1
00:00:03,270 --> 00:00:07,920
[संगीत] हां जी बोल रहा हूं।

2
00:00:07,920 --> 00:00:13,280
मैं संत रामपाल जी महाराज के शिष्य हूं। हां हां

3
00:00:13,280 --> 00:00:18,640
हां तो उनके बारे में थोड़ा बताना था मुझे।

4
00:00:18,640 --> 00:00:23,280
क्या बताना है?

5
00:00:23,280 --> 00:00:27,200
अभी आपके पास टाइम है।

6
00:00:27,200 --> 00:00:31,600
मैंने इसीलिए पूछा ना क्या बताना है बताइए आप।

7
00:00:31,600 --> 00:00:37,040
हां। हां तो संत जी है ना हमारे संत जी रामपाल जी महाराज

8
00:00:37,040 --> 00:00:41,360
तो वो अब भगवान जो है

9
00:00:41,360 --> 00:00:46,240
देवता है उनको गलत नहीं कहते

10
00:00:46,240 --> 00:00:50,800
और उनके बारे में उनके बारे में वो उन्हें

11
00:00:50,800 --> 00:00:53,840
कुछ ऐसे

12
00:00:53,840 --> 00:00:57,920
बारे में कुछ वो तो भगवान के मंत्र देते

13
00:00:57,920 --> 00:01:02,880
हैं जो आप कहते हैं कि

14
00:01:02,880 --> 00:01:08,000
भगवान किसे कहते हैं?

15
00:01:08,000 --> 00:01:10,960
भगवान

16
00:01:10,960 --> 00:01:15,040
देवताओं को ही कहते हैं। ब्रह्मा विष्णु महेश कहां लिखा

17
00:01:15,040 --> 00:01:19,120
है? भगवान देवताओं को कहते हैं। यह

18
00:01:19,120 --> 00:01:23,920
बात कहां लिखी हुई है?

19
00:01:23,920 --> 00:01:28,320
भगवान बोलते थे हम भी पहले हम भी भक्ति करते

20
00:01:28,320 --> 00:01:32,720
थे। नहीं वैष्णव में आप मेरी बात समझी नहीं।

21
00:01:32,720 --> 00:01:36,800
जब भी रामपाल और उनकी उनके तंत्र

22
00:01:36,800 --> 00:01:40,960
से यह सवाल किया जाता है कि आप देवी देवताओं का अपमान करते हैं।

23
00:01:40,960 --> 00:01:45,120
तो वो ये कह देते हैं कि भाई हम उनको भी भगवान ही कहते हैं। ब्रह्मा विष्णु

24
00:01:45,120 --> 00:01:49,200
महेश को। ठीक है। भले ही भले

25
00:01:49,200 --> 00:01:53,200
ही यह कहा जा रहा हो कि अच्छा वह गीता बोलने वाले को भी

26
00:01:53,200 --> 00:01:57,200
भगवान कह देते हैं कि हम तो उसको भी काल भगवान कहते हैं। भले

27
00:01:57,200 --> 00:02:01,280
ही काल को ही उन्होंने अपनी बुक में शैतान लिख दिया

28
00:02:01,280 --> 00:02:05,520
हो। राक्षस लिख दिया हो। मनुष्यों को खाने वाला जीवात्माओं

29
00:02:05,520 --> 00:02:09,600
को खाने वाला लिख दिया हो। ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने वालों को

30
00:02:09,600 --> 00:02:13,920
नीच कह दिया हो। ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने वालों को मूर्ख

31
00:02:13,920 --> 00:02:18,400
कह दिया हो। शिवलिंग को पूजने वालों को वो गुप्तांग

32
00:02:18,400 --> 00:02:22,560
का पूजा करने वाला कह दिया हो मगर वो कहते हैं नहीं नहीं हम तो सम्मान करते हैं। हम

33
00:02:22,560 --> 00:02:26,720
तो भगवान कहते हैं। भगवान सुन सुन लीजिए एक मिनट नहीं सुन

34
00:02:26,720 --> 00:02:30,720
सुन सुन लीजिए भगवान कहते हैं और भगवान कहने के बाद वो सारे

35
00:02:30,720 --> 00:02:34,720
कार्य करते हैं जो अपमान से संबंधित होते हैं। मगर मैं यह कह रहा

36
00:02:34,720 --> 00:02:38,800
हूं कि भगवान की डेफिनेशन क्या है? अगर

37
00:02:38,800 --> 00:02:39,300
आप

38
00:02:39,040 --> 00:02:44,560
उनको भगवान मानते हैं तो भगवान की परिभाषा क्या है आपकी?

39
00:02:44,560 --> 00:02:48,720
तो उनका कहने का मतलब यह है कि जो शास्त्रों में

40
00:02:48,720 --> 00:02:53,200
मैं यह कह रहा हूं। मैंने अभी आपसे पूछा अगर आप इन

41
00:02:53,200 --> 00:02:57,280
मतलब ऐसे काम करने वालों को भी या इस तरह

42
00:02:57,280 --> 00:03:01,600
के कार्य जिन जिनसे जुड़ा होने के बाद आप उसको भगवान की बुद्धि

43
00:03:01,600 --> 00:03:05,600
उसके लिए नहीं रखोगे। इस घृणित कार्यों से

44
00:03:05,600 --> 00:03:09,680
जोड़ करके भी या उनकी पूजा करने वालों को नीच कह करके भी आप कहोगे कि वह भगवान

45
00:03:09,680 --> 00:03:13,760
है। ठीक है? तो फिर आप यह बता दीजिए कि भगवान की परिभाषा क्या है

46
00:03:13,760 --> 00:03:18,720
आपकी? इसे कहते हैं भगवान। आप पढ़िए विष्णु पुराण

47
00:03:18,720 --> 00:03:22,720
विष्णु पुराण में छठवे अध्याय में लिखा हुआ है भगवान की परिभाषा भगवान

48
00:03:22,720 --> 00:03:27,040
की परिभाषा होती है पूर्ण ऐश्वर्यवान जिसमें

49
00:03:27,040 --> 00:03:31,360
कोई कमी ना हो। जिसमें कोई कमी नहीं होती वह भगवान

50
00:03:31,360 --> 00:03:35,360
है। तो जब आप जब आप काल में कमी बता रहे हो कि

51
00:03:35,360 --> 00:03:39,520
वह खाने के लिए परेशान है और ये ब्रह्मा विष्णु महेश में तमाम

52
00:03:39,520 --> 00:03:43,760
सारी कमियां आप गिनवा दे रहे हो तो ये कमी होते हुए उनको भगवान कहना

53
00:03:43,760 --> 00:03:48,000
मूर्ख बनाना है। जैसे आदि सनातन

54
00:03:48,000 --> 00:03:52,080
कमियां नहीं है। आप कमियां आप कमियां

55
00:03:52,080 --> 00:03:54,160
गिनवा रहे हो ना।

56
00:03:54,160 --> 00:03:58,240
आपने कमियां गिनवाई ना कि ब्रह्मा ब्रह्मा

57
00:03:58,240 --> 00:04:02,400
विष्णु महेश की पूजा करने से यह नहीं मिलेगा वह नहीं मिलेगा यह कमियां है मोक्ष नहीं

58
00:04:02,400 --> 00:04:06,640
मिलेगा यह कमी है जिसमें अभाव होता है वो

59
00:04:06,640 --> 00:04:11,200
पूर्ण नहीं होता है और जो पूर्ण नहीं है वो भगवान नहीं है

60
00:04:11,200 --> 00:04:15,200
भागवत का पहला स्कंद पढ़ लीजिए आप उसी में लिखा हुआ है कि

61
00:04:15,200 --> 00:04:20,240
ज्ञाता यानी कि जानने वाला और गेय

62
00:04:20,240 --> 00:04:24,400
यानी कि जानने योग्य इन दोनों दोनों के भेद से

63
00:04:24,400 --> 00:04:28,720
रहित जो ज्ञान होता है अखंड ज्ञान होता है सच्चिदानंद स्वरूप

64
00:04:28,720 --> 00:04:32,880
उसको तत्व कहते हैं। इसी तत्व को

65
00:04:32,880 --> 00:04:37,200
भगवान परमात्मा और ब्रह्म के नाम से जाना जाता है। इसी तत्व

66
00:04:37,200 --> 00:04:41,760
को सच्चिदानंद स्वरूप तत्व को ठीक है। तो भगवान

67
00:04:41,760 --> 00:04:46,000
भगवान कोई ऐसा शब्द नहीं है कि हमने किसी को भी कह दिया। भगवान

68
00:04:46,000 --> 00:04:50,080
का अर्थ होता है पूर्ण। पूर्ण का मतलब होता है जिसमें

69
00:04:50,080 --> 00:04:54,240
कमी ना हो। अच्छा दूसरी बात आप अगर प्रमाण अगर

70
00:04:54,240 --> 00:04:58,400
इनको भगवान कहते हैं तो आप यह क्यों नहीं चिल्लाते की वेदों में प्रमाण

71
00:04:58,400 --> 00:05:02,480
है और शास्त्रों में प्रमाण है और शिवजी भगवान है यह क्यों नहीं कहते

72
00:05:02,480 --> 00:05:06,480
फिर वहां पर तो आप कबीर कह देते हो इसका मतलब कि यह आपने

73
00:05:06,480 --> 00:05:09,360
केवल एक कहने के लिए रख रखा है

74
00:05:09,360 --> 00:05:13,360
मैं कि भैया मीठी मीठी बातें भी कर दो और बाकी तो मूल में तो यही

75
00:05:13,360 --> 00:05:17,360
है कि इनका विरोध है इनका अपमान है ना ये

76
00:05:17,360 --> 00:05:21,440
बात होती है ना उनका अपमान नहीं है ये अपमान नहीं

77
00:05:21,440 --> 00:05:25,440
और क्या है कि उनकी पूजा करने वाले नीच हैं। कहां लिखा है नीच?

78
00:05:25,440 --> 00:05:28,000
बताइए।

79
00:05:28,000 --> 00:05:32,000
कहां लिखा है नीच है उनकी पूजा करने वाले? ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने

80
00:05:32,000 --> 00:05:36,160
वाले। नीच का मतलब क्या होता है कि निचली भक्ति है।

81
00:05:36,160 --> 00:05:40,880
दूषित दूषित अपवित्र अपवित्र

82
00:05:40,880 --> 00:05:44,880
दूषित। नीच ये सब लिखा है। हां। यही लिखा है

83
00:05:44,880 --> 00:05:49,440
पवित्र नहीं है दूषित नहीं अरे दूषित

84
00:05:49,440 --> 00:05:53,440
नीच का मतलब गलत का मतलब निचली भक्ति दूषित

85
00:05:53,440 --> 00:05:58,000
दूषित कर्म कर मनुष्यों में दूषित कर्म करने वाली नीच है

86
00:05:58,000 --> 00:06:02,640
नीच दूषित मतलब कि थोड़ा सा

87
00:06:02,640 --> 00:06:06,880
मतलब जो मोक्ष के लिए चाहिए ना अपने को हां हां वो नहीं है

88
00:06:06,880 --> 00:06:11,680
वो नहीं है वो नहीं है और ये व्यक्ति है तो ब्रह्मा तो भगवान कहेंगे

89
00:06:11,680 --> 00:06:16,640
तो तो सारी बातें मोक्ष होता है सारी सारी बातें खत्म हो गई आपकी

90
00:06:16,640 --> 00:06:20,720
जैसे ही आपने कमी मान ली ब्रह्मा आपने सुना नहीं मैं क्या कह

91
00:06:20,720 --> 00:06:24,400
रहा हूं जैसे ही आपने एक सूत कमी मान ली ब्रह्मा होती है ना

92
00:06:24,400 --> 00:06:28,560
फिर देवताओं में सुन लीजिए सुन लीजिए कुछ भी कर लीजिए भगवान

93
00:06:28,560 --> 00:06:32,640
सिद्ध नहीं होंगे जिसमें आपने कमी मान ली जिसमें आपने कमी

94
00:06:32,640 --> 00:06:36,720
मान ली जरा सी भी वो भगवान सिद्ध नहीं होंगे कभी भी

95
00:06:36,720 --> 00:06:40,960
क्योंकि भगवान वो है जिसमें कमी नहीं है

96
00:06:40,960 --> 00:06:45,200
ठीक है तो ये हो देवता देवता है

97
00:06:45,200 --> 00:06:49,360
देवता है तो निचले भी देवता होते ये आप ये आप निचला

98
00:06:49,360 --> 00:06:53,760
उचला ये आप निचला उचला करता रहिए कर कर रहिए

99
00:06:53,760 --> 00:06:57,840
मगर हम ये कह रहे है आप जो बोल रही है वो शास्त्र में कहां लिखा है

100
00:06:57,840 --> 00:07:03,600
निचला उचला

101
00:07:03,600 --> 00:07:07,680
हम्म शास्त्र सम्मत बाते करिए ना

102
00:07:07,680 --> 00:07:11,840
भगवान की परिभाषा मुझे दीजिए मुझे मुझे

103
00:07:11,840 --> 00:07:15,840
मुझे मुझे मुझे मुझे आपकी आप भगवान की परिभाषा दीजिए

104
00:07:15,840 --> 00:07:21,360
पहले मैंने तो आपको दे दी ना अब आप दीजिए भगवान की परिभाषा

105
00:07:21,360 --> 00:07:25,760
भगवान की ऐसी परिभाषा दीजिए देवताओं को भी भगवान बोला जाता है

106
00:07:25,760 --> 00:07:29,920
गौड गौड गौ गौड गौ रूप से गण

107
00:07:29,920 --> 00:07:34,240
रूप से बोला जाता है इसको भी समझ लीजिए इसको भी

108
00:07:34,240 --> 00:07:38,320
उन्हें भी भगवान ही कहते है इसको भी समझ लीजिए इसको भी समझ लीजिए दोनों बातें

109
00:07:38,320 --> 00:07:42,720
समझ अरे सुनिए तो मैं बता रहा हूं ना आपका जवाब दे रहा हूं सुनिए

110
00:07:42,720 --> 00:07:46,800
विष्णु पुराण में ही लिखा हुआ है। जैसे हम अपने माता-पिता गुरुजनों को

111
00:07:46,800 --> 00:07:50,800
भी भगवान कह देते हैं। अरे आप तो हमारे भगवान है। गुरु को भी कह देते हैं। आप

112
00:07:50,800 --> 00:07:55,200
तो मगर वहां पे वो गौ रूप होता है। वास्तविकता में प्राथमिकता

113
00:07:55,200 --> 00:07:59,360
से भगवान शब्द का उपयोग तो पूर्ण भगवान के लिए ही होता है।

114
00:07:59,360 --> 00:08:03,360
मतलब इनको हम उपमा दे देते हैं। आप हमारे लिए भगवान के जैसे हो। भगवान ही

115
00:08:03,360 --> 00:08:07,600
नहीं हो। उस रूप में हम कहते हैं कि तादात्म पुण्य से कह देते हैं कि भगवान भगवान।

116
00:08:07,600 --> 00:08:11,600
गुरु भगवान, माता पिता भगवान, सुन सुन लीजिए, सुन

117
00:08:11,600 --> 00:08:15,840
सुन लीजिए, सुन लीजिए। इसका मतलब की इनको आप भगवान के रूप में भगवान

118
00:08:15,840 --> 00:08:18,640
नहीं कह रहे हो ना? ऐसे ही कह दे रहे हो

119
00:08:18,640 --> 00:08:22,720
ना कि आप भी चलो ठीक है जैसे चाचा को पिता समान माना जाता है।

120
00:08:22,720 --> 00:08:26,800
मगर वो भगवान नहीं है ना फिर? दूसरी बात आपने क्या कही

121
00:08:26,800 --> 00:08:30,880
है? एक और बात आपने कही ना। अभी लास्ट में

122
00:08:30,880 --> 00:08:34,080
क्या कही आपने बात?

123
00:08:34,080 --> 00:08:38,320
अभी क्या कहा आपने? परमात्मा ही है भगवान ही है ना देवता भी भगवान

124
00:08:38,320 --> 00:08:42,640
ही है नहीं उपमा है भगवान का वास्तविक

125
00:08:42,640 --> 00:08:47,040
अर्थ है जिसमें कमी ना हो जो पूर्ण होता है वही भगवान

126
00:08:47,040 --> 00:08:51,520
होता है जो अपूर्ण होता है वो भगवान नहीं होता है इस

127
00:08:51,520 --> 00:08:55,520
इसका ज्ञान आपको इसलिए आप बोल रहे हैं जिनके पास ज्ञान नहीं है वो माता पिता को

128
00:08:55,520 --> 00:08:59,520
भगवान बोल देते वो गौण रूप से बोलते है ज्ञान नहीं है तो आप आप ये क्यों कह रहे

129
00:08:59,520 --> 00:09:03,760
हो कि हम वेदों के आधार पर बता रहे है आप अपना कहो हम मनमुखी बता रहे है जैसे

130
00:09:03,760 --> 00:09:07,920
वो लोग जो बोलते माता पिता को अगर कोई माता पिता को पूर्ण रूप से भगवान

131
00:09:07,920 --> 00:09:12,160
ही देख कह रहा है व्यवहार जगत में ही तो फिर वो मनमुखी

132
00:09:12,160 --> 00:09:16,160
बात कर रहा है ना तो आप उसकी कॉपी करके क्यों एक मिनट आप

133
00:09:16,160 --> 00:09:20,400
उसकी कॉपी करके ये क्यों कह रहे हो कि बिल्कुल सही है फिर हमारा वैसे

134
00:09:20,400 --> 00:09:24,560
कहना भाई आप फिर ये कहोगे ये है कि

135
00:09:24,560 --> 00:09:28,640
परमात्मा ने देवता बनाए हैं माता पिता बनाए हैं तो वो

136
00:09:28,640 --> 00:09:32,640
परमात्मा के स्वरूप परमात्मा ने बनाए हैं। क्योंकि जीव की

137
00:09:32,640 --> 00:09:34,000
रक्षा के लिए अरे भैया

138
00:09:34,000 --> 00:09:38,160
मैं यह कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं आप आप

139
00:09:38,160 --> 00:09:42,560
अपनी परिभाषा आप अपनी परिभाषा लिखित में बताइए

140
00:09:42,560 --> 00:09:46,560
लिखित में कहां है भगवान की परिभाषा की जिसमें कमी है वो भी भगवान

141
00:09:46,560 --> 00:09:50,640
है देखिए मेरे पास बहुत ज्यादा समय नहीं है समझ

142
00:09:50,640 --> 00:09:54,720
रही है आप लिखित में दीजिए मैंने आपको लिखित में बताया विष्णु

143
00:09:54,720 --> 00:10:00,000
पुराण का छठवां अध्याय पढ़िए और भागवत का पहला स्कंध पढ़िए

144
00:10:00,000 --> 00:10:05,520
ठीक है क्योंकि क्योंकि वो कुछ हमें दे रहे हैं भगवान भी

145
00:10:05,520 --> 00:10:09,520
देवता भी हमें कुछ दे रहे हैं इसलिए अपन उनको भगवान बोल रहे हैं

146
00:10:09,520 --> 00:10:13,520
क्योंकि बोल रहे हैं तो फिर तो फिर [हंसी] तो फिर पेड़

147
00:10:13,520 --> 00:10:18,560
तो फिर पेड़ भी हमारे तो पेड़ भी हमारे हमें कुछ दे रहा है तो वो भी भगवान है

148
00:10:18,560 --> 00:10:23,120
हां हम जो भी हमें देता है तो तो इस

149
00:10:23,120 --> 00:10:27,600
तो कबीर भी ऐसा ही भगवान है एक मिनट एक मिनट कबीर

150
00:10:27,600 --> 00:10:32,160
भी ऐसा ही भगवान है या फिर कुछ स्पेशल है

151
00:10:32,160 --> 00:10:36,720
अभी उन्होंने निकाल कर दिया है प्रमाण कि सब

152
00:10:36,720 --> 00:10:40,720
मैंने क्या पूछा है? मैंने क्या पूछा है आपसे? मैंने

153
00:10:40,720 --> 00:10:44,800
क्या पूछा है? कि यानी कि यह जो ब्रह्मा, विष्णु, महेश है। यह ऐसे ही

154
00:10:44,800 --> 00:10:48,800
भगवान है। जैसे पेड़ भगवान है। जैसे हमारे गुरु भगवान है। बड़ा भाई

155
00:10:48,800 --> 00:10:49,300
भी भगवान

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00:10:49,200 --> 00:10:53,520
हैं। अरे भैया इसका मतलब

157
00:10:53,520 --> 00:10:57,680
ये कुल मिलाकर शास्त्र सम्मत तरीके से ब्रह्मा, विष्णु, महेश भगवान

158
00:10:57,680 --> 00:11:01,760
नहीं है। रामपाल के अनुसार, आपके गुरु जी के अनुसार। ऐसा

159
00:11:01,760 --> 00:11:05,760
नहीं है, ऐसा। नहीं, ऐसा है ना। आप लिखित में दिखाइए ना।

160
00:11:05,760 --> 00:11:10,080
भगवान की परिभाषा कहां लिखी है? शास्त्र में, आपकी।

161
00:11:10,080 --> 00:11:14,240
उनको जो पद अरे मैंने मैंने क्या पूछा है? मैंने आपसे क्या पूछा

162
00:11:14,240 --> 00:11:18,960
अब आप परिभाषा बताइए शास्त्र में कहां लिखी है? भगवान

163
00:11:18,960 --> 00:11:23,120
की परिभाषा कहां लिखी है?

164
00:11:23,120 --> 00:11:27,200
अभी सभी बोलते है ना सभी यानी कि आप जो आप जो

165
00:11:27,200 --> 00:11:31,280
कह रही है वो लोगो के बोलने से कह रही है। शास्त्र से नहीं कह रही है।

166
00:11:31,280 --> 00:11:35,600
शास्त्र बोलते है तो शास्त्र में कहां लिखा है बताओ?

167
00:11:35,600 --> 00:11:39,680
एक बार पढ़िए। मैंने क्या पूछा आपसे भगवान की परिभाषा बताइए शास्त्र

168
00:11:39,680 --> 00:11:42,160
से?

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00:11:42,160 --> 00:11:47,440
तो मैंने आपको वही बताया। मैं क्या पूछ रहा हूँ,

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00:11:47,440 --> 00:11:51,600
आप मुझे ग्रंथ से, आप मुझे ग्रंथ से बताइए कि यहां ये

171
00:11:51,600 --> 00:11:55,120
लिखा है जो मैं बोल रही हूँ।

172
00:11:55,120 --> 00:11:59,360
अभी सभी ग्रंथ साक्षी देते हैं। यह सभी सभी इतना मेरे पास समय

173
00:11:59,360 --> 00:12:03,520
नहीं है। आप यह सभी आप कल ग्रंथ देख करके फिर मुझसे और

174
00:12:03,520 --> 00:12:07,840
आप यहां पर जिस नंबर पे आपने कॉल किया है इसी पे आप WhatsApp करिए

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00:12:07,840 --> 00:12:11,920
और आपको वो मिलेगा। क्या कहते है फॉर्म चर्चा करने का उसको भर दीजिए

176
00:12:11,920 --> 00:12:16,240
और आमने सामने बैठकर फेस टू फेस हम बात करेंगे। ठीक है? अगली बार आप प्रमाण

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00:12:16,240 --> 00:12:20,320
देके आइएगा कि भगवान जिसमें अभाव है उसको भी भगवान कहते हैं।

178
00:12:20,320 --> 00:12:24,320
शास्त्र में लिखा हो। जय श्री राम। ठीक है। ठीक है। सबसे
