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00:00:01:01 जरूरी बात करेंगे आज हम जानेंगे जो हम आज जानने वाले है च का नाम है मानवता और पशुता मानवता और पता आज हम जानेंगे मानवता क्या है और पता क्या है और मानवता हमारे लिए फायदेमंद क्यों है पछता हमारे लिए नुकसानदायक क्यों है और पशुता किस तरह से हम पशुता से बचे और मानवता को पकड़े रखे यह तीन बात मानवता क्या है और पशुता क्या है और दूसरा की मानवता को मानवता से हमें क्या मिलर है क्या लाभ है हमारा और पता से क्या नुकसान हमारा और तीसरा है कि इसको हम अपने जीवन में निर्धारित करके कैसे रखें मानवता को पकड़ के कैसे रखे
00:01:21:12 तो मानवता जो आती है आपके जीवन में वो आती है नियमों से किससे आती है नियमों से नियम अब ये नियम क्या होते हैं दो तरह के नियम है एक कुछ कार्य ऐसे जिनको करने में हम सामर्थ वान नहीं है जैसे हम उड़ नहीं सकते तो ना उड़ पाना क्या हो गया नियम मगर वो हमारी मजबूरी है कि हम उड़ नहीं सकते हम गायब नहीं हो सकते वो हमारी क्या है मजबूरी यानी कि प्राकृतिक नियम है नेचुरल मगर कुछ नियम ऐसे हैं जो नैतिकता के कारण हम जिनको मानते हैं जिनको हम स्वीकार करते हैं जैसे की रसोई घर में चप्पल पहन कर के जूते पहन कर के ना जाना यह क्या हुआ हम जा सकते हैं मगर हमने स्वीकार किया हम नहीं जाएंगे इसको हम कहते नैतिकता तो जो नियम ये नैतिकता वाले जो नियम है यही नियम हमको अलग बनाते हैं किससे पशु
00:02:40:08 से तो मानवता का पहला लक्षण क्या हो गया आपके पास क्या है नियम और उनके पास क्या नहीं है नियम नहीं है तो इसी नियम को आगे कहते हैं नैतिकता क्या कहते हैं और फिर जानवर कौन हुआ जिसके पास नैतिकता नहीं है वो हो गया जानवर ठीक है अय नैतिकता हमारे जीवन में आती कहां से है तो नैतिकता हमारे जीवन में आती है धर्म से किससे आती है धर्म से तो एक लोक है संस्कृत का धर्म हीना पशु भी समाना हम कह रहे ना जिसके पास नियम नहीं होंगे वो क्या हो गया पशु तो इसीलिए कहा जाता है धर्मे हीना पशु भी समाना यानी कि धर्म के बिना कोई भी व्यक्ति है वो पशु है और धर्म क्या है यही नैतिकता जो है यही नैतिकता कहलाती है मर्यादा क्या
00:03:55:10 कहलाती है मर्यादा और यही मर्यादा कहलाती है आगे चल कर के धर्म तो यह कौन हुआ जिसके पास मर्यादा नहीं है अमर्यादित जिसके कारण हम मनुष्य कहलाते हैं इसीलिए वो श्लोक लिखा था चाणक्य ने आचार्य चाणक्य को जानते हैं आप कौटिल्य उन्होंने लिखा था धर्मे हीना पशु भी समाना भगवत गीता में भी यह बात कही है अलग ढंग से भगवान श्री कृष्ण ने तो जिनके पास नियम है वो मनुष्य है नियम नहीं है वो जिनके पास नैतिकता है वो मनुष्य है और जिनके पास नैतिकता नहीं है वो जिनके पास मर्यादा है वो मनुष्य है और जिनके पास मर्यादा नहीं है वो मर्यादा का एक रूप और समझ लीजिए सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियां हैं एक माता जी है एक बहन जी है और एक बुआ जी है यह हमें कौन बताएगा धर्म यह जो मर्यादा है यही मर्यादा हमें धर्म बताता है कि वह
00:05:10:12 बहन जी है वह माता जी है यह मर्यादा पशुओं के पास नहीं होती उनको नहीं पता कि उनकी माता जी कौन है उनकी बहन जी कौन है उनको कुछ नहीं पता तो यह मर्यादा केवल किसके पास है हमारे पास तो आपने जो आज जो नोट बनाने के लिए लेकर के आए हो उसमें पहला ये डाल लीजिए मानव और पशुता और इस तरीके से चार्ट हल्का सा छोटा सा बना लीजिए बहुत कम से कम जगह उसमें [संगीत]
00:05:58:14 लीजिएगा तो इसका अर्थ क्या हुआ जिसके पास अध्यात्म है व उसके पास धर्म है और जिसके पास धर्म है उसके पास मर्यादा है और जिसके पास मर्यादा है उसके पास नैतिकता है जिसके पास नैतिकता है उसके पास नियम है और जिसके पास नियम है अंतता वही और जिनके पास ये सब चीजें नहीं है वो अभ अध्यात्म क्या है
00:06:32:16 अध्यात्म का अगर सरल अध्यात्म का सरल अर्थ देखेंगे तो अध्यात्म का अर्थ होता है अपना अध्ययन आत्म अध्यन अध्यात्म तो हमारे अंदर एक डिजायर होती है जिसके बारे में बात करेंगे मगर पहले हम इसको चैप्टर को क्लोज कर ले तोय अध्या ना इसका अर्थ होता है की ईश्वर क्या होता है ईश्वर इसी तरीके से य पर
00:07:22:28 अध्यात्म और नीचे ईश्वर अध्यात्म क से आता है अनश्वर तो ये जिसके पास ईश्वर है वही मनुष्य जिसके पास ईश्वर नहीं है अगर इसको और सरल भाषा में कर दे तो जो आस्तिक है वही मनुष्य और जो नास्तिक
00:07:58:09 है जो ये नहीं मानता कि ईश्वर नहीं है तो उसके पास अध्यात्म नहीं है और जिसके पास अध्यात्म नहीं है उसके पास धर्म नहीं है जिसके पास धर्म नहीं है उसके पास मर्यादा नहीं है उसके पास कोई वजह नहीं है माता जी को माता जी कहने की बहन जी को बहन जी कहने की कोई उसके पास वजह नहीं है और जिसके पास मर्यादा नहीं वो नैतिक नहीं है और जो नैतिक नहीं वो नियमित नहीं है और जो नियमित नहीं है वो मानव नहीं है तो अर्थ क्या हुआ जो आस्तिक है वही मानव
00:08:36:19 है तो अब हमें यह पता चल गया कि जो आस्तिक ये जो अध्यात्म हमारे पास आता है ईश्वर को मानने से तो दुनिया में दो तरह के पक्ष है एक ये पक्ष है ठीक है और एक ये पक्ष है जब मैं कहूंगा उतनी चीजों को लिखिए अभी यहां तक लिख लिया आपने आस्तिक तक यहां तक लिख लीजिए
00:09:11:06 जी बड़ा बड़ा लिखे अच्छा चलिए य वाला ये मत लिखिए जो महत्वपूर्ण चीज है इससे आगे बड़ा बड़ लिख दूंगा वो लिखिए ठीक है इंसान नहीं बनना है जिनके मन में ये बातें आती है कि हम अमर्यादित रह कर के अपना जीवन चलाए हम अनैतिक बन कर के जीवन चलाएंगे अमर्यादित रह कर के जीवन चलाएंगे वो इनको खत्म करने के लिए षडयंत्र रचती है क्या रचती है षडयंत्र तो आज जो हम लोग पढ़ेंगे व यही पढ़ेंगे कि इन यंत्रों से हम कैसे कैसे बचेंगे जिससे कि हम क्या बन जाएंगे जब हमारा जब हमारा अध्यात्म बचेगा तो हमारा धर्म बचेगा जब हमारा धर्म बचे तो हमारी मर्यादा बचेगी मर्यादा बचेगी तो नैतिकता नैतिकता बचेगी तो नियम और नियम बचेंगे तो मानवता हम मानवता को बचा लेंगे मगर एक पॉइंट य भी है कैची पॉइंट की यह मानवता आपको चाहिए क्यों आपका व्यक्तिगत पर्सनल क्या फायदा हो रहा है मानवता से आपको फायदा यह हो रहा है कि हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है क्या रहना चाहता है खुश एट द एंड
00:10:26:13 आप तभी खुश रहेंगे जब आप मानवता को वहन करेंगे आपको संतोष तभी मिलेगा जब आप मानवता को निर्वाह करेंगे तभी आप खुश रह पाएंगे जैसे कि यह कहा जाए कि संसार में लोग हमेशा खुशियों के पीछे भागते रहते हैं अगर वो मानवता के पीछे भागेंगे तो खुशियां अपने आप उनके पीछे आएंगी तो इसलिए अगर आपको खुश रहना है जीवन में तो आपको क्या बनना है मानव ये बात वो लोग नहीं समझते जिनके माइंड में पशुता ज्यादा है ह्यूम निटी वर्सेस
00:11:12:22 एनिमलिज्म नहीं सुना होगा कि कोई संत थे उन्होने सुसाइड कर ली है ना तो क्या होता है कि जो स्पिरिचुअल हो जाता है जो आध्यात्मिक हो जाता है उसके जीवन से सारी चीज निराशा निराशा यह सारी चीज चली जाती है तो हमें भी तो यही चाहिए अपने जीवन में और सबसे बड़ी बात है सक्सेस हमें अपने अगर लक्ष्य को पाना है तो हमारे अंदर क्या होना चाहिए आत्म बल होना चाहिए ना आत्मबल होने के कारण हम अपने लक्ष्य को भी आसानी से प्राप्त कर पाते हैं यह सारी चीजें हमें कहां से मिलती है मानवता से मानवता कहां से मिलती है अध्यात्म से अध्यात्म यानी कि ईश्वर ईश्वर से मिलती है इसको साफ करा यह साफ नहीं होगा अ ईश्वर का और आस्तिक का धर्म का रिलेशन क्या है बहुत सरल भाषा में अगर कहे तो ईश्वर का रिलेशन यह होता है धर्म से मर्यादा से कि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए हमें कुछ नियम बताए जाते हैं क्या बताए जाते हैं हा कि सच बोलोगे तो ईश्वर
00:12:27:28 मिलेगा और झूठ तो नहीं मिलेगा अच्छा काम करोगे तो ईश्वर प्रसन्न होंगे बुरा काम करोगे तो यही नियम हमारी मर्यादा कहलाते हैं और यही नियम हमारा धर्म कहलाते हैं और इसीलिए ईश्वर को अगर हम मानते हैं तभी तो उसको प्राप्त करने के लिए हम नियमों का पालन करेंगे तो ये क्या करता है जब इसको नियमों से प्रॉब्लम होती है तो यह सीधे सधे कह देता है कि मैं ईश्वर को नहीं मानता तो नास्तिक को हराने का तरीका हम यहां पर आपको बता रहे हैं चार तरीके के जो शत्रु है मानवता के उन चारों से आज हम लड़ेंगे और उनको हराए और आपको जीवन भर य याद रखना है कि इन चार तरह के शत्रुओं से हमें कैसे जीतना है सिर्फ लड़ना नहीं है जीतना है क्योंकि हमें किसको बचाना है अपनी मानवता को बचाना है संसार में अपनी अपने साथ साथ संसार भर की मानवता कोर बचाना है तो आपको इन चार नियमों का इन चार नियमों को पकड़ के रखना पड़ेगा तो आप किसको हरा पाएंगे हा जी आप पशुता को हरा पाएंगे तो पहला जो पशुता का है
00:13:43:07 लक्षण व है नास्तिक य नास्तिक बन कर के आता है आपकी मानवता को चोट पहुंचाने के लिए तो नास्तिक से लड़ने का जो नास्तिक से लड़ने का जो तरीका है वो है पहला नियम है इधर इधर पहु इधर वाला साफ कर दीजिए इसको आप लिख लीजिए पहला नियम संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों कहता हो लिख लीजिए इसको बोल रहा संसार का प्रत्येक मनुष्य बेटा आप लिख नहीं रहे हो आपके आगे वाले आप लिख नहीं रहे हो संसार का प्रत्यक मनुष्य भगवान को ही ू रहा है फ व भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो यह हमारा पहला नियम है जो आपको जीवन भर के लिए याद करना है
00:15:01:26 संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले
00:15:39:07 ही स्वयं को नास्तिक ही कहता हो अगला वाला आप लिख लीजिए अब इसका अथ समझिए सबने लिख लिया अब इसका अर्थ समझिए संसार में कोई भी व्यक्ति नास्तिक है ही नहीं संसार का कोई भी व्यक्ति नास्तिक है ही नहीं फिर वो भले ही खुद को कह मैं नहीं मानता भगवान को पहली बात सबसे पहले तो हमने य जाना कि जो जिसके पास मर्यादा है वही व्यक्ति मनुष्य है तो क्या कोई ऐसा इंसान है जो मर्यादा एक भी ना मानता हो ऐसा मनुष्य मिलता है नहीं मिलता अगर आप वस्त्र भी धारण कर रहे हैं तो भी आप मनुष्य है ये भी एक मर्यादा है क्या जानवर वस्त्र धारण करता है नहीं तो इसका अर्थ क्या हुआ कि वो अपनी वाणी से तो कह रहा है कि मैं भगवान को नहीं मानता मगर वो भगवान को मानता है क्योंकि वो वस्त्रों को पहन रहा है वो कुछ
00:16:54:08 मर्यादाओं का पालन तो कर रहा है पर एक बात और है ये जो मर्यादा है ये हमें कौन सिखाता है हमारे माता पिता बचपन में जब हम जन्म लेते हैं तो वो हम सिखाते बेटा इनको ये कहना है इनको वो कहना है ऐसे बाहर मत जाओ ऐसे वो ना करो ये ना करो तो माता पिता से शुरुआत होती है ना तो ये नैतिकता माता पिता सिखाते हैं परंतु एक चीज और है जिससे सिद्ध होता है कि नास्तिक व्यक्ति भी भगवान को ही ढूंढ रहा है यह जो चीज है यह ब उपनिषद में लिखी हुई है पहले अध्याय के 30 सर के 28 में श्लोक में एकती 28 में तो इसको आप लिख लो बारण उपनिषद एकती 28 ऐसे लिखो
00:17:45:26 बा और उ बस इतना ठीक है बाप वो प्रकृति वाला रा और उ और इसका श्लोक क्रमांक एकती 28 अब ये श्लोक आपने सुना होगा आपके विद्यालय का ये स्लोगन भी है असतो मा सद गमाया तमस मा ज्योतिर गमाया मृत मा मतम गमाया सुना होगा ना हॉलीवुड की एक बहुत बड़ी मूवी थी मैट्रिक्स किसी ने सुना हो मैट्रिक्स की जो फाइनल पार्ट है मैट्रिक्स थ उसमें लास्ट में जब लन से फाइट हो रही होती है हीरो की तो यही यही जो शलोक है व सन् में चलता है पीछे बैकग्राउंड म्यूजिक में कभी सर्च करिएगा मैट्रिक्स में यह लोक गल प य पर इसका अर्थ है कि हमारे अंदर तीन तरह की प्यास है पहली प्यास है सत की प्यास स दूसरी प्यास है चित की प्यास चित और तीसरी प्यास
00:19:01:04 है आनंद की प्यास सत का अर्थ होता है कभी ना मरने की चा यानी कि इमोटी और चित का अर्थ होता है सब कुछ जान लेने की चा यानी कि और बन जाना इमोटी क्या है एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी ये नहीं चाहता कि वो कभी मृत्यु को प्राप्त हो अगर वो 300 साल का जीवन भी जी लेगा तब भी सोचेगा कि मुझे खांसी आएगी तो मैं कहां जाऊंगा डॉक्टर के पास कोई कभी मरना चाहता है क्या नहीं नास्तिक व्यक्ति भी नहीं चाहता जबकि वो क्या कह रहा है इस दुनिया में कोई ऐसा नहीं है जो मरता नहीं है भगवान कौन है जो कभी नहीं मरता तो नास्तिक व्यक्ति चाहता तो है भगवान जैसा बनना मगर वो कह क्या रहा है दुनिया में कोई भगवान नहीं है इसी प्रकार से आगे जो चित की प्यास है यह भी नास्तिक व्यक्ति के अंदर है और बन जाना मुझे सब कुछ मालूम पड़ जाए मुझे भविष्य में क्या होने वाला इंडिया पाकिस्तान का मैच हो रहा है उसम कौन जीतेगा मुझे पता चल जाए अभी
00:20:16:07 अभी यहां पर प्रोग्राम करने दो लोग आए हैं दो भाई बहन आए हैं तो मुझे पता चल जाए क्यों आए जादू दिखाएंगे या कुछ पेपर का कटिंग टिंग करके दिखाएंगे कलाकृति ा सिखाएंगे ऐसा कुछ हम लोगों ने आंकलन करना शुरू किया ना घोड़े दौड़ाना हा क्यों शुरू किया क्योंकि हमारे अंदर ये चित की प्यास इनबिल्ट है हम जानना चाहते हैं सब कुछ अभी तो आप त भी थोड़े बड़े हैं थोड़ा सा मैच्योरिटी है छोटे होते हैं तो और ज्यादा होती है चित की प्यास बिजली के बोर्ड में हाथ डाल दूंगा मैं इसमें क्या है ये मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दूंगा जरा ये सब होता है बच्चे कूद पढा क्या हैय नीचे जाने से क्या हो जाएगा कू दूंगा तभी माबाप
00:21:06:15 उसको माता पिता कहते हैं ना बेटा उसम हाथ मत डालो तुमहे झटका लग जाएगा तो ये चित की प्यास होती है तो यह जो है ये प्यास नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी है और तीसरी प्यास है आनंद की प्यास आनंद की प्यास का अर्थ है सुखी रहने की प्यास क्या है सदा सुखी रहने की प्यास हम अगर कार लेकर के आए तो व कभी खराब ना हो हम अगर मोबाइल लेकर के आए तो व कभी खराब ना हो हम अगर कोई अच्छा कपड़ा लेकर के आए तो वो कभी खराब ना हो हमारे हेयर कभी सफेद ना हो हमारे रिंकल्स ना पड़े इतनी सारी क्रीम आती है ना नहीं नहीं आपने देखा होगा ले और वो लक की बहुत सारी क्रीम आती है केवल आपको बताती है आपकी जुया नहीं पड़ेगी य क्या है आनंद की प्यास कि हमारो हमें जो सुख देने वाली स्थिति है वह ऐसे ही बनी रहे तो यह तीन तरह की प्यास है य नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी इनबिल्ट है अगर इन तीनों प्यास का निचोड़ कर दे
00:22:22:08 तो एक नास्तिक व्यक्ति भी प्रकृति को कंट्रोल कर चाहता है किसे हा एक नास्तिक व्यक्ति के मन में भी ये ख्याल आता है कि बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए यह ख्याल आता है धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए यह ख्याल आता है कि काश मैं भविष्य देख सकता काश मैं दोबारा भूतकाल में जाकर के ग गिल्ली डंडा खेला ता अपने दोस्तों के साथ काश मैं अपनी माता जी की गोद में दोबारा सो लेता ये सब ख्याल नास्तिक व्यक्ति के मन में भी आते हैं इसका अर्थ क्या है कि एक नास्तिक व्यक्ति भी सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है चाहता है ना मैं उड़ सकू मैं सब कुछ कर सकू मगर वो कह क्या रहा है इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो सब कुछ कर सकता है यही तो कह रहा है भगवान का अर्थ क्या है सब कुछ कर सकने वाला तो वो ये कह रहा है इस दुनिया में कोई ऐसा नहीं है जो धूप को कंट्रोल कर ले बारिश को कंट्रोल कर ले जो पास्ट में चला जाए ऐसा कोई नहीं है जो स आनंद जिसने प्राप्त कर लिया हो मगर मुझे प्राप्त करना है तो समझ में आया नास्तिक व्यक्ति ढूंढ किसे रहा है भगवान को
00:23:37:18 क क रहा है कि इस दुनिया में कोई भगवान नहीं है तो जब भी आपसे कोई कभी जीवन में यह कहेगा कि दुनिया में कोई भगवान नहीं है तो आप उसको पूछोगे क्या आप कभी मरना चाहते हैं क्या आप कभी दुखी होना चाहते हैं क्या आप कभी मूर्ख बनना चाहते हैं य तीन वो ना कहेगा ना कहेगा ना तो इसका अर्थ है कि आप भगवान को ही ढूंढ रहे हैं क्योंकि एक नियम है कि हमारे अंदर जिस जिस चीज की डिजायर है हमारे अंदर जिस जिस चीज की चाह है उस उस चीज का जो सब्जेक्ट है डिजायर का उसका अस्तित्व इस दुनिया में मौजूद है फॉर एग्जांपल हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में क्या है पानी हमारे अंदर भूख है तो दुनिया में क्या है हा हमारे अंदर देखने की क्षमता तो दुनिया में क्या है हा हमारे अंदर सुनने की क्षमता तो दुनिया में क्या है हा इसका मतलब हमारे अंदर ऐसी कोई भी डिजायर नहीं है जिसका सब्जेक्ट इस दुनिया में मौजूद ना हो तो जिस प्रकार हमारे अंदर देखने की चा का विषय दृश्य और प्यास
00:24:52:18 का विषय पानी प्रूव होता है इट प्रूड उसी प्रकार से हमारे अंदर जो सत चित आनंद की चा है है ना इसका जो सब्जेक्ट है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है सरल भाषा में क तो भगवान का अस्तित्व सिद्ध होता है तो आज के बाद आपसे अगर कोई यह कहेगा इस दुनिया में कोई ईश्वर नहीं है तो आप उसको समझा पाएंगे कि नहीं कितने लोग है जो समझा पाएंगे पीछे वाले नहीं
00:25:26:20 समझाते ठीक है अगर कोई आपको ये कहेगा इस दुनिया में कोई ईश्वर नहीं है तो आप क्या बताएंगे उसे कि आप भी भगवान को ही ढूंढ रहे हैं आप ये वाली लाइन बोलेंगे उससे संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही नास्तिक ही क्यों ना हो तो हमने किसको हरा दिया एक शत्रु को तो हरा दिया नास्तिक को हमने हरा दिया अब दूसरा शत्रु आता है दूसरे शत्रु का नाम लिखिए अज्ञात
00:26:09:00 नास्तिक कहीं कहीं मिल जाते हैं टकरा जाते हैं और आपसे आपकी मोरालिटी को आपकी नैतिकता को छीन हैं तो आप उनसे लड़ पाओगे इन चीजों से यह वैचारिक युद्ध होता है यह वपन से नहीं है युद्ध किससे है वैचारिक युद्ध होता है आपके विचारों को ही किसी ने मार दिया तो उसको आपको सामने से हराने की आवश्यकता पड़ेगी क्या नहीं अगर आपके विचार ही उसने खत्म कर दिए तो उसको आपको उसको गोले ब की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी तो ये वैचारिक युद्ध होता है तो आपके पास वैचारिक शस्त्र होने चाहिए क्या होने चाहिए तो ये आज आप वैचारिक शस्त्र प्राप्त कर रहे हैं किसकी रक्षा के लिए मानवता की रक्षा के लिए मर्यादा की रक्षा के लिए आज के बाद आप एक सेवियर बनेंगे ह्यूम निटी के मानवता के रक्षक सर्वप्रथम अपनी फिर दुनिया की पहले अपनी पहले अपने मानवता की रक्षा करनी है है ना
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