1
00:00:01,960 --> 00:00:06,400
[घंटी की आवाज़] निकली उस दिन 28 नवंबर को घर से निकली थी हॉस्टल

2
00:00:06,400 --> 00:00:10,640
के लिए एक तारीख को उसको जाना था ट्रिप पर तो सामान

3
00:00:10,640 --> 00:00:14,800
लेके जितना उसको पहले हॉस्टल में पहुंचाना था घर से जो ले जाना था वो सारी

4
00:00:14,800 --> 00:00:18,800
सारा सामान धीरे-धीरे उसने हॉस्टल में रख दिया और उस दिन जब सामान ले

5
00:00:18,800 --> 00:00:23,040
निकली तो उस समय मैं नहा रही थी वो जैसे जैसे निकलने से पहले गले

6
00:00:23,040 --> 00:00:27,040
लग के जाती है तो उस दिन वो गले भी नहीं लग पाई थी मेरे मैं नहा रही थी और उसने

7
00:00:27,040 --> 00:00:31,280
कहा कि जा रही हूं मुझे लेट हो रही है कॉलेज की बस आने वाली तो फिर

8
00:00:31,280 --> 00:00:35,280
चली गई और फिर वहां तक मेन रोड तक जाने के बाद उसको एहसास हुआ कि मां

9
00:00:35,280 --> 00:00:41,280
को

10
00:00:51,920 --> 00:00:54,320
हम

11
00:00:54,320 --> 00:00:59,200
मां को छोड़ के जा रही हूं तो उसने मेन रोड पर सामान रखा अपना

12
00:00:59,200 --> 00:01:03,360
फिर कॉल किया मुझे वापस घर आई वो घरा के

13
00:01:03,360 --> 00:01:07,520
मतलब मां आप नीचे आओ एक बार करके मैंने कहा क्या हुआ तो बोली मैं कुछ भूल

14
00:01:07,520 --> 00:01:11,600
गई हूं आप आओ नीचे तो मैंने कहा भेज रही हूं किसी के साथ मुझे

15
00:01:11,600 --> 00:01:16,240
भी स्कूल जाना है लेट हो रही है तो बोली नहीं आप आओ फिर नीचे गई तो उसने

16
00:01:16,240 --> 00:01:20,720
गले लगाया मुझे और कहा अपना ध्यान रखना

17
00:01:20,720 --> 00:01:23,120
और

18
00:01:23,120 --> 00:01:27,120
बस लव यू मां करके वो वापस निकल गई मैं समझ ही नहीं पाई थी इतने

19
00:01:27,120 --> 00:01:31,200
दिन बाद ऐसे मतलब इतना करते जा रही थी और आज फिर से वापस आके ये

20
00:01:31,200 --> 00:01:35,200
कैसे गला गले लगा रही है। मैंने पूछा तो बोलती है आपकी शिकायत रहती ना आजकल

21
00:01:35,200 --> 00:01:39,200
मैं आपसे बात नहीं करती हूं करके इसलिए मैं ट्रिप में जा रही हूं। दो-तीन दिन तक

22
00:01:39,200 --> 00:01:43,280
आऊंगी नहीं ना इसलिए करके मैं आपको फिर से मिलने आई थी घर

23
00:01:43,280 --> 00:01:47,360
के और मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वो

24
00:01:47,360 --> 00:01:51,680
पूरी तरह छोड़ के जाने की तैयारी में।

25
00:01:51,680 --> 00:01:56,560
फिर फोन पर दो दिन तक नॉर्मल कांटेक्ट में रही। 1 दिसंबर को

26
00:01:56,560 --> 00:02:00,800
बात हुई थी उससे सुबह कि हां मै ट्रिक में जा रही हूं कर फिर कॉलेज

27
00:02:00,800 --> 00:02:04,800
में उसने उसके पहले से ही उसने एक मेल आईडी से मेल करना चालू किया

28
00:02:04,800 --> 00:02:06,960
कॉलेज में मेरी तरफ से कि ये वो मेरा मेल

29
00:02:06,960 --> 00:02:11,200
आईडी है कि मैं अपनी बेटी को घर पर बुला रही हूं करनी

30
00:02:11,200 --> 00:02:15,200
उसी मेल आईडी को वो बार-बार ट्राई करती थी कि कॉलेज वालों को हॉस्टल वालों को

31
00:02:15,200 --> 00:02:19,280
मैसेज करती थी उससे कि मैं अपनी बेटी को घर बुला रही हूं तो परमिशन चाहिए करके

32
00:02:19,280 --> 00:02:23,280
तो दो चार बार उसी परमिशन से उसी मेल से मेल

33
00:02:23,280 --> 00:02:27,360
करके घर पर आई भी थी और कॉलेज वालों ने ऑब्जेक्शन नहीं दिया था उस पर।

34
00:02:27,360 --> 00:02:31,440
तो उस दिन भी सुबह 7:30 बजे मां का मतलब मेरी

35
00:02:31,440 --> 00:02:35,520
तरफ से मेल किया उसने कॉलेज को कि 7:30 बजे मैं बुला रही हूं करके। फिर उसका टाइमिंग थोड़ा सा

36
00:02:35,520 --> 00:02:39,600
आगे पीछे करके फिर से मेल किया और कॉलेज वालों को मेल मिल गया मां की तरफ से

37
00:02:39,600 --> 00:02:43,840
कि जा सकती है वो घर। और फिर वहां

38
00:02:43,840 --> 00:02:48,160
से निकली। फिर जो लेडी उसको लेने आई थी उसके साथ जाके कहीं

39
00:02:48,160 --> 00:02:52,240
पर उसने रजिस्टर पोस्ट किया सारे पुलिस स्टेशंस में कि मैं अपनी मर्जी से जा

40
00:02:52,240 --> 00:02:56,240
रही हूं। मैं 18 साल की हो गई हूं और इस ज्ञान को फॉलो करती हूं

41
00:02:56,240 --> 00:03:00,320
और मैं मुझे मेरी मां से प्रोटेक्शन चाहिए करके

42
00:03:00,320 --> 00:03:04,560
वहां आसपास के जितने भी तीन चार पुलिस स्टेशन थे सब में उसने रजिस्टर पोस्ट

43
00:03:04,560 --> 00:03:08,560
किया और मेल भी किया और फिर उसकी कॉपी भी उसने साथ में रखी और फिर रात

44
00:03:08,560 --> 00:03:12,640
को 9:00 बजे की ट्रेन से वो दिल्ली पहुंच गई और उसका यह

45
00:03:12,640 --> 00:03:16,960
कहना है पुलिस वालों को कि मैं अपनी मर्जी से आई हूं और जनरल कंपार्टमेंट

46
00:03:16,960 --> 00:03:20,960
में बैठ के आई हूं जबकि दो दिन का सफर था पूरा उसके

47
00:03:20,960 --> 00:03:22,000
Google अकाउंट पे कुछ

48
00:03:22,000 --> 00:03:26,240
फोटो फोटो जो मिली है उसमें दिख रहा है कि बहुत सारा सामान उसके पास है तो उसका अकेले

49
00:03:26,240 --> 00:03:30,320
का नहीं है। तो ये चीजें भी बाद में समझ में आई मुझे

50
00:03:30,320 --> 00:03:34,320
और सारे रास्ते वो बिल्कुल कांटेक्ट में नहीं थी। कितनी बार कॉल करो तो फोन

51
00:03:34,320 --> 00:03:38,400
में चार्जिंग नहीं है। फोन मुझे कहीं डिपॉजिट करना पड़ रहा है ऐसे वैसे करके और दो दिन

52
00:03:38,400 --> 00:03:42,800
पहले उसने फ्रेंड्स के साथ जाके कुछ फोटो ली थी कहीं मॉल में जाके और वो फोटो

53
00:03:42,800 --> 00:03:46,800
मुझे उस दिन भेजती है कि देख के आप निश्चिंत हो जाओ कि मैं मतलब मजे कर

54
00:03:46,800 --> 00:03:50,960
रही हूं फ्रेंड्स के साथ करके। बस उसके अलावा बात नहीं की उसने

55
00:03:50,960 --> 00:03:55,360
पूरे दो दिन का सफर होता है कोयंबतूर से डेली तो

56
00:03:55,360 --> 00:03:59,360
दिल्ली पहुंच गई थी शायद उस समय मैंने कॉल किया था तो

57
00:03:59,360 --> 00:04:03,360
किसी वो साथ में जो लेडी थी उसने फोन उठाया था शायद उसने कहा माताजी

58
00:04:03,360 --> 00:04:07,520
करके उसने बात की तो मैं एकदम दंग रह गई ये फ्रेंड्स के साथ गई है तो माताजी वाला

59
00:04:07,520 --> 00:04:11,520
शब्द तो कहां से आ रहा है तो मैंने पूछा आप कौन तो उसने

60
00:04:11,520 --> 00:04:15,840
तुरंत फोन काट दिया फिर मैं एकदम परेशान हो गई और मैंने लगातार

61
00:04:15,840 --> 00:04:19,920
15 20 बार कॉल किया तो रिसीव ही नहीं वो लोग सोच में पड़

62
00:04:19,920 --> 00:04:23,920
गए कि अब क्या करें इधर? फिर 15 20 बार कॉल जाने के बाद प्रीटी ने

63
00:04:23,920 --> 00:04:27,920
मैसेज किया कि मैं कॉलेज अभी पहुंची हूं। यहां पर सर्टिफिकेट डिस्ट्रीब्यूट कर रहे

64
00:04:27,920 --> 00:04:32,240
हैं। सामान मेरे हाथ में है तो मैं आपको आधे घंटे बाद कॉल करूंगी घर में। मतलब

65
00:04:32,240 --> 00:04:36,560
इतनी अच्छी तरह वो झूठ बोलने में माहिर हो गई थी। तब तक बड़ी

66
00:04:36,560 --> 00:04:37,360
बड़ी शांति

67
00:04:37,360 --> 00:04:41,680
से मतलब कि सामने वाले को बिल्कुल भी शक हुए बिना झूठ बोल रही थी वो।

68
00:04:41,680 --> 00:04:45,760
तो आधे घंटे बाद उसने कॉल किया। एकदम नॉर्मल तरीके से बात किया कि बहुत मजा आया।

69
00:04:45,760 --> 00:04:49,840
हम लोग ट्रिप में मजे करके आए हैं और सर्टिफिकेट्स दे रहे थे इसलिए फिर मैंने

70
00:04:49,840 --> 00:04:54,000
कहा ये माताजी करके किसने बात की तो बोली कि माताजी

71
00:04:54,000 --> 00:04:58,080
तो किसी ने बोला नहीं आपको ऐसा लगा तो मैं परेशान

72
00:04:58,080 --> 00:05:02,080
हो गई कि मुझे सुनाई तो दिया और बेटी इतने आराम से बात कर रही तो शायद मुझे

73
00:05:02,080 --> 00:05:06,080
गलत सुनाई दिया या फिर यह मेरा वहम है। वहम तो हो नहीं सकता

74
00:05:06,080 --> 00:05:10,400
क्योंकि मैंने सुना तो है इतना तो पक्का है। तो फिर एक बार बेटी पर भरोसा

75
00:05:10,400 --> 00:05:14,560
कर ही लेती हूं करके मैं ठीक है करके फोन रख दिया मैंने लेकिन बेचैनी

76
00:05:14,560 --> 00:05:18,640
हो ही रही थी कि कुछ गलत हो रहा है। फिर रात को 9:30 पौ:45 के

77
00:05:18,640 --> 00:05:22,640
आसपास मैंने कॉल किया उसको तो नॉर्मल तरीके से उसने बात की। मैंने कहा

78
00:05:22,640 --> 00:05:26,800
वीडियो कॉल रिसीव कर। तो बोली कि इस हॉस्टल में सब लोग सो रहे हैं।

79
00:05:26,800 --> 00:05:30,800
थके हुए हैं। लाइट बंद है तो मैं भी बात नहीं कर सकती। मैंने कहा बाहर आके बात कर लेकिन

80
00:05:30,800 --> 00:05:34,960
तेरे को बात करना पड़ेगा। तो फिर उसने तुरंत वीडियो कॉल रिसीव किया।

81
00:05:34,960 --> 00:05:39,040
बोला कि फिर मैंने देखा कि वो हॉस्टल का रूम नहीं था। पीछे कुछ पर्दा

82
00:05:39,040 --> 00:05:43,120
दिख रहा था जो वहां का नहीं था वो। फिर नॉर्मल तरीके से

83
00:05:43,120 --> 00:05:47,280
ही बात किया। फिर मैंने फोन रख दिया और मुझे चैन ही नहीं पड़ रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है।

84
00:05:47,280 --> 00:05:52,480
फिर मैंने उससे कहा कि लोकेशन शेयर कर अपना कहां पर है? तो उसने

85
00:05:52,480 --> 00:05:56,480
अब वो परेशान हो गई कि दिल्ली में है तो लोकेशन कैसे शेयर करेंगे। फिर

86
00:05:56,480 --> 00:06:00,560
उसने अपने फ्रेंड से बात करने की कोशिश की। लोकेशन लेने की कोशिश की। वो सब कुछ

87
00:06:00,560 --> 00:06:04,560
हो नहीं पाया। फिर उसने Google मैप से लोकेशन निकाल के शेयर किया। WhatsApp लोकेशन

88
00:06:04,560 --> 00:06:08,560
ना शेयर करके Google मैप से कॉलेज का लोकेशन शेयर किया। फिर मैंने उसको कॉल

89
00:06:08,560 --> 00:06:12,640
किया और कहा कि तू कॉलेज में तो है नहीं इतना मुझे पता है। कहां है बता वरना

90
00:06:12,640 --> 00:06:16,720
मैं अभी आधी रात को निकल के कॉलेज जा रही हूं और तुझे पता है कि कॉलेज कितना दूर है और तेरी

91
00:06:16,720 --> 00:06:20,800
मां अकेली फिर उसने बताया कि मैं दिल्ली आई हूं।

92
00:06:20,800 --> 00:06:24,800
तो मुझे लगा कि किसी प्रोग्राम अटेंड करने के लिए मैं

93
00:06:24,800 --> 00:06:29,680
मना करती हूं। इसलिए वो दिल्ली गई है और मैंने डांटा उसको अच्छे से और

94
00:06:29,680 --> 00:06:33,840
कहा कि तू घर आ बेटी। फिर मैं तेरे को बताती हूं कि झूठ बोलने का मतलब क्या होता है। तू

95
00:06:33,840 --> 00:06:37,920
क्या-क्या कर रही है। मुझसे झूठ बोल के देखती हूं मैं भी। फिर मैंने अपनी दीदी लोगों को

96
00:06:37,920 --> 00:06:42,080
फोन लगाया। किसी ने रिसीव नहीं किया। फिर भांजी ने रिसीव करके कहा कि वह अपनी मर्जी

97
00:06:42,080 --> 00:06:46,080
से आई है यहां। मैंने कहा बताना तो चाहिए था कि आई है

98
00:06:46,080 --> 00:06:50,080
तुझे पता है कि मैं परेशान होऊंगी उसके लिए। तो तब भी यह नहीं बताया कि

99
00:06:50,080 --> 00:06:54,320
वो पूरी तरह आ गई। मैंने कहा तुम सब से मैं बाद में बात करूंगी। पहले बेटी

100
00:06:54,320 --> 00:06:58,800
से तो समझ लो कि कर क्या रही है वो अपनी पढ़ाई छोड़ के। घर आ जाए फिर बात करती हूं उससे।

101
00:06:58,800 --> 00:07:03,040
फिर अगले दिन सुबह मुझे मेल आता है 5:30 बजे कि मां

102
00:07:03,040 --> 00:07:07,600
आपको बता के आती तो आप आने नहीं देते मुझे। इसलिए मैं अपनी मर्जी से आ गई हूं

103
00:07:07,600 --> 00:07:11,600
और मैंने सुबह-सुबह खोला नहीं था। देख तो लिया था लेकिन खोला नहीं था

104
00:07:11,600 --> 00:07:15,920
क्योंकि मुझे स्कूल जाने की जल्दी थी और मुझे लग रहा था कि

105
00:07:15,920 --> 00:07:20,000
थोड़ा सा अपना कुछ एक्सप्लेनेशन दे देगी वो समझा देगी मुझे

106
00:07:20,000 --> 00:07:24,160
तो मेरा गुस्सा कम हो जाएगा। फिर उसके बाद घर आएगी तो मैं उतना डांटूंगी नहीं उसको। इसलिए वो मेल

107
00:07:24,160 --> 00:07:28,160
कर रही हूं। फिर जब स्कूल जाके थोड़ा सा फ्री हुई तब मैंने मेल खोल के देखा तो

108
00:07:28,160 --> 00:07:32,320
उसमें लिखा था कि आप हॉस्टल से मेरा सामान ले आना। मैं समझ ही नहीं पाई कि

109
00:07:32,320 --> 00:07:36,400
हॉस्टल से सामान लाने की बात क्यों कर रही है ये? दो-तीन बार मेल पढ़ा तब जाकर

110
00:07:36,400 --> 00:07:40,480
मुझे एहसास हुआ कि यह पूरी तरह छोड़कर चली गई है और उसमें लिखा

111
00:07:40,480 --> 00:07:44,720
है कि मैं अपने डिसीजन खुद ले सकती हूं। मैं अब 18 साल की हो गई हूं

112
00:07:44,720 --> 00:07:48,720
और अब अपना ध्यान रखना और यहां मैं अपना ध्यान रखूंगी और अब ये रास्ता

113
00:07:48,720 --> 00:07:52,880
मेरा लाइफ टाइम के लिए यही हूं। ये चीजें फिर समझ

114
00:07:52,880 --> 00:07:57,120
में आई। तो मैंने तुरंत स्कूल में मतलब कुछ बहाना बना के मैं घर आई कि तबीयत

115
00:07:57,120 --> 00:08:01,200
ठीक नहीं है। फिर घर आकर मैंने कॉल किया उसको कि तू बताए बिना चली गई

116
00:08:01,200 --> 00:08:05,280
तो क्या हो गया? मैं तुझे वापस ले आऊंगी। ऐसे थोड़ी ना कुछ तो अभी

117
00:08:05,280 --> 00:08:10,640
लाइफ को समझी ही नहीं है। पढ़ाई करते-करते निकल गई है तो फिर ऐसे

118
00:08:10,640 --> 00:08:14,640
ऐसे तो मैं जाने नहीं दूंगी तुझे। फिर मैंने कहा

119
00:08:14,640 --> 00:08:18,800
कि ले आऊंगी वापस जो उसको कहा उस बात को लेके अमोल

120
00:08:18,800 --> 00:08:23,520
ने उसको गाइड किया कि तू वहां दिल्ली पहुंच ही गई थी। तो

121
00:08:23,520 --> 00:08:27,520
डीसीपी को साउथ वेस्ट दिल्ली के डीसीपी को उसने मेल करवाया कि मेरी

122
00:08:27,520 --> 00:08:31,680
मां को मैंने बता दिया था तरीके से कि मैं अपनी मर्जी से आई हूं। उसके बाद मां मुझे धमकी

123
00:08:31,680 --> 00:08:36,080
दे रही थी कि वापस ले जाएगी तो मुझे आपसे प्रोटेक्शन चाहिए और मैंने सारे पुलिस स्टेशनंस

124
00:08:36,080 --> 00:08:40,080
में इन्फॉर्म कर दिया था कि मैं अपनी मर्जी से जा रही हूं। तो ये चीज

125
00:08:40,080 --> 00:08:44,160
मैं फिर समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या करूं। मैं अपनी बहन से

126
00:08:44,160 --> 00:08:48,480
बात की। फिर रात को मैंने लैपटॉप खोल के देखा कि उसकी चैटिंग उसमें WhatsApp

127
00:08:48,480 --> 00:08:52,800
चैट खुली हुई थी उसमें। तो मैंने इसके पहले भी देखा था कि भाई जी आप नाराज

128
00:08:52,800 --> 00:08:57,600
हैं क्या मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं। ऐसा चैट मैंने देखा था जब वो घर पे थी।

129
00:08:57,600 --> 00:09:01,680
तो देखूं तो सही कि चल क्या रहा है। तो फिर मैंने देखा तो WhatsApp तो बंद था

130
00:09:01,680 --> 00:09:05,680
उसमें लेकिन Google अकाउंट उसका खुला हुआ था। तो उसमें मैंने देखा कि दो-ती घंटे पहले

131
00:09:05,680 --> 00:09:09,760
ही उसने पीसीपी को मेल किया कि मां से मुझे प्रोटेक्शन चाहिए

132
00:09:09,760 --> 00:09:13,840
और मां मुझे धमकी दे रही है। और फिर मैंने अपनी बहनों

133
00:09:13,840 --> 00:09:18,000
से बात की कि गलत हो रहा है। यह सब कुछ आप सही नहीं कर रहे हो। उसको

134
00:09:18,000 --> 00:09:22,560
जल्दी से घर भेज दो वरना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमारी कोई इसमें

135
00:09:22,560 --> 00:09:26,640
इंटरफेरेंस नहीं है। आपको भी हमने ज्ञान दिया है। अगर वह ज्ञान

136
00:09:26,640 --> 00:09:30,800
समझी है तो वो उसकी अच्छाई है। आप समझ नहीं पाए ये आपकी कमी है। ज्ञान

137
00:09:30,800 --> 00:09:34,960
तो हम सबको देते हैं तो हम इसके जिम्मेदार कैसे हुए? ज्ञान तो आपको भी दिया। फिर अगर हमारे

138
00:09:34,960 --> 00:09:38,720
ज्ञान की वजह से वो गई है तो आपको भी चले जाना चाहिए था। आप नहीं गई मतलब

139
00:09:38,720 --> 00:09:42,720
आप हम जिम्मेदार नहीं है। आपकी बेटी जिम्मेदार है। वो अपनी मर्जी से गई। ये

140
00:09:42,720 --> 00:09:46,720
उनका तर्क था। फिर मैंने बहुत उनसे बहस की। तब

141
00:09:46,720 --> 00:09:50,880
जाकर उन्होंने कहा कि आप चले जाओ दिल्ली। आपकी बेटी मानती है तो ले आओ। हम

142
00:09:50,880 --> 00:09:54,960
कुछ नहीं कर सकते। फिर मैं अगले दिन दिल्ली पहुंची। 5 तारीख को

143
00:09:54,960 --> 00:09:59,040
5 तारीख को आधी रात को 2:00 बजे मैं वहां पर आश्रम पहुंची। लेकिन उन्होंने कहा कि

144
00:09:59,040 --> 00:10:03,120
अभी हम मिलने नहीं देंगे आपकी बेटी को। रूल्स हैं हमारे आश्रम के कुछ तो हम सुबह

145
00:10:03,120 --> 00:10:07,360
ही मिलने देंगे। फिर दो दिन तक मैं ना सो पाई ना खा पाई।

146
00:10:07,360 --> 00:10:11,520
फिर रात को 2:00 बजे से लेकर सुबह तक का मैं इंतजार कर रही थी। 7:00

147
00:10:11,520 --> 00:10:15,600
बजे उन्होंने बेटी से बेटी को सामने लाया और मैं देख के दंग

148
00:10:15,600 --> 00:10:19,600
रह गई। उसके चेहरे पर कोई कोई इमोशन नहीं है। कोई फीलिंग नहीं है। बस

149
00:10:19,600 --> 00:10:23,600
एकदम क्लाश की तरह खड़ी है वो मेरे सामने। मैं देख के कि

150
00:10:23,600 --> 00:10:27,840
बेटी क्या हुआ? क्यों यहां आई है? अभी तो अच्छे से मिल के आई थी तू तो

151
00:10:27,840 --> 00:10:32,320
बस यही मेरा रास्ता है। आप बस इस जन्म के मां-बाप हो। आपके साथ

152
00:10:32,320 --> 00:10:36,320
मेरा हिसाब किताब खत्म हो गया। मैंने कहा ऐसे कैसे हिसाब किताब खत्म हो गया?

153
00:10:36,320 --> 00:10:40,480
तू 18 साल की हुई है तब तक मैं पाली हूं। तो नहीं इतना ही आपका काम

154
00:10:40,480 --> 00:10:44,480
था। आपका आपकी जिम्मेदारी थी मुझे पालना। और मैं

155
00:10:44,480 --> 00:10:48,480
अब आपकी बात नहीं सुनूंगी। मुझे इस रास्ते पर आना है

156
00:10:48,480 --> 00:10:54,000
और मैं आ गई हूं और आप कुछ नहीं करोगे अब।

157
00:10:54,000 --> 00:10:58,080
और इतना उसके सामने मैं बैठ के रोना करना कर रही हूं। उसका हाथ पकड़ने की

158
00:10:58,080 --> 00:11:02,960
कोशिश कर रही हूं। छूने भी नहीं दे रही थी मुझे। एकदम लाश की जिंदा लाश की तरह एक रोबोट

159
00:11:02,960 --> 00:11:06,960
की तरह मेरे सामने बैठी थी कि उसको कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था। मैंने कहा एक बार

160
00:11:06,960 --> 00:11:11,120
घर चल ले समझ लेते हैं कि क्या परेशानी है। मैं तेरे को कहीं रोक-टोक नहीं करूंगी।

161
00:11:11,120 --> 00:11:15,200
तेरे को जो करना है करना लेकिन घर में रह के करना दूसरी जगह नहीं और तेरे को पता है मैं

162
00:11:15,200 --> 00:11:21,200
तेरे में ही जी रही हूं

163
00:11:26,080 --> 00:11:30,720
तेरे बिना मैं जी नहीं पाऊंगी तू चल ले बेटी एक बार करके बहुत मैंने उसे

164
00:11:30,720 --> 00:11:34,720
मेहनत की लेकिन कहीं उसको फर्क नहीं पड़ रहा था एकदम

165
00:11:34,720 --> 00:11:38,720
लाश की तरह बैठी थी मेरे सामने मैं पूछ रही हूं उसको कि हुआ क्या है

166
00:11:38,720 --> 00:11:42,720
तेरे को बिल्कुल तेरे इतना जो तू मुझे ले इतना इमोशनल

167
00:11:42,720 --> 00:11:46,960
रहती थी तो बोलती है ये सब मोह माया है। मुझे मोह माया के जाल में नहीं फंसना है। मुझे

168
00:11:46,960 --> 00:11:51,040
अब भगवान मिल गए हैं। मैं भगवान के रास्ते पर आ गई हूं। तो अब और

169
00:11:51,040 --> 00:11:55,200
कुछ नहीं चाहिए मुझे। सही जगह पहुंची हूं। और मुझे पता है आप भी देखना एक दिन

170
00:11:55,200 --> 00:11:59,440
में मुझ पर गर्व करोगे कि आपको भी यहां आना है। आप भी बोलोगे कि बेटी तूने

171
00:11:59,440 --> 00:12:04,960
सही काम किया। तेरी वजह से मैं भी सही रास्ते पर आई हूं। करके आप भी बोलोगे देखना।

172
00:12:04,960 --> 00:12:09,120
तो फिर बहुत उसको समझाने की कोशिश की। बिल्कुल मारने को तैयार ही नहीं

173
00:12:09,120 --> 00:12:13,200
थी। फिर मैं बाहर से निकल गई। फिर मैंने कहा कि मतलब

174
00:12:13,200 --> 00:12:17,360
अब मुझे चीजें क्लियर हो रही थी कि जितने भी केसेस आए थे वीरेंद्र देव दीक्षित

175
00:12:17,360 --> 00:12:21,440
के आश्रम में वो सारे सही थे। इन लोगों का कहना है कि वो सब

176
00:12:21,440 --> 00:12:25,520
तब मैंने ध्यान नहीं दिया था कि चलो कौन इन झंझट में पड़े कि बहनों से

177
00:12:25,520 --> 00:12:29,520
कौन बहस करे। उनकी सोच है तो वो अपने घर में बैठी हुई है तो कोई नुकसान नहीं

178
00:12:29,520 --> 00:12:33,680
है। ठीक है। ज्ञान को कुछ भी भगवत गीता के श्लोक वगैरह कर रहे हैं तो करने दो। उसमें कोई

179
00:12:33,680 --> 00:12:37,680
गलत नहीं। तो मैं कभी उस झंझट में पड़ी ही नहीं। लेकिन अब समझ में आ रहा था

180
00:12:37,680 --> 00:12:41,680
कि जितने मां-बाप परेशान हो रहे थे वीरेंद्र देव दीक्षित की संस्था की वजह

181
00:12:41,680 --> 00:12:46,000
से वही हाल आज मेरा है और फिर पुलिस स्टेशन में भी मैंने वही कंप्लेंट

182
00:12:46,000 --> 00:12:50,000
दी कि यह संस्था पहले से बदनाम है और इस आदमी ने मतलब बहुत गलत किया

183
00:12:50,000 --> 00:12:54,080
है लड़कियों के साथ और आज वो भागा हुआ है तो मेरी बेटी 18

184
00:12:54,080 --> 00:12:58,240
साल की जरूर हुई है लेकिन वो अपनी समझ से समझदारी से यहां आई

185
00:12:58,240 --> 00:13:03,200
है। इस बात की छानबीन की जाए और न्याय दिलाया जाए।

186
00:13:03,200 --> 00:13:07,280
तीन दिन तक मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काटी हूं और फिर वहां से एक एसआई साथ

187
00:13:07,280 --> 00:13:11,280
में आई थी और उन्होंने बस पूछताछ

188
00:13:11,280 --> 00:13:15,360
की तो ये लोग सारे घेर के बैठ गए। मेरी बेटे को बोलते हैं कि आप बस स्टेटमेंट

189
00:13:15,360 --> 00:13:19,440
लेने आई हो तो स्टेटमेंट ले चले जाओ। आपको काउंसिल करने का कोई अधिकार नहीं है। वो

190
00:13:19,440 --> 00:13:23,520
समझा रही थी कि आपकी मां अगर मतलब परेशान है तो आप चले जाओ

191
00:13:23,520 --> 00:13:24,160
एक बार मां के

192
00:13:24,160 --> 00:13:28,160
पास। वहां रह के कर लेना। मां को समझा के आ जाना। तो सारी लेडीज वहां

193
00:13:28,160 --> 00:13:32,320
जितनी भी थी सब लोग घेर के खड़ी हो गई। उस एसआई को बोलती है कि आपको किसने हक

194
00:13:32,320 --> 00:13:36,560
दिया इससे बात करने का? वो स्टेटमेंट दे रही थी आप ले चले जाओ। फिर सब

195
00:13:36,560 --> 00:13:40,720
लोग लेडीज जो वहां पर थी सबने बेटी के साथ रह के उससे

196
00:13:40,720 --> 00:13:44,960
स्टेटमेंट लिखवाया फिर से और वो स्टेटमेंट लेके सही वापस आ गई

197
00:13:44,960 --> 00:13:49,280
और यही है कि 18 साल के ऊपर की हो गई है तो हम कुछ नहीं कर सकते।

198
00:13:49,280 --> 00:13:53,360
उसके बाद जो मेरी लड़ाई चालू हुई इन लोगों से कि क्या हुआ?

199
00:13:53,360 --> 00:13:57,600
सारा WhatsApp चैट इनका Google अकाउंट सारी चीजें मैंने निकाली तो

200
00:13:57,600 --> 00:14:01,680
धीरे-धीरे परतें खुलती गई कि कैसे कहां से शुरुआत हुई

201
00:14:01,680 --> 00:14:05,760
क्या उसने मेरी बेटी से बात की क्या-क्या कॉल रिकॉर्डिंग है क्या-क्या

202
00:14:05,760 --> 00:14:09,840
इनके वीडियोस हैं। क्या-क्या इनकी चार्ट है। सारी चीजें निकल निकली। तब

203
00:14:09,840 --> 00:14:14,080
मुझे समझ में आया कि कैसे मेरे ही आंखों के सामने मुझे

204
00:14:14,080 --> 00:14:18,640
पता चले बिना कैसे मेरी बेटी को अपने कंट्रोल में किया गया।

205
00:14:18,640 --> 00:14:22,640
फिर मुझे लगा कि चीजें तो सारी क्लियर है तो हम कोर्ट में

206
00:14:22,640 --> 00:14:26,800
एप्लीकेशन देंगे और तुरंत ही मेरी बेटी मेरे हाथ में आ जाएगी। तो मैंने दिल्ली

207
00:14:26,800 --> 00:14:31,040
में कोई मेरी फ्रेंड के फ्रेंड है उनके थ्रू मैंने रिट

208
00:14:31,040 --> 00:14:35,040
पिटीशन डाला दिल्ली हाई कोर्ट में लेकिन वो केस आज तक चलते ही आ

209
00:14:35,040 --> 00:14:39,040
रहा है और दो साल से उसमें कोई सुनवाई नहीं थी। शुरू-शुर में दो-तीन सुनवाई हुई थी

210
00:14:39,040 --> 00:14:39,540
उसमें

211
00:14:39,520 --> 00:14:43,600
जिसमें मुझे परमिशन दी गई थी कि मैं बेटी से मिल सकती हूं। बेटी

212
00:14:43,600 --> 00:14:47,760
बिल्कुल पहले दिन तो पुलिस प्रोटेक्शन के साथ वो डालती हूं और वही

213
00:14:47,760 --> 00:14:51,840
वही उसका हाल की लाश की तरह है और मैं बगल में उसके खड़ी हूं। मैं उसकी

214
00:14:51,840 --> 00:14:55,840
तरफ देख रही हूं और वो मेरी तरफ देखने को भी तैयार नहीं है। उसको छूने की

215
00:14:55,840 --> 00:14:59,920
कोशिश कर रही हूं। एकदम हाथ मतलब छूने भी नहीं दे रही। एकदम पलट के

216
00:14:59,920 --> 00:15:04,080
खड़ी हो गई कि हाथ नहीं लगाना मुझे। और मैं सामने भी उसके खड़ी हूं

217
00:15:04,080 --> 00:15:08,080
पुलिस वहां कोर्ट में तो पुलिस वाले बोल रहे हैं कि मैडम आप आप

218
00:15:08,080 --> 00:15:12,240
हमको हमारी ड्यूटी करने दीजिए। आपकी बेटी नहीं चाहती कि आप उसको देखूं। तो मैं उसको

219
00:15:12,240 --> 00:15:16,400
देख भी नहीं पा रही थी। फिर जज ने भी

220
00:15:16,400 --> 00:15:20,560
कहा कि आप बात करो अपनी मां से पांच मिनट तो बोलती है कि मेरी इच्छा नहीं है मां

221
00:15:20,560 --> 00:15:24,800
से बात करने की। मैं नहीं बात करना चाहती और मेरी मर्जी के खिलाफ कोई मुझे बात भी नहीं करवा

222
00:15:24,800 --> 00:15:28,880
सकता। तो एक चीज उस पर रटा दी गई है कि मैं मेजर हूं और अपने डिसीजन

223
00:15:28,880 --> 00:15:32,880
खुद लूंगी और कोई इसमें इंटरफेयर नहीं कर सकता। फिर जज

224
00:15:32,880 --> 00:15:37,680
ने चेंबर में बुलाकर उससे बात की। उसको समझाया दो-तीन पेशी के बाद

225
00:15:37,680 --> 00:15:41,920
तो उसको मानना पड़ा कि वो मुझसे मिलेगी।

226
00:15:41,920 --> 00:15:45,920
अ हर दिन 45 मिनट मिलने की परमिशन दी गई थी

227
00:15:45,920 --> 00:15:50,080
और किसी के इंटरफेरेंस के बिना मैं उससे बात करूं ये परमिशन मिली थी। तो

228
00:15:50,080 --> 00:15:54,240
पहले दिन तो उन्होंने मिलने ही नहीं दिया और मतलब

229
00:15:54,240 --> 00:15:54,740
इंटरफेयर

230
00:15:54,720 --> 00:15:58,720
कर रहे थे बार-बार बीच में आना वीडियो लेना कि मेरी बेटी को यह ध्यान

231
00:15:58,720 --> 00:16:02,720
रहे कि उन सबकी नजर है बेटी पर तो वो आराम से बात भी नहीं कर पा रही थी। फिर

232
00:16:02,720 --> 00:16:06,800
मैंने थोड़ा सा जोर से बोला कि आप इंटरफेयर कर रहे हैं तो मैं फिर से कंप्लेंट

233
00:16:06,800 --> 00:16:11,200
करूंगी। ऑर्डर में क्लियर लिखा हुआ है कि किसी के इंटरफेरेंस के बिना मैं बेटी से मिलूंगी।

234
00:16:11,200 --> 00:16:15,200
तो फिर उन्होंने अगले दिन से सामने तो नहीं दिखे लेकिन ऐसी जगह पर

235
00:16:15,200 --> 00:16:19,280
हमको बिठाए थे। वहां पर सारे पर्दे लगे थे, ग्रिल्स लगे थे, खिड़की थी।

236
00:16:19,280 --> 00:16:23,280
तो हर जगह से हर कोई नोटिस कर सकता है कि हम क्या बात कर रहे

237
00:16:23,280 --> 00:16:27,440
हैं। तो हम सबकी नजर में ही बीच में बैठे थे। मैंने कहा छत

238
00:16:27,440 --> 00:16:31,520
पर जाकर बात कर लेते हैं। तो बोलती है छत पर भी नहीं जाऊंगी। मैं यहीं बैठूंगी। इसके अलावा

239
00:16:31,520 --> 00:16:35,520
बाहर एक कदम भी नहीं रखूंगी। तो फिर परमिशन हमको

240
00:16:35,520 --> 00:16:39,520
उतनी ही मिली। रोज मिल के आती थी जैसे 4:00 से पौ:45 बजे का

241
00:16:39,520 --> 00:16:43,600
मिलने का टाइम था। तो 4:00 बजे के 1 मिनट पहले भी अगर मैं वहां गेट के सामने खड़ी

242
00:16:43,600 --> 00:16:47,600
होती हूं, बेल बजाती हूं तो वो नहीं खुलेंगे। 4:00 बजे ही गेट खोलेंगे। और

243
00:16:47,600 --> 00:16:51,680
जैसे ही पौ:45 बजती थी मेरी बेटी उठकर खड़ी हो जाती थी कि आपका टाइम हो गया। अब

244
00:16:51,680 --> 00:16:55,680
निकलो अब तो जितनी देर पौन घंटा मैं उसके सामने कुछ भी

245
00:16:55,680 --> 00:17:00,160
समझाने की कोशिश करना रोना कुछ भी करती थी बचपन की यादें

246
00:17:00,160 --> 00:17:04,480
मतलब उसको याद दिलाना कि बेटी हम कितने अच्छे से रहते थे कितना तू मुझे मानती

247
00:17:04,480 --> 00:17:10,160
थी कितना हम दोनों मिलके स्ट्रगल किए हैं।

248
00:17:10,160 --> 00:17:14,240
कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था उसके बस वह ऐसे लाश की तरह बैठी रहती थी

249
00:17:14,240 --> 00:17:18,480
कान बंद करके जैसे कुछ भी उसको सुनना नहीं उनका कहना था कि

250
00:17:18,480 --> 00:17:22,560
मां के रूप में माया आएगी जो तुमको वापस ले जाने की कोशिश

251
00:17:22,560 --> 00:17:26,720
करेगी तुम अपने अपने आप में इतना स्ट्रांग रहना कि

252
00:17:26,720 --> 00:17:30,800
बस उस माया से तुम जीत जाओ तो उसको ये सिखाया गया कि मैं माया के

253
00:17:30,800 --> 00:17:34,960
रूप में आ रही हूं तो फिर बिल्कुल उसके कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था इतने

254
00:17:34,960 --> 00:17:39,120
दिन तक मैंने कोशिश की लगभग 14 15 दिन फिर उसके बाद कोर्ट से आर्डर आया

255
00:17:39,120 --> 00:17:43,200
कि आप एक हफ्ता रह सकती हैं वहां पर तो वहां रहने गई तो वहां

256
00:17:43,200 --> 00:17:47,280
की कहानी अलग है। मतलब मुझे फोन वहां उनके आश्रम के अंदर यूज़

257
00:17:47,280 --> 00:17:51,440
नहीं करने देना है और जिस रूम में रखे थे वहां पर ही रहना है और बेटी

258
00:17:51,440 --> 00:17:55,920
मेरे साथ नहीं सोएगी। दूसरे बेड पर सोएगी। मैं उसको छू भी नहीं सकती।

259
00:17:55,920 --> 00:17:59,920
वो भी ठीक है। मैंने मान लिया। फिर उसके बाद ऊपर जहां उनका

260
00:17:59,920 --> 00:18:04,000
आश्रम है मेन आश्रम वहां पर अगर बैठते थे तो छूने भी नहीं देना है। बहुत

261
00:18:04,000 --> 00:18:08,320
ठंडी थी उस समय। मतलब मैं ठंडी सहन नहीं होती है मुझे तो बहुत ज्यादा परेशान

262
00:18:08,320 --> 00:18:12,480
थी। एक दिन ऐसे ही बैठे-बैठे वह एकदम कंबल लपेट के बैठी थी। तो मैंने

263
00:18:12,480 --> 00:18:16,720
अपने पैर उसके कंबल में घुसाने की कोशिश की। तो इतनी जोर से उसने झिड़की

264
00:18:16,720 --> 00:18:20,960
दी मुझे कि क्या कर रहे हो आप? क्यों छू रहे हो मुझे करके? मैंने कहा बचपन

265
00:18:20,960 --> 00:18:24,960
से ये चलते आ रहा है कि हम दोनों एक कंबल में सोते हैं। तेरे पैर

266
00:18:24,960 --> 00:18:25,460
ठंडे

267
00:18:25,200 --> 00:18:29,200
होते हैं तो तू मेरे मतलब गर्म करने की कोशिश करती है। मेरे

268
00:18:29,200 --> 00:18:33,280
पैरों के नीचे दबा लेती है। हम ये करते ही हैं। तो आज क्या हो गया? तो मैं अभी भगवान

269
00:18:33,280 --> 00:18:37,600
के आस्त में हूं और आप मुझे छुओगे तो मेरे वाइब्रेशन खराब हो जाएंगे।

270
00:18:37,600 --> 00:18:41,760
यहां हम किसी को छूते नहीं हैं। तो आप दूर रहूं मुझसे। तो

271
00:18:41,760 --> 00:18:45,840
समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह भगवान है क्या है? क्या कहां मेरी

272
00:18:45,840 --> 00:18:50,480
बेटी फंस गई है। उसको मैं छू नहीं सकती। उसको मैं देख नहीं सकती।

273
00:18:50,480 --> 00:18:54,480
बहुत मतलब बुरा समय था।

274
00:18:54,480 --> 00:18:58,560
और वहां छत पर भी बेटी अकेली जा नहीं सकती। उसके दिमाग में यह भरा गया है

275
00:18:58,560 --> 00:19:02,560
कि जो बाहर के लोग हैं वो सारे दुर्योधन दुशासन है। तो इस

276
00:19:02,560 --> 00:19:06,800
चार दीवारी से इस तालों से अगर तू बाहर निकलेगी तो कोई भी तेरे को

277
00:19:06,800 --> 00:19:11,040
मतलब तेरे साथ गलत कर सकता है। तो छत पर भी अगर जाना है तो उनकी माताएं

278
00:19:11,040 --> 00:19:15,200
जो साथ में रहती है वो साथ में जाएगी। ग्राउंड फ्लोर पर भी जाना है तो माता

279
00:19:15,200 --> 00:19:19,280
साथ में जाएगी। मैंने कहा नीचे चलते हैं मेरे साथ चल दे। मैं हूं साथ में। तो बोलती

280
00:19:19,280 --> 00:19:23,440
है आपके साथ नहीं जाऊंगी। आपके साथ सेफ नहीं हूं मैं। माता साथ में चलेगी तभी

281
00:19:23,440 --> 00:19:27,520
जाऊंगी। और मैंने कहा ठीक है फिर मैं चली जाती हूं नीचे। तो उसको इतना अजीब

282
00:19:27,520 --> 00:19:31,680
लग रहा था कि आप अकेले नीचे चले जाओगे। नीचे मतलब अकेले कैसे जा सकते हो? कैसे

283
00:19:31,680 --> 00:19:35,840
सेफ हो? इतना डर उसके दिमाग में है कि मैं खुद भी अकेले नीचे नहीं जा सकती।

284
00:19:35,840 --> 00:19:40,000
मैंने कहा हम एक जगह से दूसरे एक स्टेट से दूसरे स्टेट दोनों ही गए

285
00:19:40,000 --> 00:19:40,500
हैं।

286
00:19:40,240 --> 00:19:44,240
अपनी नई दुनिया बताए हैं। कौन साथ था हमारे? कोई भी तो नहीं था और क्या

287
00:19:44,240 --> 00:19:48,400
बिगड़ा है हमारा? तो वो सारी चीजें वो भूल गई है। अब इतना डर उसके

288
00:19:48,400 --> 00:19:52,720
दिमाग में है कि कुछ नहीं हम अकेले कर सकते हैं। हम किसी ना किसी का हमको सपोर्ट

289
00:19:52,720 --> 00:19:56,880
हमेशा चाहिए। क्योंकि सगा भाई और सगा बाप भी दुर्योधन दुशासन

290
00:19:56,880 --> 00:20:01,120
होते हैं और रात को लाइट बंद करके

291
00:20:01,120 --> 00:20:05,200
नहीं सोते हैं वो लोग बोलते हैं कि सारे दुष्ट आत्माएं चारों तरफ

292
00:20:05,200 --> 00:20:09,280
रहती है तो वो कभी भी अटैक कर सकती है तो लाइट चालू करके ही सोना है जो पहले

293
00:20:09,280 --> 00:20:13,280
कभी ऐसे नहीं करती थी ये भी पढ़ा दिया गया कि सौगा भाई भी दुर्योधन

294
00:20:13,280 --> 00:20:17,360
दुशासन होता है बिल्कुल बिल्कुल किसी पर भी भरोसा नहीं कर सकते आप

295
00:20:17,360 --> 00:20:21,840
दुर्योधन दुशासन हर कोई होता है जो आदमी है वो दुर्योधन दुशासन

296
00:20:21,840 --> 00:20:25,840
है बस इनके गुरु के अलावा मैंने कहा फिर ये भी तो आदमी

297
00:20:25,840 --> 00:20:29,840
ही है तो बोलती है यह तो अष्ट देवों में से मतलब मुझसे फिर नहीं कहा कि अष्ट देवों में

298
00:20:29,840 --> 00:20:34,000
से हैं लेकिन ये उनके बोलती थी डिवाइन सोल है ये

299
00:20:34,000 --> 00:20:38,160
ये बहुत पवित्र आत्मा है और उनके फर्स्ट फ्लोर

300
00:20:38,160 --> 00:20:42,400
पर जो वहां के ओनर है भावना करके उनके पति जो रहते

301
00:20:42,400 --> 00:20:46,400
थे तो एक दिन फर्स्ट ग्राउंड फ्लोर

302
00:20:46,400 --> 00:20:50,640
से हम लोग सेकंड फ्लोर पर आ रहे थे और बीच में उनका आना हुआ तो ऐसे इसको

303
00:20:50,640 --> 00:20:54,640
गाइड कर दिया गया कि तुम उधर पलट जाओ और मेरी बेटी ऐसी जैसे ससुर को देख के बहू

304
00:20:54,640 --> 00:20:55,440
घूंघट में कैसे

305
00:20:55,440 --> 00:20:59,440
पलट जाती है कि जेठ का सामना नहीं करना है। ससुर का सामना नहीं करना है।

306
00:20:59,440 --> 00:21:03,520
बस एकदम पलट गई और उनको बोल दिया गया कि संस्कृति आ रही है तो आप

307
00:21:03,520 --> 00:21:08,000
पलट जाओ। तो फिर वो भी पलट गए। इधर ये भी पलट गई। मैंने कहा ये क्या है? मतलब

308
00:21:08,000 --> 00:21:12,240
रास्ते से वो आ रहे हैं। वो सीढ़ियां उतर रहे हैं और तुम सीढ़ियां चढ़ रहे हो। इतनी चौड़ी

309
00:21:12,240 --> 00:21:16,240
सीढ़ियां है। तो इसमें क्या प्रॉब्लम हो गई? तो बोलती है कि आदमी का सामना नहीं करना

310
00:21:16,240 --> 00:21:20,480
है और वह उसी बिल्डिंग में रहते हैं। उन्हीं को लाना ले जाना करते हैं। इनका खेल

311
00:21:20,480 --> 00:21:24,880
ही समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर चल क्या रहा है।

312
00:21:24,880 --> 00:21:29,120
आधी रात को 2:00 बजे उसको जगाते हैं। पूरा दिन बिजी रखते हैं। इतना

313
00:21:29,120 --> 00:21:33,520
काम देते हैं कि वो अपने आप में कुछ सोचने की ही टाइम उनको नहीं मिलती है कि हम

314
00:21:33,520 --> 00:21:37,840
क्या कर रहे हैं। हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं। बिल्कुल सोचने पर भी पाबंदी

315
00:21:37,840 --> 00:21:42,240
है। टाइम ही नहीं मिलता है। इतना बिजी रहते हैं तो फिर थक जाते हैं। फिर सो जाती हूं।

316
00:21:42,240 --> 00:21:46,240
बस वहां का माहौल पूरा ऐसे ही तालों में बंद रखे हैं उसको

317
00:21:46,240 --> 00:21:51,200
और अभी तो और भी ज्यादा पूरा पैक कर दिए हैं बिल्डिंग को

318
00:21:51,200 --> 00:21:55,280
कि कहीं कहीं से कोई घुस नहीं सकता। फिर

319
00:21:55,280 --> 00:21:58,880
क्या हुआ?

320
00:21:58,880 --> 00:22:03,040
मैं मिल नहीं पाई अपनी बेटी से और तरस गई और मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काट

321
00:22:03,040 --> 00:22:07,200
काट के भी थक गई। एनएचआरसी से थोड़ा सा काम आगे बढ़ते दिखा।

322
00:22:07,200 --> 00:22:11,360
मुझे अपनी बेटी की चिंता तो है ही साथ-साथ वह जितने बच्चों को और

323
00:22:11,360 --> 00:22:15,520
फंसा रहा है उसकी भी बहुत ज्यादा चिंता हो रही थी क्योंकि यह आदमी

324
00:22:15,520 --> 00:22:19,840
पूरे देश भर के स्कूल्स कॉलेजेस में जाकर प्रचार कर रहे हैं। क्या क्या

325
00:22:19,840 --> 00:22:23,360
किसी प्रकार से

326
00:22:23,360 --> 00:22:27,360
दैहिक शोषण भी वहां पर होता है बच्चों का जो जिनको ले जाया

327
00:22:27,360 --> 00:22:31,440
जाता है। ये एक ये कठिन प्रश्न है मेरा जो आपके

328
00:22:31,440 --> 00:22:35,440
लिए सुनने में मतलब आपको जवाब देना इसका थोड़ा आपके लिए कठिन होगा।

329
00:22:35,440 --> 00:22:39,760
मगर लोगों के जानने के लिए और समाज के लिए आवश्यक

330
00:22:39,760 --> 00:22:43,760
प्रश्न है। क्या किसी प्रकार से वहां पर जो जाने वाली जो लड़कियां है इनका

331
00:22:43,760 --> 00:22:47,760
दैहिक शोषण भी होता है। ऐसी कुछ जानकारी वीरेंद्र देव

332
00:22:47,760 --> 00:22:52,080
दीक्षित के बारे में तो सबको पता है ही कि वो क्या करते थे?

333
00:22:52,080 --> 00:22:56,240
आपकी जानकारी में क्या ऐसा कुछ आपको आशंका? वीरेंद्र दीक्षित से जुड़े हुए

334
00:22:56,240 --> 00:23:00,240
कई मामले हैं। आपने बताया कोर्ट केसेस भी हुए वो भागे भी और

335
00:23:00,240 --> 00:23:04,240
बाद में अभी की क्या स्थिति वीरेंद्र दीक्षित की डेथ हो चुकी है। वीरेंद्र देव

336
00:23:04,240 --> 00:23:08,400
दीक्षित तो खत्म हो गए हैं 2022 में और वो जानकारी बाहर नहीं निकाली

337
00:23:08,400 --> 00:23:12,720
गई थी क्योंकि उन्होंने कहा था कि वो इसी शरीर से सबको सतयुग में ले जाएंगे।

338
00:23:12,720 --> 00:23:14,000
अब तो फिर बाद में ये

339
00:23:14,000 --> 00:23:18,000
जानकारी आई कैसे वो तो उनके साथ जो

340
00:23:18,000 --> 00:23:22,240
लोग थे उन्होंने ही बताया कि मतलब कुछ लोग जो साथ में थे उनको

341
00:23:22,240 --> 00:23:26,320
समझ में आया कि ऐसा कुछ है ना कि कोई

342
00:23:26,320 --> 00:23:30,400
डेथ सर्टिफिकेट वगैरह भी मिल गया है अभी दीक्षित का। जी शुरुआत

343
00:23:30,400 --> 00:23:34,560
ऐसे हुई कि जो लोग उनके साथ थे वह मान रहे थे कि ये ये इनहीं में भगवान

344
00:23:34,560 --> 00:23:38,560
है और इसी शरीर से हम सबको सतयुग में लेकर जाएंगे। जब वो खत्म

345
00:23:38,560 --> 00:23:42,560
हो गए तो उनके साथ जो कुछ लोग जुड़े थे उनको समझ में आया कि ये तो चले गए हैं।

346
00:23:42,560 --> 00:23:46,800
अब हमको सतयुग में कौन ले जाएंगे? तो फिर उनका दिमाग खुला कि

347
00:23:46,800 --> 00:23:50,960
हम गलत जगह फंसे हैं। तो फिर उन्होंने प्रचार करना चालू किया कि

348
00:23:50,960 --> 00:23:53,200
ये

349
00:23:53,200 --> 00:23:57,280
वीरेंद्र दीक्षित खत्म हो गए और साथ में वो लोग थे। उन्होंने स्टेटमेंट भी

350
00:23:57,280 --> 00:24:01,520
दिया कुछ। अब वह कितना उनको मानते हैं इसका तो मुझे कोई जानकारी नहीं है।

351
00:24:01,520 --> 00:24:05,920
लेकिन जब वह खत्म [गला साफ़ करने की आवाज़] हो गई यह चीज समझ में आई तो अमोल कोहनी ने उनके सारे

352
00:24:05,920 --> 00:24:10,000
बर्थ डेथ सर्टिफिकेट वगैरह सब कुछ निकलवाया। अब इनका कहना है कि वो

353
00:24:10,000 --> 00:24:14,000
जो भगवान की आत्मा वीरेंद्र देव दीक्षित में आती थी। अब वह इनके

354
00:24:14,000 --> 00:24:18,080
अंदर आती हैं। यह जो हीरा एक डिब्बी में रखा हुआ था वह डिब्बी

355
00:24:18,080 --> 00:24:22,080
को तो जला दिया गया है वहां पर हैदराबाद में कोई क्रिमेशन सेंटर

356
00:24:22,080 --> 00:24:26,320
पर और अब वो जो भगवान है जो शिव की आत्मा राम

357
00:24:26,320 --> 00:24:29,200
की आत्मा कृष्ण की आत्मा है इन ये अष्टदेव

358
00:24:29,200 --> 00:24:33,200
जो इन्होंने बाबा की बहुत सेवा की है। अब इनके अंदर आकर सबका उद्धार

359
00:24:33,200 --> 00:24:37,360
करने में यह काम कर रही है। तो

360
00:24:37,360 --> 00:24:41,440
अब इन्हीं को भगवान माना जाए। उस शरीर को भी याद नहीं करना है। जिस शरीर में भगवान

361
00:24:41,440 --> 00:24:45,440
की आत्मा है उसी शरीर को याद करना है। तो अब इनका गाइडेंस ऐसे सबको

362
00:24:45,440 --> 00:24:50,240
अपनी तरफ डाइवर्ट करने में लगे हुए हैं कि अब यही भगवान है।

363
00:24:50,240 --> 00:24:54,320
तो तो फिर ये तो क्लियर हो गया। जी

364
00:24:54,320 --> 00:24:58,560
वीरेंद्र अब वीरेंद्र देव दीक्षित की जगह इन्होंने ली है तो आगे चलके ये भी वही

365
00:24:58,560 --> 00:25:02,800
ज्ञान फैला सकते हैं कि सबको पवित्र करने के लिए जो

366
00:25:02,800 --> 00:25:07,520
वीरेंद्र देव दीक्षित करते थे उसी बहाने से और ये भी वही करेंगे।

367
00:25:07,520 --> 00:25:11,920
और कुछ मुझे ऐसे प्रूफ भी मिले हैं जहां पर यह लड़कियों को समझाने

368
00:25:11,920 --> 00:25:16,400
की कोशिश कर रहा है कि इनको भगवान माने। इनको इनको पार्टनर माने अपना।

369
00:25:16,400 --> 00:25:20,400
एक रिकॉर्डिंग ऐसी मिली है जहां एक लड़की पूछ रही है इनके ज्ञान के आधार पर बोला जाता

370
00:25:20,400 --> 00:25:24,800
है कि 9 लाख लोग सतयुग में जाएंगे जिसमें 4.5 लाख ब्रह्मकुमारी

371
00:25:24,800 --> 00:25:29,040
से होंगे और 4.5 लाख इनके ज्ञान से होंगे। रुद्रमाला ये अपने आप को रुद्रमाला

372
00:25:29,040 --> 00:25:33,280
बोलते हैं और ब्रह्मकुमारी को विजयमाला बोलते हैं। तो आधे लोग इधर के होंगे

373
00:25:33,280 --> 00:25:37,280
तो आधे उनके पार्टनर जो हैं उधर से होंगे। तो लड़की पूछती है कि

374
00:25:37,280 --> 00:25:41,280
हमारे पार्टनर बीके में है क्या करके तो वह बताते हैं कि नहीं यहां पर

375
00:25:41,280 --> 00:25:44,400
भी होंगे यहां पर जो अष्टदेव की जगह पर बैठे हैं

376
00:25:44,400 --> 00:25:48,480
वह भी आपके पार्टनर हो सकते हैं। आपको कैसा पार्टनर चाहिए? एरागरा न तो कह

377
00:25:48,480 --> 00:25:52,480
रहा चाहिए कि जो अपनी सीट पे सेट हो गया है जो अष्ट

378
00:25:52,480 --> 00:25:56,560
देवों की जगह बैठा है ऐसा पार्टनर चाहिए। तो यह किस तरफ लड़कियों का ध्यान

379
00:25:56,560 --> 00:26:00,800
मतलब ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह करना चाहते हैं?

380
00:26:00,800 --> 00:26:04,880
तो यह चीजें संकेत देती है उसी बात का कि इनका ज्ञान

381
00:26:04,880 --> 00:26:09,040
किस तरफ जा रहा है। बाकी बहुत सारी चीजें पता चली है जिसका

382
00:26:09,040 --> 00:26:13,120
मतलब सुनने में आया है तो उस पर मैं बोल नहीं पाऊंगी लेकिन जो

383
00:26:13,120 --> 00:26:17,280
प्रूफ मेरे पास है उस पर तो मैं अच्छे से बोल सकती हूं। मैं एक बार फिर

384
00:26:17,280 --> 00:26:23,280
से बता दूं कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय सबसे

385
00:26:23,520 --> 00:26:27,520
कहां से शुरू हो रहा है? ब्रह्मा कुमारीज का सेंटर चलता

386
00:26:27,520 --> 00:26:31,600
है पूरे भारत में। वहां पर एक व्यक्ति ज्वाइन करता है जिसका नाम

387
00:26:31,600 --> 00:26:35,680
होता है वीरेंद्र देव दीक्षित। थोड़े दिनों बाद वो अपनी खुद की एक संस्था

388
00:26:35,680 --> 00:26:40,400
अलग से चालू करता है। वह अपनी संस्था का नाम रखता है आध्यात्मिक

389
00:26:40,400 --> 00:26:44,480
विश्वविद्यालय। वीरेंद्र देव दीक्षित लगभग लगभग

390
00:26:44,480 --> 00:26:48,560
उसी पैटर्न में बात करता है जिस पैटर्न में ब्रह्मा कुमारी करती है कि भाई किसी

391
00:26:48,560 --> 00:26:52,640
के शरीर के अंदर भगवान आ रहे हैं। कुछ वस्तुनिष्ठ जानकारियां अलग हो जाती

392
00:26:52,640 --> 00:26:56,640
हैं जिसके नाम पर वीरेंद्र देव दीक्षित अपनी अलग संस्था बनाता

393
00:26:56,640 --> 00:27:00,560
है। उसके बाद वीरेंद्र देव दीक्षित

394
00:27:00,560 --> 00:27:04,720
पर कई सारे आरोप लगते हैं, एलगेशंस लगते हैं। जिसमें कई मामलों

395
00:27:04,720 --> 00:27:08,800
में फंसता चला जाता है। फिर वीरेंद्र देव दीक्षित गायब हो जाता है। तब वीरेंद्र

396
00:27:08,800 --> 00:27:12,880
देव दीक्षित के द्वारा जो यह संस्था स्टार्ट की गई थी, इसके दो भाग हो जाते

397
00:27:12,880 --> 00:27:16,960
हैं वीरेंद्र देव दीक्षित को मानने वालों के। उन दो भाग

398
00:27:16,960 --> 00:27:21,120
में से एक भाग है जो यह मानता है कि वीरेंद्र देव दीक्षित मरे नहीं है। वह

399
00:27:21,120 --> 00:27:25,520
जीवित है और वो आएंगे कलयुग के एंड में और जो सतयुग सतयुग में सबको

400
00:27:25,520 --> 00:27:29,760
ले जाएंगे। दूसरा भाग है जो यह सबूत इकट्ठा करता है कि वीरेंद्र देव

401
00:27:29,760 --> 00:27:33,760
दीक्षित मर चुके हैं और अब जो वीरेंद्र देव दीक्षित के अंदर

402
00:27:33,760 --> 00:27:38,000
परमात्मा आकर के जानकारी देते थे वो अब

403
00:27:38,000 --> 00:27:42,240
किसी और के शरीर में आ रहे हैं और वह शरीर है इस समय अमोल कोकने

404
00:27:42,240 --> 00:27:46,800
का। यह अमोल कोक ने जो पूरे भारतवर्ष में घूम घूम करके विद्यालयों

405
00:27:46,800 --> 00:27:50,880
से जुड़ जुड़ के घर परिवारों से जुड़ जुड़ के वहां के बच्चों को

406
00:27:50,880 --> 00:27:55,520
उसी यात्रा पर ले जा रहा है जिस यात्रा पर इनकी बिटिया जा चुकी है।

407
00:27:55,520 --> 00:27:59,760
तो यह आध्यात्मिक विश्वविद्यालय और ब्रह्मा कुमारी

408
00:27:59,760 --> 00:28:03,920
वीरेंद्र देव दीक्षित लेखराज इन सबकी आपस में यह खिचड़ी

409
00:28:03,920 --> 00:28:08,080
पकी हुई है। जिसका यह उत्पाद है इनकी बच्ची का घर से ऐसे चले

410
00:28:08,080 --> 00:28:12,240
जाना और यह एक बच्ची नहीं है। बहुत सारी ऐसी बिटियां

411
00:28:12,240 --> 00:28:15,600
जा चुकी हैं और यह एक परिवार नहीं

412
00:28:15,600 --> 00:28:19,680
है। बहुत से ऐसे परिवार हैं जो टूट चुके हैं। किसी की पत्नी जा चुकी

413
00:28:19,680 --> 00:28:23,760
है। किसी की बहन जा चुकी, किसी की मां फंस चुकी है।

414
00:28:23,760 --> 00:28:28,400
अलग-अलग तरीके से यह बहुत बड़े स्तर पर चल रहा है लगातार।

415
00:28:28,400 --> 00:28:32,480
लेकिन हर जगह स्कूल्स कॉलेजेस में ये जो जा रहे हैं। ये मैंने एजुकेशन मिनिस्ट्री को भी मेल

416
00:28:32,480 --> 00:28:36,880
किया। एनएचआरसी से थोड़ा काम आगे बढ़ा लेकिन कहीं से

417
00:28:36,880 --> 00:28:40,880
फाइनली कुछ रिजल्ट नहीं निकला। पुलिस स्टेशन में भी मेल गया। पुलिस

418
00:28:40,880 --> 00:28:45,600
स्टेशन से मुझे मेल आया। फिर मैंने तुरंत हर मेल का रिप्लाई तुरंत किया। लेकिन कहीं फिर

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00:28:45,600 --> 00:28:49,600
रिजल्ट देखा जाए तो शून्य था। कुछ भी नहीं था। और हर दिन मुझे यह

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00:28:49,600 --> 00:28:53,760
सुनने में आ रहा है कि बेटी वहां पर मतलब सेफ नहीं है। अमोल भी वही कर मतलब कुछ

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00:28:53,760 --> 00:28:57,840
पुराने जो अनुयाय थे वो बता रहे थे कि अमोल भी अभी वही काम करना चालू कर दिया

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00:28:57,840 --> 00:29:01,920
है जो वीरेंद्र दीक्षित ने किया है। तो हर रात मैं इतनी बेचैन होके

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00:29:01,920 --> 00:29:06,000
मतलब सो ही नहीं पाती थी। हर दिन की मेरी यही परेशानी कि मैं कैसे सो सकती हूं जब मेरी

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बेटी ऐसी जगह पर फंसी है। कोई भी मानने से सो पाएगी जब वो अपनी बेटी की

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00:29:10,000 --> 00:29:14,000
चिंता करती है तो फिर मैंने जब मिलने की बात की तो वो मिलने के लिए भी

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तैयार नहीं है। वो लोग मिलने भी नहीं दे रहे हैं। तो मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काट काट

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00:29:18,080 --> 00:29:22,080
के थक गई। क्या बीती होगी इन पर जब इनकी बिटिया

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00:29:22,080 --> 00:29:26,080
ने जाने से पहले इनको आखिरी बार गले से लगाया होगा और

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आज वह कोर्ट में आकर के कहती है कि मुझे अपनी मां को नहीं देखना

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00:29:30,160 --> 00:29:30,660
है

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00:29:30,640 --> 00:29:35,520
और पुलिस वाले घेर करके उसको खड़े होते हैं कि आपकी बिटिया आपको

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00:29:35,520 --> 00:29:40,640
देखना नहीं चाहती है। सोचिए

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00:29:40,640 --> 00:29:45,120
आप भी किसी के बेटे होंगे, किसी की बिटिया होंगी। आप

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00:29:45,120 --> 00:29:50,240
किसी के मां होंगे, किसी के पिता होंगे, किसी के भाई होंगे।

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00:29:50,240 --> 00:29:54,160
कैसा लगेगा जब आपका कोई व्यक्ति

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00:29:54,160 --> 00:29:58,400
जिस पर आप निर्विवाद रूप से विश्वास करते हैं कि मेरा है,

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00:29:58,400 --> 00:30:02,400
मेरा अपना है और वह अचानक से अंदर ही अंदर कोई व्यक्ति

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आप आपसे छीन लेगा उसे।

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00:30:07,920 --> 00:30:12,640
तो यह सारी चीजें हैं इनकी यात्रा और बहुत ही दुखद

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अभी तक रही है और भगवान से हम सभी प्रार्थना करते हैं आपकी बिटिया

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00:30:16,640 --> 00:30:21,520
जल्दी घर वापस आ जाए और आपकी बिटिया के रूप में आपकी जो प्रेरणादायक

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प्रेरणादाई संघर्ष है आपका यह हम सभी के लिए बहुत

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00:30:25,760 --> 00:30:29,840
अनुकरणीय है और हम सबको बहुत

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साहस देती है आपकी कहानी कि अन्याय के खिलाफ

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00:30:34,160 --> 00:30:38,960
और अत्याचार के खिलाफ अत्याचार के विरोध में

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00:30:38,960 --> 00:30:43,200
कभी भी बैठ नहीं जाना चाहिए। निरंतर प्रयास

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00:30:43,200 --> 00:30:47,520
करते रहना चाहिए और आपने किया भी है और आपकी अपनी बेटी

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के लिए जो आपका स्नेह आपका प्रेम है जो सभी के

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होता है मगर आपके जितने भी प्रयास है उन सभी को नमन करते हैं हम

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और आगे जो हो सकेगा आपके जितने

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जितना हमसे हो सकता है आपके साथ जरूर हम खड़े होंगे आपकी

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लड़ाई में ठीक है सरता जी पूरा करें

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00:31:13,280 --> 00:31:17,600
ठीक है। तो इस वीडियो को जितना हो सके लोगों तक पहुंचाएं।

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00:31:17,600 --> 00:31:22,560
अमोल कोकने की चीजों को लोगों को बताएं। ब्रह्मा कुमारी

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की चीजों

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को लोगों को बताएं। किस तरीके से ब्रह्मा कुमारी के द्वारा उत्पादित ये जो

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उत्पाद है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वीरेंद्र देव दीक्षित और

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फिर अमोल कोकने वस्तुनिष्ठता से अमोल

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कोकने और इनकी बेटी और इनकी कहानी है और

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अगर समग्र रूप से देखें, व्यापक दृष्टि से देखें तो यह एक

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बुरी ताकतें हैं जो किस तरीके से हमारे सनातन समाज

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को सनातन धर्म को नष्ट करने पर तुली हुई है वो आपको दिख रहा होगा।
