1
00:00:13,200 --> 00:00:19,200
मेरी आवाज आ रही है सभी को?

2
00:00:22,640 --> 00:00:26,720
एक मिनट सेटिंग्स वगैरह देख लें।

3
00:00:26,720 --> 00:00:30,720
काफी दिन के बाद लाइव आ रहे हैं। तो मेरी आवाज साफ

4
00:00:30,720 --> 00:00:34,960
आ रही होगी। आशा करता हूं आप सभी को साफ आ रही होगी। कोई अगर देख रहा है

5
00:00:34,960 --> 00:00:40,480
तो थोड़ा सा कमेंट करके बता दें आवाज साफ आ रही है या नहीं।

6
00:00:40,480 --> 00:00:44,480
हम जी सभी को जय श्री

7
00:00:44,480 --> 00:00:48,560
राम। हर हर महादेव और बहुत-बहुत

8
00:00:48,560 --> 00:00:53,040
आभार आपका इस तरह से अपना समर्थन

9
00:00:53,040 --> 00:00:56,080
प्रदान करने का

10
00:00:56,080 --> 00:01:01,200
और आज की लाइव जो है बहुत विशेष होने वाली है

11
00:01:01,200 --> 00:01:07,200
हमारे साथ में अनिकेत द्विवे जी भी जुड़ने वाले हैं

12
00:01:07,760 --> 00:01:13,760
और सनातन शंकर जी भी जुड़ने वाले हैं।

13
00:01:17,940 --> 00:01:23,940
[गला साफ़ करने की आवाज़]

14
00:01:25,680 --> 00:01:30,400
बहुत से रोचक तथ्य हैं जिन पर आज बात होगी

15
00:01:30,400 --> 00:01:34,480
और क्या था बहुत दिनों से यात्रा में थे

16
00:01:34,480 --> 00:01:38,480
आपने देखा होगा पहले हम ऋषिकेश गए हरिद्वार गए उसके बाद

17
00:01:38,480 --> 00:01:42,560
एक बार वहां से वापस आए उसके बाद फिर ऋषिकेश

18
00:01:42,560 --> 00:01:46,560
हरिद्वार गए और अब ऐसा सोच रहे हैं कि

19
00:01:46,560 --> 00:01:51,680
ऋषिकेश एक बहुत ही महत्वपूर्ण जगह है

20
00:01:51,680 --> 00:01:56,160
जहां पर हमारा होना आवश्यक है। तो ऋषिकेश

21
00:01:56,160 --> 00:02:00,960
की यात्राएं आपको ज्यादा देखने को मिलेगी क्योंकि वहां पर बहुत ज्यादा

22
00:02:00,960 --> 00:02:06,000
आप मान लीजिए कि पाखंड का जो

23
00:02:06,000 --> 00:02:11,360
केंद्र स्त्रोत बन गया है। ओरिजिन सेंटर बन गया है।

24
00:02:11,360 --> 00:02:15,520
अ मैं कुशलता से हूं। भैरव जी पूछ रहे हैं। मैं कुशल

25
00:02:15,520 --> 00:02:19,680
पूर्वक हूं। तो हुआ क्या है कि जितनी भी सनातन

26
00:02:19,680 --> 00:02:25,360
धर्म विरोधी शक्तियां हैं उन्होंने क्या किया है कि

27
00:02:25,360 --> 00:02:29,360
जहां पर हमारा सबसे जो भी हमारा मुख्य

28
00:02:29,360 --> 00:02:34,160
स्थान है ना धर्म का केंद्र है वहीं पर ही सबसे ज्यादा

29
00:02:34,160 --> 00:02:38,400
बड़ा वार प्रहार करने का प्रयास उन्होंने किया

30
00:02:38,400 --> 00:02:42,440
है और

31
00:02:42,440 --> 00:02:46,560
[गला साफ़ करने की आवाज़] इसका एक उदाहरण है राम मंदिर है ना आप

32
00:02:46,560 --> 00:02:50,560
देखो कृष्ण जन्मभूमि जहां पर है

33
00:02:50,560 --> 00:02:54,560
जहां पर कृष्ण भगवान का मंदिर है कृष्ण जन्मभूमि वाला वहीं पर आप

34
00:02:54,560 --> 00:02:58,720
देखो मंदिर के अंदर से जो मस्जिद है उसकी वो गुंबद

35
00:02:58,720 --> 00:03:02,800
है जो वो दिखाई देती है। राम मंदिर का आप जानते ही

36
00:03:02,800 --> 00:03:07,280
हैं। और अगर आप देखें तो

37
00:03:07,280 --> 00:03:13,230
हां आर के एस वकर जी मैं ठीक हूं बिल्कुल

38
00:03:13,230 --> 00:03:15,440
[खांसने की आवाज़]

39
00:03:15,440 --> 00:03:20,000
हां जी यही मुख्य विषय होने वाला है आज एनोनिमस

40
00:03:20,000 --> 00:03:21,120
जी

41
00:03:21,120 --> 00:03:25,360
और मैं बिल्कुल ठीक हूं मेरी चिंता ना करें हमारे साथ शिवनाथ तक किस बात की चिंता

42
00:03:25,360 --> 00:03:30,000
में चिंता करने के लिए बहुत-बहुत आभार आप सब की जो प्रार्थनाएं हैं

43
00:03:30,000 --> 00:03:34,080
वो मेरे साथ सदैव हैं और अभी तो अंगड़ाई है। आगे

44
00:03:34,080 --> 00:03:38,120
बहुत लड़ाई है। खैर [खांसने

45
00:03:38,120 --> 00:03:40,640
की आवाज़]

46
00:03:40,640 --> 00:03:46,640
तो

47
00:03:47,200 --> 00:03:52,400
आज हमारी स्ट्रीम में बोबड़ा सोल भी जुड़ने वाला है।

48
00:03:52,400 --> 00:03:56,000
वो कुतर्कों का जो

49
00:03:56,000 --> 00:04:01,040
क्या कहा जाता है? कुतर्कों का बेताज बादशाह या निराकार बादशाह

50
00:04:01,040 --> 00:04:05,520
वो बोबड़ा सोल है बोबड़ा स्पिरिट सोल

51
00:04:05,520 --> 00:04:09,680
वो भी जुड़ने वाला है शायद जुड़ भी गया है

52
00:04:09,680 --> 00:04:13,840
डीपी चेंज नहीं हुई है बोबड़ा की डीपी चेंज होनी चाहिए

53
00:04:13,840 --> 00:04:16,110
क्या

54
00:04:16,110 --> 00:04:20,480
[हंसी] अच्छा मैं वो बता रहा था तब तक बोबड़ा

55
00:04:20,480 --> 00:04:24,800
बोबड़ा आएगा आज हमारे लाइव स्ट्रीम में तो

56
00:04:24,800 --> 00:04:28,800
तब तक मैं बता रहा था कि राम

57
00:04:28,800 --> 00:04:32,880
जन्मभूमि आप देख लीजिए कृष्ण जन्मभूमि आप देख लीजिए बोबड़ा जी आप

58
00:04:32,880 --> 00:04:38,880
अपनी डीपी चेंज करेंगे या ऐसे ही आपको ले लिया जाए?

59
00:04:42,310 --> 00:04:46,960
[गला साफ़ करने की आवाज़]

60
00:04:46,960 --> 00:04:51,120
राम जन्मभूमि कृष्ण जन्मभूमि और मैंने देखिए आप देखिए

61
00:04:51,120 --> 00:04:56,880
बनारस जाइए जो बनारस जब

62
00:04:56,880 --> 00:05:00,960
उसकी जितनी मान्यता है बनारस की कि वहां पर जो

63
00:05:00,960 --> 00:05:06,800
देह त्याग करता है उसका मोक्ष निश्चित हो जाता है और

64
00:05:06,800 --> 00:05:11,120
सारी दुनिया में प्रलय आ जाएगी पर बनारस में कुछ नहीं होगा तो ये सारी

65
00:05:11,120 --> 00:05:15,280
चीजें हैं और बनारस आज आप जाओगे ना तो वहां पर इतना

66
00:05:15,280 --> 00:05:19,440
पतन हो रहा है हमारी संस्कृति का हमारे धर्म का इतना

67
00:05:19,440 --> 00:05:24,560
ज्यादा मांसाहार कच्चा मांस और गंदगी

68
00:05:24,560 --> 00:05:28,560
और वहां के लोग है वैसे अगर देखा

69
00:05:28,560 --> 00:05:32,800
जाए तो एक छोटा शहर है वाराणसी आध्यात्मिक रूप से बड़ा शहर

70
00:05:32,800 --> 00:05:36,880
है पर यूं देखेंगे दिल्ली मुंबई के सामने जो है

71
00:05:36,880 --> 00:05:40,960
अपेक्षागत छोटा शहर है पर वहां के लोग ऐसी उड़ान भर

72
00:05:40,960 --> 00:05:46,160
रहे हैं कि दिल्ली मुंबई को भी फेल कर देंगे कुछ दिनों में।

73
00:05:46,160 --> 00:05:50,240
घाटों पर जो है जो एक हमारी भारतीय

74
00:05:50,240 --> 00:05:54,240
संस्कृति है कि पराई स्त्री का स्पर्श ना करें

75
00:05:54,240 --> 00:05:58,400
और अ अगर

76
00:05:58,400 --> 00:06:02,400
मतलब दूर रहे एक मर्यादा में रहे तो वहां पर आप देखेंगे घाटों

77
00:06:02,400 --> 00:06:06,560
पर जाकर के तो उसको जूहू भी बीच बनाया जा रहा है और यही हाल ऋषिकेश

78
00:06:06,560 --> 00:06:12,240
का भी है। अश्लीलता नग्नता और एक अनुशासन हीनता

79
00:06:12,240 --> 00:06:17,520
है ना

80
00:06:17,520 --> 00:06:20,560
तो

81
00:06:20,560 --> 00:06:25,120
द कहने का तात्पर्य यह है कि जो हमारे सेंटर्स

82
00:06:25,120 --> 00:06:29,520
है ना वहीं पर सबसे ज्यादा वार हो रहा है। जहां पर लक्ष्मण जी की तपोभूमि

83
00:06:29,520 --> 00:06:34,160
है जो ऋषिकेश ऋषियों की तपोभूमि जो मानी जाती है

84
00:06:34,160 --> 00:06:38,320
तो वहीं पर सबसे ज्यादा प्रहार हो रहा है। वाराणसी हो या

85
00:06:38,320 --> 00:06:42,480
अयोध्या हो या राम कृष्ण जन्मभूमि हो या

86
00:06:42,480 --> 00:06:46,800
फिर आपका यह ऋषिकेश जैसी जगह हो जहांजहां पर हमारे

87
00:06:46,800 --> 00:06:50,800
वो है ना गर्भ ग्रह उस गर्भ पे ही वार किया जा

88
00:06:50,800 --> 00:06:56,400
रहा है सनातन विरोधी ताकतों के द्वारा

89
00:06:56,400 --> 00:07:02,400
तो जब जब ऐसा होगा [गला साफ़ करने की आवाज़] तबत

90
00:07:02,400 --> 00:07:06,800
भगवान की कृपा से कोई ना कोई शिवश कोई ना कोई सनातन

91
00:07:06,800 --> 00:07:10,320
शंकर कोई ना कोई

92
00:07:10,320 --> 00:07:15,680
मनुवादी उठ खड़ा होगा

93
00:07:15,680 --> 00:07:19,120
जो अपने

94
00:07:19,120 --> 00:07:23,600
धर्म को क्षति पहुंचते हुए नहीं देख पाएगा।

95
00:07:23,600 --> 00:07:28,320
कई बार ऐसा हुआ मेरे साथ कि जब भी हम कोई

96
00:07:28,320 --> 00:07:32,640
ऐसा कार्य करने जा रहे होते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जिसमें

97
00:07:32,640 --> 00:07:36,960
कि रिस्क होता है जिसमें कि साहस दिखाना पड़ता है

98
00:07:36,960 --> 00:07:41,120
खतरा होता है तो वहां क्या होता है कि एक

99
00:07:41,120 --> 00:07:45,120
आवाज आती है कि भाई ये करना है कि नहीं करना है और

100
00:07:45,120 --> 00:07:49,120
करना है तो क्यों करना है क्या वो कारण है

101
00:07:49,120 --> 00:07:53,280
जो हम कर रहे हैं व्यक्तिगत क्या है तुम्हारा आखिरकार तुम

102
00:07:53,280 --> 00:07:57,440
एक समष्टि की लड़ाई को व्यष्टि के रूप में लेकर के और जो लड़ रहे हो तो

103
00:07:57,440 --> 00:08:00,800
तुम्हारा व्यक्तिगत क्या है?

104
00:08:00,800 --> 00:08:04,800
तो फिर वहां पर यही बात आती है कि सबको नहीं करना पड़े इसलिए किसी ना किसी एक को

105
00:08:04,800 --> 00:08:10,800
तो करना ही पड़ेगा। और दूसरी बात यह आती है

106
00:08:11,250 --> 00:08:13,600
[खांसने की आवाज़]

107
00:08:13,600 --> 00:08:17,920
कि और उस समय हमारे पास

108
00:08:17,920 --> 00:08:22,160
एक ही सहारा होता है ऐसे कठिन रास्तों पर चलते हुए

109
00:08:22,160 --> 00:08:27,680
हमारे साथ शिवनाथ तो किस बात की चिंता हमें

110
00:08:27,680 --> 00:08:32,080
तो

111
00:08:32,080 --> 00:08:38,080
शिवश भैया क्या

112
00:08:39,120 --> 00:08:43,920
अद्विज शंकर भाष्य पढ़ सकते हैं।

113
00:08:43,920 --> 00:08:47,520
हिंदी अर्थ तो पढ़ ही सकते हैं।

114
00:08:47,520 --> 00:08:53,520
गुरुदेव ने ही कहा है।

115
00:08:59,070 --> 00:09:01,600
[गला साफ़ करने की आवाज़]

116
00:09:01,600 --> 00:09:07,600
ठीक है। मुझे लग रहा है उनको कुछ समय लग रहा है। आने में

117
00:09:29,040 --> 00:09:33,280
हां

118
00:09:33,280 --> 00:09:38,480
तो ये पूछ रहे हैं

119
00:09:38,480 --> 00:09:44,080
आप कौन सी स्टेट से हो? मैं उत्तर प्रदेश से हूं।

120
00:09:44,080 --> 00:09:50,080
लखनऊ

121
00:09:50,640 --> 00:09:55,120
हां भाष्य पढ़ सकते हैं। गुरुदेव ने बताया है।

122
00:09:55,120 --> 00:09:59,920
हिंदी पढ़ने में कोई दोष नहीं है।

123
00:09:59,920 --> 00:10:05,120
ये बेस्ट कमेंट है अभी तक का।

124
00:10:05,120 --> 00:10:09,520
इस सब से मेरा खून बढ़ता है। जब

125
00:10:09,520 --> 00:10:13,760
सामने वाला जो द्वंदी है

126
00:10:13,760 --> 00:10:17,920
जब सामने वाला तर्क ना करके

127
00:10:17,920 --> 00:10:22,160
निराधार आरोप प्रत्यारोप चालू करता है। तुम यह हो तुम वो हो

128
00:10:22,160 --> 00:10:26,160
तो उससे क्या होता है? वह हमारी विजय का द्योतक है। जब वह तर्क नहीं कर

129
00:10:26,160 --> 00:10:30,320
रहा है, वह अपनी चीजों को एक्सप्लेनेशन के साथ नहीं रखना

130
00:10:30,320 --> 00:10:34,320
चाहता है। निर्णायक हो रहा है कि तुम अंधे हो, तुम यह हो, तुम वो

131
00:10:34,320 --> 00:10:38,400
हो। इसका अर्थ क्या हुआ? उसके पास हमसे लोहा लेने

132
00:10:38,400 --> 00:10:43,440
का सामर्थ्य नहीं है। और तब वह ऐसा करता है कि अरे तू यह है।

133
00:10:43,440 --> 00:10:47,520
उनके यहां पर जोंबीज बनाए जाते हैं। अंधा गधा, अंधा गधा,

134
00:10:47,520 --> 00:10:48,560
अंधा गधा, अंधा

135
00:10:48,560 --> 00:10:53,440
गधा उनको ही अंधा गधा बना दिया गया है।

136
00:10:53,440 --> 00:10:59,440
रामपाल के यहां और [गला साफ़ करने की आवाज़]

137
00:11:01,280 --> 00:11:06,080
भैरव जी इस प्रकार के प्रश्न आप ना आचार्य श्री से किया करें।

138
00:11:06,080 --> 00:11:10,320
अगर हमारी आचार वाणी आचार्य मुख से सुनेंगे

139
00:11:10,320 --> 00:11:16,320
निराकरण तो वो ज्यादा उचित होगा।

140
00:11:17,440 --> 00:11:23,120
हां जी हां जी पढ़ सकते हैं।

141
00:11:23,120 --> 00:11:27,200
दीक्षित [गला साफ़ करने की आवाज़] जी

142
00:11:27,200 --> 00:11:33,200
एक मिनट मैं जरा देख लूं।

143
00:12:45,040 --> 00:12:45,540
तो

144
00:12:45,120 --> 00:12:48,080
तो

145
00:12:48,080 --> 00:12:52,080
अच्छा दो तीन चीजें मैं बता देता हूं जब तक लोग

146
00:12:52,080 --> 00:12:56,160
जॉइ कर रहे हैं कि पहली चीज चीज है

147
00:12:56,160 --> 00:13:00,400
रामपाल ने शायद अपने वीडियो में यह कहा है कि वह चैनल

148
00:13:00,400 --> 00:13:05,840
की व्यवस्था वह करेगा और वह जो है अ

149
00:13:05,840 --> 00:13:10,000
चर्चा के लिए तैयार है हम तो रामपाल

150
00:13:10,000 --> 00:13:14,320
सबसे पहली बात तो यह है कि क्या तू मूर्ख व्यक्ति है क्या भाई

151
00:13:14,320 --> 00:13:18,320
और या तेरे चेले मूर्ख है हां अरे

152
00:13:18,320 --> 00:13:22,320
भाई हमने घोषणा पहले ही की हुई है कि भाई चर्चा कब करोगे बताओ और विषय भी

153
00:13:22,320 --> 00:13:25,280
बताए हुए हैं उसमें

154
00:13:25,280 --> 00:13:29,360
तो फिर इस प्रकार की घोषणा करने का अर्थ

155
00:13:29,360 --> 00:13:33,680
क्या हुआ? जब पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि भाई चर्चा के लिए कोई तैयार है।

156
00:13:33,680 --> 00:13:38,160
तुम्हें तो अपने चेलों के द्वारा हमसे संपर्क करवाना करना चाहिए था।

157
00:13:38,160 --> 00:13:42,720
सिंपल और या फिर तुम्हारे चेले तुमको मूर्ख बनाते हैं। तुमको

158
00:13:42,720 --> 00:13:46,720
शायद 10 20 फीट के कमरे में बंद रखते हैं। और बाहर की दुनिया से तुम अनजान हो

159
00:13:46,720 --> 00:13:50,800
क्या रहा है? तुम्हारी थूथू हो रही है जगह-जगह।

160
00:13:50,800 --> 00:13:53,600
खैर

161
00:13:53,600 --> 00:13:57,760
तुमने जो बोला है ना अपने किताबों में अश्लील

162
00:13:57,760 --> 00:14:02,400
बातें की है ना दुर्गा मैया के बारे में शिव जी के बारे में

163
00:14:02,400 --> 00:14:06,560
हमारे भगवान के बारे में कृष्ण के बारे में विष्णु के बारे में

164
00:14:06,560 --> 00:14:10,960
तो जहर उगला है ना तो कोई ना कोई दिन आने वाला है तुम्हारी थूथू

165
00:14:10,960 --> 00:14:14,960
तो अभी तो हो ही रही है अभी और होना बाकी है अभी तो यहां कोर्ट के चक्कर

166
00:14:14,960 --> 00:14:19,040
लगाने हैं तुम्हें। खैर तुम्हारी जो तमन्ना जागी है ना चैनल की या तुमने

167
00:14:19,040 --> 00:14:23,360
अपने लोगों को सुनाने के लिए जो बेवकूफ बनाया है। है ना?

168
00:14:23,360 --> 00:14:27,360
तो तुम कर लो। तुम्हारा ये जो चैलेंज

169
00:14:27,360 --> 00:14:31,840
है वो एक्सेप्ट है। सुन लो क्लियर। रामपाल

170
00:14:31,840 --> 00:14:35,920
तुम्हारा चैलेंज एक्सेप्ट है। अब आप

171
00:14:35,920 --> 00:14:39,920
बताइए कौन से दिन आप चैनल की व्यवस्था कर

172
00:14:39,920 --> 00:14:44,160
रहे हैं? दिल्ली में। दिल्ली में ही करोगे ना चैनल की व्यवस्था।

173
00:14:44,160 --> 00:14:48,400
न्यूट्रल जगह हो जाएगी दिल्ली। तो दिल्ली में चैनल की व्यवस्था

174
00:14:48,400 --> 00:14:52,480
करो। कौन से दिन कर रहे हो और कौन से चैनल पर कर रहे हो? यह

175
00:14:52,480 --> 00:14:57,760
सारी सूचनाएं प्रदान करो। और हम पहुंचते हैं तुम्हारे मुंह पर टेप लगाने के लिए।

176
00:14:57,760 --> 00:15:00,000
हां।

177
00:15:00,000 --> 00:15:05,600
लव पंडित जी। आपसे बात कर लेते हैं।

178
00:15:05,600 --> 00:15:10,080
ठीक है? बाकी एक पर्सनल

179
00:15:10,080 --> 00:15:14,160
परामर्श और है तुम्हारे लिए कि रही सही जो बची खुची जो

180
00:15:14,160 --> 00:15:18,160
दो चार मंद बुद्धियों के बीच में जो इमेज है अगर उसको

181
00:15:18,160 --> 00:15:22,240
बचाना चाहते हो तो मत पड़ो चक्कर में कोई

182
00:15:22,240 --> 00:15:26,400
है नहीं टक्कर में ज्यादा से ज्यादा 510 मिनट होंगे और

183
00:15:26,400 --> 00:15:30,480
तुम्हारा बोलती बंद हो जाएगी लिख के

184
00:15:30,480 --> 00:15:34,480
दे रहा हूं अभी नोट कर लेना इसको 510 मिनट बोलती

185
00:15:34,480 --> 00:15:38,480
बंद और जब मैं ये कहता हूं हूं ना 510 मिनट तो 510 मिनट ही

186
00:15:38,480 --> 00:15:44,080
होते हैं। फिर उसके बाद फिर अभी व्यक्ति अब अगर कोई भी चर्चा

187
00:15:44,080 --> 00:15:48,080
हमारे विरोधी के साथ आज तक कई

188
00:15:48,080 --> 00:15:52,240
घंटों तक चली तो वो इसलिए चली कि हम चाहते हैं कि वह

189
00:15:52,240 --> 00:15:57,600
चले जिससे कि कई और नई चीजें लोगों को सुनाई दे जाए।

190
00:15:57,600 --> 00:15:59,760
वरना

191
00:15:59,760 --> 00:16:04,240
सामर्थ्य ऐसी है कि टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन।

192
00:16:04,240 --> 00:16:08,400
समझ गए? अगर हम चाहे तो किसी भी चर्चा को 510 मिनट के अंदर

193
00:16:08,400 --> 00:16:14,400
ही समाप्त करने का सामर्थ रखते हैं। गुरु गोविंद और ग्रंथ की कृपा से।

194
00:16:14,640 --> 00:16:18,720
यह सब नोट कर लो और फिर अपना ढंडस बनाओ। अपनी वो कौन

195
00:16:18,720 --> 00:16:22,800
सी दवाई ववाई पिलाते हो अपने उनको पिछड़े हुए लोगों को जो पागल

196
00:16:22,800 --> 00:16:25,120
हो जाते हैं सोचने समझने की

197
00:16:25,120 --> 00:16:30,000
शक्ति क्षीण हो जाती है हम

198
00:16:30,000 --> 00:16:34,160
तो [गला साफ़ करने की आवाज़] 510 मिनट ही लगेंगे मुझे तुम्हारा मुंह

199
00:16:34,160 --> 00:16:38,240
बंद करने में और जिसजिस को कहा है आज तक 510 मिनट की

200
00:16:38,240 --> 00:16:42,560
बात उसको 510 मिनट में बंद किया भी है और जिसजिस की चर्चा लंबी

201
00:16:42,560 --> 00:16:46,640
चली है तो हमारा रहम होता है चर्चा लंबी चलाना समझ रहे हो हमारा

202
00:16:46,640 --> 00:16:50,640
रहमोकरम होता है वो [हंसी] ठीक है

203
00:16:50,640 --> 00:16:54,880
कि हम कुछ देना चाहते हैं समाज को तो इसलिए छूट

204
00:16:54,880 --> 00:16:58,880
देते हैं चलो इस बारे में बात की जाए ऐसे ऐसे चला

205
00:16:58,880 --> 00:17:03,680
जाए आगे चला जाए है ना

206
00:17:03,680 --> 00:17:08,160
वो हमारी छूट होती है रहम होता है हमारा

207
00:17:08,160 --> 00:17:12,160
जो हम करते हैं सामने वाले पर और वो इसलिए करते हैं

208
00:17:12,160 --> 00:17:17,120
कि एक तो सामने वाले को थोड़ा सा और लंबा वो

209
00:17:17,120 --> 00:17:21,600
ले जाकर के जो है घुमाया फिराया जाए और फिर लास्ट में उसको दिया जाए।

210
00:17:21,600 --> 00:17:25,600
जैसे एक भव्य राधा कृष्ण दास था। हम चाहते तो उसकी उसके साथ जो

211
00:17:25,600 --> 00:17:29,920
चर्चा शुरू हुई थी वो पांच 10 मिनट में तीन टर्म खत्म

212
00:17:29,920 --> 00:17:33,920
पर दूसरे दूसरे टॉपिक उठाए जो अब तक नहीं डिस्कशन हुआ था जिन टॉपिक्स

213
00:17:33,920 --> 00:17:37,920
पर वो उठाए और उन पर बात करते हुए तब जाकर

214
00:17:37,920 --> 00:17:42,160
के जब अच्छे से वह उसमें टूट

215
00:17:42,160 --> 00:17:46,640
चुका था तब हम अपना वो लाए लो भाई

216
00:17:46,640 --> 00:17:47,360
टू स्टॉप द

217
00:17:47,360 --> 00:17:53,360
ट्रेन पुल द और

218
00:17:55,040 --> 00:17:58,400
अनिकेत जी आ चुके हैं।

219
00:17:58,400 --> 00:18:02,720
ठीक है। और जो

220
00:18:02,720 --> 00:18:06,880
अलंकारी बच्चा आया था हमारी लाइव में उसके साथ भी यही

221
00:18:06,880 --> 00:18:11,120
था। हम चाहते तो जहां पर भी अटकने वाली बातें थी धक्का

222
00:18:11,120 --> 00:18:15,440
स्वीकार कर लिया वहीं पर जो है

223
00:18:15,440 --> 00:18:21,440
निर्णय हो गया कि

224
00:18:21,760 --> 00:18:25,840
भगवान का अवतार वहां पर सिद्ध हो गया जहां पर धक्का स्वीकार कर लिया और धक्का

225
00:18:25,840 --> 00:18:30,000
उसने स्वीकार किया ही था। हम अटके नहीं कि चलो और इसके जो जो प्रश्न है

226
00:18:30,000 --> 00:18:33,760
उनके जवाब देता चलो।

227
00:18:33,760 --> 00:18:38,000
ईश्वर का सृष्टि बनाने के लिए जड़

228
00:18:38,000 --> 00:18:42,880
पदार्थों को मूव कराने के लिए उसका अवतार

229
00:18:42,880 --> 00:18:47,120
मानना ही पड़ेगा। भले ही आंखों का विषय ना हो पर अवतार मानना

230
00:18:47,120 --> 00:18:51,280
पड़ेगा। कहीं किसी भी अवस्था में सीधी सी सरल सी

231
00:18:51,280 --> 00:18:57,280
बात है। कहीं किसी भी

232
00:18:57,600 --> 00:19:01,840
लव जी पंडित जी लव पंडित जी आप

233
00:19:01,840 --> 00:19:06,240
जो है ना

234
00:19:06,240 --> 00:19:10,240
अभी हमारी जब चर्चा हो जाएगी हम आपको बोलेंगे तब आप जुड़ जाइएगा। अभी आपका कोई

235
00:19:10,240 --> 00:19:14,320
काम नहीं है। पहले हमारा जो मुख्य उद्देश्य है वह हो जाए। उसके

236
00:19:14,320 --> 00:19:18,880
बाद हम आपको ले लेंगे। ठीक है? तब तक आप

237
00:19:18,880 --> 00:19:24,880
दर्शक की भक्त देखिए।

238
00:19:26,720 --> 00:19:32,400
सनातन शंकर जी आ गए। अच्छा नहीं आए।

239
00:19:32,400 --> 00:19:36,240
अच्छा अनिकेत जी चले गए।

240
00:19:36,240 --> 00:19:40,320
अनिकेत जी आप क्यों चले गए? मैंने तो लव पंडित को मना किया था। वह एक

241
00:19:40,320 --> 00:19:45,040
और हैं जो आए हैं आज। खैर सनातन

242
00:19:45,040 --> 00:19:49,280
शंकर जी को ले लेते हैं। जय श्री राम। जय

243
00:19:49,280 --> 00:19:53,840
श्री राम। जय श्री राम जी। हर हर महादेव।

244
00:19:53,840 --> 00:19:58,720
अच्छा मुझे जो है मैं तो भूल ही गया था। मेरे पास

245
00:19:58,720 --> 00:20:04,720
ये हेडफोन है एक।

246
00:20:04,960 --> 00:20:09,280
हां जी। आवाज आ रही है मेरी? सबको साफ सुन। आ

247
00:20:09,280 --> 00:20:12,720
रही है।

248
00:20:12,720 --> 00:20:18,720
आ रही है। हां हां आ रही है।

249
00:20:30,560 --> 00:20:35,120
आ रही है आवाज? जी जी नहीं

250
00:20:35,120 --> 00:20:38,160
आ रही है आ रही है।

251
00:20:38,160 --> 00:20:44,160
अच्छा छोड़ते हैं इसको रहने देते हैं। अभी हमें तो आ रही है आवाज।

252
00:20:46,080 --> 00:20:52,080
बोलिए कुछ? हां आ रही है आपकी आवाज।

253
00:20:52,560 --> 00:20:57,200
हां तो लव पंडित जी अभी आप बाहर रहिए।

254
00:20:57,200 --> 00:21:01,200
अभी जब हमारी जो मुख्य विषय है वो जब पूरा हो जाएगा तो हम आपको ले लेंगे।

255
00:21:01,200 --> 00:21:05,360
लव पंडित जी के कुछ सवाल हैं। विरोधाभासी

256
00:21:05,360 --> 00:21:07,600
विरोधी

257
00:21:07,600 --> 00:21:12,400
कुछ सिद्ध करना है लव पंडित जी को हमारे विरोध में। अच्छा

258
00:21:12,400 --> 00:21:17,600
तो सुबह इनको वर्णाश्रम को लेकर के कुछ शंकाएं थी विरोधी।

259
00:21:17,600 --> 00:21:21,600
तो वह हमने उस समय दूर कर दी थी फोन पर

260
00:21:21,600 --> 00:21:25,760
आधे घंटे में बालक हैं यह 17 वर्ष की आयु है इनकी

261
00:21:25,760 --> 00:21:31,760
अब ये बोले नहीं नहीं नहीं मुझे जो है ओखली में सर देना है इस तरह का कुछ

262
00:21:31,760 --> 00:21:35,760
तो मैंने कहा भाई आप जो है बहुत छोटे हैं फिर अवमानना होती

263
00:21:35,760 --> 00:21:40,000
है फिर क्या कहते हैं फिर

264
00:21:40,000 --> 00:21:44,080
लोग कहते हैं भाई इतने छोटे बालक से क्यों भिड़े हालांकि मुझे किसी से भी बात

265
00:21:44,080 --> 00:21:48,160
करने में ये रहता है कि अगर उससे बातें होंगी और कुछ चीजें होंगी

266
00:21:48,160 --> 00:21:52,160
तो वो सामने जो देखने वाले लोग होंगे उनको समझ में आएगा कुछ है

267
00:21:52,160 --> 00:21:56,160
ना तो बातचीत करने से क्या होता है वन साइडेड गेम नहीं होता

268
00:21:56,160 --> 00:22:00,480
है जो जैसे बोबड़ा सोल बनाया करता है अभी आने वाला है बोबड़ा

269
00:22:00,480 --> 00:22:01,120
सोल हमारे

270
00:22:01,120 --> 00:22:07,120
चैनल पे अनिकेत जी जय श्री राम

271
00:22:10,320 --> 00:22:14,160
जय श्री राम अनिकेत जी

272
00:22:14,160 --> 00:22:18,480
जी जी जय जय श्री राम जय श्री राम आवाज आ रही है मेरी?

273
00:22:18,480 --> 00:22:24,080
जी जी आ रही बात

274
00:22:24,080 --> 00:22:28,400
[गला साफ़ करने की आवाज़] तो

275
00:22:28,400 --> 00:22:34,400
वही है कि बोबड़ा सोल जैसे

276
00:22:34,720 --> 00:22:38,880
लोग होते हैं कुतर्की उनको भी उत्तर मिल जाते हैं। अच्छा

277
00:22:38,880 --> 00:22:41,520
तो अभी

278
00:22:41,520 --> 00:22:45,520
अह मैं एक बात कह रहा था कि

279
00:22:45,520 --> 00:22:49,520
जैसे आर्य समाज मानता है कि जो अवतार है वो

280
00:22:49,520 --> 00:22:53,600
उनकी भाषा में कहे तो अल्पज्य होता है। है ना?

281
00:22:53,600 --> 00:22:57,920
सीमित होता है। अल्पज्य का मतलब सीमा सीमा हो गई उसकी। तो

282
00:22:57,920 --> 00:23:01,440
ईश्वर कभी भी

283
00:23:01,440 --> 00:23:06,000
मनुष्य के व्यवहार में आया कि नहीं आया? सीधी बात

284
00:23:06,000 --> 00:23:10,880
संपर्क में आए बिना शिक्षित नहीं हो सकता मनुष्य

285
00:23:10,880 --> 00:23:15,040
है ना वो दयानंद जी ने ही लिखा है सत्यार्थ प्रकाश

286
00:23:15,040 --> 00:23:19,120
में शिक्षित नहीं हो सकता और वहां पर किसी ना

287
00:23:19,120 --> 00:23:23,280
किसी गुरु की आवश्यकता ही पड़ेगी ही यह भी माना उन्होंने

288
00:23:23,280 --> 00:23:27,440
अपने से नहीं हो सकता तो क्यों अगर

289
00:23:27,440 --> 00:23:32,400
उसकी जो

290
00:23:32,400 --> 00:23:36,640
लव पंडित जी आप बार-बार प्रया प्रयास ना करें जुड़ने

291
00:23:36,640 --> 00:23:40,640
का। अभी आप बाहर रहें। जब हमारा यह हो जाएगा जो

292
00:23:40,640 --> 00:23:45,920
मुख्य उद्देश्य है वो बात हो जाएगी तब हम आपको ले लेंगे। तब आप जुड़िएगा।

293
00:23:45,920 --> 00:23:51,920
तो यदि वह अल्पज है तो उसके व्यवहार में अनंत कैसे आएगा?

294
00:23:52,000 --> 00:23:56,080
नहीं आएगा। तो किसी ना किसी प्रकार से

295
00:23:56,080 --> 00:24:00,320
मनुष्य के व्यवहार में जब ईश्वर आएगा

296
00:24:00,320 --> 00:24:04,880
तो वह अवतरित होगा। अवतार लेगा। एक ऐसा रूप धारण करेगा कि वह

297
00:24:04,880 --> 00:24:07,280
सीमित

298
00:24:07,280 --> 00:24:11,360
सीमित अल्पज्य जो जीव है मनुष्य

299
00:24:11,360 --> 00:24:15,440
है उसकी उसके व्यवहार का विषय बन सके। सीधी

300
00:24:15,440 --> 00:24:19,600
सी बात है। यहीं पे सब कहानी खत्म हो जाती है।

301
00:24:19,600 --> 00:24:23,760
आप खुद ही मानते हो कि जीव जो है अल्पज है और ईश्वर जो है वो सर्वज्ञ

302
00:24:23,760 --> 00:24:28,160
है। तो अल्पज यानी सीमित सर्वज्ञ यानी अनंत।

303
00:24:28,160 --> 00:24:32,320
तो वो कैसे आएगा व्यवहार में? एक बहुत साधारण सा है। उसमें आप

304
00:24:32,320 --> 00:24:36,320
और हां मैंने देखा है कि इनके तरह-तरह के कयास वाले लोग

305
00:24:36,320 --> 00:24:40,400
यह कह रहे हैं कि ईश्वर जो है वो जैसे विद्युत जो है पंखा चला देती है।

306
00:24:40,400 --> 00:24:44,400
पंखे में जाती है तो पंखा घूमता है। जबकि बल्ब में जाती है तो बल्ब जलता

307
00:24:44,400 --> 00:24:47,520
है। यह सब कुतर्क कर रहे हैं। अरे भाई

308
00:24:47,520 --> 00:24:51,680
बात हो रही है कि अलग-अलग उपकरणों में

309
00:24:51,680 --> 00:24:56,640
जो विद्युत होती है, उसका जो स्तर होता है,

310
00:24:56,640 --> 00:25:00,880
है ना? मारक क्षमता मान लो जो क्षमता होती है वो अलग-अलग

311
00:25:00,880 --> 00:25:04,880
होती है। 100 वाट के बल्ब में आप वो हीटर वाली

312
00:25:04,880 --> 00:25:10,000
वाली पावर नहीं दे देते हो तो सीमित

313
00:25:10,000 --> 00:25:14,080
बल्ब के अनुसार सीमित क्षमता वाली विद्युत होती है बल्ब

314
00:25:14,080 --> 00:25:18,080
में जो जाती है तब बल्ब चलता है नहीं तो फट जाता है। वोल्टेज ज्यादा होते हैं तो फ्यूज हो

315
00:25:18,080 --> 00:25:22,960
जाता है कि नहीं? बल्ब खराब हो जाता है ना? हां।

316
00:25:22,960 --> 00:25:27,200
तो दुनिया में यदि निश्चित अनुपात में भगवान की शक्ति प्राप्त

317
00:25:27,200 --> 00:25:31,200
हो रही है जड़ पदार्थों को निश्चित अनुपात में तो वहां पर भगवान

318
00:25:31,200 --> 00:25:35,520
अवतार ले रहे हैं। ऐसा अवतार जो अलग-अलग जड़

319
00:25:35,520 --> 00:25:39,840
पदार्थों के व्यवहार का विषय अलग-अलग रूप में बने।

320
00:25:39,840 --> 00:25:43,840
कम ज्यादा रूप में बने। ठीक है? बात यह नहीं

321
00:25:43,840 --> 00:25:48,240
हो रही कि अलग-अलग प्रकार का कार्य कैसे हो रहा है। बात यह हो रही है अलग-अलग क्षमता

322
00:25:48,240 --> 00:25:52,240
वाले कार्य कैसे हो रहे हैं। क्षमता क्षमता अलग-अलग

323
00:25:52,240 --> 00:25:56,960
हो रही है। सीमित हो रही है क्षमता और सीमित नहीं करेंगे तो

324
00:25:56,960 --> 00:26:01,920
जहां भी लगेगा अनंत बल लगेगा। अनंत बल लगेगा। कुछ होगा ही नहीं।

325
00:26:01,920 --> 00:26:02,560
इन बातों

326
00:26:02,560 --> 00:26:06,640
अच्छा इनका ईश्वर धक्का लगाता है। अरे

327
00:26:06,640 --> 00:26:11,280
ठीक है भैया नहीं लगाता। क्या लगाता है वह बता दो ना। वह नहीं बताएंगे।

328
00:26:11,280 --> 00:26:15,200
वही अचंत

329
00:26:15,200 --> 00:26:19,360
जैसे जीव जो है इच्छा करता है और जो है वह सूक्ष्म शरीर काम

330
00:26:19,360 --> 00:26:23,520
करता है। जैसे जीव इच्छा करता है

331
00:26:23,520 --> 00:26:27,600
वो वाला शरीर काम करता है। अरे भाई तो हम तो कह ही रहे हैं ना कि

332
00:26:27,600 --> 00:26:32,080
भैया माया है अद्वैत है। हम

333
00:26:32,080 --> 00:26:36,800
इसलिए काम करता है। मान लो हमारी बात। वो मान ही नहीं रहे।

334
00:26:36,800 --> 00:26:40,880
और जब ये मानोगे तो अवतार भी मान लो। और अगर वह भी नहीं मान

335
00:26:40,880 --> 00:26:45,040
रहे, सत्य ही मान रहे हो तो सत्य से बता दो जड़ पदार्थों को धक्का कैसे लगा? ईश्वर

336
00:26:45,040 --> 00:26:49,120
ने इच्छा की। भाई इच्छा किस रूप में प्राप्त हुई जड़ पदार्थों

337
00:26:49,120 --> 00:26:53,200
को? और एक है अवतार का अवतार का

338
00:26:53,200 --> 00:26:58,000
एक और है कि

339
00:26:58,000 --> 00:27:02,000
इस समय राइट नाउ क्या ईश्वर मेरे व्यवहार का

340
00:27:02,000 --> 00:27:06,160
विषय है? नहीं है। क्या इस जड़ पदार्थ

341
00:27:06,160 --> 00:27:10,320
के व्यवहार का विषय है? नहीं है। नहीं है ना?

342
00:27:10,320 --> 00:27:15,440
मगर एक समय ऐसा यानी ईश्वर का मौलिक स्वरूप क्या हो गया?

343
00:27:15,440 --> 00:27:20,960
ईश्वर का वास्तविक मौलिक स्वरूप हुआ व्यवहार में ना आ सकने वाला। सिंपल

344
00:27:20,960 --> 00:27:25,440
यही तो हुआ। तो जब भी कभी सृष्टि बनी,

345
00:27:25,440 --> 00:27:29,840
जब भी कभी सृष्टि रचना हुई तो ईश्वर व्यवहार में आया।

346
00:27:29,840 --> 00:27:35,440
जब भी कभी वेद का ज्ञान दिया गया ऋषियों को ईश्वर व्यवहार में आया।

347
00:27:35,440 --> 00:27:39,440
तो मौलिक स्वरूप क्या है? व्यवहार में ना आ सकने वाला। व्यवहार में

348
00:27:39,440 --> 00:27:43,600
आ गया। अवतार हो गया। कैसे आएगा? परिवर्तनशील मान

349
00:27:43,600 --> 00:27:48,000
लो या तो कि ईश्वर परिवर्तित हुआ। परिवर्तित हुआ तो शाश्वत

350
00:27:48,000 --> 00:27:52,000
नहीं रहा। खत्म। तो मानोगे कि वह वही की वही एज इट इज

351
00:27:52,000 --> 00:27:56,080
है। व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप अभी भी व्याप्त है। अब एक

352
00:27:56,080 --> 00:28:00,160
और रूप है जो व्यवहार में आ रहा है। जो ज्ञान दे

353
00:28:00,160 --> 00:28:04,240
रहा है चार ऋषियों को जो षष्ठी रचना कर रहा है। क्यों भाग रहे हो

354
00:28:04,240 --> 00:28:08,240
यार सच्चाई से? सिंपल है और

355
00:28:08,240 --> 00:28:12,640
इतना ज्यादा गहनता से जाकर के बता दिया कि ईश्वर जब एक निश्चित

356
00:28:12,640 --> 00:28:13,140
धक्का

357
00:28:13,040 --> 00:28:17,200
मार सकता है चीजों को चीजों के लिए छेपक बन सकता है। इतना

358
00:28:17,200 --> 00:28:21,840
इतना ज्यादा सबको समझ में आ चुका है। बच्चा समझ चुका है। अब

359
00:28:21,840 --> 00:28:27,200
मगर ये जो है ये हम नहीं मानेंगे।

360
00:28:27,200 --> 00:28:31,520
हमारी पास के पत्तों की इमारत डह जाएगी।

361
00:28:31,520 --> 00:28:35,840
नहीं तो फिर वो ईश्वर ही था। यह बताना पड़ेगा। है ना?

362
00:28:35,840 --> 00:28:40,240
जिसने ज्ञान दिया चार ऋषियों को वो ईश्वर ही था। यह बताना पड़ेगा।

363
00:28:40,240 --> 00:28:44,400
और आपको कैसे पता चला यह ज्ञान ईश्वर का ही है? तो आपने कवर करा ही हुआ है सारा

364
00:28:44,400 --> 00:28:48,720
कुछ उसमें। अच्छा वो मूवी आई थी उसमें उसमें

365
00:28:48,720 --> 00:28:52,800
हर एक चीज पे बात की हमने। हां उस

366
00:28:52,800 --> 00:28:56,880
वो बड़ी पसंद आई। सबने पसंद की है। हम

367
00:28:56,880 --> 00:29:01,200
बहुत पसंद की है वो। [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] तो

368
00:29:01,200 --> 00:29:05,200
अब आते हैं मुख्य विषय पर। 28 बज

369
00:29:05,200 --> 00:29:09,600
के 28 मिनट हो चुके हैं। लगभग 29 मान लो 29

370
00:29:09,600 --> 00:29:13,680
वे मिनट में हम लोग मुख्य विषय पर आते हैं। सबसे बड़ी बात है पहले मैं आपको वहां का

371
00:29:13,680 --> 00:29:17,760
वृतांत सुनाऊं वहां हुआ क्या था क्योंकि वहां से लेकर के अब तक

372
00:29:17,760 --> 00:29:21,760
मुझे वो समय नहीं मिल पाया जहां जब मैं जो है वहां का वो जो आंखों देखा

373
00:29:21,760 --> 00:29:26,800
एक्सपीरियंस है अच्छे से बैठकर के एक

374
00:29:26,800 --> 00:29:28,240
सहजता वाले

375
00:29:28,240 --> 00:29:32,320
उसमें मैं बता सकूं आपबीती क्या थी तो

376
00:29:32,320 --> 00:29:36,560
होता क्या है कि हम लोग ऋषिकेश पहुंचे तो इसी मकसद से थे कि भाई हमें बहुत बताया

377
00:29:36,560 --> 00:29:40,720
गया था कि वहां पाखंड बहुत हो रहा है यद्यपि हमें यह नहीं ऐसा

378
00:29:40,720 --> 00:29:44,880
मन में नहीं था कि हमें इस वाले मिल जाएंगे। उनहीं

379
00:29:44,880 --> 00:29:49,120
से शुरुआत हो गई ऋषिकेश में तो हम गए थे

380
00:29:49,120 --> 00:29:53,360
और सुबह सुबह हम लोग निकले थे शायद हम ओसो का

381
00:29:53,360 --> 00:29:57,440
ओशो का सेंटर ढूंढ रहे थे ओशो का और वहां पर क्या है योग के

382
00:29:57,440 --> 00:30:01,600
नाम पर नग्नता भी बहुत हो रही है वहां पर विजयश्री जी रहती हैं ऋषिकेश

383
00:30:01,600 --> 00:30:06,080
में तो उन्होंने बताया था यहां योग के नाम पर बहुत

384
00:30:06,080 --> 00:30:10,240
अश्लीलता फैल रही है। घाट पर भी बहुत ज्यादा यह नशेबाजी

385
00:30:10,240 --> 00:30:14,800
हो रही है। तो हमने कहा ठीक है चालू करते हैं

386
00:30:14,800 --> 00:30:18,800
कहीं पहुंचते हैं। एक वहां पर कोई एक Instagram और है उसके साथ

387
00:30:18,800 --> 00:30:22,880
और वार्ता हुई है वन ऑन वन तो वो शायद अगर

388
00:30:22,880 --> 00:30:27,280
कुछ काम का लगा तो बाद में डाला जाएगा वीडियो। तो

389
00:30:27,280 --> 00:30:31,280
हम लोग निकले थे सुबह-सुबह। हमने देखा कि वहां पर सीता

390
00:30:31,280 --> 00:30:35,280
घाट है। जहां जिस आश्रम में हम रुके थे भागीरथी धाम में

391
00:30:35,280 --> 00:30:39,520
उससे एक मतलब ऐसा रास्ता इसमें कार वगैरह

392
00:30:39,520 --> 00:30:43,360
नहीं जा सकती है और स्कूटी ज्यादा चलती है वहां पर ऋषिकेश

393
00:30:43,360 --> 00:30:48,080
में तो जैसे गंगा नदी ये बह रही है तो गंगा नदी

394
00:30:48,080 --> 00:30:52,400
गंगा मैया के ही तट से लगा हुआ भागीरथी धाम आश्रम है। बहुत अच्छा आश्रम

395
00:30:52,400 --> 00:30:56,400
है। और मैं तो कहूंगा सभी को एक एक बार

396
00:30:56,400 --> 00:31:00,880
वहां अवश्य जाना चाहिए। भागीरथी धाम और वहां जाकर के

397
00:31:00,880 --> 00:31:04,880
जब आप उसमें पीछे जाकर के उसमें अपने कमरे से गंगा मैया के दर्शन करते हैं

398
00:31:04,880 --> 00:31:08,960
आहा क्या आनंद आ जाता है वहां पर सबको

399
00:31:08,960 --> 00:31:11,920
जाना चाहिए एक बार

400
00:31:11,920 --> 00:31:14,720
तो

401
00:31:14,720 --> 00:31:17,040
अ

402
00:31:17,040 --> 00:31:21,040
तो यह जो गंगा मैया बह रही हैं इसके उस ओर जो है

403
00:31:21,040 --> 00:31:25,120
टिहरी गढ़वाल है अगर जिले की बात की जाए और इस तरफ

404
00:31:25,120 --> 00:31:29,120
पौड़ी गढ़वाल है और मेन जो सिटी एरिया है

405
00:31:29,120 --> 00:31:33,360
वो उस तरफ है। गंगा मैया के उस तरफ हम इस तरफ है। है पूरा

406
00:31:33,360 --> 00:31:37,600
ऋषिकेश ही कहा जाता है। जिले का अंतर पड़ता है। और

407
00:31:37,600 --> 00:31:42,400
आवागमन जो होता है ऋषिकेश में वो होता है

408
00:31:42,400 --> 00:31:46,400
अगर पैदल जाना है तो इस समय जो लक्ष्मण झूला है वह अभी बंद है।

409
00:31:46,400 --> 00:31:50,720
लक्ष्मण झूले के ही विकल्प के रूप में बगल में ही लक्ष्मण झूले के बजरंग सेतु

410
00:31:50,720 --> 00:31:54,720
बना हुआ है। तो उस पार जाने के लिए पैदल अगर आपको जाना है

411
00:31:54,720 --> 00:31:58,800
तो बजरंग सेतु से जाते हैं और बजरंग सेतु फिर

412
00:31:58,800 --> 00:32:02,880
इधर की ओर चले अगर बजरंग सेतु से तो बीच में ही इस पार

413
00:32:02,880 --> 00:32:06,960
हमारा आश्रम था जिसमें हम रुके थे भागीरथी धाम वो भी अद्वैत को ही मानने

414
00:32:06,960 --> 00:32:11,040
वाला आश्रम है अद्वैत परंपरा का ये और आगे चले अच्छा मैंने

415
00:32:11,040 --> 00:32:15,120
देखा उस आश्रम में भी स्कनिस्ट आकर के रुकते हैं हम जबकि मायावादियों

416
00:32:15,120 --> 00:32:19,760
की शक्ल देखना इनके लिए वो है [हंसी]

417
00:32:19,760 --> 00:32:23,760
मैं वो बाद में बताऊंगा इसनियों का सामना कैसे

418
00:32:23,760 --> 00:32:29,600
हुआ मुझे उसमें? खैर मैं आगे बढ़ा और

419
00:32:29,600 --> 00:32:30,100
आगे

420
00:32:30,080 --> 00:32:34,080
जब बढ़े तो फिर थोड़ी दूर बाद फिर है राम झूला। लक्ष्मण

421
00:32:34,080 --> 00:32:39,040
झूला फिर राम झूला। ये जो झूला है ना मतलब झूले का मतलब ये सेतु है।

422
00:32:39,040 --> 00:32:43,280
इस पार से उस पार के लिए। इसके बाद फिर आगे जाकर के

423
00:32:43,280 --> 00:32:47,360
लगभग 3 कि.मी. टोटल हो जाएगा इधर से इधर तक। तो लास्ट में

424
00:32:47,360 --> 00:32:51,520
जाकर के जानकी झूला है। तो जानकी झूला से आप बाइक

425
00:32:51,520 --> 00:32:55,920
लेकर उस पार जा सकते हो। कार के लिए तो और बड़ा राउंड मारना पड़ेगा। जानकी

426
00:32:55,920 --> 00:33:00,160
झूला से भी नहीं जा सकते। तो हम लोग उस पार जा रहे थे

427
00:33:00,160 --> 00:33:04,160
जहां विजय श्री जी ने हमको बताया था कि यहां यहां पे हमें जाना है स्पॉट

428
00:33:04,160 --> 00:33:08,560
देखने हैं। कहां-कहां पे हो रहा है ऐसा कार्य तो हम लोग निकले थे।

429
00:33:08,560 --> 00:33:12,640
रास्ते में मिल गया सीताघाट। हम लोग क्या हो रहा है? गंगा जी के इस तरफ अपने

430
00:33:12,640 --> 00:33:16,960
आश्रम से जानकी झूले की तरफ चल रहे हैं और बगल में अलग-अलग

431
00:33:16,960 --> 00:33:21,440
छोटे-छोटे से घाट पड़ रहे हैं। उनका अलग-अलग अपना नाम है।

432
00:33:21,440 --> 00:33:25,760
तो हमें दिखा सीता घाट। सीता घाट पर

433
00:33:25,760 --> 00:33:29,840
ओपनली इनके इनका जो है सभा चल रही है। यह अपनी

434
00:33:29,840 --> 00:33:34,560
बातें कर रहे हैं। सामान्य जन भी वहां पर बैठे हुए हैं।

435
00:33:34,560 --> 00:33:37,840
अब [गला साफ़ करने की आवाज़]

436
00:33:37,840 --> 00:33:41,840
अब जो है मैंने जैसे ही देखा तो मैंने कहा

437
00:33:41,840 --> 00:33:45,200
भाई यह लोग करते तो हैं ही। अब

438
00:33:45,200 --> 00:33:49,200
ऐसा तो नहीं यहां पर भी शिव जी का अपमान कर रहे हो। और मैंने देखा

439
00:33:49,200 --> 00:33:53,520
है कि अगर वास्तविकता में आप धरातल पर जाकर के इन लोगों को सुनोगे

440
00:33:53,520 --> 00:33:57,920
ना भले ही यह थोड़ा बहुत वो हो जाए

441
00:33:57,920 --> 00:34:03,360
जब क्या कहते हैं

442
00:34:03,360 --> 00:34:07,840
जब कैमरा चल रहा हो और ऑनलाइन वगैरह आते टाइम मंच पे ऐसे पब्लिकली

443
00:34:07,840 --> 00:34:12,080
सब कुछ बोलते टाइम जब वहां पे हो सकता है थोड़ा सॉफ्ट वो उसमें आ जाए

444
00:34:12,080 --> 00:34:17,120
वैसे आते नहीं है उसमें भी कॉमेडी मजाक उड़ाते हैं हमारी चीजों का पर

445
00:34:17,120 --> 00:34:22,160
धरात धरातल पे धरातल पे तो यह

446
00:34:22,160 --> 00:34:26,720
शास्त्रवाद जी को ऊपर जोड़ दीजिए। इसमें धरातल

447
00:34:26,720 --> 00:34:30,720
पे क्या होता है कि ये लोग इनका शायद

448
00:34:30,720 --> 00:34:34,800
ही कोई ऐसा लेक्चर रहता होगा जिसमें यह निंदा ना करें। जैसे आर्य

449
00:34:34,800 --> 00:34:38,880
समाज का है ना आर्य समाज का लगभग हर एक जो

450
00:34:38,880 --> 00:34:43,360
लेक्चर होगा लगभग या तो वह कोई पर्टिकुलर

451
00:34:43,360 --> 00:34:47,600
विषय की बात कर रहे हो कि कोई एक चैप्टर चल रहा है अगर जनरल उनको बोलना है

452
00:34:47,600 --> 00:34:51,840
कोई एक पर्टिकुलर उनका अध्याय नहीं है कि फलाने चैप्टर का फलाना

453
00:34:51,840 --> 00:34:56,240
फलाने ग्रंथ का फलाना अध्याय ऐसे नहीं है तो अगर वो जनरल

454
00:34:56,240 --> 00:35:00,320
लेक्चर दे रहे हैं तो उसमें बहुत चांसेस हैं कि

455
00:35:00,320 --> 00:35:04,560
पुराणों की अवमानना अवतार की अवमानना मूर्ति पूजा

456
00:35:04,560 --> 00:35:08,880
की अवमानना यह सब होनी है और हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों की अवमानना

457
00:35:08,880 --> 00:35:13,920
सब होनी है। उसी प्रकार से इस के जितने भी लेक्चर्स होते हैं

458
00:35:13,920 --> 00:35:17,920
उसमें जो शिव निंदा है वो थोड़े

459
00:35:17,920 --> 00:35:22,240
बहुत फेरबदल के साथ अच्छे शब्दों में कभी सॉफ्ट

460
00:35:22,240 --> 00:35:26,720
तरीके से है ना सॉफ्ट ब्रेन वाशिंग वो आपको मिल जाएगी।

461
00:35:26,720 --> 00:35:30,880
खैर मैंने वहां पर जब देखा और सुना

462
00:35:30,880 --> 00:35:35,120
मैंने जाकर के तो उसमें वह चीज आ गई जो मैं देख ही रहा था। अच्छा

463
00:35:35,120 --> 00:35:39,440
गीता का प्रचार प्रसार ये करते ही है जहां भी जाते हैं तो गीता तो बेचनी है इन्हें

464
00:35:39,440 --> 00:35:43,520
बांटनी है गीता तो फिर मेरे पास बहुत सी रीजनिंग्स

465
00:35:43,520 --> 00:35:48,400
हो गई कि भाई मैं वहां पर बोलूं अब वो उनका मंदिर तो था नहीं अपना

466
00:35:48,400 --> 00:35:52,800
है ना कि अपने मंदिर के अंदर कर रहे होते हालांकि यदि मंदिर सार्वजनिक

467
00:35:52,800 --> 00:35:57,840
है सबके आने का है तो हम तो वहां पर भी प्रश्न कर सकते हैं

468
00:35:57,840 --> 00:36:01,920
और मैंने विधिवत मर्यादा में रहते हुए प्रश्न किया कि

469
00:36:01,920 --> 00:36:06,160
आप ऐसा क्यों कर रहे हैं शिव जी की अब मानना क्यों करते हैं? गंगा माता

470
00:36:06,160 --> 00:36:10,320
के घाट पर बैठे हुए जिनकी जटाओं में गंगा बहती है उनकी

471
00:36:10,320 --> 00:36:14,000
ही अवमानना क्यों कर रहे हैं?

472
00:36:14,000 --> 00:36:15,600
तो उन्होंने पहले कहा कि

473
00:36:15,600 --> 00:36:19,680
ओ हमने क्या किया अवमानना ऐसे करके कुछ

474
00:36:19,680 --> 00:36:24,320
बताने लगे और फिर बोले कि शिवजी

475
00:36:24,320 --> 00:36:28,320
जो है वो वो तो परम वैष्णव है। तो मैंने वो वाला उदाहरण दिया कि

476
00:36:28,320 --> 00:36:32,320
भाई हरिदास ठाकुर को तो आपने यह कर दिया। परम वैष्णव भी नहीं रहने दिया शिव

477
00:36:32,320 --> 00:36:36,720
जी को। चलो मान लो कि परम वैष्णव परम वैष्णव करने लगते हो तो आप तो हरिदास

478
00:36:36,720 --> 00:36:40,880
ठाकुर से भी छोटा बना दे रहे हो उनको शिव जी को ऐसा क्यों कर रहे हो और जब

479
00:36:40,880 --> 00:36:45,410
छोटा कर रहे हो तो फिर परम वैष्णव कैसे सिद्ध होंगे वो खैर

480
00:36:45,410 --> 00:36:49,680
[गला साफ़ करने की आवाज़] अब जो है क्या होता है कि

481
00:36:49,680 --> 00:36:53,840
जब मैं जब उन्होंने कहा फिर वो आगे एक ये बोलने

482
00:36:53,840 --> 00:36:57,840
लगे कि वो उनके भक्त है तो मैंने

483
00:36:57,840 --> 00:37:02,080
कहा वो भी भक्त हैं। शिव जी के अगर शिव शिव जी अगर विष्णु

484
00:37:02,080 --> 00:37:06,160
जी के भक्त हैं तो क्या कहते हैं विष्णु जी भी शिव जी के भक्त हैं।

485
00:37:06,160 --> 00:37:10,400
और मैं उनको उदाहरण देने लगा। फिर वो बोले कि

486
00:37:10,400 --> 00:37:14,960
अगर एक दिन प्राइम मिनिस्टर ने झाड़ू लगा दी

487
00:37:14,960 --> 00:37:20,120
तो क्या प्राइम मिनिस्टर झाड़ू वाला बन गया?

488
00:37:20,120 --> 00:37:24,320
[गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा इसमें एक बहुत बड़ा वो है फिर लूप वो

489
00:37:24,320 --> 00:37:29,600
भी समझने वाली बात है कि श्री कृष्ण भगवान

490
00:37:29,600 --> 00:37:33,680
यदि भगवान शिव की भक्ति कर रहे हैं या विष्णु रूप उनका भगवान शिव की

491
00:37:33,680 --> 00:37:37,840
भक्ति कर रहे हैं वो हम बाद में बात करेंगे विष्णु और कृष्ण में भी भेद

492
00:37:37,840 --> 00:37:43,680
है वो बाद में बात करेंगे मगर शिव जी

493
00:37:43,680 --> 00:37:49,280
की भक्ति अगर कृष्ण जी कर रहे हैं तो वह लीला है क्योंकि

494
00:37:49,280 --> 00:37:53,360
कृष्ण भगवान ने कहा है कि मैं तो अपने भक्तों की भक्ति करता हूं। तो भैया शिव जी ने

495
00:37:53,360 --> 00:37:57,440
भी तो कहा है नारद पुराण में शिव जी ने कहा है हे

496
00:37:57,440 --> 00:38:01,840
गोविंद गोविंद भगवान विष्णु पूछते हैं कि आप किसका ध्यान लगा रहे हैं?

497
00:38:01,840 --> 00:38:05,840
तो वो कहते हैं हे गोविंद मैं किसी का ध्यान नहीं लगाता। वो वहां

498
00:38:05,840 --> 00:38:09,840
यही बात पूछ रहे आप तो देवों के देव महादेव है। आपको क्या जरूरत किसी का ध्यान लगाने

499
00:38:09,840 --> 00:38:13,920
की? तो वो बोल रहे हैं कि मैं तो लीला करता हूं नास्तिकों को प्रवृत्त करने के लिए।

500
00:38:13,920 --> 00:38:18,240
शिव पुराण में भी कह रहे हैं। जी तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] जब कृष्ण

501
00:38:18,240 --> 00:38:22,320
भगवान ने भक्ति की आपने भक्ति नहीं मानी क्योंकि कृष्ण भगवान ने कह दिया मैं

502
00:38:22,320 --> 00:38:26,400
तो अपने भक्तों की भक्ति करता हूं लीला करता हूं तो शिव भगवान ने भक्ति की तो शिव जी ने भी

503
00:38:26,400 --> 00:38:30,400
तो कह दिया वो क्यों नहीं मान रहे हो फिर उनकी केवल भक्ति ही क्यों मान रहे

504
00:38:30,400 --> 00:38:36,400
हो यहां पे क्या हो गया अर्ध कुकुट न्याय

505
00:38:36,960 --> 00:38:41,040
खैर ये वाली बात हो गई तो अब यहां पर मुझे पिंच

506
00:38:41,040 --> 00:38:45,040
हुआ जब उन्होंने ये वाला उदाहरण दे दिया ना कि वो कूड़ेदार से अगर वो

507
00:38:45,040 --> 00:38:49,040
हो जाए कूड़े ददार से तुलना कर कूड़ा कूड़ा उठाने वाले से झाड़ू लगाने

508
00:38:49,040 --> 00:38:53,200
वाले से तुलना कर दी शिव जी की तो यहां पर मुझे थोड़ा सा फिर हृदय

509
00:38:53,200 --> 00:38:57,200
को मुझे बुरा लगा फिर उन्होंने कुछ शायद कहीं पर बोला

510
00:38:57,200 --> 00:39:01,760
था भागवत में ऐसा है वैसा है कुछ तो मैंने तुरंत बोला पद्म पुराण का ये तो

511
00:39:01,760 --> 00:39:06,000
वो प्रमाण सुनने से पहले ही प्रमाण

512
00:39:06,000 --> 00:39:11,280
सुनने से पहले ही वो बोल पड़े कि पद्म पुराण लिखा किसने है

513
00:39:11,280 --> 00:39:15,280
व्यास जी ने लिखा है तो व्यास जी ने तो वो बोलने जा रहे थे तो

514
00:39:15,280 --> 00:39:19,680
फिर मैंने मेरे पास ब्रह्मास्त्र है। ज्यादा इधर-उधर

515
00:39:19,680 --> 00:39:23,760
नचाओगे तो हमारे पास राम है। धर्म स्थापना

516
00:39:23,760 --> 00:39:27,920
करने के लिए हमारे पास राम है। ज्यादा

517
00:39:27,920 --> 00:39:32,480
इधर-उधर की बात करोगे तो रामो विग्रह धर्म राम

518
00:39:32,480 --> 00:39:37,600
ने गायत्री मंत्र के द्वारा किसकी पूजा की? बताओ।

519
00:39:37,600 --> 00:39:41,600
अपने से अलग किसी तत्व की तो उस तत्व का

520
00:39:41,600 --> 00:39:46,320
नाम बताओ। अपने से अलग किसी तत्व की और

521
00:39:46,320 --> 00:39:50,560
अपने ही अपने ही स्वरूप की पूजा की कृष्ण की तो अद्वती

522
00:39:50,560 --> 00:39:52,320
हो जाओ

523
00:39:52,320 --> 00:39:56,400
ना तो तुम अद्वैती हो ना तुम शिव जी को मान रहे हो दूसरे तत्व को भी नहीं मान रहे

524
00:39:56,400 --> 00:40:00,480
हो गायत्री मंत्र का जाप किया ना भगवान ने और जगह जगह पर

525
00:40:00,480 --> 00:40:05,280
किया है कहां तक बचोगे [गला साफ़ करने की आवाज़] सबसे बच जाओगे

526
00:40:05,280 --> 00:40:09,280
पर मेरे राम से नहीं बच पाओगे है ना

527
00:40:09,280 --> 00:40:13,360
तो मैं वो बोलने ही जा रहा था तब तक उन्होंने इनको को बाहर करूं। मैंने कहा

528
00:40:13,360 --> 00:40:17,520
बाहर क्यों जाऊं? मेरी तुम्हारी प्रॉपर्टी थोड़ी ना है। क्यों जाऊं बाहर?

529
00:40:17,520 --> 00:40:21,520
अच्छा [नाक से की जाने वाली आवाज़] फिर उनके लोग आ गए भाई

530
00:40:21,520 --> 00:40:25,600
कि क्या किया? क्या किया? तो फिर अच्छा उन्होंने कहा कि आप अगर

531
00:40:25,600 --> 00:40:29,600
यही रहना है तो चुप बैठो। मैंने कहा चुप मैं बैठ रहा हूं। आप प्रवचन करो। मगर

532
00:40:29,600 --> 00:40:34,000
शिव जी के बारे में अनापशनाप बोलोगे भ्रमित करोगे मैं बोलूंगा।

533
00:40:34,000 --> 00:40:38,000
वहां पर मैंने यह भी कहा कि भैया मेरे इष्ट है। यद्यपि मेरे इष्ट राम जी

534
00:40:38,000 --> 00:40:42,240
है पर शिव जी के लिए मेरा हृदय धड़कता है। ऐसे छोटाई

535
00:40:42,240 --> 00:40:46,320
बड़ाई नहीं सुनूंगा मैं और फिर वहां पर मुझे बताना

536
00:40:46,320 --> 00:40:50,480
आवश्यक हो गया मेरे हृदय को ठेस पहुंच रही है शिव जी के लिए ऐसा सुनके

537
00:40:50,480 --> 00:40:54,640
क्योंकि उनमें भी मेरी वैसी ही बुद्धि है राम जी जैसी राम

538
00:40:54,640 --> 00:40:58,960
जी के रूप में मैं समस्त रूपों की पूजा करता हूं।

539
00:40:58,960 --> 00:41:03,040
पर ऐसा थोड़ी ना कि शिव जी के प्रति जो भगवान की दृष्टि है वह नहीं

540
00:41:03,040 --> 00:41:07,200
है। तो मैंने वहां पर कहा कि भाई मेरे इष्ट की अगर वह होगी निंदा

541
00:41:07,200 --> 00:41:07,700
तो

542
00:41:07,360 --> 00:41:11,600
मैं बोलूंगा। अब उनको पता नहीं क्या लगा कि शायद

543
00:41:11,600 --> 00:41:15,600
हमारा जो है प्रपंच जो है आगे पूर्ण हो नहीं पाएगा। हम जो करना चाह रहे

544
00:41:15,600 --> 00:41:19,920
हैं। तो ऐसा करो कि थोड़ा सा वो मतलब घबराने

545
00:41:19,920 --> 00:41:24,000
लगे इस चीज के मेरी वहां उपस्थिति से। फिर क्या हो रहा है कि दूसरे लोग आकर के उधर

546
00:41:24,000 --> 00:41:28,000
से वो कुतर्क करने लगे कि अरे यह है वो है तो मुझे उनको जवाब देना पड़ा।

547
00:41:28,000 --> 00:41:32,240
एक व्यक्ति कह रहा है शांत बैठो। तो मैं कह रहा हूं भाई अपने लोगों को बोल दो। वो

548
00:41:32,240 --> 00:41:37,440
अगर प्रश्न पूछेंगे तो मुझे उत्तर देना पड़ेगा ना। वो ना पूछे प्रश्न।

549
00:41:37,440 --> 00:41:41,440
वहां पर एक महिला भी आई मातृशक्ति भी आई। वो भी थोड़ा सा इस तरह

550
00:41:41,440 --> 00:41:45,600
की बात कर कर रही थी। बता रही थी कि शायद वो भी परेशान

551
00:41:45,600 --> 00:41:49,600
थी उस चीज से क्योंकि वो बोल रही थी कि हम लोग कैसे भेद कर सकते हैं।

552
00:41:49,600 --> 00:41:53,760
वो जबकि उन्हीं के साथ थी पर वो उन के साथ थी वो बैठी हुई

553
00:41:53,760 --> 00:41:57,840
थी उनके साथ। वो ये सब प्रश्न कर रही थी कि हम ये सब नहीं कर सकते। वो

554
00:41:57,840 --> 00:42:02,000
शायद मेरे आने से वो मेरा आना उनके लिए सकारात्मक

555
00:42:02,000 --> 00:42:06,400
था। शायद वह किसी विवशता के कारण उस टोली में शामिल

556
00:42:06,400 --> 00:42:11,120
थी। कोई कोई होता है ना संबंध का निर्वाह कर रहे हैं।

557
00:42:11,120 --> 00:42:15,280
तो शायद दबाव के कारण उस टोली में शामिल थी। पर उनके

558
00:42:15,280 --> 00:42:19,360
हृदय में अग्नि थी। जिस कारण से वहां वो वो मेरे [गला साफ़ करने की आवाज़] पक्ष

559
00:42:19,360 --> 00:42:22,560
में बोलने लगी। इससे ज्यादा और क्या प्रमाण होगा

560
00:42:22,560 --> 00:42:26,720
मूर्खों जो आप लोग ये जो बात जो

561
00:42:26,720 --> 00:42:30,800
बात वो बोल रही थी इस की तरफ से ऐसा लग रहा था कि वो

562
00:42:30,800 --> 00:42:34,800
इस की तरफ से बोल रही है लेकिन जो इस के जो ऑथराइज बंदे वहां

563
00:42:34,800 --> 00:42:38,960
बैठे हुए थे खड़े थे उनके मुख से वो बात नहीं निकली ये

564
00:42:38,960 --> 00:42:43,200
वहां पर बहुत नोट करने वाली बात है वो नहीं बोल सकते ना कि शिव और विष्णु

565
00:42:43,200 --> 00:42:47,280
में भेद नहीं कर सकते हम वो कह रही थी कि हां हम इंसान हो के

566
00:42:47,280 --> 00:42:51,840
कैसे भेद कर सकते हैं मतलब कि वो वो थोड़ा सा सॉफ्ट वे में

567
00:42:51,840 --> 00:42:56,080
मेरा पक्ष ले रही थी और उनका जो जिस टोली के साथ स्वयं थी

568
00:42:56,080 --> 00:43:00,160
उसका विरोध कर रही थी वो विरोध कर और इससे बड़ी और क्या

569
00:43:00,160 --> 00:43:04,160
बात होगी मूर्खों जो जिस टोली के जिस टोली

570
00:43:04,160 --> 00:43:08,400
का जो ये जो इस वाले जो बातें कर रहे हैं जिस टोली

571
00:43:08,400 --> 00:43:12,400
का तुम विरोध देख रहे हो जिस टोली के साथ तुम विवाद देख रहे हो उस टोली के

572
00:43:12,400 --> 00:43:16,560
साथ ही उपस्थित महिला वहां पर मौके पर और हमारा

573
00:43:16,560 --> 00:43:20,560
पक्ष ले रही है मौके पर वो वो महिला नहीं जिन्होंने बाद में कहा था

574
00:43:20,560 --> 00:43:24,800
सबका सबको भगा दिया एक अकेला सब पर भारी पड़ गया वो महिला नहीं

575
00:43:24,800 --> 00:43:29,920
आप जब वो देखिएगा वीडियो अभी तो खैर हट गया है हम लोगों ने मेल किया है

576
00:43:29,920 --> 00:43:34,160
और हम लोग जो है अभी आगे कानूनी कारवाई के बारे में बताएंगे

577
00:43:34,160 --> 00:43:38,160
तो [गला साफ़ करने की आवाज़]

578
00:43:38,160 --> 00:43:42,160
उस वीडियो में आप देखेंगे वो महिला उसी मौके पर ही जब मेरी बात औरों से चल

579
00:43:42,160 --> 00:43:46,320
रही तो वह मेरा पक्ष ले रही है कि हां हम हमें कोई अधिकार नहीं है

580
00:43:46,320 --> 00:43:50,400
शिव और विष्णु में भेद करने का। खैर अब यह सब होने

581
00:43:50,400 --> 00:43:54,560
लगा। एक व्यक्ति फिर इस पर आ गया कि तुम बकवास कर लो। तुम तो शायद

582
00:43:54,560 --> 00:43:58,640
कोई एक जानता होगा मुझे तो वो कहने लगा अरे ये तो

583
00:43:58,640 --> 00:44:02,640
YouTube बनाते हैं। तो मुझसे कहा आपका तो यही काम है YouTube बनाना। मेरा

584
00:44:02,640 --> 00:44:07,200
काम मैंने कहा तुम्हारा काम है क्रिश्चियन बनाना। लो

585
00:44:07,200 --> 00:44:11,360
भाई अभी अभी मैंने इस लाइव की शुरुआत में ही कहा कि

586
00:44:11,360 --> 00:44:15,440
जब व्यक्ति जो एक प्रवाह

587
00:44:15,440 --> 00:44:19,520
चल रहा होता है आपके विचारों के आदानप्रदान का आपने अपना पक्ष

588
00:44:19,520 --> 00:44:23,760
प्रस्तुत किया मैंने अपना किया जब आप निर्णायक होने लगते हो बिना किसी तर्क

589
00:44:23,760 --> 00:44:27,840
और आधार को प्रस्तुत किए हुए और आक्षेप सीधे-सीधे व्यक्तिगत

590
00:44:27,840 --> 00:44:32,640
लगाने लगते हो इसका मतलब यह है कि आपके पास सैद्धांतिक उत्तर नहीं है

591
00:44:32,640 --> 00:44:36,640
इसीलिए आपको पर्सनल होना पड़ रहा तो आप क्या कह रहे हो? आप तो YouTube बनाते

592
00:44:36,640 --> 00:44:41,440
हो, वीडियो बनाते हो, उठा उठा के पटकता भी हूं।

593
00:44:41,440 --> 00:44:46,080
काक में दबा के मारता भी हूं। [हंसी]

594
00:44:46,080 --> 00:44:51,120
वो नहीं बोला। हां नहीं भैया उसने यही बोला था।

595
00:44:51,120 --> 00:44:53,200
हां उसने ये बोला

596
00:44:53,200 --> 00:44:57,360
कि वो किसी को बोल रहा था प्रभु जी इनका तो काम ही है।

597
00:44:57,360 --> 00:45:01,440
इनका काम ही है केवल वीडियो बनाना। खाली दोष ढूंढना। बस आप

598
00:45:01,440 --> 00:45:07,440
खाली भक्ति मत करो। केवल दोष ढूंढो।

599
00:45:07,600 --> 00:45:11,600
अच्छा अच्छा ये वाला भी एक तर्क बड़ा वो आता है जो लोग

600
00:45:11,600 --> 00:45:15,760
समन्वय की बात करने आते हैं मुझसे कि भैया समदर्शी बनो

601
00:45:15,760 --> 00:45:21,520
पंडित तो समदर्शी होते हैं। तो तुमने मेरे अंदर अंतर क्यों देख लिया?

602
00:45:21,520 --> 00:45:25,680
तुमने कैसे देखा? तुम समीक्षा कर रहे हो ना मेरी? तुम

603
00:45:25,680 --> 00:45:29,760
ये देख पा रहे हो ना कि मेरे अंदर समदर्शिता नहीं है। इसका

604
00:45:29,760 --> 00:45:33,760
अर्थ क्या हुआ? तुम समदर्शी नहीं हो या फिर समदर्शी का अर्थ यह

605
00:45:33,760 --> 00:45:37,760
होता है कि सब में ईश्वर को देखना परंतु जो व्यवहार

606
00:45:37,760 --> 00:45:42,000
है वो अलग-अलग अमुक के साथ उसके अनुसार किया

607
00:45:42,000 --> 00:45:46,080
जाएगा आताई के साथ आताताई वाला व्यवहार किया जाएगा भले

608
00:45:46,080 --> 00:45:51,360
ही हमें उसमें भी ईश्वर दिखाई दे रहा हो ये है समदर्शिता समदर्शिता

609
00:45:51,360 --> 00:45:55,600
भाव से है व्यवहार से नहीं है ठीक है

610
00:45:55,600 --> 00:45:59,760
अच्छा और फिर लोग कहते हैं अरे तुमने वैष्णव अपराध

611
00:45:59,760 --> 00:46:05,040
कर तो तुम भी तो वही कर रहे हो। मैं भी राम का भक्त हूं। तुम क्यों कहा करके कह रहे हो?

612
00:46:05,040 --> 00:46:08,400
राम के भक्त सिंगली क्यों उठा रहे हो? यानी तुम उंगली उठा रहे हो तो वैष्णव

613
00:46:08,400 --> 00:46:12,560
पर उंगली नहीं उठानी चाहिए। और अगर किसी कारण से उठाई जा सकती तो मेरे पास भी कारण है वहां

614
00:46:12,560 --> 00:46:16,720
उठाने का। फिर क्या दिक्कत है? तो ये लोग कभी सामना नहीं

615
00:46:16,720 --> 00:46:20,800
कर पाएंगे। ये बोबड़ा फोबड़ा सोल थोपड़ा बिगाड़ करके

616
00:46:20,800 --> 00:46:24,800
वो अंधेरे कमरे में बैठ के वीडियो बनाना और वो ऐसे ये सब बातें

617
00:46:24,800 --> 00:46:29,600
करना यही है इनके पास। सामना करने की बारी आए तो गिग्गी

618
00:46:29,600 --> 00:46:33,760
बिल्कुल गिग्गी ततला ही जाएंगे। खैर तो

619
00:46:33,760 --> 00:46:37,920
फिर क्या होता है वहां पर जो माता जी थी वह मेरा पक्ष थोड़ा सा लेने लगी

620
00:46:37,920 --> 00:46:42,560
और वहां पर बोलने लगी और तब तक और लोग आ गए कुछ

621
00:46:42,560 --> 00:46:46,880
वो बकवास जैसे शब्दों का प्रयोग करने लगे और आपने

622
00:46:46,880 --> 00:46:50,960
देखा कि वहां पे मैंने कहा कि भाई देख लो इनका जो शब्द बिगड़

623
00:46:50,960 --> 00:46:55,120
रहा है तो बोला वाह वाह वाह इनको मौका मिल गया ये वो मैंने कहा भाई ये सब

624
00:46:55,120 --> 00:46:59,280
अच्छा फिर एक व्यक्ति आया कि आओ चलो चर्चा करते हैं तो चर्चा

625
00:46:59,280 --> 00:47:03,360
करने मैंने कहा चलो भाई करते हैं तो जब चर्चा करने की बारी

626
00:47:03,360 --> 00:47:07,840
आई तो बोल रहा है कि आपने भागवत पढ़ा है।

627
00:47:07,840 --> 00:47:11,840
अरे भाई तुमने सारे शास्त्र पढ़ लिए। तुमने वेद पढ़ लिए, पुराण पढ़

628
00:47:11,840 --> 00:47:15,840
लिए, सारे, उपनिषद पढ़ लिए। पढ़ो सब कुछ

629
00:47:15,840 --> 00:47:20,000
और नहीं पढ़ा तो फिर बात मत करो। और हमने नहीं पढ़ा,

630
00:47:20,000 --> 00:47:24,160
जिसने पढ़ा है, हम उसके शिष्य हैं। फॉर योर काइंड इन

631
00:47:24,160 --> 00:47:28,240
ठीक है। हमने कुछ नहीं पढ़ा। हमने बस पांच

632
00:47:28,240 --> 00:47:32,400
सिद्धांत जानते हैं और वही पर्याप्त है तुम्हारा टेट

633
00:47:32,400 --> 00:47:36,960
दबाने के लिए। बिल्कुल बिल्कुल ज्ञानार्थक टुआ

634
00:47:36,960 --> 00:47:41,920
वास्तव में [गला साफ़ करने की आवाज़]

635
00:47:41,920 --> 00:47:45,660
ये सब हो गया।

636
00:47:45,660 --> 00:47:49,920
[गला साफ़ करने की आवाज़] इसके बाद क्या होता है कि उनका जो होल सोल था

637
00:47:49,920 --> 00:47:54,160
सबसे बड़ा वाला जो प्रवचन कर रहा था

638
00:47:54,160 --> 00:47:58,320
वो आकर बताता है अरे ये लोग रिकॉर्ड कर रहे हैं। जैसे ही उसने बताया तो इनके जो दो

639
00:47:58,320 --> 00:48:02,480
युवा थे ना जो बाद में बीच में आगे जाकर के भी आते हैं झपट्टा मारते हैं।

640
00:48:02,480 --> 00:48:06,880
उन्होंने सबसे पहली बार छीना झपटी की तो छीना झपटी

641
00:48:06,880 --> 00:48:11,120
करके मेरे साथ जो छोटा भाई जैसा ही है हर्षित नाम है उसका

642
00:48:11,120 --> 00:48:15,280
तो वो थोड़ा मतलब वो व्यायाम वगैरह करता

643
00:48:15,280 --> 00:48:19,760
है हमारे हमारे साथ रहेंगे तो भैया शरीर से मजबूत लोग रहेंगे

644
00:48:19,760 --> 00:48:23,920
तो वो अपना जुझारू व्यक्ति था वो उसने जो है अपने

645
00:48:23,920 --> 00:48:28,000
आप को उन वो दोनों ढीले ढाले से थे

646
00:48:28,000 --> 00:48:33,840
तो वो खैर पहली बार में उसने अपने आप को संभाल लिया

647
00:48:33,840 --> 00:48:37,840
अब मैं जाके देखता हूं कि इतने सारे लोग इतने

648
00:48:37,840 --> 00:48:39,440
सारे लोग हमला कर रहे

649
00:48:39,440 --> 00:48:43,440
हैं। सबसे पहले तो मैं सबसे पहले तो मैं यह देख रहा हूं

650
00:48:43,440 --> 00:48:47,840
कि उन दो लोगों ने जो बंद करने का प्रयास किया था तो हर्षित पीछे हो गए।

651
00:48:47,840 --> 00:48:52,000
अब मैं जल्दी से बाहर उसकी मदद करने के लिए जा रहा हूं तो पता नहीं कुछ

652
00:48:52,000 --> 00:48:56,080
मेरा ध्यान हटा था क्या हुआ था। मैं बाहर जा वहां जाकर देख रहा हूं तो वो जो

653
00:48:56,080 --> 00:49:00,320
प्रवचन कर रहा था मृदभाषी व्यक्ति बहुत मीठा व्यक्ति

654
00:49:00,320 --> 00:49:04,400
वो व्यक्ति सीधे हर्षित से जाकर के कैमरा छुड़ाता हुआ दिख रहा है मुझे मोबाइल

655
00:49:04,400 --> 00:49:09,280
छुड़ाता हुआ। मैंने कहा यार हां मैंने

656
00:49:09,280 --> 00:49:13,360
कहा यार मतलब इतनी एक्सपेक्टेशन तो थी कम से कम जो बैठ के

657
00:49:13,360 --> 00:49:17,840
प्रवचन कर रहा है वो कम से कम शांत रहेगा उसके लोग हमला करेंगे

658
00:49:17,840 --> 00:49:22,320
मगर वहां तो वो स्वयं ही कूद पड़ा उसमें

659
00:49:22,320 --> 00:49:27,200
और वो जो मृदभाषित जो मृदभाषी पन था वो सब निकल गया

660
00:49:27,200 --> 00:49:31,360
अब मैंने देखा कि भाई अब बिना ना मानस जल्दी जड़

661
00:49:31,360 --> 00:49:35,520
गए तीन दिन बीत भोले राम सो तब भय हो ना प्रीत तो फिर मैंने

662
00:49:35,520 --> 00:49:39,600
उनको पकड़ा उनके हाथ से मोबाइल मोबाइल उन्होंने

663
00:49:39,600 --> 00:49:43,760
उन्होंने पकड़ के उससे ले लिया था हर्षित हर्षित के पास में एक एक बैग

664
00:49:43,760 --> 00:49:48,240
भी था हर्षित के पास में एक बैग भी था

665
00:49:48,240 --> 00:49:52,400
तो एक बैग उसने कंधे पर टांगा हुआ था एक ऐसे हाथ में लिए कितना

666
00:49:52,400 --> 00:49:54,480
वो आदमी अपने आप को बचाएगा

667
00:49:54,480 --> 00:49:58,560
इतने सारे लोग जब एक-एक करके वो फटाफट फटाफट बैक टू बैक

668
00:49:58,560 --> 00:50:02,640
हमला करेंगे तो मैंने देखा था इसके हाथ में

669
00:50:02,640 --> 00:50:07,920
आ चुका था यह व्यक्ति जो प्रवचन कर रहा था इसके मतलब

670
00:50:07,920 --> 00:50:11,920
जैसे हर्षित के हाथ में है तो इसने हाथ रख के खींचना चालू कर दिया था उस

671
00:50:11,920 --> 00:50:16,080
समय मेरा हाथ गया उसको मैंने रोका और उसका एक कलाई

672
00:50:16,080 --> 00:50:20,400
पकड़ के उसकी उसका देखा हाथ ऐसे पीछे जा रहा होता है जब कैमरा

673
00:50:20,400 --> 00:50:25,280
चालू होता है तो उनके हाथ लगने की वजह से वो लॉक हो जाता है फोन कैमरामन

674
00:50:25,280 --> 00:50:29,600
है ना और इस इससे मुझे एक बात याद आई वो रैबन का वो चश्मा

675
00:50:29,600 --> 00:50:33,920
आ गया वो वाला बहुत अच्छा हाई क्लास की उसमें वीडियो क्वालिटी आती है तो अगर भैया

676
00:50:33,920 --> 00:50:38,960
कोई हेल्प करना चाहता है, सहायता करना चाहता है तो वो मेटा वाला एक

677
00:50:38,960 --> 00:50:43,200
दिलाए जिससे कि यह वाली स्थिति आए ना अगर कहीं पे हम लोग हो

678
00:50:43,200 --> 00:50:47,280
तो सबसे पहले तो हम इसी से रिकॉर्ड करें तो हमारे पास जैसे

679
00:50:47,280 --> 00:50:52,000
एक है वो बहुत अच्छी क्वालिटी का नहीं है वो और थोड़ा सा उसका सिस्टम

680
00:50:52,000 --> 00:50:56,080
वो भी है तो अगर कोई सहायता करना चाहता है तो ये

681
00:50:56,080 --> 00:51:00,160
वाली सहायता करें। खैर आगे चलते हैं। तो

682
00:51:00,160 --> 00:51:04,400
मैंने देखा कि वह पकड़ लिया था अच्छे से। वह छुटाने वाला था। तब तब मैंने

683
00:51:04,400 --> 00:51:08,480
जो है उसकी कलाई पकड़ी और कलाई पकड़ के उसको पीछे धक्का

684
00:51:08,480 --> 00:51:09,680
मारा तो वो झूमते हुए

685
00:51:09,680 --> 00:51:14,400
दूर गया वो व्यक्ति। फिर वो दिख रहा है वीडियो में जाता हुआ वो।

686
00:51:14,400 --> 00:51:18,560
हां डांस करता हुआ झूमते हुए। हम तो फिर जब मैंने

687
00:51:18,560 --> 00:51:22,640
हाथ लगाया तो उसका कोई वहां पर फिर जोर था नहीं। उसका कुछ हल्के हल्के

688
00:51:22,640 --> 00:51:26,800
फुल्के लोग थे पॉपकर्न जैसे सब के सब तो

689
00:51:26,800 --> 00:51:31,040
दूर चला गया। अब मैं देख रहा हूं। मैं उसको देख रहा हूं। जैसे ही हर्षित

690
00:51:31,040 --> 00:51:35,360
को अकेला पाया तो दूसरे लोग झपट्टा मार रहे। मतलब इतनी जल्दी जल्दी उससे

691
00:51:35,360 --> 00:51:39,360
इससे छुड़ाया तो एक बार फोन छिड़ा करके और इस

692
00:51:39,360 --> 00:51:43,760
वाले किसी व्यक्ति के हाथ में चला भी गया और मैं केवल फोन देख रहा हूं भीड़ के बीच में।

693
00:51:43,760 --> 00:51:47,840
ये सब चीजें रिकॉर्ड नहीं हुई है। क्योंकि फोन में लॉक लग गया।

694
00:51:47,840 --> 00:51:52,000
एक ही कैमरा वहां पर चालू था। तो मैं देख रहा हूं कि एक हाथ

695
00:51:52,000 --> 00:51:56,080
मुझे दिख रहा है जिसमें अब मेरा फोन है और मुझे कुछ नहीं दिख रहा है। इधर उधर

696
00:51:56,080 --> 00:52:00,160
हर्षित कहां है? यह कहां है? सबसे पहले तो फोन छुड़ाना है भाई।

697
00:52:00,160 --> 00:52:04,560
तो मैंने जो है उस हाथ को देखा। उस हाथ को ऐसे पकड़ा और

698
00:52:04,560 --> 00:52:09,120
यूं पकड़ के यूं करके उससे फोन लिया

699
00:52:09,120 --> 00:52:13,360
और फिर हर्षित को दिया कि लो जाओ अब तुम जाओ आगे।

700
00:52:13,360 --> 00:52:17,440
हर्षित को आगे भेज दिया। उसके बाद इतना सब देखा जब पब्लिक

701
00:52:17,440 --> 00:52:21,600
ने इतनी ज्यादा मतलब लगातार वार

702
00:52:21,600 --> 00:52:25,200
और मेरा जूझना उन लोगों से जब ये सब

703
00:52:25,200 --> 00:52:29,440
लोगों ने वहां देखा तो अब तक लोगों के अंदर वो जो ज्वाला थी ना वो भड़क

704
00:52:29,440 --> 00:52:33,840
चुकी थी पहले तो अपमान देखा हां

705
00:52:33,840 --> 00:52:38,000
पहले अपमान देखा शिव जी का उन लोगों ने वहां के जो

706
00:52:38,000 --> 00:52:42,000
फल बेचने वाले थे जो छोटी-छोटी टपरी लगाए रहते हैं वो

707
00:52:42,000 --> 00:52:46,160
जो वहां आए हुए अन्य पर्यटक थे वो सब यह देख

708
00:52:46,160 --> 00:52:50,160
रहे थे तो उन पर्यटकों में से जो सहारनपुर से कुछ

709
00:52:50,160 --> 00:52:54,400
लोग आए थे परिवार के साथ वो जो दो युवा और उनकी माताजी

710
00:52:54,400 --> 00:52:58,400
और एक एक दो और मातृशक्तियां इधर उधर से सब एकत्रित हो गई

711
00:52:58,400 --> 00:53:02,720
फिर वो लोग जो है बोलने लगे जैसे ही उन लोगों ने बोला तो बस

712
00:53:02,720 --> 00:53:07,840
इनका कीर्तन चालू हो गया और अपीर दिखा के भागने लगे

713
00:53:07,840 --> 00:53:12,320
वहां से अच्छा इससे पहले का एक सीन बता दूं कि जब

714
00:53:12,320 --> 00:53:16,320
हम लोग को भागवत वाली बात आई थी ना कि आपने भागवत पढ़ी है कि नहीं जब हम लोग ऊपर की

715
00:53:16,320 --> 00:53:20,400
ओर आए नीचे से है ना कि चलो आओ चर्चा करते हैं तो इतने भर में

716
00:53:20,400 --> 00:53:24,480
वहां की जो बैठी हुई सामान्य जनता थी जिनको ये बेवकूफ बना रहे थे वो उठ खड़ी

717
00:53:24,480 --> 00:53:28,880
हुई कि भैया समझ में आ गया यहां ढोल में पोल है तो कितना जरूरी

718
00:53:28,880 --> 00:53:33,280
है मौके पर जाकर के प्रतिकार करना मौके पर जाकर के प्रतिकार

719
00:53:33,280 --> 00:53:37,680
करना कितना जरूरी है असेंबली में बम फेंकना कितना जरूरी

720
00:53:37,680 --> 00:53:40,320
है भगत सिंह की तरह अपनी आवाज

721
00:53:40,320 --> 00:53:44,400
सुनाने के लिए बहुत आवश्यक है और अगर आप नहीं बोलते

722
00:53:44,400 --> 00:53:48,400
वहां पर तो वो जो जनता सुन रही थी वो चुपचाप सुनती और चली जाती।

723
00:53:48,400 --> 00:53:52,560
उनको यह पता ही नहीं चल पाता इनकी सच्चाई का क्योंकि ये लोग बड़ी चालाकी से वो बीच

724
00:53:52,560 --> 00:53:56,720
शिव का अपमान तो करते ही हैं। तो इसीलिए बोलना बहुत ज्यादा

725
00:53:56,720 --> 00:54:00,880
जरूरी था जो आपने किया बहुत ही मतलब साहसिक कार्य है।

726
00:54:00,880 --> 00:54:05,120
मेरे साथ भी हुआ था एक इंसिडेंट। हालांकि मैं उसको रिकॉर्ड नहीं कर पाया था।

727
00:54:05,120 --> 00:54:09,280
ऐसा मेरे साथ भी हुआ था। जी दिल्ली में नेहरू प्लेस में भी ऐसे किताबें वो बांट

728
00:54:09,280 --> 00:54:13,440
रहे थे और वहां पर भी मैंने वही प्रश्न उनसे पूछा था कि आप तो शिव का अपमान करते

729
00:54:13,440 --> 00:54:17,520
हैं इसमें लिखा हुआ है। तो वो दूध और दही वाली बात कहने लगे तो फिर

730
00:54:17,520 --> 00:54:21,600
मैंने उस वक्त मेरे माइंड में कुछ नहीं आया। मैंने कहा ईश्वर के लिए दूध

731
00:54:21,600 --> 00:54:25,760
और दही वाला उदाहरण आप नहीं दे सकते। मैंने यही बोला उनको मैंने कहा

732
00:54:25,760 --> 00:54:29,760
ईश्वर के लिए अगर आप यह उदाहरण दे रहे हैं। आप कहीं ना कहीं ईश्वर को बाधित कर रहे

733
00:54:29,760 --> 00:54:35,760
हैं। उनके पास जवाब नहीं था।

734
00:54:36,000 --> 00:54:40,080
नहीं एक उदाहरण और लाए हैं। एक उदाहरण

735
00:54:40,080 --> 00:54:44,240
और लाए हैं। जब दूध दही का मैंने बहुत बार पूछा एकिक से तो बोलता है ठीक है

736
00:54:44,240 --> 00:54:48,320
आपको दूध दही वाला नहीं जम रहा है तो छोड़ दो। अब वो नया उदाहरण दे

737
00:54:48,320 --> 00:54:52,800
रहे हैं। आप शाखाशाखी न्याय से समझो। जैसे शाखा होती है

738
00:54:52,800 --> 00:54:56,800
और उसके शा एक तो पेड़ होता है उसके शाखाएं निकलती है तो

739
00:54:56,800 --> 00:55:00,800
वह एक भी है और अलग भी है। अब वो

740
00:55:00,800 --> 00:55:04,880
लोग इस पे आ गए हैं। अरे अच्छा एक

741
00:55:04,880 --> 00:55:09,040
नहीं है भाई शाखाएं शाखाएं और पेड़ पेड़ है। एक नहीं

742
00:55:09,040 --> 00:55:14,000
है। शाखाएं उसका एक पार्ट है। एक हिस्सा है।

743
00:55:14,000 --> 00:55:18,000
ठीक है? और दूसरी बात यह भी उदाहरण फिट नहीं बैठेगा ईश्वर

744
00:55:18,000 --> 00:55:22,080
पर क्योंकि वह जो शाखा है उस पेड़ से अगर अलग होगी तो उस

745
00:55:22,080 --> 00:55:26,160
पेड़ का जो पहले जो स्वरूप था अब वो बदल गया क्योंकि अब वो शाखा उससे

746
00:55:26,160 --> 00:55:30,400
जुड़ी हुई नहीं है कम हो गया उसका शरीर अवयव कुछ टूट

747
00:55:30,400 --> 00:55:34,560
गया उससे परंतु ईश्वर से पहली बात तो कुछ अलग होता नहीं केवल वो माया

748
00:55:34,560 --> 00:55:38,560
मात्र अलग होना और अगर अलग हो भी रहा है तो पूर्ण से पूर्ण ही निकलता है

749
00:55:38,560 --> 00:55:42,800
पूर्ण निकल जाने के बाद भी वो पूर्ण रहता है वो ईश्वर है

750
00:55:42,800 --> 00:55:47,280
ठीक है ये तो ये बात हो गई। खैर मैं थोड़ा सा उस वृतांत

751
00:55:47,280 --> 00:55:51,120
को पूरा कर दूं। तो सीता घाट से वह लोग थोड़ा सा आगे राम

752
00:55:51,120 --> 00:55:55,440
झूले की ओर चलने लगे। तब तक वहां पर जो है

753
00:55:55,440 --> 00:55:59,440
जब चलने लगे तो लास्ट में जब हर्षित वापस आ रहा था। मैंने कहा कि

754
00:55:59,440 --> 00:56:03,680
हर्षित बस रहने दो। अब वो जा रहे हैं जाने दो। हो गया। हर्षित जब वापस

755
00:56:03,680 --> 00:56:07,680
आ रहा है तो लास्ट में दो लड़कों ने फिर से ट्राई किया उससे

756
00:56:07,680 --> 00:56:11,680
फोन जपने का और एक लड़का जाकर के हर्षित

757
00:56:11,680 --> 00:56:15,680
को अकेले में दो चार दो तीन लड़के एक मार रहा है दो तीन उसको पकड़ रहे

758
00:56:15,680 --> 00:56:19,920
हैं और मैंने देखा वो नीचे से घूसे मार रहे हैं

759
00:56:19,920 --> 00:56:24,080
नीचे से घूसे मार रहे हैं उसके पेट हर्षित

760
00:56:24,080 --> 00:56:28,080
लोग भड़क गए और भड़क गए फिर चिल्लाने लगे तब ये

761
00:56:28,080 --> 00:56:32,160
पूरा गैंग वहां से भाग गया फरार हो गया कहां गया ये ठहरा

762
00:56:32,160 --> 00:56:36,160
हुआ था। गीता भवन में गीता भवन में

763
00:56:36,160 --> 00:56:40,240
ठहरा हुआ था। गीता भवन क्या है? ये गंगा मैया चल रही हैं। इसके बगल में

764
00:56:40,240 --> 00:56:44,640
घाट है और गंगा मैया के बगल में ही सबसे पहले हमारा जो भागीरथी

765
00:56:44,640 --> 00:56:48,800
धाम है उसी में इस इसी लाइन में जो है सीता घाट फिर आगे

766
00:56:48,800 --> 00:56:52,800
जो है अन्य घाट और इस लाइन में सारे मुख्य

767
00:56:52,800 --> 00:56:57,040
मुख्य्य वो हैं। जैसे परमार्थ निकेतन है, गीता

768
00:56:57,040 --> 00:57:01,040
भवन है, स्वर्ग आश्रम है। इसको स्वर्ग आश्रम

769
00:57:01,040 --> 00:57:07,000
लाइन कहते हैं। ये जो गली टाइप की है ईंटों की।

770
00:57:07,000 --> 00:57:11,440
[खांसने की आवाज़] खैर फिर हमने एक 112

771
00:57:11,440 --> 00:57:15,440
नंबर डायल करके पुलिस को तो सूचित कर ही दिया तुरंत और उस समय हमें

772
00:57:15,440 --> 00:57:19,760
फिर समय नहीं मिला था तो फिर अब जाकर के

773
00:57:19,760 --> 00:57:24,400
हम वहां पर कानूनी कारवाई चालू की है। जी

774
00:57:24,400 --> 00:57:28,480
अब आप लोग अपना-अपना बताएं। मैंने मुझे कुछ ध्यान आएगा तो फिर

775
00:57:28,480 --> 00:57:32,560
बताऊंगा। अभी तो मेरे पास मतलब सबसे ज्यादा जो पिन पॉइंट है ना जो

776
00:57:32,560 --> 00:57:36,720
आप लोग अभी नहीं जान रहे हैं उसमें जो अलग-अलग लोगों से फटाफट

777
00:57:36,720 --> 00:57:40,720
फटाफट मोबाइल को बचाना मोबाइल को छीनना एक दो लोगों से और फिर

778
00:57:40,720 --> 00:57:44,800
हर्षित को बचाना एक मैं अकेला वहां पर बहुत सारे लोग एक-एक कर फटा

779
00:57:44,800 --> 00:57:48,880
इधर से कर रहे हैं उधर से कर रहे सबसे भिड़ना तो वहां उतनी देर

780
00:57:48,880 --> 00:57:52,960
के लिए बड़ा वैसा थ्रिलर सा हो गया था मेरे लिए इतने सारे लोगों को

781
00:57:52,960 --> 00:57:57,120
आप दो लोग ही थे ना वहां सिर्फ आप थे और आपका जो कैमरा

782
00:57:57,120 --> 00:58:01,280
हर्षित जी भी हाथ फ्री नहीं थे ना उसके कंधों पे बैग

783
00:58:01,280 --> 00:58:06,000
था हाथ में मोबाइल था और एक हाथ पे वो लटका था ट्राईपॉड वाला बैग

784
00:58:06,000 --> 00:58:10,160
हम वो फ्री नहीं था तो बचा

785
00:58:10,160 --> 00:58:14,160
मैं अकेला ये बात थी जी और उसके

786
00:58:14,160 --> 00:58:18,160
बावजूद भी उनको वहां से मैदान छोड़कर भागना पड़ा

787
00:58:18,160 --> 00:58:22,240
ये बहुत बड़ी अचीवमेंट है बहुत बड़ी चीज है क्योंकि

788
00:58:22,240 --> 00:58:26,320
एक ऐसा ही व्यक्ति आया था विधर्मी जो काशी

789
00:58:26,320 --> 00:58:30,320
में यह दावा कर रहा था कि उसने वहां पर बहुत तीर मारा

790
00:58:30,320 --> 00:58:35,520
है लेकिन वहां से वो कैसे भागा था। ठीक है। बंदी छोड़ बंदी

791
00:58:35,520 --> 00:58:39,600
बंदी छोड़ 2. मैंने कहा ना कि भाई पता नहीं क्या

792
00:58:39,600 --> 00:58:43,760
ये पाखंडियों के अंदर एक आदत पड़ गई है कि कुछ ना कुछ छोड़ के ही भागना है। कोई जूता

793
00:58:43,760 --> 00:58:47,680
छोड़े कोई चप्पल छोड़ है। हम

794
00:58:47,680 --> 00:58:52,000
यहां पर भी वो जूता चप्पल छोड़ के भागे हैं। ये भी बात है। अच्छा

795
00:58:52,000 --> 00:58:56,160
होता क्या है कि आप अगर साहस का एक कदम बढ़ाते हो ना तो

796
00:58:56,160 --> 00:59:00,240
फिर ईश्वरीय शक्तियां आपका साथ देती हैं। तो वहां पर क्या

797
00:59:00,240 --> 00:59:04,240
है वो युद्ध ऐसे नहीं जीत सकते थे वहां पर

798
00:59:04,240 --> 00:59:09,280
ईश्वर की शक्ति ने साथ दिया शिव जी ने सदैव मेरा साथ दिया है

799
00:59:09,280 --> 00:59:13,520
शिव जी ने राम जी ने सदैव मुझे मौके पर सदैव उनका सहारा मुझे प्राप्त

800
00:59:13,520 --> 00:59:17,520
होता ही है गुरु गोविंदो ग्रंथ की कृपा से तो वहां पर वही हुआ मुझे

801
00:59:17,520 --> 00:59:21,600
नहीं मालूम था कि सहारा मिलेगा कि नहीं मिलेगा जनता में जागृति आएगी कि नहीं मगर जनता जाग

802
00:59:21,600 --> 00:59:26,480
गई जनता जाग जैसे ही जनता जनता को जगाना ही तो हमारा कार्य है

803
00:59:26,480 --> 00:59:30,480
भगत सिंह असेंबली में बम फोड़ने गए क्यों थे इसीलिए गए

804
00:59:30,480 --> 00:59:34,560
थे। बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है। धमाके की जरूरत है। और

805
00:59:34,560 --> 00:59:37,760
धमाका ऐसा हुआ है कि अब वो मतलब

806
00:59:37,760 --> 00:59:41,840
जबकि आपके कैमरे से रिकॉर्ड हुआ है। मैं बड़ा हैरान हूं कि वीडियो YouTube ने क्यों

807
00:59:41,840 --> 00:59:45,840
हटाया ऐसा होना नहीं चाहिए क्योंकि रिकॉर्डिंग तो आपके कैमरे से हुई है। वापस आ जाएगा नहीं

808
00:59:45,840 --> 00:59:49,840
तो YouTube को बुला लेंगे। आ जाओ तुम भी कोर्ट कचहरी खेल लो हमारे साथ। हम

809
00:59:49,840 --> 00:59:54,560
हम बिल्कुल बिल्कुल भैया बाद में क्या हुआ था?

810
00:59:54,560 --> 00:59:59,280
वो जब जब वो कैमरा छीन रहे थे वो जो मृदभाष

811
00:59:59,280 --> 01:00:04,320
वाले उसके बाद जब वो पब्लिक ने धबोचा फिर आगे क्या कर रहे थे वो

812
01:00:04,320 --> 01:00:08,400
फिर वो अपना चालू कर दिया मजीरा चालू कर दिया

813
01:00:08,400 --> 01:00:13,600
मजीरा बजाना आगे आगे जाकर के [हंसी]

814
01:00:13,600 --> 01:00:17,920
हां उससे तो ऐसा लगता है कि जैसे इनके जैसा कोई भक्त है नहीं

815
01:00:17,920 --> 01:00:22,000
और वहीं पर जनता जो है फस जाती है सनातन फिल्म है जिसमें ऐसे ही

816
01:00:22,000 --> 01:00:26,080
कोई एक पाखंड ठंडी है जो आगे आगे जा रहा होता है। पीछे उसके लोग पिट रहे होते

817
01:00:26,080 --> 01:00:31,120
हैं। ऐसे ही है। बिल्कुल सेम यही सीन है। वो आगे आगे

818
01:00:31,120 --> 01:00:35,680
कुछ भजन सा करता हुआ जा रहा होता है। ऐसे ही खैर

819
01:00:35,680 --> 01:00:41,190
फिल्म का सीन कोई ध्यान नहीं आ रहा। जी शास्त्रवाद जी

820
01:00:41,190 --> 01:00:47,190
[गला साफ़ करने की आवाज़]

821
01:00:48,640 --> 01:00:52,720
का माइक माइक का आप कुछ बोलेंगे अंकित जी?

822
01:00:52,720 --> 01:00:57,920
नहीं तो फिर हम अगले चरण पर फिर आगे बढ़े

823
01:00:57,920 --> 01:01:02,800
जी [गला साफ़ करने की आवाज़] भैया उसमें एक चीज और देखने मिला था कि

824
01:01:02,800 --> 01:01:06,800
जो वहां पर देखिए वो लोग सत्संग जो भी

825
01:01:06,800 --> 01:01:10,880
सत्संग नाम देते हैं सत्संग छोड़ के चले गए सारे के

826
01:01:10,880 --> 01:01:15,120
सारे अपने कर्मकांड सब कर दिए लेकिन ये मानने

827
01:01:15,120 --> 01:01:19,440
को तैयार नहीं हुए कि हां हां भाई आप बैठिए शिव भी हमारे भगवान ही है हम निंदा

828
01:01:19,440 --> 01:01:23,520
क्यों करेंगे हम छोटा क्यों नहीं करेंगे ये कह देते तो शायद यहां तक पहुंचती ही नहीं

829
01:01:23,520 --> 01:01:28,960
बात लेकिन वो कहने को तैयार नहीं। इनका एटीट्यूड ऐसा है।

830
01:01:28,960 --> 01:01:33,440
नहीं नहीं ऐसा था। इसमें एक ट्विस्ट है।

831
01:01:33,440 --> 01:01:38,160
भाई मैं तो नहीं चाहूंगा कि जिस व्यक्ति के जो सिद्धांत हो उनका त्याग करे।

832
01:01:38,160 --> 01:01:42,240
हमारी लड़ाई बड़ी वैसी रहती है। है ना? साफ

833
01:01:42,240 --> 01:01:47,280
सुथरी। हम ये थोड़ी ना चाहेंगे कि सामने वाला अपने सिद्धांत का त्याग कर दे।

834
01:01:47,280 --> 01:01:51,440
इसमें बात यह है कि वह मेरे रहते सहज

835
01:01:51,440 --> 01:01:55,520
नहीं थे। अगर वह कह भी देते तो उनका

836
01:01:55,520 --> 01:01:59,920
जो स्वभाव बन चुका है या जो उनके अंदर उनकी जो प्रकृति आ गई है

837
01:01:59,920 --> 01:02:03,680
उसको कंट्रोल कैसे करते वह प्रवचन देना होता है सहजता का जब आपको

838
01:02:03,680 --> 01:02:08,240
सहज हो प्रवचन करोगे तब ना जब आपके अंदर सहजता की फीलिंग हो

839
01:02:08,240 --> 01:02:12,400
अब वो फीलिंग तो है नहीं डर लग रहा है पता नहीं कौन सी पंक्ति मैंने मेरे मुख से वही रटी

840
01:02:12,400 --> 01:02:16,400
रटाई निकले और यह व्यक्ति यहां पर बैठा है शंकर का सैनिक और

841
01:02:16,400 --> 01:02:20,480
यह जो है गन मशीन ले खड़ा हो जाएगा अपने सिद्धांतों के साथ दाग

842
01:02:20,480 --> 01:02:24,960
दी फायर बना देगा फिर यह हां तो

843
01:02:24,960 --> 01:02:29,200
वो असहजता के कारण वहां से भागे। भले ही वो

844
01:02:29,200 --> 01:02:33,280
यह कर सकते थे कि झूठ बोल देते। हालांकि इनके अंदर ये चीज है कि

845
01:02:33,280 --> 01:02:37,600
तुरंत अपने सिद्धांतों से क्विट होते हैं। जो चाहो वो मान लेंगे।

846
01:02:37,600 --> 01:02:41,840
अभी मैं चर्च में गया था। वहां वो भी यही कर रहा था व्यक्ति।

847
01:02:41,840 --> 01:02:46,000
सामने वाला व्यक्ति है। सब कुछ मानने लगा। अवतार भी लेता है। ये भी

848
01:02:46,000 --> 01:02:50,320
है वो भी है। अभी देखना बड़ा आनंद आएगा। उसमें चर्च वाले में

849
01:02:50,320 --> 01:02:54,960
डिट्टो इनकी कॉपी है ब्रह्मा कुमारी इसको की कॉपी बिल्कुल हम

850
01:02:54,960 --> 01:02:59,040
बस ये है कि वो जो है ये करके अपने में ला रहे हैं और ये

851
01:02:59,040 --> 01:03:03,920
अपने में है ना हम

852
01:03:03,920 --> 01:03:07,920
संख्या बल बढ़ाना इनका उद्देश्य है बस अपनी जो है

853
01:03:07,920 --> 01:03:12,080
संख्या बढ़ाओ सनातनियों को बस बेवकूफ कर बनाओ

854
01:03:12,080 --> 01:03:16,240
है ना और नाच गाना बहुत करते हैं नाच गाना

855
01:03:16,240 --> 01:03:18,880
गिटार के साथ हम

856
01:03:18,880 --> 01:03:23,040
ये मैंने बहुत देखा है कि इनका वो चलता है कि गिटार पकड़ लेंगे बस

857
01:03:23,040 --> 01:03:27,200
उसी में चलते वो है। जी जी जी एक

858
01:03:27,200 --> 01:03:31,200
मिनट एक मिनट तो क्या है कि मैंने जब ये कह दिया ना कि मैं

859
01:03:31,200 --> 01:03:35,280
कहीं नहीं जाऊंगा। है ना? दूसरी बात कि अगर मेरे

860
01:03:35,280 --> 01:03:39,520
ईस्ट की निंदा होगी तो मैं बोलूंगा। मत करो आप लोग ईस्ट की निंदा। अगर नहीं

861
01:03:39,520 --> 01:03:43,920
कर सकते भाई। चलो आप यह मत कहो कि शिव और विष्णु एक हैं।

862
01:03:43,920 --> 01:03:48,000
मगर आप इनमें जो है बड़ा छोटा ना करते

863
01:03:48,000 --> 01:03:52,000
हुए अपना प्रवचन कर लो। तो उनको लगा यार हमारा और दूसरी बात

864
01:03:52,000 --> 01:03:56,240
वहां की जो आम जनता है वो समझ चुकी थी मामले को। फिर वो उठ खड़ी होने

865
01:03:56,240 --> 01:04:00,400
लगी। तो इनको और ज्यादा अपमानित सा लगा। उन्होंने कहा अब निकल लो

866
01:04:00,400 --> 01:04:04,720
यहां से। ये हुआ था। जाने की वजह ये थी। जी।

867
01:04:04,720 --> 01:04:08,800
ये कहना मात्र इनका वो नहीं था कि हमको ये ना कहना पड़े कि शिव विष्णु है। वो

868
01:04:08,800 --> 01:04:12,800
मैं चाहता भी नहीं था। आप प्रवचन करो बस शिव जी के बारे में ऐसी बातें ना करो

869
01:04:12,800 --> 01:04:17,200
बड़ी छोटी वाली जब तक मैं सुन रहा हूं तो उसमें इनको अगर

870
01:04:17,200 --> 01:04:21,200
ना भी कर तो यह पहली बात तो इनके लिए प्रैक्टिकल पॉसिबल नहीं

871
01:04:21,200 --> 01:04:25,280
है प्रैक्टिकली कि ये शिवजी की निंदा किए बिना अपने लेक्चर को पूरा करें क्योंकि

872
01:04:25,280 --> 01:04:29,600
इनके उससे दिख रहा है कि भाग गए इनको इनका लेक्चर जो रटा रटाया

873
01:04:29,600 --> 01:04:33,600
है उसमें शिवजी की निंदा आएगी बार-बार ये पॉइंट आउट करेंगे कि शिवजी भगवान

874
01:04:33,600 --> 01:04:34,160
के भक्त

875
01:04:34,160 --> 01:04:38,160
हैं। शिवजी दास है। शिवजी कूड़े वाले के समान है। झाड़ू वाले के समान

876
01:04:38,160 --> 01:04:42,560
और जो विष्णु जी हैं वो कृष्ण जी विष्णु जी भी नहीं

877
01:04:42,560 --> 01:04:46,640
वो आगे बात आई तो इसलिए वो लोग वहां से गए थे जी शास्त्रवाद जी जय श्री

878
01:04:46,640 --> 01:04:50,640
राम बताइए [नाक से की जाने वाली आवाज़] जी भैया जय श्री

879
01:04:50,640 --> 01:04:54,880
राम मेरा आवाज थोड़ा कम आ रहा होगा क्या कम आ रहा है क्या मेरा आवाज

880
01:04:54,880 --> 01:05:00,080
की सही है नहीं परफेक्ट आ रही है बताइए ठीक है ठीक है

881
01:05:00,080 --> 01:05:04,320
जी भैया जी जी भैया वही कह रहे थे कि ये

882
01:05:04,320 --> 01:05:08,480
लोग किस तरह से आप पे मतलब मतलब सिद्धांतों से डर के भाग जाते हैं। वो सभी

883
01:05:08,480 --> 01:05:12,640
ने देखा और जब वीडियो अपलोड हो गई तो किस प्रकार से इतना ज्यादा

884
01:05:12,640 --> 01:05:16,640
डर गए अपने छवि को लेकर के कि वीडियो को हटाने के लिए

885
01:05:16,640 --> 01:05:20,800
अपना वो कार्य करने लग गए। वीडियो भी हटवा दी। ये

886
01:05:20,800 --> 01:05:24,960
लोग मतलब कुछ भी सच्चाई दिखाना नहीं चाहते

887
01:05:24,960 --> 01:05:29,120
हैं। इनका अपना एक रहता है कि मेरा एक वर्चस्व

888
01:05:29,120 --> 01:05:33,520
बना रहे। एक इमेज वो जैसा भी चाहे

889
01:05:33,520 --> 01:05:37,760
भक्ति वाला यही तो भक्ति भक्ति बोल के सबको अपनी तरफ फंसाते

890
01:05:37,760 --> 01:05:41,760
हैं। लेकिन रियलिटी में तो देख ही लिया सभी ने कि हरिहर में भेद

891
01:05:41,760 --> 01:05:46,000
करते हैं। दूध दही लस्सी सब बना देते हैं। [हंसी]

892
01:05:46,000 --> 01:05:51,010
सप्रेटा नहीं और और

893
01:05:51,010 --> 01:05:54,480
[हंसी]

894
01:05:54,480 --> 01:05:58,640
आप जहां जाते हैं कि वहां पे सब जहां आप जाते हैं ना भैया

895
01:05:58,640 --> 01:06:02,720
जहां आप रहते हैं वहां पे ये लोग भागते फिरते हैं।

896
01:06:02,720 --> 01:06:06,880
कोई भी चाहे अलंकारी हो चाहे

897
01:06:06,880 --> 01:06:10,960
ये लोग। हमारे द्वारा इस प्रकार के कार्य

898
01:06:10,960 --> 01:06:15,040
करना इसलिए भी आवश्यक है कि लोगों में एक

899
01:06:15,040 --> 01:06:19,280
चेतना आए। वह चुप कैसे रह पा रहे हैं? वो कैसे मौन

900
01:06:19,280 --> 01:06:23,440
है? जब तक लोगों में जागृति नहीं आएगी तो उनके आसपास

901
01:06:23,440 --> 01:06:27,920
भाई सिंपल है ना। लोग दुनिया बदलने निकल दुनिया बदलने मत निकलो।

902
01:06:27,920 --> 01:06:32,400
अपने घर के पड़ोस में देखो क्या ऐसा कुछ हो रहा है? वहां जाकर के पूछो उनसे क्यों हो रहा है?

903
01:06:32,400 --> 01:06:37,280
वहां जाके प्रतिकार कर दो आप। सिंपल।

904
01:06:37,280 --> 01:06:41,760
तो वह उदाहरण जो बनना होता है ना मंगल पांडे वाला उदाहरण।

905
01:06:41,760 --> 01:06:45,760
भाई मैं गाय का कारतूस अपने मुख में नहीं लूंगा। चाहे मुझे 10,000

906
01:06:45,760 --> 01:06:49,920
सैनिकों पर गोली चलानी पड़ जाए। है ना? तो

907
01:06:49,920 --> 01:06:54,000
वो मंगल पांडे किसी ना किसी को बनना ही पड़ेगा। उदाहरण प्रस्तुत आपको करना

908
01:06:54,000 --> 01:06:58,640
पड़ेगा। तब लोगों में चेतना आएगी और क्रांति आएगी।

909
01:06:58,640 --> 01:07:02,640
किसी ना किसी को तो मंगल पांडे बनना ही पड़ेगा। तो इसीलिए वहां

910
01:07:02,640 --> 01:07:06,240
पर और जरूरी हो गया था कि नहीं भाई मुझे जाना है मुझे यहां मैं तो वैसे

911
01:07:06,240 --> 01:07:11,040
भी मेरा स्वभाव ऐसा नहीं है कि मैं अपने आसपास इस तरह की चीजें देख सकूं

912
01:07:11,040 --> 01:07:15,200
जब तक नौका डूबती नहीं तब तक हमारा काम है खेते रहना खेते रहना हमें नहीं पता

913
01:07:15,200 --> 01:07:19,280
क्या होगा क्या नहीं होगा और जब हम हिम्मत दिखाते हैं साहस दिखाते हैं

914
01:07:19,280 --> 01:07:23,440
तो भगवान साथ देते हैं वो तो एक बात अलग है। मगर यह उदाहरण

915
01:07:23,440 --> 01:07:27,680
प्रस्तुत करना भी जरूरी है। अरे भाई आपके घर के आसपास रामपाल

916
01:07:27,680 --> 01:07:31,760
जैसे लोग शिविर कर रहे हैं। उनके पोस्टर लगे हुए हैं। आप भी पोस्टर

917
01:07:31,760 --> 01:07:35,760
लगवा दो ना। रामपाल ने अपनी बुक में यह लिखा हुआ है। छपवा के लगवा

918
01:07:35,760 --> 01:07:40,480
दो अपने जगह-जगह पोस्टर। अभी देखो वो उसका सेंटर बंद करने के लिए पब्लिक हावी हो जाएगी।

919
01:07:40,480 --> 01:07:44,480
आप करो ना प्रतिकार। आपके घर के आसपास बहुत

920
01:07:44,480 --> 01:07:48,800
साधारण से सवाल है। जाकर के पूछ लो उनसे। जहां ये सब प्रवचन

921
01:07:48,800 --> 01:07:52,880
चल रहे हैं उल्टे सीधे। ये वाली बात है। अच्छा अब बात

922
01:07:52,880 --> 01:07:57,120
आती है इन लोगों ने जो है ना अच्छा वही मैं

923
01:07:57,120 --> 01:07:58,400
एक बात खत्म करके।

924
01:07:58,400 --> 01:08:02,480
बोबड़ा जी जुड़ गए हैं। बोबड़ा स्पिरिट सोल आ गए हैं।

925
01:08:02,480 --> 01:08:06,640
तो बोबड़ा जी को जोड़ लेते हैं। बोबड़ा स्पिरिट सोल

926
01:08:06,640 --> 01:08:10,480
यहां पर आ चुके हैं। आज इनसे भी बड़ी रोचक बातें होने वाली

927
01:08:10,480 --> 01:08:16,080
है। जय [गला साफ़ करने की आवाज़] श्री राम बोबड़ा जी।

928
01:08:16,080 --> 01:08:20,080
हरे कृष्णा हताई गौर हरि प्रदे

929
01:08:20,080 --> 01:08:25,840
हरि हरि बोल [हंसी] जय

930
01:08:25,840 --> 01:08:29,920
हरि बोल हरे कृष्णा बोबड़ा जी अभी अभी आप अभी आपका थोपड़ा

931
01:08:29,920 --> 01:08:34,000
सुखाते हैं थोड़ी देर रुक जाइए बस थोड़ी देर अभी बात करते

932
01:08:34,000 --> 01:08:37,680
हैं थोड़ी देर में है ना क्योंकि

933
01:08:37,680 --> 01:08:41,840
कुछ चीजें चल रही है तब तक आप थोड़ा सा धैर्य रखें और

934
01:08:41,840 --> 01:08:45,920
जो कालिक लगी हुई है अपने मुंह पर उसको थोड़ा और साफ करें जिससे

935
01:08:45,920 --> 01:08:49,920
कि शायद आज भगवान यह साहस आपको प्रदान करें कि आप

936
01:08:49,920 --> 01:08:54,000
अपना थोपड़ा दिखा पाए अन्यथा हम ऐसे ही काम चला लेंगे। आज

937
01:08:54,000 --> 01:09:00,000
डर रहे हो [हंसी] डर रहे हो दिख रहा है।

938
01:09:00,240 --> 01:09:04,240
इनका इनका थोपड़ा टेढ़ामेढ़ा जरूर होगा क्योंकि ये ऐसे ही टेढ़ा-मेढ़ा लगाते

939
01:09:04,240 --> 01:09:08,320
हैं। हां इनको यही आता है। खैर ठीक है

940
01:09:08,320 --> 01:09:12,090
बोबड़ा जी अभी लेते हैं आपको। है ना?

941
01:09:12,090 --> 01:09:16,320
[गला साफ़ करने की आवाज़] तो अब बात आती है कि भाई इन्होंने रिमूवल के लिए

942
01:09:16,320 --> 01:09:20,320
डाला है। हम तो मुझे

943
01:09:20,320 --> 01:09:25,360
बड़ा आश्चर्य हुआ देख के जब हमारे वीडियो पर वो स्ट्राइक आई प्राइवेसी वाली

944
01:09:25,360 --> 01:09:31,360
तो मुझे आश्चर्य ये हुआ कि अ

945
01:09:33,760 --> 01:09:38,080
मतलब आपने प्रहार किया है। आपने वहां पर हाथ उठाया

946
01:09:38,080 --> 01:09:42,160
है। छीना झप्ती की है। फिर भी आपके अंदर यह सामर्थ्य आ रहा है कि

947
01:09:42,160 --> 01:09:46,400
आप जो है किसी को कह रहे हो, शिकायत कर रहे हो हमारी लिखित में। खैर हमने वहां लक्ष्मण

948
01:09:46,400 --> 01:09:50,400
झूले में एफआईआर के लिए प्रोसेस कर दिया है। एप्लीकेशन वगैरह

949
01:09:50,400 --> 01:09:54,400
दे दी है और संबंधित लोगों को अभी पुलिस

950
01:09:54,400 --> 01:09:58,560
की इन्वेस्टिगेशन चालू हो जाएगी कुछ ही एक दो दिन में। तो

951
01:09:58,560 --> 01:10:02,560
वो चीज तो अलग है। बाकी यह प्राइवेसी उसमें आता भी नहीं

952
01:10:02,560 --> 01:10:06,800
है। तो हम वहां YouTube से भी बातें चल ही रही है। नहीं होगा तो

953
01:10:06,800 --> 01:10:11,120
YouTube को भी लीगल में घसीटेंगे। है ना अभिव्यक्ति की

954
01:10:11,120 --> 01:10:16,280
आजादी वाली है ना बात फ्रीडम ऑफ स्पीच तो

955
01:10:16,280 --> 01:10:20,800
[गला साफ़ करने की आवाज़] ये बात है

956
01:10:20,800 --> 01:10:26,000
वीडियो रिमूवल वाली जी बोबड़ा जी [नाक से की जाने वाली आवाज़]

957
01:10:26,000 --> 01:10:30,080
आपने हमारे ऊपर बहुत सारे वीडियोस बनाए मैंने सुना है

958
01:10:30,080 --> 01:10:34,080
और आप कहते हैं कि आपने जो है 80 90 पता

959
01:10:34,080 --> 01:10:38,320
नहीं कितने वीडियोस बना दिए हैं 85 85 85

960
01:10:38,320 --> 01:10:44,320
85 गिनती कर लो 85 [हंसी]

961
01:10:44,800 --> 01:10:48,880
85 85 वीडियोस तो आपका कहना ये है कि

962
01:10:48,880 --> 01:10:52,960
आप जवाब एक का भी जवाब तुमने नहीं दिया इसी में तुम्हारी हार

963
01:10:52,960 --> 01:10:58,960
दिख रही है। [हंसी]

964
01:10:58,960 --> 01:11:03,040
बात ऐसी है बोबड़ा जी कि मतलब आपके 85 वीडियोस का

965
01:11:03,040 --> 01:11:07,200
जवाब मैंने नहीं दिया तो उससे

966
01:11:07,200 --> 01:11:12,880
मेरी हार निश्चित हो जाती है। तो इस हिसाब से देखा जाए तो

967
01:11:12,880 --> 01:11:16,880
अमोग लीला पर या इस के अन्य-अ्य्य्य लोगों पर बहुत

968
01:11:16,880 --> 01:11:20,960
सारे वीडियोस मैंने बनाए हैं और एक का भी जवाब उन्होंने मेरा

969
01:11:20,960 --> 01:11:24,960
नाम लेकर तो मुझे दिया नहीं है। तो फिर क्या यह माना जाए कि

970
01:11:24,960 --> 01:11:28,960
स्क हार चुका है, अमोग लीला हार चुके हैं। जिस पर मैंने वीडियो बनाया वो सब हारे हुए

971
01:11:28,960 --> 01:11:31,760
हैं।

972
01:11:31,760 --> 01:11:36,320
अरे क्यों बोल रहे हो? आप तुम अपनी बात को

973
01:11:36,320 --> 01:11:40,480
अपनी बात को क्यों घुमा रहे हो? मेरे सवाल का जवाब दो ना। एफ5

974
01:11:40,480 --> 01:11:44,880
का क्यों तुम रिप्लाई? मैं सवाल का जवाब ही तो दे रहा हूं ना कि

975
01:11:44,880 --> 01:11:48,960
बहुत सारे वीडियोस बना देने पर उन वीडियोस को बनाने वाले

976
01:11:48,960 --> 01:11:53,120
का नाम लिए बिना नाम लेकर उत्तर ना दिए

977
01:11:53,120 --> 01:11:57,440
जाने पर जो व्यक्ति उत्तर नहीं दे रहा है उस व्यक्ति

978
01:11:57,440 --> 01:12:01,760
को हारा हुआ माना जाना है। यदि ये यदि यह सिद्धांत है

979
01:12:01,760 --> 01:12:07,440
तो ऐसा ही मैंने भी किया है। क्या वहां पर भी यह सिद्धांत लागू होगा

980
01:12:07,440 --> 01:12:11,680
आपकी जानकारी में। अभी देखो

981
01:12:11,680 --> 01:12:16,150
जो जो मैंने एडिटिंग की है ना उसी का उत्तर मैं दे सकता हूं। ठीक है?

982
01:12:16,150 --> 01:12:19,280
[हंसी]

983
01:12:19,280 --> 01:12:23,520
अन्य चीजों का नहीं। पहले तो ये बताओ कि मैंने सिद्ध किया है

984
01:12:23,520 --> 01:12:28,080
कि जो वो तुम्हारे जो शंकराचार्य

985
01:12:28,080 --> 01:12:32,240
है वो हज करके आए हैं। मैंने एक बुक से सिद्ध किया। इंग्लिश वाले बुक

986
01:12:32,240 --> 01:12:37,600
से जिद गए। इंग्लिश [हंसी] वाले बुक

987
01:12:37,600 --> 01:12:41,680
इंग्लिश वाली बुक से। अभी अभी उस

988
01:12:41,680 --> 01:12:45,680
पे आते हैं। फैक्ट्स पे अभी आगे आते हैं। पहले मैं सिद्धांत दे दूं। क्या सिद्धांत

989
01:12:45,680 --> 01:12:50,560
है कि भाई जरूरी नहीं है कि

990
01:12:50,560 --> 01:12:54,720
हम जो है अगर हमारे ऊपर कोई व्यक्ति वीडियो बना रहा है तो उसका नाम लेकर उसको

991
01:12:54,720 --> 01:12:58,960
जवाब दें। यह जरूरी नहीं है। हमने अपने ऐसे सिद्धांत और अपने

992
01:12:58,960 --> 01:13:02,960
चीजें इतनी बताई हैं जिसका कहीं पर भी कोई खंडन प्राप्त

993
01:13:02,960 --> 01:13:07,280
है ही नहीं। अकाट्य चीजें बताई और

994
01:13:07,280 --> 01:13:11,360
जितनी चीजें बताई है उन सब में तुम्हारे उन 90 क्या 90 हजार वीडियो में

995
01:13:11,360 --> 01:13:15,360
तब भी उनका जो खंडन है वो उन चीजों में प्राप्त हो जाएगा जो हमने बनाई।

996
01:13:15,360 --> 01:13:19,360
तुम्हारा नाम लेकर नहीं बनाई। ठीक है? अब बात ऐसी

997
01:13:19,360 --> 01:13:23,520
आती है कि तुम ये कहोगे कि नहीं नहीं खंडन प्राप्त नहीं होगा तो हम तुम्हारा नाम लेकर

998
01:13:23,520 --> 01:13:27,520
बनाए। तो तुमने 90 90 वीडियोस बनाए हैं। कोई और भी बना

999
01:13:27,520 --> 01:13:32,240
रहा है 50 वीडियो। कोई और भी बना रहा है 50 वीडियो। तो हम सब कार्य छोड़ केवल

1000
01:13:32,240 --> 01:13:34,720
जो जो हम पर वीडियो बनाना शुरू कर दे। भले ही कुतर्कों

1001
01:13:34,720 --> 01:13:38,800
से भरे हुए वीडियोस हो। कोई सिर पैर की बात

1002
01:13:38,800 --> 01:13:43,520
ना हो तब भी वो हम उनका उत्तर देने के लिए बैठ जाए।

1003
01:13:43,520 --> 01:13:47,760
यह तर्कसंगत बात है। इसीलिए जब हमने शुरू

1004
01:13:47,760 --> 01:13:52,000
में ही एक दो वीडियोस तुम्हारे रिप्लाई में बनाए उसके

1005
01:13:52,000 --> 01:13:56,080
बाद ये कह दिया। अब बात सामने से करो वीडियो वीडियो खेलना बंद क्योंकि हम

1006
01:13:56,080 --> 01:14:00,080
इधर से उत्तर देते रहेंगे तुम फिर वीडियो बनाओगे फिर उत्तर देंगे फिर वीडियो बनाओगे बार-बार

1007
01:14:00,080 --> 01:14:04,400
विषयांतर करोगे टू द पॉइंट बात करोगे नहीं जितनी बार मैं कोई बात कहूंगा

1008
01:14:04,400 --> 01:14:08,560
उससे आगे पहुंच जाओगे फोक के तो इसलिए आमने सामने से बात होना

1009
01:14:08,560 --> 01:14:14,240
बहुत आवश्यक है पहली बात अब तुमने बात कही

1010
01:14:14,240 --> 01:14:17,760
कि

1011
01:14:17,760 --> 01:14:23,360
यह शंकराचार्य [गला साफ़ करने की आवाज़] जी हज करने गए थे

1012
01:14:23,360 --> 01:14:27,440
कौन सी ऑथेंटिक किताब प्राप्त हुई है शंकराचार्य जी की किस परंपरा से प्राप्त

1013
01:14:27,440 --> 01:14:32,080
हुई है तुमको

1014
01:14:32,080 --> 01:14:36,080
तो तुमने एक दो उदाहरण और दिए एक दो एक एक

1015
01:14:36,080 --> 01:14:40,160
दो चीजें और बताई है शंकराचार्य जी का भाष्य ये था उसको ये बदल दिया

1016
01:14:40,160 --> 01:14:44,160
वो बदल दिया तो शंकराचार्य जी का भाष्य तुमको प्राप्त कहां से हो रहा है ये

1017
01:14:44,160 --> 01:14:48,240
बताओ हम तो इस से ही प्राप्त

1018
01:14:48,240 --> 01:14:52,240
होने वाली जो बुक है उसी के आधार आधार पर बता

1019
01:14:52,240 --> 01:14:56,400
रहे हैं। इस से प्राप्त हो रही है। उसी के आधार पर बता रहे हैं कि तुम्हारी

1020
01:14:56,400 --> 01:15:00,640
वर्तमान की जो भगवत गीता छप रही है उसमें बदलाव है और वर्तमान

1021
01:15:00,640 --> 01:15:04,960
की भगवत गीता में लिखा हुआ है कि बदलाव किया है हमने।

1022
01:15:04,960 --> 01:15:08,960
हम तब बात करते हैं। हम अपने मन से आरोप नहीं लगा रहे

1023
01:15:08,960 --> 01:15:12,960
कि तुमने ऐसा किया है। तुम जिस चीज को स्वीकार कर रहे हो उस चीज

1024
01:15:12,960 --> 01:15:17,040
पर हम क्वेश्चन उठा रहे हैं। और तुम हम पर ऐसे आक्षेप लगा रहे हो

1025
01:15:17,040 --> 01:15:21,040
जिस चीज को हमने स्वीकार ही नहीं किया है। समझ

1026
01:15:21,040 --> 01:15:25,120
रहे हो? जैसे तुम शिव और विष्णु में भेद मानते हो

1027
01:15:25,120 --> 01:15:29,120
तो अब हमने जब तुमने स्वीकार कर लिया शिव और विष्णु में भेद है। तब हम

1028
01:15:29,120 --> 01:15:33,120
तुमसे पूछ रहे हैं कि कैसे? और तुम क्या कर रहे हो

1029
01:15:33,120 --> 01:15:37,120
कि हमने यह कहा ही नहीं है कि शिव और विष्णु में भेद है या हमारी व्याख्या

1030
01:15:37,120 --> 01:15:41,200
और कुछ है। जैसे अल्लाह शब्द वहां

1031
01:15:41,200 --> 01:15:45,360
गुरुदेव कह रहे हैं कि अल्लाह अल्लाह नहीं अल्लाह। तो

1032
01:15:45,360 --> 01:15:49,520
तुम क्या कह रहे हो कि देखो तुम्हारे गुरुदेव खुद कह रहे हैं अल्लाह अल्लाह का मतलब शक्ति है।

1033
01:15:49,520 --> 01:15:54,080
अल्लाह को अल्लाह बनाए दे रहे हो। ये क्या है? एक ऐसे आक्षेप

1034
01:15:54,080 --> 01:15:58,080
लगाना जो हमने स्वीकार ही नहीं किया है। उस पर बात करना। और हम क्या

1035
01:15:58,080 --> 01:16:02,400
करते हैं? पहले तुम्हारे मंदिर में जाते हैं। तुम्हारे मंदिर वाले से ऑथेंटिक पर्सन से पूछते

1036
01:16:02,400 --> 01:16:06,560
हैं। क्या तुम कृष्ण और अल्लाह को एक मानते हो? कृष्ण अल्लाह

1037
01:16:06,560 --> 01:16:10,720
और यहोवा को एक मानते हो। वो जब डन करता है तब हम कहते कैसे एक?

1038
01:16:10,720 --> 01:16:14,720
आगे की बात पूछ रहे हैं। एक है तो कैसे है? भाई

1039
01:16:14,720 --> 01:16:18,880
गुरुदेव तो मना अगर मान लो उनकी किसी बात से तुमको यह लग रहा है कि उसने

1040
01:16:18,880 --> 01:16:23,040
उन्होंने किसी मुसलमान को जो मुसलमान उनकी शरण में आया हुआ है

1041
01:16:23,040 --> 01:16:27,120
जो मुसलमान प्रभावित हो रहा है हमारी सनातन संस्कृति से उसके लिए

1042
01:16:27,120 --> 01:16:31,280
दो मीठे बोल बोल दिए रसखान इत्यादि के लिए मीठे बोल नहीं सुनाई

1043
01:16:31,280 --> 01:16:35,280
दिए क्या भगा दें अगर कोई मुसलमान अगर कोई हिंदुत्व की ओर प्रभावित

1044
01:16:35,280 --> 01:16:40,080
हो रहा हो तो उसको भगा दें या भगाए नहीं तो तुम्हारे हिसाब से आचार्य बना दे सीधे

1045
01:16:40,080 --> 01:16:44,400
तुम तब मानोगे तो उन्होंने जो उसके लिए उचित

1046
01:16:44,400 --> 01:16:48,320
हो सकता है वैसा व्यवहार किया उसके प्रति तो तुमको ये लगा कि भाई वो जो है प्रेस

1047
01:16:48,320 --> 01:16:52,400
कर रहे हैं तो उन्होंने एक जगह स्पष्ट यह भी तो बोला है

1048
01:16:52,400 --> 01:16:56,720
कि भैया कुरान की सीमा का ईश्वर बाधित है

1049
01:16:56,720 --> 01:17:00,800
साक्षात अवतार नहीं ले सकता जगत बना सकता

1050
01:17:00,800 --> 01:17:05,280
है बन नहीं सकता ये खंडन भी तो किया है तो तुम अपने यहां के ऑथेंटिक

1051
01:17:05,280 --> 01:17:11,280
पर्सन के द्वारा कुरान का खंडन सुनाओ ना हमको सुनाया कभी

1052
01:17:13,120 --> 01:17:17,360
तो यह जो आक्षेप है अपने मन से कि हम यह मानते हैं और यह गलत

1053
01:17:17,360 --> 01:17:21,360
है। अरे भाई पहले हमारा मानने के संबंध में तो सही प्रमाण ले

1054
01:17:21,360 --> 01:17:25,440
आओ कि हम ये मानते हैं। तुम्हारे मानने

1055
01:17:25,440 --> 01:17:29,600
जिस तुम्हारी जिन मान्यताओं पर हमें हमारा प्रश्न है

1056
01:17:29,600 --> 01:17:33,600
वो मान्यताएं हम केवल पढ़ते नहीं है किताबों से

1057
01:17:33,600 --> 01:17:37,600
और केवल लेक्चर दूर से नहीं सुनते हैं। बाद में जाकर उसको क्लियर करते

1058
01:17:37,600 --> 01:17:41,920
हैं। ऐसा बाद में तुम यह ना कह दो कि नहीं तुम्हारी बात का हमने गलत मतलब निकाला

1059
01:17:41,920 --> 01:17:45,920
ना। उसको क्लियर करते हैं। कहीं दिखा दो तुम्हारे

1060
01:17:45,920 --> 01:17:49,920
ऑथेंटिक व्यक्ति ने ऑफिशियली कहीं पर क्लेम किया हो, कुरान का खंडन

1061
01:17:49,920 --> 01:17:54,000
किया हो, बाइबल का खंडन किया हो। तुम तो गुरु बना के बैठे हो

1062
01:17:54,000 --> 01:17:58,400
जीसस को। जीसस गुरु है। वो

1063
01:17:58,400 --> 01:18:02,560
जीसस जो बाइबल दे रहे हैं। यहां भी समझ लेना। अभी कल आ रहा है चर्च

1064
01:18:02,560 --> 01:18:03,520
वाला वीडियो वो देख

1065
01:18:03,520 --> 01:18:07,520
लेना। उसमें वो बातें हुई है वैष्णव वाली। पूरी

1066
01:18:07,520 --> 01:18:11,520
के शंकराचार्य जी ने जीसस को वैष्णव माना है। पर बाइबल

1067
01:18:11,520 --> 01:18:15,360
देने वाले के रूप में नहीं।

1068
01:18:15,360 --> 01:18:19,680
उनकी जानकारी में जीसस जो यहां 10 वर्ष रहे थे

1069
01:18:19,680 --> 01:18:23,680
उन्होंने वैष्णवों से शिक्षा दीक्षा लेकर वहां पर वैष्णवता फैलाई। मगर

1070
01:18:23,680 --> 01:18:27,680
उनकी वैष्णवता को एज इट इज बाइबल नाम के ग्रंथ में

1071
01:18:27,680 --> 01:18:31,760
नहीं लिखा गया है। उनके उनके मरने के कई सालों के बाद कंपाइल

1072
01:18:31,760 --> 01:18:36,400
की गई बाइबल जिसमें अपनी मनगढ़ंत बातें जीसस के नाम पर लिखी।

1073
01:18:36,400 --> 01:18:40,400
तो उस स्थिति में वह उनको वैष्णव कह रहे हैं। और आप गुरु कब कह रहे हो? जब वह

1074
01:18:40,400 --> 01:18:44,480
बाइबल को देने वाले हैं। यह अंतर है। कभी-कभी

1075
01:18:44,480 --> 01:18:48,480
सच में और सच के आसपास वाले झूठ में बहुत

1076
01:18:48,480 --> 01:18:53,200
जरा सा फर्क होता है। ये वही फर्क है। ठीक है?

1077
01:18:53,200 --> 01:18:57,280
इसको समझो। हां। तो बताओ कौन सी

1078
01:18:57,280 --> 01:19:01,440
परंपरा से तुमको प्राप्त हुई है शंकराचार्य की वो किताबें जिसमें कि शंकराचार्य

1079
01:19:01,440 --> 01:19:05,600
के भाष्य का बदला जाना सिद्ध होता है और उनका हज करके

1080
01:19:05,600 --> 01:19:09,760
आना सिद्ध होता है। बताओ बोबड़े भाई साहब अब मैं

1081
01:19:09,760 --> 01:19:13,760
बोलूं अब मैं बोलूं अब ठीक है इसको इसको बाजू में रहने दो इसको मुझे

1082
01:19:13,760 --> 01:19:17,840
अभी बात को समझो एक हफ्ता लगेगा इसका कुछ ढूंढ

1083
01:19:17,840 --> 01:19:18,640
के एडिटिंग करने

1084
01:19:18,640 --> 01:19:22,720
में अभी मेरा एआई चल नहीं रहा है वरना अभी तुमको मैं जवाब दे देता मेरा एआई बंद

1085
01:19:22,720 --> 01:19:27,440
है [हंसी] मेरा एआई पे डिपेंड हो गया।

1086
01:19:27,440 --> 01:19:32,320
एआई चल रहा होता तो मैं अभी जवाब दे देता था। अभी वो चल नहीं रहा अभी।

1087
01:19:32,320 --> 01:19:36,480
खैर एक और है कि मेरे चेहरे से क्या लेना

1088
01:19:36,480 --> 01:19:40,480
देना है? मेरे बिना चेहरे के बात करो ना। चेहरे से क्या लेना देना है?

1089
01:19:40,480 --> 01:19:44,830
तो बात तो कर ही रहे हैं। पहले तुम ये बताओ तुम्हारे साथ ऐसा क्या हुआ? क्या है?

1090
01:19:44,830 --> 01:19:48,960
[गला साफ़ करने की आवाज़] जो तुम्हें चेहरा छुपाना पड़ता है। क्या क्या दिक्कत क्या है? क्या

1091
01:19:48,960 --> 01:19:53,040
कुछ सामूहिक वगैरह कुछ ऐसा कोई घटना तो नहीं हो गई तुम्हारे साथ जिससे

1092
01:19:53,040 --> 01:19:57,040
वो जो अलंकारी बच्चा आया था वो भी डर रहा था कि मुझे कमरे में ले

1093
01:19:57,040 --> 01:20:01,360
जा रहे हैं। एक साथ मुझे कमरे में ले जाने का क्या [हंसी] मतलब

1094
01:20:01,360 --> 01:20:05,600
है? हां देखो मुझे वो सब याद नहीं करना मतलब

1095
01:20:05,600 --> 01:20:09,680
सॉरी मतलब कि मुझे वो सब बात नहीं करनी है। ठीक है?

1096
01:20:09,680 --> 01:20:13,920
और वो सब बात फालतू की मत करो। जो भी मेरे साथ हुआ है वो मैं देख लूंगा

1097
01:20:13,920 --> 01:20:17,920
ना। [हंसी] पहली बात तो ये बताओ कि तुमको

1098
01:20:17,920 --> 01:20:22,000
पता कैसे चलता है कि किसके साथ क्या हुआ है। यानी कि

1099
01:20:22,000 --> 01:20:27,200
हमारा अंदाजा सही है सनातन शंकर जी हां बिलकुल [हंसी]

1100
01:20:27,200 --> 01:20:32,640
फिर भी बता दो थोड़ा बहुत तो बता दो कितने लोग थे

1101
01:20:32,640 --> 01:20:33,680
मैं गिनती नहीं

1102
01:20:33,680 --> 01:20:37,890
कर पाया जाने दो यार मुझे रात को नींद नहीं आएगी फिर अच्छा गिनती भी नहीं करी

1103
01:20:37,890 --> 01:20:42,470
[हंसी]

1104
01:20:42,470 --> 01:20:46,480
[खांसने की आवाज़] ये है कि मुझे इतना पता है कि जो भी लोग थे

1105
01:20:46,480 --> 01:20:50,960
हमारे गुरु ने हमको ठूस ठूस के दिमाग में सिखाया

1106
01:20:50,960 --> 01:20:55,120
है कि जो भी अगर गलत कर रहा है वो मायावादी अद्वैती

1107
01:20:55,120 --> 01:20:59,120
ही होगा। इसलिए मुझे जितने भी अद्वैती है सब में उनहीं का

1108
01:20:59,120 --> 01:21:03,520
रूप दिखता है। अच्छा अच्छा इसलिए ये पर्सनल

1109
01:21:03,520 --> 01:21:08,080
है। ये है पर्सनल वजह है।

1110
01:21:08,080 --> 01:21:12,080
तो इसीलिए वो उन्होंने तुम्हारा थोबड़ा कुछ बिगाड़ा था। तुम्हारे थोबड़े के

1111
01:21:12,080 --> 01:21:16,400
साथ ऐसा क्या किया था जो तुम्हें एक आदत पड़ गई सबका थोबड़ा बिगाड़ने होता है ना? कि

1112
01:21:16,400 --> 01:21:20,720
मुझे किसी चार लोगों ने मिलके मारा था। अब मैं भूत बन गया। अब मैं सबको मारूंगा

1113
01:21:20,720 --> 01:21:26,720
तो तुम्हारे साथ के साथ गुन्स प्रतिशोध प्रतिशोध

1114
01:21:27,010 --> 01:21:29,760
[हंसी]

1115
01:21:29,760 --> 01:21:34,000
प्रतिशोध तो लेना ही चाहिए ना प्रतिशोध क्यों छोड़ने का जैसे तुम सब जगह जाके

1116
01:21:34,000 --> 01:21:38,880
प्रतिशोध लेते हो वैसे हम भी प्रतिशोध ले रहे हैं अच्छा

1117
01:21:38,880 --> 01:21:42,960
नहीं तो प्रतिशोध एग्जैक्ट वो चीज बताओगे तुम्हारा थोबड़ा कैसे बिगड़ा

1118
01:21:42,960 --> 01:21:47,360
थोबड़े के साथ क्या किया उन्होंने मतलब जिससे कि थोबड़ा इतना बेकार हो गया

1119
01:21:47,360 --> 01:21:53,360
बता दिया इनडायरेक्टली तो मुझे बताने की क्या जरूरत है?

1120
01:21:53,360 --> 01:21:57,440
अच्छा मैं समझ लो भैया इनके थोबड़े के साथ कुछ ऐसा हुआ है जिससे

1121
01:21:57,440 --> 01:22:01,440
कि थोबड़ा दिखाने लायक नहीं रह गए। है ना? इसी कारण से

1122
01:22:01,440 --> 01:22:05,760
ये सबका थोबड़ा बिगाड़ते हैं एडिटिंग के द्वारा। सिद्धांतिक खंडन

1123
01:22:05,760 --> 01:22:09,760
करो। सिद्धांतिक मैंने वीडियो बनाए

1124
01:22:09,760 --> 01:22:14,170
हैं। इत्तफा तुमने इतिफाई वर्ड भी नहीं बोले।

1125
01:22:14,170 --> 01:22:19,440
[हंसी] इतिफाई बहुत बड़ी अचीवमेंट है ये।

1126
01:22:19,440 --> 01:22:23,680
चलो अभी कुछ तुम्हारे द्वारा देखो मान गए मान गए देखो देखो देखो देखो मान गए

1127
01:22:23,680 --> 01:22:27,920
तुम्हारे भाई है ना मान गए अचीवमेंट अचीवमेंट देखा ऐसे एक एक

1128
01:22:27,920 --> 01:22:32,160
करके सबकी धुलाई करूंगा मैं एक एक करके [हंसी] अभी इसी

1129
01:22:32,160 --> 01:22:36,160
को काटूंगा इसी को काटूंगा और डालूंगा देखो इसको भी

1130
01:22:36,160 --> 01:22:40,560
वो टेढ़ामेढ़ा कर देना है ना सॉफ्टवेयर कौन सा यूज़ करते हैं आप मान लिया

1131
01:22:40,560 --> 01:22:45,120
सनातन शंकर ने मान लिया 85 अचीवमेंट है

1132
01:22:45,120 --> 01:22:49,120
बहुत बड़ा अचीवमेंट है [हंसी] उसमें मेरा

1133
01:22:49,120 --> 01:22:54,400
भी शायद एक दो वीडियो है शायद 85 में या वो ऊपर है उसके

1134
01:22:54,400 --> 01:22:58,480
नहीं दो तीन वीडियो मेरे भी है अभी तुमने बोलना

1135
01:22:58,480 --> 01:23:02,720
शुरू किया है ना इस अच्छा ठीक है और बोलना पड़ेगा मुझे 85

1136
01:23:02,720 --> 01:23:06,720
बार बोलना पड़ेगा समझ गया समझ गया मुझे 85

1137
01:23:06,720 --> 01:23:12,400
बार बोलना पड़ेगा तब जाके वो जुड़ेगा ठीक है कम से कम 85

1138
01:23:12,400 --> 01:23:16,640
एक ही आदमी का चेहरा बिगाड़ते बिगाड़ते मैं थक गया हूं दूसरा भी तो आना

1139
01:23:16,640 --> 01:23:20,800
चाहिए नो अच्छा ये चेहरा बिगाड़ने से सिद्ध क्या होता है

1140
01:23:20,800 --> 01:23:24,960
क्या वो अपनी संतुष्टि प्राप्त हो जाती है क्या खुद को मतलब एक स्वाता

1141
01:23:24,960 --> 01:23:29,680
सुखाय मिल जाता है मतलब हम लोग चेहरा बिगाड़ते नहीं है किसी का

1142
01:23:29,680 --> 01:23:33,920
ये प्रश्न किया भैया आपने पूछो पूछो इससे बहुत बोलता

1143
01:23:33,920 --> 01:23:39,600
है ये हम हां चेहरा चेहरा बिगाड़ के भाई क्या

1144
01:23:39,600 --> 01:23:43,680
चेहरा चेहरा बिगाड़ बोसली बंद हो गई ना बोलो बोलो देखो

1145
01:23:43,680 --> 01:23:47,840
ऐसे ही ऐसे ही [हंसी] अरे भाई बोलने तो

1146
01:23:47,840 --> 01:23:52,080
दो हम चेहरा बिगाड़ करके तुमको मतलब वो

1147
01:23:52,080 --> 01:23:56,160
वहां पर क्या तथ्यात्मक क्या प्राप्त होता है क्योंकि चेहरा बिगाड़ने से सिद्धांत

1148
01:23:56,160 --> 01:24:00,400
तो सिद्ध नहीं हो रहा है तो आप सैद्धांतिक प्रश्न करो जो अगर वैसे भी वो कुतर्क

1149
01:24:00,400 --> 01:24:04,400
होते हैं मगर करो मगर उसमें चेहरा बिगाड़ने से क्या मिलता है हमने आज

1150
01:24:04,400 --> 01:24:08,480
तक किसी का चेहरा नहीं बिगाड़ा है सिवाय रामपाल के रामपाल का एक

1151
01:24:08,480 --> 01:24:12,480
आध एक एक आध बार बिगाड़ा है वो भी तब जब जो है उन वो

1152
01:24:12,480 --> 01:24:16,560
लोग हमारा दसों बार बिगाड़ चुके हैं और राम रामपाल तो जानते ही हो उसका

1153
01:24:16,560 --> 01:24:20,640
तो कोई स्तर है ही नहीं नीचता का हमारे माताओं

1154
01:24:20,640 --> 01:24:25,040
के बारे में हमारे देवी देवताओं के बारे में बहुत नीच बातें बोली है रामपाल ने

1155
01:24:25,040 --> 01:24:29,360
तो वहां उसका चेहरा जरूर बिगाड़ा है खैर तो

1156
01:24:29,360 --> 01:24:33,360
तुमको तथ्यात्मक क्या वहां पे क्या सिद्ध होता है

1157
01:24:33,360 --> 01:24:38,080
चेहरा बिगाड़ अभी तुमने कुछ पढ़ा ही नहीं क्या मूर्ख संहिता पढ़ो मूर्ख संहिता

1158
01:24:38,080 --> 01:24:42,320
मूर्ख संहिता में क्लियर लिखा हुआ है कि जब तुम्हें

1159
01:24:42,320 --> 01:24:47,040
एकदम से खंडन करना है तो उसके उसके चेहरे के साथ खिलवाड़ करो।

1160
01:24:47,040 --> 01:24:51,120
उसके मूर्ख संिता पढ़ो। मूर्ख संहिता ये कहां

1161
01:24:51,120 --> 01:24:55,920
पे है? मूर्ख समिता कौन सा ग्रंथ है? मिलेगा। धुंधो धुंधो।

1162
01:24:55,920 --> 01:25:00,080
जैसे तुम बहुत सी चीजें ढूंढ लिए हो। वैसे और भी चीजें ढूंढो मिल जाएगा।

1163
01:25:00,080 --> 01:25:04,240
नहीं तो किसी दिन मैं मानते हो कि मैंने इसका मतलब मानते हो कि मैंने

1164
01:25:04,240 --> 01:25:07,280
कुछ ढूंढा है।

1165
01:25:07,280 --> 01:25:11,360
हां हां तो तुम्हारे तो काम ही वही है ना ढूंढना। ही तुम्हारा

1166
01:25:11,360 --> 01:25:15,520
काम है। हम तो [गला साफ़ करने की आवाज़] तुम्हारे

1167
01:25:15,520 --> 01:25:19,840
कुछ सवालों के जवाब तो शायद इसमें कवर होंगे अभी चर्चा में। मगर

1168
01:25:19,840 --> 01:25:24,720
फिर भी कुछ अगर मदद चाहिए हो अपने कुपोषण को दूर करने के लिए

1169
01:25:24,720 --> 01:25:28,880
कुछ मतलब खानपान क्या करें कि चेहरा वापस सुधर पाए जो दुनिया के सामने

1170
01:25:28,880 --> 01:25:32,880
आ पाए। किसी दूसरे रूप रंग में जरूरी नहीं कि उसी पहचान के साथ

1171
01:25:32,880 --> 01:25:37,200
आओ। पहचान बदल के आ जाओ। अपने माता-पिता का नाम चेंज कर दो।

1172
01:25:37,200 --> 01:25:41,200
जिस जिससे वह तुम्हें तुम्हारी पहचान होती हो कि भाई इनके

1173
01:25:41,200 --> 01:25:45,200
लड़के के साथ यह हुआ था इस नाम का लड़का तुम्हें क्या दिक्कत है दूसरे नाम के साथ

1174
01:25:45,200 --> 01:25:49,520
समाज के सामने आ जाओगे थोड़ा तुम्हारी खुराकराक ऐसी की जाए जो

1175
01:25:49,520 --> 01:25:54,080
तुम्हारे चेहरे के साथ जो कुछ हुआ था दुष्कर्म वो

1176
01:25:54,080 --> 01:25:58,320
जो है उससे आप उभ पाओ तुम्हारे सपोर्टर्स

1177
01:25:58,320 --> 01:26:02,400
भी ना कमेंट में यही बोलते हैं तुम्हारे सपोर्टर्स भी कमेंट में यही पूछते हैं मैंने तो

1178
01:26:02,400 --> 01:26:07,280
कितनी बार तुमको चैलेंज दिया तुम आ जाओ ना हमारे चैलेंज चैलेंज पे

1179
01:26:07,280 --> 01:26:12,880
अरे तो तुम्हारा चैनल कुछ ऐसा हो भी तो योग्यता वाला जो तुम्हारे चैनल पर आए।

1180
01:26:12,880 --> 01:26:17,280
भाई तुम्हारे किसी योग्य व्यक्ति ने बुलाया ईस्ट ऑफ कैलाश मंदिर

1181
01:26:17,280 --> 01:26:21,440
देखा था ना वीडियो गए थे ना ईस्ट ऑफ कैलाश कि नहीं गए मंदिर

1182
01:26:21,440 --> 01:26:25,680
में गए अंदर गए वहां मंदिर में जाकर के हमने नहीं ये कहा कि भैया

1183
01:26:25,680 --> 01:26:29,920
कमरे में क्यों ले जा रहे हो है ना तो हम वहां गए

1184
01:26:29,920 --> 01:26:30,800
और वहां बैठ

1185
01:26:30,800 --> 01:26:35,040
के अच्छे से चर्चा की वापस भी आए अपने को ऐसी

1186
01:26:35,040 --> 01:26:39,360
बात को याद मत दिलाओ यार हम

1187
01:26:39,360 --> 01:26:45,280
क्या थी बात तो बात क्या है थोड़ा बताओ तो सही भाई क्या कैसे कैसे

1188
01:26:45,280 --> 01:26:49,440
क्या क्या हो गया तुम्हारे साथ ठीक है किसी

1189
01:26:49,440 --> 01:26:53,440
दिन तुमको पर्सनल वीडियो भेज दूंगा लेकिन क्या तुम पे भरोसा नहीं है ना

1190
01:26:53,440 --> 01:26:57,520
वो हमारा एक बंदा गाली दिया था कुछ दिन पहले तो तुमने उसका

1191
01:26:57,520 --> 01:27:01,680
भी रिकॉर्डिंग करके डाल दिया तुम पे भरोसा नहीं है ना हम कैसे

1192
01:27:01,680 --> 01:27:06,080
भरोसा करें वरना तुमको हम लाइव दिखा देते थे क्या क्या हुआ

1193
01:27:06,080 --> 01:27:10,240
हमें फर्क नहीं पड़ता है एक बात बताओ कि जब तुम्हारे घर

1194
01:27:10,240 --> 01:27:15,040
की स्त्रियों पे हमला हो होगा या फिर वाकई में तुम्हें पौरुषिक

1195
01:27:15,040 --> 01:27:19,040
का प्रदर्शन करना होगा तो वहां पर भी तुम एडिटिंग करके पौरुष का प्रदर्शन करोगे

1196
01:27:19,040 --> 01:27:23,040
क्या कैसे करोगे डिजिटल मीडिया है डिजिटल जमाने में

1197
01:27:23,040 --> 01:27:27,040
ये सब नहीं करूंगा तो क्या करूंगा तुम डिजिटल नहीं समझ पा रहे

1198
01:27:27,040 --> 01:27:31,120
हो इसीलिए कहते हैं मायावादियों का बुद्धि पुराना था पुराना

1199
01:27:31,120 --> 01:27:36,440
ही रहेगा डिजिटल है तो इसी से सिद्ध करूंगा ना

1200
01:27:36,440 --> 01:27:42,080
[हंसी] यानी कि डिजिटल पौरुष से सिद्ध करोगे

1201
01:27:42,080 --> 01:27:46,160
अरे जब जमाना ही डिजिटल है, जमाना ही डिजिटल है तो फिर

1202
01:27:46,160 --> 01:27:50,560
कैसे सिद्ध करूंगा? इसी से सिद्ध करूंगा।

1203
01:27:50,560 --> 01:27:54,960
और सही बात बोलो तो मैंने सिद्ध कर दिया है। मैंने कर दिया है

1204
01:27:54,960 --> 01:27:59,360
बढ़िया है। बढ़िया तो अभी तुम्हारे कुछ प्रश्नों के उत्तर मैं दे दे रहा हूं।

1205
01:27:59,360 --> 01:28:03,360
कुछ जो तुम्हारे नहीं है वो एक व्यक्ति है। उसके कुछ मुझे

1206
01:28:03,360 --> 01:28:07,440
ठीक-ठाक प्रश्न लगे। तो उसके मैं उत्तर देता हुआ आगे बढ़ता हूं

1207
01:28:07,440 --> 01:28:11,440
और राम फिर बाकी [गला साफ़ करने की आवाज़] आगे फिर किसी और दिन आपसे बात

1208
01:28:11,440 --> 01:28:14,960
की जाएगी। है ना? बाकी

1209
01:28:14,960 --> 01:28:19,040
पहले आप लोग थोड़ा सा ये बोबड़ा सोल से अगर बात करनी हो तो आप लोग थोड़ी थोड़ी

1210
01:28:19,040 --> 01:28:23,520
बात कर सकते हैं। जी सनातन शंकर जी आप बात करें।

1211
01:28:23,520 --> 01:28:27,520
बोबड़ा सोल से आपको अगर कुछ पूछना हो तो बोबड़ा सोल ने आज बहुत

1212
01:28:27,520 --> 01:28:31,680
हिम्मत दिखाई है अपने बारे में। यहां यहां आके और सच्चाई बता

1213
01:28:31,680 --> 01:28:35,680
के। हां बिल्कुल बिल्कुल नहीं तो निकलता नहीं था

1214
01:28:35,680 --> 01:28:39,840
ये घर से बाहर कभी ये मुंह में पान दबा के बोलते हैं क्या बिना

1215
01:28:39,840 --> 01:28:44,080
पान दबाए बोलते हैं या कोई आवला डाल रखा है मुंह में नहीं वोसल

1216
01:28:44,080 --> 01:28:48,080
है ही चाय कॉफी हम लोग चाय कॉफी भी नहीं पीते समझे

1217
01:28:48,080 --> 01:28:52,080
क्या चाय कॉफी नहीं पीते नहीं मुंह में कुछ आमला दबा

1218
01:28:52,080 --> 01:28:56,350
रखा होगा तो उसके चक्कर में वो फिर ऐसी आवाज निकल जाती है

1219
01:28:56,350 --> 01:29:00,720
[हंसी] ये लोग चाय कॉफी नहीं पीते मगर ये जो है ना

1220
01:29:00,720 --> 01:29:04,800
जो क्या कहे अब जो अर्ध नग्न मातृ शक्तियां

1221
01:29:04,800 --> 01:29:08,800
अर्ध नग्न कपड़ों में नाचती है उनके साथ नाचते अवश्य है ये लोग ये लोग

1222
01:29:08,800 --> 01:29:13,280
अक्सर ये बातें किया करते हैं कि भैया ये चारों शंकराचार्यों

1223
01:29:13,280 --> 01:29:18,000
में बन नहीं रही है ये सैद्धांतिक बात है क्या

1224
01:29:18,000 --> 01:29:22,080
किस शंकराचार्य ने कहां पर जन्म लिया है कि कैसे उसकी

1225
01:29:22,080 --> 01:29:26,480
जीवन शैली में क्या-क्या घटित घटनाएं हैं ये सब शास्त्रोक्त बातें हैं क्या

1226
01:29:26,480 --> 01:29:30,320
हम लड़ रहे हैं शास्त्रों के सिद्धांतों के लिए उनमें

1227
01:29:30,320 --> 01:29:34,480
परिवर्तन कौन कर रहा है और तुम किन बातों को ला रहे हो? तुम्हारे

1228
01:29:34,480 --> 01:29:39,440
तो बन नहीं रही। धर्म ब्रह्म को लेकर के कोई अंतर है उनमें? हां।

1229
01:29:39,440 --> 01:29:43,520
अब बन नहीं रही। तुम्हारे यहां बन रही है। ऋतिक पालों

1230
01:29:43,520 --> 01:29:47,520
से केस चल रहा है इस का। क्यों चल रहा है भाई? पटना में

1231
01:29:47,520 --> 01:29:52,320
इतना बड़ा कांड हो गया। उसको क्या सजा दी जाए? हरे कृष्ण की माला करो। ये सजा है उसकी।

1232
01:29:52,320 --> 01:29:56,880
अरे भाई कोर्ट केस होना चाहिए था उस व्यक्ति के पास। नंगा

1233
01:29:56,880 --> 01:30:01,040
पकड़ा गया था वो व्यक्ति। किस किस हालात में तुम लोग पकड़े [गला साफ़ करने की आवाज़] जा रहे हो?

1234
01:30:01,040 --> 01:30:05,280
तुम लोग बात करते हो। चारों शंकराचार्यों में धर्म और ब्रह्म

1235
01:30:05,280 --> 01:30:09,280
को ले अर्थात सिद्धांतों को लेकर कोई अंतर है क्या? तुम्हारे यहां तो सिद्धांतों

1236
01:30:09,280 --> 01:30:14,240
को लेकर के अंतर आ रहा है ना। सिद्धांत अलग है तुम्हारे तो।

1237
01:30:14,240 --> 01:30:18,400
ऊपर से अगर आचरण की बात करो। चलो तो आचरण भी देख लो क्या-क्या

1238
01:30:18,400 --> 01:30:22,560
हो रहा है। तुम्हारे अपने लोगों को ही भगा भगा के मारा जा रहा है। उनके कपड़े

1239
01:30:22,560 --> 01:30:26,800
फट रहे हैं। वो लोग एक बड़ा क्रांति तुम्हारे विरोध में

1240
01:30:26,800 --> 01:30:30,880
तैयार कर दिए हैं। इस के विरुद्ध तुम्हारा

1241
01:30:30,880 --> 01:30:34,960
अपना व्यक्ति इस ईस्ट ऑफ क्लास में बैठकर के ठोक के कह रहा है। इस

1242
01:30:34,960 --> 01:30:39,120
गलत है। क्या करोगे यार इससे ज्यादा? कितने नीच गिरे

1243
01:30:39,120 --> 01:30:44,320
हुए व्यक्ति हो तुम। तुम्हें यही नहीं दिखाई पड़ रहा है।

1244
01:30:44,320 --> 01:30:45,440
अब मैंने यह सब बातें

1245
01:30:45,440 --> 01:30:49,440
की इनका जवाब ना दे के एक नए खाते खोल देना। फिर मैं उनका जवाब दूं वीडियो बना

1246
01:30:49,440 --> 01:30:53,680
के। फिर तुम नए खाते खोल दो। फिर मैं उनका जवाब दूं। इसलिए आमनासामना होना जरूरी

1247
01:30:53,680 --> 01:30:57,680
है। ठीक है। इसीलिए वीडियो नहीं बनाता मैं। तुम 90 क्या 90 हजार बना

1248
01:30:57,680 --> 01:31:01,840
दो। प्रश्न वही रहेंगे। प्रश्न [गला साफ़ करने की आवाज़]

1249
01:31:01,840 --> 01:31:06,160
वही रहेंगे। बिल्कुल जी। अच्छा ये बताइए के

1250
01:31:06,160 --> 01:31:10,480
भैया मुझे मुझे कुछ पूछना है इनसे।

1251
01:31:10,480 --> 01:31:14,480
ये ये जो है चेहरा बिगाड़ते हैं ज्यादातर तो ये

1252
01:31:14,480 --> 01:31:19,840
क्या इनके श्री कृष्ण ने सिखाया है इन्हें

1253
01:31:19,840 --> 01:31:24,080
प्रभुपाद ने सिखाया मूल संहिता मूर्ख संहिता लिखा तो है

1254
01:31:24,080 --> 01:31:28,080
अच्छा वो तो छोड़ो वो छोड़ो वो छोड़ो अच्छा एक बात बताओ

1255
01:31:28,080 --> 01:31:32,880
मुझे मायावती ये जो मच्छ

1256
01:31:32,880 --> 01:31:37,680
बोलते हो तुम किस आधार पे बोलते हो

1257
01:31:37,680 --> 01:31:42,080
म्च जो मलेच्छ धरती पर जन्मा है

1258
01:31:42,080 --> 01:31:46,160
जो जो कुल परंपरा से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शद्र में नहीं है वो मलेच्छ

1259
01:31:46,160 --> 01:31:48,320
है

1260
01:31:48,320 --> 01:31:53,040
विधर्मी है वो मलेच्छ है विधर्म को अपनाए हुए जो

1261
01:31:53,040 --> 01:31:57,120
हम जो कुछ दिन पहले अभक्ष भक्षण कर रहा था अभी

1262
01:31:57,120 --> 01:32:01,280
उसका जनेऊ संस्कार कर दिया गया है उसको ब्राह्मण बना दिया गया है ये

1263
01:32:01,280 --> 01:32:05,920
सभी मलेच्छ में आते हैं

1264
01:32:05,920 --> 01:32:11,920
मलेच्छों को जनेऊ करा रहे हो तुम लोग ऐसा नहीं करना चाहिए

1265
01:32:12,240 --> 01:32:16,320
मतलब मतलब मतलब हमारा जो फॉरेनर्स जो गुरु

1266
01:32:16,320 --> 01:32:20,480
बने हैं फॉरेनर्स वो मैक्स हो गए भाई तुम वो मत

1267
01:32:20,480 --> 01:32:24,480
देखो ना वो देखो वो लोग इंग्लिश में सिखाते हैं इंग्लिश में

1268
01:32:24,480 --> 01:32:28,720
इंग्लिश में सिखाते हैं तुम वो देखो ना अब तुमको इंग्लिश समझ

1269
01:32:28,720 --> 01:32:32,800
में नहीं आ रही है तो वो उनकी गलती है इंग्लिश

1270
01:32:32,800 --> 01:32:36,960
में सिखाते इंग्लिश में सिखाते हैं और मैंने देखा है बिकनी में भी सिखाते हैं बिकनी पहन

1271
01:32:36,960 --> 01:32:41,120
पहन के भी डांस देखा है मैंने कुछ वो भी सिखाते हैं वो भी

1272
01:32:41,120 --> 01:32:44,400
वो भी देखूं ना मैं

1273
01:32:44,400 --> 01:32:48,400
वो बिकनी वाला डांस नहीं है वहां तुम्हारे वो ढोलाक लेके बिकनी वाली एक

1274
01:32:48,400 --> 01:32:52,400
लड़की मातृशक्ति है वहां पे विदेशों में वहां नाच तो और

1275
01:32:52,400 --> 01:32:56,400
तो हम तो उनको हरि नाम से उनको शुद्ध करेंगे शुद्ध

1276
01:32:56,400 --> 01:33:02,400
शुद्ध करेंगे शुद्ध करेंगे तो तुम खुद क्यों लिपटे जा रहे हो उससे

1277
01:33:02,640 --> 01:33:06,880
शुद्ध करो ना उसको सबसे पहले उसकी गद्दर उड़ाओ

1278
01:33:06,880 --> 01:33:10,960
करने के लिए गटर को साफ करने के लिए गर में उतरना पड़ता है। इतना भी नहीं पता

1279
01:33:10,960 --> 01:33:15,120
है कि उसमें भी एक मर्यादा होती है। यह थोड़ी ना है कि तुम जहां

1280
01:33:15,120 --> 01:33:19,200
पर पोर्न इंडस्ट्री होगी वहीं चले जाओगे। उसका एक अंग

1281
01:33:19,200 --> 01:33:23,440
बन जाओगे साफ करने के लिए। उसमें भी एक मर्यादा होती है।

1282
01:33:23,440 --> 01:33:27,680
और आपको अगर उसको शुद्ध करना है तो आप उसको सबसे पहले तो एक बड़ा सा वस्त्र

1283
01:33:27,680 --> 01:33:31,760
लो पीतांबर और उसको ओढ़ाओ और फिर हरि

1284
01:33:31,760 --> 01:33:35,760
नाम कीर्तन करवाओ उससे। ये क्या मृदंग लेकर के नाचने लगे? ढोलक लेकर

1285
01:33:35,760 --> 01:33:41,760
के नाचने लगे उसके साथ। ये क्या तरीका है? हम

1286
01:33:41,920 --> 01:33:44,080
खैर

1287
01:33:44,080 --> 01:33:48,080
जी शास्त्रवाद [गला साफ़ करने की आवाज़] जी आपको और कुछ पूछना है इनसे? अनिकेत जी आप भी पूछ

1288
01:33:48,080 --> 01:33:52,080
लीजिए कुछ।

1289
01:33:52,080 --> 01:33:56,080
जी जी भैया। मेरे को यह पूछना था यही

1290
01:33:56,080 --> 01:34:00,240
तो आपने तो बहुत कुछ पूछ लिया है। लेकिन मुझे यह

1291
01:34:00,240 --> 01:34:04,320
पूछना था कि आधा कट इधर से लेता है।

1292
01:34:04,320 --> 01:34:08,560
आधा कट वहां से लेता है और सब कट कट करके

1293
01:34:08,560 --> 01:34:12,560
एडिटिंग करके जोड़ देता है। इसको ये खंडन कहता है। तो भाई मुझे यह

1294
01:34:12,560 --> 01:34:16,560
बता इस हिसाब से खंडन होता है क्या? कि

1295
01:34:16,560 --> 01:34:20,800
खंडन के लिए अच्छे से वीडियो बना। तू बता कि हां परंपरागत

1296
01:34:20,800 --> 01:34:26,800
आचार्य से आचार्यों के बुक में ये ये लिखा है। वो बता ना।

1297
01:34:27,360 --> 01:34:31,600
हां भाई क्या कहना है इस बारे में आपका? बता रहा

1298
01:34:31,600 --> 01:34:35,680
हूं। बता रहा हूं बता रहा हूं। बता रहा हूं भाई। बता रहा हूं। सबको सबको जवाब दूंगा।

1299
01:34:35,680 --> 01:34:40,480
किसी को छोडूंगा नहीं। सबको [हंसी] जवाब दूंगा।

1300
01:34:40,480 --> 01:34:44,560
तो ऐसा है भाई कि इतना ना हमारे पास टाइम

1301
01:34:44,560 --> 01:34:49,200
नहीं होता है। हम लोगों के पास में ड्यूटी वशिप इतना रहता है। ड्यूटी वशिप

1302
01:34:49,200 --> 01:34:53,920
ऑफर करना रहता है भगवान को। ठीक है? और

1303
01:34:53,920 --> 01:34:57,920
16 माला जप करना पड़ता है। 16 माला 16 माला जप

1304
01:34:57,920 --> 01:35:02,240
करने के बाद चारों नियमों पालन करने के बाद टाइम नहीं मिलता है।

1305
01:35:02,240 --> 01:35:06,480
हां वो एआई को मैं लिख तो देता हूं कि ऐसा ऐसा ऐसा ऐसा

1306
01:35:06,480 --> 01:35:07,120
वीडियो बना

1307
01:35:07,120 --> 01:35:11,040
वो छोटा बना देता है तो मैं क्या करूं?

1308
01:35:11,040 --> 01:35:15,200
अब मैंने बोला ना डिजिटल का जमाना है डिजिटल का। डिजिटल में शॉर्ट नहीं

1309
01:35:15,200 --> 01:35:19,360
पता चलता है।

1310
01:35:19,360 --> 01:35:23,360
ठीक है भाई। मतलब बड़ा तू बना ही नहीं सकता।

1311
01:35:23,360 --> 01:35:27,440
जी या सामना करने के लिए मतलब सिद्धांतिक बात तू कर

1312
01:35:27,440 --> 01:35:31,440
ही नहीं सकता। हां भाई बोबड़ा

1313
01:35:31,440 --> 01:35:35,680
बताओ सिद्धांतिक बात भाई इतनी देर से मैं सिद्धांतिक बात ही तो कर रहा हूं

1314
01:35:35,680 --> 01:35:40,080
लेकिन क्या वो कहते है ना मायावा सिद्धांतिक बात है क्या डिजिटल

1315
01:35:40,080 --> 01:35:44,720
डिजिटल कर रहा है अरे वही तो बोल रहा हूं ना अरे मायावादी

1316
01:35:44,720 --> 01:35:49,660
मायावादी बोल रहा है मायावादी हो सर्वनाथ

1317
01:35:49,660 --> 01:35:54,080
[हंसी] कोई बात समझ नहीं अरे मायावादी तो अरे मायावादी

1318
01:35:54,080 --> 01:35:58,480
तो तुम्हें बोला गया है तुम्हारे सिद्धांतों को और पुराण में

1319
01:35:58,480 --> 01:36:03,360
मायावादी मिथ्यावादी तो तुम हो अरे सिद्ध करो सिद्ध करो

1320
01:36:03,360 --> 01:36:07,200
शास्त्र प्रमाण है भाई शास्त्र प्रमाण

1321
01:36:07,200 --> 01:36:13,200
का विरोध करते हैं वो मायावादी है बहुत बुरा बुरा लिखा हुआ है

1322
01:36:16,720 --> 01:36:21,280
प्रक्षिप्त है प्रक्षिप्त है

1323
01:36:21,280 --> 01:36:25,760
प्रो [हंसी] अच्छा खैर मैं थोड़ी सी आगे

1324
01:36:25,760 --> 01:36:31,040
कुछ बातें बता देता हूं। अ

1325
01:36:31,040 --> 01:36:37,040
क्या कहते हैं एक ये [गला साफ़ करने की आवाज़]

1326
01:36:38,160 --> 01:36:42,480
पेजावर मठ वाली बात उठाई जा रही है। हमारा जो उसके बाद एक

1327
01:36:42,480 --> 01:36:46,640
क्या कहते हैं? मधवाचार्य जी की परंपरा के जो आचार्य हैं

1328
01:36:46,640 --> 01:36:50,560
[गला साफ़ करने की आवाज़] उनके साथ में

1329
01:36:50,560 --> 01:36:54,560
चर्चा हुई है सबने देखी है तो एक बात उठाई जा रही है कि

1330
01:36:54,560 --> 01:36:59,440
भाई वो जो मधवाचार परंपरा के कोई आचार्य है उन्होंने तो खुद जो है बहुत

1331
01:36:59,440 --> 01:37:03,680
वो किया है अ एक मिनट आप

1332
01:37:03,680 --> 01:37:08,240
लोग कंटिन्यू करिए मैं जरा आता हूं

1333
01:37:08,240 --> 01:37:11,530
जी जी

1334
01:37:11,530 --> 01:37:15,680
[गला साफ़ करने की आवाज़] तो बोबड़ा सोल जी आप ये बताइए देखो भाग

1335
01:37:15,680 --> 01:37:19,920
गया भाग गया हां अरे नहीं नहीं आएंगे वापस आएंगे। भागे नहीं है। तुम मत भागना

1336
01:37:19,920 --> 01:37:24,000
अभी। ठीक है? तो यह बताओ ये जो तुमने फिल्म बनाई है महावतार

1337
01:37:24,000 --> 01:37:29,120
नरसिम वाली यह तुम्हारे किसी स्कॉन वाले ने बनाई है।

1338
01:37:29,120 --> 01:37:35,120
और क्या भाई ऐसा कोई बना सकता है क्या? टू क्रिप्टोस

1339
01:37:35,280 --> 01:37:39,440
हां नहीं तो हमें भी यही पता चला ना कि ये जो फिल्म बनाई

1340
01:37:39,440 --> 01:37:43,520
है महावतार नरसिम इसमें तुमने शुरू में ही तुम्हारे बंदे

1341
01:37:43,520 --> 01:37:47,600
ने ये निर्देशक अश्विन कुमार जो है इस से जुड़ा

1342
01:37:47,600 --> 01:37:51,600
हुआ ये व्यक्ति है तो इसने वहां पर शिव

1343
01:37:51,600 --> 01:37:55,520
जी का भी अपमान किया हुआ है उसमें

1344
01:37:55,520 --> 01:38:00,240
सिद्ध करो सिद्ध करो सिद्ध शुरू में ही देखो जहां पर

1345
01:38:00,240 --> 01:38:04,400
जो ऋषि हैं। वह वहां पर जब संध्या करते

1346
01:38:04,400 --> 01:38:08,560
हैं तो जब ऋषि माता उनके पास आती हैं तो वह

1347
01:38:08,560 --> 01:38:12,640
कहते हैं कि भाई यह जो समय है वह सही नहीं है

1348
01:38:12,640 --> 01:38:16,880
क्योंकि इस वक्त जो है जो राक्षसों

1349
01:38:16,880 --> 01:38:20,960
के और प्रेतों के देवता शिव जो है इस वक्त विचरण कर रहे हैं। तो यह

1350
01:38:20,960 --> 01:38:25,280
समय शुभ नहीं है। तो वहां पर तुमने शिव जी का अपमान किया हुआ है उस मूवी में।

1351
01:38:25,280 --> 01:38:26,640
उस फिल्म में

1352
01:38:26,640 --> 01:38:31,360
मैं भी यही पूछने वाला था। है ना? तो

1353
01:38:31,360 --> 01:38:36,160
तुमने कितने करोड़ रुपए लगाकर वो फिल्म बनाई है। है ना? 40 50 करोड़

1354
01:38:36,160 --> 01:38:40,240
तुमने उसमें वास्तविक पक्ष रख दूं। उसमें भागवत में ये लिखा

1355
01:38:40,240 --> 01:38:44,400
हुआ है कि क्योंकि [गला साफ़ करने की आवाज़] शिवजी उनके

1356
01:38:44,400 --> 01:38:48,560
साडू भाई लगते हैं जो ऋषि थे। हम

1357
01:38:48,560 --> 01:38:52,640
तो साडू भाई क्योंकि इस समय विचरण पर होंगे हम।

1358
01:38:52,640 --> 01:38:57,120
इस कारण से उनकी नजर सब जगह होती है। तो वो जो

1359
01:38:57,120 --> 01:39:01,360
रमण वाला मामला है उस वो उनकी नजर में ना जाए तो एक लज्जा

1360
01:39:01,360 --> 01:39:05,920
भाव उनको याद दिला रहे हैं। वो हमें जैसे होता है ना कि वो देख लेगा कोई तो

1361
01:39:05,920 --> 01:39:10,000
शिवजी देख लेंगे। वो ये कह रहे हैं ये नहीं कि शिवजी के कोई

1362
01:39:10,000 --> 01:39:14,320
गण है जो वो वहां जन्म ले लेंगे। पहली बात हम

1363
01:39:14,320 --> 01:39:18,720
दूसरी बात यह है कि अगर गण की बात की जाए कि कोई गण

1364
01:39:18,720 --> 01:39:22,960
किसका गण जो है किसी का गलत गण जो है जन्म ले सकता है

1365
01:39:22,960 --> 01:39:27,440
तो जिसने जन्म लिया था वो किसका गण था हिरण्यकश्यप

1366
01:39:27,440 --> 01:39:31,520
के रूप में किसने जन्म लिया था जय विजय

1367
01:39:31,520 --> 01:39:35,760
थे ना द्वारपाल विष्णु के ही गण थे वो विष्णु के गण

1368
01:39:35,760 --> 01:39:39,760
भगवान के ही गण थे अगर ये बात है कि भाई देखो शिव जी के

1369
01:39:39,760 --> 01:39:41,840
गण है और जो है वो जन्म ले लेंगे

1370
01:39:41,840 --> 01:39:46,080
तो जन्म तो लिया विष्णु के गणों ने। अगर ऐसी बात है तो

1371
01:39:46,080 --> 01:39:50,080
वहां पर गणों का जन्म लेने का मामला था ही नहीं। वहां पर ये मामला था कि शिव

1372
01:39:50,080 --> 01:39:54,080
जी जो है भ्रमण पर होते हैं अपने समस्त जो गण होते

1373
01:39:54,080 --> 01:39:58,080
हैं उनके उनके साथ और क्योंकि वो साडू लगते

1374
01:39:58,080 --> 01:40:02,160
हैं उनके ऋषि के क्योंकि ये किसी प्रकार से

1375
01:40:02,160 --> 01:40:08,160
बहने लगती थी जो ऋषि जी ऋषि की जो पत्नी थी वो और उधर वो

1376
01:40:08,160 --> 01:40:12,320
पार्वती माता है ना तो इस कारण से

1377
01:40:12,320 --> 01:40:16,480
वहां पर वह शब्द आया जिसको इन्होंने इस तरह से भुना लिया अपनी

1378
01:40:16,480 --> 01:40:21,200
फिल्म में तो इसका कोई जवाब है भाई बोबड़ा

1379
01:40:21,200 --> 01:40:25,840
हां देखा यही होता है जब किसी अच्छे और मायावाद

1380
01:40:25,840 --> 01:40:30,000
भाष सुनो सर छोड़ दो उसमें कुछ बोलना ही नहीं एक चीज मैं बता दूं

1381
01:40:30,000 --> 01:40:34,080
इसका उत्तर सरल है जिस तरह से दूध

1382
01:40:34,080 --> 01:40:38,160
से सुन लो नई बात बता रहा हूं जिस तरह से दूध

1383
01:40:38,160 --> 01:40:42,240
से दही बन सकता है दही से दूध नहीं बन सकता है। उसी तरह

1384
01:40:42,240 --> 01:40:46,480
से कृष्ण से शिव बन सकते। शिव से कृष्ण नहीं बन सकते। और

1385
01:40:46,480 --> 01:40:50,560
शिव जी तो तामसी है ना भाई। तामसी है।

1386
01:40:50,560 --> 01:40:54,560
ये लिख लो लिख लो काम आएगा। हंसो मत लिख लो। [हंसी] तुमको पता भी नहीं

1387
01:40:54,560 --> 01:40:57,120
होगी ये बात कि दूध से दही और दही

1388
01:40:57,120 --> 01:41:01,200
से दूध वाला। अच्छा ये बताओ भगवान श्री कृष्ण

1389
01:41:01,200 --> 01:41:06,080
अनंत अबाध्य सर्वशक्तिमान है या नहीं?

1390
01:41:06,080 --> 01:41:08,640
है है

1391
01:41:08,640 --> 01:41:12,640
तो वो शिव बनने के बाद वापस श्री कृष्ण नहीं बन सकते फिर

1392
01:41:12,640 --> 01:41:16,720
नहीं बन सकते भाई दूध से दही बन दही से दूध बन सकता है क्या

1393
01:41:16,720 --> 01:41:20,720
दही से दूध इसलिए नहीं बन सकता क्योंकि जो दूध है वो दही बनने पर

1394
01:41:20,720 --> 01:41:25,040
बाधित है दूध एक बाधित तत्व है क्या श्री कृष्ण भी बाधित

1395
01:41:25,040 --> 01:41:30,400
है क्या

1396
01:41:30,400 --> 01:41:34,720
हो गया बोला हो गया इसको कहते

1397
01:41:34,720 --> 01:41:38,800
उत हां हां हां बाधित है बाधित है अगर हम

1398
01:41:38,800 --> 01:41:42,960
हार रहे हैं तो बाधित है अगर यहां पर अगर मैं हार रहा हूं तो जीतने के लिए मैं

1399
01:41:42,960 --> 01:41:47,680
यहां भी बाधित हूं अच्छा श्री कृष्ण भगवान बाधित है फिर

1400
01:41:47,680 --> 01:41:52,240
वाह सर्वशक्तिमान सर्वशक्तिमान का मतलब क्या है

1401
01:41:52,240 --> 01:41:56,480
अनंत पूछता हूं सर्वशक्तिमान ईश्वर

1402
01:41:56,480 --> 01:42:02,080
है तो क्या वो बाधित नहीं हो सकता है

1403
01:42:02,080 --> 01:42:08,080
सर्वशक्तिमान का मतलब ही है कि जो बाध्य ना हो

1404
01:42:12,720 --> 01:42:14,480
अभी मैं तुम्हारे प्रति तुम्हारे

1405
01:42:14,480 --> 01:42:18,480
ऊपर डालता हूं। अब बताओ मुझे क्या भगवान कृष्ण जो है

1406
01:42:18,480 --> 01:42:24,480
वो वो सर्वशक्तिमान है कि नहीं? हैं?

1407
01:42:24,720 --> 01:42:29,200
ठीक है। तो वो सारे कार्य कर सकते हैं तो क्या वो बाधित

1408
01:42:29,200 --> 01:42:33,280
हो सकते हैं? अरे भाई बाधित होना तो उनके उसमें आ गया

1409
01:42:33,280 --> 01:42:37,280
ना कि जब वह सर्वशक्तिमान है तो बाधित होना सर्वशक्तिमत्ता को काट रहा

1410
01:42:37,280 --> 01:42:39,680
है ना।

1411
01:42:39,680 --> 01:42:44,000
बाधित होना सर्वक्ता काट रहा है। मतलब तुम यह कह रहे हो

1412
01:42:44,000 --> 01:42:48,080
कि क्या विष्णु जी ऐसा कार्य कर सकते हैं जिसमें वो कुछ ना करें।

1413
01:42:48,080 --> 01:42:54,080
आप अपनी पहली बात से दूसरी बात काट रहे हो ना।

1414
01:42:54,160 --> 01:42:58,240
एक मिनट वो मैं डाला हूं। थोड़ा समझ में समझ में नहीं

1415
01:42:58,240 --> 01:43:02,320
आएगा। एक काम करना एक काम करना एडिटिंग करके बना

1416
01:43:02,320 --> 01:43:03,520
देना कुछ

1417
01:43:03,520 --> 01:43:07,600
हम ठीक है वही अभी मुंह टेढ़ा कर देना ये

1418
01:43:07,600 --> 01:43:11,680
देखो ये देखो कैसा मुंह टेढ़ा किया हुआ है तुमने ये क्या है ये ये

1419
01:43:11,680 --> 01:43:15,760
कौन सा सॉफ्टवेयर यूज़ करते हो ये देखो शिवश जी

1420
01:43:15,760 --> 01:43:19,760
का भी है देखो मजा आ रहा है ना ऐसा वीडियो देख के

1421
01:43:19,760 --> 01:43:24,160
हो रहा है ना ऐसे ही दुख होता है जब तुम हम लोगों से ऑथेंटिक

1422
01:43:24,160 --> 01:43:28,320
सॉरी अन ऑथेंटिक ऑथेंटिक प्रश्न पूछते हो नहीं तो

1423
01:43:28,320 --> 01:43:32,720
तुमने तो जो इस के जो तुम्हारे खुद के वो है उनके भी तुमने टेढ़े-मेढ़े

1424
01:43:32,720 --> 01:43:36,800
मुंह किए हुए हैं। तुम तो अपने वाले जो तुम्हारे बाबा लोग कोई

1425
01:43:36,800 --> 01:43:40,960
भी नहीं होगा मेरा बाप भी होगा

1426
01:43:40,960 --> 01:43:45,120
ना अगर मेरे को बोलेगा ना तो मैं उसका भी मुंह टेढ़ा कर दूंगा। अच्छा

1427
01:43:45,120 --> 01:43:49,200
अच्छा ये ये बताओ तुम्हारे पिताजी भी उन लोगों को उन

1428
01:43:49,200 --> 01:43:53,280
लोगों में शामिल तो नहीं थे जिन्होंने तुम्हारे साथ ऐसा कुछ किया जिसके कारण तुम मुंह दिखाने के

1429
01:43:53,280 --> 01:43:57,280
लायक नहीं रह गए। मतलब उन्होंने ही उनको सह दी हो कुछ ऐसा हो

1430
01:43:57,280 --> 01:44:01,440
कि तुमसे वह तंग आ गए हो और तुमसे तुम तुमको निपटाने

1431
01:44:01,440 --> 01:44:05,680
के लिए ही उन लोगों को तुम्हारे पास भेजा हो जो तुम्हारा आज ये हाल है

1432
01:44:05,680 --> 01:44:09,680
ऐसा कुछ है क्या पहले बात तो एक बात बताओ मैं एक क्वेश्चन इसका उत्तर दूंगा

1433
01:44:09,680 --> 01:44:13,760
दूंगा एक क्वेश्चन मेरे को एक बात सच सच बताना भाई तुमको

1434
01:44:13,760 --> 01:44:19,760
तुम्हारे सिद्धांत के भाई मेरा कोई आदमी तुम्हारे साथ मिला हुआ है क्या

1435
01:44:20,560 --> 01:44:24,560
तुम्हारे कोई मेरा कोई आदमी तुम्हारे साथ मिला

1436
01:44:24,560 --> 01:44:28,640
हां भैया तुम्हारे कुछ सिद्धांत का क्वेश्चन सिद्धांत का कसम

1437
01:44:28,640 --> 01:44:32,720
दिया मैंने कसम दिया सिद्धांत का नहीं नहीं नहीं तुम्हारे कुछ लोग

1438
01:44:32,720 --> 01:44:36,800
हैं जो तुम्हारी खुफिया जानकारियां हमें दे रहे हैं समय आने पर उचित

1439
01:44:36,800 --> 01:44:39,120
इंतजाम तुम्हारा किया जाएगा कुछ

1440
01:44:39,120 --> 01:44:45,120
लोग हैं इस बात की चिंता मत करो

1441
01:44:45,120 --> 01:44:49,360
में बैठे हुए हैं अंदर चलिए ठीक है बोबड़ा

1442
01:44:49,360 --> 01:44:53,760
जी से बहुत सारी बातें हो गई और काफी रोचक रही बातें बोबड़ा जी

1443
01:44:53,760 --> 01:44:57,840
हम फिर से आपसे किसी दिन बात करेंगे। काफी सारी बातें हो गई और

1444
01:44:57,840 --> 01:45:01,920
अह जो कुछ ऐसे प्रश्न उठाए

1445
01:45:01,920 --> 01:45:05,920
जा रहे हैं जिनका सवाल देना जवाब देना उचित समझता हूं। वो आपने नहीं उठाए

1446
01:45:05,920 --> 01:45:11,920
हैं। और लोगों ने उठाए हैं। वो मैं आज दिए दे रहा हूं। मौका है तो।

1447
01:45:12,310 --> 01:45:16,480
[गला साफ़ करने की आवाज़] सबसे पहली बात है जो पेजावर मठ

1448
01:45:16,480 --> 01:45:20,560
वाली बात है ना वो जो आचार्य जी हैं जो जिनके साथ वार्ता

1449
01:45:20,560 --> 01:45:24,640
हुई है तो उसमें एक बात आ रही है कि भाई मद संप्रदाय के

1450
01:45:24,640 --> 01:45:28,960
ही एक आचार्य हैं जिन्होंने यह माना है कि

1451
01:45:28,960 --> 01:45:32,960
जो इस है बहुत अच्छा कार्य कर रहा है और

1452
01:45:32,960 --> 01:45:37,200
अप्रिशिएट किया है। ठीक है? तो इसमें [गला साफ़ करने की आवाज़] पहली

1453
01:45:37,200 --> 01:45:41,200
बात आती है कि इस का ही एक व्यक्ति है जिसको जब यह बताया गया कि मध्य

1454
01:45:41,200 --> 01:45:45,440
संप्रदाय के एक आचार्य ने इस को अप्रिशिएट किया या इस

1455
01:45:45,440 --> 01:45:49,920
को मान लो सर्टिफाइड तक कह दिया। अपना अंग तक कह दिया। मान लो दुर्जनंतोष

1456
01:45:49,920 --> 01:45:53,920
ने ऐसे ये तक कह दिया गया स्कॉन हमारा ही अंग है। यह बात जब

1457
01:45:53,920 --> 01:45:54,420
इस

1458
01:45:54,400 --> 01:45:58,960
के ही व्यक्ति को बताई गई जिसका नाम है केशव

1459
01:45:58,960 --> 01:46:04,960
मोहन प्रभु। पता नहीं क्या नाम है? क्या नाम है अंकित जी? केशवदास

1460
01:46:05,440 --> 01:46:09,680
मालूम है आपको?

1461
01:46:09,680 --> 01:46:14,240
अंकित जी?

1462
01:46:14,240 --> 01:46:18,320
हां। हां तो केशवदास प्रभु करके हैं। उन्होंने इस बात को जब उनको बताया गया

1463
01:46:18,320 --> 01:46:22,400
कि भाई मधवाचार वालों वालों ने मान लिया इस्कॉन को मतलब

1464
01:46:22,400 --> 01:46:26,480
एप्रिशिएट किया अपना अंग मान लिया तो उन्होंने कहा कि नहीं वो ऐसे ही बोल रहे होंगे

1465
01:46:26,480 --> 01:46:30,640
उस समय इस्कॉन वालों को वो संबोधित कर रहे होंगे

1466
01:46:30,640 --> 01:46:34,720
तो उनको अच्छा लगे इसलिए ऐसे बोल दिया होगा और आपको बता दूं कि अगर

1467
01:46:34,720 --> 01:46:39,120
एप्रिशिएट की बात है तो समय-समय पर जो पूज्य गुरुदेव है पूरी शंकराचार्य

1468
01:46:39,120 --> 01:46:43,200
उन्होंने ब्रह्मा कुमारी को भी अप्रिशिएट किया है कुछ अंशों में गायत्री

1469
01:46:43,200 --> 01:46:47,280
परिवार को एप्रिशिएट किया है कुछ अंशों में और

1470
01:46:47,280 --> 01:46:51,440
[गला साफ़ करने की आवाज़] क्या कहते हैं? आर्य समाज को भी कुछ कुछ अंशों में

1471
01:46:51,440 --> 01:46:57,440
एप्रिशिएट किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि आर्य समाज को प्रमाणिक कह रहे हैं। ठीक है?

1472
01:46:57,760 --> 01:47:02,000
[खांसने की आवाज़] दूसरी बात अगर मान भी लिया जाए

1473
01:47:02,000 --> 01:47:06,160
कि पेजा जो कोई एक आचार्य है मधवाचार्य संप्रदाय के जिन्होंने माना है

1474
01:47:06,160 --> 01:47:09,600
इस को प्रमाणिक। हालांकि माना नहीं है। अगर यह बात मान भी

1475
01:47:09,600 --> 01:47:13,680
ली जाए कि माना है उन्होंने प्रमाणिक तो क्या होगा कि

1476
01:47:13,680 --> 01:47:17,760
यह जितने भी क्वेश्चंस है ना उनके निराकरण चाहिए होंगे ना

1477
01:47:17,760 --> 01:47:21,920
सैद्धांतिक बातें जैसे विद्या भास्कर जी ने भागवतानंद के

1478
01:47:21,920 --> 01:47:26,000
लिए कह दिया कि वो प्रामाणिक आचार्य है तो फिर क्वेश्चन पुट

1479
01:47:26,000 --> 01:47:30,160
अप्स होते हैं ना वहां पे कि वो किस-किस प्रकार से यह वाली दिक्कत आती है निग्रह संप्रदाय

1480
01:47:30,160 --> 01:47:34,160
की यह परंपरा भाष्य कौन सा है ब्रह्म सूत्र का जिसके कारण उन्हें प्रामाणिक माना

1481
01:47:34,160 --> 01:47:38,320
जाए परंपरा प्राप्त माना जाए तत्व की विवेचना कैसे होगी

1482
01:47:38,320 --> 01:47:44,240
यह सारी बातें भी वहां पर आ जाती हैं। अच्छा

1483
01:47:44,240 --> 01:47:48,400
तो यह जो सवाल हमने किए जो व्यक्ति ये प्रश्न उठा रहा है कि

1484
01:47:48,400 --> 01:47:52,480
उन्होंने तो मान लिया है। पेजावर वालों ने मान लिया है। अरे भाई तो यह सवाल

1485
01:47:52,480 --> 01:47:56,560
ये वाले सवाल जो सवाल किए गए हैं जिनके आधार पर

1486
01:47:56,560 --> 01:48:00,800
पुष्टि हुई है कि जो इस है वो प्रामाणिक

1487
01:48:00,800 --> 01:48:04,800
रूप से मधु संप्रदाय से जुड़ा जुड़ा हुआ नहीं है। तो तुम जब यह कह रहे हो

1488
01:48:04,800 --> 01:48:08,960
कि उनके आचार्य ने माना है। माना मानने का यदि आधार है वह आधार

1489
01:48:08,960 --> 01:48:13,120
बताओ ना इन सवालों का निराकरण भी बताओ ना निराकरण

1490
01:48:13,120 --> 01:48:17,120
ले आओ फिर कि 1427 में ब्रह्म कहा

1491
01:48:17,120 --> 01:48:21,120
गया ब्रह्म का अर्थ मधवाचार्य जी ने माया माना

1492
01:48:21,120 --> 01:48:24,720
और फिर प्रकृति लक्ष्मी माना ठीक है और तुमने

1493
01:48:24,720 --> 01:48:28,880
क्या माना ब्रह्म का अर्थ निराकार ब्रह्म अब ये बताओ

1494
01:48:28,880 --> 01:48:33,040
लक्ष्मी जी में और निराकार ब्रह्म में अंतर है कि नहीं

1495
01:48:33,040 --> 01:48:37,120
बताओ फस गए ना यहां

1496
01:48:37,120 --> 01:48:41,520
आप विपरीत हो गए अपनी गुरु परंपरा के। उसके अलावा भागवत

1497
01:48:41,520 --> 01:48:45,840
पुराण के लिए वह लोग नहीं जा रहे श्रीधर स्वामी के पास। आपका कहना है कि श्रीधर

1498
01:48:45,840 --> 01:48:50,080
स्वामी जो थे वो जो है विष्णु स्वामी संप्रदाय के अरे भाई मैंने

1499
01:48:50,080 --> 01:48:54,400
कहा है क्या उस इंटरव्यू में कि विष्णु संप्रदाय के नहीं थे या वो अ

1500
01:48:54,400 --> 01:48:58,400
क्या कहते हैं वो इस पर जोर दिया हो कि भाई वो

1501
01:48:58,400 --> 01:49:02,400
शंकराचार्य मैंने कहा ऐसा वो शंकर शंकर शंकराचार्य संप्रदाय के हम

1502
01:49:02,400 --> 01:49:06,480
लोग मानते हैं। इस इससे मतलब नहीं है। वो मधवाचार्य संप्रदाय के

1503
01:49:06,480 --> 01:49:10,800
नहीं थे। ये पॉइंट है तो फिर जब वो मधवाचार्य संप्रदाय

1504
01:49:10,800 --> 01:49:14,800
के नहीं है तो उनके पास भागवत के लिए जाने वाला विजयध्वज के पास

1505
01:49:14,800 --> 01:49:18,880
ना जाने वाला मधवाचार्य के पास ना जाने वाला फिर मधवाचार्य

1506
01:49:18,880 --> 01:49:22,880
परंपरा का कैसे हो रहा है भाई हां सवाल

1507
01:49:22,880 --> 01:49:26,960
ये है विष्णु स्वामी संप्रदाय वाले क्यों नहीं आ

1508
01:49:26,960 --> 01:49:31,280
रहे ये कहने कि श्रीधर स्वामी हमारे हैं शंकर परंपरा के नहीं है फिर उसमें कुतर्क

1509
01:49:31,280 --> 01:49:35,280
आता है कुतर्क ये आता है कि भाई ये

1510
01:49:35,280 --> 01:49:39,440
स्वामी जो टाइटल यह कौन से उसमें होता है मेरे पास पूरा ग्रंथ

1511
01:49:39,440 --> 01:49:39,940
रखा है

1512
01:49:39,760 --> 01:49:43,760
मठामनाय मानुष आश्रम इसमें श्रीधर नाम से

1513
01:49:43,760 --> 01:49:47,920
एक आचार्य नहीं केवल गोवर्धन परंपरा में गोवर्धन पूरी पीठ की परंपरा

1514
01:49:47,920 --> 01:49:52,000
में कम से कम चार से पांच ऐसे आचार्य हुए जिनका नाम था

1515
01:49:52,000 --> 01:49:56,080
श्रीधर और स्वामी जरूरी नहीं है कि उनके टाइटल के रूप में

1516
01:49:56,080 --> 01:50:01,360
ही दिया जाए यह भी ध्यान रखो है ना दयानंद स्वामी

1517
01:50:01,360 --> 01:50:07,360
बहुत से लोगों के नाम के साथ स्वामी लगा दिया जाता है उनके नाम विद्या स्वामी

1518
01:50:07,520 --> 01:50:11,520
अब विद्या को भी कह दो क्योंकि स्वामी टाइटल लगाया तो हरि और बुक्का के गुरु नहीं

1519
01:50:11,520 --> 01:50:15,680
थे। सायन के बड़े भाई नहीं थे जिन्होंने वेदों का भाष्य किया। तो शयनाचार्य जो है वो

1520
01:50:15,680 --> 01:50:19,680
भी किसी और स्वामी संप्रदाय के सिद्ध कर दो। बेवकूफ लोग हो। इसीलिए तो

1521
01:50:19,680 --> 01:50:24,160
कहता हूं भाई सामने आकर के बात करो तब तुम्हारी एक एक बात का जवाब दिया जाए।

1522
01:50:24,160 --> 01:50:26,720
है कि नहीं?

1523
01:50:26,720 --> 01:50:30,720
वो मोहन मोहन रूप दास या तो फिर केशव मुरारी दास होंगे।

1524
01:50:30,720 --> 01:50:34,880
दो में से एक हां वो सांवले सांवले से है ना जिन पे मैंने एक वीडियो बनाया

1525
01:50:34,880 --> 01:50:38,720
था शोम शोम शोम शाम शाशा

1526
01:50:38,720 --> 01:50:42,480
वो वीडियो बनाया था मैंने

1527
01:50:42,480 --> 01:50:46,560
है ना उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया

1528
01:50:46,560 --> 01:50:52,560
था कि अ

1529
01:50:52,910 --> 01:50:56,190
[खांसने की आवाज़]

1530
01:50:56,190 --> 01:51:00,400
[गला साफ़ करने की आवाज़] उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि

1531
01:51:00,400 --> 01:51:04,960
अगर मधवाचार्य संप्रदाय के प्रामाणिक आचार्य ने वर्तमान पीठाधीश्वर

1532
01:51:04,960 --> 01:51:09,120
ने स्वीकार कर भी लिया कि इस

1533
01:51:09,120 --> 01:51:13,200
हमारा ही अंग है तब भी उन्होंने कहा था कि नहीं वो ऐसे ही कह रहे होंगे। उनके लिए

1534
01:51:13,200 --> 01:51:17,280
किसी के लिए भी ऐसे ही कहने वाला कह देना बहुत आसान होता है। उनके यहां

1535
01:51:17,280 --> 01:51:21,360
कुछ शब्द प्रमाण है भी कि नहीं है ये पता ही नहीं है। खैर आगे चलते

1536
01:51:21,360 --> 01:51:25,440
हैं। [खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] उन्होंने मना कर दिया। अच्छा

1537
01:51:25,440 --> 01:51:29,520
तो स्वामी जो टाइटल नहीं है स्वामी लोकाचार में उनको

1538
01:51:29,520 --> 01:51:33,760
कहा गया उनका नाम था श्रीधर तीर्थ तीर्थ उनका टाइटल था

1539
01:51:33,760 --> 01:51:37,760
श्रीधर स्वामी का हमारे संप्रदाय में और बाकी अगर वो हमारे संप्रदाय में नहीं भी

1540
01:51:37,760 --> 01:51:41,760
है तो मधवाचार में तो नहीं ना भाई और साथ ही साथ वो हरिहर

1541
01:51:41,760 --> 01:51:45,760
में अभेद मान रहे हैं। पढ़ो चौथा स्कंद अभेद

1542
01:51:45,760 --> 01:51:49,920
मान रहे हैं बाबू श्रीधर स्वामी अनेक जगहों पर आप उनके विपरीत जा रहे हैं।

1543
01:51:49,920 --> 01:51:54,000
ठीक है? दूसरी बात अगर आप यह कहे कि श्रीधर स्वामी ने क्या लिखा है वो हम बताएंगे तो तुम्हें

1544
01:51:54,000 --> 01:51:57,680
उनका प्रामाणिक शिष्य होना होगा परंपरा से तो फिर अपने से

1545
01:51:57,680 --> 01:52:01,680
लेकर श्रीधर स्वामी के बीच की चैन बता देना फिर चैन क्या है

1546
01:52:01,680 --> 01:52:06,000
वो भी बता देना और श्रीधर स्वामी का नाम अपनी परंपरा में डाल लेना

1547
01:52:06,000 --> 01:52:11,040
ये भी तो मजे की बात है ये सब क्वेश्चन है अच्छा

1548
01:52:11,040 --> 01:52:15,120
फिर एक ये बात लेकर के आता है एक बोबड़ा करपात्री जी की

1549
01:52:15,120 --> 01:52:19,200
कि करपात्री जी ने किसी ग्रंथ में जो है ये कहा है कि विष्णु

1550
01:52:19,200 --> 01:52:23,760
जी से श्री कृष्ण बोले अरे भैया तो उनके जो ग्रंथ है

1551
01:52:23,760 --> 01:52:27,760
उनमें भक्ति सुधा में उन्होंने एक भी तो माना है कोई अंतर नहीं है वो

1552
01:52:27,760 --> 01:52:31,760
तो प्रसंगु भगवान के जिस रूप की व्याख्या करनी जैसे व्यास जी ने किया

1553
01:52:31,760 --> 01:52:36,160
ऐसे ही वो कर रहे हैं प्रसंगु ऐसे ही पूरी पीठ के गुरु शंकराचार्य

1554
01:52:36,160 --> 01:52:40,240
भी करते प्रसंगु जिसका प्रसंग चल रहा है उसकी महिमा का गान होता है

1555
01:52:40,240 --> 01:52:44,960
उन्होंने एक जगह पर शिव जी शिव जी की पूजा कर ली तो पांचों की पूजा कर ली माना

1556
01:52:44,960 --> 01:52:49,200
माना कि नहीं माना ये सब बात अच्छा दूसरी बात ये करपात्री

1557
01:52:49,200 --> 01:52:53,200
जी ने क्या कहा है? प्रामाणिक रूप से तुम कैसे कह रहे हो? हम तो तुम पर उन

1558
01:52:53,200 --> 01:52:57,440
बातों को लेकर प्रश्न कर रहे हैं ना जिसमें तुम हमने तुम्हारे प्रामाणिक व्यक्ति से पूछ लिया

1559
01:52:57,440 --> 01:53:01,600
कि जो हम समझ रहे तुम्हारी बात वही है कि कुछ और है बता दो। तो वो जब

1560
01:53:01,600 --> 01:53:05,840
मान गया कि ईश्वर अल्लाह एक है तब हमने प्रश्न किया। तुमने पूछा क्या? पूरी

1561
01:53:05,840 --> 01:53:10,080
शंकराचार्य जी से जाकर के कि भेद माना है कि नहीं माना? करपात्री जी ने और अगर नहीं

1562
01:53:10,080 --> 01:53:12,800
पूछा है तो फिर तुम अपनी परंपरा बता दो। करपात्री जी

1563
01:53:12,800 --> 01:53:18,800
को जानने के संबंध में तुम्हारी परंपरा क्या है? उनका भी नाम डाल लो अपनी परंपरा में।

1564
01:53:19,680 --> 01:53:23,840
प्रामाणिक शिष्य और [गला साफ़ करने की आवाज़] दूसरी बात पहले तुम यह तय कर लो ना

1565
01:53:23,840 --> 01:53:27,840
भाई कि वो मायावादी थे कि वैष्णव थे ऐसे ही तुम आदि शंकराचार्य जी

1566
01:53:27,840 --> 01:53:31,920
के मामले में करते हो भजो गोविंदम आदि शंकराचार्य सच बताने आए थे कि झूठ

1567
01:53:31,920 --> 01:53:36,000
बता तुम कहते हो झूठ बताने आए थे फिर क्यों बताते हो भज गोविंदम भज

1568
01:53:36,000 --> 01:53:40,080
गोविंदम झूठ हो गया सच्चाई का प्रचार प्रसार प्रसार

1569
01:53:40,080 --> 01:53:44,320
क्या हुआ फिर या तो तुम ये कह रहे हो कि वो सच्चाई बताने आए थे इसीलिए

1570
01:53:44,320 --> 01:53:48,480
उन्होंने भजो गोविंदम बताया और या फिर तुम ये कह रहे हो कि वो झूठ बताने आए थे इसलिए

1571
01:53:48,480 --> 01:53:52,640
उन्होंने भज गोविंदम बताया तो मूर्ख बनाया तो यानी भजगोविंदम मूर्खता है।

1572
01:53:52,640 --> 01:53:56,720
तुम तय कर लो ना भाई कि कौन सी चीज से किस झूठ को बोल

1573
01:53:56,720 --> 01:54:01,550
के अपनी नैया बचानी है डूबती हुई हम

1574
01:54:01,550 --> 01:54:05,680
[गला साफ़ करने की आवाज़] तो ये सारी बातें हैं। अब आप लोग अपनीपनी बात कह दे उसके बाद जो है

1575
01:54:05,680 --> 01:54:10,560
सब समाप्त करते हैं आज की लाइव हम और अच्छा

1576
01:54:10,560 --> 01:54:14,960
बोबड़ा सोल का प्रेजेंस कैसा लगा आप लोगों को जरूर बताइएगा और आप लोग दोबारा

1577
01:54:14,960 --> 01:54:20,480
बोबड़ा सोल से हमारा आमनासामना देखना चाहते हैं वो भी बताइएगा

1578
01:54:20,480 --> 01:54:24,480
बिल्कुल बिल्कुल अच्छा इनमें जो ये जीबीसी है वो नियुक्त

1579
01:54:24,480 --> 01:54:28,480
करती है इनके गुरुओं को सबसे बड़ी बात इसमें ये है कि जीबीसी

1580
01:54:28,480 --> 01:54:32,560
बताएगी कि कौन कौन का गुरु होगा अच्छा कल को वो

1581
01:54:32,560 --> 01:54:36,880
अगर किसी बेविचार में पकड़ा जाता है वह गुरु तो जीबीसी

1582
01:54:36,880 --> 01:54:40,960
उसे हटा देती है। तो यानी कि जब हटाया तो पॉइंट

1583
01:54:40,960 --> 01:54:44,960
यह है कि जो जब उसको गुरु बनाया गया था तो यानी कि वो गुरु बनने

1584
01:54:44,960 --> 01:54:48,960
के योग्य ही नहीं था। तभी तो वो व्यभचारी निकला। यह

1585
01:54:48,960 --> 01:54:53,200
बात आती है और सबसे बड़ी अथॉरिटी गुरु नहीं

1586
01:54:53,200 --> 01:54:57,360
है वह है जीबीसी इस में वो

1587
01:54:57,360 --> 01:55:01,760
सबसे बड़ी अथॉरिटी है अरे ये लोग ये कह रहे हैं तुम्हारे शंकराचार्य

1588
01:55:01,760 --> 01:55:06,000
भाई हमारे यहां कोई है तो जो अंतिम रूप से ख्यापित है जिनके एकत्व ना होने पर तुम उंगली

1589
01:55:06,000 --> 01:55:10,240
उठा रहे हो तुम्हारे यहां है कौन एक कंपनी

1590
01:55:10,240 --> 01:55:14,400
की तरह तुम अपनी धार्मिक वो चला रहे हो कॉरपोरेट की तरह हम

1591
01:55:14,400 --> 01:55:18,400
कॉर्पोरेट ऑफिस चला रहे हो तुम जीबीसी के द्वारा वो तय

1592
01:55:18,400 --> 01:55:23,840
करेंगे कि सन्यासी के कितने शिष्य होंगे? सन्यासी सर्वश्रेष्ठ पद है,

1593
01:55:23,840 --> 01:55:29,040
आश्रम है। उस पर नियंत्रण कर रहा है। कोई गृहस्थ जीबीसी में बैठा हुआ।

1594
01:55:29,040 --> 01:55:33,280
और ज्यादातर भक्तों को तो मालूम ही नहीं है कि जीबीसी में कौन-कौन है, कौन-कौन नहीं है।

1595
01:55:33,280 --> 01:55:37,520
जिसके इशारे पर मैं चल रहा हूं। भाई मैं छाती ठोक के कह तो सकता हूं मैं पूरी के शंकराचार्य

1596
01:55:37,520 --> 01:55:42,080
के अधीन हूं। तुम कह सकते हो तुम किस-किस के अधीन हो?

1597
01:55:42,080 --> 01:55:43,760
किस-किस के

1598
01:55:43,760 --> 01:55:47,760
गुलामी कर रहे हो तुम? कह सकते हो? तुम्हें पता ही नहीं होगा किस किस की गुलामी कर

1599
01:55:47,760 --> 01:55:51,920
रहे हो। बस झंडा उठाना तानाशाही नहीं चलेगी कि

1600
01:55:51,920 --> 01:55:56,000
किसकी कि किसी की भी किसी की भी अच्छा

1601
01:55:56,000 --> 01:56:00,240
टारगेट मिल रहे हैं। भगवत गीता को डिस्ट्रीब्यूशन के टारगेट मिल रहे हैं इनको।

1602
01:56:00,240 --> 01:56:04,560
इतनी करनी है वो गलीगली

1603
01:56:04,560 --> 01:56:09,120
चौराहे चौराहे पर हां मिलती है मिलती है।

1604
01:56:09,120 --> 01:56:14,720
हां जी। जी कन्हैया जी जय श्री राम। जय श्री राम कन्हैया जी।

1605
01:56:14,720 --> 01:56:18,720
जय श्री राम सभी को। जय श्री राम। आवाज आ

1606
01:56:18,720 --> 01:56:22,960
रही है क्या मेरी? हां जी। हां जी आ रही है। अच्छा

1607
01:56:22,960 --> 01:56:26,960
मैं ये कहना चाह रहा हूं पहले तो हमको है ना एक चीज क्लियर करना एक चीज में है ना

1608
01:56:26,960 --> 01:56:31,280
हम बार-बार मिस्टेक्स करते हैं कि जो भगवान शंकर

1609
01:56:31,280 --> 01:56:35,440
जी थे ना वो कश्यप जी के साडू नहीं थे बल्कि

1610
01:56:35,440 --> 01:56:38,560
ससुर जी थे।

1611
01:56:38,560 --> 01:56:42,560
हमको पहले ये करेक्ट करना पड़ेगा पहले। हां। एक्चुअली

1612
01:56:42,560 --> 01:56:48,000
क्या होता है कि प्रजादु है

1613
01:56:48,000 --> 01:56:52,640
शायद कल्प वेद से होंगे। भागवत में प्रसंग लिखा है वो

1614
01:56:52,640 --> 01:56:57,040
नहीं कल्प वेद से नहीं एक्चुअली मैं बताता हूं। मैं बताता हूं आपको।

1615
01:56:57,040 --> 01:57:01,040
एक्चुअली क्या होता है? ये जो देवी सती थी ना ये ब्रह्मा जी के जो

1616
01:57:01,040 --> 01:57:06,160
पुत्र दक्ष प्रजापति हुए थे। ये उनकी पुत्री थी।

1617
01:57:06,160 --> 01:57:10,240
है ना? जो ब्रह्मा जी के पुत्र थे और ब्रह्मा

1618
01:57:10,240 --> 01:57:14,240
जी के जो पुत्र हुए थे वह मरीच हुए थे और मरीच के

1619
01:57:14,240 --> 01:57:18,240
भाई भगवान शंकर थे और मरीच जो थे मरीच के

1620
01:57:18,240 --> 01:57:22,400
हुए थे कश्यप जी ठीक है तो मरीच

1621
01:57:22,400 --> 01:57:26,560
और भगवान शंकर ये दोनों आपस में भाई भाई थे मरीच

1622
01:57:26,560 --> 01:57:31,680
और शंकर भगवान भाई भाई जो आप बता रहे हैं ना मरीच

1623
01:57:31,680 --> 01:57:36,080
भगवान शिव जो भाई भाई आप बता रहे हैं ये कल्प भेद है ये पढ़ा है मैंने

1624
01:57:36,080 --> 01:57:40,080
नहीं कल कल्पवेद नहीं है ये ये उसी ब्रह्मा जी सृष्टि

1625
01:57:40,080 --> 01:57:44,160
के आदि में हुए थे ये ब्रह्मा जी के जो मानस पुत्र हुए थे ना

1626
01:57:44,160 --> 01:57:50,160
ऐसा है ये जो ब्रह्मा सरस्वती वाला प्रसंग है

1627
01:57:50,320 --> 01:57:54,480
उसमें एक कल्प में जो है

1628
01:57:54,480 --> 01:57:58,800
जो मरीचि है वो ब्रह्मा जी को समझाते हैं

1629
01:57:58,800 --> 01:58:03,040
और दूसरे कल्प में समझाते हैं

1630
01:58:03,040 --> 01:58:07,040
हम हम सीधे तौर पर चलो जो भी मैं

1631
01:58:07,040 --> 01:58:11,520
आपको बता तो ऐसा फिर क्या हुआ ऐसे दूसरी क्या होता है अब जो

1632
01:58:11,520 --> 01:58:15,600
ऋषि कश्यप की जो पत्नी दति थी वो भी दक्ष

1633
01:58:15,600 --> 01:58:19,760
की पुत्री थी लेकिन वो दक्ष जो थे वो प्राचेतस दक्ष

1634
01:58:19,760 --> 01:58:24,000
प्रचेता के जो पुत्र थे यानी कि वो दक्ष वाल्मीकि ऋषि के भाई

1635
01:58:24,000 --> 01:58:28,400
थे भाई वाल्मीकि जी भी प्रचेता के पुत्र थे और

1636
01:58:28,400 --> 01:58:32,800
जो दक्ष थे वो भी वो भी प्रचिता के पुत्र थे तो वो वाल्मीकि

1637
01:58:32,800 --> 01:58:36,880
जी और दक्ष दोनों आपस में भाई थे तो उन दक्ष के जो है वह

1638
01:58:36,880 --> 01:58:41,040
दति हुई थी। उनका विवाह जो है हुआ था वो दक्ष

1639
01:58:41,040 --> 01:58:45,440
प्रजापति से हुआ था। तो इसीलिए जो

1640
01:58:45,440 --> 01:58:49,920
दति के ससुर जी लगते थे लगते हैं भगवान शंकर ना कि

1641
01:58:49,920 --> 01:58:53,920
उनके साडू लगते हैं। भागवत के प्रसंग

1642
01:58:53,920 --> 01:58:58,000
के हिसाब से बता रहा हूं मैं। जैसा भागवत भागवत जिस भागवत के हिसाब

1643
01:58:58,000 --> 01:59:02,080
से कोई नहीं ये वस्तुनिष्ठ जानकारियां है इसमें तो हो सकता है मेन

1644
01:59:02,080 --> 01:59:05,760
बात ये है कि वहां पर उनका कहना ये था ऋषि का

1645
01:59:05,760 --> 01:59:09,760
कि भाई वो निकलेंगे हमारे रिश्तेदार है चलो ससुर हो या वो भी हो जो

1646
01:59:09,760 --> 01:59:14,000
भी हो ससुर लगते हो मगर वो निकलेंगे तो उनकी दृष्टि

1647
01:59:14,000 --> 01:59:18,320
दृष्टिपात हो जाएगा उनका हम पर तो इसलिए अभी वो उस स्थिति

1648
01:59:18,320 --> 01:59:23,760
में नहीं होना है वो जब बीत जाए वो घड़ी तब हमें उस स्थिति में

1649
01:59:23,760 --> 01:59:27,840
और वहां पर वहां पर इन लोगों ने उसको ऐसे फिल्माया है

1650
01:59:27,840 --> 01:59:32,080
कि जैसे भगवान शिव की वजह से जो है राक्षस ने जन्म ले लिया।

1651
01:59:32,080 --> 01:59:36,080
हां नहीं नहीं ऐसा ऐसा नहीं है ऐसा नहीं नहीं वहां पर एक

1652
01:59:36,080 --> 01:59:40,160
और चीज भी आई है उन्होंने यह भी कहा है कि ये जैसे भगवान शंकर जी

1653
01:59:40,160 --> 01:59:44,320
तो है ही है चलो इनसे तो पर्दा करना है उन्होंने ये भी कहा था कि राक्षसों का भी समय है

1654
01:59:44,320 --> 01:59:48,400
तो राक्षस भी इसी समय घूमते हैं जैसे अच्छे लोग घूमते हैं तो राक्षस भी इसी समय घूमते हैं जैसे

1655
01:59:48,400 --> 01:59:52,480
भगवान शंकर जा रहे हैं तो वहां राक्षसों का भगवान शंकर के साथ में वर्णन नहीं किया गया

1656
01:59:52,480 --> 01:59:56,480
बल्कि उनका अलग से वर्णन किया गया है हम

1657
01:59:56,480 --> 02:00:00,800
लेकिन फिल्म भगवान शंकर नहीं फिल्म ये

1658
02:00:00,800 --> 02:00:04,960
उसमें उन्होंने उन्होंने ये दिखाने का प्रयास किया है कि भगवान शंकर के लोगों का जन्म

1659
02:00:04,960 --> 02:00:09,120
हो सकता है जो बुरे लोग हैं और बार-बार अंधकार अंधकार

1660
02:00:09,120 --> 02:00:13,280
शब्द का प्रयोग हो रहा है तो शंकर भगवान आ रहे हैं। अंधकार शब्द की

1661
02:00:13,280 --> 02:00:17,760
बात आ रही भगवान आ रहे हैं पर्दे पर। बार-बार जो है शिव जी का

1662
02:00:17,760 --> 02:00:20,880
के प्रति एक द्वेष भावना डालने का कि भैया अगर

1663
02:00:20,880 --> 02:00:25,200
राक्षसों की बात की जाए तो शिव जी की बात की जाए वहां पर वो नहीं

1664
02:00:25,200 --> 02:00:29,200
ये ये गलत है ये गलत है ये गलत है ऐसा ऐसा वहां कुछ नहीं है भागवत

1665
02:00:29,200 --> 02:00:34,160
में ऐसा कोई प्रसंग नहीं है कि भगवान शिव शंकर जी की वजह से जो है

1666
02:00:34,160 --> 02:00:38,240
कश्यप पैदा हुए थे रामपाल वाले मामले में थोड़ा सा फंसा थोड़ा सा

1667
02:00:38,240 --> 02:00:42,640
आर्थिक वो भी नहीं था बहुत सी चीजें करनी होती तो संसाधनों की कमी

1668
02:00:42,640 --> 02:00:46,880
मैं उसी समय जो है इसके खिलाफ बड़ा एक्शन लेने वाला था फिल्म के खिलाफ

1669
02:00:46,880 --> 02:00:51,200
मगर थोड़ा सा मैं वहां पर एक तो रामपाल से चल ही रहा है ना तो

1670
02:00:51,200 --> 02:00:55,440
थोड़ा सा उसमें समय और [गला साफ़ करने की आवाज़] संसाधन धन इत्यादि का अभाव रहा

1671
02:00:55,440 --> 02:00:59,600
नहीं तो मैं उसी समय इनके खिलाफ जो है मोर्चा खोल देता

1672
02:00:59,600 --> 02:01:03,760
और अगर मैं मैं देख रहा हूं परोश और अभी भी हो सकता है कि आने

1673
02:01:03,760 --> 02:01:08,080
वाले कुछ समय में अगर मुझे ठीक से कुछ

1674
02:01:08,080 --> 02:01:12,800
सहायता प्राप्त हो जाए कुछ चीजों में तो मैं जरूर इस पर जो है एक्शन

1675
02:01:12,800 --> 02:01:16,800
और क्या कहते हैं ये यह परशुराम आ रही है ना दूसरा

1676
02:01:16,800 --> 02:01:20,800
पार्ट आ रहा है कुछ मैं उसमें भी बहुत ज्यादा ध्यान दे रहा हूं अबकी बार

1677
02:01:20,800 --> 02:01:24,960
मैं नहीं जाने दूंगा इन चीजों को मैं करूंगा कर्मवादी

1678
02:01:24,960 --> 02:01:27,360
कार

1679
02:01:27,360 --> 02:01:28,400
ठीक है

1680
02:01:28,400 --> 02:01:32,400
बहुत-बहुत आभार सभी का और बोबड़ा स्टोल के साथ हमारी

1681
02:01:32,400 --> 02:01:36,960
जो बातचीत हुई कैसा लगा सबको और

1682
02:01:36,960 --> 02:01:41,120
मैं चाहूंगा इनका नाम इनका नाम तो उनसे मिलता है एक मूवी देखी आपने गोविंदा

1683
02:01:41,120 --> 02:01:45,300
की मूवी देखी थी अखियों से गोली मारे मूवी थी उसमें गोविंदा का नाम बोबड़े दादा

1684
02:01:45,300 --> 02:01:50,880
[हंसी]

1685
02:01:50,880 --> 02:01:54,880
देख ही थे उसका नाम तो गोविंदा का नाम था बोबड़े दादा [हंसी]

1686
02:01:54,880 --> 02:01:59,280
बोबड़े अगली बार बोबड़ा अगली बार बोबड़ा यहां आए

1687
02:01:59,280 --> 02:02:03,600
अगली बार बोबड़ा से बात हो तो बोबड़ा थोड़ी तैयारी करके आए केवल अपनी एडिटिंग

1688
02:02:03,600 --> 02:02:07,920
के ऊपर आधारित ना रहे अपनी थोड़ी तैयारी करके आए उससे थोड़ा सा

1689
02:02:07,920 --> 02:02:12,000
इनका नाम तो इनका नाम इनका नाम यही है क्या बोबड़े दादा ही है क्या बोबड़ा नाम है क्या इनका

1690
02:02:12,000 --> 02:02:16,160
क्या नाम है इनका अब यहां तो बोबड़ा नाम से

1691
02:02:16,160 --> 02:02:20,320
बोबड़ा बोलते ऐसे ही है ना बोबड़ा स्पिरिट सोल

1692
02:02:20,320 --> 02:02:24,720
है कहीं कहीं पे बीइंग स्पिरिट सोल भी दिखाई देता है

1693
02:02:24,720 --> 02:02:28,080
अच्छा अच्छा अच्छा

1694
02:02:28,080 --> 02:02:32,160
इसके पास में नाम कह रहा हूं नाम तो सही लिखे कुछ नहीं था इसके

1695
02:02:32,160 --> 02:02:36,320
पास हैं तो नाम तो सही लिख के आए मैं कह रहा हूं

1696
02:02:36,320 --> 02:02:40,800
नाम तो सही लिख के आए ये बोबड़ा दादा क्या नाम है बड़ा क्या नाम है नाम ही नहीं है कोई ये तो कोई

1697
02:02:40,800 --> 02:02:46,800
तो वो है ही बोबड़ा तो क्या भाई आप तो

1698
02:02:46,870 --> 02:02:51,520
[हंसी] ये बताओ आप तो उसके स्वरूप भूत लक्षण को हेलो

1699
02:02:51,520 --> 02:02:55,760
मैं कह रहा हूं आप तो उसके स्वरूप भूत लक्षण को उससे अलग कर दोगे क्या

1700
02:02:55,760 --> 02:03:00,000
स्वरूप के विरुद्ध कार्य करवाओगे क्या उससे वो उसका स्वरूप

1701
02:03:00,000 --> 02:03:04,560
है बहुत सही बहुत सही [हंसी]

1702
02:03:04,560 --> 02:03:08,720
अरे चलो कोई दिक्कत नहीं है कोई दिक्कत नहीं है कभी किसी फालतू

1703
02:03:08,720 --> 02:03:12,800
किसी किसी व्यक्तिगत कमेंट कमेंट फेंट मत करो कोई दिक्कत नहीं है फायदा करने से

1704
02:03:12,800 --> 02:03:16,800
काम में [हंसी] हमें अपना काम करना है। व्यक्तिगत कमेंट

1705
02:03:16,800 --> 02:03:20,880
किसी पे मत करो। क्या फायदा है उसे करने से? कोई दिक्कत [हंसी] क्या आप कह रहे हो

1706
02:03:20,880 --> 02:03:24,960
कि वो बोबड़ा बदल दो तो मैंने कहा वो वो स्वरूप है उसका। स्वरूप को नहीं बदल

1707
02:03:24,960 --> 02:03:28,960
सकते ना। वो देखा नहीं था वो अलंकारी बच्चा स्वरूप के पीछे

1708
02:03:28,960 --> 02:03:33,040
कितना परेशान था। उसकी आवाज आवाज नहीं सुनी आपने कन्हैया

1709
02:03:33,040 --> 02:03:37,360
जी। हां। वो है तो आवाज देखो आवाज तो किसी की किसी की

1710
02:03:37,360 --> 02:03:41,680
आवाज तो किसी की कैसी भी हो सकती है सर लेकिन फिर उसको रहने दो। उसको मत किया करो उसको

1711
02:03:41,680 --> 02:03:43,280
दो। मैं वो कहां कह रहा हूं? देखो

1712
02:03:43,280 --> 02:03:47,360
उसका नाम बोबड़ा है। उसने अपना नाम बोबड़ा रखा है। अब आप कह रहे हो बोबड़ा

1713
02:03:47,360 --> 02:03:51,520
नाम बदलो। तो मैंने कहा कि वो उसका स्वरूप है। जैसे अग्नि अगर जलाना छोड़ देगी

1714
02:03:51,520 --> 02:03:55,760
तो वो अग्नि थोड़ी ना कहलाएगी। ऐसे ही बोबड़ा अगर बोबड़ापन छोड़

1715
02:03:55,760 --> 02:03:59,840
देगा या बोबड़ा नाम हटा देगा तो उसका स्वरूप चेंज हो जाएगा। फिर वो वो नहीं रह

1716
02:03:59,840 --> 02:04:04,160
जाएगा जिसको हम जानते थे। इसलिए वो उसका स्वरूप है। स्वरूप भूत लक्षण

1717
02:04:04,160 --> 02:04:08,160
है। ये कह रहा हूं। कभी कभी सत्य बोलना पड़ता है कड़वा

1718
02:04:08,160 --> 02:04:12,240
होता है फिर भी बोलना पड़ता है ना वो वाली बात नहीं वो खंडन खंडन के लिए आया था ना वो

1719
02:04:12,240 --> 02:04:16,320
आते रहेगा मेरे को लगता है कुछ ना कुछ अगली बार कन्हैया

1720
02:04:16,320 --> 02:04:20,320
जी की बात करा देंगे उनसे ना कन्हैया जी बात करेंगे की बात

1721
02:04:20,320 --> 02:04:24,560
करेंगे चलिए ठीक है समय देने के लिए सबका आभार बहुत-बहुत

1722
02:04:24,560 --> 02:04:26,400
आभार सभी का जय श्री

1723
02:04:26,400 --> 02:04:32,400
राम सभी को जय श्री राम जी जय श्री राम [गला साफ़ करने की आवाज़]

1724
02:05:08,350 --> 02:05:12,350
[संगीत]
