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00:00:01:22 सभी को जय श्री राम आज हम आए हैं इसकन मंदिर रायपुर चलिए अंदर चल कर के देखते हैं कैसी क्या व्यवस्था है यहां पर प्रतिमा है शील प्रभुपाद जी की माननीय और यह हमारा गान करने के लिए बना हुआ है कि किस सेवा का कितना दान राशि
00:00:42:09 [संगीत] है यहां पर आ गए हैं अब बात करने के लिए यहां के जो मुख्य कर्ता धरता है जो यहां के प्रभु जी कहे जाते हैं उनसे हम बात करेंगे और हम जा रहे हैं गोविंददास प्रसादम यह रेस्टोरेंट है स्कन का और देखिए आप कितना भव्य है और कितना वैभवशाली रेस्टोरेंट है बिल्कुल किसी अच्छे फाइव स्टार सेवन स्टार रेस्टोरेंट से कम नहीं है ये तो सभी को जय श्री राम जैसा कि हमने बताया आज हम आए हैं इसकन मंदिर में और यहां पर हमने पहले वहां दर्शन किए जो देव विग्रह थे भगवान श्री कृष्ण का विग्रह था वहां पर उसके बाद हम यहां पर आए हैं यह गोविंदास रेस्टोरेंट है यहां पर और यहां के जो मेन प्रभु जी हरे कृष्णा मैं रघुपति राघव दास इकन रायपुर से पिछले 12 वर्षों से जुड़ा हुआ हूं और य अकाउंटेंट और साथ साथ में मैनेजमेंट में देखता हूं और यन संस्था ल ओवर वर्ड में फैली हुई है उसी का एक ब्रांच है केंद्र है जिसके अंतर्गत
00:01:57:25 हम सभी जन सुविध को भक्ति में लाने का प्रयास करते हैं हमारा मूल उद्देश्य यह है कि किस तरह हम अपने स्वयं के साथ जो हमारा भगवान का जो संबंध है उसको समझे हम फोकस करते हैं कि भगवत गीता की जो टीचिंग है श्रीमद् भगवतम की जो टीचिंग है वह लोगों तक पहुंचे क्योंकि आज के जनरेशन में यूथ बहुत मिसगाइड हो रहे हैं सोशल मीडिया और कई सारे आज का जो जनरेशन कलयुग है तो भटकने के बहुत चांसेस हैं तो हम लोग ऐसे कई प्रोग्राम कराते हैं यूथ प्रोग्राम कराते हैं कई सारे हमारे सेमिनार्स होते हैं बड़े-बड़े इंडस्ट्रीज में भी और बिजनेस जो मीटिंग होते हैं उसमें भी होता है तो यही एक हमारा एक सेंटर है स्कन सेंटर जो कि शीला प्रभुपाद जी ने स्टार्ट किया था उसी का एक अंश है जिसके माध्यम से हम भक्ति के गुण रहस्य को प्रचार प्रसार करने का प्रयास कर रहे हैं हरे कृष्णा हमारे पास एक इंटरव्यू है जिसमें कि स्कन के ही प्रेसिडेंट है स्कोन टेंपल के वो कह रहे हैं कि कृष्ण अल्लाह और क्राइस्ट
00:03:13:04 यहोवा इसमें कोई भेद नहीं है यह तीनों एक है एकही है बाकी कृष्ण के अंश के रूप में है बाकी हम कृष्णा ज सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ लड बाकी जो भी हम बाहर देखेंगे वे एक एक्सपेंशन के रूप में देखेंगे जैसे विष्णु जो है वो कृष्ण से ही आई है शिव जो है वो कृष्ण से आए अच्छा इसमें क्लेम किया जाता है मैं सीधे इस प्रश् में आता हूं कि क्या इस कौन के द्वारा पूजित होने वाला जो कृष्ण है ईश्वर है क्या वह सर्वशक्तिमान है अकोस है अच्छा एक बात होती है ये कहा जाता है कि सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम तैत्र उपनिषद दो एक इसके अनुसार ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है ईश्वर वह है जिसने सभी नियम बनाए हैं तो उसके ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं हो सकता तो क्या जो इसकन के द्वारा जो कृष्ण पूजित हो रहा है उसके ऊपर ऐसा है कि कोई भी नियम लागू होता है या कोई कोई नियम लागू होता है भगवान व है जो स्वयं नियम की रचना करता है और अपनी अनुकूलता के अनुसार जब उनको लगता है वह नियम बना सकते हैं और नियम को तोड़ भी सकते हैं भगवान का अर्थ यही
00:04:28:06 है कि कुछ भी कर सकते हैं वो तो अब एक बात इसका अर्थ ये है कि भगवान कुछ भी कर सकते हैं उनके ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता यही है अभी तो वो भगवान है अब बात ये आती है कि ब्रह्म समिता के रेफरेंस देकर के कई बार लोग ऐसी बात करते हैं कि यह कहा गया है कि जो शिव जी हैं या विष्णु जी हैं या जितने भी अन्य रूप है भगवान के यह सब भगवान के एक्सपेंशस है हां तो शिवजी एक तरीके से कृष्ण ही शिवजी बनते हैं आंशिक रूप से हां हां यस मर एक जगह पर यह क्लेम किया जाता है कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव कृष्ण नहीं बन सकते य क्लेम सही है हां सही है तो अभी हमने बात की कि ईश्वर वह है जिसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं होगा और यहां पर हम ईश्वर के ऊपर एक नियम लगा रहे हैं कि कृष्ण भगवान भगवान है हम उनको इंटरफेयर नहीं कर सकते कि वो ऐसा नहीं कर स यह ब्रह्म समता में लिखा है आपके पांचवे नंबर का श्लोक है शायद लिखा हैवान तो शिव के रूप में मतलब शिव शिव रूप में भी कृष्ण हमको दर्शन दे सकते हैं मेरा सवाल यह
00:05:44:08 है शिव को दही र में स् कर मेरा प्रश्न य है आपका कि हमने यह कहा कि कृष्ण ही शिव बनते हैं है ना आंशिक रूप मगर कृष्ण ही बनते हैं मगर अब प्रश्न य आता है क्या शिव जी कृष्ण बन सकते हैं या नहीं बन सकते अच्छा शिव जी कृष्ण बन सकते हैं या नहीं ऐसा राइट तो भगवान ने किसी जीव को या किसी देवी देवता को नहीं दिया है शिव जी कृष्ण ही बने हैं ना कृष्ण तो शिव बने हैं हा कृष्ण ही शिव के रूप में आए शिव के रूप में आने के बाद कृष्ण बाधित हो जाते हैं बिल्कुल बाधित नहीं होते मैंने कहा हम भगवान की क्षमता पर अंकुश लगा रहे यहां पर कि वो ऐसा क्यों नहीं कर सकते मेरा कहने का अर्थ ये है तो ये यही चीज आती है कि भगवान कुछ भी कर सकते हैं वो शिव के रूप में भी आ सकते हैं राम के रूप में भी आ सकते हैं किसी भी रूप में आ सकते हैं वो हमारी बौद्धिक क्षमता इतनी नहीं है है ना कि वो बिल्कुल कर सकते हैं वो तो यह क्लेम करना गलत है कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं उस एग्जांपल को बताया गया है ना
00:06:59:26 हमें क्या समझना है हमें यही समझना है कि जो शिव जी है दही के रूप में है आपका परिचय मेरा नाम भागवत प्रिय दस है मैं पिछले चार वर्षों से इसन में जुड़ा हुआ हूं तो प्रश्न हमारा वही है जो संभवत प्रभु जी समझ नहीं पाए कि हा कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है उसी प्रकार पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन रहे हैं पर शिव जी कृष्ण नहीं बन रहे तो एक ये फैक्ट आ रहा है कि यहां पर जो ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता है बाधित हो रही है रुक रही है तो इस बारे में आप क्या क जैसा कि आपने बताया य ब्रह्म समिता का जैसे दूध और दही का एग्जांपल दिया है ना तो इससे मतलब यह है कि जैसे जो भगवान कृष्ण है वह परम पिता है ना सुप्रीम मतलब कि वो हमें जैसे उनको पिता के रू जैसे अब हम लोग तीन रूप में है जैसे मैं हूं है ना जैसे मेरे भौतिक माता-पिता है ठीक है वैसे ही उनके ऊपर जो माता-पिता के ऊपर जो बीज देने वाले हैं वह शिव और जगत जननी बोलते हैं हम लोग है ना दुर्गा माता और शिव और उसके ऊपर है भगवान ठीक है तो इसका मतलब जैसे अब देखो दोनों एक ही है जैसे दूध और दही दोनों एक ही भी है और दोनों भिन्न
00:08:15:02 भी है यहां पे पता चल रहा है आपको दोनों एक भी हैं और दोनों भिन्न भी हैं वैसे ही शिव और कृष्ण भी एक तरह से भिन्न भी है और एक ही है ये क्लियर हो पा रहा हैद दूध दही ऐसा है कि दूध और दही एक भी है मगर दूध और दही दोनों ही दूध और दही दोनों ही अपूर्ण है बाधित है वो सत्य अत नहीं है तो इसलिए दूध अगर दही में परिवर्तित हो जाएगा तो उसम इतनी क्षमता नहीं है कि वो वापस दूध में आ सके मगर जो हमारे कृष्ण वो पूर्ण है वो कहीं भी कहीं से भी बाद नहीं हो सकते है ना तो उनके उनके ऊपर नियम कैसे आ रहा है कि वो जो है दूध जैसे की अक्षम हो जाता है क्षमता नहीं होती वापस अपने मूल स्वरूप में आने की तो उनके ऊपर य नियम कैसे लग रहा है कि वो शिव बनने के बाद वापस कृष्ण नहीं बन पा रहे ये निय कैसे लग रहा है क्योंकि दूध तो अपूर्ण है और कृष्ण पूर्ण है नहीं वही चीज मैं समझा रहा हूं कि आप जैसे अब वही देखो दोनों भिन्न है एक तरह से देखो दूध का कार्य अलग है दही का कार्य अलग है दोनों का अलग अलग क्षमता है मतलब की आप जिस जैसे मान लो दूध से आप लस्सी बना सकते लेकिन
00:09:30:08 नहीं नहीं दही से लस्सी बना सकते हो दूध से बना सकते हो क्या दूध से नहीं बना सकते मतलब देखो यहां पर भगवान का कार्य अलग है है ना वह सुप्रीम है उनका कार्य अलग है और शिव जी का शिव जी का जो कार्य है वह अलग चीज है लेकिन दोनों एक ही है क्योंकि दूध और दही मैं पूछ मैं पूछ ये रहा हूं क्या श्री कृष्ण भगवान में इतनी ताकत है कि वो शिव बन जाए उसके बाद वापस कृष्ण बन जाए बस इसके बारे में बताइए हां ओबवियस है तो क्या ब्रह्म समता की लाइन गलत है नहीं नहीं गलत क्यों है वो एग्जांपल बता रहे है ना उस तरीके से क्या क्या एपल मतलब कृष्ण बाधित है वही समझाना चाह रहे हैं बाधित नहीं है वो कहीं से भी तरक कर रहे हो एक्चुअली वो जस्ट एक एग्जांपल है प्रभु जी नहीं वो एग्जांपल किस लिए मैं समझ क्या समझना है हमें समझने के लिए जो परम पिता है सुप्रीम है वो भगवान कृष्ण है मगर ये रियलिटी नहीं है हमको केवल समझना है इसको है रियलिटी कुछ और एपल ही है बस रिलिटी समझा रहा है एपल हम रियलिटी समझा रहा है भगवान वही है जो सब चीज करने में समर्थ है य जो है यह हमें एक एग्जांपल के तौर पर लेना है या रियलिटी के
00:10:51:08 य झूठ है ना फिर वो बन सकते हैं ना कि वो नहीं बन सकते ठ नहीं बन सकते हैं कृष्ण जो है कृष्ण जो है शिव बनने के बा शिव से कृष्ण बन सकते हैं बन सकते हैं कोई लाइन गलत है सकते हम वेदों को कोई भी चीज को ये नहीं कह सकते प्रभु जी की गलत है भगवान की बोलना चाह रहे हो कि शिव जो है रुद्रम च
00:11:31:20 तो सही कह र है देख बात वो नहीं है बात देखिए ऐसी कोई बात नहीं है बात यह है कि अगर ब्रम समता में लिखा है कि वो शिव बनने के बाद वापस कृष्ण नहीं बन सकते ठीक है यह ब्रह्म समता में लिखा है आप कह रहे बन सकते हैं ठीक है ना तो या तो ब्रह्म समता में गलत लिखा है या फिर आप गलत बोल रहे वही का आशय समझाने के लिए लिखा वो आशय क्या है वो आशय यही जो गु की बात हुई है दूध का गुण अलग है दही का गुण अलग है बना सते य है लेकिन कृष्ण को बोरूप मेंप में भगवान आए दिखा देख देख ऐ है हम किसी कोपल को देते है तो इसलिए देते हम उ को टी समना चा मगर कुछ और है कृष्ण भगवान सब कुछ कर सकते हैं बनने के बाद वापस आ सकते हैं मगर हम एपल में क रहे दूध दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं बन पाता है उसी प्रकार कृष्ण
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00:12:32:16 तो शिव बन जाते हैं पर शिव शिव शिव कृष्ण नहीं बन सकते तो फिर
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00:12:36:00 यहां पर यह एग्जांपल या देने की आवश्यकता क्या है जब वह एग्जांपल खरा ही नहीं उतर रहा रियलिटी से मैच ही नहीं हो रहा वो अच्छा यह सवाल है तो प्रभु जी बताइए थोड़ा कुछ होरहा है प्रभु जी लाइए वो कहां पर लिखा है बताइए वो लोक मैं भी जान रहा हूं आपने आपने तो पढ़ा होगा कृष्ण सब चीज करने में समर्थ है प्रभु जी वो तो वो एग्जांपल क्या समझाने के लिए मैं समझ नहीं पा रहा हूं यहां पर गुणों की बात हो रही है ना प्रभु क्या शिव में शिव में परिवर्तित होने के बाद उनके गुण कुछ कट जाते हैं क्या नहीं बिल्कुल नहीं कटते हैं आता है प्रभु जी सिर्फ अलग अलग है स्त्री रूप में अलग गुण है पुरुष रूप में अलग गुण अलग अलग जीवों में अलग अलग गुण है अलग-अलग पेड़ पौधे मतलब सारी गुणात्मक शक्तियां भगवान की है शिव के रूप में भी वही है जब वो शिव बने तो क्या वोह अपूर्ण हो गए शक्ति है जब जब दूध दही दूध
00:13:42:18 जब वो सभी रूप में पूर्ण है दूध जो है वह अपूर्ण है तो यहां उसके दूध अपूर्ण है मगर कृष्ण जो है देखिए जब दूध दही बन रहा है तो वो दही और ज्यादा अक्षम हो गया दूध भी अक्षम है दही और ज्यादा हो गया कि वह दही से दूध नहीं बन पाएगा यहां तो कृष्ण शिव बन रहे हैं ना वो तो पूर्ण है तो क्या वोह शिव बनने के बाद अपूर्ण हो जाते हैं क्या नहीं भगवान ने एक्चुअली अपने एक्सपेंशन ना सारे जीवों की रुचि के अनुसार किया कि कुछ जीव तामसिक प्रवृत्ति के हैं कुछ राजसिक वो तो मैं जानता वो एक अलग गुण ही गुण को आकर्षित करता है तो जो आसुरी प्रवृत्ति के वो या प्रति के शिवजी के भक्त बने हैं जो सात्विक प्रवृत्ति के हैं वो विष्णु और कृष्ण के भक्त बने हैं य तो यह तो यह तो शिव पुराण में लिखा है सात्विक जो है व करते कुछ सात्विक होते हैं कुछ ताम तीन का मि होता हा साक भी शिव की भक्ति करते [संगीत]
00:14:53:21 हैंते लोग शव की भक्ति करते कुछ ज्यादा होती है उलो और मतलब ये श्रद्धा के विभाग में आता है हमारे भगवत गीता कुल मिलाकर के कुल मिलाकर के ये जो प्रश्न है य रह रहा है कि क्या श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान है कि नहीं बक है है तो वो शिव बनने के बाद वापस कृष्ण बन सकते है नहीं बकल बन सते आपकी जो लाइन है जिस प्रकार दूध से दही बनता है दही से दूय
00:15:31:03 य जोय जो दूध और दही वाला एपल है ना य सिर्फ कार्यक्षेत्र में जैसे भगवान से जैसे भगवान कृष्ण बनते बलेन बनने के ला मतलब ला रूप में ऐसा है मगर तात्क रूप से ऐसा नहीं है शिवजी कृष्ण बन सकते शिवजी सर्व सामर्थ है कि नहीं शिव ही कृष्ण है कृष्ण ही शिव है शिव जी सर्व सामर्थ शली है मतलब भगवान से ले शे नहीं है मैंने नहीं कहा भगवान से शे मैंने कहा कृष्ण के बराबर नहीं है इसका मतलब जब कृष्ण बनते है तो कुछ घट जाता है घट जाता है मतलब बस गुणों में परिवर्तन हो जाता है कुछ कुछ क्वालिटीज कम हो गई नाभी तो बन वापस कृष्ण तो फिर अभी आप बन सकते
00:16:32:24 कम इनी नहीं है कील में भवान क्या कहलाते हैं पूरी तरह से देवी प्रकृति से युक्त है नांतो अस्ति मम दिव्या नाम विभूति नाम परमत एकतर मेरी विभूतियों को जानना असंभव बोले भगवान भगवत गीता में इसलिए हमारी बौद्धिक क्षमता इतनी नहीं है भगवान जितना कह रहे हैं उतना हमें स्वीकार करना है तो पहले पहले य भी तो समझना पड़ेगा कि भगवान जिस जो कह रहे हैं वो भगवान ही है कि नहीं बिल्कुल है भगवान हमें विश्वास करना है मानना है स्वीकार करना है अगर सिर्फ अगर बात से हमने विश्वास कर लिया तो तो कल को आके कोई भी कहेगा मैं भगवान हूं हम विश्वास कर क्या बोलते हैं बोलिए तो
00:17:16:09 प्रभु शिव बोते इसमें तो अलग है कि आपका आपका वो कहना बिल्कुल सही है कि शिवजी ने उनको परम कहा मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं ये पूछना चाह रहा हूं क्या न के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है उसकी ग्रंथावली के अकॉर्डिंग आप जो कह र उसके विरुद्ध जा रहा है क्योंकि ग्रंथावली कह रही है कि वो शिव से कृष्ण नहीं बन सकते आप कह रहे हो बन सकते हैं तोय फ कैसे पता चलेगा आप जो कह रहे प्रमाण आश सम उह द से बताया क्या उ क्या कहना चा वो ये कहना चाह रहे है कि शिवजी को नीचे समझो शिवजी नीचे
00:18:00:18 शिव और कृष्ण ना दोनों एक तरह से सेम भी है और एक तरह से भिन्न भी उसम य उसी को समझाने के लिएन इस तरह से समझना हमलोग भिन कैसे आपसे पूछ रहा कैसे कैसे दू से समझ गयासे दूध का काम जो कर दही नहीं कर सकता दही मेरा क्या में कोई कमी है
00:18:36:28 को नहीं तो यानी की शिवजी शिवजी व सारे काम कर सकते हैं जो कृष्ण कर सकते हैं तो आप क्या कृष्ण बन सकते आप में सेम ही है लेकिन कार्य दोनों का अलग अलग है कार्य अलग अलग है तो शिवजी भी कृष्ण केतु है एक तरीके से य है शिवजी शिवजी और कृष्ण में कोई भेद नहीं है शिवजी में बस यही चीज तो समझना है आपको इसम यही समझाने की कोशिश किया
00:19:18:28 हैज आपकी बा मुझे लग रहा है समझ में आया एक आम आदमी होने के नाते तो आप ये कह रहे हो शिवजी और कृष्ण में कोई भेद नहीं है थोड़ा सा अलग समझो हां थोड़ा सा कार्य अलग है समझो अलग मगर वो अलग है नहीं यही तो कह रहे वो कि अलग मानो पर वो अलग है नहीं है ना चलिए खैर अब इस टॉपिक को छोड़ते हैं तो आपकी स्टडी होगी ना तो चैतन्य महाप्रभु ने श्री चैतन्य चरता वली में कहा है चरता मृत में कि मैं कृष्ण को श्रीधर स्वामी के द्वारा जानता हूं सीध स्वामी और मैं भागवत को समझ पाया सीध स्वामी के कारण मैं उन्ह इस जगत का गुरु मानता हूं सी स्वामी है अपने टाइम के शंकराचार्य तो अब जब वो उनको अपना गुरु मान रहे हैं उनका दर्शन ले रहे हैं तो हमारी इसको की ग्रंथावली में क्या शंकराचार्य की मान्यताओं को सिद्धांतों को स्वीकारा जाता है या [संगीत] नहीं श्री चन म प्रभु ने श्री चेतन तामृत जो आपके य से पब्लिश होती है उसमें है कि मैं श्रीधर
00:20:34:07 स्वामी के द्वारा कृष्ण को जान पाया हूं मैं भागवत को श्रीधर स्वामी के द्वारा समझ पाया हूं मगर अब जब वो उनको गुरु मान और वो यह भी क्लेम करते कि वह संसार के इस जगत के गुरु है मेरे द्वारा मगर हम जब इसको की ग्रंथावली पढ़ते हैं तो वहां पर कहीं भी शंकराचार्य के सिद्धांतों को स्वीकार नहीं किया जाता है तो ऐसा क्यों है ऐसा इसलिए है कि हम भगवान के साकार रूप के उपासक हैं मतलब भगवान की जो हम जिस दृष्टि से हम भगवान को देखते हैं वेदों में एक श्लोक आता है कि मेरा प्रश्न यह है कि जो चैतन्य महाप्रभु ने जो सिद्धांत स्वीकारी वह सिद्धांत आप मानेंगे या नहीं मानेंगे मानेंगे उन्होने शंकराचार्य को जगतगुरु कहा शंकराचार्य को आप कहते हैं हा तो वो अपना उत्तराधिकारी किसी को बना के जाएंगे आप उसको कहेंगे शक जगतगुरु हा वो किसी और को बना के जाएंगे तो यानी कि वर्तमान के जो शंकराचार्य है उनको आप जगत गुरु की दृष्टि
00:21:49:09 से देखते हैं देश काल परि अनुसार जो हमारी धारणा परि होती आपके जो गुरु या तत्कालीन शंकराचार्य है व एक निर्णय करके जा रहे मेरी ग पर या बैठेगा आपको अपने गु पर अविश्वास है नहीं उनकी जो निय क्षमता ब बल के जा रहे मेरी गद्दी बैठे बैठ परपरा परंपरा और क्या होती है पर को कहते तो आज क्या आप उनको ज मानते [संगीत] है शकर के बैठे हुए उनकोर स्वामी ने जो अप शिष्य को अपनी ग में बला क्या आप उनको जगतगुरु मानते हैं जगतगुरु बहुत है आप जगतगुरु उनको मानते है जो आज सीरीज में बैठे हुए हैं क्या उनके सितो को आप अपनाते है अब शकरा अलग संप्रदाय है हम तो आपका संप्रदाय अलग कैसे हु चन महा संप्रदाय को मान तन वही चीज तो बता रहा था प्रभु जी की धारणाएं समय देश का परिस्थिति के अनुसार से
00:23:04:12 आपकी धारणा अलग है चत प्रभु जी की धारणा अलग है चत महाप्रभु की नहीं शंकराचार्य की चैतन्य महाप्रभु जी की धारणा है कि शंकराचार्य उनके गुरु है चेतन महाप्रभु जी की धारणा है कि शंकराचार्य उनके गुरु है प्र मतलब की शंकराचार्य ने जो अपने शिष्यों को गद्दी दी व गलत दी आप जो है पूरा जो है ना एक ही उद्देश्य से आए हैं कु ऐसा कुछ जब तक हम भक्ति के ता तो यही ते कोई नहीं भक्ति की जो धारणाओं को हम नहीं स्वीकार तब तक इस तत्व मैं अपने गुरु को मानू आप अपने गुरु को मानेंगे या नहीं मैं मान रहा अब मैं आपको बताता हूं चैतन्य महाप्रभु ने शंकराचार्य जी की धारणाओं को पूरा पूरा स्वीकार नहीं किया क्योंकि वहां पर निराकार ब्रह्म की धारणा कण की स्वरूप की उन्होने कहा है कि मैं श्रीधर स्वामी को जगतगुरु मानता हूं क्या उनकी लाइनेज में जो आज के शंकराचार्य उन्हें आप जगतगुरु मानते हैं चैतन्य महाप्रभु ने चैतन्य चरिता अमृत में और भी कई सारे दृष्टांत प्रस्तुत
00:24:19:12 किता अत भगवान स्वयं जो है वो है जो वृंदावन के नंद तनुज है आपकी बात बात बिल्कुल मान चैत तो अब यह बताइए अब ये बताइए चैतन्य महाप्रभु ने दो बातें कह दी एक तरीके से एक शंकराचार्य को मानने की और दूसरी शंक तो गुरु की गुरु की शिक्षा को माना जाए कि ना माना जाए वही चीज है धर्म जो है ना धर्म का प्रतिपादन भगवान करते हैं धर्मे तु साक्षात भगवत प्रितम वो जब चाहे धर्म को देश काल परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित करके प्रस्तुत कर सकते हैं चैतन्य महाप्रभु मैं समझ गया इस मैं इसमें एक बात कहना चाहूंगा आपने कहा कि भगवान जो है धर्म को देशकाल परिस्थिति के अनुसार बदल सकते हैं जी जी अच्छा अथर्ववेद में कहा गया है कि सनातन का सनातन का अर्थ है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है एक मिनट तो क्या हम यह माने कि इस कन के द्वारा बताया जाने वाला धर्म सनातन नहीं है यहां पर हमें ये समझना है कि जो सनातन वर्ड जो यूज हो रहा है भगवान सनातन है जीव सनातन है और उनके साथ संबंध भी सनातन है मगर धर्म बदलेगा धर्म देश काल परिस्थिति
00:25:34:16 के अनुसार धर्म को पालन करने की रीति बदलती है धर्म तो वही एक ही है धर्म का अर्थ होता है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने हेतु बताई जाने वाली मर्यादा का नाम धर्म है ठीक है अब हम कह रहे हैं कि पहले का धर्म कुछ और था रामो विक्र वान धर्म राम ने कहा एक शादी करो तो क्या समय के अनुसार बदल दिया जाएगा कि नहीं दो शादी करो इसका निर्धारण हम नहीं कर सकते हीज बता रहा भगवान जहे भगवान बदल सकते हैं धर्म को हमारा मतलब हमारा धर्म सनातन नहीं था हमारा धर्म हमारा ध कहने का अर्थ है कहने कहने का अर्थ है कि हमारा धर्म नाम से सनातन है मगर प्रकृति से सनातन नहीं है कह रहे भाई अथर्ववेद कह रहा है कि सनातन तो उसको कहते जो कभी ना बदले आप कह रहे हो कि धर्म बदलता है भले ही भगवान बदले स्वीकार करने की रीति की बात करर तिया तो बदल रही है युग में तपस्या करते थे वो जो तिया बदल रही है वो शुरू मेंही बता दिया गया है ऐसा नहीं है कि आज नया धर्म कोई नियम आ रहा हो वो शुरू मेंही बता दिया गया कि कौन से युग में कौन सी चीज को फॉलो करना है ये
00:26:49:20 शुरू में बताया गया बदला हुआ कहीं पर भी नहीं है कि आज भगवान नेता लिया मैं तुझे नया धर्म बता रहा हूं धर्म है अलग अलग तिया है का अर्थ है मर्यादा विधि विधान किस तरीके से भगवत प्राप्ति होगी ठीक है शुरू मेंही जो धर्म है उसम बता दिया गया इस में य रहेगा इस में य रहेगा मगर ये बताया शुरू में गया बाद में कुछ नहीं आ रहा कृष्ण भगवान में तो उन्होने कह दिया य आज से नया नियम शुरू कर र हूं तो य पर तो हमारा र्म वसा हो जाएगा परिवर्तनशील जो कुरान में कहा गया है कि अपनी आयतो को बदल देता हूं य बद जैसे आज मान लो हमारे मूर्ति पूजा हो रही है कल को मूर्ति पूजा य भी हो सकता है तो मूर्ति की रक्षा करने वाला व्यक्ति लड़ मवान ना था अच्छा इसका और है विशेष पार्षद के द्वारा धर्म की रचना करते हैं स्थापना करते हैं परिवर्तन भी करते हैं इसमें एक क्वेश्चन फिर और आ जाता है कि अगर देश काल परिस्थिति वश भगवान धर्म को बदल देते है जैसा कि आपने कहा अब भगवान का अभी हमने एक नियम देखा था भगवान कर सते तो भगवान तो झूठ भी बोल सकते हैं जब वो धर्म को बदल रहे तो आपको कैसे पता व
00:28:04:21 धम उन्होने बदला है बदल के आपको दिया है मोक्ष दायक है या [संगीत] नहीं हम ही तो भगवान हम ही तो कह रहे हैं अच्छा ठीक है जब भगवान ने जरा सन के साथ छल किया मोहिनी बनक छल किया तो आपको कैसे पता आप मोहिनी नहीं हो आपको कैसे पता भस्मासुर नहीं है उनके लिए भस्मासुर को जब उन्होंने छल से नष्ट किया काल्या वन को जब उन्होंने छल से नष्ट किया तो उन्होंने कालवन को बताया थोड़ी ना था कि मैं तुझे छल से मार रहा हूं तो हमें कैसे पता चलेगा कि भगवान हमें छल से नहीं मार रहे इसीलिए बधार इसीलिए नहीं तो आपका आपको विश्वास है श्रद्धा है मगर हमारे जो जो शास्त्र है वो ये कहते हैं कि भगवान के बारे में वही शास्त्र प्रमाणिक माने जा सकते हैं जिन्हें भगवान ने भी ना रचा हो इसीलिए हां इसीलिए हम वेदों को मानते हैं ब्रार उपनिषद दो चार 10 में लिखा हुआ है कि जो हमारे सनातन शास्त्र है वो भगवान ने नहीं रचे अपौरुषेय
00:29:15:00 भी सोच रहे हैं ना राक्षसों को बना रहे हैं तो सोच रहे हैं कि नहीं सोच रहे नहीं बिल्कुल नहीं सोच रहे को वही बना रहे हैं ताकि उन ऐसे गुण है ऐसा है जो दुनिया में बुराई जो दुनिया में बुराई उत्पन्न हुई है वो किसने की धर्म अधर्म किसने मैं पूछ रहा हूं किसने रा परम कृष्णा किसने की भगवान के दवारा होता है यानी की से देखे भवान के अब ये कैसे पता चलेगा कि जो किताब वो आपको दे रहे हैं वो सच है यही तो एक समर्पण की बात है विश्वास की बात है जो हमारे लिए करेंगे हित के लिए करने लगे
00:30:09:08 तोराय कटेड क्वेन है इसका तो ये थी हमारी थोड़ी सी चर्चा गुरुजी के साथ और मैं कहूंगा किनय जो कुछ ऐसे क्वेश्चन है इनको थोड़ा सा देखिए एक बात मैं आपको बता के जाना चाहूंगा कि आप कभी भी मत कहिए कि भगवान आकर के समय समय पर बदल देते देश काल परिस्थिति में क्योंकि सनातन का अर्थ ही ये है जो किसी देश पर स्थिति में ना बदला जाए हमारा धर्म अटल है वो बदल नहीं सकता तो हम उसका नाम नहीं बदल रहे आप उसकी उसकी प्रकृति उसकी प्रकृति को आप वो जो रीति है वही धर्म है वही धर्म है धर्म की परिभाषा क्या बची जब हमने उसका नाम आप जानते मेरा मतलब कहने का देखिए आप जो कह रहे हैं आप जो कह रहे हैं आप जो कह रहे हैं आप जो कह रहे हैं वो यह है कि हम अपना धर्म का नाम नहीं बदल रहे मगर उसके फीचर्स तो बदल रहे हैं जबकि
00:31:08:28 उसमें भाई साहब चलिए मुंह से निकल गया मैं अपनी बात वापस ले रहा हूं हम ये सोच रहे हैं कि हम अपने धर्म का नाम नहीं बदल रहे मगर हां जो भगवान है वो आकर के उसकी प्रकृति बदल रहे हैं मगर प्रकृति ही बताई गई है कि जिसकी प्रकृति ऐसी हो जो कभी ना बदले वही सनातन कहलाएगा तो अगर आप यह मान ले रहे हैं भगवान धर्म को बदल देंगे तो वह सनातन धर्म नहीं होगा ना फिर उसको तो कुछ और कहा जाएगा कुछ भी किया गया कार्य वो सभी दिव्य है सभी सनातन की श्रेणी में आप अथर्ववेद को मानेंगे कि नहीं मानेंगे तो अथर्ववेद ये कह रहा है कि भाई किसी भी देश काल परिस्थिति में जो ना बदले उसका नाम सनातन है तो भगवान बदल करके जब आपको धर्म देंगे आप उसे सनातन क्यों कहोगे अ यह तो अनुकूलता की बात है जी मैं आपसे पूछ रहा हूं जो बदल के मिला भाई साहब भाई साब स्थिति के अनुसार क्यों कहा गया है मैं आपसे न करते क्यों ध्यान करने की क्षमता थी तो ये सारे नियम कब बने थे आज के तभी शुरुआत में ही इस सब भगवान स्वयं भगवान ने बीच बीच में बदले हैं या शुरू में ही दे दिए थे ये तिया है प्रभु जी मैं पूछ रहा हूं यह जो सतयुग में अलग तरह से पूजा पद्धति द्वापर में पहले ही तो यानी कि बाद में कुछ बदलाव नहीं हुआ ना आज तक तो आप क्यों कह रहे हैं भगवान बदलते
00:32:24:10 हैं एक उदाहरण एक उदाहरण बता एक उदाहरण बताइए कि भगवान ने कहीं पर यह कहा हो कि मैंने धर्म बदल दिया एक उदाहरण धर्म करने की जो रीति है जो प्रोसेस है उसमें चेंस आए चेंस हमने किए भगवान ने कहां पर कहा मैं य धर्म बदल रहा हूं भगवान ने नहीं कहा क्यों कवान बदल देते य तो समझने का हमारा डिफरेंस है जो प्रोसेस है उसमें चेंस आए है बोला चेंस किसने किए चेंज जिस देश काल परिस्थिति के अनुसार किसने किए भगवान ने किए भगवान ही धर्म की स्थापना करते हैं और चेंस भगवान कर रहे हैं ये उन्होंने कहा है कहीं पर मैं धर्म को बदल रहा हूं नहीं नहीं कहा आप क्यों कह रहे भगवान ने यह काल के अनुसार से परिवर्तित होते हैं जैसे काल क्या है काल के अनुसार हम परिवर्तित कर रहे हैं हम मंदिर नहीं जा पा रहे हम घर में बैठ के पूजा कर रहे हैं हम जन उधारण नहीं कर पा रहे सतयुग में ध्यान होता है ये सारे नियम तो शुरू में ही बताए गए बा बता समने समने का डिफर
00:33:34:08 हो आपने सम दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद जय श्री राम
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