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00:00:00:09 ऐसा क्यों है कि जो व्यक्ति ईश्वर को मानता है उसी के पास मर्यादा है ऐसा क्यों [संगीत] है पहले आप समझिए मर्यादा आपको मनुष्य कैसे बती है सामने खड़ी हुई तीन महिलाएं एक मेरी माता जी है बहन जी है और एक मेरी बुआ है यह मुझे कौन बताएगा साइंस नहीं बताएगी मुझे धर्म बताएगा यह मां है इनको माता की दृष्टि से देखो यह बहन है इनको बहन की दृष्टि से देखो यह बुआ जी है इनको बुआ जीी की दृष्टि से तो यह मुझे कौन सिखा रहा है धर्म यह साइंस नहीं सिखाती है कि इसको कैसे देखना है वो यह बता देगी आप इससे जन्मे हो वो ये बता देगी साइंस की बुक मगर किसके साथ कैसा व्यवहार करना है यह व्यवहार आपको कौन सिखाएगा धर्म तो अब बात ये आती है कि जो मर्यादा है इसका और ईश्वर का संबंध क्या है ऐसा क्यों है कि जो ईश्वर को मानता है उसी के पास मर्यादा है ऐसा इसलिए है कि ईश्वर को ईश्वर प्राप्त करने के लिए ही हम जिन नियमों का पालन
00:01:15:16 करते हैं ईश्वर को प्राप्त करने के लिए ही हम का पालन करते हैं वही नियम मर्यादा है जैसे कि सच बोलोगे तो ईश्वर मिलेगा झूठ बोलोगे तो पाप लगेगा ऐसा ना अगर आपने कुछ गलत काम किया तो पाप पड़ेगा पाप चढ़ेगा कहा जाता है अ काम किया तो ईश्वर प्रसन्न होंगे पुण्य ईश्वर को प्रसन्न दूसरी भाषा में कहे तो ईश्वर को प्राप्त करने के लिए नियमों का आलंबन लेते हैं ईश्वर को प्राप्त करने के लिए हम जिन नियमों का आलंबन लेते हैं वही नियम मर्यादा और दूसरे शब्दों में धर्म और अन्य शब्दों में नैतिकता आदि आदि नामों से से उद् भाषित होते हैं है ना तो जिसके पास ईश्वर है उसी के पास क्या है
00:02:07:15 मर्यादा और जब आपके पास मर्यादा है तभी तक आप खुश रह सकते हैं यानी कि जब तक आपके पास धर्म है ईश्वर है तभी तक आप खुश रह सकते हैं अन्यथा नहीं रह सकते अब बात ये आती है मानवता पशुता पर आ जाते हैं वापस जो हमारा मेन टॉपिक मानव कौन है जो नियमित है और पशु कौन है जो अनियमित है इस नियमित होने को और नीचे चले जाए तो मानव कौन है जो मर्यादित है क्या है
00:02:50:20 मर्यादित और पशु कौन है अमर्यादित है ना और नीचे ले जाए तो मानव कौन है जो नैतिक है और पशु कौन है अनैतिक और इसी नियमों को इसी मर्यादा को इसी नैतिकता को अंतता का जाता धर्म क्या कहा जाता है यानी कि मानव कौन है जिसके पास धर्म है और पशु कौन है जिसके पास धर्म नहीं है यानी कि अधर्म जहां धर्म नहीं है वहां पर स्वत सिद्ध है कि वो अधर्म है
00:03:51:24 ठीक बात आती है कि यह जो नियम है मर्यादा है नैतिकता है धर्म है जो कि यहां पर नहीं है पशुओं के पास यह आपको मिलता कहां से है य आपको मिलता कहां से है यह मिलता है आपको आध्यात्म से किससे मिलता है अध्यात्म तो इसका अर्थ क्या हुआ कि मानव वो है जिसके पास अध्यात्म है और पशु कौन है जिसके पास
00:04:31:15 अध्यात्म नहीं है यानी कि अध्यात्म एक श्लोक है धर्मेन हीना पशु भी समाना धर्म के बिना मनुष्य जो है पशु के समान है तो हमने वही बताया कि धर्म किसे कहते हैं उन नीतियों को उन मर्यादाओं को उन नियमों को जो हमें पशु से अलग बनाता है चार चीजें पशु में और मनुष्य में समान होती है आहार निद्रा भय और मैथुन आहार यानी की फूड खाना खाना हम भी खाते हैं वह भी खाते हैं निद्रा यानी कि स्लीप हम भी सोते वो भी सोते हैं और भय मरने से डर हमें भी लगता है और उनको भी लगता है एक चीज और है जो दोनों में होती है तो हमारे पास एक्स्ट्रा क्या है केवल और केवल धर्म धर्म है जो हमको पशुओं से अलग बनाता है इसीलिए श्लोक है धर्मेन हीना पशु भी समाना अब बात ये आती है कि धर्म आपको तब मिलता है जब आपके जीवन
00:05:46:16 में अध्यात्म आता है क्या आता है अध्यात्म तो जिसके जीवन में अध्यात्म जितना ज्यादा सुरक्षित है उसके जीवन में धर्म उतना ही सुरक्षित है उसके जीवन में मर्यादा उतनी सुरक्षित है और उसके जीवन में मानवता उतनी ही है वो उतना ही अच्छा मानव होगा जितना अच्छा उसके उसके पास क्या होगा अध्यात्म अब ये अध्यात्म क्या है तो अध्यात्म य है अगर सीधी सी सरल भाषा में कहे तो अध्यात्म य है आत्मा का अध्ययन अपना अध्ययन अध्यात्म आत्म अध्यन और सरल भाषा में गए तो जो ईश्वर को मानता है वह अध्यात्मिक है जो ईश्वर को नहीं मानता वो आध्यात्मिक नहीं है इसका अर्थ क्या हुआ कि जिसके पास ईश्वर
00:06:45:25 है उसके पास क्या है अध्यात्म और अध्यात्म जिसके पास है उसी के पास और जिसके पास धर्म उसके पास क्या है और नैतिकता जिसके पास है उसके पास क्या है मर्याद मर्यादा जिसके पास उसके पास क्या है और अंतता यह सारी चीजें जिसके पास है वह क्या है मानव है ना और जिसके पास यह सब कुछ नहीं है क्रम से वह कौन है ठीक है अब क्या है इससे आगे की चीज कि यह जो आध्यात्म है यह आपको मनुष्य बना तो रहा है मगर इससे फायदा किसका हो रहा है पशुओं का किसी और का आपको मनुष्य बना रहा है अगर तो मनुष्य बनने से फायदा क्या है मनुष्य बनने से फायदा यह है कि आपके जीवन में जो आपको चाहिए आपको क्या चाहिए होता है जीवन में खुशी क्या चाहिए खुशी और इसी को अगला कहले सुख और क्या कह सकते हैं आनंद यही तो चाहिए इसी के लिए हम परेशान है इसी के लिए परेशान है ना सारी मेहनत सारी चीजें हम क्यों करते हैं क्यक हमें चाहिए खुशी सुख
00:08:01:18 आनंद तो जब आप मनुष्य बनते हैं यानी कि जब आप ईश्वर को मानते हैं जब आपके पास अध्यात्म आता है मर्यादा आती ध आता है तो यह तीन चीज आपके पास ऑटोमेटिक आ जाती है आनंद संतोष यह सब तभी आएगा जब आपके पास क्या होगा अध्यात्म ईश्वर का अस्तित्व य अभी हम आगे जानेंगे ऐसा क्यों है तो यह आपका जो बिहेवियर लाइफ स्टाइल यानी व्यावहारिक आपका जो जीवन दर् जो है जीवन चर्या दिनचर्या उसमें मदद क्यों करता है क्योंकि जब आप मनुष्य बनेंगे यानी कि जब आप ईश्वर को मानेंगे जब आप आध्यात्मिक बनेंगे तब आपके पास आएगी खुशी वरना आप कितना भी खुशियों के पीछे परेशान हो जाओ आपके पास खुशी नहीं आ पाएगी कि आप खुशियों के पीछे मत भागो आप इसके पीछे भागो मानवता के पीछे यानी कि नियमों के पीछे मर्यादा के पीछे नैतिकता के पीछे धर्म के पीछे अध्याम प के पीछे तो आपके पास िया स्वत आएंगी
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