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00:00:00:09 यह प्रदर्शन क्यों कर रहे हो क्योंकि हमें तकलीफ है श्री राम जय श्री राम एक ही नारा एक ही नाम जय श्रीराम जय श्रीराम सनातन नाम के धर्म का कोई अस्तित्व नहीं है इस संसार में जय श्री राम तो आपने थंबनेल देख लिया होगा आज हम बात करेंगे की सनातन पर आस्थान्वित समाज की इतनी दयनीय स्थिति क्यों है क्यों इतने भाव दृश्य देखने को मिलते हैं क्यों हमारी मंत्र शक्तियों के साथ इतना अमानवीय व्यवहार हो जाता है क्यों हमारे ग्रंथ धर्म ग के इतना अपमान किया जाता है बीच चौराहे पर उसे जल दिया जाता है क्यों हमारे भगवान भगवानों का मजाक उदय जाता है भागवत स्वरूपों का मजाक उदय जाता है अश्लील चित्र बनाए जाते हैं ऐसा क्यों होता है हमारे स्क्रिप्चर्स क्या कहते हैं इस बड़े में तो हमारे स्क्रिप्चर्स कहते हैं की हमारी यह जो दयनीय स्थिति है उसकी वजह है की हम संगठित नहीं है यूनिटी नहीं हमारे बीच में यूनिटी क्यों नहीं है क्योंकि हम वैचारिक तोर पर बैठे हुए हैं जबकि वेद भगवान कहते हैं की आपको एक मत हो करके रहना चाहिए आज के टाइम में खाने को सनातनी भारत में बहुत संख्या के मगर आज के टाइम में एक सनातनी ऐसा
00:01:15:14 नहीं है जो कोई एक पंक्ति ऐसी बोल पे जो सभी सनातनियों के लिए मान्य हूं सार्वभौमिक पंक्ति एक पंक्ति ऐसी नहीं बोली जा शक्ति जैसे मां लीजिए अगर हम कहें मोती मोती बातें ले लेते हैं मां लीजिए अगर मैं कहूं की सनातन वो है जहां भगवान को सरकार और निराकार दोनों रूपन में स्वीकार किया जाता है मगर ऐसा नहीं है आर्य समाज ही तो कहते हैं की भगवान शिवा निराकार है मगर फिर भी वो सनातनी है अच्छा अगर हम कहें की भगवान सनातन ईश्वर वह है जो कुछ भी कर सकता है जन्म भी ले सकता है यह भी कर सकता है वो भी कर सकता है हर वो चीज कर सकता है जो मनुष्य बुद्धि से सोचा जा सकता है मगर ऐसा नहीं है भगवान शिवा बने के बाद वापस कृष्णा नहीं बन सकते
00:02:04:13 बाधित करेंगे अच्छा अगर हम थोड़े से आचरण को डिफाइन कर लेते हैं अगर हम कहें की सनातन वह है जहां मांस नहीं खाया जाता मगर ऐसा तो नहीं है पूर्वांचल में तो खाया जाता है दक्षिण भारत में तो खाया जाता है मगर फिर भी वो सनातनी कहलाने हैं अगर हम कहें की हमारे यहां अमेरिकी बहनों से शादी नहीं करते हैं तो ऐसा भी नहीं है कई ऐसेउल होंगे जहां पर बा की लड़की से शादी हो जाति है मम्मी मेरी फुफुफेरी बहनों शादी हो जाति है इस सिचुएशन के दो अर्थ निकलते हैं एक या तो सनातन नाम के धर्म का कोई अस्तित्व ही नहीं है इस संसार में और या फिर ऐसा है की धर्म के रेफरेंस से धर्म के संदर्भ से कोई है जो सच बोल रहा है जो सही बोल रहा है जो तार्किक बोल रहा है जो प्रमाणिक बोल रहा है और कोई है जो धर्म की आड में धर्म बोल रहा है कोई है जो वास्तविकता ही बता रहा है आस्तिकता के नाम से मगर कोई ऐसा भी है जो आस्तिकता की आड में नास्तिकता बता रहा है मगर उसको भी आस्तिक कहा जान की करण आमजन है वह चुनाव नहीं कर का रहा है की किसकी बात सही है और किसकी गलत है और इस वजह से फैलता है अब आप बताइए की दोषी कौन है वो जो बॉडी पर
00:03:19:22 वार कर रहा है या वो जो ब्रेन पर वार करना है तो यह निर्णय आप स्वयं करें तो यह संशय ए जाता है हमारा दूसरा करण सनातन की मूल समस्या का पहले करण था संगठित ना होना और दूसरा करण संशय भागवत गीता 440 भगवान का रहे हैं जिसके मां में इस लोक में सुखी र पाएगा नहीं पर लोक में आज अपने धर्म को लेकर के अपने ईश्वर को लेकर के हर हिंदू के मां में उसको मालूम ही नहीं है की भगवान रोटी क्यों हैं भगवान लीला क्यों करते हैं उसको यह सब चीज मालूम ही नहीं है ना ही उसके अंदर कोई इच्छा होती है जन की और जब कहानी से इन्हीं बटन को आधार बनाकर के प्रहार किया जाता है तो हिंदू होता है फिर अगर हम तथाकथित धर्म रक्षों से बात करें जो स्वयं को बहुत धर्म की रक्षा करने वाला सिद्ध करना चाहेंगे अगर उनसे हम कहें की आप क्या कर रहे हैं तो फर्स्ट ऑफ जो वो कहेंगे आपसे की हम धर्म की रक्षा के लिए तत्पर हैं ठीक है मगर किस धर्म की रक्षा गई तत्पर है नाम बता देंगे सनातन तो सनातन धर्म जो है कहां से डिफाइन हो रहा है कहां से प्रतिपादित हो रहा है कहां से निश्चित तोर ए रही है की ये
00:04:34:25 वाला जो सनातन धर्म है यहां पर जो लिखा हुआ है यहां पर जो सुनिश्चित हो रहा है इस सनातन धर्म की हम रक्षा कर रहे हैं इतना वो अगर बता पे तो बहुत बड़ी बात है नहीं बता पाएंगे क्यों क्योंकि उनके पास कोई निश्चित नहीं मावली ही नहीं है तो ज्यादातर लोग तो ऐसे मिलेंगे आपको धर्म रक्षक जींस जवाब कर लेंगे की सनातन धर्म की निश्चित नियमावली कौन सी है जिसको आप ही मानते हो की हम इसकी रक्षा कर रहे हैं और साड़ी मानव जाति के लिए कल्याणकारी है दर्शन विज्ञान और व्यवहार तीनों ही धरातल पर तो नहीं बता पाएंगे अब अगर उसमें से कुछ ऐसे बुद्धिजीवी होंगे जो आपको कहेंगे नहीं जो सनातन धर्म ग्रंथ है हम उनके द्वारा प्रतिपादित होने वाले धर्म की रक्षा कर रहे हैं तो अब यहां पर भी कांट्रडिक्शन है की सनातन धर्म के ग्रंथ तो हैं मगर उसका जो अर्थ हो रहा है वो कौन कला है आर्य समाज का अलग है प्रमुख मैरिज का अलग है तो किसके द्वारा किया गया अर्थ आप मानते हैं की ये सही अर्थ है और ये उचित है और इस वाले धर्म की हम रक्षा कर रहे हैं उनके पास जवाब नहीं है अगर एक बार को हम मां भी लेने की उन बुद्धिजीवियों में से किसी एक ने यह का दिया की नहीं भाई हम इस किताब के आधार पर होने वाले प्रतिपादित जो धर्म है
00:05:50:03 उसकी हम रक्षा कर रहे हैं तो इसका अर्थ क्या होगा पता है की इन महाशय का धर्म कौन ते करेगा जो इस किताब को छापने वाला है उसका जो मनाएगा वह उसमें अर्थ करेगा उसे अर्थ को धर्म मां कर के फॉलो करेंगे तो हमारे हमारे धर्म का निर्णय करने वाला कौन हुआ धर्म रक्षों की जो किसी विशेष जगह इस तरह से करते हैं यह जो स्थिति है यह बंटी बबली मूवी का वह सीन है जब ताज का सौदा करना होता है बंटी और बबली को तो वो ताज का जहां पर ऑफिस था मैनेजिंग ऑफिस था जो वहां की जो अधिकारी थी उसके घर पर एक भीड़ को भेज देते हैं झूठ प्रदर्शन करने के लिए जिससे की वो घबरा करके वो जो महिला अधिकारी है वो अपने घर जाए तो उतनी डर में उसकी अनुपस्थित में यह ताज का सौदा कर सके अंग्रेज के साथ तो वो महिला जब घर जाति है तो वहां पर एक भीड़ प्रदर्शन कर रही थी जिसको केवल प्रदर्शन करना था उसका कोई उद्देश्य नहीं था तो वह प्रदर्शन कर रही थी तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी नहीं चलेगी तो ऐसे
00:07:05:04 में जब अधिकारी वहां पूछती है तो वो पूछती क्या होगा भैया तो फिर नारे लगाते तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी प्रदर्शन हां हां वो तो ठीक है पर मांगे क्या
00:07:45:29 श्री राम जय श्री राम एक ही नारा एक ही नाम जय श्री राम जय श्रीराम मगर उनको आप दो शब्द बोलने के लिए अगर कहते हैं राम के बड़े में तो नहीं बोल पाएंगे यही चिल्लाने वाले क्योंकि उनको यही नहीं पता है की हम किस चीज की रक्षा कर रहे हैं कहां से सुनिश्चिट्ठा है उसमें उनको ये जानना ही नहीं है तो यहां इसका मतलब क्या हुआ की हम तो केवल अपनी जो वर्चस्व होता है उसको सिद्ध कर रहे हैं की गलत तो हम भी हैं हमारे पास भी कोई निश्चित नियमावली नहीं है मगर हम जो कर रहे हैं वो सही है उसको सब लोग मां लो क्या यही सनातन धर्म है यही सनातन धर्म का मूल स्वरूप है तो आगे चलते हैं सनातन धर्म इस बड़े में क्या कहते हैं क्योंकि हमारा जो ईश्वर है वो किसी विशेष दिल देश कालखंड तक ही नहीं आगे का पीछे का सब कुछ जानता है तो इसलिए उसने पहले ही साड़ी व्यवस्था कर राखी है मगर प्रॉब्लम ये है की हम दुनिया को तो लोहा लवाना छह रहे हैं अपने सनातन का मगर हम खुद नहीं जानते उसका लोहा है क्या प्रॉब्लम बस यही अब आप सोचिए की आप किस धर्म की रक्षा कर रहे हैं और करिए
00:09:03:24 सारे पुराण पढ़ ले जब तप व्रत दान पुण्य कर्म सब कुछ व्यर्थ है अगर उसका गुरु नहीं है तो अब आता है सनातन की मूल समस्या का तीसरा करण गुरु तत्व से अभिज्ञता अब गुरु तत्व के बड़े में जो महत्व है वो आपको सभी को वर्बल तो पता है की सनातन जो सनातन धर्म है वो तीन स्तंभों पर खड़ा हुआ है गुरु गोविंद और ग्रंथ मगर आज की डेट में आप देखेंगे की ज्यादातर लोग गुरु के बड़े में जानते ही नहीं है हमारे जितने भी शास्त्र हैं वो गुरु और शिष्य की बात से ही शुरू हो रहे हैं सारे पुराण उसमें शिष्य पूछ रहे होंगे की सुखदेव जी हमें कथा सुनाइए पाराशर जी हमें कथा सुनाइए सभी शिष्य ऐसे अपने गुरु से पूछ रहे होंगे इसके साथ ही साथ यह भी कहा गया है की जिसका गुरु नहीं है वह मूर्ख है वह पशु है यहां तक की जब स्वयं परम भी धरती पर अवतरित होता है तो गुरु की शरण लेट है प्रभु श्री राम गए थे वशिष्ठ जी के पास भगवान श्री कृष्णा गए थे गुरु संधीपन के पास ज्ञान लेने के लिए उनको आदर्श स्थापित करना था रामू विग्रहवां धर्मा 337 13 राम धर्म का जीता
00:10:19:00 जगत स्वरूप हैं आपको कुछ भी समझ में नहीं ए रहा है तो राम ने जो जो किया यथा समर्थ उसको फॉलो करिए तो राम जी जब गुरु के पास जा रहे हैं तो आज आप बताइए की हम में से हमारा जो समाज ऐसा नित पर आस्थान्वित उसमें से कितने परसेंट लोग ऐसे हैं जिनका कोई गुरु है आजकल लोग जो ये लौकिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते हैं स्कूल में उनको गुरुवार उनको गुरु मानते हैं और उनको गुरु समझते हैं ऐसा नहीं है भागवत पुराण का वचन है मनुष्य के तीन प्रकार के गुरु होते हैं पहले माता पिता जो जन्म देते हैं दूसरे गुरु वो जो संस्कार करते हैं और तीसरी गुरु वह जो भागवत प्रताप का मार्ग प्रशांत करते हैं तो हम में से कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास भागवत प्रताप का मार्ग प्रशांत करने वाले गुरुदेव हैं नहीं यह है सनातन की मूल समस्या अब इससे आगे बढ़ते हैं की जिन लोगों को गुरु तत्व के बड़े में गुरु की महत्व के बड़े में मालूम है तो उनको यह नहीं मालूम है की गुरु कौन होना चाहिए अब यहां इस प्रश्न के जवाब में ए जाता है वह उत्तर जो हमारे सो कॉल्ड धर्म रक्षक थे ना जो उनकी समस्या थी की हमारा धर्म कहां से सेट होगा उनको मालूम ही नहीं है उनका उत्तर यहां पर है ज्ञान
00:11:34:25 प्राप्त होता है परंपरा से उपनिषद मांडू के उपनिषद चांदो के उपनिषद हर जगह शास्त्रों में यही बात कहीं जा रही है की स्वाधीन ना करें परंपरा प्राप्त आचार्ययों के सानिध्य में ही अध्ययन करें तो ऐसा क्यों कहा जा रहा है इसको लॉजिकल भी समझिए अगर हम किसी डॉक्टर के पास इलाज करने जाएंगे तो हमारी प्रायोरिटी होती है की हम देखेंगे वो कहां से सर्टिफाइड है हम एक फिटनेस कोच को हेयर करते तो हम देखते हैं की कहां से सर्टिफाइड है हम फिजिक्स पढ़ने जाएंगे मठ पढ़ने जाएंगे तो हम देखेंगे इसने डिग्री कहां से ली है फालना कहां से किया है जो जिनका कोई गुरु नहीं है अपने गुरु का नाम नहीं बता रहे धर्म की शिक्षा देने के लिए मगर अपने नाम के आगे आईआईटीएम जरूर बता रहे हैं तो यह आईआईटीएम कहना का मतलब क्या है की वह उन्होंने आईआईटी वाली जो शिक्षा है वो कहां से प्राप्त की उसका अपना केंद्र बता रहे हैं सोर्स ऑफ इनफॉरमेशन का क्या है तो लॉजिकल हम देखें की जब हम किसी का प्रमाण पत्र देखते हैं मार्कशीट देखते हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से उसमें हम यही देख रहे होते हैं की इस व्यक्ति ने ज्ञान कहां से प्राप्त किया यानी की उसका गुरु कौन है और अगर उनके भी पास जाएंगे तो वहां पर भी उनके पास कुछ ना कुछ प्रमाण
00:12:50:03 पत्र होगा जो उनके सोर्स ऑफ इनफॉरमेशन के बड़े में बता रहा होगा तो ये क्या बन रही है परंपरा गुरु का गुरु का गुरु का गुरु इसी बात को भागवत गीता में भगवान श्री कृष्णा ने भी कहा 316 42 ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से आज यह यह जो नियम है ना परंपरा इसको पूरा वर्ल्ड फॉलो कर रहा है किसने दिया सनातन शास्त्र ने सर्टिफिकेट ऑफ मार्कशीट के रूप में पूरा वर्ल्ड कर रहा है मगर हम खुद अपने ऊपर अप्लाई नहीं करते हैं अगर हम बजा बजाना भी सीखना चाहते हैं ना तो हम सोचते हैं कोई सर्टिफाइड ट्रेनर मिल जाए हमें हम डांस सीखना चाहते हैं हमें डिड में जाना है यहां जाना है वहां जाना है तो हम सोचते हैं हमें कोई सर्टिफाइड ट्रेनर मिल जाए जो मैं डांस शिखा दे मगर हमें जब धर्म की शिक्षा लेनी है तो हम किसी से भी ले लेते हैं कुमार विश्वास जी मंच पर खड़े होकर के बोल देते हैं उनसे जब पूछा जाता है की रामायण का उत्तराखंड क्या है सीता माता का वनवास क्यों भेजो वह बात और है की जो प्रमाणिक आचार्य हैं वर्षों से उत्तर कांड की रक्षा कर रहे हैं हमारे पूज्य करपात्री महाराज जी उन्होंने रामायण विमानस नाम का कालजई ग्रंथ लिखा सिर्फ इसलिए की रामायण और राम प्रभु श्री राम पर लगे वाले सारे आरोपी का खानदान किया राम जी ने सीता माता को वनवास क्यों भेजो था शंभू का वध क्यों किया था ये साड़ी बातें उसे ग्रंथ में लिखी और
00:14:05:03 आज से कई साल पहले यह जो रामायण पर राम पर अक्षय ग रहे हैं आज नहीं ग रहे हैं कई वर्षों कई सालों सदियों से ग रहे हैं क्यों ग रहे हैं क्योंकि दुनिया भर में एकमात्र आदर्श अगर किसी धर्म में है तो वो सनातन धर्म में किसी और के पास आदर्श नहीं है धर्म की शिक्षा देने वाले कई व्यक्तित्व है मगर धर्म की शिक्षा देने के बाद उसे पर चल के दिखाने वाला एकमात्र व्यक्तित्व सनातन धर्म में राम इसीलिए कहा गया रमन के गृहवान धर्मा और सभी लोग अक्षय राम पर इसलिए लगाते हैं की इनका जो आदर्श है जो मजबूत इनके पास एक अलग विशेष खंबा है जो सनातन की ऊंचाई को और बड़ा दे रहा है श्रेष्ठ और कर दे रहा है इसको तोड़ दो हटा दो इसको तो वहां पर रामायण विमान सकरपात्री जी महाराज बता रहे हैं जिन्होंने नॉरेटिव लिखा जिन्होंने नारा बनाया धर्म की जय हो धर्म का नस हो हर मंदिर में घुसता है नारा किसने लिखा करपात्री जी ने पुरी दुनिया के विचारकों को मान दे दी जिन्होंने खानदान करके मार्क्सवाद और राम राज्य के द्वारा किसने लिखा करपात्री जी ने मगर इन प्रमाणिक आचार्य को हम नहीं जानते हैं जो परंपरा से प्राप्त रहे हैं और कुमार विश्वास जी क्योंकि उनके फॉलोअर्स बहुत हैं कविता अच्छी करते
00:15:20:06 हैं कोई बात कोई इसमें संशय नहीं है और ये भी है ये भी संभव है कुमार विश्वास जी धर्म के लिए अच्छा भाव रखते हैं मगर उन्होंने वहां पर उनको परंपरा से ज्ञान प्राप्त नहीं था जब उनसे प्रश्न किया गया तो उन्होंने उत्तराखंड को प्रकाशित का दिया इस करण से क्या हुआ मैंने कहा हमने कहा था ना शुरू में की हमें वैचारिक तोर पर एक होना होगा तभी हम व्यवहारिक तोर पर एक हो पाएंगे अब यहां पे देखिए प्रैक्टिकल समझिए की कोई व्यक्ति रामायण गीता प्रेस गोरखपुर से जो रामायण शक्ति है उसको जाकर के बीच चौराहे पर जलन वाला है तो उसको बचाने कौन जाएगा जो जानता होगा की उत्तर कांड प्रक्षिप्त नहीं है सीता माता को वनवास इसलिए भेजो गया था क्योंकि पद पुराण के पाताल खंड में उनको श्राप लगा हुआ गया है उनको श्राप लगा था की गर्भावस्था के दौरान उनको भी अपने पति का वियोग झेलना पड़ेगा यह साड़ी चीज किसी अन्य वीडियो में लेंगे वो साड़ी चीज हैं मगर वन वीडियो में लेंगे मगर अभी बात इतनी आई है की उसे गीता प्रेस गोरखपुर से छापने वाली वाल्मीकि रामायण को बचाने कौन जाएगा जो ये मानता होगा की उत्तराखंड प्रकाशित नहीं है वो हिंदू नहीं जाएगा जो ये मानता होगा की उत्तर कांड प्रक्षेप है जिनके मां में विश्व बोल दिया स्वभाव से सेल्फ प्रोक्लेमद गुरु हैं जिसको हम सरल भाषा में कल ने भी का सकते हैं कालनेमि भड़काने
00:16:36:05 वाला रक्षा अब आते हैं हमारे ट्रैक पर मरना विषयांतर हो गया हो जाएगा अब हमें पता चल गया की ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से तो पहले जो पहले पैरामीटर होना चाहिए गुरु का वो होना चाहिए की वह परंपरा से आचार्य लक्षण बताए गए हैं आचार्य के दूसरा लक्षण है की धर्म का अंतिम निर्णायक जो होता है वो ब्रह्मचारी सन्यासी होता है अथर्ववेद 117 16 मनुस्मृति बार-बार अध्याय 112 से 114 धर्म में संशय होने पर ब्रह्मचारी के पास जैन ब्रह्मचारी इसके साथ ही साथ ये भी कहा गया है जिसका प्रमाणिक गुरु है निश्चित गुरु है वह मनुष्य ब्रह्म प्रलय तक पशु यानी में ही राहत है भट्ट राहत है इतनी सब बातें कहीं जा रही हैं मगर कैसे बातें हमको पता है नहीं पता है इसके बाद इसके बड़े में हम बात करेंगे क्यों नहीं पता है और वो पता ना होने से क्या-क्या होता है अब हमें पता चल गया की गुरु कौन होना चाहिए ब्रह्मचारी सन्यासी होना चाहिए सभी शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला होना चाहिए और वो संशय दूर करने वाला होना चाहिए और वो परंपरा से आचार्य होना चाहिए इतने सारे पैरामीटर हमको पता चल गए अब
00:17:52:04 अगर मैं कोई यह का रहा है की भगवान निराकार ही है सरकार नहीं है तो हम उससे पूछ सकते हैं की वह भगवान कैसा जो अक्षम हूं कुछ कर कुछ कर अपने में सक्षम ना हो भगवान के साथ इसका मतलब गुरु नहीं है आप क्योंकि आप किसी शास्त्र का खानदान कर रहे हैं एक शास्त्र को मां रहे एक को नहीं मां रहे अगर कोई आपसे यह कहता है की नहीं विष्णु गणेश शिवा छोटे हैं तो आप उससे का सकते हैं यहां पर शिवा पुराण का खानदान कर रहे हो आप तो सभी शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला ही प्रमाणिक गुरु है तो सभी शास्त्रों की यहां पर समाज समंजन वाली शिक्षा क्या है एक ही ईश्वर स्वयं को पांच रूपन में प्रकट करते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती एवं गणेश कभी वह सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है कई बार हुई है तो कभी उन्होंने सृष्टि की रचना की विष्णु बन के कभी ब्रह्मा बन के कभी शिवा बैंक इसलिए जब-जब उन्होंने जिस-जिस रूप में बैंक सृष्टि की रचना की उसे तरीके से संबंधित एक ही पुराण लिखा गया मगर उसमें चैप्टर अलग-अलग हुए ये भी शुरू है
00:19:07:08 की पुराण जो है 18 अलग-अलग नहीं है एक ही पुराण है इन साड़ी चीजों के बाद कालनेमि को पहचान का सबसे सरल तरीका यह है की एक वक्त आएगा जब कलिनी जो होगा जो गलत गुरु होगा जो प्रमाणिक नहीं होगा वो आपसे कहानी ना कहानी यह का देगा की नहीं तुम तो भाई हरे कृष्णा का जब करो तुम तो भाई सवाल मत करो संचय मत करो जबकि कहा गया है क्या है हमारा चौथ नियम की गुरु वही है जो सांसद दूर करें क्योंकि हमारा तो धर्म ही है जो सवाल से शुरू होता है प्रश्नों से शुरू होता है अर्थात वो धर्म जिज्ञासा अर्थात वो ब्रह्म जिज्ञासा असाटॉमा सद्गमय तमसो मां ज्योतिर्मय मित्र महामृत्युंजय हमारा तो धर्म है वो प्रश्न की नींद पर खड़ा हुआ है इंसान के अंदर से उत्पन्न होने वाले प्रश्न तो जो गलत गुरु होगा वो व्यक्ति को मनुष्य को उसके जो सवाल हैं उसके जो प्रश्न है उनका पूर्णतया समाधान करने में समर्थ होगा एक वक्त आएगा जब वो आपसे का देगा नहीं नहीं ज्यादा गहराई में मत जो ज्यादा प्रश्न मत करो कहानी ना कहानी वो आपको अटका देगा
00:20:26:10 कहां नहीं करना है और शास्त्र के विभिन्न गहराईयां इनमें जाना हमारा उद्देश्य नहीं है तो यह सारे नियम जब हमारे बच्चे बच्चों को मालूम होंगे हमारे हर धर्म रक्षक को मालूम होंगे तब वह सुनिश्चित कर पाएंगे की हमको किस धर्म की रक्षा करनी है हमने अब यहां तक यह जान लिया की सनातन धर्म की मूल समस्या की वो संगठित नहीं है संगठित क्यों नहीं है दूसरा पॉइंट है की संशय फैला हुआ है अब शशाइयों का निवारण क्या है गुरु और गुरु कौन होना चाहिए जो परंपरा से हो जो सन्यासी हो जो सभी प्रमाणिक शास्त्रों की सामंजस्य की शिक्षा देता हो और जो अपने शिष्य का सभी प्रकार के संशय दूर करने में समर्थ हो यह तो अब परंपरा तो कौन सी परंपरा तो इसकी अगर तार्किकता में जाएंगे सभी शास्त्रों का जब मंथन करेंगे तो सनातन धर्म की जो परंपरा है वह है शंकर परंपरा जब हम सभी शास्त्रों का अध्ययन करते हैं तो हमें जगह-जगह पर जो प्रमाण मिलते हैं उनसे बंता है की भगवान विष्णु ने सबसे पहले ज्ञान
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→ Used in: A · Video Students learned how to defeat Kalnemi | मैं आचार्य नहीं हूं | Ahvaan Sessions... at 7:08 ↗
00:21:33:05 दिया ब्रह्मा जी को ब्रह्मा जी ने ज्ञान दिया वशिष्ठ जी को वशिष्ठ जी ने ज्ञान
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00:21:37:15 दिया पाराशर जी को शक्ति को शक्ति जीने ज्ञान दिया पाराशर जी को पाराशर जी ने ज्ञान दिया सुखदेव जी को सुखदेव जी ने ज्ञान दिया गोविंद योगेंद्र मत्स्य जी को और उन्होंने ज्ञान दिया स्वयं शंकर भगवान जबतरित हुए शंकराचार्य के रूप में आदि शंकराचार्य भगवान आदि शंकराचार्य के रूप में नारायण समारंभ शंकराचार्य माध्यम आसमा आचार्य पर्यंत वंदे गुरु परंपरा तो गुरु परंपरा तो कौन सी गुरु परंपरा शंकर गुरु परंपरा अब आप सोच रहे होंगे की यहां पर अभी जो है वो हो गया एक विशेष मत में ले जान वाला हो गया मगर यहां पर आप देखना पड़ेगा की इसमें तार्किकता और प्रमाणिकता क्या है हमारे शास्त्रों के अनुसार तो ये परंपरा है ही ये सिद्ध मगर तार्किकता भी देख लीजिए की जब सनातन धर्म पूर्णतया से खत्म होने वाला था तब भगवान शिवा आदि शंकराचार्य के रूप में प्रकट हुए बौद्ध मत का खानदान किया उन्होंने हराया और सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की आज जितनी भी ग्रंथावली जो हमें सुलभता से प्राप्त हैं गोरखपुर की किताबें हूं या फिर चौखंबा पब्लिकेशन की किताबें हूं इनमें जो दर्शन चल रहा है भारतीय दर्शन आदि शंकराचार्य
00:22:53:03 द्वारा प्रतिपादित किया गया जो विलुप्त हो गया था समय कालखंड में और इसी दर्शन की वजह से भारत को विश्व गुरु कहा जाता है दुनिया के सभी जितने भी विचारक हैं बड़े-बड़े इसी दर्शन के आगे देते हैं की दर्शन का मतलब की जब हम किसी को ईश्वर का रहे हैं तो अब आप ईश्वर कौन परिभाषित कर का रहा है सिंपल सी बात है दुनिया में बहुत सारे दर्शन हैं मगर किसमे ईश्वर को आबाद सिद्ध कर पाया ऐसा कौन सा दर्शन है तो वो दर्शन है भगवान आदि शंकराचार्य जी का दर्शन उन्होंने इसी दर्शन के आधार पर जो अनिश्वरवादी थे बौद्ध उनको हराया उनसे शास्त्राद करके और दोबारा वैदिक धर्म की स्थापना की तो आज हम जो अपने आपको हिंदू का का रहे हैं ना यह आदि शंकराचार्य जी के करण वरना हम भी बहुत हो चुके होते हैं बुद्धम शरण गच्छामि नियम किसी और दिन लेंगे किसी और वीडियो में अब बात यह आई है की अब कुछ लोग यहां पर ये कहेंगे की ये जो मत अंतर का भेद है ना की भाई तुम शिवा को मानते हो पहले बात आदि शंकराचार्य जी के दर्शन में ऐसा नहीं है की शिवा कोई माना जाता है मैं इस परंपरा से इस गुरु परंपरा से दीक्षित हूं और मैं वैष्णव हूं मगर वैष्णव केवल वैष्णव का कोई अस्तित्व नहीं है शास्त्र
00:24:08:17 संवत शास्त्र कहते हैं की आप स्मार्ट होते हुए ही वैष्णव हो सकते हो आप स्मार्ट होते हुए ही शायद हो सकते हो आप स्मार्ट होते हुए साफ हो सकते हो इसका अर्थ क्या है की पांचो देव को ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती एवं गणेश को इक्वल मानिए मगर इनमें से किसी एक रूप के प्रति अपने पूर्व जन्म के प्रभाव की वजह से या इस जन्म से प्राप्त संस्कारों की वजह से आपकी जो भक्ति है आपकी जो श्रद्धा है वो किसी एक रूप में ज्यादा हो जाति है तो इसी प्रकार से मैं वैष्णव हूं क्योंकि मैं मेरे ईस्ट राम जी हैं मुझे उनकी भक्ति प्राप्त हुई है जीवन में तो मगर ऐसा नहीं है की मैं राम जी के आगे सबको कम समझना हूं मैं सभी से कहता हूं की आप सभी का दर्शन में राम जी के रूप में करना चाहता हूं पूजा करते समय और आनंद से पूछा करता हूं भगवान की भक्ति करता हूं मगर अब यहां पर कई लोग कहेंगे की नहीं यह मत बताना अंतर तो काफी समय से चला ए रहा है ये पहले भी था शिव और वैष्णव में ये वो इस तरह की बातें करेंगे तो आप एक बात ध्यान रखिए की महाभारत का वचन है की किसी के कर देने से वह प्रमाण नहीं बन जाता है किसी के कर देने से मैं प्रमाण नहीं बन जाता है शास्त्रों द्वारा स्वीकार किया जान पर ही वह प्रमाण बंता
00:25:23:21 है महाराज दशरथ ने भी तीन शादियां की मगर उनको धर्म नहीं कहा गया भगवान श्री कृष्णा ने भी 16000 शादियों की मगर उनको मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं कहा गया लीला पुरुषोत्तम कहा गया मर्यादा पुरुषोत्तम और धर्म किस कहा गया राम राम को तो यह मत बताना वह कहानी ना कहानी धर्म के विरुद्ध है वह साड़ी घटनाएं जो हो रही है वह ठीक है हो रही है मगर उनको स्वीकार किया जाना है जरूरी नहीं है स्वीकार क्या करेंगे राम
00:26:01:04 ने कभी सबर वैष्णव का अंतर किया नारद पुराण में लिखा है किसी और विष्णु में कोई भेद नहीं है भेद करने वाला पापी है हरिहर में भेद करने वाला क्या भगवान राम ने कभी ऐसी कोई शिक्षा दी की नहीं शिवा में अंतर करो उन्होंने जब वो उन्होंने राम रूप में शिवा की पूजा की और शिवा जी ने हनुमान रूप में विष्णु की पूजा की राम की पूजा की तो उन्होंने वेद सिखाया की आपको रामायण ने भेद करना सिखाया आपको जो पुरी दुनिया के लिए संसार के लिए आदर्श है अब यहां पर कुछ लोगों के कुतर्क भी आते हैं अरे राम जी को फॉलो करोगे तो राम जी ने तो रामसेतु बनाया था क्या उसको आप फॉलो कर सकते हो नहीं कर सकते क्योंकि हमारे पास क्षमता नहीं है मगर यदि हमारे पास क्षमता होगी और हमारे को करण मिलेगा ऐसा करने का तो हम करेंगे भगवान अगर हमें शक्तिमान बनाएंगे ऐसा और हमें जरूर होगी ऐसे समुद्र में पुल बनाने की बनाएंगे मगर यहां पर पुल ना बना पन हमारा चुनाव नहीं है दबाव है और राम जी की इस बात को फॉलो ना करना की सबको एक मानो शिवा और विष्णु को एक मानो यह हमारा चुनाव होगा इसमें समर्थ की बात नहीं है कहानी भी जब आपकी बात नहीं है इसमें हम चुनाव कर रहे हैं की राम जी ने सिखाया की शिवा भविष्य में अंतर मत करो मगर हम का रहे हैं राम
00:27:16:24 जी यहां लीला कर रहे हैं तो यहां अंतर है की हम पुल नहीं बना का रहे हैं तो इसका मतलब ये है की हमारे अंदर समर्थ नहीं है तो यहां पे दबाव है उनको फॉलो ना कर पन और यहां अगर उन्होंने फॉलो नहीं कर रहे हैं तो यहां पे हमारा चुनाव है तो हम चुनाव से उनको उन फॉलो कर रहे हैं अब ये साड़ी चीज आज आपको बताने का एक विशेष करण भी है जब भगवान शिवा आदि शंकराचार्य के रूप में प्रकट हुए तो जैसे व्यू पुराण में भगवान शिवा ने घोषणा की इस प्रकार से आदि शंकराचार्य रूप के रूप में भी शिवा भगवान ने घोषणा की क्या घोषणा की की जी प्रकार
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00:27:51:09 सतयुग में ब्रह्मा गुरु थे त्रेता में वशिष्ठ गुरु थे द्वापर में व्यास गुरु थे
⬜ Not used yet · 00:27:56:03 – 00:33:00:00 (5:04)
00:27:56:03 इस प्रकार कलयुग में मैं आदि शंकराचार्य गुरु हूं और मेरे द्वारा स्थापित इन चारों पीटो पर उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम में जो मैंने कर पीट बनाई है इन पर बैठने वाला लक्षण युक्त सन्यासी शिवा का रूप ही माने होगा इसीलिए उसे गाड़ी पर बैठने वाले सन्यासी को शंकराचार्य कहा जाता है जो सनातन धर्म का अंतिम विकल्प और अंतिम निर्णायक है तो ऐसी महान परंपरा से ऐसे महान पद पर विराजमान होने वाले महान आचार्य हैं श्री गोवर्धन मत पीट के पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु 145 में शंकराचार्य और शंकर परंपरा के 155वें गुरु स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी ये वो है जिन्होंने अब तक धर्म दर्शन और विज्ञान पर 200 से अधिक ग्रंथ लिखे हुए हैं यह वह है जींस परामर्श लेने हैं जिनकी सहायता लेने के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से नासा से विश्व बैंक से संयुक्त राष्ट्र से लोग आते हैं यह वह है जिन्होंने इसरो को चंद्रयान दो को बनाते समय सहायता की थी ये वो है जिनका महिमामंडन इसरो कम से कम 2
00:29:11:08 घंटे तक करते हैं यह वह है जो धर्म की रक्षा के लिए धर्म की स्थापना के लिए पूरे 365 दिन भारतवर्ष में यात्रा करते हैं यह वह है जो हॉस्पिटल्स होने पर भी वहां पर जैसे ही होश में आते हैं तो अपना जो कार्य धर्म रक्षा के निमित्त वो चालू करते हैं ये वो है जो धर्म सभा में आकर के बैठने हैं तो कथन ही वेस्ट हैं सबसे पहले ही पूछते हैं की धर्म अध्यात्म और दर्शन के विषय में किसी का कोई भी प्रश्न हो तो वो प्रश्न करें हमारा धर्म है अर्थात धर्म जिज्ञासा अर्थात वो ब्रह्म जिज्ञासा और यह वह है जो अपने शिष्य का संशय दूर करते हैं जिनका प्रकृति उत्सव 16 जून 2023 को पूरे भारतवर्ष में मनाया जा रहा है तो एक बहुत ही सुनहरा अवसर है प्रमाणिक गुरु का सानिध्य प्राप्त करने का और उनके सानिध्य में अपनी धर्म रक्षा के निमित्त या अपने व्यक्तिगत उत्थान के निमित्त और इस सब के अलावा यदि आप सुरक्षित जीवन व्यतीत करना चाहते हैं तो इसके निमित्त अपना अंश प्रधान करने का एक बहुत ही सुनहरा
00:30:50:15 [संगीत] तो इसीलिए मेरा सभी से निवेदन है वो खास तोर पर मोबाइल वालों से किस सोशल मीडिया वारियर जितने भी हैं उनसे मैं यह कहना चाहता हूं की मोबाइल के जारी कुछ भी हम प्रवर्तन नहीं ला सकते मोबाइल केवल एक निमित्त है लोगों को एकजुट करने के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए अंततः उनको धरातल पर उतार के ही सुरक्षा करनी होगी जब हमारे घर की किसी मातृशक्ति पर हमला हो रहा होगा उसकी जो गरिमा है उसको भांग करने का प्रयास किया जा रहा होगा तब क्या मोबाइल का इस्तेमाल करेंगे उसे दुष्ट व्यक्ति को रोकने के लिए आपको एकजुट होना होगा आपको संगठित होना होगा तब आप अपने घर की अपने घर की मातृशक्ति की फिर अपने समाज की रक्षा कर पाएंगे तो इसीलिए सभी धर्म के लोगों से सभी धर्म के रक्षों से मेरा निवेदन है की इनके सानिध्य में सर्वप्रथम सनातन धर्म को जानिए और फिर सनातन धर्म के सार्वभौम सिद्धांतों के द्वारा सनातन समाज को एकजुट करने का प्रयास करिए और तब जब कोई व्यक्ति रामचरितमानस को जलन का प्रयास करेगा या हमारी मंत्र शक्ति को
00:32:05:27 क्षति पहचाने का प्रयास करेगा तो वहां पर पूरा सनातन समाज एकजुट होकर के उनका प्रतिकार करेगा और सबसे बड़ी बात तो ये है की सनातन धर्म के प्रति किसी भी तरह का आपत्तिजनक व्यवहार करने से पहले कोई भी दुष्ट व्यक्ति 100 बार सोचेगा आपके घर के आसपास जहां भी नजदीक से नजदीक में आदित्य वहिनी की संगोष्ठियां हो रही हैं पूरे भारतवर्ष में हो रही है उनको धुंधिया अगर आपके घर के आसपास नहीं मिल रही है तो आदित्य उनसे संपर्क साधकर आप स्वयं आदित्य वहिनी के रूप में संगोष्ठी चालू करिए इसी प्रकार से सनातन धर्म का हिट हो सकता है यही एकमात्र अंतिम विकल्प है सनातन धर्म का कर स्वामी
00:32:58:06 जय श्री राम
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हिंदुओं का अंतिम विकल्प | Jagadguru Shankaracharya Puri | the last option of Hindu | Pramanik Guru
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