⬜ Not used yet · 00:00:00:13 – 00:11:47:00 (11:47)
00:00:00:13 चैतन्य हैड रिलाइड सेइंग द वन हु डज नॉट फॉलो द कमेंटरी ऑफ श्रीधर स्वामी इज टू बी कंसीडर्ड अ प्रोस्टिट्यूट सो हि क्वेश्चन इज इफ लॉर्ड चैतन्य हैड फोरबिडेन एनी वन टू राइट कमेंटरी ऑन द भगवतम आउटसाइड ऑफ श्रीधर स्वामी ओन कमेंटरी देन वहाई ड प्रभुपाद कमेंट ऑन द श्रीमद भगवतम इजट दिस अ कंट्रक्शन सो बिफोर आई आंसर दिस क्वेश्चन लेट मी क्लियर अप द कांटेक्ट इफ वयी रीड द सेथ चैप्टर ऑफ द अंत लीला वी विल फाइंड दैट वल्लभाचार्य वास कवर्ड विद प्राइड ही वाज फुल ऑफ फाल्स प्राइड एंड आउट ऑफ दिस फॉल्स प्राइड ही केम टू प्रेजेंट हिज कमेंटरी न श्रीमद् भागवत ू लड चैतन्य महाप्रभु अभी कुछ ही दिन पहले मैंने स्कन की शिक्षाओं पर एक प्रश्न उठाया था कि श्री चैतन्य महाप्रभु जब भागवत को समझते श्रीधर स्वामी के द्वारा जो कि अपने समय के शंकराचार्य हैं तो फिर शंकराचार्य से दूरी क्यों बनाई जा रही है इसकन में तो इस बारे में हमारे प्रश्न के समाधान स्वरूप एक इकन की तरफ से अधिकृत रूप से नहीं मगर उनके एक फॉलोअर की तरफ से जो भक्ति रास अमृत नाम से उनका आईडी है उनकी तरफ से एक पक्ष अपना प्रस्तुत किया गया है इस समाधान में उन्होंने यह बताया है कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने वल्लभाचार्य जी को जो एक प्रकार से ट लगा दी थी कि आप यदि शीदा स्वामी के बाहर जाकर के अपना भाष्य लिख रहे हैं तो भाष्य गलत होगा मैं गर्व के साथ कह सकता हूं मतलब मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं तो इसके लिए इस वीडियो में इन्होंने जो समाधान दिया वो यह दिया है कि ऐसा श्री चैतन्य महाप्रभु ने इसलिए दिया था
00:01:15:27 क्योंकि श्री वल्लभाचार्य जी को घमंड हो गया था और वह श्रीधर स्वामी के विरुद्ध जाकर के टीका लिख रहे थे ठीक है पर हमने तो यह कहा ही नहीं है कि श्रीधर स्वामी के अलावा कोई भी टीका नहीं लिखा जा सकता हमने अपने वीडियो में नहीं कहा हमने भी यही कहा है कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने यही कहा था कि जो भी व्यक्ति श्रीधर स्वामी के बाहर जाकर के टीका लिखने का प्रयास करेगा वह व्यक्ति मेरे लिए अ अमुक अमुक के समान है इस प्रकार से उन्होंने वहां पर कहा था तो पहली बात तो यह कि आपका यह बताना कि वल्लभाचार्य जी को श्री चेतन महाप्रभु ने क्यों डांटा क्यों लिखने से रोका यह बताना व्यर्थ था क्योंकि जो आप कह रहे हैं वही बात हमने भी कही है अच्छा एक बात तो सबसे पहले मैं यह कहूंगा कि ज्यादातर ऐसा होता होता है कि स्कन की तरफ से जब हमारी वीडियोस पर क्वेश्चन उठाए जाते हैं तो उसमें यह नहीं होता है कि प्रमाण लीजिए या ये ले लीजिए शास्त्रीय बात ये नहीं होता ज्यादातर क्या होता है बहुत व्यूज आ रहे हैं ना स्कन के नाम पर चैनल अच्छा चल रहा है ना इस तरह की बातें वहां पर होती है अच्छा जो लोग प्रमाण लेकर के आते भी हैं तो हमने अगर 10 प्रश्न पूछे होंगे 20 प्रश्न पूछे होंगे तो उन 20 प्रश्नों में से जिस एक प्रश्न में उनको सहजता होगी जिनको लगता होगा मैं इसका उत्तर दे सकता हूं उस एक प्रश्न पर ही बात करेंगे बाकी के 19 पर
00:02:30:28 नहीं हमारी इं आईडी पर जिसके बारे में इन्होंने बात की है भक्ति रमत वालों ने इस इंस्टा आईडी पर बहुत सारे प्रश्न डले हुए हैं स्कोन के लिए मगर केवल एक इसी प्रश्न पर ही इन्होंने उत्तर दिया इतने दिनों में अच्छा एक राधिका जो वहां पर और बात कर रही है वहां पर कमेंट्स में मैंने जाकर के देखा जो उनको सपोर्ट कर रहे हैं और वहां पर हमारे में से भी कोई हमारे बंधुवर हैं जो वहां पर हमारे बारे में वहां हमारा पक्ष रख रहे हैं वहां पर एक राधिका भी है वहां पर वो भी ही इसी तरह की बातें कर रही हैं कि मैंने उनको यह कह दिया वो वो हमेशा लाइव स्ट्रीम पर आने के लिए कहते हैं लाइव स्ट्रीम पर आने के लिए इसलिए कहते हैं कि जिस बात को मैं कम समय में यहां पर बोल सकता हूं उसी बात को वहां पर टाइप करने में देर लगती है संभव आपको नहीं लगती होगी हमें लगती है और लाइव स्ट्रीम पर आने में यह भी होता है कि अगर आप मेरे प्रश्न को समझ नहीं पा रहे हैं गलत समझ करके उसका उत्तर दे रहे हैं तो मैं आपको टोकू और अपना प्रश्न दोबारा से सही तरीके से आपको स्पष्ट करूंगा अभी यही हुआ अब आपने मेरा प्रश्न समझा नहीं अच्छा या फिर लिख लिखकर जवाब देने में यह भी होता है कि मैंने 20 प्रश्न पूछे हैं आपने उसमें से किसी एक का उत्तर दे दिया बाकी के 19 उत्तर क्यों नहीं दे रहे क्या उसमें आपको लगता है कि मैं सही हूं अब इसके बाद आपका कहना यह है कि हमने शील प्रभुपाद जी
00:03:45:28 पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने श श्रीधर स्वामी की अलना की नहीं हमने अपनी वीडियो में कहीं भी यह बोला ही नहीं है कि शील प्रभुपाद जी के भाष्य को हम चैलेंज कर रहे हैं कि वह श्रीधर स्वामी से मैच नहीं खाता है हम यह कह रहे हैं कि कि आज जो भाष्य उसमें पढ़ाया जा रहा है वो किसका है क्योंकि कई जगह ऐसी शिक्षाएं प्राप्त हो रही है स् कन के द्वारा जो कि शील प्रभुपाद से मैच नहीं कर रही हैं अगर आप लाइव आने का सामर्थ्य जुटा पाते मैंने आपसे आग्रह भी किया था कि आप ला लाइव आ जाइए तो यह जो देर लगती है या प्रश्नों को समझ पाने में प्रॉब्लम होती है वह समस्याएं हमारे सामने ना आती हम तो यह कह ही नहीं रहे कि हम शील प्रभुपाद जी को चैलेंज कर रहे हैं क्योंकि इकन की कई शिक्षाएं ऐसी हो रही है जिसमें कि शील प्रभुपाद जी के विचारों के साथ जो है मिसमैच हो रही है वो कंटक्ट हो रहा है अब बात यह है कि स्कन के द्वारा जो प्रस्तुत किया जाने वाला भाष्य है उसमें कई जगह पर ये मेंशन है कि उन्होंने यहां पर जो तर्क दिए जो सिद्धांत दिए हैं वह सीधा स्वामी से मैच खाते हैं तो प्रश्न हमारा यह है कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने जब श्रीधर स्वामी का लिखा हुआ टीका स्वीकार किया है तो उनके टीके के बजाय कोई और टीका स्कोन में क्यों पढ़ाया जा रहा है दूसरी बात यह है कि यदि
00:05:01:02 आप यदि वह संस्कृत में है वो टीका तो आप उसका हिंदी ट्रांसलेशन पढ़ाइए मगर पढ़ाइए उन्हीं का अच्छा तीसरी बात यह है कि अगर आप समझते हैं कि उस उस समय की जो प्रासंगिक भाषा थी उसमें और अंतर आ गया है और सरलता से करना है इसलिए हमने भाष्य लिखा है तो ठीक है तो आप यह भी रखिए मगर इसकन में कम से कम उपलब्ध तो होना चाहिए ना सीध स्वामी जी का टीका नहीं है उपलब्ध तो यह श्रीधर स्वामी का ग्रंथ उपलब्ध ना होना इसकन में आपकी परंपरा में कहीं भी शंकर संप्रदाय के आचार्य का नाम ना होना यह क्या इंगित करता है वहां पर उनके जो दीक्षा गुरु है ऑफिशियल जिनसे वो दीक्षा ले रहे हैं उनका नाम नहीं है और अन्य जिन्होंने गुरु रूप में नहीं बल्कि सहयोगी के रूप में श्री चैतन्य महाप्रभु का साथ निभाया उनका नाम वहां पर गुरु के जगह पर लिखा हुआ है तो ऐसा क्यों है अब बात य आती है कुल मिलाकर के कि सीदर स्वामी का भाष्य गाय बस कन से उनके जो दीक्षा गुरु है उनके जो सैद्धांतिक गुरु है जिनको व जगतगुरु मानते हैं उनका नाम गायब है वहां पर से यह सब चीजें इस तरफ इंगित कर रही है कि आप सार्वभौम जगत गुरुओं से इसकन के अनुयायियों की दूरी बनाकर रखना चाहते हैं इस कारण से आपने ये किया है एक प्रश्न यह भी बनता है कि जब मधवा चार्य जी
00:06:16:03 ने भाष्य लिखा है श्रीमद् भागवत पर तो श्री चैतन्य महाप्रभु उनके भाष्य को ना बनाकर श्रीधर स्वामी के भाष्य को क्यों अपना रहे हैं क्या स्वयं भगवान श्री कृष्ण से जो मधुवा चार्य जी तक ज्ञान आया था वो पूर्ण नहीं था जो श्री चैतन्य महाप्रभु को उनके द्वारा लिखे गए भाष्य को छोड़ कर के श्रीधर स्वामी के पास जाना पड़ा और इस सबके बाद भी श्री चैतन्य महाप्रभु को फॉलो करने वाला जो स्कन है वह यह कहता है कि हमारे परम गुरु जो है मधवा चार जी हम मधवा संप्रदाय के इसके अलावा यदि श्रीधरी टीका मान्य है और उसी पर आपका भाष्य लिखा हुआ है तो श्रीधरी टीके को कम से कम उपलब्ध तो कराइए अरे भाई शंकर संप्रदाय के आचार्य गण कुछ भी लिख द ऐसा थोड़ी नाना करते हैं कि पुराने जो शंकर भाष्य उनको गायब ही कर दें कि नहीं भाई आदि शंकराचार्य जी का लिखा हुआ है ही नहीं भाई शंकर भाष्य आप जाकर के देखिए उपनिषदों पर ब्रह्म सूत्र प अवेलेबल है भले ही आज के आचार्य दोबारा भाष्य करते मगर ऐसा थोड़ी ना कि उसकी बात ही नहीं होगी शंकर भाष्य पर आधारित ही है आज की भाषा के अनुरूप नया भाष्य लिखा गया वोह बात एक अलग है मगर हम शंकर भाष्य को गायब नहीं कर देंगे अब यहां पर कुछ लोग ऐसा कहेंगे कि भाई जो श्रीधर स्वामी थे अंदर से वैष्णव थे
00:07:31:19 और वो बाहर से दिखने के लिए शंकराचार्य थे बाहर से दिखने के लिए शंकर संप्रदाय के थे वो अंदर से वैष्णव थे भाई जो भी विष्णु की पूजा करेगा शंकराचार्य जी को मानने वाला वो श स्मार्थ होते हुए वैष्णवी है अगर कोई शिव की पूजा करेगा तो वो स्मार्थ होते हुए शैव है और अगर वो वैष्णव थे उनका टीका स्वीकार्य था तो उनका टीका आप क्यों नहीं दे रहे हैं इकन वालों को क्यों नहीं पढ़ने दे रहे हैं जिससे कि वो मैच कर पाए इसकन का टीका और यह जो श्रीधर स्वामी का टीका है मैच कर पाए अगर आप ये कहते श्रीधर स्वामी का टीका जो है वह विलुप्त हो गया है भ्रष्ट हो गया मिलावट हो गई है तो फिर इसका मतलब परंपरा से प्राप्त होने वाला ज्ञान भी खंडित हो जाता है क्योंकि श्री चैतन्य महाप्रभु तक वोह टीका उपलब्ध है वो उसे मान रहे हैं पढ़ रहे हैं उसके बाद व अपने शिष्य को सुरक्षित रूप से नहीं दे रहे यानी कि ज्ञान जो है सुरक्षित रूप से नहीं आया है इसकन के अनुसार इस कन में सुरक्षित नहीं है ज्ञान वो टीका मिलावट हो गई उन्होंने नहीं दिया अंतता जब आप अंतता जो आपकी बात है कि वह अंदर से वैष्णव थे सीधा स्वामी क्योंकि आप क्या जवाब देंगे आपकी बात कर रहा हूं स्टा आईडी वाले जो भाई साहब है आप क्या जवाब देंगे इस बारे में कि श्रीधर स्वामी ने भाष्य जो लिखा है वह किसके अनुरूप है किसके नहीं है मगर
00:08:46:26 इसकन जो जवाब देता है वह यह देता है कि श्रीधर स्वामी अंदर से वैष्णव थे दिखाने के लिए व शंकर संप्रदाय के थे इसका अर्थ क्या हुआ कि श्रीधर स्वामी वैचारिक तौर पर गुरु विरोधी थे जब वह लिखते हैं तो वह गुरु विरोधी हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि वह प्रामाणिक आचार्य नहीं है आपके हिसाब से तो इसका अर्थ यह हुआ कि श्री चेतन महाप्रभु एक अप्र माणिक आचार्य को मानते थे गुरु विरोधी को मानते थे तो आप कुल मिलाकर के यदि आप श्रीधा स्वामी को अंदर से वैष्णव बाहर से शंकराचार्य जी के प्रति आस्थान बता रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप यह कह रहे हैं कि हम अ प्रमाणिक गुरुओं के द्वारा दी जाने वाली शिक्षा को फॉलो कर रहे हैं तो इस सब का अर्थ क्या हुआ कि श्री चैतन्य महाप्रभु गुरु विरोधी थे क्योंकि उन्होंने मधुवा चार्य जी के भाष्य को नहीं स्वीकारा शंकर संप्रदाय के भाष्य को स्वीकारा श्रीधर स्वामी गुरु विरोधी थे क्योंकि वह अंदर से शंकर विरोधी शिक्षा देते थे मगर बाहर से वह शंकराचार्य के पद पर नियुक्त होते थे अपने शिष्यों को दीक्षा देते थे शिक्षा देते थे शंकर संप्रदाय की मगर अंदर से वह वैष्णव थे और केवल उन्होंने अपने भाष्य में अपनी वैष्णव को उजागर किया था और वह जो उजागर किया था वो भी प्रमाणिक रूप से यह लोग नहीं उपलब्ध करा रहे यह देखो श्रीधर स्वामी ने यह भाष्य उपल ् कराया था तो इसका अर्थ यह है कि इकन
00:10:02:01 के अनुसार श्री चैतन्य महाप्रभु गुरु विरोधी थे क्योंकि उन्होंने अपने संप्रदाय के भाष्य को नहीं स्वीकारा बल्कि शंकर संप्रदाय के श्रीधर स्वामी के भाष्य को स्वीकारा उसे प्रमाणिक माना उन्हें जगतगुरु माना मगर केवल और केवल आज की तारीख में श्रील प्रभुपाद के भी वचनों को बदल देने वाला केवल इस्कोन ही एक ऐसा है जो अपने गुरु की अवेल नहीं करता है गुरु के द्वारा खींची गई सीमाओं के बाहर नहीं जाता है यही एक सत्य है ना तो श्रीर स्वामी सत्य हैं ना ही श्री चैतन्य महाप्रभु सत्य हैं और क्योंकि मधुवा चार्य जी ने भी पूर्ण तरीके से भगवान श्री कृष्ण से प्राप्त होने ज्ञान वाले ज्ञान को आगे नहीं बढ़ाया तो वह भी सत्य नहीं है केवल और केवल आज के टाइम में जो स्कोन का तंत्र है वही सत्य है तो इन सारे प्रश्नों का एक सटीक और कंप्लीट जवाब के साथ वीडियो बनाइए और अंतत यह सब करने से पहले मैं आपसे एक बात कहना चाहूंगा कि सबसे पहले शास्त्रों की गहराई में जाने से भी पहले आप यह बता दीजिए कि शास्त्रों की गहराई में जाना चाहिए कि नहीं क्योंकि इसकन ये शिक्षा दे रहा है कि शास्त्रों की गहराई में नहीं जाना चाहिए यदि आपको यह लगता है कि यह वचन जो है शास्त्रों की गहराई में नहीं जाना चाहिए यह सही है तो आप किस मुंह के साथ यहां पर आकर के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं
00:11:17:03 और यदि आपको यह लगता है कि गलत है तो पहला वीडियो आप उसके लिए बनाइए जिसने ये बात बोली है उसके लिए विरोध करिए तब तक करिए जब तक कोई सही कार्यवाई ना हो कि क्यों बोली ये बात एक अधिकृत व्यक्ति ने इसकन की तरफ से कि शास्त्रों की गहराई में नहीं जाना चाहिए शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है उसके बाद प्रमाण लेकर के आइएगा जय श्री राम
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Reply of Iskcon follower @bhaktirasamrat | Were Chaitanya Mahaprabhu and Sridhar Swami anti-Guru?
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