1
00:00:04,580 --> 00:00:05,600
[घंटी की आवाज़][संगीत] होने

2
00:00:05,600 --> 00:00:09,760
जा रही है। इसमें जो मेरे ज्ञान को

3
00:00:09,760 --> 00:00:14,080
शास्त्रों के आधार से कोई गलत साबित कर दे 50

4
00:00:14,080 --> 00:00:18,480
लाख का इनाम। मैं हूं सनातन धर्म का एडवोकेट

5
00:00:18,480 --> 00:00:22,560
और मैं घोषणा करता हूं रामपाल और इसके विश्व भर में

6
00:00:22,560 --> 00:00:26,560
फैले हुए समस्त चूहे भगत को कि रामपाल ने जो

7
00:00:26,560 --> 00:00:30,880
परंपरा प्राप्त सनातन सिद्धांतों के विषय में जिन विषय को लेकर मैंने आपत्ति

8
00:00:30,880 --> 00:00:34,880
प्रकट की है उन विषयों में मेरी एक ही बात को गलत साबित कर दे मैं

9
00:00:34,880 --> 00:00:40,160
उसे एक करोड़ दूंगा 50 लाख नहीं एक करोड़ दूंगा

10
00:00:40,160 --> 00:00:44,400
ठीक है ये मेरा खुला चैलेंज है जिसको

11
00:00:44,400 --> 00:00:48,640
को भी उसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। वो गलत साबित करके बताए और

12
00:00:48,640 --> 00:00:52,720
₹1 करोड़ ले जाए। फिर आने से पहले मैंने एक

13
00:00:52,720 --> 00:00:56,800
कॉमेडी शो देखा। तो थोड़ा सा मैं उस कॉमेडी

14
00:00:56,800 --> 00:01:01,360
शो के बारे में बात कर लूं। कॉमेडी शो क्या है कि एक

15
00:01:01,360 --> 00:01:05,120
पगला चला है

16
00:01:05,120 --> 00:01:09,360
अ बुद्धिमान की चाल। एक मूर्ख चला है बुद्धिमान

17
00:01:09,360 --> 00:01:13,600
की चाल। और उसने

18
00:01:13,600 --> 00:01:17,600
उसने एक वीडियो बनाया है। वीडियो जारी किया है कि भाई मैं 50

19
00:01:17,600 --> 00:01:21,680
लाख रुपए दूंगा जो मेरी बातों को

20
00:01:21,680 --> 00:01:26,000
गलत साबित कर दे और वह खुद को सनातन का आदि सनातन का एडवोकेट

21
00:01:26,000 --> 00:01:30,000
कह रहा है। तो उसकी जरा बोली हुई जो टच्चगिरी की

22
00:01:30,000 --> 00:01:34,080
बातें हैं उनका अवलोकन करते हुए उनका रिप्लाई कर देते हैं और फिर

23
00:01:34,080 --> 00:01:38,240
आज का जो चैप्टर है वो चालू करते हैं। वो क्या है ना आज बुलेट पॉइंट्स

24
00:01:38,240 --> 00:01:42,320
बुलेट पॉइंट्स तो है नहीं तो उनका स्पेस खाली रहेगा तो चलो इसने अच्छा कॉमेडी शो

25
00:01:42,320 --> 00:01:46,770
दे दिया तो उसी में बात हो जाएगी। अच्छा

26
00:01:46,770 --> 00:01:48,880
[गला साफ़ करने की आवाज़]

27
00:01:48,880 --> 00:01:54,640
बात करते हैं इसने क्या-क्या बकवास की है अपने उस कॉमेडी सर्कस में

28
00:01:54,640 --> 00:01:59,520
हम

29
00:01:59,520 --> 00:02:03,040
वर्किंग प्रोजेक्ट

30
00:02:03,040 --> 00:02:07,120
इसने बोला है विश्व के जितने भी धर्म गुरु हैं पहले तो क्या इसको

31
00:02:07,120 --> 00:02:11,120
धर्म की परिभाषा मालूम है। परमात्मा की परिभाषा मालूम है। यह कहता

32
00:02:11,120 --> 00:02:15,440
है आगे कि पवित्र जो शास्त्र है जिसमें कबीर सागर को भी जोड़ देता है। सूक्ष्म

33
00:02:15,440 --> 00:02:19,600
वेद के नाम पर सूक्ष्म वेद छमम छक्षम वेद करके अपना जो उसमें

34
00:02:19,600 --> 00:02:23,760
पष्ट बेषण किया। कबीर सागर एक पवित्र ग्रंथ है। पर जो यह प्रस्तुत करता

35
00:02:23,760 --> 00:02:28,000
है अपना घोटाखोरी मिलावट के साथ वह पवित्र नहीं है।

36
00:02:28,000 --> 00:02:32,160
तो कबीर सागर एक सम्मानित ग्रंथ है। तब तक जब तक उसकी बात का

37
00:02:32,160 --> 00:02:36,880
अर्थ उसमें कही हुई किसी बात का अर्थ वेद के सम्मत है।

38
00:02:36,880 --> 00:02:40,960
सनातनियों के लिए बाकी वो अपने नजर से कुछ भी हो

39
00:02:40,960 --> 00:02:44,960
उससे हमें कोई आपत्ति नहीं है। सनातनियों के लिए तब तक वो

40
00:02:44,960 --> 00:02:48,960
ग्राह है तब जब तक उसकी कही हुई किसी बात का अर्थ वेद के विरुद्ध

41
00:02:48,960 --> 00:02:53,440
ना निकल रहा हो। क्योंकि वेद यह घोषणा करते हैं कि वेद के अलावा कोई मार्ग नहीं है।

42
00:02:53,440 --> 00:02:57,520
और उपनिषदों के अनुसार जो पंचम वेद कहा गया है, सूक्ष्म

43
00:02:57,520 --> 00:03:01,680
वेद कहा गया, सूक्ष्म वेद तो प्रणव है। जो प्रणवाक्षर है वही सूक्ष्म

44
00:03:01,680 --> 00:03:06,160
वेद है। बीज रूपी वेद वो हमारा प्रणवाक्षर है।

45
00:03:06,160 --> 00:03:10,560
और पंचम वेद कहा गया इतिहास, पुराण, महाभारत इत्यादि को, पुराण,

46
00:03:10,560 --> 00:03:15,280
शास्त्र इत्यादि को और इसके भरभर के उपनिषदों में प्रमाण भी हैं।

47
00:03:15,280 --> 00:03:19,360
अच्छा तो यह कहता है कि जो हमारे शास्त्र है उन पर आधारित

48
00:03:19,360 --> 00:03:23,520
चर्चा होगी। इसने कम से कम उस वीडियो में तीन से चार बार यह

49
00:03:23,520 --> 00:03:27,600
बताया है कि कौन-कौन से शास्त्र ने इस पर जोर दिया है। उसमें

50
00:03:27,600 --> 00:03:31,920
रामचरितमानस का नाम लिया है। उसमें जो है वाल्मीकि रामायण का नाम लिया है। महाभारत

51
00:03:31,920 --> 00:03:36,240
का नाम लिया है। गीता का नाम लिया है। और गीता को इसने सार बताया

52
00:03:36,240 --> 00:03:40,480
है। गीता को इसने किसका सार बताया

53
00:03:40,480 --> 00:03:45,360
है? चारों वेदों का प्लस सूक्षम वेद का। इसके चमचम वेद का।

54
00:03:45,360 --> 00:03:50,160
तो उसको इन सब का सार इसने गीता गीता को बताया है।

55
00:03:50,160 --> 00:03:54,240
जबकि यह खुद ही कहता है कि गीता में पूर्ण

56
00:03:54,240 --> 00:03:58,640
ज्ञान नहीं है। यह खुद ही कहता है और गीता कबीर

57
00:03:58,640 --> 00:04:02,880
सागर का भी सार है। यह इसकी मूर्खता है।

58
00:04:02,880 --> 00:04:06,960
इसने अपनी वीडियो में कहा। तो एक-एक करके चलते हैं। सबसे पहली

59
00:04:06,960 --> 00:04:11,440
बात इसने बोली है कि परमा पवित्र शास्त्र में कबीर सागर यह कैसे जुड़ा?

60
00:04:11,440 --> 00:04:15,600
रामपाल तुम बता दो। जब पंचम वेद, इतिहास, पुराण शास्त्र इत्यादि

61
00:04:15,600 --> 00:04:20,320
हैं उपनिषदों के अनुसार, महाभारत के अनुसार, पुराणों के अनुसार,

62
00:04:20,320 --> 00:04:25,120
ब्राह्मण ग्रंथों के अनुसार तो फिर तुम कैसे उसमें कबीर सागर को घुसेड़ोगे?

63
00:04:25,120 --> 00:04:29,280
अपनी वो थुल्लाग्लागिरी के आधार पर। अच्छा।

64
00:04:29,280 --> 00:04:30,320
फिर तुम कहते हो

65
00:04:30,320 --> 00:04:34,480
कि गीता चार वेद प्लस सूक्ष्म वेद। तुम्हारे छमम छमम

66
00:04:34,480 --> 00:04:40,400
वेद का सार है। तो भैया तुम ही तो यह कहते हो कि गीता में पूर्ण

67
00:04:40,400 --> 00:04:44,960
परमात्मा की भक्ति कैसे करनी है? ये देखो

68
00:04:44,960 --> 00:04:49,280
वेदों और गीता में ज्ञान तो श्रेष्ठ है। मगर जो साधक

69
00:04:49,280 --> 00:04:53,520
परंतु भक्ति की साधना केवल तुम्हारे अनुसार जो काल ब्रह्म है जिसको पाकर के मुक्ति

70
00:04:53,520 --> 00:04:57,680
नहीं होती वहां तक की है। तो फिर तुम कैसे कह रहे हो कि गीता उसका

71
00:04:57,680 --> 00:05:01,840
सार है। या तो तुम यह कहो कि कबीर सागर में भी पूर्ण ज्ञान

72
00:05:01,840 --> 00:05:07,040
नहीं है। इसके अलावा और भी कई जगह तुमने कहा है

73
00:05:07,040 --> 00:05:11,040
चारों वेदों 18 पुराणों गीता जी व छह शास्त्रों में केवल

74
00:05:11,040 --> 00:05:15,200
ब्रह्म काल की उपासना है यानी मुक्ति की बात नहीं है तुम्हारे हिसाब से तो

75
00:05:15,200 --> 00:05:19,280
तुम गीता को कबीर सागर का सार कैसे कह रहे हो क्योंकि भैया दुकान चलानी

76
00:05:19,280 --> 00:05:23,680
है अपनी आप को फेमस करना है इसलिए है ना

77
00:05:23,680 --> 00:05:27,760
और एक जगह लिखा हुआ बिल्कुल साफ सुथरा कि भैया गीता में

78
00:05:27,760 --> 00:05:31,760
जो है अच्छा क्या कहता

79
00:05:31,760 --> 00:05:35,840
है गीता इसके और यह कहता है कि

80
00:05:35,840 --> 00:05:40,160
यह जो शास्त्र है ना वेद, पुराण और गीता

81
00:05:40,160 --> 00:05:45,120
यह सब जो है सद ग्रंथ है इसके लिए पवित्र ग्रंथ हैं। और

82
00:05:45,120 --> 00:05:45,620
यह

83
00:05:45,360 --> 00:05:49,440
सद ग्रंथ कहने वाला कौन है? जो लोगों को बहकाता है,

84
00:05:49,440 --> 00:05:53,600
झूठ बोलता है, अज्ञानता करता है, अपना उल्लू सीधा करता

85
00:05:53,600 --> 00:05:57,600
है, झूठ बोल के उल्लू सीधा करता है। उसके द्वारा की गई

86
00:05:57,600 --> 00:06:01,760
जो उल्टी है, जो इसने कहीं अपनी कल्पनाओं में सोच रखी

87
00:06:01,760 --> 00:06:06,000
है, उसको ये हमारे शास्त्रों से जोड़ देता है। और फिर भी इस मूर्खता

88
00:06:06,000 --> 00:06:10,240
को करने के बाद भी कहता है कि ये सद ग्रंथ है। अरे भाई तेरे

89
00:06:10,240 --> 00:06:14,320
अनुसार ये सद ग्रंथ है। पहले ये तो साबित कर सद ग्रंथ है कैसे?

90
00:06:14,320 --> 00:06:18,720
इनको तो काल दे रहा है और काल झूठ बोलता है। यह देखो इसका 95

91
00:06:18,720 --> 00:06:23,120
नंबर पेज खोलकर दिखाओ। 95 चलो बाद में लगा देना। अभी मत खोलो।

92
00:06:23,120 --> 00:06:27,120
95 नंबर प्रश्न पर तीसरे चौथे पैराग्राफ में

93
00:06:27,120 --> 00:06:31,200
लिख रहा है यह कि जो काल ब्रह्म है वह अच्छी आत्माओं

94
00:06:31,200 --> 00:06:35,280
को रचता है अर्थात पैदा करता है फिर उनमें स्वयं

95
00:06:35,280 --> 00:06:39,280
प्रवेश करके गुप्त रूप से अपना उल्लू सीधा कर लेता

96
00:06:39,280 --> 00:06:43,360
है और अभी आज पांचवे चैप्टर में भी यह बात आ रही है कि काल जो

97
00:06:43,360 --> 00:06:47,440
है भ्रमित करता है व्यक्ति को अज्ञानता फैलाता है व्यक्ति को

98
00:06:47,440 --> 00:06:51,440
तो फिर काल के द्वारा दिए गए जो वेद है वह भ्रमित करने वाले नहीं

99
00:06:51,440 --> 00:06:55,760
है कैसे तय हो रहा ठुल्ले गिरी के ज्ञान से घटियाई

100
00:06:55,760 --> 00:06:59,840
घटियाई रामपाल की घटिया गिरी के ज्ञान से जैसे तुम कहते हो ना

101
00:06:59,840 --> 00:07:00,400
ब्रह्मा विष्णु

102
00:07:00,400 --> 00:07:04,560
महेश की भक्ति करने वाले या वो गीता ज्ञान दाता

103
00:07:04,560 --> 00:07:08,720
की जो भक्ति है वो गति है वो घटिया है तो वास्तविकता में तुम्हारा

104
00:07:08,720 --> 00:07:13,120
जो घटिया स्तर है उसके आधार पर तुम ये कहते हो

105
00:07:13,120 --> 00:07:17,200
तुम्हारी घटिया गिरी है ये कि तुम पहले तो कहते हो कि काल

106
00:07:17,200 --> 00:07:21,600
जो है वो उल्लू सीधा करता है झूठ बोलता है अज्ञानता फैलाता है भ्रमित करता है

107
00:07:21,600 --> 00:07:25,600
और और फिर उसी के द्वारा दिए जाने वाले शास्त्रों को तुम कहते हो कि ये हमारे सद ग्रंथ

108
00:07:25,600 --> 00:07:29,600
है और सद ग्रंथ होने के बाद भी तुम फिर उसमें एक ठुल्लू लगाते हो

109
00:07:29,600 --> 00:07:34,080
कि इसमें ये तो काल ने अपनी मर्जी से कह दिया ये झूठ है वो झूठ है फलाना है ढिमका

110
00:07:34,080 --> 00:07:38,160
है तो पहली बात तो तुम यही सिद्ध कर दो कि भैया धर्म किसे

111
00:07:38,160 --> 00:07:42,320
कहते हैं ईश्वर किसे कहते हैं तुम्हारे अनुसार

112
00:07:42,320 --> 00:07:46,400
जो धर्म है जो धर्म है वही सिद्ध नहीं होगा

113
00:07:46,400 --> 00:07:50,480
धर्म की परिभाषा ही सिद्ध नहीं होगी फिर उसके बाद तुम ईश्वर की परिभाषा

114
00:07:50,480 --> 00:07:54,720
तुम्हारी सिद्ध नहीं हो पाएगी और तो और अंतत गतवा तुम्हारे द्वारा

115
00:07:54,720 --> 00:07:58,880
शास्त्र की परिभाषा सिद्ध नहीं हो पाएगी और अंत में अगर बात करो कि तुम इनको

116
00:07:58,880 --> 00:08:03,040
शास्त्र कहते हो सद ग्रंथ शास्त्र कहते हो तो किस आधार पर कहते हो सद

117
00:08:03,040 --> 00:08:07,120
ग्रंथ कहते हो तो किस आधार पर कहते हो अगर गीता

118
00:08:07,120 --> 00:08:11,280
कबीर सागर का और बाकी चारों वेदों का सार है तो फिर गीता में पूर्ण

119
00:08:11,280 --> 00:08:15,600
भक्ति की बात क्यों नहीं है तुम्हारे हिसाब से उसमें ज्ञान अधूरा है यह है तुम्हारा

120
00:08:15,600 --> 00:08:19,600
घटियागरी का ज्ञान है ना ठोको ताली अच्छा

121
00:08:19,600 --> 00:08:23,760
इसके बाद इसने अपने उसमें क्या कहा है। आगे चलते हैं। इसने बड़ी कॉमेडी

122
00:08:23,760 --> 00:08:28,320
की है उसमें। मैं तो अभी तक समझता था कि रामपाली जो है ज्यादा बड़े कॉमेडियन

123
00:08:28,320 --> 00:08:32,400
हैं। मगर आज मुझे इस वीडियो को देख के पता लगा कि सबसे बड़ा कॉमेडी

124
00:08:32,400 --> 00:08:36,400
तो कॉमेडी किंग तो रामपाल है। कैसे? आगे क्या कह रहा

125
00:08:36,400 --> 00:08:40,720
है? फैसला कौन करेगा? जनता करेगी। है ना?

126
00:08:40,720 --> 00:08:44,960
फैसला कौन करेगा? जनता करेगी।

127
00:08:44,960 --> 00:08:49,040
और उसमें उदाहरण देता है। उदाहरण क्या देता है? कि जैसे दो वकील हैं। ध्यान

128
00:08:49,040 --> 00:08:53,120
देना इस बात पे। जैसे दो वकील हैं वो आपस में एक दूसरे को कुछ नहीं

129
00:08:53,120 --> 00:08:57,120
कहते हैं बल्कि वो अपनेप पक्ष को रखते हैं। फैसला जो

130
00:08:57,120 --> 00:09:01,440
है वह करता है। जज करता है। ठीक है? तो फैसला

131
00:09:01,440 --> 00:09:05,440
जब जनता को करना है और फिर इसने ये कहा कि मैं साधना

132
00:09:05,440 --> 00:09:09,680
टीवी पर बैठकर के अपने आश्रम में क्या कहते हैं? कायरता

133
00:09:09,680 --> 00:09:13,760
पूर्वक क्योंकि मैं अपने बिल से तो बाहर निकल नहीं सकता। तो कायरता पूर्वक

134
00:09:13,760 --> 00:09:17,760
रामपाल अपने वक्तव्य निर्गत करेगा साधना टीवी पर आकर के और

135
00:09:17,760 --> 00:09:21,840
उसके बाद जिसका भी मन हो उसकी बात को काटने का जिससे कि रामपाल फेमस

136
00:09:21,840 --> 00:09:25,920
हो जितने ज्यादा से ज्यादा धर्म गुरु रामपाल की बात करेंगे उससे शास्त्रार्थ

137
00:09:25,920 --> 00:09:30,080
जैसा सीन बनेगा रामपाल कभी ये मानेगा नहीं कि मैं गलत हूं जनता

138
00:09:30,080 --> 00:09:30,720
का जनता

139
00:09:30,720 --> 00:09:34,800
ने किसको गलत माना किसको सही माना ये फैसला कैसे होगा इस बारे में रामपाल

140
00:09:34,800 --> 00:09:38,800
जी का घटियागरी का ज्ञान कोई आधार नहीं है जनता ने

141
00:09:38,800 --> 00:09:43,120
किसको चुना इस इस बारे में रामपाल के पास कोई उपाय उपाय नहीं है।

142
00:09:43,120 --> 00:09:47,120
उसके बाद रामपाल यह कहता है कि रामपाल यह नहीं कहता

143
00:09:47,120 --> 00:09:51,280
कि आप साधना टीवी पर आकर के लाइव चर्चा करो मेरे सामने बैठकर ना

144
00:09:51,280 --> 00:09:55,280
रामपाल ये कहता है कि आप भी अपना चैनल बुक करके उस पर बोलो जैसे मैं बोल रहा

145
00:09:55,280 --> 00:09:59,600
हूं और चैनल ना हो तो YouTube पर बोलो और

146
00:09:59,600 --> 00:10:04,320
YouTube पर या Instagram पर जिस पर सोशल मीडिया पर मेरे बारे में बोलना है मेरी बात को काटो।

147
00:10:04,320 --> 00:10:10,080
कितना घटियागिरी करोगे भाई। कितनी घटियाई बातें करोगे।

148
00:10:10,080 --> 00:10:14,400
जो चीज तुम करने को कह रहे हो वह तो वह अभी भी कर रहे हैं।

149
00:10:14,400 --> 00:10:18,400
क्या अनुचार्य ज्ञान नहीं दे रहे? क्या देवकीन नंदन ज्ञान नहीं

150
00:10:18,400 --> 00:10:22,560
दे रहे? क्या रामानुजाचार्य परंपरा के जो

151
00:10:22,560 --> 00:10:26,640
आचार्य गण है वो ज्ञान नहीं दे रहे? क्या मधवाचार्य परंपरा के लोग हैं वो

152
00:10:26,640 --> 00:10:30,800
ज्ञान नहीं दे रहे सोशल मीडिया पर? क्या शंकराचार्य परंपरा के लोग ज्ञान

153
00:10:30,800 --> 00:10:35,360
नहीं दे रहे सोशल मीडिया पर? तो ये क्या मूर्खता

154
00:10:35,360 --> 00:10:39,440
की पराकाष्ठा प्रस्तुत कर रहे हो? तुम्हारे लोग वैसे ही अर्ध पागल है। उन्हें

155
00:10:39,440 --> 00:10:43,440
पूरा पागल बना के ही छोड़ोगे क्या? भाई वह लोग जो काम तुम करने

156
00:10:43,440 --> 00:10:45,760
को कह रहे हो वह तो दे ही रहे हैं। अच्छा तुम कहो

157
00:10:45,760 --> 00:10:49,760
कि मेरा नाम लेकर के मेरी बात काटते हुए तो कोई बात नहीं कही। वैसे तो कही भी

158
00:10:49,760 --> 00:10:53,760
है। सुक्राईनाथ इत्यादि तरीके जो कई ऐसे संत

159
00:10:53,760 --> 00:10:57,920
हैं जिन्होंने तुम्हारी बात को काटते हुए बातें की है। पर

160
00:10:57,920 --> 00:11:02,080
यदि चलो मान लिया कि जो बड़े संत है उन्होंने तुम्हारी बात

161
00:11:02,080 --> 00:11:06,640
को काटते हुए बात नहीं कही। उन्होंने अपना पक्ष रखा है तो हो चुल्लू व्यक्ति

162
00:11:06,640 --> 00:11:10,800
शुरू में तू ही तो कह रहा है कि भैया केवल अपना पक्ष रखो आपस

163
00:11:10,800 --> 00:11:14,800
में नहीं जुड़ना है फिर बाद में तुम ये क्यों अपेक्षा कर रहे हो कि भैया मेरा

164
00:11:14,800 --> 00:11:18,800
नाम लेकर के ज्ञान दो वो तो वो कर ही रहे हैं तो एक नया एक

165
00:11:18,800 --> 00:11:22,960
वो क्या होता है वो एक तनतुना लेकर के

166
00:11:22,960 --> 00:11:28,560
आए बस और कुछ नहीं फिर तनुने में आगे क्या बोलते हैं

167
00:11:28,560 --> 00:11:34,560
आगे क्या बोलते हैं कि

168
00:11:35,440 --> 00:11:39,600
आगे बोलते हैं कि जो सृष्टि रचना जो सृष्टि रचना

169
00:11:39,600 --> 00:11:43,760
बता सकता है वही सृष्टि करता है।

170
00:11:43,760 --> 00:11:48,080
तो भाई अगर सृष्टि रचना बतानी है तो जितने शास्त्र वेदव्यास

171
00:11:48,080 --> 00:11:52,240
के माध्यम से हमको प्राप्त हुए यानी वेदव्यास मानते थे जानते थे सृष्टि रचना

172
00:11:52,240 --> 00:11:56,640
तो वो तो सृष्टि तो वो तो तुम्हारे हिसाब से ईश्वर हो गए वेदव्यास जी

173
00:11:56,640 --> 00:12:01,440
अच्छा इसने कुछ उदाहरण भी दिए अपने बकवास में एक उदाहरण दिया

174
00:12:01,440 --> 00:12:05,520
भागवत का जो इनका फेवरेट पुराण है जिसमें इनको अपना वो ब्रह्मा विष्णु महेश

175
00:12:05,520 --> 00:12:09,600
का आविर्भाव तिरभाव मिल जाता है तो ये वहां पर जो है

176
00:12:09,600 --> 00:12:13,760
ये व्यक्ति कहता है देवी भागवत में ब्रह्मा जी पूछ रहे हैं और देखो जो शिव शिव पुराण

177
00:12:13,760 --> 00:12:17,760
है उसमें ब्रह्मा विष्णु पूछ रहे हैं। इससे सिद्ध हो गया कि

178
00:12:17,760 --> 00:12:22,160
तीनों लोगों को नहीं मालूम है। जबकि सृष्टि रचना

179
00:12:22,160 --> 00:12:26,800
के बारे में ही जहां पर ब्रह्मा जी पूछ रहे हैं वहां पर देवी जी बता रही हैं।

180
00:12:26,800 --> 00:12:30,880
जहां पर ब्रह्मा और विष्णु दोनों पूछ रहे हैं वहां पर शिव जी बता रहे हैं। मगर यह

181
00:12:30,880 --> 00:12:34,960
बात नहीं बोलेगा क्योंकि यह दोगला व्यक्ति है। झूठा व्यक्ति है।

182
00:12:34,960 --> 00:12:38,960
कहीं पर भी एक बात को आप नोट करो। ये लोग कहते हैं कि शास्त्रों में

183
00:12:38,960 --> 00:12:42,960
इनकी भक्ति करने को मना किया गया है। पहली बात इस यह कभी

184
00:12:42,960 --> 00:12:47,120
प्रमाण सहित बता पाएगा यह घटियागिरी करने वाला व्यक्ति

185
00:12:47,120 --> 00:12:50,560
कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो हमारे पंच देवोपासना

186
00:12:50,560 --> 00:12:54,800
है वो करने के लिए यदि मना किया गया है शास्त्रों में तो इनकी

187
00:12:54,800 --> 00:12:58,880
भक्ति करने की जो विधा है वो आई कहां से अगर इनको जो

188
00:12:58,880 --> 00:13:03,040
है पूर्ण परमेश्वर नहीं कहा गया है शास्त्रों में तो इनको पूर्ण परमेश्वर

189
00:13:03,040 --> 00:13:07,120
माना कैसे किस आधार पर माना क्यों माना तो यहां पर

190
00:13:07,120 --> 00:13:11,280
तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं होगा क्योंकि जो हमारे सारे शास्त्र हैं। इसके

191
00:13:11,280 --> 00:13:15,280
हिसाब से इसकी घटियागरी की बातों के हिसाब से वो सारे शास्त्र तो इस

192
00:13:15,280 --> 00:13:19,440
बात के लिए हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है। पूर्ण भगवान नहीं

193
00:13:19,440 --> 00:13:23,440
है। इस बात के लिए है तो फिर उनको पूर्ण भगवान माना किस आधार पे?

194
00:13:23,440 --> 00:13:27,840
दूसरी बात एक बहुत पॉइंट की बात है। ये लोग जितने लोग ब्रह्मा

195
00:13:27,840 --> 00:13:32,000
विष्णु महेश भगवती और गणेश की भक्त को पूर्ण ब्रह्म मानने वाली

196
00:13:32,000 --> 00:13:36,160
बातों को कट करने के लिए जितने भी शास्त्र के प्रमाण

197
00:13:36,160 --> 00:13:40,400
ले आएंगे आपके सनातन शास्त्रों के तो जहां से प्रमाण दे रहे होंगे

198
00:13:40,400 --> 00:13:44,480
वहीं पर यदि ब्रह्मा विष्णु महेश को कहा जा रहा होगा कि उनका जीवन मरण होता

199
00:13:44,480 --> 00:13:48,560
है या आविर्भाव तिरोभाव होता है हमारे अनुसार आविर्भाव तिरोभाव इनके अनुसार

200
00:13:48,560 --> 00:13:52,640
जीवन मरण तो जहां पर ये कहा जा रहा होगा वहीं पर इन पांचों

201
00:13:52,640 --> 00:13:56,800
देवों में से किसी ना किसी एक को पूर्ण ब्रह्म के रूप में स्थापित किया

202
00:13:56,800 --> 00:14:00,800
है। मगर वो बात ये नहीं बताएंगे क्योंकि

203
00:14:00,800 --> 00:14:04,960
यह हैं दोगले। कौन है ये? दोगले अपने बिल में बैठकर के बकवास

204
00:14:04,960 --> 00:14:06,400
करने वाले।

205
00:14:06,400 --> 00:14:10,400
इसके बाद ये दो बातें हमेशा ध्यान रखो। एक

206
00:14:10,400 --> 00:14:14,720
बात कि भैया ब्रह्मा, विष्णु, महेश को पूर्ण परमेश्वर मानने

207
00:14:14,720 --> 00:14:18,800
वाली बात शुरू कहां से हुई? इसका प्रमाण क्या है? क्योंकि यह सारे शास्त्र तो

208
00:14:18,800 --> 00:14:23,200
उनको पूर्ण परमेश्वर ना मानने के निमित्त बनाए गए हैं। और दूसरी बात

209
00:14:23,200 --> 00:14:27,200
क्या कहीं पर ऐसा है कि एक सिरे से पांचों देवों की उपासना

210
00:14:27,200 --> 00:14:31,360
को खंडन कर दिया गया हो। कहीं नहीं है। यदि ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भाव

211
00:14:31,360 --> 00:14:35,520
तिरोभाव बताएंगे तो वहां पर देवी ब्रह्म के रूप में स्थापित है। उत्पत्ति

212
00:14:35,520 --> 00:14:39,760
के रूप में स्थापित है। यदि देवी को उत्पन्न होना दिखाएंगे तो वहां पर शिव जी स्थापित

213
00:14:39,760 --> 00:14:44,240
है। यदि शिव जी का उत्पन्न होना दिखाएंगे तो विष्णु जी स्थापित है।

214
00:14:44,240 --> 00:14:48,240
इसका अर्थ क्या है? एक ही परम तत्व ब्रह्मा विष्णु

215
00:14:48,240 --> 00:14:52,480
महेश भगवती और गणेश के रूप में बार-बार सृष्टि करता है। कभी

216
00:14:52,480 --> 00:14:56,640
सृष्टि उसने मां मां भगवती के रूप को

217
00:14:56,640 --> 00:15:00,640
प्राथमिकता देते हुए रखी तो यह उनके परिकर कहलाए। बाकी के चार

218
00:15:00,640 --> 00:15:04,880
देव और जिस-जिस देव को प्राथमिकता देते हुए सृष्टि रचना की व्याख्या

219
00:15:04,880 --> 00:15:08,880
हुई। तो उस सृष्टि रचना के आधार पर जो बाकी के चार अन्य देव

220
00:15:08,880 --> 00:15:12,880
हैं वो उनके परिककर कहलाए। इतनी सी बात समझने वाली है। इसको

221
00:15:12,880 --> 00:15:17,120
कल्प भेद कहते हैं। वह बात और है कि इनके यहां पर काल मरता

222
00:15:17,120 --> 00:15:21,200
भी है। काल मरता है इसका मतलब वो दोबारा पैदा होता है। दोबारा पैदा होता

223
00:15:21,200 --> 00:15:21,700
है।

224
00:15:21,600 --> 00:15:25,680
उसका जीवन मरण होता है। मानता है ना रामपाल अपनी घटियागरी के ज्ञान के अनुसार।

225
00:15:25,680 --> 00:15:29,920
तो काल जब मरा उसके बाद वो जन्म लिया। कबीर को मालूम है ये ऐसा-सा

226
00:15:29,920 --> 00:15:34,240
करेगा। फिर भी उसको जन्म दिया। यानी कि उसको फंसाना है दोबारा से आत्माओं

227
00:15:34,240 --> 00:15:38,320
को और जब वो दोबारा जन्म लेगा तो वही कहानी सब रिपीट होगी। वह

228
00:15:38,320 --> 00:15:42,400
दोबारा से ऐसा कुछ करेगा कि आत्मा उसके जाल में फसग दोबारा से कुछ ऐसी

229
00:15:42,400 --> 00:15:46,560
गलतियां जिससे कि ब्रह्मा विष्णु महेश रामपाल के हिसाब से प्रकट होंगे। ये

230
00:15:46,560 --> 00:15:51,760
सारी चीजें इसके यहां पर मान्य है और हमारे यहां के कल्प वेद को ये

231
00:15:51,760 --> 00:15:55,920
घटियागरी का ज्ञान देने वाला कभी समझ नहीं सकता। इसके बाद इसने क्या

232
00:15:55,920 --> 00:15:58,960
बकवास की है?

233
00:15:58,960 --> 00:16:03,040
ये इसने पुराणों की बात की थी। वो हो गया। इसके बाद इसका

234
00:16:03,040 --> 00:16:07,040
एक चमचा बैठा हुआ है। किसी संत का भष धरे हैं। मैं उनको जानता

235
00:16:07,040 --> 00:16:11,200
नहीं हूं। हो सकता है संत हो या फिर हो सकता है इनके द्वारा प्रायोजित हो। ज्यादा

236
00:16:11,200 --> 00:16:15,520
चांसेस ऐसे हैं क्योंकि उन्होंने संस्कृत बोली और रामपाल के खेमे का व्यक्ति कभी संस्कृत

237
00:16:15,520 --> 00:16:19,600
बोलता हुआ नहीं मिलेगा। है ना? तो उन्होंने

238
00:16:19,600 --> 00:16:23,680
संस्कृत बोली तो वो एक इनका एक घटियागिरी का चेला वहां पर बैठा हुआ है और वो

239
00:16:23,680 --> 00:16:27,760
बातें कर रहा है कि वो रामपाल ने जो गौशाला में दान भेजा।

240
00:16:27,760 --> 00:16:32,000
अरे भैया रामपाल यदि गौशाला में दान भेज रहा है तो यह प्रश्न

241
00:16:32,000 --> 00:16:38,000
करने वाले क्या अपनी स्त्रियों को रामपाल के पास सोने के लिए भेज देंगे

242
00:16:38,400 --> 00:16:42,400
जो तुम ऐसी बातें करते हो कि दुर्गा माता के बलात्कार की बात करने वाले

243
00:16:42,400 --> 00:16:46,480
का पक्ष लेते हो कि उसने पाइप दिए हैं। उसने जो है गेहूं, शक्कर,

244
00:16:46,480 --> 00:16:52,480
आटा, तेल, चावल दिया है। हां।

245
00:16:52,480 --> 00:16:56,960
बात हो रही है कि उसने जो है वेदों के नाम पर कूड़ा क्यों किया?

246
00:16:56,960 --> 00:17:01,040
उसने उसको कूड़ा करना है अपना भैया जो तुम लिख रहे हो किताब अपने

247
00:17:01,040 --> 00:17:05,280
आप को परमेश्वर कहो भजवाओ मगर वेदों के नाम पर कूड़ा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि

248
00:17:05,280 --> 00:17:09,440
वेदों पे सबकी आस्था है पुराणों पे सबकी आस्था है गीता पे सबकी आस्था है

249
00:17:09,440 --> 00:17:13,520
इसलिए जिस पे पहले से सबकी आस्था है उसी के अंदर चोरी से घुसना

250
00:17:13,520 --> 00:17:17,520
है और अंदर घुस के ऐसा दिखाना है कि भैया इसके द्वारा तो मुझे ही पूजा जा रहा

251
00:17:17,520 --> 00:17:21,760
है। वो बात और है कि मेरी हर दूसरी बात पहली बात से कट जाती है और हर पहली

252
00:17:21,760 --> 00:17:26,000
बात दूसरी बात से कट जाती है। क्योंकि मेरा जो ज्ञान है, रामपाल का जो ज्ञान

253
00:17:26,000 --> 00:17:30,400
है, वह घटियागिरी का ज्ञान है। है ना? अच्छा।

254
00:17:30,400 --> 00:17:34,960
और आगे क्या है? फिर इसने आखिर में कहा

255
00:17:34,960 --> 00:17:38,960
कि जो है ये इनाम देगा जो इसकी एक बात को गलत साबित कर देगा। गलत

256
00:17:38,960 --> 00:17:43,440
साबित का निर्णय कैसे होगा? तेरी बात गलत साबित हो गई। अरे फुअर है क्या तू?

257
00:17:43,440 --> 00:17:47,520
एक नंबर का मूर्ख व्यक्ति है क्या? एक तरफ तो कह रहा है भैया

258
00:17:47,520 --> 00:17:51,520
जनता फैसला ले लेगी। जनता फैसला ले लेगी। ये पता कैसे चलेगा? इस बारे

259
00:17:51,520 --> 00:17:53,760
में कोई तूने समीकरण बैठाए समीकरण

260
00:17:53,760 --> 00:17:57,840
बैठा भी नहीं पाएगा उसके लिए दिमाग चाहिए होता है उसके लिए फोड़ बुद्धि

261
00:17:57,840 --> 00:18:01,840
काम नहीं करती है एक लेवल तक जो रटा रटाई चीजें हैं वो बोल लोगे उसके

262
00:18:01,840 --> 00:18:05,840
बाद ये सब चीजें कैसे स्थापित करोगे जनता ने किसको चुना किसको

263
00:18:05,840 --> 00:18:09,920
नहीं चुना अच्छा दूसरी बात जब ये

264
00:18:09,920 --> 00:18:13,920
निर्णय ही नहीं होगा तो फिर यह कैसे तय होगा कि तेरी बात गलत साबित

265
00:18:13,920 --> 00:18:18,720
हुई कि नहीं हुई हम अच्छा अब 100 की सीधी एक बात है

266
00:18:18,720 --> 00:18:22,960
तो अभी रामपाल ने एक घोष की है। एक घोषणा मैं कर देता हूं। कॉमेडी सर्कस

267
00:18:22,960 --> 00:18:27,200
उसने किया है। मैं उसको उसका जवाब दे देता हूं। आप लोग यहां से चाहो तो रील कट करके

268
00:18:27,200 --> 00:18:31,280
अपना जो जवाब किसी को देना हो तो दे देना। तो एक कॉमेडी सर्कस में

269
00:18:31,280 --> 00:18:35,520
रामपाल ने हरियाणा का जो तथाकथित बाबा है जो हमारे सनातन देवी

270
00:18:35,520 --> 00:18:39,520
देवताओं का मजाक उड़ाता है। हमारे सनातन

271
00:18:39,520 --> 00:18:43,920
धर्म को मानने वाले हिंदुओं की आस्था के जो केंद्र हैं

272
00:18:43,920 --> 00:18:47,920
हमारे तीज त्यौहार इत्यादि हमारे ईश्वर

273
00:18:47,920 --> 00:18:52,400
के स्वरूप और हमारी पूजा पद्धति यानी कि श्राद्ध कर्म इत्यादि

274
00:18:52,400 --> 00:18:56,560
करवा चौथ के व्रत इत्यादि इन सबका मजाक उड़ाता है। कहता है करवा

275
00:18:56,560 --> 00:19:00,800
चौथ रखने वाली जो महिलाएं हैं वो गधी बनेंग

276
00:19:00,800 --> 00:19:05,040
है ना और ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करने वाले नीच हैं। दुर्गा

277
00:19:05,040 --> 00:19:08,960
के साथ जो है बलात्कार किया एक राक्षस ने और भी ना जाने कितनी

278
00:19:08,960 --> 00:19:12,960
बातें कि गायत्री ने गवाही देने के लिए झूठी झूठी गवाही

279
00:19:12,960 --> 00:19:17,040
देने के लिए शर्त रखी कि मेरे साथ पहले संभोग करो तब जो है मैं झूठी गवाही

280
00:19:17,040 --> 00:19:21,440
दूंगी। तेरे का कई सांड पति होंगे। यह सब अश्लील बातें हैं।

281
00:19:21,440 --> 00:19:25,600
स्त्रियों के अंतरंग वस्त्रों की बात यह करता है माता पार्वती और शिवजी

282
00:19:25,600 --> 00:19:29,920
के विवाह वाले प्रकरण में अंतरंग वस्त्रों वो भी अंग्रेजी नाम उनका

283
00:19:29,920 --> 00:19:34,000
हिंदी नाम नहीं अंग्रेजी नाम। तो ये सब चीजें करने

284
00:19:34,000 --> 00:19:38,000
वाला जो बाबा है तथाकथित जो अपने जो कायरता पूर्वक [हंसी] अपने बिल में बैठा

285
00:19:38,000 --> 00:19:42,080
रहता है। उसने अपने बिल में बैठकर के एक घोषणा की है कि मैं

286
00:19:42,080 --> 00:19:46,160
हूं आदि सनातन धर्म का एडवोकेट। अरे घोंंचू तेरी सबसे पहले तो यही बात

287
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गलत हो गई। तू कह रहा है ना मेरी गलत बात साबित कर दो। सनातन के आगे यदि

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आदि लगा दिया तो सनातन का अस्तित्व कहां रह गया? जिसकी शुरुआत

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हो रही है वो सनातन नहीं है। सनातन वो जो अनादि है।

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अनादि सनातन कहता मूर्ख तो तेरी बात चल भी जाती। कहां तू प्रबुद्ध जनों

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में बैठकर के सोच रहा है कि लाइव तेरे साथ कोई शास्त्रार्थ करेगा।

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इतना बड़ा तू मूर्खता का पिटारा है ना। इतना

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बड़ा पिटारा है कि तुझको कौन अपने सामने बिठाएगा?

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आदि सनातन मैं हूं आदि सनातन का एडवोकेट तो सुन ले भाई रामपाल

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कहता है कि वह आदि सनातन का एडवोकेट

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है और वो आदि सनातन उसका जो तथाकथित धर्म

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है जिसका उसे खुद ज्ञान नहीं है धर्म होता क्या है उसके

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बारे में वो अपना पक्ष रखेगा और उसकी बातों को जो भी गलत साबित कर देगा वो उसको

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50 लाख देगा तो सुन मैं हूं सनातन धर्म का

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एडवोकेट और जितनी बातें तुमने सनातन

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परंपरा परंपरा प्राप्त सनातन धर्म के विरुद्ध कही है।

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उसके संबंध में जो मैंने निराकरण प्रस्तुत किए है और तेरी मूर्खता प्रस्तुत की

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है। उसके एक भी शब्द को एक भी पंक्ति

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को एक भी बात को जो गलत साबित कर देगा उसको मैं ₹1 करोड़

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इनाम दूंगा। बोल कर गलत साबित

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तू डाल डाल तो मैं पाथप पाथ। और फैसला कौन करेगी

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जनता? तो जनता फैसला करके बता देगी गलत साबित किया कि नहीं किया? तेरी डपोर शंख

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वाली बातें हैं ना। कर गलत साबित रामपाल

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के विरुद्ध मेरे द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले सिद्धांतों में से एक

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भी सिद्धांत को कोई गलत साबित कर देगा मैं उसको ₹1 करोड़ इनाम

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दूंगा। अपना चैनल खोलो सोशल मीडिया पे आओ YouTube पे

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आओ और करो गलत साबित और अगर कर दिया

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तो ₹1 करोड़ तुम तुम्हें मैं इनाम दूंगा

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रामपाल

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तू भी कर दे गलत साबित तेरे को मैं इनाम दूंगा जा

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[संगीत] आ
