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00:00:04:26 सभी को जय श्री राम। तो एक विवाद चल रहा है YouTube पर जिसमें कि आर्य समाज के जो राहुल आर्य जी हैं उन्होंने चैलेंज किया है डिबेट के लिए अमोग लीला जी को इस के हैं जो तो वैसे अगर मेरा दृष्टिकोण आप देखें तो ये दोनों ही जो पक्ष हैं एक आर्य समाज और इस्कॉन अभी मुझसे किसी ने पूछा था कमेंट के माध्यम से कि भाई जब मैंने एक वीडियो बनाया था कि गर्व से कहिए हम हिंदू हिंदू का सही अर्थ लोगों को मालूम नहीं है। तो कई बार वो मिसगाइड हो जाते हैं और यह सोचते हैं कि हिंदू जो शब्द है वो हमें विदेशी आक्रांताओं जो द्वारा दिया गया है। तो उस वीडियो के माध्यम से मैंने इन चीजों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया था। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] तो [गला साफ़ करने की आवाज़] उस वीडियो में मुझे एक कमेंट प्राप्त हुआ था कि भाई इस के कोई फॉलोअर्स थे तो वो हमसे बोल रहे थे कि भाई हम तो आर्य समाजियों के साथ मिलकर के कई लोगों की घर वापसी करा चुके हैं। तो सबसे पहले यह जान लीजिए कि अगर आर्य समाज के द्वारा या इस के द्वारा अगर किसी व्यक्ति की घर वापसी हो रही है। अगर आप यह सोच रहे हो कि हम किसी को वहां से ला के यहां सही जगह पे ला रहे हैं तो ऐसा नहीं है। क्योंकि ये दोनों ही जगह बाध्य ईश्वर की पूजा ही करवाती हैं। और एट द एंड हिंदू धर्म में और जितनी भी ईश्वर को

00:01:19:27 लेकर के अन्य कोई भी दार्शनिकता है, विचारधारा है, उसमें यह अंतर है कि यहां पर ईश्वर सर्वशक्तिमान है और वहां पर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। यानी कि एकमात्र सनातन धर्म के द्वारा परिभाषित होने वाला ईश्वर ही वो है जो सर्वशक्तिमान है। जिसे अह बाधित नहीं कहा जा सकता है। मगर इसके विपरीत जितनी भी विचारधाराएं हैं, जितनी भी वेद-विरुद्ध विचारधाराएं हैं, वह सारी विचारधाराएं ऐसी हैं जिनके अनुसार ईश्वर कहीं ना कहीं बाधित होता है। जैसे खुद कहता है कि मैं जन्म नहीं ले सकता। खुद कहता है कि मैं अवतार नहीं ले सकता। खुद कहता है कि मेरा बेटा आ सकता है, मैं नहीं आ सकता। तो इस तरह की विचारधाराएं खुद कह वहां पर खुद है कि जो सिद्ध हो जाएगा वही भगवान बनेगा। वही प्रकृति को कंट्रोल करेगा। यानी कि नित्य ईश्वर नहीं है। नियमों के अधीन ईश्वर है। तो सबसे पहली बात अब बात करते हैं कि स्कॉन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है। तो नहीं इनके द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर भी लिमिटेड ही है। जैसे इस का ये कहना कि भाई ईश्वर जो है जो भगवान श्री कृष्ण है ये भगवान श्री कृष्ण में ही ईश्वर को मानते हैं। शिव और दुर्गा आदि ये सब इनके लिए डेमी गॉड्स हैं। वो बात एक अलग है। अगर चलिए कृष्ण को ही अगर ईश्वर मान रहे हैं केवल तो वहां पर ये कहते हैं कि अगर कृष्ण एक बार शिव बन गए

00:02:35:01 तो शिव बनने के बाद वापस वो कृष्ण नहीं बन सकते हैं। तो यहां पर सवाल ये उठ जाता है कि जब ये जब ईश्वर अगर श्री कृष्ण ईश्वर हैं तो वो सर्वशक्तिमान है या नहीं? वो किसी भी नियम के नीचे हैं या नहीं? तो इस तरीके से यहां पर भी एक बाधित ईश्वर की ही पूजा हो रही है एट द एंड और अगर आर्य समाज की बात करें तो उसके अनुसार ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। तो इनके अनुसार भी बाधी ईश्वर की ही पूजा हो रही है। पर फिलहाल अभी जो राहुल आर्य जी की तरफ से इस के लिए एक चैलेंज आया है उस पर जो प्रतिक्रिया दी गई है इस के द्वारा तो उसमें मुझे तार्किकता का अभाव मिला। जैसे कि राहुल आर्य जी ने कहा कि आप शास्त्रार्थ कर लीजिए। तो इस पर इस वाले बोल रहे हैं कि भाई हमें पहले आप लिखित में दीजिए कि आप जो है आर्य समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं या आप लिखित में दीजिए। उनसे लिखवा के लाइए कि आप अगर हार गए तो पूरा आर्य समाज हार जाएगा। तो पहली बात यह है कि चलिए मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को आपके विचार अगर समझ में नहीं आ रहे हैं तो आपको उसे समझाने के लिए क्या उसका किसी संस्थागत होना जरूरी है? ये कोई आवश्यक बात है कि कोई आपसे आकर के क्वेश्चन अगर करने लगा कि भाई आपकी ये बात मुझे समझ में नहीं आ रही। तो आप उससे कहोगे कि आप जिस विचारधारा को मानते हो पहले उससे साइन लेकर के आओ कि हमने आपको अगर हरा दिया या हमने आपको चुप करा दिया तो

00:03:50:02 आपकी वह विचारधारा पूरी हार जाएगी। ये सदा से ही मैंने अनुभव किया है कि जब भी इस से या इस के फॉलोअर्स से सीधे-सीधे बात करने पर आते हैं [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो वो कहीं ना कहीं एक न्यूट्रल टाइप की बात कहते हुए बच के निकलने की कोशिश करता है। ऐसी बात रखने की कोशिश करता है जो कि जिसके कारण वो जो आमनासामना होना है वो जो प्रत्यक्ष रूप से बिल्कुल आमनासामना होना है वो ना हो। तो इसलिए मैं इस वीडियो के माध्यम से यह जो सीरीज मैं बताऊंगा प्रश्नों की इस के लिए उसमें आएगा हर क्वेश्चन में कैसे या फिर क्यों? अब ये मैं इस के लिए क्यों ऐसा ऐसे क्वेश्चन पुट अप कर रहा हूं? आर्य समाज के लिए क्यों नहीं पुट अप कर रहा हूं? क्योंकि आर्य समाज के लिए कई क्वेश्चन हमारे जो महान संत गण हैं जो परंपरा प्राप्त आचार्य हैं वो पहले से ही कई सारे खंडन आर्य समाज के करपात्री जी महाराज के द्वारा या फिर श्री मद्वाचार्य जी द्वारा बहुत अच्छे से उन्होंने अपनी क्यों नाम की पुस्तक में बहुत आर्य समाज का पूरी तरीके से हर सवाल का जवाब दिया है। सत्यार्थ प्रकाश में जो भी दयानंद सरस्वती जी ने लिखा सब कुछ लिखा हुआ है। पर एक बात यह भी है कि आर्य समाज की जो चीजें हैं वह भले ही बाधित ईश्वर को पूजा करते हो जो भी हो मगर अभी तक ऐसा कुछ सामने नहीं आया है कि वह कहीं किसी

00:05:05:10 पाश्चात्य संस्कृति की ओर प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित बना रहे हैं दूसरों को। मगर इस के द्वारा कई बातें ऐसी मिल जाती हैं जहां पर दुख होता है। जहां पर एक तरफ कहा जाता है कि शिव जी, विष्णु जी, दुर्गा जी ये सब भगवान नहीं है। केवल कृष्ण ही भगवान है और कृष्ण और कुरान और बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर में कोई भेद मतलब कोई भेद नहीं है। कोई अंतर नहीं है। यानी कि शिव पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर जो शिव है। भगवती पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाली जो माता भगवती है ईश्वर उनमें और कृष्ण में तो भेद है मगर बाइबल और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो अभेद है वो तीनों एक ही है तो ये कुछ एक दुख होता है कि विदेशी जो हम आप ठीक है आपकी जो दर्शन है जो भी है उसमें आप ये मिलावट ऐसी क्यों कर रहे हैं कि ऐसी विचारधाराएं जो पूर्णतया वेद विरुद्ध है उनके द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर आप उसके साथ कृष्ण को एक कह रहे हैं और वहीं पर जो हमारे पौराणिक ग्रंथ है उन्हीं वेदव्यास जी ने जिस भागवत पुराण को लिखा उन्हीं वेदव्यास जी ने शिव पुराण लिखा और उनके द्वारा लिखित होने वाले जो ईश्वर हैं उनको आप नहीं मान रहे हैं तो ये कुछ एक दुखप्रद बात होती है। तो मैं बहुत देर नहीं करता हूं। जल्दी से उन क्वेश्चंस पर आता हूं। कैसे और क्यों की सीरीज है

00:06:20:12 ये? तो सबसे पहला मेरा क्वेश्चन है कि इस वाले कहते हैं कि हम श्रील प्रभुपाद जी को अपना गुरु मानते हैं। हम उनके शिष्य हैं कि श्रील प्रभुपाद जी की जो भगवत गीता लिखी गई थी 1972 में उसमें कई जगह पर ऐसे शब्द है जो आज जो भगवत गीता बांटी जा रही है जो छापी जा रही है जिसे लोग पढ़ रहे हैं ये सोचते हुए कि हम श्रील प्रभुपाद जी की गीता पढ़ रहे हैं। मगर वास्तविकता में उसके अंदर शब्द बदल दिए गए हैं। जो शील प्रभुपाद जी की जो भगवत गीता है उसमें कुछ और शब्द लिखे हैं। वहीं पर उस श्लोक में उसी श्लोक क्रमांक में जो आज जो शब्द है बदल दिए गए हैं। तो अब प्रश्न ये उठता है कि श्रील प्रभुपाद जी के शब्दों को बदलकर छापी गई गीता को पढ़ने वाले श्रील प्रभुपाद जी के शिष्य कैसे? दूसरा प्रश्न यह है कि यह इस दावा करता है कि श्री चैतन्य महाप्रभु उनके एक आचार्य जो गुरु शिष्य परंपरा है उसमें आते हैं। जो श्री चैतन्य महाप्रभु हैं उन्होंने अपने इस के ग्रंथों में मेंशन है कि श्रील जो श्री चैतन्य महाप्रभु जी हैं उन्होंने मेंशन किया है कि जो भी श्रीधरी टीका के अलावा कोई भाष्य लिखना चाहेगा भागवत पुराण पर वो मेरे लिए अह प्रॉस्टिट्यूट के समान होगा। वैश्यावृत्ति करने वाली महिला के समान होगा। क्योंकि वो जो श्रीधर है मैं भगवान को श्रीधर जी के द्वारा जानता हूं। श्रीधर अपने टाइम के तत्कालीन

00:07:35:20 शंकराचार्य जी हैं। तो चैतन महाप्रभु जी ने जब ये स्वीकार किया कि मैं श्रीधर को जगतगुरु मानता हूं और मैं श्रीधर स्वामी को ही के द्वारा ही भगवान श्री कृष्ण को समझता हूं। तो आज इस में उनके द्वारा छापी गई क्यों नहीं पढ़ाई जा रही? और अगर नहीं पढ़ाई जा रही तो श्री चैतन्य महाप्रभु की बात का खंडन करने वाले श्री चैतन्य महाप्रभु के शिष्य कैसे? दूसरी बात अब यह भी बात आती है कि श्री चैतन्य महाप्रभु जी ने श्रीधर टीका के अलावा लिखने किसी प्रयास करने वाले को लिखने का प्रयास करने वाले को भी वहां पर वैश्यावृत्ति करने वाली महिला से तुलना की है। तो फिर ऐसे में जब वो सख्त आदेश दे रहे हैं कि श्रीधरी टीका के अलावा कुछ मत लिखिए। कुछ मत बनाइए। तो जो लिख रहा है, वो उनका शिष्य कैसे? और अगर लिख भी दिया तो श्री चैतन्य महाप्रभु के अनुसार वो क्या साबित हो रहा है? तो यह सब विचारणीय प्रश्न है। अच्छा अब इससे आगे और चलते हैं। अब इस दावा करता है कि जो श्री श्री चैतन्य महाप्रभु जी हैं वो हमारी परंपरा में आते हैं और ये और पीछे जब जाते तो मधवाचार्य जी को अपना गुरु बता देते हैं कि जो इनके आदि दैविक गुरु थे वो मधवाचार्य जी थे। मगर मधवाचार्य जी ने भी भाष्य लिखा था भागवत पुराण पे। अब बात यह आती है कि मधवाचार्य जी श्री चैतन महाप्रभु जी के गुरु हैं।

00:08:51:03 मगर श्री चैतन महाप्रभु जी अपने ही जो सबसे परम पद पर बैठे हुए गुरु हैं जो आदि दैविक गुरु हैं उनके भाष्य को स्वीकार ना करके शंकराचार्य के भाष्य को स्वीकार कर रहे हैं। तो फिर अगेन अगर ये अपने आप को श्री चैतन्य महाप्रभु जी का शिष्य कह रहे हैं तो फिर ये श्री मधवाचार्य जी के शिष्य कैसे हुए? क्योंकि उन्होंने उनका भाष्य तो अपनाया नहीं अपने गुरु का भाष्य। तो यह एक आ गई बात। अब इसके बाद बात ये आ जाती है कि ये इस दावा करता है कि वैष्णव है। वैष्णव परंपरा से भाई मधवाचार्य को अपना गुरु बना बताते हैं और मधवाचार्य जी वैष्णव थे। वैष्णवाचार्य थे। ठीक है? तो अब बात ये आती है कि अपनी भगवत गीता में ये लिखते हैं कि श्री कृष्ण के अलावा शिव ब्रह्मा विष्णु भी श्री कृष्ण के समान सर्वशक्तिमान नहीं है। संपूर्ण ऐश्वर्यवान नहीं है। इसका अर्थ है कि विष्णु रूप में भी भगवा भगवत तत्व को स्वीकार नहीं करते। तो ऐसे में फिर ये वैष्णव कैसे भाई अगर आप विष्णु रूप में भगवत तत्व को स्वीकार नहीं कर रहे हो आप शिव रूप में स्वीकार नहीं कर रहे हो तो आप शैव नहीं हो ये पता चल गया मगर जब आप विष्णु रूप में भी भगवत तत्व को स्वीकार नहीं कर रहे हो तो फिर आप वैष्णव कैसे कृष्ण से जब आप विष्णु को अलग कर रहे हो और फिर तुलनात्मक रूप से आप कह रहे हो कि विष्णु के अंदर संपूर्ण ऐश्वर्यवान नहीं है वो तो फिर आप वैष्णव कैसे

00:10:06:16 अच्छा ऐसे में इनका जो उचित नाम दिखाई देता है वो कहीं ना कहीं लगता है कि ये अपने आप को अगर वैष्णव कहेंगे ेंगे तो वह ज्यादा उचित लगेगा इनके अकॉर्डिंगली। मगर बात यह भी आती है कि अगर ये वैष्णव कह देंगे तो इनका किसी प्राचीन परंपरा से संबंध स्थापित नहीं हो पाएगा। तो संभवत इस पर बात हो तो शायद ही कुछ प्रकाश डाल सके इस वाले। इसके बाद अगला प्रश्न आता है कि इसन ये दावा करता है कि वो श्री कृष्ण भगवान की भक्ति कराता है। मगर फिर वही बात आ गई। जिस प्रकार दूध से दही बन

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→ Used in: A · Live Unsolved questions of Iskcon theory | A live discussion with Iskcon follower | A... at 4:23 ↗

→ Used in: A · Video ISKCON is not my Enemy | My Fight is with who calls God Bound | who is worshippe... at 1:26 ↗

00:10:36:12 सकता है मगर दही से दूध नहीं बन सकता है। उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं। मगर शिव बनने

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00:10:41:15 के बाद श्री कृष्ण वापस कृष्ण नहीं बन सकते हैं। तो ये बाधित हो गया ईश्वर। जबकि ईश्वर कौन है? सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म। ईश्वर किसी भी तरह के नियम के नीचे नहीं है। वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है। सर्वशक्तिमान है। अगर ईश्वर के सामने एक लाइन नहीं लिखी जा सकती कि दुनिया में कोई ऐसा कार्य जिसके लिए जिसके कारण यह कहा जा सके कि ही कांट डू इट। ईश्वर के लिए नहीं कहा जा सकता। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] तो अब ये कह रहे हैं कि ही कांट डू इट। वो शिव बनने के बाद वापस कृष्ण नहीं बन पा रहे। तो ऐसे में श्री कृष्ण भगवान को ही बाधित बता देने वाले श्री कृष्ण भगवान के भक्त कैसे? तो इतने सारे कैसे और क्यों बन जाते हैं जो इस से इस की शिक्षाओं में जो कंफ्यूजन पैदा करते हैं, संशय पैदा करते हैं और ये संशय जब तक दूर नहीं होंगे भगवान श्री कृष्ण ने ही कहा है संशयात्मा विनश्यति। जिस इंसान के मन में संशय होगा वो तो ना तो इस लोक में सुखी रह पाएगा और ना ही परलोक में। तो मुझे लगता है हो सकता है कि इस के पास इन सारी चीजों का समाधान हो तो उसे इन बातों का समाधान प्रस्तुत करना चाहिए क्योंकि लोगों के मन में धीरे-धीरे बहुत सारे संशय इस तरह से उत्पन्न हो रहे हैं। इसके साथ ही साथ मेरा निवेदन यह भी है इस [संगीत] वालों से कि वो एक तार्किक धरातल पर अपना उत्तर प्रस्तुत करें अगर राहुल आर्य जी ने उनको [संगीत] चैलेंज किया है तो और

00:11:56:21 इस तरह की अतार्किक बातें ना करें कि आप ऐसी चीजें आप राहुल आर्य से [संगीत] मांग लें कि भाई यह लिखवा के लाओगे तभी हम आपसे शास्त्रार्थ करेंगे। आप जानते हो कि आर्य समाज का एक [संगीत] पूरा इतना बड़ा वो है जो ऐसे लिख के नहीं देगा। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 12:19 · 15 Oct 2023

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