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00:00:02:01 जब भी इकोन से क्वेश्चन किए जाते हैं तो श्री चैतन्य महाप्रभु का नाम लेकर इकोन के लोग जवाब देने से बचते हैं जबकि श्री चैतन्य चरता मृत के तीसरे भाग में जब वल्लभाचार्य जी श्री चैतन्य महाप्रभु के पास पहुंचते हैं अपना भागवत पर भाष्य लेकर के और यह कहते हैं कि मुझे श्रीधर स्वामी यानी कि तत्कालीन शंकराचार्य अपने समय के शंकराचार्य जब वल्लभाचार्य कहते हैं कि मुझे शंकराचार्य जी का भाष्य अच्छा नहीं लगता है और उसमें क्रिटिसिजम बताते हैं उसके लिए तो तो वहां पर श्री चैतन्य महाप्रभु स्पष्ट कहते हैं कि मैं शंकराचार्य श्रीधर स्वामी को जगतगुरु मानता हूं और मैं उनके द्वारा ही कृष्ण को जानता हूं मैं उनके द्वारा ही भागवत को समझ पाया हूं इसके साथ ही साथ वो कहते हैं कि अगर श्रीधर स्वामी के बाहर जाकर के कोई भागवत पर टीका लिखेगा तो मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि वह गलत लिखेगा और ऐसा करने वाला मेरे लिए प्रोस्टिट्यूट के समान है यह सारी चीजें वल्लभाचार्य से कहते हैं आज की तारीख में इकोन में किसका टीका पढ़ाया जाता है तो फिर किस प्रकार से इसकन ये दावा करता है कि वह श्री चैतन्य महाप्रभु को फॉलो करता है और यह सारे जो रेफरेंसेस मैंने आपको बताए हैं ये रेफरेंसेस कहीं और नहीं आज भी इकन के द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में उपलब्ध है मगर यह सारे तथ्य इकन से जुड़ने वाले नए लोगों तक पहुंच
00:01:17:04 ही नहीं पाते हैं और जब तक व इन तथ्यों तक पहुंचते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है तब तक वो इसकन में इतने दिन बिता चुके होते हैं कि जब उन्हें य तथ्य मालूम पड़ते हैं तो कुछ निराधार तर्कों के आधार पर व विवश हो जाते हैं इसकन को नान ने के लिए जो
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00:01:31:04 आप क्लेम बोल रहे हैं इसको मुझे रिटन में दीजिए क्यक इस पर मेरा कोई चिंतन मनन और श्रवण नहीं है हम पहले इसको डी पली तर्को के आधार पर और प्रमाणित थ के आधार पर समझेंगे तब आपको इसके विषय में बोलेंगे अच्छा जैसे ये एक मेरे पास एक है जो मैं एक्चुअली नोट कर करता रहता था यह वाली चीज मुझे खराब लगी थी किसी ने कही थी तो जैसे चैतन्य चरता मृत हमारी इसकन की पुस्तक है इसमें जो हमारे चेतन महाप्रभु है वह कह रहे हैं प्रभु हसी कहे स्वामी ना माने जाना वशर भरे तारे करिए गाना ता कहीं महाप्रभु मौना धारला सुनिया सवारा माने संतोष हैला तो इसमें आगे कह रहे हैं जो कोई स्वामी श्रीधर स्वामी की अलना करता है तत्कालीन शंकराचार्य की अलना करता है उसे व्या में गिना जाना चाहिए यह वल्लभाचार्य जी से टॉक चल रहा है शंकराचार्य नहीं होंगे नहीं नहीं ये उन्हीं के बारे में बात हो रही है श्रीधरी टीका ये वही है तत्कालीन शंकराचार्य जी है तो ये उनके बारे में य लिखा हुआ है तो जब मधुवा चार्य जी ने खुद भागवत पर भाष्य
00:02:46:14 लिखा है जो जैसा कि इनकी परंपरा के वह गुरु हैं मधुवा चार्य जी तो उनका भाष्य ना मान कर के शंकराचार्य जी की परंपरा की शंकराचार्य का भा भाष्य जो है स्वीकार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि अच्छा ये यहां पर ये भी कोट कर रहे हैं कि अगर कोई और लिखने की कोशिश करेगा तो उसे वेश्याओं में गिना जाना चाहिए इस तरह का कोट किया है तो अब यहां पर प्रभुपाद जी ने भागवत भास लिखा है तो वो भी उन पर भी प्रश्न उठ गया ये इस तरह से देखिए मूल चीज पता है हमें ये समझना चाहिए जी कि मैंने फिर एक बात कही मैं फिर उसी बात को फिर रिपीट करूंगा जी देखिए हम लोग इन व्याख्या हों में इन विषयों में जब चैतन्य महाप्रभु जैसे स्वयं भगवान है वो क्या कह रहे हैं कि मैं मूर्ख हूं जी जबक वो सब पर डिस्कशन कर सकते हैं सब पर चर्चा कर सकते हैं जी हम लोग वास्तविकता में बड़ी छोटी बुद्धि के साथ आए और हम लोग जो है वह संसार की निकृष्ट चेतना वाले लोग है तो हम इन विषयों में ना फस करके हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें मेरा निवेदन केवल इतना सा है कि हम इन सब में न फस करके हम मूल बात को समझे जिसे सब ने कहा है कलयुग केवल नाम आधारा
00:04:01:26 है ना इसमें तो कोई संदेह नहीं है किसी को जी अच्छा जितने लोग प्रश्न करने वाले हैं उन लोगों से अगर पूछो कि आप कितने माला जप करते हैं जैसे मेरा आपसे आपसे प्रश्न है आप मुझसे प्रश्न कर रहे हो मेरा आपसे प्रश्न है आप कितनी माला रोज जप करते हो 16 पर डे जी नियम से जी अच्छा तो भगवान की कृपा आपको मिलेगी और आप चीजों को समझ पाओगे तो देखो आप सबको भी मैं बोलना चाहूंगा कि जैसे प्रभु जी 16 माला जप कर रहे हैं वैसे ही आप भी 16 माला करिए और इन तर्क कुतर्क वितर्क शास्त्र के विभिन्न गहराइयां इनमें जाना हमारा उद्देश्य नहीं है हम कोई टीका लिखने नहीं आए हैं हम कोई बहुत ज्ञान देने नहीं आए हैं मैं स्वयं इस बात को समझता हूं कि मैं खुद अव्वल दर्जे का मूर्ख हूं और मुझे कोई वेद पुराण उपनिषद का ज्ञान नहीं
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00:04:55:14 है
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