थे। राणा प्रताप पैदा होते थे। आदि शंकराचार्य भगवान पैदा होते थे। हरिहर बुक्का पैदा होते थे। अन्य युगों में राम जी पैदा होते थे। सीता जी पैदा होती थी। कृष्ण जी पैदा होते थे। लक्ष्मी भाई पैदा हुई है। जितनी हमारी देव तुल्य माताएं हैं द्रोपदी माता द्रोपदी पैदा हुई है। जितनी भी देवतुल्य माताएं हैं क्या किसी ने प्रश्न किया है राजसोला होने पर आप जाकर पढ़िए शास्त्रों को तब आपको ज्ञान होगा क्या है क्या नहीं है वो साइंटिफिक
00:38:02:00 धरातल पर अब आ जाइए जरा बात कर ले हम अभी तक तो व्यवहारिक धरातल बताएं मैंने कुछ शास्त्री पक्ष बता दिए शास्त्रीय धरातल मैंने कुछ किया है रोचक बड़ा रोचक और बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी आपने प्रदान की बड़ा जी और मैंने कुछ साइंटिफिक जानकारियां भी इकट्ठा की है हमारा जरा बात उस पर भी जरा ध्यान दिया जाए कि साइंटिफिक धरातल में एक मिनट जी जरा मैं देख लू हां हां ये शोध जो है कि जब अंग्रेज भारत में आए तो ये तो जब आए तो कच्चा मांस खाते थे ढंग से कपड़ा पहनने नहीं आता था और आज ये देश के नियंता बने हुए हैं अंग्रेजी व्यवस्था। खैर जब अंग्रेजों का आधिपत्य भारत पर हुआ 19वीं सदी के आरंभ में जब आविष्कार होने शुरू हुए तो उस समय से ही क्योंकि अंग्रेजी विद्वानों की बात इसलिए करता हूं क्योंकि भारतीयों को एक चरस लगी हुई है कि जब तक कोई अंग्रेजी में आके नहीं बोलेगा अंग्रेज नहीं बोलेगा हम मानेंगे नहीं। कई मामलों में तो मैं देखता हूं कोई अपने पिता को भी अंग्रेज जब बोलेगा तभी मानते कि हमारा पिता है सामने वाला। ये मामला है। तो इसलिए कुछ अंग्रेजी वैज्ञानिकों के नाम और प्रयोग मैंने लाए हैं। शेरिक ने 1920 में एक प्रयोग किया। प्रोफेसर शेरिक थे। उन्होंने फूलों के स्पर्श पर एक प्रयोग किया। शंकराचार्य भग उसका उदाहरण देते हैं। वो अपनी ल में बैठे हुए थे। तो उन्होंने अपनी मेट से कहा कि वो जो गुलाब का फूल दिख रहा है वो लेकर के आओ। फूल खिला हुआ था। कोई कहे कि ले के आओ। जी वो लेने गई। जी जी जी। मैं इनको बताना चाहता हूं लोगों
00:39:17:01 को जो फूल लेने गई। अक्षिता शर्मा जी देखिए माताएं हमारी जुड़ी हुई माताएं बहने बहुत ध्यान से सुनने की आवश्यकता है जो वो फूल लेकर के आई तो देखी तो फूल में मुरझाहट आ गई तो उन्होंने कहा कि तुमने वो फूल नहीं लाया जो हमने कहा था वो तो बहुत खिला हुआ था तो उन्होंने वहां दिखाया कि नहीं नहीं देखिए मैंने वही लाया तो उन्होंने कहा अरे अपनी किताब में मेंशन किया उसमें कि भारत के जो ऋषि महर्षि जिन्होंने वक्तव्य निकाला है उनको पता चला कि उनकी नौकरानी राजस्वला है उनकी नौकरानी को पीरियड्स आए हुए हैं तब उन्होंने कहा जो उनकी मेड थी तब उन्होंने कहा कि जो भारतीय ऋषि परंपरा के लोगों ने जो बात कही है वो बात कितनी सत्य है कि राजस्वला के स्पर्श से जो फूल है वो दो मिनट के अंदर मुरझा के शांत हो गया। तुलसी के पौधे को अगर राजस्वला पानी देने लग जाए पांच तीन छ दिन तो पौधा सूख जाएगा। जिनको जिनको ये प्रयोग करना है प्रयोग करके देख ले। उस पानी का स्पर्श करके उसको पानी दीजिए। ना सूख जाए तो आप बताइएगा। आगे जो है कि कुछ एक विद्वान मिकवर्ग करके आए। मिकबर्ग मीकवर्ग ने मेंढक को राजस्वला के हाथ पर रखा। ठीक है? राजस्वला के हाथ पर रखा तो यह पाया कि मेंढक के हृदय की गति मंद हो गई है। सोचिए मेंढक के हृदय की गति मंद हो जा रही है राजस्वला के हाथ पर जाने पर। तीसरा क्या हुआ? तीसरा लेंजो नाम के एक वैज्ञानिक ने मेंढक के पाचन शक्ति प्रभावित होने की बात कही।
00:40:32:07 राजस्वला के स्पर्श मात्र से। ये तीन एग्जांपल मैंने दिए आपको। अब मैं पूछना चाहता हूं चित्रलेखा जी से कि जो ये आपके क्या डॉक्टर जो ब्लड निकलता है राजस्वला काल में क्या वो मेरा प्रश्न है उनसे कि जय किशोरी जी से क्या वह प्रश्न क्या वह रक्त सामान्य रक्त की तरह होता है गाढ़ा लाल नहीं होता है वो काला होता है और क्या जो रक्त निकल कर के आता है वो रक्त क्या किसी को डोनेट किया जा सकता है अगर सब नॉर्मल है तो क्या वो रक्त डोनेट किया जा सकता है मैं थोड़ा सा कुछ बताना चाहूंगा। जी जी मैं समझ रहा हूं आप क्या बताएंगे? जी [गला साफ़ करने की आवाज़] तो उसमें जो है कि जो रक्त निकल के आता है क्या उसे डॉक्टर कहते हैं कि आप भी स्पर्श कीजिए। कहते हैं स्पर्श ना कीजिए और नहाने को मना किया क्योंकि जो निकल के आएगा वो गंदगी है। नहाने से उसकी स्प्रेड होगा और चीजें स्प्रेड होंगी। एकांत में रहना क्यों कहा गया? क्योंकि उस समय शरीर का जो प्रयोग है शरीर की जो जो शरीर का तापमान होता है राजसवाला माताओं बहनों का वो अलग लेवल का होता है वो गर्म होता है बहुत ज्यादा और उनके मन में बहुत चिड़चिड़ापन होता है बहुत गुस्सा होता है एक प्रयोग मैं बताना चाहता हूं एक मैं संत का नाम भूल गया साउथ में एक संत थे तो उनको उनको दूध
00:41:47:13 देने के लिए एक वाला उनको दूध देने के लिए रोज ले आता था अपने स्वेच्छा से मन से शिवा जी जरा ध्यान से सुनिएगा स्पर्श का महत्व बता रहा हूं मैं तो उनको एक एक दूध लेकर के रोज उनको को श्रद्धा थे कि महाराज जी उनको हम दूध पिलाएंगे रोज। तो रोज उनको दूध ले आता था। एक दिन दूध गिर गया तो बालक के लिए दूध नहीं बचा। ग्वाले के बालक के लिए दूध नहीं बचा। तो जब वो दूध लेने जा रहे थे तो उसकी महिला ने उससे झगड़ा कर लिया। झगड़ा करने के बाद भी निष्ठा होने के कारण वो दूध ले गए। और जब दूध ले गए तो उस महर्षि ने छूते ही कह दिया कि ये दूध अशुद्ध है। पूछा कैसे? तो उन्होंने कहा तुम अपनी पत्नी से झगड़ा करके लेकर के आए हो ना ये दूध। इस दूध में प्रेम तत्व नहीं मौजूद है। इसमें उसका जो स्पर्श है ये स्पर्श ठीक नहीं है। और उन्होंने दूध वापस कर दिया। उसी दिन उस कोप के कारण उसका पुत्र मर गया। उस ऋषि ने नहीं कुछ श्राप दिया लेकिन कोप से उसका पुत्र मर गया। उसके कारण तो दुनिया ने हल्ला हो गया कि पुत्र मर गया। पुत्र मर गया। तो भगवान ने कहा कि इतनी सेवा जुगाले ने की है और लोग कह रहे हमारे कारण पुत्र मर गया। तो उस पुत्र को लाश को ले आया गया। अगले दिन उन्होंने जीवित करके उन्हें भेज दिया और फिर गांव छोड़ के चले गए। तो स्पर्श का ये महत्व होता है। स्पर्श का महत्व ना होता तो डॉक्टर ग्लव्स क्यों लगाते? डॉक्टर बार-बार हाथ क्यों धोते? नर्स हाथ क्यों धोती? कोरोना में आपने मास्क क्यों लगाया था?
00:43:03:13 स्पर्श का यह महत्व होता है।
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
Discussion Jaya Kishori ka Pralap | महिलाएं पीरियड में पूजा न करने का रहस्य #untouchability
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮