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00:00:01:13 सर्वप्रथम श्री शिवांश नारायण द्विवेदी जी आप यहां पर उद्बोधन करेंगे अपना अनुभव कथन वह हमारे समक्ष रखने वाले हैं हम उनका परिचय जानकर लेते हैं शिवांश नारायण द्विवेदी जी आप आदित्य वाहिनी पूरी के शंकराचार्य जी की सेना इसके क्षेत्रीय संयोजक है लखनऊ के हिंदुओं को धर्म शिक्षा देने का आप कार्य करते हैं और साथ ही में स्कूल्स और कॉलेजेस में विद्यालय महाविद्यालय में जाकर बच्चों को धर्मशास्त्र के बारे में बताने का कार्य आप करते हैं मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आपका अनुभव कथन आप हम सभी के समक्ष रखें परिचय मेरा हो सकता है वह यही है कि मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी
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00:00:49:03 पीठाधीश्वर जी का एक अल्पज्ञ शिष्य हूं और प्रभु श्री राम का साधारण सा भक्त
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00:00:58:00 परम पूज्य गुरुदेव की जो सेना है आदित्य वाहिनी सेना उसके अंतर्गत एक हिंदू राष्ट्र का अभियान चल रहा है जिसके अंतर्गत हम विभिन्न माध्यमों से जो हमारी मित्र संस्था है जिससे हम जुड़े जिसके माध्यम से हम यहां पर आए हैं तो सर्वप्रथम अभी मैंने देखा है कि आज हमने कई महानुभावों को सुना प्रातः काल से अभी तक और उन्होंने भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से अपना वक्तव्य दिया और हमारे अंदर जागरूकता लाने का प्रयास किया विभिन्न जो विषय है उनके ऊपर अब इसके बाद जो एक व्यवहारिक और धरातल स्तर की बात है वह उस तरफ मैं आपका ध्यान केंद्रित करना चाहूंगा इसका कारण यह है जितने भी वरिष्ठ आचार्य पदों पर बैठे हुए हमारे आचार्य गण है व भले ही रावण जाचार्य परंपरा से हो निबार काचार्य पर परंपरा से हो शंकराचार्य परंपरा से हो और जो भी कहीं पर भी धर्म रक्षा के निमित्त कार्यरत हैं यहां तक कि जो हमारा पुलिस विभाग है
00:02:13:08 या फिर सैन्य विभाग है इन सबके अंदर अंदर ही अंदर वरिष्ठ पदाधिकारी जितने भी हैं वह यह जानते हैं कि विप्लव की स्थितियां बन सकती हैं विप्लव की स्थितियां हमारे बहुत निकट आ चुकी है अभी अभी जैसे हमने सुबह हमास की बात की इजराइल की बात की तो अगर केवल मौखिक रूप से सूचनाओं पर हम मान ले तो बहुत सारे ऐसे है ऐसे तत्व भारत में प्रवेश कर चुके हैं जो एक योजना बद्ध तरीके से एक गृह युद्ध की ओर ले जाना चाहते हैं भारत को गृह युद्ध में अगर अंदर गृह युद्ध चल रहा होगा तो उस समय ऐसा नहीं है कि जो बाहरी शक्तियां हैं वो चुपचाप बैठेगी वो उसी समय सीमा पर आक्रमण करने के लिए तैयार रहेंगी यह सब बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से तैयारियां चल रही हैं तो अब सबसे पहली बात है कि हमने समस्या को जान लिया है इसका समाधान क्या है इसका समाधान जो सबसे पहला है बिल्कुल निचले स्तर का बिल्कुल धरातल स्तर का कि हम जिस जगह रह रहे हैं हमारा
00:03:28:13 जिस जगह निवास है उस जगह पर हमारे अगल बगल हमारा संगठन होना चाहिए अगर कल को कोई विप्लव होता है मेरे घर के आसपास तो मैं वाराणसी में बैठे हुए किसी मित्र को फोन नहीं लगाऊंगा पुरी में बैठे हुए गुरुदेव के यहां जो मेरे गुरु भाई होंगे उनको मैं नहीं बुलाऊंगा मेरी सहायता करने के लिए उस समय वही लोग वहां पर होंगे जो मेरे पड़ोसी हैं मगर दुर्भाग्य की बात है कि आज हमारा अपने ही पड़ोसी के साथ कोई बहुत अच्छा व्यवहारिक संबंध नहीं है तो इसलिए जो हमारी हिंदू जन जागृत समिति है संस्थान है या फिर आदित्य वाहिनी सेना है इसका अर्थ यह नहीं है कि आप अपना सब कुछ घर बार परिवार छोड़ कर के और जहां भी आपको आक्रमण करने बुलाया जाएगा वहां चले आए नहीं अगर आप अपने गली मोहल्ले में रहते हुए अपने परिवार की केवल अपने परिवार की रक्षा करने के बारे में सोच रहे हैं तो आप एक शंकराचार्य के सैनिक हैं अगर आप अपने परिवार की रक्षा करने के बारे में सोच रहे हैं तो आप हिंदू जनजागृति
00:04:43:15 सेवा समिति के सदस्य हैं केवल अपनी रक्षा के बारे में सोच लीजिए बस अब यह रक्षा की कैसे जाए तो जब हमें किसी को अपने संगठन से जोड़ना होता है तो तो हमें उनके सामने उन चीजों को प्रस्तुत करना पड़ता है जिनका सानिध्य वो भी प्राप्त करना चाहता हो सामने वाला केवल हमारी बातें सुन कर के कोई नहीं आएगा इसलिए इसका जो व्यवहारिक दृष्टिकोण है संगठन बनाने का वह सबसे पहला है अपने नजदीकी किसी भी मंदिर में मंदिर परिसर में हम लोग हम लोगों ने बहुत सारी योजनाएं सुनी कि हमें यह करना है वो तभी हम कर सकते हैं जब हमारे साथ खड़ा हो संख्या बल हो हमारे पास हिंदुओं की अन्यथा संख्या बल नहीं होगी तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे रक्षा अपनी नहीं कर पाएंगे मूल्यों की बात में करेंगे अपनी रक्षा नहीं कर पाएंगे अपने परिवार की नहीं कर पाएंगे तो इसलिए यहां से आज आप यह एक निर्णय करके जाएं कि प्रत्येक सप्ताह साप्ताहिक रूप से आपके पड़ोस में नजदीक में जो मंदिर हो उसको आप दुर्ग बनाइए उसको आप किला
00:05:58:15 बनाइए साप्ताहिक रूप से वहां पर लोगों को बुलाइए भगवन नाम का जाप करिए हनुमान चालीसा पढ़िए उनके साथ मिलकर के एक दूसरे का सुख दुख बाटिए आदान प्रदान करिए विचारों का जिससे कि धरातल पर हमारे बीच में एकता आए अन्यथा ऐसा अगर नहीं होगा तो विप्लव के समय हिंदू बटा रहेगा और अपने अपने घरों में उसके साथ जो जो होगा वो होगा अब इसमें जो अगला पक्ष है वह यह है कि कोई भी व्यक्ति हमारे कहने पर मंदिर क्यों आए यह एक सबसे बड़ी जब हम धर्म के प्रतिनिधि होकर के या धर्म रक्षक बन कर के जाते हैं किसी से यह कहने कि आप मंदिर आ जाइए तो वह हमसे सबसे पहला प्रश्न करेगा कि आप हो कौन जो हम आपके सानिध्य में मंदिर पहुंचे तो इसके लिए हमारे पास सनातन धर्म के पांच साल भौमिक सिद्धांत होने चाहिए जो मैं अभी आपको बताने वाला हूं पांच सार्वभौमिक सिद्धांत जिस हिंदू के पास है वह वैचारिक दृष्टि से लोगों को एक करने में सक्षम हो जाएगा लोगों को संगठित करने में
00:07:13:21 सक्षम हो जाएगा पूज्य गुरुदेव की कृपा से प्रभु श्री राम की कृपा से यह पांच सिद्धांत मुझे प्राप्त हो पाए जिनको मैं आपके समक्ष अपने अल्पज्ञ के साथ रखने की प्रयास मात्र करूंगा आज अगर हम देखें कि हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं ज्यादातर जो 60 से 70 प्रत जो हिंदू है जो धर्म की रक्षा करता है उससे अगर यह पूछा जाए कि आप क्या कर रहे हैं तो वो बड़े ही अ गर्व के साथ बताएगा कि मैं एक धर्म रक्षक हूं उससे अगला प्रश्न जब यह किया जाएगा कि जो आपका धर्म है वो सुनिश्चित कहां से होता है वो बता देगा वेद पुराण भगवत गीता उससे अगला प्रश्न अगर यह कर लिया जाएगा कि वेद पुराण भगवत गीता के कई अर्थ हो चुके हैं तो किस अर्थ कौन सा अर्थ आपके लिए प्रमाणिक है यहां पर वह आपको सटीक उत्तर नहीं दे पाएगा कि माने तो किसको माने और अगर किसी को मान रहे तो उसके क्या परिमाप है क्यों माने जैसे कि गीता गीता के बहुत सारे अर्थ आ चुके हैं यथारूप गीता यथार्थ गीता
00:08:28:26 हम गीता प्रेस गोरखपुर की गीता है थी ही पहले से इसके बाद ब्रह्मा कुमारी की गीता और भी ऐसे कई तंत्र है जिनकी गीता आ चुकी है तो इसका अर्थ यह हुआ कि हमारा धर्म ही सुनिश्चित नहीं है और हम उसकी रक्षा करने की बात करते हैं अब इसको व्यवहारिक दृष्टि पर अगर हम देख ले तो जैसे सुबह एक बात हुई थी कि कुछ लोग कुछ लोगों के य ऐसी परंपरा है कि वहां पर मामा या बुआ की बिटिया से विवाह हो जाता है ऐसी परंपराएं हैं और कहीं पर परंपराएं हैं ठीक विपरीत कि नहीं मामा की बिटिया से हम विवाह नहीं करेंगे वो हमारी बहन होती है तो इनमें से धर्म क्या है कहीं पर परंपरा है कि मांस खाया जाए पूर्वांचल में कहीं पर मांस खाने को शास्त्रीय माना जाता है और कहीं पर परंपरा है कि मांस ना खाया जाए तो इसमें से धर्म क्या है मांस खाना या ना खाना कहीं पर कहा जाएगा भगवान साकार है कहीं पर कहा जाएगा भगवान निराकार है तो इसमें से धर्म क्या है शास्त्रीय क्या है भगवान साकार है कि निराकार है यही यही जो आधार है इन्हीं आधारों पर हम हिंदू बटे हुए हैं
00:09:44:09 तो जब हमारे पास जो मूल पांच सिद्धांत होंगे तो ऐसे किसी भी स्थिति का सामना हम कर पाएंगे और अब अपने जो हिंदू भाई हैं उनको हम एक कर पाएंगे पांच सिद्धांतों में पहला सिद्धांत जो यही पांच सिद्धांत हम विश्वविद्यालयों में जाकर के आईएएस आईपीएस कोचिंग्स में जाकर के अ स्कूलों में जाकर के कक्षा छह से लेकर के पीएचडी तक करने वाले छात्र-छात्राओं को हम यही सिद्धांत पांच सिखा रहे हैं जिससे कि सब सर्वप्रथम वो उनका जो आध्यात्मिक स्तर है वह बढ़े उसके बाद वह धर्म निष्ठ हो जाए और उसके बाद अंततः वह हमारी सहायता कर सके धर्म रक्षा करने के समय हमारे साथ खड़े हो पाए तो यह पांच सिद्धांत आप लोग भी आज यहां से लेकर जाएंगे पहला सिद्धांत है इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति नास्तिक नहीं है फिर वह भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो इस संसार में हर व्यक्ति भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वह भले ही खुद को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो इसका आधार है बृहदारण्यक उपनिषद एकती
00:11:00:15 28 असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्मया मृत्युर मा अमृतम गम एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी दुनिया का सारा ज्ञान प्राप्त कर लेने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना खत्म होने वाला सुख प्राप्त करने की चाह विद्यमान है यानी कि तीन चा को अगर हम कहे हिंदी में तो उसके अंदर सत चित आनंद की चा है नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी है अब है क्या कि वह चाहता क्या है सत चित आनंद और क्या क्या रहा है इस दुनिया में कोई भी सच्चित आनंद नहीं है तो नियम यह है कि हमारे अंदर जो जो चाह है जो जो डिजायर हमारे अंदर मौजूद है उसका सब्जेक्ट दुनिया में है जैसे कि हमारे अंदर सुनने की प्यास है डिजायर है तो दुनिया में आवाज है हमारे अंदर देखने की डिजायर है तो दुनिया में दृश्य है हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में पानी है हमारे अंदर भूख है तो दुनिया में खाना है तो जिस प्रकार नेत्रों की चाह का विषय दृश्य सिद्ध होता है जिस प्रकार कानों की चाह का विषय आवाज सिद्ध होता है उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर
00:12:15:20 भी व्याप्त सत चित आनंद की चाह का विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है यह आवश्यक क्यों है क्योंकि हमारे जिन लोगों को हम मंदिर लाना चाहते हैं उनको कई लोग ऐसे मिले कि इस दुनिया में कोई भगवान है ही नहीं भाई हम भगवान को जब प्रूफ नहीं कर सकते तो उनको भगवान के पास लाएंगे कहां से तो हमें भगवान को सिद्ध करना आना चाहिए अगर हम हिंदुत्व के रक्षक है तो दूसरा सिद्धांत है तैत्रीयोपनिषद दो एक सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम इसका अर्थ है ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बना ने वाला सर्व नियामक है इसका अर्थ यह भी है अब यह जो खंडन है इससे आप किसको रोकेंगे जितने भी ऐसे लोग होंगे जो काल्पनिक ईश्वर की चर्चा करते होंगे मैं इस्लाम की बात भी कर रहा हूं एकमात्र संसार में हमारा ही सनातन धर्म ऐसा है जिसके द्वारा परिभाषित होने वाला जो ईश्वर है वह किसी भी नियम के नीचे नहीं है दुनिया में अन्य जितनी भी विचारधाराएं हैं सनातन विरुद्ध विचारधारा उनके अंदर जो ईश्वर ख्या
00:13:30:20 पित हुआ है परिभाषित हुआ है वह कहीं ना कहीं बाधित है हमारा ईश्वर बाधित नहीं
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00:13:36:02 है इसीलिए अगर कोई कहे कि ईश्वर जन्म नहीं ले सकता तो वह राम कृष्ण के रूप में अवतरित होते हैं अगर कोई कहे कि वह
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00:13:44:24 मृत्यु को प्राप्त नहीं हो सकता तो वह राम कृष्ण के रूप में यह मृत्यु को प्राप्त होकर भी दिखाते हैं अगर कोई कहे कि वह वरा नहीं बन सकता वो वरा बनते हैं कोई कहे कि वो वामन नहीं बन सकता वामन बनते हैं हम जो सोच सकते हैं वह हमारा ईश्वर कर सकता है तो दूसरा जो नैरेटिव हमको याद रखना है वह क्या है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है यह क्यों नैरेटिव याद रखना है जैसे ही हमसे आकर के कुछ कहेगा जैसे ही हमसे कोई आकर के यह कहेगा ईश्वर सिर्फ निराकार है तो हम कहेंगे नहीं ईश्वर के ऊपर कोई नियम लागू नहीं हो सकता है ईश्वर निराकार साकार दो दोनों है ब्रक उपनिषद दूसरा अध्याय तीसरा श्लोक है संभवत वर्बल याद नहीं है उसमें लिखा है ईश्वर निराकार और साकार दोनों हैं तो ईश्वर के ऊपर अगर कोई नियम लागू हो गया तो वह ईश्वर नहीं है इसीलिए भगवान ये सब लीलाएं करते हैं अब देखिए केरल स्टोरी में हमारी बिटिया को यह कहा गया कि यह तुम्हारा कैसा ईश्वर है जो रोता है वहा धर्म परिवर्तन हुआ कन्वर्जन हुआ अगर उन बिटियां को यह नियम मालूम होता कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो उनके मन को कोई भेद ना पाता ईश्वर रोए भी ईश्वर
00:14:59:26 हसेगा भी ईश्वर नाचेगा भी ईश्वर रास भी रचाए वह बात एक अलग है कि यह सब करके ईश्वर ने विभिन्न साइंटिफिक और स्पिरिचुअल अर्थ दिए हैं मगर एक अर्थ हमेशा है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है यह दूसरा नियम है मैं थोड़ा जल्दी समाप्त करूंगा शॉर्ट में तीसरा नियम है कि ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक है जिनको ईश्वर ने भी ना लिखा हो हमारे जो वेदा आदि शास्त्र है वो अपौरुषेय
00:15:59:01 और वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला हमारा धर्म है तो यह तीसरा सिद्धांत है कि ईश्वर के विषय में केवल उन्हीं शास्त्रों को प्रमाणिक मानेंगे जो ईश्वर ने भी ना रचा हो इससे दुनिया के तथाकथित जितने भी ग्रंथ हैं जो काल्पनिक दृष्टि से गड़े गए हैं उनका हम खंडन कर देंगे उसमें कहा जा रहा है कि हमको केवल इन्होंने लिखा है तो अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो व इस नियम के नीचे भी नहीं होना चाहिए कि वो झूठ नहीं लिखेगा तो इसलिए हम उन ग्रंथों को नहीं मानते और 6 101 में वहां पर कहा जा रहा है कि मेरी कोई संतान नहीं हो सकती यह क्या हुआ उनका ईश्वर बाधित है वह जन्म नहीं ले सकता अवतार नहीं ले सकता मगर भगवान क्या कहते हैं चौथे अध्याय के सातव श्लोक में यदा यदाई धर्मस्य ग्लानि भवति भारता अथान धर्मस्य तदात्मानं सजाम हम जब जब धरती पर पाप होगा मैं आऊंगा मैं अवतरित होऊंगा तो इस यह अंतर है हमारे और उनमें यह अंतर हमें जन जन को बताना है कि हमारे बीच में क्या अंतर है और इन सिद्धांतों के सानिध्य में हम संगठित हो सकते हैं अच्छा चौथा सिद्धांत है कि रामो विग्रहवां धर्मः अभी तक हमने सुबह से बहुत बार नारा लगाया है जय श्री राम
00:17:14:10 अभी नोएडा में एक घटना हुई एक बच्चे ने स्टेज पर बोल दिया जय श्री राम उसको उतार दिया गया मंच से अब जय श्रीराम का उन्होंने कहा इसका लॉजिक क्या तो बच्चे को लॉजिक नहीं पता था बच्चे को लॉजिक पता होना चाहिए लॉजिक क्या है वाल्मीकि रामायण 337 13 में कहा गया है रामो विग्रह वान धर्म श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है और धर्म क्या है आचार्य चाणक्य ने लिखा है धर्मेन हीना पशु भी समाना जिसके अंदर धर्म नहीं है वह पशु के समान है सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है यह हमें धर्म बताता है अगर हमारे पास धर्म नहीं है तो हम उनमें अंतर नहीं कर पाएंगे इसका अर्थ क्या हुआ
00:18:01:09 इसका अर्थ यह हुआ कि जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हम कहते हैं कि उन नियमों की जय जो हमें पशु से अलग बनाते हैं ज जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हम कहते हैं मानवता की जय और उस मानवता में सभी लोग आते हैं यह नियम हमारे बच्चों को पता होना चाहिए और अंतिम सिद्धांत जो है व है कालनेमि हों का दमन हमारी सबसे बड़ी मुसीबत वो नहीं है जो सामने खड़ा है हम उसे पहचानते हैं नहीं हमारी सबसे बड़ी मुसीबत है वह लोग जिन्होंने सनातन का चोला ओढ कर के अपने फायदे के लिए गलत शिक्षा दे रहे हैं तो इन लोगों से हम कैसे लड़े हमारा सबसे बड़ा शत्रु वह है जो दिखता सनातनी है दिखता हिंदू है दिखता
00:18:53:16 धर्मजीत की शिक्षा लेने जाएं तो प्रमाणिक आचार्य के पास जाए प्रमाणिक जो कल तक कवि थे और आज राम कथा मर्मज्ञ बन गए हैं उनके पास कभी ना जाएं जो जो अपने लिए लिखते हैं कि मैंने आईआईटी की है वहां से आईआईटीए हूं और लगाते अपने नाम के सामने आचार्य आचार्य प्रशांत तो ऐसे स्वघोषित सेल्फ प्रोक्लेम गुरुओं के पास कभी ना जाएं इनसे बचे अब कैसे बचे निश्चित नि नियम क्या है तो इसका निश्चित नियम है अथर्ववेद 117 अथर्ववेद 117 16 में लिखा हुआ है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनेगा यानी कि धर्म का अंतिम निर्णय करने वाला एक सन्यासी होना चाहिए अंतिम निर्णय आप गुरु बनाइए मगर वह इनसे बाहर शिक्षा ना दे सन्यासियों से दूसरा दूसरा क्या है कि ज्ञान वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो भगवत गीता च दो भगवत गीता 3 16 भगवान ने य कहा है और तीसरा नियम कि आचार्य वही हो जो सभी श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा दे ऐसा ना
00:20:08:16 करे कि विष्णु पुराण में अगर विष्णु को बड़ा बताया है और शिव पुराण में शिव को तो वह कहे नहीं विष्णु को बत मानो शिव को मानो ऐसा ना हो सभी शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा वह क्या है एक ही ईश्वर स्वयं को पांच रूपों में प्रकट करते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश समय समय पर यही अवतरित होते हैं षष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है कई बार हुई है कभी उन्होंने विष्णु बन के बनाई सृष्टि कभी उन्होंने ब्रह्मा बन के कभी उन्होंने शिव बन के इनमें कोई भेद नहीं है यह तीसरा नियम और जो सबसे अंतिम नियम है प्रमाणिक आचार्य को पहचानने का वह है कि गुरु वही जो आपका संशय दूर कर दे गु का मतलब होता है अंधकार और रू का मतलब होता है निकालने वाला अंधकार से निकालने वाला होता है गुरु अद्वय तारका उपनिषद यह लिखा हुआ है गुरु का अर्थ तो अगर आपने सवाल किया और वह आपके सवाल का उत्तर ना दे कर के कह रहा है कि तुम अंध भक्ति करो तो वह भी आपका प्रमाणिक आचार्य नहीं है तो यह पांच सिद्धांत आप अगर पकड़ के चलेंगे पहला सिद्धांत संसार का हर व्यक्ति भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वह भले ही नास्तिक ही क्यों ना हो दूसरा सिद्धांत ईश्वर वही है जो कुछ भी कर
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→ Used in: A · Live रामपाल पंथ और उनके अनसुलझे रहस्य #rampaljimaharaj #kabir at 9:00 ↗
→ Used in: A · Live ईश्वर अवतार निषेध- Arya Samaj Acharya Live Discussion #aryasamaj at 1:52:00 ↗
00:21:22:12 सकता है तीसरा सिद्धांत कि ईश्वर के विषय में वही शास्त्र प्रमाणिक जिनको ईश्वर ने भी ना रचा हो चौथा सिद्धांत ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से और
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00:21:35:07 अगर हमको सबसे सरलतम रूप जानना है धर्म का तो वह है राम तो मैं अपनी वाणी को विराम दूंगा इसी माध्यम से और जो हमारी शंकर परंपरा है उसके लिए एक श्लोक है वह आपको बताऊंगा नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अस्म चार्य पर वंदे गुरु परंपराम सभी को जय श्री राम और इस बार लॉजिक के [प्रशंसा]
00:22:10:22 साथ
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