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00:00:00:10 वाल्मीकि रामायण में साथ कांड में 24 हजार श्लोक हैं और ये माना जाता है अधिकांश से प्रकाशित वो वाल्मीकि ने लिखे नहीं आप कहेंगे लिखे नहीं फिर कैसे हो गए मैं 650 ऐसी कविताएं रोज वाटसन में देखा हूं की मेरे वहां पर युद्ध कांड समाप्त हो जाता है वाल्मीकि रामायण समाप्त समाप्त हो जाता है वाल्मीकि जी ने फूल श्रुति भी वहीं पर लिखी थी तो घाट के समाप्ति पर जय श्री राम तो आज हम बात करेंगे वो जो मोस्ट रेटेड टॉपिक है कई बार कमेंट्स में भी ए चुका है हमारे वीडियो के की उत्तर कांड प्रक्षिप्त है की नहीं और अगर है तो यह कुछ सेल्फ प्रोक्लेमद गुरु बन गए हैं ये उसे प्रकाशित क्यों कहते हैं तो इन दोनों ही बटन पे हम बात करेंगे सीक्वेंस वाइस पहले जो पॉइंट है वो ये है की जब कोई उत्तराखंड को प्रकाशित का रहा है किसी भी मंच पर खड़े होकर के तो क्या वो वहां पर उत्तर कांड के बिना रामायण को प्रस्तुत कर रहा है अगर नहीं कर रहा है और जो उपलब्ध है उसे वो मिलावटी का रहा है तो वो अनजाने में प्रभु श्री राम के अस्तित्व पर प्रश्न उठा रहा है जैसे गीता प्रेस गोरखपुर की जो रामायण है उसमें उत्तराखंड है तो अगर हम उसके द्वारा प्रभु श्री
00:01:15:14 राम को जानते हैं मानते हैं और अगर वो प्रकाशित है वो मिलावटी किताब है उसे पर विश्वास नहीं किया जा सकता अगर उसमें एक कांड मिलावटी है तो उसमें पता नहीं कौन सी जानकारी क्या दी गई हो सकता है उसमें आ जो राम ने किया उसको राम रावण नाम दे दिया गया हो और जो रावण ने किया उसको राम नाम दे दिया गया हो तो एक तरीके से जब कोई व्यक्ति यह कहता है मंच पर खड़ा होकर के उत्तर कान परीक्षित है और वो वहां पर उसे किताब का नाम नहीं बताता की जहां पर वो किताब राखी हुई है जिसमें की उत्तराखंड नहीं है तो ऐसे में वो प्रभु श्री राम के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा देता है और यही बात जो अपोनेंट्स हैं उनकी किताबें में कहीं गई है की सनातन धर्म को इसलिए नहीं माना जा सकता क्योंकि उनकी जो ग्रंथावली है वो मिलावटी है वो विश्वास करने योग्य नहीं है तो इस प्रकार से उत्तराखंड को प्रक्षिप्त खाने वाला वह व्यक्ति कौन हुआ जो सालों से ये साबित करने में लगा हुआ है की आपकी किताबें को इसलिए नहीं माना जा सकता है क्योंकि आपकी किताब में मिलावटी है अच्छा अब दूसरा देख लेते हैं उत्तराखंड को वेरीफाई स्वयं वाल्मीकि रामायण भी करती है पहले ही चैप्टर में बालकांड में ही बताया गया है की उत्तर कांड समेत रामायण में साथ
00:02:30:21 कांड हैं इसके अलावा और भी प्रमाण दिए गए हैं वाल्मीकि रामायण में इसके अलावा उत्तर कांड में दी गई कई घटनाएं ऐसी हैं जिनका वर्णन हमें महाभारत पुराण इन सब में मिलता है जैसे माता सीता का प्रत्यय शंभू के बाद सोरस की कथा प्रभु श्री राम द्वारा अश्वमेध यज्ञ या फिर माता सीता का भूमि प्रवेश यह सब हमें पूरा महाभारत गीता इत्यादि में मिल जाता है अब बात ये है की जो पुराण हैं इनको वेरीफाई हमारे सतीश शास्त्र करते हैं कई शून्य शास्त्रों में कहा गया है की जो पुराण है वह वेदों के ही अर्थ को खोलने हैं तो एक सीक्वेंस में देखें की अगर उत्तराखंड प्रकाशित तो उत्तराखंड की घटनाओं को वेरीफाई करने वाले पुराण शास्त्र प्रक्षेप महाभारत प्रक्षिप्त गीता प्रक्षे है और अगर यह साड़ी सामग्री प्रक्षेपित तो इनको वेरीफाई करने वाले हमारे सतीश शास्त्र ब्राह्मण ग्रंथ उपनिषद वेद आदि भी प्रक्षेप तो इसका मतलब जब कोई व्यक्ति यह का रहा है की उत्तर कांड प्रक्षिप्त है तो उसने अप्रत्यक्ष रूप से हमारे सभी धर्म ग का नस कर दिया और वो उसने सनातन धर्म का स्थित हुई मित दिया अब इसका एक तीसरा चरण और है वो भी देख लेते हैं की स्वयं को सनातनी खाने
00:03:45:23 वाले कई ऐसे लोग हैं जो पुराने को स्वीकार नहीं करते हैं वो भगवान के अवतार लेने की बात को भी स्वीकार नहीं करते हैं मैं बात कर रहा हूं आर्य समाज की आर्य समाज ही वह है जो कहते हैं भगवान अवतार नहीं ले सकता वह केवल निराकार है आर्य समाज की हंसी उड़ते हैं अगर आप सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक पढ़ेंगे सरस्वती जी की लिखी हुई है दयानंद सरस्वती जी की तो उसमें कई जगह आपको दिखेगा की पुराने की बहुत खिलाई उदय गई है उपवास उदय गया है तो अगर आप इनके साथ खड़े हो रहे हैं तो इसका मतलब सबसे पहले आपको मानना पड़ेगा की भगवान अवतार नहीं ले सकता और प्रभु श्री राम भगवान विष्णु के अवतार नहीं हैं इसके अलावा अब यहां आप खड़े तो हो गए मगर इनडायरेक्ट वे मैं आप देखिए की सबसे बड़ा एक लॉजिक है की ईश्वर वही हो सकता है जो कुछ भी कर सकता है ये हमारे शास्त्रों में भी दिया गया है कतरियों परिषद दो एक में सत्य में ज्ञान में अनंत ब्रह्म ईश्वर वही है जो किसी भी नियम के अधीन नहीं है बल्कि अगर उसने सभी नियम बनाए हैं तो वह तो सर्व नियामक तो यहां पर जब हम का देते हैं की भगवान अवतार नहीं ले सकता भगवान अवतरित नहीं हो सकता तो हम लोग ईश्वर को का रहे हैं की तुम्हारे अंदर भी कुछ
00:05:00:28 कमियां हैं तुम्हारे तुम भी शक्तिहीन हो दुनिया में कोई कर ऐसा है जो तुम नहीं कर सकते इसका अर्थ यह है की हम नहीं मानते इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान है हम नहीं मानते कोई शर्म नियामक है तो हम इससे नास्तिक से तोड़ते हैं इसके अलावा एक तारक और बन जाता है की युद्ध कांड में जो ग्रंथ का पूजन कर दिया गया फलसूति मिलती है वहां जो उसके करण ये माना जाएगा की वहीं पर ग्रंथ का अंत हो जाता है मगर श्रीमद् भागवत में कई प्रसंग ऐसे है जहां पर ग्रंथ का पूजन हो रहा है स्थिति मिलती है मगर उसके बाद के जो अंश है उनको क्षेपक नहीं माना गया है प्रक्षिप्त नहीं माना गया है और यह कोई सनातन नियम नहीं है की अगर कहानी पर ग्रंथ का पूजन कर दिया गया स्थिति मिल गई तो वहां पर ग्रंथ को समाप्त माना जाए अब बात ये आई है की यह जो सेल्फ प्रोक्लेमद गुरु है यह ऐसा करते क्यों है क्यों कहते हैं इसलिए कहते हैं की जब ये मंच पर खड़े हो करके सभा को संबोधित कर रहे हैं और ऐसे में किसी ने उनसे कोई ऐसा प्रश्न पूछा जिसके बड़े में इन्हें नॉलेज नहीं है क्योंकि शास्त्र कहते हैं की ज्ञान परंपरा
00:06:16:02 से प्राप्त होता है तो सेल्फ गुरु जो है उसने किसी परंपरा से ज्ञान नहीं लिया है तो ऐसे में इनको पुरी नॉलेज ना होने की वजह से जब इनके सामने कोई ऐसा प्रश्न आता है जिसका उत्तर इनके पास नहीं है तो ये स्वयं की कमी वहां प्रस्तुत करनी की बजे शास्त्र को दूर दे देते हैं और अब प्रत्यक्ष रूप से सनातन समाज को कई भागन में बांट देते हैं इससे प्रॉब्लम्स आई हैं जैसे एक सबसे बड़ी प्रॉब्लम है जो लोग ये मानते हैं की उत्तर कांड प्रक्षिप्त हैं तो गीता प्रेस गोरखपुर की किताब को अगर कोई बीच चौराहे पर जलन जाएगा तो यह जो सन प्रोक्लेमद गुरुओं को फॉलो करता है ये हिस्सा उसे रामायण की रक्षा कर रहे नहीं जाएगा अब ये जो साड़ी जानकारी इकट्ठा करके मैंने आपको दी है यह कोई मेरे द्वारा इकट्ठा नहीं की गई है यह हमारे प्रकांड विद्वान महान आचार्य श्रीमद् करपात्री जी महाराज द्वारा रचित ग्रंथ है रामायण विमानस जिसमें उन्होंने इन साड़ी चीजों को लिया है उन्होंने बताया है की प्रभु श्री राम ने सीता माता को वनवास क्यों भेजो प्रमाण बताएं उसके तारक बताएं हर चीज उन्होंने वहां पर एकत्रित की है ये जितने भी प्रकार के रामायण उत्तराखंड प्रभु श्री राम के ऊपर आक्षेप लगाया जाते हैं जैसे शंबूक वध सीता
00:07:31:20 माता का प्रत्येक आदि तो इन सभी आरोपी का निराकरण भी हम बहुत जल्दी प्रस्तुत करेंगे एक-एक करके प्रभु श्री राम पैर जो आप लगता हैं ना की उन्होंने अपनी पत्नी को वनवास क्यों भेज दिया उन्होंने संभोग का वक्त क्यों कर दिया ये आज नहीं ग रहे हैं यह हजारों सालों से सदियों से ग रहे हैं और इसलिए ग रहे हैं की पुरी दुनिया में एकमात्र सनातन धर्म के पास वह आदर्श है जो केवल धर्म की शिक्षा नहीं देता है बल्कि उसे पर चल के दिखता है अन्य किसी भी धर्म के पास ऐसा आदर्श नहीं है जिसके लिए यह कहा गया हो की इसे पूर्णतया मनुष्य फॉलो करें इसीलिए हमारे पास जो आदर्श है जो हमारे धर्म को श्रेष्ठ बना देता है और उसकी जो सुंदरता है उसमें कर चंद लगा देता है उसके ऊपर उंगली उठाते हैं और चाहते हैं की हम इनका आदर्श छन ले तो इसलिए ये जो आप है जो अक्षय पर आज से नहीं ग रहे हैं प्रभु श्रीराम पर ये सदियों से लगता ए रहे हैं और हमारे आचार्य गण जो हैं परंपरा प्राप्त जो प्रमाणिक आचार्य हैं वो सदियों से प्रभु श्री राम के गरिमा की रक्षा कर रहे हैं ऐसे ही एक आचार्य हैं जो हमारे करपात्री जी हैं जिन्होंने रामायण विमान का नाम का ग्रंथ लिखा और उसमें इन सारे अक्षयकों का बहुत ही विद्वत
00:08:46:29 खानदान किया मगर हमारी जो विडंबना है वो ये है की हम ऐसे प्रमाणिक आचार्य से अनुभाग्य है हम नहीं जानते की भागवत गीता सारे उपनिषदों में लिखा हुआ है की स्वाधीन ना करें परंपरागत आचार्ययों की शरण में जाकर के अध्ययन करें हम नहीं जानते की स्कंद पुराण में लिखा हुआ है की जब तक व्रत दान पुण्य कर्म चाहे चारों वेद पढ़ लीजिए चाहे सारे पुराण पढ़ लीजिए सारे उपनिषद पढ़ लीजिए सब कुछ बेकार है अगर आप गुरु की क्षण में नहीं चलेंगे हम नहीं जानते की अथर्ववेद में लिखा हुआ है की जो सन्यासी है वो धर्म का अंतिम निर्णायक है हम नहीं जानते की मत्स्य पुराण में लिखा हुआ है की सभी प्रमाणिक धर्म ग के सामंजस्य की शिक्षा देने वाला ही प्रमाणिक अचार हो सकता है की हम नहीं जानते की स्कंद पुराण में लिखा हुआ है की गुरु वही है जो आपका संशय दूर कर दे हम नहीं जानते की स्कंद पुराण में कहा गया है की निश्चित गुरु का सेवन करने वाला ब्रह्म प्रवर्तक पशु यानी में पड़ा राहत है जिसका गुरु नहीं है प्रमाणिक गुरु नहीं है वह मूर्ख है पशु समाज है अब इस पूरे चैप्टर का जो सारांश
00:10:02:08 है वो क्या है वो ये है की उत्तर कांड अगर प्रक्षेप तो उसे वेरीफाई करने वाले पुराण महाभारत गीता प्रक्षेप और अगर पुराण महाभारत गीता परीक्षित तो उसे वेरीफाई करने वाले हमारे क्षेत्र ब्राह्मण ग्रंथ उपनिषद प्रक्षेप वेद प्रक्षेप तो अगर वेद प्रक्षिप्त तो सनातन धर्म का मतलब है की नहीं ईश्वर अवतार ले सकता है की नहीं और अंततः [संगीत]
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उत्तरकांड प्रक्षिप्त है या नहीं | Self proclaimed Ram Katha Marmagya | reality of Kumar Vishwas
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