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00:00:01:09 तो सभी को जय श्री राम तो जैसा कि आप सब जानते हैं इस समय हम आए हैं माघ मेले में और यहां पर एक तरीके से संतों की नगरी हो जाती है जिस समय माग मेला लगता है तो तो ऐसे में हमें एक शिविर यहां पर मिला संत ज्ञानेश्वर जी का उनका पूरा नाम अभी पूरा परिचय हम इनसे लेंगे संत ज्ञानेश्वर जी के बारे में मान्यता यह मानते हैं महाराज की वह स्वयं कल्की अवतार है विष्णु भगवान का जो कल्की अवतार होता है कलयुग में वह हैं और सर्वप्रथम मैं इनसे ही थोड़ा सा इस बारे में जानना चाहूंगा तो अपना परिचय देते हुए थोड़ा सा जो मुख्य मुख्य चीजें हैं आपकी आध्यात्मिक दृष्टिकोण वो हमें बताएं थोड़ा सबसे सबसे पहले अपना परिचय देने के लिए हम परम पूज्य संत ज्ञान स्वामी सदानंद जी परमहंस के शिष्य है उनसे तत्व ज्ञान प्राप्त है और दूसरा हमारा जो मुख्यालय है पुरुषोत्तम धाम पुरुषोत्तम नगर सिधौर बरावां की उत्तर प्रदेश इसमें भारत में लगभग 32 आश्रम है नेपाल में चार पांच आश्रम है और हम लोग सत्य सनातन धर्म का ही प्रचार कर रहे हैं जो भगवान भगवान विष्णु जी भगवान श्री राम जी भगवान कृष्ण जी जो उपदेश दिया वही उन्हीं का मत ही प्रभु सदानंद कारी

00:01:16:12 मत है तो य अवतारवाद को भी क्या कि सत्य सनातन धर्म में अवतारवाद ही मूल्य विषय है क्योंकि अवतार ही सत्य सनातन धर्म का संस्थापक संचालक संरक्षक होता है इसलिए क्या कि हर चीज को जानना जरूरी है मानने का चीज नहीं है धर्म एक सत्य प्रधान जीवन विधान है और उसको मानने मानने का चीज नहीं है जानने का चीज है तो जानेंगे कैसे यह सोचना चाहिए ये बहुत ही अच्छा परिचय दिया आपने हमें तो जैसे कि अभी हमने आपके कुछ ग्रंथों को देखा उसमें कुछ हेडिंग्स थी कि संत ज्ञानेश्वर जी का शास्त्रार्थ हुआ शंकराचार्य से कुछ में ऐसा भी देखा कि कपा जी जिन्हे हम धर्म सम्राट के नाम से जानते हैं तो उनको भी एक तरीके से कहीं ना कहीं आपका कहना है कि उन्होंने हराया तो मूल विषय पर आ जाते हैं कि यह जो कल्की अवतार सिद्ध होते हैं संत ज्ञानेश्वर जी यह किस आधार पर होते हैं अवतार जो होता है मूल विषय ज्ञान से जाना जाता है ज्ञान क्या है तत्व ज्ञान जो सर्वोच्च ज्ञान है जिसको यथार्थ ज्ञान कहते हैं धार्मिक ज्ञान कहते हैं अशेष ज्ञान क कते हैं या

00:02:31:13 भगवती ज्ञान कहते हैं और उसी ज्ञान के आधार पर जैसे सतयुग में भगवान का अवतार अवतरण हुआ विष्णु जी के शरीर में देवलोक में उस समय नारद जी और गरुर जी जाने तत्व ज्ञान के माध्यम से विश्वर रूप विराट रूप आदि देखे फिर तत युग में मैं पूछ रहा हूं वो वो तो काफी लंबा हो जाएगा इंटरव्यू मेरा पूछना यह है कि हम सदानंद जी को भगवान का अवतार क्यों मानते हैं तो यह प्रमाण क्या हमारे शास्त्रों में है ऐसा कुछ वही वही पूछ रहा था हा शास्त्र ग्रंथों में इसका प्रमाण है प्रमाण देने के हम तैयार है और दूसरी बात ये है कि तत्त्वज्ञान के माध्यम से जिस वो विषय थोड़ा बदल रहा है बस आप इतना बता दीजिए कि फलाने पुराण में है या ऐसे कुछ इतना भी बता देंगे वो चलेगा ठीक गरु गरुड़ पुराण का 16 अध्याय में आपको मिलेगा भगवान विष्णु जी गरुड़ को उपदेश दे रहे हैं और भगवान श्री राम जी अध्यात्म रामायण में श्री राम गीता जो लक्षण को उपदेश दिए हैं और हनुमान जी को जो उपदेश दिए हैं श्री राम हदय है और गीता में श्रीमद् भगवत गीता में अर्जुन को उपदेश दिए हैं भागवत महापुराण में उद्धव जी को उपदेश दिए हैं वही उपदेश वही मत ही सदानंद का मत है मत तो है पूछ

00:03:46:24 ही रहा हूं जैसे किसी श्लोक में लिखा है कि जिससे सिद्ध हो जाए कि जो सदानंद जी हैं वह ही कल्की अवतार हैं 2006 के ऐसा कुछ है हा ऐसा कुछ है कि शंकराचार्य का जो ग्रंथ है विवेक चूड़ामणि विवेक चूड़ामणि में और उनके अनेक ग्रंथों में आदि शंकराचार्य जी का जो ग्रंथ है भगवान सदानंद जी का उस उनमें सब बनन है तो इसमें तो इतना श्लोक तो हमको याद नहीं है आदि शंकराचार्य जी के ग्रंथों के अनुसार हम यह मानते हैं आप यह मानते हैं कि सदानंद जी जो हैं वह कल्की भगवान के अवतार हैं तो अब अभी तक की कन्वर्सेशन से मेरे को यह समझ में आया है कि जो भी आपका व वैचारिक मत हो मगर आप वेद को मानते हैं प्रमाण पुराण को आप प्रमाण मानते हैं और कहीं ना कहीं शंकराचार्य जी का जो आदि शंकराचार्य जी ने लिखा है उसको भी आप प्रमाण मानते हैं तो अब बात यह आती है कि जो आज से दो करोड़ साल पहले लगभग पुराण आए और पुराण मतलब वेद आए वेदा दि शास्त्र आए और आदि शंकराचार्य जी की जो ग्रंथावली हमें प्राप्त है वो ढाई

00:05:01:27 हजार साल पुरानी है तो यह ग्रंथावली वहां से लेकर आपके हाथ में कैसे आई बात ऐसा है परमिता परमेश्वर भगवान की दया कृपा से इसमें जो सद ग्रंथ रहस्य है इस रहस्य में जो इसको जानना होगा और जानना समझना होगा सथ का जो प्रमाण है उस भगवान वाले श्लोक है चौपाई है जहां भी जिस ग्रंथ में है मैं कह रहा हूं जैसे हम मानते हैं कि यह किताब मेरे लिए प्रमाण ठीक है यह किताब मुझे मिली कहां से है मैं यह पूछ रहा हूं कैसे मिली हमें आपको कैसे मिली यह किताब जिसको आप प्रमाण मानते हैं जिसके आधार पर आपने सिद्ध किया कि जो सदानंद जी है वह कल्की के अवतार है वह किताब छप के आपके हाथ में कैसे पहुंची किसने दी आपको सद ग्रंथी जो सद ग्रंथ पहले एक रिकॉर्ड होता है पहले रचित हुआ है जब व्यास जी के साथ व्यास जी रचना की है मैं वही पूछ रहा हूं वो व्यास जी से आप तक कैसे आई तो बात ऐसा है तो गीता प्रेस में है पहले से गीता प्रेस हमारे धर्म के अधिष्ठाता तो है नहीं गीता प्रेस एक प्रेस है जो उनको छाप रही है गीता प्रेस के पास वह कैसे आई जो पहले से ग्रंथ लिखा जैसे ऋषि महर्ष ने लिखा

00:06:17:07 ऋषि महर्ष ने ग्रंथ लिखा तो व ग्रंथ ग्रंथ जो है ग्रंथों में जो प्रमाण है अवतारवाद का ऋषियों ने आज से बहुत साल पहले लिखा वो आज हम तक कैसे आज ऐसे कैसे पहुंचा रिकर्ड की ी तो सुरक्षित है ना अभी तो क्या वेदों की दो करोड़ वर्ष पुरानी रिकॉर्ड कॉपी सुरक्षित है जी नहीं तो उसम देखिए कुछ म शलोक भगवत शलोक है या मंत्र है वेदों में मंत्र है और बाकी शास्त्र में क्या की लोक है तो इसमें वेद मंत्र है जैसे रच

00:06:57:21 परन वित हो रहा है थोड़ा सा मेरा प्रश्न ये है कि अगर हम पुराण को प्रमाण मानते हैं तो पुराण हमारे पास आए कैसे अगर हम शंकराचार्य जी की लेखनी को प्रमाण मानते हैं व शंकराचार्य जी के जो ाज वर्ष पूर्व लिखे हुए ग्रंथ हैं वह हमें कैसे प्राप्त हुए अगर हम वेद को प्रमाण मानते हैं तो वह दो करोड़ वर्ष पूर्व के जो वेद हैं वह हमारे पास कैसे आए या मैं मानता हूं कि अगर कोई यह भी कहता है कि 5000 वर्ष पूर्वी वेद आए या 200 हज वर्ष पूर्वी वेद आए तो वो 200 हज वाले पूर्व वाले जो वेद वो हमारे पास कैसे पहुंचे मैं यह पूछ रहा हूं जो वेद आपको अवेद या ऐसा तो है नहीं कि मैं जो छाप रहा हूं गीता प्रेस कंपनी के जो प्रेस के जो मालिक है वह जो छाप रहे हैं उनको भगवान ने सपने में आकर तो वेद सुनाए नहीं है उनके पास किसी ना किसी माध्यम से वह आया उन्होंने उसको छाप दिया तो वह माध्यम क्या है आपका व जो माध्यम है सद ग्रंथ जो प्रमाण हम लोग हमारे पास आया है कि पहले जो ऋषि महर्ष ने ता का में लिखा था किसी भुज पत्र में लिखा था किसी प पत्र लिखा था फिर बाद में कागज से प्रिंट हुआ जैसे जैसे शिष्यों ने बस अब आपने शिष्यों का नाम लिया ना देखिए

00:08:12:28 जो मेरी जानकारी है कि जो वेदा आदि शास्त्र है वेद पुराण उपनिषद या आप तो भगवान आदि शंकराचार्य जी की लेखनी को भी प्रमाण मानते हैं तो उनके ग्रंथ हमारे हाथ में आते हैं गुरु शिष्य परंपरा से भगवत गीता चौथा अध्याय दूसरा श्लोक जब वह ज्ञान की सौंदर्य का वर्णन कर रहे हैं भगवान श्री कृष्ण तो उसमें कह रहे एवं परंपरा प्राप्ति मम तो परंपरा से हमारे पास ज्ञान आते हैं वेद वो जो ग्रंथ है परंपरा से हमारे पास ग्रंथ आते हैं अब प्रश्न य उठता है कि आपके पास जो शंकराचार्य के ग्रंथ हैं या पुराण है वह आए हैं परंपरा से ठीक है तो परंपरा से जब हमारे पास वेद आ रहे हैं क्या उसका अर्थ भी आपके पास परंपरा से आया है बिल्कुल ब जो सत्य होता है वो एक प्रायोगिक विधान होता है तो प्रायोगिक देखा जाता है पहले रेकॉर्ड था पूछने का अर्थ यह है कि जो आज आप मुझे बता रहे हैं वह आपको किसने बताया वह आपको जो बता रहा है वह उसको किसने बताया वह जो बता रहा है उसको किसने बताया ऐसे करते हुए हमें पीछे जाना होगा वह विष्णु भगवान आदि शंकराचार्य जी तक कम से कम पहुंच जाए ऐसे बताइए ऐसा है कि जो भी ज्ञान है परमात्मा प्र भगवान से ही आता है

00:09:28:07 दूसरी मैं देखिए विषय से भटक जाएंगे लंबी हो जाएगी चर्चा मैं यह पूछ रहा हूं कि आदि शंकराचार्य जी ने जो लिखा है सदानंद जी को किसी परंपरा प्राप्त गुरु ने बताया या उन्हें अपने आप पता चला यह तो श जी बता सकते हैं हम कैसे बता सकते हैं उनकी बात ऐसा है शंकराचार्य जी ने जब चार मठों की स्थापना की बाद में की ना तो उनकी जितनी भी ग्रंथावली यां हमें प्राप्त है वह हमें उन मठों की गुरु परंपरा से प्राप्त है सुनिए अंशा अवतार थे शिव जी के तो हमें जितनी भी ग्रंथावली उनकी प्राप्त है वह हमें प्राप्त है उनकी गुरु शिष्य परंपरा से इवन जो हमारे वेद आदि शास्त्र पुराण है उपनिषद है वह भी हमें प्राप्त है गुरु शिष्य परंपरा से अब कहने का अर्थ यह है कि जो बात आप कह रहे हैं वह क्या शंकराचार्य के जो शिष्य परंपरा है वह भी कहते हैं तो ऐसा है लेकिन भगवती ज्ञान जो है एक करके खोलते जो बात आप कह रहे हैं कि सदानंद जी कल्की के अवतार हैं वह बात जो उनकी गुरु शिष्य परंपरा के जो प्रमाणिक उस गद्दी पर बैठे हैं आज भी क्योंकि शंकराचार्य जी ने मठमन मानुष आसनम में एक बात लिखी कि जो भी व जो भी सन्यासी

00:10:43:16 मेरे द्वारा स्थापित चार सीटों पर बैठेगा वह मुझ शंकराचार्य का रूप ही मान है और वह होगा सनातन धर्म का अधिष्ठाता यह उनके मठा मना अनुशासन में लिखा है मेरे सा पास शायद वो है ग्रंथ तो उन्होंने लिखा तो कहने का अर्थ जो बात आप बता रहे हैं क्या वो बात यह भी स्वीकार करते हैं शंकराचार्य वाले जो शंकराचार्य की ऑफिशियल जो परंपरा आ रही है क्या वो भी यह बात मानते हैं देखिए सत्य सनातन धर्म का उस परंपरा को भाई साहब भाई साहब सुनिए तो ये देखिए हमारा बहुत सारे टॉपिक्स हैं इस पहले मैं पूछ रहा हूं आपसे क्या शंकराचार्य की जो गुरु शिष्य परंपरा से जो वर्तमान के शंकराचार्य हैं क्या वो भी यह मानते हैं कि सदानंद कल्की के अवतार हैं जी जी नहीं मा तो अब कहने का मतलब यह है कि आपको किताबें जहां से प्राप्त हो रही है मंत्र जहां से प्राप्त हो रहे हैं ग्रंथ जहां से प्राप्त हो रहे हैं उन ग्रंथों को आप विश्वास करते हैं है ना मगर वहीं से जो अर्थ मिल रहा है उस पर आप विश्वास नहीं करते तो अब बात यह आ जाती है कि जिससे हम ग्रंथ ले रहे हैं उससे हम उसका हम अर्थ नहीं मान रहे यह गलत है और जिसका हम अर्थ मान रहे हैं उससे हम ग्रंथ ले रहे हैं यह गलत है या तो दोनों चीजें माने

00:11:59:08 जैसे मान लीजिए कि मुझे इन पर भरोसा नहीं है ठीक है अब मैं ना तो इनसे किताब लूंगा हो सकता है इन्होंने झूठी किताब दी हो और ना ही इनसे मैं अर्थ लूंगा क्योंकि जब हमें विश्वास ही नहीं है तो अर्थ भी झूठा किताब भी झूठी इनकी किताब तो हम मान रहे हैं वह सच्ची है मगर इनका अर्थ हम नहीं मान रहे तो यह तो पार्शियल्टी हो गई अपने मन मुताबिक बात किसी सद ग्रंथ का रहस्य को जानने के लिए पहले ज्ञान चाहिए पहले ज्ञान चाहिए बिना ज्ञान से किसी सद ग्रंथ का रहस्य को हम नहीं समझ नहीं पाएंगे ग्रंथ हमारे पास जिससे आएगा वही हमें ज्ञान देगा ना नहीं एक देखिए ज्ञान का जो धारणा है शिक्षा विद्या और ज्ञान तीन चीज है तो जो ज्ञान क्या चीज है हमको जानना पड़ेगा विद्या कहने का अर्थ है कि दो करोड़ साल पहले वेद आते हैं वेद हम तक पहुंचते हैं हम वेद के केवल मंत्र माने और 2006 में जो संत ज्ञानेश्वर आएंगे अर्थ उनका माने नहीं मानना नहीं है य जानना है अर्थ उनका जान ले उस और जान लेना वो प्रैक्टिकल से जाना जाएगा जो प्रायोगिक जैसे जो वेद मंत्र का जो है वह प्रैक्टिकल करना पड़ेगा जितने भगवान अगर गीता को हम देखेंगे गीता में अर्जुन ने विराट रूप विश्वरूप देखा था वो प्रैक्टिकल देखा था प्रैक्टिकल के बाद

00:13:15:06 फिर आपका कहने का अर्थ है कि अगर मुझे प्रैक्टिकली भगवान दिख जाए तो मुझे फिर परंपरा से प्राप्त ज्ञान की आवश्यकता नहीं है आवश्यकता नहीं है तो जैसे आदि शक ने विवेक में लिखा है अज्ञान पर श निप विज्ञान निप तत्वज्ञान से पहले अगर जितने शास्त्र पढ़े हैं अगर उस परम तत्व को नहीं जाना तो कुछ भी नहीं जाना और उस परम तत्व को भगवत तत्व को जा जान गया तो सारे ग्रंथों की भी आवश्यकता नहीं है आद जी ने विवेक चण में लिखा हैय हमारा विय मेरा कहने का मतलब आप यह कहना चाहते हैं कि गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त हो सकता है हा गुरु तो गुरु कौन है जानना पड़ेगा मैं पूछ रहा हूं गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त हो सकता है गुरु के हा गुरु के माध्यम से ज्ञान प्राप्त हो सकता है लेकिन गुरु कौन है ये जानना जरूरी है हो सकता है ना आप यह कह रहे हैं जैसे राम जी आए उनके गुरु थे वशिष्ठ कृष्ण जी आए उनके गुरु थे सांदीपन कल्की जी के गुरु कौन है कन जो आपके हिसाब से कल्की है संत ज्ञानेश्वर जी सदानंद जी उनके गुरु कौन उनके उनके गुरु है तो ये तो बील किए थे इतने शिक्षा

00:14:30:06 गुरु शिक्षा गुरु नहीं आध्यात्मिक गुरु आध्यात्मिक गुरु बालवर बाल जोगेश्वर जी है वो किस परंपरा से थे उनके गुरु का नाम उनके गुरु का नाम हस जी उनके पिता गुरु भी थे उसके पास उनसे पहले स्वरूपानंद जी थे स् स्पान नहीं अलग है उनके गुरु स्पा उनका ब्रह्मानंद जी है उनका परंपरा गुरु परंपरा है उसका उन का तो मुझे इतना याद नहीं है जानकारी नहीं है आद शंकराचार्य जीत है पर आदि शंकराचार्य में जो अभी शिष्य गण है आदि शंकराचार्य ने जो प्रायोगिक विधान भी चलते थे आध्यात्मिक भी थे कर्मकांड के साथ साथ आध्यात्मिक भी थे तो आदि शंकराचार्य के जो परंपरा है अभी उसम भी नहीं है संस्था में नहीं है य तो आपका क्लेम है मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आपको आदि शंकराचार्य जी के जो ग्रंथ प्राप्त हुए हैं वो प्राप्त नहीं से हुए हैं तो फिर आप इनके ग्रंथों पर विश्वास क्यों कर रहे हैं जब इनके अर्थ पर विश्वास नहीं है सत्य आपने कहा कि प्रायोगिक में वो क्योंकि आपने कहा कि वो प्रायोगिक में सिद्ध नहीं हो रहे हैं जहां पर सत्य है उसको तो

00:15:45:13 सत्य किसी के पास हो आपके पास हो किसी बच्चे के पास हो सत्य से हमेशा ग है आपका कहने का अर्थ है जो अर्थ सचाई है व हम ग्रहण करते हैं सद ग्रंथ में जो सच्चाई है सत्यता है प्रैक्टिकल करने के बाद स पता चल जाता सत्य असत्य है तो सत्य को हम ग्रहण करते हैं गुण ग्राही होना चाहिए सत्य ग्राही होना चाहिए आपका कहने का अर्थ ये है कि वो जो ज्ञान दे रहे हैं वोह प्रैक्टिकली सही नहीं खरा उतर रहा इसलिए हम उस पर विश्वास नहीं करते हैं तो अब मैं ये जानना चाहता हूं कि ज्ञान सत्य है और या असत्य है इसकी पहचान क्या है ज्ञान ही सत्य होता है उसे पहचान तत्व ज्ञान कि जैसे शंकराचार्य जी के शिष्यों ने मुझसे कुछ बताया मैं कह रहा हूं यह गलत है आप कह रहे हैं ना गलत है शंकराचार्य जी के जो वर्तमान के शंकराचार्य हैं वो कह रहे हैं कि भाई जीव और ब्रह्म जीव और ब्रह्म एक है आप कह रहे हैं नहीं अलग-अलग है ठीक है आप उनको गलत कह रहे हैं तो जो आपने सही ज्ञान को पहचानने का पैरामीटर क्या है क्या आपने भगवान को देखा है स्वयम बिल्कुल परम दया कृपा से हम परमात्मा के साथ बातचीत भी किए हैं जैसे भगवान विष्णु जी भगवान श्री राम जी भवान कृष्ण जिस भगवान को दिखाए थे ईश्वर विराट दिखाए थे विराट पुरुष से बातचीत हुआ है तो हम बातचीत किए थे और

00:17:00:14 सारे ग्रंथ संत ज्ञानेश्वर जी का तो प्रैक्टिकल है शिक्षा से लेकर के तत्व ज्ञान तक शिक्षा स्वाध्याय अध्यान और ज्ञान चार चीज होता है जानने का जो विधान है क्योंकि चार जगत है स्थूल जगत सूक्ष्म जगत दिव्य जगत शाश्वत जगत इस चार जगत को देखने के लिए चार विधान है शिक्षा स्वाध अध्यात्म और ज्ञान और चार आंख भी है ये हम आंख देख रहे हैं ये प्राकृत नेत्र है य चमड़ा आंख है फिर सूक्ष्म जगत को देखने के लिए सूक्ष्म दृष्टि है और दिव्य ज दिव्य दृष्टि है और परम तत्व भगवत तव रूप जो ज्ञान है तत्व ज्ञान है उसको देखने के तत्व दृष्टि या ज्ञान दृष्टि है आंख चाहिए उसको देखने के लिए कहने का अर्थ है आपने कहा कि मैंने भगवान को स्वयं देखा है बातचीत भी की है अब मैं जानना चाह रहा हूं कि जो आपके पास आए आपको कैसे पता कि वही भगवान है देखिए पहली पहली प्रमाण है कि सद ग्रंथ पहले लिखा गया है सद ग्रंथों को जो लेकर प्रमाणित किया गया सद ग्रंथ परमात्मा के जो परिचय पहचान है पहली बात तो मैं आपको ये कहना चाहूंगा कि सद ग्रंथों को प्रमाण पर आप नहीं ले सकते बात प्रैक्टिकल की हो रही है क्योंकि सद ग्रंथ को आप नकार रहे हैं सुनिए सुनिए नकार कैसे रहे ज सुनिए सु सुनिए जैसे आपने कहा कि जो

00:18:15:19 परंपरा प्राप्त जो ग्रंथ है वह हम मानेंगे मगर उसका अर्थ जो परंपरा से आ रहा है वो हम नहीं मानेंगे यही तो कहा आपने में लिखा है सत्य वाला जितने सत्य का जहां पर लिखा है आपको वो सद ग्रंथ मिले कहां से जो परंपरा से आ रहा है सद्र जो परंपरा से आपको सद ग्रंथ दे रहे हैं उसका आप अर्थ नहीं ले रहे ना तो जिस जगह से हम लोग अर्थ नहीं मान रहे हमें उस जगह पर अविश्वास है तो उससे प्राप्त जो शास्त्र है उनको प्रमाण में कैसे यूज कर सकते हैं सद ग्रंथ में जो सतई है सच्चाई को जानना चाहिए ना जानने का विषय है यानी कि आपको ग्रंथ पढ़ने से पहले पता है कि सच्चाई क्या है हां स हा स प यानी कि आपको पता है क्या अच्छा है क्या बुरा है ग्रंथ पढ़ने से पहले तो वो पैरामीटर आप बताइए वो क्या है वो है क्या कि जो भगवत ज्ञान है तत्व ज्ञान है तत्व ज्ञान हर चीज का पैरामीटर है तत्व ज्ञान की जो परिभाषा है कि मैंने भगवान को देखा वो परिभाषा क्या है आपकी भगवान क्या होते हैं भगवान जो ये होते हैं सर्वोच्च सता शक्ति होते हैं कोई व्यक्ति नहीं होते और परम तत्प भगव रूप आत्म हुए होते हैं और हर जुग में शरीर धारण करते हैं आप मुझे ये थोड़ा सा बताइए कि जैसे आपके सामने भगवान आके खड़े हुए आपको कैसे

00:19:30:22 पता ये कोई दुरात्मा कोई बुरा व्यक्ति नहीं है जो रूप बदल के आया है मायावी राक्षस नहीं है आपको कैसे पता कैसे पता कि भगवान जो होते हैं कोई व्यक्ति नहीं है हमने पहले मना कर दिया कोई व्यक्ति नहीं है वो सर्वोच्च सता शक्ति है आपने देखा ना उन्हें रूप था ना उनका तो आपको कैसे पता कि वो भगवान का ही रूप है ये जो तत्वज्ञान जो रहस्य वाली विरात रहस्य है ना वो बिना प्रैक्टिकल से पता नहीं चलेगा और सब लोग कोय सव ज्ञान मिलता नहीं है और पहली बात और और क्या है तत्वज्ञान ऐसा विषय है आपका कहने का मतलब है आपका कहने का अर्थ है कि हम जो धर्म है वह वहां से मानते हैं जो सदानंद जी ने बताया है वह वेदा शास्त्रों का धर्म नहीं मानते हैं वेद सद ग्रंथों में जो सत्य का प्रमाण है या हम सिलेक्टिव हो जाते उसम कि जो हमारे लायक है वो हम लेते हैं बाकी जो झूठा है वो हम नहीं लेते जो असत्य है छोड़ देते हैं और सत्य को ग्रहण करते हैं इसका अर्थ तो यह हुआ वेद के कई मंत्रों को आप ग्रहण नहीं करते क्योंकि वेदों में अने से कर्मकांड से चला गया लेकिन वेदों में कुछ मंत्र है जो मंत्र है उस मंत्र जो सच्चाई से संबंधित है तो उसको जानते हैं आपको सच्चाई पता कहां से चली बिना वेद को जाने बिना वेद को नहीं पहले तत्वज्ञान प्राप्त करना पड़ता

00:20:45:22 यानी कि आपके पास तत्त्वज्ञान भगवान से डायरेक्ट आ गया नहीं भगवान ने तत्वज्ञान दिया डायरेक्ट दिया ना हा भगवान डायरेक्ट दिया तत्वज्ञान दिए और जो देखने के लिए जो नजरिया जो आंख है दिए प्रैक्टिकल किए जैसे अर्जुन ने प्रैक्टिकल किया था हनुमान जी प्रैक्टिकल प्रैक्टिकल किए प्रैक्टिकल के बाद ज्ञान मिला इस पर हम लोग चर्चा करते हैं इससे अगला क्वेश्चन कर लेते हैं इससे हमें समझ में आ जाएगा अब जैसे अभी तक हमने काफी चीजों पर वो हो गया अभी भी हमें क्लियरटीडीएस उनको धर्म सम्राट के नाम से जाना जाता है चलिए तो उसमें एक बात आती जैसे आपकी किताबों पर अक्सर लिखा रहता है कि भगवान कण कण में नहीं होता है है ना तो क्या भगवान सर्वव्यापक नहीं है हा भगवान सर्वव्यापक है लेकिन उसमें समझना होगा जैसे सर्व आवृत तिति भगवान का एक अंश में सारा सृष्टि है भगवान का एक भगवान ंश है तो एक अंश में सारा सारा सृष्टि है तो उस

00:22:01:00 उसको कह सबको घर कर स्थित है लेकिन घुस कर के नहीं मैं दोबारा आपसे और क्लियर करके पूछता हूं जैसे कि एक बात आती है क्या संत ज्ञानेश्वर जी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध हो सकता है देखि ईश्वर नहीं परमेश्वर है संत ज्ञानेश्वर जी के द्वारा प्रतिपादित ने वाले परमेश्वर सर्वशक्तिमान है हा जो परमेश्वर सर्वशक्तिमान है उन्होंने जीव को दिखाया पहले दर्शन कराया हम लोग को हम दो मिनट बता देते हैं संसार का मिथ्या दर्शन कराया पहली बात फिर संसार क्या है परिवार क्या है वो दिखाया ब्रहम सत्य जगत मिथ्या जगत मिथ्या कैसे वो प्रैक्टिकल करके दिखाया फिर उसके बाद संसार से परिवार आया है परिवार क्या है व ज्ञान के माध्यम से उसको देखा परिवार तुम्हारा परिवार क्या है और ये मानव शरीर देव दुर्लभ क्यों है इसको दिखाया फिर उसके शरीर में रहने वाला जो जीव है उसको दिखाया शरीर से अलग करके अलग-अलग करके स दृष्टि के माध्यम से और फिर आत्मा को जो सोल को उन्होंने देखा है दिव्य दृष्टि के माध्यम से और परमात्मा देखा है तत् दष्ट माध्यम से तो यह

00:23:16:02 जो क्षमता शक्ति है तत्वज्ञान का ही है तत्वज्ञान के माध्यम से हमलोग देखा और य तत्वज्ञान में क्या है कोई परंपरा नहीं है कोई परंपरा गुरु परंपरा नहीं है अब मैं मूल प्रश्न प तो मेरा कहने का मतलब है आपने अभी तक बताया कि हमें जो हम जिस ज्ञान को अनुसरण करते हैं वह ज्ञान हमें सदानंद जी से मिला हुआ है और सदानंद जी के पीछे अगर जाएंगे ज्यादा तो कोई गुरु शिष्य परंपरा नहीं है उन्होंने भगवान होते हुए हमको वह ज्ञान स्वयं दिया ठीक है अब बात ये आती है कि आप यह भी मान रहे हैं क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो आपने कहा हां ईश्वर तो सर्वशक्तिमान अरे भाई परमेश्वर आप कहां पड़ जाते हैं बीच में ठीक है ठीक है गलती हो गई मुझसे गलती हो गई परमेश्वर क्या सदानंद जी के रूप में जो आप परमेश्वर बता रहे हैं वो सर्वशक्तिमान है सदानंद वाला जो शरीर है मैं देखिए देखिए देखिए देखिए अब क्या होगा ना वो विस्तृत होता जाएगा वो मैं वो उस पर नहीं जाऊंगा कि वो शरीर है क्या है उस परे नहीं जाऊंगा आप चिंता मत करिए हां मैं उस परे नहीं जा रहा हूं मैं पूछ रहा हूं आपके ज्ञान के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है क्या वो सर्वशक्तिमान है बिल्कुल परमात्मा प्र भगवान सर्वशक्तिमान है सर्व अच्छा अब मुझे बताइए क्या

00:24:31:07 उसके ऊपर कोई भी नियम लागू हो सकता है जी नहीं उनके पास कोई नियम ले नहीं है अब मुझे बताइए क्या वह झूठ बोल सकते हैं देखिए बात ऐसा है जैसा स्थिति परिस्थिति होता है कि मैं पूछ रहा हूं झूठ बोल सकते हैं व परम सत्य है और उनसे दोनों संचालित है अभी आपने कहा कोई नियम लागू नहीं होता अब मैं पूछ रहा हूं क्या वह झूठ बोल सकते हैं जैसे स्थिति परिस्थिति होता है बोल सकते हैं बो सकते हैं धर्म के धर्म स्थापना के लिए स्थिति होता है झूठ भी बोल सकते हैं तो आपको कैसे पता उन्होंने जो ज्ञान आपको दिया वो झूठ नहीं है जो प्रैक्टिकल देखे जो पहले साद ग्रंथों में जो तवन भगवान विष्णु जी दिया था सद ग्रंथों को आप नहीं मान रहे हैं मान रहे भाई नहीं मान रहे हैं अभी बता रहा वो आपका कहना और कथनी और करनी मैच नहीं हो रहा है देखिए देखिए आप सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए तो सुनिए सुनिए बता रहा हूं मैं आपने वेद लिए इन भाई साहब से फिर इन्हीं भाई साहब ने वेद का अर्थ आपको बताया आपने नहीं माना आपने कहा हम सदानंद का वो मानेंगे ठीक इसका मतलब आपको इन भाई साहब से ज्यादा विश्वास किस पर है सदानंद जी पर है तो इन भाई

00:25:46:14 साहब से मिलने वाले वेदों पर भी आपको विश्वास कैसे हुआ वेदों को जो प्रैक्टिकल वेदों में जो श्लोक मंत्र है उस मंत्र को प्रैक्टिकल प्रैक्टिकल करने के बाद प्रैक्टिकल प्रिक स्वीकार करेंगे जैसे h2 इ टू वाटर तो h2 कोई कौन स्वीकार नहीं करेगा आपका कहने का अर्थ है कि हमने ब्रह्मलीन होक के स्वयं देखा है ब्रह्मलीन होक कर के देखा है यही देखिए जो जो प्रैक्टिकल है वो तो यही है कि हम ब्रह्मलीन हो गए तभी हमें पता चलता है सुनिए बात ऐसा नहीं है ऐसा नहीं है जो क्या कि प्रैक्टिकल जो चीज है आपको समझ में नहीं आएगा इसलिए हमने कहा कि पहले आप समझिए प सम अच्छा एक एक चीज और कर लेते हैं अब मुझे बताइए आपने कहा वो झूठ झूठ बोल सकता है आपने कहा कि भाई वह हमसे झूठ नहीं बोल रहे आपसे झूठ नहीं बोल रहे वह झूठ बोल सकता है पर वह आपसे झूठ चलिए ठीक है अब मैं आपसे एक प्रश्न और कर देता हूं क्या वह आपसे झूठ बोल सकते हैं हमको झूठ नहीं बो ज्ञान झूठ नहीं बोलता मैं मैं पूछ रहा हूं क्या सदानंद जी के द्वारा प्रतिपादित होने वाले परमेश्वर आपसे झूठ बोल सकते हैं बिल्कुल नहीं नहीं तो ये तो नियम लागू हो गया कैसे वो झूठ नहीं बोल सकते देखिए लीला करने के लिए लीला में कुछ

00:27:01:19 भी हो सकता है लीला में कुछ जो ज्ञान ज्ञान परम सत्य होता है वो परम सत कैसे झूठ बोलेंगे तो इसका मतलब आपके जो ईश्वर है बाधित है जो परमेश्वर है बाधित है ईश्वर चीज है आपके द्वारा प्रतिपादित होने वाले परमेश्वर बाधित है जो वो आपसे झूठ नहीं बोल सकते ना परमेश्वर झूठ नहीं बोल सकते तो ये नियम हो गया ना कि वो आपसे झूठ नहीं बोल सकते क्योंकि परम परम सत्य ज्ञान स्वरूप होता है मैं आपसे पूछ रहा हूं वह आपसे झूठ बोल सकते हैं कि नहीं परमात्मा परमेश्वर भगवान भाई साहब झूठ नहीं बोल सकते तो ये नियम हो गया ना नियमित हो गया ना ईश्वर भाई ईश्वर परमेश्वर कैसे नियमित हो गया ये तो हम वो आपसे झूठ नहीं बोल पा रहा है बेड़िया है उसके हाथ में बोल सकता है नहीं नहीं परम सत्य परम सत्य ही होता है मैं पूछ रहा हूं वो आपसे झूठ बोल सकते हैं परम सत्य झूठ नहीं बोल सकते तो ये बेड़ियां है ना नहीं बोल सकते क्या है लिमिटेड शिकंजा है ना देखिए परमात्मा परमेश्वर भगवान जो परम सत्य होते हैं उनका क्या है कि लिमिटेशन उन्हीं के ऊपर निर्भर करता है किनके ऊपर उसी परमात्मा के ऊपर वो तय करते हैं यानी बोल सकते हैं हा वो आपसे वो आपसे झूठ बोल

00:28:16:22 सकते हैं देखिए आप जबरदस्ती कर रहे बात ऐसा देखिए जो मैं बारबार कह रहा हूं कि लीला में लीला में कुछ भी कर सकते है भक्तो भक्तो के सामने भक्तों के सामने वो झूठ नहीं बोलते तो आप उनके भक्त हैं तो मैं फिर पूछ रहा हूं क्या वह आपसे झूठ बोल सकते हैं जी नहीं यानी कि ईश्वर सीमित हो गया वह अपने भक्त से झूठ नहीं बोल सकता परमेश्वर किसी को झूठ नहीं बोलते वही मैं आपके जो परमेश्वर है अब मैं पूछ लू देखिए हमारे यहां जो श्लोक है वो है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है तैत्र उपनिषद दो एक ईश्वर किसी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है ठीक है अब आप कह रहे हैं कि मेरा जो आप जो परमेश्वर बता रहे हैं वो उस वो सब कुछ कर सकता है एक काम नहीं कर सकता है उसके जो भक्त है वो उससे झूठ नहीं बोल सकता है है ना झूठ नहीं बोल सकता ना तो यहां पर तो व सीमित हो रहा है ना एक नियम आ रहा है उसके ऊपर कि वह अपने भक्तों से झूठ नहीं बोलेगा बा ऐसा है कि सद ग्रंथों को रहस्य समझने के लिए हम लोग को जानना होगा इस संप में बात आ ग कि अगर अभी हमें रास्ते नहीं होता वो

00:29:32:07 अभी हमें रास्ते में कोई व्यक्ति और मिल जाए आपने कहा रहस को समझो अब हम आपके साथ चले गए रहस को समझ के बाहर आए फिर कोई हमें दूसरा मिल गया अब रहस को वो समझाएगा फिर रहस को तीसरा समझाया सबके रहस्यों को समझते रहे अब बात ये आती है सुनिए सुनि सुनिए तो अब बात ये आती है कि भगवत गीता 4 दोती 16 कहता है परंपरा से प्राप्त होने वाला ज्ञान ही आपके लिए वो है और तेरे लिए कर्तव्य और अकर्वेंट

00:30:11:07 अवतार आया उसने वेदों का आंशिक रूप से वह भले ही धर्म की स्थापना के लिए किया मगर वेदों का विरोध किया हम वेदों को हम बुद्ध की उस शिक्षा को नहीं मानते हैं तभी हम सनातनी है मान लेते तो हम ना कहलाते सनातनी तो सनातन वो है वेद में दिया गया है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है तो अगर हम बुद्ध भगवान के बुद्ध अवतार पर विश्वास कर ले और बदल जाए वेदों को छोड़ दे तो हम सनातन ही नहीं कहलाएंगे तो कहने का अर्थ य है कि भगवान आकर के हमसे अगर कुछ कह रहे हैं कि यह मत मानो वो मानो आपने कहा सदानंद जी भगवान है थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि वो भगवान है मगर परमेश्वर है परमेश्वर है जी जी मानना जो शब्द है अरे भाई जान लेते हैं आप कहां दूसरी ओ हम जान लेते हैं ठीक है जान

00:31:04:19 लेते मैं और देखिए मैं और नियमों की बात करूंगा अब आपने एक तो नियम लागू कर दिया भगवान पर वो अपने भक्त से झूठ नहीं बोल सकता यही है ना वह आपसे झूठ नहीं बोल सकता वह सीमित है हमारी मान्यता यह है वह कर तो सब कुछ सकते हैं मगर अगर वह झूठ बोलेंगे अर्थात वेदों के विरोध में बोलेंगे उतने अंश को हम भगवान नहीं मानेंगे जैसे कि जैसे कि हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं ठीक है अब हनुमान जी के रूप में भगवान आए और स्त्री गमन करें हम कहेंगे यह बैरू पिया है हनुमान जी नहीं है यह है सनातन अगर वह शास्त्रों के विरुद्ध जाएंगे जैसे राम जी वह पत्नी व्रता है एक एक मिनट जैसे राम जी पत्नी व्रता है अब वह आए राम के रूप में दोबारा भगवान आए अब वह एक पत्नी की बजाय चारचार पत्नी विवाह कर रहे हैं तो हम उस व्यक्ति उस भगवान के उस रूम को कहे राम नहीं है क्योंकि राम तो वही है जो शास्त्रों के अनुसार चले एक पत्नी कहा है तो वो एक पत्नी वाला वही राम है ठीक है इसका अर्थ ये है कि आपके जो भगवान है जो भगवान नहीं सॉरी परमेश्वर नहीं आप फिर पकड़ लोगे जो परमेश्वर है संत ज्ञानेश्वर जी के आधार पर प्रतिपादित होने वाले जो ईश्वर है आप कह रहे हैं कि वो आपसे झूठ नहीं बोल सकते तो ये तो एक नियम हो गया ना देखिए सुनिए

00:32:20:04 बात ऐसा है कि परमात्मा परमेश्वर जो होते हैं वो परमात्मा परमेश्वर किसी नियम वो सारे नियम सिद्धांत व मनुष्य के लिए बनाते हैं सार सृष्टि के लिए बनाते हैं नियम सिद्धांत लेकिन परमात्मा भगवान को समझने के लिए इतना सहजता से हम नहीं समझ पाएंगे इसलिए इसलिए उसका आपको समझना होगा य संसार क्या है परिवार क्या है शरीर क्या है जीव क्या आपसे ही क्यों समझे फिर आपसे ही क्यों सम आप जान लीजिए कहने का अर्थ है यह मेला है इसमें इसमें 300 लोग हैं तो फिर आप यह नहीं कहते कि हम सच बोल रहे बा सब झूठ बोल रहे हैं नहीं सभी लोग अपने अपने दायरे प सब सच बोल रहे हैं सभी सभी कह रहे हैं हम सत्य का प्रचार कर रहे हैं कोई नहीं कह रहा कि हम असत्य का प्रचार कर रहे हैं फिर वही बात है ना आपके ऊपर भरोसा क्यों किया जाए कि हम आपके पास आए आपने जो जो गतिविधियां कहीं हमने किया साल भर लग गया उसके बाद हमारे प्राप्त हुआ भैया हमें नहीं मिला जो हम लेने आए थे उसके बाद हम क्या करें निर्णय लिया भैया चलो यहां से तो ऐसा ही हम जीवन भर करते रहे या फिर एक या फिर शास्त्रों में कहा गया है मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनिषद पढ़ ले जब तब व्रत दान पुण कर्म तीर्थ दान यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है अगर उसका कोई गुरु नहीं है सबसे पहले क्या होना

00:33:35:04 चाहिए मैं पूरी कर लू जैसे आपको मैं पूरा करने दे रहा हूं तो सबसे पहला क्या है मनुष्य का गुरु होना चाहिए अब गुरु कौन होगा सबसे पहले अथर्व वेद 11 पा 16 ब्रह्मचारी ही सन्यासी बनता है तो गुरु का अंतिम निर्णायक पद जो मनुस्मृति 12वां अध्याय 112 से 114 तो गुरु का जो अंतिम वो लक्षण बताया गया अंतिम गुरु का ऐसा नहीं ग्रस्त भी गुरु हो सकता मगर वह किसी ना किसी सन्यासी के अधीनस्थ रह कर के आपको ज्ञान दे रहा हो तो सबसे पहला लक्षण क्या आया अच्छा मनुस्मृति में क्या कहा गया है कि धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी सन्यासी को बनाए तो कहने का अर्थ हुआ पहला लक्षण हमें प्राप्त हुआ सन्यासी जैसे करपात्री जी थे जैसे जो शंकराचार्य के पद पर विराजमान होते हैं वो होते हैं अच्छा दूसरा क्या है भगवत गीता 4 दोती 16 छंद उपनिषद मांडो उपनिषद यह सब में लिखा हुआ व स्वा अध्ययन ना करें सपनों में आए हुए भगवान की बातों विश्वास ना करें वो जो चमत्कार दिखा रहा है उस पर ना जाएं आप जो है परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर के अध्ययन करें इसीलिए भगवान श्री कृष्ण भी जब जन्म लेते हैं तो गुरु सांदीपन के पास जाते हैं राम जी जब जन्म लेते हैं तो वशिष्ठ के पास जाते हैं यानी परमेश्वर भी अगर धरती पर आता है तो वह किसके

00:34:50:06 पास जाता है परंपरा प्राप्त आचार्य के पास अच्छा दूसरी बात वाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है रामो विग्रह धर्मा 337 13 राम ने जो जो किया वह धर्म है अब राम जी गुरु के पास जा रहे हैं फिर हम ऐसे गुरु को ऐसे राम जी गुरु के पास जा रहे हैं मगर हम ऐसे गुरु के पास जा रहे जिसका कोई गुरु नहीं है है ना तो यह तो हम राम के विरुद्ध जा रहे हैं और राम धर्म है तो धर्म के विरुद्ध जा रहे हैं तो सनातन के विरुद्ध जा रहे हैं फिर भी हम स्वयं को सनातन कह रहे हैं इस पर क्या कहेंगे आप इसमें यह कहेंगे हर चीज की जानकारी होनी चाहिए परमाणु से लेकर परमात्मा तक प्रैक्टिकल जानकारी होनी चाहि ग्रंथ पढ़ कर कोई समझ नहीं पाएगा बुध विचार ग्रंथ जो बुद्धि विचार का विषय है नहीं है बुद्धि विचार का विषय है नहीं मैं ये नहीं कह रहा हूं मैं ये नहीं कह रहा हूं मैं सनातनी तभी हूं जब मैं वेद को मानू सबसे पहले मुझे मानना पड़ेगा हा सारे सद ग्रंथ जितने सद ग्रंथ है सिर्फ वेदला वेद सद ग्रंथ नहीं है सारे सद ग्रंथ है सारे सद ग्रंथ जिसको प्रमाणित करते हैं वो है परम सत्य परम एक ही होता है तो परम सत्य को जानने के लिए उसका विधान है तत्व ज्ञान आपका कहना है जो कुरान का भी जो ज्ञान है व भी अच्छा ज्ञान है अच्छा ज्ञान है

00:36:05:07 क्योंकि य सि भाषा का झगड़ा है सि भाषा का झगड़ा जैसे हम लोग भगवान कहते हैं परमात्मा कहते हैं परमेश्वर कहते हैं उन लोग उ लोग दूसरे भाषा में कहते हैंते खुदा कहते कते कहते क्या कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और सनातन धर्म ग्रंथों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला एक ही है या अलग अलग परमेश्वर एक ही मैं पूछ रहा हूं कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और सनातन धर्म के द्वारा प्रदत होने वाला ईश्वर एक ही है तो कुरान छ 101 में लिखा हुआ है मैं तो क्या मेरी संतान भी जन्म नहीं ले सकती अवतार नहीं ले सकती और भगवता लिखा हुआ है यदा य धर्म भव भारता ध

00:37:01:04 तो यह दोनों अंतर आ रहे शरी में र नार मलते य और दूसरा क्या हैरान शरीफ भाष का अंतर आपको कुरान कैसे मिली बाजार तक कैसे

00:37:36:09 आई यानी कि जिससे किताब आ रही है आप उसके अर्थ को नहीं मान रहे वो कह रहे हैं हमारा जो अल्लाह है वो अवतार नहीं ले सकता नहीं कुरान शरीफ में लिखा हुआ बात है ख आपने उर्दू कहां से सीखी मैंने उर्दू नहीं सीखा हिंदी बोलना नहीं इसका अर्थ ये है कि जो उर्दू बना रहा है सिखा रहा है जो ग्रंथों को लिख रहा है उसका अर्थ बता रहा है आप ना तो उसका अर्थ मानेंगे ना उसकी उर्दू मानेंगे आप अपना अर्थ निकाल लेंगे उसी के ग्रंथों से जी नहीं अपना अर्थ नहीं निकाले अ सवग हो सत्य होता सर्व होता है क्या अल्लाह की कहीं पर मूर्ति बनाई है कुरान वालों नेन्ने मति नहीं बनाया मति नहीं बनाया न मूर्ति पूजा उस भी उसम साफ 6 में लिखा है मेरी संतान नहीं हो सकती क्या हमारा भगवान ऐसा है सनातन संतान नहीं हो सकती सम में जाना

00:38:47:06 पड़ेगा इसलिए तो पूछ रहा अ चलिए इसको छोड़ रामायण में राम जी कह रहे हैं रामो दना भाष राम दो प्रकार की बातें नहीं करता जिसको मां कह दिया वो मां बहन कह दिया वो बहन बेटी कह दिया वो बेटी उसके साथ वैसा ही व्यवहार होगा ठीक है यह बात आप मानते हैं कि नहीं मानते सही है या गलत है रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई परवचन ना जा इसको मानते हैं सही कि नहीं मानते तो राम जी ने कहा य तो स्वीकार करते करते अब 33 च में पुराण का ईश्वर कह रहा है कि तुमने मुंह से अगर किसी को मां बहन बेटी या कुछ भी बोल दिया है वो तुम्हारी मां बहन बेटी नहीं हो गई तो उससे मुक सकते हो ऐसा नहीं अ नि फिर अपना अपना कैसे निकाल आप मुझे अगर तुमने किसी को बहन बेटीया मा बोल दिया हैसे कर सकते हो य सब री मु की बात हमारे य पर कहा जा रहा है राम कह रहे राम दो प्रकार की बातें नहीं करता तो क्या यह दोनों शिक्षाए सही है

00:39:58:15 देखि किसी जाने सम पने के लिए बिना आ आपने पने से सम प हैन केनिया में अच्छा है डिपेंड वैदिक वेदों से ही है मान रहे उसके बाने भवत है गीता बाद में लि आपको नहीं पता है वेदों से भी पहले ब्रह्मा जी ने पुराणों का स्मरण किया है शलोक पुराण में शलोक है पुराण बाद में नहीं ख हमारी जो सनातन ग्रंथावली है ब दो च यह सदैव से विद्यमान ी श्वर की सास के रूप में इसको लिखा ही नहीं कभी अगर लिख देता तो इसम ये आ जाता किय ईश्वर ने झूठ बोला है कि सच ईश्वर ने इसको लिखा नहीं है हम उन ग्रंथों को मानते हैं जिसको ईश्वर ने भी नहीं लिखा व ईश्वर की सास के रूप में सदैव से विमान सुन लीजिए सुन व ईश्वर की सास के रूप में सदैव विद्यमान

00:41:14:04 सास का अर्थ क्या होता है मेरे सामने दो लोग है एक आप है एक य अब मुझे किसी एक को बुलाना है यदि मैं चाहता हूं किसी को बुलाना तो तो आपको बुलाऊ और मैं चाहू तो इनको बुलाऊ मगर कुछ कार्य हम ऐसे भी करते हैं जो हम बिना चाहत के करते हैं ऐसा ही एक कार्य सास जैसे बच्चा जन्म ले रहा है माता के घर से उसको कोई मतलब नहीं है मगर वो सांस ले रहा है ऐसे ही भगवान की सांस के रूप में हमारे सनातन शास्त्र भगवान ने रचा नहीं क्योंकि भगवान अगर इनको रच देते तो फिर बात ये आती कि भगवान के ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता है और भगवान झूठ भी बोल सकता है फिर हम उस पर भरोसा नहीं कर सकते इसलिए हमारा धर्म प्रतिपादित वेद शास्त्रों से मनुस्मृति दो जो कहती है वेद विरोधी नास्तिक जो वेदों का विरोध करेगा एक मंत्र का भी विरोध कर देगा वो नास्तिक है और मनुस्मृति क्या है जब बाली के बाली का वद करते भगवान श्री राम तो बाली उन पर मनुस्मृति के श्लोकों से प्रहार करता है कि तुमने मेरा व गलत किया राम जी उसे मनुस्मृति के श्लोकों का उदाहरण देक बताते मैंने तुम्हारा मत सही किया इसका अर्थ मनुस्मृति को कौन मानता है राम और रामो विगवा धर्मा अगर हम मनुस्मृति को नहीं मानते तो हम राम

00:42:29:07 को नहीं मानते हम राम को नहीं मानते तो हम धर्म को नहीं मानते तो धर्म पशु समाना हमारे और परमात्मा के बीच की बा कोई परंपरा होता नहीं और दूसरा हम किसी जन दे नहीं सकते उसके बारे में बता सकते भगवत जन में कोई परंपरा है जन है परपरा परपरा लेन भग जन में परमात्मा ज्ञान परमात्मा ही देगा सेकंड हम लोग इसको स्वीकार करते है भ विष्णु जी ने जो उपदेश दिया जी भगवान श्री राम जी ने हनुमान जी को र उपदेश दिया भगवान कृष्ण जी ने अन को उ को उपदेश दिया वही

00:43:17:03 उपदेश ष क्या फिर वही बात आ गई जब आपने ग्रंथ लिए परंपरा प्राप्त तो आपने अर्थ क्यों नहीं परंपरा प्राप्त सचाई है सत्यता है इसका मतलब आपको ग्रंथ पढ़ने से पहले मालूम है कि सच्चाई क्या है भगवान के पढ़ने से पहले पहले नहीं प नहीं लेकिन न प्राप्त करने के बाद आपको ग्रंथ पढ़े बिना आपको जानकारी आ गई ना सच्चाई क्या होती है क्या है बरा न शिक्षा लेकिन जो ज्ञान है समझ में नहीं आएगा तो इसका मतलब आप भगवत गीता का 16 अध्याय का 24 श्लोक नहीं मानते कि तेरे लिए अच्छे बुरे का प्रमाण केवल और केवल शास्त्र है य केव शस्त्र प्रमाण स्वीकार करते प्रमाण के र पर में जो सत भी है सत भी है अच्छा मतलब भगवत गीता झूट भी बोल रही है कहीं रामायण झूट भी बोल रही है कहीं राम जी झूठ भी बोल रहे क राम जी ू क कर रहे

00:44:35:08 निवेदन कियान समझ ली जानने समझने में तो आदमी फस जाता है नहीं ऐसा नहीं है ऐसा नहीं गुरु गुरु की बात कर रहा आपसे उनके गुरु गुरु गुरु के गुरु कौन है तो आप नहीं बता नके गुरु हो उनके गुरु गु जी हो उनके गुरुरा है है पूरी आपके पास

00:45:12:20 पर सं है हैन अ है जन दे रहे परपरा सेन परमेश्वर से जन मिला का प्र प्रसार कर ऐसा ऐसा वही तो मैं कह रहा हूं कि जो वेद शास्त्रों का ज्ञान है व परंपरा से मिला मगर उसका अर्थ हम अपने मन से ले रहे हैं ये क्यों दूसरी बात मन से नहीं ले रहे न बाटल भैया ना तो आप अभी त दर्शी बने ना तो आप तत्वदर्शी बने ना ही आप बमन हुए आप कैसे कह रहे कि मैं सिद्ध कर लिया जन सार चीज स चीज ऐसे उठा कर हम नहीं समझ सकते अब देखिए स्कंद पुराण का एक वचन उ कर रहा हूं गु गुरु वही जो आपका संशय दूर कर दे अब मेरा संशय है कि भाई भगवान आपने कहा सर्वशक्तिमान है भगवान किसी भी नियम के नीचे नहीं आता है भगवान किसी भी नियम के नीचे नहीं आता फिर मैंने कहा क्या भगवान आपको झूठ बोल सकते हैं क्या परमेश्वर सदानंद जो आपके द्वारा स्पित होने वाले ईश्वर है परमेश्वर है क्या वो आपको बो सकते आप बोल रहे हो नहीं बोल सकते

00:46:28:06 तो ये आपकी बातें आप ही काट रहे हो ना तीन बात हुई तीन बात हुई निचोड़ अभी तक अभी तक का तीन बात एक कि हमने जो ग्रंथ लिए वो तो परंपरा से लिए पर हमारा जो ज्ञान है जो ग्रंथों का अर्थ है वो परंपरा से नहीं है वो हमारे अपनी आत्मानुभूति का है आपने प्रैक्टिकल बताया ना प्रैक्टिकल का है मैं अप मैं तीन बातें बोल तीन बातन एक चीज तो ये आई कि हमने शास्त्र तो लिए परंपरा से मगर अर्थ लिया अपने अनुभव ठीक दूसरी बात कि भगवान सब कुछ कर सकता है मगर वो आपको झूठ नहीं बोल सकता तीसरी बात कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और सनातन धर्म ग्रंथों के आधार पर प्रतिपादित होने वाला ईश्वर एक ही है भले ही कुरान का ईश्वर कहता हो कि तुम अपनी बात को बदलो और सनातन श् कहता मत भले हीरान का ईश्वर कहता हो अवतार नहीं ले सकता और सनातन ईश्वर कहता हो कि जब जब धरती में पाप बढेगा मैं अवतार गा तब भी आपका और उनका ईश्वर एकय तीन बात अभी तक पकड़ में

00:47:45:01 आई उ नय करूगा य है अवतार का ही दे लेसी ज्ञान समझ में नहीं आता कर देता है मैं पूछ रहा हूं आपको उर्दू कुरान किसने पढ़ाई जिसके पास कुरान के मंत्र लेकर के जिसके पास कुरान की आयत लेकर के जो आ रहा है वो अपने लोगों को जो बता रहा है अर्थ भी बता रहा है मगर वो अर्थ हम नहीं मानेंगे जिससे हमको लिखा वही तो हम कह रहे हैं जिससे हमको लिखा हुआ प्राप्त हो रहा है उसी से हमको उसका अर्थ प्राप्त हो रहा उस अपने मन से

00:48:32:06 कर कोई विचार विय नहीं करके समे सम लिखा हैय लिखा है कोई भी सद ग्रंथ बुद्धि विचार का विषय नहीं है अगर वो बुद्धि विचार का विषय ही नहीं है तो हम पढ़ क्यों रहे के लिए आ बढ़ने के लिए बुद्धि से पढ़ेंगे बिना बुद्धि के जो आप पढ़ रहे हैं पढ़ रहे और विचार कर मैं पूछ रहा बुद्धि से पढ़ेंगे विचार करेंगे कि नहीं करेंगे विचार उस बोला जा रहा है बुध विचार अल तो अल का जो रहस्य है होना पड़ेगा मैं पूछ रहा हूं क्या मैं बुद्धि लगाऊंगा पढ़ते समय कि नहीं लगाऊंगा प कोई समझ नहीं सकता मैं बारबार क रहा कह रहे हो बुद्धि विचार का विषय नहीं है बुद्धि विचार बुद्धि विचार ना करू तो मैं पढ़ूंगा कैसे पढ़ते

00:49:38:21 रहि तो आपने कहा कि कहने का अर्थ यह है कि कुल मिलाकर के वेदा आदि शास्त्रों का जो ज्ञान है वह वेदा दि शास्त्र आप तक जो पहुंचा रहे हैं उनको नहीं है उनसे किताबें आपको चाहिए वैसे आप तत्वदर्शी हैं तत्व ज्ञानी तत्वदर्शी हैं तत्व ज्ञानी आप तत्व ज्ञानी है मगर मंत्र आपको रटे हुए हैं क्या वेदों के नहीं मैं रटा नहीं हूं इसका अर्थ है कि वेद के मंत्रों के लिए या शास्त्रों के जो श्लोक है उनके लिए आप निर्भर करते हैं परंपरा प्राप्त गुरुओं पर आचार्यों पर पर अर्थ आप अपना लेते हैं है ना और आगे की बात यह है कि अब इसी प्रकार से आपने कुरान का भी लिया कि आप कुरान की जो आयतें हैं वो तो आप लेंगे उनसे ही जो उनकी परंपरा में आई है उनकी ट्रेडिशनल गे मगर उनका भी अर्थ आप स्वयं करेंगे उनका अर्थ नहीं मानेंगे जो कुरान का अर्थ आपको करके देगा जिसने किताब आप तक पहुंचाई देखिए जो अर्थ करके देगा उस अर्थ अर्थ अर्थ को समझने के लिए हमने बार-बार कहा आप लोग को मैं आपसे पूछ रहा हूं जो आपको किताब देगा उसका अर्थ आप नहीं मान रहे आप अपने हिसाब से उसको करें सत्य होगा अगर सत्य होगा तो स्वीकार करेंगे असत्य स्वीकार नहीं करेंगे

00:50:54:04 सत्य का पैरामीटर शुरू तो शास्त्र से ही होता है ना शास्त्र में नहीं जैसे कि एक एग्जांपल बता दूं मनुष्य को अपनी माता से विवाह नहीं करना है यह अच्छा नहीं होता है यह हमने कहां से सीखा धर्म से धर्मे ना पशु भी समाना अगर व्यक्ति ने व्यक्ति के पास धर्म नहीं है तो वह पशु है तो पशु है तो हमने सीखा शास्त्र से धर्म से कि भाई बहन से विवाह नहीं करना है माता से विवाह नहीं करना है स अच्छा और बुरा हमें शास्त्र से पता लगा कर्तव्य और अ कर्तव्य हमें शास्त्र से पता लगा मगर हम यह कह रहे हैं कि अगर उसमें दी गई चीज अच्छी है तो हम मानेंगे अच्छी नहीं है तो हम नहीं मानेंगे इसका मतलब हमको पहले से पता है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा है शास्त्रों से पहले ही पहले पहले मनुष्य का अपना अस्तित्व को पहचानना जरूरी है मैं कौन हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं जब अपना अस्तित्व नहीं जानेगा जब अपना अस्तित्व नहीं जानेगा किसी सद्र का रहस्य समझ नहीं पाएगा रहस की बात तो छोड़ दीजिए एक छोटा बच् बिटिया है छोटी 5 साल की बिना कपड़ों के बाहर चली जाएगी उसके मां-बाप अगर उसको नहीं सिखाएंगे कपड़े पहन के ही बाहर जाना कपड़ों के बिना बाहर जाना गलत

00:52:09:07 बात है तो क्या वह सीखे गी कि बिना कपड़ों के मुझे बाहर नहीं जाना है व तो शिक्षा है शिक्षा शिक्षा शिक्षा नहीं है धर्म है बिना कपड़ों के निर्वस्त्र हो कर के स्त्री को बाहर ना जाना धर्म है उसका ज्ञान क्या कहता है ज्ञान य कहता है ना और सत्य नहीं सत्य की ओ चले अतो सद मत य तीन सूत्रों का तीन सूत्र का जब त हम लोग प्रैक्टिकल नहीं होगा तो प्रैक्टिकल नहीं होगा कुछ समझ में नहीं आएगा और दूसरी बात किसी भी बात पर भरोसा ना करें बस हम आपकी किताबें ले ले और प्रैक्टिकल करते रहे जी नहीं प्रैक्टिकल करते प्रैक्टिकल कर लेगा प्रैक्टिक कर लेगा हम य नहीं ह ग्रंथ पढ़े उ ले उ आ करके जान जाए जानने के बा नि करे व किसी गुरु किसी संस्था की हो हिंदू मुस्लिम कोई सं की हो तो जान हम लोग कह रहे हैं लेते ला कुछ कुछ अंतिम कुछ

00:53:22:04 अम कुछ अंतिम प्रश्न ले लेते हैं कि जैसे कि आपने बताया कि आपके जो परमेश्वर हैं वह आपसे झूठ नहीं बोल सकते इतनी मर इतना सीमित है वह एक सीमा लगी हुई है वह आपसे झूठ नहीं बोल सकते अब यह बताइए ईश्वर सिद्ध कैसे होता है कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है आपके ज्ञान के अनुसार ज्ञान के अनुसार हमारा जो है जीव ईश्वर परमेश्वर तीनों तीन होता है अलग अलग होता है पूछ रहा हूं इस इस दुनिया में इस दुनिया मैं अपना प्रश्न ठीक कर दूं इस दुनिया में कोई परमेश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है पहला सिद्ध ये होता है हम जिंदा है जीवन शक्ति उसी से आ रहा है और सारा सृष्टि का रचयिता वही है ये तो आप बोल रहे हैं क्लेम कर रहे हैं मुझे आप समझाइए कि इस दुनिया में ईश्वर है मुझे मानना पड़ जाए बिलीव करवाइए मैंने बिलीव करने के लिए शास्त्र भी कह रहा है रामायण भी कह रहा है बनु जाने नही प्रतीति बिन प्रतीति नहीं प्रीति बिन प्रीति भक्ति ना दोढाई तो पहले चौपाई वहां लिखा है हमको हो सकता है गलत भी हो तो बोलने में हमारा इतना तो याद नहीं है फिर भी जो मैं कह रहा हूं जो प पहले जानना पड़ेगा जाने बिन जाने की बात आप कर रहे हैं ना तो वो जनवाई

00:54:37:08 है तो कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है हा पहले आप जानी जान लीजिए कोई ऐसी बात कहिए कि मैं जानू इस दुनिया में कोई ईश्वर है हा तो जो ऐसी है कि परमेश्वर सारा सृष्टि का जो एक परिवर्तन नहीं होता जो परमेश्वर है व उसका परिवर्तन नहीं होता बाकी सृष्टि परिवर्तन हो सकता है तो तो उसमें तो उसमें यह देखना है कि परमेश्वर स सृष्टि कोई तो रचता है ना ईश्वर को डार्विन ने नकार दिया था ईश्वर को डार्विन ने नकार दिया था इस दुनिया में कोई ईश्वर ही नहीं है यह सृष्टि एवोल्यूशन से चल रही है विकासवाद से है और डार्विन ने नकार दिया था उसको जवाब पता है किसने दिया था करपात्री जी ने और उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी नास्तिक ब आस्तिक उसमें उन्होंने उन्हें जवाब दिया डार्विन जै को जो ईश्वर को नकारते हैं उन्होंने उसमें बताया कि एक नास्तिक के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक के अंदर भी अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक के अंदर भी सदा आनंदित रहने की चाह विद्यमान है कभी ना मरने की चा मुझे कभी कुछ ना हो अखंड ज्ञानी बनने की चा यह आदमी कौन है यहां क्यों आया है सब कुछ जानना चाहता है कभी ना दुखी होने की चा कि भाई मेरे

00:55:52:13 बाल कभी सफेद ना हो मेरे झुर्रियां कभी ना है इनको निचोड़ भी कर दें तो वह इस दुनिया को कंट्रोल करना चाहता है जैसे कि बारिश ज्यादा हो रही तो कम हो जाए आज मौसम बड़ा खराब था यह क्या है मैं मौसम को भी अपनी इच्छा अनुसार कंट्रोल करना चाहता हूं और जैसे कभी-कभी य आता है कि मैं अपनी माता की गोद में वापस जाकर के खेल आऊं यानी कि मैं काल को भी कंट्रोल करना चाहता हूं तो यह जो तीन प्रकार की चाह होती है इसी को कहते हैं सत चित आनंद सत मतलब कभी ना मरने की चा हमेशा सत हो के अस्तित्व में रहे और चित का मतलब अखंड ज्ञानी और आनंद मतलब सदा सुखी तो सत चित आनंद तो अब नियम यह कहता है कि हमारे अंदर जिस जिस प्रकार की प्यास है उस उस प्यास का जो सब्जेक्ट है वह दुनिया में मौजूद है जैसे कि हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में पानी है हमारे

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→ Used in: A · Video एक नया पाखंड | आध्यात्मिक विश्वविद्यालय या पागलखाना at 32:26 ↗

00:56:41:10 अंदर सुनने की चाह है तो दुनिया में ध्वनि है हमारे अंदर देखने की चाह है

⬜ Not used yet · 00:56:45:07 – 01:11:29:07 (14:44)

00:56:45:07 तो दुनिया में दृश्य है हमारे अंदर भूख है तो दुनिया में खाना है हमारे अंदर भोग की कामना है तो दुनिया में संभोग है इसका अर्थ है हमारे अंदर ऐसी कोई प्यास नहीं है जिसका इंतजाम इस दुनिया में ना हो तो जिस प्रकार नेत्रों की चाह का विषय दृश्य सिद्ध होता है सुनने की चाह का विषय ध्वनि सिद्ध होती है भूख का विषय खाना सिद्ध है प्यास का विषय पानी सिद्ध है उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सत चित आनंद की चाह का विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है ठीक है तो अब जो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सिद्ध हो पाए वो कैसे सिद्ध हो पाए कि एक मनुष्य जो है वो सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है तो इस चा का विषय कौन होगा वह ईश्वर जो सब कुछ कर सकता हो मगर आप यह कह रहे हैं कि वह आपसे झूठ नहीं बोल

00:57:37:25 सकता अगर आपका आपका परमेश्वर झूठ नहीं बोल सकता आपसे इसका मतलब वह सब कुछ कर सकने वाला नहीं है तो यह मनुष्य की उस चाह का विषय ही नहीं है जिससे कि ईश्वर की सिद्धि हुई जितनी हमारा बात हुआ यह बात हुआ है एक ज्ञान अज्ञान सत असत का है तो बात ऐसा है हम बारबार क जो पद्धति है जो विधान है जो विधान है हर किसी को हर कि सत्य का विधान जानकर सत्य मार्ग में चलेगे सत्य के पास पहुचे सत्य का लाभ मिलेगा शास्त्र ग्रंथ इसलिए पढ़ कर के आदि शक जी ने कहा क्या कहा आ विवेक चौड़ा में आदि शंकराचार्य जी को आप कैसे जानते हैं उन्होंने जो कहा आपको कैसे पता चला उ उनका जो कहा उन्होंने जो कहा वो आपको कैसे पता उ उन्होंने जो ग्रंथों से उनके ग्रंथ आपको दिए उन्होंने उन्होंने नहीं दिया किसने दिए मार्केट से लिए मार्केट में कैसे आए मार्केट से मार्केट मार्केट से मार्केट से कैसे आए कोई लिखा होगा कोई संस्था दिया होगा कोई लिखा होगा कोई लिखा होगा क्या तरीका है भाई भाई जिसने शास्त्र लिखे उसने अपने शिष्य को दिए शिष्य ने अपने

00:58:52:25 शिष्य को दिए शिष्य ने अपने शिष्य को दि दिए तब गुरु शिष्य परंपरा से वह ज्ञान आप तक आया तो आप उनके बारे में कोई भी बात तब बोलिए जब उनसे जाकर के उस ज्ञान को प्रमाणित करिए कि मैं जो इसका अर्थ समझ रहा हूं सही है कि नहीं जैसे कि तीन बेर खाती थी वोह तीन बेर खाती है बेर शब्द दो बार आया इन दोनों लाइन में कोई अंतर है क्या शास्त्र ग्रंथ मैं पूछ रहा हूं तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है इन दोनों लाइन में कोई अंतर है क्या तीन पैर का तीन पैर का तीनों बेर का अर् तो हमको पता नहीं है हां अब सुनिए तीन बेर खाती है में कवि जो है वो एक बार कह रहा है कि व पहले तीन बार खाना खाती थी और आज वह कह रहा है कि उसकी हालत ऐसी है कि अब वह दिन भर में सिर्फ तीन बेर खाती है यह अर्थ मुझे पता है कैसे मिला जिसने उसको लिखा उसने अपने शिष्य को बताया उसने अपने शिष्य को बताया उसने अपने शिष्य को बताया तब मुझे अर्थ मिला अन्यथा मैं भटकता तो इसीलिए इसीलिए स्कंद पुराण में कहा जाता है आप आप जो है जब तक परंपरा प्राप्त प्रमाणिक आचार्य की शरण में नहीं जाओगे तो आप भटक जाओगे इसीलिए कहा जाता है तो इसलिए इसलिए भगवान विष्णु जी की जो उपदेश है भगवान श्री राम जी के उपदेश है भगवान कृष्ण जी के उपदेश है और वो उपदेश आपको

01:00:07:28 कैसे प्राप्त हुए भाई ग्रंथों से पता हुए वो ग्रंथ वहां के आप तक कैसे आए हमारे हमार तो अभी तो आपने बताया मैं दोबारा पूछ रहा हूं ना आप अब आप दूसरे ग्रंथों की बात कर रहे हैं मैं दूसरे ग्रंथों के बारे में पूछ रहा हूं वो जो ग्रंथ है भ भन शिव और कृष्ण और राम के बारे में आप नाम ले रहे हैं वो ग्रंथ आप तक कैसे आए वो ग्रंथ हम लोगों ने शिष्य शिष्य पर व्यास जी ने लिखा था व्यास जी लिखे हैं तो व्यास जी लिखे हैं उन सीधे गीता प्रश्न छाप दिया व्यास जी के लिखने के बाद नहीं नहीं मैं कब कहा मैंने क्या हुआ मैंने कब कहा कि गीता से प्रश्न छाप दिया अंत का अंत का ले लेते भाई काफी हो गया तो अब ये बताइए क्या जीव और ब्रह्म अलग है या एक है जीव ब्रह्म परम ब्रह्म ये तीनों अलग-अलग है जीव और परम परम ब्रह्म अलग है या एक है अलग है तो आप ये बताइए क्या हर कण में भगवान नहीं है कण कण में शक्ति है शक्ति भगवान नहीं है तो उसमें जीव नहीं है तो परमात्मा कैसे आ जाएगा ठीक है ठीक है ठीक है कण कण में शक्ति है

01:01:23:00 परमात्मा नहीं है ठीक है यानी कि शक्ति और परमात्मा दो अलग-अलग चीजें हैं परमात्मा से शक्ति और सता दोनों संचालित है शक्ति और सता दोनों परमात्मा है शक्ति भी परमात्मा ही है यानी कि शक्ति के रूप में परमात्मा ही है शक्ति शक्ति और सत्ता दोनों परमात्मा है मैं पूछ रहा हूं श मैं ये कह रहा हूं शक्ति और सत्ता परमात्मा है जो शक्ति कण कण में व्याप्त है वो भी भगवान वही परब्रह्म है वो परम ब्रह्म नहीं है परब्रह्म से है वो परब्रह्म नहीं है ना तो यानी शक्ति शक्ति होता है जड़ जड़ और चेतन चेतन होता है सत्ता शक्ति होता है जड़ दोनों परमात्मा से संचालित है दोनों सृष्टि उन्हीं से सृष्टि हुआ है ये बताइए क्या परमात्मा जीव बन सकता है जी नहीं तो नियम आ गया नहीं आप कह रहे नियम आ गया ना व आप अपने विचार से कह रहे नियम आ गया तो आप जो कह रहे हम मान ल मैं क्या कह रहा हूं मैं तो यह कह रहा हूं ईश्वर व है जो कुछ भी कर सकता है तो क्या व जीव बन सकता है नहीं सकता है वो तो ये नियम नहीं है स्वयं परमात्मा उस शरीर में परमात्मा है हम आप जो है इसमें हमारा शरीर में जीव है उस एक विशेष शरीर में परमात्मा क्रियाशील है मैं पूछ रहा हूं क्या क्या आपका परमेश्वर

01:02:38:01 सब कुछ कर सकता है क्या वो सर्वशक्तिमान है बिल्कुल सर्वशक्तिमान है सर्वज्ञ है सर्वशक्ति सत्ता भी है क्या वो जीव बन सकता है भाई परमा ज इस परमात्मा सब कुछ बन सकता है सब कुछ ब वो जीव बन सकता है सब कुछ बन सकता है अभी तो आप कह रहे थे नहीं बन सकता नहीं जिस आधार पर आप बोल रहे हैं कि परमात्मा सर्वशक्तिमान है इस सव कुछ भी कर सकता है कुछ भी बन सकता है लेकिन परमात्मा लीला करने के लिए वो कुछ भी बन सकता है तो उनका जो मानवीय लीला होता है उस मानव लीला को किसी को समझ में नहीं आएगा पहली बात दूसरी बात जो परमात्मा ज जैसा जरूरत पड़ता है वो ऐसा रोल करता है तो उसका रोल को समझना इतना सहजता से नहीं है मैंने पूछ मैं हाथ जोड़ के पूछ रहा हूं आपसे क्या परमात्मा जीव बन सकता है परमा परमात्मा जीव बन सकता है व सब कुछ बन सकता है अब आपने एक बात कही कि जहां जहां पर कण कण में भगवान की परमेश्वर की शक्ति है परमेश्वर नहीं है इसका मतलब है जो शक्ति और परमात्मा के बीच में थोड़ा सा कुछ ना कुछ अंतर होगा ना तभी तो शक्ति और वो अलग है

01:03:53:16 शक्ति और परमात्मा परमात्मा से शक्ति है मतलब क्वालिटी में कुछ अंतर है कि नहीं बिल्कुल अंतर है शक्ति चड़ है मतलब शक्ति वह सब कुछ नहीं कर सकती जो परमात्मा कर सकता है बिल्कुल सत्य बात है शक्ति वह सब नहीं कर सकती जो जो परमात्मा कर सकता है इसका अर्थ है कि जहां पर कण कण में शक्ति है परमात्मा नहीं है वहां पर परमात्मा का जोड़ जोर जो है व कम है और जहां पर परमात्मा है वहां पर परमात्मा का जोर ज्यादा है जाने सृष्टि का रहस्य सृष्टि का रहस्य आपको जानना होगा तो आप तत्वदर्शी नहीं है मैं तत्व ज्ञानी हूं त आप तत्व ज्ञान नहीं है तत्व ज्ञान ये जो मैं पूछ रहा हूं तत्व ज्ञान नहीं है नहीं है तत्व ज्ञान नहीं है ये क्या है य आप अपनी दायरे पर अप स्तर पर जो पूछ रहे हैं यह आपकी अज्ञानता है अच्छा यह कहां लिखा है मेरी अज्ञानता है आपकी बात क्यों मानी जाए मैं तो इसलिए कह रहा हूं पहले आप जान लीजिए अरे तो मतलब आप मुझे गाली दे दे आप मुझे गाली दे दे मेरे पिताजी का नाम बदल द और मैं कहूं कि मैं जानना नहीं मानने पर पड़ जाऊं मानने मने नहीं आपने मुझे अभी अज्ञानी कहा ना तो अब आप मुझे बताइए कि मैं क्यों

01:05:09:00 क्यों क्यों मुझे आपने अज्ञानी कहा कैसे कहा आपने अज्ञानी अज्ञानता में कहा अज्ञानी नहीं कहान किसकी है किसकी अज्ञानता अज्ञानता जब होता है अज्ञानता किसकी है संसार को मिथा तो दर्शन आपने किया है आपको मुझे अज्ञानी नहीं कहना चाहिए गलत बात है अज्ञानी मत कहिए आपने कहा यह आपकी अज्ञानता है जिसकी अज्ञानता होती है वही अज्ञानी होता है नहीं नहीं ऐसा नहीं अंतर हैता अज्ञानता अज्ञान मुझे जानकारी नहीं है कोई जरूरी नहीं परमात्मा को छोड़ परमात्मा स होता है मुझे जिस अंश में जानकारी नहीं है उस अंश में अज्ञानी हुआ जितना आप जानते हैं अप बता रहे हैं चलिए देखिए देखिए मैं आपसे ये कह रहा हूं आपको अज्ञानता शब्द का उपयोग नहीं करना चाहिए था वो मत करिए आप तो दूसरी बात मैं यह कह रहा हूं कि कुल मिलाकर के हम चार चीजें पहुंचे मैंने फिर वही जब आपसे षष्टि का रस पूछा फिर आपने कह दिया तत्व ज्ञान वो जो है तत्व ज्ञान नहीं है ये है आपको करना पड़ेगा अब चार चीजें हमने पकड़ में देखी एक आपका ईश्वर आपसे झूठ नहीं बोल सकता आपका परमेश्वर आपसे झूठ नहीं बोल सकता दूसरा कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो भले

01:06:24:08 ये कह रहा हो कि तुम अपनी बात से मुकर जाओ भले ही यह कह रहा हो को भले ही वो कह रहा हो मैं जन्म नहीं ले सकता मेरा अवतार नहीं ले सकता फिर भी वो और सनातन धर्म ग्रंथों का जो ईश्वर है वो और कुरान का ईश्वर एक है तीसरा हमने ये जाना कि जहां पर भगवान नहीं है परमेश तीसरा तीसरा हमने ये जाना कि जहां पर परमेश्वर नहीं है और क्या कहते हैं परमेश्वर की शक्ति है वहां पर परमेश्वर का जोर थोड़ा कम है है ना और जहां पर भगवान है परमेश्वर है वहां जोर पूरा है चौथा हमने यह जाना कि जो जिन शास्त्रों के आधार पर हमय प्रमाणित करते हैं कि भाई वह जो सदानंद जी हैं ज्ञानेश्वर सदानंद जी महाराज वह भगवान के अवतार हैं कल्की जिन ग्रंथों के आधार पर हमने य सिद्ध किया मानते हैं उन ग्रंथों को हम परंपरा से प्राप्त करेंगे मगर उसका जो अर्थ करेंगे वो अपने मन से करेंगे जैसे कि हमें जी ओ गो होता है तो यह हमें किसी परंपरा प्राप्त व्यक्ति से पता चला किसी इंग्लिश मीडियम को पढ़ाने वाले से इंग्लिश के शिक्षक से अब हम गो का जो अर्थ है वो अपने आप करने लगे जिओ गो नहीं फलाना होता है डीयो डू नहीं डो होता है यह सब अपने मन से करने लगे जिसने आपको पढ़ाया कि डी ओ डू होता है उससे हम नहीं मानेंगे उसकी किताब ले आएंगे और डी को हम सी भी

01:07:39:10 कर दें टी भी कर दे पी भी कर दे कुछ भी कर दे तो यह चार चीजें अभी तक हमने समझी नहीं ऐसा हमने नहीं कहा ऐसा हमने नहीं कहा जो आप कह रहे हैं जो आप कह रहे हो ऐसे हमने नहीं कहा ऐसा चलिए कोई बात नहीं आपसे बात करके हमें आनंद आया आपसे बात हुई चर्चा हुई आपने अपना समय दिया तो सभी आप लोग भी देखिए इस चर्चा का कैसा आपको क्या समझ में आता है यह जो तथाकथित कल्की अवतार हैं या नहीं है यह आप लोग खुद निर्णय करिए कि क्या यह सनातन धर्म है जो कह रहा है जो लोग यह कह रहे हैं कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और सनातन ईश्वर एक है क्या यह सनातन धर्म है क्या जो यह कह रहे हैं कि हम वेद के उन कई ंत्र को छोड़ देते हैं जो यह कह रहे हैं क्या वह सनातन का प्रचार प्रसार कर रहे हैं क्या जो लोग यह कह रहे हैं कि जो परंपरा प्राप्त हमारे ग्रंथ है उनको तो मानेंगे मगर उनका अर्थ हम अपने मन का करेंगे अपने मन में जो सपने में आएगा प्रैक्टिकल करेंगे उससे करेंगे तो क्या यह सनातन धर्म है तो यह सारा और क्या जो यह कह रहे हैं कि हमारा भगवान सर्वशक्तिमान है मगर फिर भी वह फलाने फलाने कार्य नहीं कर सकता है ऐसे कई कार्य है जो वो नहीं कर सकता है बोते जा रहे क्या कहेंगे नहीं

01:08:54:15 आपने कहा ना वो आपसे झूठ नहीं बोल सकता ऐसा नहीं है आपसे झूठ बोल सकता है आप ही ब बताते मैं आपसे नहीं मैं नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं वो आपसे झूठ बोल सकता है क्या सुन जो मैं असली चीज बताया पहले इसको जानिए मानिए मैं पूछ रहा हूं वो आपसे झूठ बोल सकता है क्या जानना चाहता हूं तो बार-बार वही प्रश्न वही प्रश्न आपको पूछ रहे आप कह रहे हो ना मैं गलत बोल रहा हूं तो मैं दोबारा जानना चाहता हूं मानना नहीं क्या आपका ईश्वर आपका परमेश्वर आपसे झूठ बोल सकता है परमात्मा परमेश्वर भगवान सीधी बात करेंगे ही नहीं यही तो गोल मोल होता है सीधी बात मैं पूछ रहा हूं क्या आपके परमेश्वर आपसे झूठ बोल सकते हैं परमात्मा परमेश्वर भगवान आपने 10 बार कहा नहीं बोल सकते इसमें रिकॉर्ड है हा भगवान भगवान मैंने कहा लीला करने के लिए कुछ भी कर सक कर स आपसे झूठ बोल सकते हैं कि नहीं मुझे कोई झूठ नहीं बोला प्रैक्टिकली हमको देखा मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं आपसे झूठ बोल स आपको झूठ दिखा समझा सकते हैं कि नहीं झूठ हमको देखाए आपके मन में गलत धारणाएं भर सकते हैं कि नहीं नहीं गलत धारणा नहीं भर सकते तो वही वही मैं कह रहा हूं वही कह रहा था गलत धारणा नहीं भर

01:10:09:21 सकते ना तो कुल मिलाकर के जहां से यह ग्रंथ लेंगे वहां से अर्थ नहीं लेंगे सनातन अर्थ नहीं लेंगे अपना अर्थ देंगे क्योंकि किसी भी देश काल परिस्थिति में जन्म लेने वाला अपना है उसने उसने जहां से वह उसने जहां से वह ग्रंथ मिल रहा है उसने वहां से अर्थ लिया है अरे तो भाई गुरु शिष्य वही तो मैं कह रहा हूं तो आप उसके ग्रंथ को मत मानिए ना आपके पास नहीं है वोह आपके पास नहीं है जवाब तो एक एंडिंग एंडिंग बोल दू जहां से यह ग्रंथ लेंगे वहां से नहीं लेंगे पहला नंबर दूसरा नंबर इनका जो परमेश्वर है वह सब कुछ कर सकने वाला नहीं है कुछ कार्य ऐसे हैं जो वह नहीं कर सकता तीसरा नंबर कुरान के द्वारा ब्राहमम ग्रंथ के द्वारा अब्राह्मिक किताबों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है और जो संत ज्ञानेश्वर सदानंद जी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है परमेश्वर है वह एक है जबकि वह कह रहा है कि मैं मैं अवतार नहीं ले सकता और यह कह रहे हैं हमारे धर्म ग्रंथ सनातन धर्म ग्रंथ कह रहे हैं कि अवतार ले

01:11:24:21 सकते हैं भगवान जबकि वह कह रहा है कि तुम अपनी बातों से बदल सकते हो और जबकि यहां कहा जा

01:11:29:07 रहा है कि रकुल री सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई और चौथी

⬜ Not used yet · 01:11:34:01 – 01:11:50:00 (0:16)

01:11:34:01 बात कि जहां जहां पर कण कण में भगवान नहीं है उसकी शक्ति है वहां पर भगवान का जोड़ थोड़ा कम है क्योंकि शक्ति और भगवान में अंतर है तो यह कुछ चार पांच चीजें हैं बाकी आप निर्णय करिए क्या सत्य है क्या झूठ है सभी को जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:11:49 · 18 Feb 2024

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