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00:00:04:16 जय श्री राम तो आज हम बात करेंगे सनातन समाज की पांच मूल समस्या और उनके सार्वभौमिक सिद्धांतों के आधार पर समाधान के बड़े में तो सनातन पर स्थानीय समाज की पहले मूल समस्या है की वह संगठित नहीं है और वो व्यवहारिक रूप से संगठित इसलिए नहीं है क्योंकि वो वैचारिक तोर पर संगठित नहीं है जबकि वेद का रहे हैं वेद भगवान ये का रहे हैं की आपको एक मत होकर रहना चाहिए एक मत होकर ईश्वर की वंदना करनी चाहिए आपके विचारों में एकता हनी चाहिए अच्छा अब ए जाति है दूसरी समस्या की हम वैचारिक तोर पर बैठे हुए क्यों हैं क्योंकि हमारे मां में संशय है इसको अगर और सरल भाषा में कहें तो हमारे पास वह सार्वभौमिक सिद्धांत नहीं है जो खुद को सनातनी खाने वाला हर व्यक्ति मानता हो इसके करण ही संशय पूर्ण स्थिति बन जाति है जबकि भागवत गीता में भगवान श्री कृष्णा का रहे हैं की जिसके मां में संशय होता है वह ना तो इस लोक में सुखी र पता है और ना ही पर लोक में अब यह जो संशय की स्थिति बंटी है यह क्यों बंटी है तो अब ए जाति हमारी तीसरी समस्या गुरु तत्व से अभिज्ञता तो सनातन को माने वालों में 90% से ज्यादा लोगों के जीवन में गुरु नहीं है गुरु तत्व से अनुभाग्य है ज्यादातर लोग जबकि स्कंद
00:01:20:01 पुराण में कहा जा रहा है की मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनिषद पढ़ ले सारे शास्त्र पढ़ ले जब तक व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ सब कुछ व्यर्थ है गुरु के बिना जिसका गुरु नहीं वे पशु है जिसका गुरु नहीं वह मूर्ख है यह इतना तक कहा गया है अब बात आई है चौथी समस्या की जिनको गुरु की महत्व पता है उनको यह नहीं पता की गुरु किसको बनाया जाए जबकि स्कंद पुराण में कहा गया है की निश्चित गुरु का सेवन करने वाला ब्रह्म प्रलय तक पशुओं में ही राहत है अब ए जाति है पांचवी मूल समस्या जो इन सब से मिलकर के उत्पन्न होती है की सब कुछ जान लेने के बाद व्यक्ति यह नहीं जानता है की जी प्रकार से वक्त अपने धर्म गुरु को जानते हैं दलाई लामा को क्रिश्चियन अपने धर्मगुरु को जानते हैं पॉप को उसे तरह से सनातन समाज अपने सार्वभौमिक गुरु को नहीं जानता की सनातन धर्म का सार्वभौमिक गुरु कौन होगा अब बात करते हैं उन पांच सर भौमिक सिद्धांतों के बड़े में जिनके द्वारा हम सनातन समाज को संगठित कर सकते हैं तो पहले सिद्धांत है नास्तिकता का खानदान इस संसार में हर व्यक्ति भगवान को ही ढूंढ रहा है फिल्म फिर वे भले ही नास्तिक क्यों ना हॉर्स्टोमा सद्गमय तमसो मां ज्योतिर्गमय मृत्यु कमाया इसके
00:02:35:19 बाद जो दूसरा सिद्धांत है वह तथाकथित काल्पनिक ईश्वरों का खानदान सनातन ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है सत्यम ज्ञान किसी भी नियम के अधीन नहीं बल्कि सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियत है इसके बाद आता है तीसरा सिद्धांत वह है की ईश्वर के विषय में एकमात्र सनातन शास्त्र ही प्रमाणिक हैं क्यों क्योंकि वह कभी यह नहीं कहते की ईश्वर ने उन्हें किसी विशेष देश कल स्थिति में रचा है क्योंकि हमने पिछले नियम से जाना की ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो वह झूठ भी बोल सकता है मटका भी सकता है तो इसीलिए जो वेद हैं जो शास्त्र है सनातन धर्म शास्त्र है वो ये कभी नहीं कहते की उन्हें ईश्वर ने लिखा बल्कि वह तो ये कहते हैं की वह ईश्वर की श्वास रूप में हमेशा से विद्यमान थे श्वास रूप का अर्थ क्या है मनुष्य दो प्रकार के कार्य करता है एक जिसमें उसकी छह इंवॉल्व होती है जिसमें उसका एफर्ट इंवॉल्व होता है और दूसरा जी जो वो बिना चाहे करता है जब उसके द्वारा किया जान वाले किसी कार्य में उसका एफर्ट इंवॉल्व हो जाता है तो उसके पास ऑप्शन होता है की वह उसको किस प्रकार से करें पर एग्जांपल मेरे सामने मेरा फोन भी है और मेरे सामने मेरा पावर बैंक भी है अब अगर मैं चाहता हूं कुछ उठाना
00:03:50:22 तो मैं चाहूं तो अपना मोबाइल उठाऊं और मैं चाहूं तो अपना पावर बैंक इसी प्रकार से मैं जब आपको कुछ बताना चाहता हूं तो मैं चाहूं तो आपको झूठ बताऊं और मैं चाहूं तो आपको सत्य बताऊंगा पर कुछ कर हम ऐसे भी करते हैं जो हम बिना छह के करते हैं वह शुद्ध होते हैं जैसे सांस एक
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→ Used in: B · Video ब्रह्माकुमारी से इस्लाम पर सीधा सवाल — जवाब सुनकर आप भी चौंक जाएंगे! at 27:40 ↗
→ Used in: A · Video Secular world of Brahma kumaris #brahmakumaris at 51:33 ↗
00:04:09:14 बच्चा जन्म ले रहा है मां के गर्भ से और वो सांस ले रहा है उसमें कोई
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00:04:12:19 मिलावट नहीं है उसमें उसका कोई चुनाव नहीं है तो इस प्रकार से ईश्वर के संबंध में एकमात्र सनातन शास्त्री ही विश्वसनीय हैं अब ए जाता है चौथ नियम ये सर जो प्रमाणिक तार्किक और अखंडनीय ज्ञान है ये हमें कैसे प्राप्त होता है सबसे पहले परंपरा भागवत गीता कर दो तीन 16 इसके अलावा मंद के उपनिषद 70 ब्राह्मण ग्रंथ वरने उपनिषद सभी के अनुसार हमें स्वाधीन ना करते हुए परंपरागत आचार्य के सानिध्य में ही अध्ययन करना चाहिए इसके साथ ही साथ धर्म के विषय में अंतिम निर्णायक कौन होता है जो ब्रह्मचारी सन्यासी हो अथर्ववेद 117 16 मनुष्यमती 12वां अध्याय 112 से 114 इसके साथ ही साथ मत से पुराण के अनुसार सभी परंपरा से प्राप्त प्रमाणिक ग के सामंजस्य की शिक्षा ही साधु समझ धर्म है इसका मतलब गुरु वो होना चाहिए जो किसी भी शास्त्र का खानदान ना करें बल्कि सभी से मिलकर के एक आपको शिक्षा दे वो ये ना कहे की शिवा पुराण गलत है विष्णु पुराण चाहिए वही ना कहे की भागवत पुराण गलत है और भगवती पुराण सही है सभी को मिलकर के वो शिक्षा दे वही गुरु होना चाहिए स्कंद पुराण में लिखा हुआ है की गुरु वही है जो आपका संशय दूर कर दे तो अब जब हमें
00:05:27:25 ये पता चल गया की गुरु परंपरा से होना चाहिए तो लास्ट जो हमारा सार्वभौमिक सिद्धांत है सनातन समाज के लिए वो ये है की कौन सी परंपरा तो वह है शंकर परंपरा नारायण समारंभ शंकराचार्य माध्यम असमताचार्य पर रणथम वंदे गुरु परंपरा इस परंपरा के बड़े में व्यू प्राण में एक श्लोक भी मिलता है जिसमें भगवान शिवा का रहे हैं की
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→ Used in: A · Video Message to So called Hindus like @Ajeetbharti and @tufailchaturvedi #narendramod... at 2:53 ↗
→ Used in: A · Video श्रीमज्जगद्गुरू पूज्य गुरुदेव पुरी शंकराचार्य जी के 82 वें प्राकट्योत्सव पर विशे... at 11:59 ↗
00:05:49:20 सतयुग में स्वयं ब्रह्मा गुरु थे त्रेता में स्वयं वशिष्ठ गुरु थे द्वापर में व्यास गुरु थे और कलयुग में मैं जगत
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00:05:57:23 गुरु हूं यानी शिवा भगवान ने बोल रहे हैं उसके बाद जब वो आदि शंकराचार्य के रूप में प्रकट हो जाते हैं तो वो एक घोषित करते हैं की मेरे द्वारा स्थापित 4pithon पर बैठने वाला सन्यासी मुझे शिवा का रूप ही मान्य है अर्थात इन सारे प्रमाणों से हमें यह पता चला है की सनातन समाज का जो सार्वभौम गुरु पद है वो है शंकराचार्य का पूर्व पद और जो सार्वभौम गुरु है वो है उसे पद पर बैठने वाला सन्यासी हमारे धर्म के शंकराचार्य जी ने साइन बाबा को देवताओं का स्थान नहीं किया और शंकराचार्य की बात मानना प्रत्येक सनातनी का धर्म है क्योंकि वो अपने धर्म के प्रधानमंत्री
00:06:42:19 तो इस साड़ी थ्योरी का सारांश क्या हुआ की कलयुग में अपने सरगुन गुरु यानी की जगतगुरु शंकराचार्य से दूरी ही सनातन समाज की मूल समस्या है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]
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हिंदुओं की दुर्गति का मूल । Top 5 problems of Hinduism #shankaracharya #bageshwardhamsarkar
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