1
00:01:09,520 --> 00:01:14,320
अच्छा एक मिनट ठीक है

2
00:01:14,320 --> 00:01:18,320
इसको हटा दे

3
00:01:18,320 --> 00:01:22,160
तो अभी आवाज आ रही है मेरी

4
00:01:22,160 --> 00:01:26,880
आवाज आ रही है मेरी अब?

5
00:01:26,880 --> 00:01:31,040
जी जी चलिए ठीक है। तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं

6
00:01:31,040 --> 00:01:35,120
आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और जैसा कि

7
00:01:35,120 --> 00:01:39,280
प्रकरण चल रहा है आप लोग परिचित होंगे उस प्रकरण से।

8
00:01:39,280 --> 00:01:43,440
तो जो अलंकारी बच्चा है जिसका आपने वीडियो देखा है उसमें उसने बहुत

9
00:01:43,440 --> 00:01:47,520
से ऐसी गलतियां कर बैठा है। वह जो कि अभी उन पर प्रकाश

10
00:01:47,520 --> 00:01:52,160
डाला जाएगा। अपने ही लिए उसने जो है गड्ढा खोद लिया है। और

11
00:01:52,160 --> 00:01:56,160
उसने बहुत सारे भ्रामक तथ्य बोले हैं। तो उन सब विषयों पर अभी हम

12
00:01:56,160 --> 00:02:00,240
लोग बहुत ही विस्तृत और टू द पॉइंट और बहुत ही ठोस

13
00:02:00,240 --> 00:02:04,720
सामग्री के साथ बात करने वाले हैं। इस

14
00:02:04,720 --> 00:02:08,880
लाइव में आपको बहुत सारे ऐसे दृश्य भी देखने को मिलेंगे जो अभी से पहले

15
00:02:08,880 --> 00:02:12,880
देखने को नहीं मिले थे। इसमें एक वो वाली बात भी है

16
00:02:12,880 --> 00:02:17,120
कि जो मातृशक्ति उसके साथ आई थी वह मुझे

17
00:02:17,120 --> 00:02:21,280
मुझे वैसे ही संदिग्ध दिख रही थी क्योंकि मैंने उनसे पूछा था

18
00:02:21,280 --> 00:02:24,560
कि आप इसकी कौन है तो मैं उन्होंने वो

19
00:02:24,560 --> 00:02:28,640
वहां मौन हो गई बता नहीं पाई दो तीन बार पूछा तो फिर भी

20
00:02:28,640 --> 00:02:32,640
हमने यह देखते हुए कि भाई आ गई हैं ठीक है एक प्रिविलेज

21
00:02:32,640 --> 00:02:37,680
दिया था और उनको इस सब से दूर रखा था परंतु अभी जब यह

22
00:02:37,680 --> 00:02:41,840
जो उसका वीडियो जो आया तो उसमें उनकी एक बहुत प्रमुख भूमिका दिख रही है कि वह किस तरीके

23
00:02:41,840 --> 00:02:46,000
से नैरेटिव सेट करने में मदद कर रही हैं। उनसे बोला कुछ जा रहा है

24
00:02:46,000 --> 00:02:50,240
और वह कह रही हैं कि अरे वह बहुत देर से माइक नहीं दिया जा रहा था इत्यादि

25
00:02:50,240 --> 00:02:54,320
इत्यादि ऐसी आवाजें बोल मतलब बोल रही हैं जिससे वो रिकॉर्ड होता रहे। मौके

26
00:02:54,320 --> 00:02:58,560
पर ऐसी बातें बोल रही हैं जिससे वो रिकॉर्ड हो और फिर

27
00:02:58,560 --> 00:03:02,560
जो है क्या कहते हैं? एक नैरेटिव्स तैयार हो।

28
00:03:02,560 --> 00:03:06,640
सो कॉल्ड वाले। ठीक है? तो अभी बहुत बड़े-बड़े धमाके होने

29
00:03:06,640 --> 00:03:11,200
वाले हैं। आप सब लोग तैयार रह और हम लोग शास्त्रवाद जी को ले लेते हैं।

30
00:03:11,200 --> 00:03:17,200
वो हमारे साथ में है। अभी जय श्री राम शास्त्रवाद जी।

31
00:03:20,080 --> 00:03:24,160
जी जय श्री राम शास्त्रवाद जी। जय श्री राम भैया। जय श्री

32
00:03:24,160 --> 00:03:28,720
राम। जी तो अभी हम

33
00:03:28,720 --> 00:03:32,720
स्टार्ट करने वाले हैं। कैमरा एंगल ठीक नहीं भाई जैसा भी

34
00:03:32,720 --> 00:03:36,960
है। आप लोग उसी को स्वीकार करें जिस रूप में भी है।

35
00:03:36,960 --> 00:03:41,440
ठीक है? कुछ असुविधाएं हैं यहां पर।

36
00:03:41,440 --> 00:03:45,520
ठीक है? तो इसको चर्चा को हमने दो सेक्शंस में लिया है। एक उसने

37
00:03:45,520 --> 00:03:49,520
जो भ्रामक तथ्य दिए हैं अपनी लाइव में वो वीडियो में वो

38
00:03:49,520 --> 00:03:53,680
छोटे-छोटे से कुछ पॉइंट्स उन पर हम लोग बात करेंगे।

39
00:03:53,680 --> 00:03:57,680
और फिर उसके बाद एक विस्तृत विश्लेषण है। उसमें भी बहुत सारे तथ्य

40
00:03:57,680 --> 00:04:02,240
प्रमाण और कुछ ऐसे वीडियोस जो आपको आज एक्सक्लूसिवली

41
00:04:02,240 --> 00:04:06,320
मिलने वाले हैं वो सब भी आप आपको जो

42
00:04:06,320 --> 00:04:10,480
है प्राप्त होने वाले हैं। तो आप बने रहिएगा। तो उसने अपने वीडियो में

43
00:04:10,480 --> 00:04:15,040
सबसे पहले तो अभी उसके वीडियो की बात कर रहे हैं। उसने जो आरोप लगाए

44
00:04:15,040 --> 00:04:19,200
उसने अपने वीडियो में यह कहा है कि मानसिक शारीरिक

45
00:04:19,200 --> 00:04:23,600
दबाव बनाने के लिए उसको यह आभास हो गया था कि मानसिक और शारीरिक

46
00:04:23,600 --> 00:04:27,920
दबाव बनाने के लिए हम जो है उसे कमरे में ले जाना चाहते हैं।

47
00:04:27,920 --> 00:04:32,640
अब बात यहां हो रही है धर्म की है ना शास्त्रों की

48
00:04:32,640 --> 00:04:35,440
और यह आजकल आपको दिखाई देगा

49
00:04:35,440 --> 00:04:39,760
लक्षण लक्षण ऐसे चिल्लाता हुआ मिल जाएगा जैसे आलू प्याज बेच रहा हो

50
00:04:39,760 --> 00:04:43,920
है ना वो आलू ले लो कांदा ले लो सुबह से ना ही आलू बिका है ना ही बिका

51
00:04:43,920 --> 00:04:48,400
है आंधा कांधा तो कुछ उस तरह से लक्षण चिल्लाता हुआ मिल जाएगा

52
00:04:48,400 --> 00:04:52,880
इनके जो बहुत ही परम मित्र हैं या जो भी हैं

53
00:04:52,880 --> 00:04:57,360
बंगाली बाबूजी जो उनका नाम है संदीपन

54
00:04:57,360 --> 00:05:02,000
उन्होंने अपनी वीडियो में खुद कहा है कि भाई तर्क भी होंगे तो वह शास्त्र से होंगे।

55
00:05:02,000 --> 00:05:06,080
तो अब मुझे यह बताएं कि एक व्यक्ति जो वास्तविकता में चर्चा करने

56
00:05:06,080 --> 00:05:10,160
के लिए जाना चाहता है कमरे में और

57
00:05:10,160 --> 00:05:14,160
जो षड्यंत्र पूर्वक जाना चाहता है इसमें लक्षण क्या होगा?

58
00:05:14,160 --> 00:05:18,400
न्याय शास्त्र एक व्यक्ति जो कमरे में जाना

59
00:05:18,400 --> 00:05:23,360
चाहता है वाकई में व्यवस्थित चर्चा करने के लिए और एक व्यक्ति

60
00:05:23,360 --> 00:05:27,440
जो षड्यंत्र पूर्वक जाना चाहता है तो उसमें लक्षण क्या होगा? क्या लक्षण

61
00:05:27,440 --> 00:05:31,520
दिया है इसने अपनी वीडियो में? अगर मेरे अंदर वाकई में भावना

62
00:05:31,520 --> 00:05:35,680
है कि अब यह मेरे सामने आ गया है और इससे बैठकर के मैं कॉलर माइक

63
00:05:35,680 --> 00:05:39,760
लगा करके आप देख रहे हैं ना वहां पर कैसे कितनी साफ आवाजें आ रही है। तो मैं इससे

64
00:05:39,760 --> 00:05:44,160
कह रहा हूं भाई अब तुम आ गए हो। हमारी बहुत सारी

65
00:05:44,160 --> 00:05:48,160
जो प्रतीक्षित है हमारी चर्चा कई कारणों से नहीं हो पाई। जिस दिन हमारी

66
00:05:48,160 --> 00:05:50,560
हो रही थी उस दिन एक

67
00:05:50,560 --> 00:05:54,720
दूसरे को समझ ना पाने की वजह से तुम्हारा मुझको ना समझ पाने की वजह से तुम्हारे

68
00:05:54,720 --> 00:05:58,720
पूर्वाग्रहों की वजह से वो चर्चा पूरी नहीं हो पाई। यह भी मैं सिद्ध करूंगा कि

69
00:05:58,720 --> 00:06:03,840
तुम पूर्वाग्रह लेकर जाते हो कि नहीं जाते हो यह भी सिद्ध करूंगा। और

70
00:06:03,840 --> 00:06:08,560
काफी ज्यादा सामग्री तो तुम्हारी ही है। तुम्हारे ही वचनों से सिद्ध करूंगा।

71
00:06:08,560 --> 00:06:12,720
ठीक है? तो तुम्हारा जो यह पूर्वाग्रह है कि कमरे

72
00:06:12,720 --> 00:06:16,960
में ले जाने का मतलब है कि षड्यंत्र। तो इसके

73
00:06:16,960 --> 00:06:21,040
लक्षण क्या है षड्यंत्र के? क्या लक्षण है? पहली बात। दूसरी

74
00:06:21,040 --> 00:06:25,120
बात यह है कि अगर अगर तुम्हें संभावना है ही तो तुम वहां पर

75
00:06:25,120 --> 00:06:29,280
पहुंचे क्यों? षड्यंत्र तो वहीं पर शुरू हो सकता है। बहुत सी तरीके हैं। तुम्हारी

76
00:06:29,280 --> 00:06:33,600
जो अविवाहित संगनी है यह संज्ञा

77
00:06:33,600 --> 00:06:37,840
क्यों है उनकी? इस पर हम बाद में बात करेंगे। तुम्हारी जो अविवाहित संगनी थी तुम्हारे

78
00:06:37,840 --> 00:06:41,920
साथ में उनका भी यह कहना था कि हम बार-बार माइक मांग रहे थे

79
00:06:41,920 --> 00:06:46,000
पर जो है माइक हमें दिया नहीं गया। बहुत से लोग हाथ उठाते हैं हर प्रश्न

80
00:06:46,000 --> 00:06:50,160
पर तो वो बहुत से लोग ये आरोप लगाएंगे कि भाई हमको

81
00:06:50,160 --> 00:06:54,240
माइक नहीं दिया गया। हमने बार-बार माइक मांगा ऐसा नहीं है। अरे भैया हमको माइक

82
00:06:54,240 --> 00:06:58,240
नहीं मिल पाता है और तुम चले आए भैया कि हमको माइक नहीं

83
00:06:58,240 --> 00:07:02,240
मिला। आपने आरोप लगा दिया। तो अगर बात षड्यंत्र की ही है यहां पर

84
00:07:02,240 --> 00:07:05,680
भी वही बात आती है कि माइक उद्देश्य पूर्वक नहीं दिया

85
00:07:05,680 --> 00:07:09,920
गया या व्यवस्था कारणों के निमित्त या व्यवस्था के अभाव के निमित्त संख्या

86
00:07:09,920 --> 00:07:14,000
ज्यादा होने के निमित्त इसमें लक्षण क्या है शास्त्र से बात होगी ना क्या

87
00:07:14,000 --> 00:07:19,280
लक्षण है इसमें तो लक्षण यही है क्योंकि

88
00:07:19,280 --> 00:07:23,360
अलंकारी ने कहा है क्या क्या है आज की टैगलाइन क्योंकि

89
00:07:23,360 --> 00:07:27,600
अलंकारी ने कहा है हम तो अलंकारी

90
00:07:27,600 --> 00:07:31,680
बच्चे ने कहा है इसलिए एकांतिक एकांत की जगह

91
00:07:31,680 --> 00:07:35,920
पर भीड़भाड़ भी शोरशरावे से दूर होकर के एकांत में जाकर

92
00:07:35,920 --> 00:07:40,160
के बात करने का व्यवस्थित रूप से चर्चा करने का प्रस्ताव देना एक षड्यंत्र

93
00:07:40,160 --> 00:07:44,400
है। और इस षड्यंत्र को क्यों माना जाए? क्योंकि लक्षण तो है नहीं यहां पर कोई सिद्ध

94
00:07:44,400 --> 00:07:49,280
ऐसा। तो क्यों माना जाए? क्योंकि अलंकारी बच्चे ने कहा है।

95
00:07:49,280 --> 00:07:53,440
सनातन शंकर जी भी आ गए हैं। तो यहां पर लक्षण से दो चीजों

96
00:07:53,440 --> 00:07:57,680
की हमने काट की। इसके वीडियो में दो आरोप हमें दिख रहे हैं। माइक नहीं मिला

97
00:07:57,680 --> 00:08:01,760
और षड्यंत्र पूर्वक कमरे में ले जाने के लिए कहा। अच्छा मैं अपनी बात बता

98
00:08:01,760 --> 00:08:05,760
दूं कि हुआ क्या था वहां पर एग्जैक्टली। अभी थोड़ा सा हम लोग एक वीडियो देख लेते हैं

99
00:08:05,760 --> 00:08:10,240
चला करके। भाई मैंने आपको वीडियोस भेजे हैं ऑपरेटर जी।

100
00:08:10,240 --> 00:08:12,400
अ

101
00:08:12,400 --> 00:08:17,600
सबसे पहले आप यह वीडियो चला दीजिए। सबसे पहले तो आप वह वीडियो चलाइए।

102
00:08:17,600 --> 00:08:21,200
क्रमांक एक प्रश्न के पूर्व चर्चा का प्रस्ताव

103
00:08:21,200 --> 00:08:24,360
वह वीडियो आप चला दीजिए।

104
00:08:24,360 --> 00:08:28,800
[गला साफ़ करने की आवाज़]

105
00:08:28,800 --> 00:08:33,200
हां जी बहुत सारे मित्र और बंधु बांधव आ चुके हैं। जी सनातन

106
00:08:33,200 --> 00:08:37,440
शंकर जी जी जी जी हमने

107
00:08:37,440 --> 00:08:42,080
इस विषय पर तो आज दिन में स्ट्रीम की है शास्त्रवाद जी के साथ और बाकी

108
00:08:42,080 --> 00:08:46,400
सनातनियों के साथ तो हमने भी अपनी तरफ से जो जी

109
00:08:46,400 --> 00:08:50,560
हां ये एक संक्षिप्त विवरण है और जिन लोगों को पता ना हो उनको

110
00:08:50,560 --> 00:08:54,560
मैं बता देता हूं उनके लिए ये वीडियो अपने आप में पूर्ण हो जाएगा। यह जो

111
00:08:54,560 --> 00:08:58,800
व्यक्ति है तथाकथित यह जो अपने आप को आर्य बना फिरता

112
00:08:58,800 --> 00:09:02,800
है यह व्यक्ति अपने पूर्वाग्रहों को लेकर के वहां पर आया

113
00:09:02,800 --> 00:09:06,960
था। द्वेष पूर्वक आया था। ये द्वेष पूर्वक जाता है चर्चाओं में। यह भी हम इसी

114
00:09:06,960 --> 00:09:10,960
के वचनों से सिद्ध करेंगे कि द्वेष ले जाता है। है

115
00:09:10,960 --> 00:09:15,440
ना? तो ये द्वेष पूर्वक वहां पर आया था। इसने पूरी शंकराचार्य जी से प्रश्न किया।

116
00:09:15,440 --> 00:09:19,600
प्रश्नोत्तरी में जहां तक एक व्यक्ति को सीमित सीमा में

117
00:09:19,600 --> 00:09:23,600
प्रश्नों का उत्तर दिया जा सकता है। एक से अधिक प्रश्नों का उत्तर इसके दिया गया। यह भी

118
00:09:23,600 --> 00:09:27,760
हम सिद्ध करेंगे। तो जहां तक दिया जा सकता था दिया गया सीमा

119
00:09:27,760 --> 00:09:32,000
से आगे जाकर के दिया गया और उसके बाद अन्यों को जिससे कि अवसर

120
00:09:32,000 --> 00:09:36,080
प्राप्त हो प्रश्नोत्तरी में अपनी जिज्ञासाओं के लिए शंका समाधान प्राप्त करने का तो

121
00:09:36,080 --> 00:09:36,580
अगले

122
00:09:36,400 --> 00:09:40,480
से पूछा गया इनको बिठा दिया गया। इन्होंने दावा किया है कि ये वहां

123
00:09:40,480 --> 00:09:44,480
पर शास्त्रार्थ में हरा करके आए हैं। मुझे नहीं पता

124
00:09:44,480 --> 00:09:48,640
किसको हरा करके आए हैं। तो अभी देखेंगे इनकी ही बातों से इनका खंडन होगा।

125
00:09:48,640 --> 00:09:52,880
तो इसमें आपको एक समरी मिलेगी। यहां से

126
00:09:52,880 --> 00:09:57,040
ले और विवाद किसने शुरू किया पूरी समरी इसमें आपको दिख

127
00:09:57,040 --> 00:10:01,200
जाएगी और थोड़ा सा वह विवादित चेहरा भी आपको दिखेगा थोड़ा सा आप वीडियो

128
00:10:01,200 --> 00:10:06,560
को चला दें इसको जी

129
00:10:06,560 --> 00:10:11,040
हां

130
00:10:11,040 --> 00:10:15,120
ये पॉज पॉज करिए ये जो वीडियो

131
00:10:15,120 --> 00:10:19,280
है इसको समझ लीजिए यह वीडियो तब का है जब

132
00:10:19,280 --> 00:10:23,360
इसने इस अलंकार ारी ने प्रश्न नहीं किया है। यह तब

133
00:10:23,360 --> 00:10:27,520
का वीडियो है और मैंने जब इसे देखा तो मैंने इसको प्रस्ताव दिया

134
00:10:27,520 --> 00:10:31,520
है कि आओ हम लोग चर्चा कर ले। तुम आ तो गए हो। सभी प्रश्नों पर बात करते हैं बैठ

135
00:10:31,520 --> 00:10:35,600
के। तो वहां पर ये कह रहा है कि नहीं पहले इनसे ले लूं मैं। उनके बाद फिर

136
00:10:35,600 --> 00:10:39,840
मैं आपसे लेता हूं। ठीक है। ये यहां पर बात संवाद चल रहा है। जी प्ले

137
00:10:39,840 --> 00:10:45,840
करिए।

138
00:10:53,600 --> 00:10:57,680
इससे क्या पता चलता है कि जब इसने किया कि भाई

139
00:10:57,680 --> 00:11:01,840
इसको प्रश्न का उत्तर लेना है तो हमने उसमें विघ्न नहीं डाला है।

140
00:11:01,840 --> 00:11:06,160
हम वहां पर संतुष्टि पूर्वक पीछे आकर के खड़े हो गए। ठीक है?

141
00:11:06,160 --> 00:11:11,380
अब दूसरे क्रमांक का वीडियो चला दीजिए।

142
00:11:11,380 --> 00:11:15,520
[गला साफ़ करने की आवाज़]

143
00:11:15,520 --> 00:11:19,680
दूसरा है सामंजस्य पूर्ण संवाद से विवादी चेहरे

144
00:11:19,680 --> 00:11:24,720
तक वीडियो उसको आप चला दीजिए।

145
00:11:24,720 --> 00:11:30,720
जब इनकी बारी हो चुकी थी।

146
00:11:31,360 --> 00:11:35,360
जब इनकी बारी हो चुकी थी तब जब यह निकल कर के जाने लगे तब

147
00:11:35,360 --> 00:11:39,680
हमने इनसे कहा अच्छा एक बात आ रही है यहां पर ये इसने

148
00:11:39,680 --> 00:11:43,760
लास्ट में अपनी वीडियो में ये वाली बात कही है कि अगर तुम्हारे गुरु ने उत्तर दे दिया

149
00:11:43,760 --> 00:11:48,320
था तो तुमको क्या आवश्यकता थी? मेरे भाई

150
00:11:48,320 --> 00:11:52,320
तुम पहली बात तो यह है कि वैसे [नाक से की जाने वाली आवाज़]

151
00:11:52,320 --> 00:11:56,320
इतनी बेसिक सी बात है कि मुझको क्या आवश्यकता थी

152
00:11:56,320 --> 00:12:00,480
यह भी मुझे बताना पड़ रहा है। तो ये बहुत ही हास्यप्रद बात है। तो चलो बताते

153
00:12:00,480 --> 00:12:04,720
हैं। तुमने जब प्रश्न किया अगर सबसे बिल्कुल निकटतम

154
00:12:04,720 --> 00:12:08,720
कारण अगर मैं बताना चाहूं तो तुमने जब प्रश्न किया था उसमें तुमने मेरा

155
00:12:08,720 --> 00:12:13,040
नाम लिया था ना कि शिवश नारायण द्विवेदी ऐसा ऐसा कहता

156
00:12:13,040 --> 00:12:17,200
है तो शिवश नारायण द्विवेदी अपना पक्ष प्रस्तुत करने

157
00:12:17,200 --> 00:12:21,360
क्यों ना आए इसके अलावा तुमने ओपन चैलेंज दिया

158
00:12:21,360 --> 00:12:25,760
था कि भैया आकर सिद्ध करो अवतारवाद को कोई भी पौराणिक

159
00:12:25,760 --> 00:12:30,160
है वो यह करे वो वो करें तो भाई जब तुम मेरे सामने हो

160
00:12:30,160 --> 00:12:34,960
तो मैं अपने पक्ष को सिद्ध करने के लिए तुमसे वार्ता क्यों ना करूं।

161
00:12:34,960 --> 00:12:38,960
दूसरी बात यह भी है कि जब मुझे पता है कि तुम किस उद्देश्य से वहां पर आए

162
00:12:38,960 --> 00:12:42,960
हो। तुम किस पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर के वहां पर आए हो जो

163
00:12:42,960 --> 00:12:46,720
कि तुमने इस घटनाक्रम में आगे भी प्रस्तुत किया है और

164
00:12:46,720 --> 00:12:50,800
आगे तो मुझे बाद में पता चलेगा ना। तो मैं तुमको पहले से जानता हूं। तो

165
00:12:50,800 --> 00:12:54,880
तुमने कुछ ऐसी बातें पहले से कही हैं। तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज मात्र

166
00:12:54,880 --> 00:12:59,040
से दिखाई दे रहा है। तुम्हारे बात करने के ढंग से दिखाई दे रहा है कि

167
00:12:59,040 --> 00:13:03,040
तुम वहां पर संतुष्ट नहीं होने वाले। ना ही तुम संतुष्ट हुए और तुमने बाद में मेरा

168
00:13:03,040 --> 00:13:07,440
ये जो अनुमान था उसको असंतुष्टि और ये शास्त्रार्थ

169
00:13:07,440 --> 00:13:11,440
में हारा हुआ बता करके सिद्ध भी कर दिया मेरे अनुमान को। तो इसी अनुमान

170
00:13:11,440 --> 00:13:15,520
के कारण मैं तुम्हारे पास आया था तुम्हें संतुष्ट करने के लिए। ठीक है? इसके

171
00:13:15,520 --> 00:13:19,600
अलावा एक बात थी कि भाई आपने यह कहा था तुमने ये कहा था इस

172
00:13:19,600 --> 00:13:23,680
व्यक्ति ने यह कहा था कि मेरे चैनल पर होगी चर्चा अब ठीक है तो मैंने कहा

173
00:13:23,680 --> 00:13:27,760
था भाई तेरे चैनल पर तो नहीं होगी हां मैं बनारस आ रहा हूं किसी कार्य

174
00:13:27,760 --> 00:13:32,000
से और यही कार्य थे जटा बाबा का भी वो ले लिया है हमने

175
00:13:32,000 --> 00:13:36,080
जो एक उनके उनका मार्गदर्शन प्राप्त कर लिया है तो जटा

176
00:13:36,080 --> 00:13:40,400
गुरु जी का भी मुझे एक वक्तव्य लेना था तो उस कारण से मुझे

177
00:13:40,400 --> 00:13:44,480
बनारस आना ही था तो मैंने ये कहा कि अब मैं बनारस

178
00:13:44,480 --> 00:13:48,480
आ रहा हूं तो आप वहां पर आ जाओ क्योंकि तुमने बताया था बनारस के आसपास तो इसने बताया

179
00:13:48,480 --> 00:13:52,720
था कि भाई जो है मेरे पास समय नहीं अभी इन दिनों कंस्ट्रक्शन चल

180
00:13:52,720 --> 00:13:56,720
रहा है तो समय नहीं हो तो मैंने इससे कहा था कि भाई ठीक है कब होगा समय तब तब

181
00:13:56,720 --> 00:14:00,720
बता दो तो देखेंगे सामंजस्य बिठाने का प्रयास करेंगे कि तुम्हारे पास भी समय हो और

182
00:14:00,720 --> 00:14:01,920
मैं उसी समय जटा बाबा

183
00:14:01,920 --> 00:14:05,920
का मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए चला जाऊं तब इसने कहा था कि अब

184
00:14:05,920 --> 00:14:09,920
मुझे आपके लिए प्रयास पूर्वक आपसे चर्चा करने में कोई इंटरेस्ट नहीं

185
00:14:09,920 --> 00:14:14,160
है हां आपका स्वागत है आप यहां आ सकते हैं यहां पे क्या कहते हैं

186
00:14:14,160 --> 00:14:18,400
हमारे हमारी ऑनलाइन में ठीक है तो हमारी जो चर्चा थी वो

187
00:14:18,400 --> 00:14:22,720
मिल ना पाने के कारण एक जगह एकत्रित ना हो पाने के कारण मैंने तुम्हारे

188
00:14:22,720 --> 00:14:26,880
जो ऑनलाइन का प्रस्ताव है उस पर आना उचित नहीं समझा क्योंकि तुम मेरे

189
00:14:26,880 --> 00:14:30,960
लिए ऐसे योग्य व्यक्ति नहीं हो कि मैं तुम्हारे यहां जाऊं हां तुम मेरे सामने पड़ गए

190
00:14:30,960 --> 00:14:35,040
हो बिना किसी प्रयास के तो मेरे पास एक ऑप्शन था कि भाई ये आ गया ये

191
00:14:35,040 --> 00:14:39,120
बहुत सवाल भी करता है चैलेंज भी करता है तो ठीक है इससे आज चर्चा हो जाए आर्या

192
00:14:39,120 --> 00:14:43,360
पार की बात हो जाए तो मेरे सामने मेरे पास बहुत से कारण थे

193
00:14:43,360 --> 00:14:47,760
और एक जो अल्टीमेट कारण है कि आर्य समाज ने भ्रम

194
00:14:47,760 --> 00:14:51,920
जो भ्रम फैला रखे हैं सनातन समाज को भटका रखा है

195
00:14:51,920 --> 00:14:56,320
और मेरा जीवन मेरे जीवन का उद्देश्य सनातन समाज को संगठित

196
00:14:56,320 --> 00:15:00,480
करना तो उसमें जो वैचारिक क्रांति है तो उसमें ऐसे विचार

197
00:15:00,480 --> 00:15:04,560
जो हमारे हमें खोखला बना रहे हैं उनको समाज के समक्ष प्रस्तुत करना

198
00:15:04,560 --> 00:15:08,720
उनको नष्ट नहीं करना है वो अपने आप शोधित शोधन होता जाएगा तो

199
00:15:08,720 --> 00:15:13,280
उसके निमित्त मेरे पास इतने सारे कारण थे तुम्हारे पास आने के गुरुदेव

200
00:15:13,280 --> 00:15:17,040
से प्रश्नोत्तरी हो जाने के बाद भी। ठीक है? और मैं

201
00:15:17,040 --> 00:15:21,040
तो पहले ही आया हूं जो ये वाली बात है ना कि गुरुदेव ने प्रश्न का उत्तर दे दिया था तो

202
00:15:21,040 --> 00:15:25,040
फिर तुम क्यों आए? तो ये तो बात ही खत्म हो गई। मैं तो तुम्हारे पास प्रश्न करने

203
00:15:25,040 --> 00:15:29,200
से पहले आ चुका हूं कि भाई चलो चर्चा कर लेते हैं क्योंकि मैं

204
00:15:29,200 --> 00:15:33,280
तुम्हारे यहां ऑनलाइन नहीं आने वाला था और तुम मेरे लिए बनारस नहीं आने वाले थे।

205
00:15:33,280 --> 00:15:37,360
इसने कहा था कि मुझे घर से टाइम नहीं मिले। मैंने इससे ये तक कहा था कि तुम्हें भविष्य

206
00:15:37,360 --> 00:15:41,520
में कब टाइम मिल सकता है। तो इस व्यक्ति ने कहा था कि नहीं नहीं अब मैं ये नहीं बता। मतलब

207
00:15:41,520 --> 00:15:45,920
इसको करनी नहीं उससे भागना था। यह बात वहां भी क्लियर हो गई। और इस

208
00:15:45,920 --> 00:15:50,320
मौके मौका वारदात पर जब यह मिला और किस तरीके से जूता छोड़

209
00:15:50,320 --> 00:15:54,560
और सब कुछ छोड़ वहां से भागा तो उससे क्लियर हो गया कि इसको मेरे साथ चर्चा

210
00:15:54,560 --> 00:15:58,640
करने में है दिक्कत क्योंकि मैं झूठे की हद तक और

211
00:15:58,640 --> 00:16:02,800
चोर के घर तक जाता हूं। तो अब आप इसको वीडियो को देख लीजिए

212
00:16:02,800 --> 00:16:06,960
कि किस तरीके से मैंने जब चर्चा का प्रस्ताव दिया पहले राउंड

213
00:16:06,960 --> 00:16:10,960
में तो यह मान गया था कि करते हैं पहले मैं गुरुदेव से मतलब शंकराचार्य

214
00:16:10,960 --> 00:16:14,960
जी से ले लूं और प्रश्न उत्तर कर लूं उसके बाद मैं आपसे

215
00:16:14,960 --> 00:16:18,960
करता हूं। उसके बाद जब यह जा रहा है तो पूर्व की में जो हमारी बातचीत हो चुकी है

216
00:16:18,960 --> 00:16:23,120
उसके अनुसार मैं अब इससे कह रहा हूं चलो बैठ करके अब चर्चा करते

217
00:16:23,120 --> 00:16:27,200
हैं बैठ के अच्छा एक बात और भी है यहां पर मैंने बैठकर

218
00:16:27,200 --> 00:16:31,200
के चर्चा करने की जो बात कही है मेरे दिमाग में अभी तक यह है ही नहीं कि हम कहीं

219
00:16:31,200 --> 00:16:32,160
कमरे में जाएं

220
00:16:32,160 --> 00:16:36,320
ना कमरे का शब्द ही नहीं है यहां पे ठीक है कमरे का शब्द कैसे

221
00:16:36,320 --> 00:16:40,400
आएगा कि जब हम दोनों ये बात कर रहे हैं तो कोई एक गुरु

222
00:16:40,400 --> 00:16:44,400
भाई हैं वह हम दोनों को बात करते हुए देखा उन्होंने उन्होंने कहा ऊपर एक अतिथि

223
00:16:44,400 --> 00:16:48,800
कक्ष उन्होंने कहा ठीक है और वहां पर

224
00:16:48,800 --> 00:16:53,040
बहुत ज्यादा पुराने से प्राचीन समय से हम दोनों हम लोग एक दूसरे को जानने

225
00:16:53,040 --> 00:16:57,360
वाले नहीं है कोई अभी छत्तीसगढ़ से आया है मैं बताऊंगा अभी कुछ

226
00:16:57,360 --> 00:17:01,360
लोग थे वहां पर जो ये वाला आरोप लग रहा है ना कि कैमरा बंद कराने के लिए बात की गई

227
00:17:01,360 --> 00:17:05,840
ठीक है तो अगर ये एक सुनियोजित व्यवस्था थी आप अभी देखिएगा

228
00:17:05,840 --> 00:17:10,160
मेरे कैमरे को भी बंद करने का प्रयास किया गया है तो जिन

229
00:17:10,160 --> 00:17:14,400
लोगों के दिमाग में यह वाली बात चल रही है कि फोटो ना बने कोई प्लानिंग

230
00:17:14,400 --> 00:17:18,720
नहीं है मेरी या वहां के प्रशासन की जो जो सामान्य

231
00:17:18,720 --> 00:17:22,720
लोग हैं श्रद्धालु हैं जो यह चाहते हैं कि भाई मंदिर प्रांगण है

232
00:17:22,720 --> 00:17:26,720
या किसी आचार्य का प्रांगण है तो ऐसे विवादित चीजें अगर विवाद

233
00:17:26,720 --> 00:17:30,880
का सीन बन रहा है जो कि तुम बना रहे हो वो भी मैं अभी बताऊंगा कौन बना रहा है तो

234
00:17:30,880 --> 00:17:34,880
विवाद का जो दृश्य बन रहा है वो इस तरह से प्रचारित ना हो खामखा लोगों की

235
00:17:34,880 --> 00:17:38,880
अश्रद्धा उनका अपना विवेक उसके अनुसार वो फोटो को बंद कराने

236
00:17:38,880 --> 00:17:42,880
की बात कर रहे हैं तो आप देखो मेरा भी कैमरा बंद कराने की

237
00:17:42,880 --> 00:17:46,880
बात हो रही है बार-बार बता बताना पड़ रहा है कि भाई हम तो आप ही के पक्ष के व्यक्ति

238
00:17:46,880 --> 00:17:47,380
हैं।

239
00:17:47,360 --> 00:17:51,360
आप ऐसा ना करें। तो जो ये कैमरा बंद कराने की बात है यह दोनों

240
00:17:51,360 --> 00:17:55,520
के साथ घटित हुई है। योजनाबद्ध तरीके से केवल तुझ तेरे

241
00:17:55,520 --> 00:17:59,600
साथ नहीं हुई है। ठीक है? चलो तो अब

242
00:17:59,600 --> 00:18:05,600
इतनी सारी चीजें समझ गए। अब इस वीडियो को आप थोड़ा सा प्ले कर दीजिए। जी

243
00:18:11,440 --> 00:18:15,520
पॉज करिए। यहां इसने कहा एक मिनट पॉज कर दीजिए। यहां

244
00:18:15,520 --> 00:18:19,600
इसने कह दिया चलिए इसके बाद एक हां इसके बाद ये

245
00:18:19,600 --> 00:18:23,600
जो आपको नीले कुर्ते में दिख रहे हैं ना ये एक गुरु भाई हैं। इन्होंने

246
00:18:23,600 --> 00:18:27,840
बोला था कि ऊपर एक कक्ष बना हुआ है। यहां तक मेरे माइंड में कक्ष की बात नहीं थी। इन्होंने

247
00:18:27,840 --> 00:18:31,840
बोला कि कक्ष बना हुआ है। तो मैंने कहा कि कक्ष बना हुआ है। चलो अच्छे से

248
00:18:31,840 --> 00:18:35,920
बैठकर बात हो जाएगी। वरना मैं तो यही सोच रहा था। इसको कहीं पर सीढ़ी पे

249
00:18:35,920 --> 00:18:39,920
कहीं पे लेकर बैठूं। कैमरा चालू करें। कॉलर माइक लगाएं हो जाएगा चालू।

250
00:18:39,920 --> 00:18:44,000
कोई दिक्कत नहीं है। तो अब इसने क्या किया? जब

251
00:18:44,000 --> 00:18:48,480
जब आगे की बात आई चर्चा की मान लो कि इसको कक्ष से परेशानी थी।

252
00:18:48,480 --> 00:18:52,640
ठीक है? अब पहले आप एक बार ये देख लीजिए उसके बाद बात करेंगे। ये पूरा चला दीजिए।

253
00:18:52,640 --> 00:18:58,640
शुरू से चलाइए। शुरू से चलाइए।

254
00:19:05,760 --> 00:19:11,760
हमारा चर्चा करेंगे

255
00:19:14,160 --> 00:19:18,240
तुमने बिना बिना परमिशन के तुमने क्यों डाला है तुमने क्या डाला हमने तुमने डाला ना अपने

256
00:19:18,240 --> 00:19:24,240
YouTube पे डाला आवाज नहीं तुमने अपने YouTube पे डाला कि नहीं डालानी

257
00:19:31,120 --> 00:19:35,200
भैया की है ना ये व्यक्ति देख लीजिए आया था यहां पर प्रश्न का उत्तर लेने। उत्तर

258
00:19:35,200 --> 00:19:39,280
दिया जा रहा है तो बहाने बना रहा है कि कह रहा है कि हमारे आचार्यों का तुमने अपमान किया। हम क्यों करें

259
00:19:39,280 --> 00:19:44,000
भैया? [चीखने की आवाज़]

260
00:19:44,000 --> 00:19:48,400
ये ये नया सीन भी देखने को मिल गया आपको। अभी तक नहीं देखा था।

261
00:19:48,400 --> 00:19:53,760
ये देख लीजिए। ये विवादित व्यक्ति क्या कर रहा है यहां पर?

262
00:19:53,760 --> 00:19:59,760
पाप कुटने के काम

263
00:19:59,920 --> 00:20:04,800
कुटने के काम कौन कर रहा है? कुटने के काम कौन कर रहा है?

264
00:20:04,800 --> 00:20:09,120
तुम हमारे यहां पर आए हो। तुमको चर्चा करने के लिए वो

265
00:20:09,120 --> 00:20:13,280
प्रश्न करने के लिए माइक दिया गया। फिर तुम्हें चर्चा करने का प्रस्ताव दिया गया। इसके

266
00:20:13,280 --> 00:20:17,360
बाद इसने अपने में एक अच्छा ये लोग बेशर्माई पता नहीं कहां से लाते

267
00:20:17,360 --> 00:20:21,600
हैं। हालांकि अपनी स्त्री को आगे कर रहा है जो इस तरह से

268
00:20:21,600 --> 00:20:25,680
वो कितना बड़ा बेशर्म हो सकता है अपनी वो अविवाहित संगनी को

269
00:20:25,680 --> 00:20:30,080
तो वो तो खैर उससे शर्म की बात कहां से की जाए? मगर

270
00:20:30,080 --> 00:20:34,800
आप देखो साफसाफ सामने से झूठ कैसे बोल लेते हैं यार

271
00:20:34,800 --> 00:20:39,120
जब चर्चा होना सुनिश्चित हो गया तो पहला प्रहार

272
00:20:39,120 --> 00:20:43,280
आक्षेप के रूप में इसने किया इसने ये कहा

273
00:20:43,280 --> 00:20:47,760
कि आपने हमारे आचार्यों का अपमान किया हम तुमसे चर्चा क्यों करें

274
00:20:47,760 --> 00:20:51,920
भाई अगर तुमको षड्यंत्र लग रहा है कक्ष में जाना ठीक है अगर तुम्हें

275
00:20:51,920 --> 00:20:55,920
षड्यंत्र लग रहा है तो आप ये कहोगे ना कि भैया यहां पे कर लो

276
00:20:55,920 --> 00:20:59,120
बगल में 80 घाट है वहां चल के बैठ लो अच्छा तुमने

277
00:20:59,120 --> 00:21:03,280
जो एक उपाय दिया कि आर्य समाज चलो। पहली बात हम किस वहां

278
00:21:03,280 --> 00:21:07,280
पर बैठे हुए हैं। हम जाकर सीधे आर्य समाज चले जाए। तुम यह चाहते हो

279
00:21:07,280 --> 00:21:11,360
कि हमारे कक्ष में जाना क्या कहते हैं?

280
00:21:11,360 --> 00:21:16,560
तुम षड्यंत्र मानोगे मगर तुम्हारे आर्य समाज जाना हम षड्यंत्र ना माने।

281
00:21:16,560 --> 00:21:20,560
ये कैसे सिद्ध होगा? भाई बराबर का व्यवहार करोगे

282
00:21:20,560 --> 00:21:24,560
ना। अन्यों के साथ वही व्यवहार करो। महाभारत का सिद्धांत है। अन्यों के

283
00:21:24,560 --> 00:21:28,640
साथ वही व्यवहार करो जो अपने साथ स्वीकार रहे हो। तो आप जब

284
00:21:28,640 --> 00:21:32,720
हम पर हमारे कक्ष में हमारे प्रांगण में जाने के लिए आशंका

285
00:21:32,720 --> 00:21:37,200
जता रहे हैं उसमें संभावित क्या कहते हैं ये षड्यंत्र की संभावना

286
00:21:37,200 --> 00:21:41,360
देख रहे हैं तो हम आपके आर्य समाज मंदिर जाने में षड्यंत्र की संभावना क्यों देखें

287
00:21:41,360 --> 00:21:45,360
क्यों ना देखें खैर पॉइंट पर आते हैं तो

288
00:21:45,360 --> 00:21:49,600
मान लो कि तुमने अगर तुम्हें अगर षड्यंत्र की ब आ गई थी हालांकि

289
00:21:49,600 --> 00:21:53,680
वो क्या हुआ था वो सभी को मालूम है कि शिवश नारायण द्विवेदी

290
00:21:53,680 --> 00:21:57,760
जब खड़ा हो जाता है तो हो जाता है देवधर देवधर और गुंडे ंडे

291
00:21:57,760 --> 00:22:01,840
कांपे थर थर थर वो वाली बात तो पीछे भी हट रहा है

292
00:22:01,840 --> 00:22:06,000
यहां पर पीछे हट के हपहप कर रहा है ना हां हां हां वो अभी वो अभी

293
00:22:06,000 --> 00:22:10,080
आपको बहुत बढ़िया दृश्य दिखाई देंगे खैर वो [गला साफ़ करने की आवाज़] तो

294
00:22:10,080 --> 00:22:14,240
हुआ क्या कि अगर आपको कमरे में जाना

295
00:22:14,240 --> 00:22:18,320
षड्यंत्र दिखाई वो रैंडम आया हुआ विचार है मेरे सामने

296
00:22:18,320 --> 00:22:22,320
मैंने कहा कमरे में जाने की सोच ही नहीं रहा हूं मैं तो उससे बोला चलो बैठकर चर्चा कर

297
00:22:22,320 --> 00:22:26,400
लेते हैं उसने कहा चलो उसके बाद एक व्यक्ति बोला कि चलो ऊपर कमरा है मैंने कहा

298
00:22:26,400 --> 00:22:30,400
चलें ऊपर तो [गला साफ़ करने की आवाज़] बोला चलो उसके बाद जीनेस अच्छा इसने एक चीज और

299
00:22:30,400 --> 00:22:35,200
देखो इस इस वीडियो की शुरुआत दिखाओ जरा शुरुआत दिखाओ

300
00:22:35,200 --> 00:22:41,200
इस वीडियो की शुरुआत दिखाओ

301
00:22:44,320 --> 00:22:48,320
ये देखो ये देखो पॉज करो पॉज करो पॉज

302
00:22:48,320 --> 00:22:52,320
करो इसने ये चलिए भी क्यों कहा था

303
00:22:52,320 --> 00:22:56,320
मालूम है क्योंकि इसको लग रहा इसको ये मालूम था कैमरे में

304
00:22:56,320 --> 00:23:01,120
देख के कैमरे की ओर देख के दोबारा दिखाओ। हल्का सा पीछे करना बस दो सेकंड का।

305
00:23:01,120 --> 00:23:07,120
इसको दिखाई दे रहा है कि कैमरा चल रहा है तो मैं मना नहीं करूंगा।

306
00:23:07,520 --> 00:23:11,600
देखो ठीक है। और जब जब ये जीने से नीचे उतर गया।

307
00:23:11,600 --> 00:23:15,760
इसको लगा कि अब मैं कैमरे की पर्दी से बाहर हूं। बहुत साफ सुथरी चीजें नहीं आएंगी।

308
00:23:15,760 --> 00:23:19,760
तब ये वहां जाके बोला कि मुझे चर्चा नहीं करनी। मुझे भागना है चप्पल

309
00:23:19,760 --> 00:23:23,840
छोड़ के। है ना? तो खैर

310
00:23:23,840 --> 00:23:27,840
अब यहां पर क्या क्लियर हुआ कि यह जो विचार आया है रेंडम

311
00:23:27,840 --> 00:23:32,160
आया है और उसके बाद भी अगर तुम्हें भाई अगर तुझे चर्चा नहीं करनी

312
00:23:32,160 --> 00:23:36,240
है तो तुम्हें यहां पर चर्चा नहीं करनी कमरे में जाकर तो तुम पहली बात बोलो

313
00:23:36,240 --> 00:23:40,720
कि यही सार्वजनिक रूप से करो क्योंकि सार्वजनिक रूप से तुम प्रश्न भी कर रहे हो तो सार्वजनिक

314
00:23:40,720 --> 00:23:44,720
जगह पे चर्चा करने पर तुम्हें आपत्ति नहीं होनी चाहिए। तुमने प्रश्न भी तो

315
00:23:44,720 --> 00:23:49,280
सार्वजनिक जगह आकर के किया है ना है ना उसी प्रांगण में चर्चा करने के लिए बोलो

316
00:23:49,280 --> 00:23:53,360
या फिर तुम ज्यादा से ज्यादा हो सकता है न्यूट्रल जगह चले चलो

317
00:23:53,360 --> 00:23:57,440
भाई बगल में 80 घाट है थोड़ी दूरी पे कुछ और पार्क हो कोई कहीं पे वहां चल

318
00:23:57,440 --> 00:24:01,440
के बैठ लो कोई और मंदिर चले चलो कुछ भी मगर अब तुम क्या चाहते

319
00:24:01,440 --> 00:24:05,680
हो कि हम सब छोड़ करके तुम्हारे आर्य समाज के मंदिर चले जाएं हम उसको षड्यंत्र ना माने

320
00:24:05,680 --> 00:24:10,080
मगर तुम्हारी चीज को षड्यंत्र मानो ठीक है दूसरी बात यह है

321
00:24:10,080 --> 00:24:14,160
कि तुमने यह सुझाव नहीं दिया कि कहां बैठ के चर्चा अच्छा

322
00:24:14,160 --> 00:24:18,240
हो सकता है कि इस बात पे बात होती कि कहां चर्चा हो सकती है।

323
00:24:18,240 --> 00:24:22,320
इस बात पे थोड़ी बात खींचती तो वो चर्चा हो जाती। अगर

324
00:24:22,320 --> 00:24:22,820
इस बात

325
00:24:22,800 --> 00:24:26,960
पे बात खींचती कि कहां करनी है तो भाई कमरे

326
00:24:26,960 --> 00:24:30,960
में नहीं आर्य समाज मंदिर नहीं 80 घाट पर बैठ के कर लेते कहीं बैठ के कर हो जाती।

327
00:24:30,960 --> 00:24:34,960
मगर इस व्यक्ति ने एक दो बार आर्य समाज मंदिर का नाम लिया। मैंने उसका प्रतिकार किया नहीं।

328
00:24:34,960 --> 00:24:39,040
आर्य समाज मंदिर नहीं। तो ये व्यक्ति यह बोलता है कि तुमने

329
00:24:39,040 --> 00:24:43,040
हमारे आचार्यों का अपमान किया है तो हम तुमसे चर्चा क्यों करें? तो यहां क्या

330
00:24:43,040 --> 00:24:47,680
हुआ? इसने तो चर्चा की संभावना ही नष्ट कर दी ना।

331
00:24:47,680 --> 00:24:51,920
भाई हम जब और विकल्प सोचे तो कैसे सोचे? हम सोच रहे जब तक बताएं

332
00:24:51,920 --> 00:24:55,920
बताएं जब तक बात हो तब तक इसने एक दो सेकंड के अंदर-अंदर इसने बोल दिया तुमने

333
00:24:55,920 --> 00:25:00,080
हमारे आचार्यों का अपमान किया है। तो हम तुमसे चर्चा क्यों करें?

334
00:25:00,080 --> 00:25:04,240
अब यहां तो इस कोई विकल्प निकालना, कोई खुली जगह पर चर्चा करने की

335
00:25:04,240 --> 00:25:08,240
भावना लाना सब खत्म हो गया। तो सबसे पहली बात कि

336
00:25:08,240 --> 00:25:12,400
मानसिक दबाव बनाना सिद्ध नहीं होता। माइक ना देने में कोई द्वेष

337
00:25:12,400 --> 00:25:16,800
भाव सिद्ध नहीं होता और क्या कहते हैं

338
00:25:16,800 --> 00:25:20,800
यह यह जो तुम तुम्हारा जो न्यूट्रल जगह पर

339
00:25:20,800 --> 00:25:24,800
चर्चा का प्रस्ताव कहना है वो सिद्ध नहीं होता क्योंकि तुमने न्यूट्रल जगह नहीं

340
00:25:24,800 --> 00:25:28,960
बताई थी कि 80 घाट चलो या फलाने उस पार्क में चलते

341
00:25:28,960 --> 00:25:33,120
हैं। तुमने बताया था आर्य समाज मंदिर तो तुमने जो अपने उसमें बयान दिए हैं ना

342
00:25:33,120 --> 00:25:37,600
मानसिक और शारीरिक दबाव बनाने के लिए माइक वाली बात जो तुम्हारी

343
00:25:37,600 --> 00:25:38,560
वो

344
00:25:38,560 --> 00:25:42,560
क्या कहते हैं अविवाहित संगनी कह रही हैं और साथ ही साथ जो

345
00:25:42,560 --> 00:25:46,720
तुम कह रहे हो कि न्यूट्रल जगह का सुझाव दिया मैंने वो न्यूट्रल जगह का सुझाव आप

346
00:25:46,720 --> 00:25:50,720
ये सारी चीजें आपकी यहीं पे असिद्ध हो रही हैं।

347
00:25:50,720 --> 00:25:54,800
ठीक है? इसके बाद आपने यह जो एक

348
00:25:54,800 --> 00:25:58,800
ब्लेम किया है कि मैंने भड़काया राधा जी का नाम लेकर तो

349
00:25:58,800 --> 00:26:02,880
भाई साहब भड़काया आपने है। विवादित वातावरण आपने शुरू किया

350
00:26:02,880 --> 00:26:06,880
है। नेगेटिविटी आप लाए हो। हम तो चर्चा करने के लिए तुम्हारे साथ जा रहे हैं। फिर

351
00:26:06,880 --> 00:26:11,040
तुमने आर्य समाज का मंदिर का सुझाव दिया। हमने उसको मना किया कि नहीं आर्य समाज मंदिर नहीं

352
00:26:11,040 --> 00:26:15,040
जैसे तुमने हमारे हमारे स्थान को ही गौण कर दिया। तुमने कक्ष छोड़ो

353
00:26:15,040 --> 00:26:19,120
तुम जहां सार्वजनिक खड़े होकर के चर्चा कर चुके हो। प्रश्न उत्तर कर चुके हो

354
00:26:19,120 --> 00:26:23,120
वहां का भी तुमने सुझाव कैंसिल कर दिया तो तब जब हमने

355
00:26:23,120 --> 00:26:27,200
जो है तुम्हारे आर्य समाज को स्वीकार नहीं किया तो तुम लगे कहने आक्षेप लगाने

356
00:26:27,200 --> 00:26:31,200
कि आपने वो किया है हमारा अपमान किया आचार्यों का अच्छा आचार्यों

357
00:26:31,200 --> 00:26:35,200
का अपमान भी मैंने कभी किया नहीं जो व्यक्तिगत हो

358
00:26:35,200 --> 00:26:39,200
के हां मैंने कटाक्ष किए हैं और मैं आगे करता रहूंगा जिसमें

359
00:26:39,200 --> 00:26:43,600
दम तो वो क्या कहते हैं भक्त है बाजीराव सिंघम

360
00:26:43,600 --> 00:26:47,600
हां तो वो मैं करता रहूंगा है ना तो

361
00:26:47,600 --> 00:26:51,920
फिर यहां तक यह बात हो गई। अब इसके बाद तो यह जो इसने

362
00:26:51,920 --> 00:26:53,680
झूठ बोला है उसने राधा का नाम राधा

363
00:26:53,680 --> 00:26:58,000
जी का नाम लेकर के भड़काने लगा अपने लोगों को तो यह सारी चीजें मिथ्या

364
00:26:58,000 --> 00:27:03,680
इनकी यहां पर सिद्ध होती है कि किस प्रकार से था मामला। अच्छा

365
00:27:03,680 --> 00:27:07,840
अब जब इसने ये कहा कि

366
00:27:07,840 --> 00:27:11,920
आचार्यों का अपमान तो मैंने प्रतिकार पूर्वक इसको बोला कि भाई

367
00:27:11,920 --> 00:27:16,000
तुमने हमारा राधा जी का अपमान किया। हमारे आचार्यों का

368
00:27:16,000 --> 00:27:20,160
तुमने अपमान किया है और तुमने तो अभी-अभी कॉल रिकॉर्डिंग डाली है। वह कहीं

369
00:27:20,160 --> 00:27:24,160
पर व्यस्त थे प्रफुल जी उनसे इनकी चर्चा हुई कॉल पर। उनका

370
00:27:24,160 --> 00:27:28,320
नंबर इसलिए दिया जाता है कि गुरुदेव के शिविर कहां लग रहे हैं। इस बारे में कोई असुविधा होने

371
00:27:28,320 --> 00:27:32,480
पर संपर्क करें। उस नंबर पर इन्होंने कॉल किया। अगर मैं किसी को कॉल

372
00:27:32,480 --> 00:27:36,480
करता हूं। मैंने योगेश भारद्वाज जी के यहां कॉल किया है। मैंने विवेकानंद

373
00:27:36,480 --> 00:27:40,560
परिव्राजक जी के यहां कॉल किया है। अगर मैं किसी को कॉल करता हूं तो मैं

374
00:27:40,560 --> 00:27:44,800
उनसे टाइम लेता हूं और कॉल पर तो चर्चा करने से बचता ही हूं अपनी

375
00:27:44,800 --> 00:27:48,880
ओर से। ठीक है? मैं टाइम लेता हूं और टाइम लेने के

376
00:27:48,880 --> 00:27:52,960
बाद या टाइम लेने के बाद उसको

377
00:27:52,960 --> 00:27:57,040
चर्चा के लिए पूछ मतलब पूछता हूं। फिर तब जाकर के उससे चर्चा करता

378
00:27:57,040 --> 00:28:01,200
हूं और फिर उसको जैसा वो व्यवहार होता है उसके अनुसार प्रसारित

379
00:28:01,200 --> 00:28:05,280
प्रसारित करता हूं। खैर यहां पर इसने क्या किया? अच्छा दूसरी बात

380
00:28:05,280 --> 00:28:08,880
इसने अपने हिसाब से नरेटिव सेट किया कि भैया देखो शंकराचार्य

381
00:28:08,880 --> 00:28:12,880
के शिष्य उत्तर नहीं दे पाए। प्रफुल जी महाराज जबकि उन्होंने ये नहीं कहा था उत्तर

382
00:28:12,880 --> 00:28:17,040
है नहीं। उन्होंने एक हद तक उत्तर दिया भाई कोई किस स्थिति में है। उसने थोड़ा

383
00:28:17,040 --> 00:28:21,040
बहुत सोचा कि मैं ठीक है। साधारण सी बात होगी तो मैं दे देता हूं। मगर

384
00:28:21,040 --> 00:28:25,200
जब उनको दिखाई दिया कि तुम जो है लखोर टाइप के व्यक्ति हो। उन्होंने कहा भैया सामने आ के

385
00:28:25,200 --> 00:28:29,280
बात करो। हं? अच्छा यह भी बात मैं इनहीं के मुंह से सिद्ध करूंगा

386
00:28:29,280 --> 00:28:34,150
कि सामने आकर बात करने को कहना ही गलत है सही है। और

387
00:28:34,150 --> 00:28:38,400
[गला साफ़ करने की आवाज़] इतनी चीजें हो गई। फिर इसने एक वो

388
00:28:38,400 --> 00:28:43,440
किया है कि गुंडों ने हाथापाई की अह

389
00:28:43,440 --> 00:28:47,520
एक बात इसने ये भी कही है कि पूरी शंकराचार्य जी असमर्थ थे। अपने

390
00:28:47,520 --> 00:28:51,920
वीडियो में कहा है कि जब इनको दिखने लगा कि पूरी शंकराचार्य जी असमर्थ हैं।

391
00:28:51,920 --> 00:28:55,920
मेरे भाई मुझे मैं तो तुम्हारे पास प्रश्न करने से पहले आ

392
00:28:55,920 --> 00:29:00,160
गया था। इसने यह बात कही है अपनी वीडियो में कि जब शिष्यों

393
00:29:00,160 --> 00:29:04,240
को दिखने लगा कि उनके गुरु उत्तर देने में असमर्थ

394
00:29:04,240 --> 00:29:08,240
हैं। तो वहां पर जो है इनके शिष्यों ने मुझे

395
00:29:08,240 --> 00:29:12,240
आगे घेर लिया। ये सब बातें इसने कही है। तो पहली बात तो यह है कि

396
00:29:12,240 --> 00:29:16,560
मैं तो तुम्हारे पास प्रश्न उत्तर होने से पहले ही आ गया तो तुम्हारी ये बात कट गई। दूसरी

397
00:29:16,560 --> 00:29:20,560
बात इसमें भी लक्षण बता दो। तर्क भी होता है तो न्याय शास्त्रों से होगा

398
00:29:20,560 --> 00:29:23,920
ना। तो इसमें लक्षण बता दो कि कौन सा लक्षण है जिससे

399
00:29:23,920 --> 00:29:27,920
ये सिद्ध हो रहा है कि भैया वो जो गुरुदेव हैं मैं ये समझ रहा हूं कि गुरुदेव

400
00:29:27,920 --> 00:29:31,920
जो है असमर्थ है और गुरुदेव असमर्थ हैं। इस बात का लक्षण क्या है? ये भी

401
00:29:31,920 --> 00:29:35,920
बात है। लक्षण वहां पर डाउट क्यों लक्षण ना होना वो भी अभी आगे

402
00:29:35,920 --> 00:29:40,320
पता चलेगा। तो ये बातें हो गई। अच्छा इसमें इसने

403
00:29:40,320 --> 00:29:44,320
दो क्लेम किए हैं कि 15 से 20 लोगों ने हमला किया है।

404
00:29:44,320 --> 00:29:48,400
मारपिटाई 20 से 25 लोगों ने 15 से 20 या 20 से 25

405
00:29:48,400 --> 00:29:52,800
जो भी इसने कहे हैं और इसने यह भी दावा किया है कि इसके पास वीडियो है।

406
00:29:52,800 --> 00:29:56,880
इसने अपने वीडियो में 15 से 20 लोगों ने मारा। वो सारे

407
00:29:56,880 --> 00:30:00,880
शंकराचार्य के शिष्य थे और क्योंकि इसने वो तुरंत तुरंत में वीडियो बनाया था।

408
00:30:00,880 --> 00:30:04,960
समझ रहे हैं? इसके पास क्या है क्या नहीं है इसको पता ही नहीं था। इसको तो वहां पर

409
00:30:04,960 --> 00:30:09,040
नैरेटिव सेट करने थे क्योंकि इनको धूल चटाई गई थी।

410
00:30:09,040 --> 00:30:13,040
है ना? तो इसलिए इसने ज्यादा वो इसके अंदर एक वो ईगो बहुत है।

411
00:30:13,040 --> 00:30:17,600
वह भी अभी मैं सिद्ध करूंगा ईगो क्या है। तो खैर अ

412
00:30:17,600 --> 00:30:21,600
इसने वहां पर ये बोला है कि मेरे पास वीडियो है। तो भाई वीडियो

413
00:30:21,600 --> 00:30:25,680
है तेरे पास। पहली बात तो तू वीडियो दिखा। क्यों नहीं दिखा रहा है?

414
00:30:25,680 --> 00:30:29,680
और क्या तू लुच्चा है क्या एक नंबर का? बगल में चौकी है। बगल में थाना है।

415
00:30:29,680 --> 00:30:33,840
जा ना भाई। तू कह रहा है वहां पुलिस वाले थे। उन्होंने तुझे बचाया। अबे मेरे गुरु

416
00:30:33,840 --> 00:30:38,400
भाई ने बचाया तुम्हें। मेरे गुरु भाइयों ने तुम्हें मेरे हाथों से बचाया है।

417
00:30:38,400 --> 00:30:39,520
ठीक है?

418
00:30:39,520 --> 00:30:43,600
पुलिस वाले बाद में आए हैं। अभी दिखाता हूं झूठे की हद तक और चोर के

419
00:30:43,600 --> 00:30:47,600
घर तक। खैर तो इसमें इन्होंने जो दो तीन चीजें

420
00:30:47,600 --> 00:30:52,000
कही है जानलेवा हमला। तो ये आर्य समाजी जो तथाकथित आर्यवीर

421
00:30:52,000 --> 00:30:56,000
बन के निकलते हैं। बड़े-बड़े इनके वो आर्यवीर दल चल रहे हैं।

422
00:30:56,000 --> 00:31:00,160
इनकी सच्चाई ये है। धूल चाट ली। यही

423
00:31:00,160 --> 00:31:04,160
इनका जानलेवा हमला है। खरोच कोहनी पे निशान आ गया। ये इनके

424
00:31:04,160 --> 00:31:08,480
लिए जानलेवा हमला है। समझ गए? धारा 307 अरे

425
00:31:08,480 --> 00:31:12,720
बेवकूफ यह जानलेवा हमला किसे कहते हैं? पता नहीं है अभी

426
00:31:12,720 --> 00:31:16,880
तुझे और तेरे ऊपर जानलेवा हमला हुआ है। तेरे पास प्रमाण है।

427
00:31:16,880 --> 00:31:20,880
तेरे पास साक्ष्य है। पुलिस वाले वहां पर साक्ष्य है। तो भाई

428
00:31:20,880 --> 00:31:24,880
तू एक तहरीर तो दे दे थाने में। नहीं देगा।

429
00:31:24,880 --> 00:31:29,040
क्यों? क्योंकि तुझे पता है कि तूने उसमें बहुत सारा ऐसा ब्लंडर

430
00:31:29,040 --> 00:31:33,040
मिस्टेक किया है। इतने झूठों का पुलिंदा बनाया है कि अगर तूने ऐसी

431
00:31:33,040 --> 00:31:37,440
कोई तहरीर दे दी तो तू ही कुट जाएगा उस तहरीर में। हम

432
00:31:37,440 --> 00:31:41,600
बिल्कुल वो जो भगा भगा के जूते मारने वाली बात मैंने वहां कही थी वही होगा

433
00:31:41,600 --> 00:31:45,920
तेरे साथ जुतियाए जाओगे तुम सब तरफ से। है ना?

434
00:31:45,920 --> 00:31:49,920
तो अब ये जो 15 से 20 लोगों ने हमला किया है कि नहीं किया

435
00:31:49,920 --> 00:31:54,080
है इसके लिए और तुझे पुलिस वालों ने बचाया है कि नहीं

436
00:31:54,080 --> 00:31:54,720
बचाया इसके

437
00:31:54,720 --> 00:31:58,960
लिए ये आप देख लो पुलिस वालों ने बचाया कि नहीं बचाया

438
00:31:58,960 --> 00:32:03,040
तो इसके लिए हम अब आप वीडियो

439
00:32:03,040 --> 00:32:07,440
चला दीजिए मैं बताता हूं आपको कौन सा

440
00:32:07,440 --> 00:32:11,440
हमने पहला वीडियो देखा प्रश्नोत्तरी से पहले जो मैंने

441
00:32:11,440 --> 00:32:15,600
इसको चर्चा का प्रस्ताव दिया तो यह बात खत्म हो जाती है कि गुरु के असमर्थ दिखने

442
00:32:15,600 --> 00:32:19,840
पर शिष्य आया। वो मेरे पास अपने स्वतंत्र कारण थे

443
00:32:19,840 --> 00:32:24,160
उसके इसके मिल जाने पर और चर्चा होने पर। हालांकि जब मैं यहां से जा रहा था

444
00:32:24,160 --> 00:32:28,160
तो काशी के कोतवाल जी से मुझे ऐसा आभास आया था कि

445
00:32:28,160 --> 00:32:32,240
भैया वहां पर निर्भय जो है मिल जाएगा। उसका दूध का दूध पानी पानी हो जाएगा।

446
00:32:32,240 --> 00:32:36,400
इस तरह से होना था ये मुझे नहीं पता था। दूध का दूध पानी का पानी तो हो गया। खैर

447
00:32:36,400 --> 00:32:40,400
आप यह वीडियो चला दीजिए विवाद से धूल चटाने

448
00:32:40,400 --> 00:32:44,640
तक और जो उसके आगे जो टाइटल है अविवाहित संगिनी वाला

449
00:32:44,640 --> 00:32:50,640
वो वीडियो चला दीजिए।

450
00:32:55,760 --> 00:33:00,080
तुमने क्यों डाला है तुमने? क्या डाला हमने? तुमने डाला ना अपने YouTube पे डाला उधर आवाज नहीं।

451
00:33:00,080 --> 00:33:06,080
तुमने अपने YouTube पे डाला कि नहीं डाला? महाराज

452
00:33:06,720 --> 00:33:11,040
पॉज पॉज पॉज पॉज पॉज पॉज पॉज पॉज

453
00:33:11,040 --> 00:33:15,810
पॉज पॉज थोड़ा सा पीछे थोड़ा सा पीछे

454
00:33:15,810 --> 00:33:20,080
[हंसी] सस्पेंस सस्पेंस मिटा देते हो। पीछे करो। देखो पहली

455
00:33:20,080 --> 00:33:24,640
बात तो यह है व्यक्ति यहां पर हमारे प्रांगण में आता है। गैर अनुशासित

456
00:33:24,640 --> 00:33:29,440
तरीके से गुरुदेव से क्वेश्चन आंसर्स करता है। और उसको

457
00:33:29,440 --> 00:33:33,520
एक व्यक्ति से एक क्वेश्चन लिया जाता है ना। इसके पहले क्वेश्चन का आंसर

458
00:33:33,520 --> 00:33:37,680
तो इसको तुरंत दे दिया गुरुदेव ने। है ना? इसने यह पूछा

459
00:33:37,680 --> 00:33:41,680
था कि भाई उसमें जो इस तरह के पैराडॉक्स होते हैं ना

460
00:33:41,680 --> 00:33:45,840
वो वाले जो इसने करपाती जी का उदाहरण देते हुए कहा था

461
00:33:45,840 --> 00:33:50,160
कि भाई वो जो उन्होंने कहा कि वो कुंवारी वो वैश्या

462
00:33:50,160 --> 00:33:54,720
को कुमारी नहीं बना सकता ईश्वर तो इसमें उन्होंने वंद्या पुत्र का

463
00:33:54,720 --> 00:33:58,880
उदाहरण देते हुए गुरुदेव ने इसको क्रिया शून्य के रूप में बताते

464
00:33:58,880 --> 00:34:03,040
हुए प्रदर्शित करते हुए कहा था जो क्रिया है ही नहीं वो क्रिया होगी कैसे या

465
00:34:03,040 --> 00:34:07,120
तो क्रिया दो तो क्रिया होगी यही हमने अपने अभी लेटेस्ट एक वीडियो बताया है

466
00:34:07,120 --> 00:34:10,880
कि भाई इस ये जो बातें होती है पैराडॉक्स इसमें क्या होता है कि कोई एक

467
00:34:10,880 --> 00:34:15,200
व्यक्ति यह कह रहा है कि ऐसा कार्य करो और फिर शब्दांतर

468
00:34:15,200 --> 00:34:19,520
भेद से यह कह रहा होता है कि ऐसा कार्य मत करो तो कुल मिलाकर के उसका निचोड़

469
00:34:19,520 --> 00:34:24,000
है कि कुछ भी मत करो ऐसा कार्य करो फिर ऐसा कार्य मत करो

470
00:34:24,000 --> 00:34:28,000
फिर आंसर इसका मतलब क्या है वो ये कह रहा है कि कुछ ऐसा कुछ करो

471
00:34:28,000 --> 00:34:32,000
जिसमें कुछ ना करो ठीक है तो हम कुछ नहीं करने वाली स्टेज में

472
00:34:32,000 --> 00:34:36,160
तो जा ही सकते हैं तो इसके बहुत सारे उत्तर होते हैं पैराडॉक्स

473
00:34:36,160 --> 00:34:40,240
के तो उसमें से ये एक उत्तर है। एक उत्तर वो वाला है कि अविद्या के द्वारा जो है

474
00:34:40,240 --> 00:34:44,320
तुमको वो जो ईश्वर है वो ये फील करा सकता है कि हां तुमने ये

475
00:34:44,320 --> 00:34:48,400
जान लिया कि हां भाई कुंवारी से वैश्या से कुंवारी हो सकती है या दो

476
00:34:48,400 --> 00:34:52,560
और दो पांच इत्यादि वो वाला जो विद्या वाली बात हमने बताई थी। ठीक है तो

477
00:34:52,560 --> 00:34:56,800
तुमको ऐसा प्रतीति हो सकती है करवा सकते हैं। और

478
00:34:56,800 --> 00:35:01,120
तो इसने जो ये पहला प्रश्न पूछा था उसका उत्तर तो मिल ही गया था।

479
00:35:01,120 --> 00:35:05,120
तो आप हमारे यहां पर आते हैं। गैर अनुशासित तरीके

480
00:35:05,120 --> 00:35:09,360
से हमारे जो सार्वभौम आचार्य हैं जो तुम्हारे आचार्य

481
00:35:09,360 --> 00:35:14,160
हैं ना उनसे जो लोग हाथ मिलाते हैं ना जाकर के वो इनके पैरों में गिरते हैं।

482
00:35:14,160 --> 00:35:18,240
जिनकी वहां पर वो होती है ना मेहमान नवाजी क्या कहा जाता है? अभी तुम्हारा

483
00:35:18,240 --> 00:35:22,560
हुआ था ना 150वा वहां पर क्या हो रहा था? आरती उतारी जा रही है। मेहमान

484
00:35:22,560 --> 00:35:26,160
नवाजी हो रही है। यहां पैरों में बैठते हैं। यहां वो आचार्य

485
00:35:26,160 --> 00:35:30,320
हैं। समझो इस बात को। कौन है यहां पे? तो वहां तुम आते हो अपने वो

486
00:35:30,320 --> 00:35:34,640
जो क्या कहते हैं वो जो तुम्हारा टपोरीपन की एक छवि

487
00:35:34,640 --> 00:35:38,720
है ना जो तुम्हें तमीज नहीं है बदतमीजी है ना तो

488
00:35:38,720 --> 00:35:42,880
तमीज की जो कमी है संस्कारों की जो कमी है उसको लेकर के तुम यहां आते हो और

489
00:35:42,880 --> 00:35:46,960
अपने स्टाइल में अपने तरीके से तुम पहले विवादित तरीके से प्रश्न

490
00:35:46,960 --> 00:35:51,040
उत्तर करने का प्रयास करते हो करते भी हो एक के बाद अगला प्रश्न करते हो तीसरा

491
00:35:51,040 --> 00:35:55,120
दूसरा तीसरा प्रश्न करते हो ऐसे करके जो है आप जो है उसको शास्त्रार्थ में

492
00:35:55,120 --> 00:35:59,200
बदलने का प्रयास करते हो इतना सब करते हो उसके बाद हम चर्चा व्यवस्थित

493
00:35:59,200 --> 00:36:03,360
रूप से करने को कहते हैं तो तुम आरोप प्रत्यारोप शुरू करते हो। क्या क्या शुरू

494
00:36:03,360 --> 00:36:07,840
करते हो आरोप प्रत्यारोप? कि भैया क्या कहते हैं ये

495
00:36:07,840 --> 00:36:11,840
तुमने हमारे आचार्यों का अपमान किया तो हम चर्च मतलब आक्षेप लगाना प्रारंभ

496
00:36:11,840 --> 00:36:16,080
करते हो। हमारे यहां आकर के गैर अनुशासित होते हो। अशिष्ट होते हो हमारे आचार्य

497
00:36:16,080 --> 00:36:20,080
के साथ। फिर आरोप लगाना प्रारंभ करते हो। विवादित वातावरण तैयार

498
00:36:20,080 --> 00:36:24,080
करते हो। उसके बाद जब तुम तुम्हारे ऑफेंसेस तुम्हें याद दिलाते हो तो तुम

499
00:36:24,080 --> 00:36:28,080
क्या कह रहे हो वहां पर? तुम क्या कह रहे हो? कि क्या किया क्या

500
00:36:28,080 --> 00:36:32,320
डाला तुम्हें मालूम ही नहीं तुमने प्रफुल जी महाराज की रिकॉर्डिंग डाली है उनके नाम के साथ

501
00:36:32,320 --> 00:36:36,640
उनके चेहरे के साथ ठीक है अभी वह तुम्हें पता नहीं है कानून की चपेट

502
00:36:36,640 --> 00:36:40,720
में आता है ये मामला ठीक है किसी की रिकॉर्डिंग

503
00:36:40,720 --> 00:36:41,920
उसके

504
00:36:41,920 --> 00:36:46,080
बिना अनुमति के इस तरह से डालना अगर तुम कहो मेरी और तुम्हारी तो तुम मेरी

505
00:36:46,080 --> 00:36:50,240
डाल रहे हो मैं तुम्हारी डाल रहा हूं ठीक है अगर तुम मेरी और तुम्हारी

506
00:36:50,240 --> 00:36:54,240
की बात करो तो और तुमने अपने हिसाब से उसका नैरेटिव भी सेट कर

507
00:36:54,240 --> 00:36:58,480
लिया वो वो तुमसे कह रहे हैं आने को तो यह सब तुम कर रहे हो झूठ

508
00:36:58,480 --> 00:37:02,800
बोल रहे हो हमारे प्रांगण में आके अनैतिक आचरण कर रहे हो

509
00:37:02,800 --> 00:37:06,800
उसके बाद भी जो है हम लोग तुम्हें शांतिपूक ढंग

510
00:37:06,800 --> 00:37:10,800
से विदा कर रहे हैं जाने को कह रहे हैं विवादित वातावरण तुम कह रहे हो वहां पर कुछ

511
00:37:10,800 --> 00:37:14,800
लोग देखा था आपने क्या कह रहे थे यहां पे हल्ला व्ल्ला मत करो हल्ला कौन कर रहा

512
00:37:14,800 --> 00:37:18,880
है क्या डाला क्या डाला करके ये कर रहे हैं ठीक है और इनका

513
00:37:18,880 --> 00:37:23,040
विवादित चेहरा देख लो और जरा पीछे से फिर से दिखा दो थोड़ा सा पीछे से

514
00:37:23,040 --> 00:37:27,330
जहां से क्या डाला क्या डाला करेंगे जी

515
00:37:27,330 --> 00:37:33,330
[गला साफ़ करने की आवाज़]

516
00:37:35,360 --> 00:37:39,520
तुमने इनका बिना बिना परमिशन के तुमने क्यों डाला तुमने? क्या डाला हमने? तुमने डाला ना अपने

517
00:37:39,520 --> 00:37:45,520
YouTube पे डाला। उधर आवाज नहीं। तुमने अपने YouTube पे डाला कि

518
00:37:48,240 --> 00:37:52,480
अब होगी पिटाई।

519
00:37:52,480 --> 00:37:55,280
अब देखो।

520
00:37:55,280 --> 00:38:00,080
पॉज कर दो। पॉज कर दो। अब आप देखिए यहां पर

521
00:38:00,080 --> 00:38:04,400
कि अ यहां पर कौन बीच बचाव

522
00:38:04,400 --> 00:38:08,400
कर रहा है? कौन कूट रहा है? जमीन में धूल कौन चाट

523
00:38:08,400 --> 00:38:12,640
रहा है? जमीन से कौन उठ के खड़ा हो रहा है? ये देख लिया आपने।

524
00:38:12,640 --> 00:38:16,880
अभी दिखाते दोबारा। यहां पर मेरे गुरु भाई तुमको

525
00:38:16,880 --> 00:38:21,120
बचा रहे हैं। तुमने जो नैरेटिव सेट किया है ना मैंने चार लोगों से लड़ाई

526
00:38:21,120 --> 00:38:25,280
की। चार को तो निपटा दिया। उसके बाद 15 से 20 लोग आ गए।

527
00:38:25,280 --> 00:38:29,520
कहां है भाई 15 से 20 लोग? ये मेरा गुरु भाई ये पीयूष

528
00:38:29,520 --> 00:38:33,680
पीयूष जी हैं। ये तुमको बचा रहे हैं। वो गुरु भाई तुमको

529
00:38:33,680 --> 00:38:37,920
पकड़ के बचा रहा है। पीछे से लगाओ जरा पाप पाप के बाद। इनकी अकड़ देखो।

530
00:38:37,920 --> 00:38:42,000
हमारे प्रांगण में आकर 50 तरह के अनैतिक आचरण करने के बाद

531
00:38:42,000 --> 00:38:46,240
भबकी ले रहे हैं। मेरे गुरु भाइयों को शारीरिक और मानसिक दबाव में

532
00:38:46,240 --> 00:38:50,240
लाने का प्रयास कर रहे हैं। और तब मैंने इनको धूल चटाई है और

533
00:38:50,240 --> 00:38:50,740
फिर

534
00:38:50,480 --> 00:38:55,200
ये अपने नेटिव झू फॉल्स नेटिव सेट कर रहे हैं। हां देखिए

535
00:38:55,200 --> 00:38:59,200
यहां पे यहां पे क्या है मैं बता दूं। क्यों गए हैं यहां पे? ये इनके पास क्यों

536
00:38:59,200 --> 00:39:03,200
है गुरु भाई? जो इनकी प्रफुल जी महाराज की रिकॉर्डिंग डालने

537
00:39:03,200 --> 00:39:07,360
वाली बात है गलत नरेटिव के साथ उसके लिए पूछना

538
00:39:07,360 --> 00:39:11,360
है कि भाई क्यों डाली आपका पक्ष क्या है इसमें और

539
00:39:11,360 --> 00:39:15,440
इसमें भी अभी भी एक वही वाली बात है कि भाई आप जो है आए

540
00:39:15,440 --> 00:39:19,440
हो तो चर्चा कर लो है ना वो वाली बात भी है तो अब

541
00:39:19,440 --> 00:39:25,440
ये देखिए व्यक्ति क्या कर रहा है चलाइए क्या कर रहा है ये

542
00:39:32,440 --> 00:39:36,560
[हंसी] करो करो ये जो दाढ़ी वाले भाई हैं जो इसको

543
00:39:36,560 --> 00:39:40,640
बचा रहे हैं मुझसे यही भाई है जिन पर ये जो है पाप पाप कर रहा

544
00:39:40,640 --> 00:39:44,640
है हम हम यही गुरु भाई है जिन पर ये पाप पाप कर

545
00:39:44,640 --> 00:39:48,640
रहा है देख लिया शेर का बच्चा एक ही अच्छा

546
00:39:48,640 --> 00:39:52,800
जमीन में डले हुए हो तुम और ये जो जमीन में डला ये

547
00:39:52,800 --> 00:39:57,200
जो तुम जमीन में धूल चाट रहे हो ना ये भी इसलिए किया गया है

548
00:39:57,200 --> 00:40:01,520
कि तुम अपनी औकात को जान पाओ।

549
00:40:01,520 --> 00:40:05,520
आई रिपीट तुम्हें जमीन में इसीलिए डाला गया है तुम

550
00:40:05,520 --> 00:40:09,760
अपनी औकात को जान पाओ कि ये तुम्हारी

551
00:40:09,760 --> 00:40:14,320
औकात है। जमीन में धूल चाटना। समझ

552
00:40:14,320 --> 00:40:18,480
में आया? और मेरे गुरु भाई तुम्हें बचा रहे। कौन सा पुलिस वाला यहां पे अभी बीच बचाव

553
00:40:18,480 --> 00:40:22,640
कर रहा है? बताओ। मेरे गुरु भाई शुरू से कह रहे हैं कि

554
00:40:22,640 --> 00:40:26,720
भाई यहां हल्ला मत करो। जाओ जाओ। वो जाने की बात इसलिए कर रहे हैं। हल्ला

555
00:40:26,720 --> 00:40:30,800
मतलब हल्ला कर रहा था। सीन वहां क्रिएट कर रहा है। उसको मतलब थोड़ी ना है। उसके

556
00:40:30,800 --> 00:40:34,880
घर में यही सिखाया गया। एक दिन आया था मेरे मंच पर बहुत पहले की बात है।

557
00:40:34,880 --> 00:40:39,120
तो खाना खाते हुए बात बात कर रहा है। खाना खाते

558
00:40:39,120 --> 00:40:43,830
मैंने कहा भाई ये क्या संस्कार है? मेरे यहां ऐसे ही होता है। ये बदतमीज टाइप के

559
00:40:43,830 --> 00:40:47,520
[नाक से की जाने वाली आवाज़] अनैतिक आचरण वाले लोग और आते हैं शंकराचार्य

560
00:40:47,520 --> 00:40:52,080
के। उनको चाहिए प्रिविलेजेस। वहां पर माइक नहीं मिला।

561
00:40:52,080 --> 00:40:56,160
माइक नहीं मिला। तो मेरे आंखों के सामने मेरे गुरु

562
00:40:56,160 --> 00:41:00,560
भाइयों पर तुम जो है शारीरिक मानसिक दबाव बना रहे हो

563
00:41:00,560 --> 00:41:04,640
तब मैंने तुम्हें धूल चटाई है और तुम्हें यह बताने के लिए धूल चटाई

564
00:41:04,640 --> 00:41:08,960
है कि तुम्हारी ये औकात है ये देख लो ये निर्भय फिरभय

565
00:41:08,960 --> 00:41:13,120
बनना भूल जाओ ये औकात धूल

566
00:41:13,120 --> 00:41:17,200
चाटी है तुमने वहां पर धूल नीचे से देखा ना

567
00:41:17,200 --> 00:41:23,200
नीचे से दोबारा से रिपीट कर दो फिर से यहां तक फिर से चलो

568
00:41:26,410 --> 00:41:32,410
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]

569
00:41:33,280 --> 00:41:37,520
और और पीछे से लो और पीछे से लो पाप पाप जरा एक दो बार किया था इन्होंने

570
00:41:37,520 --> 00:41:42,160
इनकी गर्जना से हां ये

571
00:41:42,160 --> 00:41:45,600
ये नहीं

572
00:41:45,600 --> 00:41:51,280
ये सब मत करो

573
00:41:51,280 --> 00:41:55,600
ये नहीं

574
00:41:55,600 --> 00:41:59,680
मत [हंसी] ये देखो पॉज करो

575
00:41:59,680 --> 00:42:03,840
अब क्या है मामला मारपीट मत करो ये कौन कह रहा है मेरे गुरु

576
00:42:03,840 --> 00:42:08,720
भाई वही चार गुरु भाई जिनको तुमने कूट दिया है

577
00:42:08,720 --> 00:42:12,880
एक तो मैं ही हूं बाकी के तीन है जो बचा

578
00:42:12,880 --> 00:42:17,120
रहे हैं तुमको किससे बचा रहे हैं है ना लाइफ

579
00:42:17,120 --> 00:42:21,280
में कुछ भी करने का पर जयकांत शिकरे के ईगो को हर्ट नहीं करने

580
00:42:21,280 --> 00:42:25,680
करने का सही बात है। ये है तुम्हारी जो

581
00:42:25,680 --> 00:42:29,920
तुमको धूल भी इसलिए चटाई गई है। तुम कह रहे हो जानलेवा हमला। जानलेवा हमला

582
00:42:29,920 --> 00:42:33,920
भी तुम्हें पता नहीं है क्या होता है। खैर तुम्हारे लिए वही जानलेवा हमला है। जैसे

583
00:42:33,920 --> 00:42:38,480
होता है ना कि भाई एक चूहे के लिए

584
00:42:38,480 --> 00:42:41,520
जो है बिल्ली की भी आवाज आ जाए उसको

585
00:42:41,520 --> 00:42:45,520
या थोड़ा सा भी कुछ हो जाए उसके जीवन में। उसको लगता है जान

586
00:42:45,520 --> 00:42:49,840
गई। तो वो चूहे वाली स्थिति है तुम्हारी। खैर तो

587
00:42:49,840 --> 00:42:53,840
ठीक है तुम्हारे लिए वह जानलेवा हमला है। तो

588
00:42:53,840 --> 00:42:58,080
तुम मैंने जो तुम्हें धूल चटाई है वो सिर्फ और सिर्फ सिंगल मोटो था

589
00:42:58,080 --> 00:43:02,080
मेरा कि भाई और मैं हंस रहा हूं जिस समय इसको धूल चटाई

590
00:43:02,080 --> 00:43:06,400
ना मैंने उस समय मैं हंस रहा हूं। ये जो इसकी आंखें देखो नशे

591
00:43:06,400 --> 00:43:11,600
में हो गया आधा अ पआ का नशे किए हुए ये तो

592
00:43:11,600 --> 00:43:15,760
तो [हंसी] मैं वहां हंस रहा हूं और मैं उसको केवल ये बताना चाहता हूं तुम मेरे

593
00:43:15,760 --> 00:43:19,760
लिए कितने सामान्य वह हो ऑब्जेक्ट नियंत्रण में

594
00:43:19,760 --> 00:43:23,840
करने के लिए तो वह इसको जो धूल चटाई गई है वहां पर जो इसने

595
00:43:23,840 --> 00:43:27,920
आरोप लगाया है चार लोगों को मैंने पीट लिया था तब 1520 लोगों

596
00:43:27,920 --> 00:43:32,080
ने आकर मुझे मारा मेरे कपड़े फाड़े ये इनकी स्थिति है

597
00:43:32,080 --> 00:43:36,080
ठीक है मारपीट मत करो मेरे गुरु भाई बचा रहे हैं इसको जिस पर ये

598
00:43:36,080 --> 00:43:40,240
पप पप कर रहा है देख लो भैया अपने निर्भय को देख लो यह है इसकी

599
00:43:40,240 --> 00:43:44,320
हालत और अभी देखो अब यहां से पप पप से दोबारा चला दो जरा आगे तक

600
00:43:44,320 --> 00:43:50,320
चला देना आपकी बात

601
00:43:52,640 --> 00:43:57,280
थोड़ा पीछे थोड़ा पीछे से चलाना

602
00:43:57,280 --> 00:44:01,440
पॉज पॉज करो पॉज करो पॉज करो पॉज करो अच्छा एक बात

603
00:44:01,440 --> 00:44:06,240
और है जब मैं इसको धूल चटा रहा था तो जैसे

604
00:44:06,240 --> 00:44:10,800
छोटे बच्चे अपने पिता पर लाटे चलाते हैं ना छोटे बच्चे असहाय

605
00:44:10,800 --> 00:44:14,800
होते हैं जो घुटनों पर चलने वाले दूध मुंह बच्चे

606
00:44:14,800 --> 00:44:18,960
उस हालत में मुझ पर वो चला रहा था पैर

607
00:44:18,960 --> 00:44:23,120
और मुझे तभी हंसी आ रही थी ये कर क्या रहा है यार इसको

608
00:44:23,120 --> 00:44:27,520
मैं इसको मैं पांच से 10 बार पटक सकता था वहीं की वो

609
00:44:27,520 --> 00:44:31,600
तो गुरु भाई बीच में आ गए वहां मैं पटकने वाला था इसको और उठा उठा

610
00:44:31,600 --> 00:44:35,680
के पटकता देखिए उठा उठा के पटकने में क्या होता है ना जैसे एक

611
00:44:35,680 --> 00:44:39,680
होता है थप्पड़ और एक है पटकना इसमें क्या होता है व्यक्ति को चोट तो भले ही

612
00:44:39,680 --> 00:44:43,840
कम लगे मगर उसको ये फील होता है कि उसकी औकात क्या है

613
00:44:43,840 --> 00:44:48,080
औकात क्या है हम औकात पता चलती है। ये मुझे उठा के पटक

614
00:44:48,080 --> 00:44:52,640
दे रहा है। उठा के ये हूं मैं।

615
00:44:52,640 --> 00:44:56,640
तो इसलिए मैं हंस रहा था कि ये मुझ पे लाते चला रहा है और मैं

616
00:44:56,640 --> 00:45:02,000
इसको अभी धूल चटा रहा हूं। धूल चटाने वाला। ठीक है? तो

617
00:45:02,000 --> 00:45:06,000
इसके बाद यहां से पप पप से दोबारा चला दीजिए। ये वाला सीक्वेंस पूरा जहां तक मैं चाहता हूं वहां

618
00:45:06,000 --> 00:45:12,000
तक दिखा दीजिए एक बार। जी

619
00:45:12,000 --> 00:45:18,000
ये नहीं करना।

620
00:45:27,440 --> 00:45:32,240
कर रहे हो

621
00:45:32,240 --> 00:45:37,120
भैया की ये देखो पॉज करो पॉज करो

622
00:45:37,120 --> 00:45:41,120
पॉज करो यहां देखो जो वीडियो शूट कर रहा है वो बताना पड़ रहा है

623
00:45:41,120 --> 00:45:45,440
उसको कि भैया की यानी कि कई लोग ऐसे हैं जो आते जाते में सीधे कैमरा

624
00:45:45,440 --> 00:45:49,520
बंद करवाना चाह रहे हैं। ठीक है? तो यानी कि कैमरा बंद करने का

625
00:45:49,520 --> 00:45:53,520
प्रोसेस कोई आदेश पूर्वक उद्देश्य पूर्वक योजनाबद्ध नहीं है। वो

626
00:45:53,520 --> 00:45:57,760
जिसके मन में जैसा जिसका विवेक काम किया उसने प्रयास किया बंद करवाने

627
00:45:57,760 --> 00:46:01,840
का। ठीक है? तो ये कोई एक वैसा आरोप नहीं है। षड्यंत्र पूर्वक जो है

628
00:46:01,840 --> 00:46:05,920
कैमरा बंद करवाया गया। इस पे आगे बात करेंगे जो माता शक्ति है जो उन्होंने जो कहा

629
00:46:05,920 --> 00:46:10,000
है। इनकी अविवाहित संगनी है जो उस पर भी बहुत अच्छे से बात होगी।

630
00:46:10,000 --> 00:46:16,000
खैर इसको थोड़ा पीछे से दोबारा चला दो तो ये सीक्वेंस पूरा हो जाए। जी

631
00:46:16,800 --> 00:46:21,840
हाथ क्यों कर रहे हो? कर रहे होतजी

632
00:46:21,840 --> 00:46:26,400
करने आए। अरे भैया

633
00:46:26,400 --> 00:46:31,680
बदतमीजी करने आए हो तुम। जूते से मारे जाओगे। समझे?

634
00:46:31,680 --> 00:46:35,920
प्रश्न पूछने का तरीका होता है। कहां है वो दीदी? बस

635
00:46:35,920 --> 00:46:40,560
बस बस पॉज पॉज पॉज जाते भी कहा है ना

636
00:46:40,560 --> 00:46:44,720
जूते से मारे जाओगे मैं अभी भी कह रहा हूं तू इस तरह की हरकत

637
00:46:44,720 --> 00:46:48,720
करेगा तो जूते से ही मारा जाएगा जा कर ले जो करना है मेरा अभी भी यही कह रहा

638
00:46:48,720 --> 00:46:52,720
हूं हमारे आचार्यों का तू तू अपमान करता है राधा मां के लिए

639
00:46:52,720 --> 00:46:56,800
अश्लील गालियां दे चुका है तू तेरा रिकॉर्डिंग वायरल तूने क्या कानूनी कदम उठा

640
00:46:56,800 --> 00:47:00,960
लिया इन्होंने तो उठा लिया हमारे यहां आकर के तू जो

641
00:47:00,960 --> 00:47:04,960
पूर्व में तूने गलत हरकत की है उससे तू मुकर रहा मैं जानता ही

642
00:47:04,960 --> 00:47:09,280
नहीं हूं मैंने क्या किया है और झूठे आरोप लगा रहा है

643
00:47:09,280 --> 00:47:13,520
तो भैया तेरी फिर इस तरह से ही वहां पर धूल चटा के

644
00:47:13,520 --> 00:47:17,600
तुझे तेरी स्थिति से अवगत तो कराया जाएगा ना जूते से ही मारे जाओगे और

645
00:47:17,600 --> 00:47:21,680
तू जाकर के जो अपनी जो ये तथाकथित जो नैरेटिव सेट कर रहा है ना सो

646
00:47:21,680 --> 00:47:25,920
कॉल्ड इस नैरेटिव को जाकर के लेकर के तहरीर दे थाने

647
00:47:25,920 --> 00:47:30,560
में मेरे साथ ऐसासा हुआ है जिससे कि तेरे झूठ की पोल खुले

648
00:47:30,560 --> 00:47:32,000
हम तो चाहते हैं कि तू पुलिस

649
00:47:32,000 --> 00:47:34,880
में जाए

650
00:47:34,880 --> 00:47:39,040
मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] ताल ठोक रहा हूं यहां पर। मैं ताल ठोक रहा हूं यहां पर कि

651
00:47:39,040 --> 00:47:43,040
तू तुझे मैंने धूल चटाई है। जा कर ले जो कर सकता

652
00:47:43,040 --> 00:47:47,600
है। ताल ठोक के कह रहा हूं।

653
00:47:47,600 --> 00:47:51,680
शिवश नारायण द्विवेदी नाम है। जा

654
00:47:51,680 --> 00:47:55,760
धूल चटाई है तू। क्योंकि तूने आकर के मेरे ही प्रांगण में आकर के

655
00:47:55,760 --> 00:48:00,480
मेरे आचार्य के साथ अभद्रता, मेरे साथ अभद्रता, मेरे गुरु भाइयों के साथ अभद्रता,

656
00:48:00,480 --> 00:48:04,800
मेरे प्रांगण के साथ अभद्रता। कोई कितना सहन

657
00:48:04,800 --> 00:48:08,800
करेगा भाई [गला साफ़ करने की आवाज़] हम जो उदारता आपके अस्तित्व पर हावी हो जाए ना

658
00:48:08,800 --> 00:48:12,800
वो उदारता नहीं कायरता होती है तुम्हारे सहष्णुता का

659
00:48:12,800 --> 00:48:18,800
फायदा उठा रहे थे वहां पर हम खैर

660
00:48:20,080 --> 00:48:24,160
खैर तो इसी [गला साफ़ करने की आवाज़] इसी को इसी को कह रहे थे वो

661
00:48:24,160 --> 00:48:28,320
के वो वाला दिखाओ वो वाला दिखाओ अब देख लिया आपने देख लिया कि किस

662
00:48:28,320 --> 00:48:32,480
तरह से वो नीचे धूल चाट रहा था अब बात ये आती इसने

663
00:48:32,480 --> 00:48:36,720
यह कहा कि मुझ पर जानलेवा हमला हुआ तो आपको यह दिखाई दे रहा है कितना जानलेवा

664
00:48:36,720 --> 00:48:40,720
है। खैर इसके लिए जानलेवा होगा। दूसरी बात ये आती है इसने कहा था पुलिस वालों

665
00:48:40,720 --> 00:48:44,880
ने बीच बचाव किया तो यहां आपको पता चल रहा है किसने किया बीच बचाव। तीसरी

666
00:48:44,880 --> 00:48:49,520
बात यह आती है कि इसने कहा मैंने चार लोगों को निपटा लिया।

667
00:48:49,520 --> 00:48:53,520
जो चार लोग हैं उनमें से एक व्यक्ति ने तेरे साथ जो किया है सो किया

668
00:48:53,520 --> 00:48:57,680
है। बाकी के तीन व्यक्ति तुझे बचा रहे हैं। तुझे जो है तेरे वो

669
00:48:57,680 --> 00:49:01,840
जो धूल चाटने वाली बात है उससे तेरी रक्षा कर रहे हैं। ठीक है?

670
00:49:01,840 --> 00:49:06,000
ये सब चीजें हमारी क्लियर हो गई। अब थोड़ा सा हम और तर्क और प्रमाण की ओर आगे

671
00:49:06,000 --> 00:49:10,080
बढ़ेंगे। थोड़ा थोड़ा सा आप लोग जो अभी उपस्थित है वो कुछ बोलना

672
00:49:10,080 --> 00:49:14,560
चाहे तो बोल सकते हैं। अह नहीं बिल्कुल उसने

673
00:49:14,560 --> 00:49:20,160
एक तो वो जूता चप्पल हां। जी देखिए

674
00:49:20,160 --> 00:49:24,080
ये सरस जी हैं इनको

675
00:49:24,080 --> 00:49:28,560
सरस जी इसमें और भी कुछ तथ्य आपको पहले पूर्व की चीजें भी देखनी चाहिए

676
00:49:28,560 --> 00:49:33,730
इसने वहां पर बहुत सी अभद्रताएं की है जिसके बारे में हम अभी बता रहे हैं और

677
00:49:33,730 --> 00:49:35,680
[गला साफ़ करने की आवाज़] कुछ चीजें ऐसी हैं

678
00:49:35,680 --> 00:49:39,920
जो आपको इस वीडियो में अभी आगे पता चलती जाएंगी ठीक है थोड़ा सा धैर्य

679
00:49:39,920 --> 00:49:44,320
रखें बहुत सारी चीजें अभी सामग्री अभी बाकी है अभी पूरी नहीं हो गई सामग्री

680
00:49:44,320 --> 00:49:48,400
ठीक है तो भाई एक काम करिए ना पप पप से लेकर के

681
00:49:48,400 --> 00:49:52,640
और यहां तक एक बार चला दीजिए जिससे अगर कोई व्यक्ति वीडियो को वीडियो को

682
00:49:52,640 --> 00:49:57,680
यहां से लेना चाहेगा ना तो एक साथ ले लेगा चला दीजिए एक बार

683
00:49:57,680 --> 00:50:03,680
हमारा

684
00:50:06,080 --> 00:50:10,240
तुमने इनका बिना बिना परमिशन के तुमने क्यों डाला है तुमने क्या डाला हमने तुमने डाला ना अपने

685
00:50:10,240 --> 00:50:14,320
YouTube पे उधर आवाज नहीं तुमने अपने YouTube पे डाला कि नहीं डाला जी

686
00:50:14,320 --> 00:50:19,040
महाराज

687
00:50:19,040 --> 00:50:25,040
ये नहीं

688
00:50:34,560 --> 00:50:37,680
कर रहे होतजी

689
00:50:37,680 --> 00:50:42,240
करने आए अरे भैया

690
00:50:42,240 --> 00:50:46,800
बदतमीजी करने आए हो तुम जूते से मारे जाओगे समझे

691
00:50:46,800 --> 00:50:52,800
हो गया प्रश्न पूछने का

692
00:50:52,880 --> 00:50:57,360
ये लैग क्यों कर रहा है आपका लैग कर रहा है मेरा लैग कर रहा है

693
00:50:57,360 --> 00:51:01,360
पिक्चर पॉज हो गई क्या पॉज की है

694
00:51:01,360 --> 00:51:05,600
जी जी वीडियो रुकी हुई है सर हां ठीक है अब अब नॉर्मल

695
00:51:05,600 --> 00:51:09,600
कर दीजिए अब थोड़ा सा आगे बढ़ते हैं हां

696
00:51:09,600 --> 00:51:13,600
अब आप लोग थोड़ा थोड़ा सा यहां तक का एक पार्ट हमने पूरा कर लिया जो उसने दावे

697
00:51:13,600 --> 00:51:17,840
किए हैं तो उस बारे में अभी तक आप लोग कुछ बता दें।

698
00:51:17,840 --> 00:51:21,920
जी हां जी अभी दावे तो इसने ये किए कि चार

699
00:51:21,920 --> 00:51:26,240
लोगों को मैंने पीटा और 1520 लोगों ने लोग वहां पर थे। है ना?

700
00:51:26,240 --> 00:51:30,320
तो भैया [हंसी] वो तो इसका क्लियर हो गया। अब अब मतलब ये

701
00:51:30,320 --> 00:51:34,560
चाहे यहां तक क्या है? प्रोपोगेंडा फेल। और

702
00:51:34,560 --> 00:51:38,640
यह भी दिख रहा है कि भाई कौन नीचे गिरा हुआ है। है ना?

703
00:51:38,640 --> 00:51:42,880
नीचे गिरकर बच्चों की तरह टांगे चला रहा है। नीचे नहीं गिरा। इसको इसको

704
00:51:42,880 --> 00:51:47,040
नीचे गिरना नहीं कहते इसको कहते हैं इसको जुतिया गया है

705
00:51:47,040 --> 00:51:51,120
जुतिया गया है वहां पर किसने धूल चाटी है धूल चाटी है

706
00:51:51,120 --> 00:51:55,200
धूल धूल चाटे धूल हां इसको नोट करना इसको

707
00:51:55,200 --> 00:51:59,360
सुबह सुन निर्भय तू सुन रहा है ना मेरी बात इसको नोट करना

708
00:51:59,360 --> 00:52:03,440
अपने जीते जागते सोते जीते सोते जागते मंजन

709
00:52:03,440 --> 00:52:07,840
करते और जो भी तेरी नित्य क्रियाएं वो करते करते इस सीन को याद रखना

710
00:52:07,840 --> 00:52:08,340
धूल

711
00:52:08,320 --> 00:52:12,640
चटाई थी तुझे धूल कर ले जो करना है जो धस

712
00:52:12,640 --> 00:52:16,640
जवा रहा था पाप पाप कर रहा था उसके परिणाम स्वरूप धूल वहां पर

713
00:52:16,640 --> 00:52:20,720
इसको चटाई गई है और बाकी के तीन गुरु भाई इसको बचा

714
00:52:20,720 --> 00:52:25,040
रहे हैं उसके बाद भी अच्छा जूते छोड़ के तो भागा ही भागा पीठ दिखाकर

715
00:52:25,040 --> 00:52:29,280
भी भागा पीठ पीठ दिखाकर भी भागा है ना पीठ दिखाकर

716
00:52:29,280 --> 00:52:33,440
भागा है ये नोट करने वाली बात है धूल चाटी धूल चटाई

717
00:52:33,440 --> 00:52:37,760
से और पीठ दिखाकर भागा है दुम दबाकर अच्छा

718
00:52:37,760 --> 00:52:42,480
इसमें एक चीज और बता दूं आपको [गला साफ़ करने की आवाज़]

719
00:52:42,480 --> 00:52:46,960
कि इस व्यक्ति को अपने जूते की तो चिंता है।

720
00:52:46,960 --> 00:52:51,280
जाते टाइम मेरे जूते रह गए। मेरे जूते रह गए। अपनी

721
00:52:51,280 --> 00:52:55,360
अविवाहित संगनी की चिंता नहीं है इसको मूर्ख को। हम भाई

722
00:52:55,360 --> 00:52:59,680
तेरे हिसाब से हम गुंडे हैं। तेरे हिसाब से तेरे एक व्यक्ति ने आज ही

723
00:52:59,680 --> 00:53:03,760
वहां सोशल मीडिया पे मैंने देखा एक स्टोरी लगाई थी। उसमें हमारी तुलना मलेच्छों से

724
00:53:03,760 --> 00:53:08,960
की थी। तो तू अपने साथ लाई हुई स्त्री को छोड़ के चला गया।

725
00:53:08,960 --> 00:53:13,360
ऐसे नीच होते हैं आर्य यह आर्य है कि अनार्य

726
00:53:13,360 --> 00:53:17,440
है अरे भाई वह तेरी बहन थी कि नहीं थी वो तेरी मां

727
00:53:17,440 --> 00:53:21,600
मां तो नहीं थी बेटी भी नहीं थी बहन उसने बोला नहीं आगे बात करेंगे आपने

728
00:53:21,600 --> 00:53:23,360
पूछा भी था आपने पूछा था वो जो भी

729
00:53:23,360 --> 00:53:27,360
हां वो जो भी थी अविवाहित संघनी मान लिया जाए संज्ञा उचित है अविवाहित थी

730
00:53:27,360 --> 00:53:31,520
संघनी थी थी भाई उसको तू छोड़ के चला गया तुझे जूतों

731
00:53:31,520 --> 00:53:36,080
की फिक्र है तू वीडियो में जूते बता रहा है अपने हां

732
00:53:36,080 --> 00:53:40,320
गुंडों के बीच 25 से 25 26 गुंडों के बीच

733
00:53:40,320 --> 00:53:44,400
हां आएंगे इस पॉइंट पे अभी है ना वो कहते

734
00:53:44,400 --> 00:53:49,190
हैं ना झूठे की ह तक और चोर के घर तक जी बोलिए

735
00:53:49,190 --> 00:53:53,200
[गला साफ़ करने की आवाज़] अभी ये अविवाहित अविवाहित संगनी वाला

736
00:53:53,200 --> 00:53:57,520
छोड़ के बाकी सब पे बात करें जी जी जी [गला साफ़ करने की आवाज़] इसका

737
00:53:57,520 --> 00:54:01,600
जो प्रोपगेंडा था यहां तक जो आप दिखाए हैं उतना तक में पता चला यही बात कि

738
00:54:01,600 --> 00:54:05,600
इसके जो प्रोपगेंडा ये जो फैला रहा है पहली बात तो इसने शंकराचार्य

739
00:54:05,600 --> 00:54:10,000
को निरत्तर किया वो भी गलत। ठीक है? इसने जो इसने

740
00:54:10,000 --> 00:54:14,000
जो ताल ठोकी थी कि आपको चैलेंज दिया था कि

741
00:54:14,000 --> 00:54:18,160
आओ चैलेंज में सिद्ध करो अवतारवाद इत्यादि जो भी है। जब आप

742
00:54:18,160 --> 00:54:22,240
सामने में गए तो बेचारे ने जब आपको देखा

743
00:54:22,240 --> 00:54:26,720
तो बेचारे की जमीन पैरों तले जमीन खिसक गई। ठीक है? फिर

744
00:54:26,720 --> 00:54:30,720
जब आपने उससे बोला कि चलो डिस्कशन कर लेते हैं। तो वहां पे शायद

745
00:54:30,720 --> 00:54:34,800
ये सोचा होगा कि भाई इतने भीड़ है तो यहां पे कहां पे बैठेंगे?

746
00:54:34,800 --> 00:54:38,880
कहां पे चर्चा होगी? इसलिए बोल देते हैं कि

747
00:54:38,880 --> 00:54:43,040
कर लेते हैं। ठीक है? और कैमरा भी था तो वो देखा

748
00:54:43,040 --> 00:54:47,200
था तो बोला कि ठीक है चलिए कर लेते हैं चर्चा। जैसे ही कैमरे से थोड़ा दूर

749
00:54:47,200 --> 00:54:51,200
हुआ फिर बोलता है परंपरा का परंपरा नहीं अपने आचार्यों का

750
00:54:51,200 --> 00:54:55,840
बहाना बना करके अपमान का वहां से पीछे हट गया। ठीक है?

751
00:54:55,840 --> 00:54:59,840
और बिल्कुल फिर वहां से और फिर जब वहां तक तो फिर आप

752
00:54:59,840 --> 00:55:03,840
तो आराम आराम से ही बात कर रहे हैं। जो वीडियो देखा गया है उसमें आप आराम आराम

753
00:55:03,840 --> 00:55:07,840
से ही बात कर रहे हैं। लेकिन जब उससे यह बोला गया कि तुमने इनका वीडियो क्यों

754
00:55:07,840 --> 00:55:12,560
डाला या फिर इस तरह से तो तुरंत उसके

755
00:55:12,560 --> 00:55:16,800
सूर्य यहां से चेंज हुए जब इसने भागने के लिए आक्षेप लगाया ना

756
00:55:16,800 --> 00:55:20,800
और मैंने आक्षेप का प्रतिकार किया कि भाई तुमने किया है जो किया

757
00:55:20,800 --> 00:55:24,960
है हमने कब किया है और मैंने इसके

758
00:55:24,960 --> 00:55:29,200
आचार्यों का अपमान नहीं किया। ये बात इसने कॉल रिकॉर्डिंग में बोली हुई है मुझसे।

759
00:55:29,200 --> 00:55:33,360
मैं सुना दूंगा किसी कि हां आपने कभी आचार्यों का अपमान

760
00:55:33,360 --> 00:55:37,360
जी बोलिए। जी तो मैं तो यही बात है कि वहां पे उसके

761
00:55:37,360 --> 00:55:41,520
सुर बदल गए। जब वो देखा कि भाई सब तरफ से निराश हो चुका

762
00:55:41,520 --> 00:55:45,760
है तो अब थोड़ा अपना रब जमा ले तो चिल्लाने

763
00:55:45,760 --> 00:55:49,760
लगा और वैसे तो आपको देख लिया तो वो उसको भय आ गया होगा

764
00:55:49,760 --> 00:55:53,920
मन में कि भाई फिर चर्चा होगी तो फिर निरत्तर हो जाएंगे। इस भय से बेचारे को

765
00:55:53,920 --> 00:55:58,080
वो शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस होता है ना वो हो गया शायद जिसके

766
00:55:58,080 --> 00:56:02,160
कारण वो बोल रहा है कि [नाक से की जाने वाली आवाज़] जिसके कारण वो

767
00:56:02,160 --> 00:56:06,240
बोल रहा है कि क्या डाला क्या डाला जबकि उसे पता है

768
00:56:06,240 --> 00:56:10,480
फिर भी वो ऐसा बोल रहा है इसका मतलब या तो शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस हो गया

769
00:56:10,480 --> 00:56:14,640
ठीक है अब जो भी हो फिर वहां से हेलो

770
00:56:14,640 --> 00:56:18,720
जब वो निकला जब वहां से वो निकला भैया मैं एक चीज बताना

771
00:56:18,720 --> 00:56:22,720
चाहता हूं मैं हो गया हो गया पूरा हो गया एक मिनट

772
00:56:22,720 --> 00:56:26,720
एक मिनट हां पूरा हो रहा है। आज ही मैंने सनातन शंकर भैया के

773
00:56:26,720 --> 00:56:31,200
लाइव में बैठकर के ये बात बोला है कि यदि लड़ाई

774
00:56:31,200 --> 00:56:35,200
हुआ भी होगा तो वहां पे स्टार्ट निर्भय ने ही किया होगा

775
00:56:35,200 --> 00:56:39,440
क्योंकि उसके तेवर दिख रहे थे उस उस वीडियो में जब तक जो

776
00:56:39,440 --> 00:56:43,680
भी दिखे उसमें मैंने ये बात बोला है और अभी जब हमने वीडियो प्ले

777
00:56:43,680 --> 00:56:48,160
किया तो उसमें भी यही दिख रहा है कि उसी ने पाप पाप किया।

778
00:56:48,160 --> 00:56:52,240
ठीक है? उसी ने हाथ पहले उनका हाथ मरोड़ा ऐसा दिखा है उसमें

779
00:56:52,240 --> 00:56:56,240
वीडियो में। ठीक? तो यहां पे सिद्ध होता है

780
00:56:56,240 --> 00:57:00,720
कि भाई उसी ने पहले अटैक भी किया। ठीक है?

781
00:57:00,720 --> 00:57:04,800
और धूल चाटी और पीठ दिखाकर भाग हां

782
00:57:04,800 --> 00:57:08,960
इस इस चीज को लोग बाग जरा ध्यान रखें। निर्भय

783
00:57:08,960 --> 00:57:13,280
ने धूल चटाई धूल चाटी है वहां पर। निर्भय को धूल चटाई

784
00:57:13,280 --> 00:57:17,280
गई है शिवश के द्वारा। इसको सब लोग ध्यान कर नोट कर लो अपने

785
00:57:17,280 --> 00:57:21,520
जीते अपने जन्म का एक लक्ष्य बना लो। शिवश नारायण द्विवेदी

786
00:57:21,520 --> 00:57:25,600
ने निर्भय को धूल चटाई थी। तो जो जो निर्भय के पक्ष में खड़े हो वो इस पर

787
00:57:25,600 --> 00:57:30,880
सोचे हम क्या-क्या करें। है ना? ठीक है। हां जी।

788
00:57:30,880 --> 00:57:35,040
फिर जब वो धूल धूल चाट लिया तब भी

789
00:57:35,040 --> 00:57:39,200
उसको जो लोग बचा रहे हैं तीन जन आपके गुरु भाई वो सब उनको बचा

790
00:57:39,200 --> 00:57:43,360
रहे हैं। और जिसको इसने आरोप लगाया कि चार जन आए थे मैंने उसको पीट दिया।

791
00:57:43,360 --> 00:57:47,440
जब उनसे संभला नहीं तो 1520 को ले आए भड़का करके और फिर

792
00:57:47,440 --> 00:57:51,440
इसको मारा गया। पूरा प्रोपगेंडा फेल सभी देख सकते

793
00:57:51,440 --> 00:57:55,520
हैं। सभी दर्शक देख सकते हैं। अभी तक जो भी वीडियो आया है सामने इसमें यही

794
00:57:55,520 --> 00:57:59,760
दिख रहा है कि उसे तीन जन जो थे गुरु भाई वो

795
00:57:59,760 --> 00:58:03,920
बचा रहे थे। ठीक है? इन दोनों को आपस से दूर

796
00:58:03,920 --> 00:58:08,080
कर रहे थे कि भाई भिड़े नहीं। ठीक है? तो उसका प्रोपगेंडा साफसाफ

797
00:58:08,080 --> 00:58:12,080
दिख रहा है। हमारे पास तो वीडियो प्रमाण है। आप देख सकते हैं।

798
00:58:12,080 --> 00:58:16,720
जी भैया। जी आजाद जी मैं एक छोटी सी

799
00:58:16,720 --> 00:58:21,520
आजाद जी एक छोटी सी इन दे दूं बहुत जरूरी इसकी

800
00:58:21,520 --> 00:58:24,080
किस्मत अच्छी थी जिस समय यहां

801
00:58:24,080 --> 00:58:28,320
वहां पर इसने ये वाक्या किया है ना वहां इंटेलिजेंस वाले खाना खाने चले गए

802
00:58:28,320 --> 00:58:33,120
थे वापस आए हैं और जैसे ही वो इतना ज्यादा

803
00:58:33,120 --> 00:58:37,200
उनको बुरा लगा कि हमारी ड्यूटी है यहां पर क्योंकि गुरुदेव जहां रहते

804
00:58:37,200 --> 00:58:41,280
हैं वहां इंटेलिजेंस वगैरह बहुत सारी वहां सिक्योरिटी रहती है तो उनकी जिनकी

805
00:58:41,280 --> 00:58:45,760
ड्यूटी थी उन पर कोई बात ना जाए। उन्होंने तुरंत इसको कॉल किया। यह है निर्भय।

806
00:58:45,760 --> 00:58:50,160
देखिए बोल रहे हैं कि भाई मैं भगत बोल रहा हूं। क्या हुआ कि हम तो

807
00:58:50,160 --> 00:58:54,240
रहने वाले कहा कि हम दिल्ली जा रहे हैं। हमस्ते रास्ते में दिल्ली है।

808
00:58:54,240 --> 00:58:58,400
ये है वो है। उसने इनको इसको उन्होंने बताया कि

809
00:58:58,400 --> 00:59:02,720
भाई मैं जो हूं मैं यहां का अनुयाय हूं। उन्होंने पहले ये नहीं बताया।

810
00:59:02,720 --> 00:59:07,760
फिर ये कहा कि आ जाओ चौकी आकर के बात कर लो। वो बंदा भागता ही जाएगा।

811
00:59:07,760 --> 00:59:12,080
के कब तक के जब तक कदम ना रुके। चलो सजना जहां

812
00:59:12,080 --> 00:59:17,040
तक हवा चले। ठीक है। एक और

813
00:59:17,040 --> 00:59:21,200
अगर ये अगर ये वहां पर थोड़ी बहुत देर और रुक जाते ना इनको जाने

814
00:59:21,200 --> 00:59:25,360
ना दिया जाता जो भेज दिए गए हैं। इस समय जेल की

815
00:59:25,360 --> 00:59:30,080
इस समय इन पर कानूनी कारवाई हो रही होगी। जी शास्त्र

816
00:59:30,080 --> 00:59:34,080
भैया ये चीज मैं बोल रहा था कि इसने ये भी दावा किया था कि

817
00:59:34,080 --> 00:59:38,160
जो लोग थे आपके गुरु भाई वो सब इनका पीछा कर रहे थे जिसके कारण ये

818
00:59:38,160 --> 00:59:39,120
किसी गली में छुप

819
00:59:39,120 --> 00:59:43,200
के फिर अपना बयान रिकॉर्ड किया है ऐसा उसने बोला अपने वीडियो में ठीक है भाई वीडियो

820
00:59:43,200 --> 00:59:48,160
में साफसाफ दिख रहा है तुम अकेले गए हो कोई तुम्हारा पीछा नहीं कर रहा है ठीक है

821
00:59:48,160 --> 00:59:52,240
तुम्हारा तुम्हारा पीछा नहीं पीछा कोई पीछा नहीं

822
00:59:52,240 --> 00:59:56,240
कर रहा है वही मैं कह रहा हूं उसका प्रोपेगेंडा यहां पे भी अगर अगर कोई गया था

823
00:59:56,240 --> 01:00:00,400
तो मैं ही गया था एक बार मैं गया था थोड़ी और देर बाद मतलब दो

824
01:00:00,400 --> 01:00:04,640
चार पांच मिनट के बाद मैं बाहर गया था क्योंकि तब प्रफुल जी महाराज जी आए थे कि

825
01:00:04,640 --> 01:00:08,640
वो जो है लड़का आया था ना जिसने रिकॉर्डिंग डाली है तो वो जो प्रश्न

826
01:00:08,640 --> 01:00:12,640
उत्तर करना चाहता है तो उसमें प्रश्न उत्तर कर लेते हैं बैठकर के तो ऐसा कुछ

827
01:00:12,640 --> 01:00:16,880
वहां पर सिनेरियो बन रहा था तो मैं एक बार से फिर से बाहर गया था

828
01:00:16,880 --> 01:00:20,960
मगर उसका वो वहां जाने का बाहर जाने का मतलब ये नहीं था कि मैं उसको पकड़

829
01:00:20,960 --> 01:00:25,200
के लाके मारूं वही वाली बात थी कि भाई बैठ जाए बात हो जाए खैर वो तो सब

830
01:00:25,200 --> 01:00:29,840
वो नगण्य हो ही चुका हालांकि प्रफुल जी महाराज आए थे तो एक बार को लगा था कि देख

831
01:00:29,840 --> 01:00:33,760
जी [गला साफ़ करने की आवाज़] आजाद वाद जी

832
01:00:33,760 --> 01:00:37,840
अच्छा भैया मैं ये कह रहा था कि आप निर्भय का पर्दाफाश कर

833
01:00:37,840 --> 01:00:41,840
रहे हो तो उसके जो कुछ शिष्य हैं उनकी बहुत आग लगी हुई है वो कमेंट में

834
01:00:41,840 --> 01:00:46,000
गाली बाजी कर रहे हैं। तो मैं यह बताना चाहता हूं जिसको भी भाई लाइव पर आना

835
01:00:46,000 --> 01:00:50,000
है वो लाइव पर आ जाए चेहरा दिखाकर ठीक है आपका जो ऋषि

836
01:00:50,000 --> 01:00:54,160
मत नाम से जो व्यक्ति है नीचे कमेंट में बहुत तब से गाली दिए जा रहा है तो

837
01:00:54,160 --> 01:00:58,160
गोपाल खेड़े भाई तुम्हारी पहचान छिपी हुई नहीं है जो तुम फेक आईडी बनाकर

838
01:00:58,160 --> 01:01:02,240
गाली दे रहे हो ऊपर आइए चेहरा दिखाइए और चेहरा दिखाकर बात

839
01:01:02,240 --> 01:01:06,480
करिए हमसे इसी विषय पे मैं यही कह रहा हूं इस तरह से

840
01:01:06,480 --> 01:01:10,800
ऐसे ललकारा नहीं जाता मैं बताता हूं ललकारा कैसे जाता है

841
01:01:10,800 --> 01:01:15,120
जली है ना बहुत बुरी बुरी लगी है ना दिल जला है ना तुम्हारा

842
01:01:15,120 --> 01:01:19,280
जाओ जाके कुछ करो धूल चाटी तुम्हारे भाई ने करते क्यों

843
01:01:19,280 --> 01:01:23,600
नहीं कुछ बस यही ये गालीबाजी करोगे क्या ऐसे

844
01:01:23,600 --> 01:01:28,000
करोगे रक्षा अपने घर की स्त्रियों की कमेंट में जाके गाली देके

845
01:01:28,000 --> 01:01:31,040
जाओ कुछ करो

846
01:01:31,040 --> 01:01:34,240
हम बिल्कुल

847
01:01:34,240 --> 01:01:38,320
कुछ करो भाई उसको चोट लगी जानलेवा हमला हुआ उसके ऊपर

848
01:01:38,320 --> 01:01:42,320
और हमारे अकॉर्डिंग धूल चाटी है उसने नीचे

849
01:01:42,320 --> 01:01:46,480
धूल चाटना समझते हो ना घातक का वो सीन देख लेना वो तस्वीर तीन

850
01:01:46,480 --> 01:01:48,880
चार बार वो ऐसे उसका सनी्नी

851
01:01:48,880 --> 01:01:52,960
देओल वो धूल ही चटाता है ठीक है तो [नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]

852
01:01:52,960 --> 01:01:58,960
घुटना उसके यहां रख के बाजू पकड़ के तुम्हारे आदमी को

853
01:01:58,960 --> 01:02:03,120
सुनो तुम्हारे व्यक्ति को सामने से बोला गया जूते

854
01:02:03,120 --> 01:02:07,200
से मारे जाओगे जूते से जूते से जो जो जूता तुम छोड़ के जा

855
01:02:07,200 --> 01:02:11,280
रहे हो वही उसी के लिए बोला गया है जूते से मारे जाओगे तुम्हारे व्यक्ति

856
01:02:11,280 --> 01:02:15,280
क्या कर लिया तुम लोगों ने जाओ कुछ करो ना भाई जूते से मारे जाओगे

857
01:02:15,280 --> 01:02:19,840
कहा गया है तुम्हारे व्यक्ति के लिए क्यों ना कहा जाए

858
01:02:19,840 --> 01:02:23,840
क्यों ना कहा जाए जब वो हमारे यहां आकर के अनुशासन को ब्रेक करेगा शिष्ट

859
01:02:23,840 --> 01:02:28,000
व्यवहार करेगा आरोप प्रत्यारोप करेगा हमारी परंपरा को नष्ट

860
01:02:28,000 --> 01:02:33,360
करने की बात कर रहा है फिर भी हमारे यहां बैठा हुआ है और हम सष्ण हो रहे हैं

861
01:02:33,360 --> 01:02:37,920
तुम कह रहे हो मैं नाश कर दूंगा नाश कर दूंगा नाश

862
01:02:37,920 --> 01:02:40,560
कर दूंगा

863
01:02:40,560 --> 01:02:44,880
तो [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] क्या कहते हैं वो जो

864
01:02:44,880 --> 01:02:49,120
मारा गया उसको देखो आप जाकर के और जी अजातवाद

865
01:02:49,120 --> 01:02:52,640
जी

866
01:02:52,640 --> 01:02:57,280
उसी का नाश हो चुका है धूल चटा दी है उसे

867
01:02:57,280 --> 01:03:01,520
यही बोल रहे हां उसका नीचे जो नीचे से वो उठने

868
01:03:01,520 --> 01:03:05,600
वाला दृश्य है वो केवल उसमें एक बात निमित्त है कि मुझे

869
01:03:05,600 --> 01:03:09,680
उसकी औकात याद दिलानी थी कि तुम ये हो शास्त्रार्थ में

870
01:03:09,680 --> 01:03:13,840
तो तुम आप लोगों ने देखा ही कॉल रिकॉर्डिंग में सब वो हो गया। चीजें

871
01:03:13,840 --> 01:03:18,080
बिल्कुल क्लियर हो गई। पढ़ के आता हूं। ईश्वर मदद करता है जीव की

872
01:03:18,080 --> 01:03:22,320
तब कोई क्रिया होती है। है ना? ईश्वर जीव इच्छा करता है। ईश्वर

873
01:03:22,320 --> 01:03:26,480
मदद करता है। और अभी अभी जो है इनका एक और सीन यहां पर दिख

874
01:03:26,480 --> 01:03:30,720
जाएगा कि क्या है इनका शास्त्रार्थ का। खैर अब थोड़ा सा हम आगे बढ़ाते हैं।

875
01:03:30,720 --> 01:03:34,880
भैया भैया भैया एक और बात बोलना था। आपने बोला ना जैसे कि इसने

876
01:03:34,880 --> 01:03:38,880
बोला था कि मैं शंकर परंपरा का नाश कर दूंगा। ठीक है? तो वैसे ही

877
01:03:38,880 --> 01:03:42,960
कुछ जैसे अभी अपने जो ये वीडियो अपलोड किया है उसमें

878
01:03:42,960 --> 01:03:46,960
निर्भय ने ये भी बात बोला है कि अभी तो एक एक के यहां गए अभी बाकी तीन

879
01:03:46,960 --> 01:03:51,040
के यहां भी जाना बाकी है। ठीक है मतलब ये सीधा इशारा

880
01:03:51,040 --> 01:03:55,600
शंकराचार्य जी के और बाकी मठों पे बोल वहां जाना बाकी है।

881
01:03:55,600 --> 01:03:59,760
अच्छी बात है। सब जगह जाओ सब जगह जुतिया जो कुछ घटिया

882
01:03:59,760 --> 01:04:04,240
किस्म के लोग होते हैं। सुनो कुछ घटिया किस्म के लोग होते हैं।

883
01:04:04,240 --> 01:04:08,080
वह ऐसे होते हैं जैसे पॉकेट-वॉकेट मार होते हैं ना घटियाई

884
01:04:08,080 --> 01:04:12,080
टाइप के लोग उनका क्या हिसाब किताब होता है? थोड़ा बहुत चलते फिरते अगर किसी

885
01:04:12,080 --> 01:04:16,240
ने दो झापड़ मार दिए तो झटकार देते हैं। ऐसे धूल साफ कर देते हैं। समझ रहे हो?

886
01:04:16,240 --> 01:04:21,360
तो ये लथखोर वाले लोग हैं। इनको चलते फिरते ऐसा अगर दिल नहीं भरा उसका।

887
01:04:21,360 --> 01:04:25,600
हां। नहीं ये लतखोर होते हैं। घटिया टाइप के लोग जो चलते

888
01:04:25,600 --> 01:04:30,080
फिरते जो है झाड़ देते हैं। अगर किसी ने दो चंटे मार दिए तो उनके लिए बरसात

889
01:04:30,080 --> 01:04:34,160
के कीचड़ में गिर जाना और किसी के दो थप्पड़ खा लेना एक समान बात

890
01:04:34,160 --> 01:04:38,240
होती है। कोई खुददार व्यक्ति हो आत्मसम्मान वाला स्वाभिमान वाला

891
01:04:38,240 --> 01:04:42,320
उसके लिए तो बड़ी बात है भाई। तेरे मुंह पे तुझको कहा जूते से मारे जाओगे। हां।

892
01:04:42,320 --> 01:04:47,360
तुझको धूल चटाई। तूने क्या कर लिया? क्या एक्शन ले रहा है? वीडियो बना रहा है। सुन

893
01:04:47,360 --> 01:04:51,520
मैं दूसरे के प्रांगण में था। सामने वाले ने अभी

894
01:04:51,520 --> 01:04:56,000
तक एक्सेप्ट नहीं किया है कि गाली दी गई। भागवतानंद की बात कर रहा हूं।

895
01:04:56,000 --> 01:05:00,080
मैंने कहा कि गाली दी गई। उसने नहीं कहा अभी तक कि गाली दी गई। मैंने कहा कि

896
01:05:00,080 --> 01:05:04,480
गाली दी गई। ठीक। मैंने कहा कि गाली दी गई और उसके ही प्रांगण

897
01:05:04,480 --> 01:05:08,640
में खड़े होकर के मैंने उसको ललकार दिया जिसने गाली दी। आजा तुझे चार पांच

898
01:05:08,640 --> 01:05:11,760
बार पटक दूं।

899
01:05:11,760 --> 01:05:15,760
यह ललकार मेरी थी। शत्रु के गढ़ में

900
01:05:15,760 --> 01:05:20,240
खड़े होकर के। मैं गाली नहीं दे सकता। मैं तुझे पटक सकता हूं।

901
01:05:20,240 --> 01:05:23,120
समझ रहा है? और वो जो गाली देने वाला मुंह

902
01:05:23,120 --> 01:05:27,440
था वो इतना सा हो गया था। यह बात सुनकर [गला साफ़ करने की आवाज़] उसके

903
01:05:27,440 --> 01:05:31,520
खड़े होकर के कहा था। और ये बात गाली ना देने वाली बात तो सामने वाले ने

904
01:05:31,520 --> 01:05:35,680
स्वीकार नहीं की है। मगर उसका तुम वीडियो देख लेना। उठा के पटकने वाली

905
01:05:35,680 --> 01:05:39,840
बात उसने स्वीकार की है कि मैंने कहा था। वो ये बात कह रहा है। इसको कहते

906
01:05:39,840 --> 01:05:44,720
हैं मर्द। हम मर्द होता है ये मर्द।

907
01:05:44,720 --> 01:05:48,880
ठीक है? गाली दी तो वही उसकी आंखों में आंखें डाल

908
01:05:48,880 --> 01:05:52,960
के कहा था उसका वो जो सेवक है गुटखा खाया करता है तंबाकू का सेवन

909
01:05:52,960 --> 01:05:56,960
करता है उसको कहा था तुझे मैं उठा के पटकता हूं तू आजा बाहर गाली नहीं

910
01:05:56,960 --> 01:06:00,960
दे पाऊंगा क्योंकि तेरी मां मेरी मां भी है तो गाली नहीं

911
01:06:00,960 --> 01:06:04,960
दे पाऊंगा ठीक है मगर तुझे उठा के पटक दूंगा जो

912
01:06:04,960 --> 01:06:09,120
माता-पिता ने जो संस्कार नहीं दे पाए वो मैं दे दूंगा तुझे हम

913
01:06:09,120 --> 01:06:13,200
उसके यहां पे खड़े होके मर्द होता है भाई कैसे घटियाई टाइप के इंसान

914
01:06:13,200 --> 01:06:17,200
हो शर्ट झाड़ करके चले जा रहे हो गली कल ही जाकर के वो जो है अपना वीडियो बना

915
01:06:17,200 --> 01:06:23,200
रहे हो। [हंसी] मुझे माला मुझे माला

916
01:06:24,640 --> 01:06:29,120
ये तो अपनी स्त्री को छोड़ के भी भाग गया था। हां बताओ ये बात

917
01:06:29,120 --> 01:06:33,120
ये बात जूते की चिंता है लेकिन घर की स्त्री की चिंता नहीं है। घर की है या जो भी बाहर

918
01:06:33,120 --> 01:06:37,200
की है। हां ये नहीं कह रहा वहां खड़ा होकर के अरे भैया मेरी

919
01:06:37,200 --> 01:06:41,600
जो साथ में वो अविवाहित संगनी आई है वो वहीं अंदर है। उसको

920
01:06:41,600 --> 01:06:45,920
मुझे लेना है साथ में। जूतों की चिंता हो रही है। जूतों की चिंता

921
01:06:45,920 --> 01:06:50,160
जूते दो जूते दो भागने की चिंता हो रही है भागने की

922
01:06:50,160 --> 01:06:54,880
भागने में भागने में जूतों से स्पीड मिलेगी ना [हंसी]

923
01:06:54,880 --> 01:06:58,880
ये तो लंबेलंबे लंबे लंबे कदम कैसे रखेंगे भागने में

924
01:06:58,880 --> 01:07:02,880
जूतों से स्पीड मिलेगी तो जूते मिल जाए तो जरा और तेज भागेंगे

925
01:07:02,880 --> 01:07:07,040
है [हंसी] ना सही बात खैर चलिए

926
01:07:07,040 --> 01:07:11,200
आगे चलते हैं अब तो अब लॉजिकल पैराडॉक्स की बात आती है कि इसने जो पहला

927
01:07:11,200 --> 01:07:15,440
प्रश्न किया इसने ये बात है ना कि गुरुदेव आंसर नहीं दे पाए। एक्चुअली

928
01:07:15,440 --> 01:07:19,600
हुआ क्या था? इसकी जो प्लानिंग थी वो थी कि वहां जाकर के एक दृश्य क्रिएट कर लूं

929
01:07:19,600 --> 01:07:23,680
मैं शंकराचार्य जी के साथ और वो दृश्य क्रिएट करके और जो है

930
01:07:23,680 --> 01:07:27,760
मैं ये कर लूं कि जैसे अन्यों को नैरेटिव दे देता है वैसे ही शंकराचार्य भी

931
01:07:27,760 --> 01:07:31,760
हमारे सवाल का उत्तर नहीं दे पाए। अब यहां पे ट्विस्ट आ जाता

932
01:07:31,760 --> 01:07:35,840
है वो काल भैरव जी का विधान था कि

933
01:07:35,840 --> 01:07:39,760
21 तारीख को ये गया तो इसको मौका नहीं मिला। 23 तारीख को जब इसे

934
01:07:39,760 --> 01:07:44,800
मौका मिलना था तो वहां पर खड़े थे शिवश नारायण द्विवेदी

935
01:07:44,800 --> 01:07:49,520
बस वहां से इसका जो है पिक्चर पूरी घूम गई अब इतना बौखलाया

936
01:07:49,520 --> 01:07:53,760
हुआ है कि इसको सवाल क्या करना था वहां

937
01:07:53,760 --> 01:07:57,920
पर हालांकि गुरुदेव का ओरा ही ऐसा है अच्छे अच्छे जाकर के थोड़े ढीले

938
01:07:57,920 --> 01:08:02,080
हो जाते हैं तो इसको प्रश्न क्या करना है इसको मालूम ही नहीं था

939
01:08:02,080 --> 01:08:06,160
सही मायने में देखा जाए तो एक व्यक्ति को यदि एक प्रश्न का अवसर दिया गया

940
01:08:06,160 --> 01:08:10,320
है तो इसका पहला प्रश्न यह था कि क्या इस तरह के जो

941
01:08:10,320 --> 01:08:14,480
कार्य हैं यह क्या कहते हैं क्या वैश्या को कुमारी बना सकता है वंद्या पुत्र

942
01:08:14,480 --> 01:08:18,560
को जन्म दे सकता है ना इस तरह के कार्य है क्या ये ईश्वर

943
01:08:18,560 --> 01:08:22,560
नहीं कर सकता है या नहीं कर सकता और फिर वो आगे की बात थी

944
01:08:22,560 --> 01:08:26,560
गुरुदेव ने कहा उसमें ये क्रिया शून्य है यही भाव उन्होंने प्रकट किया इसका मतलब

945
01:08:26,560 --> 01:08:30,720
क्रिया शून्य है पहले क्रिया दोगे तब तो करे तो यह भावना उन्होंने

946
01:08:30,720 --> 01:08:34,720
प्रकट कर दी इसके बाद इसका अगला क्वेश्चन ये आना चाहिए था कि अगर

947
01:08:34,720 --> 01:08:38,800
नहीं कर सकता है स्वरूप के विरुद्ध कार्य जो है वह ईश्वर भी

948
01:08:38,800 --> 01:08:44,720
नहीं कर सकता है। तो फिर यह लोग यह क्यों कहते हैं कि जो है वो

949
01:08:44,720 --> 01:08:48,880
अवतार नहीं ले सकता तो सर्वशक्तिमान नहीं है। ये लोग ये क्यों कहते

950
01:08:48,880 --> 01:08:53,120
हैं? या फिर ये पूछ लेता तो फिर अवतार लेना स्वरूप के विरुद्ध

951
01:08:53,120 --> 01:08:54,880
कार्य है कि नहीं? तो हम तुम्हें बताते या

952
01:08:54,880 --> 01:08:59,200
गुरुदेव तुम्हें बताते। अवतार लेना स्वरूप के विरुद्ध कार्य है। ये कहां लिखा हुआ है?

953
01:08:59,200 --> 01:09:03,280
ये सिद्ध कहां होता है? अवतार लेना भी उसकी

954
01:09:03,280 --> 01:09:07,680
शक्ति का परिणाम है। लक्षण है। जैसे सृष्टि

955
01:09:07,680 --> 01:09:11,760
बनाना उसका लक्षण है। ठीक है?

956
01:09:11,760 --> 01:09:16,160
तो अवतार लेना भी उसका लक्षण है। और अगर तुम कहो

957
01:09:16,160 --> 01:09:20,560
दयानंद जी लिखते हैं अपनी सत्यार्थ प्रकाश में

958
01:09:20,560 --> 01:09:25,280
कि न्याय करना है पूरे

959
01:09:25,280 --> 01:09:29,600
संसार में तो उसको सर्वव्यापी होना पड़ेगा। यानी कि न्याय

960
01:09:29,600 --> 01:09:33,600
नामक क्रिया करनी है अगर ईश्वर को तो उसका सर्वव्यापक

961
01:09:33,600 --> 01:09:37,600
होना जरूरी है। यानी कि सर्वव्यापी पूरे संसार में यदि

962
01:09:37,600 --> 01:09:42,400
क्रिया करनी है तो पूरे संसार में उसका होना जरूरी है। सर्वव्यापक

963
01:09:42,400 --> 01:09:46,400
रूप से जब क्रिया को देखा जा रहा है न्याय के रूप में एट ए ग्लांस तो

964
01:09:46,400 --> 01:09:50,800
वो ये मान रहे हैं कि जब सर्वव्यापक रूप से क्रिया को मान रहे हैं तो सर्वव्यापक

965
01:09:50,800 --> 01:09:55,040
रूप से उसका होना मान रहे हैं। तो फिर एक देश जब क्रिया होगी

966
01:09:55,040 --> 01:09:59,040
तो ईश्वर का एक देश होना पड़ेगा ना वहां पर कैसे

967
01:09:59,040 --> 01:10:03,200
करोगे वो जवाब तुम देते नहीं हो अगर तुम अवतार को स्वरूप

968
01:10:03,200 --> 01:10:07,280
विरुद्ध सिद्ध करने चलोगे तो हम सृष्टि की रचना करने से सिद्ध करेंगे कि ये भी

969
01:10:07,280 --> 01:10:10,240
स्वरूप विरुद्ध मानो वास्तविकता तो

970
01:10:10,240 --> 01:10:14,240
यही है कि जैसे अद्वैत के अनुसार मान लोगे

971
01:10:14,240 --> 01:10:18,320
सब सारी चीजें सिद्ध हो जाएंगी। जैसे संसार प्रतीति मात्र है तो उसके

972
01:10:18,320 --> 01:10:23,120
अंदर होने वाली सारी चीजें प्रतीति मात्र हैं। तो स्वरूप विरुद्ध हुआ कहां ईश्वर

973
01:10:23,120 --> 01:10:27,120
भाई? जहां संसार प्रतीति है, माता-पिता प्रतीति है तो

974
01:10:27,120 --> 01:10:31,280
वहां तो सब कुछ ही प्रतीति है। सब कुछ प्रतीति है। तो वास्तविकता में

975
01:10:31,280 --> 01:10:35,280
ईश्वर ने ईश्वर स्वरूप विरुद्ध अगर एकदेशीय होने से तुम मान रहे स्वरूप

976
01:10:35,280 --> 01:10:39,360
विरुद्ध हो जाए तो ईश्वर तो एकदेशीय हुआ ही नहीं ना। वो भी

977
01:10:39,360 --> 01:10:43,600
जिस चीज के आधार पर तुम उसके एकदेशीय होने का आरोप लगा रहे हो वो भी

978
01:10:43,600 --> 01:10:47,600
प्रतीति मात्र है। लो

979
01:10:47,600 --> 01:10:51,680
तो कहा हुआ उसने बदलाव और बाकी तुम अपने वो एक

980
01:10:51,680 --> 01:10:55,760
देश क्रिया का बता दो कैसे करता है ईश्वर अब तुम वहां ईश्वर ये

981
01:10:55,760 --> 01:10:59,840
लोग डायलॉग मारा करते हैं इनका ईश्वर तो जादूगर है और खुद यहां जादू कर रहे हैं ना उसकी

982
01:10:59,840 --> 01:11:04,080
शक्ति है जड़ पदार्थ हां उसकी शक्ति व्यक्ति है ही नहीं दुनिया में शक्ति का अस्तित्व

983
01:11:04,080 --> 01:11:08,240
है ही नहीं इन्होंने मान लिया दुनिया में शक्ति का अस्तित्व नहीं जब ईश्वर के पास शक्ति नहीं केवल

984
01:11:08,240 --> 01:11:12,240
इच्छा है इच्छा है हां शक्ति है ही नहीं

985
01:11:12,240 --> 01:11:16,240
संकल्प मात्र है बस संकल्प मात्र हां बस इच्छा की हो गया उसमें

986
01:11:16,240 --> 01:11:20,480
शक्ति नहीं है कि कोई किसी को जाके उसने सरकाया शक्ति ने ऐसा कुछ नहीं है।

987
01:11:20,480 --> 01:11:24,640
ठीक है? तो वहां ये मौन हो जाते हैं। तो जब तुम अपनी चीजों को अचिंत रूप से मान

988
01:11:24,640 --> 01:11:25,360
लेते हो तो हमारी

989
01:11:25,360 --> 01:11:29,360
को मानो और अगर तर्क से तर्क कर रहे हो तो यहां पे भी तर्क दो। यही तो मैंने पूछा था

990
01:11:29,360 --> 01:11:33,440
उनसे आचार्य से और यहां से ये बात आई कि इसको

991
01:11:33,440 --> 01:11:37,520
इसके प्रश्न का सबसे पहली बात है कि एक व्यक्ति का एक प्रश्न लिया जाए। तो गुरुदेव

992
01:11:37,520 --> 01:11:41,680
ने तो उत्तर दे दिया था वंद्या पुत्र वाली बात से। उसके बाद आगे बात आगे बढ़ी

993
01:11:41,680 --> 01:11:45,680
तो यह वाली बात इसको पूछनी चाहिए थी कि अवतार अवतार तो स्वरूप विरुद्ध है तो वो

994
01:11:45,680 --> 01:11:49,840
तुम्हें बताते अवतार स्वरूप विरुद्ध नहीं है। वो तुम कर नहीं पाए क्योंकि बहका मैं

995
01:11:49,840 --> 01:11:53,880
बहका मैं शंकराचार्य के यहां आ गया और

996
01:11:53,880 --> 01:11:59,200
[हंसी] शिवश नारायण द्विवेदी से टकरा गया। ठीक है? खैर

997
01:11:59,200 --> 01:12:03,760
बौखला गए थे शॉर्ट टर्म मेमोरी। तो इतनी बात हो गई। अब होते-होते

998
01:12:03,760 --> 01:12:07,120
बात किसी तरीके से

999
01:12:07,120 --> 01:12:11,360
अ होते-होते बात किसी तरीके से

1000
01:12:11,360 --> 01:12:14,800
आ गई

1001
01:12:14,800 --> 01:12:18,880
कहां पे आ गई मुक्ति मुक्ति पर आ गई

1002
01:12:18,880 --> 01:12:23,200
कि भाई मुक्ति हां हां गुरुदेव ने कहा कि भाई अगर गुरुदेव

1003
01:12:23,200 --> 01:12:27,200
ने कहा कि अगर अवतार पर ही आपको आपत्ति है तो अवतार

1004
01:12:27,200 --> 01:12:31,360
तो आपके यहां हो रहा है भाई यदि वह मुक्त

1005
01:12:31,360 --> 01:12:35,600
है और मुक्त का अवतार नहीं होता है। मुक्त कौन है? ईश्वर

1006
01:12:35,600 --> 01:12:39,760
और जीव मुक्त हो गया। ठीक है? तो जीव जो मुक्त है और मुक्त का अवतार नहीं

1007
01:12:39,760 --> 01:12:43,840
होता है। तो फिर तुम्हारे यहां ये जो जीव है मुक्ति वाले

1008
01:12:43,840 --> 01:12:47,920
आ तो रहे हैं। और अगर तुम कहो नहीं वो मुक्त अगर तुम कहो नहीं उसके कर्म

1009
01:12:47,920 --> 01:12:51,920
तो बाकी थे तो मुक्त नहीं मानो उसको। यानी कि अगर मुक्त मानोगे तो

1010
01:12:51,920 --> 01:12:56,080
वो अवतार है। अगर बद्ध मानोगे तो अवतार नहीं है। तो बता दो कि तुम्हारा

1011
01:12:56,080 --> 01:13:00,160
वो परांत काल मुक्ति है कि नहीं है। वो बद्ध है।

1012
01:13:00,160 --> 01:13:04,560
अगर वो बद्ध है तो जीव की तरह वो अवतार ले रहा है। ठीक है। गुरुदेव

1013
01:13:04,560 --> 01:13:08,640
ने कितना सटीक बोला वहां पे। भैया मुक्ति का अवतार मान रहे हो ना।

1014
01:13:08,640 --> 01:13:12,720
तो आप हम लोग जीव का शरीर धारण करना क्यों मानते हैं? क्योंकि

1015
01:13:12,720 --> 01:13:17,040
वो बद्ध है। बद्ध है। है ना? कर्मों के बंधन में है

1016
01:13:17,040 --> 01:13:21,120
तो तो फिर मुक्त का क्यों मान रहे हो? अगर बंधन

1017
01:13:21,120 --> 01:13:25,280
है तो फिर मुक्त क्यों कह रहे हो? मुक्त क्यों कह रहे हो? परांत काल जी

1018
01:13:25,280 --> 01:13:29,360
आजाद जी और एक बात और इसमें वो दे दूं जरा सा कि भाई

1019
01:13:29,360 --> 01:13:29,920
आप यह

1020
01:13:29,920 --> 01:13:34,080
बता दो कि जब फिल्म देख रहे होते हो एक व्यक्ति

1021
01:13:34,080 --> 01:13:38,160
फिल्म देख रहा होता है। एक नॉर्मल व्यक्ति तो क्या वो बंधन

1022
01:13:38,160 --> 01:13:42,160
में होता है फिल्म के या मुक्त होता है? अगर मुक्त होता है तो क्या वहां से

1023
01:13:42,160 --> 01:13:46,880
वह जो चीजें हैं उनका भोग नहीं कर रहा होता उनका दृष्टा नहीं होता है

1024
01:13:46,880 --> 01:13:50,880
और या फिर दृष्टा होता है तो क्या मुक्त नहीं होता है यही

1025
01:13:50,880 --> 01:13:55,120
बता दो बस इसमें ही सारी आपको चीजें समझ में आ जाएंगी क्या आप फिल्म देखते

1026
01:13:55,120 --> 01:13:59,280
समय क्या आप बंधन में होते हो फिल्म के क्या आप सस्टेंड

1027
01:13:59,280 --> 01:14:03,440
नहीं होते हो यह जानते हुए भी वहां से कनेक्ट होते हुए

1028
01:14:03,440 --> 01:14:07,520
भी वहां के मनोरंजन से जुड़े होते हुए भी क्या आप दृष्टा भाव से

1029
01:14:07,520 --> 01:14:11,680
दृष्टा मात्र भाव से अपनी स्थिति में शेष नहीं होते हो

1030
01:14:11,680 --> 01:14:16,080
या तो बोल दो मैं बद्ध होता हूं हम जी

1031
01:14:16,080 --> 01:14:22,000
आजाद जी

1032
01:14:22,000 --> 01:14:28,000
अच्छा अभी है नहीं आजाद जी तो किसी को यहां तक अगर कुछ कहना हो तो वो

1033
01:14:28,000 --> 01:14:32,240
बोले जी सनातन शंकर जी हम नहीं

1034
01:14:32,240 --> 01:14:36,400
वहां पर गुरुदेव द्वारा जब इनसे पूछा गया कि भाई

1035
01:14:36,400 --> 01:14:40,400
तुम्हें आर्य समाज का सिद्धांत ही नहीं पता है कि आर्य समाज जो है वो मुक्त

1036
01:14:40,400 --> 01:14:44,800
जीव का अवतार मानता है। तब तो इसके द्वारा कोई बात नहीं कही गई कि भाई हां

1037
01:14:44,800 --> 01:14:49,280
आप सही कह रहे हैं कि है ना कह रहे आर्य समाज आर्य समाज जो है वो अवतारवाद

1038
01:14:49,280 --> 01:14:53,520
नहीं मानता है। कहने का है कि इसे यह पता ही नहीं था कि आर्य समाज

1039
01:14:53,520 --> 01:14:57,600
का सिद्धांत क्या है? अब गुरुदेव ने तो इनके पूरे ग्रंथ खंगाले हुए हैं। इसको

1040
01:14:57,600 --> 01:15:01,920
इसको मैं थोड़ा सा क्लियर करूं। बात ऐसी है कि जो बद्ध है अगर वो शरीर

1041
01:15:01,920 --> 01:15:06,000
धारण करता है तो उसको कहते हैं भाई जीव जो है संसार में आ गया बंधन

1042
01:15:06,000 --> 01:15:10,000
में आ गया या संसार में आ गया। प्रपंच रूपी संसार में उसने शरीर धारण किया

1043
01:15:10,000 --> 01:15:14,000
उसने जन्म लिया मगर जो बद्ध नहीं है मुक्त है वो जब

1044
01:15:14,000 --> 01:15:18,080
शरीर धारण करता है तो उसको अवतार कहा जाता है अवतार है तो

1045
01:15:18,080 --> 01:15:22,080
डायरेक्ट ईश्वर को नहीं मान रहे मगर मुक्त का तो अवतार मान रहे हो ना या फिर कह

1046
01:15:22,080 --> 01:15:26,160
दो कि वो भी बद्ध है या फिर कह दो वो भी बद्ध है ये

1047
01:15:26,160 --> 01:15:30,160
ये उनका ये उनका प्रहार था इसके ऊपर हालांकि समय के

1048
01:15:30,160 --> 01:15:34,240
अभाव के कारण और जो है अन्यों को अवसर दिए जाने के कारण और इसका

1049
01:15:34,240 --> 01:15:38,560
एक प्रश्न का तो पूरा आंसर दे चुके थे इसके

1050
01:15:38,560 --> 01:15:43,520
बात गुरुदेव ने कितना सॉलिड चीज बोली थी मुक्त का अवतार

1051
01:15:43,520 --> 01:15:47,600
मुक्त मुक्त ने शरीर धारण किया तो वो अवतार है व ने धारण किया तो वो

1052
01:15:47,600 --> 01:15:51,600
जो है बंधन है जन्म है उसका जन्म है उसका है

1053
01:15:51,600 --> 01:15:56,560
ना तो खैर [गला साफ़ करने की आवाज़] जो भी है

1054
01:15:56,560 --> 01:16:00,560
जी अब आगे आप कुछ कह रहे थे वो बोल लीजिए शास्त्रवाद जी आप भी

1055
01:16:00,560 --> 01:16:04,560
आप भी कुछ बोलना चाहे तो बोल लीजिए जी फिर वहां पर यह भी बात कही गई

1056
01:16:04,560 --> 01:16:08,560
कि भाई किसी ने दयानंद जी से पूछा के सारे लोगों

1057
01:16:08,560 --> 01:16:12,800
को मोक्ष मिल जाएगा। सारी आत्माओं को मतलब जीवात्मा को मोक्ष मिल जाएगा जीव को।

1058
01:16:12,800 --> 01:16:17,040
तो एक दिन क्या होगा कि संसार जो है वो जीवात्मा से खाली हो जाएगा।

1059
01:16:17,040 --> 01:16:21,280
तो उनकी बुद्धि चकरा गई। अब उनकी बुद्धि चकरा गई तो उन्होंने बोला

1060
01:16:21,280 --> 01:16:25,280
युक्ति लगाई। बोला मैं तो जीव का जो है कभी भी

1061
01:16:25,280 --> 01:16:30,000
नित्य मोक्ष मानूंगा ही नहीं। है ना? जब नित्य मोक्ष नहीं मानूंगा

1062
01:16:30,000 --> 01:16:34,720
तो फिर वो मोक्ष के बाद भी जीव को जो है वो जन्म लेना पड़ेगा।

1063
01:16:34,720 --> 01:16:39,120
सबसे बड़ी बात है कि इतने वहां जाकर के प्रश्न क्यों करते हो भाई? सच्चिदानंद

1064
01:16:39,120 --> 01:16:43,360
की प्यास क्यों आ रही है? जब सच्चिदानंद है नहीं तो प्यास

1065
01:16:43,360 --> 01:16:47,680
क्यों है? ईश्वर को उपास्य सिद्ध कर दो ना बिना इस सिद्धांत

1066
01:16:47,680 --> 01:16:51,760
के कि ईश्वर की भक्ति आवश्यक है। ईश्वर का

1067
01:16:51,760 --> 01:16:53,760
ईश्वर को प्राप्तव के रूप में सिद्ध कर दो

1068
01:16:53,760 --> 01:16:57,840
तुम। बिना सिद्धांत के सच्चिदानंद के। सब

1069
01:16:57,840 --> 01:17:02,160
जगह कराओगे। यहां धरातल से चालू नहीं करोगे। अच्छा धरातल से कर

1070
01:17:02,160 --> 01:17:06,240
हां धरातल से आप चालू नहीं करेंगे। अच्छा इसने एक और एक और पूछा था प्रश्न

1071
01:17:06,240 --> 01:17:10,240
एक और पूछा था के बोला कि यदि जीव स्वभाव से मुक्त

1072
01:17:10,240 --> 01:17:14,240
है तो फिर वह बंधन में क्यों आ रहा है हम और

1073
01:17:14,240 --> 01:17:18,240
वहां पर जब गुरुदेव [गला साफ़ करने की आवाज़] जवाब दे रहे थे तो ये बीच में ही बोलने लगा तो

1074
01:17:18,240 --> 01:17:22,240
गुरुदेव ने बोला अरे एक के बाद एक पूछ रहे हो त ठंड रखो जी ऐसा

1075
01:17:22,240 --> 01:17:27,200
कुछ बोला था है ना प्रेम नाल सुनोष्टाच

1076
01:17:27,200 --> 01:17:31,360
प्यार से प्यार से प्यार से बोल लो नाल ऐसे करके

1077
01:17:31,360 --> 01:17:35,440
शायद कुछ था ना अच्छा अच्छा एक बात और मुझे याद आई। यह

1078
01:17:35,440 --> 01:17:39,760
बोलता है कि हम आर्य समाज जी तो आपके लाडले प्यारे हैं। अरे मेरे

1079
01:17:39,760 --> 01:17:43,840
घचू व्यक्ति नीच व्यक्ति ये

1080
01:17:43,840 --> 01:17:48,000
लाडले प्यारे का जो व्यवहार है केवल गुरुदेव को ही करना है क्या कि तूने उन

1081
01:17:48,000 --> 01:17:52,000
पे तो थोप दिया। तुम हम तुम्हारे लाडले प्यारे हैं। हम तुम्हारी अब छाती पे खंजर

1082
01:17:52,000 --> 01:17:56,240
मारेंगे। हम तुम्हारे लाडले प्यारे हैं। हम तुम्हारे लाडले प्यारे हैं। हम खंजर

1083
01:17:56,240 --> 01:18:00,480
मारेंगे। नीच कहीं का नीच आदमी। वो तुम्हारे साथ

1084
01:18:00,480 --> 01:18:05,360
लाडले प्यारे का व्यवहार कर रहे हैं। इसलिए ध्यान दिला रहे हम तो आपके लाडले प्यारे हैं।

1085
01:18:05,360 --> 01:18:08,960
और तुम उनके पीठ में छुरा घोंप रहे हो। तुमने आज्ञा ली?

1086
01:18:08,960 --> 01:18:13,040
लाडले प्यारे वो तुम्हारे साथ व्यवहार करें। मुझे लगता है उन्होंने तो ऐसा कोई गलत व्यवहार

1087
01:18:13,040 --> 01:18:17,280
नहीं कर दिया। तुमने आज्ञा ली। तुमने ये आज्ञा

1088
01:18:17,280 --> 01:18:21,280
ली कि गुरुदेव ये शास्त्रार्थ के नाम से मैं इसको डालूंगा

1089
01:18:21,280 --> 01:18:25,360
जिसमें आप पराजित हुए हो। आज्ञा ली उनसे लाडले प्यारे हो ना तुम उनके? नीच

1090
01:18:25,360 --> 01:18:29,520
कहीं के लथखोर कहीं के। हम

1091
01:18:29,520 --> 01:18:34,720
ठीक है। अब बात आती है अगला प्रश्न। यह आ जाता है

1092
01:18:34,720 --> 01:18:39,200
कि क्या गुरुदेव का इसके निरुत्तर होने तक

1093
01:18:39,200 --> 01:18:43,520
उस शंका समाधान वाले सत्र में प्रश्नोत्तरी वाले सत्र में

1094
01:18:43,520 --> 01:18:48,000
इसके निरुत्तर होने तक इसको जवाब देते रहना था। ठीक है?

1095
01:18:48,000 --> 01:18:53,600
तो यह क्या आवश्यक था? तो [गला साफ़ करने की आवाज़]

1096
01:18:53,600 --> 01:18:59,440
हम यह बात आती है। तो अब इसमें मैं आपको

1097
01:18:59,440 --> 01:19:03,600
पहली बात बताऊंगा। पहली बात यह बताऊंगा आपको।

1098
01:19:03,600 --> 01:19:07,600
इसने खुद माना है कि इसके एक आज देखिए कोई भी छोड़

1099
01:19:07,600 --> 01:19:12,080
के ना जाए। बहुत सारे रोचक तथ्य विद ठोस सामग्री

1100
01:19:12,080 --> 01:19:16,640
है ना सॉलिड प्रूफ आपको मिलने वाले हैं वीडियोस के रूप में। तो आप देखते रहें।

1101
01:19:16,640 --> 01:19:20,880
तो इसने खुद अपने वक्तव्य में माना है

1102
01:19:20,880 --> 01:19:25,680
कि हमारे जो विवेकानंद परिवराजक जी हैं

1103
01:19:25,680 --> 01:19:29,840
वो ऐसे आचार्य हैं जो अपनी बात

1104
01:19:29,840 --> 01:19:33,920
कहते हैं शंका समाधान वाले उससे परंतु यदि कोई

1105
01:19:33,920 --> 01:19:38,320
शंका समाधान के नाम पर शंका समाधान की आड़ में

1106
01:19:38,320 --> 01:19:42,320
शास्त्रार्थ करने की भावना से आएगा विरोधाभास की तो वो बहुत ज्यादा आगे

1107
01:19:42,320 --> 01:19:46,400
तक नहीं जाते और जो है वो अपनी बात कह कह देते

1108
01:19:46,400 --> 01:19:50,480
हैं तुमको मानना है तो मानो नहीं मानना है तो नहीं मानो इस रूप में उसने उनको स्वीकार

1109
01:19:50,480 --> 01:19:54,560
किया है। ठीक है? यानी कि इसके अनुसार वह

1110
01:19:54,560 --> 01:19:58,720
शास्त्रार्थ में हारने वाली प्रवृत्ति के हैं। यदि किसी कारण

1111
01:19:58,720 --> 01:20:02,880
से यहां पर पूरी शंकराचार्य जी का इसको उत्तर ना देना

1112
01:20:02,880 --> 01:20:07,040
आगे अंत तक उनका शास्त्रार्थ में पराजित होना

1113
01:20:07,040 --> 01:20:11,200
सिद्ध करता है तो इसका मतलब इसके जो इसके

1114
01:20:11,200 --> 01:20:14,720
अनुसार इसके जो परिवराजक जी हैं वो शास्त्रार्थ

1115
01:20:14,720 --> 01:20:18,880
में हारने वाली प्रवृत्ति के हैं। हालांकि उसी वीडियो में इसने यह खुद कह

1116
01:20:18,880 --> 01:20:19,680
दिया है

1117
01:20:19,680 --> 01:20:23,840
कि शंका समाधान के नाम पर यदि कोई शास्त्रार्थ

1118
01:20:23,840 --> 01:20:25,440
करने लगता है तो उसे वितंडा

1119
01:20:25,440 --> 01:20:29,840
कहा जाता है। जी भाई साहब हमसे कहते हैं शिवश

1120
01:20:29,840 --> 01:20:34,000
नारायण द्विवेदी झूठे के हद तक और चोर के घर तक तो भैया

1121
01:20:34,000 --> 01:20:40,000
अगली सौगात अब आपको मिलने वाली है। उसके लिए कमर कसे रह

1122
01:20:41,040 --> 01:20:47,040
यह चौथे नंबर का वीडियो चलाइए। शंका समाधान वितंडा

1123
01:20:47,060 --> 01:20:53,060
[नाक से की जाने वाली आवाज़]

1124
01:21:01,120 --> 01:21:04,320
यही है क्या चौथा?

1125
01:21:04,320 --> 01:21:10,320
गलत भेज दिया क्या मैंने?

1126
01:21:10,400 --> 01:21:15,680
एक मिनट मैं देख लेता हूं।

1127
01:21:15,680 --> 01:21:17,840
स्वामी

1128
01:21:17,840 --> 01:21:23,840
यही तो है एक मिनट 23 सेकंड वाला हां जी चलाइए

1129
01:21:25,200 --> 01:21:29,440
ये सीन एक मिनट अभी मैं चला ये सीन देख लेना जितने भी उसके समर्थक

1130
01:21:29,440 --> 01:21:33,760
हैं ये सीन है मैं खड़ा हूं चट्टान की तरह

1131
01:21:33,760 --> 01:21:38,000
कि इधर आ मैं तुझे फिर से तेरी जो है औकात याद दिलाता हूं इन जैसे

1132
01:21:38,000 --> 01:21:42,480
लोगों के लिए यही शब्द उचित रहता है तुझे फिर से धूल चटाता हूं ये देख लो

1133
01:21:42,480 --> 01:21:46,560
और इसको मेरे गुरु भाई मुझसे बचा आ रहे हैं। पुलिस वाले नहीं आए

1134
01:21:46,560 --> 01:21:52,560
अभी। ठीक है। जी चलाइए।

1135
01:21:53,440 --> 01:21:55,920
क्या नाम? हां परिवार है।

1136
01:21:55,920 --> 01:22:00,000
वो तो दर्शनाचार्य हैं। वो तो बड़े हाई लेवल के आचार्य हमारे उनसे मेरी बात होती है।

1137
01:22:00,000 --> 01:22:04,000
शुरू से चलाइए। शुरू से नाम सुन ले। कुछ स्वामी

1138
01:22:04,000 --> 01:22:08,080
विवेकानंद क्या नाम? परिवराज हां परिवराज

1139
01:22:08,080 --> 01:22:12,160
वो तो दर्शनाचार्य हैं। वो तो बड़े हाई लेवल के आचार्य हमारे। उनसे मेरी बात होती है।

1140
01:22:12,160 --> 01:22:16,160
उनसे ना मेरी बातचीत मुझे डाउट होता है ना कुछ दर्शनों के संबंधी उनके यहां मैंने

1141
01:22:16,160 --> 01:22:20,240
फोन किया था। अच्छा तो मुझे चर्चा के लिए आप समय दें।

1142
01:22:20,240 --> 01:22:24,320
हम हम तो कहा कि

1143
01:22:24,320 --> 01:22:28,320
हां गुजरात कभी आइएगा तो इधर हो लीजिएगा। ऐसा कुछ

1144
01:22:28,320 --> 01:22:32,400
बोला मतलब मतलब बहुत ज्यादा ठोस जवाब नहीं

1145
01:22:32,400 --> 01:22:36,480
आया। क्योंकि वो क्या करते हैं? वो ऐसे डिबेट इत्यादि नहीं करते हैं। डिबेट

1146
01:22:36,480 --> 01:22:40,560
नहीं डिबेट के तौर पर नहीं है। का समाधान और

1147
01:22:40,560 --> 01:22:45,200
शंका समाधान के लिए उनके यहां हर कोई आता है। शंका समाधान देखिए उसमें ये होता है ना जैसे

1148
01:22:45,200 --> 01:22:49,200
न्याय में सब बता रखा है कि विदंडा क्या है? वाद क्या है? जल क्या है? शंका समाधान। शंका समाधान

1149
01:22:49,200 --> 01:22:53,200
में क्या होता है कि व्यक्ति का अपना खुद का कोई मत नहीं होता। ये चीज है। तो अगर

1150
01:22:53,200 --> 01:22:57,760
आप शंका समाधान के नाम पे अपना फिर मत भी वहां पे स्थापित करने का प्रयास करेंगे तो फिर शंका समाधान

1151
01:22:57,760 --> 01:23:02,000
वो भी ठंडा बन जाएगा। तो स्वामी जी ऐसे हैं क्योंकि वो परिवराजक

1152
01:23:02,000 --> 01:23:06,080
सन्यासी हैं। तो वो क्या करते हैं? उनकी वो आध्यात्मिक थोड़ा एक उन्नति अच्छी है कि

1153
01:23:06,080 --> 01:23:10,080
वो ऐसी चीजों में पढ़ते ही नहीं जहां पर हल्का सा भी विरोध भाव हो। तो

1154
01:23:10,080 --> 01:23:11,280
वो उनकी ऐसी प्रवृत्ति

1155
01:23:11,280 --> 01:23:15,280
है तो वह कहते हैं कि अगर आपको मुझसे कोई बात कहनी है ठीक है तो या तो यह चीज हो कि आप

1156
01:23:15,280 --> 01:23:19,280
नहीं मानोगे तो मैं कह दूंगा ठीक है जी आपकी मर्जी कोई इशू नहीं है और अगर आप आपको शंका समाधान

1157
01:23:19,280 --> 01:23:23,360
करना है तो मुझे जितना ज्ञान है उस अकॉर्डिंग आपको बता दूंगा बाकी आपकी मर्जी मानना मान

1158
01:23:23,360 --> 01:23:28,160
तो शंका समाधान करते हैं वो भी और स्वामी वो मुनि सत्यजीत जी

1159
01:23:28,160 --> 01:23:32,400
ठीक है भाई तो शंका समाधान के नाम पर कोई व्यक्ति

1160
01:23:32,400 --> 01:23:37,120
शास्त्रार्थ करने का प्रयास करता है तो उसे कहते हैं वितंडा

1161
01:23:37,120 --> 01:23:41,440
यह कौन कह रहा है तुम्हारा जूता छोड़ भगोड़ा

1162
01:23:41,440 --> 01:23:44,400
जूता छोड़ भगोड़ा

1163
01:23:44,400 --> 01:23:48,800
और शंका समाधान के नाम पर

1164
01:23:48,800 --> 01:23:52,800
जो है शास्त्रार्थ करने का प्रयास जो कि वितंडा है और इस चीज

1165
01:23:52,800 --> 01:23:56,880
से अगर दूर रहते हैं किसी कारण से भी उनकी आध्यात्मिक उन्नति इसलिए

1166
01:23:56,880 --> 01:24:01,040
उनको उनका दूर रहना स्वीकार है क्योंकि वो आर्य समाजी है मगर

1167
01:24:01,040 --> 01:24:05,520
शंकराचार्य की आध्यात्मिक उन्नति से कोई मतलब नहीं

1168
01:24:05,520 --> 01:24:09,520
शंकराचार्य के पास कोई कारण नहीं हो सकता उस विरोध से विरोध वाली बात से

1169
01:24:09,520 --> 01:24:13,520
दूर रहने का या फिर किसी के प्रश्न के शंका समाधान में एक हद तक

1170
01:24:13,520 --> 01:24:17,680
उत्तर देने के बाद अगले व्यक्ति को सुनना। यह कारण शंकराचार्य के पास नहीं हो

1171
01:24:17,680 --> 01:24:22,240
सकते। हां, तुम्हारे आचार्यों के पास पर्याप्त कारण है केवल।

1172
01:24:22,240 --> 01:24:26,560
क्यों? क्योंकि जूता छोड़ भगोड़े ने कहा है। न्याय भी वही लागू

1173
01:24:26,560 --> 01:24:30,800
होगा जहां जूता छोड़ भगोड़ा कहेगा। है ना?

1174
01:24:30,800 --> 01:24:35,200
न्याय भी वहीं लागू होगा। तो अगर यह शास्त्रार्थ

1175
01:24:35,200 --> 01:24:39,600
है। यहां पर सब लोग जान ले। अगर यह शास्त्रार्थ है

1176
01:24:39,600 --> 01:24:43,200
और शास्त्रार्थ में इस तरीके से शंकराचार्य जी का

1177
01:24:43,200 --> 01:24:47,360
पराजित होना सिद्ध होता है। वाह वाह वाह तो फिर इसका

1178
01:24:47,360 --> 01:24:51,440
मतलब है कि तुम्हारे जो परिव्राजक जी हैं जिनसे तुम शंका समाधान

1179
01:24:51,440 --> 01:24:55,440
करते हो पूछते हो फोन लगा करके वो उनकी प्रवृत्ति

1180
01:24:55,440 --> 01:25:00,000
है शास्त्रार्थ में हारने की। ठीक है?

1181
01:25:00,000 --> 01:25:04,000
नाम नोट कर लेना मेरा दोबारा। शिवश नारायण द्विवेदी नाम है तुम्हें

1182
01:25:04,000 --> 01:25:08,000
धूल चटाने वाला। देखो अभी और कैसे कैसे धूल चाटोगे तो

1183
01:25:08,000 --> 01:25:12,000
अब बात एक बात अब यहां पर आपने क्लियर कर लिया कि शंका समाधान के

1184
01:25:12,000 --> 01:25:16,000
नाम पर कोई शास्त्रार्थ करे तो वितंडा है और ऐसे

1185
01:25:16,000 --> 01:25:20,080
कारण हो सकते हैं लोगों के पास कि वो एक हद तक उत्तर दे उसके बाद ना दें

1186
01:25:20,080 --> 01:25:24,240
उसको शास्त्रार्थ में पराजित स्वीकार नहीं किया जाएगा अकॉर्डिंग टू इस जूते

1187
01:25:24,240 --> 01:25:28,480
छोड़ भगोड़े के अनुसार केवल मेरे अनुसार नहीं केवल शास्त्र के अनुसार

1188
01:25:28,480 --> 01:25:33,200
नहीं उसमें इस जूता छोड़ भगोड़ा की भी बात है ठीक है

1189
01:25:33,200 --> 01:25:37,280
अब रोज आके छाती पीट पीट छाती पीट पे वो पप्पा

1190
01:25:37,280 --> 01:25:41,810
आएंगे पप्पा पाएंगे क्या है वो पीट पीट के छाती सब पप्पा पाएंगे हां

1191
01:25:41,810 --> 01:25:46,720
[हंसी] अब जाओ पीटो छाती अच्छा अब एक बात और है कि

1192
01:25:46,720 --> 01:25:51,040
अच्छा किस किसी व्यक्ति को कब तक उत्तर दिया जाएगा या तो

1193
01:25:51,040 --> 01:25:55,200
अगर हम कहें कि सामने वाले के चुप होने तक उत्तर दिया जाएगा। अगर हम कहें

1194
01:25:55,200 --> 01:25:58,240
यह सोचे कि सामने वाला जब तक चुप ना हो

1195
01:25:58,240 --> 01:26:02,320
जाए तब तक उसको उत्तर देते रहो तो क्या यह उचित है? यदि

1196
01:26:02,320 --> 01:26:06,320
सामने वाला निराधार हो गया तो वहां पर मौन हो जाना उस चर्चा से

1197
01:26:06,320 --> 01:26:10,560
अलग हट जाना क्या वह उचित नहीं है आप देखिए

1198
01:26:10,560 --> 01:26:15,840
यह व्यक्ति किस प्रवृत्ति का व्यक्ति है आप देखिए यहां पर

1199
01:26:15,840 --> 01:26:20,080
भैया वो वीडियो दिखाओ यहां पर क्या कहते हैं शायद

1200
01:26:20,080 --> 01:26:25,200
पांचवें नंबर का होगा जिसमें यह

1201
01:26:25,200 --> 01:26:29,280
जिसमें यह जो है अर्ध कुकुट न्याय को स्वीकार कर रहा है। हां मैं

1202
01:26:29,280 --> 01:26:33,840
अर्ध कुकुट न्याय करूंगा। देखो और वहां पर मैंने

1203
01:26:33,840 --> 01:26:38,000
जब यह निराधार हुआ दो तरीके होते हैं। या तो व्यक्ति निरुत्तर हो जाए या

1204
01:26:38,000 --> 01:26:42,080
निराधार हो जाए तब जो है चर्चा बंद होती है। निरुत्तर हो गया तो हम शांत

1205
01:26:42,080 --> 01:26:46,080
हो गए और निराधार हो गया तो हम शांत हो गए। तो ये व्यक्ति

1206
01:26:46,080 --> 01:26:50,080
जब जो है बोले ही जा रहा है। निराधार बातें बोले जा रहा है। खुद ही न्याय

1207
01:26:50,080 --> 01:26:52,880
न्याय चिल्लाता है। यहां देखिए क्या कह रहा है।

1208
01:26:52,880 --> 01:26:57,040
सुनिए। तो मैं तो यह कह रहा हूं कि किसी कारण

1209
01:26:57,040 --> 01:27:01,040
से अगर हमें हमारे गुरुजनों का झूठ बोलना हमारा लग रहा

1210
01:27:01,040 --> 01:27:05,200
है। ये लग रहा है कि द्वेष वश या लालच वश या भयवश झूठ बोल

1211
01:27:05,200 --> 01:27:09,200
रहे हैं। [हंसी] सुनो उनके सामने हमने सिद्ध कर दिया। सुनो

1212
01:27:09,200 --> 01:27:13,200
तो उनके सामने हमने [गला साफ़ करने की आवाज़] सिद्ध कर दिया। ये देखो अष्टाध्यायी से आपका मैच

1213
01:27:13,200 --> 01:27:17,280
नहीं खा रहा है। फिर वो कह रहे हैं कि नहीं अष्टाध्यायी से मैच हमारा खा रहा है। तो

1214
01:27:17,280 --> 01:27:21,440
इसका मतलब वो लोग झूठे लोग हैं। उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। एक सूत

1215
01:27:21,440 --> 01:27:25,600
भी नहीं किया जा सकता। और जब गलत है क्यों गलत है अर्ध कुकुट न्याय

1216
01:27:25,600 --> 01:27:29,760
नहीं कुकुट न्याय करोगे यहां हां तो क्या दिक्कत है अर्ध कुकुट

1217
01:27:29,760 --> 01:27:33,840
न्याय कर दोगे किसी व्यक्ति की कोई एक बात गलत हो तो सारी बात गलत

1218
01:27:33,840 --> 01:27:39,060
हो जाती है क्या अब बस बस अब इस मनन करो अब तुम

1219
01:27:39,060 --> 01:27:43,520
[हंसी] क्या करें भाई जब व्यक्ति कह रहा है मैं अर्धकूट

1220
01:27:43,520 --> 01:27:49,520
न्याय करूंगा तब भी उसको चुप कराने के लिए पीछे पड़े रहे क्या बेवकूफ

1221
01:27:50,480 --> 01:27:54,480
मुझे नीच बोल रहा हैं

1222
01:27:54,480 --> 01:27:58,560
अर्ध कुकुट न्याय करूंगा मैं बोल रहा है तुम्हारा ये

1223
01:27:58,560 --> 01:28:02,800
जूता छोड़ भगोड़ा इनका उद्देश्य धर्म की स्थापना

1224
01:28:02,800 --> 01:28:06,880
नहीं है ये अपने वीडियोस बना के जो ये कर रहे हैं ना मेरा एक

1225
01:28:06,880 --> 01:28:10,880
सिंगल पॉइंट एजेंडा है ये भी मुझसे कॉपी की है पूरी स्टाइल इसने मेरी कॉपी की

1226
01:28:10,880 --> 01:28:15,200
है मुझसे जो बातें हुई है इसकी जो भाईचारे में जो बातें हुई है इसकी

1227
01:28:15,200 --> 01:28:19,200
उसमें जो मैंने इसको बताया कि मैं ऐसे इस तरह से मेरा दृष्टव्य है

1228
01:28:19,200 --> 01:28:23,920
सेम टू सेम कॉपी कर दिया इसने पूरा स्ट्रेटजी कॉपीरा

1229
01:28:23,920 --> 01:28:28,000
मगर भाई तुम कितना भी कॉपी कर लो तुम्हारे पास गुरु नहीं है ना

1230
01:28:28,000 --> 01:28:32,880
सिद्धांत नहीं है ना क्या करोगे कर लो कॉपी

1231
01:28:32,880 --> 01:28:37,280
क्या कह रहा है देखो व्यक्ति क्या कह रहा है अर्ध कुकु न्याय करूंगा मैं

1232
01:28:37,280 --> 01:28:42,160
अब इससे हम इसको चुप कराने तक इससे तर्क वितर्क करें और आगे

1233
01:28:42,160 --> 01:28:46,480
हो गया निराधार खत्म

1234
01:28:46,480 --> 01:28:50,480
ठीक है अच्छा अब आगे [गला साफ़ करने की आवाज़] चलते हैं जी यहां तक अगर किसी को

1235
01:28:50,480 --> 01:28:54,480
कुछ कहना है थोड़ा थोड़ा सा आपका ओपिनियन ले लें। बहुत आप लोग थोड़ा सा

1236
01:28:54,480 --> 01:28:58,560
कुछ जलपान वगैरह लेके बैठिएगा क्योंकि अभी काफी कुछ और भी है और

1237
01:28:58,560 --> 01:29:02,800
बाद में बहुत सारी रोचक तथ्य आने वाले हैं। फुल एंटरटेनमेंट भरी

1238
01:29:02,800 --> 01:29:07,200
है आज की ये जो जो मूवी है जी बोले आप लोग कुछ

1239
01:29:07,200 --> 01:29:11,440
नहीं नहीं जारी रखिए जलपान करके ही बैठे हैं। [हंसी] नहीं

1240
01:29:11,440 --> 01:29:15,600
नहीं मैं इनको कह रहा हूं दर्शकों को जो देख रहे हैं। हां वो भी वो भी देख रहे हैं। आप

1241
01:29:15,600 --> 01:29:19,840
आप लोग थोड़ा थोड़ा कुछ ना कुछ जलपान इत्यादि ले लीजिए क्योंकि अभी है चीजें

1242
01:29:19,840 --> 01:29:24,160
है बाकी। पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त। पिक्चर अभी बाकी है। जी जी जी

1243
01:29:24,160 --> 01:29:28,240
पिक्चर अभी बाकी है। तो हमने क्या-क्या सिद्ध कर लिया कि

1244
01:29:28,240 --> 01:29:32,320
प्रश्नोत्तरी में कोई अगर इस तरह से शास्त्रार्थ का नाम देने प्रयास

1245
01:29:32,320 --> 01:29:36,480
करे तो वितंडा होता है। अगर अंत तक कोई आचार्य ना

1246
01:29:36,480 --> 01:29:40,640
जाए तब भी वो हरा हुआ सिद्ध नहीं होता है। ठीक है? और इसके

1247
01:29:40,640 --> 01:29:44,880
साथ ही साथ ये किस तरह के वितंडा वाले व्यक्ति हैं कि मैं अर्ध कुकुट न्याय

1248
01:29:44,880 --> 01:29:49,040
करूंगा। जैसे राजपाल यादव कहता है ना अंत में मैं पागल हूं। मैं

1249
01:29:49,040 --> 01:29:53,040
पागल हूं। मैं को न्याय करूंगा। अबे भाई जब तूने स्वीकार कर लिया

1250
01:29:53,040 --> 01:29:57,760
मैं पागल हूं तो अब तुझे क्या हम सिद्ध करें आगे? जूता छोर भगोड़े।

1251
01:29:57,760 --> 01:30:02,560
हां जी शास्त्रवाद जी बोले। जी भैया

1252
01:30:02,560 --> 01:30:06,560
यही हुआ कि इसे जो पूरा समय जो यह चाहता था जितना

1253
01:30:06,560 --> 01:30:09,840
समय पहली बात तो जगह पर जहां पर वो खड़ा है

1254
01:30:09,840 --> 01:30:14,000
जिस सभा में वो प्रश्न कर रहा है वो प्रश्नोत्तरी सभा है

1255
01:30:14,000 --> 01:30:18,400
प्रश्नोत्तरी सभा में चर्चा करने लगे हो और चर्चा नहीं उसको शास्त्रार्थ

1256
01:30:18,400 --> 01:30:22,640
का नाम दे रहे हो और वह भी वो शास्त्रार्थ का नाम दे रहे हो जो काशी

1257
01:30:22,640 --> 01:30:26,800
काशी शास्त्रार्थ का नाम दे रहे हो और ये काशी शास्त्रार्थ का

1258
01:30:26,800 --> 01:30:31,120
जो बोला जाता है ये सीधेसीधे दयानंद जी से जुड़ता है।

1259
01:30:31,120 --> 01:30:35,200
अगर अगर इस शास्त्रार्थ में तुम स्वयं

1260
01:30:35,200 --> 01:30:39,200
को विजय घोषित करते हो तो क्या ये लिंग सीधेसीधे

1261
01:30:39,200 --> 01:30:43,280
तुम्हारे दयानंद जी पर भी अप्लाई होता है क्या? वो भी ऐसे ही गए

1262
01:30:43,280 --> 01:30:47,520
होंगे किसी सभा में और इस तरह से बोल के अपने आप को विजय घोषित

1263
01:30:47,520 --> 01:30:51,840
कर लिए होंगे क्या? बताओ यदि तुम काशी शास्त्रार्थ जोड़ रहे हो वो भी

1264
01:30:51,840 --> 01:30:56,000
काशी शास्त्रार्थ ही नहीं सिर्फ काशी शास्त्र 2.0 तो

1265
01:30:56,000 --> 01:31:00,160
3 ये सब कर रहे हो ये क्या बात है भाई

1266
01:31:00,160 --> 01:31:04,160
2 या 3 तुम लोग पहले तो अपने आप में सिद्ध कर लो मतलब वो

1267
01:31:04,160 --> 01:31:08,160
फिक्स कर लो कि बोलना क्या है 2 है या 3

1268
01:31:08,160 --> 01:31:12,560
है जितना भी ओ है [गला साफ़ करने की आवाज़] लेकिन लिंक तो तुम्हारे दयानंद

1269
01:31:12,560 --> 01:31:16,720
जी से हो रहा है यदि तुम इसे काशी शास्त्रार्थ का नाम दे रहे हो देखो वो हो गया है वो

1270
01:31:16,720 --> 01:31:20,960
हो गया है वो हो गया है। बात यह है कि

1271
01:31:20,960 --> 01:31:25,120
इसने कहा कि यह शास्त्रार्थ है। ठीक है? और इसी के अनुसार यह

1272
01:31:25,120 --> 01:31:29,200
कार्य करना वितंडा है। और इसी के अनुसार जो

1273
01:31:29,200 --> 01:31:33,680
है काशी में जो ये जो शास्त्रार्थ था ये वाला वितंडा

1274
01:31:33,680 --> 01:31:38,000
जो निकला बाद में ये जो है 2.0 है 3.0 है। यानी कि

1275
01:31:38,000 --> 01:31:42,000
जो काशी में जो शास्त्रार्थ हुआ था वो भी वितंडा थी। ठीक

1276
01:31:42,000 --> 01:31:46,000
है? इसी के अनुसार हां

1277
01:31:46,000 --> 01:31:50,000
इसी के और एक और चीज मैं ये बोलना चाह रहा था कि यदि

1278
01:31:50,000 --> 01:31:54,160
ये बोल रहा है कि मुझे पर्याप्त समय नहीं मिला तो भाई तुम जाकर के

1279
01:31:54,160 --> 01:31:58,240
बाकियों का भी वीडियो देख लो सबको कितने समय दिया जाता है वहां पर प्रश्न करने

1280
01:31:58,240 --> 01:32:02,800
का और ऊपर से सभी लोग एक ही प्रश्न करते हैं ज्यादा से ज्यादा

1281
01:32:02,800 --> 01:32:07,120
तुमने तीन चार लगातार प्रश्न पे प्रश्न किए ऊपर से उदंडता पूर्वक

1282
01:32:07,120 --> 01:32:11,520
अपनी जो अनार्यता दिखाते हुए तुमने बीच में

1283
01:32:11,520 --> 01:32:15,920
जो है शंकराचार्य जी की बात को काटा है बीचबीच में वो तुम्हारी अशिष्टता

1284
01:32:15,920 --> 01:32:20,050
दिखा रही है। ठीक है तो वो भी थोड़ा ध्यान रखो इस बात का

1285
01:32:20,050 --> 01:32:24,320
[गला साफ़ करने की आवाज़] जो भी तुम इसमें एक चीज और मैं बताऊं आपको आज तक मैंने

1286
01:32:24,320 --> 01:32:28,480
कभी किसी चर्चा को शास्त्रार्थ नहीं कहा। हालांकि उसमें मैं समय

1287
01:32:28,480 --> 01:32:32,480
ले बैठा हूं सामने वाले के साथ। मैंने कभी उसको यह नहीं कहा शास्त्रार्थ

1288
01:32:32,480 --> 01:32:36,480
में पराजित कभी नहीं कहा। इसको कहते हैं

1289
01:32:36,480 --> 01:32:40,400
दर्शन विज्ञान और व्यवहार जो हमने अपने गुरु से सीखा है और तुमने

1290
01:32:40,400 --> 01:32:44,640
भी हमसे सीखना चालू किया। इसकी रिकॉर्डिंग है मेरे पास। कभी अगर कोई ज्यादा डिमांड

1291
01:32:44,640 --> 01:32:48,720
होगी पब्लिक के द्वारा तो हम डाल देंगे। उसने बोला है ये मैं आपसे सीख रहा

1292
01:32:48,720 --> 01:32:52,800
हूं दर्शन विज्ञान व्यवहार। ठीक है? तो

1293
01:32:52,800 --> 01:32:56,880
[हंसी] खैर अब आगे चलते हैं थोड़ा सा। काफी चीजें हो

1294
01:32:56,880 --> 01:33:02,800
गई।

1295
01:33:02,800 --> 01:33:07,120
तो हमने [गला साफ़ करने की आवाज़] यह सारी बातें कर ली है

1296
01:33:07,120 --> 01:33:11,200
कि भाई तुम हमारे यहां पर आए तो तुम्हारे साथ जो तुम्हारे धूल चटाने वाली बात

1297
01:33:11,200 --> 01:33:14,640
आई तो किस तरह से आई थी।

1298
01:33:14,640 --> 01:33:17,520
अ

1299
01:33:17,520 --> 01:33:22,240
तुमने क्या कहते हैं?

1300
01:33:22,240 --> 01:33:26,480
हमारे यहां पर आए हुए हो। हमारे आराध्यों के बारे में तुमने गाली इत्यादि

1301
01:33:26,480 --> 01:33:30,560
तक दी गई है। हम पर ही आरोप लगा रहे हो चर्चा से बचने के लिए। नाम

1302
01:33:30,560 --> 01:33:35,040
बदलकर जो है उनके शिष्य को

1303
01:33:35,040 --> 01:33:39,440
जब यह पहली बार मेरी चर्चा में आया था तो इसने नाम बदलकर गुरुदेव

1304
01:33:39,440 --> 01:33:43,600
को भगवान कहा था। ठीक है? जब ये पहली बार हमारी चर्चा

1305
01:33:43,600 --> 01:33:47,680
में आया था इसने पहली बार गुरुदेव को भगवान कहा था। गुरुदेव भगवान।

1306
01:33:47,680 --> 01:33:51,920
ठीक है? तो इस तरह से षड्यंत्र तुम करते हो भाई और तुम उसी उनहीं आंखों

1307
01:33:51,920 --> 01:33:56,080
से सबको देखते हो। अच्छा फोन पर

1308
01:33:56,080 --> 01:34:00,400
जो है तुमने सम्मान दिया है गुरुदेव को ठीक है और तुम

1309
01:34:00,400 --> 01:34:05,280
शंकर परंपरा के नष्ट होने की बात करते हो तो षड्यंत्रकारी कौन हुआ तुम

1310
01:34:05,280 --> 01:34:09,600
व्यस्त व्यक्ति को असमय फोन करके उसकी कॉल रिकॉर्डिंग कर लेते हो

1311
01:34:09,600 --> 01:34:13,680
उससे शास्त्रार्थ का प्रयास करते हो वही शंका समाधान के नाम

1312
01:34:13,680 --> 01:34:17,680
पर और उसको जो है शास्त्रार्थ के रूप में जो है प्रसारित प्रसारित करते

1313
01:34:17,680 --> 01:34:21,840
हो और जबकि वो निरुत्तर भी नहीं हुआ है तुम्हें आमंत्रित कर रहा है

1314
01:34:21,840 --> 01:34:25,840
हम उसके उसके उसके साथ मतलब उसका पूरा नैरेटिव ही चेंज कर देते हो।

1315
01:34:25,840 --> 01:34:29,920
कैमरे पर हमने यह किया है जो अभी भी तुम्हारे चैनल पर डला हुआ

1316
01:34:29,920 --> 01:34:32,560
है उससे मुकरते भी हो और तब भी तुम

1317
01:34:32,560 --> 01:34:36,640
चाहते हो कि तुम्हारे ऊपर किसी को गुस्सा ना आए। तुम

1318
01:34:36,640 --> 01:34:40,960
एक धार्मिक जगह पर गए हुए वहां चिल्लम चिल्ली करने लगते हो। अनुशासन

1319
01:34:40,960 --> 01:34:44,960
हीनता करने लगते हो। पर फिर भी कोई तुम्हारे ऊपर क्रोधित ना हो। कोई तुमसे यह

1320
01:34:44,960 --> 01:34:49,120
ना कहे भाई जाओ तुम यहां से शांतिपूर्वक चले जाओ। एक कहना तुम्हारे लिए

1321
01:34:49,120 --> 01:34:53,280
गुंडों के द्वारा घेरना कहते हैं इसको। है ना?

1322
01:34:53,280 --> 01:34:57,280
अच्छा वही लोग हैं जो इनके वीडियो में जो कह रहे हैं ना कि देखो तुम्हें शांति

1323
01:34:57,280 --> 01:35:01,520
से सुन रहा हूं। वही लोग आगे तक इनको छोड़ के आए कि जाओ जाओ यार तुम प्रश्न पूछने

1324
01:35:01,520 --> 01:35:05,920
का एक तरीका होता है। उनका केवल ये था कि यहां का अनुशासन जो

1325
01:35:05,920 --> 01:35:10,080
अनुशासन में जो विघ्न पड़ रहा है वो ना हो। उस कारण से तुमको उन्होंने वहां

1326
01:35:10,080 --> 01:35:14,240
से हटाया और यहां तक कि उन लोगों ने ही तुम्हें मेन जो बार-बार तुम्हें

1327
01:35:14,240 --> 01:35:18,320
धूल चटाने वाला था तो मुझसे जो है उन लोगों ने दूर किया। नहीं तो तुम्हारा

1328
01:35:18,320 --> 01:35:22,320
क्या ही होता वो तुम जानते हो। तुम याद करो अपने उस

1329
01:35:22,320 --> 01:35:26,320
समय को जब तुम वहां नीचे धूल चाट रहे थे। खैर

1330
01:35:26,320 --> 01:35:30,800
मुझे हम [गला साफ़ करने की आवाज़] ये षड्यंत्र वाले पे एक चीज बोलना चाहेंगे जो

1331
01:35:30,800 --> 01:35:34,960
ये बोल बोलता है निर्भय कि षड्यंत्र किया था ये वो अगर

1332
01:35:34,960 --> 01:35:38,960
ऐसा सच्ची में होता तो जैसे ये लिखा आता वही पर हम लोग इसे धर लेते

1333
01:35:38,960 --> 01:35:43,840
चर्चा करने ही नहीं देते इसका भी एक झूठ है

1334
01:35:43,840 --> 01:35:47,920
बिल्कुल देखो ये खुद षड्यंत्रकारी है ये खुद षड्यंत्रकारी

1335
01:35:47,920 --> 01:35:52,240
है इसलिए इसको सब षड्यंत्रकारी लगते हैं अब इसका भी मेरे पास प्रूफ

1336
01:35:52,240 --> 01:35:56,960
है ठीक है वो मैं बता रहा हूं मगर सबसे बड़ी बड़ी बात यह है कि अगर इसको

1337
01:35:56,960 --> 01:36:01,200
षड्यंत्र लग भी रहा है जो कि षड्यंत्र है नहीं। अगर इसको

1338
01:36:01,200 --> 01:36:05,280
षड्यंत्र लग भी रहा है तो भाई तू यह कहना कि मैं नहीं जाऊंगा

1339
01:36:05,280 --> 01:36:09,440
मुख्य जगह में ऐसे करूंगा ऐसे मतलब चर्चा की संभावना ही क्यों खत्म कर रहा है

1340
01:36:09,440 --> 01:36:13,440
यह बोल के कि हमें चर्चा नहीं करनी। बात यह है चर्चा

1341
01:36:13,440 --> 01:36:17,440
की संभावना तूने बंद खत्म क्यों कर दी? उससे पता लगता है कि तुझे

1342
01:36:17,440 --> 01:36:21,520
भागना था जूता छोड़ के। खैर [गला साफ़ करने की आवाज़] अब

1343
01:36:21,520 --> 01:36:25,520
षड्यंत्रकारी यह है। इसको हम देखेंगे कौन से वीडियो से

1344
01:36:25,520 --> 01:36:29,760
भैया? वो छह नंबर वाला वीडियो लगा दीजिए जरा। ये ये

1345
01:36:29,760 --> 01:36:34,160
किसी से चर्चा करने जाता है तो किन-किन कारणों से इसका किस-किस

1346
01:36:34,160 --> 01:36:38,240
प्रकार का जो है भावनाएं होती हैं। पूर्वाग्रह से किस

1347
01:36:38,240 --> 01:36:42,320
प्रकार से ग्रसित होता है यह सुनिए आप। जी।

1348
01:36:42,320 --> 01:36:48,320
छह नंबर वाला लगा दीजिए।

1349
01:36:49,920 --> 01:36:55,920
[गहरी सांस लेने की आवाज़]

1350
01:37:00,720 --> 01:37:04,720
तो मैं आपको बताऊं अब तो मेरे को इतना वो जो मैंने देखा मेरे

1351
01:37:04,720 --> 01:37:08,720
को खुद पे वो बड़ा खराब लगा। मैं कहा यार ये तो ये जिस तरीके से होना चाहिए था वैसे हुआ ही

1352
01:37:08,720 --> 01:37:13,120
नहीं। हां मैं बड़े साफ मन से बैठा था वहां पे तुम्हारे साथ। सच बता रहा हूं।

1353
01:37:13,120 --> 01:37:17,280
तो पता है मैं मतलब वो मेरे को लगा कि यार यहां तो मैंने ब्लंडर मिस्टेक कर दिया

1354
01:37:17,280 --> 01:37:21,360
मतलब सिद्धांतिक बात है वो एक अलग बात है उसमें बीचबीच में कुछ ऐसा हल्का

1355
01:37:21,360 --> 01:37:25,520
सा वो पता नहीं किस कारण से था तुमने शायद कमेंट

1356
01:37:25,520 --> 01:37:30,960
देखे हो नीचे या फिर हो सकता है तुम्हें ऐसा लग रहा हो कि मैं वो हो रहा हूं डोमिनेटिंग

1357
01:37:30,960 --> 01:37:35,040
उसमें भैया मैं आपको बताऊं मैं मतलब जब मैं उस टाइम चर्चा कर रहा था वो चीज मुझे समझ में

1358
01:37:35,040 --> 01:37:39,120
नहीं आया कि यहां पे मैं गलती कर रहा हूं वो मेरे को शायद इसका कारण

1359
01:37:39,120 --> 01:37:43,120
मुझे बाद में मैंने विचार किया कि ऐसा होता है क्यों मेरे व्यवहार में आई मुझे कारण ये समझ में

1360
01:37:43,120 --> 01:37:47,200
आया कि जैसे मैं बहुत एक से एक मूर्ख लोग मिलते हैं डिबेट करने के लिए। उसमें

1361
01:37:47,200 --> 01:37:51,440
भीमवादी होते हैं उसी में मुस्लिम होते हैं। तो बहुत चीजें होती है। जिस तरह से टैकल करते हो तुमने

1362
01:37:51,440 --> 01:37:55,440
कहा कि यहां वही आदत सीख और वो क्या होता है कि वो लोग आते हैं सबसे पहले गाली

1363
01:37:55,440 --> 01:37:59,520
देते हैं। तो हम लोग थोड़ा वो चीज सुनते सुनते सुनते थोड़ा सा वो जो हमारी भावना है उसमें कटु

1364
01:37:59,520 --> 01:38:03,600
और क्रूता वो चीज आ गया। तो पता ही नहीं चलता कि मतलब जैसे डिबेट मोड ऑन हुआ

1365
01:38:03,600 --> 01:38:07,600
तो वो नेचुरली आ जाता है। जब मैंने बाद में वीडियो देखा मुझे खराब इतना लगा।

1366
01:38:07,600 --> 01:38:11,600
मैंने मैं एकदम पता है मैं एडिटिंग छोड़ दिया। संदीपन जी ने मुझे कहा

1367
01:38:11,600 --> 01:38:15,680
कि अरे हाईलाइट कब बना के दे रहे हो? तो मैंने कहा कि मैंने एडिटिंग छोड़ा। मैंने कहा वो

1368
01:38:15,680 --> 01:38:16,180
छोड़ो।

1369
01:38:15,920 --> 01:38:20,080
मैंने संदीपन जी को कॉल किया। मैंने कहा कि आपको भी एक दो बार नंबर ट्राई किया कॉल

1370
01:38:20,080 --> 01:38:24,240
तो मैंने संदीप जी को बोला कि संदीप जी मेरे को उनसे हाल में बात करनी है। तो

1371
01:38:24,240 --> 01:38:28,480
उन्होंने कहा कि क्या हो गया? मैंने बताया कि संदीप जी मेरे से हो गई बहुत बड़ी गलती और

1372
01:38:28,480 --> 01:38:32,880
ये जो जिस तरीके से करना चाहिए था उस तरीके से हुआ नहीं। मेरे को यह समझ में आया

1373
01:38:32,880 --> 01:38:36,880
कि चलो ठीक है लास्ट में अगर उन्होंने मेरे को निकाला भी तो वो उसमें जो

1374
01:38:36,880 --> 01:38:40,880
प्रेशर उनके दिमाग में बिल्ड हुआ वो बिल्ड करने का कारण ही ना था वो मेरे को

1375
01:38:40,880 --> 01:38:45,200
उस टाइम मेरे को समझ में आया वीडियो देख के हां चलो ठीक है शुरू से जो मैं वो बीच-बीच

1376
01:38:45,200 --> 01:38:49,360
में जो टोंटी इत्यादी क्योंकि उस टाइम मुझे पता नहीं चला क्योंकि वो थोड़ा एक मेरा नेचुरल स्वभाव में था

1377
01:38:49,360 --> 01:38:53,600
तो फिर मुझे समझ में आया कि भ सामने वाले को जब इतना फ्रस्ट्रेट करोगे तो फिर तो वो हो गई परेशान

1378
01:38:53,600 --> 01:38:57,680
एक बात है तो वो मुझे समझ में आया वो मेरी बहुत गलती थी तो फिर और

1379
01:38:57,680 --> 01:39:02,240
फिर मेरे को ये हो गई कि यार इतनी बड़ी बात और फिर मेरी उनसे दोबारा बातचीत नहीं हो पाएगी।

1380
01:39:02,240 --> 01:39:06,320
मुझे बहुत बुरा लगा उस वाले पॉइंट पे। हुआ ये था कि लाइव में

1381
01:39:06,320 --> 01:39:10,480
जब मैं बैठा था तो मेरे मन में ईगो वाला भाव था। ईगो वाला भाव का भी कारण ये था कि मतलब

1382
01:39:10,480 --> 01:39:14,560
उस टाइम तक जो जैसे आपने जो वीडियो वगैरह डाला था तो मुझे मेरे दिमाग में ये था कि आप जो हार और जीत

1383
01:39:14,560 --> 01:39:18,800
वाली एक इमेज थोड़ी सी मतलब आ [हंसी] रही है। उस टाइम मुझे तो थोड़ा वो दिमाग में

1384
01:39:18,800 --> 01:39:23,040
फिर ये हुआ था ना कि डिबेट के बाद फिर मैं जैसे मेरे जो मित्र या जानकार जो आर्य समाझी लड़के

1385
01:39:23,040 --> 01:39:27,120
उनसे मेरी बात हुई। तो उन्होंने जो मुझे रिस्पांस दिया तो ठीक है। अब वो आपको

1386
01:39:27,120 --> 01:39:31,040
विरोधी रूप में देखते तो उन्होंने उल्टा उल्टा बोला और मुझे थोड़ा सा वो चढ़ा बढ़ा दिया। एक टाइप से

1387
01:39:31,040 --> 01:39:35,200
थोड़ा ईगो और हाई हो गया था। तो तब तक मैंने वीडियो नहीं देखा था पूरा डिबेट का। तो वो चीजें

1388
01:39:35,200 --> 01:39:39,360
भी जो है वो लाइव में तो मैंने तो फिर मुझे तब तक मैं मतलब

1389
01:39:39,360 --> 01:39:43,440
वो आपको मतलब ऐसा नहीं था कि मैं किसी पॉइंट पे ह्यूमिलिट या ऐसे करूं नीचे गिराऊं। लेकिन फिर

1390
01:39:43,440 --> 01:39:47,440
मैंने सोचा कि अगर सामने वाले ने मतलब वो घमंड वाले वे में मैंने सोचा था कि अगर सामने वाला

1391
01:39:47,440 --> 01:39:51,440
मुझे कंटेंट दे रहा है तो क्यों मैं उसका फायदा ना उठाऊं। तो फिर मैंने लाइव में इस टाइप से जानबूझ के वो कटाक्ष वाला

1392
01:39:51,440 --> 01:39:53,760
भाव आता।

1393
01:39:53,760 --> 01:39:58,000
ठीक है। ये कब की बात हो रही है?

1394
01:39:58,000 --> 01:40:02,240
जब यह स्वीकार कर रहे हैं कुल मिलाकर के कि मैं गलत व्यवहार इसलिए

1395
01:40:02,240 --> 01:40:06,880
करता हूं कि मेरे जो लौंडे लपाड़ी हैं वो मुझे एक तो स्टिमुलेट

1396
01:40:06,880 --> 01:40:10,880
करते हैं। फकों पर चढ़ाते हैं। गलत जानकारियां देते हैं। गलत तथ्य देते हैं। मैं

1397
01:40:10,880 --> 01:40:14,960
ईगो से ग्रसित होता हूं। मेरी आदत पड़ चुकी है। क्योंकि मैं

1398
01:40:14,960 --> 01:40:19,120
बहुत बड़ा डिबेटर हूं। यहां वहां जाकर कायरों की तरह नपुंसकों की तरह

1399
01:40:19,120 --> 01:40:23,120
लोगों के वो ऑनलाइन उसमें जाकर टेली टेलीग्राम में जाकर के जो है

1400
01:40:23,120 --> 01:40:27,280
कुतर्क ये अब यही वाले अर्ध कुकुट न्याय में किया था। मैं अर्ध कुकुर [गला साफ़ करने की आवाज़] न्याय

1401
01:40:27,280 --> 01:40:31,280
करूंगा। तो मैं यही सब किया करता हूं। जिस कारण से मेरा ऐसा नेचर हो गया है

1402
01:40:31,280 --> 01:40:35,360
कि मैं ऐसे ही बिहेव करता हूं। ठीक है? तो पूर्वाग्रह

1403
01:40:35,360 --> 01:40:39,520
से ग्रसित होकर के कौन आता है यह आपको पता चला। अपनी गलती

1404
01:40:39,520 --> 01:40:43,920
कौन स्वीकारता है यह आपको पता चला। और इसी तरह के पूर्वाग्रह

1405
01:40:43,920 --> 01:40:47,920
से ग्रसित होकर आना इसका वहां पर दिखाई दिया था। और मेरा

1406
01:40:47,920 --> 01:40:52,080
इसके पास जाना क्यों नहीं बनता है। भाई मैं तुझे जानता हूं अच्छे से जब कि

1407
01:40:52,080 --> 01:40:56,320
तू पूर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति है। तू तू जो है उनसे बदतमीजी

1408
01:40:56,320 --> 01:41:00,640
करेगा, अनुशासन हीनता करेगा। इसलिए मैं गया। तो आपको यह सिद्ध हुआ

1409
01:41:00,640 --> 01:41:04,640
यहां पर कि ईगो है फुकों पर चढ़ाने से यह जो है प्रभावित होते

1410
01:41:04,640 --> 01:41:08,800
हैं कि मेरे दोस्तों ने मुझे बता दिया तो मैं उससे प्रभावित हो गया। मैं ईगो

1411
01:41:08,800 --> 01:41:12,800
से प्रभावित हो गया। मैं अपनी उस इसने क्या मेरा नेचुरल स्वभाव

1412
01:41:12,800 --> 01:41:16,880
है ऐसा। इस तरह से जाना कहीं पर। नेचुरल स्वभाव

1413
01:41:16,880 --> 01:41:21,840
है इस व्यक्ति का। यह खुद कह रहा है। अब बोलिए। जाओ

1414
01:41:21,840 --> 01:41:25,920
रोज आकर पीट पीट के छाती सब पपाएंगे। पपाओ। और

1415
01:41:25,920 --> 01:41:30,080
याद करो धूल चटाई गई है तुम्हारे व्यक्ति को धूल फिर

1416
01:41:30,080 --> 01:41:35,040
से कह रहा हूं बार-बार कहूंगा अभी आगे भी सुनते रहिएगा ठीक है

1417
01:41:35,040 --> 01:41:39,040
जी आप में से किसी को कुछ कहना हो तो आप कहें जी हटा दीजिए बस काफी

1418
01:41:39,040 --> 01:41:44,960
है [गला साफ़ करने की आवाज़]

1419
01:41:44,960 --> 01:41:49,120
जी इसको बात ये है मेन सबसे

1420
01:41:49,120 --> 01:41:54,080
प्रमुख बात ये है कि इसने अपने चलाटुओं के बीच में कुछ दो चार

1421
01:41:54,080 --> 01:41:58,240
लोगों के बीच में टोपी चिल्लर पार्टी के बीच में एक अपनी भूमिका

1422
01:41:58,240 --> 01:42:02,240
बनाई। बहुत बड़ा रैशनलिस्ट है। बहुत बड़ा फन्ने खान

1423
01:42:02,240 --> 01:42:06,320
है। तीस मार खान है। बहुत बड़ा जो है तर्क वाला व्यक्ति

1424
01:42:06,320 --> 01:42:10,400
है निर्भय। और हुआ क्या कि होते होते जब

1425
01:42:10,400 --> 01:42:14,480
वो शंकराचार्य के एक अल्पज्ञ शिष्य से टकरा गया तो उसकी वो

1426
01:42:14,480 --> 01:42:18,880
जो चीज थी ना वो भले ही दुनिया में बाद में पता चले पहले पता चले।

1427
01:42:18,880 --> 01:42:23,040
उसकी आत्मा में उसको आत्मा में चोट पहुंचने लगी।

1428
01:42:23,040 --> 01:42:28,000
वह अपने आप में जो है फील करने लगा मैं हार कैसे सकता हूं।

1429
01:42:28,000 --> 01:42:32,080
मैं कैसे हार सकता हूं? और उस मैं के चक्कर में सारी

1430
01:42:32,080 --> 01:42:36,320
चीजें जो है गड़बड़ पे गड़बड़ गड़बड़ पे गड़बड़ करता चला जा रहा है।

1431
01:42:36,320 --> 01:42:40,400
ठीक है? ये ऐसा व्यक्ति है। यह अपनी छवि को बचाने में लगा

1432
01:42:40,400 --> 01:42:44,960
है। किसी को लग रहा हो ना कि दयानंद जी के सिद्धांत को कुछ नहीं।

1433
01:42:44,960 --> 01:42:48,960
सिद्धांत को बचाने में नहीं लगा। अपनी छवि को बचाने में लगा है ये कि मेरी

1434
01:42:48,960 --> 01:42:53,120
वो चलाटुओं के भाई तुमने अंधों में का राजा बने घूमते थे टकरा गए

1435
01:42:53,120 --> 01:42:57,120
किसी दिन पहाड़ के सामने आ गए तो पता चल गई अपनी

1436
01:42:57,120 --> 01:43:00,000
चीजें और पहाड़ मैं नहीं हूं सिद्धांत पहाड़ है

1437
01:43:00,000 --> 01:43:04,000
गुरु पहाड़ है गोविंद पहाड़ है ग्रंथ पहाड़ पहाड़ मैं नहीं

1438
01:43:04,000 --> 01:43:08,000
हूं मैं तो अल्पज्ञ शिष्य हूं वो बात और है कि तुम इस अल्पज्ञ शिष्य के

1439
01:43:08,000 --> 01:43:14,000
सामने भी चवन्नी सिद्ध हुए चवन्नी छाप जी आप लोग बताएं

1440
01:43:14,160 --> 01:43:18,160
नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] बिल्कुल इसका इसके जो नकली मनगढ़ंत सिद्धांत

1441
01:43:18,160 --> 01:43:22,720
है जो इसने एक बना रखा था अपना एक

1442
01:43:22,720 --> 01:43:26,800
इमेज बना रखी थी कि भाई मैं ऐसा हूं वो अब ये गिर गया है वहां से अब

1443
01:43:26,800 --> 01:43:30,800
जब वहां से गिर गया है तो फिर ये क्या करेगा वो साइकोपैथ वाली एक

1444
01:43:30,800 --> 01:43:34,880
भूमिका होती है ना जो साइकोपैथ होता है की वो ऐसी

1445
01:43:34,880 --> 01:43:38,880
चीजें करता रहता है है ना वो अच्छा गजनी वाली गजनी

1446
01:43:38,880 --> 01:43:43,280
वाले लक्षण भी इसमें आ रहे हैं भूल भी जा रहा है [हंसी]

1447
01:43:43,280 --> 01:43:47,280
अमीर खान के गजनी गजनी यही बात है ना देखिए यही

1448
01:43:47,280 --> 01:43:51,280
बात है देखिए कितनी भी चीजें होंगी मगर हम लोग ऐसा

1449
01:43:51,280 --> 01:43:55,360
आलंबन नहीं लेने लगते कि झूठ हो जिसमें ये व्यक्ति झूठ को भी लेता

1450
01:43:55,360 --> 01:43:59,360
है तो इससे क्या सिद्ध होता है अच्छा क्या ये मानता है कि दयानंद जी झूठ भी बोलने लगते

1451
01:43:59,360 --> 01:44:03,520
थे शास्त्रार्थ में जीतने के लिए बताओ बताओ वो

1452
01:44:03,520 --> 01:44:07,760
भी बात है बिल्कुल तो फिर ये वहां पर झूठ का आलंबन ले रहा है ना किसको

1453
01:44:07,760 --> 01:44:12,000
बचा रहा है ये दयानंद जी को भी नहीं बचा रहा है कोई यह सोच रहा हो ना कि आर्य

1454
01:44:12,000 --> 01:44:15,680
समाज आर्य समाज के लिए लड़ा यह व्यक्ति

1455
01:44:15,680 --> 01:44:19,760
सेल्फ वो क्या कहते हो उसको

1456
01:44:19,760 --> 01:44:23,920
सेल्फ सेंट्रिक सेल्फ सेंट्रिक व्यक्ति है ये अपने

1457
01:44:23,920 --> 01:44:28,000
को बचा रहा है जैसे किसी से बात हो रही है जैसे वो रामपाल के लोग नहीं आते

1458
01:44:28,000 --> 01:44:32,160
हैं होते होते रामपाल का भी विरोध करने लगेंगे उसी तरीके

1459
01:44:32,160 --> 01:44:36,160
से आया वैसे न्याय की बात करता है फिर अर्ध कुकुट न्याय में छोटी बात

1460
01:44:36,160 --> 01:44:40,210
ना पड़ जाए मैं अकुट न्याय करूंगा लोग

1461
01:44:40,210 --> 01:44:44,320
[हंसी] ये क्या है ये ऋषि दयानंद जी ने सिखाया

1462
01:44:44,320 --> 01:44:50,240
है को न्याय करना यह बात है। [गला साफ़ करने की आवाज़]

1463
01:44:50,240 --> 01:44:54,320
ठीक है। किसी एक व्यक्ति की कह रहा था क्या कह रहा था कि एक बात गलत है तो उसकी सारी बातें

1464
01:44:54,320 --> 01:44:58,720
गलत नहीं मानेंगे हम। है ना? वो हमारे लिए प्रमाण नहीं हुआ ना। उसको

1465
01:44:58,720 --> 01:45:02,960
उसकी किसी बात को लेने के लिए तृतीय प्रमाण होना चाहिए। तृतीय

1466
01:45:02,960 --> 01:45:07,920
प्रमाण क्या है? ये बात।

1467
01:45:07,920 --> 01:45:13,120
और उससे [गला साफ़ करने की आवाज़] पहले तो अकु ने न्याय स्वीकार किया ना। मैं मानूंगा। हां, मैं मानूंगा।

1468
01:45:13,120 --> 01:45:17,520
ठीक है। अच्छा अब अब आगे चलते हैं।

1469
01:45:17,520 --> 01:45:21,600
अभी [नाक से की जाने वाली आवाज़] बहुत जरूरी जरूरी बातें बाकी हैं। अ

1470
01:45:21,600 --> 01:45:25,600
मान लिया कि पहली बात तो सार्वजनिक जगह पर षड्यंत्र हो नहीं सकता। हमने ये सब बातें कर

1471
01:45:25,600 --> 01:45:30,000
दी हैं कि भाई सार्वजनिक जगह पे चर्चा करने को बोलता।

1472
01:45:30,000 --> 01:45:30,880
तुमने आर्य समाज

1473
01:45:30,880 --> 01:45:36,160
का नाम लिया। हम ये सारी बातें हो गई हैं।

1474
01:45:36,160 --> 01:45:40,160
पिच भी इसकी पहले हाई हुई थी। क्या डाला? क्या डाला? ये इसी की हाई

1475
01:45:40,160 --> 01:45:44,240
हुई थी पिच। ठीक है? आपने हमारे आचार्यों का अपमान किया है। यह

1476
01:45:44,240 --> 01:45:48,240
सब इसका ही हुआ था। अच्छा गुरु भाइयों

1477
01:45:48,240 --> 01:45:52,320
ने उसे रोका क्यों? हम नाश करने की बात

1478
01:45:52,320 --> 01:45:56,320
तुम कर रहे हो। कॉल रिकॉर्डिंग के द्वारा षड्यंत्र तुम कर रहे हो। ये सब चीजें

1479
01:45:56,320 --> 01:46:00,560
तुम कर रहे हो तो क्रोध तो आएगा ही ना। तब भी जो है तुमको

1480
01:46:00,560 --> 01:46:04,880
रोका ना जाए। हमारे प्रांगण में चिल्लाकर वातावरण दूषित

1481
01:46:04,880 --> 01:46:10,880
कर रहे हो तब भी क्रोध ना आए। तो

1482
01:46:11,360 --> 01:46:15,440
वर्तमान में कानून व्यवस्था के अनुसार अपराधिक माने जाने वाली

1483
01:46:15,440 --> 01:46:19,600
गति गतिविधियों में गतिविधियों के संबंध में जब तुमसे स्पष्टीकरण मांगने

1484
01:46:19,600 --> 01:46:23,680
हेतु तुम्हें रोका गया तब भी तुम वहां पर मानसिक और शारीरिक दबाव मेरे सामने

1485
01:46:23,680 --> 01:46:27,840
मेरे गुरु भाइयों बना रहे हो भाई आए हो और इस तरह से

1486
01:46:27,840 --> 01:46:31,920
बवंडर अभद्रता करके जाओगे और तुम्हारी जो पूर्व की चीजें

1487
01:46:31,920 --> 01:46:35,920
उनसे उनके बारे में तुमसे पूछा तो जाएगा ना स्पष्टीकरण तो मांगा जाएगा ना

1488
01:46:35,920 --> 01:46:40,000
तो तब तुम्हें जो है जुतिया गया था, धूल

1489
01:46:40,000 --> 01:46:44,000
चटाया गया था और तुम्हारी औकात तुम्हें

1490
01:46:44,000 --> 01:46:48,080
याद दिलाई गई थी। और असहाय बच्चे की तरह तुम जो वो

1491
01:46:48,080 --> 01:46:52,080
पैरवैर चलाना वो था ना वो हो रहा था तुम्हारा। मैं तो मुस्कुरा रहा

1492
01:46:52,080 --> 01:46:57,600
था मैं एक वो फोटो डाली है ना आप लोग पोस्ट में जाकर के देख लीजिए मुस्कान।

1493
01:46:57,600 --> 01:47:01,600
तो तब भी मेरे [गला साफ़ करने की आवाज़] गुरु भाइयों ने वो सारी बातें बता चुका

1494
01:47:01,600 --> 01:47:05,600
हूं। पुलिस वाले बाद में आए। मेरे गुरु भाइयों ने ही इसको बचाया और यह नीच जो है

1495
01:47:05,600 --> 01:47:09,600
अपनी वीडियो में झूठ बोल रहा है। अब बात आती है

1496
01:47:09,600 --> 01:47:13,680
इनकी अविवाहित संगनी की। ठीक है? अविवाहित

1497
01:47:13,680 --> 01:47:16,800
संगनी की बात आती है।

1498
01:47:16,800 --> 01:47:21,200
तो भैया ये जो वीडियो है ना ये वाला

1499
01:47:21,200 --> 01:47:25,280
तीसरा वाला विवाद से पिटाई तक वाला वो अब जरा

1500
01:47:25,280 --> 01:47:28,880
पूरा चला दीजिए।

1501
01:47:28,880 --> 01:47:34,880
विवाद से पिटाई तक वाला वीडियो पूरा चला दीजिए। [गला साफ़ करने की आवाज़]

1502
01:47:44,960 --> 01:47:49,120
तुमने बिना बिना परमिशन के तुमने क्यों डाला तुमने? क्या डाला हमने? तुमने डाला ना अपने

1503
01:47:49,120 --> 01:47:53,200
YouTube पे डाला। उधर आवाज नहीं। तुमने अपने YouTube पे डाला कि नहीं डाला?

1504
01:47:53,200 --> 01:47:59,200
महाराज [हंसी]

1505
01:48:02,160 --> 01:48:08,160
मत करो।

1506
01:48:13,440 --> 01:48:16,560
कर रहे होतजी

1507
01:48:16,560 --> 01:48:21,120
करने आए अरे भैया

1508
01:48:21,120 --> 01:48:26,320
बदतमीजी करने आए हो तुम जूते से मारे जाओगे समझे

1509
01:48:26,320 --> 01:48:30,400
प्रश्न पूछने का तरीका होता है कहां है वो दीदी जी वहां

1510
01:48:30,400 --> 01:48:35,200
है वहां दीदी

1511
01:48:35,200 --> 01:48:41,200
अंदर चलिए अंदर चलिए अंदर चलिए अंदर चलिए

1512
01:48:41,520 --> 01:48:45,520
मैं पूछ रहा हूं कौन हो आप कौन है मैं पूछ

1513
01:48:45,520 --> 01:48:49,600
रहा हूं आप कौन है इनकी अब देखिए

1514
01:48:49,600 --> 01:48:53,840
पॉज भी कर दो भाई साथ के साथ इनसे मैं तीन बार पूछा

1515
01:48:53,840 --> 01:48:58,000
हूं आप कौन है इनकी आप कौन है इनकी आप बहन है इनकी इनका

1516
01:48:58,000 --> 01:49:02,800
मुंह सूख गया है अविवाहित संगनी का क्या बोलना है

1517
01:49:02,800 --> 01:49:06,880
ठीक है तो बहन तो थी नहीं पूछने पर बोल नहीं पा रही है मामले को भटका रही

1518
01:49:06,880 --> 01:49:12,880
है जी चलाइए

1519
01:49:13,360 --> 01:49:17,440
आप कौन है मैं पूछ रहा हूं आप कौन है आप कौन है

1520
01:49:17,440 --> 01:49:21,600
मैं पूछ मैं पूछ रहा हूं आप कौन है इनकी नहीं नहीं मैं पूछ

1521
01:49:21,600 --> 01:49:25,760
रहा हूं आप उनकी बहन है ना यहां पे ये व्यक्ति प्रश्न करने आया

1522
01:49:25,760 --> 01:49:29,840
उसको कहा गया भाई विधिवत उत्तर ले लो चलके ऊपर से गुरु

1523
01:49:29,840 --> 01:49:35,840
जी सिर्फ पकड़ रहे हैं उनको

1524
01:49:36,160 --> 01:49:40,560
अरे वो हाथ चला रहा

1525
01:49:40,560 --> 01:49:46,240
ऑडियो डाली हमने नहीं किया है

1526
01:49:46,240 --> 01:49:52,240
किसी की ऑडियो बिना

1527
01:49:58,240 --> 01:50:02,320
यहां पॉज करो पॉज करो पॉज करो देखो यहां पर जब

1528
01:50:02,320 --> 01:50:06,480
मोबाइल बंद करने की बात की गई तो मैं क्या कह रहा हूं नहीं नहीं चलने दो तो यहां सबके अपने

1529
01:50:06,480 --> 01:50:10,800
अपने विवेक के अनुसार जो जो जिसको जैसा समझ में आ रहा था वो कह रहा था मगर

1530
01:50:10,800 --> 01:50:14,880
जो वहां के अथ अथॉरिटी में जो

1531
01:50:14,880 --> 01:50:18,960
लोग थे वो मेरे सहित जो वहां के शासन प्रशासन में थे उन्होंने ये नहीं कहा कि

1532
01:50:18,960 --> 01:50:23,040
आप जो है वो बंद करो वो जिसके जहां जो विवेक काम कर रहा है वो अपना बोल रहा है उनसे

1533
01:50:23,040 --> 01:50:27,120
मगर मैंने क्या कहा नहीं नहीं वो बंद मत बंद करने को मत कहो मोबाइलबाइल

1534
01:50:27,120 --> 01:50:29,280
मोबाइल

1535
01:50:29,280 --> 01:50:33,840
कैमरा बंद करने को ये सब बातें मत कहो। यह मैंने कहा कैमरा बंद मत करवाओ।

1536
01:50:33,840 --> 01:50:38,080
ठीक है? और यह आप ध्यान दो कि इस स्त्री से मैंने दो तीन बार पूछा

1537
01:50:38,080 --> 01:50:42,240
इस मातृशक्ति से कि आप कौन हो उसकी? मनुस्मृति में कहा गया है ना या

1538
01:50:42,240 --> 01:50:46,320
तो भाई के साथ रहना है, भाई के सानिध्य में या फिर पिता के सानिध्य

1539
01:50:46,320 --> 01:50:50,400
में, बेटे के सानिध्य में या फिर पति के सानिध्य में। तो मैं

1540
01:50:50,400 --> 01:50:54,400
इससे पूछ रहा हूं इस मातृशक्ति से कि भाई तू कौन है? इसकी ये

1541
01:50:54,400 --> 01:50:59,040
जो व्यक्ति आया था तो ये क्या कह रही है? वहां पर मौन है और बात को विषयंतर

1542
01:50:59,040 --> 01:51:01,360
कर रही है कि उनको रोकिए ना उनको रोकिए

1543
01:51:01,360 --> 01:51:05,520
दो मिनट दो सेकंड के लिए चुप भी हो गई यह होता है चोर की दाढ़ी

1544
01:51:05,520 --> 01:51:09,520
में तिनका ठीक है तो चुप भी हो गई बोल नहीं पा रही है कि

1545
01:51:09,520 --> 01:51:14,080
मैं कौन हूं इसकी शर्म आ रही है बोलने में वहां बोल ही नहीं रही है

1546
01:51:14,080 --> 01:51:20,080
देखिए चलिए चलाइए

1547
01:51:24,960 --> 01:51:28,720
मत कराओ डिलीट नहीं होगा।

1548
01:51:28,720 --> 01:51:32,720
ठीक है? मत कराओ। डिलीट नहीं होगा वो। यह सब मत करो। यही

1549
01:51:32,720 --> 01:51:36,800
हमने वहां कहा था। खैर तो अब [गला साफ़ करने की आवाज़] वो यह

1550
01:51:36,800 --> 01:51:40,800
नहीं बता रही है कि वो कौन है इनकी। ठीक है? अच्छा माता जैसी दिख

1551
01:51:40,800 --> 01:51:45,600
नहीं रही है। बेटी जैसी दिख नहीं रही है। अच्छा पत्नी के जो

1552
01:51:45,600 --> 01:51:49,680
अगर आर्य समाज के अनुसार भी देख लें। तो जो लक्षण जो

1553
01:51:49,680 --> 01:51:54,880
भी कुछ प्रतीक हैं वो भी नहीं दिख रहे हैं उसमें। और

1554
01:51:54,880 --> 01:51:59,040
जो यह जूता छोड़ भगोड़ा है यह भी ऐसा नहीं दिखता है कि कोई परिवार

1555
01:51:59,040 --> 01:52:03,280
वाला व्यक्ति होगा। एक लौंडा लपाड़ी वाला ही मामला है उसका व्यक्तित्व उसका तो ऐसा कहीं

1556
01:52:03,280 --> 01:52:07,360
से भी कुछ प्रतीत नहीं हो रहा कि वो पत्नी है। तो जब ऐसा कुछ नहीं है तो क्या

1557
01:52:07,360 --> 01:52:11,360
कहा? यहां एक विकल्प और हो सकता है कि इनके जो मंदिर है ना जहां पर

1558
01:52:11,360 --> 01:52:15,680
एक दिन में किसी विधर्मी को मलेच्छ को जो है ब्राह्मण

1559
01:52:15,680 --> 01:52:19,840
बना करके और उसको हिंदू बिटिया सौंप दी जाती है एक दिन में

1560
01:52:19,840 --> 01:52:23,840
वहां से इनको कोई सर्टिफिकेट दिया गया हो बिना विवाह

1561
01:52:23,840 --> 01:52:28,160
के साथ में रहने का तो यह और हो सकता है परंतु यह स्थिति भी स्पष्ट

1562
01:52:28,160 --> 01:52:32,160
नहीं है अभी कि यह विकल्प है कि नहीं तो फिर ऐसे में क्या कहा जाए उसको

1563
01:52:32,160 --> 01:52:36,160
क्या संज्ञा दी जाए तो मैंने शुरू में कहा था ना वो संज्ञा वो संज्ञा यह

1564
01:52:36,160 --> 01:52:40,400
है अविवाह विवाहित संगनी भाई संगनी है मगर अविवाहित है विवाहित

1565
01:52:40,400 --> 01:52:45,360
तो है नहीं तो इसलिए हमने कहा था अविवाहित संगनी तो खैर

1566
01:52:45,360 --> 01:52:48,560
तो ये [गला साफ़ करने की आवाज़]

1567
01:52:48,560 --> 01:52:52,960
अविवाहित संगनी की अब बात आगे करते हैं कि यह

1568
01:52:52,960 --> 01:52:56,960
जो स्त्री है यह किस तरह से इसके साथ यहां पर है यह वहां पर ना तो

1569
01:52:56,960 --> 01:53:01,040
भाई मान लो सहयोगी है तो बहन तो होगी ना कम से कम बहन तो कही जाएगी

1570
01:53:01,040 --> 01:53:05,360
ना अगर सहयोगी भी है तो एक दृष्टि तो रखी जाएगी ना कि ऐसे

1571
01:53:05,360 --> 01:53:09,440
निर्वाद रूप से स्वतंत्र रूप से कहीं भी घूम रही है। यह एक मान लिया जाए। तो वो

1572
01:53:09,440 --> 01:53:09,940
यह भी नहीं

1573
01:53:09,920 --> 01:53:14,400
कह रही कि मैं बहन हूं उनकी। उसको दिक्कत हो रही। मुंह पे ताला पड़ गया। जब मैंने उससे पूछा

1574
01:53:14,400 --> 01:53:19,630
कि आप कौन हो इसकी? दोबारा दिखा दो वो कौन हो वाला सीन?

1575
01:53:19,630 --> 01:53:25,630
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1576
01:53:28,960 --> 01:53:33,040
मैं पूछ रहा हूं। आप कौन हो? आप कौन? मैं पूछ मैं पूछ

1577
01:53:33,040 --> 01:53:35,680
रहा हूं। आप कौन है?

1578
01:53:35,680 --> 01:53:39,680
यह देखा आंखें देखी है इसकी जो साथ में आई थी

1579
01:53:39,680 --> 01:53:43,920
तो आप कौन है मैं पूछ रहा हूं आप कौन है कौन हो आप कौन

1580
01:53:43,920 --> 01:53:48,240
है मैं पूछ मैं पूछ रहा हूं आप कौन है इनकी नहीं

1581
01:53:48,240 --> 01:53:54,080
मैं पूछ रहा हूं आप उनकी बहन है ना यहां पे व्यक्ति प्रश्न करने आया

1582
01:53:54,080 --> 01:53:58,160
ठीक है तो ये हो गया हां अब बात

1583
01:53:58,160 --> 01:54:02,240
यह है वो जो कैमरा ना चलाने की भावना कई कई लोगों में आई कई लोग टोक सकते हैं

1584
01:54:02,240 --> 01:54:06,880
ये बात अलग है कि जो तुम्हारी जो

1585
01:54:06,880 --> 01:54:10,960
अविवाहित संगनी जिस प्रकार तुम्हारी अवैध गतिविधियों में

1586
01:54:10,960 --> 01:54:15,200
अभिनय पूर्वक पूरे तन मन धन से साथ दे रही थी

1587
01:54:15,200 --> 01:54:19,360
उससे अवश्य सिद्ध होता है कि वो कितनी मर्मज्ञ

1588
01:54:19,360 --> 01:54:23,440
थी इन सब चीजों की इस तरह के आचरण में जो है संलग्न होने की

1589
01:54:23,440 --> 01:54:25,040
और तुम्हारा साथ देने की

1590
01:54:25,040 --> 01:54:29,120
हर तरह से हर प्रकार से तो यह सब इससे स्पष्ट हो जाता है। जैसे वो

1591
01:54:29,120 --> 01:54:33,280
वाली बात है ना कि वहां पर जो लोग कह रहे थे कि कैमरा बंद कराने को कहा गया तो वो कोई

1592
01:54:33,280 --> 01:54:37,360
सुनियोजित तरीके से नहीं था। परंतु इनकी जो चीजें हैं जो आप निर्भय

1593
01:54:37,360 --> 01:54:41,680
के वीडियो में भी देखिएगा कि वो बार-बार उस चीज को रिकॉर्ड करवाना चाह रही है कि हमको माइक

1594
01:54:41,680 --> 01:54:45,680
नहीं दिया गया। है ना? और यहां पर भी रोकिए उनको रोक लीजिए। ये दिखा रही

1595
01:54:45,680 --> 01:54:49,680
है वहां बहुत मार पड़ रही है। वो चला गया है। मगर ये दिखा रही वहां उनको जिससे

1596
01:54:49,680 --> 01:54:53,680
कैमरे में वो बात आए रोकिए उनको रोकिए। वो मार रहे हैं। इस तरह से वो प्रदर्शित कर रही

1597
01:54:53,680 --> 01:54:57,840
है। जब पूछा जा रहा है बहन हो क्या? बहन हो क्या? क्या हो उनकी?

1598
01:54:57,840 --> 01:55:01,840
तो मौन है कुछ नहीं उसने आज के वीडियो में भी जो डाला है ना

1599
01:55:01,840 --> 01:55:06,240
तो महिला संयोगिनी डाला है सहयोगिनी वहां पे ये नहीं डाला वो बहन है

1600
01:55:06,240 --> 01:55:10,880
क्या है कुछ नहीं महिला सहयोगिनी यानी अविवाहित संगनी

1601
01:55:10,880 --> 01:55:14,960
ठीक है तो हमारा तो षड्यंत्र नहीं था ये कैमरा इत्यादि वाला

1602
01:55:14,960 --> 01:55:18,960
हां मगर जिस तरह से यह जो अविवाहित संगनी जिस प्रकार से

1603
01:55:18,960 --> 01:55:23,600
तुम्हारी अवैध गतिविधियों में अभिनय पूर्वक पूरे तन मन धन से

1604
01:55:23,600 --> 01:55:28,080
साथ दे रही थी उससे अवश्य सिद्ध होता है कि वह कितनी मर्मज्ञ

1605
01:55:28,080 --> 01:55:32,320
थी और किस किस प्रकार से तुम्हारी संतुष्टि हेतु

1606
01:55:32,320 --> 01:55:36,560
तुम्हारी अनैतिक चेष्टाओं में तुम्हारा साथ देती

1607
01:55:36,560 --> 01:55:40,080
है। यह सिद्ध हो रहा है वहां है ना

1608
01:55:40,080 --> 01:55:44,160
तुम्हारी जो अनैतिक चेष्टाएं होती हैं उसमें किस तरीके से जो जैसी अनैतिक चेष्टाएं

1609
01:55:44,160 --> 01:55:48,160
तुमने यहां की तो और भी होती होंगी तो उसमें भी यह तुम्हारा इसी प्रकार से साथ

1610
01:55:48,160 --> 01:55:52,720
देती होगी जिस प्रकार से इसने यहां पे दिया है तो वो सिद्ध हो रहा है कि किस तरीके की मर्मज्ञ

1611
01:55:52,720 --> 01:55:57,120
ये खिलाड़ी मातृशक्ति आई थी वहां पे तुम्हारी जो अविवाहित

1612
01:55:57,120 --> 01:56:01,120
संगनी थी खैर अब बात आ जाती है थोड़ा सा

1613
01:56:01,120 --> 01:56:06,960
उस पे आ जाते हैं हटा दीजिए जी अभी आपको कुछ कहना है भाई साहब

1614
01:56:06,960 --> 01:56:11,520
जी [गला साफ़ करने की आवाज़] सनातन शंकर जी

1615
01:56:11,520 --> 01:56:15,680
नहीं इससे तो स्पष्ट हो ही गया जो अभी वीडियो दिखाया

1616
01:56:15,680 --> 01:56:20,000
कि भाई ये षड्यंत्र के साथ ही ये व्यक्ति आया था उनको लेकर

1617
01:56:20,000 --> 01:56:24,160
और पूरी की पूरी प्लानिंग थी कि हम इस तरह से रिकॉर्ड करेंगे और वहां से निकल

1618
01:56:24,160 --> 01:56:28,560
जाएंगे लेकिन उनको ये पता नहीं था कि भाई शिवश भी वहां पर होंगे

1619
01:56:28,560 --> 01:56:33,520
और ये सब हो जाएगा ये उनको आभास ही नहीं था बिल्कुल भी हम

1620
01:56:33,520 --> 01:56:37,760
और रिकॉर्डिंग करने से किसी ने रोका नहीं उनको यह भी बात है कि कोई ये जो कह रहे थे ना कि

1621
01:56:37,760 --> 01:56:42,000
रिकॉर्डिंग से रोका और ये देखिए वहां वहां हर तरह के लोग आए हुए हैं। श्रद्धालु

1622
01:56:42,000 --> 01:56:46,000
आए हुए हैं। सामान्य लोग भी आए हुए हैं जो मंदिर आए हैं वहां पे प्राण प्रतिष्ठा हुई है

1623
01:56:46,000 --> 01:56:50,000
उस दिन तो हर व्यक्ति अपने हिसाब से देख रहा है कि भाई ऐसा ना हो जाए

1624
01:56:50,000 --> 01:56:54,000
यहां का कुछ दुष्प्रचार हो। अपने और मेरा मेरे भी उसको जो मेरा जो

1625
01:56:54,000 --> 01:56:55,200
वीडियो चला रहे है उसको भी

1626
01:56:55,200 --> 01:56:59,440
कैमरा बंद करने को कह रहे हैं तो वो सिद्ध होता है ना कि अगर वो कहते तो उसी को कहते

1627
01:56:59,440 --> 01:57:03,440
अगर योजना होती तो मुझे मेरे वाले को क्यों कहते तो वो अपनेप

1628
01:57:03,440 --> 01:57:07,520
विवेक से जिसको जांच लग रहा है वो कह रहा है उस भीड़ भीड़ में कुछ हम डिसाइड नहीं कर

1629
01:57:07,520 --> 01:57:11,760
सकते ना कि कौन क्या कहेगा वहां कोई टीम वर्क थोड़ी ना है इस बात को लेकर के

1630
01:57:11,760 --> 01:57:15,760
वही मैं बता रहा हूं हां मगर इनकी जो अविवाहित संगनी है वो जरूर

1631
01:57:15,760 --> 01:57:20,080
ऐसा बिहेव कर रही है कि क्या कहते हैं जो बहुत मर्मज्ञ

1632
01:57:20,080 --> 01:57:24,480
है और इसकी इस तरह के अनैतिक चेष्टाएं जो होती है उसमें पूर्ण समर्थन

1633
01:57:24,480 --> 01:57:29,120
देती है हर जगह तन मन धन से जैसे यहां पे दे रही है ना

1634
01:57:29,120 --> 01:57:33,200
इसमें थोड़ा सा आप बताएं अभी तक नहीं तो फिर समापन की

1635
01:57:33,200 --> 01:57:37,440
ओर चले जी नहीं नहीं बिल्कुल वो

1636
01:57:37,440 --> 01:57:41,520
पूरा जो होता है ना स्क्रिप्ट पूरी माइंड में होती है कि इस

1637
01:57:41,520 --> 01:57:46,000
तरह से करना है ये ये बोलना है हम ये बोलेंगे कि हमें माइक नहीं दिया गया

1638
01:57:46,000 --> 01:57:50,160
जबकि मैंने पूरी रिकॉर्डिंग देखी गुरुदेव की उसमें सबसे ज्यादा

1639
01:57:50,160 --> 01:57:54,400
जो इसी इसी ने टाइम लिया है प्रश्नोत्तरी में

1640
01:57:54,400 --> 01:57:58,400
सबसे ज्यादा टाइम इसी को दिया गया है और उसके बाद भी ये लास्ट

1641
01:57:58,400 --> 01:58:02,480
में जब बार-बार प्रश्न कर रहा था तो गुरुदेव जी गुरुदेव इसको

1642
01:58:02,480 --> 01:58:07,360
कह रहे थे कि भाई अरे एक के बाद एक बोल रहे हो त ठंड रखो जी है ना

1643
01:58:07,360 --> 01:58:10,400
ये भी बोला क्या इनको ये कमेंट देखिए

1644
01:58:10,400 --> 01:58:14,560
क्या [हंसी][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] कि वो भाग रहा होगा इसलिए वो निर्भय को रोकने को

1645
01:58:14,560 --> 01:58:19,040
बोल रही होगी [हंसी]

1646
01:58:19,040 --> 01:58:23,280
कि जूता छोड़ भगोड़ा मुझे क्यों छोड़ गया? मुझे छोड़

1647
01:58:23,280 --> 01:58:27,360
के भाग गया भाई। अभी से छोड़ के भाग गया। भाई बाद में क्या

1648
01:58:27,360 --> 01:58:31,440
भाई? भाई ये जो कह रही है ना कि मुझे छोड़ के क्यों भाग गया है? इस

1649
01:58:31,440 --> 01:58:35,520
तरह से अविवाहित जीवन जो अविवाहित संगनियां होती हैं उनका इसी तरीके

1650
01:58:35,520 --> 01:58:41,520
से उपयोग करने के बाद लोग इसी तरह से छोड़ जाते हैं। खैर जी जी

1651
01:58:41,760 --> 01:58:46,560
खैर [गला साफ़ करने की आवाज़] 100 की सीधी एक बात षड्यंत्र की भावना

1652
01:58:46,560 --> 01:58:50,720
हम मा अगर अब थोड़ा सा उस शास्त्रवाद जी आप ये आपको

1653
01:58:50,720 --> 01:58:54,960
ये संज्ञा कैसी लगी ये बताइए जो भाई उसने तो बताया नहीं मैं बहन हूं तो हमने

1654
01:58:54,960 --> 01:58:58,960
जो ये बात बोली है अविवाहित संगिनी इस पर आप थोड़ा सा प्रकाश डालिए कैसा लगा

1655
01:58:58,960 --> 01:59:04,160
आपको ये बताइए

1656
01:59:04,160 --> 01:59:08,240
ये वाला संज्ञा तो दिख रहा है।

1657
01:59:08,240 --> 01:59:12,030
हां जी हां जी

1658
01:59:12,030 --> 01:59:16,320
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] हम मैं बोलात जी बोल आप

1659
01:59:16,320 --> 01:59:19,360
शास्त्र जी बोल

1660
01:59:19,360 --> 01:59:23,360
जी देखिए मुझे तो ये लग रहा है कि वही की पहले

1661
01:59:23,360 --> 01:59:27,440
तो वो तो अविवाहित थी ही और निर्भय

1662
01:59:27,440 --> 01:59:31,680
के इस जो छल था उसमें वो सहभागी भी थी

1663
01:59:31,680 --> 01:59:35,680
तो संगिनी भी थी तो इसलिए सही है टाइटल सही है

1664
01:59:35,680 --> 01:59:40,080
बिल्कुल बिल्कुल बिलकुल बिलकुल जी आजाद जी

1665
01:59:40,080 --> 01:59:44,320
मैं ये कह रहा था क्या आर्य समाज का मनुस्मृति जो है इसमें मिलावट

1666
01:59:44,320 --> 01:59:48,640
मानते हैं क्या ये ये लोग भी इस चीज को प्रमोट करेंगे कि ऐसे अविवाहित

1667
01:59:48,640 --> 01:59:53,360
स्त्रियों के साथ जगह जगह घूमा जाए दूर-दूर जाया जाए

1668
01:59:53,360 --> 01:59:57,440
क्या ये लोग खुद इस इन सब चीजों को प्रमोट करेंगे पहली बात तो ये आर्य समाजियों को ही

1669
01:59:57,440 --> 02:00:01,680
निर्भय को लात मार के बाहर निकालना चाहिए जैसे हमारी जगह से

1670
02:00:01,680 --> 02:00:05,920
वो निकाला हुआ है आज फोन आया था मेरे पास किसी का

1671
02:00:05,920 --> 02:00:09,920
अरे वो आर्य आर्य नहीं हमसे हमारे से क्यों नाम जोड़ दिया आपने? तो

1672
02:00:09,920 --> 02:00:14,080
मैंने उनको बताया कि भाई वो मुझसे बार-बार प्रेशर डाल रहे थे कि भाई आपने

1673
02:00:14,080 --> 02:00:18,160
कैसे उसको आर्य बता दिया। आर्य समाज बता दिया। मैंने कहा भाई आपके यहां

1674
02:00:18,160 --> 02:00:19,280
की ये रीत है।

1675
02:00:19,280 --> 02:00:23,360
दयानंद जी ने अपने आप अपने को घोषित कर लिया कि मैं जैमिनी से जुड़ा हुआ

1676
02:00:23,360 --> 02:00:27,680
हूं। अपने आप ही तो घोषित किया कि मैं ब्रह्मा

1677
02:00:27,680 --> 02:00:31,760
से ले जैमिनी पर्यंत तक में जुड़ा हुआ हूं उनसे। ठीक है? तो इसने

1678
02:00:31,760 --> 02:00:35,760
उनसे अपने आप को इसने उसने हम अपने आप को जोड़ के घोषित कर लिया। इसमें हम क्या

1679
02:00:35,760 --> 02:00:39,760
करें? तो आपके यहां क्या सिस्टम है? कोई भी घोषित कर सकता है। मैं हूं दयानंद

1680
02:00:39,760 --> 02:00:43,760
जी को मानने वाला आर्य समाझ जैसे दयानंद जी ने घोषित कर लिया था।

1681
02:00:43,760 --> 02:00:47,840
मैं हूं वेदों को मानने वाला जैमिनी ऋषि पर्यंत मानने वाला

1682
02:00:47,840 --> 02:00:51,920
वैदिक हमारे यहां परंपरा है। किसी की पहचान

1683
02:00:51,920 --> 02:00:56,000
उसके पूर्वाचार्य जो प्रामाणिक आचार्य होते हैं वो तय करते हैं। और अगर

1684
02:00:56,000 --> 02:01:00,800
कोई अपने से बोलने लगता है तो उसका खंडन होता है। जी

1685
02:01:00,800 --> 02:01:04,960
सही बात है। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] अब आ जाते हैं

1686
02:01:04,960 --> 02:01:09,200
कंक्लूजन पे। 100 की सीधी एक बात यह है कि अगर

1687
02:01:09,200 --> 02:01:13,760
तुम्हें षड्यंत्र मात्र की संभावना दिख रही है। षड्यंत्र

1688
02:01:13,760 --> 02:01:17,920
षड्यंत्र की संभावना मात्र है। पर तुमने रिस्क ना

1689
02:01:17,920 --> 02:01:22,720
लेकर रिस्क लेने का साहस ना दिखाकर पीठ दिखाकर

1690
02:01:22,720 --> 02:01:26,960
भागने वाले के रूप में अपने आप को ख्यापित किया। भाई तुम्हें

1691
02:01:26,960 --> 02:01:31,600
षड्यंत्र की संभावना दिख भी रही है। मान लेते हैं कि षड्यंत्र ही था। संभावना

1692
02:01:31,600 --> 02:01:34,480
थी। तब भी तो तुम्हारा वहां से पीठ दिखाकर

1693
02:01:34,480 --> 02:01:38,560
भागना सिद्ध होता है ना। षड्यंत्र से डर कर। चलो मान लो

1694
02:01:38,560 --> 02:01:42,800
चर्चा से डर कर तुम नहीं भागे। षड्यंत्र से डर कर तो भागे ना।

1695
02:01:42,800 --> 02:01:46,880
मेरे को भी बुलाया गया था। तुमसे ज्यादा नुकसान करे बैठा हूं मैं

1696
02:01:46,880 --> 02:01:50,960
इस का। इस का एक प्रमुख मंदिर दिल्ली में

1697
02:01:50,960 --> 02:01:55,680
वहां मुझे बुलाया गया था और कक्ष में ले जाकर बात करने को कहा गया।

1698
02:01:55,680 --> 02:01:59,680
हर व्यक्ति के जीवन में जब वह कोई साहस साहस पूर्ण कार्य करने

1699
02:01:59,680 --> 02:02:03,680
जाता है ना एक क्षण आता है निर्णय लेने का कि मुझे

1700
02:02:03,680 --> 02:02:07,680
यहां से आगे जाना है कि नहीं जाना है तो उसके अंदर सत्य का

1701
02:02:07,680 --> 02:02:11,760
बल यदि होता है तब वो अपना साहस आगे बढ़ाता है

1702
02:02:11,760 --> 02:02:15,840
तुम्हारे को षड्यंत्र की संभावना थी तब भी तुमने पीठ दिखाई ना

1703
02:02:15,840 --> 02:02:20,000
मुझे भी वहां पर षड्यंत्र की संभावना थी दो लोग थे वहां पर तुम्हारे साथ

1704
02:02:20,000 --> 02:02:24,000
तो तुम वो विक्टिम वो वुमेन कार्ड खेलने के लिए तुम्हारे

1705
02:02:24,000 --> 02:02:28,480
साथ तो वहां पर मात्र शक्ति थी वहां मेरे साथ तो एक पुरुष थे श्वेतांग

1706
02:02:28,480 --> 02:02:32,640
जी कमरे में कक्ष में जाकर के उन्होंने चर्चा करने को कहा वहां पर और वहां

1707
02:02:32,640 --> 02:02:36,880
के वो ऐसे वैसे व्यक्ति कहीं वहां के प्रमुख व्यक्ति जो जिनके साथ चर्चा

1708
02:02:36,880 --> 02:02:41,120
हुई है देख लो अभी पड़ी है ईस्ट ऑफ कैलाश स्कॉन में कमरे

1709
02:02:41,120 --> 02:02:45,280
के अंदर वहां मुझे भी लगा था ये षड्यंत्र हो सकता है पर मैं

1710
02:02:45,280 --> 02:02:49,600
गया क्यों क्योंकि मेरे पीछे राम है क्यों

1711
02:02:49,600 --> 02:02:53,840
क्योंकि मेरे पीछे गुरु है मेरा सिद्धांत है मेरा सत्य का बल

1712
02:02:53,840 --> 02:02:58,000
है हमारे हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हम है हम

1713
02:02:58,000 --> 02:03:02,080
सत्य के लिए लड़ रहे हैं हम नहीं डरेंगे हमारे राम देखेंगे

1714
02:03:02,080 --> 02:03:06,240
ये भावना कहां चली गई भाई षड्यंत्र संभावना हो गई तुम कट लिए एक

1715
02:03:06,240 --> 02:03:11,920
दो तीन इसी को तो भगोड़ा कहते हैं

1716
02:03:11,920 --> 02:03:16,000
सही बात भागवतानंद भागवतानंद के यहां मैं गया था

1717
02:03:16,000 --> 02:03:20,080
और वहां पर मुझे भागवतानंद के कक्ष में बुलाया गया कि

1718
02:03:20,080 --> 02:03:24,400
चलो अरे भाई मुझे क्या पता वो किस स्ट्रेटजी से मुझसे मिलना

1719
02:03:24,400 --> 02:03:29,440
वाला है। यद्यपि उसने भी कोई प्लानिंग पूर्वक मेरे साथ कोई

1720
02:03:29,440 --> 02:03:33,600
इस तरह का आक्रमण टाइप का नहीं किया था। वो जो बृजेश पांडे

1721
02:03:33,600 --> 02:03:38,480
ने किया उसका व्यक्ति है तो उससे पूछा जाएगा गुटखा खाऊ।

1722
02:03:38,480 --> 02:03:42,640
मगर जब मैं कमरे के बाहर हूं तब तो मेरे मन में आएगा ना। मैं जाऊं

1723
02:03:42,640 --> 02:03:47,200
अंदर कि नहीं जाऊं? पगले गया था मैं।

1724
02:03:47,200 --> 02:03:53,200
क्योंकि सच के लिए कहीं ना कहीं रिस्क लेना पड़ता है।

1725
02:03:54,160 --> 02:03:58,640
साहस दिखाना पड़ता है तब कोई सिद्धांत

1726
02:03:58,640 --> 02:04:03,360
स्थापित होता है। तब धर्म की रक्षा होती है।

1727
02:04:03,360 --> 02:04:07,440
रिस्क लेना पड़ता है। षड्यंत्र की संभावना होते

1728
02:04:07,440 --> 02:04:11,600
हुए भी जहां पर मर्डर हो जाते हैं। ऐसे

1729
02:04:11,600 --> 02:04:15,600
रामपाल के अड्डे पे जाना पड़ता है। जहां उसकी किताबें

1730
02:04:15,600 --> 02:04:19,280
छपने का एड्रेस डला हुआ है। बेवकूफ

1731
02:04:19,280 --> 02:04:23,760
पीर दिखाकर भागे नहीं थे वहां से हम। चले गए थे वहां

1732
02:04:23,760 --> 02:04:28,800
जहां पाउडर बनता है।

1733
02:04:28,800 --> 02:04:32,880
षड्यंत्र था षड्यंत्र करना होता तो तुम वहां से वापस ना आते

1734
02:04:32,880 --> 02:04:37,040
जितने सकुशल वापस लौट आए हो। तो खैर अगर षड्यंत्र की संभावना भी

1735
02:04:37,040 --> 02:04:41,120
है ना तब भी साहस लेना साहस ले लिया जाता है। साहस

1736
02:04:41,120 --> 02:04:45,440
दिखाया जाता है। रिस्क लिया जाता है। अगर हमारे अंदर

1737
02:04:45,440 --> 02:04:49,520
सत्य के अनुसंधान की भावना है। सत्य के स्थापना की धर्म की स्थापना की

1738
02:04:49,520 --> 02:04:53,600
भावना प्रबल है। प्रचंड है। वो प्रचंड

1739
02:04:53,600 --> 02:04:57,840
भावना आपको शक्ति देती है। राम आपको शक्ति देते हैं। गुरु

1740
02:04:57,840 --> 02:05:01,840
गोविंद और ग्रंथ आपको शक्ति देते हैं। तब आप रिस्क ले पाते

1741
02:05:01,840 --> 02:05:06,080
हो। तब आप साहस दिखा पाते हो। फिर बंद करो अपने आप को ये आर्य

1742
02:05:06,080 --> 02:05:09,360
कहना

1743
02:05:09,360 --> 02:05:13,600
जो जो षड्यंत्र की संभावना मात्र के मात्र को आधार

1744
02:05:13,600 --> 02:05:18,640
बनाकर अपने भागने को उचित सिद्ध ठहरा रहा है।

1745
02:05:18,640 --> 02:05:21,520
समझे

1746
02:05:21,520 --> 02:05:26,800
क्लासेस चलती है निशुल्क। वहां आओ सीखो कुछ। अच्छा

1747
02:05:26,800 --> 02:05:30,960
संभावना तो हर जगह थी। फिर फिर तुम जो है

1748
02:05:30,960 --> 02:05:35,280
कारण कोई भी हो लंबे लंबे कदम लेकर भागा है यह व्यक्ति

1749
02:05:35,280 --> 02:05:39,280
लंबे लंबे कदम लेकर के ठीक है कोई भी हो सही बात है

1750
02:05:39,280 --> 02:05:43,760
कारण कोई भी हो ठीक है लंबेल लंबे कदम लेकर के अच्छा

1751
02:05:43,760 --> 02:05:47,760
सबसे रोचक बात क्या है कि

1752
02:05:47,760 --> 02:05:52,160
जूता छोड़ा तो छोड़ा परंतु अपनी अविवाहित

1753
02:05:52,160 --> 02:05:57,040
संगनी को भी छोड़ गया गुंडों के बीच

1754
02:05:57,040 --> 02:06:01,120
अब ऐसे व्यक्ति को नपुंसक नहीं कहा जाए

1755
02:06:01,120 --> 02:06:05,200
तो हां ऐसे व्यक्ति को नपुंसक नहीं कहा जाए तो

1756
02:06:05,200 --> 02:06:09,280
क्या कहा जाए अरे भैया तू जिस स्त्री को ला रहा

1757
02:06:09,280 --> 02:06:13,440
है हां तू जिस स्त्री को लेके आ रहा है साथ में चल

1758
02:06:13,440 --> 02:06:17,600
मान लिया वुमेन कार्ड खेलने के लिए ला रहा है ढाल बना के कुछ भी करने ला रहा है तू जिस

1759
02:06:17,600 --> 02:06:21,600
स्त्री को साथ में लेके आ रहा है तू खुद लंबे-लंबे कदम मार के

1760
02:06:21,600 --> 02:06:24,960
भाग गया अरे मर्द था ना बोलता ना

1761
02:06:24,960 --> 02:06:29,280
अरे मेरी बहन को भेजो बाहर या मेरी अमुक को भेजो बाहर

1762
02:06:29,280 --> 02:06:33,600
या मेरी अविवाहित संगनी को भेजो बाहर मेरी स्त्री को भेजो बाहर

1763
02:06:33,600 --> 02:06:37,760
वो बेचारी बाद में टेरर रही है अरे अरे हक्का

1764
02:06:37,760 --> 02:06:42,320
बक्का हो रही है बता नहीं पा रही है मैं बहन हूं कि क्या हूं

1765
02:06:42,320 --> 02:06:46,320
हम ऐसे ऐसे ऐसे आर्य जन्म लेते हैं

1766
02:06:46,320 --> 02:06:51,600
तुम्हारे यहां तुम्हारी माताओं की कोख से हैं

1767
02:06:51,600 --> 02:06:55,680
अगर कोई तेरे यहां तेरे विरुद्ध षड्यंत्र करेगा तुझे जाने

1768
02:06:55,680 --> 02:06:59,680
को कहेगा तो बहन बहन ना सही मां ना सही

1769
02:06:59,680 --> 02:07:03,840
वैद वैद मतलब जो शास्त्रीय

1770
02:07:03,840 --> 02:07:08,160
न्यायिक ढंग से है ना नैतिक रूप से पत्नी ना सही

1771
02:07:08,160 --> 02:07:12,160
अविवाहित संगनी तो थी ना भाई तेरे उद्देश्य

1772
02:07:12,160 --> 02:07:16,400
में तेरी सहभागिनी तो थी ना हम

1773
02:07:16,400 --> 02:07:21,680
तब भी उसे हम गुंडों के बीच छोड़ के चले जाए

1774
02:07:21,680 --> 02:07:25,760
कैसे सोच लिया भाई अब या तो ये मान ले कि हम राम राम को

1775
02:07:25,760 --> 02:07:30,240
फॉलो करने वाले या ये मान ले कि हम रावण है। रावण है तो फिर अग्नि परीक्षा इत्यादि

1776
02:07:30,240 --> 02:07:34,720
की संभावना हो जाएगी। क्या करेगा?

1777
02:07:34,720 --> 02:07:38,720
हां हम तो रावण वाले हैं ना। गुंडे हैं

1778
02:07:38,720 --> 02:07:42,720
ना गुंडों के बीच में छोड़ गया। मात्र माता जी आप

1779
02:07:42,720 --> 02:07:46,720
जाओ बहन जी आप जाओ। मातृ शक्ति इनको जान ये सब वहां दिखाई देगा। और तू

1780
02:07:46,720 --> 02:07:50,880
हमको कह रहा है नीच। तू हमको कह रहा है गुंडे थे। हमारे ही गुरु भाई तुमको

1781
02:07:50,880 --> 02:07:54,960
बचा रहे हैं। और तुम कह रहे हो कि हमने चार को निपटा दिया। बाद में 141

1782
02:07:54,960 --> 02:07:59,280
आए। ऐसे नीच तैयार होते हैं इनके तथाकथित

1783
02:07:59,280 --> 02:08:03,840
आर्य समाज में अगर यह सारी चीजें हैं तो

1784
02:08:03,840 --> 02:08:08,000
खुद [गला साफ़ करने की आवाज़] को कह रहे हैं आर्य समाजी और जूते की चिंता है मेरा

1785
02:08:08,000 --> 02:08:12,240
जूता दे दो इस बात की चिंता नहीं है कि मेरी अविवाहित संगनी कहां गई भाई

1786
02:08:12,240 --> 02:08:16,480
जो आई है साथ में हम जूते की चिंता

1787
02:08:16,480 --> 02:08:20,800
है और गुंडे के बीच छोड़ के चले जाओ और

1788
02:08:20,800 --> 02:08:24,800
मैंने अभी बताया ना इसके कुछ लोगों ने हमारी तुलना मुसलमानों

1789
02:08:24,800 --> 02:08:29,200
से की यही वृतांत पर आधा अधूरा जो उसने बताया है तो फिर

1790
02:08:29,200 --> 02:08:33,360
तुमने एक तरीके से अगर उस बात को ले लिया जाए तो मलेच्छों के बीच में तुम

1791
02:08:33,360 --> 02:08:36,800
इस तरह से ही तुम्हारे यहां हर समाज में इसी तरह से अपनी स्त्री को

1792
02:08:36,800 --> 02:08:40,960
छोड़ के जाना सिखाया जाता है क्या तो मैं कहता नहीं था इसीलिए मैं कई

1793
02:08:40,960 --> 02:08:45,440
बार कह चुका हूं कि युद्ध के समय ऐसे नपुंसक

1794
02:08:45,440 --> 02:08:49,920
तथाकथित युद्ध के समय ऐसे नपुंसक तथाकथित आर्यों

1795
02:08:49,920 --> 02:08:54,000
की स्त्रियों की रक्षा भी हम ही को करनी है। कह चुका

1796
02:08:54,000 --> 02:08:58,000
हूं मैं अपनी कई स्ट्रीम्स में हम ही को करनी है क्योंकि तुम तो ऐसे

1797
02:08:58,000 --> 02:09:02,240
ही छोड़ छोड़ के भागोगे

1798
02:09:02,240 --> 02:09:06,880
की भी है उसको पूरा विश्वास था कि भाई ये रक्षा करेंगे गुंडे

1799
02:09:06,880 --> 02:09:10,880
हां है ना तो

1800
02:09:10,880 --> 02:09:15,120
रक्षा की भी है और उस दिन भी हम लोग

1801
02:09:15,120 --> 02:09:19,360
रक्षा जब करेंगे ना तो उस दिन ये क्या कर रहे होंगे ये लोग लंबे लंबे कदम फेंक

1802
02:09:19,360 --> 02:09:23,360
के जैसे निर्भय पीठ दिखाकर भागा है जूता छोड़ भगोड़ा ऐसे जैसे ही

1803
02:09:23,360 --> 02:09:27,520
ये किसी गली कूचे में खड़े होकर के अगला वीडियो बनाने की तैयारी

1804
02:09:27,520 --> 02:09:32,080
कर रहे होंगे कि देखो देखो मेरे साथ मेरी जो है अविवाहित

1805
02:09:32,080 --> 02:09:36,960
संगनी के साथ ये ये हो रहा है। ये इस तरह से रक्षा करेंगे

1806
02:09:36,960 --> 02:09:41,040
तो और इस तरह से फॉल्स नैरेटिव्स द्वारा फॉल्स

1807
02:09:41,040 --> 02:09:45,440
नरेटिव्स के आधार पर उनके विरुद्ध में ये अपनी नपुंसकता

1808
02:09:45,440 --> 02:09:49,680
को सिद्ध करेंगे। तो

1809
02:09:49,680 --> 02:09:51,840
अगर भाई तुझे षड्यंत्र की बात भी है तू

1810
02:09:51,840 --> 02:09:56,000
जा भी रहा है अपनी अविवाहित संगनी को तो साथ में ले जा अरे मर्द है ना

1811
02:09:56,000 --> 02:10:00,160
बोल ना मेरी उसको बाहर भेजो अमुक को खैर आप आप

1812
02:10:00,160 --> 02:10:04,160
बोले जी आप लोग बोले

1813
02:10:04,160 --> 02:10:08,720
जी मैं ये कह रहा था कि कुछ लोगों का नीचे कमेंट में प्रश्न आ रहा है कि मातृशक्ति

1814
02:10:08,720 --> 02:10:12,720
को क्यों इन्वॉल्व किया जा रहा है तो उसका उत्तर हम दे देते हैं निर्भय

1815
02:10:12,720 --> 02:10:16,720
ने खुद वीडियो डाली है वो वीडियो में वो मातृ शक्ति की आवाज आई

1816
02:10:16,720 --> 02:10:20,720
है तो वो व्यक्ति ने खुद अपने तरफ से वो इनवॉल्व किया है।

1817
02:10:20,720 --> 02:10:24,880
इसीलिए [हंसी] हम उन पर बोल रहे हैं कि देखो वो छोड़ के उन्हें भाग गया है।

1818
02:10:24,880 --> 02:10:28,880
तो हमारी तरफ से ये शुरू नहीं हुआ है। वही ले आया है वो मातृ शक्तियों

1819
02:10:28,880 --> 02:10:34,560
को ये फील्ड में तो हम एक्सपोज कर रहे हैं बस और कुछ नहीं कर।

1820
02:10:34,560 --> 02:10:38,560
देखिए मैंने कल ही अपना एक पोस्ट डाला था। निर्भय का वीडियो आने

1821
02:10:38,560 --> 02:10:42,560
से पहले तक हमने बहुत प्रयास किया। पूरा प्रयास उसकी झलक

1822
02:10:42,560 --> 02:10:46,560
भी नहीं आने दी उस मातृशक्ति की। परंतु जिस प्रकार से उसको

1823
02:10:46,560 --> 02:10:50,720
लेकर के बातें वहां कही गई है और वह मातृ शक्ति भी इन्वॉल्व होती हुई दिखाई

1824
02:10:50,720 --> 02:10:54,800
दे रही है तो फिर उसकी मीमांसा करना भी फिर हमारा कर्तव्य हो जाता

1825
02:10:54,800 --> 02:10:58,960
है और जिस तरह से तुम हमारे आचार्य के बारे में अपने

1826
02:10:58,960 --> 02:11:03,040
मन के अनुसार की गई मीमांसा के आधार पर अपने ही विरुद्ध अपने ही वचनों के विरुद्ध

1827
02:11:03,040 --> 02:11:07,040
कुछ भी कहने को तैयार हो तो हम तो तर्क संगत बातें कर रहे हैं ना भाई तुम

1828
02:11:07,040 --> 02:11:12,000
तो अपने ही सिद्धांतों का खंडन कर रहे हो

1829
02:11:12,000 --> 02:11:16,470
ठीक है तो यह वाली बात हो गई। अब

1830
02:11:16,470 --> 02:11:21,280
[गला साफ़ करने की आवाज़] हां एक बात मैं जरूर कह दूं

1831
02:11:21,280 --> 02:11:25,520
कि इसको नपुंसक को जीवतों की चिंता थी। अपनी अविवाहित

1832
02:11:25,520 --> 02:11:30,240
संगनी की चिंता नहीं थी। खैर एक चीज और है। इस प्रकार की जो

1833
02:11:30,240 --> 02:11:34,400
इस जिस प्रकार का चित्रण यहां पर दिखाई दे रहा है उसके अनुसार जो

1834
02:11:34,400 --> 02:11:38,560
इस प्रकार के संघ में आने वाली संघ में होने

1835
02:11:38,560 --> 02:11:42,800
रहने वाली जो स्त्रियां होती है इस तरह की

1836
02:11:42,800 --> 02:11:46,800
उनके साथ अक्सर ऐसा ही होता है कि व्यक्ति का काम निकल गया उपयोग

1837
02:11:46,800 --> 02:11:50,800
हो गया उसके बाद व्यक्ति तू कौन मैं कौन वो हम आपके कौन

1838
02:11:50,800 --> 02:11:54,880
वाली बात वही थी ना खैर अंतत गतवा भाई अब

1839
02:11:54,880 --> 02:11:59,040
तुझे याद दिला दूं तुझे कूटा गया है तेरे अनुसार जानलेवा हमला

1840
02:11:59,040 --> 02:12:03,280
हुआ है धूल तो मैंने चटाई है मैं ये बोल रहा हूं अभी भी ताल ठोक रहा हूं

1841
02:12:03,280 --> 02:12:07,680
ठीक है तो कर क्या रहा है तू क्या

1842
02:12:07,680 --> 02:12:11,680
कर रहा है तेरे मुंह पे बोला है जूते से मारे

1843
02:12:11,680 --> 02:12:15,920
जाओगे मुंह क्या किया तूने? क्या प्रतिकार है तेरा?

1844
02:12:15,920 --> 02:12:20,160
ठीक है। यह सब तुझे जुतिया गया। अभी भी बोल रहा हूं। कूटा धूल

1845
02:12:20,160 --> 02:12:22,240
चटाई। तुझे जुतिया गया। क्या कर लिया

1846
02:12:22,240 --> 02:12:27,040
तूने? कर लेना जाके कुछ और जो समर्थक है वो करें।

1847
02:12:27,040 --> 02:12:31,280
और तुम जैसों को धूल धूल चटाने के लिए ही जन्म हुआ है हमारा।

1848
02:12:31,280 --> 02:12:35,440
ठीक है? धूल चटाने के लिए। तेरे जैसे अभद्र

1849
02:12:35,440 --> 02:12:39,840
आचरण वाले जो होते हैं ना ऐो को धूल चटाने के लिए ही जन्म

1850
02:12:39,840 --> 02:12:44,160
है हमारा। और सुन फिर मिलेगा फिर तेरा ऐसा वद्राचरण

1851
02:12:44,160 --> 02:12:48,160
मिलेगा तो कसम गंगा मैया की उठा उठा के पटकूंगा

1852
02:12:48,160 --> 02:12:52,640
फिर से फिर से धूल चटाऊंगा ठीक है

1853
02:12:52,640 --> 02:12:56,880
अच्छा वो वहां पर मेरे गुरु भाइयों ने रोक लिया

1854
02:12:56,880 --> 02:13:01,040
वरना उसी समय तुमको और पता चलता कि तुम कितने बड़े फन्ने खाओ 30 मार

1855
02:13:01,040 --> 02:13:05,120
खाओ वो हाल होता तुम्हारा कि

1856
02:13:05,120 --> 02:13:09,120
दर्द भी परेशान हो जाता कि उठे तो कहां से उठे ठीक है वो

1857
02:13:09,120 --> 02:13:13,280
गुरु भाई जिनको तुम पीटने की कहानी बनाई है ना उन्होंने बचा लिया तुमको।

1858
02:13:13,280 --> 02:13:17,360
जी आप लोग बताएं। जी बिल्कुल बिल्कुल ये

1859
02:13:17,360 --> 02:13:21,440
सही कहा। कसम गंगा मैया की दोबारा मिलेगा तो फिर

1860
02:13:21,440 --> 02:13:25,280
धूल चटाई जाएगी।

1861
02:13:25,280 --> 02:13:29,280
इनका सारा प्रोपोगेंडा तो फेल हो गया जो इन्होंने अभी रचा था एक दो

1862
02:13:29,280 --> 02:13:33,280
दिन। अच्छा एक व्यक्ति कह रहा है राधा जी का नाम लिया। भाई जब तुम वहां पर

1863
02:13:33,280 --> 02:13:37,280
चर्चा से बचने के लिए आचार्यों के अपमान का नाम ले रहे हो तो

1864
02:13:37,280 --> 02:13:41,680
वहां हम तुम्हें बताएंगे ना कि तुम इस तरह से क्या-क्या किए बैठे हो। तुम तो यार शंकर

1865
02:13:41,680 --> 02:13:45,840
शंकर परंपरा को नष्ट करने की बात पे कह रहे हो। तुमको अंदर से मार मार के भगाया

1866
02:13:45,840 --> 02:13:49,760
नहीं तुरंत तुरंत भगाना था।

1867
02:13:49,760 --> 02:13:53,840
खैर अंत में मैं अपना संदेश दे दूं। निर्भय या

1868
02:13:53,840 --> 02:13:58,080
जो भी है तू जूता छोड़ भगोड़ा या अविवाहित

1869
02:13:58,080 --> 02:14:02,080
संगनी छोड़ भगोड़ा। तेरी कहानी यदि सच्ची है, है

1870
02:14:02,080 --> 02:14:07,360
ना? और तू आर्य है, मर्द है, तो

1871
02:14:07,360 --> 02:14:11,520
खुद ना सही पुलिस केस के द्वारा अपनी कहानी को सिद्ध

1872
02:14:11,520 --> 02:14:15,520
कर। पुलिस केस कर। ताल ठोक रहा हूं। फिर से

1873
02:14:15,520 --> 02:14:21,520
ताल ठोक रहा हूं। हम

1874
02:14:22,320 --> 02:14:26,320
मेरा कथानक झूठा और तेरा सच्चा है ना? जानलेवा

1875
02:14:26,320 --> 02:14:31,200
हमला हुआ है ना? क्रोच तेरे लिए जानलेवा है ना

1876
02:14:31,200 --> 02:14:35,360
तो भाई तू उसे सिद्ध कर कम से कम कोई कानूनी प्रक्रिया का आलंबन तो

1877
02:14:35,360 --> 02:14:39,600
ले ले तू नहीं लेगा क्योंकि तू जूता छोड़ भगोड़ा

1878
02:14:39,600 --> 02:14:43,760
है तू वो अविवाहित संगनी छोड़ भगोड़ा

1879
02:14:43,760 --> 02:14:48,320
है नपुंसक इत्यादि के जो लक्षण होते हैं वही चरितार्थ होते हैं इस तरह के

1880
02:14:48,320 --> 02:14:52,480
खैर कुछ नहीं करेगा और इसी तरह से यही

1881
02:14:52,480 --> 02:14:56,560
जो कुछ ना करना होता है यही होते हैं नपुंसक नपुंसकता के लक्षण

1882
02:14:56,560 --> 02:15:01,120
और मैं अभी भी ताल ठोक रहा हूं। जूते से मारे जाओगे। जुतियाए

1883
02:15:01,120 --> 02:15:05,680
गए हो मेरे द्वारा। और जो तुमने वहां आकर के जो अभद्राचरण

1884
02:15:05,680 --> 02:15:09,840
किया है ना शंकराचार्य के शिविर में तुम्हें लतिया

1885
02:15:09,840 --> 02:15:14,160
गया है। जुतिया गया है। तुमको धूल चटाई गई है। अब जाओ

1886
02:15:14,160 --> 02:15:18,320
जाकर के कुछ करो। ठीक है। जी आप लोग अपना

1887
02:15:18,320 --> 02:15:23,280
वक्तव्य दे दें। आशा करता हूं आप लोगों को काफी सारी चीजें

1888
02:15:23,280 --> 02:15:27,680
महत्वपूर्ण लगी हो आज जो दी गई। जी जी। जी

1889
02:15:27,680 --> 02:15:31,840
आज तो बहुत कुछ आपने यहां पर उजागर कर दिया। सच्चाई सबके सामने आ गई।

1890
02:15:31,840 --> 02:15:35,840
जो भी इनके तरफ से प्रोपगेंडा सेट किया जा रहा था। अब तो

1891
02:15:35,840 --> 02:15:37,680
वो पूरा तरीका से

1892
02:15:37,680 --> 02:15:42,400
खत्म होता ही दिख रहा है। पूरा नष्ट ही हो गया उसका प्रोपगेंडा। ठीक है?

1893
02:15:42,400 --> 02:15:46,640
और उसके आर्य में छुपे हुए

1894
02:15:46,640 --> 02:15:51,120
अनार्यपन जो है ना वो भी सार्वजनिक हो गया।

1895
02:15:51,120 --> 02:15:55,280
पहला जो बीच रण

1896
02:15:55,280 --> 02:15:59,520
से अगर तुम उसे रण मानो जो भी हो उससे तुम भाग खड़े

1897
02:15:59,520 --> 02:16:03,920
हुए उसे आर्य का गौरव नहीं कहेंगे

1898
02:16:03,920 --> 02:16:07,920
उसे कायरता ही कहेंगे और आर्य कायर तो होते नहीं और

1899
02:16:07,920 --> 02:16:13,680
यदि तुम कायर हो तो आर्य नहीं यदि आर्य हो तो कायरता क्यों दिखाई

1900
02:16:13,680 --> 02:16:17,680
ठीक है और दूसरी बात तुमने

1901
02:16:17,680 --> 02:16:22,160
जो आचार्य शंकराचार्य जी का जो वक्तव्य

1902
02:16:22,160 --> 02:16:26,480
काटा है। यहां एक बात मैं कहता चलूं कि तुम

1903
02:16:26,480 --> 02:16:30,560
केवल जूता छोड़ केवल चर्चा छोड़ भगोड़े नहीं थे। तुम

1904
02:16:30,560 --> 02:16:34,960
केवल जूता छोड़ भगोड़े नहीं थे। अपनी स्त्री छोड़ भगोड़े भी थे। जिस स्त्री को साथ मिलाए

1905
02:16:34,960 --> 02:16:40,960
थे वो जो भी हो तुम्हारी बहन नहीं है ना। वो भी तुम थे। जी

1906
02:16:41,920 --> 02:16:46,240
जी जी बोलिए शास्त्र जी। तो इसने

1907
02:16:46,240 --> 02:16:50,240
तो आज बहुत कुछ यहां पे अपने दिखा दिया है। उस उसने

1908
02:16:50,240 --> 02:16:54,240
शंकराचार्य जी का अपमान किया। उदंडता किया। अनार्यता दिखा दी

1909
02:16:54,240 --> 02:16:58,560
अपनी वहां पर। उसके बाद जब वहां से निकला वहां पे भी

1910
02:16:58,560 --> 02:17:03,120
वो सबसे पहले ही अपना तेवर दिखाने लगा। गर्मी दिखाने लग गई।

1911
02:17:03,120 --> 02:17:06,160
ठीक है?

1912
02:17:06,160 --> 02:17:11,440
गर्मी दिखाने लग गया उसने। तो ये तो समझ आ गया

1913
02:17:11,440 --> 02:17:15,600
कि भाई कौन लड़ना चाह रहा है। जब उसे रोका

1914
02:17:15,600 --> 02:17:19,600
गया तो वहां पर फिर अलग-अलग बहाना बनाने लग गया।

1915
02:17:19,600 --> 02:17:23,920
वहां से जब वो निकला जब उससे प्रश्न करने के लिए उसे रोका गया

1916
02:17:23,920 --> 02:17:27,920
तो बेचारा हप हप करके जो है पप पप

1917
02:17:27,920 --> 02:17:31,920
करने लग गया और हाथ मरोड़ा जो आपके

1918
02:17:31,920 --> 02:17:36,640
गुरु भाई थे उनका ये भी दिख रहा है साफसाफ

1919
02:17:36,640 --> 02:17:42,000
फिर जब उसे उसे धूल चटा दी गई तो उसके बाद भी

1920
02:17:42,000 --> 02:17:46,000
जो अपनी आर्य पन जो अपना गौरव

1921
02:17:46,000 --> 02:17:50,240
वो नाम के आगे लगाता है कि आर्य आर्य उसे

1922
02:17:50,240 --> 02:17:54,240
उसी गुण को वो छुपाते हुए वो क्या करता है? झूठ का

1923
02:17:54,240 --> 02:17:57,040
सहारा लेता है। कहता है कि मैंने तीन जन को पीट दिया,

1924
02:17:57,040 --> 02:18:01,440
चार जन को पीट दिया। फिर 1520 दिन उसको आके मारे। जानलेवा हमला किया।

1925
02:18:01,440 --> 02:18:05,440
एक मिनट इनका उत्तर दे दूं मैं। देखिए वुमेन के

1926
02:18:05,440 --> 02:18:09,680
लिए हमने वही बोला है जो वहां पर दृश्य है उसके अनुसार

1927
02:18:09,680 --> 02:18:13,760
जो बोला जा सकता है वही बोला है। अब कुछ कहानियां आगे पीछे

1928
02:18:13,760 --> 02:18:17,760
अगर आपको दिखाई दे रही है आप गढ़ रहे हैं तो अब वो बात एक अलग है।

1929
02:18:17,760 --> 02:18:21,760
दूसरी बात कि एक कमेंट और मैं देख रहा था कि वेपन की तरह उपयोग में

1930
02:18:21,760 --> 02:18:26,640
लिया गया। ये कमेंट हटा दीजिए। दूसरी बात कि

1931
02:18:26,640 --> 02:18:30,880
वेपन की तरह उपयोग किया तो उसने वेपन की तरह उपयोग किया और उसने

1932
02:18:30,880 --> 02:18:34,960
वहां पर एक्टिंग की है। उस लड़की ने कई जगह पे वेपन की तरीके से उपयोग हुई

1933
02:18:34,960 --> 02:18:39,840
है। उसी उपयोगिता को हमने वहां पर बताया है। ठीक है। जी

1934
02:18:39,840 --> 02:18:43,840
निर्भय की वीडियो में थी वो लड़की। वो लड़की की आवाज जो है निर्भय की वीडियो

1935
02:18:43,840 --> 02:18:47,920
में आ रही थी। और एक बात और बता दूं आपको। एक बात और बता दूं। सीधी सी

1936
02:18:47,920 --> 02:18:52,160
बात है। आपने कुछ ऐसा किया है जिससे हमें हमारे हृदय को पीड़ा हुई है।

1937
02:18:52,160 --> 02:18:56,400
ठीक है? आप कुछ भी बोल देंगे कहीं पर भी जाकर कुछ भी बोलते रहो बोलते रहो

1938
02:18:56,400 --> 02:19:00,560
है ना तो हमारे पास तो तार्किक चीजें हैं बोलने के लिए तुम्हारे पास

1939
02:19:00,560 --> 02:19:04,640
तुम्हारे पास तो खुद ही के सिद्धांतों के विरुद्ध जाकर के तुम बोल रहे हो तो हमारे पास जब

1940
02:19:04,640 --> 02:19:08,720
तार्किक चीजें हैं सत्य है तो हम उसको क्यों ना बोले भाई तुम ही

1941
02:19:08,720 --> 02:19:12,160
तो ले आए ना उसको अपने साथ वही तो वहां नहीं बता पा रही कि वह

1942
02:19:12,160 --> 02:19:16,240
तुम्हारी कौन है तो वह तुम्हारी इस स्थिति से अवगत ना कराएं हम और

1943
02:19:16,240 --> 02:19:20,240
जबकि वह हमारे हमारे विरोध में एज ए वेपन यूज़ हो रही है वो

1944
02:19:20,240 --> 02:19:24,240
कर रही है कार्य तब भी ना बोले हां जी बोलिए

1945
02:19:24,240 --> 02:19:28,560
भैया मैं इस एक और मैं इस एक और चीज बोलना चाहूंगा कि निर्भय

1946
02:19:28,560 --> 02:19:32,960
से ज्यादा पुरुष तो स्त्री प्रतीत हो रही है कि निर्भय भाग गया फिर भी कैमरा

1947
02:19:32,960 --> 02:19:36,960
के साथ अपना कर्तव्य निभा रही है वो फिर भी रिकॉर्ड कर रही है पर

1948
02:19:36,960 --> 02:19:41,040
निर्भय छोड़ के भाग गया हां वो अंत तक हमारे जो गुरु भाई

1949
02:19:41,040 --> 02:19:45,040
उनको कह रहे थे आप रिकॉर्ड मत करो उनको वो बेवकूफ भी बना रही है उसमें कुछ ऐसी सेटिंग होती है

1950
02:19:45,040 --> 02:19:49,200
ना स्क्रीन ब्लैक होती है और वो रिकॉर्ड होती रहती है ना वो

1951
02:19:49,200 --> 02:19:53,200
बेवकूफ भी बना रही है उनको हालांकि कि मैं तो चाहता ही नहीं हूं कि बंद

1952
02:19:53,200 --> 02:19:57,520
हो। मगर मैंने देखा कि वो ये कह रही है अरे कुछ नहीं हो रहा। रिकॉर्ड हो ही नहीं रहा है। वो रिकॉर्ड

1953
02:19:57,520 --> 02:20:01,680
कर रही थी। वो पूरी तरीके से इसकी सारी चेष्टाएं जो जितनी

1954
02:20:01,680 --> 02:20:05,760
इसकी अनैतिक चेष्टाएं हैं उसमें वो संलग्न थी वहां पर अपने

1955
02:20:05,760 --> 02:20:10,720
पूरे तन मन और धन से। जी शास्त्रवाद जी बिल्कुल।

1956
02:20:10,720 --> 02:20:15,520
स्त्री स्त्री नहीं भागी पर ये पुरुष भाग गया जूता छोड़ के। हां

1957
02:20:15,520 --> 02:20:17,680
हां

1958
02:20:17,680 --> 02:20:23,440
जी शास्त्रवाद जी बोले आपका वहीं से पॉइंट स्टार्ट करें

1959
02:20:23,440 --> 02:20:27,360
तो वो जो भाग गया वहां से निकायरता दिखाते

1960
02:20:27,360 --> 02:20:31,360
हुए इसका जो सारा झूठ है हम आपको एक-एक करके झूठ

1961
02:20:31,360 --> 02:20:35,680
गिनाते हैं इसका ठीक है इसने पहला झूठ बोला कि इसने आचार्य

1962
02:20:35,680 --> 02:20:40,000
शंकराचार्य जी को निरुत्तर किया जो कि पूरा तरीका से फेक क्लेम है पूरा वीडियो

1963
02:20:40,000 --> 02:20:44,320
अवेलेबल है गोवर्धन मठ पूरी का उस YouTube चैनल पर भी

1964
02:20:44,320 --> 02:20:48,480
और आज सनातन शंकर जी ने भी अपने चैनल पर दिखाया। ठीक है? आप देख सकते हैं।

1965
02:20:48,480 --> 02:20:52,480
इसके साथ ही साथ वो वितंडा वो वाला इसी के वक्तव्य से न्याय

1966
02:20:52,480 --> 02:20:56,560
के सिद्धांत से वो शंका समाधान शास्त्रार्थ इस नॉट

1967
02:20:56,560 --> 02:21:01,600
वो शास्त्रार्थ नहीं है। वो जी बिल्कुल। दूसरा

1968
02:21:01,600 --> 02:21:06,080
इसने प्रश्नोत्तरी को शास्त्रार्थ बताने का प्रयास किया

1969
02:21:06,080 --> 02:21:10,160
और प्रश्नोत्तरी को शास्त्र बता अगर बता रहा है इसका

1970
02:21:10,160 --> 02:21:14,400
मतलब प्रश्नोत्तरी जो है वो शंका समाधान है और तुमने वहां पर वितंडा किया जो तुमने

1971
02:21:14,400 --> 02:21:18,720
तुम्हारा जो यहां पर रिकॉर्डिंग चला है उसके अनुसार तुमने वहां पे वितंडा किया है

1972
02:21:18,720 --> 02:21:22,720
स्पष्ट है यहां क्योंकि तुम्हारा जो झूठ है कि भाई तुम वहां पर शास्त्रार्थ

1973
02:21:22,720 --> 02:21:27,120
करने चले गए वो गलत है क्योंकि शास्त्रार्थ एक व्यवस्था पूर्वक होता है तुमने कोई व्यवस्था

1974
02:21:27,120 --> 02:21:31,200
वहां पे कोई ऐसा नहीं था ठीक है दूसरा झूठ।

1975
02:21:31,200 --> 02:21:35,520
तीसरा झूठ इसने बोला था कि जब आचार्य शंकराचार्य जी

1976
02:21:35,520 --> 02:21:39,840
असहज हुए उत्तर देने में या फिर निरुत्तर हो गए तो उनके

1977
02:21:39,840 --> 02:21:42,480
जो शिष्य थे वो भड़क गए

1978
02:21:42,480 --> 02:21:46,560
इस तरह से। ठीक है? तो भाई पूरे वीडियो अवेलेबल है। यहां पर

1979
02:21:46,560 --> 02:21:50,720
जो भैया ने भी डाला है उस पर भी देख सकते हो। चर्चा

1980
02:21:50,720 --> 02:21:54,960
होने के बाद तक भी भैया आराम से ही वो बात कर रहे हैं कि भाई आके चर्चा कर लो।

1981
02:21:54,960 --> 02:21:59,040
वहां पर कोई भड़का हुआ नहीं है। ठीक है? और चर्चा होने से पहले मैं

1982
02:21:59,040 --> 02:22:03,520
इसके पास जा चुका हूं। तो उसमें गुरुदेव के असमर्थ होने का कोई मामला ही नहीं है।

1983
02:22:03,520 --> 02:22:07,680
बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल तो इसका जो ये तीसरा झूठ है कि भाई वहां

1984
02:22:07,680 --> 02:22:12,080
पे जो बोला कि उसके आचार्य शंकराचार्य जी के निरुत्तर जो

1985
02:22:12,080 --> 02:22:16,160
उसका दावा है वो होते ही उनके शिष्य लोग भड़क गए। ये

1986
02:22:16,160 --> 02:22:20,160
भी झूठ हो गया। ठीक है? फिर क्या हुआ?

1987
02:22:20,160 --> 02:22:24,240
इसका चौथा झूठ देखिए। इसका चौथा झूठ

1988
02:22:24,240 --> 02:22:28,320
है कि ये जो है सामान वगैरह इसको नहीं दिया

1989
02:22:28,320 --> 02:22:32,320
गया। इसका बैग और यह सब छीन लिया गया। मतलब बैग वगैरह जो है उसको

1990
02:22:32,320 --> 02:22:36,960
नहीं दिया गया। यह भी चौथा झूठ है। क्योंकि भैया ने वो शायद

1991
02:22:36,960 --> 02:22:41,120
दे ही दिया है। भैया ने दे ही दिया उसकी जो स्त्री संगिनी

1992
02:22:41,120 --> 02:22:45,680
थी उसको। ठीक है? और फिर इसका

1993
02:22:45,680 --> 02:22:50,880
पांचवा झूठ कि भाई जब हम

1994
02:22:50,880 --> 02:22:55,120
पांचवा झूठ ये था उसका कि मेरे ऊपर जानलेवा हमला हुआ। नहीं नहीं

1995
02:22:55,120 --> 02:22:57,600
पांचवा झूठ ये है पांचवा

1996
02:22:57,600 --> 02:23:01,920
पांचवा रूम रूम वाली रूम वाली बात वो

1997
02:23:01,920 --> 02:23:06,080
तो खैर षड्यंत्र था कि नहीं था वो तो अनुमान वाली बात है ना पांचवा

1998
02:23:06,080 --> 02:23:10,320
झूठ ये है कि भड़काने वाले जो आक्षेप थे हां वो

1999
02:23:10,320 --> 02:23:14,320
वो षड्यंत्र कहना भी वो भी एक झूठ है कि वो षड्यंत्र था कमरे में

2000
02:23:14,320 --> 02:23:18,480
ले जाना वो एक षड्यंत्र था वो भी झूठ है और साथ ही साथ

2001
02:23:18,480 --> 02:23:22,560
यह भी झूठ है कि इसने मुझे खुली जगह पर चर्चा करने की बात कही

2002
02:23:22,560 --> 02:23:26,560
थी ना इसने पहले आर्य समाज मंदिर में जाने की बात की थी। खुली जगह चर्चा करने की बात कही नहीं

2003
02:23:26,560 --> 02:23:30,880
इसने। आर्य समाज मंदिर जाने की ये भी झूठ है। ठीक है? और

2004
02:23:30,880 --> 02:23:35,200
तीसरा क्या है? इसने ये दिखाया अपने अपने उसमें वीडियो में कि

2005
02:23:35,200 --> 02:23:39,360
आक्षेप लगाना मैंने प्रारंभ किया। जबकि आक्षेप लगाना इसने

2006
02:23:39,360 --> 02:23:43,360
प्रारंभ किया। जी बिल्कुल। मतलब

2007
02:23:43,360 --> 02:23:47,680
मैं यह बोल रहा था उसका चौथा झूठ यह कि

2008
02:23:47,680 --> 02:23:51,760
भड़का जो है वो शिष्य उनके भड़के हैं। शंकराचार्य जी

2009
02:23:51,760 --> 02:23:56,080
के शिष्य पहले भड़के हैं। जबकि इसमें स्पष्ट दिख रहा है कि निर्भय

2010
02:23:56,080 --> 02:24:00,160
ने ही क्या डाला, क्या डाला करके भड़क रहा है। ठीक है? वहां पे

2011
02:24:00,160 --> 02:24:04,320
स्पष्ट आप देख सकते हैं सभी लोग। तो वही भड़का है। पहली बात। फिर जब

2012
02:24:04,320 --> 02:24:08,480
उसको शांत कराने के लिए कि वहां पर सभा चल रही थी। वहां पर हल्ला नहीं

2013
02:24:08,480 --> 02:24:12,480
होना चाहिए। इसलिए उसको उस कक्ष से बाहर किया गया ताकि तुम इस तरह

2014
02:24:12,480 --> 02:24:12,980
से

2015
02:24:12,800 --> 02:24:16,960
विवाद मत करो। ठीक है? और इस विवाद ना करो वाली बात को

2016
02:24:16,960 --> 02:24:21,200
उसने कहां जोड़ दिया कि भाई वहां पर सभा मंडल में था तो

2017
02:24:21,200 --> 02:24:26,080
कृष्ण ने उसके जो हमारे आचार्य हैं वो

2018
02:24:26,080 --> 02:24:30,160
थोड़ा विचलित हो गए जिसके कारण उनको बोला जा रहा था विवाद मत करो। बिल्कुल

2019
02:24:30,160 --> 02:24:35,760
ऐसा नहीं है। उसका जो झूठ है ये भी पूरा फेक था।

2020
02:24:35,760 --> 02:24:39,840
और पांचवा झूठ इसका ये है कि भाई इसके ऊपर जानलेवा हमला हुआ। तो

2021
02:24:39,840 --> 02:24:43,840
भाई जानलेवा हमला हुआ तो कैसे हुआ? नहीं नहीं नहीं वो

2022
02:24:43,840 --> 02:24:48,000
मान लो वो मान लो बस छछूंदरों के लिए इस तरह की चीजें जानलेवा हमला होती

2023
02:24:48,000 --> 02:24:53,840
है। वो मान लो वो सच है। वो सच है भाई जानलेवा ही है तुम्हारे लिए वो

2024
02:24:53,840 --> 02:24:58,000
जैसे चिलांटू बच्चे होते हैं ना चिलांटू बच्चे उनके लिए इंजेक्शन चाकू के समान

2025
02:24:58,000 --> 02:25:02,240
होता है। गंडासे के समान होता है। ऐसे इनके लिए ये जो धूल

2026
02:25:02,240 --> 02:25:06,240
चाटना है वही जानलेवा हमला। जी। ठीक है। तो इसके

2027
02:25:06,240 --> 02:25:10,560
ऊपर जो जानलेवा हमला वाली बात है वो भी वैसे झूठ ही है पूरी तरह से। ठीक है? कोई जानलेवा

2028
02:25:10,560 --> 02:25:15,360
हमला हुआ नहीं बल्कि उल्टे जो जिनको ये मारने

2029
02:25:15,360 --> 02:25:19,360
जिसने निर्भय ने बोला कि जैसे उसने मारा है तीन चार जन को बल्कि

2030
02:25:19,360 --> 02:25:23,360
वो लोग आकर के इसे बचा रहे हैं। तो इसका जो प्रोपेगेंडा यहां पे ही फेल होता

2031
02:25:23,360 --> 02:25:27,440
है। झूठ एक्सपोज होता है उसका। ठीक है? जी। और वहां पर खाली

2032
02:25:27,440 --> 02:25:27,940
तीन से

2033
02:25:27,920 --> 02:25:32,240
चार जन ही दिख रहे हैं। ठीक है? वहां पे 15 20 जन तो है ही [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं। बाकी जितने

2034
02:25:32,240 --> 02:25:36,400
लोग थे वो तो वहां पर क्या चल रहा है वो देखने के लिए बाहर में जमा हो गए होंगे। ठीक है

2035
02:25:36,400 --> 02:25:41,280
वो बात है। तो 1520 जन की तो बात ही अलग है। अगर 15 20 जन मारे होते यदि इसे

2036
02:25:41,280 --> 02:25:45,360
पकड़ के तो फिर जिस तरह से अपना बयान रिकॉर्ड करवा रहा है

2037
02:25:45,360 --> 02:25:49,600
उस तरह से उस हालत में होता ही नहीं। पहली बात ठीक है। अरे बयान रिकॉर्ड

2038
02:25:49,600 --> 02:25:54,000
करवा रहा है तो जा ना भाई थाने। ये बयान बयान क्या है? अदालत तो जा।

2039
02:25:54,000 --> 02:25:58,080
ठीक है। अच्छा दूसरी बात क्या है? अपने आप को हीरो भी बना रहा है।

2040
02:25:58,080 --> 02:26:02,080
वहां धूल चाट रहा है और हीरो बना रहा है। मैंने चार को संभाल लिया।

2041
02:26:02,080 --> 02:26:06,320
समझ रहे हो? बाकी के तीन बेचारे इसको बचा रहे हैं मुझसे और कह रहा है मैंने

2042
02:26:06,320 --> 02:26:10,640
चार को संभाल लिया। फिर मिलेगा ना फिर तुझे तेरी औकात ऐसे ही याद दिलाऊंगा।

2043
02:26:10,640 --> 02:26:15,280
धूल चटाऊंगा तुझे। वो तो ठीक से पकड़ में आ नहीं।

2044
02:26:15,280 --> 02:26:19,840
ठीक से हो नहीं पाया वहां पर। उससे पहले गुरु भाइयों ने तुझ पर वो कर दी कृपा।

2045
02:26:19,840 --> 02:26:24,000
वरना कसम गंगा मैया की फिर मारूंगा और उठा

2046
02:26:24,000 --> 02:26:28,400
उठा के पटकूंगा। और ऐसे ही धूल चटाऊंगा। ठीक है?

2047
02:26:28,400 --> 02:26:32,480
हां जी। बोलिए। तो ये सब जो उसका पूरा

2048
02:26:32,480 --> 02:26:36,640
झूठ था कि भाई उसके ऊपर जानलेवा हमला हुआ। आचार्य को निरुत्तर कर दिया

2049
02:26:36,640 --> 02:26:40,640
और ये सब जो उसके झूठ है उसका सब

2050
02:26:40,640 --> 02:26:43,040
झूठ उसका एक्सपोज हो गया। आप सभी देख सकते हैं

2051
02:26:43,040 --> 02:26:47,040
आराम से। ठीक है? यही इतना ही तो

2052
02:26:47,040 --> 02:26:51,840
उसका झूठ था। इसके अलावा

2053
02:26:51,840 --> 02:26:56,480
इस तरह से जी। हां। अनैतिक आचरण वाली बात है जो छुप

2054
02:26:56,480 --> 02:27:00,480
वहां पर गया है वहां पर किस मशा से वहां पर

2055
02:27:00,480 --> 02:27:04,640
गया है वो सब दिख रहा है और वो और वो और वो जो मातृशक्ति

2056
02:27:04,640 --> 02:27:08,640
थी वो लड़की वो स्त्री कौन थी इसकी जो साथ में आई थी जो ये नहीं बता पा

2057
02:27:08,640 --> 02:27:12,640
रही थी कि मैं बहन हूं कि कौन हूं वो भी एक सवालिया निशान है कि ये कौन

2058
02:27:12,640 --> 02:27:16,720
है भाई क्या इनके बीच में संबंध है ये सारी चीजें उसको

2059
02:27:16,720 --> 02:27:20,960
लेके तुम घूम रहे हो टहल रहे हो मैंने तो निर्भय का जो

2060
02:27:20,960 --> 02:27:25,120
झूठ है वो मैंने यहां पे एक्सपोज यहां पे बताया एक क्रमवार

2061
02:27:25,120 --> 02:27:29,280
तरीके से ठीक है मैंने बताया उसने

2062
02:27:29,280 --> 02:27:33,520
अपनी स्त्री संगनी का जिक्र नहीं किया था इसीलिए मैंने उसका

2063
02:27:33,520 --> 02:27:37,520
भी उल्लेख नहीं किया क्योंकि उसका झूठ पे किया ना उसने

2064
02:27:37,520 --> 02:27:42,320
किया उसने जो बीचबीच में स्लाइड लगाई है उसमें लिखा है ना महिला

2065
02:27:42,320 --> 02:27:46,320
सहयोगी के साथ ऐसे कर रहे थे वहां के लोग वो उसी वही तो कर रहे है

2066
02:27:46,320 --> 02:27:50,400
हां कैमरा हां उसका एक और झूठ है उसका एक और झूठ है कि केवल

2067
02:27:50,400 --> 02:27:54,560
उसके कैमरे पर जो है ना बंद कहा उसका

2068
02:27:54,560 --> 02:27:58,320
झूठ है। उसका झूठ है कि उसका झूठ है कि योजनाबद्ध तरीके

2069
02:27:58,320 --> 02:28:02,320
से उसके कैमरे को रोकने का प्रयास किया गया। वो गलत है। वो एक

2070
02:28:02,320 --> 02:28:06,560
जो भीड़ की बुद्धि नहीं होती जिसके जो समझ में आया उसने किया वो वाले बात थी।

2071
02:28:06,560 --> 02:28:10,880
वहां ये कोई डिसाइड नहीं कर सकते कि किसी उद्देश्य पूर्वक

2072
02:28:10,880 --> 02:28:15,040
इसकी साइड के कैमरे को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। लोग अपनेप विवेक के हिसाब

2073
02:28:15,040 --> 02:28:19,360
से जो कर सकते हैं वो कर रहे हैं। उसमें कोई ना आदेश है ना उद्देश्य।

2074
02:28:19,360 --> 02:28:23,360
ठीक है? और दूसरी बात यह है कि जहां बात धर्म

2075
02:28:23,360 --> 02:28:27,680
की हो रही होती है, मर्यादा की हो रही होती है और वहां पर इस तरह से आप इन्वॉल्वमेंट दिखाओगे

2076
02:28:27,680 --> 02:28:31,760
तो हर चीज पर बात होती है। वो यह नहीं बोल पा रही है कि मैं उसकी बहन हूं,

2077
02:28:31,760 --> 02:28:35,760
बहन हूं। मैं उसकी बेटी मां वो दिख नहीं रही है। पत्नी वो दिख नहीं रही

2078
02:28:35,760 --> 02:28:39,040
है। तो है कौन वो?

2079
02:28:39,040 --> 02:28:44,800
हां। इसीलिए उसका नाम है अविवाहित संगनी।

2080
02:28:44,800 --> 02:28:48,800
ठीक है। इसकी मीमांसा होनी चाहिए भाई। किसको लेके ऐसे तुम चल

2081
02:28:48,800 --> 02:28:53,440
रहे हो साथ में? हां जी बात आगे पूरी कर लीजिए।

2082
02:28:53,440 --> 02:28:57,840
जी तो ये इसी प्रकार से अपना कार्य कायरता

2083
02:28:57,840 --> 02:29:02,320
दिखाते हुए चर्चा से भी भागा था। ये व्यक्ति निर्भय एक बार में

2084
02:29:02,320 --> 02:29:06,560
हुआ था लाइव में तो संतुष्टि नहीं हुई।

2085
02:29:06,560 --> 02:29:10,960
हम जी बोलिए बोलिए बोलिए

2086
02:29:10,960 --> 02:29:13,280
बोलिए

2087
02:29:13,280 --> 02:29:13,780
ये

2088
02:29:13,760 --> 02:29:19,190
कमेंट अच्छा आ रहा है निर्भय भी बंदी छोड़ हो गया

2089
02:29:19,190 --> 02:29:22,960
[हंसी] रामपालियों की तरह

2090
02:29:22,960 --> 02:29:27,280
ठीक है लग रहा है लगभग सभी तथ्य हमने

2091
02:29:27,280 --> 02:29:31,600
ले लिए हैं यहां पर और आवश्यकता पड़ने पर और भी एक्सक्लूसिव

2092
02:29:31,600 --> 02:29:36,240
चीजें आपको प्रोवाइड कराई जाएंगी तो बने रहिए भैया [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़]

2093
02:29:36,240 --> 02:29:40,240
ठीक है। फिर से बता रहा हूं भाई मैंने धूल चटाई है। तेरे अनुसार मैंने

2094
02:29:40,240 --> 02:29:44,400
जानलेवा हमला किया है। तो कुछ कर वीडियो बनाने से काम नहीं चलता

2095
02:29:44,400 --> 02:29:49,360
है। वीडियो बनाने से ही सब कुछ नहीं होता। कुछ कर

2096
02:29:49,360 --> 02:29:53,680
जी आ रहा है यहां पे एक जो कमेंट आ रहा है

2097
02:29:53,680 --> 02:29:59,520
सॉरी बट वाले जो है उसका आप उत्तर दे दीजिए।

2098
02:29:59,520 --> 02:30:03,840
क्या सॉरी बट सॉरी बट व्हाई शुड द शी आंसर

2099
02:30:03,840 --> 02:30:07,920
योर क्वेश्चन इन द फर्स्ट प्लेस शी इज नॉट लायबल टू

2100
02:30:07,920 --> 02:30:12,000
आंसर एनीवन बिल्कुल है बिल्कुल है आप

2101
02:30:12,000 --> 02:30:16,080
अगर हमारे यहां पर आकर के प्रिविलेजेस प्राप्त कर रहे हैं आपका व्यक्ति हमारे

2102
02:30:16,080 --> 02:30:20,080
यहां आकर के अभद्र चीजें कर रहा है और अपराधिक गतिविधियों से

2103
02:30:20,080 --> 02:30:24,160
जुड़ा हुआ है और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं तो वहां

2104
02:30:24,160 --> 02:30:28,320
पर हम पूछ सकते हैं आपसे कि आप कौन

2105
02:30:28,320 --> 02:30:28,960
है उसकी जो

2106
02:30:28,960 --> 02:30:33,040
आप उसके साथ आई हो वो मैं इसलिए पूछ रहा था कि अगर आप बहन है तो आप उसकी डांट

2107
02:30:33,040 --> 02:30:37,360
लगाए आप उसे शिकायत पहुंचाए कि वो ऐसे ऐसे अपराधिक कृत्यों से घिरा हुआ है

2108
02:30:37,360 --> 02:30:41,360
और आप या तो शास्त्र का गोल लाइए यहां पर आपकी भाषा जो है ना

2109
02:30:41,360 --> 02:30:45,440
कानूनी दिख रही है समझ रहे हैं आप हेलो हेलो

2110
02:30:45,440 --> 02:30:49,760
आपकी भाषा यहां पर कानूनी दिख रही है तो चलिए आप कुतर्क कर रहे हैं तो कुतर्क

2111
02:30:49,760 --> 02:30:54,400
की में ही हम आपको उत्तर दे देते हैं उसने हमसे कहा कि रोकिए उसे

2112
02:30:54,400 --> 02:30:59,120
वो कौन होती है हमको रोकने को कहने वाली बताओ चलो आ जाओ

2113
02:30:59,120 --> 02:31:03,280
आपको दिक्कत हो रही है ना हमने उससे क्यों पूछा तो वह कौन होती है हमें रोकने

2114
02:31:03,280 --> 02:31:07,440
को कहने वाली ऑर्डर कैसे दे रही है वो हमें अब बताइए तो

2115
02:31:07,440 --> 02:31:11,440
जिस तरह से वो हमें आर्डर दे रही जिन जिन कारणों से उन्हीं कारणों से हम उससे पूछ रहे हैं आप

2116
02:31:11,440 --> 02:31:15,520
कौन है उनकी इसको कहते हैं मत

2117
02:31:15,520 --> 02:31:21,520
पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में क्या कहते हैं आप लोग

2118
02:31:22,400 --> 02:31:26,400
जी ये तो आपने कई बार बताया है कि भाई मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर

2119
02:31:26,400 --> 02:31:30,640
कर लेकिन क्या करें नहीं ये लोग कह रहे हैं

2120
02:31:30,640 --> 02:31:34,800
ये लोग कह रहे हैं निर्भय पर हमला करके उसे भगाया गया है कम

2121
02:31:34,800 --> 02:31:40,240
से कम भागना तो स्वीकार कर ही रहे हैं बंदी छोड़ के भागा

2122
02:31:40,240 --> 02:31:44,400
अपने घर की स्त्री को ही छोड़ के भाग गया अरे मर जाओ पर

2123
02:31:44,400 --> 02:31:48,400
ऐसी जगह पे जहां पे तुम्हें षड्यंत्र की बू आ रही है वहां पर अपनी स्त्री को छोड़ के

2124
02:31:48,400 --> 02:31:51,920
जाओगे मर जाओ

2125
02:31:51,920 --> 02:31:56,560
ये सिखाया हमारे धर्म ने बड़े आए टटपुंजी

2126
02:31:56,560 --> 02:32:02,560
आर्य बनेंगे। जी अजातवाद जी।

2127
02:32:03,680 --> 02:32:08,000
ठीक है। चलिए मुझे लगता है सारी चीजें हो गई है। एक जो

2128
02:32:08,000 --> 02:32:12,240
ब्रज वाले हैं वो एक कमेंट कर रहे हैं कि भाई 109 का धारा

2129
02:32:12,240 --> 02:32:16,960
के अंतर्गत मुकदमा होता है। मैं फिर कह रहा हूं। जी बृजदर्शन

2130
02:32:16,960 --> 02:32:21,040
जी हां आनंद को इसने थप्पड़ मारे। इसने ये

2131
02:32:21,040 --> 02:32:25,120
भी झूठ बोला। हां ये है ही ये झूठा। ये अपने लिए लड़ता है। ये सिद्धांत

2132
02:32:25,120 --> 02:32:29,680
के लिए नहीं लड़ता है ये व्यक्ति। सुना ना कैसे बोल रहा है कुड न्याय करेगा। खैर

2133
02:32:29,680 --> 02:32:33,760
चलिए ठीक है। सभी को समय देने के लिए आभार और फिर से

2134
02:32:33,760 --> 02:32:37,760
कह रहा हूं। ताल टोक के कह रहा हूं भाई तुझे धूल चटाई गई है। तेरे अनुसार जानलेवा हमला

2135
02:32:37,760 --> 02:32:43,680
हुआ है। जिसके कारण तू अविवाहित

2136
02:32:43,680 --> 02:32:47,680
संगनी छोड़ भगोड़ा सिद्ध हुआ। जूता छोड़ भगोड़ा सिद्ध

2137
02:32:47,680 --> 02:32:52,320
हुआ। चर्चा छोड़ भगोड़ा सिद्ध हुआ। तो कुछ कर केवल बता मत

2138
02:32:52,320 --> 02:32:56,480
विधवा विलाप मत कर कुछ कर जाके ठीक है पुलिस

2139
02:32:56,480 --> 02:33:00,640
वाले थे वहां पर उन्होंने ही तुझे बचाया था हमारे गुरु भाइयों ने तुझे नहीं

2140
02:33:00,640 --> 02:33:04,880
दूर किया था हमसे तो पुलिस वालों ने तो देखा भी है तुझे प्रिविलेज मिलेगा

2141
02:33:04,880 --> 02:33:08,880
जाओ जाके करो ठीक है आपका कमेंट

2142
02:33:08,880 --> 02:33:14,880
क्या है दोबारा करिए आपका कमेंट

2143
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पिता रक्षति कोमारे भरता रक्षतिने रक्षती

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स्थारे पुत्र स्त्री स्वतंत्र स्वतंत्र

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मनुस्मृति 9 तीन

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[गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है नहीं मानते तो कम से कम यह तो बता दें कि

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आप जो है ठीक कौन वो तुम्हारी हम

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वो तो छोड़ गया उपयोग करके इसी तरह छोड़ दिया जाता

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है। चलिए ठीक है। विशाल भाटिया जी का कमेंट क्या है?

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मेरा कमेंट पढ़िए। आपका कमेंट क्या है? विशाल भाटिया जी ऊपर चला गया वो बहुत।

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चलिए [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है। आप लोगों ने इतना समय दिया। काफी लंबी चर्चा

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हो गई। यहां पे काफिर आजम जी लिख रहे हैं कि

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जूतों को न्याय दो। [हंसी] आखिर

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में यह नहीं पता चल पाया उसके जूते गए थे कि उसके साथ हां उसको

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उसको पढ़ने के रूप में जूते दे दिए गए थे उसको [हंसी] जूतों को

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न्याय मिल गया उन जूतों की जो सही जगह होनी चाहिए थी वो दे वो पहुंचा

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दिए गए उस जगह पे ठीक है न्याय मिल गया उन्हें

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सभी को जय श्री राम

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हर हर गंगे

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सरस जी

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सबका कल्याण हो सबको सद्बुद्धि दे और ऐसी भावना के साथ

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धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में

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सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो। जय श्री राम। हर हर महादेव।

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हर हर महादेव।
