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00:00:00:00 स्टार निकले स्टार के ग में चिपक के उलझा के मत र जाइए मनुष्य की चेतन ने जो ऊंचे से ऊंचे ग्रंथ पैदा किया हैं उनका नाम उपनिषद है इसीलिए इतने सालों से मैं उपनिषद पढ़ा रहा हूं मैं मनुस्मृति थोड़ी पढ़ना हूं की एक सेल्फ प्रोक्लेमद आचार्य जी हैं उन्होंने बोला की आ मनुष्यमती को नहीं पढ़ना चाहिए सबसे अच्छी किताबें हैं बस उपनिषद मास के निषेध के हमारे शास्त्रों में भर भर के श्लोक दिए गए हैं वेदों में है मनुष्य पति में तो है ही पर साथ ही साथ ही से टाइम कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जिसमें की मांस के लिए मांस खाने के लिए अनुमति दी गई है अब सवाल ये आता है की अनुमति क्यों दी गई है तो यह अनुमति इसलिए दी गई है की यदि कोई व्यक्ति विवश है प्राण रक्षा के निमित्त या फिर उसकी प्रवृत्ति है उसको मांस खाने की अनुमति दी गई है मगर वीडियो का उपयोग करते हुए यहां ध्यान देने वाली बात ये है की जहां एक और कसाई को पापी कहा गया है और कसाई के यहां से खरीद कर लाकर मांस खाने वाले को भी कहा गया है तो
00:01:15:19 पशु का वध करना राक्षसी कर्म है पहले से काटा कटाया तो वहां पर आप कहानी ना कहानी उसे मास को छुपा करके की गई भीम के द्वारा प्राप्त करते हैं और जब आप एक देवताओं को चढ़ते हैं हवन आदि यज्ञ के द्वारा इस मांस को प्राप्त करते हैं तो वहां पर आप लोगों से छुपा कर नहीं बल्कि लोगों के सामने प्रस्तुत करते हुए उसे मास को प्राप्त करते हैं किसी भी कार्य को किया जाते समय उत्पन्न होने वाला जो भाग होता है ना अगर उसमें छिपने के भाव उत्पन्न हो रहा है तो वह सात्विक नहीं र जाता है और यह बात कहीं गई है मनुस्मृति में 12वीं अध्याय में 37 श्लोक में तो इस विधि यह जो विधियां दी गई है मांस को प्राप्त करने की व्यवस्था वर्ष यह जो विधियां दी गई है प्राण रक्षा के निमित्त या फिर आपकी प्रवृत्ति से निवृत्ति तक ले जान के लिए तो इसमें दिखाई देता है की यह और कुछ नहीं यह प्रयास है तामसिक भजन को सात्विक भीम के द्वारा प्राप्त करने के रूप में भगवान आपका स्वयं साथ देंगे उसे प्रवृत्ति से निवृत्ति में और जो व्यवहारिक रूप है यह है जो मांस आपको सरलता से मिल जा रहा था वह मांस आपको बहुत ही प्रयोजन करके प्रकल्पों का सहारा लेते हुए प्राप्त होगा तो धीरे-धीरे अपने आप मानना
00:02:30:21 खाने की प्रवृत्ति आप में जन्म लगी और फिर उनको डेड बॉडी खान जब सर्वाइवल का सवाल हो तब कर लो लेकिन अपने आप से पूछो हमने क्या कहा था चेतन की निशानी क्या है चुनाव मांसाहार के संबंध में जी निर्णय को अंतिम रूप से प्रशांत जी स्वयं भी स्वीकार करते हैं जानकारी के अभाव के चलते शास्त्रों में दिए गए इस पक्ष को इस शिक्षा को प्रस्तुत ना करते हुए प्रशांत जी ने मनुस्मृति जैसे महान ग्रंथ का अपमान कर दिया उसे डिफेंस कर दिया लिखा यज्ञ के लिए पशुओं का वध करना और उनका मांस भाषण करना देव उचित कार्य है इसीलिए इतने सालों से मैं उपनिषद पढ़ा रहा हूं मैं मनुस्मृति थोड़ी पढ़ना हूं
00:03:24:07 जरूर से ज्यादा अहमियत और प्रसिद्ध मिल गई है भाई यह एक क्लास ऑफ लिटरेचर है जो की श्रुति से बिल्कुल नीचे का माना गया है है इसीलिए हमारे शास्त्रों में कहा गया है की मनुष्य चाहे चारों वेद पडले सारे उपनिषद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले जब तक व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ आदि सभी व्यर्थ है गुरु की शरण में जाए बिना क्योंकि गुरु के बिना यह सभी मनुष्य का माटी भ्रष्ट करने वाले हैं मैं पूछना चाहूंगा की आचार्य प्रशांत जी का गुरु कौन है जो भागवत गीता वो भी पढ़ते हैं उसमें भी भगवान श्री कृष्णा 316 और 42 में कहा है की ज्ञान परंपरा से प्राप्त हुआ इसके अलावा चांदो की परिषद मांडू के उपनिषद में दिया गया है की स्वाद ना करें परंपरा प्राप्त आचार्य की शरण में जाकर ही अध्ययन करें तो मैं पूछना चाहूंगा कर प्रशांत जी से की उन्होंने जो हमारे धर्म ग्रंथ है इनका अध्ययन किस परंपरागत आचार्य कहा जाता है आपने कहा की जो पढ़ा था वह आचार्य होता है जो शिक्षक होता है उसको आचार्य बोलते हैं बहुत सन सीधी सी बात है जैसे अंग्रेजी में सर चला है वैसे ही हिंदी में आचार्य कहा जा सकता है तो ऐसा नहीं है जी अद्वैत वेदांत की अब पढ़ाई करवाते हैं करते हैं वो अद्वैत वेदांत लिखने वाले
00:04:39:14 भगवान आदि शंकराचार्य उनका ग्रंथ पढ़िए मथाना है अनुशासन उनको तो मानेंगे वो का रहे हैं की आचार्य कौन होता है इसकी व्याख्या वो कर रहे हो और वो खुद से नहीं कर रहे हैं वो भी शास्त्र संवत व्याख्या कर रहे हैं अपने मां से नहीं कर रहे हैं तो उनको जानिए तो मैं पूछना चाहूंगा की आप अपने आईआईटी की ज्ञान की सत्यापन के लिए अपने नाम के आगे लगाते हैं आईआईटीएम किया ज्ञान आपने फलाने स्रोत से प्राप्त किया तो आप अपने धर्म के ज्ञान के सत्यापन के लिए क्या लगाते हैं क्या बताते हैं अपने शिष्यों को आपके खाने के अनुसार हमारे सभी शास्त्र जितने भी अन्य ऐसे हैं जो आपकी समझ में नहीं ए रहा है जो क्योंकि आपने गुरु के पास जाकर के पढ़ाई नहीं की है इसलिए वो सारे शास्त्र हटा देने चाहिए केवल 19 शास्त्रों को रखना चाहिए जो आपकी समझ में ए रहे हैं आपने कहा मनुष्य पति को पढ़ना बेकार है मुझे तो कहानी नहीं दिखाई दिया की किसी राजा ने मनुस्मृति को अपने राज्य का संविधान बना रखा हो
00:05:40:25 जब भगवान श्री राम ने बालिका वध किया था तो बाली ने मनुस्मृति के श्लोक के आधार पर भगवान श्री राम को पापी सिद्ध करने का प्रयास किया था और वहां पर मनुस्मृति के श्लोक पढ़ करके राम जी ने बालिका खानदान किया तो मनुष्य पति को रामजी फॉलो कर रहे हैं रामायण कल के लोग फॉलो कर रहे हैं वो उसे अपना प्रमाण मानते हैं और आपने एक झटका में का दिया की वनस्पति को माननीय योगी नहीं है आपके विषय में ऐसी बहुत सी प्रमाणिक बातें हैं जिसके लिए मैं एक अलग से वीडियो बनाऊंगा इसको खानदान अर्थ नहीं बल्कि समाज से जो विकृतियों हैं समाज में जो अपने धर्म को लेकर के जो कन्फ्यूजन से सन से हैं उनको दूर करने के निमित्त समझेंगे तो मुझे अपना भाई जानेंगे [संगीत]
00:06:32:02 [प्रशंसा]
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Beware of self proclaimed | Aacharya Prashant Manusmriti | Non veg is allowed only in compulsion
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